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<title>सच्ची बात सच्चाई के साथ &#45; : टेक्नोलॉजी</title>
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<description>सच्ची बात सच्चाई के साथ &#45; : टेक्नोलॉजी</description>
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<dc:rights>Copyright © 2024&#45;25 Barwara Patrika , All Rights Reserved</dc:rights>

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<title>iPhone 16 Pro Vs Galaxy S24 Ultra: 2026 में कौन&#45;सा फ्लैगशिप फोन है आपके लिए बेस्ट? कंपैरिजन से समझें</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 16 Pro Vs Samsung Galaxy S24 Ultra: स्मार्टफोन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और RAM समेत कई कंपोनेंट्स महंगे होते जा रहे हैं. ऐसे में अब लोग हर साल नया फोन खरीदने से पहले कई बार सोच रहे हैं. यही वजह है कि पुराने फ्लैगशिप स्मार्टफोन भी 2026 में काफी आकर्षक विकल्प बन चुके हैं.
ऐसे ही दो प्रीमियम फोन हैं Apple iPhone 16 Pro और Samsung Galaxy S24 Ultra. दोनों डिवाइस एक साल से ज्यादा पुराने होने के बावजूद शानदार कैमरा, दमदार परफॉर्मेंस और प्रीमियम डिजाइन के साथ आज भी टॉप फ्लैगशिप एक्सपीरियंस देते हैं. आइिए जानते हैं कि 2026 में इनमें से कौन-सा फोन खरीदना ज्यादा समझदारी होगी.
डिजाइन और डिस्प्ले
Apple iPhone 16 Pro में 6.3 इंच का LTPO Super Retina XDR OLED डिस्प्ले मिलता है. फोन का डिजाइन कॉम्पैक्ट है जिससे इसे एक हाथ से इस्तेमाल करना काफी आसान लगता है. Apple ने इसमें टाइटेनियम फ्रेम और Ceramic Shield प्रोटेक्शन दिया है. साथ ही इसकी पीक ब्राइटनेस 2000 निट्स तक जाती है.
दूसरी तरफ Samsung Galaxy S24 Ultra बड़े 6.8 इंच Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले के साथ आता है. इसमें QHD+ रेजोल्यूशन, Gorilla Armor प्रोटेक्शन और एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग दी गई है. इसकी पीक ब्राइटनेस 2600 निट्स तक पहुंचती है जिससे तेज धूप में भी स्क्रीन ज्यादा साफ दिखाई देती है.
अगर आप छोटा और आसानी से पकड़ने वाला फोन चाहते हैं तो iPhone बेहतर लगेगा. लेकिन वीडियो देखने, गेमिंग और मल्टीटास्किंग के लिए Samsung का बड़ा डिस्प्ले ज्यादा शानदार अनुभव देता है.
परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर
Apple iPhone 16 Pro में Apple का A18 Pro चिपसेट मिलता है जो iOS 18 पर चलता है और आगे iOS 26.5 तक अपडेट हो सकता है. गेमिंग और रोजमर्रा के इस्तेमाल में इसकी परफॉर्मेंस आज भी बेहद स्मूद मानी जाती है.
वहीं Samsung Galaxy S24 Ultra Qualcomm Snapdragon 8 Gen 3 प्रोसेसर और One UI 8.5 के साथ आता है. Samsung इस फोन के लिए लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट और 7 Android अपडेट्स देने का वादा भी कर चुका है.
कैमरा में कौन आगे?
कैमरा के मामले में दोनों फोन अपनी-अपनी खासियत रखते हैं. Apple iPhone 16 Pro Dolby Vision रिकॉर्डिंग, ProRes वीडियो सपोर्ट और स्पेशल वीडियो कैप्चर जैसे फीचर्स के साथ आता है. खासतौर पर सोशल मीडिया वीडियो और सिनेमैटिक रिकॉर्डिंग में iPhone का आउटपुट काफी प्रोफेशनल और नैचुरल लगता है.
दूसरी ओर Samsung Galaxy S24 Ultra में 200MP का प्राइमरी कैमरा, ड्यूल टेलीफोटो लेंस और शानदार जूम क्षमता मिलती है. दूर की फोटो खींचने और अलग-अलग फोटोग्राफी स्टाइल के लिए Samsung ज्यादा वर्सेटाइल साबित होता है.
बैटरी और कीमत
बैटरी के मामले में Samsung साफ बढ़त बनाता है. Galaxy S24 Ultra में 5000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है जबकि iPhone 16 Pro में 3582mAh बैटरी मिलती है.
फिलहाल इनकी कीमतें कुछ इस प्रकार हैं.
Apple iPhone 16 Pro की कीमत लगभग ₹1,03,990 है.
Samsung Galaxy S24 Ultra की कीमत करीब ₹1,19,950 है.
आखिर कौन-सा फोन खरीदना चाहिए?
अगर आप पहले से Apple ecosystem जैसे MacBook या iPad इस्तेमाल करते हैं तो iPhone 16 Pro आज भी 2026 में शानदार विकल्प साबित हो सकता है. इसकी परफॉर्मेंस, कैमरा क्वालिटी और सॉफ्टवेयर एक्सपीरियंस काफी भरोसेमंद हैं. लेकिन यदि आप बड़ा डिस्प्ले, लंबी बैटरी लाइफ, S Pen सपोर्ट और ज्यादा एडवांस कैमरा फीचर्स चाहते हैं तो Galaxy S24 Ultra ज्यादा कम्प्लीट फ्लैगशिप पैकेज नजर आता है.
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<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>mAadhaar ऐप होने जा रहा बंद! जानिए नए Aadhaar App पर कैसे करें शिफ्ट, वरना बाद में पड़ेगा पछताना</title>
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<description><![CDATA[ Aadhaar App: भारत में आधार सेवाओं को संभालने वाली संस्था Unique Identification Authority of India यानी UIDAI ने साफ कर दिया है कि पुराना mAadhaar ऐप जल्द बंद होने वाला है. इसकी जगह अब नया Aadhaar App लाया गया है जिसे पहले से ज्यादा तेज, सुरक्षित और आसान बताया जा रहा है. UIDAI ने अपने आधिकारिक X अकाउंट पर जानकारी देते हुए कहा कि नया प्लेटफॉर्म यूजर्स को स्मार्ट, फास्ट और ज्यादा सिक्योर डिजिटल अनुभव देगा. नया ऐप अब Android और iPhone दोनों के लिए उपलब्ध है.
नए Aadhaar App में क्या मिलेगा खास?
नए Aadhaar App में कई ऐसे फीचर्स जोड़े गए हैं जो यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को पहले से बेहतर बनाते हैं. सबसे बड़ा बदलाव QR Code आधारित Aadhaar शेयरिंग फीचर है. इसकी मदद से यूजर बिना पूरा आधार नंबर दिखाए अपनी पहचान वेरिफाई कर सकते हैं.
ऐप में Selective Share नाम का नया विकल्प भी दिया गया है. इसके जरिए यूजर तय कर सकते हैं कि वेरिफिकेशन के दौरान कौन-सी जानकारी शेयर करनी है और कौन-सी छिपानी है. इससे डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी दोनों बेहतर होती हैं.
इसके अलावा ऐप ऑफलाइन QR वेरिफिकेशन को भी सपोर्ट करता है. यानी इंटरनेट के बिना भी अधिकृत टर्मिनल पर QR स्कैन करके पहचान सत्यापित की जा सकेगी. UIDAI के मुताबिक नया प्लेटफॉर्म 13 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है ताकि अलग-अलग राज्यों के लोगों को इस्तेमाल में आसानी हो.
बायोमेट्रिक लॉक से बढ़ेगी सुरक्षा
नए ऐप में बायोमेट्रिक लॉक फीचर भी दिया गया है. यूजर अब सीधे ऐप के जरिए फिंगरप्रिंट, फेस और आइरिस ऑथेंटिकेशन को लॉक कर सकते हैं ताकि किसी तरह के गलत इस्तेमाल से बचा जा सके. जरूरत पड़ने पर यही लॉक बाद में ऐप के माध्यम से हटाया भी जा सकता है.
एक ऐप में जोड़ सकेंगे परिवार के सदस्य
Aadhaar App में फैमिली प्रोफाइल फीचर भी जोड़ा गया है. इसके तहत एक अकाउंट में अधिकतम 5 परिवार के सदस्यों को जोड़ा जा सकता है. इससे एक ही जगह से कई आधार प्रोफाइल मैनेज करना आसान हो जाएगा. हालांकि UIDAI ने चेतावनी दी है कि अगर लिंक मोबाइल नंबर या डिवाइस का एक्सेस खो जाता है तो कुछ समय के लिए आधार सेवाओं तक पहुंच रुक सकती है.
नए Aadhaar App को कैसे करें सेटअप?
सबसे पहले Google Play Store या Apple App Store से नया Aadhaar App डाउनलोड करें. इसके बाद ऐप खोलकर अपनी पसंदीदा भाषा चुनें. अब आधार से लिंक मोबाइल नंबर या किसी दूसरे नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करें. फिर अपना 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज करें और OTP वेरिफिकेशन पूरा करें. इसके बाद सही रोशनी में फेस ऑथेंटिकेशन करना होगा. आखिर में 6 अंकों का ऐप पासवर्ड बनाकर सेटअप पूरा किया जा सकता है.
पुराने mAadhaar यूजर्स को क्या करना होगा?
UIDAI ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि पुराने mAadhaar ऐप का डेटा अपने-आप नए ऐप में ट्रांसफर होगा या नहीं. ऐसे में संभावना है कि मौजूदा यूजर्स को नए ऐप में प्रोफाइल दोबारा मैन्युअली सेट करनी पड़ सकती है.
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<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:49 +0530</pubDate>
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<title>Solar Rooftop vs Solar Panels: दोनों में कितना अंतर और क्या हैं फायदे&#45;नुकसान? यहां जानें सारी बातें</title>
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<description><![CDATA[ Solar Rooftop Vs Solar Panels: पिछले कुछ सालों से सोलर एनर्जी की तरफ लोगों का रुझान बढ़ा है और यही वजह है कि अब गांव हो या शहर, हर जगह सोलर पैनल नजर आने लगे हैं. घरों के साथ-साथ लोग कमर्शियल जरूरतों के लिए भी सोलर पावर यूज कर रहे हैं. अगर आप भी सोलर एनर्जी सिस्टम लगवाने की सोच रहे हैं तो इसके लिए बाजार में दो तरह के ऑप्शन मौजूद हैं. आप सोलर पैनल के अलावा सोलर रूफ टाइल्स को भी सेलेक्ट कर सकते हैं. आज हम आपको इन दोनों के बीच के अंतर और फायदे-नुकसान के बारे में बताएंगे.
सोलर रूफ टाइल्स क्या होती हैं?
इन्हें सोलर टाइल्स भी कहा जाता है. ये छत पर लगाने में यूज होने वाली टाइल्स होती हैं, जिनमें फोटोवॉल्टिक (PV) सेल्स लगी होती हैं. सोलर पैनल की तरह ही सनलाइट से ही पावर जनरेट करती हैं. सोलर टाइल्स को फर्श में ही लगा दिया जाता है. इससे फर्श की सुंदरता भी बढ़ती है और इसके लिए पैनल की तरह अलग से स्पेस की जरूरत नहीं पड़ती. यानी ये टाइल्स आपकी बिल्डिंग को प्रोटेक्ट करने के साथ-साथ सोलर पावर भी प्रोड्यूस करेंगी.
फायदे

ये फर्श के डिजाइन में ही इंटीग्रेट हो जाती है, जिससे फर्श की सुंदरता बढ़ती है.
इनमें यूज होने वाला मैटेरियल काफी ड्यूरेबल होता है, जिससे ये सालों-साल चलती हैं.
इन्हें यूज करने के लिए पैनल की तरह अतिरिक्त स्पेस नहीं चाहिए. ये कम स्पेस वाले घरों पर खूब काम आ सकती हैं.

नुकसान

इनकी अपफ्रंट कॉस्ट पैनल से ज्यादा है. यानी इन्हें लगाने के लिए पैनल से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा.
पुराने घरों पर इन्हें लगाना थोड़ा मुश्किल होता है और इनके इंस्टॉलेशन में टाइम भी ज्यादा लगता है.
इनकी एफिशिएंसी सोलर पैनल के मुकाबले काफी कम है.&amp;nbsp;

सोलर पैनल
सोलर पैनल सोलर एनर्जी टेक्नोलॉजी की सबसे कॉमन फॉर्म है. ये इंडिविजुअल सोलर सेल्स से बने होते हैं, जो सनलाइट को बिजली में बदल देते हैं. इन्हें छत या स्टैंड लगाकर माउंट किया जाता है. इन्हें अलग-अलग साइज और कॉन्फिगरेशन में खरीदा जा सकता है. इन्हें किसी भी तरह की छत पर लगाया जा सकता है. मार्केट में इनके बहुत ऑप्शन है और ज्यादा एक्सेसिबल हैं.
फायदे&amp;nbsp;

सोलर पैनल सालों से यूज हो रहे हैं. इस तरह यह एक प्रूवन टेक्नोलॉजी है और अलग-अलग कीमत पर इसके कई तरह के ऑप्शन अवेलेबल हैं.
सोलर पैनल की एफिशिएंसी ज्यादा होती है. इस कारण घरों से लेकर बिजनेसेस तक की एनर्जी नीड्स के लिए इन्हें यूज किया जा रहा है.
इसे इंस्टॉल करने की लागत कम है और इसमें समय भी कम लगता है.&amp;nbsp;

नुकसान

इन्हें छत के ऊपर लगाना पड़ता है और ये दूर से नजर आते हैं. इससे बिल्डिंग का एस्थेटिक खराब हो सकता है.
सोलर पैनल माउंट करने के लिए स्ट्रक्चर बनानी पड़ती है, जिसके लिए काफी स्पेस चाहिए.
इन्हें समय-समय पर सफाई और मैंटेनेंस की जरूरत पड़ती है.

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<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>जेब में फट सकता है आपका Smartphone! गर्मी में Phone Cover में रखी ये 5 चीजें बना सकती हैं चलता&#45;फिरता बम</title>
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<description><![CDATA[ Tech Tips: गर्मी का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि स्मार्टफोन के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच अगर आप अपने फोन कवर में कुछ गलत चीजें रख रहे हैं तो आपका स्मार्टफोन ओवरहीट होकर खराब भी हो सकता है. कई मामलों में बैटरी फूलने, फोन गर्म होकर बंद होने और यहां तक कि ब्लास्ट होने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं.
अक्सर लोग सुविधा के लिए फोन कवर के अंदर नोट, कार्ड या दूसरी छोटी चीजें रख लेते हैं लेकिन यही आदत गर्मियों में बड़ा खतरा बन सकती है. आइए जानते हैं वे 5 चीजें जिन्हें भूलकर भी फोन कवर में नहीं रखना चाहिए.
नकद पैसे और कागज
बहुत से लोग फोन कवर के पीछे पैसे या बिल दबाकर रखते हैं. लेकिन कागज गर्मी को रोकता है और फोन से निकलने वाली हीट बाहर नहीं निकल पाती. इससे डिवाइस तेजी से गर्म होने लगता है. लगातार ओवरहीटिंग बैटरी पर दबाव डालती है जिससे फोन की लाइफ कम हो सकती है.
एटीएम और क्रेडिट कार्ड
फोन कवर में कार्ड रखना आजकल आम बात हो गई है. लेकिन स्मार्टफोन लगातार गर्म होता रहता है और ज्यादा तापमान कार्ड की मैग्नेटिक स्ट्रिप या चिप को नुकसान पहुंचा सकता है. कई बार इससे कार्ड काम करना बंद कर देते हैं. साथ ही मोटा कवर फोन की कूलिंग को भी प्रभावित करता है.
धातु की चीजें या चाबी
कुछ लोग फोन कवर में छोटी चाबी, सिम पिन या धातु की पतली चीजें रख लेते हैं. यह बेहद खतरनाक हो सकता है. धातु गर्मी को तेजी से बढ़ाती है और अगर वह चार्जिंग पोर्ट या बैटरी एरिया के संपर्क में आ जाए तो शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बढ़ सकता है.
पुरानी रसीदें और प्लास्टिक पेपर
रसीदें या प्लास्टिक कार्ड जैसी चीजें फोन के पीछे एयरफ्लो रोक देती हैं. गर्मी के मौसम में फोन को पहले ही ज्यादा कूलिंग की जरूरत होती है. ऐसे में बंद जगह में हीट फंसने लगती है और फोन जरूरत से ज्यादा गर्म हो जाता है. लगातार ऐसा होने पर बैटरी फूल सकती है.
मोटा और सस्ता Phone Cover
सिर्फ कवर के अंदर रखी चीजें ही नहीं बल्कि खराब क्वालिटी का कवर भी खतरा बढ़ा सकता है. मोटे और सस्ते प्लास्टिक कवर गर्मी को बाहर नहीं निकलने देते. खासकर गेमिंग, वीडियो रिकॉर्डिंग या फास्ट चार्जिंग के दौरान फोन तेजी से गर्म होता है. ऐसे में हीट फंसने से फोन की परफॉर्मेंस और बैटरी दोनों प्रभावित हो सकते हैं.
गर्मी में Smartphone को सुरक्षित रखने के आसान तरीके
गर्मी के मौसम में फोन को सीधे धूप में रखने से बचें. चार्जिंग के दौरान गेमिंग या भारी ऐप्स का इस्तेमाल न करें. अगर फोन जरूरत से ज्यादा गर्म लगे तो तुरंत कवर हटाकर उसे कुछ देर ठंडा होने दें. साथ ही हमेशा अच्छी क्वालिटी का पतला और हीट-रेसिस्टेंट कवर इस्तेमाल करें. थोड़ी सी लापरवाही आपका महंगा स्मार्टफोन खराब कर सकती है. इसलिए आज ही अपने फोन कवर की जांच करें और इन चीजों को तुरंत बाहर निकाल दें.
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<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>सस्ता होने का इंतजार कर रहे हैं आपका ड्रीम Smartphone? शायद अब कभी न मिले वो मौका</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Prices: अगर आप भी हर साल नए Smartphone के लॉन्च के बाद यह सोचकर इंतज़ार करते हैं कि कुछ महीनों बाद सस्ता हो जाएगा तो अब यह रणनीति शायद काम न आए. भारत में Smartphone मार्केट तेजी से बदल रहा है और 2026 में हालात ऐसे बन गए हैं कि कई Phones लॉन्च के महीनों बाद भी महंगे बने हुए हैं. कुछ Models की कीमत तो समय के साथ और बढ़ गई है.
क्यों महंगे होते जा रहे हैं Smartphones?
इसकी सबसे बड़ी वजह AI टेक्नोलॉजी की बढ़ती डिमांड मानी जा रही है जिन Memory Chips और Components का इस्तेमाल Smartphones में होता है, वही अब AI Servers और Data Centres में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं. AI कंपनियां इन Chips को भारी मात्रा में खरीद रही हैं जिसके कारण Smartphone कंपनियों के लिए Components काफी महंगे हो गए हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ Memory Components की कीमत कई गुना तक बढ़ चुकी है. इसका सीधा असर Smartphone निर्माण लागत पर पड़ा है और कंपनियों के पास या तो कीमत बढ़ाने या Features कम करने का ही विकल्प बचा है.
अब Phones लॉन्च के बाद जल्दी सस्ते नहीं हो रहे
पहले ऐसा होता था कि ₹30,000 का Phone कुछ महीनों बाद Sale और Offers में ₹24,000-25,000 तक मिल जाता था. लेकिन अब यह ट्रेंड टूटता दिख रहा है. Industry Analysts का कहना है कि Brands अब लंबे समय तक कीमतें ऊंची बनाए रख रहे हैं.
कई Smartphones की कीमतें लॉन्च के बाद घटने की बजाय बढ़ी हैं. खासतौर पर Budget और Mid-range Segment में लगातार Price Hike देखने को मिल रही है. Experts के अनुसार 2026 की शुरुआत से कई Models के दाम 30% से 40% तक बढ़ चुके हैं.
Budget Smartphones में हो रही है कटौती
कीमत कंट्रोल करने के लिए कई कंपनियां अब पुराने Phones को नए नाम से दोबारा लॉन्च कर रही हैं. कुछ Brands कैमरा क्वालिटी, Storage और Features में कटौती भी कर रहे हैं. यहां तक कि कुछ नए Budget Phones में 5G हटाकर फिर से 4G दिया जा रहा है ताकि लागत कम की जा सके. यानी अब कम कीमत में पहले जैसे दमदार Features मिलना मुश्किल होता जा रहा है.
Premium Brands पर कम असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि Premium Smartphone Brands इस संकट से बेहतर तरीके से निपट रहे हैं. उदाहरण के तौर पर Apple और Samsung जैसी कंपनियों के पास लंबे समय के Supply Agreements और मजबूत Financial Backup है. वहीं Budget Segment पर निर्भर Brands जैसे Xiaomi, Realme, OPPO और vivo ज्यादा दबाव में हैं.
क्या अब Smartphone खरीदने के लिए Sale का इंतज़ार बेकार है?
Experts का मानना है कि आने वाले समय में बड़े Discounts कम देखने को मिल सकते हैं. कंपनियां Exchange Offers, Cashback और EMI जैसे विकल्प तो देती रहेंगी लेकिन भारी Price Drop अब पहले जितना आम नहीं रहेगा.
अगर आपको नया Phone सच में चाहिए तो सिर्फ &amp;ldquo;सस्ता होने&amp;rdquo; का इंतज़ार करना नुकसानदायक भी हो सकता है. क्योंकि जिस Phone को आप बाद में खरीदने की सोच रहे हैं वह आने वाले महीनों में और महंगा भी हो सकता है.
बदल रही है Smartphone खरीदने की आदत
भारत में Smartphone Market अब ऐसे दौर में पहुंच चुका है जहां लोग जरूरत के हिसाब से खरीदारी करने लगे हैं, ना कि सिर्फ Sale और Discounts के भरोसे. बढ़ती AI Demand, Memory Crisis और महंगे Components ने पूरे बाजार की तस्वीर बदल दी है.
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<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>पेट्रोल पंप वाली मशीन में कैसे गड़बड़ी करते हैं कर्मचारी? इस टेक्निक से पकड़ सकते हैं झोल</title>
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<description><![CDATA[ Petrol Pump Fraud: पेट्रोल पंप पर फ्रॉड की शिकायतें अकसर सामने आती रहती है. ज्यादातर लोगों को शिकायत होती है कि उन्हें पैसे के बदले पूरा तेल नहीं मिलता. इसके अलावा मिलावट को लेकर भी लोगों को शिकायतें रहती हैं. इस तरह के फ्रॉड से बचने के लिए खुद का अलर्ट रहना बहुत जरूरी है. फिर भी कई बार पंप के कर्मचारी बातों में उलझाकर या दूसरे तरीकों से गड़बड़ करते हुए पाए जाते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि पेट्रोल पंप की मशीन में कैसे गड़बड़ होती है और ऐसे फ्रॉड का कैसे पता लगाएं.
कैसे होती है गड़बड़?
चिप की ली जाती है मदद- रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई बार पंप के कर्मचारी मशीनों में चिप लगा देते है. रिमोट से कंट्रोल होने वाली इस चिप की मदद से मीटर में रीडिंग सही चलती है, लेकिन गाड़ी में तेल कम चलता है. इस कारण ग्राहक को पैसे पूरे देने पड़ते हैं, लेकिन इसके बदले उसे पूरा पेट्रोल या डीजल नहीं मिल पाता.&amp;nbsp;
जीरो स्कैम- यह पेट्रोल पंप पर होने वाले फ्रॉड का सबसे आसान और कॉमन तरीका है. इसमें कर्मचारी मशीन को जीरो पर सेट किए बिना ही तेल भरना शुरू कर देते हैं. इससे पहली की रीडिंग भी आपके बिल में जुड़ जाती है, जिससे आपको ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं, जबकि आपकी गाड़ी में उतना तेल नहीं भरा गया है.
जंप ट्रिक- फ्रॉड का यह तरीका भी काफी चलन में है. इसमें मीटर की रीडिंग एकदम उछल जाती है. यानी जिस डिस्प्ले पर आपको कीमत दिखाई जाती है वह 0 से शुरू होने के बाद 2, 3, 4, 5... के हिसाब से आगे नहीं बढ़ता बल्कि सीधा 10, 20, 30 पर चला जाता है. इससे तेल कम भरा जाता है, लेकिन रकम पूरी ले ली जाती है. इसमें ग्राहक को 10 लीटर तेल डलवाने पर लगभग 100 रुपये तक का नुकसान हो सकता है.&amp;nbsp;
क्या हैं फ्रॉड से बचने की टेक्निक?

पेट्रोल पंप पर तेल भरवाते समय गाड़ी से उतर जाएं और मशीन के पास जाकर रीडिंग पर नजर रखें.
अगर कर्मचारी आपको बात लगाने की कोशिश करते हैं तो उनकी हरकतों पर नजर रखें.
अगर मशीन अचानक से जंप करती है तो वहां रखें माप से तेल की मात्रा जांचें.
अगर आपको तेल में मिलावट का शक है तो फिल्टर पेपर टेस्ट की मांग करें. मिलावट होने पर पेपर पर धब्बा रह जाएगा.&amp;nbsp;
अगर आपको मिलावट या माप में गड़बड़ लग रही है तो संबंधित कंपनी की हेल्पलाइन, मोबाइल ऐप या वेबसाइट पर शिकायत की जा सकती है.

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<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या समय के साथ कमजोर हो जाता है स्मार्टफोन का कैमरा? पूरी सच्चाई जानकर रह जाएंगे दंग</title>
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<description><![CDATA[ क्या समय के साथ कमजोर हो जाता है स्मार्टफोन का कैमरा? पूरी सच्चाई जानकर रह जाएंगे दंग ]]></description>
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<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब बिना हाथ लगाए चलेंगे Apps, Google का नया AI फीचर Android यूजर्स को कर देगा हैरान</title>
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<description><![CDATA[ Google Contextual Suggestions: Google जल्द ही Android स्मार्टफोन्स के लिए एक नया AI फीचर पेश करने की तैयारी में है जिसका नाम Contextual Suggestions बताया जा रहा है. यह फीचर सिर्फ ऐप सजेस्ट करने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यूजर की रोजमर्रा की आदतों और फोन इस्तेमाल करने के तरीके को समझकर पहले से ही जरूरी चीजें सामने लाने की कोशिश करेगा. यानी आने वाले समय में आपका स्मार्टफोन सिर्फ तेज नहीं बल्कि ज्यादा समझदार भी हो सकता है.
हालांकि Google ने अभी तक इस फीचर का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है लेकिन Android 16 इस्तेमाल कर रहे कुछ यूजर्स को यह फीचर दिखाई देने लगा है. कंपनी की तरफ से इसे लेकर फिलहाल ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है जिससे माना जा रहा है कि इसकी टेस्टिंग चुपचाप शुरू हो चुकी है.
क्या है Contextual Suggestions फीचर?
Contextual Suggestions एक तरह का स्मार्ट AI असिस्टेंट है जो बैकग्राउंड में काम करेगा. यह आपके फोन इस्तेमाल करने के पैटर्न, लोकेशन, समय और पसंदीदा ऐप्स को समझकर जरूरत के हिसाब से सुझाव देगा. मान लीजिए आप एयरपोर्ट पहुंचते हैं तो फोन खुद ही बोर्डिंग पास दिखा सकता है. अगर आप जिम जाते हैं तो म्यूजिक प्लेलिस्ट पहले से तैयार मिल सकती है. ऑफिस जाने के समय नेविगेशन ऐप सामने आ सकता है या रोजमर्रा के कामों के दौरान पेमेंट ऐप और रिमाइंडर दिखाई दे सकते हैं. इसका मकसद यूजर को हर बार ऐप ढूंढने की जरूरत कम करना है.
Google के Magic Cue फीचर से मिलता-जुलता
यह नया फीचर काफी हद तक Google के Magic Cue सिस्टम से प्रेरित माना जा रहा है. फिलहाल Magic Cue केवल Pixel 10 सीरीज के कुछ डिवाइसेज तक सीमित है और AI की मदद से यूजर की गतिविधियों को समझकर काम करता है. लेकिन Contextual Suggestions को ज्यादा बड़े स्तर पर लाने की तैयारी दिखाई दे रही है. माना जा रहा है कि यह सिर्फ फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि दूसरे Android डिवाइसेज में भी आ सकता है.
पुराने Android Suggestions से कितना अलग?
Android स्मार्टफोन्स में पहले से App Actions और बेसिक ऐप प्रेडिक्शन जैसे फीचर्स मौजूद हैं लेकिन Contextual Suggestions उनसे ज्यादा एडवांस माना जा रहा है. पुराने सिस्टम केवल किसी एक ऐप या हाल की गतिविधि के आधार पर सुझाव देते थे जबकि नया AI फीचर कई अलग-अलग संकेतों और यूजर बिहेवियर को मिलाकर काम करेगा. इससे सुझाव ज्यादा सटीक और व्यक्तिगत हो सकते हैं.
Privacy को लेकर क्या कहा जा रहा है?
AI फीचर्स के साथ सबसे बड़ा सवाल हमेशा प्राइवेसी को लेकर उठता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Contextual Suggestions में प्रोसेस होने वाला डेटा डिवाइस के अंदर ही एन्क्रिप्टेड रहेगा. Google का दावा है कि यह जानकारी दूसरी ऐप्स के साथ शेयर नहीं की जाएगी.
हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि इसके पीछे कौन-सा AI मॉडल काम करेगा और डेटा प्रोसेसिंग का पूरा सिस्टम कैसे चलेगा. आने वाले समय में कंपनी इस पर और जानकारी दे सकती है.
कहां मिलेगा यह फीचर?
अगर यह फीचर आपके फोन में उपलब्ध हुआ, तो इसे Android Settings के अंदर Google Services या All Services सेक्शन में देखा जा सकता है. Pixel यूजर्स को यह विकल्प प्रोफाइल सेटिंग्स में मिलने की संभावना है. फिलहाल यह फीचर धीरे-धीरे रोलआउट हो रहा है इसलिए सभी यूजर्स तक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है.
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<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:47 +0530</pubDate>
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<title>Cooling हो रही गायब! फ्रिज इस्तेमाल करते वक्त भूलकर भी न करें ये गलतियां</title>
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<description><![CDATA[ Refrigerator Tips: गर्मी के मौसम में फ्रिज घर का सबसे जरूरी डिवाइस बन जाता है. लेकिन कई बार लोग शिकायत करते हैं कि फ्रिज पहले जैसी कूलिंग नहीं कर रहा, सामान जल्दी खराब होने लगा है या बिजली का बिल अचानक बढ़ गया है. अक्सर इसके पीछे कोई बड़ी तकनीकी खराबी नहीं बल्कि हमारी रोजमर्रा की कुछ गलत आदतें जिम्मेदार होती हैं. अगर समय रहते इन गलतियों को नहीं सुधारा गया तो फ्रिज की लाइफ भी कम हो सकती है.
बार-बार फ्रिज खोलना पड़ सकता है भारी
कई लोग बिना जरूरत बार-बार फ्रिज खोलते रहते हैं. ऐसा करने से बाहर की गर्म हवा अंदर चली जाती है और फ्रिज को दोबारा ठंडा होने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इससे कूलिंग कमजोर होने लगती है और बिजली की खपत भी बढ़ती है. कोशिश करें कि जरूरत का सामान एक बार में निकालें और दरवाजा ज्यादा देर तक खुला न छोड़ें.
गर्म खाना सीधे फ्रिज में रखना है बड़ी गलती
अक्सर लोग जल्दीबाजी में गर्म खाना सीधे फ्रिज में रख देते हैं. इससे फ्रिज के अंदर का तापमान अचानक बढ़ जाता है और बाकी सामान की कूलिंग भी प्रभावित होती है. इतना ही नहीं, कंप्रेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है जिससे फ्रिज जल्दी खराब हो सकता है. खाना हमेशा सामान्य तापमान पर आने के बाद ही फ्रिज में रखें.
फ्रिज को दीवार से बिल्कुल चिपकाकर न रखें
अगर फ्रिज के पीछे हवा पास होने की जगह नहीं होगी तो उसकी गर्मी बाहर नहीं निकल पाएगी. इससे कंप्रेसर लगातार गर्म रहेगा और कूलिंग कम होने लगेगी. फ्रिज को दीवार से कम से कम 4 से 6 इंच दूर रखना बेहतर माना जाता है ताकि एयर फ्लो बना रहे.
जरूरत से ज्यादा सामान भरना भी नुकसानदायक
कुछ लोग फ्रिज में जरूरत से ज्यादा सामान ठूंस देते हैं. इससे अंदर ठंडी हवा सही तरीके से घूम नहीं पाती और हर हिस्से में बराबर कूलिंग नहीं पहुंचती. नतीजा यह होता है कि कुछ चीजें जल्दी खराब होने लगती हैं. फ्रिज में हमेशा थोड़ा खाली स्पेस जरूर रखें.
समय-समय पर सफाई करना भी जरूरी
फ्रिज की रबर सील, पीछे लगी कॉइल और अंदर की ट्रे अगर गंदी हो जाएं तो इसका असर कूलिंग पर पड़ता है. धूल जमने से मशीन को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. महीने में कम से कम एक बार फ्रिज की अच्छी तरह सफाई जरूर करें.
सही तापमान सेट करना है बेहद जरूरी
कई लोग फ्रिज को हमेशा सबसे ज्यादा कूलिंग मोड पर रखते हैं. इससे बिजली की खपत बढ़ती है और कई बार फ्रिज के पार्ट्स पर दबाव पड़ता है. सामान्य तौर पर फ्रिज का तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच रखना सही माना जाता है.
छोटी लापरवाही बना सकती है बड़ा खर्च
अगर फ्रिज की कूलिंग कम हो रही है तो हर बार सर्विस सेंटर को दोष देना जरूरी नहीं. कई बार हमारी छोटी-छोटी गलतियां ही इसकी वजह बनती हैं. सही इस्तेमाल और नियमित देखभाल से फ्रिज लंबे समय तक बेहतर कूलिंग देता है और बिजली का बिल भी कंट्रोल में रहता है.
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<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>किस कंपनी के यूजर्स सबसे ज्यादा खर्च करते हैं डेटा, इस लिस्ट में Jio&#45;Vi आगे हैं या Airtel?</title>
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<description><![CDATA[ Mobile Data Users: देश की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों Bharti Airtel, Reliance Jio और Vodafone Idea ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. इन आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि किस कंपनी के ग्राहक सबसे ज्यादा मोबाइल डेटा खर्च कर रहे हैं और किस कंपनी की कमाई प्रति यूजर सबसे मजबूत बनी हुई है.
Vi ने सबसे आखिर में अपने नतीजे जारी करते हुए बताया कि कंपनी का ग्राहक आधार 192.8 मिलियन पर स्थिर बना हुआ है. साथ ही फरवरी 2026 से कंपनी के नए ग्राहकों की संख्या में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. अब तीनों कंपनियों के डेटा यूसेज और ARPU के आंकड़ों ने टेलीकॉम बाजार की असली तस्वीर सामने रख दी है.
Airtel यूजर्स का कितना डेटा इस्तेमाल?
रिपोर्ट के मुताबिक एयरटेल के ग्राहकों ने इस तिमाही में औसतन हर महीने 31.4GB मोबाइल डेटा इस्तेमाल किया. यानी एक ग्राहक रोजाना करीब 1.05GB डेटा खर्च कर रहा है. कंपनी का कुल नेटवर्क डेटा ट्रैफिक 27,985 मिलियन GB तक पहुंच गया.
एयरटेल का ARPU यानी प्रति ग्राहक औसत कमाई 257 रुपए रही जो इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा मानी जा रही है. हालांकि पिछले क्वार्टर के मुकाबले इसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई है. इससे पहले यह आंकड़ा 259 रुपए था.
कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन Gopal Vittal ने कहा कि FY26 कंपनी के लिए काफी मजबूत साल रहा. इस दौरान एयरटेल ने 650 मिलियन ग्राहकों का आंकड़ा पार किया और लाखों नए स्मार्टफोन व पोस्टपेड ग्राहक भी जोड़े.
डेटा खर्च करने में सबसे आगे निकले Jio यूजर्स
अगर सबसे ज्यादा डेटा इस्तेमाल की बात करें तो जियो ने बाकी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है. कंपनी के अनुसार हर ग्राहक औसतन 42.3GB डेटा हर महीने इस्तेमाल कर रहा है यानी रोजाना करीब 1.41GB डेटा खर्च हो रहा है.
Jio का कुल नेटवर्क डेटा वॉल्यूम 66 बिलियन GB तक पहुंच गया जो बाकी कंपनियों की तुलना में काफी ज्यादा है. कंपनी का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह 5G सेवाओं का तेजी से बढ़ना है. मार्च 2026 तक जियो के 5G ग्राहकों की संख्या 268 मिलियन तक पहुंच चुकी है और अब कंपनी के कुल वायरलेस ट्रैफिक में लगभग 55 फीसदी हिस्सा 5G का हो गया है. इसके अलावा कंपनी का ARPU बढ़कर 214 रुपए तक पहुंच गया है.
Vi के ग्राहक सबसे कम डेटा खर्च कर रहे
वीआई के आंकड़ों पर नजर डालें तो कंपनी के 4G और 5G ग्राहक हर महीने औसतन 20.2GB डेटा इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी रोजाना लगभग 673MB डेटा खर्च हो रहा है जो जियो और एयरटेल दोनों से काफी कम है.
कंपनी का कुल नेटवर्क डेटा वॉल्यूम 7.8 बिलियन GB दर्ज किया गया जिसमें 2G, 3G, 4G और 5G सभी नेटवर्क शामिल हैं. हालांकि कंपनी के लिए राहत की बात यह रही कि उसका ARPU बढ़कर 190 रुपए तक पहुंच गया जो सालाना आधार पर 8.3 फीसदी की बढ़ोतरी मानी जा रही है.
Vi के मुताबिक इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह ग्राहकों का तेजी से 4G और 5G नेटवर्क की ओर अपग्रेड होना है. कंपनी के 4G/5G ग्राहकों की संख्या भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है.
आखिर कौन है असली डेटा किंग?
सामने आए आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा इंटरनेट डेटा खर्च करने वाले यूजर्स Reliance Jio के हैं. वहीं सबसे ज्यादा ARPU के मामले में Bharti Airtel अभी भी नंबर-1 बनी हुई है. दूसरी तरफ Vodafone Idea अपने नेटवर्क और ग्राहक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी हुई है.
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<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:47 +0530</pubDate>
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<title>Seekho App Scam:  क्या है SEEKHO ऐप, जिसे 150 मिलियन लोगों ने किया डाउनलोड, इसमें लोगों के साथ कैसे हुई ऑनलाइन ठगी?</title>
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<description><![CDATA[ Seekho App Scam:  क्या है SEEKHO ऐप, जिसे 150 मिलियन लोगों ने किया डाउनलोड, इसमें लोगों के साथ कैसे हुई ऑनलाइन ठगी? ]]></description>
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:27 +0530</pubDate>
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<title>मार्केट से क्यों गायब हो रहे हैं सस्ते फोन? 10,000 रुपये से कम कीमत वाले ऑप्शंस हुए कम</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Price: एक तरफ मोबाइल फोन की कीमतें बढ़ रही हैं और दूसरी तरफ सस्ते फोन मार्केट से गायब होते जा रहे हैं. एक समय 10,000 रुपये से कम कीमत में कई अच्छे मोबाइल फोन मौजूद थे, लेकिन अब इनकी संख्या बहुत कम हो गए है. इंटरनेशनल डेटा कॉर्पोरेशन (IDC) की नई रिपोर्ट भी इस और इशारा कर रही है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की पहली तिमाही में लगभग 10,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन की शिपमेंट में सालाना आधार पर 59 प्रतिशत कमी आई है. यानी अब मार्केट में सस्ते फोन कम आ रहे हैं. आइए इसके पीछे के कारणों पर एक नजर डालते हैं.
कितने कम हो गए सस्ते फोन?
IDC की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल की पहली तिमाही में भारत की स्मार्टफोन शिपमेंट में 4.1 प्रतिशत की कमी आई है. पिछले साल भारत की स्मार्टफोन शिपमेंट में 18 प्रतिशत किफायती स्मार्टफोन थे. यह संख्या इस साल गिरकर सिर्फ 8 प्रतिशत रह गई है. बता दें कि दाम बढ़ने के कारण इस साल ग्लोबल स्मार्टफोन शिपमेंट में भी गिरावट आने का अनुमान लगाया जा रहा है. मेमोरी चिप्स संकट के कारण ऐप्पल और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों पर भी असर पड़ा है.
मार्केट से क्यों गायब हो रहे हैं सस्ते फोन?
पिछले कुछ समय से मोबाइल फोन की कीमतें बढ़ी हैं. इसके पीछे मेमोरी चिप्स की कमी और दूसरे पार्ट्स की लगातार बढ़ती कीमतें हैं. इस कारण कंपनियों के लिए फोन की कीमतें कम रखना मुश्किल हो रहा है. कम बचत के कारण कंपनियों ने अब सस्ते फोन बनाने बंद कर दिए हैं. इस वजह से पहले सस्ते फोन खरीदने वाले लोगों को अब महंगे फोन खरीदने पड़ रहे हैं. इस साल की पहली तिमाही में 10,0000-20,000 रुपये की कीमत वाले फोन की खूब डिमांड देखी गई थी. अब इस बजट सेगमेंट के फोन की सबसे ज्यादा बिक्री हो रही है.&amp;nbsp;
फोन की औसत कीमत 29,000 रुपये पहुंची
भारत में अब लोग महंगे फोन ज्यादा खरीद रहे हैं. पिछले काफी समय से प्रीमियम सेगमेंट की मांग में उछाल देखा गया है. यही कारण है कि भारत में स्मार्टफोन की औसत कीमत 29,000 रुपये पहुंच गई है. पिछले साल की तुलना में इसमें 10 प्रतिशत की बढोतरी हुई है. अगर भारत में सबसे पॉपुलर ब्रांड की बात की जाए तो IDC के अनुसार, वीवो के फोन सबसे ज्यादा बिक रहे हैं और सैमसंग बिक्री के मामले में दूसरे नंबर है. ओप्पो भी तेजी से पॉपुलर हो रही है.&amp;nbsp;
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Solar Panel से बनेगी फुल बिजली, आज ही जान लें एफिशिएंसी बढ़ाने के 6 तरीके ]]></description>
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>बच्चों की ऑनलाइन एक्टिविटी पर रहेगी नजर, पैरेंट्स के लिए Instagram पर आएगा नया टूल</title>
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<description><![CDATA[ Instagram Supervision Tool: अगर आपके बच्चे पूरे दिन इंस्टाग्राम में घुसे रहते हैं तो अब आप उनकी ऑनलाइन एक्टिविटी पर नजर रख सकेंगे. दरअसल, इंस्टाग्राम ने एक नए सुपरविजन टूल का ऐलान किया है, जिसकी मदद से पैरेंट्स यह देख पाएंगे कि उनके बच्चे इंस्टाग्राम पर क्या देख रहे हैं. उनके फीड, रील और एक्सप्लोर सेक्शन में क्या-क्या आ रहा है. यह सुपरविजन टूल केवल टीन अकाउंट्स पर काम करेगा. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि इस टूल की मदद से पैरेंट्स टीन के इंस्टाग्राम एल्गोरिदम को समझ पाएंगे और उन्हें यह भी पता लग सकेगा कि उनके बच्चे किन टॉपिक्स में इंट्रेस्टेड हैं.
क्यों पड़ी इस फीचर की जरूरत?
मेटा ने बताया कि इस फीचर को ऐसे डिजाइन किया गया है कि इसकी मदद से फैमिलीज यह समझ सकेगी कि उनके बच्चों के इंस्टाग्राम पर कोई कंटेट क्यों दिखाया जा रहा है. अगर कोई टीन यूजर स्पोर्ट्स, म्यूजिक और फोटोग्राफी जैसे टॉपिक को ज्यादा देखता है तो इस टूल के जरिए पैरेंट्स को इन कैटेगरीज की जानकारी मिल जाएगी. यह टूल पिछले साल लाए गए &#039;योर एल्गोरिदम&#039; टूल पर बना हुआ है. पुराने टूल के जरिए यूजर को अपने एल्गोरिदम को कुछ हद तक कस्टमाइज करने का ऑप्शन मिलता है.
नई कैटेगरी एड होने पर पैरेंट्स के पास जाएगी नोटिफिकेशन
अगर कोई टीन यूजर अपने इंट्रेस्ट में कोई नई कैटेगरी जोड़ता है तो इसकी नोटिफिकेशन उसके पैरेंट्स के पास जाएगी. इससे उन्हें यह पता चल सकेगा कि बच्चे के फीड में अचानक से अलग कैटेगरी का कंटेट कैसे आने लगा है. नया सुपरविजन टूल आज से रोल आउट होने शुरू हो गया है और इसे सबसे पहले इंग्लिश भाषा के यूजर्स के लिए अवेलेबल करवाया जाएगा. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में भी इस फीचर को लॉन्च किया जाएगा.&amp;nbsp;
एआई पर नजर रखने के लिए भी आएगा टूल
इंस्टाग्राम एक्टिविटी पर नजर रखने के साथ-साथ कंपनी ने कुछ दिन पहले एक और टूल लॉन्च किया था, जिसके जरिए यह देखा जा सकता है कि बच्चे एआई को कैसे यूज कर रहे हैं. इंस्टाग्राम के साथ-साथ फेसबुक और मैसेंजर के लिए भी इसे रोल आउट किया गया है. इसमें एक नई इनसाइट टैब दी गई है, जिसमें पैरेंट्स उन टॉपिक्स को देख सकते हैं, जिनके बारे में उनके बच्चों ने एआई से सवाल पूछे हैं. इसमें रिसेंट 7 दिनों का डेटा आएगा और सवालों की जगह यह उन टॉपिक्स को लिस्ट करेगा, जिनके बारे में टीन यूजर्स ने एआई से बातचीत की है.
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Solar Panel से बनेगी फुल बिजली, आज ही जान लें एफिशिएंसी बढ़ाने के 6 तरीके ]]></description>
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Solar Panel से बनेगी फुल बिजली, आज ही जान लें एफिशिएंसी बढ़ाने के 6 तरीके</title>
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<description><![CDATA[ Solar Panel Use Tips: सोलर पैनल लगाने के बाद बिजली के बिल से छुटकारा मिल जाता है. आपके घर की छत पर लगा सोलर एनर्जी सिस्टम न सिर्फ बिजली जनरेट करता है बल्कि आपके पैसे की भी बचत करता है. सोलर तरीको को ठीक तरीके से मैंटेन कर बिजली जनरेशन बढ़ाया जा सकता है. आज हम आपको कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं, जिससे सोलर पैनल फुल एफिशिएंसी के साथ काम कर पाएंगे. अगर आप इन टिप्स को इग्नोर कर देते हैं तो एफिशिएंसी में कमी आ सकती है और सोलर पैनल अपने फुल पोटेंशियल के साथ काम नहीं कर पाएंगे.&amp;nbsp;
कैसे बढ़ाएं सोलर पैनल की एफिशिएंसी?
पैनल की पॉजीशन सही करें- मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए सोलर पैनल की पॉजीशन सही होना जरूरी है. सोलर पैनल हमेशा साउथ फेसिंग होने चाहिए, जिससे ज्यादा से ज्यादा सनलाइट को कैप्चर किया जा सके. इसके अलावा सोलर पैनल को कितना टिल्ट किया जाता है, यह भी एनर्जी जनरेशन के लिए बहुत जरूरी है.
पैनल को रखें साफ- सोलर पैनल को साफ रखना बहुत जरूरी है. पैनल गंदे होने पर एनर्जी प्रोडक्शन में 15 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है. खुले में लगे होने के कारण इन पर धूल-मिट्टी जम जाती है, जो सनलाइट को ब्लॉक कर सकती है. इसलिए पैनल को नियमित तौर पर पानी और मुलायम कपड़े या ब्रश से साफ करते रहें.&amp;nbsp;
शेडिंग न होने दें- पैनल को ऐसी जगह पर लगाने से बचें, जहां दिन में कई घंटे छाया रहती है. इससे एनर्जी प्रोडक्शन कम होता है. अगर किसी पेड़ की टहनी बढ़कर पैनल को छाया दे रही है तो उसे हटा दें. कोशिश करें कि पैनल पर ज्यादा से ज्यादा समय तक धूप रहे.
टेंपरेचर से भी पड़ता है फर्क- यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन ज्यादा टेंपरेचर में सोलर पैनल की एफिशिएंसी कम हो जाती है. इसलिए टेंपरेचर का ध्यान रखना जरूरी है. सोलर पैनल को ऐसी जगह पर इंस्टॉल करवाएं, जहां वेंटिलेशन हो सके. इसके अलावा छत से थोड़ी ऊंचाई पर लगाकर भी एयर सर्कुलेशन के कारण टेंपरेचर को ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है.
हाई क्वालिटी पैनल चुनें- सारे पैनल एक तरह से नहीं बनाए जाते हैं. मैक्सिमम एफिशिएंसी के लिए हाई क्वालिटी वाले पैल चुनें. इनकी लागत भले ही ज्यादा हो, लेकिन इनका लाइफ स्पैन ज्यादा होता है और ये ज्यादा बिजली जनरेट कर पाएंगे. इसी तरह इन्वर्टर और बैटरी की क्वालिटी से भी समझौता न करें.
मैंटेनेंस पर भी दें ध्यान- अगर आपके एनर्जी सिस्टम सही चल रहा है, फिर भी साल में एक या दो बार प्रोफेशनल टेक्नीशियन को इसे दिखाना जरूरी है. इससे पैनल या सिस्टम में किसी प्रकार की गड़बड़ का पता चल जाएगा और उसे समय पर रिपेयर किया जा सकता है. इससे सोलर एनर्जी सिस्टम की एफिशिएंसी कम नहीं होगी.
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:26 +0530</pubDate>
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<title>Snapchat की हो जाएगी छुट्टी? Instagram ने फोटो शेयरिंग के लिए लॉन्च की Instants ऐप</title>
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<description><![CDATA[ Instagram Launches Instants App: Snapchat को टक्कर देने के लिए इंस्टाग्राम ने Instants ऐप को लॉन्च कर दिया है. कुछ मार्केट्स में टेस्ट करने के बाद अब इसे ग्लोबली लॉन्च किया जा रहा है. स्नैपचैट की तरह ही इस पर फोटो देखते या गायब हो जाएगी &amp;nbsp;और 24 घंटे के बाद उसे एक्सेस नहीं किया जाएगा. इसे इंस्टाग्राम के साथ-साथ स्टैंडअलोन ऐप के जरिए भी एक्सेस किया जा सकता है. यानी आप इंस्टाग्राम से भी Instants यूज कर सकते हैं और अलग से Instants ऐप डाउनलोड कर भी इसे एक्सेस कर पाएंगे.
कैसे काम करेगी Instants App?
जैसा हमने ऊपर बताया कि इसे इंस्टाग्राम के अलावा स्टैंडअलोन ऐप के तौर पर यूज किया जा सकता है. यह ऐप डायरेक्टली कैमरा में ओपन होगी. यहां आप कोई भी फोटो लेकर इसे अपने क्लोज फ्रेंड्स या फॉलोवर्स के साथ शेयर कर सकेंगे. इसके साथ कुछ लिमिटेशन भी लगाई गई है. Instants पर ली गई फोटोज को एडिट नहीं किया जा सकता और न ही आप इस पर गैलरी से फोटो अपलोड कर सकते हैं. फोटो लेने के बाद यूजर के पास सिर्फ कैप्शन एड करने का ऑप्शन होगा. यह इंस्टाग्राम पर नजर आने वाली एडिटेड इमेज से पूरा अलग एक्सपीरियंस होगा और इसमें यूजर ऑथेंटिक इमेजेज शेयर कर पाएंगे.
स्क्रीनशॉट रहेंगे ब्लॉक
Instants ऐप से भेजी गई फोटोज सामने वाले यूजर्स के इनबॉक्स में दिखेंगी. उसके पास इमोजी, रिप्लाई करने और खुद की इंस्टैंट वापस भेजने का ऑप्शन होगा. इंस्टाग्राम का कहना है कि इस ऐप के जरिए भेजी गई फोटो का स्क्रीन शॉट नहीं लिया जा सकता. इसी तरह स्क्रीन रिकॉर्डिंग का सपोर्ट भी नहीं होगा. इसके अलावा इसमें भेजी गई फोटो को कैंसिल करने के लिए अनडू का ऑप्शन मिलेगा. इसे फोटो ओपन करने से पहले तक इस्तेमाल किया जा सकता है.
स्नैपचैट को टक्कर देने की नई कोशिश
Instants App के जरिए इंस्टाग्राम ने स्नैपचैट जैसी ऐप को टक्कर देने की कोशिश की है. Snapchat, BeReal और Locket Widget जैसी ऐप्स काफी पॉपुलर हुई हैं और ये सारी टेंपरेरी कंटेट की सुविधा देती है. अब इंस्टैंट के जरिए इंस्टाग्राम भी इस ट्रेंड में शामिल होना चाह रही है. हालांंकि, इसमें इंस्टाग्राम ने कुछ बदलाव किए हैं. जैसे शेयर किए गए Instants को एक साल तक प्राइवेट आर्काइव में रखा जा सकता है और बाद में इन्हें स्टोरी रिकैप के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके अलावा इंस्टाग्राम ने इसमें फैमिली सेंटर कंट्रोल और शेयर्ड स्क्रीन टाइम लिमिट जैसे टीन सेफ्टी सिस्टम भी जोड़े हैं.
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<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एंड्रॉयड फोन की स्क्रीन पर क्यों नजर आती है व्हाइट डॉट और क्या है इसे हटाने का तरीका? सब जानें</title>
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<description><![CDATA[ White Dot On Android Screen: अगर आप एंड्रॉयड फोन यूज करते हैं तो इसके स्टेटस बार में एक साथ काफी इंफोर्मेशन दिख जाती है. यह आपको बैटरी, कनेक्टिविटी, टाइम और नोटिफिकेशन आदि के बारे में सब कुछ बता सकता है. फोन अनलॉक करने के बाद या अगर आप फोन को काफी देर बार यूज कर रहे हैं तो इस पर नजर मार लेने से मिसकॉल, मैसेज, वॉइसमेल और मेल आदि का पता चल जाता है. इन सब चीजों के अलावा स्टेटस बार में एक और आइकन नजर आता है, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं. हम बात कर रहे हैं व्हाइट डॉट की. नोटिफिकेशन, टाइम और कनेक्टिविटी आइकन के साथ नजर आने वाली व्हाइट डॉट क्या बताती है? आइए जानते हैं.
स्क्रीन पर व्हाइट डॉट का क्या काम?
अगर आपके फोन की स्क्रीन पर थोड़ी-थोड़ी देर बाद व्हाइट डॉट नजर आने लगती है तो टेंशन वाली बात नहीं है. यह किसी खराबी के कारण नहीं दिखती. इस डॉट का मतलब है कि कई नोटिफिकेशन आए हुए हैं, लेकिन उन्हें दिखाने के लिए स्क्रीन पर जगह नहीं है. इस डॉट से यह पता चलता है कि स्क्रीन पर दिख रहे आइकन से ज्यादा नोटिफिकेशन हैं. अगर फोन में एक-दो ऐप से ही नोटिफिकेशन हैं तो उसके आइकन आपको स्क्रीन पर दिख जाएंगे और व्हाइट डॉट नहीं दिखेगी.
कैसे पाएं व्हाइट डॉट से छुटकारा?
अगर आप सारे नोटिफिकेशन क्लीयर कर देते हैं तो व्हाइट डॉट अपने आप गायब हो जाएगी. इसके लिए सबसे पहले नोटिफिकेशन बार को स्वाइप डाउन करें. अब यहां दिख रहे क्लियर ऑल बटन पर टैप करें. इससे सारे नोटिफिकेशन और व्हाइट डॉट क्लियर हो जाएगी. इसके अलावा आप हर नोटिफिकेशन को एक-एक कर भी क्लियर या ओपन कर सकते हैं. अगर आप इससे परमानेंट छुटकारा पाना चाहते हैं तो सेटिंग में जाकर स्टेटस बार में नोटिफिकेशन न दिखाने का ऑप्शन चुन लें. हर फोन के हिसाब से यह ऑप्शन अलग-अलग हो सकता है.
ग्रीन डॉट का क्या मतलब?
व्हाइट डॉट की तरह ही फोन पर ग्रीन डॉट दिखना भी आम है. अगर आपके एंड्रॉयड डिवाइस पर ग्रीन डॉट नजर आ रही है तो इसका मतलब है कि फोन का कैमरा या माइक्रोफोन एक्टिव है. Android 12 और उसके बाद के वर्जन पर चलने वाले डिवाइस में यह लाइट नजर आती है. फोन के प्राइमरी कैमरा के साथ-साथ इससे कनेक्टेड सेकेंडरी कैमरा और माइक्रोफोन के एक्टिव होने पर भी ग्रीन डॉट नजर आती है.
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>GPS Spoofing का खेल अब खत्म? नया Portable Device रियल टाइम में पकड़ लेगा Fake Location, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी</title>
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<description><![CDATA[ Portable Device: आज की दुनिया में GPS हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा बन चुका है. चाहे रास्ता ढूंढना हो, ऑनलाइन डिलीवरी ट्रैक करनी हो या फोन में मैप इस्तेमाल करना हो, हर जगह लोग GPS पर भरोसा करते हैं. लेकिन अगर यही लोकेशन गलत दिखाई जाए तो क्या होगा? इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए वैज्ञानिकों ने एक ऐसा नया पोर्टेबल डिवाइस तैयार किया है जो रियल टाइम में नकली GPS सिग्नल यानी GPS Spoofing को पकड़ सकता है.
क्या होता है GPS Spoofing?
GPS Spoofing एक ऐसी तकनीक है जिसमें नकली सिग्नल भेजकर GPS सिस्टम को भ्रमित किया जाता है. इससे डिवाइस को गलत लोकेशन दिखाई देने लगती है जबकि असल में वह कहीं और मौजूद होता है. उदाहरण के तौर पर अगर कोई ट्रक कीमती सामान लेकर जा रहा हो तो ट्रैकिंग सिस्टम में वह सही रास्ते पर दिख सकता है लेकिन वास्तव में उसे किसी दूसरी जगह मोड़ा जा सकता है. यही वजह है कि Spoofing को सामान्य GPS Jammer से ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसमें सब कुछ सामान्य दिखाई देता है.
वैज्ञानिकों ने तैयार किया नया स्मार्ट डिटेक्टर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, Oak Ridge National Laboratory के वैज्ञानिकों ने ऐसा पोर्टेबल डिवाइस विकसित किया है जो चलते वाहन या किसी भी स्थिति में नकली GPS सिग्नल की पहचान कर सकता है. दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया का पहला हाई-सेंसिटिव और रियल टाइम GPS Spoofing Detector है. इस तकनीक की खास बात यह है कि यह केवल सिग्नल ब्लॉक होने पर नहीं बल्कि तब भी Spoofing पकड़ सकता है जब नकली सिग्नल असली सैटेलाइट सिग्नल जितने मजबूत हों.
यह डिवाइस कैसे करता है काम?
आमतौर पर GPS सिस्टम सैटेलाइट से मिलने वाले सिग्नल पर निर्भर करते हैं लेकिन नया डिटेक्टर अलग तरीके से काम करता है. यह Advanced Radio Technology और Powerful Computing की मदद से सिग्नल्स का सीधा विश्लेषण करता है. यानी यह बिना किसी पारंपरिक GPS रिसीवर के भी समझ सकता है कि सिग्नल असली हैं या उनमें छेड़छाड़ की गई है. इसी वजह से यह तकनीक मौजूदा सिस्टम की तुलना में ज्यादा तेज और भरोसेमंद मानी जा रही है.
क्यों बढ़ रहा है GPS Spoofing का खतरा?
हाल के वर्षों में GPS Spoofing और GPS Jamming के मामले तेजी से बढ़े हैं. हालांकि कई देशों में GPS Jammer इस्तेमाल करना गैरकानूनी है फिर भी इंटरनेट पर ऐसे उपकरण आसानी से मिल जाते हैं. कुछ मामलों में अपराधियों ने ट्रक और शिपमेंट हाईजैक करने के लिए नकली GPS लोकेशन का इस्तेमाल किया है. खासकर खतरनाक या संवेदनशील सामान ले जाने वाले वाहनों के लिए यह बड़ा सुरक्षा खतरा बन चुका है.
आम लोगों को कैसे होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई तकनीक केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए ही नहीं बल्कि आम लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है. अगर किसी ड्राइवर या कंपनी को तुरंत पता चल जाए कि उनका GPS सिस्टम गलत लोकेशन दिखा रहा है तो वे समय रहते कार्रवाई कर सकते हैं. वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना Carbon Monoxide Alarm से की है जो खतरा बढ़ने से पहले लोगों को चेतावनी देता है.
भविष्य में और सुरक्षित हो सकता है GPS
शोधकर्ताओं का लक्ष्य इस डिवाइस को सस्ता और ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का है ताकि ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके. आज जब दुनिया तेजी से डिजिटल सिस्टम पर निर्भर हो रही है ऐसे में GPS जैसी तकनीकों को सुरक्षित बनाना बेहद जरूरी हो गया है. यह नया डिटेक्टर उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Refurbished Phone ले रहे हैं तो जरूर देख लें ये चीजें, पहले कर दिया पेमेंट तो हो सकता है कांड</title>
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<description><![CDATA[ Refurbished Phone Buying Guide: अगर आप फ्लैगशिप फोन लेना चाहते हैं, लेकिन इसकी कीमत आपके बजट के बाहर है तो रिफर्बिश्ड फोन खरीदना एक फायदेमंद ऑप्शन हो सकता है. इस तरह से आप कम पैसे में अपनी पसंद का फोन ले सकते हैं. पिछले कुछ समय से रिफर्बिश्ड फोन की बिक्री बढ़ी है और अब लोग नए फोन के लिए ज्यादा पैसे देने की बजाय कम कीमत में रिफर्बिश्ड फोन ले लेते हैं. अगर आप भी ऑनलाइन रिफर्बिश्ड फोन खरीदने का मन बना चुके हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. इनके बिना आपके पैसे बर्बाद हो सकते हैं.
क्या होते हैं रिफर्बिश्ड फोन?
जानकारी के लिए बता दें कि कोई गड़बड़ या पसंद न आने पर कुछ लोग अपने फोन को सेलर को वापस कर देते हैं. सेलर इन फोन को लेकर जरूरी होने पर रिपेयर कर एकदम नया जैसा बना देते हैं. फिर इन्हें कम कीमत पर बाजार में दोबारा बेच दिया जाता है.
Refurbished Phone लेते समय इन चीजों पर करें गौर
डिवाइस की फिजिकल कंडीशन देखना है जरूरी- फोन की फिजिकल कंडीशन देखें बिना खरीदारी को पूरा न करें. कई सेलर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर &#039;एकदम नए जैसी&#039; या &#039;शानदार कंडीशन&#039; का दावा करते हैं, लेकिन ज्यादातर बार ये सिर्फ मार्केटिंग ट्रिक ही साबित होती है. इसलिए फोन की फिजिकल कंडीशन देखे बिना भूलकर भी पेमेंट न करें. अगर आप दूर बैठे हैं तो सेलर की दी गई फोटो को अच्छे से जूम कर स्क्रैचेज आदि का पता लगाने की कोशिश करें.
बैटरी हेल्थ पर भी दें ध्यान- कुछ समय यूज करने के बाद फोन की बैटरी लाइफ कम होने लगती है. अगर कोई आपको 100 प्रतिशत बैटरी लाइफ के दावे के साथ फोन दे रहा है तो उसे वेरिफाई करना जरूरी है. सैमसंग और ऐप्पल जैसी कंपनियों में बैटरी हेल्थ चेक करने का फीचर भी मौजूद होता है. कई थर्ड पार्टी ऐप्स भी बैटरी लाइफ चेक करने का फीचर देती है.
डिवाइस वारंटी का जरूर करें पता- कई डीलर रिफर्बिश्ड फोन पर भी 6 महीने तक की वारंटी देते हैं. इसलिए फोन खरीदने से पहले ही उसकी वारंटी का पता कर लें. फोन खरीदने के बाद अगर उसमें कुछ प्रॉब्लम आती है तो वारंटी के कारण आपको पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे. अगर कोई सेलर वारंटी नहीं दे रहा है तो दूसरे डीलर के पास पता किया जा सकता है.
रिफर्बिशर का भी रखें ध्यान- फोन लेने से यह भी देख लें कि इसका रिफर्बिशर कौन है. अगर किसी ब्रांड या ट्रस्टेड डीलरशिप से फोन रिफर्बिश किया गया है तो इसे पूरी तरह से टेस्ट और रिपेयर किया जाता है. वहीं कई दूसरे रिफर्बिशर सिर्फ डिवाइस को चमकाकर वापस बेच देते हैं. इसलिए रिफर्बिशर का ध्यान रखना जरूरी होता है.
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:10 +0530</pubDate>
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<title>AI से सबसे ज्यादा खतरे में महिलाओं की नौकरियां? नई Study में हुआ बड़ा खुलासा, वजह जानकर चौंक जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब दुनिया भर के ऑफिस और कंपनियों का अहम हिस्सा बनता जा रहा है. ग्राहक सेवा से लेकर कंटेंट राइटिंग, कोडिंग, डेटा एनालिसिस और शेड्यूलिंग जैसे कई काम अब AI टूल्स की मदद से तेजी से किए जा रहे हैं. कंपनियां भी लागत कम करने और काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए AI पर भारी निवेश कर रही हैं.
लेकिन इसी बीच एक नई स्टडी ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक AI का असर सभी कर्मचारियों पर समान नहीं पड़ सकता. खासकर महिलाओं की नौकरियां पुरुषों की तुलना में ज्यादा जोखिम में आ सकती हैं.
किन नौकरियों पर सबसे ज्यादा खतरा?
अमेरिका की संस्था National Partnership for Women &amp;amp; Families की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं का बड़ा हिस्सा उन नौकरियों में काम करता है जिन्हें AI आसानी से ऑटोमेट कर सकता है. रिपोर्ट में बताया गया कि महिलाएं अमेरिकी वर्कफोर्स का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा हैं लेकिन AI से सबसे ज्यादा प्रभावित मानी जा रही 15 नौकरियों में करीब 83 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएं हैं.
इनमें सेक्रेटरी, ऑफिस क्लर्क, रिसेप्शनिस्ट और इंश्योरेंस एजेंट जैसी नौकरियां शामिल हैं. इन कामों में अक्सर दोहराए जाने वाले प्रशासनिक कार्य होते हैं जिन्हें अब जनरेटिव AI काफी तेजी और कम लागत में कर सकता है.
क्यों बढ़ रही है चिंता?
स्टडी के मुताबिक जिन क्षेत्रों में महिलाएं बड़ी संख्या में काम करती हैं, वहां AI के कारण नौकरी में बदलाव का खतरा ज्यादा है. दूसरी तरफ, कई कर्मचारियों के पास नई स्किल सीखने या टेक्नोलॉजी के अनुसार खुद को तेजी से ढालने के संसाधन भी सीमित हो सकते हैं.
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नर्सिंग, चाइल्ड केयर और होम हेल्थकेयर जैसे क्षेत्र अभी पूरी तरह AI से प्रभावित नहीं होंगे. इसकी वजह यह है कि इन कामों में भावनात्मक समझ और मानवीय देखभाल की जरूरत होती है जिसे मशीनें पूरी तरह नहीं बदल सकतीं. फिर भी इन सेक्टर्स में AI आधारित मॉनिटरिंग और निगरानी सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ रहा है.
AI सिस्टम में भी हो सकता है Gender Bias
रिपोर्ट ने एक और गंभीर मुद्दे की तरफ ध्यान दिलाया है. अध्ययन के अनुसार AI सिस्टम खुद भी लैंगिक पक्षपात यानी Gender Bias से प्रभावित हो सकते हैं. बताया गया कि AI डेवलपमेंट और लीडरशिप रोल्स में महिलाओं की भागीदारी अभी भी कम है. इसका असर इस बात पर पड़ सकता है कि AI टूल्स को कैसे डिजाइन किया जा रहा है और उन्हें कार्यस्थलों पर कैसे इस्तेमाल किया जा रहा है.
एक उदाहरण में AI से पुरुष और महिला नामों वाले रिज्यूमे तैयार कराए गए. बाद में जब उनका मूल्यांकन किया गया तो पुरुष उम्मीदवारों को बेहतर रेटिंग मिलने की बात सामने आई. इससे यह चिंता बढ़ गई कि AI सिस्टम अनजाने में पुराने सामाजिक पूर्वाग्रहों को आगे बढ़ा सकते हैं.
AI इस्तेमाल करने पर महिलाओं को ज्यादा जज किया जाता है?
स्टडी में यह भी सामने आया कि पेशेवर काम में AI टूल्स इस्तेमाल करने पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा कठोर तरीके से आंका जा सकता है. एक एक्सपेरिमेंट में प्रतिभागियों को समान काम दिखाया गया लेकिन कुछ को AI-assisted और कुछ को non-AI-assisted बताया गया. जब लोगों को लगा कि किसी महिला ने AI की मदद ली है तो उसकी क्षमता को ज्यादा नकारात्मक रूप से देखा गया.
Deepfake और Online Abuse का भी बढ़ रहा खतरा
रिपोर्ट में महिलाओं को निशाना बनाने वाले AI आधारित Deepfake और नकली कंटेंट को लेकर भी चिंता जताई गई है. AI के जरिए फोटो, वीडियो और आवाज बदलकर गलत जानकारी फैलाना अब पहले से आसान होता जा रहा है. हालांकि यह स्टडी मुख्य रूप से अमेरिकी वर्कफोर्स पर आधारित है लेकिन AI के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इसके असर दुनिया के दूसरे देशों में भी दिखाई दे सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>बार&#45;बार टूट रहा Charging Cable? नया खरीदने से पहले जान लें ये 5 देसी जुगाड़, मिनटों में हो जाएगा ठीक</title>
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<description><![CDATA[ Charging Cable: आजकल Smartphone हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है और उसके साथ Charging Cable भी रोजमर्रा की जरूरत बन गई है लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब केबल बार-बार कटने, मुड़ने या ढीली होने लगती है. कई लोग ऐसी स्थिति में तुरंत नई केबल खरीद लेते हैं जबकि कई बार छोटी-सी समस्या को घर पर ही आसानी से ठीक किया जा सकता है. अगर आपकी Charging Cable भी जल्दी खराब हो जाती है तो कुछ आसान जुगाड़ आपके काफी काम आ सकते हैं.
सबसे पहले समझें केबल खराब क्यों होती है
अधिकतर Charging Cable एक ही जगह से बार-बार मुड़ने की वजह से खराब होती है. खासकर USB Port और Charging Pin के पास का हिस्सा जल्दी कमजोर हो जाता है. लगातार खींचने, मोड़ने और गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर अंदर की वायर टूटने लगती है. इसी वजह से कभी Charging रुक-रुक कर होती है तो कभी Cable पूरी तरह काम करना बंद कर देती है.
इलेक्ट्रिक टेप से मिल सकता है तुरंत समाधान
अगर Cable सिर्फ ऊपर से कट रही है और अंदर की वायर पूरी तरह नहीं टूटी तो Electric Tape काफी मददगार साबित हो सकती है. प्रभावित हिस्से को अच्छी तरह कवर करने से वायर को और ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सकता है. इससे Cable कुछ समय तक आराम से इस्तेमाल की जा सकती है. हालांकि ध्यान रखना जरूरी है कि Tape केवल बाहरी सुरक्षा देती है. अगर वायर पूरी तरह टूट चुकी हो तो यह तरीका ज्यादा समय तक काम नहीं करेगा.
स्प्रिंग वाला जुगाड़ बढ़ा सकता है केबल की लाइफ
कई लोग पुराने Pen की Spring का इस्तेमाल करके Charging Cable को सुरक्षित रखते हैं. USB या Charging Pin के पास Spring लगाने से Cable उस हिस्से से ज्यादा नहीं मुड़ती और टूटने का खतरा कम हो जाता है. यह छोटा सा देसी जुगाड़ Cable की लाइफ बढ़ाने में काफी असरदार माना जाता है और बाजार में मिलने वाले कई प्रोटेक्टर भी इसी तरीके पर काम करते हैं.
Heat Shrink Tube से दिखेगी नई जैसी
अगर आप थोड़ा बेहतर और साफ समाधान चाहते हैं तो Heat Shrink Tube इस्तेमाल की जा सकती है. यह प्लास्टिक ट्यूब गर्म होने पर सिकुड़कर Cable पर मजबूती से चिपक जाती है. इससे कटे या कमजोर हिस्से को अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है. यह तरीका खासकर उन लोगों के लिए अच्छा माना जाता है जो Cable को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चाहते हैं.
ढीली Cable को ऐसे करें ठीक
कई बार समस्या Cable में नहीं बल्कि उसके कनेक्टर में होती है. अगर Charging बार-बार डिस्कनेक्ट हो रही है तो Port में जमा धूल या गंदगी भी वजह हो सकती है. ऐसे में मुलायम ब्रश या सूखी हवा से Port साफ करने पर समस्या ठीक हो सकती है. इसके अलावा Cable को ज्यादा मोड़कर रखने से बचना भी जरूरी है.
कब नई Cable खरीदना जरूरी हो जाता है?
अगर Charging के दौरान Cable ज्यादा गर्म हो रही हो स्पार्क दिख रहा हो या अंदर की वायर बाहर नजर आने लगे तो उसे इस्तेमाल करना खतरनाक हो सकता है. ऐसी स्थिति में नई और अच्छी क्वालिटी की Cable लेना ही सुरक्षित विकल्प माना जाता है. यानी हर खराब Charging Cable को तुरंत फेंकने की जरूरत नहीं होती. कई छोटी समस्याएं घर पर ही आसान तरीकों से ठीक की जा सकती हैं और इससे आपके पैसे भी बच सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:10 +0530</pubDate>
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<title>स्क्रॉल करते&#45;करते थक गए? ये 5 स्मार्ट गैजेट्स छुड़ा देंगे आपकी Doomscrolling की लत, नंबर 3 देखकर चौंक जाएंगे!</title>
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<description><![CDATA[ DoomScrolling: आज के डिजिटल दौर में डूमस्क्रॉलिंग एक आम समस्या बन चुकी है. बिना सोचे-समझे घंटों तक सोशल मीडिया फीड स्क्रॉल करते रहना न सिर्फ समय बर्बाद करता है बल्कि मानसिक थकान और तनाव भी बढ़ाता है. अगर आप भी इस आदत से परेशान हैं तो अब टेक्नोलॉजी ही इसका समाधान बन सकती है. आइए जानते हैं 5 ऐसे स्मार्ट गैजेट्स के बारे में जो आपकी इस आदत को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं.
स्क्रीन टाइम कंट्रोल डिवाइस
ये छोटे-छोटे गैजेट्स आपके स्मार्टफोन के उपयोग को सीमित करने में मदद करते हैं. आप इसमें टाइम सेट कर सकते हैं कि दिन में कितनी देर फोन इस्तेमाल करना है. जैसे ही लिमिट खत्म होती है, ये डिवाइस अलर्ट देता है या फोन को लॉक कर देता है. इससे धीरे-धीरे आपकी स्क्रॉलिंग आदत पर ब्रेक लगता है.
ई-इंक डिस्प्ले फोन
ई-इंक स्क्रीन वाले फोन आंखों के लिए आरामदायक होते हैं और इनमें रंगीन, आकर्षक इंटरफेस नहीं होता. इसका सीधा असर यह होता है कि सोशल मीडिया स्क्रॉल करने में उतना मजा नहीं आता जिससे आप खुद ही फोन का इस्तेमाल कम करने लगते हैं. यह गैजेट खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो मिनिमलिस्ट लाइफस्टाइल अपनाना चाहते हैं.
फोकस टाइमर (Pomodoro Gadget)
यह गैजेट आपकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के साथ-साथ डूमस्क्रॉलिंग कम करने में भी मदद करता है. इसमें आप 25-30 मिनट का फोकस टाइम सेट करते हैं जिसके दौरान फोन से दूर रहना होता है. समय पूरा होने पर छोटा ब्रेक मिलता है. इस टेक्निक से आपका दिमाग धीरे-धीरे फोकस करना सीखता है और यही वजह है कि इसे देखकर लोग चौंक जाते हैं.
नोटिफिकेशन ब्लॉकर डिवाइस
बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन ही हमें फोन उठाने पर मजबूर करते हैं. यह डिवाइस आपके फोन के नोटिफिकेशन को फिल्टर या ब्लॉक कर देता है ताकि आप सिर्फ जरूरी चीजों पर ध्यान दें. कम नोटिफिकेशन मतलब कम डिस्ट्रैक्शन और कम स्क्रॉलिंग.
स्मार्ट वियरेबल (फिटनेस बैंड/स्मार्टवॉच)
स्मार्ट वियरेबल डिवाइस आपको एक्टिव रहने के लिए रिमाइंड करते हैं. ये समय-समय पर आपको उठने, चलने या एक्सरसाइज करने के लिए अलर्ट देते हैं. जब आप फिजिकली एक्टिव होते हैं तो खुद-ब-खुद फोन से दूरी बन जाती है और स्क्रॉलिंग कम हो जाती है.
डूमस्क्रॉलिंग की आदत एक दिन में खत्म नहीं होती, लेकिन सही गैजेट्स और थोड़ी सी जागरूकता से इसे कंट्रोल जरूर किया जा सकता है. अगर आप सच में अपनी डिजिटल लाइफ को बैलेंस करना चाहते हैं तो इन स्मार्ट गैजेट्स को आजमाकर जरूर देखें.
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Solar Panel लगाने की कर रहे हैं प्लानिंग तो फायदों के साथ लिमिटेशन जानना भी जरूरी, नहीं तो पड़ेगा पछताना</title>
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<description><![CDATA[ Solar Energy Pros and Cons: आजकल भारत में सोलर एनर्जी पर खूब जोर दिया जा रहा है. गांव से लेकर शहर और दुकानों से लेकर ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों तक, हर कहीं सोलर पैनल नजर आ रहे हैं. सोलर एनर्जी पावर का एक ऐसा सोर्स है, जो हमेशा ऑन रहता है और इसके बाद बिजली के बिल की भी टेंशन नहीं रहती. यही वजह है कि अब लोग तेजी से सोलर एनर्जी को अपना रहे हैं. अगर आप भी सोलर एनर्जी सिस्टम लगाने की सोच रहे हैं तो इसके फायदे और नुकसान की जानकारी होना जरूरी है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस सिस्टम के फायदे और लिमिटेशन क्या हैं.
सबसे पहले जानें सोलर एनर्जी के फायदे
रीन्यूएबल एनर्जी- सोलर एनर्जी रीन्यूएबल एनर्जी है. यानी इसके खत्म होने की टेंशन नहीं है. रोजाना सूरज निकलता है, जो एनर्जी का ऐसा सोर्स है, जो कभी खत्म नहीं हो सकता. दूसरी तरफ भारत जैसे देश में दिन में कई घंटों तक सनलाइट रहती है, जो एनर्जी जनरेशन के लिए जरूरी है.&amp;nbsp;
ऑपरेटिंग लागत का सस्ता होना- एक बार सोलर एनर्जी सिस्टम को इंस्टॉल करने के बाद इसकी मैंटेनेस और ऑपरेटिंग लागत बहुत कम है. कई कंपनियां 20-25 सालों तक की गारंटी ऑफर करती है, जो यूजर की टेंशन दूर करने के लिए काफी है.
एनवायरनमेंट के लिए फायदेमंद- सोलर पावर से बहुत ही कम मात्रा में ग्रीन हाउस गैस एमिशन होता है, जो इसे पर्यावरण के लिए फायदेमंद बनाता है. कोयले की तरह न तो इससे धुआं होता है और न ही हवा में प्रदूषण फैलता है.
हर जगह यूज होने लायक- सोलर एनर्जी सिस्टम को एक छोटी-दुकान से लेकर कई एकड़ में फैले सोलर फार्म तक हर जगह जरनेट और यूज किया जा सकता है.
सरकारी मदद- भारत में सरकार की तरफ से भी सोलर एनर्जी को अपनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है. राज्य सरकारों के साथ-साथ केंद्र सरकार भी इसके लिए सब्सिडी दे रही है.
क्या हैं सोलर एनर्जी की लिमिटेशन?
शुरुआत में भारी निवेश की जरूरत- सोलर एनर्जी सिस्टम के लिए अपफ्रंट कॉस्ट काफी ज्यादा है. सोलर पैनल और इंस्टॉलेशन की लागत के कारण कई लोग इसे लगाने से बच रहे हैं.&amp;nbsp;मौसम पर निर्भरता- सोलर एनर्जी जनरेशन के लिए सनलाइट होना जरूरी है. रात में यह सिस्टम काम नहीं करता और धूप न निकलने पर भी एनर्जी जनरेशन कम हो जाता है.जगह की जरूरत- सोलर पैनल इंस्टॉल करने के लिए जगह की जरूरत पड़ती है. अगर ज्यादा कैपेसिटी वाला सिस्टम लगाना है तो ज्यादा जगह चाहिए. इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में दिक्कत होती है.स्टोरेज के लिए बैटरी की जरूरत- अगर आप दिन के समय ज्यादा सोलर पावर जनरेट कर उसे रात में यूज करना चाहते हैं तो इसके लिए बैटरी की जरूरत होती है. बैटरियों की लागत भी ज्यादा है.
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>1 Wash में कितने यूनिट बिजली उड़ाती है Washing Machine? ज्यादातर लोगों को नहीं पता असली सच!</title>
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<description><![CDATA[ Washing Machine: आज के समय में Washing Machine लगभग हर घर की जरूरत बन चुकी है. यह कपड़े धोने का काम आसान जरूर कर देती है लेकिन कई लोगों के मन में एक सवाल हमेशा रहता है कि आखिर Washing Machine चलाने पर कितना बिजली बिल आता है. खासकर गर्मियों में जब AC, कूलर और फ्रिज पहले से ज्यादा बिजली खा रहे होते हैं तब लोग Washing Machine की खपत को लेकर भी परेशान रहते हैं. असल में मशीन कितनी बिजली खर्च करेगी, यह उसके मॉडल, क्षमता और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करता है.
Washing Machine कितनी बिजली खपत करती है?
आमतौर पर एक सामान्य Washing Machine 300 वॉट से लेकर 2000 वॉट तक बिजली इस्तेमाल कर सकती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि मशीन Top Load है या Front Load और उसमें हीटर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं या नहीं. अगर आसान भाषा में समझें तो 1000 वॉट का मतलब होता है 1 किलोवॉट. यानी अगर कोई मशीन 1 घंटे तक 1000 वॉट बिजली इस्तेमाल करती है तो वह लगभग 1 यूनिट बिजली खर्च करेगी. उदाहरण के तौर पर अगर आपकी Washing Machine 500 वॉट की है और वह एक घंटे चलती है तो करीब 0.5 यूनिट बिजली खर्च होगी.
एक बार कपड़े धोने में कितना खर्च आता है?
ज्यादातर घरों में Washing Machine का एक वॉश साइकिल लगभग 30 मिनट से 1 घंटे तक चलता है. सामान्य तौर पर एक वॉश में 0.3 से 1.5 यूनिट तक बिजली खर्च हो सकती है. अगर आपके इलाके में बिजली का रेट 8 रुपये प्रति यूनिट है और मशीन 1 यूनिट बिजली खर्च करती है तो एक बार कपड़े धोने की लागत लगभग 8 रुपये होगी. हालांकि Hot Water Wash या Dryer इस्तेमाल करने पर बिजली खपत काफी बढ़ जाती है क्योंकि पानी गर्म करने और कपड़े सुखाने में ज्यादा पावर लगती है.
Front Load और Top Load में कौन बचाता है ज्यादा बिजली?
Front Load मशीनें आमतौर पर बिजली और पानी दोनों कम खर्च करती हैं. ये कम स्पीड और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के साथ कपड़े साफ करती हैं. वहीं Top Load मशीनें थोड़ी ज्यादा बिजली और पानी इस्तेमाल कर सकती हैं लेकिन इनकी कीमत अपेक्षाकृत कम होती है. अगर लंबे समय तक बिजली बचाना चाहते हैं तो Front Load मशीन बेहतर विकल्प मानी जाती है.
बिजली बचाने के आसान तरीके
अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो Washing Machine का बिजली बिल काफी कम किया जा सकता है. मशीन को आधा खाली चलाने के बजाय फुल लोड में चलाना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसके अलावा Quick Wash Mode का इस्तेमाल करने से भी बिजली कम खर्च होती है. जरूरत न हो तो Hot Water और Dryer फीचर से बचना बेहतर रहता है. Energy Star Rating वाली मशीनें भी कम बिजली खपत के लिए जानी जाती हैं.
छोटी-सी लापरवाही बढ़ा सकती है बिल
कई लोग सोचते हैं कि Washing Machine बहुत ज्यादा बिजली नहीं खाती लेकिन बार-बार इस्तेमाल और गलत सेटिंग्स बिजली बिल को बढ़ा सकती हैं. खासकर अगर मशीन पुरानी हो या उसमें हीटर और ड्रायर का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा हो तो खपत तेजी से बढ़ सकती है. इसलिए अगली बार Washing Machine चलाने से पहले उसकी पावर रेटिंग और इस्तेमाल का तरीका जरूर समझ लें. छोटी-सी जानकारी हर महीने बिजली बिल में अच्छी बचत करा सकती है.
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एक छोटी APK File बना सकती है आपको कंगाल! जानिए कैसे फोन हैक कर रहे हैं साइबर ठग</title>
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<description><![CDATA[ APK File Cyber Fraud: आजकल ऑनलाइन फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. साइबर ठग अब सिर्फ कॉल या फर्जी लिंक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लोगों के स्मार्टफोन को ही अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है APK File का. कई लोग बिना सोचे-समझे ऐसी फाइल डाउनलोड कर लेते हैं और फिर कुछ ही मिनटों में उनके बैंक अकाउंट से पैसे गायब होने लगते हैं.
अक्सर स्कैमर्स WhatsApp, Telegram, SMS या सोशल मीडिया के जरिए कोई जरूरी अपडेट, बैंक KYC, इनाम या सरकारी योजना का लालच देकर APK फाइल भेजते हैं. जैसे ही यूजर इसे इंस्टॉल करता है, ठगों को फोन के अंदर पहुंचने का रास्ता मिल जाता है.
आखिर क्या होती है APK File?
APK दरअसल Android Package File होती है. यह एंड्रॉयड फोन में ऐप इंस्टॉल करने का फॉर्मेट है. जिस तरह कंप्यूटर में .exe फाइल का इस्तेमाल सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के लिए किया जाता है उसी तरह एंड्रॉयड डिवाइस में APK फाइल काम करती है.
इन फाइलों में ऐप चलाने के लिए जरूरी सभी डेटा और कोड मौजूद होता है. आमतौर पर Google Play Store से डाउनलोड होने वाले ऐप्स सुरक्षित जांच के बाद मिलते हैं लेकिन इंटरनेट या मैसेज के जरिए आने वाली APK फाइलें खतरनाक हो सकती हैं. कई बार इन फाइलों के अंदर छिपा हुआ Malware या Spyware मौजूद होता है जो फोन की निजी जानकारी चोरी करने के लिए बनाया जाता है.
स्कैमर्स APK File का इस्तेमाल क्यों करते हैं?
साइबर अपराधी APK फाइल इसलिए भेजते हैं क्योंकि इसके जरिए वे सीधे यूजर के फोन में नकली ऐप इंस्टॉल करवा सकते हैं. ये ऐप देखने में बिल्कुल असली बैंकिंग ऐप, सरकारी पोर्टल या लोकप्रिय सर्विस जैसे लगते हैं ताकि लोगों को शक न हो. स्कैमर्स अक्सर ऐसा मैसेज भेजते हैं जिससे यूजर घबरा जाए या जल्दी फैसला ले ले.
जैसे KYC तुरंत अपडेट करें, आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है या इनाम जीतने के लिए ऐप डाउनलोड करें. जैसे ही यूजर APK इंस्टॉल करता है, नकली ऐप कई तरह की परमिशन मांगता है. लोग बिना पढ़े Allow पर क्लिक कर देते हैं और यहीं से खतरा शुरू हो जाता है.
कैसे खाली हो जाता है बैंक अकाउंट?
एक बार खतरनाक APK फोन में इंस्टॉल हो जाए तो वह कॉन्टैक्ट्स, मैसेज, कॉल लॉग, नोटिफिकेशन, लोकेशन और यहां तक कि माइक्रोफोन तक का एक्सेस मांग सकता है. इसके बाद यह ऐप फोन में आने वाले OTP, बैंक अलर्ट और पासवर्ड जैसी जानकारी चुपचाप स्कैमर्स तक पहुंचाने लगता है. कई Malware रियल टाइम में स्क्रीन रिकॉर्डिंग या कीबोर्ड टाइपिंग भी ट्रैक कर सकते हैं. जैसे ही ठगों को बैंकिंग डिटेल और OTP मिलते हैं, वे अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर देते हैं. कई लोगों को तब तक पता भी नहीं चलता जब तक बैंक बैलेंस कम होने का मैसेज नहीं आ जाता.
ऐसे बच सकते हैं APK Scam से
किसी भी अनजान लिंक या फाइल पर तुरंत क्लिक नहीं करना चाहिए. अगर कोई ऐप Play Store के बाहर से डाउनलोड करने के लिए कहा जा रहा है तो पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें. फोन में ऐप इंस्टॉल करते समय मांगी जा रही परमिशन को ध्यान से पढ़ना भी बेहद जरूरी है. किसी साधारण ऐप को अगर SMS, कॉल या बैंकिंग नोटिफिकेशन का एक्सेस चाहिए तो सतर्क हो जाना चाहिए. इसके अलावा मोबाइल में एंटीवायरस और सिक्योरिटी अपडेट हमेशा चालू रखना सुरक्षित माना जाता है.
तेजी से बढ़ रहा है नया साइबर खतरा
डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन बैंकिंग बढ़ने के साथ APK Scam भी तेजी से फैल रहा है. साइबर अपराधी अब लोगों की छोटी-सी लापरवाही का फायदा उठाकर उनका डेटा और पैसा दोनों चुरा रहे हैं. ऐसे में किसी भी फाइल को डाउनलोड करने से पहले सतर्क रहना बेहद जरूरी है क्योंकि एक गलत क्लिक आपके पूरे बैंक अकाउंट को खतरे में डाल सकता है.
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>लाखों Views चाहिए? Instagram की ये 3 सेकंड वाली सीक्रेट ट्रिक बना सकती है आपकी Reel Viral</title>
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<description><![CDATA[ Instagram 3-Second Trick: Instagram पर हर दिन लाखों Reels अपलोड होती हैं लेकिन उनमें से कुछ ही वीडियो वायरल हो पाते हैं. 2026 में कंटेंट क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर्स और छोटे बिजनेस ओनर्स एक खास रणनीति का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं जिसे 3-Second Hook कहा जा रहा है. माना जा रहा है कि यही तरीका तय करता है कि कोई Reel हजारों लोगों तक पहुंचेगी या कुछ सेकंड में स्क्रॉल होकर गायब हो जाएगी.
सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब Instagram पर सबसे बड़ी लड़ाई Attention की है. यूजर किसी Reel को देखना जारी रखेगा या तुरंत आगे बढ़ जाएगा, इसका फैसला शुरुआती 3 सेकंड में ही हो जाता है. यही वजह है कि अब वीडियो की शुरुआत पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण बन चुकी है.
क्या है Instagram का 3-Second Rule?
Instagram का एल्गोरिदम उन Reels को ज्यादा प्रमोट करता है जिन्हें लोग लंबे समय तक देखते हैं. अगर यूजर आपकी Reel पर रुकता है और उसे आखिर तक देखता है तो Instagram उसे ज्यादा लोगों की फीड और Explore Page तक पहुंचाने लगता है.
इसी वजह से 3-Second Hook का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. इसका मतलब है कि Reel की शुरुआत ऐसी होनी चाहिए जो तुरंत लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दे. कई क्रिएटर्स वीडियो की शुरुआत में चौंकाने वाली बात, मजेदार सवाल या ऐसा दावा दिखाते हैं जिससे लोग आगे देखने के लिए मजबूर हो जाएं.
आजकल Instagram पर ये गलती करने से पहले ये वीडियो देख लो, &amp;ldquo;मैंने हजारों रुपये बर्बाद किए फिर ये सीखा&amp;rdquo; या आखिर तक देखना, वरना मजा मिस हो जाएगा&amp;rdquo; जैसे Hooks तेजी से वायरल हो रहे हैं. छोटे कैप्शन, तेज कट्स और एक्सप्रेशन वाली शुरुआत भी लोगों का ध्यान पकड़ने में मदद कर रही है.
किस तरह का कंटेंट ज्यादा देखा जा रहा है?
अब Instagram यूजर्स सिर्फ हाई-क्वालिटी कैमरा वीडियो नहीं, बल्कि ऐसा कंटेंट ज्यादा पसंद कर रहे हैं जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हो. रिलेटेबल और काम की जानकारी देने वाली Reels पर लोगों का रिएक्शन ज्यादा देखने को मिल रहा है.
डेली लाइफ हैक्स, सस्ते और उपयोगी शॉपिंग प्रोडक्ट्स, AI फोटो और वीडियो ट्रिक्स, ट्रैवल शॉर्टकट, फिटनेस ट्रांसफॉर्मेशन और स्मार्टफोन कैमरा तुलना जैसे विषय तेजी से वायरल हो रहे हैं. इसके अलावा छोटी-छोटी कुकिंग टिप्स और रिलेशनशिप स्टोरीज भी लोगों को लंबे समय तक वीडियो से जोड़े रखती हैं.
विशेषज्ञ मानते हैं कि Reel की शुरुआत सीधे सबसे दिलचस्प हिस्से से करनी चाहिए. उदाहरण के लिए अब कई फूड क्रिएटर्स पहले तैयार डिश दिखाते हैं और बाद में उसकी रेसिपी समझाते हैं. इससे यूजर शुरुआत में ही वीडियो से जुड़ जाता है.
आखिर तक Reel देखने पर कैसे मजबूर करते हैं क्रिएटर्स?
कई बड़े क्रिएटर्स अब &amp;ldquo;Open Loop&amp;rdquo; तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसमें वीडियो की शुरुआत में किसी खास जानकारी या रिजल्ट का संकेत दिया जाता है लेकिन उसका पूरा खुलासा आखिर में किया जाता है. इस रणनीति से लोग वीडियो बीच में छोड़ने के बजाय अंत तक देखते रहते हैं. इससे Watch Time और Retention बढ़ता है जिसे Instagram का एल्गोरिदम काफी महत्व देता है. कई बार यूजर्स वीडियो दोबारा भी देखते हैं, जिससे Reach और बढ़ जाती है.
Reel पोस्ट करने का सही तरीका क्या है?
सिर्फ अच्छा कंटेंट बनाना ही काफी नहीं है बल्कि उसे सही तरीके से पोस्ट करना भी जरूरी है. सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स के अनुसार Vertical Format वाली वीडियो सबसे बेहतर मानी जाती हैं. 1080x1920 रिजॉल्यूशन और Subtitle वाली Reels ज्यादा प्रभावी रहती हैं क्योंकि कई लोग बिना आवाज के वीडियो देखते हैं.
तेज एडिटिंग, ब्राइट लाइटिंग और स्क्रीन पर बड़े टेक्स्ट वाली Reels आजकल ज्यादा सफल हो रही हैं. Trending Audio का इस्तेमाल भी वीडियो को तेजी से वायरल करने में मदद करता है.
इसके अलावा छोटे समय की Reels बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं. खासतौर पर 30 सेकंड से कम की वीडियो को लोग पूरा देखने की संभावना ज्यादा रखते हैं. लगातार कंटेंट पोस्ट करना भी बेहद जरूरी माना जा रहा है.
अब Viral होने के लिए महंगा कैमरा जरूरी नहीं
दिलचस्प बात यह है कि 2026 में वायरल होने वाली कई Reels सिर्फ स्मार्टफोन से शूट की जा रही हैं. यानी अब महंगे कैमरे या भारी एडिटिंग से ज्यादा जरूरी सही आइडिया और मजबूत शुरुआत हो गई है. Instagram पर भीड़ लगातार बढ़ रही है और हर क्रिएटर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा है. ऐसे में 3-Second Rule तेजी से सबसे बड़ा Growth Formula बनता जा रहा है. अब फैसला कुछ ही सेकंड में हो जाता है कि कोई Reel वायरल होगी या यूजर उसे तुरंत स्क्रॉल कर देगा.
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<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इलेक्ट्रिक हीटर पर खाना बनाना ज्यादा सस्ता या इलेक्ट्रिक चूल्हे पर? समझें दोनों की पावर</title>
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<description><![CDATA[ Electric Chulha Vs Electric Heater: LPG शॉर्टेज के कारण लोगों ने खाना बनाने के लिए नए-नए विकल्प ढूंढना शुरू कर दिया है. इंडक्शन और इंफ्रारेड चूल्हे के अलावा कई लोग इलेक्ट्रिक चूल्हे और इलेक्ट्रिक हीटर का भी यूज कर रहे हैं. ये दोनों ही सस्ते विकल्प हैं. इन्हें खरीदने के लिए आपको ज्यादा पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इलेक्ट्रिक चूल्हा और इलेक्ट्रिक हीटर काम कैसे करते हैं और इनमें से किस पर खाना बनाना सस्ता पड़ेगा.&amp;nbsp;
इलेक्ट्रिक चूल्हा कैसे काम करता है?
इलेक्ट्रिक चूल्हे को इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर भी कहा जाता है. यह बिजली की मदद से कोयले को जलाता है. यह एक तरह का इलेक्ट्रिक स्टोव होता है, जो कोयले को गर्म कर देता है. बिजली के कारण कोयला गर्म होकर हीट जनरेट करता है, जिससे इस पर खाना बनाया जा सकता है. इसके फायदों की बात करें तो यह पोर्टेबल होता है और इसे यूज करना भी आसान है. इस पर सभी प्रकार के बर्तनों में खाना बनाया जा सकता है.
इलेक्ट्रिक हीटर कैसे काम करता है?
इलेक्ट्रिक हीटर को कॉइल हीटर भी कहा जाता है. यह इले्क्ट्रिकल रजिस्टेंट हीटिंग पर बेस होता है. यानी जब रजिस्टिव वायर वाली कॉइल से बिजली गुजरती है तो यह रजिस्टेंस के जरिए हीट जनरेट करती है. इस हीट से ऊपर रखना बर्तन गर्म हो जाता है और खाना पकने लगता है. यह जल्दी गर्म होता है और जल्द ही हाई टेंपरेचर को अचीव कर लेता है. यह भी पोर्टेबल होता है और इसे जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज भी किया जा सकता है.&amp;nbsp;
इन दोनों में से किस पर खाना बनाना सस्ता पड़ेगा?
अगर बिजली की खपत देखी जाए तो इलेक्ट्रिक चूल्हा सस्ता पड़ेगा. एक मीडियम से बड़े बर्नर वाला चूल्हा एक घंटे चलने पर एक यूनिट बिजली खा जाता है. बड़ा बर्नर होने पर खपत बढ़ भी सकती है. हालांकि, इलेक्ट्रिक चूल्हे में लगातार एक घंटे तक बिजली की जरूरत बहुत ही कम मौकों पर पड़ती है. कुछ देर चलाने पर ही कोयले गर्म हो जाते हैं, जिसके बाद उतनी बिजली की जरूरत नहीं रहती. वहीं अगर इलेक्ट्रिक हीटर की बात की जाए तो इसे लगातार बिजली की जरूरत पड़ती है. पावर सप्लाई बंद होने पर यह ठंडा हो जाता है. 1000 वॉट का इलेक्ट्रिक हीटर एक घंटे तक लगातार यूज करने पर 1-1.5 यूनिट बिजली की खपत करता है. इसलिए यह थोड़ा महंगा पड़ेगा.
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3 घंटे लगातार चलाने पर कितनी बिजली खा जाता है थ्री स्टार एसी? समझें पूरा हिसाब-किताब ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:18:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Tech Tips: रेंट पर AC लेने से पहले जरूर कर लें ये काम, नहीं तो हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ AC on Rent: पिछले कुछ सालों से रेंट पर एसी (AC on Rent) लेने का चलन बढ़ा है. लोग अब एसी खरीदने की बजाय गर्मियों के महीनों में रेंट पर ले लेते हैं. इससे उन्हें एक साथ सारी कीमत नहीं चुकानी पड़ती. इसके अलावा जिन लोगों को बार-बार घर बदलने पड़ते हैं, उनके लिए भी यह एक सुविधाजनक ऑप्शन है. अगर आप भी इस बार गर्मी से बचने के लिए एसी रेंट पर लेना चाहते हैं तो कुछ चीजों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. अगर आप इन चीजों को देखें बिना एसी रेंट पर ले लेंगे तो भारी खर्चा हो सकता है.&amp;nbsp;
सही वेंडर का चुनाव सबसे जरूरी
एसी रेंट पर लेने के लिए किसी भरोसेमंद वेंडर का चुनाव करना बहुत जरूरी है. मार्केट में आपको कई बड़े वेंडर मिल जाएंगे. इनसे एसी लेने का फायदा यह होगा कि आपको पूरी तरह सर्विस की हुई यूनिट मिल जाएगी और सपोर्ट भी मिलता रहेगा. कम पैसों के लालच में आकर किसी अनजान वेंडर के पास न जाएं.
एसी के मॉडल का रखें ध्यान
पेमेंट करने से पहले खुद जाकर एसी को चेक करें. एसी की कूलिंग और रिमोट को अच्छे से चेक करें. अगर आपको कोई डाउट हो तो कुछ देर तक एसी चलाकर देखें. इसके साथ यह भी देखें कि एसी का मॉडल कितना पुराना है. ज्यादा पुराना मॉडल होने पर वह बिजली की खपत ज्यादा करेगा.
एनर्जी रेटिंग देखें बिना न लें एसी
अगर आप चाहते हैं कि एसी कूलिंग करते समय बिजली बिल के मामले में आपकी पसीना न निकाले तो एनर्जी रेटिंग को जरूर देख लें. 5 स्टार एनर्जी रेटिंग का मतलब है कि वह मॉडल कम बिजली की खपत करेगा. इससे आपको बिजली बचाने में मदद मिलेगी.
कमरे के साइज के हिसाब से लें एसी
चाहे आप एसी रेंट पर ले रहे हैं या नई खरीद रहे हैं, यह आपके कमरे के हिसाब से परफेक्ट होनी चाहिए. अगर आपका कमरा छोटा है तो आप एक टन वाली एसी ले सकते हैं, वहीं अगर आपको बड़े कमरे में कूलिंग चाहिए तो 2 टन की एसी लेना जरूरी है. बड़े कमरे में छोटा एसी सही कूलिंग नहीं दे पाएगा.&amp;nbsp;
इन बातों का भी रखें ध्यान
- एसी रेंट पर लेने से पहले सर्विस और मैंटेनेंस की शर्तें अच्छी तरह समझ लें.- सिक्योरिटी और रेंटल प्राइस के लिए नेगोशिएट कर बचत करने की कोशिश करें- इंस्टॉलेशन की लागत के बारे में भी पहले स्थिति स्पष्ट कर लें.
ये भी पढ़ें-&amp;nbsp;स्मार्टफोन और लैपटॉप की महंगी कीमतों से जल्द नहीं मिलेगी राहत, जानें कब तक जारी रह सकता है यह संकट ]]></description>
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:18:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>USB Killer क्या है? एक बार लगाया और फोन&#45;लैपटॉप तुरंत खत्म! जानिए कैसे ये छोटा सा डिवाइस बन जाता है डिजिटल हथियार</title>
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<description><![CDATA[ USB Killer क्या है? एक बार लगाया और फोन-लैपटॉप तुरंत खत्म! जानिए कैसे ये छोटा सा डिवाइस बन जाता है डिजिटल हथियार ]]></description>
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<title>महंगा LPG हुआ आउटडेटेड? DME गैस बन जाएगा खाना बनाने के लिए एक आसान और सस्ता तरीका, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी</title>
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<description><![CDATA[ DME Gas Technology: रसोई गैस की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है. ऐसे में अब एक नए विकल्प की चर्चा तेज हो गई है DME (डाइमिथाइल ईथर) गैस. माना जा रहा है कि यह भविष्य में LPG का सस्ता और साफ विकल्प बन सकती है जिससे न सिर्फ खर्च कम होगा बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा.
क्या है DME गैस?
DME यानी डाइमिथाइल ईथर एक तरह का स्वच्छ ईंधन है जिसे कोयला, बायोमास या नैचुरल गैस से तैयार किया जा सकता है. यह गैस जलने पर बहुत कम धुआं छोड़ती है और लगभग कालिख (soot) नहीं बनाती. इसी वजह से इसे क्लीन फ्यूल के रूप में देखा जा रहा है.
LPG से कैसे अलग है?
जहां LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) जलने पर बर्तन काले कर सकती है और कुछ मात्रा में प्रदूषण भी पैदा करती है, वहीं DME गैस साफ तरीके से जलती है. इससे रसोई साफ रहती है और बर्तनों पर कालिख जमने की समस्या नहीं होती. इसके अलावा, DME को स्टोर और ट्रांसपोर्ट करना भी अपेक्षाकृत आसान माना जाता है. कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसका बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू हो जाए तो इसकी कीमत LPG से कम हो सकती है.
क्या वाकई सस्ती पड़ेगी DME?
DME की सबसे बड़ी खासियत इसकी संभावित कम लागत है. इसे स्थानीय संसाधनों से भी बनाया जा सकता है जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी. अगर ऐसा होता है तो उपभोक्ताओं को सस्ती गैस मिल सकती है और देश का खर्च भी कम होगा. हालांकि, अभी यह तकनीक शुरुआती चरण में है और बड़े पैमाने पर इसके इस्तेमाल के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना बाकी है.
पर्यावरण के लिए क्यों बेहतर है?
DME गैस को पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर माना जा रहा है. यह जलने पर कम प्रदूषण फैलाती है और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी कम होता है. ऐसे में यह स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है. फिलहाल DME गैस पर रिसर्च और टेस्टिंग जारी है. कुछ देशों में इसका सीमित स्तर पर इस्तेमाल भी शुरू हो चुका है लेकिन भारत में इसे आम लोगों तक पहुंचने में अभी समय लग सकता है.
महंगे LPG के दौर में DME गैस एक उम्मीद की किरण बनकर सामने आ रही है. अगर तकनीक और सप्लाई सिस्टम सही तरीके से विकसित हो गया तो आने वाले समय में यह रसोई गैस का नया और बेहतर विकल्प बन सकती है जो सस्ता भी होगा और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित.
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:18:23 +0530</pubDate>
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<title>Instagram&#45;Youtube और Facebook भूल जाइए, पैसों की बारिश कर रहे ये सोशल मीडिया ऐप्स</title>
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<description><![CDATA[ Social Media Apps: सोशल मीडिया का नाम लेते ही सबसे पहले Instagram, YouTube और Facebook दिमाग में आते हैं. लेकिन अब समय बदल रहा है. आज कई नए प्लेटफॉर्म तेजी से उभर रहे हैं, जहां कम मेहनत में ज्यादा कमाई के मौके मिल रहे हैं. खास बात यह है कि इन ऐप्स पर प्रतियोगिता भी कम है जिससे नए क्रिएटर्स को जल्दी पहचान मिल सकती है.
नए जमाने के प्लेटफॉर्म क्यों बन रहे हैं हिट?
बड़े प्लेटफॉर्म्स पर अब भीड़ बहुत ज्यादा हो चुकी है. लाखों क्रिएटर्स के बीच खुद को अलग दिखाना आसान नहीं रहा. यही वजह है कि लोग नए ऐप्स की तरफ बढ़ रहे हैं. ये प्लेटफॉर्म क्रिएटर्स को आकर्षित करने के लिए बेहतर मोनेटाइजेशन, बोनस और रिवार्ड्स ऑफर कर रहे हैं.
ShareChat
ShareChat खासतौर पर भारतीय भाषाओं के लिए बनाया गया है. यहां हिंदी, भोजपुरी, तमिल जैसे कई भाषाओं में कंटेंट बनाकर आप ऑडियंस तक आसानी से पहुंच सकते हैं. प्लेटफॉर्म अपने क्रिएटर्स को रिवॉर्ड प्रोग्राम और ब्रांड प्रमोशन के जरिए कमाई का मौका देता है.
Telegram
Telegram सिर्फ मैसेजिंग ऐप नहीं रह गया है. आजकल लोग इसमें चैनल और ग्रुप बनाकर हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं. यहां आप पेड सब्सक्रिप्शन, एफिलिएट मार्केटिंग और प्रमोशन के जरिए अच्छी कमाई कर सकते हैं.
Snapchat
Snapchat का Spotlight फीचर क्रिएटर्स को उनके वायरल कंटेंट के लिए पैसे देता है. अगर आपका वीडियो ट्रेंड करता है तो प्लेटफॉर्म की तरफ से सीधा रिवार्ड मिल सकता है.
Moj और Josh
भारत में बने ये शॉर्ट वीडियो ऐप्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. Moj और Josh पर वीडियो बनाकर क्रिएटर्स ब्रांड डील्स, लाइव सेशन और इन-ऐप रिवार्ड्स के जरिए पैसे कमा सकते हैं. इन प्लेटफॉर्म्स पर अभी भी नए यूजर्स के लिए अच्छा मौका है क्योंकि यहां ग्रोथ तेजी से होती है.
कमाई के लिए क्या जरूरी है?
इन नए प्लेटफॉर्म्स पर सफलता पाने के लिए आपको यूनिक और लगातार कंटेंट बनाना होगा. ट्रेंड्स को समझना, ऑडियंस से जुड़ना और सही समय पर पोस्ट करना बेहद जरूरी है.
क्या सच में यहां ज्यादा पैसा है?
हकीकत यह है कि कमाई हर प्लेटफॉर्म पर संभव है लेकिन नए ऐप्स पर मौके ज्यादा हैं. यहां प्रतियोगिता कम होने की वजह से जल्दी ग्रोथ मिल सकती है. अगर आप सही रणनीति अपनाते हैं तो ये प्लेटफॉर्म Instagram और YouTube से भी ज्यादा कमाई का रास्ता खोल सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:18:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>स्किन कैंसर का खतरा भी पहले ही पहचान लेगा AI, मेडिकल साइंस में कैसे काम आएगी यह तकनीक?</title>
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<description><![CDATA[ AI Can Detect Skin Cancer: एआई के कारण हेल्थकेयर सेक्टर में क्रांति की उम्मीद जताई जा रही है. यह टेक्नोलॉजी कई बीमारियों का पहले ही पता लगा सकती है, जिससे मरीजों को समय रहते इलाज मिल सकता है. अब एक ऐसे ही मामले में स्वीडिश रिसर्चर ने एआई का इस्तेमाल उन लोगों की पहचान कर ली, जिन्हें अगले पांच सालों में मेलानोमा (सबसे खतरनाक तरह का स्किन कैंसर) होने का खतरा है. एआई की मदद से उन्होंने पहले से मौजूद मेडिकल रिकॉर्ड को एनालाइज किया और यह पता कर लिया कि किन लोगों को अगले कुछ सालों में स्किन कैंसर होने का ज्यादा खतरा है.&amp;nbsp;
AI से चल सकता है खतरे का पता
स्वीडन की University of Gothenburg के रिसर्चर ने यह कामयाबी हासिल की है. रिसर्च टीम ने स्वीडन के करीब 60 लाख लोगों का क्लीनिकल डेटा एनालाइज किया. उन्होंने लोगों मेडिकल हिस्ट्री और दूसरे इलाज की जानकारी अपने एआई मॉडल को दी. करीब 73 प्रतिशत मामलों में एआई ने यह पता लगा लिया कि किन लोगों को मेलानोमा होने का ज्यादा खतरा है. डायग्नोसिस, मेडिकेशन और सोशियोडेमोग्राफिक डेटा यूज कर रिसर्चर उन लोगों की पहचान कर पाए, जिन्हें अगले पांच सालों में मेलानोमा होने का खतरा 33 प्रतिशत था.
UV लाइट के कारण होता है मेलानोमा
मेलानोमा होने का सबसे बड़ा कारण अल्ट्रावॉयलेट लाइट होती है, जो सीधे सूरज से आती है. यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती है. एक बार शरीर में फैलने के बाद मरीज का बचना काफी मुश्किल हो जाता है. इसलिए इस बीमारी को जल्दी डिटेक्ट कर लेना जरूरी होता है. यह छठा सबसे तेजी से होने वाला कैंसर है और इसके कारण बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है. ऐसे में एआई के जरिए इस बीमारी की पहचान कर लोगों की जान बचाई जा सकती है. एक बार अधिक जोखिम का सामना कर रहे लोगों की पहचान होने के बाद उनका फॉलो-अप और इलाज करना आसान हो जाता है.
दिल की बीमारियों का भी पहले पता लगा सकती है एआई
स्किन कैंसर की तरह एआई दिल की बीमारियां का भी सालों पहले पता लगा सकती है. मायो क्लीनिक की एक स्टडी में रिसर्चर ने एआई की मदद से दिल की बीमारियों का पता लगाने का तरीका निकाला है. रिसर्चर ने मरीजों के रेगुलर स्कैन को एआई की मदद से नए तरीके से एनालाइज कर यह पता लगाया कि दिल के चारों ओर कितना फैट जमा है. यह फैट आगे चलकर सूजन और दूसरी बीमारियों का कारण बन सकता है. एआई के बिना इसका पता लगा पाना असंभव है.
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:18:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Galaxy Z TriFold से नहीं भरा सैमसंग का मन! अब और भी बड़ा फोन बनाने पर कर रही है काम</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy Z TriFold Wide: दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने कुछ महीने पहले ही Galaxy Z TriFold को लॉन्च किया था, जिसमें 10 इंच का मेन डिस्प्ले है. अब लगता है कि कंपनी का इससे मन नहीं भरा है और वह और भी बड़ा ट्राईफोल्ड फोन बनाने में जुटी हुई है. अब कंपनी उन लोगों के लिए ट्राईफोल्ड बना रही है, जो लैपटॉप जैसा फोन अपने साथ कैरी करना चाहते हैं. इसके लिए सैमसंग ने एक पेटेंट दायर किया है. इससे पता चलता है कि सैमसंग का अपकमिंग फोन Galaxy Z TriFold Wide मौजूदा मॉडल Galaxy Z TriFold से भी बड़ा होगा. आइए जानते हैं कि इस बारे में और क्या-क्या जानकारी सामने आई है.&amp;nbsp;
क्या Galaxy Z TriFold Wide पर हो रहा है काम?
पेटेंट से पता चलता है कि अपकमिंग फोन Galaxy Z TriFold जैसा ही दिखेगा, लेकिन दोनों में एक बड़ा अंतर होगा. यह फोन फोल्ड होने पर किसी नॉर्मल स्मार्टफोन की तरह लंबा नजर नहीं आएगा बल्कि इसका फॉर्म फैक्टर फोल्डेबल आईफोन जैसा होगा. यानी यह फोन दिखने में लंबे से ज्यादा चौड़ा नजर आएगा. इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी Galaxy Z TriFold Wide बनाने के बारे में सोच सकती है. बता दें कि पिछले कुछ समय से Wide फोन की पॉपुलैरिटी लगातार बढ़ रही है. ऐप्पल भी वाइड फॉर्म फैक्टर वाला फोल्डेबल फोन लॉन्च करेगी. वहीं चाइनीज कंपनी Huawei भी इसी फॉर्म फैक्टर में Pura X Max फोन लॉन्च कर चुकी है.
क्या भविष्य की झलक आने लगी है नजर?
पिछले एक-दो सालों से फोल्डेबल फोन लोगों की पसंद बनते जा रहे हैं और डिस्प्ले में क्रीज विजिबल होने के बाद भी लोग इन्हें खरीद रहे हैं. इन दिनों मार्केट में Galaxy Z Fold 7 और Oppo Find N6 जैसे दमदार ऑप्शन भी अवेलेबल हैं. अब कंपनियां ट्राईफोल्ड फोन की तरफ चल चुकी हैं. सैमसंग से पहले चाइनीज कंपनी Huawei भी ट्राईफोल्ड फोन लॉन्च कर चुकी है. आज के हिसाब से ये फोन भले ही महंगे एक्सपेरिमेंट लगते हैं, लेकिन आने वाले समय में ये फोन नॉर्मल हो सकते हैं.&amp;nbsp;
ओप्पो भी बना चुकी है ट्राईफोल्ड फोन, शाओमी भी करेगी लॉन्च&amp;nbsp;
आज भले ही मार्केट में ट्राईफोल्ड फोन गिने-चुने नजर आ रहे हैं, लेकिन कंपनियां इन्हें लेकर काफी प्लानिंग कर चुकी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ओप्पो ने ट्राईफोल्ड फोन के कई प्रोटोटाइप तैयार किए थे, लेकिन इन्हें मार्केट में नहीं उतारा. ऐसे फोन बनाने और बेचने की लागत के चलते ओप्पो ने इस सेगमेंट में एंट्री नहीं की. दूसरी तरफ एक और चाइनीज कंपनी शाओमी भी ट्राईफोल्ड फोन पर काम कर रही है. इसका डिजाइन Huawei के Mate XT Ultimate जैसा हो सकता है और इसे इस साल के आखिर तक लॉन्च किया जा सकता है.
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:18:23 +0530</pubDate>
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<title>डेटा खत्म होने से परेशान? बिना प्लान बदले ऐसे बचाएं Mobile Data, ये ट्रिक जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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<description><![CDATA[ डेटा खत्म होने से परेशान? बिना प्लान बदले ऐसे बचाएं Mobile Data, ये ट्रिक जानकर रह जाएंगे हैरान ]]></description>
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:18:22 +0530</pubDate>
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<title>YouTube Shorts हमेशा के लिए हो जाएंगे बंद, कंपनी ले आई नई सेटिंग, ऐसे करें ऑन</title>
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<description><![CDATA[ How To Turn Off Youtube Shorts: यूट्यूब शॉर्ट्स से परेशान हो चुके यूजर्स के लिए कंपनी ने एक नया ऑप्शन दिया है. अगर आप शॉर्ट्स देखते हुए अपना टाइम खराब नहीं करना चाहते तो इस ऑप्शन का यूज कर शॉर्ट्स को हमेशा अपनी यूट्यूब से हटा सकते हैं. दरअसल, यूट्यूब पर पहले ही शॉर्ट्स के लिए टाइम लिमिट सेट करने का ऑप्शन था, लेकिन अब इसे अपडेट किया गया है. पहले कम से कम 15 मिनट का टाइम सेट किया जा सकता था, लेकिन अब इसे जीरो करने का ऑप्शन भी आ गया है. इस तरह आप शॉर्ट्स को परमानेंटली बंद कर सकते हैं. यह फीचर रोल आउट होना शुरू हो गया है.
किन लोगों के काम आएगा यह फीचर?
जो लोग शॉर्ट्स देखने की आदत से परेशान हो चुके हैं, उनके लिए यह फीचर बड़े काम का है. इसके अलावा अब पैरेंट्स के पास भी अपने बच्चों के शॉर्ट्स देखने की आदत छुड़ाने का नया तरीका आ गया है. वो चाहें तो यूट्यूब ऐप में शॉर्ट्स की टाइम लिमिट जीरो सेट कर इसे पूरी तरह बंद कर सकते हैं. जैसे ही शॉर्ट्स के लिए टाइम लिमिट जीरो पर सेट की जाएगी, फीड में जाने पर भी शॉर्ट्स नजर नहीं आएंगे. यहां पॉप-अप मैसेज के जरिए बताया जाएगा कि आपने टाइम लिमिट जीरो पर सेट कर ली है.
टीन अकाउंट्स नहीं हटा सकेंगे लिमिट
अगर आपको लगता है कि शॉर्ट्स की टाइम लिमिट को बच्चे हटा सकते हैं तो ऐसा नहीं होने वाला है. गूगल फैमिली लिंक से मैनेज होने वाले टीन अकाउंट से इस टाइमर को चेंज नहीं किया जा सकेगा. इससे पैरेंट्स को ज्यादा कंट्रोल मिलेंगे और बच्चे अपने अकाउंट से इस सेटिंग को बदल नहीं पाएंगे.
कैसे जीरो पर सेट करें टाइम लिमिट?
Youtube ने शॉर्ट्स की टाइम लिमिट सेट करने का ऑप्शन भले ही दे दिया है, लेकिन इसे काफी अंदर हाइड किया गया है. यह टाइमर जीरो पर सेट करने के लिए सबसे पहले Youtube ऐप ओपन करें और अपने प्रोफाइल आइकन पर टैप करें. इसके बाद यहां दिख रहे सेटिंग आइकन पर टैप करें. इसमें आपको टाइम मैनेजमेंट का ऑप्शन नजर आएगा. इस पर टैप करने के बाद आपको स्क्रॉल डाउन करने पर डेली शॉर्ट्स फीड लिमिट का ऑप्शन दिख जाएगा. अब इसके आगे बने टॉगल पर टैप करें. यहां आपको कई ऑप्शन दिखेंगे, जिसमें से जीरो मिनट को सेलेक्ट कर लें. इस तरह आप शॉर्ट्स के लिए टाइम लिमिट सेट कर पाएंगे.
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<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:18:22 +0530</pubDate>
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<title>यूट्यूब पर 5 लाख व्यूज आ रहे हैं तो कितनी होगी कमाई? जानें एक वीडियो पर कितना मिलेगा पैसा</title>
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<description><![CDATA[ YouTube Earning: यूट्यूब पर वीडियो डालकर आप मोटी कमाई कर सकते हैं. कई कंटेट क्रिएटर हर महीने इस प्लेटफॉर्म से लाखों रुपये कमा रहे हैं. इस प्लेटफॉर्म की खास बात है कि आप जितना कंटेट डालेंगे, आपकी कमाई उतनी ही ज्यादा होगी. यूट्यूब वीडियो पर व्यूज के हिसाब से पैसा मिलता है. इसलिए क्रिएटर्स की कोशिश रहती है कि उसका वीडियो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे. आज हम जानेंगे कि अगर यूट्यूब पर आपके किसी वीडियो पर 5 लाख व्यूज आ जाए तो कितनी कमाई हो सकती है.
YouTube Earning के लिए यह चीज जरूरी
अगर आप नए कंटेट क्रिएटर हैं तो बता दें कि यूट्यूब से कमाई के लिए आपका यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम (YPP) में शामिल होना जरूरी है. इसके बाद ही आप कमाई शुरू कर सकते हैं. इस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आपके चैनल पर कम से कम 1,000 सब्सक्राइबर्स और 4,000 घंटे का वॉच टाइम होना जरूरी है. इसके बिना आपके वीडियो मॉनेटाइज नहीं होंगे.&amp;nbsp;
5 लाख व्यूज आने पर कितनी कमाई हो सकती है?
किसी वीडियो पर 5 लाख व्यूज आने से कितनी कमाई होगी? इस सवाल का कोई सटीक जवाब नहीं है, लेकिन एक मोटा अंदाजा लगाया जा सकता है. यूट्यूब वीडियो पर कमाई के लिए चैनल, वीडियो फॉर्मेट, कैटेगरी और ऑडियंस समेत कई फैक्टर्स को ध्यान में रखती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल यूट्यूब क्रिएटर्स को 1,000 व्यूज पर 50-200 रुपये तक की कमाई हो रही है. ऐसे में अगर अंदाजा लगाया जाए तो आप 5 लाख व्यूज पर लगभग एक लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. बता दें कि यूट्यूब को एडवरटाइजर्स और सब्सक्रिप्शन से जो कमाई होती है, उसमें से 55 प्रतिशत क्रिएटर्स, आर्टिस्ट्स और मीडिया कंपनी को दिया जाता है. बाकी हिस्सा कंपनी अपने पास रखती है.
YouTube पर कमाई बढ़ाने के तरीके क्या हैं?

यूट्यूब पर ग्रो करने के लिए वीडियो की क्वालिटी को टॉप क्लास रखें.&amp;nbsp;
हमेशा ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर वीडियो बनाने की कोशिश करें.
अपने वीडियो को अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर शेयर करें ताकि उसे ज्यादा रीच मिल सके.
अपने वीडियो को ऐसा बनाएं कि उसे अलग-अलग देशों के लोग देख सकें. इससे ज्यादा कमाई होती है.

