भारत-EU के समझौते में क्या खास बातें, मदर ऑफ ऑल डील क्यों कहा गया, 10 पॉइंट्स में समझें पूरा FTA

Jan 27, 2026 - 16:28
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भारत-EU के समझौते में क्या खास बातें, मदर ऑफ ऑल डील क्यों कहा गया, 10 पॉइंट्स में समझें पूरा FTA

27 जनवरी 2026 को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय यूनियन (EU) कमीशन प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा के साथ मीटिंग की. भारत और यूरोपीय यूनियन के नेताओं ने 16वें भारत-EU समिट के दौरान भारत-EU के बीच सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) समझौता किया. इस समझौते की 10 बड़ी बातें जानते हैं...

1. 25% GDP को कवर करेगा भारत-EU समझौता

बीते 4 साल में भारत 7 FTA साइन कर चुका है, जिसमें यूके, ओमान, न्यूजीलैंड शामिल हैं. अब 27 जनवरी को EU के साथ FTA की घोषणा हुई है, जिसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह है कि EU 27 देशों का ग्रुप और दुनिया की सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लॉक है. वहीं भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था है. EU की GDP 22.53 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि भारत की इकोनॉमी 4 ट्रिलियन डॉलर है. दोनों के साथ आने से 200 करोड़ लोगों का मार्केट बनेगा. साथ ही दुनिया की 25% GDP को कवर करेगा. 2025 में भारत और EU ने 12.5 लाख करोड़ रुपए का ट्रेड किया था. FTA आने के बाद भारत की बर्लिन, रोम, म्यूनिख जैसे यूरोपीय बाजारों में और यूरोप की दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे भारतीय बाजारों में पहुंच बन जाएगी. अनुमान है कि FTA होने से भारत-EU का व्यापार जल्द ही दोगुना हो जाएगा.

2. कारें सस्ती और पुर्जों पर टैरिफ 0% हो जाएगा

कारों पर टैरिफ धीरे-धीरे 110% से घटाकर 10% तक लाया जाएगा, जिससे यूरोपीय कंपनियां जैसे ऑडी, मर्सिडीज-बेंज और BMW हाई-एंड या स्पेशल मॉडल्स भारतीय बाजार में सस्ते हो जाएंगे. कार के पुर्जों पर लगने वाले टैरिफ को शून्य तक कम कर दिया जाएगा. इससे भारत और यूरोप के बीच सप्लाई चेन में गहरा एकीकरण होगा, यानी दोनों तरफ के उद्योग ज्यादा करीब से जुड़ेंगे और सहयोग बढ़ेगा. यूरोप भारतीय ऑटो कंपोनेंट सप्लायर्स के लिए एक बड़ा निर्यात बाजार है, इसलिए इस डील से भारतीय कंपनियों को काफी फायदा होगा. दूसरी तरफ, यूरोप में बने पार्ट्स की कीमत ज्यादा होने की वजह से भारत के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर असर सीमित रहने की उम्मीद है.

3. भारतीय फार्मा इंडस्ट्री मजबूत होगी

EU से भारत में आने वाली दवाइयों पर 11% तक के टैरिफ ज्यादातर खत्म हो जाएंगे, लेकिन भारत से EU में जाने वाली दवाइयों पर पहले से ही आसान पहुंच है. EU अभी भारत से निर्यात होने वाली ज्यादातर दवाइयों पर 0% या बहुत कम टैरिफ लगाता है. इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से EU बाजार में भारतीय जेनेरिक दवाइयों को और आसान पहुंच मिलेगी, जिससे भारत की दवा कंपनियों के निर्यात में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. भारत दुनिया का 'फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड' कहलाता है, खासकर जेनेरिक दवाइयों के मामले में. EU में पहले से ही ज्यादातर भारतीय दवाइयों पर कोई या बहुत कम ड्यूटी है, इसलिए यह डील भारतीय फार्मा इंडस्ट्री को और मजबूत बनाएगी. इससे EU में सस्ती और क्वालिटी वाली जेनेरिक दवाइयां ज्यादा उपलब्ध होंगी, जिससे यूरोप के मरीजों को भी फायदा होगा. इस डील की वजह से फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स सेक्टर में भारत को हर साल 20-30% के ट्रेड का फायदा हो सकता है.

4. यूरोपीय बाजारों में भारतीय कपड़ा चमकेगा

भारत के कपड़े और चमड़े पर EU अभी 10% ड्यूटी लगाता है. FTA के बाद यह कम या खत्म हो सकती है. इससे यूरोप में भारतीय कपड़े, जूते सस्ते होंगे और उनकी डिमांड बढ़ेगी. इससे भारत में गारमेंट्स, लेदर, फुटवियर जैसी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को सीधा फायदा होगा.

