मऊ नगर पालिका में 70% ठेके मंत्रियों के करीबियों को! सभासद के खुलासे से हलचल

Jul 16, 2025 - 11:09
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मऊ नगर पालिका में 70% ठेके मंत्रियों के करीबियों को! सभासद के खुलासे से हलचल

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस पर सवाल खड़े होने लगे हैं. जी हां कुछ ऐसा ही मऊ जनपद में देखने को मिला. यहां नगर पालिका परिषद की मंगलवार को हुई बोर्ड बैठक में उस समय हड़कंप मच गया, जब सभासदों ने कैमरे के सामने खुलेआम “कमीशन राज” की पोल खोल दी. सभासद अब्दुल सलाम ने नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा, अधिशासी अधिकारी (ईओ), और चेयरमैन पर गंभीर आरोप लगाए, जिसने मऊ की राजनीति में भूचाल ला दिया है.

दरअसल नगर पालिका की बैठक के दौरान सभासद अब्दुल सलाम ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि मऊ नगर पालिका में कोई भी टेंडर बिना मंत्री के दरबार की मंजूरी के नहीं निकलता. उन्होंने दावा किया कि 70% ठेके नगर विकास मंत्री, उनके भाई और करीबी लोगों को दिए जाते हैं. सलाम ने कहा कि ठेकेदारों का चयन जाति और पहुंच के आधार पर होता है. बलिया, देवरिया, और आजमगढ़ से आए ऊंची जाति के भूमिहार-पंडित ठेकेदारों को ही ठेके मिलते हैं. उन्होंने तीखे कटाक्ष में पूछा-क्या सभासद केवल हाथ उठाने के लिए बैठे हैं? सलाम ने चुनौती दी कि उनके आरोप 100% सही हैं और इसकी पुष्टि मंत्री से की जा सकती है.

पलटवार और जवाबी आरोप

वहीं बैठक में मौजूद अन्य सभासद सत्यप्रकाश और राजीव सैनी ने मंत्री का बचाव करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष अरशद जमाल पर पलटवार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष खुद 25% कमीशन लेकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को काम दिलाते हैं. सैनी ने कहा कि अल्पमत में होने के बावजूद जबरन प्रस्ताव पास किए जाते हैं, और बैठक को बीच में छोड़ दिया जाता है. ठेकेदार सफेद बालू से घटिया काम करते हैं, और जब हम शिकायत करते हैं, तो हम पर ही कमीशन मांगने का इल्जाम लगा दिया जाता है.

कैमरे पर रिकॉर्ड हुआ विवाद

बैठक में उठा यह पूरा विवाद कैमरे पर रिकॉर्ड हो गया, जिसने मऊ की राजनीति में तहलका मचा दिया है. सभासदों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और कमीशन के खेल की खुली चर्चा ने प्रशासन और सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. क्या मऊ नगर पालिका में टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और जातिगत आधार पर भेदभाव हो रहा है? यह सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है.

प्रशासन और सरकार पर दबाव

कैमरा कांड के बाद निगाहें अब नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा और जिला प्रशासन पर टिकी हैं. सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी? क्या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, या यह मामला अन्य भ्रष्टाचार के आरोपों की तरह दबा दिया जाएगा? इस घटना ने मऊ की सियासत में भूचाल खड़ा कर दिया है.

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