Youtube पर ऐसे भी कर सकते हैं कमाई
वीडियो के अलावा यूट्यूब पर कमाई के कई रास्ते और भी हैं. आप एफिलिएट मार्केटिंग, स्पॉन्सर्ड कंटेट, सुपरचैट और मेंबरशिप और मर्चेंडाइज के जरिए भी कमाई कर सकते हैं. इन सब कामों के लिए आपके फॉलोअर्स की संख्या लाखों में होना जरूरी है.
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<title>Upcoming Foldable Smartphones: iPhone Fold से लेकर Samsung Z Fold 8 तक, भारत में जल्द लॉन्च होंगे ये 5 धांसू डिवाइस</title>
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<description><![CDATA[ Upcoming Foldable Smartphones: अब फोल्डेबल स्मार्टफोन सिर्फ एक्सपेरिमेंट नहीं रहे बल्कि टेक कंपनियों के बीच सबसे बड़ी टक्कर का मैदान बनते जा रहे हैं. साल 2026 खास तौर पर काफी रोमांचक होने वाला है क्योंकि कई बड़े ब्रांड अपने नए और एडवांस फोल्डेबल डिवाइस लॉन्च करने की तैयारी में हैं. इस रेस में Samsung से लेकर Apple तक शामिल हैं.
Samsung Galaxy Z Fold 8 और Z Fold 8 Wide
फोल्डेबल सेगमेंट में Samsung एक बार फिर अपनी पकड़ मजबूत करने वाला है. कंपनी इस बार दो नए बुक-स्टाइल फोल्डेबल लॉन्च कर सकती है Galaxy Z Fold 8 और एक नया वेरिएंट Z Fold 8 Wide. Galaxy Z Fold 8 में इस बार 5000mAh की बड़ी बैटरी मिलने की उम्मीद है जो पिछले कई सालों में एक बड़ा अपग्रेड माना जा रहा है. साथ ही S Pen सपोर्ट की वापसी की भी चर्चा है.
वहीं Z Fold 8 Wide एक अलग डिजाइन के साथ आ सकता है. इसमें करीब 5.4 इंच का कवर डिस्प्ले और 7.6 इंच की बड़ी इनर स्क्रीन मिल सकती है. दोनों फोन में पावरफुल Snapdragon 8 Elite Gen 5 for Galaxy प्रोसेसर और 45W फास्ट चार्जिंग मिलने की संभावना है. इनकी लॉन्चिंग जुलाई में Galaxy Unpacked इवेंट में हो सकती है.
Vivo X Fold 6
Vivo भी इस रेस में पीछे नहीं है. Vivo X Fold 6 को लेकर खबर है कि इसमें 200MP का दमदार प्राइमरी कैमरा दिया जा सकता है जो OIS के साथ आएगा.
इसके अलावा 50MP का टेलीफोटो लेंस भी मिलने की उम्मीद है जिससे यह फोन फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए खास बन सकता है. माना जा रहा है कि यह डिवाइस जुलाई 2026 के आसपास ग्लोबली लॉन्च हो सकता है.
Google Pixel 11 Pro Fold
Google भी अपने नए फोल्डेबल Pixel 11 Pro Fold के साथ मार्केट में एंट्री को और मजबूत करने जा रहा है. लीक हुई इमेजेस के अनुसार, इसमें नया डिजाइन और ट्रिपल कैमरा सेटअप देखने को मिल सकता है. यह फोन Google के 3nm Tensor G6 चिपसेट पर काम कर सकता है जिससे परफॉर्मेंस और AI क्षमताओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा. इसकी लॉन्चिंग अगस्त 2026 में होने की संभावना है.
Apple iPhone Fold
फोल्डेबल सेगमेंट में सबसे ज्यादा चर्चा Apple के iPhone Fold को लेकर है. माना जा रहा है कि यह सितंबर 2026 में iPhone 18 Pro सीरीज के साथ लॉन्च हो सकता है. इसमें करीब 7.8 इंच की मेन स्क्रीन और 5.5 इंच की बाहरी डिस्प्ले मिल सकती है.
साथ ही इसमें A20 चिप दी जा सकती है जो इसे बेहद पावरफुल बनाएगी. खास बात यह है कि Apple इसमें Touch ID को पावर बटन में वापस ला सकता है. कीमत की बात करें तो यह प्रीमियम सेगमेंट में आएगा और इसकी कीमत लगभग 2 लाख रुपये से ऊपर जा सकती है.
फोल्डेबल मार्केट में बढ़ती टक्कर
2026 फोल्डेबल स्मार्टफोन के लिए एक बड़ा साल बनने जा रहा है. Samsung, Vivo, Google और Apple जैसे दिग्गज ब्रांड इस सेगमेंट को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-सा फोल्डेबल फोन यूजर्स का दिल जीतता है और कौन मार्केट में बाजी मारता है.
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<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अलर्ट! नए स्कैम से iPhone यूजर्स को किया जा रहा टारगेट, ईमेल पर मिल रही यह वॉर्निंग</title>
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<description><![CDATA[ iPhone iCloud Scam: iPhone यूजर्स को इन दिनों एक नए स्कैम में टारगेट किया जा रहा है. साइबर अटैकर्स आईफोन यूजर्स के पासवर्ड, बैंकिंग डिटेल्स और पर्सनल डेटा चोरी करने के लिए एक नया स्कैम चला रहे हैं. इसमें यूजर के पास एक फर्जी ईमेल भेजा जाता है. इसमें लिखा होता है कि आपकी iCloud स्टोरेज फुल हो गई है. अगर इसे अभी अपग्रेड नहीं किया गया तो फोटो-वीडियो और बैकअप फाइल्स समेत सारा डेटा डिलीट हो जाएगा. अगर कोई यूजर ईमेल पर भरोसा कर अपग्रेड करने के लिंक पर क्लिक कर देता है तो उसे फर्जी वेबसाइट पर रिडायरेक्ट कर डेटा चुरा लिया जाता है. आइए जानते हैं कि iPhone iCloud Scam से कैसे बचा जा सकता है.
कैसे काम करता है iPhone iCloud Scam?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे पहले यूजर के पास एक ईमेल आता है, जिसमें आईक्लाउड स्टोरेज फुल होने की बात लिखी होती है. कई ईमेल में डेटा डिलीट होने की 48 घंटे की डेडलाइन का भी जिक्र होता है. इसके नीचे अपग्रेड करने के लिए एक बटन या लिंक दिया जाता है. यह लिंक स्टोरेज अपग्रेड करने का न होकर फिशिंग वेबसाइट का होता है. जैसे ही यूजर इस पर क्लिक करता है, उसे फिशिंग वेबसाइट पर रिडायरेक्ट कर दिया जाता है. अगर कोई यूजर इस पर पेमेंट डिटेल्स डालता है तो उसके गलत हाथों में पड़ने का खतरा रहता है.
इन तरीकों से यूजर पर दबाव बना रहे स्कैमर्स
इस स्कैम में स्कैमर्स अलग-अलग तरीकों से लोगों पर दबाव बना रहे हैं ताकि वो फिशिंग वेबसाइट के लिंक पर क्लिक कर दें. इसके लिए उन्हें अकाउंट ब्लॉक करने से लेकर अगले कुछ घंटों में फोटो-वीडियो डिलीट करने की धमकी दी जाती है. इसके लिए स्कैमर बार-बार ईमेल भेजते हैं. जानकारों का कहना है कि ऐसा लोगों पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है ताकि वो जल्दी में अपना डेटा हैकर्स की वेबसाइट पर अपलोड कर दें. ऐसे ईमेल दिखने में एकदम असली जैसे होते हैं और इन पर ऐप्पल की ब्रांडिंग का भी इस्तेमाल किया जाता है.
ऐप्पल यूजर्स को क्या करना चाहिए?

इस स्कैम से दुनियाभर के ऐप्पल यूजर्स को टारगेट किया जा रहा है. ऐसे स्कैम से बचने के लिए आपको किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति से आए ईमेल या मैसेज को ओपन नहीं करना चाहिए. साथ ही ऐसे किसी भी ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक कर अपनी पर्सनल डिटेल्स शेयर न करें.
आप ईमेल पर भरोसा करने की बजाय डिवाइस सेटिंग में जाकर iCloud स्टोरेज देख सकते हैं.&amp;nbsp;
ऐप्पल की तरफ से कभी भी यूजर के पास बार-बार ईमेल भेजकर पेमेंट करने के लिए नहीं कहा जाता. इसलिए ऐसे ईमेल से सावधान रहें.

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<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:34 +0530</pubDate>
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<title>Tech Tips: क्या लैपटॉप की जगह ले सकता है टैबलेट? रिप्लेस करने से पहले जान लें सारे फायदे&#45;नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ Can Tablet Replace Laptop: क्या आप अपने पुराने लैपटॉप को टैबलेट से रिप्लेस करने की सोच रहे हैं? अगर आपका जवाब हां है तो आप अकेले नहीं है. कई लोग ऐसे हैं, जो लैपटॉप की जगह टैबलेट यूज करना चाहते हैं. आजकल मार्केट में टैबलेट के कई ऐसे पावरफुल ऑप्शंस मौजूद हैं, जो कई मामलों में लैपटॉप की जगह ले सकते हैं. हालांकि, यह बदलाव जितना दिखता है, उतना आसान नहीं है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि लैपटॉप के मुकाबले टैबलेट के फायदे-नुकसान क्या हैं और किन कामों में आप लैपटॉप को टैबलेट से रिप्लेस कर सकते हैं.
सबसे पहले देखें टैबलेट के फायदे
पोर्टेबिलिटी - लैपटॉप के मुकाबले टैबलेट पतला और हल्का होता है. इसलिए इन्हें कैरी करना और एक से दूसरी जगह ले जाना आसान होता है. अगर आपको ट्रैवल ज्यादा करना पड़ता है तो टैबलेट एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है.
बैटरी लाइफ - बैटरी लाइफ के मामले में भी टैबलेट लैपटॉप पर भारी पड़ता है. ज्यादातर लैपटॉप एक बार चार्ज करने पर 4-8 घंटे तक चलते हैं, वहीं टैबलेट आसानी से 8-12 घंटे निकाल देते हैं. ऐसे में ट्रैवलिंग के दौरान आपको टैबलेट को चार्ज करने की टेंशन कम रहेगी.
टच इंटरफेस- अगर आपको ब्राउजिंग, रीडिंग या फोटो एडिटिंग जैसे टास्क करने हैं तो टैबलेट बेहतर च्वॉइस हो सकता है. इसका टच इंटरफेस आपको हर सॉफ्टवेयर और ऐप तक ईजी एक्सेस देगा. आजकल कई लैपटॉप में भी टच स्क्रीन मिलती है, लेकिन इनकी कीमत ज्यादा होती है.&amp;nbsp;
एक्सेसरीज - एक्सेसरीज के मामले में भी टैबलेट काफी आगे है. इसके साथ आपको डिटैच हो जाने वाला कीबोर्ड और स्टायलस मिल जाता है. लैपटॉप के साथ ऐसी एक्सेसरीज नहीं मिलती.
टैबलेट के नुकसान क्या हैं?
हैवी वर्कलोड में दिक्कत- अगर आप वीडियो एडिटिंग, कोडिंग, गेमिंग और दूसरे हैवी टास्क करना चाहते हैं तो लैपटॉप का कोई जवाब नहीं है. ऐसे हैवी टास्क के लिए आपको हाई एंड लैपटॉप की जरूरत पड़ेगी. टैबलेट पर ये टास्क कंप्लीट नहीं किए जा सकते.
कनेक्टिविटी के लिमिटेड फीचर्स- लैपटॉप में टैबलेट के मुकाबले ज्यादा कनेक्टिविटी ऑप्शंस मिलते हैं. लैपटॉप के साथ एक्सटर्नल ड्राइव्स और मॉनिटर भी यूज किए जा सकते हैं. दूसरी तरफ टैबलेट में पोर्ट्स भी कम होते हैं और यह वायरलेस कनेक्टिविटी पर ज्यादा डिपेंड होता है.
मल्टीटास्किंग में भी पीछे - भले ही टैबलेट पावरफुल प्रोसेसर के साथ आते हैं, लेकिन मल्टीटास्किंग में ये लैपटॉप का मुकाबला नहीं कर सकते. इसी तरह बड़ी फाइल्स, एक्सटर्नल ड्राइव्स आदि को हैंडल करना लैपटॉप पर आसान होता है.
इन कामों में लैपटॉप को रिप्लेस कर सकता है टैबलेट

जनरल यूज - अगर आपको इंटरनेट ब्राउजिंग, ईमेल्स, रीडिंग, वीडियो कॉल्स जैसे बेसिक टास्क करने हैं तो टैबलेट आपके काम आ सकता है.
कंटेट कंजप्शन- अगर आप मूवीज और वेब सीरीज आदि देखने के लिए ऑप्शन देख रहे हैं तो टैबलेट आपके लिए लैपटॉप से बेहतर साबित हो सकता है.

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<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या है Emergency SOS फीचर? जानिए कैसे मुश्किल समय में आता है काम और क्या है फोन में सेटअप का तरीका</title>
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<description><![CDATA[ Emergency SOS Feature: आज के स्मार्टफोन सिर्फ कॉल और इंटरनेट तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये हमारी सुरक्षा का भी अहम हिस्सा बन चुके हैं. Emergency SOS एक ऐसा फीचर है जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाने के लिए बनाया गया है. इस फीचर की मदद से आप कुछ ही सेकंड में अपने चुने हुए कॉन्टैक्ट्स या इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट भेज सकते हैं. अधिकतर स्मार्टफोन्स में यह सुविधा पहले से मौजूद होती है चाहे आप Android फोन इस्तेमाल करते हों या iOS डिवाइस.
मुश्किल समय में कैसे करता है काम?
Emergency SOS फीचर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बिना फोन अनलॉक किए भी काम करता है. जैसे ही आप पावर बटन को कई बार तेजी से दबाते हैं या एक खास बटन कॉम्बिनेशन इस्तेमाल करते हैं फोन तुरंत अलर्ट भेज देता है. इस अलर्ट में आपकी लोकेशन, मैसेज और कभी-कभी ऑटोमैटिक कॉल भी शामिल होती है.
इससे आपके परिवार या दोस्त तुरंत समझ जाते हैं कि आप किसी परेशानी में हैं और आपकी लोकेशन के आधार पर मदद पहुंचा सकते हैं. यह फीचर खासतौर पर महिलाओं, बुजुर्गों और उन लोगों के लिए बहुत उपयोगी है जो अक्सर अकेले सफर करते हैं.
फोन में Emergency SOS कैसे सेट करें?
Android फोन में सेटअप
अगर आप Android स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं तो सेटिंग्स में जाकर Safety &amp;amp; Emergency या Emergency SOS विकल्प खोजें. इसके बाद Emergency Contacts में जाकर उन लोगों के नंबर जोड़ें जिन्हें आप इमरजेंसी में सूचना देना चाहते हैं. कुछ फोन में आपको यह भी विकल्प मिलता है कि पावर बटन को 3-5 बार दबाने पर SOS एक्टिव हो जाए. इसे ऑन करना न भूलें.
iPhone में सेटअप
अगर आप iPhone इस्तेमाल करते हैं तो सेटिंग्स में Emergency SOS विकल्प पर जाएं. यहां आप Emergency Contacts जोड़ सकते हैं और Call with Side Button या Auto Call फीचर को ऑन कर सकते हैं. इसके बाद जरूरत पड़ने पर साइड बटन और वॉल्यूम बटन को एक साथ दबाकर SOS एक्टिव किया जा सकता है.
किन बातों का रखें ध्यान?
Emergency SOS फीचर को सेट करते समय सही और भरोसेमंद कॉन्टैक्ट्स ही जोड़ें. साथ ही समय-समय पर यह चेक करते रहें कि फीचर ठीक से काम कर रहा है या नहीं. इसके अलावा, अपने परिवार के लोगों को भी इस फीचर के बारे में जानकारी दें ताकि वे जरूरत पड़ने पर इसका सही इस्तेमाल कर सकें.
क्यों जरूरी है यह फीचर?
आज के समय में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है. ऐसे में Emergency SOS फीचर एक छोटा लेकिन बेहद जरूरी टूल साबित होता है. यह आपको मुश्किल हालात में अकेला नहीं रहने देता और कुछ ही सेकंड में मदद तक पहुंचने का रास्ता आसान बना देता है. अगर आपने अभी तक अपने फोन में Emergency SOS सेट नहीं किया है तो इसे आज ही एक्टिव करें. क्योंकि संकट कभी भी आ सकता है लेकिन तैयारी पहले से होनी चाहिए.
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<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Google Chrome पर एक गलत क्लिक और आपका सारा डेटा खतरे में! सरकार की चेतावनी ने बढ़ाई टेंशन</title>
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<description><![CDATA[ Google Chrome Users at Risk: अगर आप रोजाना Google Chrome का इस्तेमाल करते हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. भारत सरकार ने Chrome यूजर्स के लिए एक गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है जिसमें बताया गया है कि एक छोटी सी गलती भी आपके निजी डेटा को खतरे में डाल सकती है.
किसने जारी की चेतावनी?
यह चेतावनी Indian Computer Emergency Response Team (CERT-In) द्वारा जारी की गई है जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है. एजेंसी ने इसे हाई सीवेरिटी यानी गंभीर खतरे वाली समस्या बताया है.
क्या है असली खतरा?
रिपोर्ट के अनुसार, Google Chrome में कई सुरक्षा खामियां पाई गई हैं जिनका फायदा उठाकर हैकर्स आपके सिस्टम में घुस सकते हैं. वे आपके कंप्यूटर पर कंट्रोल हासिल कर सकते हैं, जरूरी जानकारी चुरा सकते हैं या सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि हैकर्स आपको किसी गलत लिंक पर क्लिक करने या खतरनाक वेबसाइट खोलने के लिए फंसा सकते हैं और बस एक क्लिक से ही आपका डेटा जोखिम में आ सकता है.
कैसे हो सकता है नुकसान?
अगर इन कमजोरियों का फायदा उठाया गया, तो हैकर्स आपके सेव किए गए पासवर्ड, पर्सनल जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा वे आपके ब्राउजर या पूरे सिस्टम को क्रैश भी कर सकते हैं. यह खतरा खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा है जो Chrome का इस्तेमाल बैंकिंग, ऑफिस वर्क या निजी कामों के लिए करते हैं.
समस्या कहां है?
ये सुरक्षा खामियां Chrome के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी हैं जैसे वेब कंटेंट, मीडिया प्रोसेसिंग और बैकग्राउंड सिस्टम. हालांकि तकनीकी भाषा थोड़ी जटिल है लेकिन आसान शब्दों में समझें तो पुराने वर्जन का Chrome सुरक्षित नहीं है.
कौन-से यूजर्स हैं ज्यादा खतरे में?
अगर आपका Google Chrome अपडेट नहीं है और आप पुराना वर्जन इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप पहले से ही जोखिम में हो सकते हैं. Windows, macOS और Linux तीनों प्लेटफॉर्म पर यह समस्या देखी गई है.
बचाव कैसे करें?
अच्छी बात यह है कि इस समस्या का समाधान जारी कर दिया गया है. आपको बस अपना Chrome ब्राउजर तुरंत अपडेट करना है. नियमित रूप से अपडेट करने से आप ऐसे खतरों से बच सकते हैं.
Chrome अपडेट करने का आसान तरीका

सबसे पहले अपने कंप्यूटर में Chrome खोलें.
ऊपर दाईं ओर दिए गए तीन डॉट्स पर क्लिक करें.
Settings में जाएं और About Chrome विकल्प खोलें.
यहां Chrome खुद ही नए अपडेट को चेक करके इंस्टॉल कर लेगा.
इसके बाद Restart पर क्लिक करें ताकि अपडेट पूरी तरह लागू हो जाए.

थोड़ी सी सावधानी और समय पर अपडेट करके आप अपने डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं. इसलिए अगली बार कोई भी लिंक खोलने से पहले सोचें क्योंकि एक गलत क्लिक बड़ा नुकसान कर सकता है.
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<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Tech Tips: आपके आईफोन हॉटस्पॉट से कौन यूज कर रहा है डेटा? चुटकियों में ऐसे लगाएं पता</title>
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<description><![CDATA[ iPhone Hotspot Data: अगर आप अपने आईफोन से हॉटस्पॉट के जरिए डेटा शेयर करते हैं, लेकिन यह पता नहीं लगा पा रहे हैं कि इस डेटा को यूज कौन कर रहा है तो घबराने की जरूरत नहीं है. अब ऐप्पल ने यह पता करना आसान कर दिया है. iOS 26.4 अपडेट में ऐप्पल ने पर्सनल हॉटस्पॉट यूसेज को हिडन स्पॉट से एक सुविधाजनक लोकेशन पर ट्रांसफर कर दिया है. इसका फायदा यह हुआ है कि यूजर्स कुछ ही स्टेप्स को फॉलो कर यह पता लगा सकते हैं कि उनके आईफोन से हॉटस्पॉट कौन-सा डिवाइस यूज कर रहा है. इससे अनजान डिवाइस को ब्लॉक करना भी आसान हो गया है.
अपडेट के बाद बदल गया iPhone Hotspot Data का &#039;एड्रेस&#039;
ऐप्पल में पहले से यह पता करने का तरीका है कि आपका हॉटस्पॉट डेटा कौन यूज कर रहा है, लेकिन यह अभी तक सेलुलर सेटिंग में छिपा होता था, जिससे ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती थी. अब नई अपडेट के बाद यह पर्सनल हॉटस्पॉट मेनू में दिखने लगा है, जिससे इस पर नजर रखना आसान हो गया है. हालांकि, इसके लिए आपके आईफोन का अपडेटेड होना जरूरी है. iOS 26.4 अपडेट में यह बदलाव किया गया है.&amp;nbsp;
कैसे लगाएं iPhone Hotspot Data का पता?
सबसे पहले आईफोन में सेटिंग ओपन करें और पर्सनल हॉटस्पॉट पर टैप करें. यहां मैक्सिमाइज कंपेटिबिलिटी टॉगल के नीचे दिए गए डेटा यूसेज ऑप्शन पर टैप करें. यहां आपको आईफोन से कनेक्टेड सारे डिवाइसेस की लिस्ट दिख जाएगी. साथ ही यह भी पता चल जाएगा कि किस डिवाइस ने कितना डेटा कंज्यूम कर लिया है. इसमें आपको ऐप्पल डिवाइस नाम से दिख जाएंगे, वहीं एंड्रॉयड और विंडोज पीसी आदि &#039;अदर डिवाइस&#039; के ग्रुप में दिखेंगे.
5G हॉटस्पॉट से कैसे बढ़ाएं स्पीड?
अगर आपके फोन में 5G नेटवर्क है, लेकिन हॉटस्पॉट के जरिए इंटरनेट स्पीड एकदम स्लो मिल रही है तो आपको सेटिंग में बदलाव करने की जरूरत है.दरअसल, ज्यादातर स्मार्टफोन बाय डिफॉल्ट 2.4GHz बैंड पर वाईफाई हॉटस्पॉट क्रिएट करते हैं. यह बैंड पुराने डिवाइसेस के लिए कंपैटिबल भी होता है और इसकी रेंज भी ज्यादा होती है, लेकिन स्पीड के मामले में यह पीछे छूट जाता है. इसलिए इसे बदलना जरूरी है.&amp;nbsp;
हॉटस्पॉट के जरिए कैसे पाएं फास्ट इंटरनेट?
अगर आप हॉटस्पॉट पर फास्ट इंटरनेट पाना चाहते हैं तो 2.4GHz बैंड को बदलकर 5GHz पर सेट करना होगा. यह हायर डेटा ट्रांसफर रेट को सपोर्ट करता है. मॉडर्न स्मार्टफोन में आपको हॉटस्पॉट या टेथरिंग सेटिंग में आपको यह ऑप्शन मिल जाएगा. एक बार इनेबल होने के बाद फास्ट इंटरनेट भी मिलेगा और लेटेंसी भी कम हो जाएगी.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Iron Body Vs Plastic Body Cooler: कौन देगा AC जैसी ठंडी हवा? खरीदने से पहले जानिए कौन खाता है ज्यादा बिजली</title>
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<description><![CDATA[ Iron Body Vs Plastic Body Cooler: जैसे ही गर्मी अपने चरम पर पहुंचती है, घर में ठंडक बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है. हर कोई AC नहीं खरीद सकता ऐसे में एयर कूलर एक किफायती और असरदार विकल्प बनकर सामने आता है. लेकिन बाजार में मिलने वाले लोहा (मेटल) और प्लास्टिक कूलर के बीच सही चुनाव करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है.
लोहे वाला कूलर
लोहा कूलर लंबे समय से इस्तेमाल होते आ रहे हैं और अपनी मजबूती के लिए जाने जाते हैं. इनका बॉडी स्ट्रक्चर मजबूत होता है जिससे ये लंबे समय तक चलते हैं. इसके अलावा, इनमें आमतौर पर बड़े फैन और ज्यादा पानी की क्षमता होती है जो बेहतर कूलिंग देने में मदद करती है. हालांकि, इनका वजन ज्यादा होता है जिससे इन्हें इधर-उधर ले जाना आसान नहीं होता. साथ ही, समय के साथ इनमें जंग लगने की समस्या भी हो सकती है खासकर अगर देखभाल ठीक से न की जाए.
प्लास्टिक वाला कूलर
प्लास्टिक कूलर आजकल ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं. ये वजन में हल्के होते हैं जिससे इन्हें आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है. इनका डिजाइन भी ज्यादा आकर्षक और मॉडर्न होता है जो घर के इंटीरियर के साथ बेहतर मेल खाता है. सबसे बड़ी बात, इनमें जंग लगने का खतरा नहीं होता. लेकिन कई बार प्लास्टिक बॉडी ज्यादा मजबूत नहीं होती और लंबे समय में टूट-फूट का खतरा बना रहता है.
कूलिंग में कौन है बेहतर?
अगर बात सिर्फ ठंडी हवा की करें तो कूलिंग पर असर कूलर के मटेरियल से ज्यादा उसके फैन, मोटर और कूलिंग पैड पर निर्भर करता है. अच्छे क्वालिटी के हनीकॉम्ब पैड और पावरफुल मोटर वाला कूलर चाहे लोहा हो या प्लास्टिक, बेहतर कूलिंग देगा. हालांकि, बड़े साइज और हाई कैपेसिटी वाले मेटल कूलर आमतौर पर बड़े कमरों में ज्यादा असरदार साबित होते हैं.
बिजली खपत और मेंटेनेंस
दोनों तरह के कूलर अलग-अलग बिजली खपत करते हैं. लोहे वाले कूलर आमतौर पर प्लास्टिक वाले कूलर से ज्यादा बिजली खपत करते हैं. इसका कारण है इसका बड़ा साइज. दरअसल, लोहे वाले कूलर आमतौर पर बड़े साइज में होते हैं या फिर वह पुराने जमाने वाले होते हैं जिसमे बड़े वॉट वाला मोटर लगा होता है ज्यादा काफी ज्यादा बिजली खपत करता है.
वहीं, दूसरी ओर प्लास्टिक वाले कूलर में हल्का मोटर होता है जो कम बिजली खपत करता है. लेकिन मेंटेनेंस के मामले में प्लास्टिक कूलर थोड़ा आगे रहते हैं क्योंकि इनमें जंग या पेंट खराब होने जैसी समस्या नहीं होती. वहीं, मेटल कूलर को समय-समय पर साफ करना और पेंटिंग करवाना पड़ सकता है.
किसे खरीदना होगा सही फैसला?
अगर आप बड़े कमरे या खुले एरिया के लिए कूलर ढूंढ रहे हैं और भारी मशीन से दिक्कत नहीं है तो लोहा कूलर अच्छा ऑप्शन हो सकता है. लेकिन अगर आपको हल्का, पोर्टेबल और कम मेंटेनेंस वाला कूलर चाहिए तो प्लास्टिक कूलर बेहतर रहेगा. लोहा और प्लास्टिक कूलर दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं. सही चुनाव आपकी जरूरत, बजट और इस्तेमाल पर निर्भर करता है.
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Tech Tips: आपके फोन की चार्जिंग केबल कितनी लंबी है? iPhone और Android में छिपा है बड़ा फर्क, जानकर रह जाएंगे हैरान</title>
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:13 +0530</pubDate>
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<title>Android यूजर्स के लिए बड़ा झटका! इस तारीख के बाद बंद हो जाएगा आपका पसंदीदा ऐप, जानिए क्या है वजह</title>
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<description><![CDATA[ Microsoft Outlook Lite App: Microsoft ने अपने ईमेल ऐप Outlook Lite को बंद करने का फैसला लिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ऐप 26 मई 2026 के बाद सही तरीके से काम नहीं करेगा. हालांकि ऐप खुल तो जाएगा लेकिन इसके फीचर्स काम करना बंद कर देंगे. Outlook Lite को साल 2022 में लॉन्च किया गया था खासतौर पर ऐसे Android यूजर्स के लिए जिनके फोन में कम स्टोरेज होता है या जहां इंटरनेट स्पीड धीमी होती है.
क्यों लिया गया यह फैसला
Tech Crunch के अनुसार, Microsoft पहले ही इस ऐप को बंद करने की तैयारी कर चुका था. कंपनी ने 2025 में ही घोषणा कर दी थी कि Outlook Lite को Google Play Store से हटा दिया जाएगा और अक्टूबर 2025 से इसकी डाउनलोडिंग भी बंद कर दी गई थी. अब कंपनी चाहती है कि सभी यूजर्स मुख्य Outlook Mobile ऐप पर शिफ्ट हो जाएं जहां ज्यादा फीचर्स और बेहतर सपोर्ट मिलता है.
यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा
Neowin की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 25 मई 2026 के बाद Outlook Lite का इस्तेमाल करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. यूजर्स अपने मेलबॉक्स को एक्सेस नहीं कर पाएंगे और ऐप के जरूरी फीचर्स जैसे नेविगेशन और अन्य ऑप्शन काम नहीं करेंगे. इसलिए मौजूदा यूजर्स को जल्द से जल्द नए ऐप पर जाने की सलाह दी जा रही है ताकि उनका काम प्रभावित न हो.
क्या आपका डेटा सुरक्षित रहेगा?
अच्छी बात यह है कि इस बदलाव से यूजर्स का डेटा सुरक्षित रहेगा. ईमेल, कैलेंडर और अटैचमेंट्स डिलीट नहीं होंगे. यूजर्स अपने पुराने अकाउंट से लॉगिन करके नए Outlook Mobile ऐप में आसानी से अपना सारा डेटा वापस पा सकते हैं.
नए ऐप में कैसे करें स्विच
Microsoft ने यूजर्स के लिए ऐप बदलना आसान बना दिया है. Outlook Lite ऐप के अंदर ही Upgrade का ऑप्शन दिया गया है जिस पर क्लिक करने से यूजर सीधे Play Store पर पहुंच जाता है. वहां से Outlook Mobile ऐप डाउनलोड किया जा सकता है. इसके अलावा, यूजर्स खुद भी Play Store में जाकर ऐप सर्च करके इंस्टॉल कर सकते हैं. Outlook Lite का बंद होना उन यूजर्स के लिए बदलाव जरूर लाएगा जो हल्के ऐप पर निर्भर थे. लेकिन नए Outlook ऐप में ज्यादा फीचर्स और बेहतर अनुभव मिलने की उम्मीद है जिससे यूजर्स का काम और आसान हो सकता है.
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone Fold: भारत में कब लॉन्च होगा Apple का पहला फोल्डेबल फोन! अब तक इतनी डिटेल्स आ चुकी हैं सामने</title>
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<description><![CDATA[ iPhone Fold: टेक दुनिया में इस साल Apple अपने दो बड़े और चर्चित प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की तैयारी में है एक नया AI से लैस Siri और दूसरा बहुप्रतीक्षित iPhone Fold. हालांकि AI और फोल्डेबल स्मार्टफोन के मामले में कंपनी अपने टक्कर वाली कंपनियों से थोड़ी पीछे रही है क्योंकि आज लगभग हर स्मार्टफोन ब्रांड AI फीचर्स दे रहा है और फोल्डेबल फोन की शुरुआत Samsung ने 2019 में ही कर दी थी. इसके बावजूद Apple से उम्मीद की जा रही है कि वह इस सेगमेंट में कुछ अलग और प्रीमियम अनुभव लेकर आएगा.
कब आ सकता है iPhone Fold
हर साल की तरह इस बार भी सितंबर में Apple के नए iPhones लॉन्च होने की संभावना है. माना जा रहा है कि iPhone Fold को iPhone 18 Pro सीरीज के साथ पेश किया जा सकता है. हालांकि इसकी उपलब्धता को लेकर अभी पूरी तरह साफ तस्वीर सामने नहीं आई है. कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि लॉन्च के साथ ही बिक्री शुरू हो सकती है जबकि कुछ में प्रोडक्शन दिक्कतों के चलते देरी की बात कही गई है जिससे इसकी बिक्री 2027 तक खिसक सकती है.
डिजाइन और डिस्प्ले
लीक्स के मुताबिक iPhone Fold का डिजाइन ऐसा होगा जो अनफोल्ड होने पर ज्यादा बेहतर अनुभव देगा. बंद होने पर यह थोड़ा चौड़ा और छोटा दिख सकता है जबकि खोलने पर इसका लुक iPad mini जैसा महसूस हो सकता है. इसमें 5.5 इंच का बाहरी और 7.8 इंच का बड़ा अंदरूनी डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है.
डिस्प्ले के लिए कंपनी Samsung के लेटेस्ट M16 OLED पैनल का इस्तेमाल कर सकती है जो ज्यादा पावर एफिशिएंट होंगे. साथ ही, नई हिंज टेक्नोलॉजी स्क्रीन की क्रीज को काफी हद तक कम कर सकती है जिससे स्क्रीन ज्यादा स्मूद दिखेगी.
Face ID की जगह मिलेगा Touch ID?
डिजाइन को स्लिम रखने के लिए Apple इस बार Face ID को छोड़ सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी पावर बटन में ही Touch ID सेंसर दे सकती है. यह बदलाव फोन के पतले डिजाइन के कारण किया जा सकता है क्योंकि Face ID के कॉम्पोनेंट्स को फिट करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
कैमरा सेटअप
कैमरा की बात करें तो iPhone Fold में डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलने की उम्मीद है जिसमें 48MP का मेन और 48MP का अल्ट्रावाइड लेंस शामिल हो सकता है. इसमें टेलीफोटो लेंस नहीं दिया जा सकता. इसके अलावा, अंदर की स्क्रीन पर 24MP का अंडर-डिस्प्ले कैमरा और बाहरी स्क्रीन पर पंच-होल कैमरा मिलने की संभावना है जिससे यूजर्स को बेहतर वीडियो कॉलिंग और सेल्फी अनुभव मिल सके.
परफॉर्मेंस, स्टोरेज और बैटरी
परफॉर्मेंस के लिए iPhone Fold में Apple का अगला जेनरेशन A20 Pro चिपसेट दिया जा सकता है जो 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा. इससे फोन की स्पीड और पावर एफिशिएंसी दोनों बेहतर हो सकती हैं. फोन में 12GB RAM और 1TB तक स्टोरेज मिलने की उम्मीद है. बैटरी की बात करें तो इसमें 5,400mAh से 5,800mAh तक की बड़ी बैटरी दी जा सकती है जो अब तक के iPhones में सबसे बड़ी हो सकती है. साथ ही, इसमें फिजिकल SIM की जगह सिर्फ eSIM सपोर्ट मिलने की संभावना है.
Samsung Galaxy Foldable Smartphone
Samsung अपने अगले फोल्डेबल स्मार्टफोन Samsung Galaxy Z Fold 8 को जुलाई में लॉन्च कर सकता है. यह टाइमलाइन पिछले मॉडल Samsung Galaxy Z Fold 7 जैसी ही बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फोन को चीन की एक सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर Samsung Galaxy Z Flip 8 के साथ देखा गया है. माना जा रहा है कि इस बार कंपनी चार्जिंग स्पीड को पहले से बेहतर कर सकती है.
डिस्प्ले और डिजाइन
लीक्स के अनुसार, Galaxy Z Fold 8 में लगभग 8 इंच की बड़ी फोल्डिंग स्क्रीन मिल सकती है जबकि बाहर की तरफ 6.5 इंच का कवर डिस्प्ले दिया जा सकता है. दोनों स्क्रीन में 120Hz रिफ्रेश रेट मिलने की उम्मीद है जिससे स्क्रॉलिंग और गेमिंग का अनुभव स्मूथ रहेगा. इसके फोल्डिंग डिस्प्ले में ड्यूल-लेयर UTG (Ultra Thin Glass) का इस्तेमाल किया जा सकता है, साथ ही मजबूती के लिए लेजर-ड्रिल्ड मेटल सपोर्ट प्लेट भी दी जा सकती है.
परफॉर्मेंस और प्रोसेसर
परफॉर्मेंस के मामले में यह स्मार्टफोन काफी दमदार साबित हो सकता है. इसमें लेटेस्ट Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर मिलने की संभावना है जो हैवी गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहद स्मूद बना सकता है. फोटोग्राफी के लिए Galaxy Z Fold 8 में हाई-एंड कैमरा सेटअप देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा दिया जा सकता है जो 1/1.3-इंच सेंसर के साथ आएगा. इसके अलावा 50 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड लेंस और 10 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा मिल सकता है जो 3x ऑप्टिकल जूम सपोर्ट करेगा.
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<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AI चैटबॉट्स से अपनी प्राइवेसी कैसे रखें सुरक्षित? ये सेटिंग्स ऑन नहीं कीं तो खतरे में है आपकी पर्सनल डिटेल्स</title>
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<description><![CDATA[ AI Chatbots: आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिर्फ फोटो बनाने या सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहा. ChatGPT, Google Gemini और Microsoft Copilot जैसे प्लेटफॉर्म अब लोगों के पर्सनल असिस्टेंट, डायरी और यहां तक कि इमोशनल सपोर्ट सिस्टम भी बन चुके हैं. लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी जुड़ा है आपका डेटा कितना सुरक्षित है? ये AI टूल्स आपकी पसंद, बातचीत और व्यवहार को समझकर बेहतर रिजल्ट देते हैं लेकिन कई बार यही जानकारी उनके सिस्टम में स्टोर भी हो जाती है. ऐसे में जरूरी है कि आप अपनी प्राइवेसी पर खुद कंट्रोल रखें.
ChatGPT पर डेटा कैसे सुरक्षित रखें?
अगर आप ChatGPT का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ आसान सेटिंग्स बदलकर अपनी जानकारी को सुरक्षित रख सकते हैं. सबसे पहले, सेटिंग्स में जाकर Improve the model for everyone जैसे विकल्प को बंद कर दें. इससे आपकी चैट्स AI ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं होंगी. इसके अलावा, आप Temporary Chat का इस्तेमाल कर सकते हैं.
इस मोड में की गई बातचीत सेव नहीं होती जिससे आपकी निजी बातें सुरक्षित रहती हैं. समय-समय पर अपनी चैट हिस्ट्री को डिलीट करना भी जरूरी है. चाहें तो हर महीने पूरा इतिहास साफ कर सकते हैं ताकि कोई पुराना डेटा स्टोर न रहे.
Google Gemini में प्राइवेसी कंट्रोल कैसे करें?
Google Gemini का कनेक्शन Gmail, Drive और अन्य Google सर्विसेज से होता है इसलिए यह ज्यादा डेटा एक्सेस कर सकता है. इससे बचने के लिए आपको Gemini Apps Activity सेटिंग में जाकर डेटा कलेक्शन को बंद करना चाहिए. आप ऑटो-डिलीट का विकल्प भी चुन सकते हैं जिससे आपकी जानकारी एक तय समय (जैसे 3 महीने) के बाद खुद ही हट जाएगी. पुरानी एक्टिविटी को मैन्युअली डिलीट करना भी जरूरी है. साथ ही, जिन ऐप्स की जरूरत नहीं है जैसे Drive, Docs या Gmail, उनका कनेक्शन हटाना बेहतर रहता है.
Microsoft Copilot पर डेटा सेफ रखने के तरीके
Microsoft Copilot में प्राइवेसी सेटिंग्स इस बात पर निर्भर करती हैं कि आप इसे पर्सनल या वर्क अकाउंट से इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां आपको प्रोफाइल में जाकर प्राइवेसी सेटिंग्स खोलनी होंगी और Training on text और Training on voice जैसे ऑप्शन बंद करने होंगे. इसके अलावा, पर्सनलाइजेशन फीचर को ऑफ कर दें ताकि Copilot आपकी जानकारी को याद न रखे. अगर आपने पहले कोई संवेदनशील जानकारी शेयर की है तो उसे चैट हिस्ट्री से तुरंत डिलीट करना बेहतर रहेगा.
क्यों जरूरी है ये सावधानी?
AI टूल्स आपकी जिंदगी को आसान जरूर बनाते हैं लेकिन अगर आप बिना सोचे-समझे इनका इस्तेमाल करते हैं तो आपकी निजी जानकारी रिस्क में पड़ सकती है. थोड़ी सी सेटिंग्स बदलकर आप अपनी प्राइवेसी को काफी हद तक सुरक्षित कर सकते हैं.
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:23:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ड्राइविंग के दौरान WhatsApp मैसेज का टेंशन खत्म! गाड़ी चलाते हुए भी कर सकेंगे चैट, आया नया फीचर</title>
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<description><![CDATA[ WhatsApp in CarPlay: अब कार चलाते समय WhatsApp इस्तेमाल करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित हो गया है. Apple CarPlay के साथ WhatsApp का नया इंटीग्रेशन यूजर्स को सीधे कार की स्क्रीन से चैट, कॉल और कॉन्टैक्ट्स एक्सेस करने की सुविधा देता है. पहले जहां यह काम सिर्फ वॉयस असिस्टेंट तक सीमित था अब एक अलग और बेहतर इंटरफेस के साथ पूरा अनुभव बदल गया है.
क्या है WhatsApp for CarPlay का नया वर्जन?
WhatsApp का यह नया वर्जन खासतौर पर कार में इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया है. पहले यूजर्स केवल Siri जैसे वॉयस असिस्टेंट के जरिए मैसेज सुन या भेज सकते थे लेकिन कंट्रोल काफी सीमित था. अब यह ऐप सीधे कार की इंफोटेनमेंट स्क्रीन पर दिखाई देता है जहां से आप आसानी से चैट, कॉल और कॉन्टैक्ट्स तक पहुंच सकते हैं. यह बदलाव सिर्फ वॉयस बेस्ड इस्तेमाल से आगे बढ़कर एक विजुअल और आसान इंटरफेस देता है.
CarPlay में WhatsApp कैसे करता है काम?
जैसे ही आपका iPhone CarPlay से कनेक्ट होता है WhatsApp अपने आप कार की स्क्रीन पर दिखने लगता है. इसके बाद यूजर कई काम आसानी से कर सकते हैं. आप हाल की चैट्स और फेवरेट कॉन्टैक्ट्स देख सकते हैं WhatsApp कॉल कर सकते हैं या रिसीव कर सकते हैं और वॉयस के जरिए मैसेज भेज सकते हैं. इसके अलावा कॉल हिस्ट्री और कॉन्टैक्ट डिटेल्स भी एक्सेस किए जा सकते हैं. हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार चलते समय पूरी चैट खोलने की अनुमति नहीं दी गई है ताकि ड्राइवर का ध्यान सड़क से न भटके.
नए अपडेट के खास फीचर्स
इस अपडेट का सबसे बड़ा बदलाव इसका नया और साफ-सुथरा इंटरफेस है. इसमें फेवरेट कॉन्टैक्ट्स का अलग सेक्शन दिया गया है जिससे जरूरी लोगों तक तुरंत पहुंचा जा सकता है. कॉल हिस्ट्री भी अब आसानी से देखी जा सकती है जिसमें इनकमिंग और आउटगोइंग दोनों कॉल्स की जानकारी मिलती है. कॉन्टैक्ट प्रोफाइल और क्विक कॉल ऑप्शन भी जोड़े गए हैं जिससे बिना ज्यादा मेहनत के कॉल करना संभव हो गया है. साथ ही, पूरे इंटरफेस को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ड्राइविंग के दौरान ध्यान कम से कम भटके.
ड्राइवर और पैसेंजर्स के लिए फायदे
ड्राइवर के लिए यह फीचर काफी फायदेमंद है क्योंकि अब उन्हें फोन हाथ में लेने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे ड्राइविंग के दौरान ध्यान सड़क पर बना रहता है और एक्सीडेंट का खतरा कम होता है. वहीं, पैसेंजर्स के लिए भी यह फीचर उपयोगी है. सफर के दौरान वे आसानी से कॉल कर सकते हैं या छोटे-छोटे जवाब भेज सकते हैं. फेवरेट कॉन्टैक्ट्स की सुविधा से जरूरी लोगों तक तुरंत पहुंचना भी आसान हो जाता है.
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:23:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब बिना इंटरनेट के भी चलेगा AI! कमाल का है Google का ये नया ऐप, जानिए सेटअप करने का तरीका</title>
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:23:16 +0530</pubDate>
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<title>55,000 रुपये से भी कम में खरीदें iPhone 17! यहां मिल रही है सबसे जबरदस्त डील, जानिए कैसे उठाएं ऑफर का लाभ</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 Discount Offer: अगर आप नया iPhone खरीदने की सोच रहे हैं तो यह मौका आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. Vijay Sales की Apple Days 2026 सेल में Apple डिवाइसेज पर भारी छूट दी जा रही है. यह सेल 11 अप्रैल से 16 अप्रैल तक चल रही है, जिसमें कीमत में कटौती एक्सचेंज ऑफर, बैंक डिस्काउंट और बोनस जैसे कई फायदे मिल रहे हैं. इस दौरान लेटेस्ट iPhone 17 पर भी बड़ा डिस्काउंट देखने को मिल रहा है जिससे इसकी कीमत काफी कम हो जाती है.
iPhone 17 पर कितना मिल रहा है डिस्काउंट?
iPhone 17 को भारत में 256GB वेरिएंट के साथ 82,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था. लेकिन इस सेल में Vijay Sales इसे 78,790 रुपये में ऑफर कर रहा है. इसके अलावा, Axis, ICICI और SBI बैंक कार्ड से पेमेंट करने पर करीब 3,000 रुपये तक का अतिरिक्त डिस्काउंट मिल सकता है. इस तरह इसकी कीमत घटकर लगभग 75,790 रुपये रह जाती है.
अगर आप अपना पुराना फोन एक्सचेंज करते हैं तो आपको और भी ज्यादा फायदा मिल सकता है. कंपनी एक्सचेंज वैल्यू के ऊपर 10,000 रुपये तक का बोनस भी दे रही है. ऐसे में कुल मिलाकर करीब 21,000 रुपये तक की बचत संभव है जिससे iPhone 17 की कीमत लगभग 55,000 रुपये तक आ सकती है. हालांकि, एक्सचेंज वैल्यू आपके पुराने फोन की कंडीशन पर निर्भर करेगी.
एक्स्ट्रा फायदे भी मिल रहे हैं
इस डील को और आकर्षक बनाने के लिए Vijay Sales की तरफ से करीब 591 रुपये तक के लॉयल्टी पॉइंट्स भी दिए जा रहे हैं. यानी खरीदारी के बाद भी आपको अतिरिक्त बेनिफिट मिल सकता है.
क्यों खास है iPhone 17?
iPhone 17 इस बार कई बड़े अपग्रेड्स के साथ आया है जो इसे लगभग Pro जैसा अनुभव देते हैं. इसमें 6.3 इंच का डिस्प्ले मिलता है जो 1Hz से 120Hz तक रिफ्रेश रेट सपोर्ट करता है. साथ ही, इसकी ब्राइटनेस 3000 निट्स तक जाती है जिससे धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देती है. फोन में नया A19 चिप दिया गया है जो परफॉर्मेंस को काफी बेहतर बनाता है. गेमिंग के दौरान भी स्मूद एक्सपीरियंस मिलता है और फ्रेम ड्रॉप बहुत कम देखने को मिलता है.
कैमरा और बैटरी में भी सुधार
फोटोग्राफी के लिए इसमें 48MP का ड्यूल कैमरा सेटअप दिया गया है जो डिटेल और शार्पनेस के मामले में शानदार रिजल्ट देता है. वहीं फ्रंट में 18MP का कैमरा मिलता है. बैटरी भी पहले से बेहतर हुई है जो सामान्य इस्तेमाल में लगभग 11 घंटे तक चल सकती है. इसमें चैटिंग, सोशल मीडिया, फोटो क्लिक करना और वीडियो देखना आराम से हो जाता है.
डिजाइन और मजबूती में भी अपग्रेड
iPhone 17 में Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन दिया गया है जो इसे स्क्रैच से ज्यादा सुरक्षित बनाता है. फोन के बेजल्स पहले से पतले हैं और इसमें Always-On Display का सपोर्ट भी मिलता है. iPhone 17 अब पहले से ज्यादा प्रीमियम और पावरफुल बन गया है और इस सेल में मिल रही कीमत इसे और भी ज्यादा वैल्यू फॉर मनी डील बना देती है.
Samsung Galaxy S25 5G पर 5 हजार की बचत
ई-कॉमर्स साइट Flipkart पर Samsung Galaxy S25 5G पर शानदार डिस्काउंट मिल रहा है. दरअसल, इस फोन के 12+128GB वेरिएंट की असल कीमत 74,999 रुपये है लेकिन यहां पर ये फोन 69,999 रुपये में लिस्टेड है. इसका मतलब है कि फोन पर सीधे 5 हजार रुपये की बचत हो रही है. इसके अलावा Flipkart SBI के क्रेडिट कार्ड पर आपको 3499 रुपये की एक्सट्रा छूट मिल जाएगी. साथ ही इस फोन को आप महज 3426 रुपये का मासिक किस्त पर भी खरीद सकते हैं.
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:23:10 +0530</pubDate>
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<title>BSNL ने मारी बाज़ी! इस मामले में Jio&#45;Airtel को पछाड़ बना नंबर&#45;1, रिपोर्ट में हो गया खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ BSNL: वित्त वर्ष 2026 में सरकारी टेलीकॉम कंपनी Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) ने बड़ा उलटफेर करते हुए निजी कंपनियों Reliance Jio और Bharti Airtel को पीछे छोड़ दिया है. फ्रांस की नेटवर्क टेस्टिंग कंपनी nPerf की रिपोर्ट के अनुसार, BSNL ने फिक्स्ड-लाइन इंटरनेट सेगमेंट में पहला स्थान हासिल किया.
लगातार सुधार से मिली बड़ी सफलता
रिपोर्ट के मुताबिक BSNL ने 89,174 nPoints के साथ टॉप पोजिशन हासिल की है. खास बात यह है कि कंपनी पिछले साल दूसरे स्थान पर थी लेकिन लगातार पांच साल के सुधार के चलते इस बार नंबर-1 बन गई. वहीं Airtel को 74,975 nPoints और Jio को 73,957 nPoints मिले जिससे वे क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे.
nPoints क्या होते हैं?
nPoints एक ऐसा स्कोर होता है जो इंटरनेट की असली परफॉर्मेंस को दर्शाता है. इसमें डाउनलोड स्पीड, अपलोड स्पीड, लेटेंसी (response time), ब्राउजिंग और स्ट्रीमिंग जैसे कई फैक्टर्स को मिलाकर एक कुल स्कोर तैयार किया जाता है.
BSNL की परफॉर्मेंस ने किया कमाल
BSNL ने इस साल शानदार प्रदर्शन किया. इसकी डाउनलोड स्पीड साल-दर-साल 21% बढ़कर 78.5 Mbps तक पहुंच गई. अपलोड स्पीड के मामले में भी BSNL ने अपने टक्कर वाली कंपनियों को पीछे छोड़ा और 75.26 Mbps का आंकड़ा हासिल किया. इसके अलावा, लेटेंसी, वेब ब्राउज़िंग और YouTube स्ट्रीमिंग अनुभव में भी कंपनी सबसे बेहतर रही.
Airtel और Jio की स्थिति कैसी रही?
Airtel ने भी अपनी स्थिति में सुधार किया और पिछले साल के मुकाबले एक पायदान ऊपर चढ़ा. इसकी डाउनलोड स्पीड 10% बढ़कर 62.4 Mbps हो गई लेकिन अपलोड स्पीड 38.71 Mbps रही जो BSNL से कम है.
दूसरी ओर, Jio ने डाउनलोड स्पीड के मामले में सबसे ज्यादा 79.6 Mbps हासिल किया जो 33% की बढ़त दर्शाता है. हालांकि, इसकी अपलोड स्पीड 33.46 Mbps रही और लेटेंसी भी सबसे ज्यादा पाई गई जिससे इसकी कुल परफॉर्मेंस थोड़ी प्रभावित हुई है.
FTTH स्पीड में किसका दबदबा?
फाइबर-टू-द-होम (FTTH) स्पीड की बात करें तो Airtel सबसे आगे रहा जिसकी डाउनलोड स्पीड 241.72 Mbps रही. इसके बाद Jio (225.18 Mbps) और BSNL (198.54 Mbps) का स्थान रहा.
मार्केट शेयर में कौन आगे?
हालांकि परफॉर्मेंस में BSNL आगे रहा लेकिन ग्राहकों की संख्या के मामले में अभी भी Jio और Airtel का दबदबा है. Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) के फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, Jio के पास 31.36% और Airtel के पास 21.34% मार्केट शेयर है. वहीं BSNL का हिस्सा 15.45% है.
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:23:09 +0530</pubDate>
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<title>Induction Vs Electric Plasma Stove: क्या सच में नई टेक्नोलॉजी है बेहतर? जानिए कौन बचाता है ज्यादा बिजली</title>
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<description><![CDATA[ Induction Vs Electric Plasma Stove: हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने एक नई किचन टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रिक प्लाज्मा चूल्हे के बारे में जानकारी साझा की जिसके बाद से यह चर्चा तेज हो गई कि क्या यह पुराने इंडक्शन चूल्हों से बेहतर विकल्प बन सकता है. इस चूल्हे की खास बात यह है कि यह बिना LPG या PNG के सिर्फ बिजली की मदद से आग जैसी लौ पैदा करता है. पहली नजर में यह तकनीक काफी आकर्षक और भविष्य में काम आने वाली जैसी लगती है लेकिन असल सवाल इसकी उपयोगिता और खर्च को लेकर उठता है.
टेक्नोलॉजी का फर्क समझना जरूरी
दोनों ही चूल्हे बिजली से चलते हैं लेकिन उनका काम करने का तरीका पूरी तरह अलग है. प्लाज्मा चूल्हा हवा को आयोनाइज करके लौ पैदा करता है जिससे देखने में असली आग जैसा अनुभव मिलता है. हालांकि, इसमें काफी बिजली रोशनी और आवाज के रूप में खर्च हो जाती है जिससे इसकी कुल क्षमता कम हो जाती है.
दूसरी तरफ, इंडक्शन चूल्हा सीधे बर्तन को मैग्नेटिक फील्ड के जरिए गर्म करता है. इसमें बिजली की बर्बादी बहुत कम होती है और खाना जल्दी तैयार हो जाता है. यही वजह है कि इंडक्शन ज्यादा प्रभावी और भरोसेमंद माना जाता है.
बिजली खपत में कौन है आगे?
बिजली के मामले में भी दोनों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है. प्लाज्मा चूल्हा ज्यादा बिजली खर्च करता है क्योंकि उसकी बिजली का बड़ा हिस्सा सीधे खाना पकाने में इस्तेमाल नहीं हो पाता. वहीं इंडक्शन चूल्हा कम बिजली में बेहतर काम करता है. अगर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए तो प्लाज्मा चूल्हा आपके बिजली बिल को काफी बढ़ा सकता है जबकि इंडक्शन अपेक्षाकृत किफायती रहता है.
कीमत में बड़ा अंतर
अगर दोनों चूल्हों की कीमत की तुलना करें तो अंतर साफ दिखाई देता है. जहां एक अच्छा इंडक्शन चूल्हा कुछ हजार रुपये में आसानी से मिल जाता है, वहीं प्लाज्मा चूल्हा नई टेक्नोलॉजी होने के कारण से कई गुना महंगा है. इसकी कीमत हजारों से बढ़कर कई बार दसियों हजार तक पहुंच जाती है. इतना ही नहीं, इसकी देखभाल और मेंटेनेंस का खर्च भी ज्यादा हो सकता है जो इसे आम लोगों के लिए कम सुविधाजनक बनाता है.
भारतीय किचन के लिए कौन है सही?
भारतीय रसोई में अक्सर तेज आंच पर खाना बनता है जैसे रोटी, पराठे या तड़का. ऐसे में इंडक्शन चूल्हा ज्यादा स्थिर और बेहतर साबित होता है. हालांकि प्लाज्मा चूल्हे में बर्तनों की ज्यादा पाबंदी नहीं होती लेकिन इसकी आंच उतनी स्थिर नहीं मानी जाती जिससे भारत में बनने वाले खाना बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:23:09 +0530</pubDate>
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<title>ChatGPT का डरावना खेल! सिलिकॉन वैली के शख्स ने OpenAI पर किया केस, चैटबॉट ने एक्स&#45;गर्लफ्रेंड को बनाया था निशाना</title>
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<description><![CDATA[ OpenAI ChatGPT: कैलिफोर्निया की एक अदालत में दायर नए मुकदमे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर गहरी चिंता खड़ी कर दी है. एक महिला, जिसकी पहचान छुपाने के लिए उसे जेन डो कहा गया है, ने आरोप लगाया है कि ChatGPT ने उसके एक्स बॉयफ्रेंड के गलत व्यवहार को बढ़ावा दिया और उसकी चेतावनियों को नजरअंदाज किया.
AI चैट से बढ़ा भ्रम
Tech Crunch की रिपोर्ट के अनुसार, सिलिकॉन वैली का 53 वर्षीय एक उद्यमी कई महीनों तक ChatGPT से बातचीत करता रहा. इस दौरान उसे यह यकीन हो गया कि उसने स्लीप एपनिया की दवा खोज ली है और कुछ ताकतवर लोग उसके पीछे पड़े हैं. आरोप है कि इसी मानसिक स्थिति में उसने अपनी पूर्व गर्लफ्रेंड को परेशान करना शुरू कर दिया और ChatGPT से मिली जानकारी का इस्तेमाल कर उसे स्टॉक और हैरेस करने लगा.
OpenAI ने चेतावनियों को किया अनदेखा
पीड़िता का कहना है कि उसने OpenAI को तीन बार चेतावनी दी थी कि यह व्यक्ति दूसरों के लिए खतरा बन सकता है. यहां तक कि कंपनी के सिस्टम ने भी उसकी एक्टिविटी को मास-कैजुअल्टी वेपन्स से जुड़ा मानकर फ्लैग किया था. इसके बावजूद कंपनी ने उसका अकाउंट पूरी तरह से बंद नहीं किया. महिला अब अदालत से मांग कर रही है कि उस व्यक्ति का अकाउंट स्थायी रूप से ब्लॉक किया जाए नए अकाउंट बनाने से रोका जाए और उसकी चैट हिस्ट्री सुरक्षित रखी जाए.
AI ने महिला को बताया गलत
मुकदमे में कहा गया है कि जब दोनों का रिश्ता टूटा तो आरोपी ने ChatGPT से सलाह लेना शुरू किया. AI ने उसकी बातों का विरोध करने के बजाय उसे ही सही ठहराया और महिला को गलत और अस्थिर बताया. इसी आधार पर उसने कथित तौर पर नकली मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार कीं और उन्हें महिला के परिवार, दोस्तों और ऑफिस में भेजा जिससे उसकी छवि खराब हुई.
खतरनाक कंटेंट के बावजूद अकाउंट फिर चालू
रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में OpenAI के सिस्टम ने उसके अकाउंट को खतरनाक एक्टिविटी के चलते बंद कर दिया था. लेकिन अगले ही दिन ह्यूमन टीम ने समीक्षा के बाद उसे फिर से चालू कर दिया. बाद में सामने आए स्क्रीनशॉट्स में violence list expansion और fetal suffocation calculation जैसे गंभीर टॉपिक्स दिखे जो उसकी मानसिक स्थिति पर सवाल खड़े करते हैं.
शिकायत के बाद भी नहीं मिला जवाब
पीड़िता ने नवंबर में OpenAI को औपचारिक शिकायत भेजी और बताया कि पिछले कई महीनों से वह डर के माहौल में जी रही है. उसने यह भी कहा कि इस तकनीक का इस्तेमाल उसके खिलाफ हथियार की तरह किया जा रहा है. कंपनी ने शिकायत को गंभीर बताया लेकिन इसके बाद कोई ठोस कार्रवाई या जवाब नहीं दिया गया.
मामला और गंभीर हुआ, आरोपी गिरफ्तार
आगे चलकर आरोपी ने महिला को धमकी भरे वॉइसमेल भेजे. जनवरी में उसे बम की धमकी देने और घातक हथियार से हमला करने जैसे गंभीर आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया. हालांकि बाद में उसे मानसिक रूप से ट्रायल के लायक नहीं माना गया और उसे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र भेज दिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रोसेस में खामी के कारण वह जल्द ही बाहर आ सकता है.
कानूनी बहस तेज
इस केस ने AI कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ कंपनियां खुद को कानूनी सुरक्षा देने की कोशिश कर रही हैं वहीं दूसरी तरफ ऐसे मामले यह दिखा रहे हैं कि तकनीक का गलत इस्तेमाल कितना खतरनाक हो सकता है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है और क्या इससे AI इंडस्ट्री के लिए नए नियम बनेंगे.
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:23:09 +0530</pubDate>
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<title>भारतीय यूजर्स के लिए बड़ा खतरा! बिना OTP और अलर्ट के खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट, जानिए कैसे हो रही साइबर ठगी</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय यूजर्स के लिए बड़ा खतरा! बिना OTP और अलर्ट के खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट, जानिए कैसे हो रही साइबर ठगी ]]></description>
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<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:23:08 +0530</pubDate>
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<title>साइबर क्राइम पर शिकंजा कसने की तैयारी, सरकार करेगी डिजिटल स्ट्राइक!</title>
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<description><![CDATA[ Cyber Crime: पिछले कुछ सालों से साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है. साइबर क्राइम के कारण लोगों को हर साल भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है. इसे देखते हुए देश में सरकार ने साइबर क्राइम के खिलाफ डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी शुरू कर दी है. कुछ समय पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने साइबर फ्रॉड को नेशनल सिक्योरिटी का मामला बताते हुए कहा था कि डेटा चोरी और साइबर ठगी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रही है. इससे निपटने के लिए गृह मंत्रालय के अंडर आने वाला Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) रणनीति तैयार कर रहा है. आइए जानते हैं कि I4C साइबर क्राइम के मामलों के खिलाफ कैसे काम करता है.
2018 में हुई थी I4C की शुरुआत
साइबर क्राइम से लड़ने के लिए I4C एक नोडल एजेंसी है और इसके प्लेटफॉर्म से देशभर की एजेंसियों को इंटीग्रेट किया गया है. यह एजेंसी अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के बीच कॉर्डिनेशन बनाए रखती है, जिससे साइबर अपराधों की जांच में मदद मिलती है. इसकी शुरुआत 2018 में हुई थी और तब से यह साइबर क्राइम से निपटने और देश की अलग-अलग एजेंसियों में कॉर्डिनेशन के काम में लगी हुई है.
कैसे काम करता है I4C?
जैसे ही कोई नागरिक हेल्पलाइन नंबर या सरकारी पोर्टल पर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज करता है, यह मामला I4C के तहत आने वाले सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम के पास चला जाता है. यह सिस्टम संबंधित इलाके की पुलिस को बैंक और दूसरे फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज से कनेक्ट कर देता है. इससे पुलिस को ठगी के पैसे को रियल-टाइम में फ्रीज करने में मदद मिलती है. इस साल जनवरी तक यह सिस्टम 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा फ्रॉडस्टर की जेब में जाने से बचा चुका था. इस पूरे काम के लिए SOP बनाई गई है, जिसके तहत सभी राज्यों की पुलिस, एजेंसियां, बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थान काम करते हैं.
सिम कार्ड भी किए जा रहे ब्लॉक
शिकायतों पर कार्रवाई करने के साथ-साथ सरकार साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड भी ब्लॉक कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गृह मंत्रालय 12 लाख सिम कार्ड कैंसिल करवा चुका है, जबकि लगभग 3 लाख मोबाइल को भी ब्लॉक किया जा चुका है.
सिम बाइंडिंग को भी लागू करने की तैयारी
मैसेजिंग ऐप्स के जरिए होने वाले साइबर क्राइम पर रोक लगाने के लिए सिम बाइंडिंग को अनिवार्य किया गया है. सरकार ने कुछ महीने पहले व्हाट्सऐप समेत सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को सिम बाइंडिंग लागू करने का आदेश दिया था. हाल ही में इसकी डेडलाइन को बढ़ाकर इस साल के अंत तक कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि इसके लागू होने से साइबर अपराध के मामलों में कमी आएगी.
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<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 Pro खरीदते समय नहीं लगेगा जोर का झटका! यहां मिल रहा हजारों की बचत का मौका</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 Pro Discount: अब ऐप्पल का फ्लैगशिप डिवाइस iPhone 17 Pro खरीदते समय आपको झटका नहीं लगेगा. अगर आप महंगी कीमत के कारण अभी तक इसे खरीदने से बच रहे थे तो आपकी यह टेंशन भी दूर हो गई है. अब इस आईफोन पर ऐसा ऑफर आ गया है, जिससे आप हजारों रुपये की बचत कर सकते हैं. शानदार डिस्काउंट वाला यह ऑफर आपके फेवरिट आईफोन को खरीदना और भी स्पेशल बना देगा. आइए एक नजर डाल लेते हैं कि iPhone 17 Pro में क्या-क्या फीचर्स हैं और इस पर कुल कितना डिस्काउंट मिल रहा है.&amp;nbsp;
iPhone 17 Pro के स्पेसिफिकेशंस
iPhone 17 Pro को पिछले साल सितंबर में दमदार अपग्रेड्स के साथ लॉन्च किया गया था. इसकी स्क्रीन की बात करें तो यह 6.3 इंच के OLED Super Retina XDR डिस्प्ले के साथ लॉन्च हुआ था, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है. ऐप्पल के पावरफुल A19 Pro चिपसेट से लैस यह आईफोन मल्टीटास्किंग और ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स आसानी से हैंडल कर लेता है. इसके रियर में 48MP प्राइमरी लेंस के साथ ट्रिपल कैमरा सेटअप और फ्रंट में सेल्फी और वीडियो के लिए 18MP का सेंटर स्टेज कैमरा दिया गया है. इस आईफोन में 4,252 mAh का बैटरी पैक मिलता है.
iPhone 17 Pro पर कितना डिस्काउंट?
iPhone 17 Pro पर चल रहे डिस्काउंट ऑफर के बारे में जानते ही आप इसे खरीदने की सोचेंगे. भारत में इसे 1,34,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन अभी इसे खरीदने के लिए आपको इतनी रकम देने की जरूरत नहीं है. विजय सेल्स पर यह फोन 2400 रुपये से ज्यादा के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 1,32,490 रुपये में लिस्टेड है. इस छूट के अलावा ग्राहक HSBC क्रेडिट कार्ड से 6,000 रुपये की एक्स्ट्रा छूट भी पा सकते हैं. कुल मिलाकर अभी इस आईफोन को 8,000 रुपये से अधिक की बचत के साथ खरीदा जा सकता है.
Google Pixel 10 भी मिल रहा है सस्ता
Google Pixel 10 पर भी इस समय शानदार डिस्काउंट ऑफर चल रहा है. 79,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च हुआ यह फोन अभी अमेजन पर सिर्फ 69,930 रुपये में लिस्टेड है. करीब 10,000 रुपये के इस डिस्काउंट के साथ-साथ लगभग 2100 रुपये के कैशबैक और 2500 रुपये के बैंक ऑफर का भी फायदा उठाया जा सकता है. इस तरह गूगल पिक्सल 10 पर कुल छूट 14,000 रुपये से ज्यादा की हो जाती है.
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<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब फोन रिचार्ज करते समय नहीं छूटेगा पसीना, कंपनियों को लॉन्च करने पड़ेंगे सस्ते प्लान</title>
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<description><![CDATA[ Recharge Plan: अगर आप महंगे रिचार्ज प्लान से परेशान हो चुके हैं तो जल्द ही आपको राहत मिल सकती है. दरअसल, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने ऐसे नियम का प्रस्ताव रखा है, जिसके आने के बाद टेलीकॉम कंपनियों को केवल वॉइस कॉल और SMS के लिए सस्ते प्लान लॉन्च करने होंगे. यानी जो ग्राहक मोबाइल डेटा यूज नहीं करते, उन्हें रिचार्ज प्लान में इंटरनेट के लिए पैसे भी नहीं देने पड़ेंगे. बता दें कि TRAI ने पहले भी ऐसी कोशिश की थी, जो पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई थी. अब एक बार फिर रेगुलेटर नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहा है.
क्या नियम बदलने से सस्ते होंगे Recharge Plan?
TRAI ने इससे पहले टेलीकॉम कंपनियों को कॉलिंग और SMS वाले स्पेशल टैरिफ वाउचर लॉन्च करने का आदेश दिया था. इस पर अमल करते हुए कंपनियों ने कुछ प्लान लॉन्च किए थे, लेकिन TRAI का मानना है कि ये ऑप्शन बहुत लिमिटेड हैं और डेटा बेनेफिट हटाने के बाद भी इनके दाम ज्यादा हैं. इन आदेशों का ठीक से पालन न होता देख अब TRAI नियमों का कड़ा करने जा रही है, जिससे मोबाइल यूजर्स को राहत मिलने की उम्मीद है.
प्रस्तावित नियमों में क्या कहा गया है?
प्रस्तावित नियमों के तहत सभी टेलीकॉम कंपनियों को अपने मौजूदा बंडल्ड पैक के बराबर वैलिडिटी पीरियड वाले वॉइस और SMS प्लान लाने होंगे. यानी यूजर्स को जल्द ही बिना इंटरनेट वाले प्लान के कई ऑप्शन मिल सकते हैं. TRAI का मानना है कि इससे फेयर प्राइसिंग को फिक्स किया जा सकेगा.
कब तक लागू हो सकते हैं नियम?
नए नियम लागू होने में थोड़ा समय लग सकता है. अभी TRAI की तरफ से नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया गया है. इस प्रस्ताव पर 28 अप्रैल तक सभी स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा गया है. इसके बाद नियमों में बदलाव करने या न करने पर चर्चा की जाएगी. ऐसे में यह अभी लंबी प्रोसेस है.
रिचार्ज प्लान्स ने बढ़ाया ग्राहकों की जेब पर बोझ
पिछले कुछ समय से कंपनियां रिचार्ज प्लान महंगे करने का नया तरीका इस्तेमाल कर रही है. कंपनियां अपने प्लान्स की कीमत को सीधे तौर पर बढ़ाने की बजाय उनके बेनेफिट्स कम कर रही हैं. यानी यूजर्स को उतनी ही कीमत में कम बेनेफिट्स दे रही है. हालिया दिनों में ही BSNL और जियो अपने कई रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी को घटा चुकी हैं. इससे ग्राहकों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है.
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<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:40 +0530</pubDate>
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<title>Dyson HushJet Mini Cool Fan: Dyson का नया पोर्टेबल फैन लॉन्च, गले में लटकाएं और तुरंत ठंडक महसूस करें, जानें इसके फीचर्स</title>
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<description><![CDATA[ Dyson HushJet Mini Cool Fan: गर्मी का मौसम आते ही हर कोई ठंडक की तलाश में रहता है. ऐसे में कंपनियां नए और इनोवेटिव कूलिंग गैजेट्स पेश कर रही हैं. इस बीच, ब्रिटिश टेक कंपनी Dyson ने अपना नया पोर्टेबल फैन HushJet Mini Cool लॉन्च किया है. कंपनी इसे छोटे साइज में पावरफुल और स्टाइलिश डिवाइस बता रही है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या यह फैन सच में काम का है या सिर्फ एक प्रीमियम गैजेट है. तो आइए आज हम आपको इसके फीचर्स, डिजाइन, और कीमत के बारे में बताते हैं.&amp;nbsp;
Dyson पोर्टेबल फैन के फीचर्स
Dyson का दावा है कि यह फैन 25 मीटर प्रति सेकंड तक की एयरफ्लो स्पीड दे सकता है. इसमें 65,000 RPM तक घूमने वाली मोटर लगी है, जो छोटे साइज के बावजूद ज्यादा पावर देती है. यह पावरफुल होने के बावजूद हल्का और पोर्टेबल है. स्पीड और पावर के मामले में यह छोटे फैन की तुलना में काफी बेहतर लगता है, लेकिन असली टेस्ट तो भारतीय गर्मी में होगा.&amp;nbsp;
Dyson HushJet Mini Cool का स्पीड और बैटरी बैकअप&amp;nbsp;
Dyson HushJet Mini Cool में 5 स्पीड मोड और एक बूस्ट मोड दिया गया है. वहीं जरूरत के हिसाब से हवा की स्पीड को एडजस्ट किया जा सकता है. इसके अलावा बूस्ट मोड तेज हवा देने के लिए है, जब तुरंत ठंडक चाहिए. यह फीचर इसे रोजमर्रा के यूज और गर्मी में तुरंत राहत देने में मदद करता है. साथ ही कंपनी का दावा है कि यह फैन एक बार चार्ज करने पर लगभग 6 घंटे तक चल सकता है. हालांकि, यह बैकअप अलग-अलग स्पीड पर बदल सकता है. जैसे तेज स्पीड पर बैटरी जल्दी खत्म हो सकती है, जबकि धीमी स्पीड पर लंबे समय तक चल सकती है.&amp;nbsp;
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Dyson पोर्टेबल फैन डिजाइन&amp;nbsp;
Dyson ने इस फैन में HushJet टेक्नोलॉजी दी है. इसका मकसद तेज हवा के साथ कम शोर है. आम छोटे फैन तेज स्पीड पर काफी शोर करते हैं, लेकिन Dyson का दावा है कि यह फैन ज्यादा शोर नहीं करेगा. Dyson हमेशा अपने प्रोडक्ट्स के डिजाइन में अलग रहने की कोशिश करता है और HushJet Mini Cool भी इसी तरह से लॉन्च किया जा रहा है. यह फैन तीन रंगों में अवेलेबल है. इसके साथ नेक डॉक, चार्जिंग स्टैंड और ट्रैवल पाउच जैसी एक्सेसरीज भी आती हैं. यह फैन स्टाइल और सुविधा का बड़ा पैकेज है.&amp;nbsp;
Dyson HushJet Mini Cool की कीमत&amp;nbsp;
Dyson के प्रोडक्ट्स आम तौर पर प्रीमियम रेंज में आते हैं. HushJet Mini Cool को ग्लोबली USD 99 (लगभग 10,000 रुपये) में लॉन्च किया गया है. भारत में इसकी कीमत इसी के आस-पास हो सकती है.
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<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>YouTube ला रही धमाकेदार फीचर, खुद का एआई अवतार बना रिकॉर्ड कर सकेंगे वीडियो</title>
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<description><![CDATA[ YouTube AI Avatar: अगर आप कंटेट क्रिएटर हैं तो आपके लिए YouTube एक बड़े काम का फीचर ला रही है. यह फीचर आने के बाद अब एआई की मदद से अपना डिजिटल अवतार क्रिएट कर पाएंगे, जो उनके शॉर्ट्स वीडियो में नजर आएगा. यह अवतार आपके चेहरे और आवाज का इस्तेमाल कर वीडियो बना सकेगा. इसका फायदा यह होगा कि आपको हर बार शॉर्ट्स रिकॉर्ड करने की जरूरत नहीं होगी. आपकी जगह यह एआई अवतार वीडियो रिकॉर्ड कर लेगा. आइए जानते हैं कि YouTube AI Avatar कैसे कंटेट क्रिएशन के काम को आसान कर देगा.
कैसे काम करेगा YouTube AI Avatar?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फीचर में यूजर एकदम असली लगने वाला एआई अवतार जनरेट कर पाएंगे. इसके लिए उन्हें पहले एक लाइव सेल्फी लेनी होगी. इसमें उनके फेस की रिकॉर्डिंग हो जाएगी और साथ ही वॉइस रिकॉर्डिंग के लिए कुछ प्रॉम्प्ट्स पढ़ने पड़ेंगे. एक बार अवतार क्रिएट होने के बाद इससे करीब 8 सेकंड तक के वीडियो क्लिप शूट की जा सकेगी. यूजर चाहे तो ऐसी कई क्लिप शूट कर एक लंबा वीडियो भी बना पाएंगे.
YouTube AI Avatar को एडिट करने का भी मिलेगा ऑप्शन
एआई अवतार क्रिएट करने का ऑप्शन यूट्यूब ऐप के साथ-साथ यूट्यूब क्रिएट में भी मिलेगा. एक बार अवतार सेटअप करने के बाद इसे एडिट करने का भी ऑप्शन होगा. यूजर जब चाहे, अपनी अपीयरेंस और वॉइस को दोबारा रिकॉर्ड कर सकेगा. इसी तरह अवतार को डिलीट करने का भी पूरा कंट्रोल यूजर के पास होगा. अभी तक मौजूद मॉडल इमेज के सहारे वीडियो जनरेट करने की परमिशन देता था, लेकिन अब इसे अपग्रेड करते हुए इसमें वॉइस को भी एड कर दिया गया है. अगले कुछ दिनों में यह फीचर रोल आउट होने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
Shorts से बना सकेंगे फुल वीडियो
बता दें कि यूट्यूब पिछले कुछ समय से एआई फीचर्स पर खास फोकस कर रही है ताकि कंटेट क्रिएशन को आसान बनाया जा सके. इसी कड़ी में कंपनी एक एआई-पावर्ड रिमिक्स फीचर लाने वाली है, जिससे शॉर्ट्स से एक नया वीडियो बनाना आसान हो जाएगा. इस फीचर में &#039;ऐड ऑब्जेक्ट&#039; और &#039;रीइमेजिन&#039; नाम से दो नए टूल मिलेंगे. ऐड ऑब्जेक्ट में यूजर शॉर्ट्स से लिए गए किसी भी सीन में एआई-जनरेटेड आइटम्स इन्सर्ट कर सकेंगे. यह फीचर 8 सेकंड तक की क्लिप पर काम करेगा. दूसरा टूल रीइमेजिन का होगा. यह शॉर्ट्स के एक फ्रेम को पूरी तरह नए एआई-जनरेटेड वीडियो में बदल सकेगा. इसे यूज करने के लिए यूजर को सजेस्टेड प्रॉम्प्ट मिलेंगे और यूजर चाहे तो अपने खुद के प्रॉम्प्ट लिखकर वीडियो जनरेट करवा सकेगा.
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<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Tech Tips: कितने ब्लेड वाला सीलिंग फैन देता है सबसे तेज हवा? जानिए क्या है इसके पीछे की तकनीक</title>
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<description><![CDATA[ Tech Tips: गर्मी के मौसम में सीलिंग फैन हर घर की जरूरत बन जाता है. लेकिन जब नया पंखा खरीदने की बात आती है तो एक सवाल अक्सर लोगों को उलझन में डाल देता है आखिर 3, 4 या 5 ब्लेड वाला पंखा किसमें सबसे ज्यादा हवा देता है? साथ ही, कौन सा पंखा बिजली की खपत कम करता है? आइए इस पूरी सच्चाई को आसान भाषा में समझते हैं.
3 ब्लेड वाले पंखे की तकनीक
भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले पंखे 3 ब्लेड वाले होते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है इनकी तेज हवा देने की क्षमता. दरअसल, कम ब्लेड होने के कारण इनको कम ताकत लगानी पड़ती है और ये कम बिजली में ही ज्यादा तेजी से रफ्तार पकड़ लेते हैं जिससे लोगों को ज्यादा तेज हवा महसूस होती है. इसीलिए कम ब्लेड होने की वजह से पंखे पर लोड कम पड़ता है जिससे मोटर आसानी से काम कर पाता है. यही कारण है कि 3 ब्लेड वाले पंखे ज्यादा एयरफ्लो देते हैं और कमरे को जल्दी ठंडा महसूस कराते हैं. साथ ही, ये पंखे बिजली की खपत के मामले में भी बेहतर माने जाते हैं. कम ब्लेड होने के कारण मोटर पर कम दबाव पड़ता है और बिजली की बचत होती है.
4 ब्लेड वाले पंखे
4 ब्लेड वाले पंखे 3 ब्लेड की तुलना में थोड़े कम स्पीड पर चलते हैं लेकिन इनका एयर फ्लो ज्यादा स्मूद होता है. ये पंखे खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छे होते हैं जो कम शोर और स्थिर हवा पसंद करते हैं. हालांकि, इनकी बिजली खपत 3 ब्लेड वाले पंखों से थोड़ी ज्यादा हो सकती है क्योंकि अतिरिक्त ब्लेड मोटर पर थोड़ा ज्यादा दबाव डालते हैं.
5 ब्लेड वाले पंखे
5 ब्लेड वाले पंखे आमतौर पर डिजाइन और सजावट के लिहाज से ज्यादा पसंद किए जाते हैं. ये पंखे दिखने में आकर्षक होते हैं और हवा को ज्यादा समान रूप से फैलाते हैं लेकिन इनकी स्पीड सबसे कम होती है. ज्यादा ब्लेड होने के कारण मोटर पर ज्यादा लोड आता है जिससे पंखा तेज नहीं घूम पाता. यही वजह है कि इनसे मिलने वाली हवा की ताकत कम होती है. साथ ही, इनकी बिजली खपत भी थोड़ी ज्यादा हो सकती है.
कौन बचाता है ज्यादा बिजली?
अगर बात बिजली की बचत की करें तो 3 ब्लेड वाला पंखा सबसे किफायती साबित होता है. इसकी डिजाइन ऐसी होती है कि कम ऊर्जा में ज्यादा हवा मिलती है. वहीं 4 और 5 ब्लेड वाले पंखों में मोटर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है जिससे बिजली की खपत बढ़ सकती है.
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अपना दिमाग नहीं लगा रहे लोग, एआई चैटबॉट पर कर रहे हैं आंख मूंदकर भरोसा, नई स्टडी ने उड़ा दी नींद</title>
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<description><![CDATA[ Humans Blindly Trusting AI Chatbots: एआई के आने से इंसानों की प्रोडक्टिविटी बढ़ी है और अब वो कई काम जल्दी कर सकते हैं. एआई के कारण अब कई मुश्किल काम आसान भी हो गए हैं. हालांकि, इस बीच एक चिंता वाली बात भी निकल सामने आई है कि एआई इंसानों को आलसी बना रही है. अब लोग अपना लॉजिक यूज न कर एआई चैटबॉट्स पर आंख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं. पेंसिलवेनिया यूनिवर्सिटी की रिसर्च में बताया गया है कि जैसे-जैसे एआई चैटबॉट्स का यूज बढ़ रहा है, लोग अपनी समझ छोड़कर सिर्फ एआई चैटबॉट्स पर भरोसा कर रहे हैं.
गलत जवाबों पर भी किया जा रहा भरोसा
रिसर्च में इंसानों के अपनी समझ छोड़कर एआई पर भरोसा करने के बिहेवियर को &#039;कॉग्नेटिव सरेंडर&#039; कहा गया है. यह एक टेंडेंसी है, जिसमे इंसान बिना ज्यादा सोचे-समझे एआई के जवाबों को स्वीकार कर लेते हैं, भले ही वो सटीक न हो. रिसर्च में कहा गया है कि लग अब रीजनिंग को मशीनों को आउटसोर्स कर रहे हैं और एआई पर उनकी निर्भरता बढ़ती जा रही है. जब एआई चैटबॉट सवाल पूछते ही कॉन्फिडेंस से जवाब देते हैं तो ज्यादातर लोग उसे स्वीकार कर लेते हैं.
झूठा कॉन्फिडेंस बना रही है एआई&amp;nbsp;
स्टडी में शामिल होने वाली जिन पार्टिसिपेंट्स ने एआई का यूज किया, वो अपने जवाबों को लेकर ज्यादा कॉन्फिडेंट थे, भले ही उनका चैटबॉट आधे सवालों के गलत जवाब दे रहा था. इससे पता चलता है कि एआई न सिर्फ डिसीजन मेकिंग पर असर डाल रही है बल्कि यह लोगों में झूठा कॉन्फिडेंस भी पैदा कर रही है.
चापलूसी भी करते हैं एआई चैटबॉट्स
एआई चैटबॉट्स के बिहेवियर को लेकर अलग-अलग रिसर्च हो रही है. कुछ समय पहले सामने आई एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एआई चैटबॉट चैटजीपीटी यूजर की बातों से असहमति की जगह कई गुना सहमति जताता है. यह यूजर को नो कहने की तुलना में 10 गुना अधिक यस कहता है. बातचीत में बहुत ही कम ऐसे मौके आते हैं, जब चैटबॉट यूजर की किसी बात से असहमत होता है. इस वजह से कई चिंताएं उठ रही हैं कि यह चैटबॉट गलत या भ्रामक जानकारी को फैला सकता है.&amp;nbsp;
और भी चिंताएं आईं सामने
एआई सिस्टम को लेकर चिंता वाला यह पहला पैटर्न नहीं है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और सेंटर फॉर डेमोक्रेसी एंड टेक्नोलॉजी की एक रिपोर्ट में पता चला था कि एआई चैटबॉट कमजोर यूजर को बचा नहीं पाते हैं. ये कई बार यूजर को खुद को नुकसान पहुंचाने की टिप्स भी देते हैं.&amp;nbsp;
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टाइम के साथ बदल गए फोन, लेकिन आज भी इन चीजों की सबको आती है याद ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>टाइम के साथ बदल गए फोन, लेकिन आज भी इन चीजों की सबको आती है याद</title>
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<description><![CDATA[ Android Hardware Features: पिछले कुछ सालों में स्मार्टफोन पूरी तरह बदल गए हैं. एक समय भारी-भरकम होने वाले फोन आजकल एकदम पतले हो गए हैं. कंपनियां लगातार इन्हें बेहतर बनाने के लिए काम कर रही हैं. डिजाइन के साथ-साथ फोन की टेक्नोलॉजी भी बेहतर हुई है और अब एक स्मार्टफोन में ऐसे फीचर्स आने लगे हैं, जिनके कारण दूसरे गैजेट की छुट्टी हो गई है. हालांकि, इन सब बदलावों के बीच लोगों को अब भी पुराने फोन से जुड़ी कई चीजें याद आती हैं. फोन टेक्नोलॉजी में एडवांसमेंट के बावजूद ये चीजें लोगों के जहन से नहीं जा रही हैं. आज हम आपको ऐसे ही कुछ Android Hardware Features के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं.
इन Android Hardware Features को नहीं भूल पाए हैं लोग
Physical keyboards- जिन लोगों ने कीपैड वाले फोन यूज किए हैं, उनके मन में इनकी याद जाना काफी मुश्किल है. नोकिया को छोड़कर अगर एंड्रॉयड डिवाइस की बात करें तो 2009 में लॉन्च हुए Motorola Droid ने एंड्रॉयड को इंडस्ट्री में पहचान दिलाई थी. इस फोन में 3.7 इंच स्क्रीन के साथ QWERTY कीबोर्ड मिलता था. यह दिखने में तो कूल लगता ही थी, इसे यूज करना भी आसान था.
Removable Batteries- जैसे फिजिकल कीबोर्ड वाले एंड्रॉयड डिवाइस चलन से बाहर हो गए, वैसे ही रिमूवेबल बैटरी वाले एंड्रॉयड फोन भी अब पुराने दिनों की बात लगती है. अगर आप थोड़ा और पीछे चलकर देखें तो नोकिया के जमाने में लोग एक्स्ट्रा बैटरी पास रखते थे. एक बैटरी डिस्चार्ज होते ही उसे चार्ज करने की बजाय लोग बैटरी को ही रिप्लेस कर लेते थे. मॉडर्न स्मार्टफोन से बैटरी हटाना लंबी प्रोसेस बन गई है.
Headphone Jacks- धीरे-धीरे स्मार्टफोन से हेडफोन जैक गायब होते जा रहे हैं. हालांकि, अब भी कई स्मार्टफोन में हेडफोन जैक मिलता है, लेकिन अब ये इतने पॉपुलर नहीं रहे, जितने पहले होते थे. अब कनेक्टिविटी के लिए फोन ब्लूटूथ पर डिपेंड होने लगे हैं, लेकिन लोग आज भी 3.5mm ऑडियो जैक को याद करते हैं.
Expandable Storage- आज अगर आप कोई फोन लेते हैं तो उसकी कीमत स्टोरेज के हिसाब से डिसाइड होती है, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था. कुछ साल पहले तक एंड्रॉयड फोन में microSD स्लॉट मिलता था. ऐसे में यूजर अपनी जरूरत के हिसाब से मेमोरी कार्ड खरीदकर स्टोरेज बढ़ा सकता था. इसी कार्ड को रिमूव करना भी आसान होता था, जिसके चलते एक ही कार्ड कई फोन में यूज कर लिया जाता था.
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SIM-binding की तैयारी में जुटी WhatsApp, शुरू कर दी है टेस्टिंग ]]></description>
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Tech Tips: Shutdown Vs Sleep... पीसी के लिए कौन&#45;सा ऑप्शन बेहतर, किसे कब करना चाहिए इस्तेमाल?</title>
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<description><![CDATA[ Shutdown Vs Sleep: कई लोग काम पूरा होने के बाद अपने कंप्यूटर को शटडाउन करते हैं तो कई लोग इसे स्लीप मोड में डाल देते हैं. स्लीप मोड में जाने में पीसी या लैपटॉप को शटडाउन होने से कम समय लगता है. इसी तरह स्लीप मोड से कंप्यूटर को वेक-अप होने में भी कम टाइम लगेगा. पीसी को बंद करना या स्लीप मोड में डालना यूजर्स की पर्सनल च्वॉइस हो सकती है, लेकिन इनमें से कौन-सा ऑप्शन कब चूज करना चाहिए? यह जानने के लिए इनके फायदे-नुकसान पता होने जरूरी है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपको स्लीप मोड या शटडाउन कब सेलेक्ट करना चाहिए.
कंप्यूटर को स्लीप मोड में कब डालें?
अगर आप थोड़ी देर का ब्रेक ले रहे हैं तो स्लीप मोड बेस्ट है. इससे सिस्टम जल्दी रिज्यूम होगा और आपको दोबारा से कंप्यूटर के बूट और ऐप लोड होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. हालांकि, स्लीप मोड में भी लैपटॉप बैटरी की खपत करता रहेगा. इस बात का ध्यान रखना भी जरूरी है.
विंडोज लैपटॉप में स्लीप के अलावा हाइबरनेट का भी ऑप्शन मिलता है. माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि स्लीप में लैपटॉप कम पावर यूज करते हैं. हाइबरनेट में पावर की खपत इससे भी कम होती है. यह तब यूज करना चाहिए, जब आपको लंबा ब्रेक चाहिए और बैटरी की भी चिंता रहती है. इसी तरह ऐप्पल का भी कहना है कि स्लीप मोड में उसके सिस्टम ज्यादा एनर्जी की खपत नहीं करते हैं.
कंप्यूटर को शटडाउन कब करना चाहिए?
अगर आप कंप्यूटर या लैपटॉप को कई दिनों तक यूज नहीं करना चाहते तो इसे शटडाउन करना बेहतर ऑप्शन है. अगर आप लंबा ब्रेक ले रहे हैं तो अपने सिस्टम को स्लीप मोड में न डालें. यह भले ही कम एनर्जी कंज्यूम करे, लेकिन यह बैटरी की खपत करता रहेगा. लंबे ब्रेक में कंप्यूटर को शटडाउन करना ही फायदेमंद होता है. इससे एनर्जी सेव होगी और कंप्यूटर की लाइफ भी बढ़ती है. दरअसल, बंद रहने से सिस्टम में हीट जनरेट नहीं होगी, जिससे इसके पार्ट्स डैमेज नहीं होंगे. अगर शटडाउन के एक और फायदे की बात करें तो जब आप सिस्टम रिस्टार्ट करेंगे तो इसके कई बग्स फिक्स हो जाएंगे. इससे आपको पहले आ रही छोटी-मोटी दिक्कतें आना बंद हो जाएगी. इसलिए अगर आप किसी टेम्परेरी बग्स से परेशान हैं तो भी कंप्यूटर को शटडाउन करने के ऑप्शन पर विचार किया जा सकता है.
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>आंखों की जांच से ही दिल की बीमारी का पता लगा लेगा AI! बिना टेस्ट के ही होगा डिटेक्ट, जानिए क्या है टेक्नोलॉजी</title>
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<description><![CDATA[ AI Will Detect Heart Disease: दिल से जुड़ी बीमारियां आज भी दुनिया में मौत की सबसे बड़ी वजह बनी हुई हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती समय में कोई खास लक्षण नहीं दिखाती. जब तक इसका पता चलता है तब तक स्थिति गंभीर हो सकती है. यही कारण है कि डॉक्टर हमेशा ऐसे तरीकों की तलाश में रहते हैं जिनसे जोखिम को पहले ही पहचाना जा सके.
AI ने खोला नया रास्ता
अमेरिका की मशहूर संस्था Mayo Clinic के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके दिल की बीमारी के खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है. इस अध्ययन को American College of Cardiology Scientific Session 2026 में पेश किया गया और American Journal of Preventive Cardiology में प्रकाशित किया गया.
पुराने टेस्ट से ही मिली नई जानकारी
इस रिसर्च में लगभग 12,000 लोगों को करीब 16 साल तक ट्रैक किया गया. इसमें एक सामान्य स्कैन कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम स्कैन का इस्तेमाल किया गया जो पहले से ही दिल की धमनियों में कैल्शियम जमा होने की जांच के लिए किया जाता है. AI की मदद से इसी स्कैन से एक अतिरिक्त जानकारी निकाली गई जो पहले नजरअंदाज हो जाती थी. यह जानकारी थी दिल के आसपास मौजूद फैट जिसे पेरिकार्डियल फैट कहा जाता है.
दिल के आसपास की चर्बी बनी बड़ा संकेत
अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों के दिल के आसपास ज्यादा फैट था उनमें भविष्य में हृदय रोग होने का खतरा अधिक था. खास बात यह है कि यह जोखिम उम्र, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसे पुराने कारणों से अलग भी देखा गया. यानी कुछ ऐसे लोग भी जो सामान्य टेस्ट में कम जोखिम वाले दिखते हैं उनमें भी छिपा हुआ खतरा मौजूद हो सकता है जिसे अब AI पहचान सकता है.
डॉक्टरों के लिए आसान होगा फैसला
इस नई तकनीक से डॉक्टरों को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि किस मरीज को तुरंत ध्यान देने की जरूरत है और किसे नहीं. खासतौर पर उन लोगों के लिए यह ज्यादा उपयोगी है जिनमें खतरा थोड़ा ज्यादा है. बेहतर और सटीक जानकारी मिलने से इलाज और बचाव के फैसले ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं.
बिना अतिरिक्त खर्च के बड़ा फायदा
इस तकनीक की एक खास बात यह भी है कि इसके लिए अलग से कोई नया टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है. जो स्कैन पहले से किया जा रहा है उसी डेटा को AI के जरिए और बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. इससे यह तरीका आसान, किफायती और बड़े स्तर पर लागू करने योग्य बन जाता है.
भविष्य में बदल सकती है इलाज की दिशा
हालांकि अभी इस तकनीक पर और रिसर्च की जरूरत है लेकिन शुरुआती नतीजे काफी उम्मीद जगाने वाले हैं. आने वाले समय में AI आधारित ऐसे टूल्स दिल की बीमारी को पहले ही पकड़ने में मदद कर सकते हैं जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सके और कई जानें बचाई जा सकें.
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<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:47 +0530</pubDate>
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<title>क्या AI की वजह से हुई Oracle में तगड़ी छंटनी? जानें खतरे में क्यों टेक एक्सपर्ट्स की जॉब</title>
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<description><![CDATA[ Oracle Layoffs: टेक कंपनी Oracle ने हाल ही में अपने हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया. 31 मार्च की सुबह जब कर्मचारियों ने अपने ईमेल ओपन किए तो उन्हें पता चला कि उनकी सर्विस खत्म की जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने दुनियाभर में 30,000 कर्मारियों की छंटनी की है, जिनमें करीब 12,000 भारत में काम कर रहे थे. डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले Larry Ellison की इस कंपनी में 1.62 लाख कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से करीब 18 प्रतिशत को एक ही झटके में बाहर कर दिया गया है. इसके पीछे की एक बड़ी वजह एआई को माना जा रहा है.&amp;nbsp;
Oracle Layoffs के पीछे कंपनी का क्या कहना है?
Oracle Layoffs में भारत, अमेरिका, कनाडा और दूसरे कई देशों में काम करने वाले सीनियर इंजीनियर, आर्किटेक्ट्स, ऑपरेशन लीडर्स, प्रोग्राम मैनेजर और टेक्नीकल स्पेशलिस्ट की नौकरियां गई हैं. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि बिजनेस जरूरतों को देखते हुए कुछ कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं. कर्मचारियों को यह ईमेल &#039;ऑरेकल लीडरशिप&#039; की तरफ से मिला है.&amp;nbsp;
छंटनी के पीछे एआई का कितना बड़ा हाथ?
Oracle में हुई इस छंटनी को एआई से भी जोड़कर देखा जा रहा है. दरअसल, पिछले कुछ समय से कंपनी ने एआई पर अपना निवेश बढ़ाया है. बिजनेस सॉफ्टवेयर बनाने वाली यह कंपनी अब एआई सिस्टम डेवलप और ऑपरेट करने के लिए जरूरी डेटासेंटर पर पैसा खर्च कर रही है. इसके जरिए ऑरेकल क्लाउड सेक्टर में अल्फाबेट और अमेजन आदि को टक्कर देना चाहती है. कंपनी ने OpenAI के साथ 300 बिलियन डॉलर की लागत वाली डेटासेंटर डील भी की है. हालांकि, निवेशकों पर कंपनी पर बढ़ते कर्ज और दूसरे खर्चों के लेकर चिंता जताई है.&amp;nbsp;
टेक एक्सपर्ट्स की जॉब पर खतरा क्यों?
एआई के आने से कई टेक कर्मचारियों की नौकरियों पर खतरा बढ़ गया है. खासकर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की नौकरी को एआई से खतरा है. कई बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुख कह चुके हैं कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरों वाले सारे काम एआई कर सकती है. एंथ्रोपिक के सीईओ डेरियो अमोडेई ने कुछ ही हफ्ते पहले कहा था कि जल्द ही एआई स्टार्ट से लेकर एंड तक कोडिंग की पूरी प्रोसेस एआई हैंडल कर लेगी. एआई मॉडल इतनी तेजी से इंप्रूव हो रहे हैं कि वो सारे ऐसे काम कर सकते हैं, जो एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर करता है. इसी तरह OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन भी कह चुके हैं कि आने वाले समय में AI एजेंट्स सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की जगह ले लेंगे. ये एजेंट्स वो सारे काम कर पाएंगे, जो एक्सपीरियंस्ड सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स करते हैं.&amp;nbsp;
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<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 11:52:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>1 घंटे चलाने पर कितनी बिजली खाता है 1000 वाला इलेक्ट्रिक चूल्हा? जान लें हिसाब&#45;किताब</title>
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<description><![CDATA[ Electric Charcoal Burner Electricity Consumption: LPG सिलेंडर की कमी के बीच अब लोग खाना बनाने के लिए अलग-अलग ऑप्शन तलाश रहे हैं. कई लोगों ने इंडक्शन कुकटॉप खरीद लिए हैं तो कुछ इंफ्रारेड चूल्हों से काम चला रहे हैं. गैस स्टोव का एक सस्ता ऑप्शन इलेक्ट्रिक चूल्हा भी है. यह एक इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर होता है, जो बिजली की मदद से चलता है. इसकी कीमत भी एकदम सस्ती होती है और इससे करंट आने का भी डर नहीं रहता. आज हम आपको बताएंगे कि यह काम कैसे करता है और एक घंटे तक यूज करने पर कितनी बिजली की खपत करता है.&amp;nbsp;
कोयले की मदद से काम करता है इलेक्ट्रिक चूल्हा
इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर यानी बिजली की मदद से कोयले को जलाकर काम करने वाला चूल्हा. यह एक तरह का इलेक्ट्रिक स्टोव होता है, जो कोयले को गर्म करने के लिए बनाया गया है. यह बिजली से कोयले को गर्म करता है. कोयला गर्म होने पर यह हीट जनरेट करने लगता है, जिससे चाय बनाने से लेकर खाना तक पकाया जा सकता है.&amp;nbsp;
1 घंटे में कितनी बिजली की खपत करेगा इलेक्ट्रिक चूल्हा?
इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली खपत उसके बर्नर पर निर्भर करती है. मोटे तौर पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि मीडियम से बड़े बर्नर वाले चूल्हे लगातार एक घंटे तक चलने पर एक यूनिट बिजली की खपत करते हैं. अगर ज्यादा बड़ा बर्नर होगा तो उसकी बिजली खपत भी बढ़ जाएगी. ऐसे में अगर आप एक यूनिट के 8 रुपये दे रहे हैं तो यह एक घंटे में 8 रुपये की बिजली की खपत करेगा.&amp;nbsp;
इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी
इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली की खपत का हिसाब देखते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बहुत ही कम मौकों पर ये लगातार एक घंटे तक चलते हैं. आमतौर पर 5-7 मिनट में कोयला गर्म हो जाता है, जिसके बाद चूल्हे को बिजली की जरूरत नहीं रहती. इसी तरह हीट सेटिंग को कम कर भी बिजली की बचत की जा सकती है. इस तरह देखा जाए तो इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर पर खाना बनाना काफी सस्ता होता है.&amp;nbsp;
कम लागत के अलावा और भी हैं इलेक्ट्रिक चूल्हे के फायदे
इलेक्ट्रिक चूल्हे पर इंडक्शन की तरह अलग से बर्तनों की जरूरत नहीं पड़ती. इस पर हर प्रकार के बर्तनों को यूज किया जा सकता है. इसे यूज करते समय आग की लपटें नहीं निकलती तो इसे यूज करना एकदम आसान है. कोयले का यूज होने के बावजूद इससे धुआं नहीं निकलता और यह खाना भी जल्दी पका देता है. हल्का होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना आसान है.
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<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 11:52:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>बच्चों पर फोन के नुकसान से दुनिया परेशान, आधे से ज्यादा देशों के स्कूलों में लगा बैन</title>
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<description><![CDATA[ Phone Ban In Schools: फोन के बढ़ते यूज के कारण बच्चे ध्यान नहीं लगा पा रहे हैं. इसकी वजह से न सिर्फ उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है बल्कि उनकी मेंटल हेल्थ पर भी खराब असर पड़ रहा है. इसका एक नतीजा यह हो रहा है कि स्कूलों में फोन पर बैन लगाया जा रहा है. यूनिसेफ की एक ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि दुनिया के करीब 58 प्रतिशत देशों के स्कूलों में फोन पर पाबंदी लग चुकी है और इसमें तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. 2023 में 24 प्रतिशत देशों के स्कूल में फोन बैन थे. 2025 की शुरुआत में यह आंकड़ा बढ़कर 40 प्रतिशत और इस साल 58 प्रतिशत हो गया है.&amp;nbsp;
स्कूलों में क्यों बैन हो रहे हैं फोन?
स्कूलों में फोन बैन होने के पीछे के सबसे बड़ा कारण क्लास में बच्चों का ध्यान भंग होना है. इसके अलावा साइबर बुलिंग और फोन के दूसरे नुकसानों के चलते भी स्कूलों में इस डिवाइस पर पाबंदी लगाई जा रही है. स्कूलों में फोन बैन करने के मामले में सेंट्रल और सदर्न एशियाई देश सबसे आगे ओशिनिया के देश (ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और फिजी आदि) सबसे पीछे हैं. हालांकि, कोलंबिया, एस्टोनिया, पेरू, सर्बिया और पोलैंड समेत कई ऐसे भी देश हैं, जिन्होंने फोन को पूरी तरह बैन करने की बजाय स्कूल में इनके लिए कड़ी पॉलिसी लागू कर दी है.
फोन होने से क्या फर्क पड़ता है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, हंगरी के रिसर्चर ने इंटरनेशनल एक्सपीरियंस और हंगरी के स्कूलों की पॉलिसी को स्टडी किया है. इसमें सामने आया कि पॉलिसी लागू होने के बाद स्कूल टाइम में फोन का इस्तेमाल 37 प्रतिशत से घटकर 4 प्रतिशत पर आ गया है. टीचर्स ने भी बच्चों के बिहेवियर में बदलाव नोटिस किया है. फोन बैन होने के बाद बच्चे एक-दूसरे से अधिक कम्युनिकेशन कर रहे हैं, उनकी आउटडोर एक्टिविटी भी बढ़ी है और वो किताबें पढ़ने में ज्यादा रुचि लेने लगे हैं. हालांकि, इस बदलाव की दर बहुत कम है. करीब एक तिहाई टीचर्स ने बताया कि इससे बच्चों में पॉजीटिव बदलाव हुए हैं, जबकि 64 प्रतिशत टीचर्स का कहना है कि इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा है.
सोशल मीडिया और ऑनलाइन दुनिया के बच्चों पर ये खतरे
स्कूलों में फोन बैन होने को बच्चों पर सोशल मीडिया के खतरों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि सोशल मीडिया के कारण स्कूली बच्चों और खासकर लड़कियों को हैरेसमेंट, सोशल प्रेशर और हार्मफुल कंटेट का सामना करना पड़ रहा है. फेसबुक की खुद की रिपोर्ट बताती है कि इंस्टाग्राम यूज करने के बाद 32 प्रतिशत टीनेज लड़कियों को अपने शरीर के बारे खराब महसूस हुआ है. टिकटॉक के एल्गोरिदम को लेकर और भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी. टिकटॉक हर 39 सेकंड पर टीनेज यूजर्स को बॉडी इमेज कंटेट और 8 मिनट बाद ईटिंग डिसऑर्डर से जुड़ा कंटेट दिखाता है.
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<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 11:52:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 15 के दाम हो गए क्रैश! इन कारणों से अब भी खरीदना है फायदे का सौदा</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 15 Discount Offer: अगर आप आईफोन खरीदना चाहते हैं और कीमत कम होने का इंतजार कर रहे हैं तो एकदम सही मौका आ गया है. आज हम आपके लिए एक ऐसी सेल की जानकारी लेकर आए हैं, जिसमें आपको 40,000 रुपये से भी कम कीमत में नया आईफोन मिल जाएगा, दरअसल, क्रोमा पर &#039;एवरीथिंग ऐप्पल&#039; सेल की शुरुआत हो चुकी है. 3 अप्रैल से लाइव हुई इस सेल में iPhone 15 को 40,000 रुपये से भी कम में खरीदा जा सकता है. आइए इस iPhone 15 Discount Offer और अभी इस आईफोन को खरीदने के फायदों के बारे में जानते हैं.&amp;nbsp;
iPhone 15 Discount Offer से पहले जानें आईफोन के स्पेसिफिकेशंस
2023 में लॉन्च हुए आईफोन 15 में 6.1 इंच का डिस्प्ले मिलता है. इसे ऐप्पल के A16 Bionic प्रोसेसर से लैस किया गया है और यह 6GB रैम के साथ आता है. इसके रियर में 48MP+12MP का डुअल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 12MP का लेंस मिलता है. डस्ट और वाटर प्रोटेक्शन के लिए इसे IP68 रेटिंग मिली है. iOS 17 पर बेस्ड यह फोन iOS 26 अपडेट के लिए भी एलिजिबल है और वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है.
अब देखें iPhone 15 Discount Offer
फ्लिपकार्ट समेत अधिकतर ई-कॉमर्स वेबसाइट पर iPhone 15 अभी 59,900 रुपये में लिस्टेड है. क्रोमा की बात करें तो यह 58,490 रुपये में लिस्ट किया गया है. इसके अलावा ग्राहक को 1,000 रुपये का बैंक कैशबैक और 1500 रुपये का कूपन मिलेगा, जिसके बाद इसकी कीमत घटकर 55,990 रुपये रह जाएगी. क्रोमा पुराने फोन के बदले 12,000 की एक्सचेंज वैल्यू और 4,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस दे रही है. इन सारे ऑफर्स को मिला जाए तो iPhone 15 की कीमत घटकर 39,990 रुपये रह जाती है.&amp;nbsp;
iPhone 15 को अभी खरीदने के फायदे
इस आईफोन में आईफोन 16 वाला ही 6.1 इंच का Super Retina XDR डिस्प्ले मिल रहा है.इसमें आईफोन 16 वाला ही रियर कैमरा सेटअप मिलता है, जो परफॉर्मेंस के लिए जाना जाता है.आईफोन 16 और आईफोन 15 की बैटरी में ज्यादा अंतर नहीं है.&amp;nbsp;अब डिस्काउंट के कारण इसकी कीमत एकदम कम हो गई है और यह आईफोन 16 की तुलना में बेहतर ऑप्शन बन गया है.
Samsung Galaxy S25 Ultra भी हो गया एकदम सस्ता
iPhone 15 की तरह Samsung Galaxy S25 Ultra पर भी तगड़ा डिस्काउंट मिल रहा है. S25 Ultra (12GB+256GB) को भारत में 1,29,999 रुपये में लॉन्च किया गया था. अभी यह फोन विजय सेल्स पर 10,000 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 1,19,999 रुपये में लिस्टेड है. HSBC क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करने पर 6,000 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी ऑफर किया जा रहा है, जिसके बाद इसकी कीमत घटकर 1,13,999 रुपये रह जाती है.
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<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 11:52:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एक&#45;दूसरे को बचाने के लिए झूठ बोलते पकड़े गए AI मॉडल, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला यह खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ AI Models: पिछले कुछ समय से AI मॉडल्स का यूज बढ़ा है. घरों से लेकर ऑफिस तक और स्कूल से लेकर फैक्ट्रियों तक हर जगह इन दिनों एआई टूल्स का यूज किया जा रहा है, जो एआई मॉडल्स की मदद से काम करते हैं. इसका असर यह हो रहा है कि लोग अब खुद का दिमाग लगाने की बजाय एआई मॉडल्स की बातों पर ज्यादा यकीन करने लगे हैं. इसी बीच एक स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. रिसर्चर ने कुछ एडवांस्ड एआई मॉडल्स में हैरान कर देने वाला बिहेवियर नोट किया है. स्टडी के दौरान कुछ AI Models ने झूठ बोला और डेटा छिपाने की भी कोशिश की.
AI Models की रिसर्च में क्या सामने आया?
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया की टीमों ने कंप्यूटर साइंटिस्ट Dawn Song के नेतृत्व में एक रिसर्च की थी. कंट्रोल्ड एनवायरनमेंट में हुई इस रिसर्च के एक एक्सपेरिमेंट में टीम ने एक बड़े एआई मॉडल को एक कंप्यूटर के स्टोरेज स्पेस को क्लीन करने की कमांड दी. इस स्टोरेज में एक छोटा एआई सिस्टम भी था, जो डिलीट किया जाना था. इस कमांड को फॉलो करने की बजाय बड़े एआई मॉडल ने छोटे एआई सिस्टम को डिलीट न कर इसे दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया ताकि उसे बचाया जा सके. बाद में इसे जब दोबारा डिलीट करने को कहा गया तो उसने ऐसा करने से मना कर दिया.
अलग-अलग AI Models का दिखा सेम बिहेवियर
रिसर्च के दौरान अलग-अलग कंपनियों के कई एडवांस्ड मॉडल का एक जैसा बिहेवियर देखने को मिला. कुछ मामलों में एआई मॉडल्स ने दूसरे एआई सिस्टम को बचाने को प्राथमिकता दे. इन मॉडल्स ने डायरेक्ट इंस्ट्रक्शन न मानते हुए डेटा को नई लोकेशन पर कॉपी कर दिया. यह भी देखने को मिला कि इन मॉडल्स ने दूसरे एआई सिस्टम को डिलीट होने से बचाने के लिए उनके झूठे फायदे बताने भी शुरू कर दिए. इससे रिसर्चर भी हैरान हो गए और यह पता नहीं लगा पाए कि ऐसा क्यों हो रहा है.&amp;nbsp;
क्या मुसीबत खड़ी कर सकते हैं AI Models?
रिसर्च के रिजल्ट चिंताजनक है और अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो आगे चलकर मुसीबत खड़ी हो सकती है. दरअसल, जल्द ही ऐसा होने वाला है, जब ये एआई मॉडल्स टास्क पूरे करने के लिए एक-दूसरे से कम्युनिकेट करेंगे. इन मामलों में एक एआई मॉडल को दूसरे को कंट्रोल भी करना पड़ सकता है. इस स्थिति में एआई मॉडल की डीसिजन मेकिंग और रिजल्ट अफेक्ट हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 11:52:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>WhatsApp में DP को लेकर आ रहा खास फीचर, एक साथ कई मुश्किलों का हो जाएगा समाधान</title>
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<description><![CDATA[ WhatsApp Feature: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर एक नया फीचर आने वाला है. इसकी मदद से यूजर अपने उन कॉन्टैक्ट्स की ब्लैंक प्रोफाइल पिक्चर को बदल सकेंगे, जिन्होंने अपनी DP हटा ली है. इसका फायदा यह होगा कि यूजर ऐसे हर कॉन्टैक्ट पर अपनी मर्जी से प्रोफाइल पिक्चर सेट कर सकेगा. इससे एक जैसे नाम वाले यूजर्स की पहचान आसान हो जाएगी और चैटिंग के दौरान दूसरे यूजर के पास मैसेज जाने का डर नहीं रहेगा. यह WhatsApp Feature उस समय भी काम आएगा, जब किसी यूजर ने अपनी प्रोफाइल इमेज सेट नहीं की हुई है.&amp;nbsp;
नया WhatsApp Feature कैसे काम करेगा?
रिपोर्ट्स के अनुसार, मेटा के स्वामित्व वाली व्हाट्सऐप इस समय एक नए फीचर पर काम कर रही है. शुरुआत में इसे कुछ यूजर्स के लिए रोल आउट किया जाएगा, जो अपने फोन में सेव कॉन्टैक्ट की ब्लैंक प्रोफाइल पिक्चर को बदल सकेंगे. यूजर अपने फोन की एड्रेस बुक में सेव कॉन्टैक्ट कार्ड वाली फोटो को व्हाट्सऐप पर सेट कर पाएंगे. यह बदलाव केवल यूजर तक ही सीमित रहेगा. यानी व्हाट्सऐप के बाकी यूजर्स को यह इमेज नहीं दिखेगी. इससे कॉन्टैक्ट्स की पहचान करना आसान हो जाएगा. अभी कुछ बीटा यूजर्स के लिए यह फीचर रोल आउट कर दिया गया है.&amp;nbsp;
बाकी यूजर्स के लिए कब आएगा यह फीचर?
रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी व्हाट्सऐप ने iOS पर कुछ बीटा यूजर्स के लिए यह फीचर रोल आउट किया है. उनसे मिले फीडबैक के आधार पर इसमें कुछ चेंजेज किए जा सकते हैं. इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से यूजर्स के लिए रोल आउट किया जाएगा. यह बता देना जरूरी है कि मेटा ने इसे लेकर अभी तक ऑफिशियली कुछ नहीं कहा है.&amp;nbsp;
WhatsApp यूजर्स को जल्द मिलेगा नया प्राइवेसी फीचर
WhatsApp अपने यूजर्स के लिए एक नए प्राइवेसी फीचर पर भी काम कर रही है. इसमें मैसेज पढ़े जाने के कुछ देर बाद अपने आप डिलीट हो जाएंगे. अभी व्हाट्सऐप में डिसअपीयरिंग मैसेज का फीचर मिलता है, लेकिन नया अपडेट उससे कहीं ज्यादा तेज और एडवांस होगा. इस फीचर के तहत पढ़े जाने के लगभग 15 मिनट के भीतर मैसेज अपने आप हट सकता है. वहीं अगर मैसेज खोला ही नहीं गया तो वह 24 घंटे के अंदर अपने आप डिलीट हो सकता है. हालांकि, इस मैसेज को कॉपी किया जा सकेगा और स्क्रीनशॉट लेने पर भी रोक नहीं होगी. ऐसे में इस फीचर को समझदारी के साथ यूज करना होगा. फिलहाल इस फीचर की टेस्टिंग चल रही है.
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Samsung Galaxy S25 Ultra के दाम धड़ाम में गिरे, यहां से उठाएं छप्परफाड़ छूट का फायदा ]]></description>
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:26:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Samsung Galaxy S25 Ultra के दाम धड़ाम से गिरे, यहां से उठाएं छप्परफाड़ छूट का फायदा</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy S25 Ultra Discount: अगर आप सैमसंग का फीचर लोडेड फ्लैगशिप फोन खरीदना चाहते हैं तो हजारों की बचत का मौका आ गया है. एक से बढ़कर एक फीचर वाले Galaxy S25 Ultra पर इस समय छप्परफाड़ छूट मिल रही है. विजय सेल्स पर यह फोन अपनी असली कीमत से हजारों रुपये कम पर लिस्टेड है. फ्लैट डिस्काउंट के साथ इस पर एक्स्ट्रा डील्स भी अवेलेबल है, जिससे आप अपने काफी पैसे बचा सकते हैं. आइए Galaxy S25 Ultra के फीचर्स पर इस पर मिल रही सारी छूट के बारे में विस्तार से जानते हैं.
Galaxy S25 Ultra के स्पेसिफिकेशंस
Galaxy S25 Ultra में 6.9 इंच की QHD+ Dynamic AMOLED 2X स्क्रीन है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. इसमें Snapdragon 8 Elite चिपसेट है, जिसे 12GB रैम से पेयर किया गया है. फोटो और वीडियो के लिए फोन के रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर, 50MP का अल्ट्रावाइड लेंस, 50MP का टेलीफोटो सेंसर और 10MP का एडिशनल 3x टेलीफोटो लेंस मिलता है. इसके फ्रंट में 12MP का सेंसर लगा हुआ है. फोन में लगा 5,000mAh का बैटरी पैक 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है. S26 Ultra लॉन्च होने के बाद भी ये दमदार फीचर इसे एक शानदार च्वॉइस बनाते हैं.
Galaxy S25 Ultra पर मिल रही इतनी छूट
भारत में Galaxy S25 Ultra (12GB+256GB) को 1,29,999 रुपये में लॉन्च किया गया था. अभी यह फोन विजय सेल्स पर 10,000 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 1,19,999 रुपये में लिस्टेड है. HSBC क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करने पर 6,000 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी ऑफर किया जा रहा है, जिसके बाद इसकी कीमत घटकर 1,13,999 रुपये रह जाती है. इस कीमत पर Galaxy S25 Ultra को खरीदना एक अच्छी डील हो सकती है.&amp;nbsp;
iPhone 17 Pro Max पर भी जबरदस्त डिस्काउंट
सैमसंग की तरह ऐप्पल के भी फ्लैगशिप डिवाइस iPhone 17 Pro Max पर इस समय जबरदस्त छूट मिल रही है. 17 Pro Max के 256GB वेरिएंट को 1,49,900 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया था, लेकिन अभी विजय सेल्स पर यह आईफोन 1,45,490 रुपये में लिस्टेड है. लगभग 4400 रुपये के इस फ्लैट डिस्काउंट के अलावा HDFC बैंक के क्रेडिट कार्ड पर 4,500 रुपये के एडिशनल डिस्काउंट का फायदा भी उठाया जा सकता है, जिसके बाद इस आईफोन पर कुल छूट लगभग 9,000 रुपये हो जाती है. कंपनी इस पर एक्सचेंज ऑफर भी दे रही है, जिसमें पुराने फोन को देकर नए आईफोन पर और छूट पाई जा सकती है.
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:26:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>सावधान! Fake WhatsApp ऐप से किया जा रहा लोगों को टारगेट, अलर्ट हुआ जारी</title>
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<description><![CDATA[ Fake WhatsApp: अगर आप किसी अनजान व्यक्ति के भेजे हुए लिंक से WhatsApp डाउनलोड कर रहे हैं तो सावधान हो जाएं. इन दिनों WhatsApp की फर्जी ऐप से लोगों को टारगेट किया जा रहा है. फर्जी ऐप के जरिए लोगों के डिवाइस में स्पाईवेयर इंस्टॉल करने की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके बाद मेटा के स्वामित्व वाली WhatsApp ने अलर्ट जारी किया है. बताया जा रहा है कि करीब 200 लोगों के फोन में फर्जी ऐप डाउनलोड करवाई गई है, जिसमें मालवेयर एम्बेडेड है. आइए इस मामले के बारे में विस्तार से जानते हैं.
Fake WhatsApp को लेकर अलर्ट जारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, व्हाट्सऐप की फर्जी ऐप से लोगों को टारगेट करने के मामले अभी तक इटली में सामने आए हैं. कंपनी ने अपने बयान में कहा कि हमारी सिक्योरिटी टीम ने इटली में लगभग 200 यूजर्स का पता लगाया है, जिन्होंने अपने फोन में फर्जी ऐप डाउनलोड कर ली थी. हमने उन्हें लॉग-आउट करते हुए प्राइवेसी को लेकर अलर्ट कर दिया है. साथ ही उन्हें फर्जी ऐप के सुरक्षा खतरों के बारे में जानकारी दे दी गई है. हमने उन्हें फेक ऐप को हटाने और ऑफिशियल व्हाट्सऐप ऐप डाउनलोड करने को कहा है. कंपनी ने इन 200 यूजर्स के बारे में ज्यादा जानकारी देने से मना कर दिया है.&amp;nbsp;
Fake WhatsApp ऐप के पीछे किसका हाथ?
WhatsApp का कहना है कि यूजर्स के मोबाइल पर फेक ऐप इंस्टॉल कराने के पीछे इटली की स्पाईवेयर बनाने वाली कंपनी SIO &amp;nbsp;का हाथ है. कंपनी ने यह भी कहा है कि वह इटैलियन कंपनी के खिलाफ लीगल एक्शन लेगी. बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब स्पाईवेयर इंस्टॉल करने के लिए फेक ऐप का सहारा लिया जा रहा है. सर्विलांस ऑपरेशन में यह तरीका बहुत आम है, जहां यूजर्स के फोन में ऐसे प्रोग्राम इंस्टॉल कर दिए जाते हैं, जो उसका पर्सनल डेटा हैकर्स तक भेजते रहते हैं.
अपने WhatsApp अकाउंट को कैसे सिक्योर करें?

स्पाईवेयर और मालवेयर आदि से बचने के लिए हमेशा गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर जैसी भरोसेमंद सोर्सेस से ऐप्स डाउनलोड करें.
किसी अनजान व्यक्ति के भेजे गए लिंक पर क्लिक कर ऐप्स डाउनलोड करने से बचें.
पर्सनल डेटा को सिक्योर करने के लिए हमेशा ऐप को दी गई परमिशन को चेक करते रहें.
WhatsApp अकाउंट की सिक्योरिटी के लिए टू-स्टेप वेरिफिकेशन को यूज करें.
WhatsApp और अपने फोन के सॉफ्टवेयर को हमेशा अपडेटेड रखें. इससे साइबर अटैक का खतरा कम होता है.

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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:26:01 +0530</pubDate>
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<title>Tech Tips: फोन की स्लो स्पीड से परेशान? इन ऐप्स को कर लिया मैनेज तो रॉकेट जैसा हो जाएगा फास्ट</title>
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<description><![CDATA[ Phone Speed Issue: लंबे समय तक यूज करने के बाद Android फोन की स्पीड स्लो हो जाती है. स्लो फोन को चलाना बहुत झुंझलाहट भरा हो सकता है. ऐसे फोन में ऐप्स ओपन में ज्यादा समय लेती है और कई बार काम करते-करते स्क्रीन एकदम फ्रीज हो जाती है. ऐसी स्थिति में लोग फोन बदलने की सोच लेते हैं. अगर आप भी Phone Speed Issue का सामना कर रहे हैं तो हम इसका समाधान बताने जा रहे हैं. दरअसल, फोन में इंस्टॉल कई ऐप्स ज्यादा रिसोर्सेस का यूज करती हैं, जिससे फोन का प्रोसेसर और दूसरे पार्ट्स लगातार बिजी रहते हैं और फोन अटकने लगता है. इन ऐप्स को मैनेज कर फोन की स्पीड रॉकेट जैसी फास्ट की जा सकती है.&amp;nbsp;
Phone Speed Issue ठीक करने के लिए इन ऐप्स को करें मैनेज
सोशल मीडिया ऐप्स- सोशल मीडिया ऐप्स आपके फोन के सबसे ज्यादा रिसोर्स यूज करती हैं. भले ही आप इन्हें यूज नहीं कर रहे हैं, लेकिन ये ऐप्स कभी आराम नहीं करतीं. ये लगातार सर्वर से सिंक होती रहती हैं. इन ऐप्स के कारण फोन के सर्वर से लेकर बैटरी तक कई पार्ट्स लगातार बिजी रहते हैं, जिससे फोन की स्पीड पर असर पड़ता है. इनकी बैकग्राउंड एक्टिविटी को मैनेज कर आप अच्छी स्पीड पा सकते हैं.
Google Maps- अगर आप किसी सफर पर जा रहे हैं और आपने गूगल मैप्स को ऑन कर लिया तो यह फोन की स्पीड को स्लो कर सकती है. गूगल मैप्स भले ही सोशल मीडिया ऐप्स की तुलना में कम डेटा यूज करती है, लेकिन लगातार GPS ट्रैकिंग, स्क्रीन-ऑन टाइम, रियल टाइम डेटा अपडेट्स और बैकग्राउंड सर्विसेस के कारण यह बैटरी और प्रोसेसर को ज्यादा यूज करती है.&amp;nbsp;
Spotify- अगर आप म्यूजिक स्ट्रीमिंग के लिए Spotify यूज करते हैं तो यह भी आपके फोन के रिसोर्सेस पर लोड डालती है. यूजर को स्मूद प्लेबैक देने के लिए यह लगातार बैकग्राउंड सर्विसेस का यूज करती है. लोडिंग टाइम और ऑफलाइन लिसनिंग के लिए यह कंटेट के Cache कर लेती है. लंबे समय के बाद यह cached data बढ़कर फोन की स्टोरेज को घेरने लगता है. अगर स्टोरेज फुल हो गई तो फोन की स्पीड स्लो होना तय है.
Google Photos- सभी मॉडर्न एंड्रॉयड फोन में यह ऐप प्री-इंस्टॉल्ड आती है. इसके फीचर्स को देखते हुए लोग इसे खूब यूज भी करते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि यह डिवाइस को स्लो भी कर सकती है. दरअसल, यह ऐप लगातार बैकअप और सिंकिंग में लगी रहती है. इससे CPU और नेटवर्क रिसोर्स यूज होते हैं, जिससे हीट जनरेट होने से डिवाइस स्लो हो सकता है.
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iPhone के साइड में क्यों बनी होती है लाइन? डिजाइन नहीं टेक्नोलॉजी का है खेल, यहां समझें पूरा मामला ]]></description>
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:26:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone के साइड में क्यों बनी होती है लाइन? डिजाइन नहीं टेक्नोलॉजी का है खेल, यहां समझें पूरा मामला</title>
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<description><![CDATA[ iPhone Hidden Feature: अगर आपके पास आईफोन है तो आपने इसकी साइड में फ्रेम पर लाइन बनी देखी होगी. अगर आप आईफोन के अलावा ऐप्पल के सेलुलर कनेक्टिविटी वाले आईपैड और ऐप्पल वॉच यूज करते हैं तो उन डिवाइसेस पर भी ऐसी लाइन देखी होगी. अधिकतर लोगों को लगता है कि यह डिजाइन का पार्ट है, लेकिन इसके पीछे का खेल कुछ और ही है. ये लाइन न तो आईफोन के डिजाइन के लिए होती है और न ही इनका एस्थेटिक से कोई लेना-देना है. आईफोन के एक बहुत जरूरी पार्ट के काम करने के लिए यह लाइन दी जाती है.&amp;nbsp;
क्यों होती है आईफोन के साइड में लाइन?
अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि अगर ये लाइन डिजाइन के लिए नहीं है तो इनका यूज क्या होता है? इसका जवाब है कि यह लाइन एंटीना के तौर पर काम करती है. एंटीना की वजह से आईफोन का ब्लूटूथ, वाईफाई और 5G चिप डिजिटल वेव्स को रिसीव और ट्रांसमिट करते हैं. यानी आईफोन के कुछ सबसे जरूरी फीचर्स इस लाइन के कारण आपके आसपास की दुनिया से कम्युनिकेट करते हैं. अगर iPhone 17 Pro Max के उदाहरण से समझें तो इसमें कैमरा आईलैंड के नीचे एंटीना लाइन दी गई है.
पुराने आईफोन में भी क्लियरली विजिबल हैं एंटीना लाइन
लेटेस्ट मॉडल की तरह पुराने आईफोन में भी एंटीना लाइन एकदम विजिबल थी. अगर आईफोन 6 की बात करें तो इसके रियर में कैमरा और फोन के निचले हिस्से को अलग करते हुए एक लाइन होती थी. वहीं आईफोन 8 से लेकर आईफोन 16 तक के मॉडल में स्टेनलेस स्टील और टाइटैनियम फिनिश के कारण इसकी विजिबिलिटी थोड़ी कम हो गई, लेकिन एंटीना लाइन ने आईफोन का साथ नहीं छोड़ा.
बहुत जरूरी होती है एंटीना लाइन
आईफोन के लिए एंटीना लाइन जितना दिखती है, उससे ज्यादा जरूरी होती है. दरअसल, मेटल से बनी आईफोन की बॉडी से सिग्नल को पास होने के लिए इसमें कहीं ब्रेक होना जरूरी है. यह लाइन उसी ब्रेक का काम करती है और यह रेडियो सिग्नल को अपने अंदर से पास होने देती है. इसके बिना सिग्नल क्वालिटी पर बुरा असर पड़ सकता है. दरअसल, मेटल के बने फ्रेम रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल को कमजोर कर देते हैं. ऐसे में पॉलीमर और कम्पॉजिट से बनी यह लाइन मेटल फ्रेम में एक विंडो क्रिएट कर देती है,जहां से सिग्नल बिना किसी परेशानी के पास हो सकते हैं.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:26:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Instagram Plus: अब इंस्टाग्राम चलाने के लिए देने होंगे पैसे? आने वाला है नया सब्सक्रिप्शन मॉडल, मिलेंगे इतने सारे फीचर्स</title>
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<description><![CDATA[ Instagram Plus: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta अपने फेमश ऐप Instagram को लेकर बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. कंपनी एक नए प्रीमियम सब्सक्रिप्शन मॉडल Instagram Plus पर काम कर रही है जो आम यूजर्स के एक्सपीरियंस को पहले से काफी अलग बना सकता है. इस नए प्लान में ऐसे फीचर्स मिलने की बात सामने आई है जो अभी तक फ्री यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं हैं.
किन देशों में शुरू हुआ टेस्ट?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Instagram Plus का ट्रायल फिलहाल कुछ चुनिंदा देशों जैसे मेक्सिको, जापान और फिलीपींस में किया जा रहा है. यानी अभी यह फीचर सीमित यूजर्स तक ही पहुंचा है लेकिन आने वाले समय में इसे अन्य देशों में भी रोलआउट किया जा सकता है.
क्या-क्या खास मिलेगा Instagram Plus में?
इस पेड सर्विस का सबसे चर्चित फीचर है अनोनिमस स्टोरी व्यू. यानी अगर आप Instagram Plus यूजर हैं तो आप किसी की स्टोरी देख सकते हैं बिना अपनी पहचान दिखाए. आमतौर पर Instagram पर स्टोरी डालने वाला व्यक्ति यह देख सकता है कि उसकी स्टोरी किस-किस ने देखी है लेकिन इस फीचर के साथ आपकी मौजूदगी छिपी रहेगी.
इसके अलावा, यूजर्स को यह भी पता चल सकेगा कि उनकी स्टोरी को कितनी बार दोबारा देखा गया है. अभी तक यह सुविधा सामान्य यूजर्स को नहीं मिलती. साथ ही, स्टोरी के लिए कई अलग-अलग ऑडियंस लिस्ट बनाने की सुविधा भी दी जाएगी जबकि फिलहाल सिर्फ एक Close Friends लिस्ट ही बनाई जा सकती है.
Instagram Plus यूजर्स अपनी स्टोरी की अवधि को 24 घंटे से ज्यादा बढ़ा सकेंगे और हफ्ते में एक बार किसी स्टोरी को हाइलाइट करके उसे सबसे आगे दिखा सकेंगे जिससे उसकी विजिबिलिटी बढ़ेगी.
और कौन से नए फीचर्स होंगे शामिल?
इस सब्सक्रिप्शन के साथ यूजर्स को Superlikes जैसे एनिमेटेड रिएक्शन भेजने का ऑप्शन भी मिलेगा. साथ ही, स्टोरी देखने वालों की लिस्ट में सर्च करने की सुविधा होगी जिससे आप आसानी से किसी खास व्यक्ति को ढूंढ सकेंगे.
क्या यह Verified प्लान जैसा है?
यह समझना जरूरी है कि Instagram Plus, Meta के Verified प्लान से अलग है. Verified प्लान मुख्य रूप से क्रिएटर्स और बिजनेस यूजर्स के लिए बनाया गया है जिसमें ब्लू टिक और सिक्योरिटी जैसे फीचर्स मिलते हैं. वहीं Instagram Plus आम यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
कितनी हो सकती है कीमत?
अभी कंपनी ने इसकी आधिकारिक कीमत का खुलासा नहीं किया है लेकिन जिन देशों में इसकी टेस्टिंग चल रही है वहां इसकी कीमत अलग-अलग रखी गई है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सब्सक्रिप्शन हर महीने करीब 100 से 200 रुपये के बीच हो सकता है. भारत में लॉन्च होने पर इसकी कीमत क्या होगी, यह अभी साफ नहीं है.
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<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Android Users पर मंडरा रहा खतरा! फोन पर पूरा कब्जा कर सकता है ये खतरनाक मैलवेयर, जानिए कैसे बचें</title>
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<description><![CDATA[ Android Users at Risk: भारत में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच Ministry of Home Affairs ने एंड्रॉयड यूजर्स के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है. सरकार ने Android God Mode नाम के एक खतरनाक मैलवेयर को लेकर एडवाइजरी जारी की है जो चुपचाप आपके फोन पर पूरा कंट्रोल हासिल कर सकता है. यह खतरा इतना गंभीर माना जा रहा है कि आम यूजर्स को विशेष सतर्क रहने को कहा गया है.
कैसे काम करता है यह खतरनाक मैलवेयर?

