तेज प्रताप यादव को लेकर मची हलचल के बीच रोहिणी आचार्य का बयान, 'जिसकी जिंदगी से जुड़ा मसला…'
जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा जारी है कि वे पिता बन गए हैं. अनुष्का यादव (Anushka Yadav) ने पटना के एक अस्पताल में बेटी को जन्म दिया है. हालांकि जैसे ही यह खबर आई तो तेज प्रताप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसे झूठा करार दिया. यह भी कहा कि उनका अनुष्का यादव से कोई रिश्ता नहीं है. इस बीच तेज प्रताप यादव की बहन रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) ने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया है जिसे इस पूरे प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है.
'टीका-टिप्पणी वही करते हैं जो निठल्ले होते हैं'
हालांकि अपने पोस्ट में कहीं भी रोहिणी आचार्य ने तेज प्रताप का जिक्र नहीं किया है. सोमवार (09 फरवरी, 2026) की रात एक्स पर शेयर किए गए अपने पोस्ट में रोहिणी आचार्य लिखती हैं, "किसी की निजी जिंदगी में ताका-झांकी, किसी के निजी मामलों पर टीका-टिप्पणी वही करते हैं जो निठल्ले होते हैं या फिर जिनकी खुद की फितरत व नीयत गंदी होती है."
किसी की निजी जिंदगी में ताका - झांकी , किसी के निजी मामलों पर टीका - टिप्पणी वही करते हैं , जो निट्ठले होते हैं या फिर जिनकी खुद की फितरत व् नियत गंदी होती है ..
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) February 9, 2026
बिना फीस के वकील बने बैठे भौंकने वाली बेचैन आत्माओं ... जिसकी जिंदगी से जुड़ा मसला है , उसे खुद या उसके परिवार को…
उन्होंने आगे लिखा, "बिना फीस के वकील बने बैठे भौंकने वाली बेचैन आत्माओं... जिसकी जिंदगी से जुड़ा मसला है, उसे खुद या उसके परिवार को समझने-संभालने दो... नाहक परेशान मत हो, तुम जैसों की दिखावे की परेशानी का मतलब और मकसद सब समझते हैं..."
सीएम नीतीश कुमार को रोहिणी आचार्य ने घेरा
बता दें कि परिवार पर जब भी बात आती है तो रोहिणी आचार्य खुलकर बोलती हैं. अभी हाल ही में जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन में राबड़ी देवी को लेकर यह कह दिया था कि, 'लड़की हो…', इस बीच रोहिणी ने ट्वीट कर लिखा था, "माननीय मुख्यमंत्री जी की आदत बन चुकी है "संसदीय भाषाई मर्यादा लांघने की". दर्जनों दफा मुख्यमंत्री जी ने सदन में और सार्वजनिक मंचों पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग, विशेषकर महिलाओं के संदर्भ में, किया है... जब तर्क और तथ्यों का टोंटा पड़ जाता है तभी भाषा की सीमा लांघ कर व्यक्ति अपनी खीज, अपने वैचारिक खोखलेपन का इजहार करता है."
आगे कहती हैं, "वैसे भी मुख्यमंत्री जी के पिछले कुछ वर्षों के बयानों-वक्तव्यों पर गौर करने से ये स्पष्ट होता है कि वो महिलाओं के प्रति मानसिक-वैचारिक कुंठा से ग्रस्त हैं और उनके द्वारा महिला सम्मान को लेकर कही जाने वाली बातें महज राजनीतिक व चुनावी दिखावा हैं..."
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