Harsha Richhariya Sanyas: मॉडल हर्षा रिछारिया ने लिया संन्यास, जानें कैसे बनते हैं साध्वी ? क्या-क्या त्यागना पड़ता है

Apr 22, 2026 - 11:18
 0
Harsha Richhariya Sanyas: मॉडल हर्षा रिछारिया ने लिया संन्यास, जानें कैसे बनते हैं साध्वी ? क्या-क्या त्यागना पड़ता है

Harsha Richhariya Sanyas: ग्लैमर की दुनिया छोड़ आध्यात्म की राह पकड़ने वाली सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर हर्षा रिछारिया एक बार फिर सुर्खियों में है. महाकुंभ 2025 में वायरल हुईं हर्षा ने संन्यास ले लिया है. अब वह सांसारिक जीवन को छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग पर चलेंगी. साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने उज्जैन में खुद का पिंडदान कर संन्यास की परंपरा का पालन किया इसके बाद उनका नाम भी बदल गया है. आखि

हर्षा रिछारिया से बनीं हर्षानंद गिरी

हर्षा रिछारिया ने अक्षय तृतीया पर उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे मौनी तीर्थ आश्रम में संन्यास दीक्षा ली. पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर सुमनानंद गिरि महाराज के नेतृत्व में ये अनुष्ठान हुआ. अब हर्षा रिछारिया स्वामी हर्षानंद गिरि नाम से पहचानी जाएंगी.

खुद का तर्पण, पिंडदान किया

साध्वी हर्षा नंदगिरी ने स्वंय का तर्पण, पिंडदान, शिखा और दंड का त्याग कर संन्यास की दीक्षा ली. सन्यास दीक्षा के दौरान 'स्वयं का पिंडदान' एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक अनुष्ठान है, जो सांसारिक जीवन, परिवार और पिछले रिश्तों के पूर्ण त्याग का प्रतीक है. इस प्रक्रिया में, साधक/साधिका अपने पितरों के तर्पण के साथ-साथ स्वयं के नाम का पिंडदान करते हैं, जिसका अर्थ है कि उनका पूर्व जीवन समाप्त हो गया है और वे अब आध्यात्मिक जीवन के लिए पुनर्जन्म ले चुके हैं

कैसे बनते हैं साध्वी ?

  • साध्वी बनने का मार्ग आसान नहीं होता. यह एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा है, जिसमें महिला को अपने पूरे जीवन को नए सिरे से ढालना पड़ता है. यह सिर्फ बाहरी रूप बदलने का निर्णय नहीं, बल्कि भीतर से पूरी तरह परिवर्तन की प्रक्रिया है.
  • सबसे पहले, साध्वी बनने की इच्छा रखने वाली महिला को अपने मन में यह दृढ़ निश्चय करना होता है कि वह सांसारिक जीवन, रिश्तों और मोह-माया से पूरी तरह दूर रह सके.
  • इस निर्णय की गंभीरता को समझने के लिए उसके परिवार, जीवनशैली और यहां तक कि उसकी जन्म कुंडली तक का विश्लेषण किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह इस मार्ग के लिए उपयुक्त है.
  • साध्वी बनने के लिए एक महिला को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का त्याग करना पड़ता है, जैसे कि अपने परिवार और दोस्तों से दूर रहना. भौतिक सुखों का त्याग करना पड़ता है, जैसे कि धन, पद, और प्रतिष्ठा.
  • इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका गुरु की होती है. बिना गुरु के मार्गदर्शन के साध्वी बनने की राह संभव नहीं मानी जाती. जब कोई महिला किसी योग्य गुरु से दीक्षा लेती है, तभी उसके आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत होती है. गुरु उसे मंत्र, ज्ञान और जीवन जीने की नई दिशा प्रदान करते हैं.
  • दीक्षा के बाद साध्वी को अपने पुराने जीवन से पूरी तरह अलग होना पड़ता है. इसका मतलब है. परिवार, सामाजिक पहचान और व्यक्तिगत इच्छाओं से दूरी बनाना. नियमित दिनचर्या का पालन करना पड़ता है, जिसमें प्रार्थना, ध्यान, और सेवा कार्य शामिल हैं.
  • इस मार्ग में त्याग का विशेष महत्व होता है. साध्वी को भौतिक सुख-सुविधाओं, आडंबर और तामसिक भोजन  का पूरी तरह त्याग करना पड़ता है. जीवन सादा, संयमित और सात्विक बनाना इस साधना का मूल आधार होता है.
  • बाहरी रूप में भी बदलाव आता है. साध्वी बनने से पहले सिर मुंडवाना एक प्रतीकात्मक प्रक्रिया है, खुद का तर्पण, पिंडदान किया जाता है ताकि सांसारिक जीवन का त्याग किया जा सके.
  • दीक्षा के बाद साध्वी को भगवा वस्त्र धारण करने होते हैं, गुरु के आदेशों का पालन करना, उनकी सेवा करना और उनके बताए मार्ग पर चलना ही उसका मुख्य कर्तव्य बन जाता है.

कौन हैं हर्षा रिछारिया

हर्षा रिछारिया का जन्म 26 मार्च 1994 को उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी जिले के मऊरानीपुर में हुआ था. बाद में उनका परिवार मध्य प्रदेश के भोपाल में बस गया. वर्तमान में हर्षा उत्तराखंड में रहती थीं.  ल वे नियमित रूप से धर्म और अध्यात्म से जुड़े विषयों पर सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करती रही हैं.

Vat Savitri Vrat 2026 Date: वट सावित्री व्रत 2026 में कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, इसी दिन है शनि जयंती

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0
Barwara Patrika Barwara Patrika is a Hindi newspaper published and circulated in Jaipur , Ajmer , Sikar, Kota and Sawaimadhopur . Barwara Patrika covers news and events all over from India as well as international news, it serves the Indian community by providing relevant information.