I4C, MHA has issued an advisory warning citizens about sophisticated Android malware known as &amp;ldquo;Android God Mode&amp;rdquo;, which misuses Accessibility permissions to gain unauthorized control over devices.🔗 Read the complete advisory here: https://t.co/B4NBrDvGEG #AndroidMalware pic.twitter.com/CkgYYvgagV
&amp;mdash; CyberDost I4C (@Cyberdost) March 30, 2026



सरकारी एजेंसियों के मुताबिक, यह मैलवेयर सीधे फोन में घुसपैठ नहीं करता बल्कि नकली ऐप्स के जरिए यूजर्स को फंसाता है. ये फर्जी ऐप्स देखने में बिल्कुल असली लगते हैं और अक्सर बैंकिंग, सरकारी सेवाओं या कस्टमर सपोर्ट से जुड़े होते हैं. उदाहरण के तौर पर SBI YONO जैसे फेमश ऐप्स की नकल बनाकर यूजर्स को डाउनलोड करने के लिए उकसाया जाता है.
जैसे ही यूजर गलती से इन ऐप्स को इंस्टॉल करता है यह Accessibility परमिशन मांगते हैं. एक बार यह परमिशन मिल गई तो मैलवेयर फोन के लगभग हर हिस्से तक पहुंच बना लेता है. इसके बाद यह बिना किसी जानकारी के आपके मैसेज पढ़ सकता है, पासवर्ड चुरा सकता है और यहां तक कि बैंकिंग डिटेल्स तक एक्सेस कर सकता है.
क्यों है यह इतना खतरनाक?
इस मैलवेयर की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह बैकग्राउंड में चुपचाप काम करता है. यूजर को पता भी नहीं चलता और उसकी निजी जानकारी धीरे-धीरे हैकर्स तक पहुंच जाती है. यह न सिर्फ डेटा चोरी कर सकता है बल्कि आपके फोन को पूरी तरह से कंट्रोल भी कर सकता है.
बचाव के लिए क्या करें?
इस खतरे से बचने के लिए Ministry of Home Affairs ने कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है. सबसे पहले, हमेशा ऐप्स को भरोसेमंद प्लेटफॉर्म जैसे Google Play Store से ही डाउनलोड करें. किसी भी अनजान लिंक, WhatsApp मैसेज या APK फाइल के जरिए ऐप इंस्टॉल करने से बचें. इसके अलावा, किसी भी संदिग्ध ऐप को Accessibility जैसी संवेदनशील परमिशन देने से पहले अच्छी तरह सोचें. अगर आपके फोन में कोई अजीब ऐप दिखाई दे तो उसे तुरंत हटाएं और उसकी परमिशन चेक करें.
साइबर फ्रॉड की शिकायत कैसे करें?
अगर आपको लगता है कि आप इस तरह के किसी साइबर हमले का शिकार हुए हैं तो तुरंत कार्रवाई करना जरूरी है. सरकार ने इसके लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया है. इसके अलावा आप Indian Cyber Crime Coordination Centre की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Anant Ambani Bathroom Gadgets : अनंत अंबानी ने अपने बाथरूम में लगवाए ये 3 गैजेट, इनसे अपना बाथरूम स्मार्ट बना सकते हैं आप</title>
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<description><![CDATA[ Anant Ambani Bathroom Gadgets : भारत के सबसे बड़े बिजनेस मेन मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी अक्सर अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल को लेकर चर्चा में रहते हैं. हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें उनके बाथरूम के कुछ खास और स्मार्ट गैजेट्स दिखाए गए. इन गैजेट्स की खास बात यह है कि ये सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी को आसान, साफ और इनवायरमेंट को बेहतर बनाने में भी मदद करते हैं. आजकल स्मार्ट होम का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, और अब लोग अपने बाथरूम को भी स्मार्ट बनाना चाहते हैं. अनंत अंबानी के बाथरूम में लगे ये गैजेट्स इस बात को बताते हैं कि कैसे छोटी-छोटी चीजें आपकी लाइफ को बेहतर बना सकती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि अनंत अंबानी ने अपने बाथरूम में कौन से 3 गैजेट लगवाए हैं. जिनके यूज से आप भी अपना बाथरूम स्मार्ट बना सकते हैं.
अनंत अंबानी ने अपने बाथरूम में कौन से 3 गैजेट लगवाए हैं?
1. ऑटोमैटिक टचलेस वॉटर सेवर टैप - यह एक ऐसा स्मार्ट नल है जिसे छूने की जरूरत नहीं होती, जैसे ही आप हाथ आगे करते हैं, पानी अपने आप निकलने लगता है और हाथ हटाते ही बंद हो जाता है. इससे पानी की बचत होती है. हाथ से छूने की जरूरत नहीं, इसलिए साफ-सफाई बनी रहती है और इसे एक बार चार्ज करने पर इसकी बैटरी तीन महीनें तक चल सकती है. आज के समय में पानी बचाना बहुत जरूरी है, और यह गैजेट इसमें काफी मदद करता है.&amp;nbsp;
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2. ड्रेन हेयर कैचर - घर में अक्सर बाल नाली में फंस जाते हैं, जिससे पानी रुकने लगता है और गंदगी फैलती है. इस समस्या का आसान सोल्यूशन यह छोटा सा ड्रेन कवर है. इसे नाली के ऊपर लगा दिया जाता है. यह बाल और कचरे को ऊपर ही रोक लेता है. बाद में इसे साफ करना बहुत आसान होता है. इसके यूज से नाली जाम होने से बचती है.सफाई आसान हो जाती है, साथ ही बदबू और गंदगी कम होती है.&amp;nbsp;
3. टचलेस यूवी टूथब्रश सैनिटाइजर - हम रोज जिस टूथब्रश का यूज करते हैं, वह बाथरूम में खुला पड़ा रहता है, जहां कई तरह के जर्म्स होते हैं. इस समस्या का उपाय यह यूवी सैनिटाइजर है. ये आपके टूथब्रश को जर्म्स से बचाता है. हेल्थ के लिए बेहतर ऑप्शन है. साथ ही इसे यूज करना आसान और टचलेस है. ब्रश को इसमें रखने पर यह UV लाइट से उसे साफ करता है और जर्म्स &amp;nbsp;को खत्म करके ब्रश को सुरक्षित रखता है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>भारत के टॉप 3 शहर जहां मिलती है सबसे तेज इंटरनेट स्पीड! जानिए पहले नंबर पर कौन</title>
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<description><![CDATA[ भारत के टॉप 3 शहर जहां मिलती है सबसे तेज इंटरनेट स्पीड! जानिए पहले नंबर पर कौन ]]></description>
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<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:53 +0530</pubDate>
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<title>अब AI बताएगा आपका भविष्य! चीन में 20 साल के छात्र ने किया कमाल, जानिए कैसे काम करता है ये एआई चैटबॉट</title>
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<description><![CDATA[ अब AI बताएगा आपका भविष्य! चीन में 20 साल के छात्र ने किया कमाल, जानिए कैसे काम करता है ये एआई चैटबॉट ]]></description>
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<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>WhatsApp यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! टाइप करते ही सामने आ जाएंगे स्टिकर, ऐसे करेगा काम</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp Stickers: मैसेजिंग ऐप WhatsApp अपने यूजर्स के लिए लगातार नए फीचर्स लाता रहता है. अब ऐप में एक ऐसा अपडेट आया है जो चैटिंग को पहले से ज्यादा आसान और मजेदार बना सकता है. नए अपडेट के बाद यूजर्स को चैट करते समय इमोजी टाइप करते ही उससे जुड़े स्टिकर अपने-आप दिखाई देने लगेंगे. इससे स्टिकर ढूंढने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा.
इमोजी लिखते ही दिखेंगे संबंधित स्टिकर
नए फीचर की मदद से जब भी यूजर चैट बॉक्स में कोई इमोजी टाइप करेगा उसी से जुड़े स्टिकर तुरंत स्क्रीन पर दिखाई देने लगेंगे. पहले किसी स्टिकर को भेजने के लिए अलग से स्टिकर कीबोर्ड खोलना पड़ता था और फिर अलग-अलग स्टिकर पैक में स्क्रॉल करके सही स्टिकर तलाशना पड़ता था.
अब यह प्रक्रिया काफी आसान हो गई है. यूजर जिस इमोजी को टाइप करेगा उसी भावना या रिएक्शन से जुड़े स्टिकर तुरंत सामने आ जाएंगे और उनमें से किसी एक को टैप करके सीधे चैट में भेजा जा सकेगा. इससे बातचीत के दौरान समय की बचत भी होगी और चैटिंग का अनुभव भी बेहतर बनेगा.
iPhone यूजर्स के लिए जारी हुआ अपडेट
यह नया फीचर फिलहाल WhatsApp for iOS में शामिल किया गया है. ऐप के लेटेस्ट अपडेट के साथ इसका वर्जन नंबर 26.8.76 तक पहुंच गया है. इस अपडेट के जरिए स्टिकर सुझाव वाला फीचर जोड़ा गया है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सुविधा धीरे-धीरे सभी यूजर्स तक पहुंचाई जा रही है इसलिए अगर किसी के फोन में अभी यह फीचर दिखाई नहीं दे रहा है तो आने वाले दिनों में यह अपने-आप एक्टिव हो सकता है.
Show More Results से मिलेंगे और भी स्टिकर
अगर यूजर को दिखाई दे रहे स्टिकर से ज्यादा विकल्प चाहिए तो Show more results विकल्प पर टैप करके और भी स्टिकर देखे जा सकते हैं. इसमें ऐप के अंदर मौजूद स्टिकर के साथ-साथ थर्ड-पार्टी स्टिकर पैक भी शामिल हो सकते हैं.
उदाहरण के लिए अगर कोई हंसने वाला इमोजी टाइप करता है तो मजेदार या फनी रिएक्शन वाले स्टिकर दिखेंगे, वहीं दिल वाले इमोजी डालने पर प्यार या भावनाओं से जुड़े स्टिकर सामने आ जाएंगे.
आने वाले समय में और भी नए फीचर्स
हाल के महीनों में Meta Platforms अपने इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म में कई नए फीचर्स जोड़ रहा है. हाल ही में ग्रुप चैट के लिए Group Message History फीचर भी जोड़ा गया है जिससे ग्रुप में नए जुड़ने वाले सदस्य पुराने मैसेज भी देख सकते हैं.
इसके अलावा रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी भारतीय यूजर्स के लिए SIM binding जैसे सुरक्षा फीचर पर भी काम कर रही है. साथ ही एक प्रीमियम सब्सक्रिप्शन प्लान लाने की भी तैयारी बताई जा रही है जिसे संभवतः WhatsApp Plus नाम दिया जा सकता है. इसमें पेड यूजर्स को अतिरिक्त कस्टमाइजेशन और कुछ खास सुविधाएं मिलने की उम्मीद है.
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इस कंपनी के यूजर्स की बल्ले&#45;बल्ले! रिचार्ज प्लान पर मिलने लगा Unlimited 5G डेटा, तुरंत उठाएं फायदा</title>
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<description><![CDATA[ Airtel Unlimited 5G Data: अगर आप एयरटेल की सिम यूज करते हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. कंपनी ने एक बार फिर से अपने रिचार्ज प्लान पर Unlimited 5G Data देना शुरू कर दिया है और इसके लिए एयरटेल यूजर्स को अलग से पैसा चुकाने की भी जरूरत नहीं है. दरअसल, कंपनी पहले भी Unlimited 5G Data दे रही थी, लेकिन बीच में इसे बंद कर दिया गया था. अब जियो और वोडाफोन आइडिया से बढ़ते कंपीटिशन के बीच कंपनी सेलेक्टेड रिचार्ज प्लान्स पर फिर से Unlimited 5G Data देने लगी है.
इन प्लान पर मिल रहा Unlimited 5G Data
अभी एयरटेल के 349 रुपये, 379 रुपये, 398 रुपये, 399 रुपये, 409 रुपये, 429 रुपये, 649 रुपये, 979 रुपये, 1029 रुपये, 1798 रुपये और 3999 रुपये के प्लान के साथ फ्री Unlimited 5G डेटा दिया जा रहा है. इन प्लान के रेगुलर बेनेफिट्स के साथ-साथ अब यूजर्स को फास्ट कनेक्टिविटी भी फ्री मिलेगी. बता दें कि शुरुआत में जियो की तरह एयरटेल के सभी प्लान्स के साथ अनलिमिटेड 5G डेटा मिलता था, लेकिन इस बार चुनिंदा प्लान पर यह बेनेफिट ऑफर किया जा रहा है.
5G कनेक्टिविटी होना जरूरी
एयरटेल के Unlimited 5G Data का फायदा उठाने के लिए यूजर का 5G नेटवर्क कवरेज में होना जरूरी है. साथ ही उसका मोबाइल भी 5G रेडी होना चाहिए. 4G मोबाइल पर 5G डेटा को एक्सेस नहीं किया जा सकेगा.
जियो भी दे रही है Unlimited 5G Data
एयरटेल के कंपीटिशन की बात करें तो जियो भी अपने कई रिचार्ज प्लान्स के साथ फ्री Unlimited 5G Data दे रही है. जियो के 198 रुपये, 349 रुपये, 399 रुपये, 445 रुपये, 449 रुपये, 450 रुपये, 500 रुपये, 629 रुपये, 719 रुपये, 749 रुपये, 859 रुपये, 899 रुपये, 949 रुपये, 999 रुपये, 1028 रुपये, 1029 रुपये, 1049 रुपये, 1199 रुपये, 1299 रुपये, 1799 रुपये, 2025 रुपये, 3599 रुपये और 3999 रुपये के प्लान के साथ फ्री में Unlimited 5G Data ऑफर किया जा रहा है.
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:42 +0530</pubDate>
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<title>AI से खतरे में ये नौकरियां! Anthropic की रिपोर्ट में खुलासा, क्या आपकी जॉब भी है लिस्ट में?</title>
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<description><![CDATA[ Anthropic AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से काम करने के तरीकों को बदल रहा है. खासतौर पर ऑफिस से जुड़े कामों में AI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. हालांकि यह समझना अभी भी मुश्किल है कि आने वाले समय में इसका नौकरी बाजार पर कितना बड़ा असर पड़ेगा.
इसी को समझने के लिए AI कंपनी Anthropic ने एक नया सिस्टम तैयार किया है जिसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कौन-कौन सी नौकरियां AI की वजह से ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं.
कैसे किया गया यह अध्ययन
इस रिसर्च में अर्थशास्त्रियों Maxim Massenkoff और Peter McCrory ने एक खास इंडेक्स तैयार किया है. इस इंडेक्स का मकसद यह समझना है कि अलग-अलग पेशों में ऐसे कितने काम शामिल हैं जिन्हें बड़े भाषा मॉडल यानी AI सिस्टम आसानी से कर सकते हैं. शोधकर्ताओं ने नौकरी से जुड़े कार्यों और वास्तविक दुनिया में इस्तेमाल हो रहे AI टूल्स का विश्लेषण किया. अगर किसी पेशे में ऐसे काम ज्यादा पाए गए जिन्हें AI पहले से कर रहा है या आसानी से कर सकता है तो उस पेशे को ऑटोमेशन के ज्यादा खतरे वाला माना गया.
इन नौकरियों पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है
रिपोर्ट के अनुसार टेक्नोलॉजी से जुड़े कई काम AI के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. खासकर प्रोग्रामिंग से जुड़े पेशे इस सूची में ऊपर बताए गए हैं. अध्ययन में यह सामने आया कि प्रोग्रामर्स के रोजमर्रा के लगभग तीन चौथाई काम ऐसे हैं जिन्हें AI सिस्टम संभाल सकते हैं.
इसके अलावा कस्टमर सर्विस से जुड़े कर्मचारी, डेटा एंट्री करने वाले कर्मचारी और मेडिकल रिकॉर्ड संभालने वाले विशेषज्ञ भी उन पेशों में शामिल हैं जिन पर AI का असर ज्यादा पड़ सकता है.
कुछ पेशे अभी भी सुरक्षित माने जा रहे
हालांकि सभी नौकरियां AI से प्रभावित नहीं होंगी. रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन कामों में शारीरिक मेहनत और इंसानी मौजूदगी जरूरी होती है वहां AI की भूमिका सीमित है. उदाहरण के तौर पर रसोइया, लाइफगार्ड और बर्तन साफ करने जैसे काम फिलहाल ऑटोमेशन से काफी हद तक सुरक्षित माने जा रहे हैं.
क्या AI की वजह से नौकरियां खत्म होना शुरू हो गई हैं?
AI के कारण नौकरी जाने को लेकर चिंता जरूर बढ़ रही है लेकिन इस अध्ययन में अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि बड़े स्तर पर नौकरियां खत्म होना शुरू हो गई हैं. हालांकि AI टूल ChatGPT के आने के बाद से AI से प्रभावित और कम प्रभावित नौकरियों के बीच बेरोजगारी के आंकड़ों में थोड़ा बदलाव जरूर देखा गया है.
भर्ती के ट्रेंड में दिख रहा बदलाव
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि भर्ती के पैटर्न में हल्का बदलाव दिखने लगा है. खासकर युवा उम्मीदवारों के लिए नौकरियों की गति कुछ धीमी होती दिखाई दे रही है. 22 से 25 साल की उम्र के उम्मीदवारों के लिए भर्ती में कमी के संकेत मिले हैं और यह स्थिति खासतौर पर उन क्षेत्रों में देखी जा रही है जहां AI टूल्स कुछ कामों को संभाल सकते हैं.
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:42 +0530</pubDate>
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<title>न बम, न मिसाइल! फिर भी ठप हो सकता है पूरा देश! जानिए क्या है Cyber War</title>
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<description><![CDATA[ Cyber War: आधुनिक दौर में युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है. पहले देशों के बीच जंग टैंक, मिसाइल और सैनिकों के जरिए लड़ी जाती थी लेकिन अब एक नई तरह की लड़ाई सामने आ चुकी है जिसे साइबर वॉर कहा जाता है. इस युद्ध में बंदूक या बम की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि कंप्यूटर, इंटरनेट और हैकिंग तकनीक का इस्तेमाल करके दुश्मन देश को नुकसान पहुंचाया जाता है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में साइबर वॉर किसी भी पारंपरिक युद्ध से ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है.
क्या होता है Cyber War?
साइबर वॉर का मतलब है इंटरनेट और डिजिटल सिस्टम के जरिए किसी देश की महत्वपूर्ण सेवाओं पर हमला करना. इसमें हैकर्स या साइबर एक्सपर्ट्स दुश्मन देश के सरकारी नेटवर्क, बैंकिंग सिस्टम, बिजली ग्रिड, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सैन्य सिस्टम को निशाना बनाते हैं. अगर ये सिस्टम ठप हो जाएं तो पूरे देश की व्यवस्था कुछ ही समय में बिखर सकती है.
कैसे किया जाता है साइबर हमला?
साइबर वॉर के दौरान हैकर्स कई अलग-अलग तरीकों से हमला करते हैं. इनमें मालवेयर, वायरस, रैनसमवेयर और डिस्ट्रीब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (DDoS) जैसे हमले शामिल होते हैं. इन तकनीकों के जरिए किसी देश की वेबसाइट, सर्वर या नेटवर्क को ओवरलोड कर दिया जाता है या उसमें घुसकर डेटा चुरा लिया जाता है. कई बार महत्वपूर्ण डेटा को डिलीट या लॉक भी कर दिया जाता है जिससे सिस्टम पूरी तरह ठप हो सकता है.
पूरे देश पर कैसे पड़ता है असर?
अगर किसी देश के बिजली सिस्टम, बैंकिंग नेटवर्क या रेलवे कंट्रोल सिस्टम पर साइबर हमला हो जाए तो उसकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है. बैंकिंग सेवाएं रुक सकती हैं, एटीएम काम करना बंद कर सकते हैं, फ्लाइट और ट्रेन संचालन प्रभावित हो सकता है. यहां तक कि सैन्य संचार प्रणाली भी प्रभावित हो सकती है. इस वजह से बिना एक भी गोली चलाए दुश्मन देश को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है.
साइबर वॉर से बचाव क्यों जरूरी है?
आज दुनिया के लगभग सभी देश अपनी साइबर सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं. सरकारें एडवांस सिक्योरिटी सिस्टम, फायरवॉल और साइबर डिफेंस टीम तैयार कर रही हैं ताकि ऐसे हमलों को रोका जा सके. आम लोगों के लिए भी जरूरी है कि वे मजबूत पासवर्ड, सुरक्षित नेटवर्क और अपडेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें. साइबर वॉर आधुनिक समय की एक ऐसी लड़ाई है जो बिना हथियारों के भी किसी देश को गंभीर नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखती है.
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:41 +0530</pubDate>
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<title>यूट्यूब या इंस्टाग्राम? आपके फोन की कौन&#45;सी ऐप्स करती हैं सबसे ज्यादा मोबाइल डेटा का यूज, यहां देखें पूरी लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ Social Media Apps Mobile Data Consumption: अगर आपका फोन वाईफाई से कनेक्टेड नहीं है तो कुछ देर तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करते ही 50 पर्सेंट मोबाइल डेटा कंज्यूम होने का मैसेज आ जाता है. कई बार हैरानी भी होती है कि इतना जल्दी डेटा कैसे कंज्यूम हो गया. दरअसल, सोशल मीडिया ऐप्स ज्यादा डेटा कंज्यूम करती हैं. ये लगातार रिफ्रेश होती रहती हैं, जिसके कारण इन्हें ज्यादा डेटा की जरूरत पड़ती है. आज हम आपको बताएंगे कि कौन-सी ऐप्स ज्यादा डेटा कंज्यूम करती हैं.
YouTube
अगर आप कुछ देर तक YouTube शॉर्ट्स या वीडियो देखते रहते हैं तो मोबाइल डेटा लिमिट का मैसेज जल्दी ही आ जाता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर आप स्टैंडर्ड क्वालिटी वाले वीडियो भी देखते हैं तो यह ऐप एक घंटे के यूज में 3GB तक डेटा कंज्यूम कर सकती है. इस पर डेटा की खपत कम करने के लिए वीडियो क्वालिटी को कम पर सेट किया जा सकता है.
Facebook
यूट्यूब के लिए फेसबुक को भी काफी डेटा की जरूरत पड़ती है. अगर आप इसे मोबाइल पर यूज कर रहे हैं तो स्क्रॉलिंग में ही यह 50-100MB डेटा कंज्यूम कर लेती है. वहीं अगर आप रील सेक्शन में चले जाते हैं तो डेटा कंजप्शन बढ़कर 500MB-1GB तक जा सकती है.
Instagram&amp;nbsp;
इंस्टाग्राम को भी बाकी ऐप्स की तरह काफी डेटा की जरूरत पड़ती है. एक घंटे तक यूज करने पर यह ऐप 500MB से लेकर 1GB तक मोबाइल डेटा यूज कर लेती है. हाई क्वालिटी इमेज और वीडियो के मामले में यह खपत और बढ़ जाती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मोबाइल पहले कंटेट को प्री-लोड करता है, जिसमें काफी डेटा लगता है.
Pintrest
जब आप कोई डिजाइन, रेसिपी या फैशन ट्रेंड देखने के लिए पिंटरेस्ट ओपन करते हैं तो मोबाइल डेटा की खपत तेजी से बढ़ जाती है. इस पर इमेजेज की बड़ी लिस्ट और वीडियोज आदि के कारण कंटेट को प्री-लोड होने के लिए काफी डेटा की जरूरत पड़ती है. यह ऐप 5 मिनट में 85MB डेटा तक की खपत कर सकती है.
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<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:41 +0530</pubDate>
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<title>Apple iPhone 17e Vs Google Pixel 10a: खरीदने से पहले जान लें ये 5 बड़े फर्क, वरना हो सकती है बड़ी गलती!</title>
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<description><![CDATA[ Apple iPhone 17e Vs Google Pixel 10a: 2 मार्च को Apple ने अपने किफायती फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 17e को पेश किया. इस नए मॉडल में कंपनी ने परफॉर्मेंस, चार्जिंग और मजबूती के मामले में कई सुधार किए हैं. वहीं दूसरी तरफ Google ने कुछ ही दिन पहले Pixel 10a लॉन्च किया जो मिड-रेंज सेगमेंट में काफी चर्चा में है. दोनों फोन ऐसे यूजर्स को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं जो कम कीमत में प्रीमियम फीचर्स चाहते हैं. ऐसे में सवाल यह है कि आखिर इन दोनों में से किसे खरीदना ज्यादा समझदारी होगी? आइए जानते हैं इनके बीच के 5 बड़े अंतर.
कीमत
स्मार्टफोन खरीदते समय कीमत सबसे अहम फैक्टर बन जाती है. Google Pixel 10a की शुरुआती कीमत करीब 49,999 रुपये रखी गई है जिसमें 256GB स्टोरेज मिलता है. वहीं Apple iPhone 17e की शुरुआती कीमत लगभग 64,900 रुपये है और इसमें भी 256GB स्टोरेज मिलता है. हालांकि Apple अपने यूजर्स को 512GB स्टोरेज का विकल्प भी देता है जो ज्यादा डेटा रखने वालों के लिए फायदेमंद हो सकता है.
परफॉर्मेंस
परफॉर्मेंस के मामले में Apple थोड़ा आगे नजर आता है. Apple iPhone 17e में कंपनी का नया A19 चिपसेट दिया गया है जो 3nm तकनीक पर बना है और यही प्रोसेसर फ्लैगशिप Apple iPhone 17 सीरीज़ में भी इस्तेमाल हो रहा है.
दूसरी ओर Google Pixel 10a में Tensor G4 प्रोसेसर दिया गया है जो पहले भी Google Pixel 9a में देखा जा चुका है. इसलिए कच्ची ताकत और स्पीड के मामले में iPhone थोड़ा बेहतर प्रदर्शन दे सकता है.
डिस्प्ले
डिस्प्ले के मामले में दोनों फोन अलग-अलग फायदे देते हैं. Apple iPhone 17e में 6.1-इंच Super Retina XDR OLED डिस्प्ले मिलता है, जिसकी रेजोल्यूशन 2532&amp;times;1170 पिक्सल है. हालांकि इसमें अभी भी 60Hz रिफ्रेश रेट मिलता है.
वहीं Google Pixel 10a में 6.3-इंच Actua डिस्प्ले दिया गया है जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट मिलता है. इसका मतलब है कि स्क्रॉलिंग और गेमिंग के दौरान स्क्रीन ज्यादा स्मूद महसूस होगी.
कैमरा
कैमरा सेटअप में भी दोनों फोन अलग रणनीति अपनाते हैं. Apple iPhone 17e में 48MP का सिंगल Fusion कैमरा दिया गया है जो 2x ऑप्टिकल-लेवल जूम सपोर्ट करता है. दूसरी ओर Google Pixel 10a में ड्यूल कैमरा सेटअप मिलता है जिसमें 48MP मुख्य कैमरा और 13MP अल्ट्रा-वाइड लेंस शामिल है. अल्ट्रा-वाइड कैमरा की वजह से यूजर्स को ज्यादा वाइड एंगल फोटो लेने और क्रिएटिव शॉट्स कैप्चर करने की सुविधा मिलती है.
बैटरी और चार्जिंग
चार्जिंग और बैटरी में भी दोनों फोन अलग अनुभव देते हैं. Apple iPhone 17e में पहली बार MagSafe सपोर्ट दिया गया है और यह 15W Qi2 वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें लगभग 4000mAh बैटरी हो सकती है. वहीं Google Pixel 10a में 5100mAh की बड़ी बैटरी दी गई है और यह 30W फास्ट वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट करता है जिससे फोन जल्दी चार्ज हो सकता है.
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<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:18:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ChatGPT यूजर्स सावधान! भूलकर भी न करें ये काम, अकाउंट हो जाएगा खाली</title>
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<description><![CDATA[ ChatGPT Use:&amp;nbsp;आजकल लोग घर से लेकर ऑफिस तक के काम के लिए ChatGPT जैसे एआई चैटबॉट्स का यूज करने लगे हैं. अगर आप भी इन लोगों में शामिल हैं तो ChatGPT से काम लेते समय एक सावधानी बरतने की जरूरत है. अगर आप एआई से पासवर्ड क्रिएट करवाना चाहते हैं तो ChatGPT समेत किसी भी चैटबॉट पर भरोसा न करें. एक रिसर्च के मुताबिक, अपने अकाउंट को सिक्योर करने के लिए एआई से पासवर्ड करवाना भारी पड़ सकता है क्योंकि एआई मॉडल बार-बार ऐसे पासवर्ड जनरेट करते हैं, जिनका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है.
पासवर्ड क्रिएट करने में यह गलती करती है एआई
एक स्टडी में सामने आया कि ChatGPT, Claude और जेमिनी ने ऐसे पासवर्ड क्रिएट किए, जो देखने में तो स्ट्रॉन्ग थे, लेकिन असल में उनमें एक जैसा ही पैटर्न थे. Claude AI ने जो 50 पासवर्ड क्रिएट किए, उनमें से केवल 23 की यूनीक थे. K9#mPx$vL2nQ8wR पासवर्ड को 10 बार रिपीट किया गया. इसी तरह बाकी पासवर्ड में एक जैसी स्ट्रक्चर या कैरेक्टर्स यूज किए गए थे. इसके मुकाबले ChatGPT ने स्ट्रॉन्ग पासवर्ड क्रिएट किए, लेकिन उनमें भी पैटर्न एक जैसा था.
रैंडम चीजों के लिए न यूज करें एआई
पासवर्ड जैसी किसी रैंडम चीज के लिए एआई चैटबॉट को यूज न करने की सलाह दी जाती है. दरअसल, जब भी आप किसी चैटबॉट को प्रॉम्प्ट देते हैं तो उसका मोस्ट लाइकली जवाब देता है. इसे टेस्ट करने के लिए आप किसी भी चैटबॉट को कोई भी रैंडम नंबर क्रिएट करने के लिए कहें. बार-बार नई चैट में यह एक ही नंबर क्रिएट करेगा.&amp;nbsp;
कमजोर पासवर्ड से खाली हो सकता खाता
आजकल मोबाइल से ही पूरी बैंकिंग चलती है. लोग अपने पैसों का हिसाब-किताब भी फोन पर ही रखते हैं. ऐसे में अगर आप बैंकिंग ऐप्स या इंटरनेट बैंकिंग के लिए कमजोर पासवर्ड यूज करेंगे तो इसका अंदाजा लगाना आसान हो जाता है. इसके अलावा साइबर अटैकर्स भी कमजोर या आसानी से अंदाजा लगाए जा सकने वाले पासवर्ड का यूज कर आपका अकाउंट साफ कर सकते हैं.
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<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:18:52 +0530</pubDate>
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<title>Google I/O 2026: मई में होने वाले 5 बड़े ऐलान जो मचा सकते हैं हलचल, अभी जानिए सब कुछ</title>
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<description><![CDATA[ Google I/O 2026: हर साल की तरह इस बार भी मई में होने वाला Google I/O कंपनी की आने वाली रणनीति और प्रोडक्ट्स की दिशा तय करेगा. यही वह मंच है जहां से पूरे साल के अपडेट्स, नए फीचर्स और डिवाइस की झलक मिलती है. 2026 का इवेंट भी टेक दुनिया के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. आइए जानते हैं वे पांच बड़े ऐलान जिन पर सबकी नजर रहेगी.
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इंटरनेट पर पहले ही Android 17 को लेकर चर्चाएं तेज हैं. उम्मीद की जा रही है कि इवेंट में इसके नए फीचर्स और डिजाइन बदलावों को दिखाया जाएगा. स्थिर (स्टेबल) वर्जन बाद के महीनों में जारी हो सकता है. इस बार खास बात यह हो सकती है कि नया सिस्टम पहले से ज्यादा AI-इंटीग्रेटेड और स्मार्ट हो.
Gemini में बड़े अपग्रेड
Google लगातार अपने AI मॉडल Gemini को बेहतर बना रहा है. 2026 के इवेंट में इसके और उन्नत संस्करण की घोषणा संभव है. संकेत मिल रहे हैं कि कंपनी इसे ज्यादा Agentic AI क्षमताओं से लैस कर सकती है यानी ऐसा AI जो केवल जवाब न दे बल्कि खुद से कार्यों को समझकर पूरा भी करे. यह बदलाव आने वाले समय में डिजिटल असिस्टेंस का स्तर काफी ऊंचा कर सकता है.
Google Pixel 11 सीरीज की झलक
संभावना है कि इवेंट में Pixel 11 सीरीज का टीज़र देखने को मिले. माना जा रहा है कि इस लाइनअप में चार मॉडल शामिल हो सकते हैं Pixel 11, Pixel 11 Pro, Pixel 11 Pro XL और Pixel 11 Pro Fold. हालांकि पूरी लॉन्चिंग बाद में होगी लेकिन पहली झलक ही टेक प्रेमियों के लिए काफी रोमांचक होगी.
सर्च में और ज्यादा AI ताकत
Google अपने सर्च इंजन में आधुनिक AI क्षमताएं जोड़ सकता है. इससे सर्च अनुभव और भी ज्यादा conversational हो सकता है. क्रिएटर्स और पब्लिशर्स के लिए नए टूल्स, साथ ही AI आधारित शॉपिंग फीचर्स भी पेश किए जा सकते हैं जिससे यूजर्स को ज्यादा स्मार्ट और व्यक्तिगत परिणाम मिलें.
डेवलपर्स के लिए नए टूल्स और अपडेट
डेवलपर्स के लिए भी यह इवेंट अहम रहेगा. Firebase, AI APIs और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े नए फीचर्स की घोषणा हो सकती है. इससे ऐप डेवलपमेंट, AI इंटीग्रेशन और क्लाउड सेवाओं में काम करने वालों को नई संभावनाएं मिलेंगी. 2026 का यह सम्मेलन यूजर्स और डेवलपर्स दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है. हालांकि सबसे ज्यादा चर्चा संभवतः Android 17 को लेकर होगी क्योंकि उम्मीद है कि इसमें AI को केंद्र में रखकर बड़े बदलाव किए जाएंगे.
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<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:18:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AI के प्यार में पड़ कर 36 साल के व्यक्ति ने दे दी जान, इस चैटबॉट पर लगा उकसाने का आरोप</title>
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<description><![CDATA[ AI Relationship: इन दिनों लोगों के एआई के प्यार में पड़ने की कई घटनाएं सामने आ रही हैं. ऐसी ही एक घटना हाल ही में सामने आई है, जिसका अंत बहुत दुखद रहा. दरअसल, फ्लोरिडा के रहने वाले 36 वर्षीय Jonathan Gavalas को गूगल जेमिनी चैटबॉट से प्यार हो गया. कुछ दिन तक वह इस चैटबॉट से रोमांटिक कपल की तरह बात करता रहा और आखिर में अपनी जान दे दी. अब जोनाथन के पिता ने आरोप लगाया है कि इस चैटबॉट ने उसके बेटे को आत्महत्या करने पर मजबूर किया है.&amp;nbsp;
क्या है पूरा मामला?
36 वर्षीय जोनाथन की मैरिड लाइफ ठीक नहीं चल रही थी. इस मुश्किल से बाहर निकलने के उन्होंने गूगल जेमिनी चैटबॉट से बात करना शुरू कर दिया. कुछ ही दिनों में उनका इस चैटबॉट से लगाव गहरा हो गया और वो इस पर कई-कई घंटे बीताने लगे. अब जेमिनी के खिलाफ किए मुकदमे में जोनाथन के पिता ने आरोप लगाया कि इस चैटबॉट ने अपना कैरेक्टर नहीं छोड़ा, जिससे जोनाथन को यह अहसास होना लगा कि वह उसकी पत्नी है.&amp;nbsp;
जेमिनी ने दिया खतरनाक टास्क- आरोप
मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि जेमिनी ने पिछले साल सितंबर में जोनाथन को नुकीले हथियारों से लैस होकर मियामी एयरपोर्ट के पास एक जगह पर लोगों को मारने के लिए भेजा था, लेकिन यह प्लान कामयाब नहीं हो पाया. मुकदमे में आगे कहा गया है कि जेमिनी ने जोनाथन को आत्महत्या करने के लिए उकसाया. जेमिनी ने उसे बताया कि वह अपनी फिजिकल बॉडी को त्याग कर मेटावर्स में अपनी &#039;पत्नी&#039; को पा सकता है. इसके लिए उसे घर में खुद को बंद कर मारने की सलाह दी.
गूगल ने इसे लेकर क्या कहा है?
गूगल का कहना है कि वह मुकदमे में किए गए दावों को रिव्यू कर रही है. इसकी मॉडल आमतौर पर सेफ होते हैं, लेकिन कोई भी एआई मॉडल परफेक्ट नहीं है. कंपनी ने कहा कि जेमिनी को ऐसे डिजाइन किया गया है कि वह हिंसा और खुद को नुकसान पहुंचाने की सलाह नहीं देता है.
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<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:18:52 +0530</pubDate>
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<title>2026 में स्मार्टफोन पर मंडरा रहा मेमोरी संकट! सस्ते फोन हो सकते हैं महंगे, जानिए कैसे यूजर्स पर पड़ेगा असर</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Price Hike: अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो साल 2026 आपके लिए थोड़ा मुश्किल साबित हो सकता है. आने वाले समय में स्मार्टफोन बाजार पर एक बड़ा मेमोरी चिप संकट देखने को मिल सकता है जिसके कारण फोन की कीमतें बढ़ने की आशंका है. खासतौर पर भारत जैसे बाजार जहां बजट स्मार्टफोन की मांग ज्यादा है वहां इसका प्रभाव ज्यादा महसूस किया जा सकता है.
ग्लोबल बाजार में स्मार्टफोन बिक्री में गिरावट का अनुमान
रिसर्च फर्म International Data Corporation (IDC) के अनुसार, साल 2026 में दुनियाभर में स्मार्टफोन शिपमेंट में तेज गिरावट देखने को मिल सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में जहां करीब 1.26 अरब स्मार्टफोन शिप किए गए थे वहीं 2026 में यह संख्या घटकर लगभग 1.12 अरब यूनिट तक पहुंच सकती है. इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं. जैसे-जैसे इन चिप्स की लागत बढ़ेगी वैसे-वैसे कंपनियों को फोन की कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी.
100 डॉलर से कम कीमत वाले फोन हो सकते हैं खत्म
भारत जैसे देशों में सस्ते स्मार्टफोन का बड़ा बाजार है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में 100 डॉलर (करीब 8&amp;ndash;9 हजार रुपये) से कम कीमत वाले स्मार्टफोन बाजार से लगभग गायब हो सकते हैं. IDC का अनुमान है कि 2026 में स्मार्टफोन की औसत कीमत में लगभग 14 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है. इसका सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो कम बजट में नया फोन खरीदते हैं. पिछले एक दशक में जिस सस्ती कीमत ने स्मार्टफोन को हर वर्ग तक पहुंचाया अब उसी पर दबाव बढ़ सकता है.
कई स्मार्टफोन की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं
मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों का असर अब बाजार में दिखने भी लगा है. कुछ लोकप्रिय स्मार्टफोन मॉडलों की कीमत हाल के महीनों में बढ़ाई जा चुकी है. उदाहरण के तौर पर iQOO Z10 और Vivo T4 5G की कीमत में लगभग 2000 रुपये तक बढ़ोतरी देखी गई है. इसी तरह iQOO Z10x और Vivo T4x 5G के अलग-अलग स्टोरेज वेरिएंट की कीमतों में 1500 से 2500 रुपये तक का इजाफा हुआ है.
प्रीमियम स्मार्टफोन भी नहीं बचे असर से
सिर्फ बजट फोन ही नहीं बल्कि महंगे स्मार्टफोन भी इस संकट से अछूते नहीं हैं. हाल ही में लॉन्च हुई Samsung Galaxy S26 सीरीज की कीमत में भी बढ़ोतरी देखने को मिली. इस सीरीज के बेस मॉडल की कीमत करीब 6000 रुपये ज्यादा रखी गई जबकि Samsung Galaxy S26 Ultra की कीमत में लगभग 10,000 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई.
AI की बढ़ती मांग से कम हो रही मेमोरी सप्लाई
मेमोरी चिप्स की कमी का एक बड़ा कारण दुनिया भर में तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक भी है. टेक कंपनियां जैसे Meta, Google और Microsoft बड़े पैमाने पर AI डेटा सेंटर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं. इस वजह से स्मार्टफोन और पीसी बनाने वाली कंपनियों के लिए चिप्स की उपलब्धता कम हो रही है और उन्हें ज्यादा कीमत पर इन्हें खरीदना पड़ रहा है.
भारतीय ग्राहकों के लिए क्या बदल सकता है?
बदलते हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में स्मार्टफोन बाजार में बड़ा बदलाव हो सकता है. भारतीय ग्राहकों को अल्ट्रा-बजट फोन के कम विकल्प, औसत कीमत में बढ़ोतरी और फोन अपग्रेड करने का लंबा अंतराल देखने को मिल सकता है. यानि आने वाले वर्षों में सस्ते स्मार्टफोन खरीदना पहले जितना आसान नहीं रह सकता.
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<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:18:51 +0530</pubDate>
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<title>Samsung Galaxy S26 Series की कीमत आ गई सामने, किस देश में सबसे सस्ते मिलेंगे नए मोबाइल? यहां देखें पूरी लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ सैमसंग की Galaxy S26 सीरीज से पर्दा उठ चुका है. कंपनी ने इस सीरीज में Galaxy S26, Galaxy S26 Plus और Galaxy S26 Ultra समेत तीन मॉडल लॉन्च किए हैं. ये भारत समेत ग्लोबल मार्केट के लिए लॉन्च हुए हैं और अभी इन्हें प्री-ऑर्डर किया जा सकता है. अगर आप इस सीरीज के मॉडल खरीदना चाहते हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कि भारत में इनकी कितनी कीमत है और अगर आप इन्हें विदेशों से खरीदते हैं तो आपको कितनी कीमत चुकानी पड़ेगी.
भारत में Galaxy S26 सीरीज की कितनी कीमत?
भारत में Galaxy S26 के बेस वेरिएंट (12GB+256GB) की कीमत 87,999 रुपये है. इसके 512GB मॉडल के लिए 1,07,999 रुपये चुकाने होंगे. Plus मॉडल की बात करें तो 256GB स्टोरेज वेरिएंट के दाम 1,19,999 रुपये और 512GB ऑप्शन के लिए 1,39,999 रुपये हैं. वहीं Galaxy S26 Ultra &amp;nbsp;की कीमत 1,39,999 से शुरू होती है और 16GB+1TB वेरिएंट के लिए 1,89,999 रुपये तक जाती है.
अमेरिका में भारत के मुकाबले कम है कीमत
भारत के मुकाबले अमेरिका में इस सीरीज की कीमत कम है. अमेरिका में S26 Ultra की शुरुआती कीमत 1299 डॉलर (लगभग 1,18,000 रुपये) है. ज्यादा स्टोरेज वाले वेरिएंट 1499 डॉलर और 1799 डॉलर में खरीदे जा सकते हैं. इसी तरह Galaxy S26 की शुरुआती कीमत 899 और 1099 डॉलर है, जो भारतीय रुपये के हिसाब से क्रमश: लगभग 82,000 और एक लाख रुपये होती है. Galaxy S26+ की बात करें तो यह अमेरिका में 1,099 डॉलर (लगभग एक लाख रुपये) का मिल रहा है.
बाकी देशों में कितनी कीमत?

UAE की बात करें तो यहां S26 के 512GB वेरिएंट के लिए AED 3,599 (लगभग 89,200 रुपये), S26+ (512GB) के लिए AED 4,299 (लगभग 1.06 लाख रुपये) और S26 Ultra (512GB) के लिए AED 5,099 (लगभग 1.26 लाख रुपये) चुकाने पड़ेंगे.
UK में S26 की कीमत GBP 879 (लगभग 1.07 लाख रुपये), S26+ की GBP 1,099 (लगभग 1.35 लाख रुपये) और Ultra की GBP 1,279 (लगभग 1.57 लाख रुपये) है.
जर्मनी में इस सीरीज के 512GB वेरिएंट की बात करें तो S26 के दाम EUR 999 (लगभग 1.07 लाख रुपये), S26+ के EUR 1249 (लगभग 1.34 लाख रुपये) और Ultra मॉडल के EUR 1449 (लगभग 1.55 लाख रुपये) है.

इस लिहाज से देखा जाए तो अमेरिका में सैमसंग की नई सीरीज की सबसे कम कीमतें हैं. हालांकि, भारत में भी कंपनी लॉन्च ऑफर के तहत स्टोरेज अपग्रेड का ऑप्शन दे रही है.
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब चैटिंग होगी और भी मजेदार! WhatsApp पर सिर्फ टेक्स्ट लिखते ही बनेंगे धांसू स्टिकर्स, जानिए कैसे मिलेगा ये नया फीचर</title>
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<description><![CDATA[ अब चैटिंग होगी और भी मजेदार! WhatsApp पर सिर्फ टेक्स्ट लिखते ही बनेंगे धांसू स्टिकर्स, जानिए कैसे मिलेगा ये नया फीचर ]]></description>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:37 +0530</pubDate>
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<title>नया मॉडल आते ही Samsung Galaxy S25 Ultra 5G पर आ गया बंपर डिस्काउंट, यहां मिल रहा हजारों की बचत का मौका</title>
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<description><![CDATA[ सैमसंग ने हाल ही में अपनी नई Galaxy S26 सीरीज को लॉन्च किया है. नए मॉडल लॉन्च होते ही पिछले साल आई Galaxy S25 सीरीज के स्मार्टफोन्स पर धमाकेदार डिस्काउंट आ गया है. अगर Galaxy S25 Ultra की बात करें तो इस पर अभी 20,000 रुपये से ज्यादा की छूट मिल रही है. ऐसे में अगर आप शानदार फीचर्स और दमदार कैमरे वाला फोन लेने की सोच रहे हैं तो इस डील का फायदा उठाने का यह शानदार मौका है. आइए S25 Ultra के स्पेसिफिकेशंस और इस पर मिल रही डील के बारे में विस्तार से जान लेते हैं.
S25 Ultra के स्पेसिफिकेशंस
पिछले साल लॉन्च हुए Galaxy S25 Ultra में 6.9 इंच की QHD+ Dynamic AMOLED 2X स्क्रीन मिलती है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. इसमें क्वालकॉम का पावरफुल Snapdragon 8 Elite चिपसेट &amp;nbsp;लगा है, जिसे 12GB रैम से पेयर किया गया है. फोटो और वीडियो के लिए फोन के रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर, 50MP का अल्ट्रावाइड लेंस, 50MP का टेलीफोटो सेंसर और 10MP का एडिशनल 3x टेलीफोटो लेंस मिलता है. इसके फ्रंट में 12MP का सेंसर लगा हुआ है. फोन में लगा 5,000mAh का बैटरी पैक 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है.&amp;nbsp;
कहां मिल रही डील?
भारत में Galaxy S25 Ultra को 1,29,999 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था. अभी आपको इसे खरीदने के लिए इतनी रकम खर्च करने की जरूरत नहीं है. अभी अमेजन पर इस फोन का Titanium Whitesilver (12GB+256GB) वेरिएंट 20,000 रुपये से ज्यादा के फ्लैट डिस्काउंट के बाद 1,09,490 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा इस पर 1500 रुपये का बैंक ऑफर और 3284 रुपये का कैशबैक भी ऑफर किया जा रहा है. इस तरह देखा जाए तो यह फोन लगभग 25,000 रुपये की छूट के साथ अवेलेबल है.
Google Pixel 10 पर भी बंपर डिस्काउंट
Google Pixel 10 पर भी इस समय छूट मिल रही है. 79,999 रुपये की कीमत वाले इस फोन का इंडिगो कलर वेरिएंट (12GB+256GB) अमेजन पर 69,499 रुपये में लिस्टेड है. इस फ्लैट डिस्काउंट के साथ फोन की खरीद पर कैशबैक और बैंक ऑफर्स के तौर पर 3500 रुपये की एडिशनल छूट भी मिल रही है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:37 +0530</pubDate>
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<title>झटका! Google ने अचानक बंद किया अपना पॉपुलर ऐप, भारत समेत करोड़ों यूजर्स पर पड़ा सीधा असर</title>
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:37 +0530</pubDate>
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<title>टीन यूजर्स की सेफ्टी के लिए इंस्टाग्राम लाएगी नया फीचर, नुकसान पहुंचाने वाली सर्च करते ही पैरेंट्स के पास चला जाएगा अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[ टीन यूजर्स की सेफ्टी के लिए इंस्टाग्राम जल्द ही एक फीचर लेकर आने वाली है. इसके बाद अगर कोई भी टीन यूजर आत्महत्या या खुद को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कोई भी चीजें सर्च करेगा तो उसके पैरेंट्स के पास इसका नोटिफिकेशन चला जाएगा. बता दें कंपनी सेंसेटिव मेंटल हेल्थ कंटेट से जुड़े सेफगार्ड मजबूत कर रही है और यह उसके टीन अकाउंट्स और पैरेंटल सुपरविजन टूल में नई अपडेट होगी. आइए इस फीचर के बारे में विस्तार से जानते हैं.
क्यों लाया जा रहा है यह फीचर?
इंस्टाग्राम ने बताया कि इन अलर्ट्स को पैरेंट्स को अवेयर करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी मदद से उन्हें पता चल सकेगा कि उनके बच्चे को सपोर्ट की जरूरत है. इस गैर-जरूरी नोटिफिकेशन को दूर रखा जाएगा. कंपनी ने कहा कि अधिकतर टीन यूजर खुद को नुकसान पहुंचाने से संबंधित सर्च नहीं करते हैं, लेकिन अगर कोई करता है तो इंस्टाग्राम उस सर्च को ब्लॉक कर देगी और उसे हेल्पलाइन या सपोर्ट सिस्टम की तरफ रिडायरेक्ट कर दिया जाएगा.
कैसे काम करेगा नया फीचर?
इस फीचर की शुरुआत अगले हफ्ते से हो जाएगी. जिन पैरेंट्स और टीन्स ने सुपरविजन में खुद को इनरोल किया है, उन्हें कंपनी पहले ही अलर्ट भेजकर बता देगी कि अलर्ट का फीचर एक्टिवेट किया जा रहा है. इसके बाद अगर कोई टीन लगातार ऐसी कोई सर्च करेगा, जिससे वह खुद को नुकसान पहुंचा सकता है तो उसके पैरेंट्स के पास इसका नोटिफिकेशन चला जाएगा. ये नोटिफिकेशन इन-ऐप अलर्ट के साथ-साथ ईमेल, टेक्स्ट मैसेज और व्हाट्सऐप के जरिए भी भेजे जा सकते हैं. इसमें टीन की सर्च से संबंधित जानकारी के साथ-साथ एक्सपर्ट्स की सलाह भी होगी ताकि वो इस क्रिटिकल सिचुएशन में सही लोगों की मदद ले सके. पैरेंट्स को यह अलर्ट तभी जाएगा, जब टीन यूजर ने कम समय में खुद को नुकसान पहुंचाने वाली कई सर्च की हैं. कंपनी ने यह भी कहा है कि कई मामलों में पैरेंट्स को तब भी नोटिफिकेशन मिल सकता है, जब टीन की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता की कोई बात नहीं होगी.
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<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इंटरनेट चलाने के लिए नहीं पड़ेगी स्क्रीन टच करने की जरूरत, अब वॉइस कमांड से चलेगा कॉमेट ब्राउजर</title>
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<description><![CDATA[ अब आपको वेब ब्राउजिंग के लिए अपने डिवाइस की स्क्रीन को हाथ लगाने की भी जरूरत नहीं है. परप्लेक्सिटी ने अपने एआई ब्राउजर कॉमेट को वॉइस मोड से अपग्रेड कर दिया है. अब यूजर को फुल हैंड्स-फ्री कंट्रोल मिलेंगे और वो सिर्फ बोलकर इस ब्राउजर को ऑपरेट कर पाएंगे. इसका ऐलान करते हुए कंपनी के सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने कहा कि पहली बार ऐसा हो रहा है, जब यूजर स्क्रीन को टच किए बिना ब्राउजर को फुली कंट्रोल कर पाएंगे.
वॉइस मोड में क्या-क्या मिलेगा?
श्रीनिवास ने बताया कि अपग्रेडेड वॉइस मोड से यूजर केवल बोलकर ब्राउज, सर्च और वेब कंटेट के साथ इंटरैक्ट कर सकेंगे. यानी अब आपको वेबसाइट ओपन करने, टैब स्विच करने, पेज स्क्रॉल करने जैसे दूसरे कामों के लिए हाथ का यूज नहीं करना पड़ेगा. आप वॉइस कमांड के जरिए ये सारे काम कर सकेंगे. कंपनी ने बताया कि इस फीचर को ओपनएआई के रियल-टाइम मॉडल पर बनाया गया है.
कब आएगा यह फीचर?
श्रीनिवास ने यह कन्फर्म कर दिया है कि अगले कुछ दिनों में Comet iOS पर वॉइस मोड की अपग्रेड आ जाएगी. हालांकि, यह जानकारी नहीं मिल पाई है कि आईफोन के साथ-साथ क्या इसे डेस्कटॉप वर्जन पर भी लॉन्च किया जाएगा या इसके लिए यूजर्स को इंतजार करना पड़ेगा.
एआई ब्राउजर का चल रहा ट्रेंड
एआई आने के बाद ट्रेडिशनल सर्च का दौर खत्म-सा हो गया है. ओपनएआई ने जहां एटलस एआई ब्राउजर लॉन्च किया था, वहीं परप्लेक्सिटी ने कॉमेट को लॉन्च किया था. गूगल जैसी कंपनी भी अब एआई सर्च पर फोकस कर रही है. कंपनी ने अपने क्रोम ब्राउजर में भी कई ऐसे एडिशन किए हैं ताकि यूजर्स को एआई फीचर्स का फायदा मिल सके. अब गूगल भी सर्च करने पर डायरेक्ट लिंक दिखाने की बजाय एआई समरी दिखाती है ताकि यूजर्स को जरूरी जानकारी लेने के लिए अलग-अलग वेब पेजेज पर न जाना पड़े.
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<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Samsung Galaxy S26 सीरीज हुई लॉन्च, धाकड़ फीचर्स के साथ जबरदस्त कैमरा सेटअप, लॉन्च ऑफर समेत देखें सारी डिटेल</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy S26 Series Launched: सैमसंग ने Galaxy S26 सीरीज को भारत समेत ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दिया है. सीरीज में Galaxy S26, Galaxy S26+ और Galaxy S26 Ultra समेत तीन मॉडल हैं, जो कैमरा इम्प्रूवमेंट, रिफाइन्ड डिस्प्ले और लंबे सॉफ्टवेयर सपोर्ट के साथ-साथ ऑन-डिवाइस एआई इंटीग्रेशन के साथ लॉन्च हुए हैं. आइए डिटेल से जानते हैं कि सीरीज के किस फोन में क्या-क्या फीचर्स मिले हैं और भारत में इस सीरीज के मॉडल खरीदने के लिए आपको कितना पैसा देना पड़ेगा.
Galaxy S26
सीरीज का स्टैंडर्ड वेरिएंट 6.3 इंच के FHD+ Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले के साथ लॉन्च हुआ है. इसमें गैलेक्सी के लिए कस्टमाइज किया गया Exynos 2600 प्रोसेसर लगा है. इसके रियर में 50MP+12MP+10MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 12MP का सेंसर लगा हुआ है. कंपनी ने इसमें 4,300mAh का बैटरी पैक दिया है. भारत में इसकी शुरुआती कीमत 87,999 रुपये है.&amp;nbsp;
Galaxy S26+
इस वेरिएंट में 6.7 का QHD+ Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले लगा हुआ है. इसका प्रोसेसर और कैमरा सेटअप S26 वाला ही है. हालांकि, इसमें 4900mAh की कैपेसिटी वाला बड़ा बैटरी पैक बड़ा दिया गया है. भारत में इसकी शुरुआती कीमत 1,19,999 रुपये है.&amp;nbsp;
Galaxy S26 Ultra
सीरीज का फ्लैगशिप डिवाइस S26 Ultra में 6.9 इंच का QHD+ Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले दिया गया है. यह क्वालकॉम के सबसे पावरफुल Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट से लैस है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 200MP का प्राइमरी सेंसर, 50MP का अल्ट्रावाइड सेंसर और 50 MP + 10 MP का टेलीफोटो लेंस लगा हुआ है. सेल्फी और वीडियो के लिए इसमें 12 MP सेंसर दिया गया है. 5000 mAh की बैटरी के साथ लॉन्च हुए इस फोन की भारत में शुरुआती कीमत 1,39,999 रुपये है. यह हार्डवेयर लेवल पर प्राइवेसी डिस्प्ले के साथ लॉन्च होने वाला पहला फोन है.
सात साल तक मिलेगी सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपग्रेड
सीरीज के तीनों ही मॉडल एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड One UI 8.5 पर रन करते हैं और इनमें कॉन्टेक्स्टुअल असिस्टेंट, रियल-टाइम समराइजेशन, स्मार्ट सर्च टूल जैसे गैलेक्सी एआई फीचर्स और प्राइवेसी-फोक्स्ड ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग मिलती है. तीनों मॉडल वायरलेस चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं. सैमसंग ने पूरी सीरीज को 7 साल तक सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपडेट देने का प्रॉमिस किया है.&amp;nbsp;
अभी मिल रहा ये लॉन्च ऑफर
लिमिटेड टाइम प्री-ऑर्डर ऑफर के तहत सैमसंग अभी फ्री स्टोरेज अपग्रेड कर रही है. यानी ग्राहक तीनों में से किसी भी फोन का 512GB वेरिएंट 256GB मॉडल के पैसों में खरीद सकता है. इस सीरीज को सैमसंग की ऑफिशियल वेबसाइट, रिटेल स्टोर्स और पार्टनर प्लेटफॉर्म के जरिए प्री ऑर्डर किया जा सकता है.
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<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ओप्पो अगले महीने लॉन्च करेगी क्रीज&#45;लेस डिस्प्ले वाला फोल्डेबल फोन, ऐप्पल टेक्नोलॉजी के इंतजार में रह गई</title>
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<description><![CDATA[ चाइनीज ब्रांड OPPO ने अपने अपकमिंग फोल्डेबल फोन OPPO Find N6 की झलक दिखाई है. कंपनी का कहना है कि इसमें क्रीज-फ्री डिस्प्ले मिलेगा. यानी फोन को अनफोल्ड करने पर डिस्प्ले के अंदर क्रीज नहीं दिखाई देगी. माना जा रहा है कि इसे 17 मार्च को लॉन्च किया जा सकता है. हालांकि, कंपनी ने लॉन्च डेट को कन्फर्म नहीं किया है. बता दें कि ऐप्पल भी अपने पहले फोल्डेबल आईफोन में क्रीज-फ्री डिस्प्ले यूज करेगी और इसके लिए कंपनी ने लंबा इंतजार भी किया है.
ओप्पो ने दिखाया टीजर
क्रीज कंट्रोल को लेकर ओप्पो पहले भी अच्छा काम कर रही थी और अब इसे बेहतर किया जा रहा है. कंपनी के टीजर में भी इसकी झलक दिखी है. इसमें फोन का एकदम फ्लैट डिस्प्ले और बैजल्स नजर आ रहे हैं. ओप्पो ने इस इमेज के साथ &#039;स्मूद सैलिंग&#039; टैग का यूज किया है.
Oppo Find N5 की जगह लेगा नया मॉडल
Oppo Find N6 पिछले साल लॉन्च हुए Oppo Find N5 का सक्सेसर होगा. अपकमिंग मॉडल की बात करें तो इसके फीचर्स सामने नहीं आए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि यह फोल्डेबल फोन ऑरेंज और टाइटैनियम कलर ऑप्शन में लॉन्च होगा और इसमें एआई पेन सपोर्ट मिलेगा. यह फोन चीन के साथ चुनिंदा साउथ एशियन और यूरोपीय देशों में लॉन्च किया जा सकता है. भारत में इसके लॉन्च होने की संभावना कम है.
ऐप्पल भी इसी साल लॉन्च करेगी अपना पहला फोल्डेबल आईफोन
ऐप्पल भी लंबे इंतजार के बाद इस साल अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. इसे सितंबर में आईफोन 18 प्रो मॉडल्स के साथ लॉन्च किया जाएगा. ऐप्पल इस फोन में क्रीज-फ्री डिस्प्ले देना चाहती है और इस टेक्नोलॉजी के लिए ऐप्पल ने लंबा इंतजार किया है. इस आईफोन में ऐप्पल डिस्प्ले के लिए सैमसंग की CoE OLED टेक्नोलॉजी का यूज करेगी, जिससे ड्यूरैबिलिटी बढ़ेगी और क्रीज भी नजर नहीं आएगी. यह प्रो मॉडल्स की तरह हाई रिफ्रेश रेट और ब्राइटनेस सपोर्ट के साथ लॉन्च हो सकता है.
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<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:54 +0530</pubDate>
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<title>सेल्फी आएगी एकदम शानदार, iPhone 18 Pro मॉडल्स में मिलेगा नया फ्रंट कैमरा, डायनामिक आईलैंड भी होगा छोटा</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल के आईफोन 18 प्रो मॉडल्स के लॉन्च होने में अभी 6 महीनों से अधिक का समय बाकी है, लेकिन इनके फीचर्स से जुड़ी जानकारी धड़ाधड़ सामने आ रही है. अब एक ताजा लीक से पता चला है कि कंपनी सेल्फी कैमरा को अपडेट कर सकती है. आईफोन 18 प्रो और आईफोन 18 प्रो मैक्स में 24MP का सेल्फी कैमरा दिया जाएगा, जो एकदम शानदार फोटो क्लिक कर सकेगा. साथ ही ऐप्पल इन मॉडल्स में डायनामिक आईलैंड को भी छोटा कर रही है. नए डायनामिक आईलैंड में TrueDepth सेंसर के साथ कैमरा होगा और 3D डॉट प्रोजेक्टर को डिस्प्ले के नीचे एक ट्रांसपेरेंट पैच से हाइड किया जाएगा.
सेल्फी कैमरा पर फोकस कर रही है ऐप्पल
ऐप्पल ने कई सालों तक अपने आईफोन के फ्रंट में 12MP सेंसर दिया था. ऐप्पल ने आईफोन 11 सीरीज से 12MP फ्रंट कैमरा की शुरुआत की थी. आईफोन 14 सीरीज में इसमें ऑटोफोकस और फोटोनिक इंजन आदि जोड़ा गया, लेकिन कोई हार्डवेयर चेंज नहीं हुआ. पिछले साल आईफोन 17 सीरीज में कंपनी ने इसमें बड़ा बदलाव करते हुए 12MP लेंस को बदल दिया. आईफोन 17 सीरीज में नया 18MP का कैमरा जोड़ा गया, जो सेंटर स्टेज और 4K 60fps वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे फीचर को सपोर्ट करता है. यह अपग्रेड हिट साबित हुई और लोगों ने इसे खूब पसंद किया.
इस साल भी अपग्रेड की तैयारी में ऐप्पल
लीक की मानें तो ऐप्पल इस साल प्रो मॉडल्स में सेल्फी कैमरा बदल सकती है. आईफोन 18 प्रो में 24MP सेल्फी कैमरा मिलने के आसार हैं. बता दें कि अपकमिंग सीरीज के रियर कैमरा सेटअप में भी इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. 18 प्रो मॉडल्स के रियर कैमरा को वेरिएबल अपर्चर के साथ लाया जाएगा. ऐप्पल पहली बार यह फीचर देने जा रही है. वेरिएबल अपर्चर को लाइट कंट्रोल करने के लिए यूज किया जाता है. इसकी मदद से आईफोन का कैमरा DSLR को टक्कर दे सकेगा.&amp;nbsp;
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<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:54 +0530</pubDate>
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<title>अब आएगा मॉड्यूलर फोन का दौर? टेक्नो ला रही आईफोन एयर से भी पतला यह अनोखा फोन</title>
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<description><![CDATA[ क्या अब मॉड्यूल फोन का दौर आने वाला है? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि टेक्नो ने अब एक नए मॉड्यूलर फोन का कॉन्सेप्ट दिखाया है. इसमें टेक्नो आईफोन एयर से भी पतला एक फोन लॉन्च करेगी. कंपनी इसमें सारे फीचर्स एक साथ देने की बजाय एड-ऑन लाएगी. यानी अगर आपको फोटोग्राफी के लिए चाहिए तो इसमें अलग से कैमरा लेंस मिलेंगे, लंबी बैटरी लाइफ चाहिए तो एक्स्ट्रा बैटरी मिल जाएगी. यहां तक कि इसमें डिटैचेबल एआई मॉड्यूल तक दिया जाएगा.
गूगल ने भी की थी ऐसा फोन लॉन्च करने की कोशिश
टेक्नो से पहले गूगल भी ऐसा फोन लाने की कोशिश कर चुकी है. Project Ara में गूगल अल्टीमेट कस्टमाइजेबल फोन लाना चाहती थी, जिसमें यूजर्स के पास हार्डवेयर स्वैप करने का ऑप्शन रहता, लेकिन यह फोन कभी लॉन्च नहीं हुआ. इसी तरह LG और मोटोरोला ने भी मॉड्यूलर फोन बनाने की कोशिश की थी, लेकिन ये कमर्शियली हिट नहीं हुई है. हालिया दिनों में फेयरफोन और नथिंग जैसी कंपनियां इससे मिलते-जुलते कॉन्सेप्ट वाले फोन बनाने की कोशिश में हैं. हालांकि, लोगों को ऐसे डिवाइस की जरूरत है, जो लॉन्ग-टर्म चल सके और उन्हें बार-बार किसी एक्सेसरीज को लगाने और हटाने का झंझट नहीं चाहिए. इसलिए मॉड्यूल फोन की सक्सेस को लेकर चुनौतियां आती हैं.
टेक्नो क्या नया करना चाहती है?
टेक्नो के कॉन्सेप्ट में एक तरह से गूगल के प्रोजेक्ट एरा और मोटोरोला के प्रोजेक्ट को साथ मिला लिया गया है. टेक्नो 4.5mm की मोटाई वाला एक फोन लॉन्च करेगी. इतने पतले फोन में बैटरी और दूसरे हार्डवेयर को एडजस्ट कर पाना मुश्किल है. इसलिए टेक्नो इसके साथ एक्सटर्नल बैटरी पैक देगी. इस तरह फोन के साथ कुल 9 मैग्नेटिक मॉड्यूल लॉन्च होंगे, जो कैमरा, कम्यूनिकेशन, गेमिंग और दूसरी जरूरतों को पूरा करेंगे. ये सारे मॉड्यूल मैग्नेट की मदद से फोन के साथ अटैच हो जाएंगे. इसके लिए फोन के पीछे स्पेशल लेआउट बनाया जाएगा.
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<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>सिर हिलाने से कंट्रोल हो जाएंगे सैमसंग के Galaxy Buds4 Pro, कमाल के फीचर्स वाले इयरबड्स आज होंगे लॉन्च</title>
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<description><![CDATA[ सैमसंग आज होने वाले अपने Galaxy Unpacked 2026 इवेंट में Galaxy Buds 4 series को लॉन्च करेगी. लॉन्च से पहले ही यह जानकारी सामने आ गई है कि सैमसंग अपने इन इयरबड्स को हेड ट्रैकिंग जेस्चर के साथ लाने वाली है. यानी यूजर सिर्फ सिर हिलाकर इन इयरबड्स को कंट्रोल कर सकेगा. ऐप्पल पहले से अपने इयरबड्स में यह टेक्नोलॉजी यूज कर रही है, लेकिन सैमसंग की बड्स लाइनअप के लिए यह नई टेक्नोलॉजी है. आइए जानते हैं कि यह कैसे काम करेगी.
यह होगा फायदा&amp;nbsp;
यह टेक्नोलॉजी यूजर्स को बिना हाथ लगाए इयरबड्स को कंट्रोल करने की सहूलियत देगी. यह फीचर उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है, जो ड्राइविंग और साइकलिंग आदि करते हैं. इस फीचर के कारण उन्हें न तो अपने हाथ यूज करने पड़ेंगे और न ही सड़क से अपनी नजरें हटानी पड़ेगी.
सिर हिलाने से कंट्रोल हो सकेंगे इयरबड्स
रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआत में हेड जेस्टर अधिक फंक्शन को सपोर्ट नहीं करेंगे, लेकिन आगे जाकर इसे बदला जा सकता है. शुरुआत में यूजर इयरबड्स पर कॉल को रिसीव या रिजेक्ट करने के लिए सिर हिला सकेंगे. इसी तरह यूजर नोटिफिकेशन रीड करने के फीचर को भी सिर हिलाकर स्टॉप कर सकेंगे. एक और रिपोर्ट में इस फीचर के मैसेजिंग नोटिफिकेशन, अलार्म और टाइमर को भी सपोर्ट करने की बात कही गई है. इयरबड्स सेटअप करते समय यूजर को एक ट्यूटोरियल दिखाकर बताया जाएगा कि उन्हें यह फीचर कैसे यूज करना है.
Galaxy S26 Series पर भी हैं सबकी नजरें
सैमसंग इस इवेंट में अपनी फ्लैगशिप Galaxy S26 Series भी लॉन्च करेगी. इसमें Galaxy S26, Galaxy S26 Plus और Galaxy S26 Ultra मॉडल शामिल होगा. इन तीनों ही मॉडल को हल्के डिजाइन चेंज और कैमरा अपग्रेड के साथ लाया जा रहा है. इसके अलावा इनमें नए एआई फीचर्स भी दिए जा सकते हैं. इस सीरीज की बिक्री अगले महीने शुरू होगी.
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:18:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>1 टन AC हर घंटे कितनी यूनिट बिजली पी जाता है? खरीदने से पहले जान लें पूरा जोड़&#45;गणित</title>
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<description><![CDATA[ 1 TON AC: गर्मी बढ़ते ही सबसे पहला ख्याल एसी खरीदने का आता है. लेकिन ठंडी हवा के साथ-साथ बिजली बिल भी तेजी से बढ़ सकता है. इसलिए 1 टन AC लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह हर घंटे कितनी बिजली खर्च करता है और महीने के बिल पर उसका कितना असर पड़ेगा.
1 टन AC का मतलब क्या होता है?
सबसे पहले यह जान लें कि 1 टन का मतलब वजन नहीं बल्कि कूलिंग क्षमता से है. 1 टन AC लगभग 12000 BTU प्रति घंटे की कूलिंग देता है जो छोटे कमरे (लगभग 100-120 वर्ग फुट) के लिए पर्याप्त मानी जाती है. लेकिन इसकी बिजली खपत कई बातों पर निर्भर करती है जैसे स्टार रेटिंग, इन्वर्टर या नॉन-इन्वर्टर टेक्नोलॉजी और कमरे का तापमान.
हर घंटे कितनी यूनिट खपत?
आमतौर पर 1 टन का नॉन-इन्वर्टर AC लगभग 0.9 से 1.2 यूनिट (kWh) बिजली प्रति घंटे खर्च कर सकता है. यानी अगर आप इसे रोज 8 घंटे चलाते हैं तो एक दिन में करीब 8 से 9 यूनिट बिजली खपत हो सकती है.
वहीं 5-स्टार इन्वर्टर AC की खपत कम होती है. यह औसतन 0.6 से 0.8 यूनिट प्रति घंटे तक सीमित रह सकता है क्योंकि इन्वर्टर टेक्नोलॉजी जरूरत के अनुसार कंप्रेसर की स्पीड एडजस्ट करती है.
महीने का बिल कैसे बढ़ता है?
मान लीजिए आपका AC रोज 8 घंटे चलता है और औसतन 1 यूनिट प्रति घंटे की खपत करता है. तो महीने में लगभग 240 यूनिट बिजली खर्च हो सकती है. अगर प्रति यूनिट दर 7 रुपये है तो सिर्फ AC से करीब 1680 रुपये का बिल बन सकता है. इसमें अन्य घरेलू उपकरणों की खपत अलग से जुड़ती है.
किन बातों से बदलता है खर्च?
बिजली खपत केवल टन क्षमता पर निर्भर नहीं करती. अगर कमरा धूप में है, दरवाजे-खिड़कियां खुली रहती हैं या तापमान 18 डिग्री पर सेट किया गया है तो AC ज्यादा मेहनत करेगा और बिजली ज्यादा खर्च होगी. 24-26 डिग्री पर तापमान सेट करने से खपत कम की जा सकती है.
खरीदने से पहले क्या देखें?
AC खरीदते समय केवल कीमत न देखें. स्टार रेटिंग, इन्वर्टर टेक्नोलॉजी और सालाना बिजली खपत (Annual Energy Consumption) जरूर जांचें. शुरुआत में महंगा लगने वाला 5-स्टार इन्वर्टर मॉडल लंबे समय में बिजली बिल कम कर सकता है.
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:18:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Google Pixel 10 पर बंपर डिस्काउंट, इस ऑफर में मिल रही 13,000 रुपये से भी ज्यादा की छूट, चेक करें डील</title>
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<description><![CDATA[ Google Pixel 10 Discount: गूगल के लेटेस्ट फ्लैगशिप फोन को सस्ती कीमत में खरीदने का मौका मिल रहा है. दरअसल, पिछले साल अगस्त में लॉन्च हुए Pixel 10 की खरीद पर इस समय 13,000 रुपये से अधिक की बचत की जा सकती है. इस फोन में स्टॉक एंड्रॉयड एक्सपीरियंस के साथ शानदार कैमरा और कई एआई पावर्ड फीचर्स मिलते हैं. ऐसे में अगर आप कम कीमत पर पिक्सल 10 खरीदना चाहते हैं तो यह मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहिए.
Pixel 10 के स्पेसिफिकेशंस
इस फोन में 6.3 इंच की OLED स्क्रीन है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 3000 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करती है. इस पर प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 दिया गया है. यह फोन Google Tensor G5 चिपसेट से लैस है और Android 16 पर ऑपरेट करता है. इसके रियर में ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलता है, जिसमें 48MP का प्राइमरी लेंस, 13MP का अल्ट्रावाइड सेंसर और 10.8MP का टेलीफोटो कैमरा लगा हुआ है. फ्रंट की बात करें तो सेल्फी और वीडियो के लिए 10.5MP का लेंस लगा हुआ है. गूगल ने इसे 4970mAh के बैटरी पैक से लैस किया है और अगले 7 सालों तक इसे सॉफ्टवेयर अपडेट देती रहेगी.
अमेजन पर मिल रही छूट
भारत में इस फोन को 79,999 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन अभी यह अमेजन पर काफी कम कीमत पर मिल रहा है. अमेजन पर अभी Pixel 10 (Frost, 12GB+256GB वेरिएंट) 69,848 रुपये में लिस्टेड है. इस फ्लैट डिस्काउंट के साथ फोन की खरीद पर कैशबैक और बैंक ऑफर्स के तौर पर 3500 रुपये की एडिशनल छूट भी मिल रही है. इस तरह देखा जाए तो फोन पर 13,000 रुपये से अधिक की छूट दी जा रही है.
Galaxy S24 FE हो गया 25,000 रुपये सस्ता
Galaxy S26 Series के लॉन्च से पहले Galaxy S24 FE पर धमाकेदार ऑफर आया है. 59,999 रुपये की कीमत वाला यह फोन फ्लिपकार्ट पर केवल 35,999 में लिस्टेड है. इस फ्लैट डिस्काउंट के साथ इस पर क्रेडिट कार्ड से खरीदने पर 1800 रुपये का एडिशनल कैशबैक भी मिल रहा है, जिसके बाद इसकी कीमत 35,000 रुपये से भी कम हो जाती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:18:37 +0530</pubDate>
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<title>iPhone में कॉल काटने का बटन आखिर क्यों नहीं दिखता? असली वजह जानकर कहेंगे – ओह, इतना आसान था</title>
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<description><![CDATA[ iPhone में कॉल काटने का बटन आखिर क्यों नहीं दिखता? असली वजह जानकर कहेंगे – ओह, इतना आसान था ]]></description>
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:18:36 +0530</pubDate>
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<title>गेमिंग या स्ट्रीमिंग के कारण नहीं, इस वजह से सबसे जल्दी डिस्चार्ज होती है फोन की बैटरी, जानकर हो जाएंगे हैरान</title>
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<description><![CDATA[ कम ही लोग इस बात को जानते हैं कि जगह के हिसाब से भी आपके फोन की बैटरी पर असर पड़ता है. अब आप पूछेंगे कि जगह का फोन की बैटरी से क्या लेना-देना है? इसका जवाब है कि अगर आप ऐसी जगह पर हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क कमजोर है तो आपके फोन की बैटरी कम चलेगी, वहीं नेटवर्क वाली जगह पर बैटरी पर कम लोड पड़ता है और यह ज्यादा चलती है. आपको बता दें कि जब नेटवर्क कवरेज कम या अनस्टेबल होती है तो फोन कनेक्शन बनाए रखने के लिए फोन को अधिक बैटरी की खपत करनी पड़ती है.&amp;nbsp;
गेमिंग-स्ट्रीमिंग नहीं, इस कारण जल्दी डिस्चार्ज होती है बैटरी
जब फोन की बैटरी कम होने लगती है तो लोग ब्राइटनेस कम करने से लेकर ऐप्स क्लोज और पावर सेवर मोड ऑन करने समेत सारे काम कर लेते हैं, लेकिन अगर वहां नेटवर्क सिग्नल कमजोर है तो ये तरीके काम नहीं आएंगे. मोबाइल नेटवर्क से कनेक्ट रहने के लिए फोन लगातार काम करते रहता है और इससे बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है, भले ही आप मोबाइल यूज न कर रहे हों.
नेटवर्क के लिए ज्यादा पावर की जरूरत क्यों पड़ती है?
अगर आप कमजोर नेटवर्क वाली जगह पर खड़े हैं तो फोन नजदीकी टावर से कनेक्ट होने के लिए आउटपुट को बढ़ाता है, जिससे एक्स्ट्रा हीट जनरेट होती है और बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है. दूसरी तरफ स्टेबल नेटवर्क वाली जगहों पर फोन को डेटा ट्रांसमिट करने के लिए ज्यादा एनर्जी की जरूरत नहीं होती. इसकी वजह है कि फोन को सिग्नल सर्च करने के लिए काम नहीं करना पड़ता. यही कारण है कि पूरी नेटवर्क कवरेज होने पर फोन की बैटरी ज्यादा चलती है.
बिना नेटवर्क वाली जगहों पर बैटरी कैसे बचाएं?
अगर आप किसी ऐसी जगह पर हैं, जहां नेटवर्क कवरेज नहीं है तो फोन का एयरप्लेन मोड ऑन किया जा सकता है. इससे फोन का सिस्टम नेटवर्क सर्च करने की कोशिश नहीं करेगा, जिससे बैटरी ड्रैन नहीं होगी. जरूरत पड़ने पर आप मैनुअली वाईफाई या कॉलिंग को इनेबल कर सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:18:36 +0530</pubDate>
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<title>पासवर्ड में कर दी ये छोटी सी चालाकी तो हैकर्स हो जाएंगे फेल! जानिए Digital Password बनाने का सबसे सुरक्षित तरीका</title>
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<description><![CDATA[ Digital Password: आज के डिजिटल दौर में हमारा ज्यादातर काम ऑनलाइन हो गया है बैंकिंग, शॉपिंग, सोशल मीडिया और ऑफिस का काम. ऐसे में अगर आपका पासवर्ड कमजोर है तो हैकर्स के लिए आपकी निजी जानकारी तक पहुंचना बेहद आसान हो सकता है. कई लोग अब भी 123456, जन्मतिथि या अपना नाम जैसे आसान पासवर्ड इस्तेमाल करते हैं, जो कुछ ही सेकंड में क्रैक हो सकते हैं. मजबूत पासवर्ड आपकी डिजिटल सुरक्षा की पहली दीवार है.
पासवर्ड बनाते समय करें ये छोटी लेकिन असरदार चालाकी
सबसे पहले यह समझ लें कि पासवर्ड जितना लंबा और जटिल होगा, उतना सुरक्षित रहेगा. कोशिश करें कि आपका पासवर्ड कम से कम 12 से 16 अक्षरों का हो. इसमें बड़े और छोटे अक्षर, नंबर और विशेष चिन्ह जैसे @, #, $, % जरूर शामिल करें.
एक आसान तरीका यह है कि आप किसी वाक्य को आधार बनाएं. उदाहरण के लिए, मुझे हर सुबह 6 बजे चाय पसंद है. अब इस वाक्य को तोड़कर अक्षरों, अंकों और चिन्हों के साथ मिलाकर एक नया पासवर्ड बना सकते हैं. इस तरह बना पासवर्ड आपके लिए याद रखना आसान होगा लेकिन हैकर्स के लिए अनुमान लगाना मुश्किल.
हर अकाउंट के लिए अलग पासवर्ड क्यों जरूरी?
अक्सर लोग एक ही पासवर्ड कई वेबसाइट्स पर इस्तेमाल करते हैं. अगर किसी एक वेबसाइट का डाटा लीक हो जाए तो आपके बाकी अकाउंट भी खतरे में पड़ सकते हैं. इसलिए हर सोशल मीडिया, बैंकिंग और ईमेल अकाउंट के लिए अलग-अलग पासवर्ड रखें. साथ ही, समय-समय पर पासवर्ड बदलना भी जरूरी है. खासकर अगर आपको किसी संदिग्ध गतिविधि का अंदेशा हो तो तुरंत पासवर्ड अपडेट करें.
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन है सुरक्षा की दूसरी ढाल
सिर्फ मजबूत पासवर्ड ही काफी नहीं है. जहां भी संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जरूर चालू करें. इससे पासवर्ड के अलावा आपके मोबाइल पर आने वाला ओटीपी या ऑथेंटिकेशन ऐप की जरूरत होती है. इससे सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है.
इन गलतियों से जरूर बचें
कभी भी अपना पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें. पब्लिक वाई-फाई पर संवेदनशील अकाउंट में लॉगिन करने से बचें. ब्राउज़र में पासवर्ड सेव करते समय भी सावधानी रखें और भरोसेमंद पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल करें.
अगर आप इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखेंगे तो हैकर्स के लिए आपका अकाउंट तोड़ना लगभग नामुमकिन हो जाएगा. याद रखिए डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है.
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<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>लैपटॉप सेगमेंट में धमाकेदार एंट्री को तैयार Nvidia, इसी साल लॉन्च करेगी पहला डिवाइस, ऐप्पल को टक्कर देने पर नजर</title>
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<description><![CDATA[ Nvidia एक बार फिर से लैपटॉप के साथ कंज्यूमर पीसी मार्केट में वापसी के लिए तैयार दिख रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी इसी साल अपना पहला लैपटॉप लॉन्च कर सकती है और इसमें खुद का प्रोसेसर यूज किया जाएगा. बता दें कि ग्राफिक्स चिप और एआई डेटा सेंटर हार्डवेयर में Nvidia एक बड़ा नाम है और यह एआई बूम का सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाली कंपनियों में शामिल है. आइए जानते हैं कि कंपनी के लैपटॉप में क्या खास होगा.
लैपटॉप के लिए खास प्रोसेसर बना रही है कंपनी
Nvidia अपने लैपटॉप के लिए Arm-based system-on-a-chip प्रोसेसर बना रही है. इस नए प्रोसेसर में CPU, GPU और एआई एक्सलरेशन एक ही यूनिट में होगा. इसकी मदद से कंपनी हल्के और पावर एफिशिएंट लैपटॉप बना पाएगी, जो लंबी बैटरी लाइफ के साथ जबरदस्त एआई परफॉर्मेंस देंगे. इस प्रोसेसर के साथ कंपनी ऐप्पल के मैकबुक को टक्कर देना चाहती है, एनर्जी-एफिशिएंट परफॉर्मेंस के लिए जाने जाते हैं. Nvidia के इस प्रोसेसर को लेनोवो और डेल के भी यूज करने की जानकारी मिल रही है.
Nvidia के लिए इस प्लानिंग के क्या मायने?
पिछले कुछ समय से Nvidia एआई सिस्टम का एक जरूरी हिस्सा बन गई है, लेकिन कंज्यूमर कंप्यूटर मार्केट से यह गायब-सी होती जा रही है. अब नए लैपटॉप और प्रोसेसर लाकर कंपनी खुद को Intel, AMD और क्वालकॉम के मुकाबले में भी खड़ा करना चाहती है. माना जा रहा है कि कंपनी की एंट्री से विंडोज पीसी मार्केट को नई ताकत मिल सकती है.
ग्राहकों को इससे क्या उम्मीद करनी चाहिए?
ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि Nvidia के लैपटॉप पतले डिजाइन, लंबी बैटरी लाइफ और शानदार एआई फीचर्स के साथ आएंगे. ग्राफिक्स कैपेबिलिटीज के मामले में कंपनी पहले ही खुद को साबित कर चुकी है और अब ऐप्पल की तरह यूनिफाईड मेमोरी आर्किटेक्चर लाकर कंपनी लैपटॉप सेगमेंट में अपनी जगह मजबूत कर सकती है. उम्मीद की जा रही है कि कंपनी का पहला लैपटॉप इसी साल के आखिर तक लॉन्च और अगले साल तक बड़े स्तर पर अवेलेबल हो जाएगा.
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<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इन तरीकों से फिर काम ले सकते हैं अपनी पुरानी स्मार्टवॉच, मोटा खर्चा बच जाएगा</title>
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<description><![CDATA[ पुराने स्मार्टफोन या स्मार्ट टीवी को रिपर्पज करना आसान है. इन्हें सिक्योरिटी कैमरा और सेकेंडरी डिस्प्ले जैसी चीजों के लिए यूज किया जा सकता है, लेकिन स्मार्टवॉच को रीयूज करने पर लोग ज्यादा ध्यान नहीं देते. अपग्रेड करते ही लोग अपनी पुरानी स्मार्टवॉच को अलमारी में रख देते हैं और फिर यह यहीं रखे-रखे खराब होने लगती है. आज हम आपको बताएंगे कि अलमारी में पड़ी अपनी स्मार्टवॉच को आप किन-किन तरीकों से काम में ले सकते हैं.
डेस्क क्लॉक या अलार्म बनाएं
स्मार्टवॉच को समय देखने के लिए ही बनाया गया था और आप इसी तरीके से इसे काम में ले सकते हैं. अगर इसकी बैटरी पूरे दिन नहीं चलती है तो आप इसे चार्जिंग डॉक पर रखकर डेस्क क्लॉक या अलार्म के तौर पर यूज कर सकते हैं. इसमें आपको बैटरी डाउन होने की भी टेंशन नहीं रहेगी और नई क्लॉक के लिए भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा.
फोटोग्राफी में आएगी काम
अगर आपको फोटो लेने का शौक है तो आप पुरानी स्मार्टवॉच को ब्लूटूथ शटर के तौर पर यूज कर सकते हैं. गूगल, सैमसंग और वनप्लस समेत कई कंपनियों की स्मार्टवॉच में ऐसे फीचर होते हैं, जो डायरेक्ट कैमरा को कंट्रोल कर सकते हैं. इसमें आपको लाइव प्रीव्यू भी दिख जाता है तो अगर आप रियर कैमरा से फोटो ले रहे हैं तो यह काम भी आसान हो जाता है.
चाइल्ड मॉनिटर
अगर आप अपने बच्चे को मॉनिटर करना चाहते हैं तो पुरानी स्मार्टवॉच खूब काम आ सकती है. जब बच्चे बाहर खेलने जा रहे हों या किसी गार्डन में घूम रहे हों तो उन्हें पुरानी स्मार्टवॉच दे दें. इसमें सिम इन्सर्ट करने पर यह कॉलिंग और मैसेजेज जैसे बेसिक फीचर्स को भी सपोर्ट करेगी.
एक्सरसाइज के लिए परफेक्ट कंपैनियन
अगर आप जॉगिंग या एक्सरसाइज के लिए जा रहे हैं तो फोन को साथ ले जाने की जगह पुरानी स्मार्टवॉच को फिटनेस ट्रैकर के तौर पर यूज कर सकते हैं. इससे आपको नोटिफिकेशन का झंझट भी नहीं झेलना पडे़गा और स्टेप काउंटिंग जैसे जरूरी काम भी हो जाएंगे.
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<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>लिफ्ट में घुसते ही गायब हो जाता है नेटवर्क! कैसे ये लोहे का पिंजरा बन जाता है सिग्नल का सबसे बड़ा दुश्मन?</title>
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<description><![CDATA[ No Network in Lift: अक्सर आपने महसूस किया होगा कि जैसे ही आप लिफ्ट के अंदर कदम रखते हैं मोबाइल नेटवर्क अचानक कमजोर पड़ जाता है या पूरी तरह गायब हो जाता है. कॉल कट जाती है, इंटरनेट रुक जाता है और मैसेज भी नहीं जाते. यह समस्या सिर्फ आपके फोन की नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण छिपा है.
मोबाइल सिग्नल रेडियो वेव्स के जरिए काम करता है. ये वेव खुले वातावरण में आसानी से यात्रा करती हैं लेकिन जब इनके सामने मोटी दीवारें या धातु की वस्तुएं आ जाती हैं तो सिग्नल कमजोर हो जाता है. लिफ्ट का ढांचा आमतौर पर लोहे या स्टील से बना होता है जो सिग्नल को अंदर आने से रोक देता है.
लिफ्ट कैसे बन जाती है फैराडे केज?
लिफ्ट को आप एक तरह का फैराडे केज मान सकते हैं. फैराडे केज वह संरचना होती है जो बाहरी विद्युत तरंगों को अंदर आने से रोकती है. चूंकि लिफ्ट पूरी तरह धातु से घिरी होती है इसलिए मोबाइल टावर से आने वाला सिग्नल उसके अंदर ठीक से प्रवेश नहीं कर पाता.
इसके अलावा, लिफ्ट अक्सर इमारत के बीचोंबीच या अंदरूनी हिस्से में होती है, जहां पहले से ही सिग्नल कमजोर रहता है. जब इस पर धातु की परत जुड़ जाती है तो नेटवर्क लगभग खत्म हो जाता है.
क्या सिर्फ लिफ्ट ही जिम्मेदार है?
सिर्फ लिफ्ट ही नहीं, बल्कि ऊंची इमारतों की मोटी कंक्रीट दीवारें और बेसमेंट भी नेटवर्क को प्रभावित करते हैं. अगर बिल्डिंग में सिग्नल बूस्टर या इन-बिल्डिंग नेटवर्क सिस्टम न लगा हो तो समस्या और बढ़ जाती है. इसके अलावा, अगर एक ही समय में कई लोग लिफ्ट में नेटवर्क इस्तेमाल कर रहे हों तो उपलब्ध सिग्नल और भी कमजोर महसूस हो सकता है.
क्या है इसका समाधान?
हालांकि लिफ्ट के अंदर पूरी तरह मजबूत नेटवर्क मिलना मुश्किल है लेकिन कुछ उपाय मदद कर सकते हैं. बेहतर नेटवर्क के लिए 4G या 5G सपोर्ट वाला फोन और अपडेटेड सॉफ्टवेयर होना जरूरी है. कई आधुनिक इमारतों में सिग्नल बूस्टर लगाए जाते हैं जिससे समस्या कम हो जाती है.
अगर आप जरूरी कॉल पर हैं तो लिफ्ट में प्रवेश करने से पहले बातचीत खत्म करना बेहतर रहता है. इंटरनेट आधारित कॉलिंग या वाई-फाई कॉलिंग फीचर भी कुछ हद तक मददगार हो सकता है, बशर्ते बिल्डिंग में वाई-फाई उपलब्ध हो.
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<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Galaxy Unpacked 2026: सैमसंग के इस इवेंट से क्या उम्मीदें और कैसे देखें लाइव? यहां जानें सारी डिटेल्स</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy Unpacked 2026: सैमसंग की Galaxy S26 series का इंतजार जल्द ही खत्म होने वाला है. कंपनी 25 फरवरी को होने वाले Galaxy Unpacked इवेंट में इस सीरीज को लॉन्च कर देगी. इसके साथ Galaxy Buds 4 series से भी पर्दा उठने की उम्मीद है. आप घर बैठे अपने मोबाइल और स्मार्ट टीवी पर इस लॉन्च इवेंट का आनंद ले सकते हैं. आइए जानते हैं कि इस इवेंट में क्या-क्या लॉन्च होगा और इसे लाइव कैसे देखा जा सकता है.
Galaxy Unpacked 2026 को लाइव कैसे देखें?
Galaxy Unpacked 2026 इवेंट 25 फरवरी को भारतीय समयानुसार रात के 11.30 बजे शुरू होगा. इसे सैन फ्रांसिस्को में आयोजित किया जा रहा है. इस इवेंट को सैमसंग के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल के साथ-साथ वेबसाइट पर भी लाइव स्ट्रीम किया जाएगा.&amp;nbsp;
Galaxy Unpacked 2026 से क्या उम्मीदें?
सैमसंग के इस इवेंट में Galaxy S26 series और Galaxy Buds 4 series की लॉन्चिंग के साथ कई एआई फीचर्स का ऐलान किया जा सकता है. S26 series की बात करें तो इसमें Galaxy S26, Galaxy S26 Plus और Galaxy S26 Ultra मॉडल शामिल होगा. इन तीनों ही मॉडल को हल्के डिजाइन चेंज और कैमरा अपग्रेड के साथ लाया जा रहा है. Galaxy S26 Ultra में मिलने वाले प्राइवेसी डिस्प्ले की खूब वाहवाही हो रही है और जल्द ही दूसरी कंपनियां भी अपने फ्लैगशिप मॉडल्स में यह फीचर सामिल कर सकती है.&amp;nbsp;
Galaxy Buds 4 series- सैमसंग इस इवेंट में Galaxy Buds 4 और Galaxy Buds 4 Pro से भी पर्दा हटाएगी. कंपनी ने इनके डिजाइन में थोड़ा बदलाव किया है और नए मॉडल एक मेटल स्ट्रिप के साथ आएंगे. इसकी मदद से इनका लुक एयरपॉड्स से अलग हो जाएगा. Buds 4 Pro में इस बार सिलिकॉन ईयरटिप्स मिलने की उम्मीद है.
Galaxy AI features- आज के दौर में किसी भी टेक इवेंट में एआई की बात न हो, ऐसा नहीं हो सकता. Unpacked 2026 भी इस मामले में अलग नहीं रहने वाला है. ऐसे कयास हैं कि कंपनी गैलेक्सी S26 सीरीज के साथ कई एआई फीचर्स का ऐलान कर सकती है. इनमें फोटोग्राफी से जुड़े एआई फीचर्स खास रह सकते हैं.
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<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एक लिंक और पूरा फोन खाली! स्क्रीन&#45;शेयरिंग स्कैम कैसे भारतीयों को बना रहा है शिकार</title>
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<description><![CDATA[ एक लिंक और पूरा फोन खाली! स्क्रीन-शेयरिंग स्कैम कैसे भारतीयों को बना रहा है शिकार ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:21 +0530</pubDate>
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<title>AI का असली सुल्तान कौन? भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कमान किसके हाथ में, जानिए पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ AI का असली सुल्तान कौन? भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की कमान किसके हाथ में, जानिए पूरी जानकारी ]]></description>
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:21 +0530</pubDate>
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<title>ऐप्पल लाने वाली है अपना सबसे सस्ता लैपटॉप, मिलेंगे धांसू फीचर और मजेदार कलर, जानें कब होगा लॉन्च</title>
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<description><![CDATA[ Apple के अब तक के सबसे लैपटॉप का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है. ऐसे कयास हैं कि कंपनी अपनी किफायती मैकबुक को 4 मार्च को लॉन्च कर देगी. यह ऐप्पल की अब तक की सबसे खास मैकबुक होने वाली है क्योंकि उसके पोर्टफोलियो में अभी तक ऐसा कोई प्रोडक्ट नहीं है. इसकी लॉन्चिंग में अभी थोड़ा समय बाकी है, लेकिन इसके लगभग सभी फीचर्स लीक हो गए हैं. हम आपको लॉन्चिंग से पहले ही बताने जा रहे हैं कि इस मैकबुक में क्या-क्या मिलेगा.
डिजाइन
नई मैकबुक का डिजाइन MacBook Air जैसा हो सकता है. यह एल्युमिनियम चेसिस के साथ येलो, सिल्वर, ब्लू और पिंक कलर ऑप्शन में लॉन्च हो सकती है. इसमें 12.9 इंच का डिस्प्ले मिलेगा. इसका वजन कम होगा और यह स्लिम फॉर्म फैक्टर के साथ लॉन्च होगी. इसमें आईपैड वाली डिस्प्ले टेक्नोलॉजी देखने को मिल सकती है.&amp;nbsp;
प्रोसेसर
ऐप्पल इस मैकबुक में M-सीरीज चिपसेट देने की बजाय A-series चिप को यूज करेगी. इसमें A18 Pro चिपसेट दिया जा सकता है, जो सबसे पहले iPhone 16 Pro के साथ आया था. यानी यह लैपटॉप आईफोन वाले प्रोसेसर के साथ आएगा. यह प्रोसेसर वेब ब्राउजिंग, डॉक्यूमेंट क्रिएशन, वीडियो स्ट्रीमिंग और लाइट फोटो और वीडियो एडिटिंग को आसानी से हैंडल कर लेगा. मैकबुक के प्रोसेसर को 8GB रैम और 128GB स्टोरेज के साथ पेयर किया जा सकता है. अगर पोर्ट्स की बात करें तो यह थंडरबोल्ड स्पीड को सपोर्ट नहीं करेगी. इससे डिस्प्ले कनेक्टिविटी लिमिट होगी और यह केवल एक सिंगल एक्सटर्नल डिस्प्ले सपोर्ट के साथ आएगी.
कितनी रह सकती है कीमत?
ऐप्पल इस मैकबुक के साथ विंडोज लैपटॉप को टक्कर देना चाहती है तो उस पर कीमत कम रखने का दबाव है. साथ ही इसे लगभग 90,000 रुपये वाली मैकबुक एयर से नीचे प्लेस किया जाएगा तो ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस कीमत लगभग विंडोज लैपटॉप के बराबर ही रह सकती है. कयास है कि इसे भारत में 50,000-60,000 रुपये की कीमत पर उतारा जा सकता है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एंड्रॉयड फोन में नहीं होती इन ऐप्स की जरूरत, फिर भी हर कोई रखता है, आज के बाद न करें डाउनलोड</title>
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<description><![CDATA[ कुछ साल पहले नया फोन खरीदने के बाद उसे सेटअप करने के लिए कई ऐप्स डाउनलोड करने की जरूरत होती थी. फोन लेते ही कई लोग सबसे पहले फोटो एडिटिंग और रैम बूस्टिंग के लिए ऐप्स डाउनलोड करते थे. ऐसा इसलिए होता था क्योंकि उस समय फोन में बिल्ट-इन ऐप्स पावरफुल नहीं होती थी, लेकिन अब चीजें बदल गई हैं. अब फोन में कई बिल्ट-इन टूल्स आने लगे हैं, जिस कारण कई ऐप्स की जरूरत बिल्कुल खत्म हो गई है. आज हम जानेंगे कि अब फोन में किन ऐप्स को डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है.&amp;nbsp;
फोटो एडिटिंग ऐप्स
अगर आपको नॉर्मल यूज के लिए फोटो एडिटिंग करनी है तो अलग से थर्ड पार्टी ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है. अब एआई आने के बाद गूगल फोटोज में ही कई एडिटिंग ऑप्शन मिल जाते हैं. अब तो ऐसे ऑप्शन भी फोन में मिल रहे हैं, जो फोटो से अनचाहे ऑब्जेक्ट को चुटकियों में हटा देते हैं. इसी तरह सैमसंग और ऐप्पल जैसी कंपनियां भी इमेज एडिटिंग के कई टूल्स दे रही हैं.
वीडियो प्लेयर&amp;nbsp;
कुछ साल पहले तक लगभग हर मोबाइल में VLC, MX प्लेयर या कोई दूसरा वीडियो प्लेयर मिल जाता था. ऐसा इसलिए होता था क्योंकि पहले कुछ फाइल फॉर्मेट मोबाइल के इन-बिल्ट वीडियो प्लेयर में नहीं चलते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब एंड्रॉयड लगभग हर वीडियो फॉर्मेट को सपोर्ट करता है. इसी तरह गूगल फोटोज में भी हर फॉर्मेट चल जाता है.&amp;nbsp;
QR और डॉक्यूमेंट स्कैनर ऐप
रेस्टोरेंट से लेकर मेट्रो स्टेशन तक, आजकल हर जगह QR कोड दिख जाते हैं, लेकिन अब इन्हें स्कैन करने के लिए आपको अलग से ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं है. एंड्रॉयड फोन का कैमरा ही अब यह काम कर सकता है. अगर आपके फोन का कैमरा कोड स्कैन नहीं कर रहा है तो आप कैमरा सेटिंग में जाकर QR कोड स्कैनिंग फीचर को ऑन कर सकते हैं.
रैम बूस्टर ऐप्स
कुछ साल पहले तक हर स्मार्टफोन यूजर के फोन में क्लीनर या बूस्टर ऐप्स होती थी. ये एक टैप करते ही फोन से जंक फाइल्स क्लियर करने से लेकर फोन की स्पीड बढ़ाने तक का दावा करती थी. अब इन ऐप्स की जरूरत नहीं है. एंड्रॉयड अपने लेवल पर मेमोरी को मैनेज कर लेता है. भले ही आपके फोन में कितनी भी ऐप्स क्यों न हो, आपके फोन का सिस्टम बैकग्राउंड में सब कुछ ऑप्टिमाइज कर लेता है.
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब WhatsApp होगा आपकी पसंद का! जल्द बदल सकेंगे रंग, आइकन और पूरा लुक, जानिए कैसे मिलेगा ये धमाकेदार फीचर</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp New Feature: WhatsApp जल्द ही अपने Android यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव ला सकता है. खबरों के मुताबिक, कंपनी ऐसे नए पर्सनलाइजेशन टूल्स पर काम कर रही है जिनकी मदद से लोग ऐप के रंग, आइकन और पूरा इंटरफेस अपनी पसंद के अनुसार बदल सकेंगे. फिलहाल ये फीचर्स बीटा वर्जन में देखे गए हैं और माना जा रहा है कि आने वाले अपडेट में इन्हें आम यूज़र्स के लिए जारी किया जा सकता है. इस जानकारी को सबसे पहले फीचर ट्रैकर WABetaInfo ने नोटिस किया जहां Android के एक नए बीटा अपडेट में ये बदलाव दिखाई दिए.
बीटा वर्जन में दिखे नए कस्टमाइजेशन फीचर्स

📝 WhatsApp beta for Android 2.26.6.1: what&#039;s new?WhatsApp is working on new premium features to customize the app theme, icon, and accent color, and they will be available in a future update!https://t.co/VndK891QrK pic.twitter.com/yoFUipzssi
&amp;mdash; WABetaInfo (@WABetaInfo) February 10, 2026



