पंडित नहीं मिल रहे? वीडियो कॉल पर गणपति स्थापना का ये नियम जान लें
Ganesh Chaturthi Puja Online: गणेश चतुर्थी से पहले पंडितों की व्यस्तता बढ़ जाती है. कई परिवार समय पर पुरोहित की व्यवस्था नहीं कर पाते, जबकि विदेश या दूसरे शहर में रहने वाले लोगों के सामने यह परेशानी और बड़ी होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वीडियो कॉल पर पंडित जी से गणपति स्थापना करवाई जा सकती है और पूजा का संकल्प पंडित लेंगे या घर का कोई सदस्य?
सीधा उत्तर यह है कि पंडित वीडियो कॉल के माध्यम से पूजा की विधि और मंत्र बता सकते हैं, लेकिन मूर्ति की स्थापना, पूजन सामग्री अर्पित करने और संकल्प लेने का काम घर में मौजूद व्यक्ति को ही करना होगा. मोबाइल स्क्रीन के दूसरी ओर बैठे पंडित मार्गदर्शक होंगे, जबकि पूजा के यजमान परिवार के सदस्य रहेंगे.
संकल्प पंडित नहीं, यजमान लेता है
धार्मिक पूजा में संकल्प का अर्थ केवल संस्कृत के कुछ शब्द दोहराना नहीं है. इसके माध्यम से यजमान अपना नाम, गोत्र, स्थान, तिथि और पूजा का उद्देश्य बताते हुए धार्मिक कर्म करने का निश्चय करता है. इसलिए वीडियो कॉल पर पंडित संकल्प के शब्द बोल सकते हैं, लेकिन उन्हें दोहराते हुए हाथ में जल, फूल और अक्षत घर के यजमान को लेने चाहिए.
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आमतौर पर परिवार का मुखिया संकल्प ले सकता है. उसके उपलब्ध न होने पर पति-पत्नी साथ बैठकर अथवा परिवार का कोई वयस्क सदस्य संकल्प ले सकता है. जिस व्यक्ति ने गणपति को घर लाने और पूजा की जिम्मेदारी स्वीकार की है, वह भी यजमान बन सकता है. महिला या पुरुष होने से पूजा का अधिकार समाप्त नहीं होता; हालांकि परिवार की कुल परंपरा अलग हो तो उसी का पालन करना उचित होगा.
क्या वीडियो कॉल वाली स्थापना मान्य होगी?
वीडियो कॉल पूजा का स्वतंत्र धार्मिक विकल्प नहीं, बल्कि विधि समझने का माध्यम है. ठीक वैसे ही जैसे कोई व्यक्ति पुस्तक या रिकॉर्ड किए गए वीडियो को देखकर पूजन करता है, वैसे ही लाइव कॉल पर पुरोहित प्रत्येक चरण समझा सकते हैं. अंतर इतना है कि पंडित जी की गलती होने पर उसी समय सुधार करा सकते हैं.
मोबाइल को मूर्ति के बहुत पास या चौकी के बीच में रखने के बजाय ऐसी जगह रखें, जहां आवाज साफ सुनाई दे और पूजा स्थल की मर्यादा भी बनी रहे. मंत्र मोबाइल से सुनाई देंगे, लेकिन आचमन, संकल्प, आवाहन, पुष्प, दूर्वा, नैवेद्य और आरती घर में उपस्थित यजमान ही करेंगे.
स्थापना और मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा एक जैसी नहीं
यहां एक अंतर समझना जरूरी है. गणेशोत्सव के लिए घर लाई गई पार्थिव मूर्ति की अस्थायी स्थापना और किसी मंदिर में स्थायी विग्रह की विस्तृत प्राण प्रतिष्ठा एक समान अनुष्ठान नहीं हैं. मंदिर की प्रतिष्ठा में प्रशिक्षित आचार्यों, विस्तृत मंत्रों और निर्धारित कर्मकांड की आवश्यकता होती है. घर में गणेशोत्सव मनाने वाले श्रद्धालु परंपरा के अनुसार सरल पूजन और आवाहन करते हैं.
इसलिए पंडित उपलब्ध न हों तो केवल इसी कारण गणपति स्थापना छोड़ने की आवश्यकता नहीं है. भगवान गणेश की पूजा में श्रद्धा, स्वच्छता और विधि के प्रति सम्मान को प्रमुख माना जाता है. कठिन संस्कृत मंत्रों का गलत उच्चारण करने के बजाय उनका सरल रूप अथवा भगवान गणेश के नाम-मंत्र का जप किया जा सकता है.
वीडियो कॉल से पहले ये तैयारी करें
कॉल शुरू होने से पहले चौकी, स्वच्छ वस्त्र, कलश, जल, अक्षत, फूल, दूर्वा, दीपक, धूप, फल और मोदक या उपलब्ध सात्विक भोग रख लें. परिवार के सदस्यों के नाम और गोत्र की जानकारी भी लिखकर रखें. इंटरनेट, मोबाइल की बैटरी और आवाज पहले जांच लें, ताकि संकल्प या आरती के बीच कॉल न टूटे.
गणेश चतुर्थी 2026 का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा. उपलब्ध पंचांग रिपोर्टों के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह आरंभ होगी और 15 सितंबर की सुबह समाप्त होगी. अलग-अलग शहरों में मध्याह्न पूजा मुहूर्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग अथवा पुरोहित से अपने शहर का समय अवश्य पूछें. गणेश चतुर्थी 2026 की तिथि संबंधी विवरण
अंततः स्क्रीन पर पंडित जी की मौजूदगी से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि पूजा वास्तव में कौन कर रहा है. वीडियो कॉल दिशा बता सकती है, लेकिन संकल्प यजमान का ही होगा, क्योंकि गणपति को घर बुलाने का भाव, जिम्मेदारी और प्रार्थना उसी परिवार की है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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