Shri Navgrah Pidahar Stotra: होलाष्टक शुरू, करें नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ, उग्र ग्रह होंगे शांत

Feb 25, 2026 - 11:16
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Shri Navgrah Pidahar Stotra: होलाष्टक शुरू, करें नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ, उग्र ग्रह होंगे शांत

Holashtak 2026 Shri Navgrah Pidahar Stotra: फाल्गुन मास में होली से पहले आने वाले 8 दिनों के समय को होलाष्टक कहा जाता है. होलाष्ठ के आठ दिनों की अवधि विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि के लिए शुभ नहीं मानी जाती है. इस साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो चुका है और 3 मार्च को समाप्त होगा.

ज्योतिष के अनुसार होलाष्टक के समय ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल रहती है. ग्रहों के उग्र होने के कारण मानसिक तनाव, विवाद, आर्थिक रुकावट और स्वास्थ्य संबंधी जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए इस समय नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करना लाभकारी हो सकता है.

नवग्रह पीड़ाहर स्त्रोत महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जो ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति और पीड़ा को दूर करता है. इसमें हर श्लोक के द्वारा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, शुक्र, शनि, राहु जैसे ग्रहों की पीड़ा को कम करने की प्रार्थना की गई है. मान्यता है कि, होलाष्टक के समय ग्रह उग्र होते हैं और नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं. इसलिए होलाष्टक की अवधि में आप भी इसका पाठ कर सकते हैं.  

नवग्रह पीड़ाहर स्त्रोत हिंदी अर्थ सहित (Shri Navgrah Pidahar Stotra in Hindi)

ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः। विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे रविः ॥1॥
अर्थ-ग्रहों में पहले परिगणित, अदिति पुत्र और विश्व के रक्षक सूर्य विषम स्थानजनित मेरी पीड़ा का हरण करें ।।1।।

रोहिणीशः सुधांशुश्च सुधागात्रः सुधाशनः। विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे विधुः ॥2॥
अर्थ-दक्षकन्या नक्षत्र रूपा देवी रोहिणी के स्वामी, अमृतमय स्वरूप वाले, अमतरूपी शरीर वाले और अमृत का पान कराने वाले चंद्रमा विषम स्थानजनित मेरी पीड़ा का हरण करें ।।2।।

भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत्सदा। वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीड़ां हरतु मे कुजः ॥3॥
अर्थ-भूमि के पुत्र, महान तेजस्वी, वृष्टि करने वाले तथा वृष्टि का हरण करने वाले मंगल मेरी पीड़ा का हरण करें ।।3।।

उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युतिः। सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीड़ां हरतु मे बुधः ॥4॥
अर्थ-महान द्युति से संपन्न, सूर्य के प्रिय, विद्वान और चन्द्रमा पुत्र बुध मेरी पीड़ा का निवारण करें ।।4।।

देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः। अनेकशिष्यसम्पूर्णः पीड़ां हरतु मे गुरुः ॥5॥
अर्थ-सर्वदा लोक कल्याण में निरत, देवताओं के मंत्री, विशाल नेत्रों वाले और अनेक शिष्यों से युक्त बृहस्पति मेरी पीड़ा का हरण करें ।।5।।

दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामतिः। प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीड़ां हरतु मे भृगुः ॥6॥
अर्थ-दैत्यों के मंत्री और गुरुओं जीवन देने वाले, तारा ग्रहों के स्वामी, बुद्धि से संपन्न शुक्र मेरी पीड़ा का हरण करें ।।6।।

सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः। मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु मे शनिः ॥7॥
अर्थ-सूर्य पुत्र, दीर्घ देह, विशाल नेत्र, मंद गति की चाल, शिव के शिष्य और प्रसन्नात्मा शनि मेरी पीड़ा का निवारण दूर करें ।।7।।

अनेक रूपवर्णैश्च शतशोऽथ सहस्रशः। उत्पातरूपो जगतां पीड़ां हरतु मे तमः ॥8॥
अर्थ-विविध रूप और वर्ण वाले, सैकड़ों-हजारों आंखों वाले, जगत के लिए उत्पातस्वरूप, तमोमय राहु मेरी पीड़ा का हरण करें ।।8।।

महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबलः। अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीड़ां हरतु मे शिखी ॥9॥
अर्थ-महान शिरा  से संपन्न, विशाल मुख और बड़े दांत, बिना शरीर और ऊपर की ओर केश वाले केतु मेरी पीड़ा का हरण करें।।9।।

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