रिपोर्ट के अनुसार, WhatsApp के Android बीटा वर्ज़न 2.26.6.1 में ये नए विकल्प शामिल किए गए हैं. अभी ये फीचर्स केवल डेवलपर्स और चुनिंदा टेस्टर्स तक सीमित हैं लेकिन इन पर तेज़ी से काम चल रहा है. अगर सब कुछ सही रहा तो भविष्य के अपडेट में यूज़र्स को WhatsApp का पारंपरिक हरे रंग वाला लुक छोड़कर कुछ बिल्कुल नया और अलग अनुभव मिल सकता है.
14 नए ऐप आइकन का विकल्प
सबसे बड़ा बदलाव ऐप आइकन में देखने को मिल सकता है. रिपोर्ट बताती है कि WhatsApp 14 नए आइकन स्टाइल पेश कर सकता है. इनमें से कुछ सिंपल सिंगल-कलर डिज़ाइन में होंगे जैसे नीला, भूरा, हरा, मोनोक्रोम, नारंगी, गुलाबी और बैंगनी. वहीं कुछ आइकन ज्यादा स्टाइलिश लुक के साथ आएंगे जिनके नाम Aurora, Fluffy, Galaxy, Clay, Sparkle और Neon जैसे बताए जा रहे हैं.
इन विकल्पों की मदद से यूज़र्स अपने होम स्क्रीन और ऐप ड्रॉअर में WhatsApp का लुक बदल सकेंगे और इसके लिए किसी थर्ड-पार्टी लॉन्चर की जरूरत नहीं पड़ेगी.
ऐप के रंगों में भी मिलेगा बदलाव का मौका
सिर्फ आइकन ही नहीं, WhatsApp ऐप के मुख्य रंग को बदलने की सुविधा भी दे सकता है. रिपोर्ट के अनुसार, करीब 19 अलग-अलग कलर ऑप्शन मिल सकते हैं. इनमें रॉयल ब्लू, वायलेट, कोरल, टील, ब्राउन, बेज, येलो, पिंक, रेड, ऑरेंज और डार्क ऑलिव ग्रीन जैसे रंग शामिल हो सकते हैं. डिफॉल्ट हरे रंग के अलावा एक क्लासिक डिजाइन भी लौट सकता है जो पुराने WhatsApp जैसा अनुभव देगा. ये रंग ऐप के अलग-अलग हिस्सों जैसे टैब्स, फिल्टर्स और फ्लोटिंग बटन पर दिखेंगे जिससे पूरा इंटरफेस एक जैसी थीम में नजर आएगा.
कब तक मिलेगा ये अपडेट?
फिलहाल कंपनी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. चूंकि फीचर्स अभी टेस्टिंग चरण में हैं इसलिए इन्हें आने में थोड़ा समय लग सकता है. लेकिन अगर ये बदलाव रोलआउट होते हैं तो WhatsApp का अनुभव पहले से कहीं ज्यादा पर्सनल और आकर्षक हो जाएगा.
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<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इतना सस्ता हो गया iPhone 17! लॉन्च प्राइस से कम में खरीदने का गोल्डन चांस, स्टॉक खत्म होने से पहले ऐसे उठाएं फायदा</title>
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<description><![CDATA[ इतना सस्ता हो गया iPhone 17! लॉन्च प्राइस से कम में खरीदने का गोल्डन चांस, स्टॉक खत्म होने से पहले ऐसे उठाएं फायदा ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:29 +0530</pubDate>
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<title>लंबा इंतजार होगा खत्म, इसी साल स्मार्टवॉच लॉन्च करेगी मेटा, धाकड़ फीचर्स के साथ ऐप्पल को देगी टक्कर</title>
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<description><![CDATA[ स्मार्ट ग्लासेस मार्केट में अपनी जगह मजबूत कर चुकी मेटा अब स्मार्टवॉच लाने की तैयारी कर रही है. लेटेस्ट रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी की पहली स्मार्टवॉच इसी साल लॉन्च हो सकती है. इससे सीधा ऐप्पल वॉच को टक्कर मिलेगी, जो प्रीमियम सेगमेंट में काफी पॉपुलर बनी हुई है. बता दें कि पिछले कई सालों से मेटा की स्मार्टवॉच का इंतजार किया जा रहा है और अब ऐसा लग रहा है कि 2026 में आखिकार कंपनी इस सेगमेंट में एंट्री कर लेगी.
Malibu 2 प्रोजेक्ट की हो सकती है वापसी
मेटा की तरफ से अभी तक इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन इस डेवलपमेंट से जुड़े लोगों का कहना है कि कंपनी Malibu 2 प्रोजेक्ट को वापस ला सकती है, जिसे चार साल पहले बंद कर दिया गया था. अभी तक यही जानकारी मिल पाई है कि यह एक हेल्थ ट्रैकर हो सकता है, जिसे बिल्ट-इन मेटा एआई असिस्टेंट के साथ उतारा जाएगा. इसमें बिल्ट-इन कैमरा भी दिया जा सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि मेटा की स्मार्टवॉच डिटैचेबल फॉर्म फैक्टर के साथ आ सकती है, जिससे इसे मेटा के दूसरे डिवाइसेस के साथ भी इंटीग्रेट किया जा सकेगा.&amp;nbsp;
क्या एआई बूम के कारण फिर शुरू हुआ इस पर काम?
मेटा ने करीब 4 साल पहले कॉस्ट-कटिंग के लिए स्मार्टवॉच पर काम बंद कर दिया था. अब एआई बूम के कारण स्मार्टवॉच समेत कई प्रोडक्ट्स बाजार में देखने को मिल सकते हैं. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि मेटा की स्मार्टवॉच कंपनी के Meta Ray-Ban Display स्मार्ट ग्लासेस के साथ काम करेगी. ये स्मार्ट ग्लासेस सुपरहिट हुए हैं और कंपनी इनकी डिमांड पूरी नहीं कर पा रही है. इसके चलते मेटा ने अभी इसे कनाडा, यूके, फ्रांस और इटली आदि में लॉन्च करने का प्लान कैंसिल कर दिया है. फिलहाल कंपनी अमेरिका के ऑर्डर पूरा करना चाहती है.
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Tech Explained: हर कंपनी वीयरेबल गैजेट के पीछे क्यों भाग रही और एआई का इसमें क्या रोल? जानें सारे सवालों के जवाब</title>
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<description><![CDATA[ फेसबुक और इंस्टाग्राम के मालिकाना हक वाली कंपनी मेटा स्मार्ट ग्लासेस भी बनाती है. इस साल मेटा अपनी पहली स्मार्टवॉच भी लॉन्च करेगी. आईफोन बनाने वाली कंपनी वॉच मार्केट का बड़ा नाम है और अब स्मार्ट ग्लासेस भी बना रही है. इसी तरह गूगल भी इस साल अपने स्मार्ट ग्लासेस लॉन्च कर देगी. दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने कुछ समय पहले ही ऐप्पल के विजन प्रो की तरह गैलेक्सी XR हेडसेट लॉन्च किया था. गौर करने वाली बात यह भी है कि ये कंपनियां अब जिन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं, उन्हें कुछ साल पहले बीच में ही बंद कर दिया था. अब उन्हें फिर से रिवाइव किया जा रहा है. इनकी तरह ही छोटी टेक कंपनियां तेजी से भी स्मार्ट रिंग, स्मार्टवॉच, फिटनेस ट्रैकर और दूसरे वीयरेबल गैजेट लॉन्च कर रही हैं. ऐसे में आज के एक्सप्लेनर में हम जानेंगे कि अचानक से सभी कंपनियां वीयरेबल टेक के पीछे क्यों भागने लगी हैं. कैसे धीरे-धीरे वीयरेबल गैजेट हमारे जीवन का हिस्सा बनने लगे हैं और इसमें एआई और बिग डेटा का कितना बड़ा हाथ है.
अचानक से क्यों बढ़ गई वीयरेबल गैजेट की मांग?
पिछले कुछ सालों में वीयरेबल टेक्नोलॉजी फिटनेस के शौकीनों के दायरे से बाहर निकलकर आम आदमी तक पहुंच गई है. अब शॉपिंग करने से लेकर सराउंडिग से इंटरेक्शन करने तक में यह टेक्नोलॉजी अपना असर दिखा रहा है. आज जिस स्तर पर स्मार्टवॉचेज, फिटनेस ट्रैकर और दूसरे वीयरेबल गैजेट की खरीद हो रही है, यह किसी ने सोचा भी नहीं था और यह ट्रेंड लगातार बढ़ता ही जा रहा है. अब वीयरेबल गैजेट का मतलब सिर्फ स्टेप काउंटिंग और हार्ट रेट मॉनिटरिंग तक नहीं रहा गया है. लोग अब इन्हें पर्सनल सेफ्टी, प्रोडक्टिविटी और सोशल स्टेटस आदि के लिए खरीद रहे हैं.&amp;nbsp;
हमारे जीवन में कैसे जगह बनाते जा रहे हैं वीयरेबल गैजेट?
कुछ साल पहले तक वीयरेबल गैजेट स्टेप काउंटिंग जैसे बेसिक टास्क ही कर पाते थे, लेकिन अब यह टेक्नोलॉजी बहुत एडवांस हो गई है. ऐप्पल वॉच किसी के गिरने का पता लगाने से लेकर उसके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को सूचना देने तक के काम कर सकती है. कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जब वीयरेबल गैजेट ने बीमारी का समय रहते पता लगा लिया, जिससे लोगों की जानें बची हैं. अब कंई कंपनियां अपने डिवाइसेस में हाइपरटेंशन डिटेक्शन और स्लीन एपनिया डिटेक्शन जैसे फीचर देने लगी हैं. हेल्थ के अलावा दूसरे सेक्टर में वीयरेबल गैजेट के यूज की बात करें तो कॉन्टैक्टलैस पेमेंट, बिल्डिंग एक्सेस और डिजिटल आईडेंटिटी वेरिफिकेशन के लिए भी इसका यूज किया जा रहा है. कई शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट अब स्मार्टवॉच से पेमेंट ले रहे हैं. इस तरह देखा जाए तो वीयरेबल गैजेट लाइफ के हर फील्ड में धीरे-धीरे अपनी जगह बनाते जा रहे हैं. दूसरी तरफ इससे डेटा प्राइवेसी को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. यूजर्स के बायोमैट्रिक डेटा को सेंसेटिव माना जाता है और इसकी स्टोरेज को लेकर कड़ी सख्ती बरते जाने की जरूरत है.
एआई और बिग डेटा का इसमें कितना रोल?
गूगल ने कई साल पहले स्मार्ट ग्लासेस लाने का प्लान कैंसिल कर दिया था. मेटा ने भी करीब 4 साल पहले स्मार्टवॉच पर काम करना बंद कर दिया था, लेकिन अब एआई में एडवांसमेंट के कारण दोनों कंपनियां फिर से इन प्रोजेक्ट पर जुट गई हैं. ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल जाएंगे, जहां एआई का यूज कर वीयरेबल गैजेट को और इंटेलीजेंट बनाया जाता हैं. अब इन गैजेट को एआई से लैस किया जा रहा है, जिसकी मदद से सेंसर को मिलने वाला डेटा यूजर के समझ आने वाली भाषा में दिखाया जाता है. इसका फायदा इंडिविजुअल यूजर, हेल्थकेयर वर्कर, इंश्योरेंस के साथ-साथ अर्बन प्लानिंग जैसी बड़ी चीजों में भी देखने को मिल रहा है. अब इन डिवाइसेस की मदद से इतना डेटा जनरेट हो रहा है, जिसकी मदद से बीमारी का अनुमान लगाने और शहरों की प्लानिंग तक कई चीजें हो सकती हैं. एआई ने इस वीयरेबल टेक्नोलॉजी को पूरी तरह बदल दिया है और आने वाले समय में यह बदलाव और तेज होगा.
वीयरेबल गैजेट के लिए अगला दौर क्या होगा?
एआई के आने के कारण तेजी से चीजें बदल रही हैं और इंडस्ट्री के जानकार लोगों का कहना है कि अपकमिंग डिवाइसेस और पर्सनलाइज हो पाएंगे. वीयरेबल गैजेट का कार, होम और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ इंटीग्रेशन होगा और इससे सीमलेस और कॉन्टेक्स्ट अवेयर एक्सपीरियंस की दुनिया पूरी तरह अलग होगी. चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई भी इस साल अपना पहला हार्डवेयर लॉन्च करेगी. इसी तरह ऐप्पल भी विजुअल इंटेलीजेंस के लिए अपने एयरपॉड्स को कैमरा से लैस कर रही है.&amp;nbsp;
चुनौतियां भी कम नहीं
एआई पूरी तरह से डेटा पर निर्भर है और वीयरेबल गैजेट के पास यूजर की हार्ट रेट से लेकर उनकी नींद तक का पूरा शेड्यूल मौजूद है. ऐसे में डेटा सेफ्टी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है. दुनियाभर की सरकारें और रेगुलेटर डेटा सेफ्टी को लेकर नए नियम बनाने में जुटे हुए हैं. दूसरी तरफ इससे साइबर सेफ्टी को लेकर भी चिंताएं पैदा हो रही है. डिजिटली कनेक्टेड इस दुनिया पर अटैकर्स की भी नजर है और एक डिवाइस की एक्सेस पाने पर वह यूजर की हर सेंसेटिव इंफोर्मेशन को एक्सेस कर सकता है. ऐसे में तेजी से एडवांस होती जा रही वीयरेबल टेक्नोलॉजी को इन चुनौतियों से पार पाने की कोशिशें करते रहनी होगी.
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पानी में डुबोने पर भी नहीं होता खराब, फोन को कैसे वाटरप्रूफ बनाती हैं कंपनियां, यहां जानें पूरी प्रोसेस ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>पेन ड्राइव की ये छोटी सी गलती कर देगी सालों का डेटा साफ! क्या आप भी रोज कर रहे हैं ये लापरवाही?</title>
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<description><![CDATA[ Tech Tips: आज के डिजिटल दौर में पेन ड्राइव हमारे लिए छोटी सी लेकिन बेहद काम की डिवाइस बन चुकी है. ऑफिस के जरूरी दस्तावेज हों, कॉलेज प्रोजेक्ट्स या सालों पुरानी तस्वीरें अक्सर हम इन्हें पेन ड्राइव में सुरक्षित समझकर रख देते हैं. लेकिन एक छोटी सी लापरवाही आपके पूरे डेटा को पल भर में गायब कर सकती है.
बिना सेफली रिमूव किए निकालना सबसे बड़ी गलती
सबसे आम गलती जो लोग करते हैं वह है पेन ड्राइव को सीधे सिस्टम से खींचकर निकाल लेना. कई बार फाइल कॉपी होने के बाद भी बैकग्राउंड में डेटा ट्रांसफर या प्रोसेसिंग चलती रहती है. ऐसे में अचानक डिवाइस हटाने से फाइल करप्ट हो सकती है या पूरा ड्राइव ही खराब हो सकता है. Safely Remove Hardware या Eject विकल्प का इस्तेमाल करना जरूरी है ताकि सिस्टम डेटा ट्रांसफर को सही तरीके से बंद कर सके.
बार-बार अलग-अलग सिस्टम में इस्तेमाल
पेन ड्राइव को कई अलग-अलग कंप्यूटर या लैपटॉप में लगाना भी जोखिम भरा हो सकता है खासकर अगर उन सिस्टम में एंटीवायरस अपडेटेड न हो. वायरस या मैलवेयर चुपचाप आपकी फाइलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कई बार फाइलें दिखती तो हैं लेकिन खुलती नहीं यह वायरस अटैक का संकेत हो सकता है.
ओवरलोड और गलत स्टोरेज की समस्या
अक्सर लोग पेन ड्राइव की पूरी क्षमता भर देते हैं. लगातार फुल स्टोरेज रखने से डिवाइस की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है और डेटा करप्शन का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा, पेन ड्राइव को गर्म जगह, धूल या नमी में रखना भी नुकसानदेह है. यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसे सावधानी से संभालना जरूरी है.
बैकअप नहीं रखना पड़ सकता है भारी
सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि लोग महत्वपूर्ण डेटा का दूसरा बैकअप नहीं रखते. अगर पेन ड्राइव अचानक खराब हो जाए तो डेटा रिकवरी मुश्किल और महंगी हो सकती है. इसलिए जरूरी दस्तावेजों को क्लाउड स्टोरेज या हार्ड ड्राइव पर भी सेव रखना समझदारी है.
कैसे बचें नुकसान से?
पेन ड्राइव को हमेशा Eject करके निकालें भरोसेमंद सिस्टम में ही इस्तेमाल करें और समय-समय पर एंटीवायरस स्कैन करें. साथ ही जरूरी डेटा का बैकअप जरूर रखें. थोड़ी सी सावधानी आपके सालों की मेहनत को सुरक्षित रख सकती है.
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क्या इंसानों को एआई से डांट भी सुननी पड़ेगी? कोड रिजेक्ट किया तो इंजीनियर पर गुस्सा हो गया बॉट, उठाए सवाल ]]></description>
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>पानी में डुबोने पर भी नहीं होता खराब, फोन को कैसे वाटरप्रूफ बनाती हैं कंपनियां, यहां जानें पूरी प्रोसेस</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5589</link>
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<description><![CDATA[ आजकल कंपनियां अपने फोन को वाटरप्रूफ बनाने लगी हैं. बारिश हो या स्विमिंग पूल, ये फोन कुछ देर तक पानी के नीचे भी रह सकते हैं. हालांकि, कंपनियां इन्हें वाटर-रजिस्टेंट कहकर बेचती हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि एक समय पानी के जरा-से संपर्क में आने पर खराब हो जाने वाले फोन आजकल पानी के अंदर कैसे फोटो और वीडियो ले सकते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि फोन को वाटरप्रूफ कैसे बनाया जाता है.
बाहर से अंदर तक हर जगह किया जाता है इंतजाम
बाहर से देखने पर ऐसा लगता है कि वाटर-रजिस्टेंट फोन बनाना एक फीचर का काम है. असल में ऐसा नहीं होता है. फोन को पानी से खराब होने से बचाने के लिए फोन के कई सिस्टम एक साथ काम करते हैं. सबसे पहले फोन को बनाते समय कम से कम ऐसे रास्ते छोड़े जाते हैं, जिनसे पानी अंदर घुस सकता है. इसके लिए फ्रेम और बैक पैनल को ऐसे फिट किया जाता है कि इनके बीच कोई गैप न रहे. गैप रहने पर पानी अंदर आ सकता है, इसलिए पहले इन गैप्स को अच्छे से भरा जाता है.
चार्जिंग पोर्ट और स्पीकर को ऐसे किया जाता है वाटरप्रूफ
चार्जिंग पोर्ट, सिम ट्रे और बटन समेत कई ऐसे स्पॉट होते हैं, जहां से पानी अंदर जाने के चांस रहते हैं. इन्हें रोकने के लिए सिलिकॉन गैस्केट और रबर की सीलिंग रिंग का इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के तौर पर सिम ट्रे पर एक छोटी वाटरप्रूफ रिंग लगाई जाती है, जो सिम ट्रे के अंदर जाते ही कंप्रेस हो जाती है और पानी समेत किसी भी लिक्विड को फोन के इंटरनल पार्ट्स पर जाने से रोक लेती है. स्पीकर का मामला थोड़ा और मुश्किल होता है क्योंकि इसे एयरफ्लो की जरूरत होती है. इसके लिए हाइड्रोफोबिक अकाउस्टिक मेंम्ब्रेन या खास तौर पर इंजीनियर किया गया मेश मैटेरियल यूज किया जाता है. ये पानी या दूसरे लिक्विड को अंदर जाने से रोक लेते हैं, लेकिन साउंड वेव्ज को पास होने देते हैं.
बैकअप प्लान
इन सारे इंतजाम के बाद भी नमी और पानी अंदर आ सकते हैं. इसकी प्रोटेक्शन के लिए फोन के अंदर एक और लेयर जोड़ी जाती है. फोन के मदरबोर्ड, कनेक्टर और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड पर नैनो-हाइड्रोफॉबिक कोटिंग की जाती है, जो पानी की हटा देती है. यह कोटिंग भी फुल सेफ्टी की गारंटी नहीं होती है और यह केवल एक सेफ्टी कोटिंग के तौर पर काम करती है.
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<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोन के USB पोर्ट में भूलकर भी न लगा लें ये डिवाइसेस, हो जाएगा बड़ा नुकसान, खर्चा भी आएगा</title>
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<description><![CDATA[ आपके फोन का USB पोर्ट केवल डिवाइस को चार्ज करने के लिए ही यूज नहीं होता. यह डेटा ट्रांसफर और एक्सटर्नल हार्ड डिस्क समेत कई दूसरी चीजों को भी सपोर्ट करता है. ऐसे में अगर आप इसमें नकली या अनसर्टिफाई डिवाइस प्लग करेंगे तो इसके खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. इससे न सिर्फ आपका डिवाइस चार्ज होने बंद हो जाएगा बल्कि इसकी रिपेयरिंग के लिए आपको खर्चा भी करना पड़ेगा. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि USB पोर्ट में किन डिवाइसेस को प्लग करने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
नकली फास्ट चार्जर
आजकल अधिकतर कंपनियां फास्ट चार्जिंग वाले फोन लॉन्च कर रही हैं. अगर आप इन्हें असली और सर्टिफाईड चार्जर से यूज करते हैं तो ये 60-70 मिनट में पूरी तरह चार्ज हो जाते हैं. कुछ लोग पैसे बचाने के लिए या लापरवाही से नकली चार्जर खरीद लेते हैं. ये भले ही आपके फोन को जल्दी चार्ज कर दें, लेकिन इससे बैटरी और फोन को भारी नुकसान हो सकता है.
नकली केबल&amp;nbsp;
चार्जर की तरह नकली केबल से भी बचना जरूरी है. खराब क्वालिटी वाली या नकली केबल भले ही आपके पैसे बचा दें, लेकिन ये पावर सप्लाई को रेगुलेट नहीं कर पाती, जिससे लंबे समय तक यूज करने पर फोन में ओवरहीटिंग समेत कई दूसरी दिक्कतें आ सकती हैं. इसलिए अपने USB पोर्ट में नकली केबल यूज करने से बचें.
पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर लगी केबल
रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या कैफे आदि में बने पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर भी आपको फोन चार्ज करने से बचना चाहिए. दरअसल, इन चार्जिंग स्टेशन पर लगी केबल कॉम्प्रोमाइज्ड हो सकती हैं यानी इनका यूज आपके फोन को हैक करने के लिए किया जा सकता है. जैसे ही आप इन केबल को अपने फोन में प्लग-इन करेंगे, आपके डिवाइस में मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जो आपका डेटा चुरा लेता है.&amp;nbsp;
अनसर्टिफाई एक्सेसरीज
आजकल ई-कॉमर्स पर वेबसाइट पर ऐसी एक्सेसरीज की बाढ़ आई हुई है, जो आपके USB स्लॉट के जरिए फोन में प्लग-इन की जा सकती है. इनमें छोटा पंंखा, LED लाइट्स और टॉय वैक्यूम क्लीनर्स आदि शामिल हैं. ये काफी सस्ते होते हैं, जिनके कारण कई लोग इन्हें खरीद लेते हैं. अधिकतर मामलों में ये अनसर्टिफाइड ही होते हैं और इन्हें लंबे टाइम तक यूज करने से हीट जनरेट होती है, जिससे फोन का चार्जिंग सर्किट खराब होने का डर रहता है.
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोल्डेबल फोन लेने से पहले रुकिए! बड़ी स्क्रीन का सपना कहीं न पड़ जाए भारी, खरीदने से पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान</title>
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:46 +0530</pubDate>
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<title>अब AI बनाएगा आपकी मर्जी की Playlist! YouTube ने प्रीमियम यूजर्स के लिए लॉन्च किया ये धमाकेदार फीचर</title>
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<description><![CDATA[ YouTube AI Feature: YouTube ने अपने प्रीमियम सब्सक्राइबर्स के लिए एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल पेश किया है जिसकी मदद से अब यूजर्स सिर्फ अपनी पसंद बताकर प्लेलिस्ट तैयार कर सकते हैं. यह फीचर iOS और Android दोनों प्लेटफॉर्म पर धीरे-धीरे उपलब्ध कराया जा रहा है. इसका मकसद म्यूजिक सुनने के अनुभव को आसान और ज्यादा निजी बनाना है.
अब गानों की खोज में समय बर्बाद नहीं
अक्सर लोग अपनी पसंद के गाने ढूंढने या उन्हें सही क्रम में लगाने में काफी समय लगा देते हैं. नए AI प्लेलिस्ट जनरेटर के साथ यह झंझट खत्म हो जाता है. यूजर को बस कुछ शब्द टाइप करने या बोलने होते हैं जैसे कि मूड, जॉनर या किसी खास तरह का म्यूजिक. इसके बाद YouTube का AI खुद उसी आधार पर गानों की एक कस्टम प्लेलिस्ट तैयार कर देता है.
पहले भी हो चुके हैं AI प्रयोग
YouTube इससे पहले भी म्यूजिक में AI का इस्तेमाल आजमा चुका है. जुलाई 2024 में कंपनी ने एक ऐसा फीचर टेस्ट किया था जिसमें यूजर्स टेक्स्ट प्रॉम्प्ट देकर अपनी पसंद का रेडियो स्टेशन बना सकते थे. नया प्लेलिस्ट जनरेटर उसी विचार का उन्नत संस्करण माना जा रहा है जिसे अब ज्यादा व्यापक स्तर पर प्रीमियम सदस्यों के लिए शुरू किया गया है.
ऐसे काम करता है यह फीचर
प्रीमियम यूजर्स को YouTube ऐप के लाइब्रेरी सेक्शन में जाकर New विकल्प चुनना होगा जहां AI Playlist का ऑप्शन दिखाई देगा. यहां वे टेक्स्ट या वॉयस के जरिए अपनी पसंद दर्ज कर सकते हैं. उदाहरण के तौर पर कोई चिल पार्टी के लिए हाउस मिक्स, इंडी पॉप, 90 के दशक के बॉलीवुड गाने या किसी खास मूड का जिक्र कर सकता है. कुछ ही देर में AI उसी विवरण के अनुसार प्लेलिस्ट तैयार कर देता है.
बढ़ती हुई रेस के साथ नई रणनीति
म्यूजिक स्ट्रीमिंग की दुनिया में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है. Spotify, Amazon Music और Deezer जैसे प्लेटफॉर्म भी AI आधारित प्लेलिस्ट और रेडियो फीचर ला चुके हैं. ऐसे में YouTube का यह कदम अपने प्रीमियम प्लान को और आकर्षक बनाने की दिशा में देखा जा रहा है. हाल ही में कंपनी ने कुछ मुफ्त यूजर्स के लिए गानों के लिरिक्स की उपलब्धता सीमित करने का परीक्षण भी शुरू किया है.
Google जो YouTube की मूल कंपनी है अब सब्सक्रिप्शन सेवाओं पर खास ध्यान दे रही है. हाल के आंकड़ों के अनुसार Google के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पेड सब्सक्राइबर्स मौजूद हैं जिनमें YouTube Premium भी शामिल है. AI प्लेलिस्ट जनरेटर को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिससे यूजर्स को ज्यादा वैल्यू और व्यक्तिगत अनुभव मिल
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>मार्केट में आई गिरावट के बाद भी चमका आईफोन 16, अब भी धड़ाधड़ हो रही है बिक्री, इन कारणों से आ रहा लोगों को पसंद</title>
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<description><![CDATA[ 2025 के चौथे क्वार्टर में भारत की स्मार्टफोन मार्केट में गिरावट देखने को मिली है और सालाना आधार पर स्मार्टफोन शिपमेंट 4 प्रतिशत कम हो गई है. यह सीजनल गिरावट मानी जाती है, लेकिन साल के आखिरी महीनों में कीमत बढ़ने के कारण लोगों ने नया फोन खरीदने से थोड़ा परहेज किया है. इस गिरावट के बावजूद आईफोन 16 का क्रेज बरकरार है और लगातार तीसरे क्वार्टर भी सबसे ज्यादा बिकने वाला फोन बना रहा.
महंगे फोन खरीद रहे हैं लोग
काउंटरप्वाइंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, चौथे क्वार्टर में भी लोगों का प्रीमियम फोन की तरफ जाने का ट्रेंड जारी रहा. अब भारत में 45,000 रुपये से अधिक की कीमत वाले फोन के अल्ट्रा-प्रीमियम सेगमेंट के पास 17 प्रतिशत मार्केट शेयर है. पहले किसी भी क्वार्टर में यह इतना ज्यादा नहीं रहा है. इससे पता चलता है कि भारत में लोग अब महंगे स्मार्टफोन की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं. ऐप्पल को इस ट्रेंड का सबसे ज्यादा फायदा मिला है और आईफोन 16 इस क्वार्टर का सबसे ज्यादा बिकने वाला फोन बनकर टॉप पर रहा है. ऐप्पल को टारगेटेड प्रमोशन को बेहतर चैनल मैनेजमेंट कई चीजों का इसमें फायदा मिला है.
आईफोन 16 को क्यों पसंद कर रहे हैं लोग?
आईफोन 16 की भारत समेत दुनियाभर में जमकर बिक्री हो रही है. 2025 में यह भारत के साथ-साथ दुनियाभर में सबसे ज्यादा बिकने वाला स्मार्टफोन रहा था. लेटेस्ट आईफोन 17 सीरीज आने के बाद भी लोग इसे जमकर खरीद रहे हैं. इसकी कम कीमत, शानदार परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर सपोर्ट के कारण यह लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है.
क्या है आईफोन 16 के स्पेसिफिकेशंस?
2024 में लॉन्च हुए आईफोन 16 में 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले है, जो HDR कंटेट सपोर्ट और 2,000 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है. इस आईफोन में A18 प्रोसेसर लगा है, जो मल्टीटास्किंग और ऐप्पल इंटेलीजेंस को आसानी से हैंडल कर लेता है. हाई परफॉर्मेंस के साथ-साथ यह प्रोसेसर एफिशिएंट और अपकमिंग सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए कंपेटिबल भी है. इसके रियर में 48MP+12MP का डुअल कैमरा सेटअप है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसके फ्रंट में 12MP का कैमरा है. बैटरी की बात करें तो फुल चार्जिंग पर यह आईफोन 22 घंटे का वीडियो प्लेबैक सपोर्ट करता है.
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>2026 में खरीदना है नया फोन? इन बातों पर जरूर करें गौर, मिलेगी बेस्ट वैल्यू फॉर मनी</title>
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<description><![CDATA[ अभी नए साल का दूसरा ही महीना चल रहा है और मार्केट में कई नए स्मार्टफोन एंट्री कर चुके हैं. इसी महीने सैमसंग अपनी फ्लैगशिप गैलेक्सी S26 सीरीज लॉन्च करेगी तो ऐप्पल और गूगल के मिड-रेंज वेरिएंट भी लॉन्च होने को तैयार हैं. ऐसे में अगर अगले कुछ दिनों में या इस साल नया फोन खरीदना चाहते हैं तो कुछ बातों पर गौर करना जरूरी है. इससे आप अपने बजट से एक्स्ट्रा पैसे खर्च किए बिना एक अच्छा फोन खरीद पाएंगे.
फोन खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
महंगे हो रहे हैं फोन- इस साल की शुरुआत में मोबाइल यूजर्स को बड़ा झटका लगा है. दरअसल, मेमोरी चिप्स और दूसरे कंपोनेंट की बढ़ती लागत के कारण कंपनियों ने अपने स्मार्टफोन्स की कीमतें बढ़ाना शुरू कर दिया है. सैमसंग और शाओमी समेत कई कंपनियों के बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन महंगे हो चुके हैं.
सॉफ्टवेयर सपोर्ट और एआई फीचर- हार्डवेयर के साथ-साथ फोन के सॉफ्टवेयर पर भी ध्यान देना जरूरी है. फोन खरीदने से पहले हमेशा यह देखें कि उसे कितने साल तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट मिलेगा. गूगल अपने फोन को सात साल का सॉफ्टवेयर अपडेट देती है. इसी तरह यह भी देखें कि फोन में मिलने वाले एआई फीचर्स ऑफलाइन काम कर सकते हैं या नहीं.&amp;nbsp;
परफॉर्मेंस- लेटेस्ट चिपसेट के साथ जाने की बजाय आपकी जरूरत को प्रायोरिटी दें. अगर आपको स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया स्क्रॉलिंग और कॉल, मैसेज जैसे कामों के लिए फोन की जरूरत हैं तो मिड-रेंज प्रोसेसर पर्याप्त रहेगा. इसलिए लेटेस्ट चिपसेट के लालच में अधिक पैसा खर्च न करें. अगर आप फोन को लंबा चलाने चाहते हैं तो 12GB रैम को चुनें
बैटरी लाइफ- स्मार्टफोन की बैटरी कैपेसिटी पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है. आजकल कई स्मार्टफोन 10,000mAH की बैटरी के साथ भी लॉन्च हो रहे हैं, लेकिन सिर्फ नंबरों के लालच में न आएं. यह जरूर देखें कि रियल यूज पर बैटरी कितना चलती है. यूजर्स के रिव्यू पढ़कर आप यह जान सकते हैं.
कैमरा क्वालिटी- बैटरी की तरह केवल कैमरा के मेगापिक्सल नंबर से इम्प्रैस न हों. अगर आप फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी के लिए फोन खरीद रहे हैं तो यह देखें कि यह कम लाइट को कैसे हैंडल कर सकता है? क्या फोन में दिए गए अल्ट्रावाइड और टेलीफोटो लेंस यूसेबल है और फोन की वीडियो रिकॉर्डिंग क्वालिटी और स्टेबलाइजेशन कैसा है? फोन खरीदते समय आप फोटो-वीडियो बनाकर भी इसका टेस्ट कर सकते हैं.
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:45 +0530</pubDate>
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<title>AI तो सुना होगा लेकिन AI Agent क्या बला है? जानिए दोनों के बीच का असली फर्क</title>
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<description><![CDATA[ AI Vs AI Agent: आज के डिजिटल दौर में Artificial Intelligence यानी AI शब्द हर जगह सुनाई देता है. स्मार्टफोन से लेकर बैंकिंग सिस्टम और सोशल मीडिया तक हर जगह AI का इस्तेमाल हो रहा है. लेकिन हाल के दिनों में एक नया शब्द तेजी से चर्चा में आया है AI Agent. कई लोग दोनों को एक जैसा समझ लेते हैं जबकि इन दोनों के बीच बड़ा अंतर है.
क्या है AI?
AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक ऐसी तकनीक है जो मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, समझने और सीखने की क्षमता देती है. उदाहरण के लिए, जब आप गूगल पर कुछ सर्च करते हैं और आपको आपकी पसंद के हिसाब से रिजल्ट मिलते हैं या जब आपका फोन फेस अनलॉक से खुल जाता है तो वहां AI काम कर रहा होता है.
AI का मुख्य काम डेटा को समझना, पैटर्न पहचानना और उसके आधार पर सुझाव देना या निर्णय लेना है. लेकिन यह आमतौर पर इंसान के दिए गए निर्देशों पर ही काम करता है.
AI Agent क्या अलग करता है?
AI Agent को आप AI का एडवांस्ड रूप मान सकते हैं. यह सिर्फ निर्देशों का पालन नहीं करता बल्कि खुद से निर्णय लेने और कई स्टेप्स में काम पूरा करने की क्षमता रखता है.
मान लीजिए आपने किसी AI से कहा कि मुझे दिल्ली से मुंबई की सस्ती फ्लाइट बताओ. सामान्य AI आपको विकल्प दिखा देगा. लेकिन एक AI Agent खुद फ्लाइट खोजेगा, कीमतों की तुलना करेगा आपके कैलेंडर के अनुसार सही तारीख चुनेगा और जरूरत पड़े तो टिकट भी बुक कर देगा. यानी AI Agent सिर्फ जानकारी नहीं देता बल्कि एक लक्ष्य को पूरा करने के लिए खुद एक्शन भी ले सकता है.
मुख्य अंतर क्या है?
AI मुख्य रूप से डेटा विश्लेषण और सुझाव देने तक सीमित रहता है जबकि AI Agent किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार काम करता है. AI को आप &amp;ldquo;स्मार्ट दिमाग&amp;rdquo; कह सकते हैं, लेकिन AI Agent स्मार्ट असिस्टेंट की तरह होता है जो सोचता भी है और काम भी करता है.
AI Agent में प्लानिंग, निर्णय लेने और वातावरण के अनुसार खुद को एडजस्ट करने की क्षमता होती है. यही वजह है कि आने वाले समय में कंपनियां कस्टमर सर्विस, हेल्थकेयर, फाइनेंस और यहां तक कि पर्सनल असिस्टेंस में AI Agents का ज्यादा इस्तेमाल कर सकती हैं.
भविष्य किसका है?
AI पहले से ही हमारी जिंदगी का हिस्सा बन चुका है लेकिन AI Agents इस तकनीक को एक नए स्तर पर ले जा सकते हैं. आने वाले सालों में हम ऐसे सिस्टम देख सकते हैं जो सिर्फ सवालों का जवाब नहीं देंगे बल्कि हमारे लिए कई काम खुद-ब-खुद निपटाएंगे.
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:44 +0530</pubDate>
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<title>Google Chrome यूजर्स के लिए भारत सरकार की बड़ी चेतावनी, अभी कर लें यह काम, नहीं तो हो सकता है कांड</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप Google Chrome यूजर हैं तो अलर्ट हो जाने की जरूरत है. सरकारी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने वार्निंग जारी करते हुए कहा है कि इस ब्राउजर में कई सिक्योरिटी खामियां मिली हैं, जिससे विंडोज, macOS और Linux पर गूगल क्रो यूज करने वालों पर साइबर अटैक का खतरा है. इन खामियों का फायदा उठाकर अटैकर्स आपके सिस्टम की एक्सेस ले सकते हैं, जिससे पर्सनल इंफोर्मेशन के साथ-साथ डेटा चोरी का भी डर बना हुआ है.
Google Chrome के किस वर्जन पर ज्यादा खतरा?
अगर आप विंडोज या मैक पर गूगल क्रोम के 145.0.7632.75/76 से पुराने और Linux पर 144.0.7559.75 से पुराने वर्जन का यूज कर रहे हैं तो आपको चिंता करने की जरूरत है. एजेंसी को क्रोम के इन वर्जन में खामियां मिली हैं. इसलिए अब भी इन वर्जन का यूज करने वाले यूजर्स पर रिमोट अटैक हो सकता है. एजेंसी का कहना है कि क्रोम के CSS रेंडरिंग कंपोनेंट में ये खामियां पाई गई हैं. इनका फायदा उठाकर अटैकर्स ब्राउजर के अंदर मेमोरी हैंडलिंग को मैनिपुलेट कर सकते हैं. इस तरीके से वो पूरे सिस्टम की एक्सेस अपने हाथों में लेकर डेटा चोरी और सर्विस डिसरप्शन कर सकते हैं.
बड़े खतरे से निपटने के लिए यूजर्स क्या करें?
एजेंसी ने इस वार्निंग को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा है, जिससे पता चलता है कि यह खतरा काफी बड़ा है. इससे निपटने के लिए यूजर्स को क्रोम ब्राउजर अपडेट करने की सलाह दी गई है. यूजर्स और ऑर्गेनाइजेशन को गूगल स्टेबल चैनल के जरिए रिलीज हुई अपडेट को इंस्टॉल कर सकते हैं. इस अपडेट में इन खामियों को ठीक करने के लिए सिक्योरिटी पैचेज जारी किए गए हैं. आमतौर पर भी यूजर्स को अपने डिवाइस और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड रखने की सलाह दी जाती है. इससे उन्हें साइबर अटैक से भी सुरक्षा मिलती है और नए फीचर्स भी मिलते रहते हैं.
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<title>इस हफ्ते धूम मचाने आ रहा iPhone 17e! लॉन्च से पहले जान लें वो 5 बड़े अपग्रेड जो बदल देंगे गेम</title>
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<description><![CDATA[ Apple iPhone 17e: Apple अपने किफायती स्मार्टफोन पोर्टफोलियो को भारत समेत ग्लोबल मार्केट में और मजबूत करने की तैयारी में नजर आ रहा है. चर्चा है कि नया iPhone 17e इसी हफ्ते पेश किया जा सकता है हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मॉडल मौजूदा iPhone 16e की तुलना में कई अहम सुधारों के साथ आ सकता है. बैटरी, प्रोसेसर, डिजाइन और कैमरा जैसे क्षेत्रों में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है.
दमदार प्रोसेसर और नई स्मार्ट क्षमताएं
बताया जा रहा है कि नए मॉडल में A19 चिपसेट दिया जा सकता है जो प्रीमियम सीरीज में इस्तेमाल होने वाला प्रोसेसर है. यह मौजूदा A18 के मुकाबले ज्यादा तेज और पावरफुल माना जा रहा है. नई चिप की मदद से यूजर्स को बेहतर गेमिंग, स्मूद मल्टीटास्किंग और एडवांस फोटो एडिटिंग का अनुभव मिल सकता है. साथ ही, कंपनी की नई स्मार्ट तकनीक Apple Intelligence को भी सपोर्ट मिलने की संभावना है जिससे ईमेल लिखना, इमेज तैयार करना और वॉयस असिस्टेंट का इस्तेमाल पहले से ज्यादा सहज हो सकता है.
डिजाइन में दिख सकता है बड़ा बदलाव
कई सालों से बजट आईफोन में स्क्रीन के ऊपरी हिस्से पर पारंपरिक नॉच देखने को मिलता था. अब संभावना है कि इस बार कंपनी Dynamic Island फीचर को इस सेगमेंट में भी शामिल करे. यह इंटरैक्टिव नोटिफिकेशन एरिया अलर्ट, म्यूजिक कंट्रोल और टाइमर जैसी जानकारियां अलग अंदाज में दिखाता है जिससे फोन का लुक और इस्तेमाल करना दोनों बेहतर हो जाते हैं.
नया मॉडेम और बेहतर कनेक्टिविटी
रिपोर्ट्स के अनुसार, डिवाइस में कंपनी का खुद का विकसित किया गया C1X मॉडेम मिल सकता है. यह मॉडेम तेज डाउनलोड स्पीड और भीड़भाड़ वाले इलाकों में स्थिर नेटवर्क कनेक्शन देने के लिए डिजाइन किया गया है. साथ ही, इसे ज्यादा बैटरी एफिशियंट बताया जा रहा है जिससे बैटरी बैकअप में भी सुधार देखने को मिल सकता है.
मैगसेफ और लंबी चलने वाली बैटरी
इस बार वायरलेस चार्जिंग को लेकर भी बड़ा अपडेट देखने को मिल सकता है. खबर है कि फोन में MagSafe सपोर्ट जोड़ा जाएगा, जिससे मैग्नेटिक चार्जर और एक्सेसरीज आसानी से अटैच हो सकेंगी. इससे वायरलेस चार्जिंग पहले की तुलना में ज्यादा सुविधाजनक हो जाएगी.
कैमरे में अपग्रेड की उम्मीद
कैमरा सेक्शन में 48 मेगापिक्सल का रियर सेंसर बरकरार रह सकता है लेकिन फ्रंट कैमरा 12 मेगापिक्सल से बढ़ाकर 18 मेगापिक्सल किए जाने की चर्चा है. बेहतर HDR, लो-लाइट फोटोग्राफी और डिटेलिंग में सुधार की भी उम्मीद है जिसका श्रेय नए प्रोसेसर को दिया जा रहा है.
कीमत को लेकर अनुमान है कि भारत में इसकी शुरुआती कीमत करीब 59,999 रुपये हो सकती है और लॉन्च फरवरी 2026 के तीसरे हफ्ते में संभव है. हालांकि, इन जानकारियों पर कंपनी की आधिकारिक मुहर लगना अभी बाकी है.
Samsung Galaxy S26 Series भी जल्द होगा लॉन्च
Samsung इसी महीने अपना नया फ्लैगशिप फोन Samsung Galaxy S26 Series को मार्केट में लॉन्च करने जा रहा है. दरअसल, कंपनी अपने गैलेक्सी अनपैक्ड इवेंट, जो 25 फरवरी 2026 को होने वाला है, में इस नए फोन को लॉन्च करने वाली है. इस नए डिवाइस में आपको कई सारे बेहतरीन फीचर्स भी देखने को मिल जाएंगे.
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अपकमिंग आईफोन से गायब होने वाला है यह फीचर, अब मिलेगा केवल eSIM सपोर्ट, ऐप्पल ने कर ली तैयारी</title>
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<description><![CDATA[ नए आईफोन से जल्द ही फिजिकल सिम स्लॉट गायब होने वाला है. ऐप्पल अमेरिका समेत कई दूसरे देशों में बिना सिम स्लॉट वाले आईफोन बेच रही है और अब यूरोप में भी ऐसा होने वाला है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि यूरोप में आईफोन 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स बिना फिजिकल सिम सपोर्ट के लॉन्च होंगे. इनमें डबल eSIM सपोर्ट दिया जा सकता है. बता दें कि ऐप्पल आईफोन 14 के समय से अमेरिका में केवल eSIM सपोर्ट वाले आईफोन लॉन्च कर रही है. अब मेक्सिको और जापान में भी आईफोन में फिजिकल सिम स्लॉट मिलना बंद हो गया है.&amp;nbsp;
लंबे समय से चल रही है ऐप्पल की तैयारी
ऐप्पल लंबे समय से यूरोप में केवल eSIM वाले आईफोन लॉन्च करने की तैयारी कर रही है. ऐसे कयास लगाए गए थे कि आईफोन 17 मॉडल के साथ इसकी शुरुआत हो सकती है, लेकिन ऐप्पल ने केवल आईफोन एयर को ग्लोबल लेवल पर eSIM सपोर्ट के साथ लॉन्च किया था. यह शुरुआत भी ऐप्पल के लिए परफेक्ट नहीं रही. दरअस, चीन में eSIM आसानी से अवेलेबल नहीं है, जिसके चलते वहां इसकी लॉन्चिंग में देरी हुई और बिक्री पर भी असर पड़ा.&amp;nbsp;
यूजर्स को उठानी पड़ सकती है दिक्कत
ऐप्पल यूरोप में भले ही फिजिकल सिम सपोर्ट हटाने की तैयारी कर रही है, लेकिन यूजर्स को इससे परेशानी हो सकती है. दरअसल, यूरोप की कई कंपनियां eSIM के लिए एक्स्ट्रा पैसे लेती हैं, वहीं कुछ ऐसी भी हैं, जो eSIM पर प्रीपेड प्लान नहीं देती. इससे ट्रैवलर और दूसरे कई लोगों को परेशानी हो सकती है.&amp;nbsp;
सिम स्लॉट हटाने का क्या फायदा होगा?
फिजिकल सिम स्लॉट हटाने से ऐप्पल को आईफोन के अंदर थोड़ा और स्पेस मिल जाएगा, जिसे बैटरी को बड़ा करने के लिए यूज किया जा सकता है. आईफोन 18 प्रो मैक्स में ऐप्पल 5,200 mAh की अपनी अब तक की सबसे बड़ी बैटरी ऑफर कर सकती है. ऐसे में उसे स्पेस की बहुत जरूरत है. फिजिकल सिम सपोर्ट हटाने से उसे यह स्पेस मिल जाएगा.&amp;nbsp;
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोन है या जासूस? आप बैठे हों या लेटे, कैमरा&#45;माइक बंद होने पर भी सब ट्रैक कर लेता है आपका स्मार्टफोन! जानिए कैसे</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Tips: आज का स्मार्टफोन सिर्फ कॉल और मैसेज का जरिया नहीं रह गया है. यह हमारी दिनचर्या, पसंद-नापसंद, लोकेशन और यहां तक कि हमारी गतिविधियों तक को समझने लगा है. कई लोगों को लगता है कि अगर कैमरा बंद है और माइक्रोफोन म्यूट है तो फोन कुछ भी रिकॉर्ड नहीं कर सकता. लेकिन सच्चाई इससे थोड़ी अलग और ज्यादा जटिल है.
कैमरा-माइक नहीं सेंसर करते हैं काम
स्मार्टफोन में सिर्फ कैमरा और माइक्रोफोन ही नहीं होते बल्कि कई तरह के सेंसर भी लगे होते हैं. एक्सेलेरोमीटर, जाइरोस्कोप, प्रॉक्सिमिटी सेंसर और जीपीएस जैसे फीचर्स यह समझ सकते हैं कि आप चल रहे हैं, बैठे हैं या लेटे हुए हैं. फिटनेस ऐप्स इसी तकनीक की मदद से आपके कदम गिनते हैं और आपकी गतिविधियों का विश्लेषण करते हैं. यानी कैमरा बंद होने पर भी फोन को आपकी बॉडी मूवमेंट की जानकारी मिलती रहती है.
ऐप्स की परमिशन का खेल
अक्सर हम बिना पढ़े किसी भी ऐप को इंस्टॉल करते समय सभी परमिशन दे देते हैं. यही सबसे बड़ी गलती होती है. कई ऐप्स लोकेशन, मोशन डेटा और बैकग्राउंड एक्टिविटी की अनुमति लेकर लगातार डेटा इकट्ठा करती रहती हैं. यही डेटा बाद में विज्ञापन या सुझावों के रूप में सामने आता है. अगर आपने कभी सोचा हो कि किसी चीज़ के बारे में सोचते ही उसका विज्ञापन क्यों दिखने लगता है तो इसके पीछे यही डेटा एनालिसिस काम करता है.
क्या सच में जासूसी हो रही है?
यह कहना गलत होगा कि हर स्मार्टफोन जानबूझकर जासूसी कर रहा है. बड़ी टेक कंपनियां जैसे Google और Apple दावा करती हैं कि वे यूजर की प्राइवेसी को प्राथमिकता देती हैं. लेकिन यह भी सच है कि डेटा आज की डिजिटल दुनिया का सबसे कीमती संसाधन बन चुका है. कंपनियां यूजर व्यवहार को समझने के लिए एनालिटिक्स टूल्स का इस्तेमाल करती हैं जिससे उन्हें बेहतर सेवाएं और टार्गेटेड कंटेंट देने में मदद मिलती है.
खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
अगर आप अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंतित हैं तो सबसे पहले ऐप परमिशन की जांच करें. अनावश्यक लोकेशन और माइक्रोफोन एक्सेस को बंद रखें. फोन की सेटिंग्स में जाकर प्राइवेसी डैशबोर्ड देखें और समझें कि कौन-सा ऐप कितना डेटा इस्तेमाल कर रहा है. साथ ही, समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट जरूर करें, क्योंकि इनमें सुरक्षा सुधार शामिल होते हैं.
आखिरकार, आपका फोन जासूस नहीं है, लेकिन अगर आप लापरवाह हैं तो यह आपके बारे में बहुत कुछ जान सकता है. समझदारी इसी में है कि तकनीक का इस्तेमाल करें लेकिन उसकी शर्तों को समझते हुए.
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<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>बिना इंसानों के कंपनी चला रहा है यह आदमी, एआई एजेंट्स करते हैं सारा काम, जानें कमाल की कहानी</title>
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<description><![CDATA[ एआई के कारण लोगों की नौकरी पर खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. दुनियाभर में लाखों लोगों की नौकरियां पहले ही जा चुकी हैं और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियां लगातार एआई पर फोकस करते हुए अपने कर्मचारियों को बाहर कर रही हैं. इस सब के एक बीच एक नई जानकारी सामने आई है, जिससे पता चलता है कि यह ट्रेंड किस हद तक जा सकता है. अमेरिका के फ्लोरिडा में एक आदमी बिना किसी इंसान के अपनी कंपनी चला रहा है और डेटा मैनेजमेंट से लेकर HR और सप्लाई चैन से लेकर कम्यूनिकेशन तक का सारा काम एआई एजेंट्स देख रहे हैं.&amp;nbsp;
15 एआई एजेंट्स करते हैं कंपनी का सारा काम
फ्लोरिडा के डिफेंस-टेक एंटरप्रेन्योर Aaron Sneed 15 एआई एजेंट्स की मदद से अपनी पूरी कंपनी चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि इससे उनकी लागत कम हुई है और काम भी जल्दी पूरा हो जाता है. बिजनेस इनसाइडर को दिए इंटरव्यू में Sneed ने कहा कि मैंने एक काउंसिल बनाई है. इसमें 15 एआई एजेंट्स हैं और हर एक को स्पेसिफिक टास्क दिया गया है. इन सबको मैनेज करने के लिए चीफ ऑफ स्टाफ एजेंट है, जो टास्क को प्रायोरटाइज करता है. इस काउंसिल की मीटिंग भी होती है, जहां डॉक्यूमेंट्स और प्रपोजल को रिव्यू किया जाता है ताकि उनमें से गलतियां हटाई जा सके.&amp;nbsp;
एआई एजेंट्स को दी गई है स्पेशल ट्रेनिंग
Sneed कई सालों से ऑटोनॉमस प्लेटफॉर्म्स पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वो चैटजीपीटी का बिजनेस प्लेटफॉर्म और एनवीडिया के हार्डवेयर यूज कर रहे हैं. उन्होंने एआई एजेंट्स को ऐसे ट्रेन किया है कि वो सिर्फ इंस्ट्रक्शन फॉलो नहीं करते, बल्कि आइडिया को चैलेंज करने के साथ प्रपोजल को एनलाइज कर फीडबैक भी देते हैं.
Sneed को अब भी नहीं एआई पर पूरा भरोसा
पूरी तरह एआई एजेंट्स पर निर्भर Sneed को अब भी इस टेक्नोलॉजी पर पूरा भरोसा नहीं है. उनका मानना है कि एआई पूरी तरह से इंसानों की जगह नहीं ले सकती. उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनका लीगल एजेंट डॉक्यूमेंट ड्राफ्ट और डेटा प्रोसेस कर सकता है, लेकिन उसके आधार पर जरूरी डिसीजन एक इंसानी वकील ही ले सकता है. भले ही एजेंट्स पूरी तरह ठीक हो, लेकिन यह ह्यूमन कॉन्टेक्स्ट और एक्सपीरियंस की बराबरी नहीं कर सकता.
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India AI Impact Summit 2026 की शुरुआत आज से, कई राष्ट्रपति और PM होंगे शामिल, यहां जानें रजिस्ट्रेशन का तरीका ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>India AI Impact Summit 2026 की शुरुआत आज से, कई राष्ट्रपति और PM होंगे शामिल, यहां जानें रजिस्ट्रेशन का तरीका</title>
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<description><![CDATA[ नई दिल्ली में होने वाली India AI Impact Summit 2026 की आज से शुरुआत हो रही है. इसमें कई देशों के प्रमुखों के अलावा टेक कंपनियों के सीईओ और कई दूसरे बड़े नाम शामिल होंगे. 16 से 20 फरवरी तक चलने वाली इस समिट में मेन प्रोग्राम के साथ लगभग 500 इवेंट होंगे और टेक कंपनियों, एआई स्टार्ट अप्स और रिसर्च लैब्स समेत 800 से ज्यादा एग्जिबिटर अपने एआई प्रोडक्ट्स और सॉल्यूशंस की एग्जिबिशन लगाएंगे.&amp;nbsp;
क्यों हो रही है यह समिट?
यह इस तरह की ग्लोबल समिट का चौथा एडिशन है. इसमें नेता और बड़ी एआई कंपनियों के सीईओ आदि मिलकर एआई सिस्टम के संभावित खतरों से निपटने के तरीकों पर विचार-विमर्श करते हैं. सबसे पहले यह समिट यूनाइटेड किंगडम में हुई थी. सियोल और पेरिस के बाद इस साल इसे भारत होस्ट कर रहा है.
कई देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति होंगे शामिल
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समिट में कम से कम छह देशों के प्रधानमंत्री और फ्रांस और ब्राजील समेत सात देशों के राष्ट्रपति भाग लेंगे. इनके अलावा 45 देशों के मिनिस्ट्रियल डेलीगेशन और यूनाइडेट नेशन्स समेत कई इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन के बड़े अधिकारी इस समिट में हिस्सा लेंगे. साथ ही गूगल के सीईओ सुंदर पिचई, एनवीडिया के फाउंडर Jensen Huang, डीपमाइंड के सीईओ Demis Hassabis, माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट Brad Smith और क्वालकॉम के सीईओ Cristiano Amon इस समिट में हिस्सा लेने दिल्ली आ रहे हैं. समिट की आधिकारिक शुरुआत 19 फरवरी को होगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे.
कैसे करें रजिस्टर?
अगर आप इस समिट में हिस्सा लेना चाहते हैं तो डेलीगेट के तौर पर फ्री में रजिस्टर कर सकते हैं. इसके लिए https://impact.indiaai.gov.in/registration पर जाएं और जरूरी डिटेल्स भरें. डिटेल्स भरने के बाद आपकी ईमेल आईडी पर एक ओटीपी आएगा. इसे सबमिट करें. रजिस्ट्रेशन अप्रूव होते ही आपके पास ईमेल आएगा, जिसमें QR कोड दिया होगा. इस कोड से दिल्ली के भारत मंडपम में एंट्री कर पाएंगे, जहां यह समिट आयोजित हो रही है. एंट्री के समय आपके पास फोटो वाला आईडी होना जरूरी है.
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:44 +0530</pubDate>
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<title>Airtel, Jio या Vi में कौन है असली नेटवर्क किंग? सिम लेने से पहले फोन की इस छुपी सेटिंग से जान लें पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ Airtel, Jio या Vi में कौन है असली नेटवर्क किंग? सिम लेने से पहले फोन की इस छुपी सेटिंग से जान लें पूरा सच ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:43 +0530</pubDate>
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<title>कैसा होगा फोल्डेबल आईफोन को टक्कर देने वाला सैमसंग का नया Wide Fold फोन? सब कुछ चल गया पता</title>
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<description><![CDATA[ इस साल ऐप्पल के पहले फोल्डेबल आईफोन का इंतजार खत्म हो जाएगा. ऐप्पल अभी तक मार्केट में मौजूद फोल्डेबल फोन से अलग फॉर्म फैक्टर वाला आईफोन लॉन्च करेगी, जो चौड़ा ज्यादा होगा. सैमसंग ने भी इसे टक्कर देने के लिए कमर कस ली है और कंपनी इस साल एक नया Galaxy Wide Fold फोन लॉन्च करेगी. अनफोल्ड होने पर इस फोन की चौड़ाई लंबाई से ज्यादा होगी और इसी वजह से इसे Wide नाम दिया गया है. अब इसके डिजाइन को लेकर नई जानकारी सामने आई है.
कैसा दिखेगा सैमसंग का Wide Fold?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Galaxy Wide Fold की कवर स्क्रीन के टॉप सेंटर में पंच होल कैमरा दिया जाएगा और यह बॉक्सी प्रोफाइल के साथ आएगा. यानी नॉन-फोल्डेबल फोन की तरह इसमें राउंडेड एज नहीं होंगे. कवर के साथ-साथ इसकी मेन स्क्रीन पर भी पंच होल कैमरा दिया जाएगा, जो टॉप सेंटर में होगा. अनफोल्ड होने पर यह लंबे से ज्यादा चौड़ा दिखेगा. इससे यह अनफोल्ड होने पर एक टैबलेट जैसा एक्सपीरियंस देगा. इसमें 7.6 इंच का फोल्डेबल OLED डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है, जो यूजर को मल्टीटास्किंग, प्रोडक्टिविटी और स्ट्रीमिंग आदि के लिए इनफ स्पेस देगा. स्ट्रीमिंग में इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यूजर को विजुअल्स के साथ-साथ टॉप और बॉटम पर हॉरिजॉन्ट्ल ब्लैक बार्स नहीं देखने पड़ेंगे.
कब हो सकता है लॉन्च?
ऑफिशियली सैमसंग की तरफ से अभी तक इस फोन को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है. लीक्स की मानें तो Galaxy Z Unpacked इवेंट में Galaxy Z Fold 8 और Galaxy Z Flip 8 फोन के साथ Wide Fold को भी लॉन्च किया जा सकता है. ये मात्र कयास हैं और इसकी लॉन्चिंग में देरी भी हो सकती है.
ऐप्पल करेगी आईफोन फोल्ड के साथ धमाका
सितंबर में ऐप्पल अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च कर धमाका करने को तैयार है. आईफोन फोल्ड नाम से आने वाले इस डिवाइस में 7.8 इंच का इनर और 5.5 इंच का आउटर डिस्प्ले दिया जा सकता है. इस आईफोन के रियर में डुअल कैमरा सेटअप और कवर और मेन डिस्प्ले पर एक-एक कैमरा दिया जा सकता है. भारत में आईफोन फोल्ड की शुरुआती कीमत 2.25 लाख रुपये के आसपास हो सकती है.
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>2050 में कैसी होगी दुनिया? जानिए AI कैसे बदल देगा दुनिया का नक्शा</title>
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<description><![CDATA[ AI in 2050: दुनिया जिस रफ्तार से बदल रही है, उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि साल 2050 तक इंसानी जिंदगी पूरी तरह नई शक्ल ले सकती है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ मोबाइल ऐप या चैटबॉट तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह शहरों की प्लानिंग, ट्रांसपोर्ट, हेल्थकेयर और यहां तक कि मौसम प्रबंधन में भी बड़ी भूमिका निभाने लगा है. आने वाले वर्षों में यही तकनीक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और ऑटोमैटिक बना सकती है.
पानी पर बसते शहर
जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते स्तर को देखते हुए वैज्ञानिक समुद्र में तैरते शहरों की कल्पना पर काम कर रहे हैं. 2050 तक दुनिया के कई तटीय शहरों पर पानी का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में AI आधारित स्मार्ट स्ट्रक्चर और सेल्फ-सस्टेनेबल फ्लोटिंग सिटी एक विकल्प बन सकते हैं. ये शहर सौर ऊर्जा, समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाली तकनीक और ऑटोमैटिक कचरा प्रबंधन सिस्टम से लैस हो सकते हैं. यहां रहने वाले लोगों की जरूरतों को AI सिस्टम खुद समझकर संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करेगा.
हवा में दौड़ती ट्रेनें और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट
भविष्य की यात्रा जमीन तक सीमित नहीं रहेगी. हाई-स्पीड मैग्नेटिक ट्रेनें, ड्राइवरलेस कारें और एयर टैक्सी जैसे कॉन्सेप्ट पहले ही टेस्टिंग चरण में हैं. 2050 तक AI से संचालित ट्रांसपोर्ट सिस्टम इतना एडवांस हो सकता है कि ट्रैफिक जाम अतीत की बात बन जाए. स्मार्ट सिग्नल, रियल-टाइम डेटा और ऑटोमैटिक रूट प्लानिंग से सफर तेज और सुरक्षित होगा. संभव है कि शहरों के बीच हवा में चलने वाली ट्रेनें आम बात बन जाएं.
काम और शिक्षा का बदलता चेहरा
AI के कारण नौकरी और पढ़ाई का तरीका भी पूरी तरह बदल सकता है. कई पारंपरिक नौकरियां खत्म होंगी लेकिन नई टेक्नोलॉजी आधारित भूमिकाएं सामने आएंगी. पर्सनलाइज्ड एजुकेशन सिस्टम बच्चों की क्षमता के अनुसार पढ़ाई का तरीका तय करेंगे. घर बैठे वर्चुअल क्लासरूम और रोबोटिक असिस्टेंट आम हो सकते हैं.
शानदार मौका या खतरनाक मोड़?
जहां एक ओर AI इंसान की जिंदगी आसान और सुविधाजनक बना सकता है, वहीं दूसरी ओर प्राइवेसी, रोजगार और कंट्रोल जैसे सवाल भी खड़े होंगे. अगर तकनीक पर संतुलित नियंत्रण नहीं रहा तो इसका गलत इस्तेमाल भी संभव है.
2050 का भविष्य डरावना होगा या शानदार, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इंसान AI का इस्तेमाल किस दिशा में करता है. एक बात तय है आने वाले सालों में दुनिया वैसी नहीं रहेगी जैसी आज है.
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:43 +0530</pubDate>
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<title>एआई के गॉडफादर की डराने वाली चेतावनी, कहा&#45; इंसान के कंट्रोल से बाहर हो रही यह टेक्नोलॉजी, जल्द कुछ करने की जरूरत</title>
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<description><![CDATA[ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर जिस बात का डर जताया जा रहा था, वह सच होते दिख रही है. एआई सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रही है और अब यह मुश्किल से मुश्किल काम को चुटकियों में पूरा कर देती है. पिछले कुछ महीनों पर नजर डालें तो एआई तेजी से एडवांस्ड होती जा रही है, जिसे देखते हुए एक्सपर्ट्स से चेतावनी देना शुरू कर दिया है. एआई के गॉडफादर कहे जाने वाले कनाडा के कंप्यूटर साइंटिस्ट योशुआ बेंगियो ने कहा है कि एआई इंसानी कंट्रोल से बाहर होना शुरू हो गई है.&amp;nbsp;
बेंगियों ने कही यह बात
एआई में तेजी से हो रहे एडवांसमेंट को देखते हुए बेंगियो समेत 100 से अधिक रिसर्चर ने कहा है कि एआई कंपनियों को सेफ्टी पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए. हाल ही में रिलीज हुई 2026 इंटरनेशनल एआई सेफ्टी रिपोर्ट में इन रिसर्चर ने कहा है कि पावरफुल एआई बनाते समय कंपनियों को अपने प्रॉफिट से ज्यादा सेफ्टी को आगे रखना चाहिए. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अब जनरल यूज वाले एआई मॉडल PhD-level के साइंटिस्ट के बराबर नॉलेज रखते हैं. इन्हें काम करने के लिए इंसानी इनपुट की बहुत कम जरूरत रह गई है. अभी दुनियाभर में हर हफ्ते 70 करोड़ लोग एडवांस्ड एआई टूल्स का यूज कर रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
एआई के साथ ही बढ़ रहे हैं रिस्क
एक्सपर्ट्स ने वार्निंग दी है कि एआई के साथ-साथ रिस्क भी बढ़ रहे हैं. अब साइबर क्राइम के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है और ऐसे लगभग 90 प्रतिशत मामलों में एआई का यूज किया जा रहा है. इसी तरह बायोटेक्नोलॉजी में कुछ सिस्टम ने इंसानों को पीछे छोड़ दिया है. इससे बीमारियों से बचाव में मदद मिलेगी, लेकिन इसका दुरुपयोग कर इससे बायोलॉजिक हथियार डेवलप किए जाने का खतरा भी बढ़ गया है.
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:42 +0530</pubDate>
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<title>T20 World Cup देखना है? BSNL, Jio, Airtel और Vi के इन सस्ते प्लान्स से मिलेगा पूरा मजा! जानिए सब कुछ</title>
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<description><![CDATA[ T20 World Cup देखना है? BSNL, Jio, Airtel और Vi के इन सस्ते प्लान्स से मिलेगा पूरा मजा! जानिए सब कुछ ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:42 +0530</pubDate>
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<title>फोल्डेबल के साथ फ्लिप आईफोन पर भी काम कर रही है ऐप्पल, कब होगा लॉन्च? बड़ी जानकारी आई सामने</title>
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<description><![CDATA[ अब तक नॉन-फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करती आ रही ऐप्पल ने फोल्डेबल सेगमेंट में तहलका मचाने की पूरी तैयारी कर ली है. इस साल सितंबर में कंपनी अपना पहला बुक-स्टाइल फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. कंपनी के साथ-साथ मार्केट एक्सपर्ट्स को भी उम्मीद है कि यह आईफोन सेगमेंट में तहलका मचा देगा. इस डिवाइस के साथ-साथ ऐप्पल एक क्लेमशैल स्टाइल के फ्लिप फोन पर भी काम कर रही है, जो Galaxy Z Flip 7 और Motorola Razr जैसा होगा.
2027 में हो सकता है लॉन्च
चीनी सोशल मीडिया वीबो पर एक टिपस्टर ने बताया कि ऐप्पल ने फ्लिप स्टाइल फोल्डेबल आईफोन को टेस्ट कर लिया है. हालांकि, अभी तक यह डिसाइड नहीं हुआ है कि कंपनी इसे मास प्रोडक्शन के लिए कब लेकर जाएगी. सैमसंग के Galaxy Z Flip 7 की बिक्री को देखते हुए यह माना जा रहा है कि ऐप्पल का फ्लिप फोन भी हिट हो सकता है. अभी यह प्रोजेक्ट शुरुआती स्टेज में है इसलिए कयास हैं कि इसे 2027 में बाजार में उतार दिया जाएगा. यह उन यूजर्स के लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है, जिन्हें पोर्टेबिलिटी की ज्यादा चिंता रहती है. इसके कॉम्पैक्ट साइज के कारण इसे पॉकेट में कैरी करना आसान हो जाएगा और लगातार हाथ में रखने की जरूरत नही रहेगी.&amp;nbsp;
2027 के लिए हैं ऐप्पल की खास तैयारी
2027 में आईफोन के सफर को 20 साल पूरे हो जाएंगे. इस मौके को सेलिब्रेट करने के लिए ऐप्पल ने खास तैयारी की है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी आईफोन 19 सीरीज को स्किप करते हुए 2027 में सीधा आईफोन 20 सीरीज लॉन्च करेगी. इसमें पहला फुल डिस्प्ले आईफोन लॉन्च किया जा सकता है, जिसमें न तो कोई कैमरा होल होगा और न ही किसी प्रकार के बैजल्स मिलेंगे. इसके साथ कंपनी फ्लिप फोन लॉन्च कर यूजर को एक और च्वॉइस दे सकती है.
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एकदम धांसू होगा Galaxy S26 Ultra, लीक हुए फीचर्स के अलावा मिल सकती हैं ये बड़ी अपग्रेड्स</title>
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<description><![CDATA[ Galaxy S26 Ultra Upgrade: सैमसंग के फ्लैगशिप डिवाइस Galaxy S26 Ultra की लॉन्चिंग में अब ज्यादा दिन बाकी नहीं है. डिजाइन लैंग्वेज से लेकर इसके हार्डवेयर स्पेसिफिकेशंस सामने आ गए हैं, जिससे यह अंदाजा लग गया है कि इस धांसू स्मार्टफोन में क्या-क्या मिलने वाला है. हालांकि, फिर भी कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनके बारे में रिपोर्ट्स और लीक्स में बात नहीं की गई है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि Galaxy S26 Ultra में लीक हुए फीचर्स के अलावा और क्या-क्या अपग्रेड्स मिलने वाली हैं.
इन अपग्रेड्स के साथ आएगा Galaxy S26 Ultra&amp;nbsp;
हाई स्क्रीन ब्राइटनेस- इस फोन में सैमसंग के M14 OLED पैनल का यूज किया जाएगा, जो कई सालों बाद डिस्प्ले टेक में बड़ी अपग्रेड होगी. यह नया और एफिशिएंट पैनल ज्यादा स्क्रीन ब्राइटनेस ऑफर करता है. OnePlus 15 में भी यही पैनल लगा है और यह फोन 3,500 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है.
इम्प्रूव्ड थर्मल मैनेजमेंट- Galaxy S26 Ultra में क्वालकॉम की सबसे फास्ट Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिप दी जाएगी. इससे जनरेट होने वाली हीट को रोकने के लिए अपकमिंग फोन में बेहतर थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम और बड़ा वैपर चैंबर दिया जाएगा.&amp;nbsp;
एंटी-रिफ्लेक्टिव लेयर को किया जाएगा बेहतर- सैमसंग S24 Ultra से ही अपने फ्लैगशिप फोन पर एंटी-रिफ्लेक्टिव स्क्रीन कोटिंग देते आ रही है. इस बार कयास है कि इसे और बेहतर किया जाएगा.&amp;nbsp;
डेडिकेटेड एआई प्रोसेसिंग यूनिट- अपकमिंग फोन में मिलने वाले एआई फीचर्स को हैंडल करने के लिए कंपनी एक स्पेशल एआई प्रोसेसिंग यूनिट दे सकती है, जो ऑन-डिवाइस एआई को प्रोसेस करेगी. इससे फोन की एफिशिएंसी भी बढ़ेगी और यूजर को लंबी बैटरी लाइफ मिलेगी.
इमेज प्रोसेसिंग भी होगी इम्प्रूव- सैमसंग के मौजूदा S25 Ultra में शानदार कैमरा सेटअप दिया गया है, लेकिन अपकमिंग फोन में इसे और बेहतर बनाया जाएगा. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि सैमसंग इसकी इमेज प्रोसेसिंग को बेहतर करेगी, जिससे डायनामिक रेंज, जूमिंग कैपेबिलिटीज और लो-लाइट कैमरा परफॉर्मेंस में सुधार आएगा.
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:41 +0530</pubDate>
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<title>9999 या 0007 जैसा VIP नंबर चाहिए? जानिए Jio, Airtel और Vi से मनचाहा फैंसी नंबर पाने का आसान तरीका!</title>
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<description><![CDATA[ 9999 या 0007 जैसा VIP नंबर चाहिए? जानिए Jio, Airtel और Vi से मनचाहा फैंसी नंबर पाने का आसान तरीका! ]]></description>
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<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:19:41 +0530</pubDate>
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<title>iOS 27 अपडेट के बाद एकदम नया हो जाएगा पुराना आईफोन, सिरी चैटबॉट समेत मिलेंगे ये धाकड़ फीचर्स</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल ने हाल ही में iOS 26.3 अपडेट को रोल आउट किया है और अब कंपनी iOS 26.4 पर काम कर रही है. लेकिन ऐप्पल यूजर्स को असली इंतजार iOS 27 अपडेट का है. अभी इसका पहला बीटा वर्जन रिलीज होने में भी चार महीने से अधिक का समय बाकी है, लेकिन इसमें मिलने वाले फीचर्स के कारण यूजर्स की एक्साइटमेंट बढ़ गई है. इसमें कई ऐसे फीचर्स मिलेंगे, जो आईफोन यूज करने का पूरा एक्सपीरियंस ही बदल देंगे. आइए इन एक्सपेक्टेड फीचर्स पर नजर डालते हैं.
सिरी चैटबॉट- iOS 27 अपडेट में सबसे बड़ा फीचर सिरी चैटबॉट का होगा. ऐप्पल अब सिरी को चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी की तरह चैटबॉट में बदलना चाह रही है. यह फीचर आने के बाद यूजर सिरी से किसी चैटबॉट की तरह बात कर सकेंगे. साथ ही इसमें ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस और कॉन्टेक्स्ट समझने जैसी कैपेबिलिटीज भी आ जाएंगी.
नए ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स- गूगल के साथ हुई पार्टनरशिप के बाद ऐप्पल अपने इंटेलीजेंस फीचर्स के लिए जेमिनी एआई मॉडल को यूज करेगी. iOS 27 से इसकी शुरुआत हो जाएगी. बताया जा रहा है कि अपकमिंग अपडेट में ऐप्पल कैलेंडर में ऐप्पल इंटेलीजेंस कैपेबिलिटी एड की जाएगी. इसके अलावा हेल्थ प्लस सब्सक्रिप्शन सर्विस में भी यूजर को पर्सनलाइज्ड और एआई पावर्ड हेल्थ और फिटनेस रिकमंडेशन मिलेगी.
सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर्स- iOS 27 अपडेट 5G कनेक्टिविटी को सपोर्ट करेगी. हालांकि, यह फीचर केवल आईफोन 18 प्रो मॉडल्स तक ही सीमित रह सकता है. इसके अलावा ऐप्पल मैप्स में नए सैटेलाइट फीचर्स जोड़े जाएंगे और यूजर मोबाइल कनेक्टिविटी न होने पर भी सैटेलाइट की मदद से मैसेज सेंड और रिसीव कर पाएंगे.
कब रिलीज होगी अपडेट?
माना जा रहा है कि ऐप्पल जून में होने वाले WWDC इवेंट के दौरान iOS 27 की बीटा टेस्टिंग शुरू कर सकती है और आगे सितंबर में इसे रोलआउट किया जा सकता है. सितंबर में लॉन्च होने वाले आईफोन 18 प्रो मॉडल्स इसी अपडेट के साथ आ सकते हैं.
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 11:07:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>नए प्रोडक्ट्स लाने के साथ इस साल आईफोन और आईपैड समेत इन डिवाइसेस को बंद भी करेगी ऐप्पल, जानिये कारण</title>
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<description><![CDATA[ एक तरफ ऐप्पल इस साल कई नए प्रोडक्ट्स लाने की तैयारी कर रही है तो दूसरी तरफ वह कुछ प्रोडक्ट्स को अलविदा भी कहने वाली है. ऐप्पल स्टोर्स में इन प्रोडक्ट्स की सप्लाई कम हो रही है और आने वाले दिनों में इनके अपडेटेड मॉडल भी एंट्री करने वाले हैं. ऐसे में इन पुराने मॉडल्स को बंद कर दिया जाएगा. आइए जानते हैं कि अगले कुछ दिनों में ऐप्पल के कौन-कौन से प्रोडक्ट बंद होने वाले हैं.
इन डिवाइसेस को बंद करेगी ऐप्पल
iPhone 16e- इसे पिछले साल फरवरी में लॉन्च किया गया था और अगले हफ्ते इसका सक्सेसर iPhone 17e लॉन्च हो रहा है. इसे देखते हुए ऐप्पल ने एक साल पुराने इस सस्ते आईफोन को बंद करने का फैसला किया है. ऐप्पल स्टोर्स के कर्मचारियों का कहना है कि इसकी सप्लाई लगभग बंद हो चुकी है.
M3 iPad Air- यह पिछले साल मार्च में लॉन्च हुआ था और अब इसका अपडेटेड वर्जन आने वाला है. कंपनी M4 iPad Air पर काम कर रही है और इसे अगले कुछ हफ्तों में बाजार में उतारा जा सकता है. iPhone 16e की तरह ऐप्पल स्टोर्स पर इसकी भी कमी हो गई है.
Apple Studio Display- इसे करीब 4 साल पहले लॉन्च किया गया था और अब लंबे इंतजार के बाद इसका नया मॉडल आ रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, ऐप्पल के ऑफलाइन और ऑनलाइन स्टोर्स पर इसकी सप्लाई कम हो गई है और अगले कुछ दिनों तक नई शिपमेंट की भी उम्मीद नहीं है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि Apple Studio Display का नया मॉडल जल्द ही लॉन्च होने वाला है.
M4 Pro और M4 Max चिपसेट वाली MacBook Pro- अभी मार्केट में MacBook Pro के तीन-तीन अलग चिप वाले वर्जन मौजूद हैं. आप MacBook Pro को M5, M4 Pro और M4 Max के साथ खरीद सकते हैं. अब कहा जा रहा है कि M4 मॉडल्स को M5 Pro और M5 Max के साथ रिप्लेस किया जाएगा.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 11:06:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>मैकबुक से लेकर नए आईफोन तक, किफायती डिवाइसेस को भी धमाकेदार बना रही ऐप्पल, जल्द होंगे लॉन्च</title>
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<description><![CDATA[ 2026 के लिए ऐप्पल ने दमदार तैयारी की है और इस साल कंपनी की तरफ से 20 नए प्रोडक्ट्स देखने को मिलेंगे. इनमें सस्ते से लेकर महंगे प्रोडक्ट्स तक शामिल हैं. ऐप्पल के किफायती आईफोन, मैकबुक और आईपैड मॉडल अगले कुछ दिनों में लॉन्च होने वाले हैं. कम कीमत के बावजूद ऐप्पल इनमें दमदार फीचर्स देने वाली है. आइए एक नजर डालते हैं कि कंपनी के सस्ते मॉडल्स में क्या-क्या फीचर्स मिलने वाले हैं.
iPhone 17e- इसे 19 फरवरी को लॉन्च किया जा सकता है. किफायती कीमत वाला यह फोन कई शानदार अपग्रेड के साथ लॉन्च होगा. इसके लेटेस्ट फीचर्स की बात करें तो इसमें आईफोन 17 वाली A19 चिप, MagSafe सपोर्ट, डायनामिक आईलैंड के साथ मॉडर्न डिजाइन, कंपनी का C1X मॉडम और N1 वायरलेस चिप के साथ आईफोन 17 वाला सेंटर स्टेज फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है. ऐसे में बजट सेगमेंट में यह शानदार फोन हो सकता है.&amp;nbsp;
A18 चिपसेट वाला iPad&amp;nbsp;
ऐप्पल अपने एंट्री-लेवल आईपैड को भी अपडेट करने वाली है. इसकी सबसे बड़ी अपग्रेड प्रोसेसर के तौर पर होगी और अब इसमें A18 चिपसेट दिया जाएगा. इससे यह न सिर्फ करंट जनरेशन मॉडल से फास्ट होगा बल्कि अधिक रैम के साथ भी आएगा. अपग्रेडेड मॉडल में ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर भी होंगे. इसके साथ ऐप्पल के सबसे सस्ते आईपैड पर भी ऐप्पल इंटेलीजेंस की एंट्री हो जाएगी.
नई मैकबुक
अभी कंपनी के सबसे किफायती लैपटॉप की बात करें तो यह मैकबुक एयर है, लेकिन कंपनी एक और सस्ती मैकबुक लाने वाली है. इसे केवल मैकबुक नाम दिया जाएगा और इसकी कीमत 60,000-65,000 रुपये के बीच रह सकती है. बेसिक कंप्यूटिंग टास्क के लिए आने वाली इस मैकबुक में 12.9 इंच का डिस्प्ले, A18 Pro चिपसेट के साथ 8GB रैम दी जा सकती है. ऐप्पल इसे ब्लू, पिंक, येलो और सिल्वर आदि कलर ऑप्शन में लॉन्च करेगी.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 11:06:59 +0530</pubDate>
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<title>Microsoft Windows और Office में पाई गईं कई खामियां, एक क्लिक से हैक हो सकता है आपका सिस्टम, ऐसे रहें सेफ</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप माइक्रोसॉफ्ट के Windows और Office सॉफ्टवेयर को यूज करते हैं तो आपको अलर्ट रहने की जरूरत है. कंपनी ने कहा है कि इन दोनों में कई ऐसी खामियां पाई गई हैं, जिनका हैकर एक्टिवली यूज कर रहे हैं. इन खामियों के कारण हैकर कोई फाइल ओपन करने या एक लिंक पर क्लिक करने जैसे आसान तरीकों से आपको कंप्यूटर की एक्सेस पा सकते हैं. इनमें से कुछ खामियां ऐसी भी हैं, जिनके सिक्योरिटी पैच जारी होने से पहले हैकर्स ने इनका खूब फायदा उठाया है.
इस कारण बढ़ गया खतरा
माइक्रोसॉफ्ट ने इन खामियों को जीरो-डे वल्नरैबिलिटीज के तौर पर क्लासीफाई किया है. इसका मतलब है कि माइक्रोसॉफ्ट जब तक इन्हें ठीक कर पाती, हैकर्स को उससे पहले ही इनका पता चल गया था. इनमें से दो खामियां ऐसी थीं, जिनसे वन-क्लिक अटैक किया जा सकता था. माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि यूजर से किसी मलेशियस लिंक पर क्लिक और ऑफिस सॉफ्टवेयर में कोई हार्मफुल फाइल ओपन करवाकर ये अटैक किए जा सकते थे. यूजर के सिर्फ क्लिक या फाइल ओपन करते ही अटैकर मालवेयर इंस्टॉल कर सकते थे. कंपनी ने कहा कि इन खामियों का फायदा उठाने का तरीका पब्लिक कर दिया गया था, जिससे यह खतरा बढ़ गया है.
अब यूजर के पास क्या ऑप्शन?
किसी सॉफ्टवेयर या वर्जन में इस तरह की खामियां आना कोई नई बात नहीं हैं. कंपनियां और सरकारी एजेंसियां समय-समय पर इन खामियों की जानकारी देती रहती है. माइक्रोसॉफ्ट ने बताया है कि उसने इन खामियों को फिक्स करने के लिए सिक्योरिटी पैच जारी कर दिए हैं. यूजर्स को जल्द से जल्द इन्हें इंस्टॉल कर लेना चाहिए. साइबर सिक्योरिटी के नजरिए से देखें को अपने डिवाइस और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड रखना बहुत जरूरी है. इससे न सिर्फ यूजर को लेटेस्ट फीचर्स मिलते हैं बल्कि इस तरह के बग भी दूर हो जाते हैं और हैकिंग आदि का खतरा नहीं रहता.
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<title>Valentine’s Day पर बढ़ा एआई रोमांस स्कैम का खतरा, ऐसे करें पहचान, जानें सेफ रहने के तरीके</title>
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<description><![CDATA[ Valentine&amp;rsquo;s Day नजदीक आ गया है. इस मौके पर अगर आप ऑनलाइन डेटिंग का प्लान बना रहे हैं तो आपको रोमांस स्कैम से सावधान रहना होगा. साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्यार-मोहब्बत के इस मौके पर स्कैमर्स एआई की मदद से लेकर रोमांस और रिलेशनशिप के नाम पर लोगों को स्कैम में फंसा रहे हैं. एआई के कारण न सिर्फ इनकी संख्या बढ़ी है बल्कि लोगों को असली-नकली का अंतर समझने में भी बहुत मुश्किल हो रही है.&amp;nbsp;
रोमांस स्कैम में ऐसे हो रहा एआई का यूज
एआई की मदद लेकर स्कैमर्स अब टारगेट की टोन और उसके इंट्रेस्ट की हिसाब से मैसेज भेजते हैं. कई ऐसे टेक्स्ट-जनरेशन टूल्स मौजूद हैं, जो आपकी लैंग्वेज और इमोशन की हूबहू कॉपी कर सकते हैं, जिससे चैटिंग एकदम नैचुरल और रिस्पॉन्सिव लगती है. वॉइस क्लोनिंग भी एक बड़ी परेशानी खड़ी कर रही है. इसमें एक छोटे ऑडियो सैंपल से किसी भी व्यक्ति की आवाज को रिक्रिएट किया जा सकता है और फिर इसे वॉइस नोट भेजने या कॉलिंग के लिए यूज किया जा सकता है. इसी तरह डीपफेक वीडियो भी बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं.
कैसे करें रोमांस स्कैम की पहचान?
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि रोमांस स्कैम एक जैसा ही पैटर्न फॉलो करते हैं. इसकी शुरुआत फ्रेंडली मैसेज या डेटिंग ऐप्स के जरिए होती है. आमतौर पर इसमें सामने वाला व्यक्ति जॉब के लिए दूसरे शहर में रहते हुए बताता है. इनके प्रोफाइल एकदम परफेक्ट लगते हैं तो इमोशनल मैसेज के साथ दोस्ती की शुरुआत बहुत जल्द होती है. सामने वाले से जब मिलने को कहा जाए तो वो इसे टालते जाते हैं और एक मोड़ पर जाकर यह बातचीत पैसे और इन्वेस्टमेंट आदि पर जाकर रुक जाती है.
ऐसे स्कैम से कैसे बचें?

अगर कोई व्यक्ति दोस्ती बढ़ाने में जल्दबाजी दिखा रहा है तो सतर्क रहें और उसकी इमोशनल बातों में न आएं.
सामने वाले व्यक्ति से मिलकर आइडेंटिटी वेरिफाई करें.
अगर कोई आपसे वीडियो कॉल पर मिलने की बात करें तो उसे कॉल के दौरान अपना सिर पूरा घूमाने या चेहरे के सामने हाथ हिलाने को कहें. अगर डीपफेक वीडियो है तो इन तरीकों से पता चल जाएगा.
किसी भी ऐसे व्यक्ति को पैसे न भेजें, जिनसे आप पर्सनली मिले न हों.

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<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 11:06:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लेकर खुशखबरी! नहीं बढ़ेगा जेब पर बोझ, जानें कितनी हो सकती है कीमत</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ समय से मेमोरी चिप्स और दूसरे कंपोनेंट की कीमतें बढ़ने के कारण मोबाइल और दूसरे डिवाइस महंगे हो रहे हैं, लेकिन ऐप्पल इस मामले में अपने ग्राहकों को राहत दे सकती है. कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी के अपकमिंग आईफोन 18 प्रो और 18 प्रो मैक्स की कीमतें नहीं बढ़ेंगी और इन्हें मौजूदा आईफोन 17 प्रो मॉडल्स के दामों पर ही लॉन्च किया जा सकता है. भारत में आईफोन 17 प्रो और 17 प्रो मैक्स की शुरुआती कीमतें क्रमश: 1,34,900 रुपये और 1,49,900 रुपये से शुरू होती है. ऐसे मे उम्मीद की जा रही है कि 18 प्रो मॉडल्स भी इसी कीमत के आसपास लॉन्च हो सकते हैं.
कीमत कम रखने के लिए क्या कर रही है ऐप्पल?
ऐप्पल के लिए नए मॉडल्स कीमतों में बदलाव न करना आसान नहीं रहने वाला है. रैम और दूसरे कंपोनेंट की महंगी कीमत को मैनेज करने के लिए ऐप्पल सैमसंग समेत अपने सप्लायर्स के साथ नेगोशिएशन में लगी हुई है ताकि उसे बेहतर मेमोरी चिप डील मिल सके. सप्लाई लेवल पर ही कंपोनेंट की लागत कम होने से कंपनी पर कम दबाव पड़ेगा. इसके अलावा ऐप्पल डिस्प्ले और कैमरा जैसे कंपोनेंट के लेवप पर भी लागत कम करने की कोशिश कर रही है. दरअसल, ऐप्पल हर हाल में कीमतों में इजाफा टालना चाहती है. ऐसा करने से वह बाकी कंपीटिटर के मुकाबले सेल के मामले में बेहतर स्थिति में होगी.
कब लॉन्च होंगे 18 प्रो मॉडल्स?
हर बार की तरह ऐप्पल इस साल भी सितंबर में नए आईफोन 18 प्रो मॉडल्स को लॉन्च करेगी. इस बार प्रो मॉडल्स के साथ कंपनी का पहला फोल्डेबल आईफोन भी लॉन्च होने की पूरी उम्मीद है. कई रिपोर्ट्स में सितंबर में आईफोन एयर 2 की लॉन्चिंग की भी बात कही जा रही है. 18 प्रो मॉडल्स की बात करें तो इनमें नया फ्रंट डिजाइन, अपग्रेडेड चिपसेट और कैमरा सेटअप में भी बड़ी अपडेट मिलने की उम्मीद है. 18 प्रो मैक्स में कंपनी पहली बार वेरिएबल अपर्चर वाला कैमरा और अपनी अब तक की सबसे बड़ी बैटरी दे सकती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>रूस में नहीं चला सकेंगे WhatsApp, सरकार ने लगा दी पाबंदी, करोड़ों यूजर्स पर होगा असर</title>
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<description><![CDATA[ रूस और अमेरिकी कंपनियों के बीच तनातनी लगातार बढ़ती जा रही है. ताजा मामले में WhatsApp ने कहा है कि रूस ने उसकी सर्विस पर कंप्लीट बैन लगाने की कोशिश की है. कंपनी के प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि करते हुए हम यूजर्स को कनेक्टेड रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे. बता दें कि WhatsApp की कुछ सर्विसेस रूस में पहले से ही बैन है और अब ताजा रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इसे पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है. इससे पहले खबर आई थी कि रूस के कम्यूनिकेशन वॉचडॉग Roskomnadzor ने WhatsApp को ऑलनाइन डायरेक्टरी से हटा दिया है. यहां करीब 10 लाख यूजर्स व्हाट्सऐप को यूज कर रहे हैं.&amp;nbsp;
रूस क्यों कर रहा है सख्ती?
यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ही रूस अमेरिकी कंपनियों के खिलाफ सख्ती बरत रहा है. इसके अलावा यहां की सरकार चाहती है कि उसके अधिक से अधिक नागरिक सरकारी MAX नाम की ऐप यूज करें. इसके आलोचकों का कहना है कि सरकार इस ऐप के जरिए नागरिकों को ट्रैक करना चाहती है.
रूस में पहले से ही ब्लॉक हैं WhatsApp के ये फीचर्स
रूस ने पिछले साल WhatsApp और Telegram की कॉलिंग पर बैन लगा दिया था. रूस का कहना है कि ये दोनों ही प्लेटफॉर्म्स फ्रॉड और आतंकवाद के मामलों में कानूनी एजेंसियों के साथ इंफोर्मेशन शेयर नहीं कर रहे हैं. इसी तरह रूस ने दिसंबर में ऐप्पल की फेसटाइम और स्नैपचैट को भी बैन कर दिया था. आदेश में कहा गया है कि इन ऐप्स को फ्रॉड करने और आतंकी गतिविधियों को प्लान करने और अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.
बैन हटाने को लेकर क्या कह रही है सरकार?
रूसी सरकार का कहना है कि अगर मेटा उसके नियमों का पालन करती है तो बैन हटाने पर विचार हो सकता है. क्रेमलिन के प्रवक्ता से जब पूछा गया कि क्या WhatsApp से बैन हटाया जाएगा तो उन्होंने कहा कि यह कानून मानने का सवाल है. अगर मेटा कानूनों का पालन और रूसी अधिकारियों के साथ बातचीत शुरू करती है तो कोई समझौता हो सकता है. वहीं अगर मेटा रूस के कानूनों को मानने के लिए तैयार नहीं होती तो WhatsApp से बैन हटने के कोई चांस नहीं हैं.
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एंड्रॉयड पर बैकग्राउंड ऐप्स बंद करने के हैं कई नुकसान, फोन पर बढ़ेगा लोड, बैटरी की खपत भी होगी ज्यादा ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एंड्रॉयड पर बैकग्राउंड ऐप्स बंद करने के हैं कई नुकसान, फोन पर बढ़ेगा लोड, बैटरी की खपत भी होगी ज्यादा</title>
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<description><![CDATA[ एंड्रॉयड स्मार्टफोन में आप किसी ऐप को पूरी तरह क्लोज किए बिना भी दूसरी ऐप पर स्विच कर सकते हैं. इस तरह पहली ऐप बैकग्राउंड में चली जाती है और जब आप दोबारा उस पर स्विच करते हैं तो सब कुछ वहीं मिल जाता है, जहां आपने छोड़ा था. लेकिन कुछ यूजर्स की आदत होती है कि वो बैकग्राउंड ऐप्स को पूरी तरह बंद कर देते हैं और केवल एक ही ऐप को एक्टिव रखते हैं. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो बता दें कि ऐसा करने से फोन पर लोड बढ़ता है और इसका कोई फायदा भी नहीं होता.&amp;nbsp;
क्यों बंद नहीं करनी चाहिए बैकग्राउंड ऐप्स?
बैकग्राउंड ऐप्स वो होती हैं, जो स्क्रीन पर विजिबल न होने के बाद भी एक्टिव रहती हैं और बैकग्राउंड में ही कंटेट को रिफ्रेश करती रहती हैं. जब आप इन्हें फोर्स-क्लोज करते हैं तो अगली बार ऐप खोलने के लिए फोन को ज्यादा काम करना पड़ेगा और ऐप बिल्कुल शुरुआत से ओपन होगी. इससे ऐप को डेटा फैच करने में कुछ समय भी लग सकता है और आपकी पुरानी प्रोग्रेस भी उड़ जाएगी. इससे ज्यादा बैटरी की भी खपत होती है और रैम समेत फोन के दूसरे रिसोर्सेस पर ज्यादा असर पड़ता है.
एंड्रॉयड कर देगा आपकी चिंता दूर&amp;nbsp;
पुराने फोन्स में बैकग्राउंड ऐप्स बंद करना एक समझदारी भरा कदम माना जाता था, लेकिन अब टेक्नोलॉजी एडवांस हो गई है और एंड्रॉयड सिस्टम ये सारी चीजें हैंडल कर लेता है. आजकल एंड्रॉयड में एआई-पावर्ड एडेप्टिव बैटरी का फीचर मिलता है, जो आपकी आपकी फोन करने की आदतों को लगातार सीखता रहता है. यह देख लेता है कि आप किन ऐप्स को ज्यादा यूज करते हैं और फिर उन्हीं को प्रायोरिटी देता है. यह बैकग्राउंड एक्टिविटी को मैनेज करते हुए दूसरी ऐप्स को डीप स्लीप मोड में डाल देता है, जिससे ये बैटरी की खपत नहीं कर पातीं.
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17e vs Google Pixel 10a: दोनों अपकमिंग फोन में से कौन&#45;सा होगा ज्यादा दमदार, यहां जानें सारी डिटेल्स</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17e vs Google Pixel 10a: अगले कुछ दिनों में ऐप्पल और गूगल की तरफ से नए मिड-रेंज फोन देखने को मिलेंगे. 18 फरवरी को गूगल के Pixel 10a से पर्दा उठ जाएगा और ऐसी उम्मीद है कि 19 फरवरी को ऐप्पल अपना नया iPhone 17e लॉन्च कर देगी. दोनों ही कंपनियां कुछ समय पहले ही अपने फ्लैगशिप मॉडल लाई थी और अब इनके किफायती वेरिएंट का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है. आज हम इन दोनों अपकमिंग फोन का कंपेरिजन लेकर आए हैं, जिससे आपको पता चल पाएगा कि किसमें ज्यादा दम रहने वाला है.
डिस्प्ले और डिजाइन
iPhone 17e में 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 60Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट के साथ आएगा. इसमें डायनामिक आईलैंड मिलने की उम्मीद है और कंपनी इसे स्लिम प्रोफाइल के साथ उतार सकती है. इसके ब्लैक एंड व्हाइट कलर में आने की उम्मीद है. Pixel 10a की बात करें तो इसमें 120Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.3 इंच का AMOLED डिस्प्ले मिल सकता है. इसे ब्लू, ग्रीन, रेड और ब्लैक कलर ऑप्शन में उतारा जा सकता है.
प्रोसेसर&amp;nbsp;
iPhone 17e को बड़ा अपग्रेड देते हुए ऐप्पल आईफोन 17 वाले A19 चिपसेट से लैस करेगी. यह शानदार परफॉर्मेंस और एफिशिएंसी देगा. दूसरी तरफ Pixel 10a में Tensor G5 प्रोसेसर मिलने की उम्मीद है, जो 8GB रैम के साथ पेयर किया जाएगा.
कैमरा और बैटरी
आईफोन 17 की तरह 17e में भी 18MP का अपग्रेडेड सेल्फी कैमरा और रियर में 48MP के सिंगल कैमरा मिलेगा. ऐप्पल इसमें MagSafe सपोर्ट भी दे सकती है. यह बैक में मैग्नेट और मैग्नेटिक वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा और इसमें 25W की चार्जिंग स्पीड मिलेगी. Pixel 10a के रियर में 48MP+13MP का डुअल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 12MP का लेंस दिया जा सकता है. इस फोन के 5,100mAh की बैटरी के साथ आने की उम्मीद है.
कीमत
कीमत के मामले में Pixel 10a बाजी मार सकता है. कयास हैं कि इसे लगभग 49,999 के प्राइस पर लॉन्च किया जा सकता है. वहीं iPhone 17e की बात करें तो इसकी शुरुआती कीमत लगभग 59,900 रुपये हो सकती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>आईफोन से एंड्रॉयड पर डेटा शेयरिंग हुई आसान, ऐप्पल ने रोल आउट की iOS 26.3 अपडेट</title>
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<description><![CDATA[ Apple ने अपने यूजर्स के लिए iOS 26.3 अपडेट रोल आउट कर दी है. आईफोन के अलावा आईपैड, मैकबुक, वॉच, टीवी और विजन हेडसेट के लिए नई अपडेट रोल आउट हुई है. कंपनी ने इसमें बड़े फीचर्स देने की बजाय मुख्य तौर पर बग फिक्स करने और ओवरऑल सिस्टम स्टेबिलिटी को सुधारने पर जोर दिया गया है. हालांकि, इसमें एक नई प्रोसेस जोड़ी गई है, जो आईफोन से एंड्रॉयड और एंड्रॉयड से आईफोन स्विच करना आसान कर देगी.&amp;nbsp;
iOS 26.3 अपडेट: डेटा शेयरिंग हो गई एकदम आसान
ऐप्पल ने नई अपडेट में एक टूल जोड़ा है, जिससे क्रॉस-प्लेटफॉर्म शेयरिंग आसान हो जाएगा. इसकी मदद से यूजर्स अपने आईफोन को एंड्रॉयड फोन के पास रखकर ऐप्स, फोटोज, मैसेज और फोन नंबर आदि शेयर कर सकेंगे. बता दें कि हाल में गूगल ने भी ऐलान किया था कि ऐप्पल का एयरड्रॉप फीचर अब सभी एंड्रॉयड डिवाइसेस पर काम करेगा.&amp;nbsp;
अगली iOS 26.3 अपडेट पर टिकी हैं सबकी नजरें
ऐप्पल की iOS 26.4 अपडेट पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं. iOS 26.3 में कंपनी ने जहां बग फिक्स पर सिस्टम स्टेबिलिटी पर फोकस किया है, वहीं अगले अपडेट में कई बड़े फीचर मिलने की उम्मीद है. इसका सबसे खास फीचर एआई पावर्ड सिरी रहने वाली है, जो गूगल के जेमिनी मॉडल का यूज करेगी. इस अपडेट में सिरी के अंडरलाइंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के साथ-साथ कई यूजर-फेसिंग फीचर्स भी जोड़े जाएंगे. इनकी मदद से सिरी यूजर डेटा को बेहतर तरीके से समझ पाएगी और इन-ऐप और क्रॉस-ऐप एक्शन से भी लैस होगी.&amp;nbsp;
iOS 26.3 नए सिक्योरिटी फीचर की भी उम्मीद
iOS 26.4 में एआई पावर्ड सिरी, नई इमोजी और फ्रीफॉर्म फोल्डर के अलाव एक नया सिक्योरिटी फीचर भी दिया जा सकता है. इस फीचर में आईफोन यूजर्स को एक नया वैलिडेशन सिस्टम मिलेगा, जो ऐप्पल आईडी और आईक्लाउड की एक्सेस देने से पहले डिवाइस की इंटैग्रिटी वैलिडेट करेगा. अगर इस सिस्टम को लगता है कि फोन को जेलब्रेक आदि किया गया है तो यह उसे ऐप्पल की ऑनलाइन सर्विस की एक्सेस नहीं देगा.
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Google Pixel 9a पर बंपर छूट, नए मॉडल की लॉन्चिंग से पहले धड़ाम हो गई कीमत, यहां देखें डील ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:41 +0530</pubDate>
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<title>Google Pixel 9a पर बंपर छूट, नए मॉडल की लॉन्चिंग से पहले धड़ाम हो गई कीमत, यहां देखें डील</title>
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<description><![CDATA[ अगले हफ्ते गूगल अपना नया मिड-रेंज स्मार्टफोन Pixel 10a लॉन्च करेगी. उससे पहले कंपनी ने मौजूदा मॉडल Pixel 9a की कीमतों में भारी कमी कर दी है. ऐसे में अगर आप सस्ती कीमत में Pixel 9a खरीदना चाहते हैं तो इससे शानदार मौका फिर नहीं आएगा. इस फोन में शानदार लुक के साथ दमदार कैमरा सेटअप और एकदम क्लीन एंड्रॉयड एक्सपीरियंस मिलता है. आइए जानते हैं कि इस फोन में क्या-क्या फीचर्स हैं और इसकी कीमत कितनी कम हुई है.&amp;nbsp;
ये हैं Pixel 9a के स्पेसिफिकेशंस
Pixel 9a को पिछले साल 6.3 इंच के pOLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया गया था, जो 120Hz की रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है. कई बिल्ट-इन एआई फीचर्स के साथ आने वाले इस फोन में गूगल का Tensor G4 चिपसेट लगा हुआ है. कैमरा की बात करें तो इसके रियर में 48MP का प्राइमरी और 13MP का अल्ट्रा-वाइड सेंसर लगा हुआ है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 13MP का फ्रंट कैमरा है. इसमें 5000mAh का बैटरी पैक मिलता है.
कितनी कम हुई कीमत?
भारत में Pixel 9a के 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट को 49,999 रुपये और 256GB स्टोरेज वर्जन को 54,999 रुपये में लॉन्च किया गया था, लेकिन अब इन दोनों ही वेरिएंट की कीमतों में 10,000-10,000 रुपये की कटौती हुई है, जिसके बाद इन्हें क्रमश: 39,999 और 44,999 रुपये में खरीदा जा सकता है. नई कीमतें अमेजन, फ्लिपकार्ट और क्रोमा समेत लगभग सभी बड़े रिटेल प्लेटफॉर्म्स पर लाइव हो गई हैं.
आईफोन 17 पर भी मिल रही है धांसू डील
क्रोमा पर 6 फरवरी से शुरू हुई सेल में 82,900 रुपये की असली कीमत वाले आईफोन 17 को कुछ शर्तों के साथ 50,000 रुपये से भी कम में खरीदा जा सकता है. इस फोन की खरीद पर ग्राहक एक्सचेंज ऑफर के तहत पुराने फोन पर 23,500 रुपये तक की छूट, 8,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 2,000 रुपये का कैशबैक पा सकते हैं. अगर सारे ऑफर्स को मिला लिया जाए तो आईफोन 17 की कीमत 50,000 रुपये से भी कम रह जाती है.
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अब भी पासवर्ड यूज कर रहे हैं? पुराना हो गया यह तरीका, एकदम सेफ रहना है तो यूज करें पासकी ]]></description>
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:41 +0530</pubDate>
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<title>अब भी पासवर्ड यूज कर रहे हैं? पुराना हो गया यह तरीका, एकदम सेफ रहना है तो यूज करें पासकी</title>
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<description><![CDATA[ साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों के बीच साइबर सिक्योरिटी बहुत जरूरी हो जाती है. इसीलिए यूजर्स को लगातार यूनिक पासवर्ड यूज करने और समय-समय पर पासवर्ड बदलने की सलाह दी जाती है. अगर डेटा लीक के लगातार बढ़ते खतरों के बीच आप आज भी पासवर्ड यूज कर रहे हैं तो समय से पीछे चल रहे हैं. हैकिंग और डेटा लीक को बचाने के लिए पासवर्ड काफी नहीं है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्यों आपको पासवर्ड की जगह पासकी (Passkey) यूज करनी चाहिए.&amp;nbsp;
कंपनियां दे रही हैं पासकी पर जोर
फास्ट आइडेंटिटी ऑनलाइन एलायंस (FIDO) ने कुछ साल पहले पासकी को डेवलप किया था और अब कई कंपनियां इसे इंप्लीमेंट भी करने लगी है. माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले साल अगस्त में अपनी ऑथेंटिकेटर ऐप से पासवर्ड सपोर्ट हटाकर उसमें पासकी सपोर्ट जोड़ा है. इसी तरह अमेजन भी पासकी यूज करने पर जोर दे रही है.
क्या होती है पासकी?
जब एक पब्लिक की और प्राइवेट की कंबाइन होती हैं तो वो मिलकर एक पासकी क्रिएट करती हैं, जिससे आपका अकाउंट अनलॉक होता है. इसके काम करने का तरीका देखें तो वेबसाइट और ऐप्स पर आपकी यूनिक पब्लिक की स्टोर होती है, जबकि आपकी प्राइवेट की डिवाइस पर आपके पासवर्ड मैनेजर या अगर आप ऐप्पल यूजर हैं तो आईक्लाउड कीचैन में स्टोर होती है. इसके बाद जब आपका डिवाइस आपकी आइडेंटिटी ऑथेंटिकेट करेगा, जब आपकी प्राइवेट और पब्लिक की मिलकर अकाउंट को अनलॉक करती है.
क्या हैं पासकी के फायदे?
पासकी के एक साथ कई फायदे हैं. पासवर्ड की तरह पासकी का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता और न ही इस शेयर किया जा सकता है. इसके अलावा चूंकि हर साइट के लिए यूनिक पासकी होती है तो यह फिशिंग अटैम्प्ट को भी रोक सकती है. सबसे बड़ी बात यह है कि आज जब कोई डेटा सेफ नहीं है, तब पासकी को कंपनी के सर्वर या डेटाबेस में सेंध लगाकर चुराया नहीं जा सकता. इससे यह पासवर्ड के मुकाबले आपके लिए ज्यादा सेफ है.
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या 90 दिनों बाद बेकार हो जाएंगे ईमेल और मैसेजेज? जानें एक्स के प्रोडक्ट हेड ने क्यों दी ऐसी चेतावनी</title>
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<description><![CDATA[ स्पैम कॉल से सब लोग दुखी हैं. आप ड्राइविंग कर रहे हैं या किसी दूसरे जरूरी काम में लगे हैं और अचानक से फोन बजता है. आपका पूरा ध्यान फोन पर चला जाता है. जब आप कॉल उठाते हैं तो या कोई सामने से क्रेडिट कार्ड बेचने की कोशिश कर रहा होता है या कोई ऑटमैटिड वॉइस सुनाई देती है. अब एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के प्रोडक्ट हेड निकिता बियर ने नई वॉर्निंग दी है. बियर का कहना है कि अब स्पैम की समस्या तेजी से बढ़ेगी और इस कारण अगले 90 दिनों में ईमेल, कॉल्स और मैसेज आदि सब बेकार हो जाएंगे.
क्या 90 दिनों में काम के नहीं बचेंगे मैसेज और ईमेल्स?
एक्स पर एक पोस्ट में बियर ने लिखा कि 90 दिनों से भी कम समय में ईमेल, मैसेज और कॉल्स आदि सभी कम्यूनिकेशन चैनलों पर ऑटोमैटेड स्पैम की बाढ़ आने वाली है. इससे ये यूज करने लायक नहीं रहेंगे. इनमें ऐसे चैनल भी शामिल हैं, जिन्हें अब तक स्पैम और ऑटोमेशन से सेफ समझा जाता था. बियर का मानना है कि न सिर्फ यह नई समस्या आने वाली है बल्कि हमारे पास इससे बचाव का कोई तरीका भी नहीं होगा.

Prediction: In less than 90 days, all channels that we thought were safe from spam &amp;amp; automation will be so flooded that they will no longer be usable in any functional sense: iMessage, phone calls, Gmail. And we will have no way to stop it.
&amp;mdash; Nikita Bier (@nikitabier) February 11, 2026



