यमुना प्राधिकरण छह महीने में सुलझाएगा सात फीसदी आबादी भूखंडों के विवाद, सीईओ ने दी जानकारी

Jan 15, 2026 - 12:45
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यमुना प्राधिकरण छह महीने में सुलझाएगा सात फीसदी आबादी भूखंडों के विवाद, सीईओ ने दी जानकारी

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने औद्योगिक विकास के साथ-साथ आवासीय सेक्टरों के विकास को तेज करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. प्राधिकरण ने किसानों से जुड़े सात प्रतिशत आबादी भूखंडों के लंबे समय से चले आ रहे विवादों को अगले छह महीनों में निपटाने का लक्ष्य तय किया है. इसके लिए एक ठोस और चरणबद्ध योजना तैयार की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह के कानूनी या प्रशासनिक विवाद से बचा जा सके.

यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह जानकारी दी कि आबादी भूखंडों के आवंटन को प्राथमिकता दी जाएगी. जिन किसानों को अभी तक आबादी भूखंड नहीं मिल सके हैं, उन्हें पहले चरण में योजना के दायरे में लाया जाएगा. प्राधिकरण का दावा है कि 29 गांवों के किसानों को आबादी भूखंड देने के लिए करीब 500 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है. इसके लिए गांव-वार योजना बनाकर प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि योजना के तहत किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदी जाएगी और उसी जमीन पर आबादी भूखंड विकसित किए जाएंगे. वर्तमान में सेक्टर-18 और उसके आसपास के क्षेत्रों में किसानों को आबादी भूखंड देकर विकास को गति देने की योजना बनाई गई है. जल्द ही 973 आवासीय भूखंडों की योजना लॉन्च की जाएगी, जिसमें 17.5 प्रतिशत आरक्षण यमुना सिटी के लिए जमीन देने वाले किसानों के लिए रखा गया है.

प्राधिकरण को कोर्ट के आदेशों से भी राहत मिली है. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के अर्जेंसी क्लॉज से जुड़े एक ऐतिहासिक फैसले में यीडा को फायदा हुआ है. हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील में भी प्राधिकरण को राहत मिली थी. इसके बाद करीब डेढ़ दर्जन मामलों को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया, जिससे लगभग 1800 भूखंडों पर कब्जा मिलने का रास्ता साफ हो गया है.

यमुना प्राधिकरण के सीईओ राकेश कुमार सिंह ने बताया कि सात प्रतिशत आबादी भूखंड देने के लिए प्राधिकरण पूरी प्राथमिकता के साथ काम कर रहा है. किसानों से अलग-अलग स्तर पर बातचीत की जाएगी और आपसी सहमति से जमीन खरीदने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. छह महीनों के भीतर इसका असर धरातल पर दिखने लगेगा.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक स्थान पर मौजूद जमीन के सभी काश्तकारों की सहमति जरूरी होगी. इसके लिए सेक्टर और पॉकेट के अनुसार अलग-अलग रणनीति अपनाई जाएगी, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहते हुए विकास कार्य बिना बाधा के आगे बढ़ सके.

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