पिता के अंतिम संस्कार में भावुक हुए बारामूला सांसद इंजीनियर रशीद, 'शायद अब चुनाव न लड़ूं'
बारामूला से सांसद और अवामी इत्तेहाद पार्टी (AIP) प्रमुख इंजीनियर रशीद ने मंगलवार को अपने पिता के अंतिम संस्कार के दौरान भावुक भाषण दिया. इस दौरान उन्होंने चुनावी राजनीति से दूर होने के संकेत भी दिए. राशिद ने कहा कि उनकी लड़ाई सिर्फ अनुच्छेद 370 या जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की गरिमा, सम्मान और आज़ादी की लड़ाई है.
इंजीनियर राशिद 2019 से टेरर फंडिंग मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं. इसके बावजूद उन्होंने जेल में रहते हुए ही 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. हाल ही में उनके पिता खज़ीर मोहम्मद का निधन हो गया, जिसके बाद उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अंतरिम ज़मानत दी गई.
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अंतिम संस्कार के दौरान राशिद काफी भावुक नजर आए. उन्होंने कहा कि राजनीति ने उनसे बहुत कुछ छीन लिया है और अब शायद वह आगे चुनाव न लड़ें.
उन्होंने कहा, “मैं उन लोगों को एक संदेश देना चाहता हूँ जो हमेशा वोटों की गिनती करते रहते हैं कि इंजीनियर राशिद के चुनाव लड़ने की संभावना बहुत कम है. यह मेरे दिल की इच्छा है, हालाँकि अंतिम फ़ैसला बाद में लिया जाएगा.”
राशिद ने साफ कहा कि उनका संघर्ष कभी निजी लाभ या राजनीतिक फायदे के लिए नहीं रहा. उन्होंने कहा कि उनकी पूरी लड़ाई जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान और सम्मान के लिए रही है.
उन्होंने कहा, “मेरा संघर्ष अनुच्छेद 370 और राज्य का दर्जा मिलने से कहीं आगे का है. यह जम्मू-कश्मीर के लोगों की गरिमा और सम्मान के लिए है.”
उन्होंने उन लोगों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने मुश्किल समय में उनका साथ दिया. साथ ही तंज भरे अंदाज में उन लोगों का जिक्र भी किया जिन्होंने उनका नाम लेने से भी परहेज किया.
'डरिए मत, राजनीति विचारों की लड़ाई होनी चाहिए'
अपने संबोधन में राशिद ने लोगों से अपील की कि वे उनसे डरें नहीं. उन्होंने कहा कि राजनीति सिर्फ विचारों की लड़ाई होनी चाहिए, न कि नफरत और डर का माध्यम. उन्होंने कहा, “डरें नहीं. मुझे नहीं पता कि मैं राजनीति जारी रखूँगा या नहीं, लेकिन मेरे साथ जो कुछ हुआ, उसे मैं कभी नहीं भूलूँगा.”
राशिद ने बताया कि शुरुआत में वह जेल से बाहर आना ही नहीं चाहते थे, लेकिन परिवार और दोस्तों के दबाव में उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बाहर आना पड़ा. उन्होंने कहा, “कल मेरे परिवार और दोस्तों ने मुझे ज़बरदस्ती तिहाड़ से बाहर निकाला.”
युवाओं की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
अपने भाषण में इंजीनियर राशिद ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं की गिरफ्तारी और PSA के तहत जेल भेजे जाने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने हंदवाड़ा में एक आदमखोर तेंदुए का उदाहरण देते हुए सरकार से पूछा कि अगर एक हिंसक जानवर का व्यवहार बदला जा सकता है, तो युवाओं के दिल क्यों नहीं जीते जा सकते.
उन्होंने कहा, “अगर सरकार हत्याएँ करने के बाद एक जानवर के व्यवहार को सुधार सकती है, तो उन कश्मीरियों के दिलों को क्यों नहीं जीता जा सकता जिन्होंने छोटी-मोटी गलतियाँ की हैं, बजाय इसके कि उन्हें PSA के तहत जेलों में डाल दिया जाए?”
राशिद ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हालात सुधारने का रास्ता मेल-मिलाप और भरोसा कायम करने से होकर जाता है. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने हमेशा लोगों के दिल जीतने की बात की है. उन्होंने कहा, “मैंने उन्हें दिल जीतने का रास्ता दिखाया है.” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा “मुझे तिहाड़ में ही रहने दो. तिहाड़ मुझे तोड़ नहीं सकता, क्योंकि मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है.”
भारत और पड़ोसी देशों से शांति की अपील
अपने संबोधन के आखिर में इंजीनियर राशिद ने भारत और पड़ोसी देश दोनों से जम्मू-कश्मीर में हिंसा रोकने की अपील की. उन्होंने कहा कि आम लोगों को शांति और आज़ादी से जीने दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “मैं सभी से गुज़ारिश करता हूँ, चाहे वे इस तरफ के हों या पड़ोसी देश के कि वे जम्मू-कश्मीर के लोगों को न मारें, चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान. हमें आज़ादी से जीने दो.”
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भारत के लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीरी देश के दुश्मन नहीं हैं और इस्लाम शांति और भाईचारे की सीख देता है.उन्होंने कहा, “हम पूरे देश से आने वाले पर्यटकों का स्वागत करते हैं और चाहते हैं कि वे कश्मीर के हर कोने में घूमें, जिसमें बंगस भी शामिल है. लेकिन इस सोच के साथ मत आइए कि आपने कश्मीर को जीत लिया है.”
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