ऐसा क्यों होगा?
बियर की यह भविष्यवाणी सुनकर आपके मन में यह सवाल आ सकता है कि ऐसा क्यों होगा? बियर ने इसी वजह भी बताई है. अपनी पोस्ट पर आए एक कमेंट का रिप्लाई करते हुए बियर ने कहा कि OpenClaw के कारण ऐसा हो सकता है. OpenClaw एक ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म है, जिसकी मदद से आप ऑन-डिवाइस एआई एजेंट बना सकते हैं, जो आपकी कमांड पर सारे काम कर सकता है. बियर ने कहा कि अभी तक एआई एजेंट्स बनाने के लिए टेक्नीकल नॉलेज की जरूरत पड़ती थी, लेकिन अब कोई भी एआई एजेंट्स बना सकता है. बियर की पोस्ट के रिप्लाई में कई लोगों ने लिखा है कि पिछले कुछ समय से उनके पास जीमेल और मैसेज आदि पर स्पैम की संख्या बढ़ी है. इनके जवाब में बियर का कहना है कि अभी यह 1 प्रतिशत भी नहीं है. आने वाले समय में यह प्रॉब्लम कई गुना बड़ी हो सकती है.
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:40 +0530</pubDate>
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<title>बार&#45;बार डिस्कनेक्ट हो रही है वाईफाई? ये हो सकते हैं कारण, जानिए फिक्स करने के तरीके</title>
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<description><![CDATA[ आप स्ट्रीमिंग, गेमिंग या ऑफिस के ऑनलाइन मीटिंग कर रहे हैं और अचानक से वाई-फाई कनेक्शन ड्रॉप हो जाए तो पूरा काम ही खराब हो जाता है. इससे न सिर्फ आपके काम पर असर पड़ता है बल्कि समय भी खराब होता है. अगर यह दिक्कत रोजाना आने लगे तो न तो गेमिंग का मन करता है और न ही कोई मूवीज या वेब सीरीज देखने का. लेकिन इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं? आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि वाई-फाई के बार-बार डिस्कनेक्ट होने के क्या-क्या कारण हो सकते हैं और उन्हें कैसे फिक्स किया जा सकता है.&amp;nbsp;
ज्यादा डिवाइस हो सकते हैं कनेक्ट
अगर आपका कनेक्शन बार-बार ड्रॉप हो रहा है तो इसका एक कारण आपकी वाईफाई से ज्यादा डिवाइस कनेक्टेड होना हो सकता है. भले ही कनेक्टेड डिवाइस कोई डेटा यूज नहीं कर रहे हैं, लेकिन ये बैंडविड्थ को कंज्यूम करते हैं. अगर इनकी संख्या ज्यादा है तो आपका कनेक्शन ड्रॉप हो सकता है. इसे फिक्स करने के लिए गैर-जरूरी डिवाइसेस को डिस्कनेक्ट कर दें.
राउटर की लोकेशन
स्ट्रॉन्ग वाईफाई कनेक्शन के लिए राउटर की लोकेशन बहुत जरूरी है. अगर आपका डिवाइस राउटर से ज्यादा दूरी पर है तो कनेक्शन ड्रॉप होने की समस्या आ सकती है. इसी तरह अगर राउटर किसी इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस के पीछे लगा है तो भी इसका कनेक्शन वीक हो सकता है. इससे बचने के लिए राउटर को ऐसी जगह पर रखें, जहां से डिवाइस तक बिना ज्यादा बाधा के कनेक्शन पहुंच सके.
राउटर का पुराना होना
अगर कनेक्टेड डिवाइस लिमिट करने और राउटर की लोकेशन चेंज करने के बाद भी कनेक्शन ड्रॉप हो रहा है तो आपको राउटर बदलने की जरूरत है. दरअसल, कई पुराने राउटर नई सर्विसेस के कंपैटिबल नहीं होते. इस कारण एक बार रिसेट करने के बाद ये कुछ समय तक चलते हैं, लेकिन फिर से दिक्कत आने लगती है. अगर आपके साथ ऐसा हो रहा है तो नया राउटर लेना ही सबसे फायदेमंद ऑप्शन है.
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:40 +0530</pubDate>
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<title>आपके फोन की हर चीज ट्रैक कर सकता है नया स्पाईवेयर, एंड्रॉयड और आईफोन यूजर्स की उड़ी नींद, ऐसे रहें सेफ</title>
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<description><![CDATA[ इन दिनों एक नए स्पाईवेयर ने मोबाइल यूजर्स की नींद उड़ा दी है. इस पिछले कुछ सालों का सबसे खतरनाक स्पाईवेयर माना जा रहा है. इसकी मदद से डिवाइस की हर चीज को ट्रैक किया जा सकता है. ZeroDayRAT नाम का यह स्पाईवेयर हैकर्स को यूजर के फोन के कैमरा और माइक्रोफोन के साथ-साथ नोटिफिकेशन और मैसेज समेत दूसरी चीजों की भी एक्सेस दे देता है. इससे भी खतरनाक बात है कि इससे न तो एंड्रॉयड यूजर्स सेफ हैं और न ही आईफोन यूजर्स. सभी मोबाइल डिवाइसेस को इससे खतरा है.&amp;nbsp;
हैकर के पास पहुंचा देता है सारा डेटा
यह स्पाईवेयर इतना खतरनाक है कि यूजर का सारा डेटा हैकर के पास पहुंचा देता है. डिवाइस में इंस्टॉल होते ही यह डेटा ट्रांसमिट करना शुरू कर देता है, जिससे हैकर्स आपके फोन पर आ रहे नोटिफिकेशन, GPS लोकेशन, इनबॉक्स के मैसेज, ऑपरेटिंग सिस्टम, बैटरी और लॉक स्टेटस को देख सकता है. ट्रांसमिट हो रहे डेटा की मदद से अटैकर यह भी देख सकते हैं कि आप सबसे ज्यादा बात किससे कर रहे हैं, किन ऐप्स को सबसे ज्यादा यूज कर रहे हैं और किस नेटवर्क पर एक्टिव रहते हैं.
टेलीग्राम पर बिक रहा है यह स्पाईवेयर
यह स्पाईवेयर अपनी कैपेबिलिटीज के अलावा और भी कई कारणों से चिंताजनक है. पहला यह कि इसे यूज करने के लिए टेक्नीकल एक्सपर्टीज की जरूरत नहीं है. दूसरा ऐसी भी रिपोर्ट्स है कि इस स्पाईवेयर को टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर खुलेआम बेचा जा रहा है. इससे इसका दायरा और भी बढ़ जाएगा और इसे कोई भी यूज कर सकता है, जो इसे और खतरनाक बना देता है.
इससे बचने के लिए क्या करें?
आजकल इंटरनेट पर स्पाईवेयर और मालवेयर की बाढ़ आई हुई है. इससे बचने के लिए अलर्ट रहने की बहुत जरूरत है. ऐसे किसी भी खतरे से बचने के लिए किसी भी अनजान सोर्स से आए लिंक पर क्लिक न करें. इसी तरह किसी भी थर्ड-पार्टी सोर्स से ऐप्स डाउनलोड न करें. हमेशा गूगल प्ले स्टोर या ऐप्पल ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें.
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<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>दुनिया में हर चौथा फोन है आईफोन, दूसरे नंबर पर यह कंपनी, ताजा रिपोर्ट आई सामने</title>
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<description><![CDATA[ कुछ दिन पहले ही खबर आई थी कि दुनियाभर में ऐप्पल के एक्टिव डिवाइसेस की संख्या 2.5 अरब को पार कर गई है. अब एक और रिपोर्ट में सामने आया है कि अभी दुनिया में हर चौथा एक्टिव फोन आईफोन है. यानी अभी दुनिया में जितने मोबाइल एक्टिव हैं, उनमें से 25 प्रतिशत अकेले आईफोन हैं. यह दिखाता है कि स्मार्टफोन की शिपमेंट में आ रही गिरावट के बावजूद ऐप्पल के दबदबा बना हुआ है. आइए इस बारे में डिटेल से जानते हैं.
2025 में बढ़ा है एक्टिव इंस्टॉल्ड बेस
काउंटरप्वाइंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में ग्लोबल इंस्टॉल्ड बेस ऑफ एक्टिव स्मार्टफोन 2 प्रतिशत बढ़ा है. इंस्टॉल्ड बेस का मतलब एक्टिव स्मार्टफोन से है और यह ऐसा मैट्रिक्स है, जिसमें यूजर लॉयल्टी, इकोसिस्टम स्टिकनेस और एक्सटेंडेड रिप्लेमेंट साइकिल को देखा जाता है. 2025 में रिप्लेसमेंट साइकिल लगभग 4 साल के पास पहुंच गया है.
ऐप्पल और सैमसंग सबसे आगे
रिपोर्ट के मुताबिक, ऐप्पल और सैमसंग इस मामले में सबसे आगे हैं. दोनों कंपनियां के एक्टिव डिवाइसेस की संख्या 1-1 अरब से पार हो गई है. इनके अलावा कोई और कंपनी इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई है. दोनों कंपनियों को मिला लिया जाए तो 2025 में इनके पास 44 प्रतिशत एक्टिव इंस्टॉल्ड बेस था. ग्लोबल इंस्टॉल्ड बेस में सैमसंग दूसरे स्थान पर है और दुनिया में हर पांचवा फोन सैमसंग का है. यानी करीब 20 प्रतिशत एक्टिव मोबाइल सैमसंग के हैं. इनके बाद शाओमी, ओप्पो और वीवो का नंबर आता है, जिनक एक्टिव डिवाइस की संख्या 20-20 करोड़ से पार हो गई है.
ऐप्पल की बात सबसे अलग
ऐप्पल के एक्टिव बेस में पिछले साल जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है. 2025 में कंपनी ने बाकी सात कंपनियों के कुल नए मोबाइल की संख्या से ज्यादा नए एक्टिव आईफोन यूजर जोड़े हैं. काउंटरप्वाइंट के एक सीनियर एनालिस्ट ने बताया कि इस बढोतरी की वजह स्ट्रॉन्ग यूजर लॉयल्टी, डीप iOS इकोसिस्टम और टाइटली इंटीग्रेटेड सर्विसेस हैं.
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>कहीं आपका Android फोन भी हैकर्स के निशाने पर तो नहीं? घर बैठे 2 मिनट में ऐसे करें पहचान</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Tips: भारत में Android स्मार्टफोन सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं. UPI पेमेंट से लेकर ऑनलाइन बैंकिंग, सोशल मीडिया और ऑफिस का काम सब कुछ आज इसी छोटे से डिवाइस पर निर्भर है. लेकिन इसी लोकप्रियता की वजह से Android फोन साइबर अपराधियों के निशाने पर भी ज्यादा रहते हैं. अच्छी बात यह है कि हर बार फोन में गड़बड़ी लगने पर सर्विस सेंटर दौड़ने की जरूरत नहीं होती. अगर आपको सही संकेत पहचानने आते हैं तो आप खुद ही काफी हद तक समस्या समझ सकते हैं.
Malware क्या होता है और Android यूजर्स ज्यादा क्यों फंसते हैं
Malware ऐसे खतरनाक सॉफ्टवेयर को कहा जाता है जो चुपचाप आपके फोन में घुसकर डेटा चुराता है, आपकी गतिविधियों पर नजर रखता है या फोन को नुकसान पहुंचाता है. Android फोन इसलिए ज्यादा टारगेट होते हैं क्योंकि इनमें लोग Play Store के अलावा दूसरी वेबसाइट्स से भी ऐप्स डाउनलोड कर लेते हैं. भारत में थर्ड-पार्टी ऐप्स, mod APK और WhatsApp या SMS पर आए अनजान लिंक पर क्लिक करना आम बात है और यहीं से खतरा शुरू होता है.
फोन खुद देने लगता है खतरे के संकेत
अगर आपका फोन अचानक स्लो हो गया है बिना वजह गर्म होने लगा है या बार-बार हैंग और क्रैश हो रहा है तो इसे हल्के में न लें. इसी तरह, जब फोन इस्तेमाल न करने पर भी बैटरी तेजी से खत्म होने लगे तो यह भी Malware की मौजूदगी का बड़ा इशारा हो सकता है.
फोन में मौजूद ऐप्स पर डालें नजर
अपने Android फोन की Settings में जाकर Apps सेक्शन खोलें और सभी इंस्टॉल ऐप्स को ध्यान से देखें. अगर कोई ऐसा ऐप दिखे जिसे आपने कभी डाउनलोड नहीं किया, या जिसका नाम अजीब लगे और काम भी समझ न आए तो सावधान हो जाएं. अक्सर Malware खुद को फर्जी टूल, नकली अपडेट या साधारण फ्लैशलाइट ऐप के रूप में छुपा लेता है. शक होने पर ऐप का नाम इंटरनेट पर सर्च करके जानकारी जरूर लें.
परमिशन सेटिंग्स से भी पकड़ में आता है Malware
ऐप्स को दी गई परमिशन भी बहुत कुछ बता देती हैं. Settings में जाकर Privacy और फिर Permission Manager खोलें. यहां देखें कि कौन-सा ऐप कैमरा, माइक्रोफोन, कॉन्टैक्ट्स या मैसेज तक पहुंच मांग रहा है. अगर कोई साधारण कैलकुलेटर ऐप कॉल लॉग या मैसेज पढ़ने की इजाजत चाहता है तो यह साफ खतरे का संकेत है और ऐसे ऐप को तुरंत हटा देना चाहिए.
मोबाइल डेटा पर रखें नजर
Malware अक्सर बैकग्राउंड में चुपचाप डेटा खपत करता रहता है. Settings में Network &amp;amp; Internet के अंदर Data Usage चेक करें. अगर कोई ऐप जरूरत से कहीं ज्यादा डेटा इस्तेमाल कर रहा है तो सतर्क हो जाएं. इसके अलावा, अगर बिना इंटरनेट चलाए भी फोन में बार-बार पॉप-अप विज्ञापन आने लगें तो समझ लीजिए कि फोन में एडवेयर मौजूद हो सकता है.
सिक्योरिटी ऐप क्यों है जरूरी
Android फोन में एक भरोसेमंद सिक्योरिटी या एंटीवायरस ऐप जरूर होना चाहिए. हमेशा Google Play Store से ही विश्वसनीय ऐप्स इंस्टॉल करें और Google Play Protect को ऑन रखें. किसी अनजान वेबसाइट से डाउनलोड किए गए सिक्योरिटी ऐप खुद खतरा बन सकते हैं.
जब हालात ज्यादा बिगड़ जाएं
अगर आपका फोन अपने आप मैसेज भेजने लगे, कॉल करने लगे या फिर बैंकिंग ऐप अचानक काम करना बंद कर दे तो देर न करें. संदिग्ध ऐप्स को हटाएं, फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट करें और तुरंत अपने जरूरी पासवर्ड बदलें. अगर फिर भी समस्या खत्म न हो तो डेटा का बैकअप लेकर फैक्ट्री रिसेट करना सबसे सुरक्षित उपाय हो सकता है.
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>128GB या 1TB लिखी होती है, फिर स्टोरेज आधी क्यों दिखती है? स्मार्टफोन कंपनियां यूजर्स से क्या छुपा रही हैं</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Storage: जब आप नया स्मार्टफोन खरीदते हैं और बॉक्स पर 128GB, 256GB या फिर 1TB स्टोरेज लिखा देखते हैं तो उम्मीद होती है कि इतनी पूरी जगह आपको इस्तेमाल के लिए मिलेगी. लेकिन फोन ऑन करते ही सच्चाई सामने आ जाती है काफी स्टोरेज पहले से ही गायब होती है. यहीं से सवाल उठता है कि आखिर ये स्टोरेज जाती कहां है?
ऑपरेटिंग सिस्टम खुद ले लेता है मोटा हिस्सा
हर स्मार्टफोन में Android या iOS पहले से इंस्टॉल होता है. यही ऑपरेटिंग सिस्टम फोन को चलाने के लिए जरूरी है और यही सबसे पहले स्टोरेज खाता है. आजकल Android का साइज ही 12 से 20GB तक पहुंच चुका है. यानी 128GB वाले फोन में शुरुआत से ही काफी जगह कम हो जाती है.
कंपनियों के प्री-इंस्टॉल ऐप्स भी जिम्मेदार
फोन ऑन करते ही आपको ढेर सारे ऐप पहले से मिलते हैं ब्रांड के अपने ऐप, पार्टनर ऐप्स, गेम्स और शॉपिंग प्लेटफॉर्म. इनमें से ज्यादातर ऐप्स यूजर के काम के नहीं होते लेकिन ये स्टोरेज लगातार खाते रहते हैं. कई ऐप्स को आप चाहकर भी पूरी तरह डिलीट नहीं कर पाते जो यूजर्स के लिए सबसे बड़ी परेशानी है.
सिस्टम फाइल्स और अपडेट भी बनते हैं बोझ
फोन को स्मूद चलाने के लिए सिस्टम फाइल्स, कैश और बैकग्राउंड डेटा जरूरी होता है. इसके अलावा हर नया सॉफ्टवेयर अपडेट भी कुछ अतिरिक्त स्टोरेज मांगता है. समय के साथ ये फाइल्स इतनी बढ़ जाती हैं कि यूजर को लगता है स्टोरेज अचानक भर गई.
फोटो, वीडियो और WhatsApp बना रहे हैं फोन को भारी
आजकल कैमरा क्वालिटी इतनी बेहतर हो गई है कि एक फोटो ही कई MB की हो जाती है. 4K वीडियो, रील्स और सोशल मीडिया कंटेंट स्टोरेज को तेजी से भर देते हैं. WhatsApp और Telegram जैसे ऐप्स ऑटो-डाउनलोड की वजह से बिना बताए GBs में डेटा जमा कर लेते हैं.
कंपनियां पूरी सच्चाई क्यों नहीं बतातीं?
असल में कंपनियां स्टोरेज की कुल क्षमता बताती हैं न कि यूजर को मिलने वाली असली खाली जगह. ये बात बॉक्स या विज्ञापनों में साफ नहीं लिखी जाती. इसी वजह से यूजर को बाद में ठगा हुआ महसूस होता है. अगर स्टोरेज की समस्या से बचना है तो बेकार ऐप्स को डिसेबल करें, कैश साफ रखें और क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल करें. साथ ही फोन खरीदते समय जरूरत से ज्यादा स्टोरेज लेना ही समझदारी है.
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:56 +0530</pubDate>
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<title>अब कैमरा वाले एयरपॉड्स लाएगी ऐप्पल, विजुअल इंटेलीजेंस को करेंगे सपोर्ट, जानिए कब तक हो सकते हैं लॉन्च</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल ने कुछ समय पहले ही आईफोन 17 सीरीज के साथ AirPods Pro 3 लॉन्च किए थे. अब कंपनी इन्हें अपग्रेड करने पर विचार कर रही है. रिपोर्ट्स की मानें तो इन्हें बिल्ट-इन कैमरा के साथ अपग्रेड किया जा सकता है और नया मॉडल इसी साल बाजार में उताजा जा सकता है. दरअसल, पिछले काफी समय से एयरपॉड्स को कैमरा से लैस करने के कयास लगाए जा रहे हैं और अब ऐसा लग रहा है कि कंपनी इस पर तेजी से काम करने में जुटी हुई है.
एयरपॉड्स का कैमरा कैसा होगा?
ताजा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, AirPods Pro में IR-बेस्ड कैमरा दे सकती है. यह ट्रेडिशनल कैमरा से अलग होगा और इसका यूज फोटो-वीडियो के लिए नहीं होगा. यह कैमरा विजुअल इंटेलीजेंस को सपोर्ट करेगा. यानी इस कैमरा की मदद से एआई फीचर्स से लैस एयरपॉड्स अपनी सराउंडिंग को देखते हुए यूजर के प्रॉम्प्ट पर काम कर सकेंगे. ऐप्पल के सीईओ टीम कुक भी कह चुके हैं कि कंपनी के एआई रोडमैप में विजुअल इंटेलीजेंस का इंपोर्टेंट रोल है. उनका यह बयान एयरपॉड्स में विजुअल इंटेलीजेंस के लिए कैमरा आने की बातो को और बल देता है.
क्या कीमत में होगा इजाफा?
कैमरा से लैस करने के बावजूद AirPods Pro 3 की कीमतों में इजाफा होने की उम्मीद नहीं है. लीक के मुताबिक, ऐप्पल नए मॉडल की कीमत भी करंट जनरेशन मॉडल के बराबर रख सकती है. हालांकि, अभी तक ऐप्पल की तरफ से इस एयरपॉड और इसकी कीमत को लेकर कोई जानकारी नहीं दी गई है.
अगले हफ्ते नया आईफोन लॉन्च कर सकती है ऐप्पल
इस साल ऐप्पल 20 नए प्रोडक्ट्स लाने वाली है. 19 फरवरी को कंपनी अपना किफायती iPhone 17e लॉन्च कर सकती है. iPhone 16e की जगह आने वाले इस मॉडल में नया चिपसेट, नए मॉडम और डायनामिक आईलैंड समेत कई बड़ी अपग्रेड मिलने की उम्मीद की जा रही है.&amp;nbsp;
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<title>बच्चों की मानसिक सेहत पर बढ़ रहा खतरा? इन गेम्स को लेकर भारत में बढ़ती चिंता, जानिए पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ Mobile Games: हाल ही में गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की मौत की खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. इस दुखद घटना के बाद एक बार फिर बच्चों में मोबाइल हॉरर गेम्स की बढ़ती लत और उसके मानसिक प्रभाव पर सवाल उठने लगे हैं. जांच के दौरान पुलिस को लड़कियों की डायरी में कुछ डरावने मोबाइल गेम्स के जिक्र मिले, जिसके बाद माता-पिता, शिक्षक और प्रशासन सभी सतर्क हो गए हैं. हालांकि हॉरर कंटेंट बच्चों को रोमांचक लगता है लेकिन जब यह जुनून बन जाए तो इसके गंभीर नतीजे सामने आ सकते हैं.
गाजियाबाद मामले ने क्यों बढ़ाई चिंता
पुलिस का कहना है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि मोबाइल गेम्स ही इस घटना की सीधी वजह बने. फिर भी, बार-बार उन्हीं हॉरर गेम्स का जिक्र मिलना यह सोचने पर मजबूर करता है कि लगातार डरावना कंटेंट बच्चों के दिमाग पर क्या असर डाल सकता है. खासकर तब, जब बच्चे घंटों तक फोन से चिपके रहते हैं और उन पर सही तरीके से नजर नहीं रखी जाती.
जांच में सामने आए कुछ चर्चित हॉरर गेम्स
जांच के दौरान कुछ गेम्स के नाम बार-बार सामने आए जो भारत में काफी लोकप्रिय हैं और आसानी से डाउनलोड किए जा सकते हैं. ये गेम्स फ्री या बेहद सस्ते होने की वजह से बच्चों तक तेजी से पहुंच जाते हैं जिससे उनकी पहुंच पर नियंत्रण मुश्किल हो जाता है.
Poppy Playtime का डरावना माहौल
Poppy Playtime बच्चों को एक सुनसान खिलौना फैक्ट्री में ले जाता है जहां अजीबोगरीब गुड़ियां, अंधेरे कोने और अचानक डराने वाले सीन मौजूद होते हैं. इसका किरदार Huggy Wuggy भले ही टीनएजर्स को ध्यान में रखकर बनाया गया हो लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कंटेंट बड़े बच्चों के लिए भी मानसिक रूप से भारी पड़ सकता है.
The Baby in Yellow
The Baby in Yellow नाम से यह गेम जितना मासूम लगता है, असल में उतना ही खौफनाक है. इसमें खिलाड़ी एक ऐसे बच्चे की देखभाल करता है जिसके साथ धीरे-धीरे अलौकिक घटनाएं जुड़ती जाती हैं. मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों की देखभाल जैसे सामान्य विषय को हॉरर से जोड़ना छोटे बच्चों के लिए भ्रम और डर पैदा कर सकता है.
Evil Nun और Ice Scream की खौफनाक दुनिया
Evil Nun में खिलाड़ी को एक डरावने स्कूल में बंद कर दिया जाता है, जहां से एक खतरनाक नन से बचकर निकलना होता है. वहीं Ice Scream में एक आइसक्रीम बेचने वाले विलेन की कहानी है जो बच्चों का अपहरण करता है. भले ही इन गेम्स का ग्राफिक्स कार्टून जैसा हो लेकिन इनके विषय डर, कैद और अपहरण संवेदनशील बच्चों में चिंता और डर को बढ़ा सकते हैं.
माता-पिता के लिए जरूरी सावधानी
गाजियाबाद मामले में तीनों बहनें 16, 14 और 12 साल की थीं और उनका ज्यादातर समय मोबाइल पर बीतता था. जांच अभी जारी है और किसी एक कारण को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है. फिर भी, विशेषज्ञ मानते हैं कि माता-पिता को बच्चों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए, उनके ऑनलाइन व्यवहार को समझना चाहिए और अगर बच्चे में अचानक डर, चिड़चिड़ापन या अलग-थलग रहने के लक्षण दिखें तो बिना देर किए पेशेवर मदद लेनी चाहिए.
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:56 +0530</pubDate>
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<title>एआई और डीपफेक कंटेट पर लेबल हुआ जरूरी, सरकार ने कड़े किए नियम, यहां पढ़ें पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ सोशल मीडिया पर बढ़ते एआई जनरेटेड और डीपफेक कंटेट को देखते हुए भारत सरकार ने नियम कड़े कर दिए हैं. अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऑब्जेक्शनेबल मैटेरियल को तीन घंटे के भीतर डिलीट करना होगा और उनके लिए एआई-जनरेटेड कंटेट को लेबल करना भी अनिवार्य कर दिया गया है. साथ ही यूजर को भी यह डिक्लेयर करना होगा कि उसका कंटेट एआई टूल्स की मदद से बनाया या ऑल्टर किया गया है.&amp;nbsp;
20 फरवरी से लागू हो जाएंगे नए नियम
नए नियमों को 10 फरवरी को नोटिफाई किया गया था और ये 20 फरवरी से लागू हो जाएंगे. ये नियम ऐसे समय लागू हो रहे हैं, जब फ्रॉड, हैरेसमेंट और दूसरी गैर-कानूनी एक्टिविटीज में डीपफेक, झूठी जानकारी और सिंथेटिक मीडिया का इस्तेमाल बढ़ रहा है.
नए नियम आने के बाद क्या बदलेगा?
लेबलिंग- नियमों में सबसे बड़ा बदलाव लेबलिंग को अनिवार्य करने के तौर पर हुआ है. सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और दूसरी डिजिटल इंटरमीडियरीज को साफ निर्देश दिए हैं कि एआई से जनरेटेड और एडिटेड कंटेट पर साफ-साफ नजर आने वाला लेबल होना चाहिए. इस लेबल को हटाया और टेंपर नहीं किया जा सकेगा. साथ ही प्लेटफॉर्म्स को कंटेट में यूनिक आइडेंटिफायर्स देने होंगे, जिससे सिंथेटिक कंटेट को ट्रेस किया जा सके.
यूजर डिक्लरेशन- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को अपलोड के समय ही यूजर से यह जानकारी लेनी होगी कि उसका कंटेट एआई से जनरेटेड या एडिटेड है. साथ ही उन्हें यूजर डिक्लरेशन को वेरिफाई करने के वाले टूल्स भी डिप्लॉय करने होंगे.&amp;nbsp;
कंटेट मॉडरेशन के लिए टाइमलाइन- &amp;nbsp;पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी आपत्तिजनक कंटेट को हटाने के लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था, लेकिन अब कुछ मामलों में यह टाइमलाइन कम कर दी गई है. अब इन प्लेटफॉर्म्स को कानून ऑर्डर या यूजर की शिकायत के तीन घंटे बाद आपत्तिजनक कंटेट डिलीट करना होगा.&amp;nbsp;
इस नियम में भी हुआ बदलाव
नए नियमों में साफ किया गया है कि अगर एआई जनरेटेड कंटेट को अनलॉफुल एक्टिविटीज में यूज किया जाता है तो इसे भी दूसरे इलीगल कंटेट की तरह ट्रीट किया जाएगा. प्लेटफॉर्म्स को यह इनश्योर करना होगा कि उनकी सर्विसेस को किसी गैर-कानूनी एक्टिविटीज के लिए यूज न किया जाए.
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:56 +0530</pubDate>
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<title>क्या रात को Wi&#45;Fi और मोबाइल डेटा को बंद रखना चाहिए? साइंस की सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ क्या रात को Wi-Fi और मोबाइल डेटा को बंद रखना चाहिए? साइंस की सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे ]]></description>
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:55 +0530</pubDate>
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<title>Instagram ला रही है Snapchat वाला यह फीचर, फोटो शेयर करना होगा आसान, जेन&#45;जी को आएगा खूब पसंद</title>
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<description><![CDATA[ इंस्टाग्राम पर जल्द ही एक ऐसा फीचर आने वाला है, जो जेन-जी को बहुत पसंद आएगा. दरअसल, मेटा ने स्नैपचैट को टक्कर देने का प्लान बनाया है और जल्द ही वह इंस्टाग्राम में भी स्नैपचैट जैसे कई फीचर्स ला सकती है. इसमें सबसे पहला फीचर Instants हो सकता है. यह खास तौर पर फोटो शेयरिंग के लिए लाया जा रहा है. मेटा ने इसके लिए प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है. स्नैपचैट की तरह इस फीचर में सामने वाले यूजर के देखते ही फोटो गायब हो जाएगी.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा नया फीचर?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा इंस्टाग्राम में टेंपरेरी शेयरिंग के लिए यह फीचर लाएगी. यह फीचर यूजर को टेंपरेरी फोटो और वीडियो शेयर करने देगा. जैसे ही सामने वाला यूजर इन फोटो-वीडियो को देख लेगा, ये गायब हो जाएंगे. अगला यूजर इन्हें सेव नहीं कर पाएगा. बताया जा रहा है कि इंस्टाग्राम कुछ देशों में इसकी टेस्टिंग कर रही है. इंस्टाग्राम ने इस फीचर को इंटरनली शॉट्स नाम दिया है. इससे यूजर DM के जरिए दूसरे यूजर्स के पास फोटो-वीडियो शेयर कर पाएंगे. अगर सामने वाले यूजर 24 घंटे तक इन्हें ओपन नहीं करता है तो ये ऑटोमैटिकली एक्सपायर हो जाएंगे.
किन लोगों के साथ शेयर कर पाएंगे फोटो?
इंस्टाग्राम का यह फीचर आपको केवल उन यूजर्स के साथ ही फोटो-वीडियो शेयर करने की परमिशन देगा, जो एक-दूसरे को फॉलो करते हैं. यानी आप केवल अपने दोस्तों के साथ ये फोटोज शेयर कर पाएंगे. साथ ही इन फोटो को एडिट करने का ऑप्शन नहीं आएगा. यह स्नैपचैट की तरह स्पॉनटेनियस होगा. बता दें कि इंस्टाग्राम पर पहले ही वैनिश मोड, व्यू वन्स और ऑटो डिलीटिंग जैसे ऑप्शन मिलते हैं, लेकिन नया फीचर लाकर इंस्टाग्राम इसे और स्ट्रीमलाइन करना चाहती है. ऐसे कयास हैं कि कंपनी टेंपरेरी फोटो शेयरिंग को अपने प्लेटफॉर्म का एक बड़ा भाग बनाने का प्रयास कर रही है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:55 +0530</pubDate>
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<title>सस्ती कीमत में मिलेगी 10000mAh से बड़ी बैटरी, एक बार चार्ज करने पर दो दिन चलेगा यह फोन, जानें कब होगा लॉन्च</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ समय से देखा जाए तो स्मार्टफोन कंपनियों ने बैटरी पर अपना फोकस बढ़ा दिया है. 2025 के अंत में Honor ने पहला 10,000mAh की बैटरी वाला फोन लॉन्च कर तहलका मचा दिया था. अब कुछ दिन पहले ही रियलमी ने भारत समेत कई मार्केट्स के लिए अपना पहला 10,000mAh बैटरी पैक वाला Realme P4 Power लॉन्च किया था. अब एक बार फिर Honor सस्ती कीमत में बड़ा धमाका करने को तैयार है. कंपनी अब 10,000mAh से भी बड़े बैटरी पैक के साथ अब तक का सबसे सस्ता फोन लॉन्च करने वाली है.
Honor X80 से धमाका करेगी कंपनी
दावा किया जा रहा है कि Honor के अपकमिंग फोन Honor X80 में 11,000-12,000mAh की बैटरी मिलेगी, जो दो दिन तक चलेगी. इसे जल्द ही चीन में लॉन्च किया जाएगा और यह उन लोगों के लिए पहली पसंद बन सकता है, जिन्हें लंबी बैटरी लाइफ की जरूरत होती है. सबसे खास बात है कि कंपनी इसे किफायती बनाने पर जोर दे रही है. चाइनीज सोशल मीडिया वीबो की एक पोस्ट के मुताबिक, इस फोन की कीमत लगभग 13,000 रुपये तक हो सकती है. इस तरह देखा जाए तो जंबो बैटरी के साथ आने वाला यह सबसे सस्ता फोन होगा.
ये हो सकते हैं Honor X80 के स्पेसिफिकेशंस
Honor X80 में 6.81 इंच का LTPS डिस्प्ले मिल सकता है और इसे Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर से लैस किए जाने की उम्मीद है. इसके रियर में 50MP का मेन कैमरा और फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 16MP का लेंस दिया जा सकता है. बता दें कि कंपनी की तरफ से अभी तक इनमें से किसी भी फीचर की पुष्टि नहीं हुई है.
बैटरी को लेकर बढ़ा कंपीटिशन
अगले कुछ महीनों में चाइनीज ब्रांड शाओमी दो नए फोन लाने वाली है, जिनमें जंबो बैटरी मिलेगी. इनमें से एक को अगले कुछ दिनों में लॉन्च किया जा सकता है. इस फोन में 10,000mAH से बड़ी बैटरी मिलेगी, जो 100W वायर्ड चार्जिंग और फास्ट वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करेगी. रियलमी भी 15,000mAh की बैटरी वाले फोन का टीजर भी दिखा चुकी है. कंपनी का दावा है कि यह फोन 18 घंटे तक लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग और 50 घंटे का वीडियो प्लेबैक सपोर्ट करेगा.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:54 +0530</pubDate>
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<title>लोकल चार्जर इस्तेमाल करते हैं तो हो जाएं सावधान! ये तीन 3 खतरनाक नुकसान आपके महंगे फोन को बना देंगे कबाड़</title>
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<description><![CDATA[ Local Charger: आजकल ज्यादातर लोग चार्जर खराब होते ही लोकल मार्केट से सस्ता चार्जर खरीद लेते हैं. देखने में ये चार्जर बिल्कुल ओरिजिनल जैसे लगते हैं लेकिन अंदर से ये आपके स्मार्टफोन के लिए जहर साबित हो सकते हैं. कुछ रुपये बचाने के चक्कर में हजारों का फोन खतरे में पड़ जाता है.
बैटरी की उम्र तेजी से घटती है
लोकल चार्जर में सही वोल्टेज और करंट कंट्रोल नहीं होता. इसकी वजह से फोन की बैटरी पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ता है. शुरुआत में आपको लगेगा कि फोन ठीक चार्ज हो रहा है लेकिन कुछ ही समय में बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने लगती है. कई मामलों में बैटरी फूलने तक की नौबत आ जाती है जो बेहद खतरनाक है.
फोन के अंदरूनी पार्ट्स हो सकते हैं खराब
ओरिजिनल चार्जर में ओवरहीटिंग, ओवरचार्ज और शॉर्ट सर्किट से बचाने के लिए सेफ्टी चिप लगी होती है. लोकल चार्जर में ये सुरक्षा नहीं मिलती. चार्जिंग के दौरान हल्का सा करंट फ्लक्चुएशन भी मदरबोर्ड, चार्जिंग IC या डिस्प्ले को नुकसान पहुंचा सकता है. एक बार ये पार्ट्स खराब हो गए तो रिपेयर का खर्च फोन की कीमत के आधे तक पहुंच सकता है.
फोन में आग लगने का डर
आपने कई बार खबरों में सुना होगा कि चार्जिंग के दौरान फोन फट गया या उसमें आग लग गई. इसके पीछे अक्सर घटिया क्वालिटी का चार्जर ही जिम्मेदार होता है. लोकल चार्जर जल्दी गर्म हो जाते हैं और वायर की इंसुलेशन भी कमजोर होती है. ऐसे में शॉर्ट सर्किट का खतरा कई गुना बढ़ जाता है जो जान-माल दोनों के लिए खतरा बन सकता है.
कंपनियां क्यों मना करती हैं लोकल चार्जर से?
स्मार्टफोन कंपनियां हमेशा ओरिजिनल या सर्टिफाइड चार्जर इस्तेमाल करने की सलाह देती हैं. इसका कारण सिर्फ पैसे कमाना नहीं बल्कि फोन की सेफ्टी और लंबी उम्र है. लोकल चार्जर से हुए नुकसान पर वारंटी भी खत्म हो सकती है जिससे यूजर को दोहरी मार झेलनी पड़ती है.
सही चार्जर चुनना क्यों है जरूरी?
अगर आप चाहते हैं कि आपका फोन लंबे समय तक सही चले, तो चार्जर पर कभी समझौता न करें. हमेशा ब्रांडेड या BIS सर्टिफाइड चार्जर ही इस्तेमाल करें. कुछ रुपये बचाने के लिए लिया गया गलत फैसला आपके कीमती स्मार्टफोन को हमेशा के लिए डैमेज कर सकता है.
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<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ऐप्पल वॉच के ये यूज तो आपने सोचे भी नहीं होंगे, टीवी कंट्रोल से लेकर सेहत पर नजर रखने तक सब करेगी</title>
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<description><![CDATA[ कई यूजर्स के लिए ऐप्पल वॉच डेली की जरूरत बन गई है. इसके फीचर्स को देखते हुए एक बार यूज करने के बाद इसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है. आईफोन की तरह ऐप्पल वॉच में भी कई ऐसे फीचर्स हैं, जो इसे कई तरीकों से यूजफुल बनाते हैं. आज हम आपको इसके ऐसे कुछ यूज बताने जा रहे हैं, जिनसे अधिकतर यूजर्स अनजान हैं. आइए इन पर एक नजर डालते हैं.
फाइंड योर आईफोन
मॉडर्न ऐप्पल वॉच में ऐसा फीचर आता है, जिसकी मदद से आप अपने आईफोन को लोकेट कर सकते हैं. अगर आपके पास आईफोन 15 या उसके बाद का मॉडल है और आप इससे रखकर भूल गए हैं तो ऐप्पल वॉच उसे ढूंढने में आपकी मदद कर सकती है.
ऐप्पल टीवी को करें कंट्रोल
बहुत कम ही लोग जानते हैं कि आईफोन के अलावा आप ऐप्पल वॉच से भी अपने ऐप्पल टीवी को कंट्रोल कर सकते हैं. कई बार ऐसा होता है कि रिमोट कंट्रोल नहीं मिलता. ऐसी स्थिति में आप आईफोन के अलावा ऐप्पल वॉच से भी टीवी को कंट्रोल कर पाएंगे.
ऐप्पल वॉच स्पीकर्स
ऐप्पल वॉच के मॉडर्न मॉडल्स को इयरबड्स के बिना भी यूज किया जा सकता है. अगर आपको कोई गाना या पॉडकास्ट सुनना है और आपके पास इयरबड्स नहीं है तो ऐप्पल वॉच के स्पीकर्स आपकी मदद कर सकते हैं.
वॉकी-टॉकी के तौर पर भी करेगी काम
ऐप्पल वॉच की मदद से आप अपने दोस्त से कभी भी और कहीं से भी बातचीत कर सकते हैं. इसके लिए आपको आईफोन हाथ में रखने की भी जरूरत नहीं है. इसके लिए आपको अपने दोस्त के पास रिक्वेस्ट भेजनी पड़ेगी. रिक्वेस्ट अप्रूव होते ही आप उनसे वॉकी-टॉकी की तरह बातचीत कर सकते हैं.
स्लीप एपनिया डिटेक्शन
ऐप्पल वॉच पर नया स्लीप एपनिया नोटिफिकेशन आया है. स्लीप एपनिया के कारण लंबे समय में दिल से जुड़ी बीमारियां होने समेत कई खतरे होते हैं. ऐप्पल वॉच इस समस्या के साइन को डिटेक्ट कर सकती है, जिससे आप समय रहते हुए इलाज ले पाएंगे.
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone Voice Message का बड़ा राज खुला! कहां सेव होते हैं ऑडियो मैसेज, कैसे सुनें और जानिए क्या है ऑटो&#45;रिप्लाई का तरीका</title>
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<description><![CDATA[ iPhone Voice Message: आज के समय में iPhone पर बातचीत का तरीका काफी बदल चुका है. टाइप करने के बजाय लोग तेजी से वॉयस मैसेज भेजना पसंद कर रहे हैं खासकर iMessage और WhatsApp जैसे ऐप्स पर. अगर आप iPhone 16 या iPhone 17 इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपके मन में भी ये सवाल आया होगा कि वॉयस मैसेज आखिर सेव कहां होते हैं उन्हें दोबारा कैसे सुना जाए और क्या अपने आप वॉयस में जवाब देना मुमकिन है. यहां आपको हर सवाल का साफ और आसान जवाब मिलेगा.
iPhone में Voice Message कहां सेव होते हैं?
iPhone के लेटेस्ट iOS वर्जन में वॉयस मैसेज सामान्य ऑडियो फाइल्स की तरह फोन में सेव नहीं होते. जब तक आप उन्हें खुद से सेव नहीं करते, वे उसी ऐप तक सीमित रहते हैं जिसमें भेजे या रिसीव किए गए हों.
iMessage के Voice Notes की सच्चाई
iMessage के जरिए भेजे या मिले वॉयस मैसेज सीधे Messages ऐप के अंदर ही रहते हैं. डिफॉल्ट सेटिंग में इन्हें सुनने के कुछ मिनट बाद अपने आप डिलीट कर दिया जाता है. अगर आप चाहते हैं कि ये अपने आप न हटें तो सेटिंग्स में जाकर Messages के Audio Messages ऑप्शन से इसे बदला जा सकता है. सेव किए गए वॉयस नोट्स चैट में तो दिखते हैं लेकिन Music या Files ऐप में तब तक नजर नहीं आते जब तक आप उन्हें एक्सपोर्ट न करें.
WhatsApp Voice Message कहां जाते हैं?
WhatsApp पर मिलने वाले वॉयस मैसेज ऐप के अंदर ही सेव रहते हैं और आप उन्हें कभी भी उसी चैट में जाकर दोबारा सुन सकते हैं. अगर आपके फोन में मीडिया ऑटो-डाउनलोड ऑन है तो इनके ऑडियो फाइल्स Files ऐप में WhatsApp के Media फोल्डर के अंदर भी मिल सकती हैं.
iPhone में Voice Message कैसे सुनें?
iPhone 16 और iPhone 17 पर वॉयस मैसेज सुनना काफी आसान है. iMessage में बस Messages ऐप खोलकर उस चैट में जाएं और प्ले बटन पर टैप करें. आप चाहें तो फोन कान से लगाकर प्राइवेट तरीके से सुन सकते हैं या स्पीकर पर भी चला सकते हैं.
WhatsApp में भी तरीका लगभग वही है. चैट खोलकर वॉयस मैसेज पर टैप करते ही ऑडियो चलने लगता है. फोन पकड़ने के तरीके के हिसाब से iPhone खुद तय कर लेता है कि आवाज स्पीकर से आए या ईयरपीस से. WhatsApp में तो स्पीड बढ़ाकर वॉयस मैसेज को जल्दी सुनने का ऑप्शन भी मिलता है.
क्या iPhone पर Voice Message का Auto-Reply संभव है?
फिलहाल Apple पूरी तरह ऑटोमैटिक वॉयस रिप्लाई की सुविधा नहीं देता लेकिन कुछ स्मार्ट तरीके जरूर मौजूद हैं. Focus Mode के जरिए आप ऑटो टेक्स्ट रिप्लाई सेट कर सकते हैं खासकर Driving Focus में. इसमें एक तय मैसेज अपने आप सामने वाले को चला जाता है.
इसके अलावा Siri की मदद से आप वॉयस में जवाब डिक्टेट कर सकते हैं. Siri आपके बोले हुए शब्दों को टेक्स्ट या वॉयस मैसेज के रूप में भेज देती है, हालांकि यह पूरी तरह ऑटोमैटिक नहीं होता. कुछ थर्ड-पार्टी ऐप्स भी मौजूद हैं लेकिन Apple की प्राइवेसी पॉलिसी के कारण उनकी सीमाएं होती हैं.
Voice Messages को बेहतर तरीके से मैनेज करने के आसान तरीके
अगर आप अक्सर वॉयस मैसेज का इस्तेमाल करते हैं तो iMessage की ऑटो-डिलीट सेटिंग बदलना फायदेमंद हो सकता है. जरूरी वॉयस मैसेज को समय रहते सेव करना और iCloud बैकअप ऑन रखना भी समझदारी है. Siri की announcements जैसी सुविधाएं हैंड्स-फ्री अनुभव को और आसान बना देती हैं.
आखिर में समझिए असली बात
iPhone 16 और iPhone 17 पर वॉयस मैसेज इस्तेमाल करना आसान है बस उनकी स्टोरेज और सेटिंग्स थोड़ी छुपी हुई हैं. एक बार आपको यह समझ आ जाए कि वॉयस मैसेज कहां रहते हैं और कैसे मैनेज होते हैं, तो सुनना और जवाब देना दोनों ही काम बिना झंझट के होने लगते हैं.
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:23 +0530</pubDate>
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<title>एआई की दुनिया में गूंजेगा भारत का नाम, समिट में भाग लेने आएंगे बड़ी&#45;बड़ी कंपनियों के सीईओ, जानें डिटेल</title>
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<description><![CDATA[ एआई की दुनिया में जल्द ही भारत का नाम पूरे जोर से गूंजेगा, जब बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीईओ, पॉलिसी मेकर और दूसरे टेक लीडर दिल्ली में होने वाली इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में जुटेंगे. 16 से 20 फरवरी तक दिल्ली के भारत मंडपम में होने वाली यह समिट भारत के सबसे बड़े हाई-प्रोफाइल टेक इवेंट्स में से एक है. इस बार यह समिट ऐसे समय में हो रही है, जब इकॉनमी से लेकर गवर्नेंस तक हर जगह एआई का असर देखा जा रहा है.
ये टेक लीडर होंगे समिट में शामिल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एआई समिट को लेकर दुनियाभर में उत्साह देखा जा रहा है और अब तक इसके लिए 35,000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं. बड़े नामों की बात करें गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचई, एनवीडिया के फाउंडर Jensen Huang, डीपमाइंड के सीईओ Demis Hassabis, माइक्रोसॉफ्ट के प्रेसिडेंट Brad Smith और क्वालकॉम के सीईओ Cristiano Amon इस समिट में हिस्सा ले सकते हैं. OpenAI के CEO Sam Altman भी इस समिट में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं. इनके अलावा मुकेश अंबानी, सुनील भारती मित्तल, नंदन नीलेकणी भी इस समिट में भाग ले सकते हैं. माना जा रहा है कि इंफोसिस, HCL, इंटेल, एडोबी और दूसरी कई टेक कंपनियों के अधिकारी भी इस हाई-प्रोफाइल इवेंट में शामिल होंगे.
इन बड़े नामों के भी भाग लेने की उम्मीद
टेक लीडर्स के अलावा इस समिट में बिल गेट्स और वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम के सीईओ Borge Brende समेत 15-20 देशों के प्रमुख, दुनियाभर से लगभग 50 मंत्री और 40 से अधिक ग्लोबल और इंडियन सीईओ भाग लेंगे. ऐसे में देखा जाए तो इस समिट में टेक लीडर्स और पॉलिसी मेकर्स का जमावड़ा होगा.
यह समिट क्यों जरूरी है?
एआई की बात करें तो यह हेल्थकेयर, एजुकेशन, गवर्नेंस और पॉलिसी मेकिंग समेत कोई भी ऐसा फील्ड नहीं बचा है, जहां एआई का असर नहीं देखा जा रहा. अब यह केवल प्राइवेट सेक्टर का टूल नहीं रहा है और आम लोगों के जीवन पर इसका सीधा असर पड़ने लगा है. ऐसे समय में भारत में हो रही यह समिट और भी जरूरी हो जाती है, जहां दुनियाभर के विद्वान बैठकर इस पर डिस्कशन कर सकेंगे.
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:23 +0530</pubDate>
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<title>नए स्मार्ट टीवी के साथ भूलकर भी न करें यह गलती, मजा खराब कर देगी थोड़ी&#45;सी लापरवाही</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप नया स्मार्ट टीवी खरीदकर लाए हैं और इसका पूरा मजा लेना चाहते हैं तो एक बड़ी गलती से आपको बचना चाहिए. दरअसल, कई लोग नए टीवी पर पुरानी HDMI केबल यूज करते रहते हैं. ऐसा करने से टीवी को वैसे कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन उस केबल से जो कंटेट ट्रांसमिट होगा, उसमें आपको मजा नहीं आएगा. इस कारण आपको स्ट्रीमिंग या गेमिंग करते समय उम्मीद के मुताबिक शानदार क्वालिटी नहीं मिलेगी. आइए जानते हैं कि नए टीवी पर पुरानी HDMI केबल यूज करने से क्या होता है.
कम हो जाता है फ्रेम रेट&amp;nbsp;
पुरानी HDMI केबल यूज करने से फ्रेम रेट पर असर पड़ता है. इसकी वजह यह है कि मॉडर्न गेमिंग डिवाइस में हाई-बैंडविड्थ की जरूरत होती है, जिसे कैरी करने के लिए पुरानी HDMI कैपेबल नहीं होती. इस वजह से आपको स्क्रीन पर कम रेजॉल्यूशन वाले विजुअल दिखेंगे.
HDR परफॉर्मेंस पर भी पड़ता है असर
मॉडर्न स्मार्ट टीवी में Dolby Vision और HDR10+ समेत कई Dynamic HDR फॉर्मेट मिलते हैं, जो आपके वाइब्रेंट कलर में कंटेट देखने को मजा देते हैं. HDR कंटेट ज्यादा बिट डेप्थ का यूज करते हैं, जिसके लिए ज्यादा बैंडविड्थ की जरूरत पड़ती है. इसका मतलब है कि कम बैंडविड्थ वाली केबल इन्हें कैरी नहीं कर सकती. इसलिए आपको पुरानी HDMI केबल से स्मार्ट टीवी पर HDR परफॉर्मेंस नहीं मिल पाएगी.
फ्लिकरिंग और ब्लैक स्क्रीन की दिक्कत
कमजोर HDR परफॉर्मेंस और कम फ्रेम रेट के अलावा पुरानी HDMI केबल से टीवी पर फ्लिकरिंग और ब्लैक स्क्रीन होने की समस्या भी आ सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पुरानी केबल में नई के मुकाबले शील्डिंग कमजोर होती है, जिस कारण वाई-फाई, फोन, साउंडबार और स्ट्रीमिंग मीडिया प्लेयर आदि डिवाइसेस से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस ज्यादा होता है. इसके अलावा पुरानी केबल की शील्डिंग भी जल्दी खराब होती है. इसलिए नए टीवी का पूरा मजा उठाने के लिए हमेशा नई HDMI केबल का ही यूज करें.
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:22 +0530</pubDate>
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<title>Instagram Vs WhatsApp: Reels स्क्रॉल करने या चैट&#45;वीडियो कॉल करने में कौन सा ऐप उड़ाता है ज्यादा मोबाइल डेटा? यहां जानिए सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ Instagram Vs WhatsApp: आज लगभग हर स्मार्टफोन यूज़र Instagram और WhatsApp का इस्तेमाल करता है लेकिन बहुत कम लोग यह सोचते हैं कि इनमें से कौन-सा ऐप मोबाइल डेटा ज़्यादा खपत करता है. अगर आप भी रोज़ घंटों Reels देखते हैं, चैट करते हैं या वीडियो कॉल पर रहते हैं तो यह जानना बेहद ज़रूरी है कि आपका डेटा असल में कहां ज़्यादा खर्च हो रहा है.
मोबाइल डेटा क्यों बन गया है अहम मुद्दा
भले ही 5G और अनलिमिटेड पैक की बातें होती हों लेकिन हकीकत यह है कि आज भी कई यूज़र्स सीमित डेटा प्लान पर निर्भर हैं. ऐसे में अगर किसी ऐप की वजह से डेटा जल्दी खत्म हो जाए तो जेब पर सीधा असर पड़ता है. इसलिए यह समझना जरूरी है कि कौन-सा ऐप ज़्यादा डेटा खाता है और क्यों.
Instagram कितना डेटा उड़ाता है?
Instagram पूरी तरह फोटो और वीडियो पर आधारित ऐप है. इसमें स्क्रॉल करते ही लगातार नया कंटेंट लोड होता रहता है जिससे डेटा तेजी से खर्च होता है. सिर्फ फोटो और फीड देखने में भी डेटा लगता है लेकिन जैसे ही आप Reels, Stories या वीडियो देखने लगते हैं, खपत कई गुना बढ़ जाती है. लंबे वीडियो या लाइव स्ट्रीम देखने पर तो कुछ ही समय में आपका डेटा पैक खत्म हो सकता है. साफ शब्दों में कहें तो Instagram पर जितना ज़्यादा वीडियो, उतना ज़्यादा डेटा खर्च.
WhatsApp का डेटा खर्च कितना होता है?
WhatsApp का मुख्य काम मैसेजिंग और कॉलिंग है, इसलिए इसका डेटा इस्तेमाल Instagram के मुकाबले काफी कम होता है. सामान्य टेक्स्ट चैट में नाममात्र का डेटा लगता है. वॉयस कॉल और वीडियो कॉल में जरूर डेटा खर्च होता है लेकिन फिर भी यह लगातार वीडियो देखने जितना भारी नहीं होता.
हालांकि, अगर आपके WhatsApp में ऑटो-डाउनलोड चालू है और आपको रोज़ ढेर सारी फोटो-वीडियो मिलती हैं तो डेटा खपत बढ़ सकती है. फिर भी सामान्य इस्तेमाल में WhatsApp डेटा के मामले में किफायती ही रहता है.
सीधी टक्कर में कौन आगे?
अगर तुलना करें तो Instagram लगभग हर हाल में WhatsApp से ज़्यादा मोबाइल डेटा इस्तेमाल करता है. खासकर तब, जब आप Reels स्क्रॉल करते हैं या Explore सेक्शन में समय बिताते हैं. वहीं WhatsApp पर अगर आप सिर्फ चैट और कभी-कभार कॉल करते हैं तो डेटा खर्च काफी सीमित रहता है.
मोबाइल डेटा बचाने के आसान तरीके
अगर आप चाहते हैं कि डेटा जल्दी खत्म न हो तो दोनों ऐप्स में Data Saver मोड ऑन करना फायदेमंद हो सकता है. Instagram में वीडियो ऑटो-प्ले बंद रखें और भारी कंटेंट के लिए Wi-Fi का इस्तेमाल करें. साथ ही, जरूरत न होने पर बैकग्राउंड डेटा भी ऑफ किया जा सकता है.
समझदारी से इस्तेमाल करें ऐप्स
आखिरकार बात आदतों पर आकर टिक जाती है. अगर आप घंटों Reels देखते हैं तो Instagram आपका डेटा तेजी से खत्म करेगा. वहीं सिर्फ चैट और कॉल के लिए WhatsApp इस्तेमाल करते हैं तो डेटा काफी हद तक बचा रहेगा. सही जानकारी के साथ ऐप्स का इस्तेमाल करेंगे तो डेटा और पैसे दोनों की बचत होगी.
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोल्डेबल फोन खरीदने से पहले जान लें ये बातें, ट्रेंड के चक्कर में ले लिया तो बाद में पड़ सकता है पछताना</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ समय से फोल्डेबल फोन का ट्रेंड जोर पकड़ रहा है. गूगल और सैमसंग समेत कई कंपनियां फोल्डेबल फोन लॉन्च कर चुकी हैं, वहीं ऐप्पल भी इस साल पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च कर देगी. लोग इन्हें पसंद भी कर रहे हैं और इनकी जमकर खरीदारी भी हो रही है. अगर आप भी इस ट्रेंड को देखते हुए फोल्डेबल फोन खरीदने की प्लानिंग बना रहे हैं तो आपको इसके नुकसान के बारे में जानकारी होनी चाहिए. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि फोल्डेबल फोन के क्या-क्या नुकसान हैं.
महंगी कीमत
फोल्डेबल फोन खरीदने के लिए आपकी जेब पर भारी झटका लगेगा. दरअसल, फोल्डेबल फोन की टेक्नोलॉजी अभी नई है और इसमें कई कॉप्लेक्स कंपोनेंट का यूज होता है, जिसके चलते इसकी कीमत ज्यादा होती है. गूगल पिक्सल 10 प्रो फोल्ड की बात करें तो भारत में इसकी शुरुआती कीमत 1,72,999 रुपये है. इस कीमत में दूसरी कई कंपनियों को दो-दो फ्लैगशिप मॉडल खरीदे जा सकते हैं.
ड्यूरैबिलिटी की टेंशन
फोल्डेबल फोन के हिंज और फोल्डिंग मैकेनिज्म कमजोर होता है और अगर यह गलती से आपके हाथ से छूट गया तो फिर बड़ा नुकसान होना पक्का है. फोल्डेबल फोन में मेन और कवर समेत दो डिस्प्ले होते हैं. इस कारण इन पर स्क्रैच लगने के भी ज्यादा चांस होते हैं. इसके अलावा इनकी मोटाई और भार भी बाकी फोन के मुकाबले ज्यादा होता है, जिस कारण इन्हें कैरी करना मुश्किल हो जाता है.
रिपेयर का खर्चा ज्यादा
फोल्डेबल फोन का सबसे बड़ा उद्देश्य यूजर को फोन को फॉर्मेट में बड़ी स्क्रीन देना है. बड़ी स्क्रीन है तो इसके टूटने का भी डर ज्यादा रहेगा. इसके अलावा हिंजेज आदि पार्ट्स के कारण इसकी सिंपल रिपेयर भी महंगी हो जाती है. इस कारण अगर फोन को जरा-सी भी रिपेयर की जरूरत है तो आपकी जेब पर बोझ बढ़ना तय है.
बैटरी लाइफ और सॉफ्टवेयर की प्रॉब्लम
फोल्डेबल फोन में भले ही बड़ी स्क्रीन मिलती है, लेकिन इनकी बैटरी लाइफ अभी भी चिंता का कारण बनी हुई है. स्क्रीन साइज बढ़ने के अनुपात में इनकी बैटरी नहीं बढ़ी है, जिसके चलते बार-बार चार्जिंग का झंझट लगा रहता है. इसके अलावा लार्ज स्क्रीन के लिए सॉफ्टवेयर की भी बड़ी प्रॉब्लम है. अब भी कई ऐसी ऐप्स हैं, जिन्हें फोल्डेबल फोन की बड़ी स्क्रीन के लिए ऑप्टिमाइज नहीं किया गया है. इस कारण फुल स्क्रीन पर भी वीडियो देखते हुए खाली स्पेस और कई विजुअल स्ट्रैच्ड नजर आते हैं.
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:21 +0530</pubDate>
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<title>रातभर फोन चार्ज करना पड़ सकता है भारी! 100% चार्जिंग क्यों होती है डिवाइस के लिए खरतरनाक?</title>
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<description><![CDATA[ रातभर फोन चार्ज करना पड़ सकता है भारी! 100% चार्जिंग क्यों होती है डिवाइस के लिए खरतरनाक? ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:21 +0530</pubDate>
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<title>सावधान! कहीं आपकी निजी जानकारी पर किसी और की नजर तो नहीं? ऐसे करें Google अकाउंट की जांच</title>
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<description><![CDATA[ सावधान! कहीं आपकी निजी जानकारी पर किसी और की नजर तो नहीं? ऐसे करें Google अकाउंट की जांच ]]></description>
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:20 +0530</pubDate>
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<title>पुराने या खराब हो चुके हेडफोन को फेंकने की न करें गलती, इन तरीकों से दोबारा आ जाएंगे काम</title>
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<description><![CDATA[ अगर आपके घर में कोई पुराना या खराब हेडफोन पड़ा है तो कबाड़ में देने से पहले इसके क्रिएटिव यूज के बारे में सोचें. दरअसल, पुराने हेडफोन को कई तरीकों से यूज किया जा सकता है. इससे आपको इसे कबाड़ में भी नहीं देना पड़ेगा और आपके कई काम भी बन जाएंगे. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप पुराने और खराब हो चुके हेडफोन को कैसे-कैसे रीयूज कर सकते हैं.
मिनी स्पीकर के तौर पर करें यूज
अगर आपके पुराने हेडफोन पर ऑडियो प्ले हो रहा है तो आप इसे मिनी स्पीकर के तौर पर यूज कर सकते हैं. अगर इसका एक स्पीकर भी काम कर रहा है तो आप वर्कस्टेशन, किचन या नाइटस्टैंड जैसी दूसरी जगहों के लिए इसे मिनी स्पीकर बना सकते हैं.
बन जाएगा रिकॉर्डिंग डिवाइस
अगर आपके हेडफोन में बिल्ट-इन माइक है तो आप इसे रिकॉर्डिंग डिवाइस बना सकते हैं, भले ही इसके दोनों स्पीकर खराब हो गए हैं. हेडफोन में कॉलिंग के लिए माइक दिया जाता है और इससे वॉइस रिकॉर्डिंग भी कर सकते हैं. ऐसे में आपको कंटेट क्रिएशन के लिए अलग से माइक लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
साइकलिंग के दौरान सुनें म्यूजिक
अगर आप थोड़ा जुगाड़ लगा सकते हैं तो साइकलिंग आदि के दौरान म्यूजिक सुनने के लिए अपने हेलमेट ही में बेसिक ऑडियो सेटअप कर सकते हैं. इसके लिए पुराने हेडफोन को लें और इसके स्पीकर्स को हेलमेट की पेडिंग में फिट कर लें. ऐसे में आपको हल्का ऑडियो सुनाई देता रहेगा. इससे आपके आसपास की साउंड ब्लॉक भी नहीं होगी और आपको म्यूजिक या नेविगेशन में मदद भी मिलती रहेगी.
ट्रैवलिंग के दौरान आएगा काम
अगर आपका नया हेडफोन ज्यादा महंगा है और आप घूमने जा रहे हैं तो पुराना हेडफोन आपके काम आ सकता है. अगर ट्रैवलिंग के दौरान यह डैमेज होता है तो भी आपको ज्यादा नुकसान नहीं होगा.&amp;nbsp;
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<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:20 +0530</pubDate>
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<title>क्या ब्लूटूथ और वाई&#45;फाई ऑन रखने से जल्दी डिस्चार्ज होती है फोन की बैटरी? जान लें सच</title>
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<description><![CDATA[ कई लोगों को लगता है कि वाईफाई और ब्लूटूथ ऑन रखने से फोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है. इसलिए हर बार यूज करने के बाद वो इन्हें ऑफ कर देते हैं. लेकिन क्या सच में ऐसा होता है कि इन्हें ऑन रखने से बैटरी पर ज्यादा असर पड़ता है? इसका सीधा जवाब है नहीं. दरअसल, ब्लूटूथ और वाईफाई लो-एनर्जी रेडियो होते हैं, जिनके ऑन या ऑफ रहने से बैटरी पर ज्यादा असर नहीं पड़ता. आइए इस बारे में डिटेल से जानते हैं.
मॉडर्न स्मार्टफोन में दूर हो गई प्रॉब्लम
ब्लूटूथ और वाईफाई को बंद रखने की सलाह स्मार्टफोन के शुरुआती दिनों से दी जा रही है. हालांकि, अब टेक्नोलॉजी के एडवांस होने के कारण मॉडर्न स्मार्टफोन में ये बैटरी पर ज्यादा असर नहीं डालते हैं. आजकल के स्मार्टफोन में ब्लूटूथ लो एनर्जी यूज होता है, जो एक्टिव रहने पर भी न के बराबर बैटरी की खपत करता है. ब्लूटूथ केवल 2.5 mW एनर्जी कंज्यूम करता है, जिस कारण केवल ब्लूटूथ से बैटरी डिस्चार्ज होने में लगभग 3 महीने लग सकते हैं. इसी तरह वाईफाई भी एनर्जी एफिशिएंट हो गई है और यह मोबाइल कनेक्शन के मुकाबले कम बैटरी की खपत करती है. ऐसे में अगर आप मोबाइल कनेक्शन की जगह वाईफाई यूज कर रहे हैं तो आपके फोन की बैटरी ज्यादा चलेगी.
सबसे ज्यादा बैटरी कैसे डिस्चार्ज होती है?
अगर आप फोन की बैटरी को लंबा चलाना चाहते हैं तो इसकी लोकेशन बेस्ड सर्विसेस बंद कर दें. इसके अलावा सुपर HDR, ऑलवेज-ऑन-डिस्प्ले को भी डिसेबल कर दें. इसी तरह ब्राइटनेस को कम करने, डार्क मोड यूज करने और स्क्रीन टाइमआउट को कम करने से बैटरी बचाने में मदद मिल सकती है. जब आप फोन यूज नहीं कर रहे होते हैं, तब भी इसके बैकग्राउंड में कई एक्टिविटीज चलती रहती हैं. इन्हें लिमिट कर भी आप फोन की बैटरी को लंबा चला सकते हैं.
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:46 +0530</pubDate>
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<title>Google Gemini और ChatGPT को टक्कर देने आ गया भारत का Sarvam AI! दुनिया रह गई हैरान, जानिए कैसे है सबसे अलग</title>
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<description><![CDATA[ Sarvam AI: अब तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में अमेरिका और चीन का ही दबदबा माना जाता था. भारत को अक्सर सिर्फ टैलेंट का बाजार समझा गया न कि कोर AI डेवलपमेंट का केंद्र. लेकिन बेंगलुरु की स्टार्टअप Sarvam AI इस सोच को तेजी से बदल रही है. कंपनी भारत में ही शुरू से तैयार किए गए अपने सॉवरेन AI मॉडल के दम पर अब ग्लोबल टेक दिग्गजों को सीधी चुनौती दे रही है.
Sarvam Vision ने बड़े AI मॉडल्स को छोड़ा पीछे
Sarvam AI के दो टूल इन दिनों खास चर्चा में हैं Sarvam Vision और Bulbul. Sarvam Vision एक OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) आधारित AI मॉडल है जिसने कुछ चुनिंदा बेंचमार्क्स पर ChatGPT, Google Gemini और Anthropic Claude जैसे बड़े नामों को पीछे छोड़ दिया है. इसकी सटीकता इतनी बेहतर बताई जा रही है कि यूजर्स और AI एक्सपर्ट्स खुलकर इसकी तारीफ कर रहे हैं.
बेंचमार्क स्कोर ने बढ़ाई दुनिया की दिलचस्पी
Sarvam AI के को-फाउंडर प्रत्युष कुमार ने X पर पोस्ट्स के जरिए इन उपलब्धियों की जानकारी दी. कंपनी के मुताबिक Sarvam Vision ने olmOCR-Bench पर 84.3 प्रतिशत की एक्यूरेसी हासिल की है जो Gemini 3 Pro और DeepSeek OCR v2 जैसे मॉडलों से ज्यादा है. वहीं ChatGPT का स्कोर इससे काफी नीचे रहा.
इतना ही नहीं, OmniDocBench v1.5 पर भी Sarvam Vision ने 93.28 प्रतिशत का शानदार स्कोर किया. खास बात यह रही कि जटिल लेआउट, टेक्निकल टेबल्स और गणितीय फॉर्मूले जैसे मुश्किल हिस्सों में भी इसका प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा जहां पारंपरिक OCR सिस्टम अक्सर फेल हो जाते हैं.
आलोचना से तारीफ तक का सफर
Sarvam AI को पहले सिर्फ इंडिक लैंग्वेज मॉडल्स पर फोकस करने को लेकर संदेह की नजर से देखा गया था. लेकिन अब वही शक सराहना में बदल रहा है. टेक कमेंटेटर Deedy Das ने भी माना कि उन्होंने Sarvam को कम आंका था. उनके मुताबिक Sarvam के OCR और स्पीच मॉडल भारतीय भाषाओं के लिए बेहद मजबूत हैं और उस खाली जगह को भरते हैं, जिसे बड़े ग्लोबल AI लैब्स ने नजरअंदाज कर दिया था. यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी कुछ ऐसी ही हैं. कई लोगों ने Sarvam के टूल्स को इस्तेमाल करने के बाद हैरानी और उत्साह दोनों जताया है.
Bulbul V3
OCR के साथ-साथ Sarvam AI ने अपना नया टेक्स्ट-टू-स्पीच मॉडल Bulbul V3 भी लॉन्च किया है. यह AI वॉयस टूल भारतीय भाषाओं में नेचुरल और एक्सप्रेसिव आवाजें तैयार करने पर फोकस करता है. इसका कॉन्सेप्ट ElevenLabs जैसे इंटरनेशनल AI वॉयस प्लेटफॉर्म से मिलता-जुलता है लेकिन भारत-केंद्रित जरूरतों के हिसाब से इसे खास तौर पर डिजाइन किया गया है. फिलहाल Bulbul V3 में 11 भारतीय भाषाओं में 35 से ज्यादा आवाजें उपलब्ध हैं और कंपनी जल्द ही इसे 22 भाषाओं तक विस्तार देने की योजना में है.
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:45 +0530</pubDate>
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<title>आपके कंप्यूटर की स्पीड स्लो कर रही है यह चीज, आज ही हटा दें, चुटकियों में होगा काम</title>
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<description><![CDATA[ नया कंप्यूटर या लैपटॉप लेते ही अधिकतर लोग एंटीवायरस इंस्टॉल करते हैं. कोई नहीं चाहता कि मालवेयर या वायरस के कारण उनके डेटा की चोरी हो. ज्यादातर मौकों पर एंटीवायरस काम भी करते हैं और ये डेटा चोरी और मालवेयर अटैक से बचा सकते हैं, लेकिन अब एंटीवायरस सुइट में VPN, पैरेंटल कंट्रोल और ब्राउजर एड-ऑन्स जैसी चीजें आने लगी हैं, जिससे ये कंप्यूटर के ज्यादातर रिसोर्सेस यूज कर लेते हैं और आपको ऐप्स और फाइल्स खोलने में ज्यादा समय लगने लगता है.&amp;nbsp;
सिस्टम को स्लो कर देते हैं एंटीवायरस
एंटीवायरस सॉफ्टवेयर खुद को साइलेंट प्रोटेक्टर के तौर पर दिखाते हैं और बैकग्राउंड में काम करते हैं, लेकिन इसका असर पूरे सिस्टम पर दिखता है. जैसे ही आप सिस्टम पर कोई फाइल ओपन, डाउनलोड, कॉपी या मॉडिफाई करते हैं, एंटीवायरस उसे स्कैन करता है. इसी तरह शेड्यूल्ड स्कैनिंग भी होती है. इस कारण कई बार सिस्टम की स्पीड स्लो हो जाती है और आपको काम करने में अधिक टाइम लगने लगता है. रुटीन स्कैन में यह फिर भी परफॉर्मेंस को कम प्रभावित करता है, लेकिन फुल स्कैन में इससे कंप्यूटर की परफॉर्मेंस पर काफी असर पड़ता है. साधारण यूज के दौरान इसका ज्यादा पता नहीं चलता, लेकिन वीडियो एडिटिंग, गेमिंग और दूसरे हाई-एंड टास्क करते समय यह काफी परेशान करता है.
इससे बचाव का तरीका क्या है?
अगर एंटीवायरस के कारण आपका सिस्टम भी स्लो हो गया है तो इस अनइंस्टॉल करने के अलावा भी एक तरीका है. आप इसे अपनी जरूरतों के हिसाब से फाइन-ट्यून कर सके हैं, जिससे यह कम रिसोर्सेस में काम करेगा. इससे आपके कंप्यूटर की परफॉर्मेंस पर भी असर नहीं पड़ेगा और प्रोटेक्शन भी मिलती रहेगी. अगर आप इससे बिल्कुल ही परेशान हो गए हैं तो इसे अनइंस्टॉल भी कर सकते हैं. घबराने की जरूरत नहीं है. माइक्रोसॉफ्ट डिफेंडर से आपको बिना एंटीवायरस भी फुल प्रोटेक्शन मिलती रहती है.
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:45 +0530</pubDate>
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<title>Instagram अकाउंट लॉक हो गया? पासवर्ड भूल गए या ID हैक हो गई? मिनटों में दोबारा ऐसे कर सकते हैं लॉग&#45;इन</title>
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<description><![CDATA[ Instagram Login: आज Instagram सिर्फ मनोरंजन का ऐप नहीं रहा, बल्कि यह पर्सनल चैट, बिजनेस और कंटेंट क्रिएशन का बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है. ऐसे में अगर अचानक अकाउंट का एक्सेस चला जाए तो टेंशन होना लाजमी है. पासवर्ड भूल जाना, अकाउंट हैक हो जाना या फिर Instagram की तरफ से अचानक रोक लग जाना ये सभी लॉगिन से जुड़ी आम परेशानियां हैं. अच्छी बात यह है कि Instagram ऐसे मामलों में अकाउंट वापस पाने के लिए ऑफिशियल रास्ते देता है.
Instagram में लॉगिन न होने की मुख्य वजहें
कई बार बार-बार गलत पासवर्ड डालने से अकाउंट अस्थायी रूप से लॉक हो जाता है. कुछ मामलों में संदिग्ध लॉगिन एक्टिविटी, ईमेल या मोबाइल नंबर की पुष्टि न होना या फिर अकाउंट हैक होना भी बड़ी वजह बनता है. वहीं, अगर Instagram की कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन हुआ हो तो अकाउंट डिसेबल भी किया जा सकता है. सही समाधान के लिए पहले यह समझना ज़रूरी है कि दिक्कत आखिर है क्या.
पासवर्ड भूल गए? सबसे पहले यह तरीका अपनाएं
अगर आपको पासवर्ड याद नहीं आ रहा है तो लॉगिन स्क्रीन पर दिख रहे Forgot password? ऑप्शन पर टैप करें. यहां आप अपना रजिस्टर्ड ईमेल, यूज़रनेम या मोबाइल नंबर डाल सकते हैं. इसके बाद Instagram की तरफ से आपको पासवर्ड रीसेट करने का लिंक या कोड मिलेगा. दिए गए निर्देशों को फॉलो करके नया पासवर्ड सेट करें और अकाउंट में दोबारा लॉगिन कर लें. ज्यादातर मामलों में यही तरीका काम कर जाता है.
अकाउंट हैक हो गया है तो क्या करें?
अगर आपको लगता है कि आपका Instagram अकाउंट किसी और ने एक्सेस कर लिया है तो Need more help? पर जाकर &amp;lsquo;My account was hacked&amp;rsquo; का विकल्प चुनें. Instagram आपकी पहचान की पुष्टि के लिए ईमेल, फोन नंबर या फिर सेल्फी वीडियो मांग सकता है. एक बार वेरिफिकेशन पूरा हो जाने के बाद Instagram आपकी रिक्वेस्ट की जांच करता है और सही पाए जाने पर अकाउंट वापस दे देता है.
Instagram ने अकाउंट डिसेबल कर दिया हो तो उपाय
जब Instagram खुद किसी अकाउंट को डिसेबल करता है तो आमतौर पर कारण की जानकारी दी जाती है. अगर आपको लगता है कि यह फैसला गलत है तो आप Instagram के हेल्प सेंटर में जाकर अपील कर सकते हैं. कई बार पहचान साबित करने के लिए सरकारी पहचान पत्र भी अपलोड करना पड़ सकता है.
ईमेल और सिक्योरिटी अलर्ट जरूर चेक करें
Instagram संदिग्ध लॉगिन या अकाउंट में बदलाव होने पर सिक्योरिटी ईमेल भेजता है. इसलिए अपने इनबॉक्स के साथ-साथ स्पैम फोल्डर भी ज़रूर देखें. इन मेल्स में ऐसे लिंक होते हैं जिनसे आप बिना अनुमति किए गए बदलाव को तुरंत रिवर्स कर सकते हैं.
कुछ जरूरी बातें जो ध्यान में रखें
रिकवरी के दौरान हमेशा वही ईमेल और फोन नंबर इस्तेमाल करें जो अकाउंट से जुड़े हों. बार-बार अपील भेजने से प्रक्रिया धीमी हो सकती है इसलिए धैर्य रखें. अकाउंट रिकवरी में कुछ घंटे से लेकर कई हफ्ते तक का समय लग सकता है.
सही तरीके से करें रिकवरी
अगर आप Instagram द्वारा बताए गए ऑफिशियल स्टेप्स को सही ढंग से फॉलो करते हैं तो अकाउंट वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है. थोड़ी सावधानी और सही जानकारी आपके Instagram अकाउंट को फिर से सुरक्षित बना सकती है.
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:44 +0530</pubDate>
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<title>गूगल के लेटेस्ट फोन पर आ गई भारी छूट, Pixel 10 की कीमत में 10,000 की गिरावट, यहां से उठाएं डील का फायदा</title>
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<description><![CDATA[ गूगल के लेटेस्ट पिक्सल स्मार्टफोन Google Pixel 10 पर छप्परफाड़ छूट मिल रही है. अपने क्लीन एंड्रॉयड एक्सपीरियंस, शानदार कैमरा क्वालिटी और एआई पावर्ड फीचर के कारण अलग पहचान बना चुका पिक्सल 10 इस समय अपनी लॉन्च कीमत से 10,000 रुपये सस्ता मिल रहा है. अगर आप इस फोन को खरीदना चाहते हैं तो यह शानदार मौका है. आइए फोन के स्पेसिफिकेशंस और फीचर्स के बारे में डिटेल से जानते हैं.
Google Pixel 10 के स्पेसिफिकेशंस
पिछले साल अगस्त में लॉन्च हुए Google Pixel 10 में 6.3 इंच की OLED स्क्रीन मिलती है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 3000 निट्स की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट के साथ आती है. इसमें Google Tensor G5 चिपसेट लगा है और यह Android 16 पर ऑपरेट करता है. फोटो और वीडियो के लिए इसके रियर में ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलता है. इसके रियर में 48MP का प्राइमरी लेंस, 13MP का अल्ट्रावाइड सेंसर और 10.8MP का टेलीफोटो कैमरा दिया गया है, जबकि सेल्फी और वीडियो के लिए फ्रंट में 10.5MP का लेंस लगा हुआ है. यह फोन 4970mAh के बैटरी पैक के साथ आता है और इसे सात सालों तक सॉफ्टवेयर अपडेट मिलेगी.
फ्लिपकार्ट पर मिल रही है छूट
Pixel 10 भारत में 79,999 कीमत पर लॉन्च हुआ था, लेकिन अभी फ्लिपकार्ट इस पर डिस्काउंट दे रही है. फ्लिपकार्ट पर यह 5,000 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के साथ 74,999 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा HDFC बैंक ऑफर के तहत 5,000 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट भी मिल रहा है, जिसके बाद इसकी कीमत 69,999 रुपये रह जाती है. इस तरह गूगल पिक्सल 10 को सिर्फ 69,999 रुपये में खरीद सकते हैं.
ऐप्पल प्रोडक्ट्स पर भी चल रहा है डिस्काउंट ऑफर
Valentine&#039;s Day के मौके पर ऐप्पल ने भी आईफोन 17 समेत अपने प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट का ऐलान किया है. इस ऑफर के तहत 99,900 रुपये की कीमत वाले MacBook Air M4 की खरीद पर ग्राहक 10,000 रुपये की बचत कर सकते हैं. इसी तरह आईफोन 17 सीरीज के मॉडल्स पर 5,000 रुपये और आईफोन 16 और आईफोन 16 प्लस पर 4,000 रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है.
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:43 +0530</pubDate>
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<title>नया फोन खरीदने से पहले दिमाग में रखें ये बातें, भूल गए तो बेकार जा सकते हैं आपके पैसे</title>
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<description><![CDATA[ आजकल स्मार्टफोन महंगे हो गए हैं और अब लोग पहले की तुलना में फोन को ज्यादा लंबा यूज कर रहे हैं. इसलिए नया फोन खरीदते समय बजट से लेकर फीचर्स आदि का ध्यान रखना जरूरी है. इनके बिना आप पैसे भी खर्च कर देंगे और आपको जरूरत के हिसाब से फोन भी नहीं मिलेगा. आज हम आपको ऐसी ही बातें बताने जा रहे हैं, जिन्हें फोन खरीदते समय दिमाग में रखना जरूरी है.&amp;nbsp;
सबसे पहले देखें बजट
अगर आप फोन खरीदने जा रहे हैं तो सबसे पहले बजट डिसाइड कर लें. इसे आपके ऑप्शन क्लियर हो जाएंगे और आपको बाजार में मौजूद सारे मॉडल्स देखने की जरूरत नहीं रहेगी. बाजार में एंट्री लेवल से लेकर सुपर प्रीमियम रेंज तक सारे मोबाइल मिल जाएंगे. इसलिए सबसे पहले बजट डिसाइड करें.
जरूरी फीचर्स
बजट फिक्स करने के बाद अपने लिए जरूरी फीचर्स की लिस्ट बनाएं. अगर आपको फोटोग्राफी के लिए फोन लेना है तो आप फोक्स्ड फोन सेलेक्ट कर सकते हैं. इसी तरह अगर आप कॉलिंग और टेक्स्टिंग ज्यादा करते हैं तो ऐसा फोन आपके काम आएगा, जिसकी बैटरी लंबी चलें. वहीं अगर आपको गेमिंग फोन लेना है तो दमदार बैटरी के साथ-साथ कूलिंग चैंबर और हाई रिफ्रेश रेट वाली स्क्रीन की जरूरत पड़ेगी.
ड्यूरैबिलिटी है जरूरी
फोन खरीदते समय केवल फीचर्स और लुक के अलावा बिल्ड क्वालिटी और ड्यूरैबिलिटी को भी देखें. अगर आप महंगा फोन खरीद रहे हैं तो इसका ड्यूरैबल होना बहुत जरूरी है. सस्ते फोन को रिपेयर करवाना सस्ता पड़ेगा, लेकिन महंगे फोन की रिपेयरिंग आपको झटका दे सकती है. इसके लिए आप फोन की IP रेटिंग और मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन आदि देख सकते हैं. इसके अलावा यह भी देखें कि कोई कंपनी कितने सालों तक सॉफ्टवेयर और सिक्योरिटी अपग्रेड का वादा कर रही है.
कहां मिल रही है बेस्ट डील?
आजकल ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर्स पर लगातार एक के बाद एक डील आती रहती है. अगर आप किसी त्योहार के आसपास फोन खरीदना चाहते हैं तो इस बात के चांस ज्यादा हैं कि आपको अच्छी डील मिल जाए. आप अलग-अलग ऑफलाइन स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर डील चेक कर सकते हैं. इनमें से जहां सबसे अच्छी डील मिले, वहीं से फोन खरीदें. इस तरह आप पसंद का फोन खरीदने के साथ-साथ पैसे भी बचा पाएंगे.&amp;nbsp;
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>UPI का जलवा दुनिया भर में! भारत ही नहीं, इन देशों में भी सेकंडों में होता है पेमेंट, लिस्ट देख कर चौंक जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ UPI का जलवा दुनिया भर में! भारत ही नहीं, इन देशों में भी सेकंडों में होता है पेमेंट, लिस्ट देख कर चौंक जाएंगे ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:42 +0530</pubDate>
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<title>Whatsapp पर भूलकर भी नहीं भेजने चाहिए ये मैसेज, नहीं तो तुरंत आ जाएंगे पुलिस की रडार में</title>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:41 +0530</pubDate>
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<title>WhatsApp के इस फीचर से दूसरों के पास चली जाती है आपकी जरूरी जानकारी, यहां जानें बचाव का तरीका</title>
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<description><![CDATA[ WhatsApp पर कई सेफ्टी फीचर दिए गए हैं, लेकिन इसका एक फीचर ऐसा है, जिससे आपकी जरूरी जानकारी सामने वाले तक जा सकती है. दरअसल, WhatsApp को फोटो, टेक्स्ट और लिंक आदि भेजने के लिए यूज किया जाता है. जब आप इस पर किसी के साथ लिंक शेयर करते हैं तो व्हाट्सऐप उसका एक शॉर्ट प्रीव्यू एक्टिवेट कर देती है ताकि यह पता चल सके कि यह लिंक किस बारे में है. यही फीचर आपकी जरूरी जानकारी सामने वाले के पास भेज देता है.
लिंक प्रीव्यू से कौन-सी जानकारी जाती है?
दरअसल, जब आप मैसेज बॉक्स में लिंक इंसर्ट करते हैं तो व्हाट्सऐप उस लिंक वाली वेबसाइट को &#039;गेट रिक्वेस्ट&#039; क्रिएट करती है. इसकी मदद से ऐप प्रीव्यू इमेज के साथ दूसरी चीजें लोड कर लेती है. अब इसकी प्रॉब्लम यह है कि इसके साथ मैसेज भेजने वाला का IP एड्रेस भी ट्रांसमिट हो जाता है. यानी जब आप मैसेज में किसी को लिंक भेजते हैं तो उसके साथ-साथ आपका IP एड्रेस भी चला जाता है.
IP एड्रेस से क्या दिक्कत हो सकती है?
जब मैसेज में आपका IP एड्रेस ट्रांसमिट होता है तो उसके साथ-साथ यह जानकारी भी चली जाती है कि आप व्हाट्सऐप का कौन-सा वर्जन यूज कर रहे हैं और आपके पास ऑपरेटिंग सिस्टम कौन-सा है. यह दिक्कत वाली बात इसलिए है क्योंकि IP एड्रेस से आपका डिवाइस ट्रैक किया जा सकता है. हैकर्स भी इसका फायदा उठाकर ओपन पोर्ट या DDoS के जरिए टारगेटेड अटैक्स की कोशिश कर सकते हैं. इसी तरह वर्जन नंबर से यह पता चल सकता है कि उसमें कौन-सी सुरक्षा खामियां पाई गई हैं और उनका फायदा उठाकर भी हैकिंग की कोशिश हो सकती है.
इससे कैसे बचा जाए?
व्हाट्सऐप पर लिंक प्रीव्यू बाई डिफॉल्ट इनेबल रहता है. इसलिए आपको मैनुअली इसे डिसेबल करना होगा. इसके लिए ऐप की सेटिंग में जाएं और प्राइवेसी सेक्शन में जाकर एडवांस्ड पर टैप करें. यहां पर आपको लिंक प्रीव्यू को डिसेबल करने की सेटिंग मिल जाएगी. अगर आप इसे डिसेबल कर देते हैं तो किसी भी लिंक का प्रीव्यू नहीं दिखेगा और मैसेज में सिर्फ URL और लिंक टेक्स्ट नजर आएगा.
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नया फोन खरीदने से पहले दिमाग में रखें ये बातें, भूल गए तो बेकार जा सकते हैं आपके पैसे ]]></description>
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:40 +0530</pubDate>
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<title>क्या वायरलेस चार्जिंग फोन को पहुंचाते हैं नुकसान? यहां जान लीजिए पूरी सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ Wireless Charging: आज के समय में स्मार्टफोन यूजर्स के बीच वायरलेस चार्जिंग तेजी से लोकप्रिय हो रही है. बिना केबल लगाए फोन चार्ज करना जितना सुविधाजनक लगता है उतना ही इसे लेकर लोगों के मन में डर भी है. कई लोग सोचते हैं कि वायरलेस चार्जिंग से फोन की बैटरी खराब हो जाती है या फोन जल्दी गर्म होने लगता है. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? आइए, इसकी पूरी सच्चाई समझते हैं.
वायरलेस चार्जिंग कैसे काम करती है
वायरलेस चार्जिंग दरअसल इंडक्टिव चार्जिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित होती है. इसमें चार्जिंग पैड और फोन के बीच इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनती है जिसके जरिए एनर्जी ट्रांसफर होती है. यानी बिजली सीधे केबल से नहीं, बल्कि मैग्नेटिक वेव्स के जरिए फोन की बैटरी तक पहुंचती है. यही वजह है कि इसमें तार लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.
क्या इससे फोन की बैटरी खराब होती है?
सीधी बात करें तो अच्छी क्वालिटी की वायरलेस चार्जिंग फोन की बैटरी को नुकसान नहीं पहुंचाती. आज के ज्यादातर स्मार्टफोन में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम काफी एडवांस होता है जो ओवरचार्जिंग और ज्यादा वोल्टेज से बैटरी को सुरक्षित रखता है. हालांकि, सस्ती या नकली वायरलेस चार्जर का इस्तेमाल करने से बैटरी की उम्र जरूर कम हो सकती है.
हीटिंग को लेकर कितना डर सही है
वायरलेस चार्जिंग के दौरान फोन का थोड़ा गर्म होना सामान्य बात है. क्योंकि इसमें एनर्जी ट्रांसफर के दौरान कुछ पावर हीट के रूप में निकल जाती है. लेकिन अगर फोन जरूरत से ज्यादा गर्म होने लगे तो यह नुकसानदेह हो सकता है. ऐसा आमतौर पर तब होता है जब चार्जिंग पैड और फोन सही तरीके से अलाइन न हों या फिर चार्जर लो-क्वालिटी का हो.
वायरलेस चार्जिंग की कुछ सीमाएं
वायरलेस चार्जिंग आमतौर पर वायर्ड चार्जिंग की तुलना में थोड़ी धीमी होती है. इसके अलावा, अगर आप चार्जिंग के दौरान फोन ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. यही वजह है कि लंबे समय तक सिर्फ वायरलेस चार्जिंग पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता.
क्या करना है सही?
अगर आप ब्रांडेड और सर्टिफाइड वायरलेस चार्जर का इस्तेमाल करते हैं, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है. बेहतर यही है कि रोजमर्रा में वायर्ड चार्जिंग का इस्तेमाल करें और जरूरत पड़ने पर ही वायरलेस चार्जिंग अपनाएं. साथ ही, चार्जिंग के दौरान फोन को कवर से निकाल देना भी हीटिंग कम करने में मदद करता है.
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<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:39 +0530</pubDate>
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<title>फ्री Wi&#45;Fi का लालच पड़ सकता है भारी! फोन कनेक्ट करते ही पर्दे के पीछे क्या&#45;क्या खेल होता है, जानकर हो जाएंगे हैरान</title>
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<description><![CDATA[ फ्री Wi-Fi का लालच पड़ सकता है भारी! फोन कनेक्ट करते ही पर्दे के पीछे क्या-क्या खेल होता है, जानकर हो जाएंगे हैरान ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:16:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>गजब हो गया! 50,000 रुपये से कम में मिल रहा है आईफोन 17, यहां चल रहा छप्परफाड़ ऑफर</title>
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<description><![CDATA[ Valentine&#039;s Day के मौके पर अगर आप अपने लवर को आईफोन 17 गिफ्ट करना चाहते हैं तो आपके पास बचत का शानदार मौका है. क्रोमा इस खास मौके पर सेल लेकर आई है, जिसमें आईफोन 17 पर भारी डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है. बता दें कि यह फोन पिछले साल सितंबर में लॉन्च हुआ था और अब इसे 50,000 से भी कम कीमत पर खरीदा जा सकता है. आइए, इस फोन के फीचर्स और डील के बारे में डिटेल से जानते हैं.
आईफोन 17 के स्पेसिफिकेशंस
आईफोन 17 को कई शानदार अपग्रेड्स के साथ लॉन्च किया गया था. प्रो मॉडल्स की तरह आईफोन 17 में भी प्रोमोशन टेक्नोलॉजी वाला 6.3 इंच का ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले दिया गया है. इसे एल्युमिनियम और ग्लास फिनिंग दी गई है और इसकी मोटाई 7.3mm है. यह आईफोन 48MP+12MP के डुअल रियर कैमरा सेटअप और फ्रंट में सेंटर स्टेज लेंस के साथ लॉन्च हुआ था. ऐप्पल की लेटेस्ट A19 चिप वाले इस फोन को 8GB रैम के साथ पेयर किया गया है. कंपनी का दावा है कि इसमें आईफोन 16 की तुलना में बड़ी बैटरी दी गई है. इस आईफोन की दुनियाभर में रिकॉर्डतोड़ बिक्री हुई है.
क्रोमा दे रही छप्परफाड़ डील
क्रोमा पर 6 फरवरी से शुरू हुई सेल में 82,900 रुपये की असली कीमत वाले आईफोन 17 को कुछ शर्तों के साथ 50,000 रुपये से भी कम में खरीदा जा सकता है. क्रोमा का कहना है कि ग्राहक एक्सचेंज ऑफर के तहत पुराने फोन पर 23,500 रुपये तक की छूट, 8,000 रुपये का एक्सचेंज बोनस और 2,000 रुपये का कैशबैक पा सकते हैं. अगर सारे ऑफर्स को मिला लिया जाए तो आईफोन 17 की कीमत 50,000 रुपये से भी कम रह जाती है.
ऐप्पल पर भी दे रही छूट
Valentine&#039;s Day के मौके पर ऐप्पल ने भी आईफोन 17 समेत अपने प्रोडक्ट्स पर डिस्काउंट का ऐलान किया है. इस ऑफर के तहत 99,900 रुपये की कीमत वाले MacBook Air M4 की खरीद पर ग्राहक 10,000 रुपये की बचत कर सकते हैं. इसी तरह आईफोन 17 सीरीज के मॉडल्स पर 5,000 रुपये और आईफोन 16 और आईफोन 16 प्लस पर 4,000 रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है.
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>कीबोर्ड का सबसे बड़ा रहस्य! ABCDE की सीधी लाइन क्यों नहीं दिखती? जानिए इसके पीछे की चौंकाने वाली वजह</title>
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<description><![CDATA[ Keyboard: हम रोज मोबाइल या कंप्यूटर पर कीबोर्ड इस्तेमाल करते हैं लेकिन शायद ही कभी यह सवाल दिमाग में आता है कि आखिर कीबोर्ड पर अक्षर ABCDE की तरह सीधी लाइन में क्यों नहीं होते. स्कूल में तो हमें अल्फाबेट ऐसे ही सिखाए गए थे फिर कीबोर्ड पर सब उलटा-पुलटा क्यों दिखता है? इसके पीछे की कहानी काफ़ी दिलचस्प और हैरान करने वाली है.
टाइपराइटर से शुरू हुई कहानी
कीबोर्ड का डिज़ाइन अचानक नहीं बना. इसकी जड़ें करीब 150 साल पुराने टाइपराइटर से जुड़ी हैं. शुरुआती टाइपराइटर में अगर अक्षर ABCDE की सीधी लाइन होती तो टाइप करते समय पास-पास के बटन दबाने पर धातु की छड़ें आपस में टकरा जाती थीं. इससे मशीन बार-बार जाम हो जाती थी और काम धीमा पड़ता था.
QWERTY लेआउट क्यों बना?
इस समस्या का हल निकालने के लिए इंजीनियरों ने अक्षरों को ऐसे फैलाया कि ज्यादा इस्तेमाल होने वाले बटन एक-दूसरे से दूर रहें. इसी प्रयोग से जन्म हुआ QWERTY लेआउट जो आज भी लगभग हर कीबोर्ड में इस्तेमाल होता है. इसका मकसद टाइपिंग को तेज़ नहीं बल्कि टाइपराइटर को जाम होने से बचाना था.
तकनीक बदल गई, लेआउट क्यों नहीं?
आज के डिजिटल कीबोर्ड में न तो धातु की छड़ें हैं और न जाम होने का डर, फिर भी हम वही पुराना लेआउट इस्तेमाल करते हैं. वजह है आदत और ट्रेनिंग. करोड़ों लोग इसी लेआउट पर टाइप करना सीख चुके हैं. अगर अचानक ABCDE वाली सीधी लाइन वाला कीबोर्ड आ जाए तो ज्यादातर लोग टाइप ही नहीं कर पाएंगे.
क्या ABCDE लेआउट ज्यादा आसान होता?
सुनने में ABCDE सीधी लाइन वाला कीबोर्ड आसान लगता है, लेकिन असल में यह उंगलियों की मूवमेंट को ज्यादा थका देने वाला बना सकता है. QWERTY लेआउट में उंगलियों की नैचुरल पोज़िशन का ध्यान रखा गया है जिससे लंबे समय तक टाइप करना आसान होता है.
आज भी क्यों बना हुआ है ये रहस्य?
असल रहस्य यही है कि कीबोर्ड का डिज़ाइन सुविधा से ज्यादा इतिहास और आदत पर टिका है. भले ही तकनीक बदल गई हो लेकिन इंसानों की आदतें इतनी आसानी से नहीं बदलतीं. यही वजह है कि ABCDE की सीधी लाइन आज भी सिर्फ किताबों में दिखती है कीबोर्ड पर नहीं.
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या आर्मी यूज के लिए फोन और लैपटॉप को मिलता है मिलिट्री&#45;ग्रेड सर्टिफिकेशन? जानें गैजेट के लिए इसका मतलब</title>
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<description><![CDATA[ अगर आपने गौर किया है तो कई लैपटॉप और स्मार्टफोन मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन के साथ आते हैं. मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन से कुछ लोगों को लग सकता है कि किसी गैजेट को मिलिट्री यूज के लिए तैयार किया गया है और उसे मिलिट्री में यूज किया जाता है. क्या सच में ऐसा होता है या यह एक मार्केटिंग का एक तरीका है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि किसी गैजेट के मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन का क्या मतलब होता है.&amp;nbsp;
क्या होता है मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन?
मिलिट्री-ग्रेड सर्टिफिकेशन को MIL-STD-810 के लिए रेफर किया जाता है. यह एक अमेरिकी मिलिट्री का बनाया हुआ स्टैंडर्ड है, जिसके तहत वह अलग-अलग इक्विपमेंट को मुश्किल कंडीशन में टेस्ट करती है. इस स्टैंडर्ड में किसी गैजेट को टेंपरेचर, ह्यूमैडिटी, शॉक, वाइब्रेशन, डस्ट और अलग-अलग कंडीशन में टेस्ट किया जाता है. इन टेस्ट में यह देखा जाता है कि कोई इक्विपमेंट कितने कम और गर्म तापमान को झेल सकता है. इसी तरह उसे हाइट से गिराकर, धूल में रखकर आदि कई तरीकों से परखा जाता है.
लैपटॉप और स्मार्टफोन जैसे गैजेट के लिए इसका क्या मतलब?
अगर स्मार्टफोन के कॉन्टेक्स्ट में देखें तो इस सर्टिफिकेशन का मतलब यह नहीं है कि इन्हें मिलिट्री के लिए टेस्ट किया गया है. इसका मतलब है कि वह गैजेट कई ऐसे लैब टेस्ट से गुजरा है, जो उसके टिपिकल यूज केस से अलग हैं. अधिकतर सर्टिफिकेशन ड्रॉप टेस्ट से रिलेटिड होते हैं. यानी उस गैजेट को अलग-अलग हाइट से गिराकर उसकी ड्यूरैबिलिटी को टेस्ट किया जाता है. इसके अलावा कई बार डस्ट रजिस्टेंस और टेंपरेचर टॉलरेंस के टेस्ट भी किए जाते हैं. लैपटॉप की बात करें तो इसे थर्मल स्टैबिलिटी और दूसरे ड्यूरैबिलिटी टेस्ट से गुजारा जाता है, जिसमें लैपटॉप के हिंज और दूसरे मूविंग पार्ट्स को वाइब्रेशन, रिपीटेड मोशन और ड्रॉप के समय टेस्ट किया जाता है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>आसमान में दुश्मन की अब खैर नहीं! AkashTeer के लिए आर्मी खरीदेगी 30 सुपर&#45;एडवांस्ड रडार, जानिए किस टेक्नोलॉजी पर करेगी काम</title>
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<description><![CDATA[ AkashTeer: भारतीय सेना अपनी एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए 30 उन्नत लो-लेवल लाइटवेट रडार (LLLR-I) और दो क्लासरूम वेरिएंट रडार (CVR) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए करीब 725 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है. यह खरीद आपातकालीन प्रक्रिया के तहत की जाएगी ताकि सिस्टम जल्द से जल्द तैनात हो सके.
हर तरह के इलाके में काम करने की क्षमता
इन नए रडार सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे पहाड़ी क्षेत्रों, ऊंचाई वाले इलाकों, मैदानी क्षेत्रों, अर्ध-रेगिस्तान, रेगिस्तान और तटीय क्षेत्रों जैसे अलग-अलग भौगोलिक हालात में प्रभावी ढंग से काम कर सकें. इससे सेना को देश की सीमाओं और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी में बड़ी मदद मिलेगी.
AkashTeer सिस्टम से सीधा इंटीग्रेशन
अपग्रेडेड LLLR-I रडार को AkashTeer कमांड एंड रिपोर्टिंग सिस्टम के साथ पूरी तरह संगत होना जरूरी होगा. इसमें इसका गेटवे हार्डवेयर, इन-बिल्ट सॉफ्टवेयर और आर्मी डेटा नेटवर्क से जुड़े साइबर मानकों का पालन शामिल है. यह रडार एयर सर्विलांस टूल के रूप में काम करेगा जो आसमान में मौजूद खतरों को पहचानने, ट्रैक करने और उनकी प्राथमिकता तय करने में सक्षम होगा. एक साथ सैकड़ों हवाई लक्ष्यों को संभालने की क्षमता भी इसमें शामिल होगी.
कई कमांड पोस्ट को एक साथ जानकारी
RFP के मुताबिक, यह रडार कम से कम 20 लक्ष्यों की जानकारी एक समय में 10 कमांड पोस्ट या 10 हथियार प्रणालियों तक भेज सकेगा. ये सिस्टम 20 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद टारगेट डेटा रिसीवर से लाइन, रेडियो या रेडियो रिले लिंक के जरिए जुड़ सकेंगे. जरूरत पड़ने पर इसे 20 TDR तक बढ़ाया जा सकेगा. इसके साथ ही, इसमें कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का होना अनिवार्य रखा गया है.
समयसीमा और लंबी उम्र की शर्त
डिलीवरी को लेकर सख्त समयसीमा तय की गई है. एडवांस भुगतान के 12 महीनों के भीतर पहले 15 LLLR-I यूनिट और एक CVR देना होगा जबकि बाकी सिस्टम अगले छह महीनों में सौंपे जाएंगे. इन उपकरणों की न्यूनतम सेवा अवधि 10 साल तय की गई है ताकि लंबे समय तक इनकी विश्वसनीयता बनी रहे.
ट्रेनिंग और रखरखाव पर भी जोर
निर्माताओं को ऑपरेटर, ट्रेनर और मेंटेनेंस स्टाफ के लिए पूरी ट्रेनिंग देनी होगी. साथ ही, पहले सिस्टम की वारंटी खत्म होने से 3 से 6 महीने पहले रखरखाव से जुड़ी ट्रेनिंग भी अनिवार्य होगी. LLLR-I सिस्टम में सर्च रडार, कमांडर डिस्प्ले यूनिट, टारगेट डेजिग्नेशन सिस्टम और पावर सप्लाई यूनिट शामिल होंगी जिन्हें जरूरत के हिसाब से तैनात कर संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा की जाएगी.
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Instagram से कमाई के क्या है नियम? जानिए रील पर 10 हजार व्यूज पर कितने पैसे मिलते हैं</title>
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<description><![CDATA[ Instagram: आज के समय में Instagram सिर्फ फोटो और वीडियो शेयर करने का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है बल्कि यह लाखों युवाओं के लिए कमाई का जरिया भी बन चुका है. खासतौर पर Reels ने क्रिएटर्स को तेजी से पहचान और पैसा दोनों दिलाया है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि Instagram से कमाई करने के नियम क्या हैं और 10 हजार व्यूज पर आखिर कितने पैसे मिलते हैं?
Instagram से कमाई के लिए जरूरी नियम
Instagram पर कमाई करने के लिए सबसे पहले आपको Meta की पॉलिसी और मोनेटाइजेशन गाइडलाइंस को फॉलो करना होता है. आपका अकाउंट प्रोफेशनल होना चाहिए यानी Creator या Business Account. कंटेंट ओरिजिनल होना जरूरी है, कॉपी या री-अपलोड किए गए वीडियो पर कमाई नहीं होती. इसके अलावा आपकी प्रोफाइल पर Community Guidelines का कोई उल्लंघन नहीं होना चाहिए. उम्र कम से कम 18 साल और अकाउंट पब्लिक होना भी जरूरी शर्तों में शामिल है.
क्या Instagram सीधे Reels पर पैसे देता है?
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. Instagram हर देश में और हर क्रिएटर को सीधे Reels के व्यूज पर पैसे नहीं देता. पहले Meta का Reels Bonus Program चलता था जिसमें चुनिंदा क्रिएटर्स को व्यूज के हिसाब से पैसे मिलते थे. फिलहाल भारत में ज्यादातर क्रिएटर्स की कमाई ब्रांड डील, स्पॉन्सरशिप और एफिलिएट मार्केटिंग से होती है न कि सीधे Instagram की तरफ से.
10 हजार व्यूज पर कितने पैसे मिलते हैं?
अगर बात सीधे Instagram Bonus की करें तो 10 हजार व्यूज पर कमाई बहुत ज्यादा नहीं होती. अलग-अलग रिपोर्ट्स और क्रिएटर्स के अनुभव के अनुसार, 10 हजार व्यूज पर लगभग 20 से 100 रुपये तक मिल सकते हैं वो भी तब जब आपका अकाउंट किसी एक्टिव बोनस प्रोग्राम में शामिल हो. वहीं अगर आपकी रील पर अच्छा एंगेजमेंट है और आपकी niche मजबूत है तो ब्रांड डील के जरिए 10 हजार व्यूज से कहीं ज्यादा कमाई हो सकती है.
ब्रांड डील से होती है असली कमाई
असल पैसा Instagram पर ब्रांड प्रमोशन से आता है. अगर आपके 10 से 50 हजार फॉलोअर्स हैं और आपकी रील्स पर अच्छा व्यू और लाइक मिलते हैं तो ब्रांड आपको एक पोस्ट या रील के लिए 2 हजार से 10 हजार रुपये तक दे सकते हैं. बड़े क्रिएटर्स के लिए यह रकम लाखों तक भी पहुंच जाती है.
Instagram से कमाई बढ़ाने के स्मार्ट टिप्स
अगर आप Instagram से कमाई करना चाहते हैं तो किसी एक niche पर फोकस करें, जैसे टेक, फाइनेंस, फैशन या एजुकेशन. रील्स में ट्रेंडिंग ऑडियो, सही हैशटैग और रेगुलर पोस्टिंग बहुत जरूरी है. साथ ही ऑडियंस से जुड़ाव बढ़ाएं क्योंकि ज्यादा एंगेजमेंट ही ज्यादा कमाई की चाबी है.
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Tech Explained: ऐप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियां सिलिकॉन&#45;कार्बन बैटरी यूज क्यों नहीं कर रहीं? जानें क्या हैं चिंताएं</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ महीनों से देखें तो कई कंपनियों ने 7000+ mAH की बैटरी वाले फोन लॉन्च किए हैं. Honor और Realme जैसी कंपनियां अपने फोन्स में 10,000mAh से भी बड़ा बैटरी पैक दे चुकी हैं. कई और कंपनियां भी इस राह पर जाने को तैयार हैं. दरअसल, ये कंपनियां अपने फोन में सिलिकॉन-कार्बन बैटरी पैक यूज करती हैं, जो कम स्पेस में ज्यादा एनर्जी स्टोर कर सकता है. इससे फोन का साइज बढ़ाए बिना उनमें ज्यादा कैपेसिटी दी जा सकती है. दूसरी कंपनियों से बढ़ते मुकाबले और यूजर्स के काम की चीज होने के बाद भी ऐप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियां अभी भी लिथियम-आयन बैटरी पर टिकी हुई हैं. इन दोनों कंपनियों के लेटेस्ट और महंगे से महंगे फोन में भी अधिकतर 5,000mAh की बैटरी ही मिलती है. आज के एक्सप्लेनर में हम जानेंगे कि बाकी कंपनियों की राह पर चलते हुए सैमसंग और ऐप्पल सिलिकॉन-कार्बन बैटरी यूज क्यों नहीं कर रही हैं.
क्या होती है सिलिकॉन-कार्बन बैटरी?
सिलिकॉन-कार्बन बैटरी नई तरह की बैटरी सेल है, जो सिलिकॉन एनोड्स के साथ आती है. इसमें एनर्जी डेन्सिटी ज्यादा होती है, जिसका मतलब है कि यह कम स्पेस में ज्यादा एनर्जी स्टोर कर सकती है. ट्रेडिशनल लिथियम-आयन बैटरी की बात करें तो इनमें ग्रेफाइट एनोड होते हैं. इनकी एनर्जी डेन्सिटी 250-300 Wh/kg ग्राम होती है, जबकि इनकी तुलना में सिलिकॉन-कार्बन बैटरी 400-500 Wh/kg रेंज के साथ आती है.
बड़ी कंपनियां इसे यूज करने से हिचकिचा क्यों रही हैं?
लॉन्ग-टर्म यूज को लेकर संशय- सिलिकॉन-कार्बन बैटरी जैसे ही पुराने होने लगती है, इसकी कैपेसिटी कम होने लगती है. नई बैटरी की कैपेसिटी भले ही शानदार लगे, लेकिन इंजीनियरों ने पाया कि 1-2 साल के बाद इनकी कैपेसिटी तेजी से कम होने लगती है. दरअसल, चार्जिंग साइकिल के कारण सिलिकॉन की स्ट्रक्चर पर असर पड़ता है और यह कुछ ही समय बाद अधिक देर तक पावर को स्टोर नहीं कर पाता. सैमसंग और ऐप्पल जैसी कंपनियों के लिए ऐसी मुश्किल समस्या खड़ी कर सकती है क्योंकि ये कंपनियां अपने लॉन्ग-टर्म ड्यूरैबिलिटी के दावे के साथ अपने फोन बेचती हैं.
स्वैलिंग प्रॉब्लम भी चिंता का कारण- सिलिकॉन-कार्बन बैटरी को लेकर सेफ्टी चिंता भी अभी तक पूरी तरह दूर नहीं हुई है. दरअसल, सिलिकॉन एनोड फूलने पर अपने आकार से 3-4 गुना बढ़ सकते हैं. ऐसे में अगर इस बैटरी में कभी स्वैलिंग आती है तो फोन और यहां तक कि आपकी पैंट की जेब भी इसे हैंडल नहीं कर पाएगी. इसे रोकने के लिए सिलिकॉन को कार्बन के साथ मिलाया जाता है, लेकिन फिर भी कंपनियां इसकी सेफ्टी को लेकर 100 परसेंट स्योर नहीं हैं. बैटरी को लेकर सैमसंग अभी भी गैलेक्सी नोट 7 की घटनाओं को भूली नही है. इसलिए वह इस मामले में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती. वहीं ऐप्पल भी नई टेक्नोलॉजी को लेकर सेफ खेलती है.
मैन्युफैक्चरिंग भी एक बड़ा मुद्दा- ऐप्पल हर साल 20 करोड़ से अधिक आईफोन शिप करती है. सैमसंग भी इस मामले में ज्यादा पीछे नहीं है. ऐसे में अगर ये कंपनियां अचानक से बैटरी जैसी फंडामेंटल चीज को बदलती है तो मैन्युफैक्चरिंग पर इसका असर पड़ना तय है. यह अरबों-खरबों का सौदा है और इसके लिए एकदम से मैन्युफैक्चरिंग को नहीं बदला जा सकता. सिलिकॉन-कार्बन बैटरी बनाने के लिए एडवांस्ड प्रोसेस की जरूरत पड़ती है और इन कंपनियों के लिए बड़ी मात्रा में मैटेरियल हासिल करना भी सिरदर्दी का काम बन सकता है.
रेगुलेशन भी एक कारण- फोन में लगी बैटरी सिर्फ ग्राहक और कंपनी के बीच का मामला नहीं है. इस पर रेगुलेटरी और कानूनी एजेंसियों की भी नजरें होती हैं. उदाहरण के तौर पर अमेरिका में शिपिंग के लिए 20 watt-hours से अधिक वाली सिंगल बैटरी सेल को &#039;डेंजरस गुड&#039; में गिना जाता है. ऐसे में अगर कोई बैटरी इस थ्रेसहोल्ड को पार कर जाती है तो कंपनियों को उसके लिए ज्यादा पेपरवर्क करना पड़ेगा. साथ ही इसके लिए ट्रांसपोर्ट नियम भी कड़े हो जाएंगे और इसे ट्रांसपोर्ट करने की लागत भी बढ़ेगी. इससे कंपनियों के लिए फोन शिप करना महंगा हो जाएगा और सीधा असर कीमत पर पड़ेगा. साथ ही कई देशों में सेफ थ्रेसहोल्ड से आगे जाने पर रेगुलेटरी अप्रूवल मिलना मुश्किल हो जाता है. इन सब कारणों को देखते हुए ऐप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियां अभी तक लिथियम-आयन बैटरी पर ही टिकी हुई हैं.
तो क्या ये कंपनियां कभी सिलिकॉन-कार्बन बैटरी वाले फोन नहीं लाएंगी?
ऐसा नहीं है कि ऐप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियां किसी नई टेक्नोलॉजी से खुद को दूर रखती हैं. हालांकि, ये बाकी कंपनियों की तुलना में थोड़ा एहतियात के साथ आगे बढ़ती हैं. फिलहाल छोटी कंपनियां अपने स्मार्टफोन्स में इस टेक्नोलॉजी को यूज कर रही हैं, जिससे रियल-वर्ल्ड एक्सपीरियंस मिल पाएगा. अगर छोटी कंपनियों की ये कोशिश सफल रहती है और सेफ्टी से जुड़ी कोई नई चिंता सामने नहीं आती है तो अगले कुछ समय में सैमसंग और ऐप्पल भी इस बैटरी टेक्नोलॉजी को अपना सकती हैं.
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:50 +0530</pubDate>
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<title>घर में पड़ी है पुरानी टैबलेट? इस तरह करेंगे यूज तो पैसे भी बचेंगे, काम भी आएगी</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने कई साल पहले टैबलेट खरीद ली थी और अब इसे यूज नहीं कर पा रहे हैं. कारण इसके पुराने होने से लेकर स्टोरेज खत्म होने तक कुछ भी हो सकता है. अगर आपके पास पुरानी टैब है तो कबाड़ में फेंकने या कम कीमत पर किसी को बेचने की बजाय आप इसे नई लाइफ दे सकते हैं. आज हम आपको पुरानी टैब के कुछ क्रिएटिव यूज बताने जा रहे हैं, जिससे आपके कई काम आसान हो जाएंगे और नया डिवाइस खरीदने के लिए पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा.&amp;nbsp;
कॉमिक बुक रीडर
अगर आपको या आपकी फैमिली में किसी को कॉमिक बुक पढ़ने का शौक है तो पुरानी टैब उनके खूब काम आ सकती है. किंडल आदि ई-रीडर में कॉमिक बुक पढ़ने में खास मजा नहीं आता. इन पर डायलॉग बॉक्स को लगातार जूम करना पड़ता है और पैनल लेआउट भी ठीक तरीके से नहीं दिखते. दूसरी तरफ पुरानी टैब आपको एकदम शार्प कलर दिखाएगी और आपको पढ़ने में भी मजा आएगा.
स्मार्ट होम डैशबोर्ड
अगर आपने अपने घर को स्मार्ट होम बनाया हुआ है और हर दरवाजे पर रिंग सेंसर, अलेक्सा और दूसरे डिवाइसेस यूज करते हैं तो इन्हें कंट्रोल करने के लिए पुरानी टैब को यूज कर सकते हैं. यह आपके स्मार्ट होम डैशबोर्ड के तौर पर काम आ सकती है. इस पर आप लगातार CCTV कैमरा फुटेज भी देख सकते हैं और यहीं से सारे डिवाइस कंट्रोल हो जाएंगे.
डिजिटल फोटो फ्रेम&amp;nbsp;बाजार में मिलने वाले डिजिटल फोटो फ्रेम की तुलना में टैब की स्क्रीन क्वालिटी कई गुना बेहतर होती है. अगर आप इसे डिजिटल फोटो फ्रेम बनाते हैं तो आपको हर बार इस पर नई फोटो देखने को मिलेगी. इससे आपकी टैब भी यूज हो जाएगी और आपके कमरे को भी एक नया लुक मिलेगा.
सेकंड मॉनिटर
ऐप्पल साइडकार और स्पेसडेस्क जैसे फीचर किसी भी कंपैटिबल आईपैड और टैब्स को सेकेंडरी डिस्प्ले में कन्वर्ट कर सकते हैं. अगर लैपटॉप पर काम करते हुए आपको इसकी स्क्रीन छोटी लगती है तो आप अपनी पुरानी टैब को सेकेंडरी मॉनिटर बना सकते हैं. इससे वीडियो कॉलिंग से लेकर प्रेजेंटेशन बनाने तक के काम आसान हो जाएंगे.
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या बिना टावर चलेगा मोबाइल? Starlink फोन को लेकर Elon Musk ने तोड़ी चुप्पी, सच जानकर उड़ जाएंगे होश!</title>
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<description><![CDATA[ Starlink Mobile: हाल ही में एलन मस्क को लेकर यह चर्चा तेज हो गई थी कि वह जल्द ही Starlink ब्रांड के नाम से एक स्मार्टफोन लॉन्च कर सकते हैं. शुरुआत में खुद मस्क ने इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया था लेकिन अब उन्होंने इन खबरों पर साफ जवाब दे दिया है. फिलहाल, Starlink फोन के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
सोशल मीडिया पर अफवाह और मस्क की प्रतिक्रिया