5. यूरोप में लगेंगी भारत की हथियार फैक्ट्रियां

EU से FTA होने के बाद भारत को डिफेंस सप्लायर और मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर बन गया है. इससे इंडियन डिफेंस इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा. फ्रांस, जर्मनी, स्पेन और इटली जैसे EU देश भारत को एडवांस्ड वेपन बेचते हैं. 2024 में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन डेढ़ लाख करोड़ रुपए रहा. वहीं डिफेंस एक्सपोर्ट 25 हजार करोड़ रुपए रहा. अब डील होने के बाद भारत की हथियार कंपनियों को EU की डिफेंस जरूरतें पूरी करने वाले SAFE फंड्स की पहुंच मिल जाएगी. ऐसा होने से यूरोप में भारतीय फैक्ट्रियां लग सकती हैं.

6. भारत के IT प्रोफेशनल्स को फायदा मिलेगा

भारतीय IT, प्रोफेशनल और एजुकेशन सर्विसेज को EU में बड़ा बाजार मिलेगा. भारतीय कंपनियों और प्रोफेशनल्स को EU के 144 सर्विस सेक्टर्स में काम करने का मौका मिलेगा. EU को भारत के 102 सर्विस सेक्टर्स में एंट्री मिलेगी. भारतीय प्रोफेशनल्स को EU में काम और बिजनेस के लिए जाना आसान होगा. डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन सर्विसेज और नई तकनीक को बढ़ावा मिलेगा.

7. यूरोपीय शराब सस्ती होगी, एविएशन सेक्टर में भी फायदा

इस समझौते के बाद यूरोप से आने वाले खाद्य उत्पादों पर लगने वाला भारी शुल्क घटा दिया गया है. यानी जैतून का तेल, मार्जरीन और दूसरे वनस्पति तेलों पर अब जीरो टैक्स लगेगा. यूरोपीय देशों की शराब पर अभी 150% टैरिफ लगता है. इसे घटाकर 20–30% किया जाएगा. बीयर पर शुल्क 110% से घटाकर 50% होगा और स्पिरिट पर टैक्स 40% होगा. इसके अलावा विमान और अंतरिक्ष से जुड़े लगभग सभी उत्पाद अब बिना टैरिफ के आएंगे, जिससे भारत के एविएशन सेक्टर को बड़ा फायदा होगा.

8. भारत और यूरोप की सप्लाई चेन जुड़ेगी

उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यह समझौता दुनिया को साफ संदेश देता है कि ग्लोबल चुनौतियों का सबसे अच्छा जवाब सहयोग है. इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत और यूरोप की सप्लाई चेन आपस में जुड़ेंगी और जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग ताकत मजबूत होगी. उन्होंने बताया कि इससे हर साल करीब 4 अरब यूरो (43.5 हजार करोड़ रुपए) के टैरिफ कम होंगे. भारत और यूरोप में लाखों लोगों के लिए अच्छी नौकरियां बनेंगी. भारत-यूरोप का आगे बढ़ना दुनिया के लिए जरूरी है.

9. 2032 तक भारत-EU व्यापार दोगुना होगा

भारत और EU के बीच 2024-25 में कुल व्यापार 190 अरब डॉलर रहा था. इस दौरान भारत ने यूरोपीय देशों को 75.9 अरब डॉलर का सामान और 30 अरब डॉलर की सर्विस एक्सपोर्ट की. वहीं, यूरोप ने भारत को 60.7 अरब डॉलर का सामान और 23 अरब डॉलर की सर्विस भेजी.इस एग्रीमेंट के बाद 2032 तक व्यापार दोगुना हो जाएगा. समझौते से सामान और सेवाओं पर टैरिफ कम होंगे, जिससे व्यापार आसान बनेगा.

10. मदर ऑफ ऑल डील क्यों कहा जा रहा?

दुनिया अमेरिका और चीन के विकल्प ढूंढ रही है. ऐसे में यह डील भारत को चीन की जगह बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बना सकती है और यूरोप के साथ व्यापार तेजी से बढ़ा सकती है. पिछले साल भारत-EU का व्यापार 12.5 लाख करोड़ रुपए रहा था. FTA के बाद दोनों देशों को एक-दूसरे के बाजारों में ज्यादा पहुंच मिलेगी और व्यापार के दोगुना होने की उम्मीद है. इस वजह से इसे मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है.

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