नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रदर्शन पर राजनीतिक दलों कीअलग-अलग राय, PDP शामिल होगी या नहीं?
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाने का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ रहा है. सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी स्टेटहुड को लेकर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है. प्रदेश में अन्य राजनीतिक दलों की इस मुद्दे पर अलग- अलग राय है. NC अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने राज्य की बहाली की मांग के लिए राजनीतिक समर्थन मांगने के लिए 52 राजनेताओं को निमंत्रण पत्र भेजा था.
बीजेपी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और डॉ. फारूक अब्दुल्ला के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है. एपीएनआई (APNI) पार्टी ने कहा है कि राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर ये मार्च लोगों के ध्यान को भटकाने का एक प्रयास है.
महबूबा मुफ्ती बैठक के बाद लेंगी फैसला!
वहीं, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती अपने फैसले को सार्वजनिक करने से पहले पार्टी नेतृत्व के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सोमवार को एक बैठक करेंगी. पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन के प्रदर्शन में भाग लेने की संभावना नहीं है.
अल्ताफ बुखारी का उमर अब्दुल्ला सरकार पर हमला
'अपनी' पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ बुखारी ने शुक्रवार (10 जुलाई) को उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार पर कश्मीर में विकास कार्यों को ठप करने और अपनी शासन विफलताओं को छिपाने के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर सीधा हमला बोलते हुए बुखारी ने कहा, ''सरकार को राज्य का दर्जा बहाल करने में देरी के लिए हर प्रशासनिक विफलता को जिम्मेदार ठहराना बंद करना चाहिए.''
'उमर अब्दुल्ला स्टेटहुड की मांग की आड़ में विफलताओं को न छिपाएं'
उन्होंने आगे कहा, "मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राज्य के दर्जे की बहाली करने की मांग की आड़ में अपनी विफलताओं को न छिपाएं. राज्य के दर्जे का कश्मीर में विकास रोकने से कोई लेना-देना नहीं है. आप मुख्यमंत्री हैं और इसे पूरा करना आपकी जिम्मेदारी है." प्रदर्शन में शामिल होने या अस्वीकार करने के सीधे जवाब से बचते हुए बुखारी ने कहा कि सार्वजनिक चर्चा राज्य के दर्जे पर ज्यादा केंद्रित हो गई है जबकि शासन और विकास के मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है.
'हर कोई सिर्फ राज्य के दर्जे के बारे में बात कर रहा'
उन्होंने आरोप लगाते हुए ये भी कहा, "हर कोई सिर्फ राज्य के दर्जे के बारे में बात कर रहा है लेकिन अगर विकास ही रुक गया है, तो हम प्रगति के बारे में कैसे बात कर सकते हैं? जहां भी निहित स्वार्थ है, वहां रातोंरात अनुमति दी जाती है और काम तुरंत पूरा हो जाता है, लेकिन आम लोगों को लाभ पहुंचाने वाली परियोजनाएं उपेक्षित रहती हैं."
बीजेपी ने प्रदर्शन में शामिल होने से किया इनकार
बीजेपी नेता सुनील शर्मा ने शुक्रवार (10 जुलाई) को यह भी कहा कि पार्टी जंतर-मंतर पर सत्तारूढ़ दल के प्रस्तावित राज्य के विरोध में शामिल नहीं होगी, उन्होंने इसे महज 'दिखावा' और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास बताया. इस सवाल का जवाब देते हुए कि क्या BJP दिल्ली में एनसी के नेतृत्व वाले राज्य आंदोलन में शामिल होगी, शर्मा ने इस संभावना से इनकार करते हुए कहा, ''पार्टी चोरों, धोखेबाजों और हत्यारों के साथ खड़ी नहीं होगी.''
'जिनके हाथ खून से सने, हम उनके साथ हाथ नहीं मिला सकते'
विपक्षी पार्टी के नेता शर्मा ने आगे कहा, "हमारे पार्टी प्रमुख हुर्रियत और अन्य देशद्रोहियों के साथ नहीं बैठ सकते, जो देशद्रोह का दावा कर रहे थे और कश्मीर में युवाओं को मरवा रहे थे. हम उन लोगों से हाथ नहीं मिला सकते, जिनके हाथ खून से सने हुए हैं." उन्होंने ये भी कहा कि सिर्फ बीजेपी ही जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाएगी और यह उचित समय पर भारत की संसद के माध्यम से किया जाएगा, न कि विरोध प्रदर्शन के माध्यम से होगा.
NC ने मीरवाइज उमर फारूक से भी किया संपर्क
राजनीति से परे एक व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाने के लिए, एनसी ने प्रभावशाली धार्मिक नेतृत्व से भी संपर्क किया है, जिसमें मीरवाइज उमर फारूक (हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा के प्रमुख), मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम (जम्मू और कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती) शामिल हैं.
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने के अपने वादे का सम्मान करने के लिए दबाव डालने के लिए संसद के मानसून सत्र के पहले दिन रणनीतिक रूप से विरोध प्रदर्शन निर्धारित किया गया है.
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