कल्याणपुरा कुहाड़ा में भैंरूजी मंदिर का वार्षिकोत्सव, 750 क्विंटल चूरमा प्रसाद, लाखों भक्तों का जमावड़ा!

Jan 30, 2026 - 11:03
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कल्याणपुरा कुहाड़ा में भैंरूजी मंदिर का वार्षिकोत्सव, 750 क्विंटल चूरमा प्रसाद, लाखों भक्तों का जमावड़ा!

कल्याणपुरा कुहाड़ा स्थित अरावली की पहाड़ियों में बने श्री छांपाला वाला भैंरूजी मंदिर का 17 वाँ वार्षिकोत्सव समारोह 30 जनवरी शुक्रवार को बड़े ही धुमधाम व हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जायेगा. इस मौके पर विशाल व भव्य मेला, भण्डारा एवं जागरण का आयोजन होगा.

मेले को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. इसको लेकर पिछले एक माह से ग्रामीण जन सहयोग से भंडारे की तैयारियों में जुटे हुये है. भण्डारे में लाखों श्रद्धालू भैंरू बाबा की प्रसादी पायेगें. जिनके लिये 750 क्विंटल चूरमा तैयार किया गया है.

प्रदेश में यह मेला बड़ी मात्रा में चूरमा बनाने के लिए प्रसिद्ध

भैंरूजी का विशाल भण्डारा शुक्रवार 30 जनवरी को है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में चूरमा बनाने के लिये तैयारियां महीने भर पहले से शुरू हो जाती हैं और चूरमा करीब 07 दिन पहले बनना शुरू हो जाता है. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिये जेसीबी, ट्रैक्टर ट्रॉलियों और थ्रेसर काम में लिये जाते हैं. यह मेला अब प्रदेश में इस खास अंदाज में बनाये जाने वाले चूरमे के कारण ही जाना जाता है.

मेले में आसपास के ग्रामीण अपने स्तर पर मैनेजमेंट संभालते हैं. मान्यता है कि यहां भैंरूजी को विशेष प्रसादी में चूरमे का भोग लगाया जाता है. पिछली बार यहां 551 क्विंटल का प्रसाद बनाया गया था और इस बार 750 क्विंटल चूरमे का भोग लगाया जायेगा.

मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं व हजारों वाहनों के लिये ग्रामीण पार्किंग की व्यवस्था तक खुद संभालते हैं. हैलीपेड से लेकर बाबा के दर्शनों के लिये ग्रामीण ही वॉलंटियर्स के रूप में तैनात रहते हैं.

साल 2010 में प्रथम वार्षिकोत्सव

सर्वप्रथम सन् 2010 में प्रथम वार्षिकोत्सव में 70 किंवटल चूरमे की प्रसादी बनाई थी. उसके बाद हर बार प्रसादी के लिए बनाए गए चूरमे को बढ़ाया गया. महाप्रसादी के लिए दाल बनाने का काम गुरूवार से प्रारंभ हो गया था. मंदिर के वार्षिकोत्सव पर सवाईमाधोपुर, ग्वालियर, झालावाड, कोटा, पीपलखेड़ा, मुरैना व जयपुर सहित दूरदराज से श्रद्धालु आते हैं.

वहीं कोटपूतली विधायक हंसराज पटेल द्वारा निरन्तर व्यवस्थाओं की मॉनीटरिंग की जा रही है. गुरूवार को हजारों महिलाओं द्वारा गाजे-बाजे के साथ विशाल कलश यात्रा निकाली जायेगी. चूरमा तैयार करने में मेला कमेटी से जुड़े ग्रामीण जयराम जेलदार, पुजारी रोहिताश बोफा, कैलाश धाबाई, रामकुंवार, सरपंच विक्रम छावड़ी तथा बबलू गुर्जर जुटे रहे.

इसके अलावा भैंरु बाबा मंदिर पर हैलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जायेगी. मेले में हैलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड भी बना हुआ है. आस्था और विष्वास के इस महाउत्सव की तैयारियों में ग्राम कल्याणपुरा, कूहाड़ा, पदमा की ढ़ाणी, पंवाला राजपूत, हरीपुरा, हीरान की ढ़ाणी, बोपिया, चुरी सहित आसपास के करीब 08 गांवों के लोग पिछले 15 दिनों से तैयारियों में जुटे हुये है.

मैन रोड़ पर बना मंदिर का 05 मंजिला विशाल प्रवेश द्वार भामाशाहों के सहयोग से करीब 96 लाख की लागत से बनाया गया है. इस मौके पर स्थानीय गायक कलाकार ढ़प की ताल पर धमाल गाते हैं. ग्रामीणों की ओर से मेले की तैयारियां जोर शोर से की जा रही है तो वहीं पुलिस प्रशासन भी मेले में उमड़ने वाली भीड़ को लेकर चौकन्ना है.

मेले में प्रत्येक ग्रामीण देता है सेवा

मेले में लाखों श्रद्धालू भैंरू बाबा के दर्शन करने आते है. मेले में श्रद्धालूओं के लिये 651 क्विंटल प्रसादी तैयार की गई है. गांव के प्रत्येक घर से एक व्यक्ति रोजाना अपना समय निकालकर यहां अपनी सेवा दे रहा है. एक समय में यहां कम से कम 100 लोगों की टीम हमेशा रहती है.

