Bhaum Pradosh Vrat 2025: भौम प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि, जानें महत्व और लाभ

Dec 2, 2025 - 12:44
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Bhaum Pradosh Vrat 2025: भौम प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि, जानें महत्व और लाभ

Bhaum Pradosh Vrat 2025: 2 दिसंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह का भौम प्रदोष व्रत किया जाएगा. ये शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत होगा, इसका महत्व दोगुना बताया जा रहा है क्योंकि मंगलवार के दिन जब त्रयोदशी पड़ती है तो शिव संग हनुमान जी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.

भौम प्रदोष व्रत मांगलिक दोष से मुक्ति के लिए बहुत कारगर माना गया है. इस दिन शिव जी की उपासना प्रदोष काल में करें और कथा का पाठ जरुर करें. मान्यता है कलियुग में एक मात्र प्रदोष व्रत करने वालों के सारे दोष दूर हो जाते हैं. जानें भौम प्रदोष व्रत की कथा और पूजा विधि.

भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • इस दिन शाम को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें, बिल्वपत्र, अक्षत, चंदन, पुष्प और धूप-दीप से भगवान शिव की पूजा करें. साथ ही माता पार्वती की भी आराधना करें.
  •  महामृत्युंजय मंत्र का 11 या 108 बार जाप भी कर सकते हैं. या शिव चालीसा या रुद्राष्टक पाठ करें.
  • मसूर की दाल, गुड़, तांबा, लाल वस्त्र आदि का दान करना पुण्यदायी होता है.
  •  इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ, लाल वस्त्र पहनना और सिंदूर अर्पण करने से मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं, ऐसी मान्यता है.

भौम प्रदोष व्रत कथा

सूतजी बोले- मंगलवार का दिन व्याधियों का नाशक है. इस दिन त्रयोदशी  व्रत में एक समय व्रती को गेहूं और गुड़ का भोजन करना चाहिए. इस व्रत के करने से मनुष्य सभी पापों व रोगों से मुक्त हो जाता है इसमें किसी प्रकार का संशय नहीं है. एक नगर में एक बुढ़िया रहती थी, जिसके मंगलिया नाम का एक पुत्र था.

वृद्धा  प्रत्येक मंगलवार को व्रत रखती थी, इस दिन न तो घर लीपती थी और न ही मिट्टी खोदती थी. एक दिन मंगल देवता ने वृद्धा की परीक्षा लेने का विचार किया. साधु का वेष धरकर हनुमान जी वृद्धा की चौखट पर जाकर बोले कि 'है कोई है जो मेरी इच्छा पूरी करे, बुढ़़िया ये सुनकर बाहर आई और बोली क्या आज्ञा है महाराज.

मैं बहुत भूखा हूं भोजन करूंगा, तू थोड़ी सी जमीन लीप दे' वृद्धा बड़ी दुविधा में पड़ गई। अंत में हाथ जोड़कर प्रार्थना की- हे महाराज! लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त जो काम आप कहें वह मैं करने को तैयार हूं.

साधु ने फिर कहा- अपने बेटे को औंधा मुंह लिटाओ में उसकी पीठ पर भोजन पकाऊंगा. बुढ़िया ने मंगल देवता का स्मरण करते हुए लड़के को औंधा लिटा दिया और उसकी पीठ पर अंगीठी रख दी. साधु ने जब भोजन बना लिया तब बुढ़िया से कहा कि वह मंगलिया को पुकारे ताकि वह भी आकर भोग लगा ले. वृद्धा के आंख में आंसू थे, उसने कहा अब कहां से बुलाउं उसे, आपने उसकी पीठ पर भोजन तो पका लिया.

साधु के बार बार कहने पर बुढ़िया ने मांगलिया को पुकारा. थोड़ी देर बाद हंसता हुआ मांगलिया घर में दौड़ा आया. मंगलिया को जीता जागता देखकर वृद्धा हैरान रह गई. इसके बाद साधु महाराज ने उसे अपने असली रूप में दर्शन दिए. मंगल देव ने कहा कि उसका व्रत सफल हुआ.

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