दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन, हिमांशु भाऊ गैंग के 4 बदमाश गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने हिमांशु भाऊ सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान के कोटा से 4 बदमाशों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में हरियाणा के जींद निवासी 19 वर्षीय रमन उर्फ फौजी और चरखी दादरी निवासी 22 वर्षीय करण शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, दोनों कई संगीन वारदातों में वांटेड थे और हिमांशु भाऊ सिंडिकेट के लिए मिलकर काम कर रहे थे.
पुलिस के मुताबिक, रमन और करण दिसंबर 2025 में दिल्ली के आया नगर में डेयरी कारोबारी रतन की हत्या के मामले में वांटेड थे. इस वारदात में 70 से ज्यादा राउंड फायरिंग की गई थी. इसके अलावा अगस्त 2025 में द्वारका मोड़ पर मोहित डागर की हत्या के मामले में भी दोनों की तलाश थी. इस वारदात में 20 से ज्यादा राउंड फायर किए गए थे.
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दिसंबर 2025 में रोहतक के रितौली गांव में हिमांशु भाऊ के विरोधी सनी रितौली पर हुए जानलेवा हमले में भी दोनों आरोपी वांटेड थे. पुलिस के मुताबिक, इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई थी, जबकि चार अन्य लोग घायल हुए थे.
वहीं, मई 2026 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के ककोड़ में गैंगस्टर नीरज फरीदपुरिया के विरोधी जितेंद्र उर्फ जीतू पर अंधाधुंध फायरिंग के मामले में भी दोनों की तलाश थी.
करण पर अकेले भी कई संगीन मामले
पुलिस के मुताबिक, करण इन मामलों के अलावा कई अन्य वारदातों में भी वांटेड था. इनमें मई 2024 में हरियाणा के रेवाड़ी के मोहल्ला कुतुबपुर में शेखर राव के घर पर अंधाधुंध फायरिंग का मामला शामिल है. इसके अलावा दिसंबर 2024 में पलवल के महेशपुर गांव के सरपंच पर ऑटोमैटिक कार्बाइन से फायरिंग करने का मामला भी करण के खिलाफ दर्ज है.
करण के खिलाफ रोहतक के सदर थाने में BNS और आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत FIR भी दर्ज है. वहीं रमन के खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज है. पुलिस के प्रेस नोट के मुताबिक, रमन और करण दोनों इनामी अपराधी हैं. हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में उनके खिलाफ अलग-अलग इनाम घोषित हैं.
बदमाशों को पनाह देने वाले दो भाई भी पकड़े गए
स्पेशल सेल ने रमन और करण को पनाह देने वाले उनके दो सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया है. दोनों आरोपी भाई हैं और उनकी पहचान शेखर तिवारी और विनोद तिवारी के रूप में हुई है.
पुलिस के मुताबिक, दोनों ने रमन और करण को छिपने के लिए जगह देने के साथ-साथ उनके लिए पैसों के लेनदेन में भी मदद की थी. यानी पुलिस की कार्रवाई में सिर्फ मुख्य आरोपियों तक ही बात नहीं रुकी, बल्कि उन्हें मदद पहुंचाने वालों पर भी शिकंजा कसा गया है.
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चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को उनकी कस्टडी रिमांड दे दी है. पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर सिंडिकेट से जुड़े दूसरे लोगों और उनकी भूमिका के बारे में जानकारी जुटा रही है.
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