शून्य से शिखर का सफर! CM मोहन ने पंडित दीनदयाल के 'चतुर्पुरुषार्थ' चिंतन को बताया राष्ट्र निर्माण का मूल

Feb 11, 2026 - 11:50
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शून्य से शिखर का सफर! CM मोहन ने पंडित दीनदयाल के 'चतुर्पुरुषार्थ' चिंतन को बताया राष्ट्र निर्माण का मूल

Deendayal Upadhyaya: व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण का मार्ग दिखाने वाले , विलक्षण व्यक्तित्व के धनी , एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के प्रणेता पं . दीनदयाल उपाध्याय के चरणों में कोटिशः नमन.

पंडित दीनदयाल का जीवन भारत राष्ट्र को दिशा देने वाला प्रकाश स्तंभ है. वे एक ऐसे ऋषि राजनेता थे जो समाज, संस्कृति और राष्ट्र के समग्र उत्थान के लिए समर्पित रहे. उन्होंने राजनीति को राष्ट्रधर्म की साधना का माध्यम माना. उनका स्पष्ट मत था कि स्वतंत्र भारत की यात्रा भारतीय दर्शन , संस्कृति और परंपरा के अनुरूप होनी चाहिए.

पंडित दीनदयाल ने राजनीतिक चिंतन को भारतीय मूल्यों से जोड़ते हुए एकात्म मानव दर्शन का सूत्र दिया. इसमें व्यक्ति , समाज , राष्ट्र और सृष्टि के बीच समन्वय और संतुलन समाहित है. यह जीवन और संपूर्ण सृष्टि को एक सूत्र में पिरोता है. यही दर्शन व्यष्टि से समष्टि की रचना करता है. इसमें कृष्ण के वसुधैव कुटुम्बकम के भाव से लेकर आज के वैश्विक परिदृश्य का समावेश है.

एकात्म मानव दर्शन और चतुर्पुरुषार्थ का संतुलन 

पंडित दीनदयाल भारत के भविष्य की कल्पना चतुर्पुरुषार्थ -धर्म , अर्थ , काम और मोक्ष के आधार पर की. उनका विश्वास था कि इन चारों का संतुलन ही व्यक्ति और समाज को पूर्णता की ओर ले जा सकता है. यदि व्यक्ति और समाज को विकास के समान अवसर दिए जाएं, तो स्वावलंबी और समर्थ समाज का निर्माण संभव है.

पं . दीनदयाल का मानना था कि राजनीति का अंतिम लक्ष्य सशक्त , समरस और स्वाभिमानी राष्ट्र का निर्माण है. उनका विकास मॉडल केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं था , बल्कि उसमें सांस्कृतिक चेतना , सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक संतुलन का समावेश था. वे चाहते थे कि विकास का लाभ अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें, तभी वह सच्चा विकास कहलाएगा. यही अंत्योदय का भाव है.

वर्तमान भारत और पं . दीनदयाल का चिंतन 

हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत जिस विकास पथ पर अग्रसर है , उसके मूल में पं . दीनदयाल का चिंतन है. विरासत से विकास , आत्मनिर्भर भारत , वोकल फॉर लोकल और सबका साथ - सबका विकास , यह सभी एकात्म मानव दर्शन के आधुनिक रूप हैं. प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प है कि वर्ष 2047 , स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को विश्व की सर्वोच्च शक्ति के रूप में स्थापित किया जाए. यह संकल्प पं . दीनदयाल के स्वप्निल भारत की ही साकार अभिव्यक्ति है.

मध्यप्रदेश में समरस और समावेशी विकास का प्रयास 

मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर और विकसित भारत निर्माण की परिकल्पना को मूर्तरूप देने की दिशा में प्रदेश के प्रत्येक अंचल को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. प्रदेश के हर क्षेत्र की क्षमता , मेधा और दक्षता को अवसर प्रदान करने के लिए जहां रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का नवाचार किया गया, वहीं भोपाल में संपन्न हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से स्थानीय उद्योगों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया. निवेश के लिये हमने यूके , जर्मनी , जापान और दावोस आदि यात्राएं कीं और हैदराबाद , कोयंबटूर सहित मुंबई में रोड-शो के माध्यम से उद्योगपतियों को आमंत्रित किया. यह क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर तक उद्योग को जोड़ने का पहला सशक्त प्रयास है.