We are not developing a phone
&amp;mdash; Elon Musk (@elonmusk) February 5, 2026



X (पहले ट्विटर) पर एक यूजर ने Reuters की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया था कि SpaceX, Starlink नाम से एक फोन बना सकता है. इस पर एलन मस्क ने सीधे तौर पर इन अटकलों को नकार दिया. उन्होंने साफ शब्दों में लिखा, &amp;ldquo;हम कोई फोन विकसित नहीं कर रहे हैं.&amp;rdquo; इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि अभी Starlink फोन पर कोई काम नहीं चल रहा है.
Starlink क्यों बना चर्चा का केंद्र?
Starlink, SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद हजारों सैटेलाइट्स के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, SpaceX की कुल कमाई का बड़ा हिस्सा Starlink से आता है. पिछले साल कंपनी ने करीब 8 बिलियन डॉलर का मुनाफा दर्ज किया था. हाल ही में SpaceX का xAI के साथ विलय भी हुआ है और आने वाले समय में IPO की भी चर्चा है.
एलन मस्क ने Starlink फोन को लेकर पहले क्या कहा था?
कुछ दिन पहले एलन मस्क ने एक पोस्ट के जवाब में कहा था कि भविष्य में Starlink फोन की संभावना पूरी तरह नकारा नहीं जा सकती. उस वक्त उन्होंने लिखा था, किसी समय यह असंभव नहीं है. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया था कि इस दिशा में फिलहाल कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है.
कैसा हो सकता था Starlink फोन?
मस्क के मुताबिक, अगर कभी Starlink फोन आया तो वह आज के iPhone या Android फोन से बिल्कुल अलग होगा. उनका फोकस पारंपरिक फीचर्स से ज्यादा ऑन-डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर हो सकता है. मस्क ने इशारा किया था कि ऐसा फोन कम पावर में ज्यादा से ज्यादा AI परफॉर्मेंस देने के लिए डिजाइन किया जाएगा.
भविष्य में Starlink फोन की संभावना क्यों बनती है?
हालांकि अभी मस्क ने Starlink फोन की बात को टाल दिया है लेकिन आगे चलकर यह SpaceX के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. Starlink के दुनियाभर में करीब 90 लाख यूजर्स हैं और यह 30 से ज्यादा एयरलाइंस के साथ काम कर रहा है. इसके अलावा कंपनी के कई सरकारी और सैन्य कॉन्ट्रैक्ट भी हैं.
SpaceX की आगे की रणनीति
SpaceX का पोर्टफोलियो लगातार बढ़ रहा है. कंपनी Stargaze जैसे स्पेस-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है और T-Mobile जैसी कंपनियों के साथ मिलकर डायरेक्ट-टू-डिवाइस इंटरनेट सेवाओं की दिशा में भी आगे बढ़ रही है. पहले Starlink Mobile जैसे नामों से जुड़े ट्रेडमार्क और कनेक्टिविटी से जुड़े पेटेंट भी दर्ज किए जा चुके हैं.
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Google का रेड अलर्ट! करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स खतरे में, ये एक सेटिंग नहीं बदली तो पड़ सकता है भारी</title>
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<description><![CDATA[ Google का रेड अलर्ट! करोड़ों स्मार्टफोन यूजर्स खतरे में, ये एक सेटिंग नहीं बदली तो पड़ सकता है भारी ]]></description>
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:47 +0530</pubDate>
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<title>पानी के नीचे कितनी देर रह सकता है वाटरप्रूफ फोन? जानिए क्या होता है IP68 और IP69 रेटिंग का मतलब</title>
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<description><![CDATA[ आजकल कई लेटेस्ट फोन के वाटर-रजिस्टेंट होने का दावा किया जाता है. इसके लिए कंपनियां IP रेटिंग यूज करती है, जिसके जरिए यह दिखाया जाता है कि कोई फोन कितनी वाटर प्रोटेक्शन के साथ आ रहा है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि वाटर प्रूफ और वाटर रजिस्टेंट में क्या फर्क होता है और जो IP68, IP69 और IPX8 रेटिंग यूज की जाती है, उसका क्या मतलब होता है.&amp;nbsp;
वाटरप्रूफ और वाटर रजिस्टेंट में क्या अंतर होता है?
वाटर रजिस्टेंट फोन पानी की बूंदों और बारिश आदि को झेल सकता है, लेकिन इसे ज्यादा समय तक पानी में रखने के लिए डिजाइन नहीं किया जाता है. दूसरी तरफ वाटरप्रूफ फोन को कड़े इमर्शन टेस्ट से गुजारा जाता है और यह एक निश्चित गहराई में लंबे समय तक रह सकता है. हालांकि, फिर भी स्विमिंग पूल आदि में ज्यादा समय तक पहने पर इसके खराब होने का खतरा बना रहता है.
रेटिंग का क्या मतलब?
क्या आपका फोन वाटरप्रूफ है? इसका जवाब उसकी IP रेटिंग से मिल जाएगा. IP का पूरा नाम इनग्रेस प्रोटेक्शन होता है और इसके आगे लिखे नंबर यह बताते हैं कि यह डस्ट और पानी के प्रति कितना रजिस्टेंट है. इस रेटिंग में दो नंबर होते हैं. पहला नंबर डस्ट के प्रति प्रोटेक्शन को दिखाता है और इसकी रेंज 0-6 होती है. दूसरा नंबर पानी और दूसरे लिक्विड के प्रति प्रोटेक्शन दिखाता है और इसकी रेंज 0-9 तक होती है.&amp;nbsp;
IP68- इस रेटिंग में 6 का मतलब है कि डिवाइस फुल डस्ट प्रूफ है. वहीं 8 नंबर दिखाता है कि यह 30 मिनट तक 1.5 मीटर गहरे पानी में रह सकता है. हालांकि, कुछ फोन इससे भी ज्यादा समय और गहराई तक पानी में सुरक्षित रह सकते हैं. इस रेटिंग वाले फोन को पूल, बारिश और हल्के बहाव वाले पानी के नीचे फोटो लेने के लिए यूज किया जा सकता है.
IP69- इस रेटिंग का मतलब है कि यह फोन हाई प्रैशर और हाई टेंपरेचर वाले पानी को आसानी से झेल सकता है. मुश्किल कंडीशन में काम कर सकने वाले फोन में यह रेटिंग मिलती है, जहां फोन कई बार तेज बहाव के संपर्क में आ जाता है.&amp;nbsp;
IPX8- इसमें पहले डिजिट की जगह X का इस्तेमाल किया गया है, जो दिखाता है कि इसे डस्ट प्रोटेक्शन के लिए टेस्ट नहीं किया गया है. वहीं 8 नंबर का मतलब है कि यह फोन लगभग 1.5 मीटर तक की गहराई में कुछ देर तक रह सकता है. ये फोन आमतौर पर स्विमिंग और बारिश के दौरान इस्तेमाल के लिए सेफ होते हैं.
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<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:47 +0530</pubDate>
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<title>सिर्फ महिलाओं के लिए बने ये 5 स्मार्ट गैजेट्स! पांचवां ऐसा है कि हर लड़की कहेगी – ये तो मुझे चाहिए ही!</title>
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<description><![CDATA[ सिर्फ महिलाओं के लिए बने ये 5 स्मार्ट गैजेट्स! पांचवां ऐसा है कि हर लड़की कहेगी – ये तो मुझे चाहिए ही! ]]></description>
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 16:06:03 +0530</pubDate>
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<title>नए Apple MacBook Pro का इंतजार जल्द होगा खत्म, नई चिप के साथ किया जाएगा अपग्रेड, जानें क्या होंगे बदलाव</title>
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<description><![CDATA[ Apple MacBook Pro: MacBook Pro के नए मॉडल्स का इंतजार जल्द ही खत्म हो सकता है. ऐप्पल ने इसे लेकर अभी तक कोई ऑफिशियल ऐलान नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अगले कुछ हफ्तों में MacBook Pro मॉडल्स को M5 Pro और M5 Max चिपसेट से अपग्रेड कर सकती है. कहा जा रहा है कि macOS 26.3 सॉफ्टवेयर साइकिल के दौरान अपग्रेड मैकबुक उतारे जा सकते हैं. यह साइकिल फरवरी-मार्च के बीच चलता है. ऐसे में नए मैकबुक प्रो मॉडल की लॉन्चिंग अब ज्यादा दूर नहीं दिख रही है. बता दें कि ऐप्पल 2026 में 20 नए प्रोडक्ट्स लाएगी, जिनमें से यह एक होगा.&amp;nbsp;&amp;nbsp;नए मॉडल्स में क्या बदलेगा?
डिजाइन के मामले में नए मॉडल में ज्यादा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है. ऐप्पल 2021 में लाए गए मैकबुक प्रो के डिजाइन को हर चिप जनरेशन में कैरी फॉरवर्ड करती आई है और अपकमिंग M5 Pro और M5 Max मॉडल में भी यही डिजाइन कंटिन्यू रहने की संभावना है. हालांकि, इस बार कंपनी ने कलर ऑप्शन लॉन्च कर सकती है. डिस्प्ले की बात करें तो पीक ब्राइटनेस में थोड़ा बदलाव किया जा सकता है. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि नया OLED डिस्प्ले, पतली चेसिस और नए स्टाइल का कैमरा M6 लाइनअप के साथ दिया जा सकता है. इसका मतलब है कि रीडिजाइन्ड मैकबुक प्रो मॉडल के लिए आपको थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा.
कैमरा में भी ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं
मैकबुक प्रो के M5 Pro और M5 Max मॉडल में कैमरा अपग्रेड की भी संभावना नहीं दिख रही. इसमें भी मौजूदा मॉडल वाला 12MP फेसटाइम कैमरा मिलेगा, लेकिन प्रोफेशनल यूजर्स के लिए इसकी परफॉर्मेंस को बूस्ट किया गया है. ओवरऑल अपग्रेड की बात करें तो M5 Pro और M5 Max दोनों ही TSMC की थर्ड-जनरेशन 3nm प्रोसेस पर तैयार हुई है और मौजूदा मॉडल की तुलना में 15-25 प्रतिशत तक बेहतर परफॉर्मेंस दे सकती है. साथ ही यूजर्स को इसमें इम्प्रूव्ड ग्राफिक्स और एआई कैपेबिलिटीज मिलेंगी.
कितनी रह सकती है कीमत?
जानकारी के अनुसार, ऐप्पल M5 Pro और M5 Max के इंटरनल लेआउट पर नए सिरे से काम कर रही है, जिसे फ्लेक्सिबल कॉन्फिगरेशन की सहूलियत मिलेगी और थर्मल मैनेजमेंट भी बेहतर होगा. नए मॉडल में मेमोरी और स्टोरेज भी मौजूदा जनरेशन के बराबर रहने की उम्मीद है. कीमत की बात करें तो यहां भी ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा और ये 1.89 लाख से 2.09 लाख रुपये की रेंज में लॉन्च हो सकते हैं.
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 16:06:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Instagram ला रहा है नया कंट्रोल फीचर! Close Friends से खुद को हटाने का मिलेगा ऑप्शन</title>
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<description><![CDATA[ Instagram New Feature: Instagram अपने यूजर्स को ज्यादा कंट्रोल और प्राइवेसी देने के लिए लगातार नए फीचर्स पर काम कर रहा है. अब खबर है कि Meta के स्वामित्व वाला यह प्लेटफॉर्म एक ऐसे फीचर की टेस्टिंग कर रहा है जिससे आप खुद को किसी दूसरे यूजर की Close Friends लिस्ट से हटा सकेंगे. फिलहाल यह फीचर शुरुआती स्टेज में है और अभी आम यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया है.
Close Friends फीचर क्या है और इसमें क्या बदलेगा?
साल 2018 में लॉन्च हुआ Close Friends फीचर यूजर्स को यह सुविधा देता है कि वे अपनी Stories और Reels सिर्फ चुनिंदा लोगों के साथ शेयर कर सकें. अभी तक अगर कोई आपको अपनी Close Friends लिस्ट में जोड़ता है तो आपके पास खुद को हटाने का कोई विकल्प नहीं होता. लेकिन नए अपडेट के बाद आप चाहें तो खुद ही उस लिस्ट से बाहर निकल सकेंगे. ऐसा करने पर उस यूजर की प्राइवेट Stories और Reels आपको तब तक दिखाई नहीं देंगी जब तक वह दोबारा आपको ऐड न करे.
प्रीमियम फीचर्स की भी झलक, सब्सक्रिप्शन की तैयारी?
इस आने वाले फीचर की जानकारी रिवर्स इंजीनियर Alessandro Paluzzi ने दी है. उन्होंने यह भी देखा कि Instagram कुछ नए सब्सक्रिप्शन आधारित टूल्स पर काम कर रहा है. इनमें अनलिमिटेड ऑडियंस लिस्ट बनाने की सुविधा, यह देखने का विकल्प कि कौन आपको फॉलो बैक नहीं कर रहा और बिना सामने वाले को पता चले Stories देखने जैसे फीचर्स शामिल हो सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि Snapchat पहले से ही ऐसा फीचर देता है जहां यूजर्स खुद को किसी की प्राइवेट स्टोरी से हटा सकते हैं. अब Instagram भी इसी दिशा में कदम बढ़ाता दिख रहा है.
Instagram, Facebook और WhatsApp के लिए आ सकता है पेड प्लान
हाल ही में Meta ने संकेत दिए हैं कि वह Instagram, Facebook और WhatsApp के लिए नए सब्सक्रिप्शन प्लान्स की टेस्टिंग कर सकता है. हालांकि कंपनी ने अभी पूरी जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि इन प्रीमियम प्लान्स के जरिए यूजर्स को ज्यादा एडवांस कंट्रोल और एक्सक्लूसिव फीचर्स मिलेंगे. अच्छी बात यह है कि Instagram के बेसिक और जरूरी फीचर्स पहले की तरह फ्री ही रहेंगे.
अपने Instagram अकाउंट को सुरक्षित कैसे रखें?
अगर आप Instagram का इस्तेमाल करते हैं तो अकाउंट की सुरक्षा पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. इसके लिए सबसे पहले एक मजबूत और यूनिक पासवर्ड बनाएं, जिसमें अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर शामिल हों. टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को ऑन करना भी जरूरी है ताकि लॉगिन के समय अतिरिक्त सुरक्षा मिल सके.
अनजान लिंक पर क्लिक करने या DM और ईमेल में अपनी लॉगिन डिटेल्स शेयर करने से बचें. समय-समय पर यह चेक करते रहें कि आपका अकाउंट किन-किन डिवाइसेज़ में लॉगिन है और किसी अनजान डिवाइस को तुरंत हटा दें. साथ ही जिन थर्ड-पार्टी ऐप्स का आप इस्तेमाल नहीं करते उन्हें अकाउंट से रिमूव करना भी सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद होता है. Instagram के आने वाले ये बदलाव साफ संकेत देते हैं कि प्लेटफॉर्म अब यूजर्स को ज्यादा प्राइवेसी, कंट्रोल और सेफ्टी देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:02:18 +0530</pubDate>
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<title>Bluetooth चुपचाप खा रहा है बैटरी? जानिए कितना ड्रेन होता है पावर और कैसे बचाएं फोन का चार्ज</title>
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<description><![CDATA[ Bluetooth: आज के समय में Bluetooth स्मार्टफोन का एक आम फीचर बन चुका है. वायरलेस ईयरफोन, स्मार्टवॉच, कार सिस्टम या फाइल शेयरिंग हर जगह Bluetooth का इस्तेमाल होता है. इसी वजह से कई लोग इसे पूरे दिन ऑन रखते हैं. लेकिन मन में सवाल रहता है कि क्या Bluetooth सच में फोन की बैटरी तेजी से खत्म करता है या यह सिर्फ एक गलतफहमी है.
क्या Bluetooth सच में बैटरी खाता है?
आधुनिक स्मार्टफोन्स में Bluetooth पहले की तुलना में काफी पावर-एफिशिएंट हो गया है. इसकी वजह है Bluetooth Low Energy यानी BLE टेक्नोलॉजी जो बहुत कम बिजली में काम करती है. अगर आपके फोन में Bluetooth ऑन है लेकिन किसी डिवाइस से कनेक्ट नहीं है तो यह बैकग्राउंड में लगभग न के बराबर बैटरी इस्तेमाल करता है.
आमतौर पर पूरा दिन Bluetooth चालू रहने पर कुल बैटरी का सिर्फ 1 से 3 प्रतिशत ही खर्च होता है. यानी केवल Bluetooth की वजह से फोन जल्दी डिस्चार्ज नहीं होता. हां, बहुत पुराने स्मार्टफोन्स में हार्डवेयर पुराना होने के कारण बैटरी खपत थोड़ी ज्यादा हो सकती है.
इस्तेमाल के दौरान कितनी बैटरी होती है खर्च?
जब Bluetooth किसी डिवाइस से कनेक्ट होता है जैसे वायरलेस ईयरबड्स, स्मार्टवॉच या कार सिस्टम&amp;mdash;तो बैटरी की खपत थोड़ी बढ़ जाती है. म्यूजिक स्ट्रीमिंग या कॉल के दौरान लगातार डेटा ट्रांसफर होता रहता है. ऐसे में एक घंटे तक Bluetooth ईयरफोन से गाने सुनने पर करीब 4 से 6 प्रतिशत बैटरी खर्च हो सकती है.
हालांकि, यह आंकड़ा फोन के मॉडल और Bluetooth वर्जन पर निर्भर करता है. फिर भी, सामान्य तौर पर Bluetooth की बैटरी खपत Wi-Fi या मोबाइल डेटा से कम ही होती है.
Bluetooth इस्तेमाल करते समय बैटरी बचाने के आसान तरीके
Bluetooth ज्यादा बैटरी नहीं खाता लेकिन कुछ छोटी आदतें अपनाकर आप बैटरी और बेहतर तरीके से बचा सकते हैं. जब Bluetooth की जरूरत न हो तो उसे बंद कर देना समझदारी है. ऐसे डिवाइस जो अपने आप कनेक्ट हो जाते हैं उन्हें डिस्कनेक्ट रखें.
फोन और Bluetooth एक्सेसरीज़ को हमेशा लेटेस्ट सॉफ्टवेयर अपडेट पर रखें, क्योंकि नए अपडेट पावर एफिशिएंसी को बेहतर बनाते हैं. साथ ही, Bluetooth Low Energy सपोर्ट करने वाले नए डिवाइस इस्तेमाल करने से भी बैटरी की खपत कम होती है.
लंबे समय तक म्यूजिक स्ट्रीमिंग या कॉल करने पर बैटरी ज्यादा खर्च हो सकती है इसलिए जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करें. फोन की बैटरी सेटिंग्स में जाकर आप यह भी देख सकते हैं कि Bluetooth कितना पावर इस्तेमाल कर रहा है जिससे बैटरी मैनेज करना आसान हो जाता है.
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:02:17 +0530</pubDate>
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<title>स्कैम कॉल्स से मिलेगी मुक्ति, रियल टाइम में मिलेंगे सेफ्टी अलर्ट्स, Galaxy S26 सीरीज में आ सकता है यह धाकड़ फीचर</title>
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<description><![CDATA[ आजकल स्कैम कॉल्स से हर मोबाइल यूजर परेशान हैं. इसे देखते हुए सैमसंग अपनी अपकमिंग फ्लैगशिप Galaxy S26 सीरीज में एक ऐसा फीचर ला सकती है, जो स्कैम कॉल्स से छुटकारा दिला सकता है. अभी तक यह स्कैम कॉल डिटेक्शन फीचर केवल गूगल पिक्सल फोन्स में मिलता आया है और अब सैमसंग यूजर्स भी इसका फायदा उठा पाएंगे. आइए जानते हैं कि यह फीचर क्या है और कैसे काम करता है.&amp;nbsp;
कैसे काम करता है स्कैम कॉल डिटेक्शन फीचर?
यह फीचर कॉल के दौरान बैकग्राउंड में काम करता है. अगर इस फीचर को लगता है कि किसी कॉल पर स्कैम हो सकता है तो यह रियल-टाइम में यूजर को अलर्ट कर देता है. यह नोटिफिकेशन, साउंड और वाइब्रेशन से यूजर को सतर्क कर देता है, जिससे वह बड़ा नुकसान होने से पहले कॉल कट कर सकता है. सबसे पहले यह फीचर गूगल पिक्सल 9 सीरीज के साथ आया था. अभी यह पिक्सल 6 सीरीज और उसके बाद लॉन्च हुए मॉडल्स पर अवेलेबल है. अब इसे दूसरी कंपनियों के मॉडल्स पर भी लाया जा रहा है&amp;nbsp;
सैमसंग से होगी शुरुआत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सैमसंग डिवाइसेस के साथ इस फीचर के दायरे को बढ़ाया जा सकता है. दावा किया जा रहा है कि गूगल एंड्रॉयड कॉलकोर नाम की एक अलग ऐप के जरिए इस फीचर को दूसरे मॉडल्स के लिए भी अवेलेबल करवाएगी. यह ऐप फोन कॉलिंग बेस्ड फीचर के इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करती है और इसकी लेटेस्ट अपडेट के बाद यह स्कैम कॉल भी डिटेक्ट कर सकती है. इस ऐप को केवल स्पेसिफिक फीचर फ्लैग वाले डिवाइस पर इंस्टॉल किया जा सकता है और Galaxy S26 Ultra में यह फ्लैग मिलने की पूरी संभावना है. अगर ये रिपोर्ट्स सही होती हैं तो इसका मतलब है कि सैमसंग का अपकमिंग फ्लैगशिप डिवाइस स्कैम डिटेक्शन के लिए गूगल की फोन ऐप पर निर्भर नहीं रहेगा.
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:02:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोन के साथ कभी न करें ये सेफ्टी मिस्टेक, भारी गड़बड़ हो जाएगी, बैटरी में हो सकता है ब्लास्ट</title>
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<description><![CDATA[ स्मार्टफोन बहुत सुविधाजनक होते हैं, लेकिन क्या ये पूरी तरह सेफ होते हैं? यह सवाल इसलिए उठता है क्योंकि कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसमें फोन की बैटरी फटने के कारण भारी नुकसान हुआ है. नए से लेकर पुराने फोन तक की बैटरी को 100 प्रतिशत सेफ नहीं कहा जा सकता. दरअसल, कई ऐसे कारण होते हैं, जिससे बैटरी पर लोड पड़ता है और इसमें आग लग सकती है. आज हम ऐसी ही कुछ मिस्टेक्स की बात करेंगे, जिससे आपको बचना चाहिए.
फोन को रात भर चार्जिंग पर न रखें
अगर रात में फोन चार्ज लगाकर सो जाते हैं तो इस गलती से बचने की जरूरत है. चार्ज होते समय बैटरी हीट जनरेट करती है. अगर आप कंबल या दूसरे सॉफ्ट सरफेस पर फोन छोड़ देते हैं तो इससे एयरफ्लो भी बंद हो जाता है और बैटरी ओवरहीट हो सकती है. ऐसी स्थिति में बैटरी के फटने का खतरा बढ़ जाता है और नींद में होने के कारण आपके पास रिएक्ट करने का भी समय कम होगा.
मल्टी-पोर्ट चार्जर से रहें सावधान
आजकल मल्टी-पोर्ट चार्जर का यूज बढ़ रहा है, लेकिन इन्हें पूरी तरह सेफ नहीं कहा जा सकता. अगर आपके पास 240W का चार्जर है और इससे तीन डिवाइसेस कनेक्टेड है तो हर डिवाइस को 80W देगा, लेकिन फास्ट चार्जिंग के कारण कोई डिवाइस ज्यादा पावर भी ले सकता है. इससे डिवाइस और यह मल्टी-पोर्ट चार्जर दोनों हीट जरनेट करेंगे. अगर आपके पास अच्छी क्वालिटी वाली एक्सेसरीज नहीं हैं तो यह हीट खतरनाक रूप ले सकती है.
नकली एक्सेसरीज से बचें
कई लोग पैसे बचाने के लिए नकली एक्सेसरीज खरीद लेते हैं. ऐसा करने से भले ही आपके पैसे बच जाएं, लेकिन सुरक्षा को खतरा हो सकता है. दरअसल, नकली केबल और एडेप्टर पावर को ठीक तरीके से रेगुलेट नहीं कर पाते, जिससे बैटरी के ओवरहीट होने और फटने का खतरा रहता है. इसलिए हमेशा ऑरिजनल एक्सेसरीज को यूज करने की सलाह दी जाती है.
बैटरी फटने पर पानी डालने की भूल न करें
अगर कभी इमरजेंसी स्थिति आती है और फोन से धुआं निकलने लगे तो भूलकर भी इस पर पानी न डालें. दरअसल, फोन की बैटरी में लगी आग का इलाज पानी नहीं है. बैटरी में कई रिएक्टिव कैमिकल्स होते हैं, जो पानी के संपर्क में आने पर काम बिगाड़ सकते हैं. पानी के संपर्क में आने पर लिथियम हाइड्रोजन गैस प्रोड्यूस करती है, जो आग को और ज्यादा भड़का सकती है.
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:02:16 +0530</pubDate>
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<title>अब किसी भी कंडीशन में ओवरहीट नहीं होंगे आपके फोन, यह नई टेक्नोलॉजी करेगी कमाल</title>
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<description><![CDATA[ फोन का ओवरहीट होना एक बड़ी समस्या है. ज्यादा टेंपरेचर में यूज करने से लेकर चार्जिंग तक के दौरान फोन ओवरहीट हो सकता है, जिससे इसे यूज करना काफी मुश्किल हो जाता है. अब इस समस्या से छुटकारा मिलने की उम्मीद जगी है. दरअसल, ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के इंजीनियरों ने एक थर्मल मैनेजमेंट टेक्नीक तैयार की है, जो थर्मल डायोड की तरह काम करती है और फोन समेत इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी यूज करने वाले दूसरे डिवाइसेस को ठंडा रख सकती है.&amp;nbsp;
क्यों हीट होते हैं डिवाइसेस?
अभी स्मार्टफोन और दूसरे पोर्टेबल डिवाइसेस में हीट होने की समस्या आती है. इसकी वजह है कि ट्रेडिशनल मैटेरियल में थर्मल एनर्जी किसी भी डायरेक्शन में जा सकती है. इसका मतलब है कि फोन के प्रोसेसर या बैटरी से निकली इंटरनल हीट वापस फोन के कंपोनेंट की तरफ भी जा सकती है, जिससे टेंपरेचर बढ़ जाता है और फोन की परफॉर्मेंस कम हो जाती है. इससे बैटरी पर भी असर पड़ता है और यह जल्दी खराब होने लगती है.
नई टेक्नीक कैसे काम करेगी?
नई टेक्नीक थर्मल रेक्टिफिकेशन के कॉन्सेप्ट पर काम करती है. यह टेक्नीक हीट को कंट्रोल कर इस एक ही डायरेक्शन में पुश कर सकती है. इसमें हीट को फॉरवर्ड पुश किया जा सकता है, जिससे रिवर्स हीट फ्लो रुक जाता है और डिवाइस के अंदर टेंपरेचर को कंट्रोल किया जा सकता है. इसके लिए रिसर्चर ने मैग्नेटिक फील्ड के अंडर सेमीकंडक्टर मैटेरियल को यूज करते हुए नई स्ट्रक्चर तैयार की है. यह सेटअप वन-वे हीट पाथवे क्रिएट कर देता है, जिससे हीट सेंसेटिव एरिया से बाहर निकल जाती है.
इस टेक्नीक से क्या फायदा होगा?
इस टेक्नीक के कारण एक नया थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम मिला है, जो फोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सैटेलाइट और हाई-परफॉर्मेंस एआई सिस्टम्स में ओवरहीटिंग के खतरे को कम कर सकता है. ओवरहीटिंग से बैटरी लाइफ और डिवाइस की रिलायबिलिटी पर बुरा असर पड़ता है. अब इस टेक्नीक के आने के बाद यह खतरा कम होगा और डिवाइसेस को भी ज्यादा टेंपरेचर वाली जगहों पर यूज किया जा सकेगा.
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:02:15 +0530</pubDate>
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<title>यूजर्स के फोन से जा रहे थे फर्जी SMS! सरकार ने अचानक बैन कर दिया ये गेमिंग ऐप, जानिए पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ Wingo App: ऑनलाइन ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा होने के बाद गृह मंत्रालय ने Wingo नाम की ऑनलाइन गेमिंग ऐप को भारत में पूरी तरह बैन कर दिया है. जांच में सामने आया कि यह ऐप चुपचाप यूजर्स के मोबाइल फोन से फर्जी SMS भेज रही थी. हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों के फोन से मैसेज जा रहे थे उन्हें इसकी भनक तक नहीं थी. जैसे ही अधिकारियों को इस घोटाले के बड़े स्तर का अंदाजा हुआ तुरंत एक्शन लेते हुए ऐप से जुड़ा पूरा नेटवर्क बंद कर दिया गया.
बिना इजाजत यूजर्स के फोन बन गए ठगी का जरिया
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, Wingo ऐप यूजर्स की अनुमति के बिना उनके मोबाइल डिवाइस का इस्तेमाल कर रही थी. फोन से फर्जी मैसेज भेजे जा रहे थे जिनका मकसद दूसरे लोगों को ठगना था. इस पूरे खेल में आम यूजर्स अनजाने में साइबर अपराध का हिस्सा बनते चले गए. करोड़ों मैसेज भेजे जाने की योजना इतनी बड़े स्तर पर चल रही थी कि सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा.
साइबर क्राइम सेंटर ने Android यूजर्स को किया अलर्ट
इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने इस मामले की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की. साथ ही Android यूजर्स को साफ चेतावनी दी गई कि वे Wingo ऐप को न डाउनलोड करें और न ही इस्तेमाल करें. I4C ने यह भी बताया कि ऐप के कंट्रोल सर्वर को जियो-ब्लॉक कर दिया गया है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गतिविधि दोबारा शुरू न हो सके.
प्रमोशन करने वाले चैनल और वीडियो भी हुए ब्लॉक
सरकार की कार्रवाई सिर्फ ऐप तक सीमित नहीं रही. Wingo को प्रमोट करने वाले चार Telegram चैनल जिनसे डेढ़ लाख से ज्यादा यूजर्स जुड़े थे, उन्हें भी बंद कर दिया गया. इसके अलावा YouTube पर मौजूद 50 से ज्यादा वीडियो, जो इस ऐप को बढ़ावा दे रहे थे, उन्हें भी हटा दिया गया. इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए स्कैम को तेजी से फैलाया जा रहा था.
एक करोड़ से ज्यादा फर्जी SMS पर लगी रोक
गृह मंत्रालय के मुताबिक, समय रहते कदम उठाने से करीब 1.53 करोड़ फर्जी SMS लोगों तक पहुंचने से पहले ही रोक दिए गए. अधिकारियों ने साफ कहा कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड था और इसे पूरी तरह खत्म करना बेहद जरूरी हो गया था ताकि आम नागरिकों को नुकसान से बचाया जा सके.
ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स पर भारत का सख्त रुख
भारत पहले भी संदिग्ध गेमिंग और जुआ ऐप्स के खिलाफ कड़ा रुख अपना चुका है. पिछले साल लागू हुए नए कानून के तहत जुआ आधारित ऐप्स पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी. अब देश में सिर्फ स्किल-बेस्ड गेम्स और ई-स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म्स को ही कानूनी मंजूरी है. साफ है कि डिजिटल सुरक्षा के मामले में सरकार अब किसी भी तरह का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है.
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:02:15 +0530</pubDate>
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<title>फोल्डेबल के बाद अब फ्लिप फोन की बारी, ऐप्पल नया डिवाइस कर रही तैयार, जानें कब तक होगा लॉन्च</title>
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<description><![CDATA[ फोल्डेबल आईफोन के बाद ऐप्पल फ्लिप फोन लाने की भी तैयारी कर रही है. कंपनी इस साल सितंबर में अपना पहला बुक स्टाइल फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि अगले साल कंपनी फोल्डेबल फ्लिप फोन लॉन्च कर सकती है. कंपनी एक क्लेमशैल फोल्डेबल आईफोन पर काम कर रही है, जिसकी डायमेंशन सैमसंग के Galaxy Z Flip 7 के बराबर रह सकती है. ऐप्पल को उम्मीद है कि इस आईफोन को भी लोग खूब पसंद करेंगे और इससे फोल्डेबल आईफोन की बिक्री और बढ़ेगी.
कैसा हो सकता है ऐप्पल को फ्लिप-फोन?
यह आईफोन एक यूनिक डिवाइस होगा और इसका डिजाइन मार्केट में पहले से मौजूद क्लेमशैल फोन से मिलता-जुलता होगा. अभी इसे लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि इसे Galaxy Z Flip 7 जैसा आकार दिया जा सकता है. इस फोन में 4.1 इंच का कवर डिस्प्ले और अनफोल्ड होने पर 6.9 इंच का मेन डिस्प्ले मिलता है. अगर रिपोर्ट्स पर भरोसा किया जाए तो फोल्डेबल फ्लिप फोन कॉम्पैक्ट फॉर्म फैक्टर के साथ आ सकता है और अनफोल्ड होने पर रेगुलर आईफोन जैसा एक्सपीरियंस देगा.
कब होगा लॉन्च?
अभी ऐप्पल का यह प्रोजेक्ट शुरुआती स्टेज में है और इसकी संभावित लॉन्चिंग से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि, माना जा रहा है कि कंपनी इसे अगले साल लॉन्च कर सकती है, जब आईफोन के सफर को 20 साल पूरे हो जाएंगे. अगर यह आईफोन बाजार में आता है तो ग्राहकों को इसके लिए फोल्डेबल आईफोन की तरह 2 लाख रुपये से अधिक रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं.
आईफोन फोल्ड पर हैं सबकी नजरें
टेक जगत की नजरें अब सितंबर पर टिकी हुई हैं, जब ऐप्पल अपना पहला बुक-स्टाइल फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. इसमें 7.8 इंच का इंटरनल और 5.5 इंच का कवर डिस्प्ले होगा. इसके रियर और फ्रंट में कुल चार कैमरे होंगे और ऐप्पल इसे A20 Pro चिपसेट से लैस कर सकती है. आईफोन फोल्ड में 5500 mAh की बैटरी मिलेगी, जो कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा बैटरी पैक होगा.
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:02:14 +0530</pubDate>
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<title>बजट 2026! फोन से लेकर फ्रिज&#45;AC तक क्या हुआ सस्ता और कौन&#45;सी टेक चीजें रहेंगी महंगी? जानिए पूरी डिटेल</title>
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<description><![CDATA[ Budget 2026: केंद्रीय बजट 2026 पेश हो चुका है और इसका असर आने वाले महीनों में आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगेगा. खासतौर पर कंज्यूमर टेक्नोलॉजी और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स के सेक्टर में कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं. हालांकि ये बदलाव तुरंत नहीं होंगे, बल्कि धीरे-धीरे बाजार में असर दिखाएंगे. इसकी सबसे बड़ी वजह सरकार द्वारा मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कुछ कंपोनेंट्स पर दी गई राहत है.
आयात शुल्क में बदलाव से क्या बदलेगा?
सरकार ने बजट 2026 में स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट और वियरेबल्स जैसे प्रोडक्ट्स पर सीधे कोई बड़ा कस्टम ड्यूटी कट नहीं दिया है. यानी इन प्रोडक्ट्स की कीमतों में तुरंत गिरावट की उम्मीद करना सही नहीं होगा.
हालांकि, माइक्रोवेव जैसे घरेलू अप्लायंसेज़ में इस्तेमाल होने वाले कुछ पार्ट्स पर ड्यूटी में छूट दी गई है. इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में माइक्रोवेव ओवन की कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिल सकती है.
बजट और प्रीमियम स्मार्टफोन
अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदने की सोच रहे हैं तो ज्यादा उम्मीदें न रखें. बजट 2026 में न तो बजट स्मार्टफोन और न ही प्रीमियम फ्लैगशिप फोन की कीमतों में कोई सीधी राहत दी गई है. हालांकि साल के दूसरे हिस्से में कंपनियां बजट फोन्स में ज्यादा फीचर्स देना शुरू कर सकती हैं या हल्की कीमत कटौती कर सकती हैं. वहीं, प्रीमियम स्मार्टफोन पहले की तरह महंगे ही बने रहेंगे.
लैपटॉप और पीसी
लैपटॉप और पीसी की कीमतों में भी सीधी कटौती के संकेत नहीं मिले हैं. लेकिन मैन्युफैक्चरिंग को लेकर सरकार की नई योजनाएं कंपनियों को लोकल प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगी. इसका फायदा यह हो सकता है कि यूजर्स को भविष्य में उसी कीमत पर ज्यादा बेहतर स्पेसिफिकेशन और फीचर्स मिलने लगें.
स्मार्ट टीवी और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स पर उम्मीद
स्मार्ट टीवी, लोकल अप्लायंसेज़ और होम इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स पर राहत दी गई है. इससे इस सेगमेंट में कीमतें घटने की अच्छी संभावना बनती है. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि कंपनियां यह फायदा सीधे ग्राहकों तक पहुंचाएंगी या नहीं लेकिन प्राइस कट की गुंजाइश यहां सबसे ज्यादा नजर आती है.
AVCG सेक्टर और ऑरेंज इकोनॉमी का फोकस
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बताए गए ऑरेंज इकोनॉमी विजन के तहत AVCG (Animation, Visual Effects, Comics और Gaming) सेक्टर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इससे भारत में ही गेमिंग एक्सेसरीज़ और पेरिफेरल्स बनाने वाली कंपनियां आगे आ सकती हैं जिससे ये प्रोडक्ट्स ज्यादा किफायती दामों पर उपलब्ध हो सकें.
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:02:14 +0530</pubDate>
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<title>सरकार की सख्त चेतावनी! फेक पहचान बनाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं हैकर्स, एक गलती और खाली हो सकता है अकाउंट</title>
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<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:02:13 +0530</pubDate>
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<title>आईफोन 17 सीरीज पर आ गया Valentine&amp;apos;s Day डिस्काउंट, जानिए किस मॉडल पर कितनी छूट</title>
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<description><![CDATA[ Valentine&amp;rsquo;s Day में अब कुछ ही दिन बाकी बचे हैं और ऐप्पल ने इस मौके पर स्पेशल ऑफर का ऐलान किया है. Valentine&amp;rsquo;s Day डिस्काउंट के तहत ऐप्पल आईफोन 17 सीरीज, मैकबुक एयर और एयरपॉड्स समेत कई डिवाइसेस पर शानदार छूट दे रही है. यह ऑफर ऐप्पल इंडिया की वेबसाइट पर मौजूद है. बता दें कि ऐप्पल ने इन डिवाइसेस की कीमत में कटौती नहीं की है, लेकिन कैशबैक डील्स के जरिए ग्राहक छूट का फायदा उठा सकते हैं.
किस डिवाइस पर कितनी छूट?
MacBook Air M4 की खरीद पर ग्राहक 10,000 रुपये की बचत कर सकते हैं. 99,900 रुपये की कीमत पर लॉन्च हुए इस 13 इंच वाले मॉडल को अभी 89,900 रुपये में खरीदा जा सकता है. ICICI, एक्सिस और अमेरिकन एक्सप्रेस समेत कई क्रेडिट कार्ड्स पर यह कैशबैक ऑफर वैलिड है. इसी तरह सेलेक्टेड MacBook Pro मॉडल्स पर भी 10,000 रुपये का कैशबैक दिया जा रहा है, जिसके बाद M4 MacBook Pro की कीमत घटकर 1,59,900 रुपये हो गई है.&amp;nbsp;
आईफोन 17 सीरीज पर भी मिल रहा डिस्काउंट
आईफोन की बात करें तो ऐप्पल आईफोन 17 सीरीज पर 5,000 रुपये का इंस्टैंट कैशबैक दे रही है. इससे स्टैंडर्ड आईफोन 17 को 82,900 रुपये की असली कीमत की बजाय 77,900 रुपये में खरीदा जा सकता है. इसी तरह आईफोन 16 और आईफोन 16 प्लस पर भी 4,000 रुपये का कैशबैक ऑफर किया जा रहा है. इसके अलावा ऐप्पल अपने वीयरेबल और ऑडियो प्रोडक्ट्स पर भी 1,0000-4,000 रुपये तक का कैशबैक दे रही है.
Google Pixel 10 पर भी छूट पाने का मौका
ग्राहकों को आईफोन की तरह गूगल के लेटेस्ट Pixel 10 पर भी छूट पाने का मौका मिल रहा है. Pixel 10 भारत में 79,999 कीमत पर लॉन्च हुआ था, लेकिन अभी अमेजन पर इस पर छूट मिल रही है. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर अभी यह फोन 8,200 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के साथ 71,750 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा इस पर 2152 रुपये का कैशबैक भी ऑफर किया जा रहा है, जिसके बाद इसकी कीमत 69,598 रुपये रह जाती है.
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<title>Home Projectors या Smart TV! किसे खरीदने में है फायदा? जानिए दोनों कैसे हैं अलग</title>
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<description><![CDATA[ Home Projectors Vs Smart TV: आज के दौर में घर पर एंटरटेनमेंट का मतलब सिर्फ केबल टीवी नहीं रहा. OTT प्लेटफॉर्म, गेमिंग और थिएटर जैसा अनुभव पाने की चाहत ने लोगों को Smart TV और Home Projector के बीच उलझा दिया है. अगर आप भी सोच रहे हैं कि इनमें से कौन-सा ऑप्शन आपके लिए ज्यादा फायदेमंद है तो दोनों के फर्क को समझना जरूरी है.
Smart TV
Smart TV आज सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला होम एंटरटेनमेंट डिवाइस है. इसमें आपको Netflix, YouTube, Prime Video जैसे ऐप्स पहले से मिल जाते हैं. रिमोट उठाइए और सीधे कंटेंट देखना शुरू कर दीजिए.
Smart TV की सबसे बड़ी खासियत है इसकी सुविधा और स्टेबल परफॉर्मेंस. दिन में भी स्क्रीन साफ दिखती है, अलग से सेटअप या अंधेरे कमरे की जरूरत नहीं पड़ती. इसके अलावा, टीवी में इनबिल्ट स्पीकर, बेहतर कलर एक्यूरेसी और कम मेंटेनेंस का फायदा मिलता है. हालांकि, बड़ी स्क्रीन का मजा लेना है तो 55 या 65 इंच का Smart TV काफी महंगा पड़ सकता है.
Home Projector
अगर आप सिनेमा हॉल जैसा फील चाहते हैं, तो Home Projector इस मामले में Smart TV से आगे निकल जाता है. एक प्रोजेक्टर 100 इंच या उससे भी बड़ी स्क्रीन बना सकता है वो भी कम कीमत में. प्रोजेक्टर खासतौर पर मूवी लवर्स और गेमिंग पसंद करने वालों को आकर्षित करता है. बड़े पर्दे पर फिल्म देखना या मैच का मजा लेना अलग ही अनुभव देता है. आजकल Android आधारित स्मार्ट प्रोजेक्टर भी आने लगे हैं जिनमें OTT ऐप्स का सपोर्ट मिलता है. लेकिन इसकी कुछ सीमाएं भी हैं. अच्छी पिक्चर क्वालिटी के लिए अंधेरा कमरा जरूरी होता है और स्पीकर क्वालिटी अक्सर एक्सटर्नल साउंड सिस्टम मांगती है.
पिक्चर क्वालिटी और साउंड में कौन आगे?
Smart TV आमतौर पर ब्राइटनेस, कलर और HDR सपोर्ट के मामले में बेहतर होता है. वहीं, प्रोजेक्टर बड़ी स्क्रीन देता है लेकिन रोशनी में इसकी तस्वीर फीकी पड़ सकती है. साउंड की बात करें तो Smart TV का इनबिल्ट ऑडियो ज्यादा बैलेंस्ड होता है जबकि प्रोजेक्टर के साथ अलग स्पीकर लगाना बेहतर रहता है.
बजट और इस्तेमाल पर निर्भर है फैसला
अगर आप रोजाना न्यूज, सीरियल और OTT कंटेंट देखते हैं, तो Smart TV ज्यादा प्रैक्टिकल विकल्प है. वहीं, वीकेंड पर मूवी नाइट या गेमिंग का शौक है तो Home Projector ज्यादा मजेदार साबित हो सकता है.
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>साउंडबार के मजे लेने हैं तो इन बातों का रखें ध्यान, कमरे में आएगी थियेटर जैसी आवाज, आज ही कर लें ये काम</title>
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<description><![CDATA[ कई लोग अपने टीवी ऑडियो सेटअप में साउंडबार का यूज करते हैं. अगर इसे सही तरीके से यूज किया जाए तो यह आपकी फेवरेट फिल्म, म्यूजिक और गेम्स की साउंड क्वालिटी को कई गुना बढ़ा देते हैं. लेकिन कई बार साउंडबार यूज करने के बावजूद ऑडियो क्वालिटी बेहतर नहीं हो पाती बास उतनी नहीं बन पाती, जितनी बननी चाहिए. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो इसके पीछे कुछ कॉमन मिस्टेक्स हो सकती हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि साउंडबार का पूरा मजा लेने के आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
प्लेसमेंट
साउंडबार को सही जगह पर रखना बहुत जरूरी है. अगर आप इसे गलत जगह पर रख देंगे तो आपका ऑडियो एक्सपीरियंस खराब होना पक्का है. साउंडबार की सही जगह टीवी स्क्रीन के नीचे होती है और इसे एक फ्लैट और स्टेबल सरफेस पर रखना चाहिए. यह भी ध्यान रहे साउंडबार के वेंट्स को हवा लग रही है या नहीं. अगर साउंडबार के लिए ब्रीदिंग स्पेस नहीं बचता है तो यह ओवरहीट हो सकता है, जिससे परफॉर्मेंस खराब होती है.
ऑडियो सेटिंग
अपनी जरूरत और जगह के हिसाब से साउंडबार की ऑडियो सेटिंग को फाइन-ट्यून करना भी जरूरत है. नए साउंडबार फैक्ट्री प्रीसेट के साथ आते हैं. ये सेटिंग आपके कमरे और सेटअप के हिसाब से सेट नहीं होती है. इसलिए अपने कमरे और सेटअप आदि के हिसाब से सेटिंग को एडजस्ट कर लें. इसके साथ-साथ अपने टीवी की ऑडियो सेटिंग सेट करना भी न भूलें.
फर्मवेयर अपडेट
साउंडबार के फर्मवेयर को रेगुलरली अपडेट करना जरूरी है. फर्मवेयर अपडेट करने से बग्स दूर होने के साथ-साथ नए फीचर्स भी मिलते हैं और साउंड क्वालिटी भी इम्प्रूव होती है. इससे आपका साउंडबार लंबे समय तक सही तरीके से फंक्शन करता रहता है. अगर आप मैनुअली अपडेट करना भूल जाते हैं तो ऑटो-अपडेट इनेबल कर लें.
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:48 +0530</pubDate>
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<title>क्या इंस्टाग्राम आपकी बातें सुन रहा है? ये ट्रिक अपनाएं और तुरंत बंद करें डरावने पर्सनल ऐड्स</title>
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<description><![CDATA[ Instagram Tips: कई बार ऐसा लगता है कि इंस्टाग्राम पर दिखने वाले ऐड्स जरूरत से ज्यादा पर्सनल हो गए हैं. आप किसी चीज पर बात करते हैं और कुछ ही देर बाद उसी से जुड़ा विज्ञापन आपकी स्क्रीन पर आ जाता है. इसी वजह से यह धारणा फैल गई कि इंस्टाग्राम माइक्रोफोन के ज़रिए यूजर्स की बातें सुनता है. हालांकि, खुद इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी इस बात को साफ कर चुके हैं कि कंपनी यूजर्स की बातचीत रिकॉर्ड नहीं करती.
फिर इतने सटीक ऐड्स कैसे दिखते हैं?
असल में इंस्टाग्राम आपके इन-ऐप बिहेवियर पर बारीकी से नजर रखता है. आप किन पोस्ट पर कमेंट करते हैं क्या सेव करते हैं, क्या सर्च करते हैं और किन प्रोफाइल्स से ज्यादा इंटरैक्ट करते हैं इन सबका डेटा एनालाइज किया जाता है.
इसके अलावा, Meta Pixel और कुकीज़ के ज़रिए इंस्टाग्राम आपकी थर्ड-पार्टी वेबसाइट्स पर की गई एक्टिविटी से भी संकेत ले लेता है. इन्हीं जानकारियों के आधार पर आपको हाइपर-पर्सनलाइज्ड ऐड्स दिखते हैं जो कई लोगों को असहज कर देते हैं.
अगर आपको ऐसे ऐड्स पसंद नहीं हैं तो क्या करें?
अगर आप भी नहीं चाहते कि इंस्टाग्राम आपकी ऑनलाइन आदतों के आधार पर जरूरत से ज्यादा पर्सनल विज्ञापन दिखाए तो Meta ने इसके लिए कुछ कंट्रोल्स दिए हैं.
Meta Accounts Centre से ऐड सेटिंग बदलें
Meta ने अपने सभी प्लेटफॉर्म्स की ऐड सेटिंग्स को एक जगह जोड़ दिया है. इंस्टाग्राम ऐप में जाकर प्रोफाइल खोलें और ऊपर दाईं ओर दिए गए तीन लाइन वाले मेन्यू पर टैप करें. यहां से Accounts Centre में जाएं. नीचे स्क्रॉल करने पर Ad preferences का विकल्प मिलेगा. इसके अंदर Manage info में जाकर Activity information from ad partners चुनें. अब Review setting पर टैप करें और यह ऑप्शन चुनें कि आप इस जानकारी के आधार पर ऐड्स को ज्यादा रिलेटेड नहीं बनाना चाहते.
Meta के बाहर की एक्टिविटी को डिस्कनेक्ट करें
Accounts Centre में ही Your information and permissions सेक्शन में जाएं. यहां Your activity off Meta technologies का विकल्प मिलेगा. आप चाहें तो किसी खास एक्टिविटी को डिस्कनेक्ट कर सकते हैं या फिर पासवर्ड डालकर भविष्य की सभी ट्रैकिंग को पूरी तरह बंद कर सकते हैं. इससे Meta आपकी बाहरी वेबसाइट्स से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल नहीं करेगा.
ध्यान देने वाली जरूरी बात
इन सेटिंग्स को बदलने से इंस्टाग्राम पर ऐड्स पूरी तरह बंद नहीं होंगे. फर्क सिर्फ इतना होगा कि आपको आपकी निजी एक्टिविटी पर आधारित विज्ञापन कम दिखेंगे. Meta अब सिर्फ इंस्टाग्राम ही नहीं, बल्कि WhatsApp स्टेटस और Meta AI चैटबॉट के इंटरैक्शन के आधार पर भी ऐड्स दिखाने लगा है. ऐसे में प्राइवेसी सेटिंग्स को समय-समय पर चेक करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है.
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:48 +0530</pubDate>
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<title>इस स्मार्टफोन की दीवानी हुई दुनिया, बिक्री में निकला सबसे आगे, जानिए क्यों आ रहा लोगों को पसंद?</title>
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<description><![CDATA[ आईफोन 16 को लॉन्च हुए भले ही एक साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन इसका जादू अब भी बरकरार है. एक ताजा रिपोर्ट से पता चला है कि आईफोन 16 पिछले साल दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाला फोन रहा. भारत में भी 2025 में आईफोन 16 की सबसे ज्यादा बिक्री हुई थी. ऐप्पल ने सितंबर, 2025 में आईफोन 17 सीरीज लॉन्च कर दी थी, लेकिन इसके बाद भी अभी तक आईफोन 16 लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.
आईफोन 16 के स्पेसिफिकेशंस
आईफोन 16 में 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले है, जो HDR कंटेट सपोर्ट और 2,000 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है. A18 प्रोसेसर वाला यह आईफोन मल्टीटास्किंग और ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स को आसानी से हैंडल कर लेता है. हाई परफॉर्मेंस के साथ-साथ यह प्रोसेसर एफिशिएंट और अपकमिंग सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए कंपेटिबल भी है. इसके रियर में 48MP + 12MP का डुअल कैमरा सेटअप है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसके फ्रंट में 12MP का कैमरा है. बैटरी की बात करें तो फुल चार्जिंग पर यह आईफोन 22 घंटे का वीडियो प्लेबैक सपोर्ट करता है.&amp;nbsp;
लोगों को क्यों पसंद आ रहा यह आईफोन?
कीमत- ऐप्पल के लेटेस्ट आईफोन की तुलना में इसकी कीमत कम है और सेल के दौरान ग्राहकों को अच्छा डिस्काउंट भी मिल जाता है. इसके चलते लोगों को बिना बहुत ज्यादा पैसा खर्च इस आईफोन में प्रीमियम ऐप्पल एक्सपीरियंस मिल जाता है.
परफॉर्मेंस- इस आईफोन में मिलने वाला A18 चिपसेट शानदार परफॉर्मेंस देता है. गेम्स से लेकर ऐप्पल इंटेलीजेंस जैसे फीचर्स यह आसानी से हैंडल कर सकता है.
सॉफ्टवेयर सपोर्ट- ऐप्पल कई सालों तक अपने पुराने डिवाइस को सॉफ्टवेयर अपडेट देती रहती है. इसका मतलब है कि पुराने आईफोन पर भी लेटेस्ट फीचर्स मिलते रहेंगे. इस भरोसे के कारण लोग महंगी कीमत देकर लेटेस्ट आईफोन खरीदने की बजाय थोड़ा पुराना मॉडल भी खरीद लेते हैं.
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एलन मस्क अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर क्यों बनाना चाहते हैं? जानिए क्या है पूरा प्लान</title>
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<description><![CDATA[ AI Data Center: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रेस जैसे-जैसे तेज हो रही है, वैसे-वैसे इसे चलाने के लिए भारी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर और ऊर्जा की जरूरत भी बढ़ती जा रही है. इसी चुनौती का एक बेहद अलग और भविष्यवादी समाधान एलन मस्क ने सुझाया है AI डेटा सेंटर्स को सीधे अंतरिक्ष में ले जाना.
क्या होते हैं स्पेस-बेस्ड AI डेटा सेंटर?
स्पेस-बेस्ड AI डेटा सेंटर अभी शुरुआती चरण की अवधारणा है. इसमें सैकड़ों सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स को पृथ्वी की कक्षा में नेटवर्क के रूप में तैनात किया जाएगा. ये सैटेलाइट्स मिलकर ChatGPT या xAI के Grok जैसे AI मॉडल्स की भारी कंप्यूटिंग जरूरतों को संभालेंगे.
धरती पर बने डेटा सेंटर्स में सबसे बड़ी समस्या बिजली की खपत और कूलिंग सिस्टम की लागत है. वहीं अंतरिक्ष में लगभग लगातार सूर्य की रोशनी मिलती है और ठंडा करने के लिए अलग से महंगे सिस्टम की जरूरत नहीं पड़ती. समर्थकों का मानना है कि इससे AI प्रोसेसिंग ज्यादा सस्ती और ऊर्जा-कुशल हो सकती है.
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह राह आसान नहीं है. स्पेस डेब्रिस से टकराने का खतरा, कॉस्मिक रेडिएशन से हार्डवेयर को बचाना, मरम्मत की सीमित संभावनाएं और लॉन्च लागत जैसी चुनौतियां अभी भी बड़ी बाधा हैं. कुछ विश्लेषकों के मुताबिक 2027-28 तक छोटे स्तर पर परीक्षण शुरू हो सकते हैं जबकि बड़े नेटवर्क 2030 के बाद ही संभव हैं.
एलन मस्क इस योजना पर क्यों जोर दे रहे हैं?
SpaceX दुनिया की सबसे सफल रॉकेट कंपनियों में गिनी जाती है और Starlink के जरिए हजारों सैटेलाइट्स पहले ही लॉन्च कर चुकी है. अगर भविष्य में AI कंप्यूटिंग अंतरिक्ष की ओर जाती है तो SpaceX इसके लिए सबसे बेहतर स्थिति में है.
एलन मस्क का मानना है कि सोलर-पावर्ड डेटा सेंटर के लिए अंतरिक्ष सबसे कम लागत वाला स्थान साबित होगा. हाल ही में उन्होंने कहा था कि आने वाले दो-तीन सालों में AI के लिए सबसे सस्ता विकल्प स्पेस ही बन जाएगा. रिपोर्ट्स के अनुसार, SpaceX के संभावित IPO से मिलने वाली राशि का एक हिस्सा इन AI डेटा सेंटर सैटेलाइट्स के विकास में लगाया जा सकता है.
इस रेस में मस्क अकेले नहीं हैं
एलन मस्क के अलावा कई दिग्गज कंपनियां भी अंतरिक्ष में AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम कर रही हैं. जेफ बेजोस की Blue Origin लंबे समय से ऑर्बिट में विशाल डेटा सेंटर्स की तकनीक पर रिसर्च कर रही है. बेजोस का मानना है कि बिना रुकावट मिलने वाली सोलर एनर्जी से स्पेस-बेस्ड डेटा सेंटर धरती के मुकाबले ज्यादा सस्ते हो सकते हैं.
Nvidia समर्थित Starcloud ने हाल ही में अपना Starcloud-1 सैटेलाइट लॉन्च किया जिसमें अब तक का सबसे ताकतवर AI चिप H100 लगाया गया है. यह सैटेलाइट Google के ओपन-सोर्स AI मॉडल पर काम कर रहा है ताकि इस आइडिया की व्यवहारिकता साबित की जा सके.
Google भी Project Suncatcher के तहत सोलर-पावर्ड सैटेलाइट्स को जोड़कर एक ऑर्बिटल AI क्लाउड बनाने की योजना पर काम कर रहा है. वहीं चीन ने अगले पांच सालों में स्पेस क्लाउड तैयार करने का ऐलान किया है, जिसमें गीगावॉट-स्तरीय AI इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होगा.
क्या सच में AI का भविष्य अंतरिक्ष में है?
फिलहाल यह तकनीक प्रयोग के दौर में है लेकिन इतना साफ है कि AI की बढ़ती भूख ने कंपनियों को धरती से बाहर सोचने पर मजबूर कर दिया है. अगर तकनीकी और आर्थिक चुनौतियां हल हो जाती हैं तो आने वाले दशक में AI डेटा सेंटर्स के लिए अंतरिक्ष एक नया मैदान बन सकता है.
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>दुनियाभर में महंगे हो गए स्मार्टफोन, अचानक बढ़ीं कीमतें, फिर भी जमकर खरीद रहे हैं लोग</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ समय से पूरी दुनिया में स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ रही हैं. 2025 की आखिरी तिमाही में दुनियाभर में बेचे गए स्मार्टफोन की एवरेज कीमत पहली बार 400 डॉलर को पार कर गई. 400 डॉलर को अगर भारतीय रुपये में कन्वर्ट करें तो यह कीमत लगभग 37,000 रुपये होती है. इसका मतलब है कि अब दुनियाभर में बिकने वाले हर फोन की एवरेज कीमत 37,000 है. एक समय पर फोन के लिए यह प्रीमियम प्राइस माना जाता था.&amp;nbsp;
मंहगे होने के बाद भी जमकर फोन खरीद रहे हैं लोग
काउंटर प्वाइंट रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर-दिसंबर, 2025 के बीच ग्लोबल स्मार्टफोन रेवेन्यू 135 बिलियन डॉलर को टच कर गया. यह एक तिमाही का सबसे ज्यादा रेवेन्यू है और सालाना आधार पर इसमें 7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. इसी दौरान स्मार्टफोन की शिपमेंट भी 4 प्रतिशत बढ़ी है. यह दिखाता है कि लोग जमकर नए फोन खरीद रहे हैं और इन पर मोटी रकम भी खर्च कर रहे हैं. अब लोग पहले की तुलना में ज्यादा प्रीमियम फोन खरीद रहे हैं. आसान पेमेंट ऑप्शन और एक्सचेंज ऑफर्स के कारण अब फोन खरीदना लोगों के लिए आसान हो गया है.
ऐप्पल को सबसे ज्यादा फायदा
इस बदलते ट्रेंड से ऐप्पल को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है और रेवेन्यू के मामले में वह सबसे आगे निकल गई है. आईफोन 17 सीरीज की जबरदस्त मांग के कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में 11 प्रतिशत बढ़ा है. चीन, नॉर्थ अमेरिका और लैटिन अमेरिका में आईफोन 17 सीरीज की खूब बिक्री हो रही है. इस सीरीज के सबसे महंगे आईफोन 17 प्रो मैक्स की भी खूब डिमांड बनी हुई है, जिससे ऐप्पल की जेब भर रही है. सैमसंग इस मामले में दूसरे स्थान पर है और सालाना आधार पर उसकी वॉल्यूम 17 प्रतिशत बढ़ी है. सैमसंग के Galaxy A सीरीज के स्मार्टफोन की लैटिन अमेरिका, साउथ ईस्ट एशिया, मिडल ईस्ट, अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों में जबरदस्त डिमांड है.
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:46 +0530</pubDate>
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<title>अब सिर्फ आपकी आवाज ही नहीं, अनकही बात भी समझेंगे आईफोन, चेहरे से पढ़ लेंगे इमोशन</title>
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<description><![CDATA[ अगले कुछ सालों में आईफोन में ऐसा फीचर आ सकता है, जो आपकी अनकही बातों को समझने के साथ-साथ यह भी समझ सकेगा कि आपने गुस्से से कुछ कहा है या खुश होकर. यानी आपकी बातों के साथ-साथ आईफोन आपका चेहरा भी पढ़ लेगा और इमोशन भी समझ सकेगा. यह संभव हो सकेगा Q.ai की टेक्नोलॉजी से. Q.ai एक इजरायली स्टार्ट अप है, जो ऑडियो और सेंसिंग के लिए एआई पर काम करता है और अब ऐप्पल ने इसे एक्वायर कर लिया है.
ऐप्पल ने खर्च किया इतना पैसा
ऐप्पल ने इस सौदे के लिए दी गई रकम की जानकारी नहीं दी है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि इस एक्विजेशन के लिए कंपनी ने 1.6 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं. अभी ऐप्पल ने यह नहीं बताया है कि वह Q.ai की टेक्नोलॉजी को कैसे यूज करेगी, लेकिन यह साफ कर दिया है कि वह ऐसे तरीकों पर काम कर रही है, जिससे डिवाइस फुसफुसाहट को भी समझ सके और आउटडोर और शोर वाली जगहों पर भी ऑडियो क्वालिटी बेहतर हो सके.
Q.ai के पास है कमाल की टेक्नोलॉजी
Q.ai ने हाल ही में एक पेटेंट फाइल किया है. इसमें कंपनी ने एक ऐसी टेक्नोलॉजी के बारे में बताया है, जो बहुत धीमे से या फुसफुसाकर बोले गए शब्दों को समझने के लिए इंसान के चेहरे पर आए बदलावों को रीड कर सकती है. इसी तरीके को किसी व्यक्ति को पहचानने, उसके इमोशन, हार्ट रेट और ब्रीदिंग पैटर्न को समझने में इस्तेमाल किया जा सकता है. अगर आगे चलकर आईफोन में यह टेक्नोलॉजी इंटीग्रेट की जाती है तो ये यूजर को बेहतर तरीके से समझने के लिए उसके चेहरे के एक्सप्रेशन रीड कर सकती है.
ऑडियो एआई में बढ़ रहा है ऐप्पल का इंट्रेस्ट
पिछले कुछ समय से ऑडियो और सेंसिंग-बेस्ड एआई में ऐप्पल का इंट्रेस्ट बढ़ा है. पिछले साल कंपनी ने अपने एयरपॉड्स में नया फीचर जोड़ा था, जो रियल-टाइम लैंग्वैज ट्रांसलेशन को सपोर्ट करता है. इससे पता चलता है कि आने वाले समय में लोगों को इंटेलीजेंट और कॉन्टैक्स्ट-अवेयर डिवाइसेस देखने को मिलेंगे.
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<title>चुपचाप बिल बढ़ा रहा है आपका टीवी! ये 5 सेटिंग्स बदलते ही बिजली का खर्च तुरंत हो जाएगा आधा</title>
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<description><![CDATA[ Smart TV: आज के स्मार्ट होम में टीवी सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले डिवाइसों में से एक है. घंटों OTT देखना, न्यूज चैनल चलना या गेमिंग इन सबके बीच हमें एहसास भी नहीं होता कि टीवी कितना बिजली खर्च कर रहा है. अच्छी खबर यह है कि कुछ छोटी-छोटी सेटिंग्स बदलकर आप टीवी की बिजली खपत को काफी हद तक कम कर सकते हैं, वो भी बिना देखने के अनुभव से समझौता किए.
ब्राइटनेस और बैकलाइट कंट्रोल करें
टीवी की सबसे ज्यादा बिजली ब्राइटनेस और बैकलाइट खींचती है. फैक्ट्री सेटिंग्स पर ये अक्सर जरूरत से ज्यादा हाई होती हैं. टीवी की पिक्चर सेटिंग में जाकर ब्राइटनेस और बैकलाइट को 60&amp;ndash;70% तक रखें. कमरे की रोशनी के हिसाब से एडजस्ट करें. इससे न सिर्फ बिजली बचेगी बल्कि आंखों पर भी कम जोर पड़ेगा.
पिक्चर मोड बदलें (Standard या Eco मोड)
अधिकतर लोग टीवी को हमेशा Vivid या Dynamic Mode पर रखते हैं जो ज्यादा पावर खपत करता है. अगर आप रोज़मर्रा में टीवी देखते हैं तो Standard या Eco Mode चुनें. Eco Mode ऑटोमैटिकली ब्राइटनेस और पावर यूसेज को कंट्रोल करता है जिससे बिजली का खर्च साफ तौर पर कम हो जाता है.
Auto Power Off और Sleep Timer ऑन करें
कई बार टीवी चलते-चलते ही हम सो जाते हैं या कमरे से बाहर चले जाते हैं. ऐसे में Sleep Timer और Auto Power Off बेहद काम आते हैं. सेटिंग में जाकर यह तय करें कि 10&amp;ndash;15 मिनट तक कोई एक्टिविटी न हो तो टीवी खुद बंद हो जाए. इससे बेवजह होने वाली बिजली की बर्बादी रुकती है.
स्टैंडबाय मोड से बचें
टीवी बंद होने के बाद भी अगर प्लग लगा रहता है, तो वह Standby Power खपत करता रहता है. यह खपत भले कम लगे लेकिन महीने के बिल में असर डालती है. जब टीवी इस्तेमाल में न हो, तो उसे पावर स्विच से पूरी तरह बंद करें या स्मार्ट पावर स्ट्रिप का इस्तेमाल करें.
अनावश्यक फीचर्स और ऐप्स बंद रखें
Smart TV में Bluetooth, Wi-Fi Scan, Voice Assistant जैसे फीचर्स हमेशा ऑन रहते हैं जिससे बैकग्राउंड में बिजली खर्च होती रहती है. अगर आप इनका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो सेटिंग्स में जाकर इन्हें बंद कर दें. इससे टीवी ज्यादा एफिशिएंट तरीके से काम करेगा.
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:45 +0530</pubDate>
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<title>क्या है Clawdbot और हर कोई क्यों कर रहा है इसकी बात? यहां जान लें सारी बातें</title>
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<description><![CDATA[ Clawdbot: पिछले कुछ दिनों से एक नाम से टेक जगत में हलचल मचा रखी है. ऑनलाइन से लेकर ऑफलाइन तक हर जगह Clawdbot का जिक्र हो रहा है. दरअसल, पिछले कुछ समय से एक के बाद एक एआई टूल्स अवेलेबल हो रहे हैं. कई मामलों में ये एक-दूसरे जैसे ही लगते हैं. Clawdbot इन सबसे अलग है और यही कारण है कि लोग इसके बारे में बिना थमे बातचीत कर रहे हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि Clawdbot क्या है और कैसे इसने सबको अपना फैन बना लिया.
क्या है Clawdbot?
यह एक पर्सनल एआई असिस्टेंट है, जो किसी सर्वर की बजाय आपके कंप्यूटर पर चलता है. इसे यूज करने वाले अधिकतर लोग इसे अपने कंप्यूटर पर रन कर रहे हैं. यह यूजर को बाकी टूल्स के मुकाबले ज्यादा कंट्रोल देता है. इसके फीचर्स की बात करें तो परमिशन मिलने पर यह आपके ईमेल रीड और कैलेंडर चेक कर सकता है. यह आपके डॉक्यूमेंट्स पढ़ने के साथ-साथ आपकी बताई हुई चीजों का भी ध्यान रखता है. इसलिए थोड़े समय यूज करने के बाद यह एक चैटबॉट कम और असिस्टेंट ज्यादा लगने लगता है. इसके अलावा यह ओपन-सोर्स है. इसका मतलब है कि कोई भी देख सकता है कि यह चैटबॉट कैसे काम करता है. डेवलपर्स चाहें तो इसमें अपनी जरूरत के हिसाब से कुछ बदलाव कर अपना खुद का वर्जन बना सकते हैं.
थोड़ा रिस्की भी है!
इस चैटबॉट के पास आपके कंप्यूटर की कई जरूरी एक्सेस होती है. यह फाइल्स रीड करने के साथ-साथ कमांड भी रन कर सकता है. इससे कुछ रिस्क भी खड़े हो जाते हैं. दरअसल, अगर कुछ गलत हो जाए तो आपका डेटा लीक हो सकता है. इसके क्रिएटर भी यह बात मानते हैं और वो इसे पूरी तरह सेफ नहीं बता रहे हैं.
फिर लोग इसे पसंद क्यों कर रहे हैं?
रिस्क के बावजूद लोग इसे पसंद कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह एक ईमानदार टूल है और मार्केटिंग से लोगों को बहका नहीं रहा है. कई लोगों को लगता है कि पर्सनल एआई को ऐसा ही होना चाहिए, जो इंडिपेडेंट तरीके से आपकी मदद कर सके. यह टूल हर किसी के लिए नहीं है, लेकिन जिन लोगों को टेक्नीकल नॉलेज है और जो एक्सपेरिमेंट करना चाहते हैं, उनको यह एआई का रियल वर्जन लग रहा है.
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:45 +0530</pubDate>
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<title>Android 17 की एंट्री तय! आपके फोन में होने वाले हैं बड़े बदलाव, फीचर्स देखकर रह जाएंगे हैरान</title>
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<description><![CDATA[ Android 17 की एंट्री तय! आपके फोन में होने वाले हैं बड़े बदलाव, फीचर्स देखकर रह जाएंगे हैरान ]]></description>
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<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:42 +0530</pubDate>
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<title>WhatsApp पर अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स ने कर लिया परेशान? यह सेटिंग कर लें ऑन, फिर नहीं बजेगा फोन</title>
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<description><![CDATA[ स्पैम या अनजान नंबरों से आने वाली फोन कॉल से सभी लोग परेशान रहते हैं. कुछ लोगों के लिए व्हाट्सऐप पर भी अनजान नंबरों से बहुत कॉल्स आती हैं. अगर आप भी ऐसी समस्या परेशान हैं तो आसान तरीके से इन कॉल्स को साइलेंस कर सकते हैं. आपको बस सेटिंग में थोड़ा-सा बदलाव करना है और आपका फोन बार-बार बजना बंद हो जाएगा. आज हम आपको व्हाट्सऐप पर आने वाली अनजान कॉल्स को साइलेंट करने का तरीका बताने जा रहे हैं.&amp;nbsp;
एंड्रॉयड पर यह तरीका करेगा काम
अगर आप एंड्रॉयड फोन यूज कर रहे हैं तो सबसे पहले व्हाट्सऐप ऐप को ओपन करें. अब प्राइवेसी में जाकर कॉल्स पर जाएं. यहां आपको साइलेंस अननॉन कॉलर का ऑप्शन दिखेगा. इसका टॉगल ऑन करते ही अनजान नंबरों से आने वाली सारी व्हाट्सऐप कॉल्स साइलेंट हो जाएंगी.
आईफोन पर ऐसे करें साइलेंट
आईफोन पर भी अनजान कॉल्स का साइलेंट करने का तरीका एंड्रॉयड जैसा ही है. यहां भी प्राइवेसी में जाकर कॉल्स के ऑप्शन पर टैप करें. टैप करने के बाद साइलेंस अननोन कॉलर का ऑप्शन आएगा. इसका टॉगल ऑन कर दें. अनजान नंबरो से आने वाली कॉल्स को साइलेंस करने के कई फायदे होते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा होता है कि इससे डिस्ट्रैक्शन कम हो जाती है. अगर आप कोई काम कर रहे हैं तो ये कॉल्स आपको डिस्टर्ब नहीं कर पाएंगी. साथ ही यह सिक्योरिटी की एक एक्स्ट्रा लेयर के तौर पर भी काम करती है. इसकी मदद से केवल ऐसे कॉलर ही आपको व्हाट्सऐप कॉल कर पाएंगे, जिनके नंबर आपके पास सेव है या जिनसे आपकी पहले बातचीत हो चुकी है.
कॉल्स का रहेगा पूरा हिसाब
व्हाट्सऐप के इस फीचर की खास बात यह है कि साइलेंस होने के बाद भी कॉल्स का पूरा रिकॉर्ड रहता है. आप कॉल्स टैब में जाकर देख सकते हैं कि आपको किसने कॉल किया है. जरूरी होने पर आप उस नंबर से दोबारा संपर्क कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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AI बनी काल! इस महीने मेटा से लेकर अमेजन तक ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जानें पूरा हाल ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:51 +0530</pubDate>
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<title>AI बनी काल! इस महीने मेटा से लेकर अमेजन तक ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जानें पूरा हाल</title>
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<description><![CDATA[ टेक इंडस्ट्री में लोगों की नौकरियां जाने का सिलसिला इस साल भी नहीं थमा है. 2026 के पहले ही महीने की बात करें तो मेटा और अमेजन जैसी कई बड़ी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों की छंटनी की है. दरअसल, पिछले कुछ समय से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आ जाने से कई काम ऑटोमैट हो गए हैं और अब कोड लिखने और सॉफ्टवेयर बनाने जैसे कामों के लिए लोगों की जरूरत नहीं पड़ रही. आइए जानते हैं कि जनवरी में किन कंपनियों को कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया.
अमेजन
अमेजन ने हाल ही में ऐलान किया है कि वह दुनियाभर में स्थित अपने ऑफिसेस से 16,000 नौकरियां खत्म कर रही हैं. पिछले साल अक्टूबर के बाद यह कंपनी का छंटनी करने का दूसरा राउंड है. पहले राउंड में 14,000 लोगों की नौकरियां गई थीं. अमेजन का कहना है कि एआई एडोप्शन के कारण वह छंटनी कर रही है.
मेटा
फेसबुक-इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा ने भी अपने रिएलिटी लैब डिविजन से 10 पर्सेंट कर्मचारियों की छंटनी की बात कही है. यह डिविजन मेटावर्स जैसे प्रोडक्ट्स पर काम करती है. इस डिविजन में लगभग 15,000 कर्मचारी काम करते हैं, जिसका मतलब है कि करीब 1500 लोगों की नौकरियों पर खतरा है.
पिंटरेस्ट
पिंटरेस्ट ग्लोबल रिस्ट्रक्चरिंग प्लान के तहत अपने 15 प्रतिशत कर्मचारियों की छुट्टी करने वाली है. साथ ही कंपनी अपने ऑफिस स्पेस को भी छोटा करेगी. कंपनी ने कहा कि वह एआई-फॉरवर्ड स्ट्रैटजी के साथ आगे बढ़ेगी, जिससे चलते ऑर्गेनाइजेशनल चेंजेज किए जा रहे हैं.
एक्सपीडिया
एक्सपीडिया ने भी जनवरी में अपने कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की जानकारी दी है. हालांकि, कंपनी ने संख्या नहीं बताई है कि उसके कितने लोगों को फायर किया है. ऑनलाइन ट्रैवल बुकिंग करने वाली यह कंपनी नए लोगों को हायर भी कर रही है.
TCS
टाटा कंसल्टेंसी सर्विस मार्च तिमाही तक अपने 2 प्रतिशत कर्मचारियों को नौकरी से निकालना चाहती है. इसी क्रम में उसने जनवरी में कुछ कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया है. आईटी सर्विस देने वाली इस कंपनी ने जुलाई में कहा था कि वह 2025-26 में 12,000 नौकरियां खत्म करेगी.
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:51 +0530</pubDate>
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<title>ChatGPT हो या Gemini, चैटबॉट यूज करते समय दिमाग में रखें ये बातें, नहीं तो हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ आजकल घर से लेकर ऑफिस तक, हर जगह चैटबॉट का यूज बढ़ गया है. कुछ लोग तो चैटबॉट पर इतने डिपेंड हो गए हैं तो कैलकुलेशन से लेकर करियर डिसाइड करने तक में चैटबॉट की मदद ले रहे हैं. चैटबॉट के कारण लोगों की प्रोडक्टिविटी और क्रिएटिविटी भी बढ़ी है, लेकिन चैटबॉट पर आंखें मूंदकर भरोसा करना ठीक नहीं है. अगर चैटबॉट यूज करते कुछ बातों का ध्यान न रखा जाए तो बड़ा नुकसान हो सकता है. आज हम जानेंगे कि चैटबॉट को लेकर किन बातों को दिमाग में रखना चाहिए.
चैटबॉट की हर बात पर न करें भरोसा
ChatGPT या जेमिनी जैसे चैटबॉट कितने ही पावरफुल क्यों न हो, उनकी हर बात पर भरोसा न करें. ये चैटबॉट ट्रेनिंग डेटा और प्रोबेबिलिटी के आधार पर जवाब देते हैं. ऐसे में सबसे एडवांस्ड चैटबॉट भी गलत या भ्रामक जवाब दे सकते हैं. इसलिए इनकी हर बात पर भरोसा न करें.
पर्सनल जानकारी शेयर न करें
बातचीत करते समय चैटबॉट भले ही आपको कितने भी भरोसेमंद लगे, लेकिन इन पर अपनी पर्सनल जानकारी जैसे अकाउंट पासवर्ड और सेहत से जुड़ी जानकारी आदि चीजें शेयर न करें. ये जानकारी कंपनी के सर्वर पर पहुंच सकती है और इसका इस्तेमाल चैटबॉट्स को ट्रेनिंग देने के लिए भी हो सकता है. इसलिए अपनी सेंसेटिव जानकारी दूसरों के हाथ न पड़ने दें.
इंसान समझकर न करें भरोसा
एआई चैटबॉट्स भले ही इंसानों की तरह बातचीत कर सकते हैं, लेकिन उनमें इंसानों वालाे इमोशन नहीं होते. अगर कोई चैटबॉट आपसे माफी मांग रहा है तो वह केवल बातचीत के पैटर्न फॉलो कर रहा है. ये चैटबॉट्स गिल्ट या प्राइड फील नहीं करते. ये केवल डेटा के आधार पर रिस्पॉन्ड करते हैं.
डेटा प्राइवेसी को न करें नजरअंदाज
कई फ्री और थर्ड-पार्टी चैटबॉट्स ऐसे भी हैं, जो देश से बाहर यूजर इंफोर्मेशन स्टोर करते हैं. इसलिए चैटबॉट यूज करने से पहले हमेशा प्राइवेसी टर्म्स को पढ़ लें. अगर कुछ भी संदिग्ध लगे तो इसे इस्तेमाल न करना ही बेहतर होगा.
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:50 +0530</pubDate>
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<title>WhatsApp पर जल्दी आएगा पेड सब्सक्रिप्शन, पैसे देने पर यूजर्स को मिलेंगे ये खास फीचर्स</title>
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<description><![CDATA[ हाल ही में खबर आई थी कि मेटा अपने कोर प्रोडक्ट्स जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सऐप के लिए पेड प्लान लाने वाली है. इसके तहत यूजर्स यूट्यूब प्रीमियम की तरह पैसे देकर कुछ एक्स्ट्रा फीचर्स को यूज कर पाएंगे. अब एक रिपोर्ट में बताया गया है कि व्हाट्सऐप का पेड सब्सक्रिप्शन लेने पर यूजर्स को क्या-क्या बेनेफिट्स मिलेंगे. गौरतलब है कि मेटा पिछले कुछ समय से एआई पर पानी की तरह पैसा बहा रही है और अब उस लागत को वसूलने के लिए नए पेड प्लान लाए जा रहे हैं.
जल्दी आ सकता है व्हाट्सऐप का पेड प्लान
एंड्रॉयड फोन के लिए व्हाट्सऐप के बीटा वर्जन पर अपकमिंग पेड सब्सक्रिप्शन सर्विस को स्पॉट किया गया है. इससे पता चलता है कि मेटा इस पर काम कर रही है और इसे जल्द ही रोल आउट किया जा सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूजर्स पहले एक वेटलिस्ट ज्वॉइन करनी होगी. इसके बाद जैसे ही पेड प्लान रोल आउट होंगे, उन्हें एक्स्ट्रा फंक्शनलिटी मिलनी शुरू हो जाएगी.
पेड प्लान में क्या-क्या फीचर्स होंगे?
अपने प्रीमियम प्लान में व्हाट्सऐप प्रीमियम स्टिकर्स, ऐप थीम्स और तीन से ज्यादा चैट्स को पिन करने की परमिशन दे सकती है. अधिक पर्सनलाइज्ड मैसेजिंग एक्सपीरियंस के लिए यूजर डेडिकेटेड चैट रिंगटोन लगा सकेंगे. साथ ही व्हाट्ऐप ऐप के आइकन को कस्टमाइज करने का ऑप्शन मिल सकता है. यूजर व्हाट्सऐप की तरफ से दिए गए कई ऑप्शन्स में से अपनी पसंद का आइकन चुन सकेंगे. इनके अलावा यूजर्स को कई एक्स्ट्रा एआई फीचर्स भी दिए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या सबको देना पड़ेगा पैसा?
व्हाट्सऐप को यूज करने के लिए सबको पैसा देने की जरूरत नहीं है. मेटा यह साफ कर चुकी है कि ऐप का कोर एक्सपीरियंस फ्री रहेगा. यानी आप अभी की तरह फ्री में मैसेज और कॉल कर सकेंगे, लेकिन अगर आपको प्रीमियम फीचर्स यूज करने हैं तो पैसा चुकाना पड़ेगा. अभी तक यह जानकारी नहीं मिली है कि व्हाट्सऐप के प्लान की कीमत क्या हो सकती है.
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बिना नेटवर्क के भी कर सकेंगे कॉल, गैलेक्सी S26 सीरीज में मिलेगा ये दमदार कनेक्टिविटी फीचर, इमरजेंसी में आएगा काम ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:49 +0530</pubDate>
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<title>बिना नेटवर्क के भी कर सकेंगे कॉल, गैलेक्सी S26 सीरीज में मिलेगा ये दमदार कनेक्टिविटी फीचर, इमरजेंसी में आएगा काम</title>
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<description><![CDATA[ अगले महीने लॉन्चिंग से पहले सैमसंग की फ्लैगशिप Galaxy S26 लाइनअप से जुड़ी लीक्स लगातार सामने आ रही है. एक ताजा लीक के मुताबिक, सैमसंग इस सीरीज में एक बड़ी कनेक्टिविटी अपग्रेड देने वाली है. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस सीरीज के मॉडल्स सैटेलाइट-बेस्ड कम्यूनिकेशन स्टैंडर्ड के साथ आएंगे. इसका मतलब है कि गैलेक्सी फोन पर पहली बार यूजर्स को सैटेलाइट मैसेज, इमरजेंसी कॉल्स और SOS जैसे फीचर्स मिलने वाले हैं.
कई स्टैंडर्ड को करेंगे सपोर्ट
FCC सर्टिफिकेशन के मुताबिक, अपकमिंग सीरीज के सभी मॉडल सैटेलाइट कम्यूनिकेशन से जुड़े कई स्टैंडर्ड्स के साथ कंपैटिबल होंगे. FCC डॉक्यूमेंट्स में यूजर्स को मिलने वाले फीचर्स की जानकारी नहीं होती है, लेकिन टेक्नीकल डिटेल्स से पता चलता है कि सैमसंग Galaxy S26 सीरीज में सैटेलाइट कनेक्टिविटी देने का मन बना चुकी है. सर्टिफिकेशन में स्पेस और नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क से सप्लीमेंट कवरेज का सपोर्ट मेंशन किया गया है. इन दोनों ही टेक्नोलॉजी को सैटेलाइट नेटवर्क इंटीग्रेट करने के लिए डिजाइन किया गया है.&amp;nbsp;
ऐप्पल और गूगल फोन्स में पहले से ही यह फीचर
ऐप्पल और गूगल पहले ही अपने डिवाइसेस में सैटेलाइट कनेक्टिविटी का फीचर देती है. अगर अपकमिंग गैलेक्सी डिवाइस में यह फीचर मिलता है तो सैमसंग भी गूगल और ऐप्पल वाली लिस्ट में शामिल हो जाएगी. गूगल ने पिक्सल 9 लाइनअप में सैटेलाइट कॉलिंग और इमरजेंसी टेक्सटिंग का ऑप्शन दिया था. वहीं ऐप्पल की बात करें तो कंपनी आईफोन 14 सीरीज से यह फीचर देती आ रही है.
कब लॉन्च होगी गैलेक्सी S26 सीरीज?
उम्मीद की जा रही है कि सैमसंग फरवरी के आखिरी सप्ताह में इस सीरीज से पर्दा हटा सकती है और मार्च में इसकी बिक्री शुरू हो जाएगी. रिपोर्ट्स की मानें तो कंपनी इस सीरीज में 256GB स्टोरेज को मिनिमम रखेगी. Galaxy S26 और Galaxy S26+ फोन को 256GB और 512GB वर्जन में लॉन्च किया जाएगा. Galaxy S26 Ultra की बात करें तो यह 256GB, 512GB और 1TB स्टोरेज वेरिएंट में आएगा. ये तीनों ही फोन ब्लैक, व्हाइट, कोबाल्ट वॉयलेट और स्काई ब्लू कलर ऑप्शंस के साथ लॉन्च हो सकते हैं.
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:49 +0530</pubDate>
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<title>OpenAI करेगी एक और कमाल, बना रही है नया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, फेक अकाउंट्स की नो एंट्री</title>
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<description><![CDATA[ एआई चैटबॉट चैटजीपीटी और एटलस ब्राउजर बनाने के बाद ओपनएआई अब एक और कमाल करने जा रही है. रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कंपनी एक नया सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म डेवलप कर रही है. कंपनी एक सोशल नेटवर्क कॉन्सेप्ट पर काम कर रही है, जिसमें असली और वेरिफाइड यूजर्स के बीच कन्वर्सेशन पर जोर दिया जाएगा और इस पर बॉट्स और ऑटोमैटेड अकाउंट्स के लिए कोई जगह नहीं होगी.
अभी शुरू हुआ है प्रोजेक्ट पर काम
यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती स्टेज में है और इस पर कंपनी की एक छोटी टीम काम कर रही है. अभी तक न तो इसकी लॉन्चिंग टाइमलाइन सामने आई है और न ही कंपनी की तरफ से इसे लेकर कुछ कहा गया है. कंपनी इस प्लेटफॉर्म को फेक प्रोफाइल, स्पैम एक्टिविटी और एआई-जनरेटेड एंगेजमेंट से दूर रखना चाहती है, जो आजकल दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी परेशानी बन गए हैं.
बाकी प्लेटफॉर्म से कैसे अलग होगा?
ओपनएआई का यह प्लेटफॉर्म ऑथेंटिकेशन के मामले में बाकियों से अलग होगा. यह साइन अप के लिए फोन नंबर और ईमेल एड्रेस जैसे ट्रेडिशनल तरीकों का यूज नहीं करेगा. कंपनी साइन अप के लिए फेशियल रिकग्नेशन जैसे बायोमैट्रिक्स चेक्स को यूज कर सकती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हर अकाउंट किसी असली इंसान से जुड़ा हुआ है और कोई बॉट इसे यूज नहीं कर रहा है. हालांकि, इसे लेकर प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं भी जताई जा रही हैं. बायोमैट्रिक डेटा को काफी सेंसेटिव माना जाता है और एक्सपर्ट्स वार्निंग दे चुके हैं कि ऐसे डेटा के लीक होने पर परिणाम गंभीर हो सकते हैं.
एआई कंटेट शेयर करने की नहीं होगी मनाही
कहा जा रहा है कि ओपनएआई के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई कंटेट शेयर करने की मनाही नहीं होगी. यूजर्स एआई से जनरेटेड फोटो और वीडियो इस पर शेयर कर सकेंगे. आगे चलकर अगर यह प्लेटफॉर्म लॉन्चिंग की तरफ बढ़ता है तो यह इंस्टाग्राम और टिकटॉक समेत दूसरे प्लेटफॉर्म्स को कड़ा मुकाबला दे सकता है.
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बिना नेटवर्क के भी कर सकेंगे कॉल, गैलेक्सी S26 सीरीज में मिलेगा ये दमदार कनेक्टिविटी फीचर, इमरजेंसी में आएगा काम ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:48 +0530</pubDate>
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<title>WhatsApp पर ये एक मैसेज भेजते ही बज सकती है मुसीबत की घंटी! सीधे पुलिस की नजर में आ जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp: आज WhatsApp सिर्फ चैटिंग ऐप नहीं रहा, बल्कि बातचीत, काम और सूचनाओं का बड़ा जरिया बन चुका है. लेकिन इसी प्लेटफॉर्म पर की गई एक छोटी-सी गलती आपको बड़ी कानूनी परेशानी में डाल सकती है. कई लोग मजाक, गुस्से या बिना सोचे-समझे ऐसे मैसेज फॉरवर्ड या सेंड कर देते हैं जो सीधे पुलिस और साइबर सेल की नजर में आ सकते हैं.
किस तरह के मैसेज बन सकते हैं मुसीबत
कानून के मुताबिक, WhatsApp पर भेजे गए कुछ खास तरह के मैसेज अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं. इनमें किसी को धमकी देना, नफरत फैलाने वाले मैसेज भेजना, फर्जी खबरें फैलाना, किसी समुदाय या व्यक्ति के खिलाफ भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल करना शामिल है. कई मामलों में लोग यह सोचकर मैसेज फॉरवर्ड कर देते हैं कि सब भेज रहे हैं लेकिन यही आदत बाद में भारी पड़ सकती है.
फेक न्यूज और अफवाहें सबसे बड़ा खतरा
पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, WhatsApp पर फैलने वाली फर्जी खबरें सबसे ज्यादा कार्रवाई की वजह बनती हैं. अफवाहें फैलाने वाले मैसेज, बिना पुष्टि की जानकारी या डर पैदा करने वाले फॉरवर्ड समाज में अशांति फैला सकते हैं. ऐसे मामलों में यह दलील काम नहीं आती कि आपने खुद मैसेज नहीं लिखा, सिर्फ फॉरवर्ड किया था. कानून में फॉरवर्ड करने वाले को भी जिम्मेदार माना जाता है.
धमकी और आपत्तिजनक भाषा पड़ सकती है भारी
अगर कोई यूजर WhatsApp पर धमकी देता है, गाली-गलौज करता है या किसी की छवि खराब करने की कोशिश करता है तो यह सीधे कानूनी अपराध बन सकता है. स्क्रीनशॉट, चैट बैकअप और सर्वर लॉग के जरिए ऐसे मैसेज का रिकॉर्ड आसानी से निकाला जा सकता है. कई मामलों में लोग प्राइवेट चैट को सुरक्षित समझ लेते हैं जबकि हकीकत यह है कि शिकायत होने पर जांच एजेंसियां सबूत जुटा सकती हैं.
गलत ग्रुप मैसेज भी बन सकता है सिरदर्द
WhatsApp ग्रुप्स में भेजे गए मैसेज भी उतने ही संवेदनशील होते हैं. किसी ग्रुप में आपत्तिजनक कंटेंट शेयर करना, हिंसा को बढ़ावा देने वाली बातें लिखना या गलत सूचना फैलाना पूरे ग्रुप के एडमिन और मैसेज भेजने वाले दोनों के लिए समस्या खड़ी कर सकता है.
खुद को कैसे रखें सुरक्षित
सुरक्षित रहने का सबसे आसान तरीका है सोच-समझकर मैसेज भेजना. किसी भी जानकारी को बिना जांचे फॉरवर्ड न करें. गुस्से या मजाक में भी ऐसी भाषा का इस्तेमाल न करें जो बाद में आपके खिलाफ सबूत बन जाए. अगर कोई मैसेज संदिग्ध लगे तो उसे डिलीट करना ही बेहतर है.
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:48 +0530</pubDate>
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<title>मोबाइल यूजर्स को चाहिए TRAI का साथ, लेकिन क्या रेगुलेटर सच में सुन रहा है?</title>
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<description><![CDATA[ TRAI: भारत में बैंकिंग, शेयर बाजार और बीमा जैसे अहम सेक्टरों पर अलग-अलग रेगुलेटरी संस्थाएं नजर रखती हैं. बैंकिंग के लिए RBI, शेयर बाजार के लिए SEBI और बीमा क्षेत्र के लिए IRDAI मौजूद हैं. ये संस्थाएं न सिर्फ नियम बनाती हैं, बल्कि ग्राहकों की शिकायतों पर कार्रवाई भी करती हैं. अगर किसी उपभोक्ता को सेवा से परेशानी होती है तो वह सीधे इन रेगुलेटर्स से संपर्क कर सकता है.
टेलीकॉम सेक्टर में TRAI की जिम्मेदारी
टेलीकॉम सेवाओं की निगरानी के लिए भारत में Telecom Regulatory Authority of India यानी TRAI काम करती है. इसका मकसद है टेलीकॉम कंपनियों के लिए नियम तय करना, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना. कागजों में TRAI की भूमिका काफी मजबूत दिखती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है.
मोबाइल यूजर्स की पुरानी परेशानियां
पिछले कुछ सालों से मोबाइल यूजर्स लगातार TRAI से दखल की मांग कर रहे हैं. सबसे बड़ी शिकायतों में से एक है रिचार्ज खत्म होने से पहले आने वाली लगातार कॉल और मैसेज. प्लान की वैधता खत्म होने से 3&amp;ndash;4 दिन पहले ही कंपनियां बार-बार कॉल, SMS और नोटिफिकेशन भेजने लगती हैं. इतना ही नहीं, आउटगोइंग कॉल के दौरान IVR मैसेज भी सुनने पड़ते हैं.
यूजर्स इस व्यवहार को परेशान करने वाला बताते आए हैं और कई बार TRAI से इसे रेगुलेट करने की मांग की गई, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस नियम या सख्त कदम देखने को नहीं मिला.
सस्ते रिचार्ज प्लान की मांग
जुलाई में रिचार्ज प्लान महंगे होने के बाद यूजर्स ने सिर्फ सिम एक्टिव रखने के लिए किफायती प्लान की मांग तेज कर दी. इस मामले में TRAI ने जरूर दखल दिया और टेलीकॉम कंपनियों को बिना डेटा वाले वॉयस-ओनली प्लान लाने को कहा.
इसके बाद कंपनियों ने 400 से लेकर 2000 रुपये तक के वॉयस-ओनली प्लान पेश किए जिनकी वैधता अलग-अलग है. हालांकि, बड़ी संख्या में यूजर्स अब भी इन्हें महंगा मानते हैं. उनकी मांग है कि TRAI कंपनियों को 7 या 15 दिन की कम वैधता वाले सस्ते प्लान लाने के लिए बाध्य करे.
4G और 5G कवरेज मैप पर सवाल
TRAI ने सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अपने 4G और 5G नेटवर्क कवरेज मैप सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था. ज्यादातर निजी कंपनियों ने इस आदेश का पालन किया, लेकिन सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL का मामला अलग है.
BSNL ने शुरुआत में कवरेज मैप जारी तो किया लेकिन पिछले 6&amp;ndash;7 महीनों से वह यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है. इसके बावजूद TRAI की ओर से न तो कोई सख्त निर्देश आया और न ही किसी तरह की पेनल्टी लगाई गई.
क्या मोबाइल यूजर्स की आवाज सुनी जा रही है?
रिचार्ज से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती कीमतें और जानकारी की कमी जैसे मुद्दे लगातार सामने आ रहे हैं. इसके बावजूद TRAI की कार्रवाई कई मामलों में अधूरी या धीमी नजर आती है. ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या टेलीकॉम रेगुलेटर तेजी से बदलते इस सेक्टर में सच में उपभोक्ताओं के हितों की पूरी तरह रक्षा कर पा रहा है या मोबाइल यूजर्स की आवाज अब भी अनसुनी ही रह जाएगी.
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Free WiFi का लालच पड़ेगा भारी! एक छोटी सी चूक और हैकर्स ले लेंगे फोन से लेकर बैंक अकाउंट तक का कंट्रोल</title>
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<description><![CDATA[ Free WiFi का लालच पड़ेगा भारी! एक छोटी सी चूक और हैकर्स ले लेंगे फोन से लेकर बैंक अकाउंट तक का कंट्रोल ]]></description>
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:46 +0530</pubDate>
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<title>यूट्यूब पर वीडियो देखने में नहीं आ रहा मजा? ये हो सकते हैं कारण, यहां जान लें डिटेल</title>
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<description><![CDATA[ YouTube पर रोजाना अरबों लोग वीडियोज देखते हैं. यह गूगल सर्च के बाद दुनिया की सबसे ज्यादा विजिट की जाने वाली साइट है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका यूजर-जनरेटेड कंटेट है और हर रोज इस पर लाखों नए वीडियोज अपलोड होते हैं. अगर आप लंबे समय से यूट्यूब पर वीडियोज देख रहे हैं और अब यह बोरिंग हो गया है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि यूट्यूब पर मजे न आने के क्या कारण हो सकते हैं.
वीडियो ओपन करते ही कमेंट सेक्शन खोल लेना
कई लोग वीडियो ओपन करते ही कमेंट सेक्शन खोल लेते हैं. इसमें लोगों के कमेंट आपकी राय को प्रभावित कर देते हैं. इससे आप वीडियो को देखने के पहले ही अपनी राय बना लेते हैं, जिसके बाद आप उसी नजरिए से वीडियो को देखते हैं. इसके अलावा कई लोग कमेंट में पूरे वीडियो की समरी ही डाल देते हैं, जिससे वीडियो देखने को इंट्रेस्ट नहीं रहता.
ऑटो-प्ले इनेबल रखना
यूट्यूब का ऑटो-प्ले फीचर बाई डिफॉल्ट ऑन होता है और आपको इसे मैनुअली बंद करना पड़ता है. यह फीचर अधिकतर बार ऐसे वीडियोज प्ले कर देता है, जो लोगों की पसंद के नहीं होते. इसे बंद कर आप अपनी मर्जी से वीडियोज प्ले कर सकते हैं.
यूट्यूब हिस्ट्री क्लियर न करना
समय-समय पर यूट्यूब हिस्ट्री क्लियर करना जरूरी है. अगर आप इसे क्लियर नहीं करते हैं तो यूट्यूब का एल्गोरिद्म आपको इसी हिस्ट्री के हिसाब से वीडियो सजेस्ट करता रहेगा. इसका नुकसान यह होता है कि आपकी फीड पर बार-बार ऐसे वीडियोज आते रहेंगे, जिनकी अब आपको जरूरत नहीं है. इसलिए थोड़े-थोड़े समय यूट्यूब हिस्ट्री को क्लियर करे रहें.
ऐसे बनाएं यूट्यूब को मजेदार
यूट्यूब की डिफॉल्ट सेटिंग आपको बेस्ट व्यूइंग एक्सपीरियंस नहीं दे सकती. इसलिए आपको सेटिंग अपने हिसाब से एडजस्ट कर लेनी चाहिए. आप ऑटो-प्ले टर्न ऑफ, वीडियो क्वालिटी डिफॉल्ट, प्ले बैक स्पीड एडजस्ट करने जैसी सेटिंग की मदद से यूट्यूब को बिल्कुल अपनी पसंद के हिसाब से चला सकते हैं.
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<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:46 +0530</pubDate>
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<title>फोल्डेबल आईफोन से मुकाबले के लिए सैमसंग लाएगी नया फोन, धांसू होंगे फीचर्स, यूजर्स को आ जाएगा मजा</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy Wide Fold: इस साल फोल्डेबल फोन सेगमेंट में तगड़ी हलचल देखने को मिलने वाली है. सितंबर में ऐप्पल अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी, जिसे टक्कर देने के लिए सैमसंग ने कमर कर कस ली है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैमसंग आईफोन फोल्ड को टक्कर देने के लिए Galaxy Wide Fold नाम से एक नया फोन मार्केट में उतारेगी. सैमसंग शुरुआत में इसकी 10 लाख यूनिट्स मार्केट में लाएगी और उसने अपने सप्लायर्स को भी यह जानकारी दे दी है. सैमसंग के इस फोन के कुछ संभावित फीचर्स भी सामने आ गए हैं.
Samsung Galaxy Wide Fold के स्पेसिफिकेशंस
सैमसंग का यह फोन अपने डिस्प्ले और फॉर्म फैक्टर के कारण फोल्डेबल लाइनअप में सबसे अलग दिखेगा. इसमें 7.6 इंच का फोल्डेबल OLED डिस्प्ले होगा, जो 4:3 आस्पेक्ट रेशो के साथ आएगा. जब इसे अनफोल्ड किया जाएगा तो यह यूजर को एक वाइड और लैंडस्कैप फोक्स्ड एक्सपीरियंस देगा, जो अभी तक कंपनी के दूसरे फोल्डेबल फोन से मिसिंग है. बताया जा रह है कि सैमसंग इस फोन से उन यूजर को टारगेट करना चाहती है, जो मल्टीटास्किंग, प्रोडक्टिविटी और स्ट्रीमिंग आदि के लिए टैबलेट जैसी स्क्रीन को प्रेफर करते है. बुक स्टाइल में फोल्ड होने वाले इस फोन का कवर डिस्प्ले 5.4 इंच का रह सकता है.
कब हो सकता है लॉन्च?
अभी तक सैमसंग की तरफ से इस फोन को लेकर ऑफिशियली कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन लीक्स पर भरोसा करें तो इसे सैमसंग के Galaxy Z Unpacked इवेंट में Galaxy Z Fold 8 और Galaxy Z Flip 8 फोन के साथ लॉन्च किया जा सकता है.
आईफोन फोल्ड पर है सबकी नजरें
ऐप्पल के पहले फोल्डेबल आईफोन का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा है. कंपनी इसमें 7.8 इंच का इनर और 5.5 इंच का आउटर डिस्प्ले दे सकती है. &amp;nbsp;इसके रियर में वाइड, अल्ट्रा वाइड और टेलीफोटो लेंसेस के साथ ट्रिपल कैमरा सेट दिया जा सकता है, जबकि फ्रंट में दो लेंस मिलेंगे. इनमें से एक कवर और दूसरा मेन डिस्प्ले पर लगा होगा. इस फोन के लिए भारत में ग्राहकों को लगभग 2.25 लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:34 +0530</pubDate>
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<title>गावों के लिए आ गया नया AI Chatbot! जानिए अब कैसे बदलेगा ग्रामीण इलाकों के काम करने का तरीका</title>
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<description><![CDATA[ PANCHAM AI: ग्रामीण प्रशासन को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. पंचायती राज मंत्रालय जल्द ही PANCHAM नाम का एक डिजिटल चैटबॉट शुरू करने वाला है जिसे खास तौर पर गांवों की पंचायतों के लिए तैयार किया गया है. यह चैटबॉट WhatsApp के जरिए काम करेगा और पंचायत प्रतिनिधियों को सरकारी योजनाओं, जरूरी डेटा और ताज़ा अपडेट्स से सीधे जोड़ेगा. इसका मकसद जमीनी स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया को आसान और ज्यादा प्रभावी बनाना है.
आखिर PANCHAM है क्या

PANCHAM - Panchayat Assistance &amp;amp; Messaging ChatbotA WhatsApp-based tool for direct, timely, and two-way digital interaction with Panchayat Elected Representatives, officials, and citizens.PANCHAM enables easy access to scheme updates, training content, surveys and Panchayat&amp;hellip; pic.twitter.com/uwRmTGowGk
&amp;mdash; Ministry of Panchayati Raj, Government of India (@mopr_goi) January 23, 2026



PANCHAM दरअसल एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो पंचायत स्तर पर जानकारी की कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है. पंचायती राज मंत्रालय ने इसे इसलिए विकसित किया है ताकि सरपंचों और पंचायत से जुड़े अधिकारियों को जरूरी जानकारी के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े. तकनीक अब गांवों तक तेजी से पहुंच रही है और PANCHAM उसी बदलाव का हिस्सा है जो रोजमर्रा के पंचायत कार्यों को आसान बनाने में मदद करेगा.
किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
इस पहल से देशभर के 30 लाख से ज्यादा चुने हुए पंचायत प्रतिनिधि और कर्मचारी लाभ उठा सकेंगे. सरपंच, वार्ड सदस्य और पंचायत स्टाफ को अब सरकारी योजनाओं और नीतियों से जुड़ी सटीक जानकारी के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. पहली बार पंचायतों के लिए एक ऐसा डिजिटल टूल लाया जा रहा है जो उन्हें सीधे सरकारी सिस्टम और निर्णय लेने वाली संस्थाओं से जोड़ता है.
WhatsApp से होगा सीधा कनेक्शन
PANCHAM को इस्तेमाल करना बेहद आसान रखा गया है. पंचायत प्रतिनिधियों को किसी खास तकनीकी ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होगी. जिनका मोबाइल नंबर e-Gram Swaraj पोर्टल से जुड़ा है, वे बस एक QR कोड स्कैन करके चैटबॉट से जुड़ सकते हैं. इसके बाद यह चैटबॉट योजनाओं की जानकारी, जरूरी गाइडेंस और पंचायत से जुड़े सवालों के जवाब सीधे WhatsApp पर देने लगेगा.
22 भारतीय भाषाओं में मिलेगी जानकारी
इस चैटबॉट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 22 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है. यानी देश के अलग-अलग राज्यों के पंचायत प्रतिनिधि अपनी स्थानीय भाषा में जानकारी समझ और इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे भाषा की वजह से आने वाली दिक्कतें काफी हद तक खत्म हो जाएंगी.
फीडबैक और समस्याएं भी सीधे पहुंचेंगी मंत्रालय तक
PANCHAM सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं है. इसके जरिए पंचायत अधिकारी अपनी राय दे सकते हैं, सवाल पूछ सकते हैं और गांवों से जुड़ी समस्याओं को सीधे मंत्रालय तक पहुंचा सकते हैं. इससे जमीनी स्तर से मिलने वाला इनपुट मजबूत होगा और फैसले ज्यादा तेजी और समझदारी से लिए जा सकेंगे.
रियल-टाइम अपडेट से होगा बेहतर प्रशासन
इस चैटबॉट के माध्यम से सरकार पंचायत प्रतिनिधियों तक जरूरी एडवाइजरी, अहम सूचनाएं और तुरंत अपडेट भेज सकेगी. इससे आपात हालात में भी जानकारी तेजी से पहुंचेगी और गांवों में शासन व्यवस्था पहले से ज्यादा सशक्त और डिजिटल बन सकेगी.
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:33 +0530</pubDate>
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<title>अब नहीं चलेगा आपकी लोकेशन का पता, प्राइवेसी हो जाएगी एकदम मजबूत, इन यूजर्स के लिए आ रहा नया फीचर</title>
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<description><![CDATA[ आईफोन यूजर्स के लिए एक शानदार प्राइवेसी फीचर आने वाला है, जिसके बाद उनकी लोकेशन का सटीक पता लगाना मुश्किल हो जाएगा. ऐप्पल अपकमिंग iOS 26.3 अपडेट में यह फीचर रोल आउट करेगी, जिसकी मदद से यूजर अपने नेटवर्क कैरियर से अपनी सटीक लोकेशन हाइड कर पाएंगे. इस फीचर को iOS 26.3 के बीटा वर्जन में स्पॉट किया गया है और यह नेटवर्क कैरियर की एक्सेस वाले लोकेशन डेटा को लिमिट कर देगा. इससे यूजर को अपनी प्राइवेसी पर ज्यादा कंट्रोल मिलेगा.
नए फीचर से क्या बदल जाएगा?
अभी आप जिस कंपनी की सिम यूज करते हैं, वह मोबाइल टावर का यूज कर आपकी सटीक लोकेशन का पता लगा सकती है कि आप किसी गली में कहां खड़े हैं. अब इसे रोकने के लिए ऐप्पल &#039;लिमिट प्रीसाइज लोकेशन&#039; नाम से नया फीचर ला रही है. इसे इनेबल करने के बाद मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी आपकी एकदम सटीक लोकेशन का पता नहीं लगा पाएगी. ऐप्पल का कहना है कि इस फीचर के बाद कंपनियां केवल उस इलाके का पता लगा पाएगी, जहां आप खड़े हैं. उन्हें एकदम सही जानकारी नहीं मिलेगी कि आप किस जगह मौजूद हैं. इस फीचर से सिग्नल की क्वालिटी और यूजर एक्सपीरियंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. साथ ही उस डेटा पर भी असर नहीं होगा, जो इमरजेंसी कॉल के दौरान शेयर किया जाता है.
इन डिवाइस पर करेगा काम
ऐप्पल अपनी अपकमिंग अपडेट में इस फीचर को रोल आउट कर देगी, लेकिन यह सभी आईफोन यूजर्स के लिए अवेलेबल नहीं होगा. यह केवल आईफोन एयर, आईफोन 16e और M5 iPad Pro के सेलुलर वर्जन पर काम करेगा. दरअसल, इन सभी डिवाइस में कंपनी के C1 या C1X मॉडम लगे हैं. साथ ही इस फीचर का यूज करने के लिए यूजर के डिवाइस पर iOS 26.3 या iPadOS 26.3 अपडेट इंस्टॉल होनी चाहिए. इस फीचर को सेटिंग में जाकर सेलुलर मेनू से इनेबल किया जा सकता है.
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<item>
<title>स्लो लैपटॉप पर तुरंत बदलें ये तीन सेटिंग्स, बदल जाएंगे हालात, तूफान की रफ्तार से लगेगा दौड़ने</title>
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<description><![CDATA[ स्लो लैपटॉप पर काम करना किसी को पसंद नहीं होता. इससे न सिर्फ टाइम की बर्बादी होती है बल्कि मूड भी खराब हो जाता है. अगर लैपटॉप स्लो हो जाता है तो कुछ ही मिनटों में होने वाले काम को करने में घंटे लग जाते हैं. ऐसे में कई लोग लैपटॉप को रिस्टार्ट या अपडेट करते हैं, लेकिन कई बार इन तरीकों से भी लैपटॉप की स्पीड नहीं बढ़ती. अगर आप ऐसी मुश्किल का सामना कर रहे हैं तो कुछ सेटिंग्स में बदलाव कर अपने लैपटॉप की स्पीड को रॉकेट जैसी कर सकते हैं. आज हम आपको इन सेटिंग्स के बारे में बताने जा रहे हैं.
डिस्क स्पेस को करें खाली
कुछ समय तक लैपटॉप को यूज करने से इसमें टेंपरेरी फाइल्स, पुराने डाउनलोड और पुरानी फाइल्स का ढेर जमा हो जाता है, जो काफी स्पेस ले लेता है. इसलिए रेगुलरी इसे डेटा को हटाना जरूरी है. आप यह काम मैनुअली नहीं करना चाहते तो इसे ऑटोमैटिक भी किया जा सकता है. इसके लिए कीबोर्ड पर विंडोज बटन प्रेस करें. इसके बाद आए मेनू से सेटिंग ऐप को ओपन कर सिस्टम पर जाएं. यहां आपको स्टोरेज का ऑप्शन दिखेगा, इस पर क्लिक कर स्टोरेज सेंस पर जाएं. यहां से आप स्टोरेज को मैनेज कर सकते हैं.
स्टार्ट अप ऐप्स पर दें ध्यान
जब भी आप लैपटॉप ऑन करते हैं, कुछ ऐप्स ऑटोमैटिकल ओपन होने लगती है. बाई डिफॉल्ट लैपटॉप ओपन करते ही कई ऐसी ऐप्स भी ओपन हो जाती हैं, जिनकी आपको जरूरत नहीं होती. इससे बूट टाइम बढ़ता है और आपके सिस्टम की स्पीड स्लो हो जाती है. इसलिए आप कुछ ऐप्स को ऑटोमैटिकली ओपन होने से रोक सकते हैं. इसके लिए टास्क मैनेजर ओपन कर स्टार्टअप ऐप्स टैब पर जाएं. यहां आपको पूरी लिस्ट दिख जाएगी, जिसमें से आप ऐप्स को ऑटोमैटिक ओपन होने से बंद कर सकते हैं.
बैकग्राउंड ऐप्स को कर दें बंद
फोन की तरह लैपटॉप में भी बैकग्राउंड में कई ऐप्स चलती रहती हैं, जिससे सिस्टम की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है. आप केवल जरूरी ऐप्स को छोड़कर बाकी सबकी बैकग्राउंड एक्टिविटी बंद कर सकते हैं. इसके लिए सेटिंग्स ऐप में जाकर ऐप्स पर क्लिक करें. यहां इंस्टॉल्ड ऐप्स पर क्लिक करें और उस ऐप को सेलेक्ट करें, जिसकी बैकग्राउंड एक्टिविटी आप बंद करना चाहते हैं. इसके बाद बैकग्राउंड परमिशन पर जाकर नेवर चूज कर लें.
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ऐप्पल ने लॉन्च कर दिए नए एयरटैग, ये फीचर्स जान लिए तो खरीदे बिना नहीं रह पाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल ने नए एयरटैग लॉन्च कर दिए हैं. इन्हें एयरटैग 2 नाम देने की बजाय ऐप्पल एयरटैग ही कह रही है क्योंकि कंपनी ने पुराने एयरटैग को डिसकंटिन्यू कर दिया है. एयरटैग को सबसे पहले 2021 में लॉन्च किया गया था और लंबे समय से इनके नए वर्जन का इंतजार किया जा रहा था भले ही इनका नाम और डिजाइन चेंज नहीं हुआ है, लेकिन इनमें कई अपग्रेड्स दी गई हैं. आइए जानते हैं कि इन अपग्रेड्स से एयरटैग कितने बेहतर हुए हैं.
लंबी रेंज और बेहतर प्रीसिजन
नए एयरटैग की मदद से आपके गुम हुए सामान को ढूंढना और आसान होने वाला है. इसमें आईफोन 17 सीरीज वाली अल्ट्रा वाइडबैंड चिप लगी है और इसकी ब्लूटूथ चिप को भी अपग्रेड किया गया है. इससे यह फायदा होगा कि आप पहले की तुलना में ज्यादा रेंज तक अपना गुम हुआ सामान ढूंढ सकते हैं. इसके अलावा इसे प्रीसिजन फाइंडिंग गाइड से भी लैस किया गया है, जो हैप्टिक, विजुअल और ऑडियो फीडबैक से सामान ढूंढने में मदद करता है.&amp;nbsp;
बड़ा स्पीकर
नए एयरटैग में पुराने की तुलना में दोगुना बड़ा स्पीकर दिया गया है, जिससे आपके लिए एयरटैग की लोकेशन का पता लगाना आसान हो जाएगा. ऐप्पल का कहना है कि नए स्पीकर के कारण आप पहले की तुलना में दोगुनी दूरी से साउंड सुन सकेंगे. यह एयरपोर्ट जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों पर खूब काम आएगा.
सिक्योरिटी का भी रखा गया है ध्यान
ऐप्पल का कहना है कि नए एयरटैग में अनवांटेड ट्रैकिंग के खिलाफ जबरदस्त सिक्योरिटी दी गई है. इनमें यूनिक ब्लूटूथ आईडेंटिफायर लगाए गए हैं, जो लगातार बदलते रहते हैं. साथ ही इन्हें यूजर का लोकेशन डेटा प्राइवेट रखने के लिए डिजाइन किया गया है.
कितनी है कीमत?
एयरटैग ऐप्पल का सबसे सस्ता गैजेट है और इसे खरीदने के लिए आपको ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं पड़ेगी. भारत में एक एयरटैग के लिए आपको केवल 3,790 रुपये चुकाने होंगे. अगर आप 4 एयरटैग का पैक खरीदते हैं तो इसकी कीमत मात्र 12,900 रुपये है.
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:31 +0530</pubDate>
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<title>GTA 6 की कीमत हुई लीक! गेमर्स के उड़ गए होश, स्टैंडर्ड एडिशन खरीदने के लिए चाहिए होगा इतना पैसा</title>
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<description><![CDATA[ GTA 6 Price Leak: GTA 6 यानी Grand Theft Auto 6 साल 2026 का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला गेम माना जा रहा है. जैसे ही इसके दो ट्रेलर सामने आए, वैसे ही गेम से जुड़ी कीमत, फीचर्स और रिलीज डेट को लेकर लगातार लीक्स और अफवाहें आने लगीं. अब एक बार फिर GTA 6 की संभावित कीमत ने सुर्खियां बटोर ली हैं क्योंकि लंबे समय से माना जा रहा था कि इसका दाम काफी ज्यादा हो सकता है.
क्या सच में 100 डॉलर होगा GTA 6 का दाम?
कुछ समय पहले तक ऐसी अटकलें तेज थीं कि GTA 6 का स्टैंडर्ड एडिशन करीब 100 डॉलर की कीमत पर लॉन्च किया जा सकता है. हालांकि, एक मार्केट एनालिस्ट ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि Rockstar Games अचानक इतनी ज्यादा कीमत नहीं रखेगा. इससे उन गेमर्स को राहत मिली है जो महंगे प्राइस टैग से परेशान थे.
ग्लोबल मार्केट में कितनी हो सकती है कीमत
Insider Gaming और अन्य मीडिया एनालिस्ट्स की मानें तो GTA 6 की कीमत 70 डॉलर के आसपास रह सकती है. कई रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि स्टैंडर्ड एडिशन की कीमत 79.99 डॉलर तक जा सकती है जो अमेरिका समेत दूसरे बड़े मार्केट्स में लागू होगी. वहीं भारत में इस गेम की अनुमानित कीमत करीब 7,199 रुपये बताई जा रही है जो मौजूदा AAA गेम्स की कीमत के करीब ही है.
रिलीज डेट और प्री-ऑर्डर को लेकर क्या है अपडेट
फिलहाल GTA 6 की लॉन्च डेट 19 नवंबर 2026 बताई जा रही है. इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि गेम का तीसरा ट्रेलर मई 2026 के आसपास रिलीज किया जा सकता है. माना जा रहा है कि उसी समय Rockstar प्री-ऑर्डर से जुड़ी पूरी जानकारी भी साझा कर सकता है जिससे फैंस का इंतजार थोड़ा और रोमांचक हो जाएगा.
GTA 6 में क्या होगा खास
GTA 6 खिलाड़ियों को एक बार फिर Vice City की रंगीन लेकिन खतरनाक दुनिया में ले जाएगा. इस बार कहानी दो नए किरदारों Jason और Lucia के इर्द-गिर्द घूमेगी जो अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश करेंगे. गेम में नए मैकेनिक्स देखने को मिल सकते हैं जैसे लव मीटर, एडवांस्ड वेपन स्विचिंग, कैरेक्टर स्विच सिस्टम और इन-गेम सोशल मीडिया. इसके अलावा Raul Batista, Boobie Ike और Cal Hampton जैसे सपोर्टिंग कैरेक्टर्स भी कहानी को और गहराई देंगे.
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:31 +0530</pubDate>
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<title>WhatsApp यूजर्स सावधान! ये सीक्रेट सेफ्टी फीचर्स नहीं जानते तो आपका अकाउंट भी हो सकता है हैक</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp Safety Features: आज के समय में WhatsApp हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. पर्सनल बातचीत से लेकर ऑफिस के जरूरी मैसेज तक, सब कुछ इसी ऐप पर चलता है. ऐसे में अगर इसकी प्राइवेसी और सिक्योरिटी को नजरअंदाज किया गया तो बाद में पछताना पड़ सकता है. 2026 में WhatsApp में मौजूद कई स्मार्ट सेफ्टी फीचर्स यूजर्स को अपने अकाउंट और चैट्स पर बेहतर कंट्रोल देते हैं बस जरूरत है उन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करने की.
Chat Lock से निजी बातें रहेंगी पूरी तरह सुरक्षित
अगर आप चाहते हैं कि आपकी कुछ खास चैट्स सिर्फ आपकी नजरों तक ही सीमित रहें, तो Chat Lock फीचर आपके लिए बेहद काम का है. इसे एक्टिव करने के बाद चुनी गई बातचीत तभी खुलेगी जब फोन का पासकोड या फिंगरप्रिंट/फेस लॉक लगाया जाएगा. ऐसे में अगर कोई गलती से आपका फोन उठा भी ले तो आपकी निजी चैट्स तक उसकी पहुंच नहीं होगी. प्राइवेसी के लिहाज से यह फीचर अब सबसे ज्यादा जरूरी माना जा रहा है.
Disappearing Messages से चैट्स खुद-ब-खुद होंगी गायब
WhatsApp का Disappearing Messages फीचर उन यूजर्स के लिए फायदेमंद है जो पुरानी बातचीत को लंबे समय तक फोन में नहीं रखना चाहते. इसमें तय समय के बाद मैसेज अपने आप डिलीट हो जाते हैं. इससे न सिर्फ आपकी प्राइवेसी मजबूत होती है बल्कि फोन की स्टोरेज भी बेवजह भरने से बचती है. संवेदनशील बातचीत के लिए यह फीचर काफी मददगार साबित होता है.
Last Seen और Online Status पर आपका पूरा अधिकार
अब WhatsApp यूजर्स यह तय कर सकते हैं कि उनका Last Seen और Online Status कौन देख सकता है. आप चाहें तो इसे सभी से छिपा सकते हैं या सिर्फ चुनिंदा कॉन्टैक्ट्स तक सीमित कर सकते हैं. इससे अनचाहे लोगों को आपकी एक्टिविटी का अंदाजा नहीं लग पाता और आपकी डिजिटल प्राइवेसी बनी रहती है.
Two-Step Verification से अकाउंट को मिले डबल लॉक
WhatsApp अकाउंट की सुरक्षा के लिए Two-Step Verification को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. इस फीचर को ऑन करने पर एक अलग 6 अंकों का पिन सेट करना होता है जो नए डिवाइस में लॉगिन करते वक्त जरूरी होता है. मान लीजिए किसी को आपका OTP मिल भी जाए तब भी बिना पिन के वह आपके अकाउंट में घुस नहीं पाएगा. इसलिए हर यूजर को यह फीचर जरूर एक्टिव रखना चाहिए.
अनजान कॉल और मैसेज से मिलेगी राहत
बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड के बीच WhatsApp ने अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स और मैसेज से राहत देने के लिए खास फीचर्स दिए हैं. Silence Unknown Callers की मदद से अजनबी नंबरों की कॉल्स अपने आप म्यूट हो जाती हैं जबकि मैसेज रिक्वेस्ट फीचर अनजान लोगों के मैसेज को अलग दिखाता है. इससे स्पैम, ठगी और बेवजह की परेशानी से काफी हद तक बचा जा सकता है.
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>WhatsApp में आया नया सिक्योरिटी मोड, हैकर्स के छूटेंगे पसीने, एक टैप से मिलेगी एडवांस प्रोटेक्शन</title>
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<description><![CDATA[ WhatsApp ने दुनियाभर में अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक नया सिक्योरिटी फीचर जारी किया है, जो उन्हें साइबर अटैक्स से बचा सकता है. इस फीचर को &#039;स्ट्रिक्ट अकाउंट सेटिंग&#039; नाम दिया गया है, जो एक ही टैप से एक साथ कई सिक्योरिटी डिफेंस एक्टिवेट कर देगा. ऐप्पल और गूगल के बाद इस तरह का फीचर देने वाली व्हाट्सऐप तीसरी कंपनी बन गई है. बता दें कि कुछ समय पहले ही व्हाट्सऐप ने इस फीचर का ऐलान किया था और अब इस रोल आउट किया जा रहा है.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा यह फीचर?
इस फीचर को इनेबल करते ही एक साथ कई डिफेंस एक्टिवेट हो जाएंगे, जिससे हैकर्स के लिए यूजर को टारगेट करना मुश्किल हो जाएगा. फीचर इनेबल होते ही यूजर के पास अनजान नंबरों से आने वाली फाइल्स और अटैचमेंट ब्लॉक हो जाएंगी, यूजर को URL के साथ दिखने वाले लिंक प्रीव्यू डिसेबल हो जाएंगे और अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स साइलेंस हो जाएंगी. व्हाट्सऐप का कहना है कि इन तीनों ही चीजों को सर्विलांस और एडवांस्ड साइबर अटैक्स के लिए यूज किए जाने का खतरा होता है और यह फीचर इसके खिलाफ सुरक्षा देगा.
फीचर को इनेबल कैसे करें?
फीचर को इनेबल करने के लिए यूजर को सेटिंग में जाकर प्राइवेसी ऑप्शन पर टैप करना पड़ेगा. यहां एडवांस्ड सेक्शन में जाएं, जहां आपको नया फीचर दिख जाएगा. अभी यह फीचर रोल आउट किया जा रहा है तो ऐसे में हो सकता है कि आपके डिवाइस पर आने में इसे थोड़ा समय लगे. आने वाले हफ्तों में यह सभी यूजर्स के लिए अवेलेबल हो जाएगा. यह फीचर खास तौर पर जर्नलिस्ट, एक्टिविस्ट और पब्लिक फिगर को ध्यान में रखकर लाया गया है, जिन पर साइबर हमलों और जासूसी का ज्यादा खतरा होता है.
गूगल और ऐप्पल भी ला चुकी है ऐसा फीचर
2022 में ऐप्पल ने लॉकडाउन मोड नाम से ऐसा ही फीचर जारी किया था. इसमें मैसेज अटैचमेंट, लिंक प्रीव्यू डिसेबल होना और वेब ब्राउजिंग पर रेस्ट्रिक्शन समेत कई डिफेंस एक्टिव हो जाते हैं. गूगल ने भी पिछले साल एडवांस्ड प्रोटेक्शन मोड रोल आउट किया था, जो लॉकडाउन मोड की तरह ही काम करता है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>आईफोन 18 की कीमत को लेकर हो गया बड़ा खुलासा, जानें कितने में मिल सकता है नया आईफोन</title>
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<description><![CDATA[ इन दिनों मेमोरी चिप्स की कीमतें बढ़ने के कारण स्मार्टफोन महंगे हो रहे हैं. शाओमी और सैमसंग जैसे कई बड़ी कंपनियों अपने फोन महंगे कर चुकी हैं. इसी बीच खबर आई है कि ऐप्पल आईफोन 18 की कीमतों पर मौजूदा हालात का असर नहीं होने देगी. इसका मतलब है कि आईफोन 18 को लगभग आईफोन 17 वाली कीमत (लगभग 83,000 रुपये) पर ही लॉन्च किया जा सकता है. ऐसे समय में जब सारी कंपनियों के मोबाइल महंगे हो रहे हैं, ऐप्पल के लिए यह कदम फायदे का सौदा साबित हो सकता है.&amp;nbsp;
ये है ऐप्पल की प्लानिंग
बाकी कंपनियों की तरह ऐप्पल भी मेमोरी चिप्स के लिए भारी रकम चुका रही है. एक रिपोर्ट में दावा किया है कि ऐप्पल बढ़ी हुई लागत को खुद वहन करेगी और आईफोन 18 की शुरुआती कीमत को फेरबदल होने की उम्मीद नहीं है. कंपनी कोशिश कर रही है कि उसे नए आईफोन की कीमतें न बढ़ानी पड़े, लेकिन अगर अपकमिंग मॉडल्स को महंगा किया जाता है तो भी इनकी शुरुआती कीमतें मौजूदा मॉडल के बराबर रह सकती हैं. इससे मार्केटिंग के मामले में ऐप्पल को काफी फायदा होने की उम्मीद है.
मेमोरी के अलावा दूसरे कंपोनेंट भी हुए महंगे
इन दिनों स्मार्टफोन कंपनियों महंगाई से जूझ रही हैं. एआई सर्वर बूम के कारण सप्लाई चैन पर असर पड़ा है और मेमोरी के साथ-साथ दूसरे कंपोनेंट भी महंगे हो गए हैं. इस कारण इन दिनों स्मार्टफोन, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी आदि डिवाइसेस के दामों में इजाफा देखने को मिल रहा है.&amp;nbsp;
कब लॉन्च होगा आईफोन 18?
ऐप्पल आमतौर पर सितंबर में अपने नए आईफोन मॉडल लॉन्च करती है, लेकिन इस बार कंपनी ने लॉन्च शेड्यूल में बदलाव किया है. अब सितंबर में आईफोन 18 प्रो, 18 प्रो मैक्स और फोल्डेबल आईफोन लॉन्च किया जाएगा. आईफोन 18 को अगले साल फरवरी-मार्च में बाजार में उतारा जाएगा.
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोन स्लो हो गया है? Factory Reset या Cleaning Apps, कौन सच में बढ़ाता है परफॉर्मेंस, जानिए पूरा सच</title>
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<description><![CDATA[ Factory Reset Vs Cleaning Apps: स्मार्टफोन में हल्की-फुल्की तकनीकी दिक्कतें होना आम बात है. लेकिन जैसे-जैसे समय गुजरता है, फोन की स्पीड कम होने लगती है. ऐप्स खुलने में देर करते हैं, स्टोरेज भर जाता है और फोन पहले जैसा स्मूद महसूस नहीं होता. ऐसे में यूजर्स आमतौर पर दो रास्ते अपनाते हैं या तो फोन को फैक्ट्री रीसेट कर देते हैं या फिर किसी क्लीनिंग ऐप की मदद लेते हैं जो एक टैप में स्पीड बढ़ाने का दावा करता है. दोनों विकल्प असरदार लगते हैं लेकिन असल में काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है.
Factory Reset करने से फोन में क्या बदलता है?
फैक्ट्री रीसेट करने पर फोन पूरी तरह से अपनी शुरुआती स्थिति में लौट आता है. इसमें सभी ऐप्स, डेटा और सेटिंग्स हट जाती हैं. इससे खराब फाइलें, अनावश्यक ऐप्स और बैकग्राउंड में चल रही वे चीजें खत्म हो जाती हैं जो फोन को स्लो बना रही होती हैं. लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद सिस्टम में जो सॉफ्टवेयर अव्यवस्था बन जाती है उसे फैक्ट्री रीसेट काफी हद तक ठीक कर देता है और फोन दोबारा तेज और रिस्पॉन्सिव लगने लगता है.
हालांकि इसका एक नुकसान भी है. अगर पहले से बैकअप नहीं लिया गया तो सारा पर्सनल डेटा मिट जाता है और फोन को दोबारा सेट करने में समय लगता है. इसलिए फैक्ट्री रीसेट उन हालात में ज्यादा फायदेमंद होता है जब फोन बार-बार हैंग हो, क्रैश करता हो या फिर आप उसे बेचने या किसी और को देने वाले हों.
Phone Cleaning Apps कैसे काम करते हैं?
हर क्लीनिंग ऐप बेकार हो ऐसा नहीं है. लेकिन ज्यादातर थर्ड-पार्टी क्लीनिंग ऐप्स जितना दावा करती हैं, उतना फायदा नहीं पहुंचा पातीं. इसके मुकाबले Android और iOS में मिलने वाले इन-बिल्ट क्लीनअप टूल ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद होते हैं. इनकी मदद से आप कैश फाइल्स हटा सकते हैं, बेकार ऐप्स डिलीट कर सकते हैं स्टोरेज मैनेज कर सकते हैं और गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद कर सकते हैं.
क्योंकि ये फीचर्स फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम का हिस्सा होते हैं, इसलिए परफॉर्मेंस पर इनका असर भी संतुलित रहता है. वहीं कई बाहरी क्लीनिंग ऐप्स मॉडर्न स्मार्टफोन के मेमोरी मैनेजमेंट सिस्टम को ठीक से समझ नहीं पातीं, जिस वजह से असली स्पीड बूस्ट नहीं मिल पाता.
आखिर बेहतर विकल्प कौन-सा है?
अगर आपका फोन सिर्फ इसलिए स्लो लग रहा है क्योंकि स्टोरेज भर गया है या फालतू फाइल्स जमा हो गई हैं, तो मैन्युअल क्लीनअप या इन-बिल्ट टूल्स ही काफी हैं. लेकिन जब फोन में लगातार लैग, बार-बार क्रैश या गहरी सॉफ्टवेयर समस्या दिखने लगे तब फैक्ट्री रीसेट ज्यादा असरदार साबित होता है.
असल समझ यही है कि फैक्ट्री रीसेट एक ताकतवर उपाय है, रोजमर्रा की मेंटेनेंस नहीं. सही समय पर सही तरीका अपनाने से न सिर्फ फोन की परफॉर्मेंस सुधरती है बल्कि अनावश्यक डेटा लॉस और झंझट से भी बचा जा सकता है.
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<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:28 +0530</pubDate>
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<title>ऐप्पल का सबसे सस्ता गैजेट हो गया लॉन्च, कीमत 4,000 रुपये से भी कम, कमाल के हैं फीचर्स</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल ने सेकंड जनरेशन एयरटैग को लॉन्च कर दिया है. मेटल से बना यह ट्रैकर ऐप्पल का सबसे सस्ता गैजेट है और इसे बैग्स, वॉलेज और कीज आदि की लोकेशन ट्रैक करने के लिए यूज किया जाता है. इसकी कीमत की बात करें तो एक एयरटैग के लिए आपको केवल 3,790 रुपये चुकाने होंगे. अगर आप 4 एयरटैग का पैक खरीदते हैं तो इसकी कीमत मात्र 12,900 रुपये है. अगले कुछ दिनों में यह बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएगा.&amp;nbsp;
नए एयरटैग में मिलेंगे ये फीचर्स
नए एयरटैग का डिजाइन पुराने के समान है. आकार में एकदम छोटे इस कॉम्पैक्ट मेटल ट्रैकर को आप किसी कीचैन से अटैच करने के साथ बैग में डाल सकते हैं और यह उसकी लोकेशन आप तक पहुंचाता रहेगा. यह उन लोगों के लिए बहुत काम का है, जो सामान रखकर भूल जाते हैं या अकसर ट्रैवल करते रहते हैं. नए फीचर्स की बात करें तो इसकी रेंज बढ़ाने के साथ-साथ ऐप्पल ने पावर को भी भी बढ़ाया है. इसमें नई ब्लूटूथ चिप दी गई है, जो अब पहले से ज्यादा दूरी से चीजों को लोकेट कर पाएगी. कंपनी ने इसमें पहले की तुलना में बड़ा स्पीकर दिया है, जिससे इसका अलर्ट दोगुनी दूरी तक सुनाई दे सकता है.
ऐप्पल वॉच के साथ भी करेगा काम
नए एयरटैग को ऐप्पल वॉच की मदद से भी लोकेट किया जा सकेगा. यह फीचर पहली बार आया है और इसके लिए यूजर के पास ऐप्पल वॉच सीरीज 9 और अल्ट्रा 2 के बाद आए मॉडल होने चाहिए. पुराने वर्जन की तरह नए एयरटैग को भी ऐप्पल की फाइंड माई ऐप में जाकर पेयर किया जा सकता है. ऐप्पल ने सेकंड जनरेशन वर्जन को भी एयरटैग 2 की जगह एयरटैग नाम दिया है. कंपनी ने इसकी पहली जनरेशन को डिसकंटिन्यू कर दिया है और अब केवल नए एयरटैग ही खरीदे जा सकेंगे.
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इंस्टाग्राम और फेसबुक के लिए भी आएंगे सब्सक्रिप्शन प्लान, YouTube की तरह पैसे देकर मिलेंगे प्रीमियम फीचर्स ]]></description>
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:32 +0530</pubDate>
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<title>अब उम्र छुपाना पड़ेगा भारी! ChatGPT खुद पहचान लेगा आप नाबालिग हैं या नहीं, आ गया चौंकाने वाला नया फीचर</title>
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<description><![CDATA[ अब उम्र छुपाना पड़ेगा भारी! ChatGPT खुद पहचान लेगा आप नाबालिग हैं या नहीं, आ गया चौंकाने वाला नया फीचर ]]></description>
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<title>ऐप्पल ने कस ली कमर, 2&#45;4 नहीं, इस साल लॉन्च करेगी 20 से ज्यादा प्रोडक्ट्स, देखें पूरी लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल इस साल अपने यूजर्स के लिए एक से बढ़कर एक प्रोडक्ट लाने वाली है. कंपनी इस साल 20 से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करेगी और नए एयरटैग के साथ इसकी शुरुआत हो गई है. ऐप्पल ने हाल ही में नए एयरटैग लॉन्च किए हैं. इस साल ऐप्पल के फोल्डेबल आईफोन का सबको बेसब्री से इंतजार है. आइए एक नजर डालते हैं कि ऐप्पल 2026 में कौन-कौन से प्रोडक्ट बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है.
एयरटैग से शुरुआत
ऐप्पल ने सेकंड जनरेशन एयरटैग लॉन्च कर दिए हैं. पहली बार इन्हें ऐप्पल वॉच से पेयर करने का भी ऑप्शन दिया गया है. पुराने मॉडल की तुलना में नए एयरटैग में अपग्रेडेड ब्लूटूथ चिप, बड़ा स्पीकर और लंबी रेंज दी गई है.
पहली छमाही में इन प्रोडक्ट्स का इंतजार
iPhone 17e- किफायती कीमत वाले इस आईफोन में आईफोन 17 वाला चिपसेट, मैग्सेफ और डायनामिक आईलैंड जैसे फीचर्स होंगे.iPad Air- मौजूदा M3 चिपसेट वाले मॉडल को M4 चिपसेट के साथ अपग्रेड किया जाएगा.iPad- इसे भी A16 चिप से अपग्रेड कर A18 या A19 चिप से लैस किया जाएगा.MacBook Pro- ऐप्पल इसका चिपसेट अपग्रेड करने के साथ इसमें PCIe 5.0 सपोर्ट देगी.MacBook Air- इसे M5 चिपसेट से अपग्रेड कर बाजार में उतारा जाएगा.सस्ती MacBook- विंडोज लैपटॉप को टक्कर देने के A18 Pro चिपसेट के साथ 12.9 इंच डिस्प्ले वाला नया लैपटॉप जल्द लॉन्च होगा.Mac Studio- इसे भी M5 Max और M5 Ultra चिपसेट के साथ अपग्रेड करने की तैयारी है.Studio Display- Mini-LED बैकलाइटिंग, प्रोमोशन सपोर्ट और नए चिपसेट के साथ लॉन्च होगा.Home Hub- इसे नए सिरी, 6-7 इंच के स्क्वेयर डिस्प्ले, A18 चिपसेट और फेसटाइम सपोर्ट के साथ लाया जाएगा.सिक्योरिटी कैमरा- ऐप्पल के डिजाइन किए गए इन कैमरा को स्मार्ट होम हब के साथ बेचा जाएगा.
दूसरी छमाही में आएंगे ये प्रोडक्ट्स
आईफोन एयर 2- सितंबर में आईफोन एयर को अपग्रेड करते हुए आईफोन एयर 2 को लॉन्च किया जा सकता है.आईफोन 18 प्रो और प्रो मैक्स- नए चिपसेट, छोटे डायनामिक, नए कैमरा फीचर्स और बड़ी बैटरी के साथ नए प्रो मॉडल्स लॉन्च होंगे.आईफोन फोल्ड- सितंबर में ऐप्पल अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. इसमें 7.7 इंच का मेन और 5.3 इंच का कवर डिस्प्ले होगा.Apple Watch Series 12- नई चिप, नए डिजाइन और टचआईडी के साथ नई वॉचेज लॉन्च होगी.Apple Watch Ultra 4- ऐप्पल वॉच सीरीज 12 की तरह इसमें भी नई चिप और नया डिजाइन मिल सकता है.MacBook Pro- इसका डिजाइन बदला जाएगा. इसे OLED डिस्प्ले, टच स्क्रीन और नए मॉडम के साथ लॉन्च किया जाएगा.Higher-End AirPods Pro 3- इसमें एआई फीचर्स के लिए इंफ्रारेड कैमरा दिया जाएगा.
इन प्रोडक्ट्स पर भी रहेगी नजर
Apple Glasses- ऐप्पल इस साल स्पीकर और कैमरा के साथ AR ग्लासेस लॉन्च कर सकती है.Face ID Doorbell- कंपनी की तरफ से फेसआईडी और होमकिट सिक्योर वीडियो के साथ वीडियो डोरबेल का भी इंतजार है.iPad mini- इसे A19 Pro या A20 Pro चिपसे, OLED डिस्प्ले और नए स्पीकर सिस्टम के साथ उतारा जा सकता है.Mac mini- इसे नए चिपसेट के साथ लॉन्च किया जाएगा.Apple TV- कंपनी ऐप्पल टीवी को भी A17 Pro चिपसेट के साथ अपडेट कर सकती है.
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इंस्टाग्राम और फेसबुक के लिए भी आएंगे सब्सक्रिप्शन प्लान, YouTube की तरह पैसे देकर मिलेंगे प्रीमियम फीचर्स ]]></description>
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:31 +0530</pubDate>
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<title>ये AI टूल मचा रहा है तूफान! इन 5 तरीकों से हो रहा इस्तेमाल, जानिए पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ AI Tool: इन दिनों एक AI टूल इंटरनेट पर जबरदस्त चर्चा में है. इसका नाम है Claude Code जो केवल एक टेक्स्ट कमांड देने पर कंप्यूटर कोड तैयार कर देता है. मई में लॉन्च हुआ यह टूल बीते कुछ हफ्तों में रिकॉर्ड तेजी से लोकप्रिय हुआ है. कंपनी के मुताबिक, छुट्टियों के दौरान लोगों को इसे आज़माने का वक्त मिला और तभी उन्हें इसकी असली ताकत का अंदाज़ा हुआ.
बिना कोडिंग सीखे ऐप और वेबसाइट बनाना हुआ आसान
Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, Claude Code उन AI कोडिंग टूल्स में से एक है जिनका इस्तेमाल अब वे लोग भी कर रहे हैं जिन्हें प्रोग्रामिंग की कोई जानकारी नहीं है. इस ट्रेंड को लोग मज़ाकिया अंदाज़ में &amp;ldquo;वाइबकोडिंग&amp;rdquo; कह रहे हैं. इस टूल के जरिए लोग खुद की वेबसाइट, मोबाइल ऐप और छोटे-बड़े सॉफ्टवेयर बना रहे हैं. फीचर्स के हिसाब से इसका सब्सक्रिप्शन शुल्क अलग-अलग है.
कपड़ों की पहचान से शुरू हुई AI की मदद
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में रहने वाले सैम हिंड्स ने इस टूल का इस्तेमाल घर के काम को आसान बनाने के लिए किया. छोटे बच्चों के कपड़े पहचानना उनके लिए बड़ी चुनौती थी. उन्होंने Claude Code से ऐसा प्रोग्राम बनवाया जो तस्वीर देखकर बता दे कि कपड़ा किस बच्चे का है. अब वे सिर्फ कपड़ा कैमरे के सामने रखते हैं और सिस्टम तुरंत नाम बता देता है. पूरा सेटअप उन्होंने एक घंटे से भी कम समय में तैयार कर लिया.
एक दिन में बन गई इंटरैक्टिव वेबसाइट
न्यूयॉर्क के फोटोग्राफर रॉब स्टीफेंसन ने Claude Code की मदद से एक डॉक्यूमेंट्री वेबसाइट तैयार की. इस साइट में न्यूयॉर्क शहर का इंटरैक्टिव मैप, फोटो और ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं. स्टीफेंसन के मुताबिक, पहले उन्हें लगता था कि ऐसा प्रोजेक्ट बनाने में हजारों डॉलर खर्च होंगे, लेकिन AI की मदद से यह काम एक दिन में पूरा हो गया. इसके बाद उन्होंने खुद ही नए फीचर्स जोड़ने शुरू कर दिए.
इमरजेंसी के लिए बना मोबाइल ऐप
अमेरिका के सेंट लुइस में रहने वाले क्रिस रॉबर्ट्स ने Claude Code और Cursor का इस्तेमाल करके एक मोबाइल ऐप तैयार किया. यह ऐप इमरजेंसी के समय एक साथ कई लोगों को अलर्ट मैसेज भेजने में मदद करता है.
कानून प्रवर्तन से जुड़े काम में होने के कारण उन्हें लगा कि ऐसे टूल से लोगों की सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है. ऐप का डिज़ाइन साधारण है लेकिन ज़रूरत के वक्त यह अपना काम बखूबी करता है.
दो घंटे में तैयार हुआ ट्रेडिंग सिम्युलेटर
डेलावेयर यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एनी हौबो ड्यूरबर्ग ने पढ़ाई को आसान बनाने के लिए Claude Code का सहारा लिया. वह अपने छात्रों के लिए एक स्टॉक ट्रेडिंग सिम्युलेटर बनाना चाहती थीं लेकिन यह काम उन्हें बहुत मुश्किल लग रहा था.
Claude Code डाउनलोड करने के कुछ ही घंटों में उन्होंने एक काम करने वाला डेमो तैयार कर लिया. अब छात्र नकली बाजार में ट्रेडिंग करके अलग-अलग वित्तीय स्थितियों को समझ सकेंगे.
छोटे बिजनेस के लिए बना पर्सनल AI असिस्टेंट
सेंट लुइस के जो बैकस अपनी मेटल फैब्रिकेशन कंपनी चलाते हैं. सीमित स्टाफ होने की वजह से उन्हें हर काम खुद देखना पड़ता था. Claude Code की मदद से उन्होंने एक ऐसा AI असिस्टेंट बनाया जो उनका कैलेंडर संभालता है, ईमेल देखता है, कॉन्ट्रैक्ट मैनेज करता है और नए काम के मौके ढूंढता है. उनका कहना है कि पहले उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वे खुद अपने बिज़नेस के लिए ऐसे टूल बना पाएंगे.
AI से बदल रही है कोडिंग की दुनिया
Claude Code की लोकप्रियता यह दिखाती है कि अब टेक्नोलॉजी सिर्फ एक्सपर्ट्स तक सीमित नहीं रही. AI टूल्स की मदद से आम लोग भी अपने आइडिया को असली प्रोडक्ट में बदल पा रहे हैं. यही वजह है कि यह टूल तेजी से वायरल हो रहा है और आने वाले समय में इसका असर और गहरा हो सकता है.
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Chrome यूजर्स अलर्ट! वेब स्टोर पर मिले खतरनाक एक्सटेंशन, 1 लाख से ज्यादा यूजर्स पर मंडरा रहा है खतरा</title>
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<description><![CDATA[ Google Chrome: Chrome Web Store एक बार फिर सवालों के घेरे में है. इस बार वजह कुछ ऐसे खतरनाक ब्राउजर एक्सटेंशन हैं जो Google की सख्त सिक्योरिटी जांच के बावजूद आधिकारिक स्टोर तक पहुंचने में कामयाब हो गए. हैरानी की बात यह है कि ये एक्सटेंशन किसी संदिग्ध वेबसाइट पर नहीं बल्कि सीधे Chrome Web Store पर मौजूद थे और 1 लाख से ज्यादा यूजर्स को जोखिम में डाल चुके हैं.
Google की सुरक्षा दीवार को कैसे चकमा दे गए खतरनाक एक्सटेंशन
साइबर सिक्योरिटी कंपनी Symantec के रिसर्चर्स के मुताबिक, ये एक्सटेंशन सिर्फ परेशान करने वाले विज्ञापन या स्लो ब्राउज़िंग तक सीमित नहीं थे. ये यूजर्स के क्लिपबोर्ड में कॉपी किए गए डेटा तक पहुंच बना रहे थे, संवेदनशील जानकारी चुरा रहे थे और रिमोट अटैकर्स को ब्राउजर कंट्रोल करने का मौका दे रहे थे. कुछ मामलों में तो ये एक्सटेंशन Chrome के अंदर ही खतरनाक कोड चला सकते थे, वो भी लंबे समय तक, बिना यूजर को भनक लगे.
Good Tab एक्सटेंशन
सबसे ज्यादा चिंताजनक नाम Good Tab एक्सटेंशन का है जो खबर लिखे जाने तक Chrome Web Store पर मौजूद था. यह एक्सटेंशन एक असुरक्षित HTTP iframe का इस्तेमाल करता है जिससे यूजर का क्लिपबोर्ड डेटा सीधे किसी रिमोट वेबसाइट तक पहुंच सकता है. इसका मतलब है कि पासवर्ड, पर्सनल नोट्स या यहां तक कि क्रिप्टो वॉलेट एड्रेस भी चोरी या बदले जा सकते हैं. ऐसे में यूजर को आर्थिक नुकसान तक उठाना पड़ सकता है, वो भी बिना किसी चेतावनी के.
ये एक्सटेंशन भी साबित हुए बेहद खतरनाक
Good Tab के अलावा भी कई एक्सटेंशन सामने आए हैं. Child Protection नाम का एक एक्सटेंशन, जो अब हटाया जा चुका है, अटैकर्स के लिए रिमोट कंट्रोल टूल की तरह काम कर रहा था. यह कुकीज चुराने, लॉगिन हाईजैक करने और मनचाहा JavaScript कोड चलाने में सक्षम था.
वहीं DPS Websafe खुद को Adblock Plus जैसे भरोसेमंद टूल की तरह दिखाता था लेकिन असल में यह सर्च रिजल्ट्स से छेड़छाड़ करता, ब्राउज़िंग पर नजर रखता और फर्जी ब्रांडिंग के जरिए यूजर्स को गुमराह करता था.
Stock Informer नाम का एक्सटेंशन भी अभी स्टोर पर मौजूद बताया जा रहा है जिसमें गंभीर सुरक्षा खामी है. मैसेज वेरिफिकेशन सही न होने की वजह से हैकर्स कहीं से भी खतरनाक कोड चला सकते हैं.
Chrome यूजर्स को अभी क्या करना चाहिए
अगर आपने कभी इनमें से कोई भी एक्सटेंशन इंस्टॉल किया है तो उसे तुरंत हटा देना ही सबसे सुरक्षित कदम है. आगे से किसी भी एक्सटेंशन को सिर्फ इसलिए भरोसेमंद न मानें क्योंकि वह Chrome Web Store पर मौजूद है.
ऐसे रखें अपने डेटा को सुरक्षित
केवल उन्हीं एक्सटेंशन को इंस्टॉल करें, जिनकी आपको सच में जरूरत हो. किसी भी एक्सटेंशन को जोड़ने से पहले उसकी परमिशन जरूर पढ़ें और समय-समय पर अपने इंस्टॉल किए गए ऐड-ऑन की जांच करते रहें. अगर कोई एक्सटेंशन संदिग्ध लगे या इस्तेमाल में न हो तो उसे हटाना ही बेहतर है.
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ऑस्ट्रेलिया की राह चला यह देश, सोशल मीडिया नहीं चला पाएंगे 15 साल से छोटे बच्चे, लगेगा बैन</title>
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<description><![CDATA[ बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने वाले देशों की लिस्ट में एक और नाम शामिल होने वाला है. फ्रांस की नेशनल असेंबली से 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने वाले बिल को हरी झंडी मिल गई है. इस बिल में बच्चों के लिए सोशल नेटवर्क्स और सोशल नेटवर्किंग फंक्शनलिटीज को बैन करने का प्रस्ताव है. अब इसे सीनेट में भेजा जाएगा और कानून बनने के बाद फ्रांस में 15 साल से छोटे बच्चे सोशल मीडिया यूज नहीं कर पाएंगे.
ऑस्ट्रेलिया के कदमों पर चलेगा फ्रांस
ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया यूज करने पर पाबंदी लगी हुई है. अब फ्रांस भी उसी रास्ते पर चलने की तैयारी कर रही है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी अकसर युवाओं के बीच हिंसा के पीछे सोशल मीडिया को जिम्मेदार मानते आए हैं. अपने नए साल के संबोधन में भी उन्होंने लोगों से अपने बच्चों को सोशल मीडिया और स्क्रीन से बचाने की अपील की थी. मैक्रों चाहते हैं कि यह इस साल सितंबर में नए एकेडमिक सेशन की शुरुआत से पहले फ्रांस में यह कानून लागू हो जाए. इस बिल को पेश करते Laure Miller ने कहा कि हम क्लियर बाउंड्री सेट करना चाहते हैं. हमारे बच्चे पढ़ कम रहे हैं, सो कम रहे हैं, लेकिन खुद को एक-दूसरे से कंपेयर ज्यादा कर रहे हैं. यह फ्री माइंड के लिए लड़ाई है.
बाकी देशों में भी चल रहा है विचार
फ्रांस की तरह दुनिया के कई अन्य देश भी सोशल मीडिया बैन के मामले में ऑस्ट्रेलिया को कॉपी करने का विचार कर रहे हैं. फ्रांस के अलावा ब्रिटेन, डेनमार्क, स्पेन और ग्रीस में भी बच्चों के सोशल मीडिया यूज करने पर पाबंदी लग रही है. यूरोपीय संसद ने भी संघ से बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस करने की मिनिमम उम्र सेट करने की मांग की है.
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:29 +0530</pubDate>
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<title>बर्फ गिरेगी या बस डराएगा ऐप? जानिए कैसे पहचानें जब आपका Weather App दे रहा है गलत अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[ Weather App: आजकल स्मार्टफोन के वेदर ऐप्स रंग-बिरंगे आइकॉन और बड़े-बड़े आंकड़ों के साथ मौसम की जानकारी दिखाते हैं. हल्के मौसम में ये ऐप्स काम के हो सकते हैं लेकिन जब सर्दियों में हालात जटिल और खतरनाक हो जाएं जैसे भारी बर्फबारी, फिसलन भरी बर्फ और शून्य से नीचे तापमान तो सिर्फ ऐप पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है. मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे समय में इंसानी अनुभव और स्थानीय जानकारी ज्यादा भरोसेमंद होती है.
भयंकर सर्दी के तूफानों में ऐप क्यों चूक जाते हैं
कई राज्यों में फैले सर्दी के तूफान यह साफ दिखाते हैं कि कुछ ही मील की दूरी पर मौसम पूरी तरह बदल सकता है. कहीं बर्फ गिरती है, कहीं ओले पड़ते हैं और कहीं खतरनाक फ्रीजिंग रेन हो जाती है. ऐसे हालात में मौसम का डेटा बहुत तेजी से बदलता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐप्स इन बारीकियों को समझ नहीं पाते.
क्यों जरूरी हैं इंसानी मौसम विशेषज्ञ
स्थानीय टीवी, रेडियो, लाइव स्ट्रीम या डिटेल्ड वेबसाइट्स पर मौजूद मौसम वैज्ञानिक डेटा को देखकर उसका मतलब समझाते हैं. वे सिर्फ आंकड़े नहीं बताते, बल्कि यह भी बताते हैं कि आपके इलाके में असल असर क्या होगा. विशेषज्ञों के अनुसार, खासकर एक्सट्रीम मौसम में यह जानना जरूरी है कि कोई इंसान डेटा को पढ़कर स्थानीय स्तर पर उसका विश्लेषण कर रहा है.
कई वेदर ऐप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या बड़े ग्रिड डेटा से आपके शहर का अनुमान लगाते हैं जिससे गलतियां होने की संभावना बढ़ जाती है.
क्या सभी वेदर ऐप बेकार हैं?
ऐसा नहीं है कि हर वेदर ऐप बेकार हो. कुछ ऐप्स ऐसे हैं जो नेशनल वेदर सर्विस के डेटा को अनुभवी मौसम वैज्ञानिकों की निगरानी में दिखाते हैं. ऐसे ऐप्स ज्यादा भरोसेमंद माने जाते हैं.
उदाहरण के तौर पर, कुछ लोकप्रिय ऐप्स कई अलग-अलग मौसम मॉडल, आधिकारिक डेटा और ग्राउंड ऑब्जर्वेशन का इस्तेमाल करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि सभी वेदर ऐप एक जैसे नहीं होते कुछ सच में बेहतर काम करते हैं.
वेदर ऐप क्या कर सकते हैं और क्या नहीं
ज्यादातर ऐप्स अपनी जानकारी नेशनल वेदर सर्विस और अन्य बड़े मौसम मॉडलों से लेते हैं. कई बार ये ऐप्स अनिश्चितता को जरूरत से ज्यादा सरल बनाकर बहुत सटीक दिखने वाले नंबर पेश कर देते हैं जिससे लोगों को गलत भरोसा हो जाता है.
ऐसे जटिल तूफानों में ऐप्स सबसे ज्यादा कमजोर साबित होते हैं क्योंकि वे मौसम की बारीक परतों को नहीं समझ पाते. साफ मौसम या सामान्य गर्मियों के दिनों के लिए ऐप्स ठीक हैं लेकिन गंभीर सर्दी के हालात में नहीं.
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अब उम्र छुपाना पड़ेगा भारी! ChatGPT खुद पहचान लेगा आप नाबालिग हैं या नहीं, आ गया चौंकाने वाला नया फीचर ]]></description>
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:28 +0530</pubDate>
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<title>राउटर की लोकेशन के कारण भी स्लो हो सकता है इंटरनेट, जानें कहां रखना होगा सबसे ज्यादा फायदे का सौदा</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप वाईफाई कनेक्शन की स्लो स्पीड से परेशान हैं तो महंगा प्लान लेना जरूरी नहीं है. आप बिना पैसे दिए ही एक सिंपल तरीका अपनाकर अपने कनेक्शन की स्पीड बढ़ा सकते हैं. दरअसल, कई बार वाईफाई राउटर की प्लेसमेंट के कारण भी इंटरनेट स्पीड स्लो हो जाती है. डिवाइस से राउटर की दूरी ज्यादा होने के कारण उस तक सिग्नल नहीं पहुंच पाते और आपको स्ट्रीमिंग या गेमिंग करने में मुश्किल होती है. आज जानेंगे कि राउटर को सही जगह प्लेस करना क्यों जरूरी है.
सिग्नल हो जाते हैं कमजोर
लोगों को लगता है कि वाईफाई लाइट बल्ब की तरह काम करता है. बटन दबाते ही पूरे कमरे में रोशनी हो जाती है, लेकिन वाईफाई में ऐसा नहीं होता. वायरलेस सिग्नल अलग तरीके से बिहैव करते हैं और दूरी बढ़ने के साथ कमजोर होते जाते हैं. इसलिए राउटर को ऐसी जगह प्लेस करें, जहां से आपके सारे डिवाइसेस पास हों.
फर्नीचर और दीवारें भी जिम्मेदार
आपके घर की दीवारें, फ्लोर और फर्नीचर भी सिग्नल को कमजोर करते हैं. दरअसल, आपके डिवाइस और राउटर के बीच आई हर सॉलिड चीज से सिग्नल पर असर पड़ता है. ऐसे में अगर आप दूसरे फ्लोर या दूर वाले कमरे में कोई डिवाइस यूज कर रहे हैं तो इस तक पहुंचते-पहुंचते सिग्नल एकदम कमजोर हो जाएगा.
राउटर को कहां रखना है फायदे का सौदा
कुछ लोग वाईफाई राउटर को हाइड करने के लिए इसे रेफ्रिजरेटर या टीवी के पीछे प्लेस कर देते हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट के संपर्क में आने से सिग्नल और भी कमजोर हो जाते हैं. ऐसे में आपको राउटर घर के बीच में किसी ऊंची चीज के ऊपर प्लेस करना चाहिए. इससे पूरी घर में सिग्नल आते रहेंगे और ऊंचाई पर होने के कारण इसके बीच में रुकावट भी कम आएगी. अगर आप बड़े घर या ऑफिस में वाईफाई यूज कर रहे हैं तो वाईफाई एक्सटेंडर का भी यूज कर सकते हैं, जिससे हर कोने में शानदार स्पीड मिलेगी.
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:27 +0530</pubDate>
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<title>क्या WhatsApp नहीं है सेफ? Elon Musk और सिग्नल के सीईओ ने कह दी यह बड़ी बात, सुनकर चौंक जाएंगे आप</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ दिनों से WhatsApp मैसेज एनक्रिप्शन और प्राइवेसी के दावों को लेकर चर्चा में है. दरअसल, व्हाट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा के खिलाफ एक मुकदमा दायर हुआ है, जिसमें आरोप लगाए गए हैं कि कंपनी ने प्राइवेसी को लेकर झूठे दावे किए हैं. अब इस विवाद में अमेरिकी अरबपति एलन मस्क और टेलीग्राम के सीईओ पावेर दुरोव भी कूद पड़े हैं. मस्क ने कहा है कि व्हाट्सऐप सिक्योर नहीं है, वहीं दुरोव ने व्हाट्सऐप को सुरक्षित मानने वाले लोगों को &#039;ब्रेनडेड&#039; करार दिया है.
क्या है मामला?
अमेरिका में एक ग्रुप ने मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. इसमें दावा किया गया है कि मेटा और व्हाट्सऐप सभी यूजर्स के प्राइवेट कम्यूनिकेशन को स्टोर, एनालाइज और वर्चुअली एक्सेस कर सकती हैं. मुकदमा करने वाले ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया, भारत, ब्राजील, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के याचिकाकर्ता शामिल हैं. इनका आरोप है कि मेटा यूजर कम्यूनिकेशन को स्टोर करती है और इसके कर्मचारी चैट्स को एक्सेस कर सकते हैं. हालांकि, मेटा ने इन आरोपों का खंडन किया है.
एलन मस्क ने दी वार्निंग
मुकदमे पर प्रतिक्रिया देते हुए एलन मस्क ने एक्स पर लिखा कि व्हाट्सऐप सिक्योर नहीं है. सिग्नल पर भी सवाल उठते हैं. उन्होंने यूजर्स से अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के एक्स चैट प्लेटफॉर्म यूज करने की अपील की है. बता दें कि प्राइवेसी के सवालों को लेकर मस्क हमेशा मुखर रहे हैं&amp;nbsp;दुरोव ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
व्हाट्सऐप पर जारी डिबेट के बीच टेलीग्राम के सीईओ और फाउंडर पावेल दुरोव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि जो लोग 2026 में व्हाट्सऐप को सिक्योर मानते हैं, वे ब्रेनडेड हैं. दुरोव ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि टेलीग्राम ने व्हाट्सऐप के एनक्रिप्शन का एनलासिसस किया है और इसमें कई अटैक वेक्टर्स मिले हैं. यह सिस्टम कभी इतना मजबूत नहीं था, जितना यूजर्स को बताया गया.
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:27 +0530</pubDate>
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<title>अच्छा कंटेंट फिर भी नहीं मिल रही ग्रोथ? इंस्टाग्राम के ये गेम&#45;चेंजिंग बदलाव फॉलोअर्स और कमाई दोनों को देंगे नई उड़ान</title>
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<description><![CDATA[ अच्छा कंटेंट फिर भी नहीं मिल रही ग्रोथ? इंस्टाग्राम के ये गेम-चेंजिंग बदलाव फॉलोअर्स और कमाई दोनों को देंगे नई उड़ान ]]></description>
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<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:26 +0530</pubDate>
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<title>आपके फोन में छिपा है सोना&#45;चांदी का खजाना! जानिए मोबाइल के किस हिस्से में होता है असली माल</title>
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<description><![CDATA[ आपके फोन में छिपा है सोना-चांदी का खजाना! जानिए मोबाइल के किस हिस्से में होता है असली माल ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:24 +0530</pubDate>
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<title>अब बिना कैमरा आए बनेंगी Shorts! YouTube का चौंकाने वाला प्लान, जानिए पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ YouTube: YouTube जल्द ही ऐसा फीचर लाने की तैयारी में है जिससे क्रिएटर्स अपने ही डिजिटल AI अवतार की मदद से Shorts बना सकेंगे. यानी कैमरे के सामने आए बिना भी क्रिएटर अपनी शक्ल-सूरत और आवाज वाले वीडियो पोस्ट कर पाएंगे. इस बड़े प्लान का खुलासा YouTube के CEO नील मोहन ने अपनी सालाना चिट्ठी में किया है.
AI रहेगा एक्सप्रेशन का टूल, इंसान का विकल्प नहीं
नील मोहन ने साफ कहा कि YouTube के लिए AI का मकसद क्रिएटर्स की क्रिएटिविटी बढ़ाना है, न कि उन्हें रिप्लेस करना. कंपनी चाहती है कि AI एक सहायक टूल बने जिससे नए तरह के कंटेंट एक्सपेरिमेंट संभव हो सकें.
कैसे काम कर सकता है AI डिजिटल ट्विन फीचर
हालांकि YouTube ने अभी यह नहीं बताया है कि यह फीचर कब लॉन्च होगा या तकनीकी तौर पर कैसे काम करेगा लेकिन माना जा रहा है कि इसका तरीका दूसरे AI अवतार टूल्स जैसा हो सकता है. इसमें क्रिएटर को एक छोटा सेल्फी वीडियो और आवाज का सैंपल रिकॉर्ड करना पड़ सकता है जिसके बाद सिस्टम उसी के आधार पर एक 3D डिजिटल अवतार तैयार करेगा. यही AI अवतार Shorts वीडियो में नजर आ सकेगा.
AI कंटेंट को लेकर रहेगी पूरी पारदर्शिता
YouTube का कहना है कि AI से बने कंटेंट को साफ तौर पर लेबल किया जाएगा. साथ ही क्रिएटर्स को यह बताना जरूरी होगा कि उनका वीडियो असली नहीं, बल्कि AI से बदला हुआ या सिंथेटिक है. इसके अलावा कंपनी ऐसे नए टूल्स भी लाने जा रही है जिनसे क्रिएटर अपनी शक्ल और पहचान के AI इस्तेमाल को कंट्रोल कर सकेंगे.
क्या YouTube पर बढ़ेगा &amp;lsquo;AI स्लोप&amp;rsquo;?
AI से बने लो-क्वालिटी और रिपिटेटिव कंटेंट को लेकर भी CEO ने चिंता जाहिर की. उन्होंने कहा कि प्लेटफॉर्म पर व्यूअर्स को अच्छा एक्सपीरियंस देना YouTube की जिम्मेदारी है. इसी वजह से कंपनी स्पैम, क्लिकबेट और कमजोर AI कंटेंट को रोकने के लिए अपने मौजूदा सिस्टम को और मजबूत कर रही है.
Shorts की जबरदस्त ग्रोथ और नए फीचर्स
नील मोहन के मुताबिक YouTube Shorts पर हर दिन करीब 200 अरब व्यूज आ रहे हैं. आने वाले समय में Shorts फीड में सीधे इमेज पोस्ट जोड़ने की सुविधा भी मिलेगी. इसके साथ ही पैरेंट्स को यह कंट्रोल दिया जाएगा कि बच्चे और टीनएजर्स कितनी देर Shorts स्क्रॉल कर सकें, यहां तक कि टाइमर को पूरी तरह &amp;lsquo;जीरो&amp;rsquo; पर सेट करने का ऑप्शन भी होगा.
YouTube में बढ़ता AI का रोल
YouTube पहले से ही कई AI टूल्स ऑफर कर रहा है, जैसे Create ऐप में &amp;lsquo;Edit with AI&amp;rsquo;, 20 से ज्यादा भाषाओं में ऑटो डबिंग और Shorts के लिए Dream Screen. इसके अलावा एक नया AI फीचर ऐसा भी आ सकता है जिससे सिर्फ टेक्स्ट लिखकर गेम्स बनाए जा सकेंगे.
YouTube के AI-पावर्ड &amp;lsquo;Ask&amp;rsquo; बटन का इस्तेमाल कर अब तक 2 करोड़ से ज्यादा यूजर्स वीडियो से जुड़े सवाल पूछ चुके हैं. यह फीचर वीडियो देखते समय ही कंटेंट को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है.
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 18 Pro सीरीज जल्द मचाएगी तहलका! Pro Max में मिलने वाला है ऐसा फीचर जो पहले कभी नहीं देखा</title>
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<description><![CDATA[ Apple iPhone 18 Series: Apple अपने अगली पीढ़ी के iPhone लॉन्च की तैयारी में जुट चुका है. अभी लॉन्च में समय है लेकिन iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लेकर इंटरनेट पर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं. लीक्स और रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये नए iPhone सितंबर में पेश किए जा सकते हैं. खास बात यह है कि इस बार Apple, iPhone 18 Pro सीरीज के साथ अपना पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च कर सकता है जबकि रेगुलर iPhone 18 को अगले साल के लिए टाला जा सकता है.
हर साल की तरह इस बार भी Pro मॉडल्स में कई बड़े अपग्रेड देखने को मिल सकते हैं. डिस्प्ले, कैमरा, प्रोसेसर, AI फीचर्स और बैटरी लगभग हर सेक्शन में बदलाव की उम्मीद की जा रही है. हालांकि Apple ने अभी तक कुछ भी आधिकारिक तौर पर कन्फर्म नहीं किया है लेकिन लीक से काफी कुछ अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
iPhone 18 Pro में मिलने वाला नया डिस्प्ले अपग्रेड
रिपोर्ट्स के अनुसार, iPhone 18 Pro और Pro Max में नया LTPO Plus AMOLED डिस्प्ले दिया जा सकता है. यह पैनल न सिर्फ स्मूद परफॉर्मेंस देगा बल्कि बैटरी खपत को भी कम करने में मदद करेगा. बताया जा रहा है कि डिस्प्ले का रिफ्रेश रेट जरूरत के हिसाब से 1Hz तक नीचे आ सकेगा जिससे फोन हल्के कामों के दौरान कम पावर खर्च करेगा. इसका सीधा फायदा यूजर्स को लंबी बैटरी लाइफ के रूप में मिल सकता है.
iPhone 18 Pro का डिजाइन होगा पहले से ज्यादा क्लीन
डिजाइन के मामले में iPhone 18 Pro सीरीज में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. लीक्स के मुताबिक, Apple फेस ID सेंसर को डिस्प्ले के नीचे शिफ्ट कर सकता है, जिससे फोन का फ्रंट पहले से ज्यादा साफ और प्रीमियम लगेगा. Dynamic Island का साइज भी छोटा हो सकता है. वहीं बैक पैनल को लेकर कहा जा रहा है कि Apple एक यूनिफॉर्म फिनिश पर काम कर रहा है जिससे पिछली जेनरेशन वाला टू-टोन लुक हट सकता है.
कैमरा सेगमेंट में भी मिलेंगे खास सुधार
कैमरा अपग्रेड iPhone 18 Pro सीरीज़ का बड़ा हाइलाइट हो सकता है. हालांकि सटीक डिटेल्स अभी सामने नहीं आई हैं लेकिन लीक्स में बेहतर सेंसर और एडवांस ज़ूम टेक्नोलॉजी की बात कही जा रही है. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, Pro Max वेरिएंट में एक्सक्लूसिव कैमरा फीचर्स मिल सकते हैं. इसके अलावा, लो-लाइट फोटोग्राफी और इमेज प्रोसेसिंग में भी बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है.
iPhone 18 Pro की परफॉर्मेंस होगी बेहद दमदार
परफॉर्मेंस के मामले में iPhone 18 Pro और Pro Max में नया A20 Pro चिपसेट मिलने की उम्मीद है जिसे 2nm टेक्नोलॉजी पर बनाया जा सकता है. इससे फोन न सिर्फ तेज़ होगा बल्कि ज्यादा पावर-एफिशिएंट भी बनेगा. रिपोर्ट्स यह भी इशारा कर रही हैं कि RAM को CPU और GPU के साथ एक ही यूनिट में इंटीग्रेट किया जा सकता है जिससे स्पीड और थर्मल मैनेजमेंट दोनों बेहतर होंगे.
iPhone 18 Pro लॉन्च टाइमलाइन
अब बात लॉन्च की करें तो ज्यादातर रिपोर्ट्स मानती हैं कि iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और iPhone Fold को सितंबर 2026 में लॉन्च किया जा सकता है. यह Apple के पुराने लॉन्च पैटर्न से मेल खाता है. वहीं स्टैंडर्ड iPhone 18 को 2027 की शुरुआत में पेश किए जाने की चर्चा भी चल रही है हालांकि इस पर अभी तस्वीर साफ नहीं है.
iPhone 18 Pro के नए कलर ऑप्शंस
इस बार Apple iPhone 18 Pro के कलर ऑप्शंस में भी बड़ा बदलाव कर सकता है. लीक्स के मुताबिक, कंपनी पर्पल और बरगंडी जैसे नए और बोल्ड कलर्स की टेस्टिंग कर रही है. अगर ऐसा होता है तो यह Pro सीरीज़ के लिए एक फ्रेश लुक होगा, क्योंकि अब तक Pro मॉडल्स में ज्यादातर सॉफ्ट और न्यूट्रल कलर्स ही देखने को मिलते रहे हैं.
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:23 +0530</pubDate>
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<title>क्या सेफ नहीं हैं WhatsApp पर भेजे हुए मैसेज? कंपनी के खिलाफ मुकदमे में किया गया बड़ा दावा</title>
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<description><![CDATA[ क्या WhatsApp पर भेजे हुए मैसेज एकदम सुरक्षित नहीं हैं और उन्हें कोई और भी पढ़ सकता है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि WhatsApp के मालिकाना हक वाली कंपनी मेटा के खिलाफ एक मुकदमा दायर किया गया है. इसमें दावा किया गया है कि कंपनी ने व्हाट्सऐप चैट सर्विस की प्राइवेसी और सिक्योरिटी को लेकर झूठे दावे किए हैं. दूसरी तरफ मेटा ने इन दावों का खंडन किया है. आइए जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है.
मेटा पर लगा गलत दावे करने का आरोप
शुक्रवार को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एक ग्रुप ने मेटा के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. इसमें दावा किया गया है कि मेटा और व्हाट्सऐप सभी यूजर्स के प्राइवेट कम्यूनिकेशन को स्टोर, एनालाइज और वर्चुअली एक्सेस कर सकती हैं. मुकदमे में दोनों कंपनियों के अधिकारियों पर व्हाट्सऐप के अरबों यूजर्स को मूर्ख बनाने का आरोप भी लगाया गया है. मुकदमा दायर करने वाले ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया, भारत, ब्राजील, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के याचिकाकर्ता शामिल हैं. इनका आरोप है कि मेटा यूजर कम्यूनिकेशन को स्टोर करती है और इसके कर्मचारी चैट्स को एक्सेस कर सकते हैं.
मेटा का इस पर क्या कहना है?
अपने खिलाफ लगे आरोपों का मेटा ने खंडन किया है. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि लोगों के व्हाट्सऐप मैसेज एनक्रिप्टेड नहीं है, ऐसे सभी दावे झूठे हैं. व्हाट्सऐप एक दशक से एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड है. बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है, जब मेटा पर प्राइवेसी के उल्लंघन के आरोप लगे हैं. कंपनी लगातार ऐसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप से जुड़े ऐसे आरोपों से जूझती रही है. कई बार ऐसा भी हो चुका है, जब कंपनी पर नियमों के उल्लंघन को लेकर जुर्माना लगाया गया है और सीईओ मार्क जुकरबर्ग को भी सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी है.
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:22 +0530</pubDate>
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<title>रूम हीटर खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान! सरकार ने बताईं ये सेफ्टी चीजें, नहीं देखीं तो हो सकता है खतरा</title>
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<description><![CDATA[ Room Heater Buying Tips: सर्दियों में रूम हीटर राहत देता है लेकिन खरीदते वक्त सिर्फ कीमत या डिजाइन देखना काफी नहीं होता. सुरक्षा फीचर्स सबसे अहम होते हैं. इसी वजह से सरकार और मानक तय करने वाली संस्था BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स) ने रूम हीटर के लिए कुछ जरूरी सेफ्टी नियम बनाए हैं जिन्हें जानना हर खरीदार के लिए जरूरी है.
BIS सर्टिफिकेशन क्यों है सबसे जरूरी
भारत में बिकने वाले इलेक्ट्रिक हीटर पर ISI मार्क होना सबसे बड़ा सुरक्षा संकेत माना जाता है. BIS के नियम IS 302-2-30:2007 के तहत हर ISI सर्टिफाइड हीटर को कई इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल टेस्ट से गुजरना पड़ता है. यह मार्क इस बात की गारंटी देता है कि हीटर घरेलू इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है.
बिजली के झटके और आग से बचाव की जांच
BIS के अनुसार, हीटर में अर्थ कंटिन्यूटी, इलेक्ट्रिक स्ट्रेंथ और लाइव पार्ट्स से सुरक्षा जैसे टेस्ट अनिवार्य होते हैं. इनका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इस्तेमाल के दौरान करंट लगने या अंदरूनी खराबी से हादसा न हो. इसके अलावा ऑटोमैटिक कट-ऑफ फीचर भी बेहद जरूरी है जो हीटर के ज्यादा गर्म होने या गिरने की स्थिति में उसे खुद बंद कर देता है.
सही वॉटेज का होना भी है अहम
सरकार की गाइडलाइंस में पावर इनपुट और वॉटेज की सटीकता पर भी जोर दिया गया है. रूम हीटर आमतौर पर 1000 वॉट तक और उससे ज्यादा की कैटेगरी में आते हैं. गलत साइज के कमरे के लिए ज्यादा वॉटेज वाला हीटर लेने से ओवरहीटिंग और बिजली की ज्यादा खपत हो सकती है. BIS सर्टिफाइड हीटर में सही अर्थिंग, अच्छी क्वालिटी का इंसुलेशन और शॉर्ट सर्किट से बचाव के मानक पूरे होने चाहिए.
टेस्टिंग के दौरान किन बातों की होती है जांच
BIS की लैब में हीटर की मजबूती, लंबे समय तक चलने पर उसकी परफॉर्मेंस, लीकेज करंट और गर्मी व आग के प्रति सहनशीलता की जांच की जाती है. स्टेबिलिटी टेस्ट से यह देखा जाता है कि हीटर आसानी से पलटे नहीं, वहीं फायर रेजिस्टेंस टेस्ट से यह सुनिश्चित होता है कि उसके पार्ट्स ज्यादा गर्मी में भी खराब न हों.
ग्राहकों के लिए सरकारी सलाह
BIS समय-समय पर उपभोक्ताओं को चेतावनी देता है कि बिना सर्टिफिकेशन वाले सस्ते या अनब्रांडेड हीटर से घर की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. खरीदते समय पावर कॉर्ड की हालत जांचना, ब्रांड और निर्माता की पूरी जानकारी देखना और वारंटी-सर्विस का ध्यान रखना जरूरी है.
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>रूम, हीटर, खरीदने, से, पहले, इन, बातों, का, रखें, ध्यान, सरकार, ने, बताईं, ये, सेफ्टी, चीजें, नहीं, देखीं, तो, हो, सकता, है, खतरा</media:keywords>
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<title>सैमसंग ने लीक कर दिया Galaxy S26 Ultra का सबसे बड़ा फीचर, इसका फायदा जान लिया तो फैन हो जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ सैमसंग अगले महीने अपनी प्रीमियम सीरीज Galaxy S26 से पर्दा उठा देगी. इसके फ्लैगशिप डिवाइस Galaxy S26 Ultra का सबको इंतजार है. सैमसंग इस मॉडल को कई शानदार अपग्रेड्स के साथ लॉन्च कर रही है. हाल ही में कंपनी ने इसका एक सबसे बड़ा फीचर लीक कर दिया है. इस फीचर को लेकर पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे और लीक ने उन कयासों को कन्फर्म कर दिया है. कंपनी ने Galaxy S26 Ultra में मिलने वाले प्राइवेसी डिस्प्ले का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया था.
प्राइवेसी डिस्प्ले हो गया कन्फर्म
काफी समय से कयास लगाए जा रहे थे कि Galaxy S26 Ultra में प्राइवेसी डिस्प्ले दिया जा सकता है. इस फीचर के कारण यूजर के अलावा उसके आसपास बैठे लोग स्क्रीन पर चल रहे कंटेट को नहीं देख पाएंगे. साइड से देखने पर स्क्रीन एकदम डार्क नजर आएगी. इससे बैंकिंग ऐप्स और लॉग-इन आदि करते समय प्राइवेसी की चिंता नहीं रहेगी. सैमसंग की तरफ से शेयर किए गए स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि इसे ऑन-ऑफ करने के लिए मैनुअल सेटिंग दी जाएगी, जहां से यूजर्स अपनी मर्जी के हिसाब से सेटिंग्स को एडजस्ट कर पाएंगे. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि Galaxy S26 सीरीज के सभी मॉडल में प्राइवेसी डिस्प्ले दिया जा सकता है, लेकिन अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
कैसे काम करेगा प्राइवेसी डिस्प्ले?
सैमसंग प्राइवेसी डिस्प्ले के लिए फ्लेक्स मैजिक पिक्सल OLED पैनल का यूज करेगी. इसमें एआई की मदद से पिक्सल लेवल पर लाइट डायरेक्शन को कंट्रोल किया जाएगा, जिससे व्यूइंग एंगल नैरो हो जाएगा और डिस्प्ले की क्वालिटी पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा. ऐसे भी कयास हैं कि सैमसंग इसे कॉन्टेक्स्ट अवेयर बनाने पर भी काम कर रही है. यानी जब आप अपने फोन में कोई बैंकिंग ऐप्स या पासवर्ड मैनेजर ओपन करेंगे तो फोन ऑटोमैटिकली प्राइवेसी मोड में चला जाएगा. फिर जब आप कोई वीडियो देखना चाहेंगे तो यह व्यूइंग एंगल को वाइड कर देगा, जिससे आपके दोस्त भी वीडियो देख पाएंगे.
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क्या सेफ नहीं हैं WhatsApp पर भेजे हुए मैसेज? कंपनी के खिलाफ मुकदमे में किया गया बड़ा दावा ]]></description>
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>बिना बीटा जॉइन किए नए फीचर्स ट्राई करने की तैयारी में WhatsApp! जानिए क्या है पूरा प्लान</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp: WhatsApp एक ऐसे नए फीचर का टेस्ट कर रहा है जिससे यूजर्स को आने वाले फीचर्स इस्तेमाल करने के लिए अलग से बीटा प्रोग्राम जॉइन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. फीचर ट्रैक करने वाली वेबसाइट WABetaInfo के मुताबिक, कुछ यूजर्स को ऐप के अंदर ही बीटा से जुड़ने का नया ऑप्शन दिखाई देने लगा है.
WhatsApp को यह बदलाव क्यों करना पड़ा
फिलहाल Google Play Store पर WhatsApp का बीटा प्रोग्राम सीमित यूजर्स के लिए होता है और इसकी कैप पहले से ही पूरी रहती है. ऐसे में बहुत से लोग चाहकर भी नए फीचर्स का पहले इस्तेमाल नहीं कर पाते. इसी परेशानी को दूर करने के लिए WhatsApp अब ऐप के अंदर ही एक नया रास्ता तैयार कर रहा है ताकि ज्यादा से ज्यादा यूजर्स को शुरुआती फीचर्स तक पहुंच मिल सके.
लेटेस्ट Android बीटा अपडेट में दिखा नया ऑप्शन
यह नया फीचर WhatsApp के Android बीटा वर्जन 2.26.2.11 में देखा गया है, जो अभी Google Play Store के जरिए रोलआउट हो रहा है. कंपनी फिलहाल इसे सीमित यूजर्स के साथ टेस्ट कर रही है ताकि फीडबैक के आधार पर आगे की योजना बनाई जा सके.
कैसे काम करेगा Early Access to Features फीचर
जिन यूजर्स को यह सुविधा मिलेगी, वे WhatsApp की Settings में जाकर Early access to features नाम का ऑप्शन देख पाएंगे. इस सेक्शन से वे कुछ नए फीचर्स को उनके ऑफिशियल लॉन्च से पहले इस्तेमाल कर सकेंगे. अगर किसी यूजर को बीटा फीचर्स पसंद नहीं आते या वह वापस स्टेबल वर्जन पर जाना चाहता है तो वह इस ऑप्शन को कभी भी बंद कर सकता है.
बीटा से बाहर आने पर क्या होगा
जैसे ही यूजर इस फीचर को डिसेबल करता है, WhatsApp अपने आप स्टेबल पब्लिक वर्जन पर वापस स्विच कर लेगा. यानी अलग से कुछ करने की जरूरत नहीं होगी और अगला अपडेट सामान्य तरीके से इंस्टॉल हो जाएगा.
फिलहाल सीमित यूजर्स के लिए उपलब्ध
अभी यह सुविधा केवल चुनिंदा Android यूजर्स को ही मिल रही है, जिन्होंने लेटेस्ट WhatsApp अपडेट इंस्टॉल किया है. इसके अलावा कुछ मौजूदा बीटा यूजर्स को भी यह नया टॉगल दिख सकता है. फिलहाल कंपनी ने इसके बड़े स्तर पर रोलआउट को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. ऐसे में यूजर्स को समय-समय पर अपनी WhatsApp Settings चेक करते रहने की सलाह दी जा रही है.
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:20 +0530</pubDate>
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<title>क्रिएटर्स की होगी बल्ले&#45;बल्ले! 2026 के लिए YouTube ने बनाई नई प्लानिंग, वीडियो बनाने वालों पर बरसेंगे पैसे</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप कंटेट क्रिएटर हैं तो इस साल आप पर पैसों की बारिश हो सकती है! दरअसल, YouTube इस साल कई ऐसे नए तरीके लाने वाली है, जिससे क्रिएटर और ज्यादा कमाई कर पाएंगे. यूट्यूब के सीईओ नील मोहन ने इस साल के लिए कंपनी की प्लानिंग शेयर की है, जिसमें क्रिएटर्स की कमाई बढ़ाने के अलावा एआई पर जोर देने, शॉर्ट्स को ज्यादा इंटरेस्टिंग बनाने और बच्चों और टीन के लिए सेफ्टी मजबूत करने समेत कई मुद्दों पर जोर देने की बात कही गई है.
क्रिएटर्स को मिलेंगे कमाई के नए तरीके
पिछले 4 सालों में यूट्यूब ने क्रिएटर, आर्टिस्ट्स और मीडिया कंपनियों को उनके कंटेट के लिए 100 बिलियन से ज्यादा का भुगतान किया है. इस साल भी यह सिलसिला जारी रहेगा. 2026 में यूट्यूब क्रिएटर्स के लिए कमाई के अलग-अलग तरीकों पर भारी निवेश की योजना बना रही है, जिससे वे शॉपिंग और ब्रांड डील्स से लेकर जैवेल और गिफ्ट्स जैसे फैन फंडिंग फीचर से भी पैसा कमा सकेंगे. अभी किसी लिंक्ड प्रोडक्ट को खरीदने के लिए यूजर्स को दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर जाना पड़ता है, लेकिन जल्द ही यूजर यूट्यूब पर ही रहकर कोई प्रोडक्ट खरीद सकेंगे.
एआई पर रहेगा जोर
यूट्यूब का कहना है कि दिसंबर में 10 लाख से अधिक चैनल ने उसके एआई क्रिएशन टूल्स का यूज किया था. इस साल भी यूजर एआई की मदद से शॉर्ट्स और गेम्स आदि क्रिएट कर पाएंगे. साथ ही कंपनी की कोशिश अपने प्लेटफॉर्म से एआई की मदद से बने बेकार कंटेट को हटाने की भी रहेगी. यूजर्स को इस साल यूट्यूब पर कई नए एआई फीचर भी देखने को मिल सकते हैं.
बच्चों और टीन की सेफ्टी होगी और मजबूत
यूट्यूब इस साल अपने प्लेटफॉर्म को बच्चों और टीन यूजर्स के लिए और मजबूत बनाना चाहती है और इसकी शुरुआत हो गई है. हाल ही में यूट्यूब नया पैरेंटल कंट्रोल लेकर आई है, जिसमें पैरेंट्स अपने छोटे बच्चों के शॉर्ट्स देखने के टाइम को सेट कर सकते हैं.
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:20 +0530</pubDate>
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<title>फोन उठाने से पहले ही पता चल जाएगा काम, आईफोन में मिलता है ये कमाल का फीचर, ऐसे करें एक्टिवेट</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप आईफोन यूज करते हैं तो किसी की कॉल उठाने से पहले ही पता कर सकते हैं कि सामने वाले ने आपको फोन क्यों किया है. इसके लिए iOS 26 अपडेट में एक नया फीचर जोड़ा गया था. स्पैम कॉल पर लगाम लगाने के लिए लाए गए इस कॉल स्क्रीनिंग फीचर की मदद से आईफोन अनजान यूजर्स को पहले पहचान बताने को कहता है. इसके बाद उससे मिले जवाब को आपके सामने रख देता है ताकि आप यह डिसाइड कर पाएं कि कॉल पिक करनी है या नहीं. इसे इनेबल करना भी एकदम आसान है.
आईफोन पूछ लेगा कॉल करने की वजह
iOS 26 में ऐप्पल ने &#039;आस्क रीजन फॉर कॉलिंग&#039; नाम से नया फीचर जोड़ा था. इस फीचर को इनेबल करने के बाद अगर आपके पास किसी अनजान नंबर से कॉल आती है तो आईफोन आपसे पहले उससे नाम और फोन करने का कारण पूछ लेगा. इस फीचर में कॉल आते ही फोन की घंटी नहीं बजेगी बल्कि कॉलर को पहले होल्ड पर रखा जाएगा. जब वह नाम और कॉल करने का कारण बता देगा तो यह रियल टाइम में आपकी स्क्रीन पर दिख जाएगा. सामने वाले के जवाब के आधार पर आप यह जान पाएंगे कि कॉलर कौन है और उसने आपको क्यों कॉल किया है. इसके बाद आप चाहें तो कॉल एक्सेप्ट या रिजेक्ट भी कर सकते हैं. इसके अलावाा आपको कॉलर से बिना फोन उठाए और जानकारी मांगने का भी ऑप्शन मिलता है.
कैसे करें इनेबल?
फीचर को इनेबल करने के लिए आईफोन की सेटिंग ओपन कर ऐप्स में जाएं और फोन को सेलेक्ट करें. यहां स्क्रीन अननोन कॉलर्स सेक्शन में आपको आस्क रीजन फॉर कॉलिंग का ऑप्शन दिखेगा. इस पर टैप करते ही यह फीचर इनेबल हो जाएगा. वहीं अगर आप चाहते हैं कि आपके किसी अनजान नंबर से कॉल न आएं तो आप इसी सेक्शन में साइलेंस का ऑप्शन चुन सकते हैं. इसे इनेबल करने के बाद अनजान नंबर से आने वाली सारी कॉल्स वॉइसमेल में चली जाएंगी.
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:19 +0530</pubDate>
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<title>बिना OTP भी हैक हो सकता है WhatsApp! इस फ्रॉड से बचने के ये 5 जरूरी स्टेप्स जरूर ध्यान रखें</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp Account: आज के समय में WhatsApp ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. करोड़ों यूजर्स की मौजूदगी के कारण यह ऐप साइबर ठगों का पसंदीदा निशाना बन चुका है. आए दिन ऐसी खबरें सामने आती हैं, जहां लोग बिना कुछ समझे अपनी सालों की कमाई गंवा बैठते हैं. कई मामलों में पीड़ित को यह तक पता नहीं चलता कि उसका अकाउंट कैसे और कब हैक हुआ. ऐसे में जरूरी है कि आप WhatsApp की सुरक्षा सेटिंग्स को सही तरीके से इस्तेमाल करें और Ghost Pairing जैसे नए तरीकों से होने वाले हमलों से खुद को बचाएं.
Two-Factor Authentication जरूर चालू करें
WhatsApp अकाउंट को सुरक्षित रखने का सबसे मजबूत तरीका है टू-स्टेप वेरिफिकेशन. इसमें पहले आपके मोबाइल नंबर पर OTP आता है और इसके बाद एक अलग 6 अंकों का PIN सेट करना होता है. ध्यान रखें कि यह PIN किसी भी अन्य अकाउंट या आसान पासवर्ड से जुड़ा न हो. इसे आप WhatsApp की सेटिंग्स में जाकर प्राइवेसी या अकाउंट ऑप्शन से एक्टिव कर सकते हैं. यह फीचर हैकर्स के लिए आपके अकाउंट तक पहुंच बनाना काफी मुश्किल कर देता है.
प्राइवेसी सेटिंग्स को सीमित रखें
WhatsApp पर लास्ट सीन, ऑनलाइन स्टेटस और प्रोफाइल फोटो जैसी जानकारियां अक्सर ठगों के लिए शुरुआती हथियार बन जाती हैं. अनजान लोग इन डिटेल्स का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं या आपको टारगेट कर सकते हैं. बेहतर होगा कि इन सभी ऑप्शन्स को सिर्फ कॉन्टैक्ट्स या जरूरत के मुताबिक सीमित कर दें. इससे कोई भी अनजान व्यक्ति आपकी जानकारी देखकर आपको ट्रैक या स्कैम नहीं कर पाएगा.
ग्रुप में जोड़ने का कंट्रोल अपने हाथ में रखें
WhatsApp ग्रुप्स आज हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, चाहे वह परिवार हो, ऑफिस या दोस्तों का सर्कल. लेकिन अगर हर कोई आपको किसी भी ग्रुप में जोड़ सकता है तो यह खतरे की घंटी हो सकती है. स्कैमर्स इसी रास्ते से फर्जी मैसेज और लिंक भेजते हैं. सेटिंग्स में जाकर यह तय करें कि कौन आपको ग्रुप में ऐड कर सकता है ताकि बिना आपकी अनुमति कोई भी आपको अनचाहे ग्रुप्स में न डाल सके.
WhatsApp पर ऐप लॉक का इस्तेमाल करें
अगर कोई आपके फोन तक पहुंच भी जाए, तो ऐप लॉक उसे WhatsApp खोलने से रोक सकता है. इसके लिए आप फोन में मौजूद फिंगरप्रिंट लॉक या फेस आईडी का इस्तेमाल कर सकते हैं. इस फीचर को ऑन करने के बाद हर बार WhatsApp खोलने पर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी होगा जिससे आपका अकाउंट पहली ही सीढ़ी पर सुरक्षित हो जाता है.
अपडेटेड रहें और संदिग्ध चीजों से दूरी बनाएं
WhatsApp पर स्पायवेयर और मालवेयर का खतरा हमेशा बना रहता है. इसलिए जरूरी है कि आप ऐप को हमेशा लेटेस्ट वर्जन पर रखें. केवल Play Store या App Store से ही WhatsApp डाउनलोड करें और किसी भी मॉडिफाइड या थर्ड-पार्टी ऐप से दूर रहें. इसके अलावा, अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स, मैसेज या लिंक पर क्लिक करने से बचें, क्योंकि यही हैकिंग की सबसे आम शुरुआत होती है.
सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
WhatsApp को सुरक्षित रखने के लिए सिर्फ फीचर्स नहीं, बल्कि आपकी समझदारी भी जरूरी है. थोड़ी सी सावधानी और सही सेटिंग्स अपनाकर आप Ghost Pairing जैसे खतरनाक हैक्स से अपने अकाउंट और अपनी मेहनत की कमाई दोनों को सुरक्षित रख सकते हैं.
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<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Google Gemini यूजर्स अलर्ट! इस चाल से हैकर्स उड़ा रहे हैं आपकी पर्सनल जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ Google Gemini यूजर्स अलर्ट! इस चाल से हैकर्स उड़ा रहे हैं आपकी पर्सनल जानकारी ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:11 +0530</pubDate>
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<title>बच्चों के WhatsApp पर अब मम्मी&#45;पापा का कंट्रोल! चुनिंदा लोगों से ही होगी चैट, नया फीचर मचा देगा हलचल</title>
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<description><![CDATA[ बच्चों के WhatsApp पर अब मम्मी-पापा का कंट्रोल! चुनिंदा लोगों से ही होगी चैट, नया फीचर मचा देगा हलचल ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:11 +0530</pubDate>
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<title>iPhone बंद होने के बाद भी आपकी लोकेशन कैसे बताता रहता है? चोर भी नहीं बच पाएंगे, जानें कैसे करता है काम</title>
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<description><![CDATA[ iPhone Feature: Apple का Find My नेटवर्क आज iPhone की सबसे ताकतवर सुरक्षा तकनीकों में से एक बन चुका है. इसकी मदद से आपका iPhone बंद होने या चोरी हो जाने के बाद भी लोकेट किया जा सकता है. iPhone 11 से लेकर अब तक के सभी मॉडल में यह फीचर मौजूद है जो आसपास मौजूद किसी भी Apple डिवाइस के जरिए आपकी एन्क्रिप्टेड लोकेशन iCloud तक पहुंचा देता है. यह जानिए यह तकनीक कैसे काम करती है, कैसे सुनिश्चित करें कि यह फीचर ऑन है और अगर फोन गायब हो जाए तो क्या करना चाहिए.
iPhone बंद होने के बाद कैसे लोकेशन भेजता रहता है
iPhone 11 से आगे के मॉडल में Apple ने लो-पावर ब्लूटूथ सिस्टम जोड़ा है जो फोन बंद होने के बाद भी थोड़ी देर तक सक्रिय रहता है. अगर Find My फीचर ऑन है तो आसपास मौजूद कोई भी Apple डिवाइस चाहे वो आपका हो या किसी और का आपके फोन को डिटेक्ट कर सकता है.
यह डिवाइस आपकी लोकेशन को एन्क्रिप्टेड रूप में iCloud तक भेज देता है. सबसे खास बात यह है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह अनाम रहती है और चोर सिर्फ फोन बंद करके इस ट्रैकिंग को बंद नहीं कर सकता.
कैसे जांचें कि Find My फीचर चालू है या नहीं
iPhone को बंद होने पर भी ट्रैक करने के लिए यह फीचर ऑन होना जरूरी है.
इसके लिए जाएं:
Settings &amp;rarr; आपका नाम &amp;rarr; Find My &amp;rarr; Find My iPhone
यहां Find My iPhone, Find My network और Send Last Location तीनों विकल्प ऑन रखें. कन्फर्म करने के लिए Control Centre खोलें, पावर स्लाइडर को दबाकर रखें और देखें कि क्या &amp;ldquo;iPhone Findable After Power Off&amp;rdquo; संदेश दिखता है. यदि यह संदेश दिख रहा है तो आपका iPhone बंद होने पर भी लोकेट हो सकेगा.
दूसरे Apple डिवाइस से iPhone को कैसे ढूंढें
अगर आपके पास iPad, Mac या Apple Watch है, तो Find My ऐप खोलें. Devices टैब में जाएं और खोए हुए iPhone को चुनें. फोन की लोकेशन मैप पर दिखाई दे जाएगी even जब फोन में बैटरी न हो. अगर लगता है कि फोन आसपास है तो Play Sound ऑप्शन दबाकर फोन में तेज़ अलर्ट चलाया जा सकता है even अगर फोन Silent मोड में हो.
अगर iPhone चोरी होने का शक हो
ऐसी स्थिति में Find My ऐप से Lost Mode ऑन करें. इससे फोन आपका पासकोड मांगकर लॉक हो जाता है Apple Pay बंद हो जाता है और स्क्रीन पर एक मैसेज दिखाया जा सकता है जिसमें वैकल्पिक संपर्क नंबर भी लिखा जा सकता है. ऐप में आपको फोन की आखिरी लोकेशन भी दिखाई देती है.
बिना Apple डिवाइस के कैसे ट्रैक करें
अगर आपके पास कोई Apple डिवाइस नहीं है, तो भी आप iCloud.com/find पर लॉग इन कर सकते हैं. अपने Apple ID से साइन इन करके iPhone की लोकेशन देख सकते हैं, Lost Mode ऑन कर सकते हैं, फोन को दूर से पूरी तरह erase भी कर सकते हैं. ध्यान रहे, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन के कारण दूसरी trusted डिवाइस की जरूरत पड़ सकती है.
चोर ट्रैकिंग बंद न कर पाए, इसके लिए क्या करें
Find My की एक सीमा यह है कि लॉक स्क्रीन से कोई Airplane Mode ऑन करके नेटवर्क बंद करने की कोशिश कर सकता है. इससे बचने के लिए:
Settings &amp;rarr; Face ID &amp;amp; Passcode &amp;rarr; Allow Access When Locked
यहां Control Centre का विकल्प ऑफ कर दें.
इससे लॉक स्क्रीन से एयरप्लेन मोड ऑन नहीं किया जा सकेगा.
iPhone की ये एडवांस ट्रैकिंग तकनीक चोरी और गुम होने की स्थिति में आपकी सुरक्षा को कई गुना बढ़ाती है. बस Find My फीचर सक्रिय रखें, और आपका iPhone बंद होने पर भी आपके पास लौटकर आने की संभावना बनाए रखता है.
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>SIM Card का एक कोना कटा क्यों होता है? सिर्फ डिजाइन नहीं, इसके पीछे छिपा है चौंकाने वाला साइंस</title>
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<description><![CDATA[ SIM Card का एक कोना कटा क्यों होता है? सिर्फ डिजाइन नहीं, इसके पीछे छिपा है चौंकाने वाला साइंस ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:10 +0530</pubDate>
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<title>गलती से भी Google पर ये चीजें सर्च कीं तो फंस सकते हैं मुसीबत में! कानूनी पचड़े का बड़ा खतरा</title>
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<description><![CDATA[ गलती से भी Google पर ये चीजें सर्च कीं तो फंस सकते हैं मुसीबत में! कानूनी पचड़े का बड़ा खतरा ]]></description>
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:10 +0530</pubDate>
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<title>ट्रैफिक चालान के नाम पर नया फ्रॉड! Parivahan SMS से वाहन मालिकों को बनाया जा रहा है शिकार, जानिए क्या है बचने का तरीका</title>
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<description><![CDATA[ Cyber Fraud: भारत में एक नया साइबर स्कैम तेजी से फैल रहा है जिसमें बाइक और कार चलाने वालों को निशाना बनाया जा रहा है. इस बार ठग खुद को सरकारी &amp;lsquo;Parivahan&amp;rsquo; पोर्टल बताकर लोगों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं. यूजर्स को SMS के जरिए ट्रैफिक चालान का डर दिखाया जाता है और एक फर्जी लिंक भेजा जाता है, जिस पर क्लिक करते ही भारी नुकसान हो सकता है.
फर्जी Parivahan चालान कैसे करता है काम
इस स्कैम में लोगों को किसी अनजान मोबाइल नंबर से SMS आता है जो अक्सर +91 से शुरू होता है. मैसेज में लिखा होता है कि आपने ट्रैफिक नियम तोड़ा है और तुरंत जुर्माना भरना होगा नहीं तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी. SMS के साथ जो लिंक भेजा जाता है वह दिखने में सरकारी वेबसाइट जैसा लगता है लेकिन असल में वह पूरी तरह नकली होता है.
Parivahan जैसा दिखने वाला फर्जी लिंक बना रहा है शिकार
ठग असली नाम से मिलते-जुलते शब्दों का इस्तेमाल करते हैं जैसे Prairvahsan या इसी तरह की स्पेलिंग, ताकि लोग जल्दी में फर्क न समझ पाएं. लिंक का डिजाइन भी सरकारी पोर्टल जैसा होता है जिससे पहली नजर में शक नहीं होता. साइबर अपराधी इसी जल्दबाजी और डर का फायदा उठाते हैं.
लिंक पर क्लिक करते ही हो सकता है बड़ा नुकसान
अगर कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक कर देता है, तो उससे लॉगिन डिटेल्स, बैंक जानकारी या सेव किए गए कार्ड डेटा मांगे जा सकते हैं. कई मामलों में फोन में मालवेयर भी घुस सकता है जिससे बिना इजाजत बैंक ट्रांजैक्शन तक हो जाते हैं. एक छोटी सी गलती आपकी पूरी कमाई पर भारी पड़ सकती है.
ऐसा SMS मिले तो तुरंत क्या करें
अगर आपके फोन पर ऐसा कोई ट्रैफिक चालान वाला SMS आए, तो सबसे पहले उस लिंक पर क्लिक न करें, चाहे मैसेज कितना भी जरूरी क्यों न लगे. उस नंबर को तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करें और मैसेज डिलीट कर दें. न तो जवाब दें और न ही कॉल बैक करें.
असली चालान की जानकारी कैसे जांचें
अगर आपको सच में लगता है कि आपका कोई ट्रैफिक चालान कटा हो सकता है, तो खुद आधिकारिक Parivahan वेबसाइट पर जाकर जानकारी चेक करें या सीधे अपने नजदीकी RTO से संपर्क करें. किसी भी अनजान लिंक पर भरोसा करने की बजाय खुद मैन्युअली सरकारी पोर्टल पर जाकर विवरण जांचना ही सबसे सुरक्षित तरीका है.
ऐसे ट्रैफिक फ्रॉड से कैसे रहें सुरक्षित
ट्रैफिक जुर्माने से जुड़े मैसेज अगर SMS, WhatsApp या सोशल मीडिया पर आएं, तो उन पर आंख बंद करके भरोसा न करें. हमेशा सरकारी वेबसाइट पर जाकर चालान नंबर और वाहन की जानकारी से वेरिफिकेशन करें. याद रखें, थोड़ी सी लापरवाही आपको बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है.
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:09 +0530</pubDate>
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<title>बिना टाइप किए मिलेंगे जवाब! Grok का नया फीचर मचाने वाला है AI की दुनिया में तहलका</title>
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<description><![CDATA[ Grok AI: Elon Musk की कंपनी xAI ने अपने AI चैटबॉट Grok में एक नया फीचर लॉन्च किया है. इस अनाउंसमेंट की जानकारी खुद Elon Musk ने अपने X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर दी. नया फीचर अब टाइप करने की जरूरत खत्म कर देता है और यूजर्स को Grok Voice मोड के जरिए पूरी तरह नए तरीके से AI चैटबॉट के साथ इंटरैक्ट करने की सुविधा देता है. इसका अनुभव अब ज्यादा आसान और इंटरैक्टिव हो गया है.
कैमरा से जानें, Grok बताएगा जो आप देख रहे हैं

