Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या के दिन भूलकर भी न करें ये 7 काम, वरना...
Vaishakh Amavasya 2026 Rules: 17 अप्रैल 2026 शुक्रवार को वैशाख महीने की अमावस्या तिथि है. इसे सतुवाई अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि खास मायने रखती है, इसलिए अमावस्या के लिए कुछ नियम और परंपरा बनाए गए हैं, जिसका पालन सभी को करना चाहिए.
वैशाख अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करना, पितरों का तर्पण करना, सात्विकता व शुद्धता का पालन करना आदि जैसे कार्य करने चाहिए. इन कार्यों से देवता और पूर्वज दोनों प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं और घर की सुख-समृद्धि बढ़ती है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक और ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अनीष व्यास ने बताया कि, अमावस्या के दिन किए गए अच्छे कर्मों का पुण्यफल मिलता है, लेकिन गलतियां हो जाए तो इसका नकारात्मक असर भी जीवन पर पड़ सकता है. इसलिए हर व्यक्ति को यह जरूर जानना चाहिए कि, वैशाख अमावस्या पर आज कौन से काम नहीं करें.
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वैशाख अमावस्या पर न करें ये 7 गलतियां
स्नान न करना- वैशाख अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान का महत्व होता है. नदी स्नान संभव न हो तो घर पर भी शुद्ध जल से स्नान किया जा सकता है. लेकिन कुछ लोग अमावस्या के दिन स्नान ही नहीं करते. ऐसा करने की गलती न करें, अमावस्या के दिन स्नान करने से ना सिर्फ आपका शरीर शुद्ध होता है, बल्कि इससे जीवन में सकारात्मकता भी आती है.
पितृ तर्पण न करना- अमावस्या को पितरों की तिथि माना जाता है. पितृ इस दिन अपने वंश से तर्पण की आशा रखते हैं. इसलिए अमावस्या पर स्नान के बाद हाथ में कुश और काला तिल लेकर जल से पितरों का तर्पण कर उनका स्मरण करना चाहिए. इससे पितृ प्रसन्न होते है और पितृ दोष भी दूर होता है.
तामसिक भोजन करना- अमावस्या पर मांस-मदिरा का सेवन भी नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सात्विक भोजन करें और मन, वचन व कर्म से पवित्रता बनाए रखें.
दान से दूरी- विशेष तिथियों में दान-पुण्य जैसे कार्य जरूर करने चाहिए. वैशाख अमावस्या पर भी अपने सामर्थ्यनुसार दान जरूर दें. इस दिन विशेषरूप से जल से भरा मिट्टी का घड़ा, तिल, छाता, अन्न, फल आदि दान दे सकते हैं.
वाद-विवाद करना- ऐसी मान्यता है कि, अमावस्या पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. इसलिए घर का वातावरण शांत रखें और स्वयं भी संयमित रहें. घर में कलह-क्लेश, झगड़ा या वाद-विवाद से बचें.
पीपल पूजा न करना- वैशाख अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा करना न भूलें. सुबह के समय पेड़ के जल में जल डालें और सूर्यास्त के बाद पीपल वृक्ष के पास सरसों तेल का दीप जलाएं. मान्यता है कि, पीपल में देवताओं और पितरों का वास होता है. इसलिए पीपल वृक्ष की पूजा करने से देवता और पितृ का आशीर्वाद मिलता है.
सेवा भाव करना न भूलें- अमावस्या के दिन सेवा भाव दिखाएं. भूलकर भी बड़ों का अपमान न करें या अपशब्द न कहें. पशु-पक्षुओं के प्रति भी सेवा भाव दिखाते हुए गाय, कुत्ते और पक्षियों के लिए अन्न-जल की व्यवस्था करें.
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