'ये लोग सोचते हैं जज सिर्फ 6-7 साल के लिए हैं और ये यहीं रहेंगे', SC रजिस्ट्री के अधिकारियों से क्यों नाराज हो गए CJI?

Feb 27, 2026 - 11:21
 0
'ये लोग सोचते हैं जज सिर्फ 6-7 साल के लिए हैं और ये यहीं रहेंगे', SC रजिस्ट्री के अधिकारियों से क्यों नाराज हो गए CJI?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गुरुवार (26 फरवरी, 2026) को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के काम करने के तौर-तरीकों पर हैरानी जताई और इसकी गहन जांच का संकेत दिया कि कैसे समान मामलों को अलग-अलग बेंचों के सामने सूचीबद्ध किया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'अगर मैं अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में मामलों को सूचीबद्ध करने में सुधार नहीं ला पाया, तो अपने कर्तव्य के निवर्हन में चूक जाऊंगा.'

सीजेआई सूर्यकांत ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. यह मामला सुप्रीम कोर्ट की दूसरी बेंचों ने खारिज कर दिया था. उन्होंने कहा कि यह मामला उनकी बेंच के समक्ष कैसे सूचीबद्ध किया गया, जबकि इसी तरह के एक मामले की वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य बेंच में सुनवाई जारी है.

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली  की बेंच के सामने यह मामला लगा था. सीजेआई ने कहा, 'पिछले हफ्ते मुझे एक शिकायत मिली और रजिस्ट्री में जो हो रहा है उसे देखकर मैं हैरान रह गया. रजिस्ट्री के अधिकारी सोचते हैं कि वे यहां 20-30 साल के लिए हैं और जज सिर्फ 6-7 साल के लिए. जज आते-जाते रहते हैं. समस्या यह है कि वे सोचते हैं कि जज सभी अस्थाई अवस्था में हैं और वे इस संस्था में स्थाई हैं.'

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'यही हो रहा है और वे सोचते हैं कि रजिस्ट्री को उनके मन मुताबिक काम करना चाहिए. अगर मैं अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में सुधार नहीं ला पाया, तो अपने कर्तव्य के निर्वहन में चूक जाऊंगा.' जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सीजेआई का पदभार संभालने के बाद से उन्होंने मामलों की सूची तय करने के संबंध में कड़े कदम उठाए हैं, लेकिन समस्या अब भी बनी हुई है.

बेंच ने इरफान सोलंकी की ओर से दायर उस याचिका को अपने पास रखा, जिसमें उत्तर प्रदेश गैंगस्टर अधिनियम की वैधता को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि यह केंद्रीय कानून बीएनएस की धारा 111 के विपरीत है. किसी कानून को तब विपरीत कहा जाता है जब राज्य और केंद्रीय कानून एक ही विषय क्षेत्र को कवर करते हैं, ऐसी स्थिति में केंद्रीय कानून प्रभावी होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने सोलंकी की याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 25 मार्च तय कर दी है. सोलंकी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट शोएब आलम ने तब याचिका वापस लेने का अनुरोध किया जब उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने उल्लेख किया कि सप्रीम कोर्ट की अन्य पीठों ने राज्य और केंद्रीय कानून के बीच असंगति के आधार पर ऐसी याचिकाओं को खारिज कर दिया है.

सिराज अहमद खान की ओर से दायर एक ऐसी ही याचिका, जिसमें ‘उत्तर प्रदेश गिरोहबंद और असामाजिक गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1986’ के प्रावधानों को चुनौती दी गई है, वर्तमान में जस्टिस जेबी परडीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ के समक्ष लंबित है. उस मामले में भी एएसजी नटराज पेश हुए थे.

शोएब आलम चाहते थे कि इरफान सोलंकी की याचिका को सिराज अहमद खान की याचिका के साथ जोड़ दिया जाए. एएसजी नटराज ने बताया कि तत्कालीन सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन-जजों की बेंच और जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली दूसरी पीठ ने पहले भी हाईकोर्ट के उन आदेशों के खिलाफ दायर अपीलों को खारिज कर दिया था जिनमें यूपी गैंगस्टर एक्ट को इसी तरह के आधारों पर चुनौती दी गई थी.

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Barwara Patrika Barwara Patrika is a Hindi newspaper published and circulated in Jaipur , Ajmer , Sikar, Kota and Sawaimadhopur . Barwara Patrika covers news and events all over from India as well as international news, it serves the Indian community by providing relevant information.