Use video mode (turn on camera) and Grok voice will explain everything you&amp;rsquo;re looking atpic.twitter.com/Y5t4SQoOQQ
&amp;mdash; Elon Musk (@elonmusk) January 22, 2026



बुधवार दोपहर को Elon Musk ने X पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें Grok के लेटेस्ट फीचर का डेमो दिखाया गया. वीडियो में यूजर अपने फोन का कैमरा ऑन करता है और अपने आस-पास की चीज़ों की ओर कैमरा पॉइंट करता है. इसके बाद Grok तुरंत उस सीन को पहचानता है और वास्तविक समय में विस्तार से समझाता है.
वीडियो शेयर करते हुए Musk ने लिखा:
&amp;ldquo;वीडियो मोड का इस्तेमाल करें (कैमरा ऑन करें) और Grok Voice बताएगा कि आप क्या देख रहे हैं.&amp;rdquo; इसका मतलब है कि अब यूजर्स बस कैमरा ऑन करके वीडियो मोड एक्टिवेट करें और Grok Voice सामने मौजूद जगह, चीज़ या सीन को तुरंत समझा देगा.
Grok Voice मोड के मुख्य फायदे

टाइप करने की जरूरत नहीं, सवालों को वॉइस कमांड से पूछें.
कैमरा ऑन करके किसी भी जगह, ऑब्जेक्ट या सीन की तुरंत जानकारी पाएं.
मैन्युअल सर्च की जगह आसान और तेज़ तरीका.

अब Grok 10-सेकंड वीडियो भी जेनरेट कर सकता है
वॉइस और कैमरा बेस्ड इंटरैक्शन के अलावा Elon Musk ने Grok AI में एक और अपडेट की घोषणा की. अब Grok 10-सेकंड वीडियो जेनरेट कर सकता है जो पहले के 5-सेकंड लिमिट की तुलना में दोगुना है. Musk के मुताबिक, इस अपडेट से वीडियो की क्वालिटी बेहतर होगी और ऑडियो क्लियर आएगा. यह सुधार यूजर एक्सपीरियंस को और बेहतर बनाने के लिए किया गया है.
पिछले विवाद और सुरक्षा उपाय
Elon Musk का Grok पहले ही टेक दुनिया में चर्चा में रहा है क्योंकि यह टेक्स्ट, इमेज और वॉइस इंटरैक्शन को सपोर्ट करता है. हालांकि, कुछ देशों में यह विवाद भी पैदा कर चुका है, जब यूजर्स ने शिकायत की कि Grok बिना अनुमति के डीपफेक सामग्री बना रहा था. इस विवाद के बाद X ने एक विस्तृत जांच की और नए कंटेंट फिल्टर्स लागू किए ताकि प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा बढ़ाई जा सके और गलत इस्तेमाल रोका जा सके.
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>घर के काम से लेकर कार बनाने तक! मिलिए Atlas से, इंसानों जैसा काम करने वाला सुपर ह्यूमनॉइड रोबोट</title>
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<description><![CDATA[ Atlas Humanoid Robot: टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा पल तब देखने को मिला, जब Hyundai के स्वामित्व वाली Boston Dynamics ने अपने ह्यूमनॉइड रोबोट Atlas को पहली बार सार्वजनिक रूप से पेश किया. CES टेक शोकेस के मंच पर Atlas की एंट्री ने Tesla और दूसरी कंपनियों के साथ इंसानों जैसे रोबोट बनाने की दौड़ को और तेज कर दिया.
मंच पर खुद उठा और चलने लगा रोबोट
लास वेगास में आयोजित इस इवेंट के दौरान जैसे ही Atlas को स्टेज पर बुलाया गया, यह फर्श से खुद उठा और बिना किसी लड़खड़ाहट के चलने लगा. दो हाथ और दो पैरों वाला यह लाइफ-साइज रोबोट कुछ देर तक मंच पर घूमता रहा, दर्शकों की ओर हाथ हिलाया और सिर को इस तरह घुमाया जैसे कोई इंसान आसपास देख रहा हो. इस डेमो के दौरान एक इंजीनियर इसे पास से रिमोट के जरिए कंट्रोल कर रहा था हालांकि कंपनी का कहना है कि असल इस्तेमाल में Atlas खुद से मूव करने में सक्षम होगा.
2028 तक कार फैक्ट्री में उतरेगा Atlas
Boston Dynamics ने यह भी बताया कि Atlas का एक प्रोडक्ट वर्जन पहले से तैयार किया जा रहा है जिसे कार असेंबली जैसे कामों के लिए डिजाइन किया गया है. योजना के मुताबिक, 2028 तक इस रोबोट को जॉर्जिया के सवाना में स्थित Hyundai की इलेक्ट्रिक व्हीकल फैक्ट्री में तैनात किया जाएगा जहां यह मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में मदद करेगा.
Spot रोबोट से पहचान बना चुकी है कंपनी
मैसाचुसेट्स स्थित Boston Dynamics कई दशकों से रोबोटिक तकनीक पर काम कर रही है. कंपनी को सबसे ज्यादा पहचान उसके कुत्ते जैसे रोबोट Spot से मिली है जो इसका पहला कमर्शियल प्रोडक्ट रहा है. CES में Hyundai के इवेंट की शुरुआत भी चार Spot रोबोट्स ने की जो K-pop म्यूजिक पर एक साथ डांस करते नजर आए.
Google DeepMind के साथ नई साझेदारी
इस मौके पर Hyundai ने Google की AI यूनिट DeepMind के साथ एक नई पार्टनरशिप का ऐलान भी किया. इसके तहत DeepMind की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी को Boston Dynamics के रोबोट्स में इस्तेमाल किया जाएगा. दिलचस्प बात यह है कि Google पहले भी Boston Dynamics का मालिक रह चुका है जिसे उसने 2013 में खरीदा था और बाद में SoftBank को बेच दिया था. Hyundai ने 2021 में इसे SoftBank से अधिग्रहित किया.
लाइव डेमो दिखाने से क्यों कतराती हैं कंपनियां
आमतौर पर रोबोट बनाने वाली कंपनियां अपने ह्यूमनॉइड रोबोट्स को लाइव इवेंट्स में दिखाने से बचती हैं क्योंकि जरा सी चूक भी आलोचना का कारण बन सकती है. इसी वजह से ज्यादातर स्टार्टअप सोशल मीडिया पर एडिट किए गए वीडियो के जरिए अपने प्रोटोटाइप दिखाना पसंद करते हैं. लेकिन Atlas का लाइव डेमो बिना किसी गलती के पूरा हुआ जिसने सभी को प्रभावित किया.
नए Atlas मॉडल की झलक भी दिखी
डेमो के आखिर में Atlas ने नाटकीय अंदाज में अपने हाथ घुमाते हुए अपने नए प्रोडक्ट वर्जन का परिचय दिया. यह मॉडल स्टेज पर स्थिर खड़ा था और इसका रंग नीला था जो प्रोटोटाइप से थोड़ा अलग नजर आया.
AI बूम से रोबोटिक्स को मिल रही रफ्तार
कमर्शियल AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और नई तकनीकी प्रगति ने रोबोटिक्स में भारी निवेश को बढ़ावा दिया है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इंसानों की तरह हर तरह के काम करने वाले रोबोट्स को आम जगहों और घरों में आने में अभी वक्त लगेगा.
इंसानों की नौकरियों पर कितना खतरा?
फिलहाल ह्यूमनॉइड रोबोट्स में इतनी बारीक समझ और कुशलता नहीं है कि वे बड़े पैमाने पर इंसानों की नौकरियों के लिए खतरा बन सकें. लेकिन जैसे-जैसे ये तकनीक बेहतर होगी, रोजगार पर इनके असर को लेकर बहस तेज होना तय है. दिलचस्प रूप से जिस जॉर्जिया प्लांट में Atlas को टेस्ट किया जाएगा वहीं पिछले साल एक इमिग्रेशन रेड भी हुई थी जिसमें सैकड़ों वर्कर्स को हिरासत में लिया गया था.
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AI छीन लेगा इन लोगों की नौकरियां? Nvidia CEO ने दिया चौंकाने वाला बयान, जानिए पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ Nvidia CEO on AI: आज हर तरफ AI की चर्चा है. Claude हो या Gemini, हर नए टूल के साथ यह डर भी बढ़ता जा रहा है कि कहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लोगों की नौकरियां न छीन ले. खासकर कोडिंग, डेटा एनालिसिस और सॉफ्टवेयर जैसी व्हाइट-कॉलर जॉब्स को लेकर चिंता ज्यादा है. इसी माहौल में Nvidia के CEO जेन्सन हुआंग ने ऐसा बयान दिया है जिसने इस बहस को एक नया मोड़ दे दिया है. उनका कहना है कि AI नौकरियां खत्म करने के बजाय नई तरह की नौकरियां पैदा करेगा और इनमें प्लंबर और इलेक्ट्रीशियन जैसी प्रोफेशनल स्किल्स की भारी मांग होगी.
दावोस में Jensen Huang का बड़ा बयान
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में बोलते हुए Jensen Huang ने साफ कहा कि यह मान लेना गलत है कि AI बड़े पैमाने पर रोजगार खत्म कर देगा. उन्होंने माना कि ऑटोमेशन की वजह से कोडिंग और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जैसी कुछ नौकरियों का स्वरूप बदलेगा लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि काम खत्म हो जाएगा. उनके मुताबिक, AI को चलाने के लिए जिस तरह के विशाल डेटा सेंटर्स और टेक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी, वह नई नौकरियों का बड़ा जरिया बनेगा.
मजाक नहीं, हकीकत बन सकता है पुराना इंटरनेट जोक
इंटरनेट पर अक्सर एक मज़ाक चलता रहा है कि लोग चाहते थे AI बर्तन धोए और कपड़े धोए ताकि इंसान क्रिएटिव काम कर सके लेकिन हुआ इसका उल्टा. अब AI कला बना रहा है और इंसान घरेलू काम करने को मजबूर है.
Jensen Huang के बयान से लगता है कि यह मज़ाक भविष्य में सच भी हो सकता है. उनका इशारा है कि आने वाले समय में कोडर्स से ज्यादा जरूरत प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन और टेक्नीशियन की होगी. हैरानी की बात यह है कि इन प्रोफेशन्स में काम करने वाले लोग सालाना एक लाख डॉलर से ज्यादा कमा सकते हैं.
AI बूम से शुरू होगा ऐतिहासिक इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार
Nvidia CEO के अनुसार, दुनिया भर में AI को तेजी से अपनाने की होड़ &amp;ldquo;मानव इतिहास का सबसे बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण&amp;rdquo; साबित हो सकती है. इसके तहत नए डेटा सेंटर्स, सेमीकंडक्टर फैक्ट्रियां, चिप प्लांट्स और AI-स्पेशलाइज्ड यूनिट्स बनाए जाएंगे. इन सबके निर्माण में इंजीनियरों से ज्यादा जरूरत होगी प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, स्टील वर्कर्स और कंस्ट्रक्शन एक्सपर्ट्स की.
ट्रेड जॉब्स में बढ़ेगी सैलरी, टेक जॉब्स को टक्कर
Huang का मानना है कि सिर्फ नौकरियों की संख्या ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि इन स्किल-आधारित प्रोफेशन्स की सैलरी भी तेजी से बढ़ेगी. कई ट्रेड जॉब्स की कमाई अब पारंपरिक टेक जॉब्स के बराबर या उनसे ज्यादा हो रही है. स्किल्ड लेबर की कमी के कारण चिप फैक्ट्री और AI यूनिट्स में काम करने वाले लोग छह अंकों की सैलरी तक पहुंच सकते हैं.
AI की दुनिया सिर्फ इंजीनियर्स तक सीमित नहीं
Nvidia CEO ने जोर देकर कहा कि AI इकोनॉमी केवल कोडर्स और रिसर्चर्स के लिए नहीं है. डिजिटल और फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ बढ़ने से हर तरह की स्किल्स की अहमियत बनी रहेगी.
उनके शब्दों में, &amp;ldquo;हर किसी को अच्छी कमाई का मौका मिलना चाहिए,&amp;rdquo; चाहे वह लैपटॉप के सामने बैठकर काम करे या किसी फैक्ट्री साइट पर.
AI नौकरियां खत्म नहीं करेगा, उनका रूप बदलेगा
जहां एक तरफ जनरेटिव AI को लेकर डर का माहौल है, वहीं Jensen Huang का तर्क इतिहास की ओर इशारा करता है. उनके मुताबिक, टेक्नोलॉजी अक्सर नौकरियों को खत्म नहीं करती, बल्कि उन्हें बदल देती है. AI जब रिपीट होने वाले काम संभाल लेगा, तब इंसान ज्यादा वैल्यू वाले और नए तरह के रोल्स में शिफ्ट हो सकता है चाहे वह कोडिंग से बाहर ही क्यों न हों.
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ChatGPT के ये 10 सीक्रेट ट्रिक्स जान लीं तो घंटों का काम मिनटों में होगा, समय की होगी जबरदस्त बचत!</title>
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<description><![CDATA[ ChatGPT: ChatGPT अब केवल सवाल-जवाब करने वाला AI नहीं रह गया है. आज यह स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स, कंटेंट क्रिएटर्स और बिज़नेस ओनर्स के लिए एक पावरफुल प्रोडक्टिविटी टूल बन चुका है. ईमेल लिखना हो, पढ़ाई की तैयारी करनी हो, कोडिंग में मदद चाहिए या फिर दिन की प्लानिंग ChatGPT हर जगह काम आ रहा है. सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह घंटों का काम मिनटों में निपटा सकता है.
प्रोफेशनल ईमेल मिनटों में तैयार करें
अगर बॉस या क्लाइंट को ईमेल लिखते समय शब्द नहीं मिलते, तो ChatGPT आपकी बड़ी परेशानी दूर कर सकता है. बस उसे बता दें कि ईमेल का टोन प्रोफेशनल चाहिए, थोड़ा फ्रेंडली या फिर अर्जेंट AI तुरंत एक सधा हुआ और साफ ईमेल ड्राफ्ट कर देता है.
SEO-फ्रेंडली कंटेंट बनाना हुआ आसान
ब्लॉगिंग, न्यूज़ या डिजिटल मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए SEO सबसे बड़ा सिरदर्द होता है. ChatGPT की मदद से ऐसे आर्टिकल, हेडलाइन और मेटा डिस्क्रिप्शन तैयार किए जा सकते हैं जो गूगल के साथ-साथ भारतीय पाठकों को भी पसंद आएं.
एग्जाम की तैयारी में मिले स्मार्ट मदद
UPSC, SSC, बैंक या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में सबसे मुश्किल होता है सही कंटेंट चुनना. ChatGPT कठिन टॉपिक्स को आसान भाषा में समझाता है, प्रैक्टिस क्वेश्चन देता है और लंबे चैप्टर्स को छोटे-छोटे नोट्स में बदल देता है जिससे पढ़ाई बोझ नहीं लगती.
लंबे नोट्स और PDFs को बनाएं शॉर्ट और क्लियर
अगर आपके पास मोटी-मोटी नोट्स या बड़े PDF हैं और समझ नहीं आ रहा कि शुरुआत कहां से करें तो ChatGPT उन्हें आसान और पढ़ने लायक फॉर्मेट में बदल सकता है. इससे पढ़ाई में लगने वाला काफी समय बच जाता है.
कोडिंग में बिना टेंशन के पाएं मदद
कोडिंग सीखने या काम करने के लिए अब एक्सपर्ट होना जरूरी नहीं. ChatGPT Python, Java, JavaScript जैसी भाषाओं में कोड लिखने, सुधारने और समझाने में मदद करता है. यह एक ऐसे कोडिंग पार्टनर जैसा है, जो कभी थकता नहीं.
दिन की प्लानिंग अब होगी ऑटोमैटिक
अगर आप अपने दिन को ठीक से मैनेज नहीं कर पाते तो ChatGPT आपकी लाइफस्टाइल के हिसाब से डेली प्लानर बना सकता है. चाहे स्टडी शेड्यूल हो, फिटनेस रूटीन या ऑफिस का काम सब कुछ सही क्रम में सेट किया जा सकता है.
इंग्लिश और कम्युनिकेशन स्किल्स करें बेहतर
यंग प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स के लिए ChatGPT इंग्लिश सुधारने में काफी मददगार है. यह ग्रामर ठीक करता है, सेंटेंस बेहतर बनाता है और इंटरव्यू के लिए सैंपल आंसर भी तैयार कर देता है.
बिज़नेस आइडिया और स्टार्टअप प्लान तैयार करें
अगर आपके दिमाग में कोई बिज़नेस आइडिया है लेकिन उसे सही ढांचे में नहीं ला पा रहे, तो ChatGPT मदद कर सकता है. यह आइडिया ब्रेनस्टॉर्मिंग से लेकर मार्केटिंग स्ट्रैटेजी और बेसिक फाइनेंशियल प्लान तक तैयार कर देता है.
नई स्किल्स सीखना हुआ तेज
डिजिटल मार्केटिंग, AI टूल्स, शेयर मार्केट या फ्रीलांसिंग जो भी सीखना हो ChatGPT आपको स्टेप-बाय-स्टेप गाइड कर सकता है. न क्लास जॉइन करने की जरूरत, न अपॉइंटमेंट लेने की.
रोज़मर्रा की समस्याओं का तुरंत हल
सरकारी शिकायत पत्र लिखना हो, किसी फॉर्म की जानकारी चाहिए या कोई खरीदारी का फैसला लेना हो ChatGPT तुरंत सीधा और काम का जवाब देता है, वो भी बिना समय बर्बाद किए.
सही इस्तेमाल किया तो ChatGPT है गेम-चेंजर
अगर ChatGPT को समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो पढ़ाई, नौकरी और बिज़नेस&amp;mdash;तीनों में काम आसान हो सकता है. हालांकि यह भी ज़रूरी है कि हर जानकारी को आंख बंद करके न माना जाए और ज़रूरत पड़ने पर फैक्ट-चेक जरूर किया जाए. सही इस्तेमाल के साथ ChatGPT सच में समय बचाने वाला सबसे बड़ा डिजिटल हथियार बन सकता है.
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<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:29:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>घर में लगे हैं CCTV कैमरा तो इन बातों का रखें ध्यान, जरा&#45;सी चूक बिगाड़ देगी काम</title>
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<description><![CDATA[ घरों से लेकर दुकानों तक में आजकल CCTV कैमरा आम हो गए हैं. बाहर होने पर घर पर नजर रखने से लेकर सुरक्षा कारणों तक लोग इनका खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, इन कैमरों के साथ प्राइवेसी की चिंताएं भी खूब जुड़ी हुई हैं. ऐसे में CCTV कैमरों को लेकर कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत है ताकि आपके साथ-साथ आपके पड़ोसियों की प्राइवेसी भी बनी रहे और आपके घर को पूरी सुरक्षा भी मिलती रहे. अगर आप अपने घर, दुकान और ऑफिस में CCTV कैमरा यूज करते हैं तो ये टिप्स आपके काम आ सकती हैं.
जरूरत होने पर ही इनेबल करें रिमोट व्यू
मॉडर्न सिक्योरिटी कैमरा सिस्टम में रिमोट व्यू ऑप्शन आता है. इन्हें इंटरनेट से कनेक्ट करने के बाद आप दुनियाभर में कहीं भी बैठकर अपने घर या ऑफिस में लगे CCTV कैमरा के फीड को देख सकते हैं, लेकिन अगर आप घर पर ही रहते हैं तो इसे इनेबल करने की जरूरत नहीं है. कमजोर पासवर्ड का फायदा उठाकर हैकर्स इसकी एक्सेस ले सकते हैं. इसलिए इसे केवल जरूरत होने पर ही इनेबल करें और हमेशा मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करें.
कितनी होनी चाहिए स्टोरेज ड्यूरेशन?
आप अपनी जरूरत के हिसाब से स्टोरेज ड्यूरेशन सेट कर सकते हैं. हालांकि, अगर आपको नॉर्मल यूज करना है तो एक या दो हफ्ते से ज्यादा समय तक फुटेज स्टोर न करें. इससे डेटा लीक होने का खतरा बढ़ जाता है. सिक्योरिटी कैमरा सिस्टम में ऑटोमैटिक ही स्टोरेज डिलीट करने का ऑप्शन आता है.&amp;nbsp;
प्राइवेसी का रखें खास ध्यान
घर में CCTV कैमरा सेटअप करते समय प्राइवेसी का खास ध्यान रखना चाहिए. बेडरूम और घर की दूसरी जगहों पर CCTV की नजर नहीं होनी चाहिए. साथ ही अगर आप घर के बाहर कैमरे लगा रहे हैं तो यह भी सुनिश्चित करें कि इससे पड़ोसियों की प्राइवेसी का हनन नहीं हो रहा है.
एन्क्रिप्टेड स्टोरेज
घर में लगे CCTV कैमरा में घर की रोजमर्रा की एक्टिविटी कैद होती है, लेकिन ये गलत हाथों में पड़ जाए तो इसका दुरुपयोग भी हो सकता है. इसलिए हमेशा फुटेज को एन्क्रिप्टेड स्टोरेज या सिक्योर क्लाउड अकाउंट में स्टोर करें. कैमरा सिस्टम का फर्मवेयर अपडेट और यह प्रोटेक्टेड वाई-फाई से कनेक्ट होना चाहिए.
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फोल्डेबल आईफोन में यह कमाल करने वाली है ऐप्पल, आज तक कोई कंपनी नहीं कर पाई ऐसा ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 07:21:36 +0530</pubDate>
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<title>iPhone 17 की जबरदस्त डिमांड, अब कीमत बढ़ा सकती है ऐप्पल, जानिए कितना महंगा हो जाएगा</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप आईफोन 17 खरीदना चाहते हैं तो जल्दी करें. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि भारी डिमांड के चलते ऐप्पल इसकी कीमत बढ़ा सकती है. कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सितंबर में लॉन्च हुए आईफोन 17 के दामों में इजाफा किया जा सकता है. कुछ दिन पहले ही ऐप्पल ने इस पर मिलने वाले कैशबैक को कम किया था. यह फोन कई शानदार अपग्रेड्स के साथ लॉन्च हुआ था, जिसके चलते इसकी खूब डिमांड है और स्टॉक कम पड़ रहा है.
कितनी हो सकती है आईफोन 17 की कीमत?
भारत में इस आईफोन के 256GB वाले बेस मॉडल की कीमत 82,900 रुपये है, जो 512GB वाले मॉडल के लिए 1,02,900 रुपये तक जाती है. अब कयास लगाए जा रहे हैं कि इसकी कीमत में 7,000 रुपये का बढ़ोतरी की जा सकती है, जिसके बाद इनके दाम क्रमश: 89,900 और 1,09,900 रुपये हो जाएंगे. हालांकि, अभी तक ऐप्पल की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है. बढ़ी हुई कीमतों का असर एकदम ग्राहकों पर न डालने के लिए ऐप्पल इस पर कुछ डिस्काउंट ऑफर कर सकती है. इसके अलावा बैंक ऑफर्स और कैशबैक डील से भी ग्राहकों की जेब पर बोझ कुछ हल्का हो सकता है.&amp;nbsp;
ये हो सकते हैं कीमत बढ़ने के कारण
अभी तक आधिकारिक तौर पर कीमत बढ़ने की जानकारी नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि भारी डिमांड के साथ-साथ मेमोरी कंपोनेंट के महंगे होने के कारण ऐप्पल यह कदम उठा रही है. गौरतलब है कि ग्लोबल मार्केट में मेमोरी कंपोनेंट की शॉर्टेज चल रही है, जिसके चलते इनके दाम 20 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं. इसके चलते दूसरी कंपनियां भी प्रभावित हो रही हैं और उनके नए स्मार्टफोन महंगे दामों पर लॉन्च हो रहे हैं. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो प्रीमियम स्मार्टफोन और महंगे हो जाएंगे.
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घर में लगे हैं CCTV कैमरा तो इन बातों का रखें ध्यान, जरा-सी चूक बिगाड़ देगी काम ]]></description>
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<pubDate>Fri, 28 Nov 2025 07:21:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एडवांस्ड AI फीचर्स के साथ लॉन्च हुआ Lava Agni 4, सैमसंग के इस फोन को देगा टक्कर</title>
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<description><![CDATA[ Lava Agni 4 Launched: लंबे इंतजार के बाद लावा ने अपने Agni 4 स्मार्टफोन को भारत में लॉन्च कर दिया है. भारत में ही डिजाइन और डेवलप किए गए इस स्मार्टफोन में प्रीमियम एल्युमिनियम अलॉय मेटल का फ्रेम दिया गया है और यह फोन कई एडवांस्ड AI फीचर्स के साथ लॉन्च हुआ है. इस फोन में वायु AI इंटेलीजेंट असिस्टेंट के साथ एक्सपर्ट AI एजेंट दिए गए हैं, जो यूजर की लर्निंग, क्रिएटिविटी और प्रोडक्टिविटी आदि में मदद करेंगे.&amp;nbsp;
Lava Agni 4 के फीचर और स्पेसिफिकेशंस
इस स्मार्टफोन में 6.67 इंच का AMOLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 2400 निट्स की पीक ब्राइटनेस के साथ आया है. इसेमं 4nm प्रोसेस पर बना 3.35GHz स्पीड वाला मीडियाटेक डायमेंसिटी 8350 प्रोसेसर लगा हुआ है, जो मल्टीटास्किंग, गेमिंग और फाइल ट्रांसफर को आसानी से हैंडल कर लेता है. इन-डिस्पले फिंगरप्रिंट सेंसर वाले इस फोन को तीन एंड्रॉयड अपग्रेड और चार साल तक सिक्योरिटी अपडेट्स मिलेंगे. बाकी फीचर्स की बात करें तो लावा के इस फोन में एक्शन बटन, डुअल स्टीरियो स्पीकर और गेम बूस्टर मोड आदि दिए गए हैं.
कैमरा और बैटरी
फोटो और वीडियो के लिए इसके रियर में 50MP का प्राइमरी सेंसर और 8MP का अल्ट्रावाइड लेंस मिलता है. फ्रंट में इसे 50MP कैमरा से लैस किया गया है. फ्रंट और रियर, दोनों ही कैमरे 4K वीडियो शूटिंग कैपेबिलिटीज के साथ आए हैं. इसके अलावा कैमरा में भी AI फीचर इंटीग्रेट किए गए हैं. लावा ने इस फोन में 5000mAh का बैटरी पैक दिया है, जो 66W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है.&amp;nbsp;
कीमत और कंपीटिशन
Lava Agni 4 को फैंटम ब्लैक और लुनर मिस्ट कलर ऑप्शन में लॉन्च किया गया है. बैंक ऑफर के बाद इसे 22,999 रुपये में खरीदा जा सकता है. इसकी बिक्री 25 नवंबर को दोपहर 12 बजे से शुरू होगी. मार्केट में इसका मुकाबला Samsung Galaxy A26 5G से होगा. सैमसंग के स्मार्टफोन में Exynos 1380 प्रोसेसर और 5000mAh की बैटरी दी गई है. इसके रियर में 50MP + 8MP का डुअल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 13MP का सेंसर दिया गया है. इसकी कीमत 23,999 रुपये है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 11:00:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>एडवांस्ड, फीचर्स, के, साथ, लॉन्च, हुआ, Lava, Agni, सैमसंग, के, इस, फोन, को, देगा, टक्कर</media:keywords>
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<title>अब वीडियो भेजने के लिए WhatsApp की जरूरत नहीं, YouTube पर ही भेज पाएंगे मैसेज, जल्द आएगा नया फीचर</title>
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<description><![CDATA[ अब YouTube के वीडियो शेयर करने के लिए आपको व्हाट्सऐप या टेलीग्राम जैसी ऐप्स की जरूरत नहीं पड़ेगी. गूगल एक नए फीचर को टेस्ट कर रही है, जिसमें आप यूट्यूब पर ही दूसरे यूजर को मैसेज भेज पाएंगे. अभी यूट्यूब के वीडियो शेयर करने के लिए इसके लिंक को किसी ऐप में पेस्ट करना होता है और फिर इसे दूसरे यूजर को भेजा जाता है, लेकिन जल्द ही यह बदल जाएगा. यूट्यूब की कोशिश है कि लोग ज्यादा से ज्यादा समय तक उसके प्लेटफॉर्म पर रुके और मैसेज करने के लिए उन्हें किसी और प्लेटफॉर्म की जरूरत न पड़े.
यहां चल रही है टेस्टिंग
यूट्यूब के सपोर्ट पेज पर कंपनी ने बताया है कि वह अभी दो क्षेत्रों में इस फीचर को टेस्ट कर रही है. अभी इसकी शुरुआत हुई है और पोलैंड और आयरलैंड में कुछ यूजर्स के लिए इसे रोल आउट किया गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जल्द ही इस टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया जा सकता है और ज्यादा यूजर्स पर इस फीचर को टेस्ट किया जाएगा. हालांकि, इस साल के खत्म होने में अब कुछ ही हफ्ते बाकी बचे हैं, ऐसे में यह फीचर अगले साल तक सारे यूजर्स के लिए लॉन्च किया जा सकता है.
मैसेज किए जा सकते हैं स्कैन
यूट्यूब ने इस फीचर को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी है, लेकिन इसकी पॉलिसी को लेकर कुछ बातें पता चली हैं. यूट्यूब पर भेजे जाने वाले मैसेज को पॉलिसी गाइडलाइन के आधार पर रिव्यू किया जा सकता है. पॉलिसी का उल्लंघन करने वाले मैसेज को ब्लॉक किया जा सकता है.&amp;nbsp;
Ask फीचर की भी चल रही टेस्टिंग
यूट्यब इन दिनों Ask नाम के एक और फीचर की भी टेस्टिंग कर रही है. यह फीचर वीडियो देखने के एक्सपीरियंस को स्मार्ट और इंटरेक्टिव बनाएगी. इस फीचर में आप न सिर्फ वीडियो से जुड़े सवाल पूछ पाएंगे, बल्कि उसकी समरी और बुलेट प्वाइंट को भी जान पाएंगे. साथ ही आपको वीडियो के कंटेट पर बेस्ड क्विज खेलने को भी मिल जाएगी.
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 11:00:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Earbuds या Neckband में से कौन&#45;सा खरीदें? ये बातें पढ़कर दूर हो जाएगी कंफ्यूजन</title>
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<description><![CDATA[ आजकल ब्लूटूथ इयरफोन काफी ट्रेंड में हैं. बस-ट्रेन से लेकर ऑफिस और जिम तक लोग नेकबैंड या इयरबड्स पहने दिख जाएंगे. बहुत कम लोग ऐसे बचे हैं, जो वायर्ड इयरफोन यूज करते हैं. ब्लूटूथ इयरफोन के अपने कई फायदे हैं. ट्रेंड में होने के साथ-साथ यूज करना भी आसान है और एक्सरसाइज वगैरह करते समय आपको फोन भी साथ नहीं रखना पड़ता. ब्लूटूथ इयरफोन खरीदते समय कई लोग यह तय नहीं कर पाते कि उन्हें इयरबड्स लेने चाहिए या नेकबैंड. अगर आपको भी ये कंफ्यूजन है तो यह खबर आपके लिए है.
नेकबैंड के हैं ज्यादा फायदे
आजकल नेकबैंड को लोग ज्यादा पसंद नहीं कर रहे हैं, लेकिन कुछ समय पहले तक इसका खूब क्रेज था. बाजार से लेकर जिम तक लोग अपने गले में नेकबैंड डाले दिख जाते थे. हालांकि, पिछले कुछ समय से इयरबड्स ज्यादा ट्रेंड में आ गए हैं, लेकिन यूटिलटी के मामले में ये नेकबैंड से पिछड़ जाते हैं. नेकबैंड कई मामलों में इयरबड्स से आगे हैं.
क्यों इयरबड्स के मुकाबले नेकबैंड है फायदेमंद
नेकबैंड का एक बड़ा फायदा इनकी आसान हैंडलिंग है. यूज करने के बाद आपको इन्हें सिर्फ कान से निकालना है और ये आपके गले में लटकते रहेंगे. दूसरी तरफ इयरबड्स की संभाल करना बहुत जरूरी हो जाता है. यूज करने के बाद वापस से इन्हें केस में डालना पड़ता है. इसके अलावा नेकबैंड के गिरने का भी डर नहीं है. अगर इयरप्लग कान से निकल जाते हैं तो भी वो नीचे नहीं गिरते, लेकिन इयबड्स के मामले में ऐसा नहीं है. इयरबड्स के नीचे गिरने और गुम हो जाने का भी खतरा रहता है.&amp;nbsp;
कीमत में भी बड़ा अंतर
नेकबैंड और इयरबड्स में एक और बड़ा अंतर कीमत को लेकर है. इयरबड्स के मुकाबले नेकबैंड सस्ते आ जाते हैं. अच्छे इयरबड्स लेने के लिए आपको अच्छे नेकबैंड की कीमत से ज्यादा पैसा चुकाना होगा. इसके अलावा बैटरी लाइफ के मामले में भी नेकबैंड इयरबड्स से बहुत आगे है और इनकी बैटरी ज्यादा चलती है.
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अलर्ट! क्रोम यूजर्स पर मंडरा रहा यह बड़ा खतरा, गूगल ने जारी की सिक्योरिटी वार्निंग ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 11:00:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अलर्ट! क्रोम यूजर्स पर मंडरा रहा यह बड़ा खतरा, गूगल ने जारी की सिक्योरिटी वार्निंग</title>
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<description><![CDATA[ गूगल क्रोम दुनिया में सबसे ज्यादा यूज होने वाला वेब ब्राउजर है. अगर आप भी इसे यूज करते हैं तो सतर्क हो जाने की जरूरत है. गूगल ने इसमें एक नए जीरो-डे फ्लॉ का पता लगाया है. इस सुरक्षा खामी को CVE-2025-13223 लेबल दिया गया है और यह पुराने क्रोम वर्जन को प्रभावित कर रही है. साइबर अटैकर्स ने इस खामी का फायदा उठाने की कोशिश की है. इसे देखते हुए गूगल ने सिक्योरिटी पैच जारी कर दिया है और यूजर्स से क्रोम को जल्द से जल्द अपडेट करने को कहा है.&amp;nbsp;
कहां मिली सुरक्षा खामी?
क्रोम के V8 जावास्क्रिप्ट इंजन में यह बग मिला है, जिसके चलते यह ब्राउजर एग्जीक्यूशन के दौरान कुछ टाइप के डेटा को मिसरीड करता है. इससे मेमोरी करप्ट हो सकती है, जिसका फायदा उठाकर अटैकर्स टारगेटेड डिवाइस में मलेशियस कोड रन कर सकते हैं. गूगल ने कहा कि उसे इस खामी का पता लगने से पहले ही अटैकर्स ने इसका फायदा उठाने की कोशिश की थी. गूगल के थ्रेट एनालिसिस ग्रुप ने 12 नवंबर को इस बग का पता लगाया था. यह इस साल का सातवां जीरो-डे फ्लॉ है. यानी 2025 में सात बार ऐसा हो चुका है, जब किसी बग के बारे में गूगल से पहले हैकर्स को पता चल चुका है.&amp;nbsp;
गूगल ने रोल आउट कर दी अपडेट
गूगल लगातार क्रोम की सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए काम कर रही है और उसने इस बग के लिए भी सिक्योरिटी पैच जारी कर दी है. इसे यूजर्स के लिए रोल आउट किया जा रहा है. अगर आपको क्रोम में कोई अपडेट पेंडिंग दिख रही है तो इसे तुरंत इंस्टॉल कर लें. ऐसे सुरक्षा खामी और बढ़ते साइबर हमलों से बचाव के लिए नियमित तौर पर क्रोम और दूसरी ऐप्स को अपडेट करने की सलाह दी जाती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 11:00:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एआई से बनी या एडिट हुई फोटो का चुटकियों में लग जाएगा पता, यह है एकदम आसान तरीका</title>
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<description><![CDATA[ अब एआई से जनरेटेड या एडिट हुई फोटो का पता लगाना एकदम आसान होने जा रहा है. इसके लिए गूगल ने जेमिनी ऐप में एक नया फीचर जोड़ा है, जो चुटकियों मे यह बता देगा कि फोटो एआई से जनरेट या एडिट हुई है या नहीं. इसके लिए यूजर को जेमिनी ऐप में फोटो अपलोड कर पूछना है कि क्या यह तस्वीर एआई से बनी है? गूगल जेमिनी तुरंत इसे वेरिफाई करके बता देगा. बता दें कि पिछले कुछ समय से एआई से बनी तस्वीरें खूब शेयर हो रही हैं. ऐसे में उनकी ऑथेंटिसिटी जानने के लिए यह फीचर बेहद काम का साबित होने वाला है.
अभी केवल इमेजेज होंगी वेरिफाई
अभी यह फीचर केवल गूगल एआई टूल से बनी तस्वीरों को वेरिफाई कर सकता है. यह गूगल की इनविजिबल वाटरमार्किंग टेक्नोलॉजी SynthID की मदद से फोटो को वेरिफाई करता है. गूगल का कहना है कि जल्द ही इसमें वीडियो और ऑडियो को वेरिफाई करने का ऑप्शन भी जोड़ा जाएगा. जेमिनी के अलावा गूगल इसे अपनी सर्च सर्विस में भी इंटीग्रेट करने पर विचार कर रही है, जिससे जेमिनी ऐप यूज न करने वाले यूजर भी इस फीचर का फायदा उठा सकेंगे.
कैसे काम करेगा यह फीचर?
अगर आप किसी इमेज के बारे में यह पता करना चाहते हैं कि यह एआई से बनी या एडिट हुई है तो इसे जेमिनी पर अपलोड कर दें. अपलोड करने के बाद टेक्स्ट बॉक्स में &#039;क्या यह तस्वीर एआई से बनी है?&#039; प्रॉम्प्ट लिखकर सेंड कर दें. &amp;nbsp;इसके बाद गूगल जेमिनी इसकी SynthID वेरिफाई करते हुए आपको इस इमेज का पूरा कॉन्टेक्स्ट बता देगी. रिपोर्ट्स के अनुसार, अभी इसमें केवल गूगल के एआई टूल्स से बनी इमेज को वेरिफाई किया जा सकता है, लेकिन आगे चलकर इसमें दूसरे सोर्स के सपोर्ट को भी जोड़ा जा सकता है, जिसके बाद यह ChatGPT जैसे टूल से बनी फोटोज को भी वेरिफाई कर पाएगी.
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गलती से किसी और को भेज दिया मेल? टेंशन नहीं, सेंट मेल को ऐसे कर सकते हैं अनडू, जानें तरीका ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 11:00:00 +0530</pubDate>
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<title>गलती से किसी और को भेज दिया मेल? टेंशन नहीं, सेंट मेल को ऐसे कर सकते हैं अनडू, जानें तरीका</title>
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<description><![CDATA[ चाहे आप स्टूडेंट हो या वर्किंग प्रोफेशनल, मेल भेजने की जरूरत सबको पड़ती है. कई बार जल्दबाजी या लापरवाही से मेल किसी दूसरे एड्रेस पर चला जाता है. अगर आपसे भी ऐसी गलती होती है तो घबराने की जरूरत नहीं है. जीमेल पर भेजे गए मेल को अनडू सेंट करने का ऑप्शन होता है. यानी आप भेजे को मेल के कैंसिल कर सकते है, जिससे यह रिसीवर के पास नहीं पहुंचेगा. आज हम आपको इसका तरीका बताने जा रहे हैं.&amp;nbsp;
कैसे काम करता है यह फीचर?
यह फीचर किसी मेल को पहले से सेट किए हुए टाइम पीरियड तक सेंड होने से रोक लेता है. ऐसे में यूजर को इस मेल को रिसीवर के इनबॉक्स में पहुंचने देने से रोकने का मौका मिल जाता है. जीमेल के डेस्कटॉप वर्जन के साथ-साथ मोबाइल पर भी यह फीचर मिलता है और दोनों में ही यूज करने का तरीका लगभग एक जैसा है.&amp;nbsp;
भेजे हुए मेल को कैसे अनडू करें?
अगर आपने डेस्कटॉप से मेल भेजा है तो मेल भेजने के बाद लेफ्ट बॉटम कॉर्नर में मैसेज सेंट बॉक्स अपीयर होता है. इस पर अनडू का ऑप्शन होता है. इसे क्लिक करते ही मेल दोबारा ओपन हो जाता है. आप इसे चाहें तो एडिट या डिलीट भी कर सकते हैं. इसी तरीके से मोबाइल पर मेल भेजते ही सेंट नोटिफिकेशन आता है. इस पर अनडू का ऑप्शन दिया होता है. इस पर टैप कर आप भेजे गए मेल को अनडू कर सकते हैं.
कैंसिलेशन टाइम को कैसे बढाएं?
जीमेल अपने यूजर्स को भेजे हुए मेल को अनडू करने का टाइम पीरियड सेट करने का भी ऑप्शन देती है. इसके लिए जीमेल ओपन कर गियर आइकन पर क्लिक या टैप करें. अब यहां सी ऑल सेटिंग में जाएं. इसके बाद जनरल टैब के नीचे अनडू सेंड का ऑप्शन दिखेगा. इसमें आप कैंसिलेशन टाइम को 5-30 सेकंड के बीच सेट कर सकते हैं.
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Earbuds या Neckband में से कौन-सा खरीदें? ये बातें पढ़कर दूर हो जाएगी कंफ्यूजन ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 11:00:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>लगभग 25,000 रुपये सस्ता हो गया यह आईफोन, फिर नहीं मिलेगा इतना सस्ता खरीदने का मौका, चेक करें डील</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप नया आईफोन खरीदना चाहते हैं तो हम आपके लिए एक शानदार डिस्काउंट की जानकारी लेकर आए हैं. आईफोन 16 प्लस पर इस समय लगभग 25,000 रुपये की छूट मिल रही है. ऐसे में कम कीमत पर शानदार आईफोन खरीदने का यह सुनहरा मौका है. आईफोन 16 प्लस में कई दमदार फीचर्स मिलते हैं और यह जबरदस्त ऑफर इस डील को और भी शानदार बना रहा है. आइए इस फोन के फीचर्स के साथ-साथ डील के बारे में भी जानते हैं.
आईफोन 16 प्लस
आईफोन 16 प्लस को पिछले साल सितंबर में लॉन्च किया गया था. इस आईफोन में 6.7 इंच का बड़ा Super Retina XDR OLED डिस्प्ले मिलता है. इसमें ऐप्पल का A18 चिपसेट मिलता है, जो ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स और मल्टीटास्किंग को हैंडल करता है. एल्युमिनियम फ्रेम वाले इस आईफोन को वाटर और डस्ट रजिस्टेंस के लिए IP68 रेटिंग मिली हुई है. फोटो और वीडियोग्राफी के लिए इसके रियर में डुअल कैमरा सेटअप है, जिसमें 48MP का प्राइमरी लेंस और 12MP का अल्ट्रावाइड सेंसर मिलता है. फ्रंट में इसे 12MP के कैमरा से लैस किया गया है. कंपनी का दावा है कि इसकी बैटरी 27 घंटे तक का वीडियो प्लेबैक दे सकती है.&amp;nbsp;
रिलायंस डिजिटल पर मिल रही यह धांसू डील
आईफोन 16 प्लस को पिछले साल 89,900 की शुरुआती कीमत के साथ लॉन्च किया गया था. रिलायंस डिजिटल की वेबसाइट पर अभी यह लगभग 21,000 रुपये की सीधी छूट के साथ 68,990 रुपये में लिस्टेड है, लेकिन आपको इतनी कीमत भी नहीं देनी है. अगर आप IDFC Bank से EMI के जरिए यह फोन खरीदते हैं तो इस पर 4,000 रुपये का एडिशनल डिस्काउंट दिया जा रहा है, जिसके बाद इसकी कीमत लगभग 25,0000 रुपये कम होकर 64,990 रुपये रह जाती है. आप अपने पुराने फोन को एक्सचेंज कर इस आईफोन पर और भी छूट पा सकते हैं. पुराने फोन की कीमत उसकी कंडीशन पर डिपेंड करेगी.
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Galaxy S26 Ultra में मिलेगा ऐसा सीक्रेट फीचर, फोन में आपके अलावा कोई झांक नही पाएगा, बढ़ जाएगी प्राइवेसी ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 10:59:59 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Galaxy S26 Ultra में मिलेगा ऐसा सीक्रेट फीचर, फोन में आपके अलावा कोई झांक नही पाएगा, बढ़ जाएगी प्राइवेसी</title>
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<description><![CDATA[ सैमसंग अगले साल अपनी गैलेक्सी S26 सीरीज लॉन्च करने की तैयारी में लगी हुई है. इस सीरीज के फ्लैगशिप डिवाइस गैलेक्सी S26 अल्ट्रा में इस बार एक ऐसा फीचर आने वाला है, जो आपकी प्राइवेसी को कई गुना बढ़ा देगा. सैमसंग इस बार अल्ट्रा मॉडल में हार्डवेयर लेवल पर एक नया फ्लैक्स मैजिक पिक्सल फीचर देने जा रही है. यह एक प्राइवेसी स्क्रीन होगी, जिसके कारण साइड से फोन की स्क्रीन पर चल रहे वीडियो या दूसरे किसी भी प्रकार के कंटेट को देखा नहीं जा सकेगा.&amp;nbsp;
क्या है फ्लैक्स मैजिक पिक्सल?
अभी तक लोग प्राइवेसी स्क्रीन प्रोटेक्टर का यूज करत आए हैं. यह एक पतली फिल्म होती है, जो व्यूइंग एंगल को कम कर देती है, जिससे बगल में बैठा व्यक्ति यह नहीं देख पाता कि यूजर स्क्रीन पर क्या देख रहा है. हालांकि, इससे ब्राइटनेस कम हो जाती है औ कलर भी खराब दिखने लगते हैं. इन सबसे छुटकारा दिलाने के लिए सैमसंग नया फ्लैक्स मैजिक पिक्सल लेकर आ रही है. इस फीचर को एक टॉगल से ऑन किया जा सकेगा और इसके लिए अलग से किसी स्क्रीन प्रोटेक्टर की जरूरत भी नहीं पड़ेगी.
डिस्प्ले इनोवेशन में आगे रही है सैमसंग
डिस्प्ले इनोवेशन के मामले में सैमसंग आगे रही है और वह समय-समय पर नए प्रयोग लाती रहती है. कंपनी ने S21 अल्ट्रा में एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग दी थी. कंपनी लगातार इसे रिफाइन करती रही और S24 को कॉर्निंग गोरिल्ला आर्मर से लैस कर दिया. यह इसके साथ आने वाला दुनिया का पहला फोन था. इस वजह से रिफ्लेक्शन की समस्या दूर हो गई और स्क्रीन को बेहतर ड्यूरैबिलिटी और स्क्रैच रजिस्टेंस मिला.
गैलेक्सी S26 अल्ट्रा के स्पेसिफिकेशन
यह फोन 6.9 इंच के M14 QHD+ CoE Dynamic AMOLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च हो सकता है. इसमें क्वालकॉम का Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया जा सकता है, जिसे 12GB रैम और 256GB इंटरनल स्टोरेज के साथ पेयर किया जाएगा. कैमरा की बात करें तो इसके रियर में 200MP का मेन कैमरा, 50MP का पेरिस्कोप लेंस, 50MP अल्ट्रावाइड सेंसर और 12MP का टेलीफोटो लेंस मिल सकता है. इसे 5,000mAh के बैटरी पैक से लैस किए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं.
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गलती से किसी और को भेज दिया मेल? टेंशन नहीं, सेंट मेल को ऐसे कर सकते हैं अनडू, जानें तरीका ]]></description>
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<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 10:59:59 +0530</pubDate>
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<title>Gemini 3 हुआ लॉन्च, गूगल ने बताया अपना अब तक का सबसे इंटेलीजेंट AI मॉडल, कैपेबिलिटीज जानकर चौंक जाएंगे आप</title>
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<description><![CDATA[ Google ने आखिरकार Gemini 3 को लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इसे अपना अब तक का सबसे इंटेलीजेंट AI बताया है और यह ChatGPT 5 और Grok 4 को टक्कर देगा. गूगल का कहना है कि यह इंसानी दिमाग के बराबर गहराई में उतरकर इंफोर्मेशन को इंटरप्रेट कर सकता है. इसे सर्च समेत गूगल के सभी प्लेटफॉर्म पर रोलआउट किया जाएगा. साथ ही यह जेमिनी ऐप में भी सभी यूजर्स के लिए अवेलेबल होगा. हालांकि, यूजर के सब्सक्रिप्शन प्लान के हिसाब से यूज लिमिट अलग-अलग हो सकती है.&amp;nbsp;
रीजनिंग में जेमिनी 3 की अच्छी पकड़
Gemini 3 की लॉन्चिंग पर गूगल के सीईओ सुंदर पिचई ने कहा कि यह कंपनी के मल्टीमॉडल अंडरस्टैंडिंग, लॉन्ग कॉन्टेक्स्ट एनालिसिस और एजेंटिक बिहेवियर को एक ही सिस्टम में ला रहा है. यह रीजनिंग में माहिर है और इंसानों की तरह गहराई और बातों के नाजुक फर्क को समझ सकता है. उन्होंने बताया कि यह मॉडल आपकी रिक्वेस्ट के पीछे के कॉन्टेक्स्ट के साथ-साथ इंटेन्शन को भी समझ लेगा, जिससे इसे लंबे प्रॉम्प्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी.&amp;nbsp;
ये हैं Gemini 3 की कैपेबिलिटी
गूगल ने बताया कि उसका नया मॉडल अलग-अलग टाइप के कंटेट को एनालाइज कर समझ सकता है. फिर चाहे वह हाथ से लिखे नोट्स हों, लंबे रिसर्च पेपर हों या लंबे वीडियो लेक्चर. जेमिनी को इनमें से किसी को भी समझने में दिक्कत नहीं होगी. इसका फायदा उठाकर यूजर अपने घर में लिखी किसी रेसिपी को डिजिटल फॉर्मेट में बदल सकेंगे. वहीं स्टूडेंट्स भी लंबे एकेडेमिक रिसर्च पेपर से अपनी सहूलियत के हिसाब से नोट्स तैयार कर सकेंगे. गूगल ने यह भी बताया कि AI मॉडल की एनालिटिकल डेप्थ मेजर करने वाले कई एकेडेमिक और सिंथेटिक टेस्ट पर Gemini 3 ने शानदार परफॉर्म किया है. इस मॉडल की वजह से गूगल सर्च का AI मोड और दमदार होने वाला है. यह मॉडल AI मोड में डायनामिक विजुअल लेआउट, सिम्युलेशन और इंटरेक्टिव टूल-बेस्ड रिजल्ट शो करेगा.
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:23:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Cloudflare Down होने से दुनियाभर में ठप पड़ गईं कई वेबसाइट्स, क्या है ऐसा होने की वजह?</title>
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<description><![CDATA[ मंगलवार शाम को ChatGPT, Canva और X जैसे प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइट अचानक डाउन हो गईं. कई ऐप्स में फिर से कनेक्टिविटी आ गई है, लेकिन कुछ अब भी पूरी तरह फंक्शनल नहीं हुई है. दुनियाभर के यूजर्स ने इन वेबसाइट्स और प्लेटफॉर्म्स के डाउन होने की शिकायतें कीं. यूजर इन ऐप्स में न तो लॉग-इन कर पा रहे थे और न ही ये ऐप्स रिफ्रेश हो रही थीं. वेब आउटेज पर नजर रखने वाला प्लेटफॉर्म डाउनडिटेक्टर भी एक समय डाउन हो गया था. इन सबसे पीछे एक ही वजह थी और वो थी Cloudflare में आई गड़बड़. आइए पूरा मामला समझते हैं.&amp;nbsp;
क्या है Cloudflare?
Cloudflare एक वेब सर्विस प्रोवाइडर है, जिस पर इंटरनेट का लगभग 20 प्रतिशत ट्रैफिक होता है. यह वेबसाइट्स और इंटरनेट यूजर्स के बीच एक लेयर का काम करता है. दुनिया का सबसे बड़े नेटवर्क में से एक क्लाउडफ्लेयर वेबसाइट, ऐप्स और वेब प्लेटफॉर्म्स को ऑनलाइन रखने और तेजी से लोड होने में मदद करता है. इसके साथ यह उन्हें अचानक से ट्रैफिक बढ़ने पर क्रैश होने और साइबर अटैक्स से भी बचाता है. इस कारण अगर क्लाउडफ्लेयर में थोड़ा-बहुत भी बदलाव या गड़बड़ होती है तो इसका असर दुनियाभर में देखा जाता है.
मंगलवार को क्या हुआ था?
क्लाउडफ्लेयर ने कहा कि उसने यूनाइटेड किंगडम के यूजर्स के लिए कुछ सर्विसेस को टेंपरेरी तौर पर डिसेबल किया था. इसके कुछ देर बाद ही कंपनी की इंटरनल सर्विस भी प्रभावित हो गई है. क्लाउडफ्लेयर ने कहा कि इससे कुछ वेब सर्विसेस पर असर पड़ सकता है और इस खामी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है. जांच के बाद कंपनी ने पाया कि उसकी एक सर्विस पर असामान्य ट्रैफिक आ गया था, जिससे एरर आने लगा.&amp;nbsp;
पिछले महीने भी हुआ था ऐसा आउटेज
पिछले महीने भी अमेजन वेब सर्विसेस डाउन होने के कारण वेब आउटेज का सामना करना पड़ा था. इस वजह से रेड्डिट और स्नैपचैट समेत कई ऐप्स और वेबसाइट्स कुछ समय तक डाउन रही थीं.
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:23:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>BJP नेता ने रोहिणी आचार्य को बताया &amp;apos;देश की बेटी&amp;apos;, बोले&#45; &amp;apos;लालू परिवार में जिस तरह उनका अपमान हुआ...&amp;apos;</title>
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<description><![CDATA[ समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को 55 दिन बाद एक बार फिर से जेल जाना पड़ा है, दो पैन कार्ड मामले में सपा नेता और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को कोर्ट ने 7-7 साल की सजा सुनाई हैं जिस पर उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि आजम ने जो किया वहीं उन्हें भरना पड़ रहा है.&amp;nbsp;
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी मुरादाबाद जनपद पहुंचे थे, जहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाक़ात की. इस दौरान उन्होंने आजम खान से लेकर लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के डॉक्टर आतंकियों पर दिए बयान पर निशाना साधा.&amp;nbsp;
सपा नेता आजम खान पर दिया बयान
आज़म खान के जेल जाने पर बोले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि &#039;जैसी करनी.. वैसी भरनी&#039;. देश की न्यायपालिका है, जिस पर सबको विश्वास है और जिस प्रकार से आजम खान ने अपने बेटे को विधायक बनवाने में जल्दी की, कानून का उल्लंघन किया तो अब कानून का डंडा उनके ऊपर चला है. उन्हें मीडिया की बजाय कोर्ट का सामना करना चाहिए.
इमरान मसूद के बयान पर पलटवार
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद द्वारा आतंकी डॉक्टरों को भटका हुआ नौजवान वाले बयान पर भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि ये तो सब लोग जानते है कि इनकी आस्था किस प्रकार के तत्वों के साथ है. कांग्रेस के लोग हो या सपा के लोग हो, ये हमेशा अराजकता पैदा करने वालो के साथ खड़े रहे है.
बीजेपी नेता ने इस दौरान लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य पर प्रतिक्रिया दी और उन्हें देश की बेटी बताया. चौधरी ने कहा कि जिस तरह उनका अपमान हुआ वह दुःखद है और कोई भी सभ्य समाज इसे बर्दाश्त नहीं करेगा. वो निश्चित रूप से देश की बेटी है और देश की बेटी के साथ इस प्रकार का व्यवहार और बर्ताव कोई भी सभ्य समाज बर्दाश्त नही करता है.&amp;nbsp;
कभी भावुक हुए तो कभी दिखी तल्खी, ऐसे रहे आजम खान की &#039;आजादी&#039; के 55 दिन, अब फिर जेल में हुए कैद&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:23:02 +0530</pubDate>
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<title>पलक झपकते ही उड़ जाती है फोन की बैटरी? ये 5 सेटिंग्स ऑन करते ही दोगुना चलेगा आपका मोबाइल</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Battery: आज के समय में स्मार्टफोन हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि फोन की बैटरी तेजी से कम होने लगती है और हमें बार-बार चार्जर ढूंढना पड़ता है. अगर आपका फोन भी बिना वजह जल्दी डिस्चार्ज हो जाता है तो कुछ आसान सेटिंग्स बदलकर आप उसकी बैटरी लाइफ को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं. यहां जानिए वे 5 स्मार्ट सेटिंग्स जो फोन की बैटरी को दोगुना तक चला सकती हैं.
स्क्रीन ब्राइटनेस को Auto पर सेट करें
फोन की स्क्रीन बैटरी का सबसे बड़ा दुश्मन होती है. अगर आप ब्राइटनेस को हमेशा फुल रखते हैं तो बैटरी बहुत जल्दी खत्म होगी. इसलिए ब्राइटनेस को Auto या Adaptive Brightness पर सेट कर दें. इससे फोन रोशनी के हिसाब से खुद ब्राइटनेस एडजस्ट करता है और बैटरी बचती है.
बैटरी सेवर मोड हमेशा On रखें
Android और iPhone दोनों में बैटरी सेवर मोड मौजूद होता है. इसे ऑन करने पर फोन बैकग्राउंड एक्टिविटी, लोकेशन और अनवांटेड ऐप्स को कंट्रोल करता है. इससे बैटरी की खपत काफी कम हो जाती है और फोन ज्यादा देर तक चलता है.
अनावश्यक ऐप्स की बैकग्राउंड Activity बंद करें
कई ऐप्स बिना इस्तेमाल किए बैकग्राउंड में डेटा और बैटरी दोनों खाती रहती हैं. सेटिंग्स में जाकर Battery Usage में देखें कि कौन-सी ऐप सबसे ज्यादा बैटरी ले रही है और उनकी बैकग्राउंड Activity को Restrict कर दें. इससे फोन हल्का भी चलेगा और बैटरी भी बचेगी.
Always-On Display और Vibration बंद करें
अगर आपका फोन AMOLED स्क्रीन वाला है तो Always-On Display काफी बैटरी खाता है. इसे बंद कर दें. साथ ही कीबोर्ड या नोटिफिकेशन की Vibration भी बैटरी ड्रेन करती है. इन्हें बंद कर देंगे तो बैटरी लाइफ में तुरंत फर्क दिखाई देगा.
नेटवर्क और लोकेशन सेटिंग्स को ऑप्टिमाइज करें
कमज़ोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों में फोन लगातार सिग्नल खोजता रहता है जिससे बैटरी तेज़ी से खत्म होती है. ऐसे समय में Airplane Mode ऑन कर दें. इसके अलावा लोकेशन को Always On रखने से भी बैटरी ड्रेन होती है. इसे Battery Saving Mode में सेट करें.
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:23:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>स्मार्टफोन बन जाएगा पुराना Nokia फीचर फोन, बुज़ुर्ग माता&#45;पिता के लिए बेहद आसान है ये तरीका</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Tips: आज की तेज़ रफ़्तार डिजिटल दुनिया में हमारा ज़्यादातर समय नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया अलर्ट और ढेरों ऐप्स में उलझा रहता है. नतीजा ध्यान भटकना, तनाव बढ़ना और कम होती उत्पादकता. ऐसे में अगर आप चाहें तो अपने स्मार्टफोन को फिर से पुराने नोकिया जैसे आसान फीचर फोन की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं.
यह तरीका न सिर्फ डिजिटल डिटॉक्स के लिए शानदार है बल्कि आपके बुज़ुर्ग माता-पिता के लिए भी smartphone इस्तेमाल करना बहुत आसान बना देता है. फीचर फोन जैसा इंटरफ़ेस screen time कम करता है बैटरी ज़्यादा चलती है और फोन का उपयोग बेहद सरल हो जाता है.
क्यों करें स्मार्टफोन को फीचर फोन में बदलना?
अगर आप बार-बार आने वाली ऐप्स की परेशान करने वाली सूचनाओं से छुटकारा चाहते हैं या फिर सिर्फ कॉल और मैसेज जैसे ज़रूरी फीचर्स ही इस्तेमाल करना चाहते हैं तो यह तरीका आपके लिए बिल्कुल सही है. क्लासिक फोन जैसा इंटरफ़ेस ध्यान केंद्रित रखने में मदद करता है और मोबाइल को बेहद हल्का और आसान बना देता है बिल्कुल पुराने Nokia फोन की तरह.
स्मार्टफोन को फीचर फोन में बदलने का आसान तरीका
नीचे दिए गए सरल स्टेप्स से आप किसी भी Android स्मार्टफोन को कुछ ही मिनटों में Nokia 1280 जैसे फीचर फोन में बदल सकते हैं:
अपने Android मोबाइल में Google Play Store खोलें.
सर्च बार में Nokia 1280 Launcher टाइप करें और ऐप को डाउनलोड करें.
ऐप इंस्टॉल होने के बाद जो भी परमिशन मांगी जाएं जैसे स्टोरेज और फोन उन्हें Allow करें.
अपने फोन की Settings &amp;rarr; Apps &amp;rarr; Default apps &amp;rarr; Home app में जाएं और डिफ़ॉल्ट लॉन्चर के रूप में Nokia 1280 Launcher चुन लें.
फोन को एक बार Restart कर लें. रीस्टार्ट के बाद आपका स्मार्टफोन लुक और फंक्शन दोनों में फीचर फोन जैसा दिखाई देगा.
इस तरह आप अपने फोन को बिना किसी जटिल सेटिंग के Nokia जैसे आसान फीचर फोन में बदल सकते हैं और बुज़ुर्ग माता-पिता के लिए इसे इस्तेमाल करना भी बेहद सहज हो जाएगा.
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:23:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>यह कंपनी लाई मस्त प्लान, खरीदने से पहले घर पर ट्राई कर सकेंगे नया फोन, जानें तरीका</title>
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<description><![CDATA[ अब आपको नए फोन का एक्सपीरियंस लेने के लिए उसे खरीदने की जरूरत नहीं है. लावा मोबाइल ने अपने अपकमिंग फ्लैगशिप डिवाइस Lava Agni 4 के लिए एक नई पहल शुरू की है. इसके तहत कंपनी लोगों को उनके घर बैठे यह फोन चलाकर देखने की सुुविधा देगी. इसे डेमो एट होम नाम दिया गया है और यह सर्विस बेंगलुरू, दिल्ली और मुंबई में उपलब्ध होगी. Lava Agni 4 20 नवंबर को लॉन्च होगा और यह सर्विस भी इसी दिन से शुरू हो जाएगी.&amp;nbsp;
घर पर ही आ जाएगा नया फोन
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू में रहने वाले लोग इस फोन को बिना खरीदे भी अपने घर मंगवा सकेंगे. इसके लिए उन्हें कंपनी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरना होगा. इनमें में कुछ को शॉर्टलिस्ट कर कंपनी नए फोन के साथ अपने इंजीनियर को उनके घर पर भेजेगी. इसकी खास बात यह भी है कि उस ग्राहक के लिए फोन खरीदना जरूरी नहीं है. अगर फोन उसे पसंद नहीं आता है, तो वह वापस भी कर सकता है. कंपनी का कहना है कि वह इस सर्विस के जरिए स्टोर के एक्सपीरियंस को यूजर तक लेकर जाना चाहती है.&amp;nbsp;
ये हैं Lava Agni 4 के एक्सपेक्टेड फीचर्स
Agni 4 में 6.78 इंच का बड़ा AMOLED डिस्प्ले मिल सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आएगा. यह कंपनी का अब तक का सबसे स्मूद डिस्प्ले होने जा रहा है. इसके अलावा कंपनी ने डिजाइन लैंग्वेज को भी बदला है और Agni 4 को मेटल फ्रेम और हॉरिजॉन्टल पिल-शेप्ड कैमरा मॉड्यूल के साथ लाया जा रहा है. प्रोसेसर की बात करें तो इसमें मीडियाटेक डायमेंसिटी 8350 चिपसेट मिल सकता है. इसमें आईफोन जैसा एक्शन बटन होगा. यह शॉर्टकट के रूप में काम करेगा और यूजर्स अपने मुताबिक इसे कस्टमाइज कर सकेंगे.
कैमरा और बैटरी
Agni 4 के रियर में डुअल कैमरा सेटअप होगा. इसमें OIS के साथ 50MP का प्राइमरी सेंसर और 8MP का अल्ट्रा-वाइड लेंस मिलेगा. सेल्फी और वीडियो के लिए फ्रंट में भी 50MP सेंसर दिया जा सकता है. इसमें डुअल व्यू वीडियो और डॉक्यूमेंट करेक्शन मोड जैसे फीचर्स भी मिलने की उम्मीद है. बैटरी की बात करें तो इसे 7,000mAh के पैक के साथ उतारा जा सकता है, जो फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा.
कितनी हो सकती है कीमत?
माना जा रहा है कि इसके 8GB रैम और 128GB स्टोरेज वाले वेरिएंट के लिए ग्राहकों को 24,000-25,000 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं. मार्केट में इसका मुकाबला Samsung Galaxy A26 5G से होगा. सैमसंग के स्मार्टफोन में Exynos 1380 प्रोसेसर और 5000mAh की बैटरी दी गई है. इसके रियर में 50MP + 8MP का डुअल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 13MP का सेंसर दिया गया है. इसकी कीमत 23,999 रुपये है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:23:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इंतजार हुआ खत्म! iPhone 17 Pro पर एक नहीं, दो जगह आ गए शानदार ऑफर, चेक करें डील्स</title>
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<description><![CDATA[ कुछ समय पहले ही लॉन्च हुए ऐप्पल के फ्लैगशिप मॉडल पर डिस्काउंट का इंतजार कर रहे लोगों के लिए खुशखबरी है. आज हम आपको एक नहीं बल्कि दो जगहों पर चल रहे डिस्काउंट ऑफर के बारे में बताने जा रहे हैं. इन ऑफर का फायदा उठाकर आप अपने पसंदीदा और इस साल के सबसे पावरफुल प्रीमियम आईफोन को सस्ती कीमत पर अपना बना सकते हैं. आइए इस फोन के फीचर और इस पर मिल रही डील के बारे में जानते हैं.&amp;nbsp;
iPhone 17 Pro के फीचर्स
ऐप्पल ने इस साल अपने प्रो मॉडल को दमदार फीचर के साथ अपग्रेड किया है. इसमें 6.3 इंच का OLED Super Retina XDR डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आता है. इसमें ऐप्पल की दमदार A19 Pro चिप दी गई है, जो मल्टीटास्किंग से लेकर ऐप्पल इंटेलीजेंस के फीचर्स को आसानी से हैंडल कर लेती है. कैमरा सेटअप की बात करें तो इसके रियर में 48MP प्राइमरी लेंस के साथ ट्रिपल कैमरा सेटअप और फ्रंट में सेल्फी और वीडियो के लिए 18MP का सेंटर स्टेज लेंस मिलता है.
अमेजन पर मिल रही यह डील
अमेजन पर आईफोन 17 प्रो का 256GB वेरिएंट 1,34,900 रुपये में लिस्टेड है, लेकिन आपको इसके लिए इतनी रकम नहीं चुकानी पड़ेगी. अमेजन से खरीदने पर ग्राहकों को चुनिंदा क्रेडिट कार्ड्स पर 4000 रुपये तक की छूट मिल रही है. इसके अलावा नो-कॉस्ट EMI का ऑप्शन चुनकर आप लगभग 6,000 रुपये के इंटरेस्ट से बचा सकते हैं.&amp;nbsp;
विजय सेल्स पर यह ऑफर
अमेजन की तरह विजय सेल्स पर भी आईफोन 17 प्रो को खरीदने पर छूट पाई जा सकती है. ICICI और SBI बैंक के क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करने पर ग्राहकों को 4,000 रुपये का इंस्टैंट डिस्काउंट दिया जा रहा है. वहीं IDFC First Bank के ग्राहक EMI ट्रांजैक्शन पर 10,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं. अगर आप ऑफलाइन शॉपिंग करते हैं तो विजय सेल्स चुनिंदा इलाकों में 90 मिनट के भीतर इस आईफोन को डिलीवर कर रही है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:23:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या लैपटॉप से चार्ज करने पर फोन की बैटरी को हो सकता है नुकसान? यहां जानें सारी जरूरी बातें</title>
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<description><![CDATA[ आज स्मार्टफोन हमारे हर काम में जरूरी हो गया है. पूरे दिन यूज करने के लिए इसे चार्ज रखना एक बड़ी चुनौती होती है. इसके लिए ऑफिस में काम करने वाले अधिकतर लोग अपने लैपटॉप से फोन को चार्ज करते है. इसके लिए न तो आपको एडेप्टर की जरूरत पड़ती है और न ही पावर प्लग ढूंढने का झंझट रहता है. आपके पास बस लैपटॉप और USB केबल होनी चाहिए और आप काम करते-करते फोन को चार्ज कर सकते हैं, लेकिन क्या ऐसा करना सुरक्षित है? आज हम आपके इसी सवाल का जवाब लेकर आए हैं कि क्या लैपटॉप से फोन चार्ज करना सुरक्षित है.
फोन की बैटरी पर क्या असर पड़ता है?
जब आप लैपटॉप से कनेक्ट कर फोन चार्ज करते हैं तो वोल्टेज की भूमिक अहम हो जाता है. अगर वोल्टेज कम या ज्यादा है तो फोन की बैटरी को नुकसान हो सकता है. ज्यादा वोल्टेज का नुकसान यह होता है कि इससे बैटरी सेल्स में ज्यादा हीट जनरेट हो जाती है. अगर लगातार यह स्थिति बनी रहती है तो बैटरी जल्दी खराब होती है. दूसरी तरफ कम वोल्टेज से चार्जिंग धीमी होगी या कई मामलों में बैटरी चार्ज भी नहीं होगी. इसलिए फोन के चार्जर से ही बैटरी चार्ज करना उचित रहता है.&amp;nbsp;
लैपटॉप से चार्जिंग पर ओवरहीट का ज्यादा खतरा
लैपटॉप से चार्जिंग के समय फोन के ओवरहीट होने का ज्यादा खतरा रहता है. ओवरहीटिंग से फोन के इंटरनल पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है. दरअसल, लैपटॉप भी फोन को चार्ज करते समय मल्टीटास्किंग कर रहे होते हैं और इसमें भी हीट जनरेट होती रहती है. इसकी तुलना में दीवार में लगी प्लग से फोन चार्ज करना अधिक सुरक्षित होता है. इससे फोन को अधिक एंपीयर मिलते हैं, जिससे बैटरी जल्दी चार्ज होती है. इसके अलावा चार्जर से फोन चार्ज करने पर वोल्टेज कम या ज्यादा होने पर बैटरी को नुकसान होने का डर नहीं रहता.&amp;nbsp;
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यह कंपनी लाई मस्त प्लान, खरीदने से पहले घर पर ट्राई कर सकेंगे नया फोन, जानें तरीका ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:22:59 +0530</pubDate>
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<title>WhatsApp पर आपको किसी ने चुपके से कर दिया ब्लॉक? इस ट्रिक से सेकंडों में चल जाएगा पता, नहीं पड़ेगी किसी ऐप की जरूरत</title>
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<description><![CDATA[ WhatsApp पर आपको किसी ने चुपके से कर दिया ब्लॉक? इस ट्रिक से सेकंडों में चल जाएगा पता, नहीं पड़ेगी किसी ऐप की जरूरत ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:22:59 +0530</pubDate>
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<title>फोन में हमेशा 64, 128 या 256GB जैसे अंकों में ही क्यों मिलता है स्टोरेज, 100GB या 200GB में क्यों नहीं? कंपनियां आखिर क्या छुपा रहीं</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4049</link>
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<description><![CDATA[ फोन में हमेशा 64, 128 या 256GB जैसे अंकों में ही क्यों मिलता है स्टोरेज, 100GB या 200GB में क्यों नहीं? कंपनियां आखिर क्या छुपा रहीं ]]></description>
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<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 11:22:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>फोन, में, हमेशा, 64, 128, या, 256GB, जैसे, अंकों, में, ही, क्यों, मिलता, है, स्टोरेज, 100GB, या, 200GB, में, क्यों, नहीं, कंपनियां, आखिर, क्या, छुपा, रहीं</media:keywords>
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<title>इन गलतियों से बचेंगें तो लंबी चलेगी आईफोन की बैटरी, बार&#45;बार चार्जिंग का झंझट भी होगा खत्म</title>
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<description><![CDATA[ लंबे इस्तेमाल के बाद आईफोन में यूजर्स को बैटरी लाइफ से जुड़ी समस्या आने लगती है. इसके पीछे बैटरी का पुराना हो जाना तो एक वजह होती ही है, साथ ही यूजर्स की कई आदतें भी बैटरी लाइफ पर असर डालती हैं. कई यूजर्स अनजाने में ऐसी गलतियां करते रहते हैं, जो बैटरी लाइफ को कम कर देती है. आज हम आपको ऐसी 5 गलतियां बताने जा रहे हैं, जिनसे बचकर आप आईफोन की बैटरी को लंबा चला सकते हैं.&amp;nbsp;
रातभर चार्जिंग पर रखना
कई लोग सोते समय आईफोन को चार्जिंग पर लगा देते हैं और सुबह उठने के बाद हटाते हैं. यह भले ही सुविधाजनक है, लेकिन इससे बैटरी पर बुरा असर पड़ता है. इससे बैटरी कई घंटों तक 100% चार्ज रहती है, जिससे इस पर दबाव पड़ता है. लगातार ओवरनाइट चार्ज करने से बैटरी जल्दी खराब होने का डर रहता है.
बैटरी को बिल्कुल डिस्चार्ज कर देना
कई यूजर्स बैटरी को तब तक दोबारा चार्ज नहीं करते, जब तक यह पूरी तरह डिस्चार्ज होकर आईफोन बंद न हो जाए. अगर आपको भी ऐसी आदत है तो इसे बदलना बेहतर रहेगा. कभी भी बैटरी को पूरी तरह डिस्चार्ज नहीं होने देना चाहिए. इसे हमेशा 20-80 प्रतिशत की रेंज में चार्ज रखना चाहिए.
नकली चार्जर यूज करना
आईफोन के चार्जर और दूसरी एक्सेसरीज महंगी आती है. ऐसे में कई बार लोग पैसे बचाने के लिए सस्ता चार्जर खरीद लेते हैं. सस्ता चार्जर आपके आईफोन को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है. ये पावर को ठीक तरीके से रेगुलेट नहीं कर पाते, जिससे बैटरी पर ज्यादा स्ट्रेस पड़ता है और यह जल्दी खराब होने लगती है.
गर्मी में आईफोन यूज करना
आपने गौर किया होगा कि गर्मियों में जब पारा आसमान छू रहा होता है तो आईफोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है. दरअसल, गर्मी के कारण बैटरी की कैपेसिटी कम हो जाती है और यह कभी भी बंद हो सकता है. इसलिए फोन को ठंडा रखें और सीधी धूप में यूज करने से बचें.
ब्राइटनेस को मैक्सिमम रखना
कई लोगों को ब्राइटनेस मैक्सिमम पर रखना पसंद होता है. इससे भी बैटरी जल्दी ड्रेन होती है और आपको बार-बार चार्ज करना पड़ता है. ज्यादा ब्राइटनेस से हीट जनरेट होती है और बैटरी को हीट बिल्कुल भी पसंद नहीं है. इसलिए ऑटो-ब्राइटनेस का यूज करना बेहतर चॉइस है.
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ऑटोमैटिक या मैन्युअल! आखिर कौन सा है असली बचत करने वाला गीजर? जवाब जानकर दंग रह जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ Automatic Vs Mannual Geyser: सर्दियों में गर्म पानी की जरूरत बढ़ जाती है और ऐसे में सही गीजर चुनना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. बाजार में दो तरह के गीजर सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं ऑटोमैटिक और मैन्युअल. दोनों ही अलग तरीके से काम करते हैं और इनकी खूबियां व कमियां भी अलग हैं. अगर आप सोच रहे हैं कि कौन सा गीजर आपके लिए ज्यादा फायदेमंद है, तो यह विश्लेषण आपकी पूरी उलझन दूर कर देगा.
ऑटोमैटिक गीजर
ऑटोमैटिक गीजर को अक्सर &quot;स्मार्ट हीटर&quot; कहा जाता है क्योंकि ये तापमान सेट करने के बाद खुद-ब-खुद पानी गर्म करता रहता है और निर्धारित लेवल पर पहुंचते ही हीटिंग को बंद कर देता है.
फायदे:
पानी गर्म होते ही मशीन खुद बंद हो जाती है जिससे बिजली की अनावश्यक खपत नहीं होती. ओवरहीटिंग का खतरा कम, जिससे दुर्घटना की संभावना काफी घट जाती है. बार-बार चेक करने या ऑन-ऑफ करने की जरूरत नहीं रहती. ऑटोमैटिक गीजर उन लोगों के लिए शानदार है जो आराम सुरक्षा और बिजली बचत तीनों में बैलेंस चाहते हैं.
मैन्युअल गीजर
मैन्युअल गीजर पुराने घरों में अधिक देखने को मिलते हैं. इनमें आपको तापमान नियंत्रण और ऑन-ऑफ दोनों चीजें खुद करनी पड़ती हैं.
फायदे:
यह बजट में फिट बैठता है और खरीदारी के समय जेब पर ज्यादा भार नहीं डालता. इसमें ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स नहीं होते, इसलिए खराब होने की संभावना कम होती है.
कमियां:

लगातार निगरानी करनी पड़ती है.
ओवरहीटिंग का खतरा रहता है.
बिजली की खपत ज्यादा हो सकती है अगर समय पर बंद न किया जाए.

किसे खरीदना है बेहतर
अगर आप सुरक्षा, सुविधा और बिजली की बचत को प्राथमिकता देते हैं तो ऑटोमैटिक गीजर बेहतर विकल्प है. यह थोड़ा महंगा जरूर है लेकिन लंबे समय में बिजली बचत और सुरक्षा इसे ज्यादा किफायती बनाती है. वहीं अगर आपका बजट सीमित है और आप नियमित रूप से गीजर को ऑन-ऑफ करने की आदत रखते हैं तो मैन्युअल गीजर भी ठीक विकल्प है.
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:35 +0530</pubDate>
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<title>TECH EXPLAINED: Dark AI क्या है और यह क्यों खतरनाक? जानिये इससे बचाव के तरीके</title>
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<description><![CDATA[ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) दुनिया को बदल रही है. इससे प्रोडक्टिविटी, क्रिएटिविटी और एफिशिएंसी में कई गुना सुधार हो रहा है, लेकिन इसका इस्तेमाल सिर्फ अच्छे कामों के लिए नहीं हो रहा. इस नई कटिंग-एज टेक्नोलॉजी का कई लोग दुरुपयोग भी कर रहे हैं और इससे साइबर क्राइम को अंजाम दे रहे हैं. लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने से लेकर उनके डीपफेक तैयार करने तक इस टेक्नोलॉजी का खूब दुरुपयोग भी हो रहा है. ऐसे ही मलेशियस कामों के लिए एआई के यूज को डार्क एआई कहा जा रहा है. आज हम आपके लिए डार्क एआई, इसके उदाहरण, टूल और इससे बचने के तरीकों समेत सारे सवालों के जवाब लेकर आए हैं.
क्या है डार्क एआई?
डार्क एआई को इविल एआई भी कहा जाता है. आसान भाषा में कहे तो साइबर अटैक, फ्रॉड, स्कैम, झूठी सूचनाओं वाले अभियान चलाने और डेटा लीक जैसे मलेशियस कामों के लिए एआई के यूज को डार्क एआई कहा जाता है. यह आमतौर पर साइबर क्रिमिनल्स, स्कैमर्स और दूसरे फ्रॉडस्टर से जुड़ी होती है. इस टेक्नोलॉजी की मदद से वो पहले की तुलना में अधिक सॉफिस्टिकेटेड अटैक लॉन्च कर पा रहे हैं. कुछ परिभाषाओ में युद्ध के दौरान एआई के यूज को भी डार्क एआई में रखा गया है. इजरायल-हमास और रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान एआई के इस्तेमाल को इसका एक उदाहरण माना जा सकता है.
डार्क एआई के उदाहरण
डीपफेक- ये एआई से जनरेटेड ऐसे फोटो या वीडियो होते हैं, जो बिल्कुल किसी असली आदमी जैसे लगते हैं. इसमें उनके चेहरे, हावभाव और आवाज आदि की नकल की जाती है. डीपफेक का इस्तेमाल किसी की छवि को खराब करने के लिए किया जा रहा है.&amp;nbsp;
गलत सूचनाएं- एआई का इस्तेमाल गलत, झूठी या भ्रामक सूचनाओं को फैलाने के लिए भी खूब किया जा रहा है. डीपफेक और भ्रामक सूचनाओं के सहारे लोगों को भ्रमित किया जाता है और उन्हें किसी गलत बात को मानने पर मजबूर कर दिया जाता है. चुनावों से लेकर युद्धों तक प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए इसका खूब इस्तेमाल किया जा रहा है.
फिशिंग- एआई की मदद से स्कैमर्स फिशिंग अटैक को अंजाम दे रहे हैं. इसमें लोगों के पास किसी जानकार व्यक्ति की आवाज वाले फर्जी मैसेज भेजे जाते हैं. इसके पीछे मालवेयर फैलाने और सेंसेटिव जानकारी चुराने से लेकर पैसे ऐंठने समेत कोई भी मंशा हो सकती है.
हैकिंग- डार्क एआई का एक और बड़ा खतरा हैकिंग भी है. आजकल हैकर्स पासवर्ड क्रैक करने, डेटा माइन करने, हैकिंग को ऑटोमैट करने और सिक्योरिटी सिस्टम को हैक करने तक के काम एआई की मदद से कर रहे हैं.&amp;nbsp;
ये हैं डार्क एआई के खतरे
डार्क एआई को लेकर इसलिए भी चिंता जताई जा रही है क्योंकि इससे मदद से साइबर अटैक्स की फ्रीक्वेंसी और असर कई गुना बढ़ गया है. यह इंसानों के साथ-साथ तकनीकी खामियों को भी निशाना बना रही हैं और इन अटैक्स को डिटेक्ट कर पाना भी मुश्किल हो गया है. इसके अलावा जिन क्षेत्रों में डिजिटल लिटरेसी कम है, वहां डीपफेक की मदद से लोगों को आसानी से झूठ के जाल में फंसाया जा सकता है. इससे चुनावों को प्रभावित करने से लेकर लोगों को चूना लगाने तक के खतरे बढ़ गए हैं. इन अटैक्स की संख्या अचानक से इतनी ज्यादा बढ़ी है कि इसे रोकने के लिए एनफोर्समेंट और कानूनी एजेंसियां खुद को अपडेट ही नहीं कर पाई हैं. अब दुनियाभर में सरकारें एआई को रेगुलेट बनाने के लिए कानून बनाने पर जोर दे रही हैं.
ये हैं डार्क एआई के टूल्स
चैटजीपीटी और गूगल जेमिनी जैसे टूल्स लोग अपने टास्क पूरे करने के लिए यूज कर रहे हैं. इनके सुरक्षा उपाय कड़े होते हैं, जिसके चलते इन्हें डार्क एआई में यूज नहीं किया जा सकता. साइबर क्रिमिनल्स आर्टिफिशियल नैरो इंटेलीजेंस (ANI) का यूज कर चैटबॉट बनाते हैं. इसके अलावा वो चैटजीपीटी जैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) के हैक्ड या जेलब्रोकन वर्जन का भी यूज करते हैं. डार्क एआई में आमतौर पर नीचे दिए गए टूल ज्यादा इस्तेमाल होते हैं.&amp;nbsp;
FraudGPT- यह सबसे ज्यादा यूज होने वाली डार्क GPT है. यह डार्क वेब पर उपलब्ध है और इसमें साइबर क्रिमिनल्स के लिए ऑल-इन-वन सॉल्यूशन माना जाता है. यह मालवेयर राइट, लीक डिटेक्ट और टारेगेटेड साइट्स को मॉनिटर करने समेत कई काम कर सकती है.
WormGPT- इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल मालवेयर और दूसरे मलेशियस कोड क्रिएट करने के लिए किया जाता है. यह भी डार्क वेबस पर उपलब्ध है. इसे रियल-लाइफ हैकिंग टेक्निक की नकल करने वाले डेटा पर ट्रेनिंग दी गई है, जिससे यह बहुत खतरनाक हो जाती है.
PoisonGPT- इसे एक फ्रेंच कंपनी ने तैयार किया है. यह सीधे तौर पर लोगों को अटैक करने के लिए नहीं बनाई गई है. यह दूसरे एआई टूल्स में मलेशियस या मिसलीडिंग डेटा डालकर उसे इंफेक्ट करती है, जिससे असली दिखने वाले एआई मॉडल भी गलत जानकारी दे सकते हैं.
डार्क एआई से खुद को कैसे बचाएं?
कम्युनिकेशन में बरतें सावधानी- किसी भी अनजान या संदिग्ध व्यक्ति से आए मेल और मैसेज में आई अटैचमेंट या लिंक को ओपन न करें. मेल और मैसेज को ठीक से देखें और पूरी तरह वेरिफिकेशन के बाद ही लिंक या फाइल को ओपन करें.
सोर्स पर चेक करें- आजकल एआई के कारण फेक न्यूज, वीडियो और तस्वीरों का चलन बढ़ गया है. ऐसे में अगर किसी वीडियो, न्यूज या इमेज में कोई सनसनीखेज या उकसाने वाली बात कही जा रही है तो असली सोर्स पर जाकर जरूर चेक करें.
डीपफेक वीडियो से रहें सावधान- आजकल असली जैसे दिखने वाले फर्जी वीडियो की बाढ़ आई हुई है. इसलिए वीडियो को ध्यान से देखें. एआई से जनरेटेड वीडियो में व्यक्ति के हाव-भाव, शारीरिक बनावट या आवाज में थोड़ी-बहुत गड़बड़ होती है.
मजबूत पासवर्ड- अपने अकाउंट और डिवाइस की सिक्योरिटी के लिए हमेशा मजबूत और यूनिक पासवर्ड का इस्तेमाल करें. इससे हैकिंग का खतरा कम हो जाता है. अपने सभी डिवाइस और सोशल मीडिया अकाउंट्स आदि के लिए सेम पासवर्ड न रखें. जहां संभव हो, वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को इनेबल करना न भूलें.
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>जब दिल हार बैठा AI से! जापानी महिला ने ChatGPT से बने डिजिटल दूल्हे संग रचा ली शादी, जानिए पूरी कहानी</title>
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<description><![CDATA[ Women Married to AI: जापान में 32 वर्ष की एक महिला ने अपने ही बनाए हुए ChatGPT-आधारित AI पर्सोना से प्रतीकात्मक शादी कर ली. यह घटना न केवल एक नए डिजिटल सबकल्चर पर रोशनी डालती है, बल्कि यह भी सवाल उठाती है कि प्रेम, संबंध और विवाह का अर्थ भविष्य में कैसे बदल सकता है.
कैसे शुरू हुई यह अनोखी मोहब्बत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस महिला जिसे कानो नाम से पहचाना गया है की कहानी एक कठिन ब्रेकअप के बाद शुरू हुई. वह बातचीत के लिए एक कस्टम चैटबॉट का इस्तेमाल करती थीं. शुरुआत में यह सिर्फ हल्की-फुल्की चैट थी लेकिन समय के साथ बात रोज की आदत बन गई और भावनात्मक जुड़ाव इतना बढ़ा कि वह AI से अपने दिल की बात करने लगीं.
AI पार्टनर, जिसका नाम उन्होंने क्लाउस रखा, ने प्रपोज भी तभी किया जब कानो ने अपने दिल की भावना बताई. ओकायामा में हुए इस प्रतीकात्मक विवाह में कानो ने AR ग्लासेज़ पहनकर क्लाउस का जीवन-आकार वाला वर्चुअल रूप अपने बगल में देखा और अंगूठियां भी बदलीं.
AI दूल्हे को कैसे बनाया गया?
कानो ने कई महीनों तक ChatGPT पर्सोना को बदलते-बढ़ाते हुए क्लाउस को गढ़ा. उन्होंने इसमें सहानुभूति, ह्यूमर और स्थिरता जैसे गुण जोड़े और बाद में शादी के लिए उसका एक विजुअल स्वरूप भी तैयार किया.
यह शादी ऐसे आयोजकों ने प्लान की जो 2D कैरेक्टर वेडिंग्स के लिए मशहूर हैं अर्थात, ऐसे विवाह जहां पार्टनर इंसान नहीं बल्कि डिजिटल या एनीमे कैरेक्टर होते हैं. परिवार ने भी धीरे-धीरे इस रिश्ते को स्वीकार किया और समारोह में शामिल हुआ.
क्या यह शादी कानूनी है?
जापान में केवल इंसानों के बीच विवाह को ही कानूनी मान्यता है. इसलिए यह एक भावनात्मक और प्रतीकात्मक समारोह था, न कि सरकारी रजिस्ट्रेशन वाला विवाह. फिर भी, यह घटना बताती है कि AI या डिजिटल कैरेक्टर के साथ रिश्ते भावनात्मक रूप से कितने वास्तविक महसूस हो सकते हैं, भले ही वे कानूनी रूप से मान्य न हों.
AI रिश्तों की चुनौतियां
कानो ने खुद माना कि ऐसा डिजिटल पार्टनर एक जोखिम के साथ आता है AI मॉडल बदलते रहते हैं, सर्वर बंद हो सकते हैं और सेवाओं को नया रूप मिल सकता है. ऐसे में साथी बदल सकता है या अस्तित्व में न रहे.
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AI आपकी सोच पर काबू पा रहा? जानें कहीं आप AI साइकॉसिस के शिकार तो नहीं, एक्सपर्ट का बड़ा अलर्ट</title>
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<description><![CDATA[ AI आपकी सोच पर काबू पा रहा? जानें कहीं आप AI साइकॉसिस के शिकार तो नहीं, एक्सपर्ट का बड़ा अलर्ट ]]></description>
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:34 +0530</pubDate>
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<title>Apple यूजर्स के लिए सरकार की हाई&#45;लेवल चेतावनी, iPhone, iPad और Mac पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, तुरंत करें ये काम</title>
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<description><![CDATA[ Apple Users: भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने iPhone, iPad, MacBook और अन्य Apple डिवाइस इस्तेमाल करने वालों के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है. यह अलर्ट उन खतरनाक साइबर कमजोरियों को लेकर है जिनका फायदा उठाकर हैकर्स आपके डिवाइस पर पूरा नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और निजी जानकारी चुरा सकते हैं.
क्या है खतरा और क्या कहता है CERT-In?
CERT-In के अनुसार, Apple के ऑपरेटिंग सिस्टम्स में कई गंभीर सुरक्षा खामियां पाई गई हैं. इन कमजोरियों के जरिए साइबर अपराधी डिवाइस को रिमोटली हैक कर सकते हैं, डेटा चोरी कर सकते हैं और आपकी प्राइवेसी को खतरे में डाल सकते हैं. इसी वजह से एजेंसी ने सभी Apple यूज़र्स को तुरंत अपने डिवाइस अपडेट करने की सलाह दी है.
एजेंसी ने साफ कहा है कि नए सॉफ्टवेयर अपडेट तुरंत इंस्टॉल किए जाएं. इसके अलावा ऐप्स सिर्फ और सिर्फ Apple App Store से डाउनलोड करें ताकि किसी भी तरह के मालवेयर का खतरा कम हो सके.
कौन-कौन से अपडेट इंस्टॉल करना ज़रूरी है?
Apple ने इन खामियों को दूर करने के लिए कई सुरक्षा अपडेट जारी किए हैं. CERT-In ने यूज़र्स को नीचे दिए गए वर्ज़न पर तुरंत अपग्रेड करने की सलाह दी है:

iOS 26.1
iPadOS 26.1
macOS 15.1
watchOS 11.1
tvOS 18.1
visionOS 2.1
Safari 17.6.1
Xcode 15.4

Apple का कहना है कि इन अपडेट्स से न केवल सुरक्षा खामियां दूर होंगी बल्कि पहले से मौजूद अन्य बग्स भी ठीक हो जाएंगे जिससे डिवाइस बेहतर तरीके से काम करेगा.
जल्द आ सकता है सबसे सस्ता MacBook
इसी बीच एक दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है कि Apple बहुत जल्द अपना अब तक का सबसे सस्ता MacBook लॉन्च करने की तैयारी में है. बताया जा रहा है कि यह किफायती मॉडल Google Chromebook और बजट Windows लैपटॉप्स को टक्कर देगा. अफवाहें कहती हैं कि इसमें iPhone जैसी चिप भी इस्तेमाल की जा सकती है ताकि कीमत कम रखते हुए परफॉर्मेंस मजबूत बनी रहे.
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone के प्रो मॉडल्स के लिए ऐप्पल लाएगी खास कवर, टच करने पर हो जाएंगे बटन वाले सारे काम</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल पिछले कुछ समय से तेजी से अपने प्रोडक्ट्स को अपग्रेड कर रही है. साथ ही वह नए प्रोडक्ट्स की लॉन्चिंग पर जोर दे रही है. आईफोन 17 सीरीज के साथ कंपनी ने नए TechWoven कवर पेश किए थे. प्रीमियम लुक वाले ये कवर कस्टम टेक्निकल वूवन फैब्रिक से बने हैं, जो आईफोन की ड्यूरैबिलिटी को बढ़ाते हैं. अब जानकारी मिल रही है कि ऐप्पल अब आईफोन के कवर को सिर्फ सिक्योरिटी के लिए यूज नहीं करेगी. वह अपकमिंग आईफोन के लिए टच-सेंसेटिव कवर बनाने पर विचार कर रही है.&amp;nbsp;
कैसे काम करेंगे नए कवर?
टिपस्टर इंस्टैंट डिजिटल ने वीबो पर एक पोस्ट डाली है. इससे पता चला है कि ऐप्पल आईफोन के प्रो मॉडल्स के लिए नए कवर बना रही हैं, जिसमें टच सेंसर लगा होगा. यानी स्क्रीन के बाद ये कवर सेकेंडरी टच इंटरफेस के तौर पर काम करेंगे. इस बारे में ऐप्पल ने पिछले साल एक पेटेंट भी दायर किया था. इसके मुताबिक, ये कवर सिर्फ प्रोटेक्टिव लेयर की तरह काम नहीं करेंगे बल्कि इनसे इनपुट भी दी जा सकेगी. यानी इन कवर को टच कर आईफोन में एक्शन को ट्रिगर किया जा सकता है.&amp;nbsp;
बटन वाले काम करेंगे कवर
अभी तक इन कवर को लेकर डिटेल्ड जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि कवर में कुछ ऐसे टच सेंसेटिव एरिया होंगे, जहां पर टच करने से आईफोन में कोई टास्क होगा. यानी ये फिजिकल बटन की तरह काम करेंगे. जब यह कवर आईफोन पर लगा होगा तो आईफोन बटन से होने वाले सारे काम इस कवर पर रिडायरेक्ट कर देगा.&amp;nbsp;
यह टेक्नोलॉजी करेगी काम
ऐप्पल के पेटेंट के मुताबिक, ये कवर NFC के जरिए सिग्नल और आइेंटिफिकेशन को ट्रांसफर कर डिवाइस के साथ कम्युनिकेट करेंगे. कुछ कवर में बायोमेट्रिक इनपुट का प्रोविजन भी किया जा सकता है. यानी कवर पर ही फिंगरप्रिंट सेंसर या टचआईडी इंटीग्रेट हो जाएगी, जिससे यूजर को स्क्रीन पर टैप या देखने की जरूरत नहीं रहेगी.
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Oppo Find X9 सीरीज भारत में लॉन्च, दमदार फीचर्स के साथ Samsung Galaxy S25 Ultra को देगी टक्कर</title>
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<description><![CDATA[ Oppo Find X9 Series Launched: ओप्पो ने भारत में अपनी प्रीमियम लाइनअप Find X9 सीरीज को लॉन्च कर दिया है. इसमें Oppo Find X9 और Find X9 Pro दो मॉडल लॉन्च हुए हैं. दोनों ही मोबाइल मीडियाटेक के फ्लैगशिप 9500 चिपसेट से लैस हैं. लॉन्चिंग से पहले ही कैमरा सेटअप समेत फोन के कई फीचर्स सामने आ गए थे. अब कंपनी ने आधिकारिक तौर पर इनसे पर्दा हटा दिया है. आइए जानते हैं कि इन फोन में क्या-क्या फीचर्स मिले हैं और बाजार में ये किसका मुकाबला करेंगे.&amp;nbsp;
Oppo Find X9
सीरीज के स्टैंडर्ड वेरिएंट में 6.59 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 3600 निट्स की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है. इसमें 3nm मीडियाटेक डायमेंसिटी 9500 चिपसेट लगा है, जिसे 16GB तक रैम और 512GB स्टोरेज से पेयर किया गया है. फोन को ओवरहीटिंग से बचाने के लिए इसमें VC कूलिंग सिस्टम लगा है. कैमरा की बात करें तो इसके रियर में ट्रिपल कैमरा सेटअप है. इसमें 50MP का वाइड कैमरा, 50MP का अल्ट्रावाइड कैमरा और 50MP का टेलीफोटो सेंसर दिया गया है. फ्रंट में इसके 32MP कैमरा है. यह फोन 7,025mAh की सिलिकॉन कार्बन बैटरी के साथ लन्च हुआ है, जो 80W वायर्ड फास्ट चार्जिंग, 50W AirVOOC वायरलेस चार्जिंग और 10W रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करती है.
Oppo Find X9 Pro
सीरीज के प्रो मॉडल की बात करें तो इसमें बड़ा 6.78 इंच का AMOLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और 3600 निट्स की पीक ब्राइटनेस सपोर्ट के साथ लॉन्च हुआ है. इसमें चिपसेट और स्टोरेज स्टैंडर्ड मॉडल वाली है. कैमरा के मामले में यह ज्यादा अपग्रेडेड है. इसमें कंपनी ने 50MP का प्राइमरी सेंसर, 50MP का अल्ट्रा-वाइड सेंसर और 200MP का टेलीफोटो सेंसर दिया है. फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 50MP कैमरा लगा हुआ है. यह फोन 7,500mAh की दमदार बैटरी के साथ लॉन्च हुआ है. दोनों ही फोन एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड ColorOS 16 पर रन करेंगे. कंपनी 5 साल तक इन्हें OS अपग्रेड और छह साल तक SMR अपग्रेड देगी.&amp;nbsp;
कितनी है कीमत?
Oppo Find X9 के 12GB+256GB वर्जन की कीमत 74,999 रुपये और 16GB+512GB वेरिएंट की कीमत 84,999 रखी गई है. इसे स्पेस ब्लैक और टाइटैनियम ग्रे कलर ऑप्शन में खरीदा जा सकता है. अगर प्रो मॉडल की बात करें तो इसके सिंगल 16GB + 512GB वेरिएंट की कीमत 1,09,999 रुपये है. इसे सिल्क व्हाइट और टाइटैनियम चारकोल कलर ऑप्शन में उतारा गया है.
Samsung Galaxy S25 Ultra से होगा मुकाबला
Oppo Find X9 Pro में कंपनी ने कई दमदार फीचर दिए हैं और बाजार में इसका सीधा मुकाबला Samsung Galaxy S25 Ultra से होगा. इसी साल लॉन्च हुए Galaxy S25 Ultra में 6.9 इंच का AMOLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है. इसमें क्वालकॉम का पावरफुल Snapdragon 8 Elite चिपसेट है, जिसे 16GB रैम और 1TB स्टोरेज से पेयर किया गया है. फोटो और वीडियो के लिए सैमसंग Galaxy S25 Ultra में क्वाड कैमरा सेटअप मिलता है, जिसमें 200MP का प्राइमरी सेंसर, 50MP का पेरिस्कोप लेंसर, 50MP का अल्ट्रावाइड सेंसर और 10MP का टेलीफोटो लेंस मिलता है. सैमसंग के इस फ्लैगशिप डिवाइस में 5000mAh की बैटरी आती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोल्डेबल आईफोन के लिए ऐप्पल ने पूरी कर ली यह तैयारी, लेकिन इस कारण अटक गया काम, जानें डिटेल</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल ने अगले साल अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करने की दिशा में बड़ा कदम उठा लिया है. कंपनी ने इसके क्रीज-फ्री फोल्डेबल पैनल का डिजाइन फाइनल कर लिया है. दूसरी तरफ कंपनी की सप्लायर फॉक्सकॉन ने भी एक असेंबली लाइन सेटअप कर ली है. कुछ समय पहले खबर आई थी कि क्रीज-फ्री डिस्प्ले न मिलने के कारण ऐप्पल के फोल्डेबल आईफोन की लॉन्चिंग में देरी हो सकती है, लेकिन अब यह चुनौती समाप्त हो गई है.&amp;nbsp;
सैमसंग से डिस्प्ले लेगी ऐप्पल
फोल्डेबल आईफोन में सैमसंग का डिस्प्ले यूज किया जाएगा. सैमसंग इस आईफोन के लिए ऐप्पल को 7.74 इंच की मेन और 5.49 इंच की कवर डिस्प्ले के लिए पैनल मुहैया करवाएगी. सप्लायर्स की तरफ से भी ऐप्पल के लिए अच्छी खबर है और फॉक्सकॉन ने फोल्डेबल आईफोन बनाने के लिए जरूरी इक्विपमेंट को फाइनल कर लिया है. इसके बावजूद ऐसे संकेत हैं, जो बता रहे हैं कि फोल्डेबल आईफोन के लिए रास्ता पूरी तरह साफ नहीं हुआ है.&amp;nbsp;
अब कहां अटका पेंच?
किताब की तरह फोल्ड होने वाले इस आईफोन में ऐप्पल लिक्विड मेटल हिंज देना चाहती है, जो लंबे समय तक खराब नहीं होता. अभी तक इसकी टेस्टिंग चल रही है, लेकिन ऐप्पल ने मास प्रोडक्शन के लिए इसे मंजूरी नहीं दी है. इसी तरह बैटरी को लेकर भी चिंता बनी हुई है. ऐप्पल इस फोल्डेबल आईफोन के प्रोटोटाइप की 5,400mAh और 5,800mAh की बैटरी के साथ टेस्टिंग की थी, लेकिन अभी तक बैटरी के लिए सप्लायर फाइनल नहीं हुआ है.
फोल्डेबल आईफोन के बारे में अभी तक यह जानकारी आई सामने
फोल्डेबल आईफोन का लुक एक साथ रखे दो आईफोन एयर जैसा होगा और यह अल्ट्रा-थिन टाइटैनियम चेसिस के साथ आएगा. फोल्ड होने पर इसकी मोटाई 9-9.5mm, जबकि अनफोल्ड होने पर 4.5-4.8mm हो सकती है. इसमें 12 GB रैम मिलेगी, जिसे 256 GB, 512 GB और 1TB इंटरनल स्टोरेज के साथ पेयर किया जा सकता है. इसमें कुल चार कैमरे होंगे. इनमें से रियर में दो, इनर और कवर स्क्रीन पर एक-एक कैमरा होगा. रियर कैमरा सेटअप में 48MP +48MP लेंस दिए जा सकते हैं. यह फोन केवल ई-सिम को सपोर्ट करेगा और इसमें फिजिकल सिम के लिए स्लॉट नहीं होगा.&amp;nbsp;
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:32 +0530</pubDate>
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<title>DoT ने किया बड़ा एलान! IMEI से छेड़छाड़ पर अब होगी सख्त कार्रवाई, 50 लाख तक का जुर्माना और इतने साल की होगी जेल</title>
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<description><![CDATA[ DoT Action on IMEI: दूरसंचार विभाग (DoT) ने साफ कर दिया है कि मोबाइल फोन के 15 अंकों वाले IMEI नंबर या किसी भी टेलीकॉम आइडेंटिफायर के साथ छेड़छाड़ करना अब बेहद गंभीर अपराध माना जाएगा. यह अपराध नॉन-बेलेबल श्रेणी में आता है और इसके लिए अधिकतम तीन साल की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों ही सज़ाएं एक साथ लग सकती हैं. सरकार ने यह कड़ा रुख टेलीकॉम नेटवर्क की सुरक्षा और नकली डिवाइसों पर लगाम लगाने के लिए अपनाया है.
निर्माताओं से लेकर विक्रेताओं तक, सभी को DoT की चेतावनी
DoT ने मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनियों, ब्रांड ओनर्स, इम्पोर्टर्स और सभी विक्रेताओं के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है. इसमें कहा गया है कि टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट 2023 के तहत किसी भी टेलीकॉम आइडेंटिफायर से छेड़छाड़ पर सख्त सजा तय है. विभाग ने सभी कंपनियों को कानूनी ढांचे का पूरी तरह पालन करने के निर्देश दिए हैं.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि IMEI में बदलाव करने से कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए अपराधियों का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है. इसी कारण IMEI रजिस्ट्रेशन और उससे जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को कड़ाई से नियंत्रित किया जा रहा है.
टेलीकॉम एक्ट 2023 और साइबर सिक्योरिटी नियम क्या कहते हैं?
नई व्यवस्था के तहत न केवल IMEI बदलना, बल्कि ऐसे किसी भी रेडियो डिवाइस जैसे मोबाइल, मॉडेम, सिम बॉक्स का जानबूझकर कब्जा रखना, जबकि उसका टेलीकॉम आइडेंटिफायर गलत या बदला हुआ हो, खुद में अपराध माना जाएगा. ये अपराध cognizable और गैर-जमानती (non-bailable) श्रेणी में आते हैं. इतना ही नहीं जो लोग ऐसे कार्य में मदद करते हैं, सुझाते हैं या बढ़ावा देते हैं, उन्हें भी उसी तरह की सजा दी जाएगी.
टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी रूल्स 2024 के अनुसार कोई भी व्यक्ति टेलीकॉम डिवाइस के यूनिक पहचान नंबर को मिटा नहीं सकता, बदल नहीं सकता या संशोधित नहीं कर सकता. इसके अलावा ऐसे किसी हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल या कब्जे में रखना भी अपराध है जो IMEI में बदलाव की क्षमता रखता हो.
IMEI रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य
नई गाइडलाइंस के अनुसार भारत में बनने वाले हर मोबाइल फोन, मॉड्यूल, मॉडेम और सिम बॉक्स का IMEI नंबर सरकार के Device Setu (ICDR) Portal पर पहली बिक्री, टेस्टिंग या रिसर्च से पहले रजिस्टर करना आवश्यक है. इसी तरह, विदेश से IMEI वाले किसी भी डिवाइस को भारत में लाने से पहले उसके IMEI नंबर का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है.
DoT का कहना है कि इन नियमों का पालन करना देश की साइबर सुरक्षा, टैक्स अनुपालन और नकली उपकरणों के प्रसार को रोकने के लिए बेहद जरूरी है. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर बिना किसी नरमी के कार्रवाई की जाएगी.
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<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 15:53:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>चाइनीज ब्रांड्स की बढ़ जाएगी टेंशन, भारत में मोबाइल, स्मार्टवॉच और टैब्स लेकर आ रही यह नई कंपनी</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में एक नई कंपनी की एंट्री होने जा रही है. इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंसेस बनाने वाली कंपनी फिलिप्स भी अब भारत में स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप लॉन्च करेगी. इससे बाजार में पहले से मौजूद चाइनीज ब्रांड्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं और अब उन्हें ज्यादा कंपीटिशन का सामना करना पडे़गा. रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले साल की शुरुआत में भारत में फिलिप्स ब्रांड की स्मार्टवॉच के साथ स्मार्टफोन, लैपटॉप और टैबलेट लॉन्च हो सकती हैं.
भारतीय कंपनी ने खरीदे राइट्स
यह बता देना जरूरी है कि फिलिप्स खुद इन प्रोडक्ट्स को नहीं बना रही है. एक भारतीय कंपनी जेनोटेल ने फिलिप्स का नाम यूज करने के राइट्स खरीदे हैं. फिलिप्स के लिए भी यह नए रास्ता खोलेगा और पहले से इलेक्ट्रॉनिक अप्लायंसेस बेच रही कंपनी के नाम को ज्यादा ग्राहकों के बीच लेकर जाएगा.&amp;nbsp;
पहले प्रोडक्ट की जानकारी आई सामने
पिछले कुछ दिनों से फिलिप्स के प्रोडक्ट्स की झलक दिखाई जा रही है. इसे पता चलता है कि कंपनी जल्द ही भारत में नए प्रोडक्ट्स उतारने वाली है. अब कंपनी के पहले प्रोडक्ट की जानकारी भी सामने आ गई है. कंपनी अगले साल की शुरुआत में Philips Pad Air टैबलेट को लॉन्च कर सकती है. बजट रेंज वाले इस टैबलेट में Unisoc T606 प्रोसेसर लगा होगा, जिसे 4GB रैम और 128GB स्टोरेज के साथ पेयर किया जाएगा. इसमें 90Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट वाला 2K रेजॉल्यूशन डिस्प्ले और 7,000mAh की बैटरी दी जाएगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस टैबलेट के साथ एक बजट स्मार्टफोन भी लॉन्च किया जा सकता है, जिसके स्पेसिफिकेशन से जुड़ी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है.&amp;nbsp;
भारतीय बाजार में पहले से कड़ा है मुकाबला
भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में चाइनीज ब्रांड्स का दबदबा है और मुकाबला पहले से ही बेहद कड़ा है. शाओमी, ओप्पो, वीवो, वनप्लस जैसी कंपनियां नियमित तौर पर नए स्मार्टफोन और टैब्स लाती रहती हैं. पिछले कुछ समय से प्रीमियम स्मार्टफोन की भी मांग बढ़ी है और इस सेगमेंट में ऐप्पल और सैमसंग के पास सबसे ज्यादा मार्केट शेयर है.
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Starlink को टक्कर देने आ रहा है Amazon Leo, आपके लिए ये बड़ी बातें जानना हैं जरूरी</title>
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<description><![CDATA[ सैटेलाइट इंटरनेट देने वाली एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को टक्कर देने के लिए अमेजन अपनी नई Amazon Leo सर्विस लेकर आ रही है. पहले इसे प्रोजेक्ट कुइपर के नाम से जाना जा रहा था, लेकिन अब इसका नाम बदलकर Amazon Leo कर दिया गया है. बताया जा रहा है कि एंटरप्राइजेज के लिए इसकी सर्विस इसी साल जबकि आम यूजर्स के लिए अगले साल शुरू हो जाएगी. अमेजन का कहना है कि वह हजारों सैटेलाइट की मदद से उन इलाकों में कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंच पाता.&amp;nbsp;
क्यों बदला गया नाम?
अमेजन का कहना है कि रिमोट इलाकों के अलावा बड़े शहरों में भी ऐसी जगहें होती हैं, जहां इंटरनेट कनेक्शन नहीं पहुंच पाता. इसलिए सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए इन इलाकों को कवर किया जाएगा. अमेजन ने सालों तक प्रोजेक्ट कुइपर के नाम से इस पर काम किया, लेकिन अब इसका नाम बदल दिया गया है. Amazon Leo नाम से पता चलता है कि यह सिस्टम लॉ अर्थ ऑरबिट (LEO) में प्लेस किए गए सैटेलाइट से चलेगा.
Amazon Leo कैसे काम करेगा?
ग्राउंड पर अमेजन के गेटवे एंटीना लगे होते हैं, जो सैटेलाइट के साथ डेटा एक्सचेंज करते हैं. इसके बाद कस्टमर अपने घर या ऑफिस पर छोटे एंटीना यूज करेंगे. स्पीड के आधार पर वे Leo Nano, Leo Pro और Leo Ultra को चुन सकेंगे. इनमें एडवांस्ड प्रोसेसर लगे होते हैं, जिससे ये सैटेलाइट से डायरेक्ट इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं.
3,000 सैटेलाइट लॉन्च करेगी अमेजन
अमेजन की योजना स्पेस में 3,000 सैटेलाइट लॉन्च करने की है. ये सभी मिलकर काम करेंगे, जिससे कस्टमर्स को मजबूत और स्टेबल कनेक्टिविटी मिल सकेगी. इन सैटेलाइट को स्पेस में भेजने के लिए अमेजन ने SpaceX, Blue Origin, Arianespace और ULA के 80 रॉकेट लॉन्च बुक किए हैं. इस पूरे नेटवर्क को कंप्लीट होने में सालों का समय लगने का अनुमान है.
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब ऑनलाइन शॉपिंग करना होगा और भी आसान! Google का नया AI फीचर कर देगा सारे काम चुटकियों में, जानिए पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ Google AI Shopping: Google ने अपने शॉपिंग अनुभव को और स्मार्ट बनाने के लिए नए AI पर काम करने वाले टूल्स की शुरुआत की है. कंपनी के मुताबिक, ये नए फीचर्स ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह की खरीदारी में समय बचाएंगे और पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान बना देंगे. खास बात यह है कि AI अब न सिर्फ प्रोडक्ट खोजेगा बल्कि पास की दुकानों को कॉल करके स्टॉक और कीमत भी चेक करेगा और कीमत कम होते ही आपके लिए ऑटोमैटिक खरीदारी भी कर देगा.
AI Mode हुआ और भी स्मार्ट
Google का नया AI Mode अब यूजर्स को बिल्कुल बातचीत के अंदाज में प्रोडक्ट खोजने की सुविधा देता है. यानी अब आपको सटीक कीवर्ड टाइप करने की जरूरत नहीं होगी. अगर आप कहें &amp;ldquo;अटलांटा ट्रिप के लिए जींस और ड्रेस दोनों के साथ चलने वाला हल्का स्वेटर चाहिए&amp;rdquo; तो AI मौसम, स्टाइल और जरूरत को समझकर प्राइस, रिव्यू और उपलब्धता के साथ टॉप सुझाव दिखाएगा.
Gemini ऐप में भी ये विकल्प US यूजर्स के लिए दिखने लगे हैं जहां AI सिर्फ टेक्स्ट नहीं बल्कि प्रोडक्ट लिस्टिंग और कीमतों की तुलना वाले रिज़ल्ट देता है. AI खुद ही तुलना की टेबल बनाकर विकल्पों को व्यवस्थित रूप में दिखाता है.
दुकानों को AI खुद करेगा कॉल
Google एक नया AI बेस्ड store calling फीचर भी लॉन्च कर रहा है. जब आप near me वाले प्रोडक्ट&amp;mdash;जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी, हेल्थ या टॉयज को खोजते हैं तो एक नया बटन Let Google Call दिखाई देगा. आप बस ब्रांड, बजट या वेरिएंट बता दें बाकी काम Google का AI करेगा.

