केंद्र के परिसीमन वाले विधेयक को लेकर गुस्से में स्टालिन, विधेयक की कॉपी को लगाई आग, बोले- 'अब होगा...'
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार (16 अप्रैल) को मोदी सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन के खिलाफ विरोध तेज करते हुए विधेयक की एक प्रति जलाई और काला झंडा फहराया. उनके इस कदम से राज्यव्यापी आंदोलन की शुरुआत हो गई है.
स्टालिन ने काले कपड़े पहनकर 131वें संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में काला झंडा फहराया, क्योंकि इसमें विधानसभाओं और लोकसभा के आकार को बदलने के लिए परिसीमन का प्रस्ताव है. स्टालिन ने इसे काला कानून बताया है.
यह आंदोलन द्रविड़ भूमि में फैलेगा- स्टालिन
स्टालिन ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह प्रतिरोध तमिलनाडु में फैले और फासीवादी बीजेपी का अहंकार धराशायी हो जाए. अतीत के हिंदी-विरोधी आंदोलनों से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के पूर्व प्रतिरोध ने दिल्ली को झुकने पर मजबूर कर दिया था और इसी तरह का आंदोलन वर्तमान प्रस्ताव को चुनौती देगा. उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक तमिलों को उनकी अपनी भूमि में शरणार्थी बना देगा और कहा कि बीजेपी के अहंकार को कुचलने के लिए यह आंदोलन द्रविड़ भूमि में फैलेगा.
संसद का विशेष सत्र बुलाने पर उठाए सवाल
केंद्र द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को लागू करने के लिए मसौदा संशोधन विधेयकों को मंजूरी देने के बाद यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया है. विपक्षी दलों ने चुनावी मौसम में संसद का विशेष सत्र बुलाने की जल्दबाजी पर भी चिंता जताई है. स्टालिन ने राज्य भर के लोगों से विरोध के प्रतीक के रूप में अपने घरों पर काले झंडे फहराने का आह्वान किया. विरोध प्रदर्शन के तहत तिरुचिरापल्ली के थेन्नूर स्थित तमिलनाडु के मंत्री अंबिल महेश पोय्यामोझी के आवास पर भी काले झंडे लगाए गए.
क्या बोले तमिलनाडु के मंत्री
तमिलनाडु के मंत्री महेश ने पहले आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की योजना बना रही है, जिससे राज्यों के अधिकारों का हनन होगा. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सीटों की संख्या में काफी वृद्धि हो सकती है और बताया कि मसौदा रिपोर्ट विपक्षी दलों के साथ साझा नहीं की गई है.
उन्होंने इस कदम के समय पर भी सवाल उठाया और कहा कि पार्टियां वर्तमान में पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि यह कदम किसी गुप्त मकसद से प्रेरित है. केंद्र सरकार ने लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है, जिसमें राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें शामिल हैं.
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