मुझे यह बताते हुए संतोष है कि माननीय प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में पं . दीनदयाल उपाध्याय के चिंतन को व्यवहार में उतारने का प्रयत्न किया जा रहा है. समरस, संवेदनशील और उत्तरदायी शासन के माध्यम से अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं और विकास के लक्ष्य धरातल पर पहुंच रहे हैं. प्रदेश में गरीब कल्याण, किसान कल्याण, युवा शक्ति और नारी सशक्तिकरण को केन्द्र में रखकर 4 मिशन के माध्यम से कार्य किया जा रहा है. इससे समाज के सभी वर्गों के कल्याण का लक्ष्य पूर्ण होगा.

कृषि, किसान और समग्र विकास का आधार 

पं . दीनदयाल ने आर्थिक विकास के लिए कृषि , उद्योग , परिवहन , व्यापार समाज , सुरक्षा एवं सेवा का एक स्पष्ट और व्यावहारिक क्रम बताया. इस क्रम में कृषि प्रधान देश भारत में खेती को प्रथम स्थान देने की आवश्यकता व्यक्त की. उनका मानना था यदि देश में कृषि सुदृढ़ होगी , तो किसानों की आय बढ़ेगी , ग्रामीण जीवन में स्थिरता आएगी और उद्योगों को कच्चा माल एवं श्रम दोनों सहज रूप से उपलब्ध होगा. इससे किसान, उपभोक्ता और समाज तीनों का संतुलन बना रहेगा.

पं . दीनदयाल खेती की मजबूती और किसानों की समृद्धि को समग्र विकास का आधार मानते थे. मुझे यह बताते हुए संतोष है कि मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में किसानों के स्वाभिमान, सुरक्षित जीवन और आत्मनिर्भरता को केन्द्र में रखकर वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. इसमें आधुनिक तकनीक , उन्नत बीज , सिंचाई , भंडारण और बाजार तक बेहतर पहुंच के माध्यम से खेती को लाभ का व्यवसाय बनाया जाएगा. कृषि आजीविका के साधन के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी.

मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने वर्ष 2025-26 किसानों के कल्याण के लिए समर्पित किया है. मध्यप्रदेश में पार्वती-कालीसिंध-चंबल तथा केन-बेतवा नदी लिंक राष्ट्रीय परियोजना सहित ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज मेगा परियोजना से प्रदेश के 25 जिलों में 16 लाख हेक्टेयर से अधिक अतिरिक्त कृषि रकबा सिंचित होगा. प्रदेश के किसानों के समग्र कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठाया जायेगा.

प्रदेश में अन्न , सरसों और चना अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जा रही है. इससे अन्न का उत्पादन और पोषण सुरक्षा को नई ऊंचाई मिलेगी. इन केंद्रों के जरिए फसलों की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ाने पर विशेष बल दिया जाएगा. प्रदेश के 30 लाख से अधिक किसानों को अगले तीन साल में सोलर पॉवर पम्प दिये जायेंगे. प्रदेश में सिंचाई का रकबा 65 लाख हैक्टेयर से बढ़ाकर 100 लाख हैक्टेयर किये जाने का लक्ष्य है.

राष्ट्रधर्म के अमर साधक को कोटिश: वंदन 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने स्वाभिमानी, स्वावलंबी और विश्व कल्याण में अग्रणी भारत की कल्पना की थी. माननीय प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है. उनका जीवन और दर्शन हम सबको राष्ट्रधर्म के पथ पर निरंतर अग्रसर करता रहेगा. राष्ट्र निर्माण के अमर साधक पं . दीनदयाल की पुण्यतिथि पर पुनः कोटिशः वंदन.

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