चूरमा बनाने में 150 क्विंटल आटा, 100 क्विंटल सूजी, 35 क्विंटल देसी घी, 130 क्विंटल खाण्ड, 10 क्विंटल मावा, 03 क्विंटल बादाम, 03 क्विंटल किशमिश, 03 क्विंटल काजू, 03 क्विंटल खोपरा, 100 क्विंटल दूध आटे में, 80 क्विंटल दूध का दही और 40 क्विंटल दाल का उपयोग किया जायेगा.

वहीं दाल बनाने में 40 क्विंटल दाल, 20 पीपा सरसों तेल, 05 क्विंटल टमाटर, 02 क्विंटल हरी मिर्च, 01 क्विंटल हरा धनिया इस्तेमाल किया जायेगा. वहीं मसालों में 60 किलो लाल मिर्च, 60 किलो हल्दी और 40 किलो जीरा डाला जायेगा. ग्रामीण मेले को इतने व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराते हैं कि पुलिस प्रशासन भी हैरान रहता है.

मेले में आने वाले हजारों वाहनों के लिए ग्रामीण पार्किंग की व्यवस्था तक खुद संभालते हैं. मेले में 21 स्कूलों के करीब 05 हजार विद्यार्थी अपनी सेवाएं देंगे तो वहीं 03 हजार पुरूष व 500 महिलाएं भी वालंटियर्स के रुप में तैनात रहेंगी. प्रसादी वितरित करने के लिए ढ़ाई लाख पत्तल-दोने, चाय कॉफी के लिए 04 लाख कप मंगवा लिए गए हैं. मेले में पेयजल आपूर्ति के लिए 25 टैंकर तैनात रहेंगे. मेले में एम्बुलेस, फायर बिग्रेड आदि संसाधन तैनात रहेंगे.

विशाल कलश यात्रा गुरूवार को

मेले से एक दिन पूर्व 29 जनवरी गुरूवार को प्रातः 09 बजे से चोटिया मोड़ से मंदिर परिसर तक लगभग 03 किलोमीटर की कलश यात्रा निकाली जायेगी. जिसमें हजारों महिलायें सिर पर कलश लेकर चलेगी. जिनके लिये करीब 25 हजार कलश मंगवाये गये है.

विशाल कलश यात्रा का ग्रामीणों द्वारा जगह-जगह स्वागत किया जायेगा. कलश यात्रा में ग्रामीण महिलायें परम्परागत वेशभूषा में गाजे-बाजे के साथ शामिल होंगी.

116 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं मंदिर

यह मंदिर कोटपूतली-सीकर स्टेट हाईवे पर है. इसके लिए मुख्य सडक़ से 02 किलोमीटर अंदर जाना होता है. इन दो किमी में 03 भव्य दरवाजों से गुजरना पड़ता है. इसके बाद तलहटी से एक पहाड़ पर चढऩा होता है. करीब 116 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर परिसर तक पहुंचा जा सकता है.

मंदिर परिसर में प्राचीन भैरव बाबा की मूर्ति स्थापित हैं. इनके साथ ही सवाई भोज, शेड माता व हनुमान जी की मूर्ति स्थापित हैं. वार्षिकोत्सव पर सवाई माधोपुर, ग्वालियर, झालावाड़, कोटा, पीपलखेड़ा, मुरैना, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली समेत दूर-दराज से श्रद्धालु भैंरू बाबा के दर्शन करने आते हैं.

ऐसे शुरू हुई महाप्रसादी की परम्परा

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक सोनगिरी पोसवाल नामक व्यक्ति भैंरू जी का भक्त था. जो भैंरू बाबा की मूर्ति को ग्राम कुहाड़ा में स्थापित करवाना चाहता था. भक्त भैंरू बाबा की मूर्ति लाने काशी चला गया. भैंरू बाबा ने सपने में दर्शन देकर सोनगिरी से बड़े बेटे की बलि मांगी, जिस पर वह बेटे की बलि देकर भैंरूजी की मूर्ति लेकर चल देते हैं.

भैंरू बाबा परीक्षा से खुश होकर पुत्र को जीवित कर देते हैं. जिसके बाद भक्त व उसके बेटे ने पंच पीरों के साथ गांव में मूर्ति की स्थापना विधि विधान से जागरण व भण्डारे के साथ की. आज भी प्राचीन पंचदेव खेजड़ी वृक्ष की पूजा होती है. यहां लगने वाले मेले की खास बात है कि यहां खिलौनों की दुकान, चाट पकौड़ी के ठेले व झूले लगाने की अनुमति नहीं दी जाती है.

प्रतिवर्ष होने वाले लक्खी मेले में लाखों की संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं. वहीं जनप्रतिनिधि एवं नेतागण भी बाबा के दरबार में धोक लगाते हैं.

खेजड़ी वृक्ष की भी होती है पूजा

सोनगिरा पोषवाल प्रथम के सोनगिरा द्वितीय पैदा हुआ. जिसने अपनी बेटी पदमा पोषवाल की शादी बगड़ावत सवाई भोज के साथ मिति बैशाख सुदी नवमी वार रविवार संवत् 934 में की. जिसमें पंचदेव खेजड़ी वृक्ष का मंडप लगाया गया जो वर्तमान में भी मौजुद है. जिसकी आज भी पुजा होती है.

पदमा पोषवाल ने वरदान दिया कि जिस स्त्री के संतान सुख नहीं है वह मंडप में उपस्थित जड़ के नीचे से निकलने पर उसको संतान सुख प्राप्त होगा. पोषवाल गौत्र पर इसका वरदान लागु नहीं होता है. तभी से आसपास के क्षेत्र में भैरू बाबा व खेजड़ी के वृक्ष की पूजा होने लगी तथा हजारों की संख्या में लोग इसके दर पर आने लगे.

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