'ग्वालियर HC में बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा नहीं लगी तो...', भीम सेना चीफ सतपाल तंवर की धमकी से सनसनी

May 22, 2025 - 09:59
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'ग्वालियर HC में बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा नहीं लगी तो...', भीम सेना चीफ सतपाल तंवर की धमकी से सनसनी

Bhim Sena Chief on BR Ambedkar Statue: मध्य प्रदेश के ग्वालियर हाई कोर्ट में संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस विवाद में भीम सेना की एंट्री हो गई है. भीम सेना के ऐलान ने मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार की नींद उड़ा दी है. 

सूत्रों की मानें तो गृहमंत्री अमित शाह ने भीम सेना के ऐलान के बाद दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों भजनलाल शर्मा और डॉ. मोहन यादव से मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

भीम सेना चीफ ने क्या कहा?
भीम सेना के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल तंवर ने बयान जारी करके चेतावनी दी है कि अगर ग्वालियर हाई कोर्ट में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा नहीं लगेगी तो भीम सेना का यह ऐलान है कि राजस्थान के जयपुर हाई कोर्ट में भी मनु की प्रतिमा नहीं रहेगी.

सतपाल तंवर की विवादित धमकी
भीम सेना सुप्रीमो सतपाल तंवर ने दो टूक शब्दों में कह दिया, "तुम्हारी मां ने इतना दूध नहीं पिलाया और तुम्हारे बाप की इतनी औकात नहीं है जो तुम मध्य प्रदेश की ग्वालियर हाई कोर्ट में हमारे मसीहा, हमारे भगवान परम पूज्य बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा लगाने से रोक सको."

सतपाल तंवर यहीं नहीं रुके. उन्होंने आगे कहा, "जब तुम्हारे बाप-दादा की औकात नहीं थी कि वे भारत का संविधान लिख सकें तो एक दलित के बेटे, एक शूद्र के बेटे बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने भारत का संविधान लिखा था." सतपाल तंवर ने चेतावनी दी है, "मनुवादियों तुम अपनी औकात में रहो और हमारे रास्ते में रोड़ा मत बनो तो तुम्हारी सेहत के लिए बेहतर होगा."

हाई कोर्ट में सुरक्षा कड़ी
सतपाल तंवर की इस धमकी के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और राजस्थान के जयपुर हाई कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. सुरक्षा बलों द्वारा चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर रखी जा रही है.

क्या है विवाद?
एमपी हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच में डॉ. बीआर अंबेडकर की मूर्ति लगाने को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जातिगत तनाव में बदलता जा रहा है. सोशल मीडिया पर दोनों पक्ष से बयानबाजी और चेतावनी दी जा रही है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जैसे ही भीमराव अंबेडकर की मूर्ति लगाने की चर्चा हुई, वैसे ही विवाद ने जन्म ले लिया. 

बार एसोसिएशन मूर्ति लगाने को लेकर विरोध जता रही है. बार एसोसिएशन के मुताबिक हाई कोर्ट की सात सदस्यीय बिल्डिंग कमेटी ने भी परिसर में मूर्ति लगाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. इसके बावजूद डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुयायी वकीलों का एक गुट मूर्ति लेकर दो दिन पहले हाई कोर्ट पहुंच गया.

4 राज्यों में भड़की आंदोलन की चिंगारी
अब धीरे-धीरे यह मूर्ति विवाद जातिगत तनाव में बदल गया है. भीम सेना की सक्रियता से मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा में आंदोलन की चिंगारी भड़क उठी है. भीम सेना को कम आंकना देश की सरकार के लिए भी भारी पड़ सकता है. क्योंकि देश भर में भीम सेना के 28 लाख से ज्यादा सदस्य बताए जाते हैं. 

भीम सेना देश में दो बार सफल भारत बंद भी कर चुकी है. अब यह विवाद देश भर में फैल सकता है और बड़ा जातीय आंदोलन का रूप भी ले सकता है.

जयपुर हाई कोर्ट में ऋषि मनु की मूर्ति पर विवाद क्यों?
दरअसल, 28 जून 1989 को हाई कोर्ट में सौन्दर्यीकरण के काम के दौरान स्थापित किया गया था. मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि राजस्थान उच्च न्यायालय अधिकारी एसोसिएशन के तत्कालीन अध्यक्ष पदम कुमार जैन के अनुरोधानुसार तत्कालीन जस्टिस एमएम कासलीवाला ने इस मूर्ति की स्थापना के लिए पत्र क्रमांक 0303 द्वारा मान्यता प्रदान की थी. 

अब ऐसा भी मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने ग्वालियर में अंबेडकर की मूर्ति लगाने का आदेश पारित किया था, जो अब रिटायर हो चुके हैं. वहीं, जयपुर हाई कोर्ट में मनु की मूर्ति की स्थापना के दिन से ही इसका विरोध होना शुरू हो गया था, जिसके बाद से कई बार भीम सेना आंदोलन कर चुकी हैं.

वहीं, लगातार हो रहे विरोध को देखते हुए हाई कोर्ट की प्रशासनिक बैठक में 28 जुलाई 1989 को इस मूर्ति को 48 घंटों में हटाए जाने का निर्णय कर लिया गया लेकिन इसी बीच विश्व हिंदू परिषद के आचार्य धर्मेंद्र की ओर से एक रिट याचिका दायर की गई थी जिसके बाद जस्टिस महेंद्र भूषण की पीठ ने मूर्ति को यथास्थिति बनाए रखने के आदेश जारी किए. मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

मनु की मूर्ति पर महिला भीम सेना ने पोती थी कालिख
वहीं 2018 में मनु मूर्ति पर महिला भीम सेना बिहार की दो महिलाओं ने कालिख पोत दी थी जिसके बाद उन दिनों यह मुद्दा काफी गरमा गया था.  पुलिस ने कालिख पोतने के आरोप में दो महिलाओं को हिरासत में लिया है जिनकी पहचान बिहार के औरंगाबाद निवासी के रूप में हुई थी. 

दोनों महिलाएं भीम सेना के संस्थापक नवाब सतपाल तंवर की करीबी और महिला भीम सेना बिहार की सक्रिय कार्यकर्ता बताई गई थी.

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