हरीश द्विवेदी ने CM योगी से की मुलाकात, यूपी सियासत पर हुई अहम चर्चा
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की सियासत में इन दिनों बैठकों और मुलाकातों का दौर लगातार जारी है. इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवनियुक्त राष्ट्रीय महामंत्री और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी ने मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक अहम मुलाकात की है. पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री का महत्वपूर्ण पदभार ग्रहण करने के बाद हरीश द्विवेदी की सीएम योगी के साथ यह पहली आधिकारिक और शिष्टाचार भेंट थी.
यह महत्वपूर्ण बैठक राजधानी लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास, 5 कालिदास मार्ग पर संपन्न हुई, जहां दोनों दिग्गज नेताओं के बीच सूबे की राजनीति और संगठन से जुड़े कई अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई.
मुख्यमंत्री से इस खास मुलाकात के बाद हरीश द्विवेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी एक तस्वीर भी साझा की. उन्होंने पोस्ट में लिखा कि "उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आज शिष्टाचार भेंट की. इस दौरान विभिन्न संगठनात्मक एवं राजनीतिक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई." पूर्वांचल की राजनीति में हरीश द्विवेदी का एक मजबूत जनाधार माना जाता है, ऐसे में उनकी इस नई जिम्मेदारी और सीएम योगी से मुलाकात को आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
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मुलाकातों के इस दौर की मुख्य बातें
यूपी की सियासत या बीजेपी संगठन से जुड़ी किसी अन्य खबर का लिंक दें] सीएम योगी से आशीर्वाद लेने के बाद हरीश द्विवेदी ने राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से भी उनके आवास पर जाकर शिष्टाचार भेंट की. इस दौरान उन्होंने यूपी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और पंकज चौधरी से भी मुलाकात कर संगठन की मजबूती को लेकर अपने विचार साझा किए.
संगठन को धार देने की तैयारी
राष्ट्रीय नेतृत्व ने हरीश द्विवेदी को महामंत्री बनाकर जो भरोसा जताया है, उसके बाद उनका पूरा फोकस पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को निचले स्तर तक मजबूत करने पर है.
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी इन दिनों अपने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने में जुटी हुई है. हरीश द्विवेदी का बस्ती और उसके आसपास के पूर्वांचल बेल्ट में अच्छा खासा राजनीतिक प्रभाव है. उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए ही पार्टी आलाकमान ने उन्हें राष्ट्रीय महामंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.
लखनऊ में हुई इस मैराथन बैठकों के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि सरकार और संगठन पूरी तरह से समन्वय बनाकर आगामी चुनौतियों (जैसे उपचुनाव और 2027 विधानसभा चुनाव) के लिए काम कर रहे हैं. इन मुलाकातों का असर आने वाले समय में उत्तर प्रदेश बीजेपी की जमीनी रणनीतियों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिलेगा.
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