सैटेलाइट को भी पावर दे सकते हैं ये सोलर पैनल, बनाते हैं सबसे ज्यादा बिजली

Jul 11, 2026 - 13:50
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सैटेलाइट को भी पावर दे सकते हैं ये सोलर पैनल, बनाते हैं सबसे ज्यादा बिजली

Multi-Junction Solar Cells: अभी घरों पर लगाने के लिए ट्रेडिशनल सिलिकॉन सोलर पैनल और बाईफेशियल सोलर पैनल का इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, इसके साथ-साथ नई टेक्नोलॉजी पर भी काम चल रहा है और उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ सालों में हम घर के सोलर एनर्जी सिस्टम में Multi-Junction Solar Cells यूज करने के करीब पहुंच जाएंगे. ये ऐसे पैनल होते हैं, जिनकी एफिशिएंसी मौजूदा पैनल से लगभग दोगुनी है और इन्हें सैटेलाइट को भी पावर देने के लिए यूज किया जा सकता है. आइए इस नई टेक्नोलॉजी के बारे में विस्तार से जानते हैं.

क्या होते हैं Multi-Junction Solar Cells?

ये एडवांस्ड सोलर पैनल होते हैं, जिन्हें Gallium Indium Phosphide (GaInP), Indium Gallium Arsenide (InGaAs) और Germanium (Ge) जैसे सेमीकंडक्टर मैटेरियल की अलग-अलग लेयर को एक-दूसरे के ऊपर रखकर बनाया जाता है. इनमें से हर लेयर सनलाइट से अलग-अलग वेवलेंग्थ को कैप्चर कर सकती है. इसकी हर सेल में अपना अलग p-n junction होता है, जिस कारण ये पैनल ज्यादा सनलाइट को बिजली में बदल सकते हैं. Concentrated सनलाइट में इन पैनल की एफिशिएंसी 47 प्रतिशत से भी ज्यादा है और स्टैंडर्ड कंडीशन में इनकी एफिशिएंसी 33 प्रतिशत से ज्यादा होती है.

क्या हैं Multi-Junction सोलर पैनल के फायदे

ऊपर हम आपको बता ही चुके हैं कि इनकी एफिशिएंसी 47 प्रतिशत तक है. चूंकि इसमें लगी हर लेयर अलग-अलग रेंज वाली सनलाइट को कैप्चर कर लेती है, इसलिए एनर्जी वेस्टेज बहुत कम होती है. इन पैनल पर ज्यादा टेंपरेचर का भी असर नहीं होता और ये हाई टेंपरेचर भी स्टेबल तरीके से काम कर सकते हैं. ट्रेडिशनल पैनल की बात करें तो ज्यादा टेंपरेचर में इनकी एफिशिएंसी कम हो जाती है. इसके अलावा Multi-Junction पैनल को उन जगहों पर भी काम में लिया जा सकता है, जहां जगह की कमी होती है. इसलिए ये सैटेलाइट, ड्रोन, मार्स रोवर और स्पेस स्टेशन के लिए परफेक्ट माने जाते हैं.

Multi-Junction सोलर पैनल के नुकसान क्या हैं?

मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट- इन पैनल की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट ज्यादा होती है. अगर इनकी ट्रेडिशनल सोलर पैनल से तुलना की जाए तो इन्हें बनाने में 2-2.5 गुना तक ज्यादा लागत आती है. इसके अलावा इनकी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस भी काफी मुश्किल है. इस कारण इनका प्रोडक्शन को मास लेवल पर ले जाना अभी भी कठिन बना हुआ है. वहीं ड्यूरैबिलिटी भी एक चिंता बनी हुई है. इन पैनल को बनाने के लिए नाजुक मैटेरियल का इस्तेमाल होता है. यह ट्रेडिशनल सोलर पैनल की तरह हर प्रकार का मौसम नहीं झेल सकता. डायरेक्ट सनलाइट न होने पर इनकी एफिशिएंसी में भी बड़ी गिरावट आती है.

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