Srinagar: 13 जुलाई शहीद दिवस पर पाबंदी! फारूक अब्दुल्ला को नहीं मिली इजाजत, महबूबा मुफ्ती ने दी प्रतिक्रिया

Jul 13, 2025 - 09:46
Jul 13, 2025 - 17:24
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Srinagar: 13 जुलाई शहीद दिवस पर पाबंदी! फारूक अब्दुल्ला को नहीं मिली इजाजत, महबूबा मुफ्ती ने दी प्रतिक्रिया

13 जुलाई 1931 को जम्मू-कश्मीर में डोगरा शासक हरि सिंह के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान श्रीनगर जेल के बाहर उनकी फौज की गोलीबारी में 22 लोगों की मौत हो गई थी. नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) इस दिन को ‘शहीदी दिवस’ के रूप में मनाना चाहती है लेकिन जिला प्रशासन ने कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी. 

NC ने आवेदन कर अपने अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और अन्य वरिष्ठ नेताओं की ओर से नवहट्टा स्थित नक्शबंद साहिब कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि देने की योजना जताई थी. लेकिन शनिवार (12 जुलाई) को श्रीनगर के जिलाधिकारी ने इसे खारिज कर दिया.

श्रीनगर पुलिस ने जारी किया संदेश

श्रीनगर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सार्वजनिक परामर्श जारी करते हुए बताया कि 13 जुलाई को ख्वाजा बाजार, नवहट्टा की ओर जाने वाले सभी लोगों को अनुमति नहीं दी गई है. साथ ही प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और किसी भी प्रकार के उल्लंघन से बचने की अपील की गई. पीटीआई के अनुसार, पुलिस ने चेतावनी दी कि आदेशों के उल्लंघन पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी. एनसी ने प्रशासन के इस कदम को ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया है.

13 जुलाई कोई साधारण तारीख नहीं है- NC

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने X पर लिखा, "13 जुलाई कोई साधारण तारीख नहीं है, यह गरिमा, न्याय और अधिकारों की मांग में दिए गए बलिदानों की याद दिलाती है." उन्होंने आगे कहा कि कश्मीर के लोग अपने शहीदों को शांतिपूर्वक, सम्मानपूर्वक और अडिग भावना के साथ याद करते रहेंगे. उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से पहले यह दिन सार्वजनिक अवकाश हुआ करता था, लेकिन 2020 में इसे राजपत्रित छुट्टियों की सूची से हटा दिया गया था.

महबूबा मुफ्ती ने स्पीकर पर साधा निशाना

वहीं इस मुद्दे पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भी तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथेर ने पीडीपी द्वारा 13 जुलाई को छुट्टी घोषित करने संबंधी प्रस्ताव को पहले तो नकार दिया फिर इस बात से इनकार भी कर लिया, जबकि वही अध्यक्ष पहले दो सरकारी प्रस्तावों को मंजूरी दे चुके हैं. महबूबा ने X पर लिखा, "जब अध्यक्ष ने अपने विवेकाधिकार से पहले दो प्रस्तावों को स्वीकृति दी, तो फिर शहीदों को सम्मान देने वाले प्रस्ताव को क्यों रोका गया? लोग खुद तय करें."

पिछले साल, कई नेताओं को कब्रिस्तान जाने से रोकने के लिए नज़रबंद कर दिया गया था। इस बीच, जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने कहा कि विपक्षी पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती का यह आरोप कि 13 जुलाई को छुट्टी की घोषणा संबंधी पार्टी के प्रस्ताव को सदन में पेश नहीं होने दिया गया था.

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