आतंकी डॉक्टरों का अड्डा कैसे बनी अल-फलाह यूनिवर्सिटी, कहां से मिली 415 करोड़ की फंडिंग? फाउंडर जवाद सिद्दीकी उगलेंगे राज

Nov 19, 2025 - 11:23
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आतंकी डॉक्टरों का अड्डा कैसे बनी अल-फलाह यूनिवर्सिटी, कहां से मिली 415 करोड़ की फंडिंग? फाउंडर जवाद सिद्दीकी उगलेंगे राज

अल-फलह यूनिवर्सिटी से जुड़े बड़े घोटाले में ED ने चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट से 13 दिन की कस्टडी हासिल कर ली है. ये कार्रवाई छात्रों को फर्जी मान्यता दिखाकर ठगने और करोड़ों की कमाई करने के आरोपों में हुई है. ED की टीम ने 18 नवंबर की देर रात लगभग 11 बजे जवाद सिद्दीकी को उनके घर से गिरफ्तार किया था. 

गिरफ्तारी की वजह और सभी दस्तावेज़ उनके वकील और उनकी पत्नी को दिए गए. ईडी ने ये गिरफ्तारी PMLA की धारा 19 के तहत की है. दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 13 नवंबर को दो FIR दर्ज की थी, जिसमें आरोप था कि यूनिवर्सिटी ने फर्जी NAAC मान्यता दिखाई और खुद को UGC की धारा 12B में मान्यता प्राप्त बताया जबकि UGC ने साफ कहा था कि यूनिवर्सिटी को ये मान्यता कभी नहीं मिली. 

'415 करोड़ रुपये गलत दावों से कमाए' 

ED के मुताबिक ये सब छात्रों और उनके परिवारों को गुमराह कर एडमिशन और फीस वसूलने के लिए किया गया. इन आरोपों को आधार मानकर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की. ED ने दावा किया है कि 415 करोड़ रुपये गलत दावों से कमाए गए  ये पैसा उन सालों में आया, जब यूनिवर्सिटी के पास न NAAC मान्यता थी और न ही UGC की 12B मान्यता. मतलब छात्रों से एडमिशन और फीस गलत जानकारी देकर ली गई. इसलिए ED ने इस रकम को प्रोसीड्स ऑफ क्राइम यानी अपराध से कमाया हुआ पैसा बताया है.

जवाद सिद्दीकी की भूमिका आई सामने

जांच में ये भी सामने आया कि कई बार ये पैसा परिवार से जुड़ी कंपनियों और कॉन्ट्रैक्टरों के खातों में भेजा गया. ED के मुताबिक यूनिवर्सिटी के CFO ने अपने बयान में साफ कहा कि सभी बड़े वित्तीय फैसले स्वयं चेयरमैन जवाद सिद्दीकी लेते थे. ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की फाइनेंसिंग का पूरा कंट्रोल उन्हीं के हाथ में था. ED ने इसे जवाद सिद्दीकी की सीधी भूमिका का बड़ा सबूत बताया. 

ED की तरफ से पेश वकील ने कोर्ट में कहा कि मनी ट्रेल पूरी निकालने में अभी काफी काम बाकी है. कई रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा को सुरक्षित करना जरूरी है. आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है. उसके परिवार के कई सदस्य विदेश में रहते हैं. इसलिए भागने का खतरा भी है. 

जवाद सिद्दीकी के वकील ने क्या कहा?

जवाद सिद्दीकी के वकील ने कहा कि FIR ही फर्जी है ऐसे में ED को 14 दिन नहीं, सिर्फ 7 दिन की कस्टडी दी जाए लेकिन कोर्ट ने ये दलील नहीं मानी. कोर्ट ने कहा कि ये मामला बेहद गंभीर है. जांच शुरुआती चरण में है और ED के पास कई दस्तावेज़ और लोगों से पूछताछ करना बाकी है. इसी आधार पर कोर्ट ने जवाद अहमद सिद्दीकी को 13 दिन की ED कस्टडी में भेजा.

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