इमरान खान का इस लड़ाका कबीले से गहरा संबंध: समर्थक सड़कों पर उतरें तो पाकिस्तान सरकार भी संभाल नहीं पाएगी, आसिम मुनीर होंगे फेल!

Dec 3, 2025 - 12:14
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इमरान खान का इस लड़ाका कबीले से गहरा संबंध: समर्थक सड़कों पर उतरें तो पाकिस्तान सरकार भी संभाल नहीं पाएगी, आसिम मुनीर होंगे फेल!

पाकिस्तान की राजनीति में इन दिनों पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान केंद्र बिंदु बने हुए हैं. उनके परिवार का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से जेल में मिलने नहीं दिया जा रहा, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. इस बीच, उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं और देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर रहे हैं.

2023 से अदियाला जेल में बंद हैं इमरान खान

इमरान खान 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं. उन पर भ्रष्टाचार और विरोध प्रदर्शन से जुड़े आतंकवाद विरोधी कानून के तहत आरोप लगे हैं. हाल ही में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर झड़पों के बीच इमरान ने सरकार को पैरोल पर रिहाई के बदले शांति स्थापित करने का प्रस्ताव दिया. उनकी बहन नोरीन नियाजी ने बताया कि इमरान अफगान शरणार्थियों के मुद्दे पर संवेदनशील हैं और शांति स्थापना में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं.

नियाजी कबीले में हुआ था इमरान खान का जन्म

इमरान खान का जन्म 1952 में खैबर पख्तूनख्वा के मियांवली जिले में नियाजी कबीले में हुआ था. यह कबीला सैकड़ों साल पहले अफगानिस्तान से पाकिस्तान आया था और इसे ‘लड़ाका’ यानी युद्ध के लिए तैयार कबीला माना जाता है. इस कबीले में इमरान की पकड़ बहुत मजबूत है और खैबर पख्तूनख्वा के कुर्रम जिले में पाकिस्तानी सेना और अफगान तालिबान के बीच चल रही झड़पों में भी नियाजी कबीले की सांस्कृतिक पहचान और सहानुभूति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

पश्तून जनजाति, जिसमें नियाजी कबीला भी शामिल है, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में फैला सबसे बड़ा मुस्लिम जनजातीय समूह है. इसका आधार विरासत, इस्लाम, पश्तूनवाली सम्मान संहिता और भाषा है. इसी वजह से इमरान खान के समर्थकों की शक्ति केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है; अफगानिस्तान के जनजातीय समूहों का समर्थन भी उन्हें मिलता है.

समर्थकों का प्रदर्शन बन सकती है बड़ी चुनौती

इमरान खान पाकिस्तान में नियाजी कबीले से आने वाले सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं. उनकी राजनीतिक रणनीति, कबीलाई ताकत और अफगान संबंध उन्हें देश की राजनीति में चुनौतीपूर्ण खिलाड़ी बनाते हैं. अगर उनके समर्थक बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करते हैं तो यह पाकिस्तान की सियासी स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती साबित हो सकती है.

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