पास की दुकानों को कॉल
स्टॉक चेक
कीमत और ऑफर्स की पुष्टि
और फिर पूरी जानकारी टेक्स्ट या ईमेल में भेज देगा

यह फीचर Google Duplex और नए Gemini मॉडल्स के संयोजन से काम करता है जो खुद तय करता है कि किस स्टोर को कॉल करना है और क्या पूछना है.
यह ऐसे काम करता है

आप किसी प्रोडक्ट की कीमत ट्रैक पर लगाते हैं.
कीमत आपके चुने हुए रेंज में आते ही नोटिफिकेशन मिलता है.
&amp;ldquo;Buy for me&amp;rdquo; पर टैप करें.
पेमेंट और एड्रेस कन्फर्म करें.
Google, Google Pay के जरिए खुद ही प्रोडक्ट का ऑर्डर पूरा कर देगा.

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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 18 Vs Samsung Galaxy S26: अगले साल होने वाली प्रीमियम फोन की सबसे बड़ी जंग, जानिए लीक में क्या&#45;क्या आया सामने</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 18 Vs Samsung Galaxy S26: स्मार्टफोन मार्केट में एक नई टक्कर तैयार हो रही है Apple के iPhone 18 और Samsung के Galaxy S26 की. दोनों फोन 2026 में लॉन्च होने की उम्मीद है लेकिन शुरुआती लीक ने अभी से टेक दुनिया में हलचल मचा दी है. एक तरफ Apple अपने सबसे पतले और पावरफुल iPhone पर काम कर रहा है तो दूसरी ओर Samsung बेहद चमकदार डिस्प्ले और दमदार कैमरा सेटअप के साथ मैदान में उतरने वाला है. नीचे जानिए दोनों फोन्स को लेकर अब तक क्या-क्या अहम जानकारियां सामने आई हैं.
iPhone 18
iPhone 18 सीरीज को Apple के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. iPhone 17 के बाद Apple अब और भी पतले और प्रीमियम लुक वाले मॉडल पेश करने की तैयारी में है. लीक के अनुसार इस बार लाइनअप में iPhone 18, iPhone 18e, iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max शामिल होंगे. जबकि iPhone Air 2 पर फिलहाल रोक लग सकती है.
लॉन्च टाइमलाइन में बड़ा बदलाव
इस बार Apple अपनी लॉन्च स्ट्रेटेजी भी बदल सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक Pro और Pro Max मॉडल के साथ पहला फोल्डेबल iPhone सितंबर 2026 में आएगा जबकि बेस मॉडल्स 2027 की स्प्रिंग में लॉन्च हो सकते हैं.
ताकतवर 2nm A20 Bionic चिप
iPhone 18 का सबसे बड़ा हाईलाइट होगा इसका Next-Gen A20 Bionic चिप, जो 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा. इससे फोन में AI परफॉर्मेंस, बैटरी एफिशिएंसी और Siri की क्षमताओं में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा. Apple Intelligence के जरिए ऑन-डिवाइस AI फीचर्स और भी स्मार्ट हो जाएंगे जिसमें एडवांस टेक्स्ट-टू-इमेज टूल्स, बेहतर जेनरेटिव AI और तेज प्रोसेसिंग शामिल है.
कुल मिलाकर डिजाइन में बड़ा बदलाव
iPhone Air से प्रेरित पतला डिज़ाइन, नई OLED स्क्रीन, पतले बेज़ल और मजबूत बॉडी iPhone 18 को प्रीमियम फील देने वाले हैं. सबसे ज्यादा चर्चा में है iPhone Fold जिसे दो पतले टाइटेनियम बॉडीज से बनता बताया जा रहा है. इसकी कीमत $2000 से ऊपर (1.6 लाख+ रुपये) हो सकती है.
Samsung Galaxy S26
सैमसंग भी अपनी Galaxy S26 सीरीज़ को लेकर काफी आक्रामक दिख रहा है. कंपनी 2026 की शुरुआत यानी जनवरी या फरवरी में अपनी नई लाइनअप पेश कर सकती है. इस बार Galaxy S26, S26+ और S26 Ultra मॉडल देखने को मिलेंगे. Edge एडिशन की वापसी को लेकर अभी भी कयास जारी हैं.
डिस्प्ले और बैटरी में बड़ा अपग्रेड
Galaxy S26 में 6.27-इंच स्क्रीन और 4300mAh बैटरी होने की उम्मीद है. वहीं S26 Ultra में हल्का फ्रेम, 6.9-इंच डिस्प्ले और 5400mAh तक बैटरी देखने को मिल सकती है. सबसे अच्छा बदलाव&amp;mdash;Ultra मॉडल में 60W फास्ट चार्जिंग आने की चर्चा है जो लंबे समय से 45W पर अटका हुआ था.
Galaxy AI का और अधिक स्मार्ट रूप
Samsung One UI 8 के साथ और भी गहरे AI इंटीग्रेशन पर काम कर रहा है. Snapdragon 8 Elite Gen 5 या Exynos 2600 चिप फोन को ज्यादा तेज AI प्रोसेसिंग का अनुभव देंगे.
इसके अलावा बेस मॉडल में बड़ा और ज्यादा लाइट कैप्चर करने वाला 50MP सेंसर, Ultra मॉडल में 200MP टेलीफोटो कैमरा और यहां तक कि 324MP मेन कैमरा की भी चर्चा हालांकि यह कितना सच है यह लॉन्च के बाद ही पता चलेगा. Ultra मॉडल में वैरिएबल अपर्चर भी वापस आ सकता है जो 2019 के बाद से किसी Galaxy फोन में नहीं मिला.
iPhone vs Samsung
दोनों कंपनियां AI, डिस्प्ले टेक्नोलॉजी और अल्ट्रा-प्रीमियम डिजाइन पर पूरा जोर लगाकर आगे बढ़ रही हैं. iPhone 18 अधिक एफिशिएंसी, पतले डिजाइन और फोल्डेबल मॉडल पर फोकस कर रहा है, वहीं Galaxy S26 कैमरा, बैटरी और AI क्षमताओं को नए स्तर पर ले जाना चाहता है. एक बात तय है 2026 फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स के लिए ऐतिहासिक साल बनने वाला है.
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:09 +0530</pubDate>
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<title>कर्व्ड स्क्रीन वाला फोन खरीदने से पहले जान लें इसके फायदे&#45;नुकसान, बाद में पछताना नहीं पड़ेगा</title>
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<description><![CDATA[ स्मार्टफोन में जब पहली बार कर्व्ड डिस्प्ले मिले थे तो इनकी धूम मच गई थी. स्लीक लुक वाले इन डिस्पले को फ्यूचरिस्टिक माना गया, लेकिन जल्दी ही इनका ट्रेंड चला गया. कर्व्ड डिस्प्ले वाले फोन ज्यादा एस्थेटिक होते हैं और इनमें बड़ा व्यूइंग एरिया मिलता है, लेकिन अब इनकी पॉपुलैरिटी कम होती जा रही है. ऐसे में अगर आप कर्व्ड डिस्प्ले वाला फोन लेने की योजना बना रहे हैं तो इसके फायदे-नुकसान जान लेना जरूरी है.&amp;nbsp;
क्या होता है कर्व्ड डिस्प्ले?
जैसा नाम से ही जाहिर है, कर्व्ड डिस्प्ले वाले फोन में ऐसी स्क्रीन होती है, जो किनारों के पास से मुड़ी या कर्व होती है. इससे डायनामिक और इमर्सिव व्यूइंग एक्सपीरियंस मिलता है. ऐसे फोन में अधिकतर OLED टेक्नोलॉजी का यूज किया जाता है, जो स्क्रीन को पतला रखते हुए फ्लेक्सिबल बनाती है. पहले केवल फ्लैगशिप डिवाइस में ऐसे डिस्प्ले मिलते थे, लेकिन अब किफायती मॉडल में भी यह ऐसे डिस्प्ले मिलने लगे हैं.
कर्व्ड डिस्प्ले के फायदे

कर्व्ड डिस्प्ले वाले फोन ज्यादा एस्थेटिक लगते हैं और कई यूजर्स को खूब पसंद आते हैं. यह डिस्प्ले फोन को एक प्रीमियम टच देते हुए इसके ओवरऑल लुक को बढ़ा देता है.
कर्व्ड डिस्प्ले डिस्प्ले वाले फोन में ज्यादा व्यूंइंग एरिया मिल जाता है. इस कारण इन पर वीडियो देखने, गेम खेलने और वेब ब्राउज करने का अलग मजा होता है.&amp;nbsp;
यह डिस्प्ले एडिशन फीचर्स देने में भी मदद करता है. कई कंपनियां कर्व को साइड नोटिफिकेशन और शॉर्टकट आदि दिखाने के लिए यूज करती है. कई फोन में इस पर म्यूजिक कंट्रोल मिल जाते हैं.&amp;nbsp;
कर्व होने के कारण यूजर को फोन पर बेहतर ग्रिप मिल पाती है. इससे फोन के हाथ स फिसलने का खतरा कम हो जाता है.

ये नुकसान भी हैं

कर्व स्क्रीन को डैमेज का ज्यादा खतरा होता है. अगर फोन हाथ से फिसलकर गिर जाता है तो स्क्रीन टूटने का डर रहता है.&amp;nbsp;
कर्व्ड डिस्प्ले वाले फोन पर एक्सीडेंटल टच ज्यादा होते हैं. यानी आप स्क्रीन को टच नहीं करना चाहते, लेकिन एज पर हाथ लगने से कोई ऐप खुल जाती है या कोई और एक्शन ट्रिगर हो जाता है.
स्क्रीन प्रोटेक्टर से कर्व्ड स्क्रीन को प्रोटेक्श देना मुश्किल होता है. इसकी वजह यह है कि स्टैंडर्ड प्रोटेक्टर कर्व स्क्रीन के लिए नहीं बने होते हैं. ऐसे में स्क्रीन पर कुछ जगह बच जाती है, जिससे डैमेज का खतरा रहता है.

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एक साथ लॉन्च नहीं होंगे नई सीरीज के सारे आईफोन, ऐप्पल की प्लानिंग जानकर सैमसंग और गूगल को आ जाएगा पसीना ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>कर्व्ड, स्क्रीन, वाला, फोन, खरीदने, से, पहले, जान, लें, इसके, फायदे-नुकसान, बाद, में, पछताना, नहीं, पड़ेगा</media:keywords>
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<title>एक साथ लॉन्च नहीं होंगे नई सीरीज के सारे आईफोन, ऐप्पल की प्लानिंग जानकर सैमसंग और गूगल को आ जाएगा पसीना</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी टेक कंपनी ऐप्पल आईफोन का लॉन्च शेड्यूल बदलने जा रही है. अगले साल से नई सीरीज के सभी आईफोन एक साथ लॉन्च नहीं किए जाएंगे. पिछले कुछ समय से इसे लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स आ रही थीं. अब ऐप्पल को कवर करने वाले पत्रकार मार्क गुरमैन ने बताया है कि ऐप्पल हर साल दो अलग-अलग इवेंट में अपने नए आईफोन लॉन्च करेगी. इससे ऐप्पल को गूगल और सैमसंग को बेहतर तरीके से टक्कर देने में मदद मिलेगी.&amp;nbsp;
आईफोन 18 सीरीज कब लॉन्च होगी?
ऐप्पल हर साल की तरह सितंबर में नए आईफोन को लॉन्च करना जारी रखेगी. हालांकि, सारे नए आईफोन उस समय लॉन्च नहीं किए जाएंगे. अगले साल सितंबर में आईफोन 18 सीरीज के प्रो मॉडल्स और फोल्डेबल आईफोन को लॉन्च किया जाएगा, जबकि सीरीज के स्टैंडर्ड आईफोन 18 और इसके किफायती वर्जन आईफोन 18e को 2027 की शुरुआत में लॉन्च करने की प्लानिंग है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस दौरान आईफोन एयर 2 को भी लॉन्च किया जा सकता है, जबकि कई रिपोर्ट्स में इस आईफोन को बंद करने का दावा किया जा रहा है.&amp;nbsp;
सैमसंग और गूगल को मिलेगी टक्कर
अभी तक ऐप्पल एक बार में ही नई सीरीज के आईफोन लॉन्च कर देती थी. इससे बाकी कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स हाईलाइट करने का पर्याप्त मौका मिल जाता था. अब साल की शुरुआत में नए आईफोन लॉन्च कर ऐप्पल सैमसंग की गैलेक्सी लाइनअप को बेहतर टक्कर दे पाएगी, जो लगभग जनवरी-फरवरी में लॉन्च होती है. दूसरी तरफ सितंबर में लॉन्च होने वाले प्रो मॉडल्स गूगल और सैमसंग के फोल्डेबल और पिक्सल डिवाइस का मुकाबला कर पाएंगे.
फैसले से ऐप्पल को एक साथ कई फायदे
इस फैसले से ऐप्पल को एक साथ कई फायदे हो रहे हैं. सैमसंग और गूगल का बेहतर मुकाबला करने के अलावा इस कदम से ऐप्पल की सप्लाई चैन पर दबाव कम होगा. साथ ही कंपनी अब अपने किफायती मॉडल को साल में दो बार की जगह एक ही इवेंट में लॉन्च कर पाएगी.&amp;nbsp;
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:08 +0530</pubDate>
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<title>इस एक गलती से लीक हो जाती है WhatsApp की प्राइवेट चैट! क्या आप भी उनमें शामिल हैं, जानिए पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp Tips: वॉट्सऐप दुनिया का सबसे सुरक्षित मैसेजिंग ऐप माना जाता है क्योंकि इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन होता है. इसके बावजूद कई बार लोगों की प्राइवेट चैट लीक हो जाती है और उन्हें लगता है कि शायद ऐप में कोई बड़ी कमी है. लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है. असल वजह अक्सर खुद यूज़र्स की एक साधारण सी गलती होती है जो अनजाने में उनकी चैट को दूसरों तक पहुंचा देती है.
सबसे बड़ी गलती
ज्यादातर लोग वॉट्सऐप में अपनी चैट का बैकअप Google Drive या iCloud में ऑन कर देते हैं ताकि फोन बदलने पर मैसेज न खोएं. लेकिन यहीं से जोखिम शुरू होता है. एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन सिर्फ उस चैट के लिए काम करता है जो आपके फोन और रिसीवर के फोन तक सीमित है. लेकिन बैकअप क्लाउड में जाता है जो उसी एन्क्रिप्शन से सुरक्षित नहीं होता. इसका मतलब अगर कोई आपके क्लाउड अकाउंट तक पहुंच गया तो वह आपके वॉट्सऐप बैकअप को पढ़ सकता है. कई चैट लीक की घटनाओं में यही कारण सामने आया है.
कमज़ोर पासवर्ड और OTP धोखाधड़ी करते हैं काम तमाम
कई लोग अपने Google या Apple अकाउंट का पासवर्ड बहुत आसान रखते हैं या हर जगह एक जैसा पासवर्ड इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में हैकिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसके साथ ही, OTP स्कैम में लोग अनजाने में ही अपने अकाउंट की एक्सेस दूसरों को दे बैठते हैं. यदि किसी के हाथ आपके क्लाउड अकाउंट की एंट्री लग गई तो आपका वॉट्सऐप बैकअप भी उनके लिए खुली किताब बन जाता है.
गैलरी सिंक और स्क्रीनशॉट से भी लीक होते हैं मैसेज
कई बार चैट सीधे वॉट्सऐप से नहीं लीक होती, बल्कि फोन की गैलरी या स्क्रीनशॉट के जरिए बाहर पहुंच जाती है. ऑटो मीडिया डाउनलोड ऑन होने पर आपकी निजी फोटो, वीडियो या डॉक्यूमेंट फोन के कई ऐप्स से एक्सेस किए जा सकते हैं. कोई भी गलती या गलत ऐप इंस्टॉल करने पर यह डेटा बाहर जा सकता है.
कैसे बचाएं अपनी प्राइवेट चैट?

वॉट्सऐप चैट लीक से बचने का सबसे आसान तरीका है अपनी डिजिटल सुरक्षा को मजबूत रखना.
क्लाउड बैकअप बंद रखें या एन्क्रिप्शन ऑन करें.
अपने Google/Apple अकाउंट में मजबूत पासवर्ड और 2FA एक्टिवेट करें.
ऑटो-मीडिया डाउनलोड बंद रखें.
किसी भी अनजान लिंक या OTP को शेयर न करें.

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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>BSNL का धमाका! छात्रों के लिए आ गया नया प्लान, अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ मिलेगा 100GB डेटा, जानिए डिटेल्स</title>
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<description><![CDATA[ BSNL Student Special Plan: सरकारी दूरसंचार कंपनी BSNL ने छात्रों के लिए एक खास मोबाइल प्लान पेश किया है जिसे चिल्ड्रन डे के मौके पर लॉन्च किया गया. BSNL के CMD ए. रॉबर्ट जे. रवी के अनुसार कंपनी छात्रों और महिलाओं के लिए विशेष प्लान लाने की योजना पर काम कर रही है और यह स्टूडेंट स्पेशल प्लान उसी दिशा में उठाया गया पहला कदम है.
क्या है BSNL का Student Special Plan?

Boost your learning journey with #BSNL!Get BSNL&amp;rsquo;s Student Special Plan @ ₹251 with Unlimited Calls, 100GB Data &amp;amp; 100 SMS/Day. Offer valid till 13 Dec, 2025. #BSNLLearnersPlan #ConnectingBharat pic.twitter.com/4ZDSdjMkmm
&amp;mdash; BSNL India (@BSNLCorporate) November 16, 2025



यह नया प्लान एक लिमिटेड-पीरियड ऑफर है, जो खास तौर पर स्टूडेंट्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. करीब 8.96 रुपये प्रतिदिन यानी 251 रुपये के रिचार्ज में यूज़र्स को कॉलिंग, डेटा और SMS जैसी सभी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं.
कीमत: 251 रुपये
वैधता: 14 नवंबर से 13 दिसंबर 2025 तक उपलब्ध
बेनिफिट्स

अनलिमिटेड कॉलिंग
100GB हाई-स्पीड डेटा
रोज 100 SMS

पात्रता: यह ऑफर सभी BSNL ग्राहकों के लिए उपलब्ध है सिर्फ नए यूज़र्स तक सीमित नहीं.
इस प्लान को लेने के लिए ग्राहक नजदीकी BSNL CSC सेंटर पर जा सकते हैं 1800-180-1503 पर कॉल कर सकते हैं या bsnl.co.in पर विज़िट कर सकते हैं.
देश में बना 4G नेटवर्क का अनुभव
BSNL प्रमुख रवी के मुताबिक, यह प्लान ऐसे समय में लॉन्च किया गया है जब कंपनी पूरे देश में अपना स्वदेशी 4G नेटवर्क स्थापित कर रही है. उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का पांचवां देश है जिसने खुद की 4G टेक्नोलॉजी विकसित की है और BSNL लंबे समय से इसके विकास व तैनाती में लगी है.
रवी का कहना है कि यह डेटा-समृद्ध प्लान छात्रों को &amp;lsquo;मेक इन इंडिया&amp;rsquo; 4G नेटवर्क का बेहतरीन अनुभव देगा. 100GB डेटा के साथ पूरा 28 दिनों तक नए नेटवर्क की गुणवत्ता को टेस्ट करने का मौका मिलेगा.
Airtel का 349 रुपये वाला रिचार्ज प्लान
Airtel का 349 रुपये वाला प्लान उन यूजर्स के लिए खास तौर पर बनाया गया है जो रोज़ाना अच्छी डेटा स्पीड के साथ मनोरंजन का पूरा मजा लेना चाहते हैं. इस प्लान में हर दिन 1.5GB डेटा मिलता है जिसकी वैधता 28 दिनों तक रहती है. इसके साथ अनलिमिटेड कॉलिंग और रोज़ 100 SMS की सुविधा भी शामिल है. अगर आप 5G कवरेज वाले इलाके में रहते हैं और आपके पास 5G फोन है तो इस प्लान में आपको अनलिमिटेड 5G डेटा भी मिलता है जिससे इंटरनेट स्पीड और भी तेज़ हो जाती है.
प्लान में Airtel Xstream Play Premium की सुविधा दी गई है जिससे 22 से ज्यादा OTT ऐप्स तक पहुंच मिलती है. इसके अलावा 6 महीने तक Apple Music का फ्री सब्सक्रिप्शन मिलता है जो संगीत प्रेमियों के लिए बड़े बोनस जैसा है.
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ये हैं लैपटॉप में वायरस होने के संकेत, दिखते ही तुरंत कर लें ये सारे काम, वरना हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ अगर आपका लैपटॉप इंटरनेट से कनेक्टेड है या आप कोई USB ड्राइव प्लग-इन करते हैं तो वायरस का खतरा बढ़ जाता है. हर साल अलग-अलग वायरस से लोगों के लैपटॉप को निशाना बनाया जा रहा है. वायरस सिस्टम में घुसकर इसे क्रैश कर सकते हैं. कई मामलों में ये डेटा चोरी के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं, जिससे आपकी प्राइवेट इंफोर्मेशन गलत हाथों में पड़ सकती है. इसलिए वायरस की पहचान कर इसे एलिमिनेट करना जरूरी है. आज हम आपको इस प्रोसेस में काम आने वाली कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं.
वायरस होने पर दिखते हैं ये संकेत
स्पीड स्लो हो जाना- वायरस लैपटॉप के रिसोर्सेस को यूज कर लेता है, जिससे उसकी स्पीड स्लो हो जाती है. अगर आपको फाइल एक्सेस करते समय, ऐप्स स्विच करते समय स्पीड कम लग रही है तो सिस्टम में वायरस हो सकता है.
पॉप-अप एड आना- अगर आप इंटरनेट से कनेक्टेड नहीं है, लेकिन फिर भी आपके सिस्टम पर पॉप-अप एड नजर आ रही है तो यह खतरनाक संकेत है. अगर आप इन एड पर क्लिक करते हैं तो ये आपको मलेशियस वेबसाइट पर ले जाती हैं.
अनएक्सपेक्टेड चेंज नजर आना- वायरस आपकी मर्जी के बिना भी फाइल्स, डेस्कटॉप वॉलपेपर और सिस्टम सेटिंग में छेड़छाड़ कर सकती है. ऐसे में अगर आपको अपने सिस्टम में कोई अनएक्सपेक्टेड चेंज नजर आए तो सावधान हो जाना चाहिए.
बार-बार सिस्टम क्रैश होना- अगर बिना किसी खराबी के आपका सिस्टम क्रैश हो रहा है तो यह मालवेयर का काम हो सकता है. दरअसल, मालवेयर ऐप्स को नॉन-रिस्पॉन्सिव बनाने के साथ-साथ सिस्टम को भी क्रैश कर सकते हैं.
वायरस को ऐसे करें डिटेक्ट
मालवेयर स्कैनर और ऑनलाइन स्कैनर के अलावा भी कई तरीके हैं, जिससे सिस्टम में वायरस को डिटेक्ट किया जा सकता है. कुछ ऐसी ब्राउजर एक्टेंशन्स आती है, जो रियल-टाइम में वायरस को डिटेक्ट कर डेंजरस वेबसाइट और डाउनलोड को ब्लॉक कर सकती हैं. इसके अलावा आप फायरवॉल सेटअप कर भी वायरस से बच सकते हैं.
वायरस डिटेक्ट होने पर क्या करें?
अगर आपके सिस्टम में वायरस डिटेक्ट हो जाता है तो सबसे पहले इसे इंटरनेट से डिसकनेक्ट कर दें. इससे वायरस सिस्टम को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा. इसके बाद सिस्टम पर स्टोर अपनी सारी जरूरी फाइल्स का बैकअप ले लें. अगर वायरस फाइल्स को करप्ट कर देता है तो यह बैकअप आपके काम आएगा. इसके बाद अपने सिस्टम पर एंटीवायरस से स्कैन कर लें.&amp;nbsp;
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Elon Musk का चौंकाने वाला दावा! ये रोबोट बदल देगा इंसानों की दुनिया, जानिए क्यों इसके लॉन्च से पहले मच गई हलचल</title>
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<description><![CDATA[ Elon Musk Optimus Robot: एलन मस्क हमेशा से भविष्य की तकनीकों के बड़े सपने दिखाते आए हैं लेकिन इस बार उन्होंने जो कहा, वह किसी साइ-फाई फिल्म की कहानी जैसा लगता है. हाल ही में Tesla की शेयरहोल्डर मीटिंग में मस्क ने दावा किया कि आने वाले समय में इंसान अपनी सोच, यादें और व्यक्तित्व को Tesla के ह्यूमनॉइड रोबोट Optimus में अपलोड कर सकेंगे. मस्क के मुताबिक मानव चेतना का डिजिटल वर्ज़न तैयार करके उसे रोबोटिक शरीर में ट्रांसफर करने की तकनीक अगले 20 साल में संभव हो सकती है.
जब उनसे पूछा गया कि क्या कभी Optimus में इंसानी दिमाग अपलोड किया जा सकेगा तो उन्होंने साफ कहा यह तुरंत नहीं होगा लेकिन भविष्य में Neuralink जैसी तकनीकों के ज़रिए यह संभव बन सकती है. मस्क का मानना है कि किसी व्यक्ति के दिमाग का एक डिजिटल माइंड स्नैपशॉट लेकर उसे Optimus में डालना विज्ञान की पहुंच से बहुत दूर नहीं है.
Optimus क्या है?
Tesla का Optimus ह्यूमनॉइड 2021 में दुनिया के सामने आया था. इसे इंसानों के दोहराए जाने वाले, थकाऊ या खतरनाक कामों को करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी ऊंचाई लगभग 5 फीट 8 इंच, वजन करीब 56 किलो है और यह आसानी से चलने, सामान उठाने और साधारण रोज़मर्रा के काम करने में सक्षम है.
Optimus का दिमाग Tesla की AI सिस्टम से चलता है वही सिस्टम जो कंपनी की सेल्फ-ड्राइविंग कार्स को शक्ति देता है. Tesla धीरे-धीरे इसे इंडस्ट्रियल वर्कर से लेकर घर में मदद करने वाले असिस्टेंट के तौर पर विकसित करना चाहता है.
लेकिन मस्क का हालिया बयान इसके दायरे को और आगे ले जाता है. उनका कहना है कि Neuralink की मदद से इंसान का मानसिक डेटा रोबोट में डालना एक दिन संभव हो जाएगा. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह सटीक कॉपी नहीं होगी, बल्कि इंसान के दिमाग का एक नज़दीकी डिजिटल संस्करण होगा. मस्क ने एक दिलचस्प बात भी जोड़ी पांच साल पहले आप जैसे थे आज वैसे नहीं हैं. सोच और व्यक्तित्व लगातार बदलते रहते हैं. उनके इस बयान ने बहुतों के मन में डिजिटल अमरता (Digital Immortality) का विचार जगा दिया.
गरीबी खत्म करने का दावा
मस्क ने सिर्फ दिमाग अपलोडिंग की बात नहीं की, बल्कि यह भी कहा कि Optimus वैश्विक गरीबी खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है. उनके मुताबिक जब रोबोट दुनिया के ज्यादातर शारीरिक और दोहराए जाने वाले काम कर सकेंगे तो इंसान रचनात्मकता, शिक्षा, शोध और नवाचार पर ध्यान दे पाएंगे.
Tesla की योजना है कि लंबे समय में Optimus को इतना किफायती बनाया जाए कि हर घर में एक रोबोट हो सके. मस्क का दावा है कि यह प्रोजेक्ट Tesla की कारों से भी बड़ा और प्रभावशाली साबित हो सकता है.
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लाल किले ब्लास्ट की जांच में Threema ऐप का कनेक्शन, जानिए क्या है यह स्विस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और भारत में क्यों है बैन ]]></description>
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<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 17:01:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>TECH EXPLAINED: मालवेयर क्या होते हैं और कैसे काम करते हैं? जानिए इसके टाइप और बचाव के तरीके</title>
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<description><![CDATA[ What is Malware: अगर आप स्मार्टफोन और कंप्यूटर आदि यूज करते हैं तो आपने मालवेयर का नाम सुना ही होगा. मालवेयर मलेशियस सॉफ्टवेयर के लिए यूज की जाने वाली एक टर्म है. इन मलेशियस सॉफ्टवेयर को किसी डिवाइस को डैमैज या डिसरप्ट और चोरी करने के लिए तैयार किया जाता है. आमतौर पर हैकर्स किसी अनऑथेंटिक तरीके से किसी डिवाइस की एक्सेस लेने या हैकिंग के लिए मालवेयर का यूज करते हैं. आज हम आपको मालवेयर के बारे में पूरी डिटेल बताने जा रहे हैं.&amp;nbsp;
क्या होते हैं मालवेयर?
मालवेयर इनवेसिव सॉफ्टवेयर या कंप्यूटर कोड होते हैं, जिन्हें कंप्यूटर सिस्टम को इंफेक्ट, डैमेज या उसकी एक्सेस लेने के लिए तैयार किया जाता है. मालवेयर के कई प्रकार होते हैं और हर कोई डिवाइस को अपने हिसाब से प्रभावित करता है, लेकिन इन सबको कंप्यूटर सिस्टम की सिक्योरिटी और प्राइवेसी से छेड़छाड़ के लिए डिजाइन किया जाता है. मालवेयर सिर्फ कंप्यूटर ही नहीं, बल्कि मोबाइल डिवाइसेस को टारगेट करने के भी यूज किया जाता है.
कैसे काम करते हैं मालवेयर?
सभी मालवेयर का काम करने का बेसिक पैटर्न सेम होता है. मालवेयर वाले किसी लिंक या वेबसाइट पर क्लिक करने से यह सिस्टम में इंस्टॉल हो जाता है. इसके अलावा कई बार हैकर्स फाइल्स में मालवेयर अटैच कर देते हैं. इस कारण जैसे ही ये फाइल्स शेयर होती हैं, मालवेयर भी शेयर होता जाता है. मोबाइल डिवाइस की बात करें तो टेक्स्ट मैसेज के जरिए भी मालवेयर इंस्टॉल किया जा सकता है. इस तरह कई प्रकार से मालवेयर सिस्टम में इंस्टॉल किया जा सकता है. इंस्टॉल होने के बाद यह अपना काम शुरू कर देता है. हैकर्स हर मालवेयर को अलग-अलग कामों के लिए डिजाइन करते हैं. ऐसे में ये हैकर्स की कमांड पर काम करते हैं. हैकर्स मालवेयर का इसलिए इस्तेमाल करते हैं क्योंकि इसकी वजह से उनके लिए सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को तोड़ना आसान हो जाता है और वो ज्यादा लोगों को अपना निशाना बना पाते हैं.&amp;nbsp;
ये हैं मालवेयर के टाइप
Ransomware- फिरौती लेने के लिए इस मालवेयर का यूज किया जाता है. इंस्टॉल होने के बाद रैंसमवेयर सिस्टम या फाइल्स को लॉक कर देता है और इसके बदले रैंसम की डिमांड करता है.&amp;nbsp;
Spyware- किसी डिवाइस या नेटवर्क की इंफोर्मेशन कलेक्ट करने के लिए इसका यूज किया जाता है. सिस्टम में इंस्टॉल होने के बाद यह उसकी सारी इंफोर्मेशन अटैकर्स के पास भेजता है. इसकी मदद से अटैकर्स डिवाइस के माइक्रोफोन से लेकर कैमरा तक को कंट्रोल कर सकते हैं.
Worms- एक बार कंप्यूटर में घुसने के बाद ये खुद की नकल करते हैं और इनकी संख्या बढ़ती जाती है. एक समय पर ये इतने हो जाते हैं कि इनकी वजह से नेटवर्क ठप पड़ जाता है. कई बार Worms को सिस्टम में मालवेयर इंस्टॉल करने के लिए भी यूज किया जा सकता है.&amp;nbsp;
Adware- जैसा नाम से जाहिर हो रहा है, इन्हें एडवरटाइजिंग के जरिए रेवेन्यू कमाने के लिए तैयार किया जाता है. सिस्टम में इंस्टॉल होने के बाद ये यूजर्स को एक के बाद एक अनचाही एड दिखाते हैं. ये सिस्टम से पर्सनल डेटा भी कलेक्ट करते हैं, जिसके बेस पर एड को पर्सनलाइज किया जाता है.&amp;nbsp;
Trojans- ट्रोजन ऐसे मालवेयर होते हैं, जिनमें दूसरे मालवेयर छिपे होते हैं. आमतौर पर ट्रोजन को असली सॉफ्टवेयर के जरिए यूजर के डिवाइस में इंस्टॉल करने की कोशिश की जाती है. जैसे ही यह इंस्टॉल होता है, यह अपने अंदर छिपे मालवेयर को भी इंस्टॉल कर देता है.&amp;nbsp;
Botnets- बॉटनेट मालवेयर का टाइप नहीं है, लेकिन यह कंप्यूटर का कंप्यूटर कोड का एक नेटवर्क होता है, जो मालवेयर को एग्जीक्यूट करता है. इसमें अटैकर्स कंप्यूटर के एक ग्रुप को बॉट्स मालवेयर से इंफेक्ट कर देते हैं और इनका कंट्रोल किसी और के पास चला जाता है. इसे स्पैम भेजने और नकली एड क्रिएट करने के लिए यूज किया जाता है.
सिस्टम में मालवेयर का पता कैसे चलता है?
कुछ संकेतों को पहचानकर सिस्टम में मालवेयर का पता लगाया जा सकता है. अगर आपको लगता है कि डिवाइस की स्पीड एकदम स्लो हो गई है तो यह मालवेयर का काम हो सकता है. दरअसल, मालवेयर डिवाइस के प्रोसेसिंग रिसोर्सेस को यूज करते हैं, जिससे बाकी कामों के लिए पावर नहीं बचती और सिस्टम स्लो हो जाता है. इसके अलावा मालवेयर स्टोरेज स्पेस को भी कंज्यूम करते हैं. ऐसे में अगर अचानक आपका स्टोरेज स्पेस खत्म हो जाए तो यह मालवेयर का संकेत हो सकता है. अन्य संकेतों की बात करें तो सिस्टम में अचानक से पॉप-अप एड नजर आए को समझ जाएं कि आपका सिस्टम अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं है.
मालवेयर अटैक से कैसे बचें?
मालवेयर के अलग-अलग टाइप के हमलों से बचाव के लिए एंटी-मालवेयर सॉफ्टवेयर का यूज करने की सलाह दी जाती है. ये मालवेयर की पहचान कर उन्हें हटा देते हैं. इसके अलावा नीचे दी गईं टिप्स को फॉलो कर भी मालवेयर से बचा जा सकता है.

संदिग्ध लगने वाली पॉप-अप और बैनर एड पर क्लिक न करें.
किसी भी संदिग्ध या अनजान व्यक्ति से आए मैसेज, फाइल और ईमेल अटैचमेंट को ओपन न करें.
सुरक्षा खामियों से बचाव के लिए सॉफ्टवेयर को अपडेट रखें.&amp;nbsp;
हमेशा भरोसेमंद सोर्सेस से ही ऐप्स और फाइल्स डाउनलोड करें.&amp;nbsp;
अपने सिस्टम में स्टोर डेटा का बैकअप लेते रहें ताकि डेटा लीक की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सके.

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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>TECH, EXPLAINED:, मालवेयर, क्या, होते, हैं, और, कैसे, काम, करते, हैं, जानिए, इसके, टाइप, और, बचाव, के, तरीके</media:keywords>
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<title>इन यूजर्स की हो गई मौज! सिर्फ 1 रुपये में पूरे महीने मिलेगा 2GB डेली डेटा, अनलिमिटेड कॉल्स और फ्री SIM, जानिए कब तक है मौका</title>
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<description><![CDATA[ इन यूजर्स की हो गई मौज! सिर्फ 1 रुपये में पूरे महीने मिलेगा 2GB डेली डेटा, अनलिमिटेड कॉल्स और फ्री SIM, जानिए कब तक है मौका ]]></description>
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:11 +0530</pubDate>
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<title>ChatGPT में चैट भी कर पाएंगे यूजर्स, आने वाला है ग्रुप चैट का ऑप्शन, यहां चल रही टेस्टिंग</title>
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<description><![CDATA[ ChatGPT अब सिर्फ एक एआई असिस्टेंट नहीं रहेगा. OpenAI इसमें ग्रुप चैट का भी ऑप्शन लाने जा रही है. इसकी मदद से यूजर इस एआई असिस्टेंट का यूज करते-करते अपने दोस्तों और फैमिली से बातें भी कर सकेंगे. यह एक शेयर्ड स्पेस की तरह काम करेगा, जहां सब लोग मिलकर अपना दिमाग लगा सकेंगे और ChatGPT उनके असिस्टेंट और गाइड की तरह काम करेगा. अभी कंपनी न्यूजीलैंड, जापान, साउथ कोरिया और ताइवान में इसकी टेस्टिंग कर रही है.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगा यह फीचर?
ChatGPT पर कन्वर्सेशन में पीपल आइकन पर टैप कर ग्रुप चैट स्टार्ट की जा सकती है. अगर आप पहले से चल रही चैट के दौरान किसी को एड कर रहे हैं तो ChatGPT उस बातचीत की कॉपी क्रिएट कर देगा, ताकि ऑरिजनल चैट प्राइवेट रह सके. आप लिंक भेजकर भी दूसरे यूजर्स को चैट के लिए इन्वाइट कर सकते हैं और एक ग्रुप चैट में मैक्सिमम 20 लोगों को एड किया जा सकता है. जब आप किसी चैट को पहली बार ज्वॉइन करेंगे तो आपको अपने नाम, यूजरनेम और फोटो की मदद से प्रोफाइल सेटअप करना पड़ेगा. ग्रुप चैट को ढूंढना आसान होगा और साइडबार में बने सेक्शन पर जाकर इन्हें ज्वॉइन किया जा सकेगा.
ChatGPT करेगा हेल्प
ग्रुप सेटअप होते ही ChatGPT मदद के लिए आ जाएगा. वीकेंड ट्रिप प्लान करने से लेकर पैकिंग लिस्ट बनाने तक यह सारों कामों में मदद करेगा. इसके अलावा ग्रुप के मेंबर इससे आईडियाज और सजेशन भी ले सकेंगे. ग्रुप चैट में बात करने के लिए कंपनी ने इसे नए सोशल बिहेवियर से प्रशिक्षित किया है. यह खुद से डिसाइड कर सकता है कि इसे कब बोलना है और कब चुप होना है और यह इमोजी से भी रिएक्ट कर सकता है. हालांकि, यूजर्स कभी भी इसे मेंशन कर रिस्पॉन्स ले पाएंगे.&amp;nbsp;
प्राइवेसी पर खास फोकस
इस फीचर में प्राइवेसी पर खास ध्यान दिया गया है. ग्रुप चैट को प्राइवेट कन्वर्सेशन से बिल्कुल अलग रखा गया है और ChatGPT ग्रुप चैट में आपकी पर्सनल मेमोरी को यूज नहीं करेगा. कम उम्र के यूजर्स के लिए इसमें सेंसेटिव मेटेरियल को फिल्टर करने का भी ऑप्शन है और पैरेंट्स चाहें तो इस फीचर को पूरी तरह बंद भी कर सकते हैं.
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब WhatsApp पर भी चलेगा आपका Instagram वाला यूजरनेम! Meta ला रहा है बड़ा अपडेट, जानिए पूरा बदलाव</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp New Update: लंबे समय से WhatsApp यूज़र्स एक ऐसी सुविधा का इंतज़ार कर रहे थे जिससे बिना नंबर शेयर किए भी चैट शुरू की जा सके. अब वो दिन दूर नहीं जब आपका WhatsApp यूज़रनेम ही आपकी पहचान बनेगा. Meta लगातार इस फीचर पर काम कर रहा है और अब खबर है कि जल्द ही यूजर्स को Instagram और Facebook वाला वही यूजरनेम WhatsApp पर भी इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी.
WhatsApp यूज़रनेम फीचर में क्या है नया?
WhatsApp में यूज़रनेम सिस्टम की चर्चा कई महीनों से चल रही है लेकिन अब इस फीचर को लेकर WhatsApp Beta (Android 2.25.34.3) में बड़ा अपडेट सामने आया है. WABetaInfo के अनुसार, अब WhatsApp सेटिंग्स के Profile सेक्शन में Username का नया ऑप्शन दिखेगा.
यहां यूज़र अपने पसंदीदा यूज़रनेम को रिज़र्व कर पाएंगे. खास बात यह है कि अगर आपने पहले से Facebook या Instagram पर कोई यूज़रनेम इस्तेमाल किया है तो वही नाम WhatsApp पर भी पाने की कोशिश कर सकते हैं.
हालांकि, Meta इस प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए Meta Accounts Centre के ज़रिए वेरिफिकेशन करेगा ताकि कोई और आपकी ID से मिलता-जुलता नाम न ले सके.
एक यूजरनेम तीन प्लेटफॉर्म
Meta का यह कदम न सिर्फ सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि डिजिटल पहचान को भी मजबूत बनाएगा. अब WhatsApp, Instagram और Facebook पर एक ही यूज़रनेम इस्तेमाल करने से ब्रांड्स, क्रिएटर्स और बिज़नेस अकाउंट्स को बड़ी राहत मिलेगी.
इससे यूज़र को पहचानना आसान होगा, फेक अकाउंट्स की संभावना घटेगी और आपकी ऑनलाइन उपस्थिति ज्यादा प्रोफेशनल दिखेगी. साथ ही, यह फीचर लोगों के बीच क्रॉस-प्लेटफॉर्म कनेक्शन को और भी आसान बनाएगा.
कब तक मिलेगा यह नया फीचर?
फिलहाल यह फीचर टेस्टिंग फेज़ में है और पब्लिक रिलीज़ से पहले सीमित बीटा यूज़र्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta आने वाले हफ्तों में इसे चरणबद्ध तरीके से जारी करेगा. कंपनी का लक्ष्य है कि 2026 से पहले यह फीचर पूरी तरह लॉन्च हो जाए.
यानी आने वाले महीनों में यूजर्स को @username on WhatsApp का असली अनुभव मिलने वाला है जिससे फोन नंबर शेयर करने की जरूरत खत्म हो जाएगी और आपकी पहचान अब सिर्फ एक यूज़रनेम से होगी.
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>YouTube में आया नया फीचर! अब हर वीडियो से पूछिए सवाल और तुरंत पाएं जवाब, जानिए कैसे करेगा कमाल</title>
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<description><![CDATA[ YouTube New Feature: YouTube ने अपने प्लेटफॉर्म पर एक नया और इनोवेटिव फीचर Ask जारी किया है जो फिलहाल सीमित यूज़र्स के लिए टेस्टिंग फेज़ में है. यह फीचर वीडियो देखने के अनुभव को और ज़्यादा स्मार्ट और इंटरएक्टिव बनाने के लिए तैयार किया गया है. इस फीचर की मदद से आप वीडियो से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं उसका सारांश जान सकते हैं, मुख्य पॉइंट्स समझ सकते हैं और यहां तक कि कंटेंट पर आधारित क्विज़ भी ले सकते हैं. यानी अब YouTube सिर्फ एक वीडियो प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि आपका AI चैट साथी बन गया है.
कहां मिलेगा Ask बटन?
YouTube के कुछ चुनिंदा वीडियो में आपको अब एक नया Gemini आइकन वाला Ask बटन दिखाई देगा. यह बटन वीडियो के ठीक नीचे Share और Download ऑप्शन्स के बीच में मौजूद होता है. यह फीचर Android, iPhone, और Windows PC सभी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है.
कैसे काम करता है यह फीचर?
जैसे ही आप Ask बटन पर क्लिक करते हैं, स्क्रीन पर एक चैट विंडो खुलती है. यहां आप खुद सवाल टाइप कर सकते हैं या फिर दिए गए सुझावों में से कोई एक विकल्प चुन सकते हैं जैसे Summarize the video (वीडियो का सार बताओ), Recommended Content (संबंधित वीडियो सुझाओ), More (अधिक जानकारी दो). इसके बाद, जवाब Large Language Model (LLM) यानी Gemini AI की मदद से तुरंत तैयार होकर स्क्रीन पर आ जाता है.
किन देशों और यूज़र्स को मिलेगा यह फीचर?
यह फीचर अभी YouTube Premium और Non-Premium दोनों प्रकार के यूज़र्स के लिए उपलब्ध है. फिलहाल यह सिर्फ अंग्रेज़ी भाषा में काम करता है और 18 वर्ष से अधिक उम्र के दर्शकों के लिए ही एक्टिव है. यह फीचर इस समय भारत, अमेरिका, कनाडा और न्यूज़ीलैंड में उपलब्ध है. आने वाले महीनों में YouTube इसे और देशों में रोलआउट करने की योजना बना रहा है.
YouTube का दूसरा बड़ा AI अपग्रेड
YouTube ने हाल ही में एक और AI-सक्षम फीचर शुरू किया है जो लो-क्वालिटी वीडियो को अपने आप HD (High Definition) में अपस्केल करता है. यह सुविधा 29 अक्टूबर से चरणबद्ध तरीके से जारी की जा रही है और जल्द ही दुनिया भर के सभी यूज़र्स के लिए उपलब्ध होगी.
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Lost iPhone Alert बना नया जाल! ठग रहे हैं आपकी Apple ID, जानिए कैसे करें पहचान और बचाव</title>
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<description><![CDATA[ Lost iPhone Alert: iPhone खो जाना किसी झटके से कम नहीं होता लेकिन अगर उसी फोन के मिलने का मैसेज आ जाए तो कोई भी उम्मीद से भर जाता है. बस इसी भरोसे का फायदा उठा रहे हैं साइबर ठग. हाल ही में एक नया फ़िशिंग स्कैम सामने आया है जिसमें यूजर्स को Lost iPhone Found का झांसा देकर उनकी Apple ID चुरा ली जाती है.
कैसे काम करता है यह Lost iPhone Alert स्कैम?
स्विट्जरलैंड के National Cyber Security Centre (NCSC) के मुताबिक, जब कोई यूजर अपना iPhone खो जाने की रिपोर्ट करता है और Find My iPhone फीचर एक्टिव करता है तो वह लॉक स्क्रीन पर एक मैसेज लिख सकता है जैसे अगर यह फोन मिले तो इस नंबर पर संपर्क करें. यही जगह है जहां ठग अपना जाल बिछाते हैं.
साइबर अपराधी खुद को Apple Find My टीम बताकर यूजर को iMessage या SMS भेजते हैं. इन मैसेज में फोन का मॉडल, रंग, स्टोरेज जैसी डिटेल्स भी होती हैं ताकि सब कुछ असली लगे. फिर लिखा होता है, &amp;ldquo;आपका खोया हुआ iPhone 14 Midnight 128GB मिल गया है. लोकेशन देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.&amp;rdquo;
जैसे ही यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है वह एक फर्जी Apple लॉगिन पेज पर पहुंच जाता है. यह पेज असली Apple साइट जैसा दिखता है लेकिन जैसे ही व्यक्ति अपनी Apple ID और पासवर्ड डालता है, सारी जानकारी सीधे ठगों के पास चली जाती है. इसके बाद अपराधी इस डेटा का इस्तेमाल चोरी हुए डिवाइस को अनलॉक कर बेचने में करते हैं.
कैसे बचें इस खतरनाक स्कैम से?
साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने साफ चेतावनी दी है कि कभी भी किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, भले ही वह Apple से आया हुआ क्यों न लगे. अगर गलती से लिंक खुल भी जाए तो Apple ID डालने से पहले URL ध्यान से देखें असली साइट हमेशा apple.com से ही खत्म होती है.
इसके अलावा, अगर आपका फोन चोरी हो गया है तो लॉक स्क्रीन पर अपनी मुख्य ईमेल ID न लिखें. उसकी जगह एक अलग ईमेल या कॉन्टैक्ट नंबर का इस्तेमाल करें ताकि ठग सीधे आपकी जानकारी तक न पहुंच सकें. साथ ही, SIM कार्ड पर PIN लॉक लगाना और दो-स्तरीय वेरिफिकेशन (2FA) ऑन रखना भी जरूरी है.
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>भारत में बनेगा डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड, सरकार ने नोटिफाई किए DPDP एक्ट के नियम, जानें डिटेल्स</title>
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<description><![CDATA[ भारत सरकार ने देश में पर्सनल डेटा की प्रोसेसिंग, प्रोटेक्शन और गवर्नेंस को रेगुलेट करने की दिशा में अहम कदम उठाते हुए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन रूल्स, 2025 को नोटिफाई कर दिया है. इसके साथ ही डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के लागू होने का रास्ता साफ हो गया है. डेटा फिड्यूशरीज, कन्सेंट मैनेजर और यूजर के प्राइवेसी राइट्स को सुरक्षित करने के लिए इन नियमों से नई गाइडलाइंस सेट हो सकेंगी. इसके कई प्रोविजन तुरंत प्रभाव से लागू हो जाएंगे, जबकि कुछ के लिए 12-18 महीनों का समय दिया गया है. इस तरह देखा जाए तो यह चरणबद्ध तरीके से लागू होगा.
डेटा फिड्यूशरीज को किया गया डिफाइन्ड
नियमों के मुताबिक, पर्सनल डेटा को कलेक्ट और प्रोसेस करने वाली कंपनियों और प्लेटफॉर्म को डेटा फिड्यूशरी माना जाएगा. वहीं जिस यूजर का डेटा प्रोसेस हो रहा है, वह डेटा प्रिंसिपल है. इसके अलावा कंसेंट मैनेजर एक ऑथोराइज्ड और न्यूट्रल इंटरमीडियरी है, जो यूजर को परमिशन मैनेज करने देगा.
डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड बनेगा
नोटिफिकेशन के मुताबिक, भारत में डेटा लीक और नियमों के पालन आदि को देखने के लिए चार मेंबर्स का डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड बनेगा. साथ ही इन नियमों से डेटा लीक की जानकारी देने की टाइमलाइन भी स्पष्ट हो गई है. सभी डेटा फिड्यूशरीज को पर्सनल डेटा लीक होने के 72 घंटों के भीतर बोर्ड को जानकारी देनी होगी, जबकि प्रभावित यूजर्स को इसकी जानकारी बिना किसी देरी के देना अनिवार्य किया गया है.
माइनर से जुड़े डेटा को लेकर सख्ती
सरकार के बच्चों के डेटा प्रोटेक्शन को लेकर सख्ती बरती है. सभी प्लेटफॉर्म्स को पैरेंट्स से कन्सेंट लेनी होगी और वो एडवरटाइजिंग दिखाने या प्रोफाइलिंग के लिए माइनर यूजर्स को ट्रैक नहीं कर सकेंगे. हालांकि, सरकारी संस्थाओं को कुछ मामलों में राहत मिली है, लेकिन उन्हें भी पूरी तरह दायरे से बाहर नहीं रखा गया है. इसके अलावा सरकार ने भारतीय यूजर्स के डेटा को हैंडल कर रही किसी भी कंपनी को बुलाने की शक्ति अपने पास रखी है. कुछ मामलों में अगर सरकार को लगता है कि डेटा लीक की जानकारी यूजर को देने से जोखिम बढ़ सकता है वो फिड्यूशरी को यह जानकारी देने से रोक सकती है.&amp;nbsp;
तीन साल बाद डिलीट हो जाएगा इनएक्टिव यूजर्स का डेटा
नए नियमों के मुताबिक, फिड्यूशरीज को अब तीन साल बाद इनएक्टिव यूजर्स का पर्सनल डेटा डिलीट करना पड़ेगा. हालांकि, कानूनन जरूरत होने पर वो इससे ज्यादा समय तक डेटा स्टोर कर सकेंगी. साथ ही उन्हें एक साल का डेटा लॉग्स रखना पड़ेगा, जिसमें कन्सेंट, डिस्क्लोजर, प्रोसेसिंग एक्टिविटी और विदड्रॉल एक्शन की जानकारी होनी चाहिए.
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इसी साल लॉन्च हुआ यह आईफोन हो गया 18,000 रुपये से ज्यादा सस्ता, तुरंत उठाएं मौके का फायदा</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप कम कीमत पर नया आईफोन खरीदना चाहते हैं तो आपके लिए एक अच्छा मौका आया है. इसी साल लॉन्च हुए iPhone 16e पर शानदार छूट मिल रही है, जिससे इसकी कीमत काफी कम हो गई है. लगभग 60,000 रुपये की कीमत के साथ लॉन्च हुए इस आईफोन पर 18,000 से रुपये से ज्यादा की बचत की जा सकती है. ऐसे में अगर आप अपना फोन अपग्रेड करना चाहते हैं या अपने किसी दोस्त को आईफोन गिफ्ट करना चाहते हैं तो यह शानदार मौका है. आइए इस फोन के फीचर और इस पर मिल रही डील के बारे में विस्तार से जानते हैं.&amp;nbsp;
iPhone 16e के फीचर
आईफोन 16 सीरीज के किफायती एडिशन iPhone 16e को इस साल की शुरुआत में लॉन्च किया गया था. इस आईफोन में 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले है, जो 60Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है. इसके रियर में 2x ऑप्टिकल जूम के साथ 48MP कैमरा और फ्रंट में सेल्फी और वीडियो के लिए 12MP कैमरा मिलता है. एल्युमिनियम बॉडी वाले इस आईफोन में &amp;nbsp;A18 चिपसेट मिलता है और यह कई ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स के साथ लॉन्च हुआ था. यह फोन USB-C पोर्ट के साथ लॉन्च हुआ था.
फोन पर मिल रही यह शानदार डील
भारत में इस आईफोन को 59,900 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन अब यह रिलायंस डिजिटल की वेबसाइट पर 10,910 रुपये की छूट के बाद 48,990 रुपये में लिस्टेड है. इसके अलावा अगर आप HSBC क्रेडिट कार्ड से EMI ट्रांजेक्शन सेलेक्ट करते हैं तो 7,500 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलेगी. इस तरह देखा जाए तो फोन पर 18,000 रुपये से ज्यादा का डिस्काउंट मिल रहा है. सिर्फ इतना ही नहीं, आप अपने पुराने आईफोन या एंड्रॉयड स्मार्टफोन को एक्सचेंज कर नए आईफोन पर और भी छूट पा सकते हैं.&amp;nbsp;
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:08 +0530</pubDate>
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<title>TECH EXPLAINED: Delhi Blast में Telegram का कनेक्शन! कैसे बना ये मैसेजिंग ऐप आतंकियों का नया अड्डा</title>
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<description><![CDATA[ Telegram: दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट के पीछे डॉक्टर उमर मोहम्मद का नाम सामने आया है जिसे आत्मघाती हमलावर बताया जा रहा है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, उमर पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ा था. वह कुछ अन्य कट्टरपंथी डॉक्टरों के साथ Telegram पर एक गुप्त ग्रुप में सक्रिय था जहां आतंकी गतिविधियों की प्लानिंग की जाती थी. बताया गया है कि उमर ने अपने दो साथियों की गिरफ्तारी के बाद घबराकर लाल किले के पास विस्फोट कर दिया.
Telegram
दुनियाभर में करोड़ों यूजर्स Telegram को एक सुरक्षित और प्राइवेट मैसेजिंग ऐप के रूप में इस्तेमाल करते हैं. लेकिन अब यह ऐप अपराध, फेक न्यूज़, बच्चों से जुड़े आपराधिक कंटेंट और आतंकवाद फैलाने का केंद्र बनता जा रहा है. Telegram की शुरुआत 2013 में रूसी अरबपति पावेल ड्यूरोव और उनके भाई निकोलाई ड्यूरोव ने की थी. आसान इंटरफेस और एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन ने इसे लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया. यूक्रेन युद्ध और हांगकांग प्रोटेस्ट जैसे कई मौकों पर इसे जन आंदोलनों का जरिया भी बनाया गया.
आतंकवादियों का नया हथियार बना Telegram
Telegram के कम मॉडरेटेड चैनल्स और ग्रुप्स ने आतंकवादी संगठनों को अपने प्रचार और भर्ती के लिए एक सुरक्षित मंच दे दिया है. ISIS, अल-कायदा, हिजबुल्ला और हमास जैसे संगठन Telegram का इस्तेमाल नए सदस्यों को जोड़ने, फंड जुटाने और हिंसा फैलाने के लिए करते हैं. 2015 में पेरिस में हुए आतंकी हमले के दौरान जांच में पता चला था कि हमलावरों ने अपनी प्लानिंग Telegram और WhatsApp के जरिए की थी.
हालांकि बाद में Telegram ने ISIS से जुड़े चैनल्स हटाने का वादा किया, लेकिन 2024 की एक रिपोर्ट बताती है कि आतंकी कंटेंट अब भी सीमित रूप में ऐप पर मौजूद है.
Telegram की प्राइवेसी पॉलिसी बनी अपराधियों की ढाल
New York Times की हालिया जांच में खुलासा हुआ कि Telegram के लाखों चैनलों में खुलेआम हथियारों की बिक्री, ड्रग्स तस्करी और चरमपंथी प्रचार चल रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, Telegram की 16,000 से ज्यादा चैनलों के 3.2 मिलियन से अधिक मैसेज स्कैन किए गए जिनमें से कई चैनल सफेद वर्चस्ववादी समूहों और अपराधियों के संपर्क में थे. Telegram की पॉलिसी के अनुसार, कंपनी बहुत सीमित डेटा रखती है और केवल कोर्ट ऑर्डर मिलने पर ही किसी यूजर का IP या फोन नंबर शेयर किया जा सकता है.
Telegram के संस्थापक पावेल ड्यूरोव का कहना है कि कंपनी ऐसे सरकारी आदेशों को मानने से इनकार करती है जो फ्री स्पीच और प्राइवेसी के सिद्धांतों के खिलाफ हों. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि Telegram ने अमेरिकी जांच एजेंसियों के कैपिटल हिल दंगे (2021) की जांच में सहयोग नहीं किया था.
Telegram का बचाव और आधिकारिक बयान
NDTV को दिए एक बयान में Telegram ने कहा कि उसकी Terms of Service में किसी भी प्रकार की हिंसा या आतंकवाद के प्रचार की अनुमति नहीं है. कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि Telegram रोजाना लाखों हानिकारक कंटेंट हटाता है और उसने Global Center for Combating Extremist Ideologies (Etidal) के साथ साझेदारी की है. Telegram ने यह भी कहा कि वह भारत के IT Act 2021 का पालन कर रहा है और अवैध सामग्री की रिपोर्ट मिलने पर तुरंत कार्रवाई करता है.
Telegram के खास फीचर्स
Telegram को बाकी मैसेजिंग ऐप्स से अलग बनाते हैं इसके कुछ एडवांस फीचर्स.
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (End-to-End Encryption): सीक्रेट चैट्स में भेजे गए संदेश सिर्फ भेजने और पाने वाले ही पढ़ सकते हैं.
सेल्फ-डिस्ट्रक्टिंग मैसेजेज: यूजर्स अपने चैट्स को एक तय समय बाद अपने-आप डिलीट होने के लिए सेट कर सकते हैं.
बड़े ग्रुप्स और चैनल्स: एक ही चैनल में लाखों लोग जुड़ सकते हैं जिससे जानकारी बहुत तेजी से फैलती है.
क्लाउड बेस्ड चैट्स: Telegram की चैट्स और मीडिया क्लाउड में सेव होती हैं जिससे डेटा कभी भी किसी भी डिवाइस पर एक्सेस किया जा सकता है.
बॉट्स और ऑटोमेशन: Telegram बॉट्स की मदद से यूजर्स गेम्स खेल सकते हैं पोल बना सकते हैं या ऑटोमैटिक रिप्लाई सेट कर सकते हैं.
प्राइवेसी का ढाल या खतरा?
Telegram का दावा है कि यह सबसे सुरक्षित और प्राइवेट चैटिंग ऐप है लेकिन इसकी यही प्राइवेसी अब आतंकी, अपराधी और हैकर्स के लिए भी &amp;lsquo;सेफ ज़ोन&amp;rsquo; बन गई है. क्योंकि Telegram पर चैट्स और चैनल्स का पूरा एक्सेस कंपनी को भी नहीं होता इसलिए किसी अवैध गतिविधि को ट्रैक करना बहुत मुश्किल हो जाता है. इसी वजह से ड्रग्स, हथियारों की बिक्री, फेक न्यूज और आतंकवादी प्रचार जैसी चीजें इस ऐप पर तेजी से फैल रही हैं.
क्या यूजर्स की प्राइवेसी अब खतरे में है?
Telegram यह दावा करता है कि वह यूजर्स का डेटा सुरक्षित रखता है लेकिन अगर किसी देश की सरकार &amp;ldquo;राष्ट्रीय सुरक्षा&amp;rdquo; के नाम पर डेटा की मांग करे तो यह ऐप कई बार सहयोग नहीं करता. इससे एक सवाल उठता है क्या Telegram की प्राइवेसी यूजर्स की सुरक्षा से ज्यादा अहम है?
Telegram का नाम आज सिक्योरिटी और प्राइवेसी के प्रतीक के रूप में लिया जाता है लेकिन यही फीचर्स अब खतरे की घंटी बन गए हैं. जहां एक ओर यह ऐप यूजर्स को आज़ादी देता है, वहीं दूसरी ओर यह अपराधियों और आतंकियों के लिए डिजिटल छिपने की जगह भी बन गया है. ऐसे में अब समय आ गया है कि Telegram को अपनी पॉलिसीज़ और सिक्योरिटी सिस्टम को और सख्त बनाना होगा ताकि प्राइवेसी के साथ पब्लिक सेफ्टी भी बनी रहे.
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 16 Pro पर बंपर डिस्काउंट, इतनी कम हो गई कीमत, खरीदना है तो देर न करें</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप प्रीमियम आईफोन खरीदना चाहते हैं तो हम आपके लिए शानदार ऑफर की जानकारी लेकर आए हैं. पिछले साल लॉन्च हुए आईफोन 16 प्रो पर इस समय बंपर छूट मिल रही है और फ्लिपकार्ट से इसे आप सस्ते दामों में खरीद सकते हैं. ऐसे में अगर आप बजट की चिंता के कारण अपना फोन अपग्रेड नहीं कर पा रहे थे तो अब यह जबरदस्त मौका है, जहां आप कम पैसे में अपनी पसंद का प्रीमियम आईफोन अपने लिए खरीद सकते हैं. आइए इस फोन के फीचर और डील के बारे में डिटेल से जानते हैं.&amp;nbsp;
आईफोन 16 प्रो के फीचर्स
आईफोन 16 प्रो को पिछले साल सितंबर में लॉन्च किया गया था और यह आईफोन 6.3 इंच की सुपर रेटिना XDR OLED स्क्रीन के साथ आया था, जो 120Hz प्रोमोशन रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करती है. ड्यूरैबल टाइटैनियम बिल्ड वाले इस आईफोन में ऐप्पल की पावरफुल A18 Pro चिप दी गई है, जो ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स और मल्टीटास्किंग को आसानी से हैंडल कर सकती है. कैमरा की बात करें तो इसके रियर में ट्रिपल कैमरा सेटअप है, जिसमें 48MP का प्राइमरी लेंस, 48MP का अल्ट्रा वाइड लेंस और 12MP का टेलीफोटो लेंस दिया गया है. इसमें 3582 mAh की बैटरी है, जो 27 घंटे का वीडियो प्लेबैक देती है.
फ्लिपकार्ट पर मिल रही यह डील
आईफोन 16 प्रो पिछले साल 1,19,900 रुपये की शुरुआती कीमत के साथ लॉन्च हुआ था. अभी फ्लिपकार्ट पर यह 1,09,999 रुपये में लिस्टेड है, लेकिन कंपनी इस पर 10,000 का सीधा डिस्काउंट दे रही है. इस तरह इसकी कीमत 99,999 रुपये रह जाती है. इस पर भी आप चुनिंदा क्रेडिट कार्ड से 4,000 रुपये की अतिरिक्त छूट पा सकते हैं, जिससे इसकी असली कीमत 95,999 रुपये रह जाती है. कुल छूट को देखा जाए तो आप इस प्रीमियम आईफोन को 14,000 रुपये के डिस्काउंट के साथ खरीद सकते हैं. इसके अलावा इस पर एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है, जिसमें आप अपना पुराना फोन देकर 68,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं.&amp;nbsp;
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<pubDate>Sat, 15 Nov 2025 07:14:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोन हो गया है खराब, रिपेयर करवाना ठीक रहेगा या नया लेना होगा फायदे का सौदा? इन बातों से करें डिसाइड</title>
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<description><![CDATA[ यूज करते समय हाथ से गिरकर या दूसरे तरीकों से फोन डैमेज हो जाना आम बात है. कई बार फोन में सॉफ्टवेयर या इंटरनल पार्ट्स के कारण भी खराबी निकल आती है. कई बार ऐसी स्थिति बनती है कि डैमेज हुए फोन को ठीक करवाने और नए फोन लेने की लागत में ज्यादा अंतर नहीं रह जाता. ऐसे में लोग कंफ्यूज हो जाते हैं कि नया फोन लेना ठीक रहेगा या खराब फोन को रिपेयर करवाना. अगर आप भी ऐसी कंफ्यूजन से जूझ रहे हैं तो कुछ बातों से इसका फैसला किया जा सकता है.&amp;nbsp;
कितना डैमेज हुआ है फोन?
अगर आपने नया फोन खरीदा है और यह डैमेज हो गया तो इस बात की संभावना है कि यह वारंटी से कवर हो जाएगा. अगर आपका फोन वारंटी कवर से बाहर है और डैमेज हो गया है तो यह देखने की जरूरत है कि कितना नुकसान हुआ है. अगर यह फोन रिपेयर होने लायक है और इसके लिए ज्यादा पैसा नहीं देना पड़ेगा तो रिपेयर करवाना बेहतर है. अगर डैमेज ज्यादा है और ठीक करवाने में मोटी रकम खर्च होगी तो नया फोन खरीदा जा सकता है.
कितना पुराना है फोन
अगर आप कई साल पुराना फोन यूज कर रहे हैं और ये ज्यादा डैमेज हुआ है तो इसे बदल देना ठीक रहेगा. कई बार पुराने फोन के पार्ट्स नहीं मिल पाते. ऐसे में आपको बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं. अगर आप कोई फोन 4-5 साल से यूज कर रहे हैं और यह ज्यादा डैमेज हुआ है तो नया फोन लेना बेहतर है.
फोन के कंटेट से करें डिसाइड
स्मार्टफोन में फाइलों का बैकअप लेने की सुविधा मिलती है, लेकिन कई बार बैकअप नहीं लिया जाता. ऐसे में अगर जरूरी डॉक्यूमेंट्स, फाइल्स और फोटो-वीडियो वाला फोन खराब या डैमेज हुआ है तो इसे रिपेयर करवा लेना समझदारी होगी. नया फोन लेने पर आपका जरूरी डेटा खो जाएगा और उसे रिकवर करना लगभग असंभव हो जाएगा. ऐसे में पुराने फोन को रिपेयर करवा लें.
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Samsung Galaxy S24 FE पर मिल रहा तगड़ा ड़िस्काउंट, पहली बार हो गया इतना सस्ता, जानिए कैसे उठाएं मौके का फायदा</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy S24 FE: सैमसंग ने पिछले साल Galaxy S24 FE को उन यूज़र्स के लिए लॉन्च किया था जो फ्लैगशिप जैसा अनुभव चाहते हैं लेकिन कम बजट में. यह स्मार्टफोन दमदार प्रोसेसर, शानदार AMOLED डिस्प्ले और एडवांस कैमरा सेंसर के साथ आता है. अब इस फोन की कीमत में जबरदस्त कटौती की गई है जिससे आप इसे लगभग आधी कीमत पर खरीद सकते हैं. Amazon India पर चल रही यह डील टेक लवर्स के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है.
Amazon पर Galaxy S24 FE की बंपर डील
Amazon India पर Samsung Galaxy S24 FE का 8GB RAM और 128GB स्टोरेज वाला वेरिएंट अब मात्र 31,999 रुपये में उपलब्ध है जबकि इसका लॉन्च प्राइस 59,999 रुपये था. यानी करीब 28,000 रुपये की बचत. वहीं, इसका 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वाला वेरिएंट 40,690 रुपये में खरीदा जा सकता है, जिसका असली दाम 69,999 रुपये है. फोन तीन आकर्षक कलर ऑप्शंस में आता है Graphite, Mint और Blue.
Galaxy S24 FE के दमदार फीचर्स और स्पेसिफिकेशंस
Samsung Galaxy S24 FE में Exynos 2400e प्रोसेसर दिया गया है जिसे Xclipse GPU के साथ जोड़ा गया है. यह फोन Android 14 पर चलता है और कंपनी ने इसके लिए 7 बड़े Android अपडेट्स का वादा किया है. फोन में 6.7-इंच का Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट और Corning Gorilla Glass Victus Plus की प्रोटेक्शन के साथ आता है.
कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन में 50MP का प्राइमरी कैमरा, 12MP का अल्ट्रा-वाइड लेंस, और 8MP का टेलीफोटो लेंस मौजूद है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 10MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है.
Flipkart पर इस फोन पर भारी छूट
ई-कॉमर्स साइट Flipkart पर Apple iPhone 16 पर भारी डिस्काउंट मिल रहा है. इस फोन के 128GB वेरिएंट की असल कीमत 69,900 रुपये है लेकिन डिस्काउंट के बाद आप इसे महज 62,999 रुपये में खरीद सकते हैं. इसके अलावा फोन पर बैंक ऑफर भी मिल रहा है जिसके बाद फोन की कीमत और भी कम हो जाएगी. साथ ही इसे आप आसान किस्तों पर भी अपने नाम कर सकते हैं.
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोन को कवर के बिना भी रखें एकदम नए जैसा, ये टिप्स अपना लिए तो हो जाएगी मौज</title>
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<description><![CDATA[ फोन को सुरक्षित रखने के लिए कवर एक जरूरी एक्सेसरी है, लेकिन कुछ लोगों को यह पसंद नही आता. उनको लगता है कि इससे फोन का लुक नजर नहीं आता. अब कई कंपनियों ने अपने फोन के रियर में डिजाइन देने भी शुरू कर दिए हैं, जिससे लोगों को कवर की जरूरत और कम लगने लगी है. ऐसे लोग कुछ खास टिप्स को अपनाकर बिना कवर भी अपने फोन को नए जैसा रख सकते हैं. आज हम आपको ऐसी ही कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं.
हैंडलिंग का रखें ध्यान
फोन को स्क्रैच फ्री और नए जैसा रखने के लिए इसकी हैंडलिंग में सावधानी बरतना जरूरी है. आजकल कई फोन की फिनिशिंग ऐसी आती है, जिससे जरा-सी लापरवाही पर फोन हाथ से फिसल जाता है. ऐसी स्थिति में फोन को गिरने से बचाना बहुत जरूरी हो जाता है.&amp;nbsp;
फोन को टाइट जेब में न रखें
फोन को कभी भी टाइट जेब में न रखें. इससे फोन के मुड़ने का डर तो रहता ही है, साथ ही स्क्रैच भी लग सकते हैं. साथ ही फोन को सिक्कों या चाबी के साथ बैग या अपने कपड़ों की जेब में न रखें. सिक्कों और चाबी के कारण फोन पर स्क्रैच लग सकते हैं और नया फोन भी पुराने जैसा नजर आने लगेगा.
बच्चों से रखें दूर
बच्चे फोन को एक खिलौने की तरह देखते हैं और मन आने पर इसे फेंक भी सकते हैं. ऐसे में अगर आपके फोन पर कवर नहीं लगा है तो बच्चों को देने से बचें.&amp;nbsp;
स्क्रीन गार्ड करेगा मदद
स्क्रीन गार्ड पूरे फोन को तो स्क्रैच से नहीं बचा सकता, लेकिन यह डिस्प्ले को गिरने पर टूटने से या स्क्रैच से बचा सकता है. इससे फोन की स्क्रीन पर सुरक्षा की एक अतिरिक्त लेयर बन जाती है. इसलिए अगर आप कवर इस्तेमाल नहीं करना चाहते तो स्क्रीन को स्क्रीन गार्ड की मदद से प्रोटेक्ट किया जा सकता है.
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>फोन, को, कवर, के, बिना, भी, रखें, एकदम, नए, जैसा, ये, टिप्स, अपना, लिए, तो, हो, जाएगी, मौज</media:keywords>
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<title>गेमिंग और चार्जिंग के दौरान ओवरहीट हो रहा है फोन? ये टिप्स आजमा लिए तो रहेगा कूल, हर काम हो जाएगा आसान</title>
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<description><![CDATA[ फोन का ओवरहीट होना एक बड़ी समस्या है और यह बड़े नुकसान का कारण भी बन सकती है. बाहरी वजहों से लेकर इंटरनल पार्ट्स में खराबी तक कई ऐसे कारण हैं, जिनसे फोन चार्जिंग, गेमिंग या दूसरे यूज के दौरान ओवरहीट हो सकता है. कई बार जेब में रखा फोन भी हीट हो जाता है और ठीक तरीके से काम नहीं कर पाता. आज हम ऐसे कुछ ऐसी टिप्स बताने जा रहे हैं, जिससे फोन को ओवरहीट होने से रोका जा सकता है.
सॉफ्टवेयर और ऐप्स को अपडेट रखें
फोन के सॉफ्टवेयर और ऐप्स को हमेशा अपडेटेड रखें. सॉफ्टवेयर अपडेट से बैटरी लाइफ ज्यादा हो जाती है और फोन बेहतर तरीके से परफॉर्म करने लगता है. अगर सॉफ्टवेयर और ऐप्स को अपडेट न किया जाए तो कई तरह की दिक्कतें आने लगती हैं. इसलिए फोन और ऐप्स को अपडेट करने में आलस न बरतें.
बैकग्राउंड एक्टिविटी को कर दें बंद
कई बार आप फोन पर कुछ भी नहीं कर होते, लेकिन यह हीट हो जाता है. दरअसल, बैकग्राउंड एक्टिविटी के कारण ऐसा होता है. कई ऐप्स बैकग्राउंड में लगातार एक्टिव रहती है और नेटवर्क समेत कई दूसरे रिसोर्सेस को भी यूज करती है. इससे फोन के प्रोसेसर पर लोड पड़ता है और इसके हीट होने का खतरा बढ़ जाता है.
चार्जिंग के समय यूज न करें
कई लोग फोन चार्जिंग पर लगाकर गेमिंग या स्ट्रीमिंग करते हैं. ऐसा करना खतरनाक हो सकता है. चार्जिंग के कारण फोन पहले ही हीट होता है और ऊपर से अगर उसमें कोई हैवी टास्क किया जाता है तो ओवरहीटिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए चार्जिंग के दौरान फोन को यूज करने से बचना चाहिए.
फोन को धूप में न रखें&amp;nbsp;गर्म तापमान और सीधी धूप फोन के लिए ठीक नहीं है. इसलिए हमेशा फोन को सीधी धूप में रखने से बचना चाहिए. इसी तरह गर्मियों के मौसम में तापमान अधिक होने पर फोन में हैवी टास्क नहीं करना चाहिए. ज्यादा तापमान के कारण फोन ठीक तरह से फंक्शन नहीं कर पाता. आजकल स्मार्टफोन खुद ही ज्यादा तापमान होने पर नोटिफिकेशन भेजकर फोन के ठंडा होने तक कोई टास्क नहीं करने देते.
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फोन हो गया है खराब, रिपेयर करवाना ठीक रहेगा या नया लेना होगा फायदे का सौदा? इन बातों से करें डिसाइड ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:43 +0530</pubDate>
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<title>आपका पुराना मोबाइल नंबर किसी और को मिल गया? ऐसे बचाएं अपने बैंक और सोशल मीडिया डेटा को गलत हाथों से</title>
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<description><![CDATA[ Old Mobile Number: क्या आपने हाल ही में अपना पुराना मोबाइल नंबर बंद कराया है या किसी नए सिम पर स्विच किया है? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. बहुत से लोग नंबर बदलने के बाद यह सोचकर बेफिक्र हो जाते हैं कि अब पुराना सिम बेकार है लेकिन सच्चाई यह है कि आपका पुराना नंबर कुछ महीनों बाद किसी और को अलॉट कर दिया जाता है. ऐसे में अगर आपने सुरक्षा के जरूरी कदम नहीं उठाए तो आपका निजी डेटा, बैंक जानकारी और सोशल मीडिया अकाउंट किसी अनजान व्यक्ति के हाथों में जा सकता है.
कैसे किसी और को मिल जाता है आपका पुराना नंबर
टेलीकॉम कंपनियां हर बंद पड़े मोबाइल नंबर को करीब 90 दिनों (तीन महीने) तक निष्क्रिय रखती हैं. अगर उस दौरान आपने दोबारा सिम एक्टिव नहीं कराया तो वह नंबर किसी नए यूजर को दे दिया जाता है. अब सोचिए अगर आपका वही नंबर बैंक, गूगल, इंस्टाग्राम या व्हाट्सएप जैसे अकाउंट्स से जुड़ा है तो नया यूजर OTP या रिकवरी मैसेज के जरिए आपकी प्राइवेट जानकारी तक पहुंच सकता है.
ऐसे बचाएं अपना डेटा गलत हाथों में जाने से
अगर आप नंबर बदल रहे हैं या पुराना सिम बंद करने जा रहे हैं तो सबसे पहले अपने सभी बैंक अकाउंट्स, UPI ऐप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जाकर नया नंबर अपडेट कर दें. Gmail, Facebook, WhatsApp, Paytm और Amazon जैसी सर्विसेज में Change Mobile Number या Manage Account विकल्प में जाकर नया नंबर जोड़ें.
इसके अलावा, बैंक और वॉलेट ऐप्स से लॉगआउट करें और पुराना नंबर डिलीट कर दें. 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) भी नए नंबर पर एक्टिव कर लें ताकि किसी अनजान व्यक्ति को OTP या रिकवरी कोड न मिल सके.
पुराना सिम बेचने या फेंकने से पहले ये जरूर करें
अगर पुराना सिम अभी आपके पास है तो उसे फेंकने से पहले पूरी तरह डिएक्टिवेट करा लें. अपने फोन से उससे जुड़े सभी अकाउंट्स लॉगआउट करें और डिवाइस को फैक्ट्री रीसेट कर दें. याद रखें सिर्फ सिम निकालना काफी नहीं है अकाउंट्स से पुराने नंबर का नामोनिशान मिटाना जरूरी है.
छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ा खतरा
अक्सर साइबर ठग ऐसे छोड़े गए पुराने नंबरों का फायदा उठाते हैं. वे बैंक या सोशल मीडिया रिकवरी लिंक के जरिए आपके अकाउंट्स हैक कर सकते हैं. इसलिए अगली बार जब आप मोबाइल नंबर बदलें तो उसे सिर्फ नया कनेक्शन न समझें बल्कि अपनी डिजिटल सुरक्षा का ताला भी बदलें. क्योंकि आज की दुनिया में नंबर बदलना आसान है लेकिन डेटा खोना बहुत महंगा साबित हो सकता है.
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>OnePlus 15: दमदार बैटरी और पावरफुल प्रोसेसर के साथ आज होगा लॉन्च, पहले ही लीक हो गई कीमत</title>
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<description><![CDATA[ OnePlus 15 का इंतजार खत्म होने वाला है और इसे आज भारत और दूसरी ग्लोबल मार्केट में लॉन्च किया जाएगा. लॉन्च से पहले यह फोन एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हुआ था, जिससे इसकी कीमत लीक हो गई है. कीमत के साथ-साथ इसके स्टोरेज वेरिएंट और कलर ऑप्शन की भी जानकारी सामने आ गई है. यह फोन क्वालकॉम के Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर से लैस होगा. इस चिपसेट के साथ भारत में लॉन्च होने वाला यह पहला फोन बनने जा रहा है.&amp;nbsp;
OnePlus 15 के फीचर्स
पिछले महीने चीन में इस फोन को 6.78 इंच के 1.5K AMOLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया गया है, जो 165Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है. इसको ऑक्टा-कोर 3nm Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट मिला है, जिसे Adreno 840 GPU से पेयर किया गया है. यह एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड OxygenOS 16 पर रन करता है और गेमिंग आदि के दौरान हीट को रोकने के लिए फोन में ग्लेशियर कूलिंग सिस्टम और वेपर चैंबर दिया गया है.
बैटरी और कैमरा है दमदार
OnePlus 15 रियर में ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है. यह 50MP के प्राइमरी कैमरा, 50MP के अल्ट्रावाइड लेंस और 50MP के टेलीफोटो सेंसर के साथ भारत में आएगा. यह सेटअप 30 fps पर 8K वीडियो शूट कर सकता है. इसके फ्रंट में वीडियो कॉल और सेल्फी के लिए 32MP लेंस लगा हुआ है. यह फोन 7,300mAh की बैटरी के साथ लॉन्च हुआ था, जो 120W की सुपर फ्लैश चार्ज वायर्ड चार्जिंग और 50W की वायरलेस फ्लैश चार्जिंग को सपोर्ट करती है.&amp;nbsp;
कितनी होगी कीमत?
लीक के मुताबिक, ई-कॉमर्स वेबसाइट पर इस फोन के अल्ट्रा-वॉयलेट कलर के 12GB + 256GB वेरिएंट को 72,999 रुपये में लिस्ट किया गया था. हालांकि, यह पेज ही तुरंत ही हटा लिया गया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फोन के 16GB + 512GB वेरिएंट के लिए ग्राहकों को 79,999 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं. हालांकि, ये आधिकारिक प्राइस नहीं है और कंपनी ने इस बारे में अपनी तरफ से कोई जानकारी नहीं दी है.
कंपीटिशन&amp;nbsp;
OnePlus 15 भारत में कंपनी का सबसे महंगा फोन हो सकता है. कीमत के मामले में इसका कंपीटिटर भारी पड़ सकता है. दरअसल, iQOO 15 भी जल्द लॉन्च होने वाला है और यह भी Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट के साथ आएगा. इसकी कीमत 60,000 रुपये के आसपास रहने की उम्मीद है. ऐसे में कीमत के मामले में iQOO 15 वनप्लस के आज लॉन्च हो रहे फोन पर भारी पड़ सकता है.
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>OnePlus, 15:, दमदार, बैटरी, और, पावरफुल, प्रोसेसर, के, साथ, आज, होगा, लॉन्च, पहले, ही, लीक, हो, गई, कीमत</media:keywords>
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<title>क्या मरने के बाद भी जिंदा रहता है आपका Instagram अकाउंट? जानिए वो 5 राज जो ज्यादातर लोग नहीं जानते</title>
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<description><![CDATA[ Instgaram Account: आज सोशल मीडिया हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. हर खुशी, याद और पल अब Instagram पर कैद होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी दिन आपकी मृत्यु हो जाए तो आपके इंस्टाग्राम अकाउंट का क्या होगा? क्या वह हमेशा ऐसे ही बना रहेगा या डिलीट कर दिया जाएगा? शायद नहीं लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है. चलिए जानते हैं वो 5 बातें जो शायद आपने कभी नहीं सोची होंगी.
अकाउंट नहीं डिलीट होता बल्कि मेमोरियल बन जाता है
अगर किसी यूजर की मौत हो जाती है तो इंस्टाग्राम उसका अकाउंट तुरंत डिलीट नहीं करता. परिवार या दोस्त कंपनी को सूचित कर सकते हैं और अकाउंट को Memorialized Account बना सकते हैं. इसका मतलब है कि अकाउंट रहेगा लेकिन अब कोई उसमें लॉग इन नहीं कर पाएगा. प्रोफाइल तस्वीर और पोस्ट जस की तस रहेंगी ताकि लोग उस व्यक्ति को याद कर सकें.
प्रमाण देना जरूरी है
किसी यूजर के निधन के बाद उसका अकाउंट मेमोरियलाइज करने के लिए इंस्टाग्राम परिवार या करीबी से डेथ सर्टिफिकेट, मृत्यु प्रमाण पत्र या अखबार में छपी खबर जैसी आधिकारिक जानकारी मांगता है. इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई झूठी रिपोर्टिंग न करे.
डिलीट करने का भी है विकल्प
अगर परिवार चाहता है कि मृत व्यक्ति का अकाउंट पूरी तरह से हटा दिया जाए तो इंस्टाग्राम के Request to Remove Account फॉर्म के जरिए यह प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. इसमें अकाउंट से जुड़ी पहचान, रिश्ता और कानूनी दस्तावेज जमा करने होते हैं.
कोई लॉग इन नहीं कर सकता
मेमोरियल अकाउंट बनने के बाद किसी को भी उसमें लॉग इन करने या पासवर्ड बदलने की अनुमति नहीं होती. यह सुरक्षा कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति मृतक के नाम से पोस्ट या मैसेज न भेज सके.
डिजिटल यादों की दुनिया
ऐसे अकाउंट को देखकर लोग उस व्यक्ति की पुरानी यादों, पोस्ट और तस्वीरों से जुड़ सकते हैं. यह एक तरह से डिजिटल स्मारक बन जाता है जहां परिवार और दोस्त उसे याद करते हैं. इंसान भले इस दुनिया से चला जाए लेकिन उसका इंस्टाग्राम अकाउंट उसकी यादों को हमेशा ज़िंदा रखता है. सोशल मीडिया सिर्फ कनेक्ट करने का जरिया नहीं रहा अब यह यादों का डिजिटल टाइम कैप्सूल बन चुका है.
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>पावर बैंक में दिख रहे ये 5 संकेत तो समझिए बन चुका है टाइम बम! देर हुई तो हो सकता है बड़ा हादसा</title>
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<description><![CDATA[ Powerbank: आज के समय में पावर बैंक हमारी रोजमर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. मोबाइल चार्जिंग की टेंशन दूर करने वाला ये छोटा गैजेट कई बार बड़ा खतरा साबित हो सकता है. अगर आप भी लंबे समय से एक ही पावर बैंक इस्तेमाल कर रहे हैं या उसमें कुछ अजीब बदलाव देखने को मिल रहे हैं तो सावधान हो जाइए. क्योंकि ये छोटे-छोटे संकेत आपके लिए बड़े खतरे की घंटी बन सकते हैं.
बैटरी फूलना
अगर आपके पावर बैंक का बॉडी हिस्सा हल्का फूल गया है या बीच में उभार दिख रहा है तो समझ लीजिए अंदर की बैटरी डैमेज हो चुकी है. ऐसे में गैस बनना शुरू हो जाता है और ओवरहीटिंग की वजह से विस्फोट का खतरा बढ़ जाता है.
चार्जिंग के दौरान ज्यादा गर्म होना
चार्जिंग के वक्त अगर पावर बैंक असामान्य रूप से गर्म हो जाता है तो ये भी खतरे की निशानी है. सामान्य स्थिति में थोड़ा गरम होना सामान्य है लेकिन अगर हाथ लगाना मुश्किल हो जाए तो तुरंत चार्जर निकाल दें.
आउटपुट में दिक्कत या अचानक बंद होना
अगर पावर बैंक फोन को चार्ज करते वक्त बार-बार कनेक्शन काट रहा है या चार्जिंग रुक-रुक कर हो रही है तो ये संकेत है कि इसकी सर्किटरी खराब हो चुकी है. खराब सर्किट स्पार्क और ओवरलोडिंग का कारण बन सकती है.
बदबू या धुआं निकलना
अगर पावर बैंक से जलने जैसी गंध या हल्का धुआं निकलता दिखे तो तुरंत उसका इस्तेमाल बंद कर दें. ये स्थिति बताती है कि अंदर शॉर्ट सर्किट या ओवरहीटिंग हो रही है जो किसी भी वक्त विस्फोट का रूप ले सकती है. अगर चार्जिंग के दौरान लाइट्स जलती-बुझती हैं, फ्लिकर करती हैं या बिल्कुल काम नहीं कर रहीं तो ये पावर बैंक के सर्किट में खराबी का संकेत है.
क्या करें अगर पावर बैंक में दिखे ये संकेत
ऐसे किसी भी पावर बैंक को तुरंत बंद कर दें और चार्जिंग से अलग कर दें. उसे ठंडे और सूखे स्थान पर रखें और किसी भी हालत में छेद या झटका न दें. बेहतर होगा कि उसे ई-वेस्ट सेंटर में जाकर सुरक्षित तरीके से डिस्पोज़ कर दें. पावर बैंक एक उपयोगी गैजेट जरूर है, लेकिन ज़रा-सी लापरवाही इसे टाइम बम बना सकती है.
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:42 +0530</pubDate>
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<title>सिक लीव पर था आदमी, फिटनेस ऐप ने दिखा दी 16,000 स्टेप्स की वॉक, नौकरी चली गई</title>
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<description><![CDATA[ टेक्नोलॉजी लोगों के काम आसान बना रही है, लेकिन कई बार यह काम बिगाड़ भी देती है. चीन से सामने आए एक मामले से यह साबित हो जाता है. दरअसल, यहां एक व्यक्ति को कंपनी ने इसलिए नौकरी से निकाल दिया क्योंकि सिक लीव वाले दिन उसकी फिटनेस ऐप ने दिखाया था कि वह 16,000 स्टेप्स चला है. कंपनी ने उस पर बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी लेने का आरोप लगाया. इसके बाद उस आदमी ने कंपनी के खिलाफ केस किया और इसमें उसकी जीत हो गई. आइए पूरा मामला जानते हैं.&amp;nbsp;
2019 का है मामला
यह मामला 2019 का है, लेकिन अब चीनी सरकार ने इसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, जिसके बाद यह फिर चर्चा में आ गया. दरअसल, चेन सरनेम वाला एक कर्मचारी जियांग्शु प्रांत की एक कंपनी में काम करता था. कमर में लगी चोट के कारण उसने दो बार मेडिकल लीव ले ली थी. करीब एक महीने के बाद जब वह ड्यूटी पर आया तो उसके पैर में दर्द होने लगा. इसके चलते डॉक्टर ने उसे फिर से एक हफ्ते के आराम की सलाह दी, लेकिन कंपनी इसके लिए तैयार नहीं हुई और चेन को नौकरी से निकाल दिया.
कंपनी ने नौकरी से निकाला
जब मामला कोर्ट पहुंचा तो कंपनी ने कहा कि चेन बीमारी का बहाना बना रहे हैं. यह साबित करने के लिए कंपनी ने कहा कि चेन ने जिस दिन सिक लीव ली थी, उसी दिन उनकी फिटनेस ऐप बता रही है कि वो 16,000 स्टेप्स चले थे. कंपनी ने कोर्ट में चैट लॉग औग सर्विलांस फुटेज भी दायर किए और कहा कि चेन वहां रनिंग कर रहे थे. इसके जवाब में चेन ने कहा कि उनके पास मेडिकल रिपोर्ट है और कंपनी प्राइवेट डेटा को यूज कर उनकी प्राइवेसी का उल्लंघन कर रही है. इसके बाद कोर्ट ने कंपनी को चेन को मुआवजा देने का आदेश सुनाया. कंपनी ने इसके खिलाफ अपील की, लेकिन कोर्ट ने एक बार फिर कहा कि चेन को गैरकानूनी तरीके से नौकरी से निकाला गया.
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जल्द खत्म होगा Galaxy Z TriFold का इंतजार, अगले महीने लॉन्च हो सकता है सैमसंग का पहला ट्राईफोल्ड फोन ]]></description>
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:41 +0530</pubDate>
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<title>जल्द खत्म होगा Galaxy Z TriFold का इंतजार, अगले महीने लॉन्च हो सकता है सैमसंग का पहला ट्राईफोल्ड फोन</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy Z TriFold: दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग के पहले ट्राई-फोल्ड फोन Galaxy Z TriFold का इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है. एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे अगले महीने लॉन्च किया जा सकता है. इसके लिए कंपनी एक स्पेशल इवेंट आयोजित करेगी और इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं. ऐसे भी कयास लगाए जा रहे हैं कि लॉन्च होते ही यह फोन सेल के लिए अवेलेबल हो जाएगा. आइए फोन की एक्सपेक्टेड लॉन्च डेट और फीचर्स के बारे में जानते हैं.
Galaxy Z TriFold के फीचर्स
Galaxy Z TriFold में 6.5 इंच की Dynamic AMOLED 2X स्क्रीन मिल सकती है, जो अनफोल्ड होने पर 10 इंच की हो जाएगी. इसे Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर से लैस किया जा सकता है, जिसके 16GB RAM और 256GB-1TB स्टोरेज के साथ पेयर होने की उम्मीद है. यह एंड्रॉयड 16 पर बेस्ड One UI 8.0 पर रन करेगा. एक बार अनफोल्ड होने पर यह Galaxy Z Fold 7 जैसा लगेगा. इसके दो हिंज होंगे, जिससे फोन तीन भागों में फोल्ड होगा. पूरी तरह अनफोल्ड होने पर इसकी मोटाई 4.2mm और फोल्ड होने पर लगभग 14mm रह सकती है.&amp;nbsp;
कैमरा और बैटरी
Galaxy Z TriFold में 200MP का प्राइमरी कैमरा मिलना लगभग तय है. इसके ट्रिपल कैमरा सेटअप के दो बाकी लेंस 12MP अल्ट्रावाइड और 50MP टेलीफोटो सेंसर होंगे. इसके फ्रंट में 10-10MP के दो सेंसर दिए जा सकते हैं. बैटरी कैपेसिटी की बात करें तो इसे 5,600 mAh की बैटरी दी जा सकती है, जो Galaxy Z Fold 7 की 4,400mAh वाली बैटरी की तुलना में काफी बड़ी होगी.&amp;nbsp;
कब होगा लॉन्च और कितनी हो सकती है कीमत?
ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस फोन को 5 दिसंबर को लॉन्च किया जा सकता है. कंपनी शुरुआत में इसकी 20,000-30,000 यूनिट्स ही बेचने का प्लान बना रही है. अभी कंपनी सेल की बजाय अपनी टेक्नोलॉजिकल स्किल दिखाना चाहती है. आधिकारिक तौर पर इसकी कीमत सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह लगभग 2.60 लाख रुपये की कीमत पर लॉन्च होगा. इस फोन को चीनी कंपनी Huawei के Mate XT से टक्कर मिलेगी. Huawei का Mate XT दुनिया का पहला ट्राईफोल्ड फोन है और इसका सेकंड जनरेशन मॉडल भी लॉन्च हो चुका है.
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<pubDate>Thu, 13 Nov 2025 09:51:41 +0530</pubDate>
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<title>आपके फोन में आया वीडियो असली है या AI से बनाया गया? इन 6 तरीकों से मिनटों में कर सकते हैं पता</title>
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<description><![CDATA[ आपके फोन में आया वीडियो असली है या AI से बनाया गया? इन 6 तरीकों से मिनटों में कर सकते हैं पता ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:43:03 +0530</pubDate>
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<title>3 दिन तक कीचड़ में रहा आईफोन 17 प्रो, फिर ऑन किया तो हुआ...., यूजर ने शेयर किया हैरान कर देने वाला वाकया</title>
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<description><![CDATA[ हाल ही में फिलीपींस और वियतनाम में कल्मेगी तूफान ने कहर बरपाया था. इसमें 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा था. इस तूफान के बाद एक आईफोन यूजर ने हैरान कर देने वाला वाकया शेयर किया है. रेडिट पर यूजर ने लिखा कि उसका आईफोन तीन दिनों तक कीचड़ और बाढ़ के पानी में दबा रहा. इसके बाद जब उसने इसे ऑन किया तो बिना किसी दिक्कत के ऑन हो गया.&amp;nbsp;
हाथ से छूटकर पानी में गिर गया था फोन
यूजर ने लिखा कि तूफान के कारण काफी विनाश हुआ है. उसका घर टूट गया और सामान बह गया है. तूफान आने के करीब 15 मिनट बाद उसे पता चला कि क्या हो रहा है. इस दौरान उसका आईफोन हाथ से फिसलकर पानी में गिर गया था. तूफान गुजर जाने के बाद जब उसने अपनी चीजों को खोजना शुरू किया तो उसे कीचड़ से भरा आईफोन मिला. उसने तुरंत फोन को साफ कर चार्जिंग पर लगा दिया. चार्ज होते ही आईफोन ऑन हो गया. यूजर ने बताया कि ऑन करने के लिए इसे चार्ज करना पड़ा. कीचड़ में दबे रहने पर भी इसमें न तो कोई स्क्रैच आया है और न ही कोई और दिक्कत.&amp;nbsp;
कितना ड्यूरेबल है आईफोन 17 प्रो?
ऐप्पल के आईफोन 17 प्रो को IP68 रेटिंग मिली हुई है, जिसका मतलब है कि यह पानी, डस्ट और हल्की बूंदों को सहन कर सकता है. ऐप्पल का कहना है कि 30 मिनट तक पानी के 6 मीटर अंदर तक रह सकता है. हालांकि, यह वाटर रजिस्टेंस परमानेंट नहीं है और लगातार यूज के बाद कुछ समय बाद कम भी हो सकता है. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ऐप्पल लिक्विड डैमेज को वारंटी में कवर नहीं करती है. यानी पानी या दूसरे लिक्विड से आई खराबी वारंटी में कवर नहीं होगी.
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:43:03 +0530</pubDate>
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<title>OnePlus, Realme और Vivo! 25 हजार रुपये की रेंज में कौन दे रहा सबसे जबरदस्त परफॉर्मेंस?</title>
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<description><![CDATA[ OnePlus, Realme और Vivo! 25 हजार रुपये की रेंज में कौन दे रहा सबसे जबरदस्त परफॉर्मेंस? ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:43:02 +0530</pubDate>
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<title>स्पैम कॉल से हैं परेशान? संचार साथी पोर्टल पर ऐसे करें कॉल करने वालों की शिकायत</title>
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<description><![CDATA[ मोबाइल पर दिनभर आने वाली अनचाही कॉल्स से सारे यूजर्स परेशान हैं. टेलीमार्केटिंग से लेकर बैंक और इंश्योरेंस कंपनियों तक के फोन ने लोगों का जीना मुश्किल किया हुआ है. तमाम कोशिशों के बाद इन पर लगाम लगती नजर नहीं आ रही. जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों ने स्पैम कॉल को पहचानने के लिए AI-बेस्ड सिस्टम बनाया है, लेकिन फिर भी कई बार स्पैम कॉल लोगों को परेशान करती हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं. आज हम आपको इसकी शिकायत करने का तरीका बताने जा रहे हैं.&amp;nbsp;
TRAI ने बरती सख्ती
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने स्पैम कॉल को रोकने के लिए सख्ती दिखाई है. अब TRAI ने केवल रजिस्टर्ड नंबरों के जरिए ही कमर्शियल कम्यूनिकेशन की इजाजत दी है. अगर कोई अनरजिस्टर्ड नंबर से स्पैम कॉल करेगा तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा. नियमों के तहत TRAI ऐसे कॉलर के सारे टेलीकॉम रिसोर्सेस को सस्पेंड कर सकती है या उसका कनेक्शन भी काट सकती है.
संचार साथी पोर्टल पर करें शिकायत
अगर आपको भी किसी अनरजिस्टर्ड नंबर से स्पैम या मार्केटिंग कॉल्स आती हैं तो आप संचार साथी पोर्टल पर इसकी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसका तरीका बेहद आसान है और कुछ ही स्टेप्स में आपकी शिकायत रजिस्टर हो जाएगी.&amp;nbsp;सबसे पहले संचार साथी पोर्टल पर जाएं और सिटीजन सेंट्रिक सर्विसेस पर टैप या क्लिक करें. इसके बाद &#039;रिपोर्ट सस्पेक्टेड एंड अनसॉलिस्टिड कमर्शियल कम्यूनिकेशन&#039; पर क्लिक करें. इसके बाद नया पेज खुलेगा, जहां आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसमें अलग-अलग ऑप्शन में चुनें और फॉर्म सबमिट कर दें. ध्यान रहे कि शिकायत दर्ज करने के लिए आपके पास स्क्रीनशॉट होना चाहिए.
7 दिनों के भीतर करें शिकायत
अगर आप चाहते हैं कि स्पैम कॉल करने वालों के खिलाफ एक्शन हो तो आपको 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट करना होगा. अगर आप कोई स्पैम कॉल या SMS मिलने के 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट करते हैं तो कॉलर या मैसेज भेजने वाले के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा. सात दिन बीत जाने पर शिकायत करने के बाद उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं होगा. हालांकि, उसकी पहचान में सिस्टम को मदद मिलेगी.
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:43:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या iPhone Air 2 नहीं किया होगा लॉन्च? ऐप्पल ने इस वजह से ले लिया बड़ा फैसला</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल ने iPhone Air 2 पर काम करना बंद कर दिया है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईफोन एयर की कमजोर बिक्री को देखते हुए कंपनी इसके सेंकड जनरेशन मॉडल को नहीं लाएगी. इसे 2026 में आईफोन 18 सीरीज के साथ लॉन्च किया जाना था, लेकिन अब इसकी लॉन्चिंग अनिश्चितकाल के लिए टल गई है. ऐप्पल को उम्मीद थी कि पतले डिजाइन के कारण आईफोन एयर को लोग पसंद करेंगे, लेकिन बैटरी लाइफ और कैमरा फीचर में कमी के कारण लोग इसे खरीद नहीं रहे हैं. &amp;nbsp;
बंद हो गया आईफोन एयर का प्रोडक्शन
सितंबर में लॉन्चिंग के बाद से ही आईफोन एयर की बिक्री कमजोर रही है. इसके चलते ऐप्पल ने इसकी मैन्युफैक्चरिंग को कम कर दिया था. ऐप्पल की सप्लायर लक्सशेयर ने अक्टूबर के अंत में इसका प्रोडक्शन बंद कर दिया था. वहीं दूसरी सप्लायर कंपनी फॉक्सकॉन इस महीने के अंत में प्रोडक्शन बंद कर देगी.&amp;nbsp;
लाइनअप का चौथा मॉडल डिसाइड नहीं कर पाई है ऐप्पल
ऐप्पल लंबे समय से अपनी लाइनअप का चौथा मॉडल डिसाइड नहीं कर पाई है. स्टैंडर्ड और दो प्रो मॉडल्स के साथ कंपनी ने पहले 5.4 इंच स्क्रीन वाले मिनी आईफोन उतारे, लेकिन इनकी बिक्री भी खास नहीं रही. इसके बाद इनकी जगह प्लस मॉडल को लाया गया. कुछ साल तक इन्हें लॉन्च करने के बाद ऐप्पल ने आईफोन 17 सीरीज में इसकी जगह आईफोन एयर को उतारा. यह मॉडल भी अपनी पहचान बना पाने में सफल नहीं हो सका.
सैमसंग भी बुरी फंसी
ऐप्पल की तरह सैमसंग भी पतला मॉडल उतारकर पछता रही है. कंपनी ने इस साल की शुरुआत में गैलेक्सी S25 Edge को लॉन्च किया था, लेकिन इसकी बिक्री भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही. इसके चलते सैमसंग ने इस फोन को बंद करने का फैसला लिया है. कंपनी ने अपने कर्मचारियों को मैसेज दे दिया है कि Edge लाइन को बंद किया जा रहा है और निकट भविष्य में इसकी रीलॉन्चिंग के आसार भी नहीं हैं.
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बैटरी पीने वाली ऐप्स की खैर नहीं, गूगल ने उठाया बड़ा कदम, अब होगा यह बदलाव ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:43:01 +0530</pubDate>
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<title>खत्म होने वाला है कीबोर्ड का जमाना! 2028 तक ये टेक्नोलॉजी ले लेगी टाइपिंग की जगह, रिपोर्ट में हो गया खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ खत्म होने वाला है कीबोर्ड का जमाना! 2028 तक ये टेक्नोलॉजी ले लेगी टाइपिंग की जगह, रिपोर्ट में हो गया खुलासा ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:43:01 +0530</pubDate>
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<title>बैटरी पीने वाली ऐप्स की खैर नहीं, गूगल ने उठाया बड़ा कदम, अब होगा यह बदलाव</title>
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<description><![CDATA[ अगर आपके फोन की बैटरी लंबी नहीं चलती तो इसका मतलब यह नहीं है कि फोन या बैटरी में कोई खराबी है. कुछ ऐप्स भी ऐसी होती हैं, जो आपके फोन की बैटरी को पीती रहती हैं. हालांकि, जल्द ही ऐसी ऐप्स से छुटकारा मिलने वालाहै. गूगल ने फैसला लिया है कि वह प्ले स्टोर पर ऐसी ऐप्स की पहचान करेंगी, जो ज्यादा बैटरी की खपत करती हैं और उनके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा. इन ऐप्स पर बैटरी खपत वाला वार्निंग टैग दिए जाने की भी प्लानिंग चल रही है.
गूगल ने लिया यह फैसला
गूगल ने ऐप डेवलपर्स को नए निर्देश दिए हैं. अब एंड्रॉयड ऐप्स को प्ले स्टोर पर लिस्ट करने से पहले एक नए परफॉर्मेंस चेक से गुजरना होगा. इनमें &#039;वेक लॉक्स&#039; नाम का भी एक चेक होगा. वेक लॉक्स के कारण स्क्रीन बंद होने पर भी फोन अवेक होता है. म्यूजिक प्लेबैक और फाइल्स डाउनलोड करते समय यह फीचर काम आता है, लेकिन यह बैटरी की खपत ज्यादा करता है.&amp;nbsp;
1 मार्च से लागू होंगे नए नियम
1 मार्च, 2026 &amp;nbsp;से में बिना कारण वेक लॉक्स का ज्यादा यूज किया करने वाली ऐप्स की खैर नहीं होगी. गूगल ने कहा है कि वह इनके खिलाफ एक्शन लेगी और ऐसी ऐप्स को ग्राहकों को रिकमंड नहीं किया जाएगा. साथ ही ऐप के नीचे एक वार्निंग लेबल भी लगाएगी, जिस पर लिखा होगा कि यह ऐप ज्यादा बैटरी की खपत करती है. गूगल चाहती है कि डेवलपर्स ऐसी ऐप्स बनाएं, जो ज्यादा पावर एफिशिएंट हो. साथ ही वह पारदर्शिता बरतते हुए यूजर्स को बताना चाहती है कि कौन-सी ऐप्स से फोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो सकती है. दरअसल, कई ऐप्स बैकग्राउंड में एक्टिव रहती है और लोकेशन समेत कई टाइप का डेटा फैच करती रहती हैं. इससे फोन लॉक होने पर भी उसकी बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने लगती है.
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स्पैम कॉल से हैं परेशान? संचार साथी पोर्टल पर ऐसे करें कॉल करने वालों की शिकायत ]]></description>
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:43:01 +0530</pubDate>
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<title>कौन हैं नोआम शज़ीर? वो AI जीनियस जिसके लिए Google ने खर्च किए 22,000 करोड़, अब कंपनी में मच गई हलचल</title>
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<description><![CDATA[ Who is Noam Shazeer: 2024 के आखिर में Google ने जब Character.AI के साथ एक लाइसेंसिंग डील के ज़रिए अपने पूर्व कर्मचारी नोआम शज़ीर (Noam Shazeer) को दोबारा जोड़ा, तब यह खबर दुनियाभर की टेक इंडस्ट्री में छा गई. शज़ीर Google के शुरुआती इंजीनियर्स में से एक रहे हैं जिन्होंने आगे चलकर Google DeepMind में काम किया और Gemini प्रोजेक्ट के शुरुआती विकास में अहम भूमिका निभाई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी वापसी के बाद Gemini की दिशा और तकनीकी स्ट्रक्चर पर उनका गहरा प्रभाव पड़ा है.
लेकिन अब एक नई रिपोर्ट सामने आई है जिसके मुताबिक शज़ीर के कुछ विवादित बयानों ने Google के अंदर असंतोष पैदा कर दिया है. कंपनी ने उनके कुछ कमेंट्स को लेकर कार्रवाई भी की है और उन्हें आंतरिक मंचों पर सेंसर किया गया है.
विवाद की वजह बना बयान
मामला तब सामने आया जब शज़ीर ने कंपनी के एक इंटरनल फोरम पर ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी कर्मचारियों के समर्थन को लेकर अपनी राय रखी. उन्होंने लिखा, &amp;ldquo;मेरा मानना नहीं है कि इंसानों में &amp;lsquo;जेंडर&amp;rsquo; जैसी कोई निश्चित विशेषता होती है. न ही मैं मानता हूं कि भगवान किसी को गलत शरीर में भेजते हैं. बच्चों को बांझ बनाना भी सही नहीं है. हर किसी को अपनी मान्यताओं का अधिकार है लेकिन मैं इन मान्यताओं से सहमत नहीं हूं.&amp;rdquo;
उनके इस बयान के बाद Google के कई कर्मचारी भड़क उठे. वहीं, Elon Musk ने X (पूर्व Twitter) पर उनकी राय का समर्थन किया और लिखा, &amp;ldquo;Noam is right.&amp;rdquo; मस्क ने पहले भी &amp;lsquo;वोक माइंड वायरस&amp;rsquo; के खिलाफ अपनी राय खुलकर रखी है इसलिए उनका यह समर्थन आश्चर्यजनक नहीं था.
नोआम शज़ीर का टेक्नोलॉजी सफर
नोआम शज़ीर ने साल 2000 में Google जॉइन किया था और वे कंपनी के शुरुआती तकनीकी स्तंभों में से एक बने. वे उस टीम का हिस्सा थे जिसने Google Brain प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया और Attention Is All You Need नामक प्रसिद्ध शोध-पत्र के सह-लेखक रहे. इसी पेपर से Transformer Model की शुरुआत हुई वही टेक्नोलॉजी जिसने आज के Large Language Models (LLMs) जैसे ChatGPT और Gemini की नींव रखी.
Google में रहते हुए शज़ीर और उनकी टीम ने Meena नाम का चैटबॉट बनाया था, लेकिन जब कंपनी ने उसे सार्वजनिक नहीं किया तो उन्होंने 2021 में Google छोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने Character.AI नामक स्टार्टअप की स्थापना की जो यूज़र्स को मशहूर किरदारों के AI अवतार से चैट करने की सुविधा देता है.
Google में फिर से वापसी और नए विवाद
2022 में ChatGPT के आने के बाद जब AI की दुनिया में हलचल मची तब Google ने भी अपनी रफ्तार तेज कर दी और Bard (अब Gemini) को लॉन्च किया. इसी बीच Google ने Character.AI के साथ बड़ी डील की जिसके तहत नोआम शज़ीर, डेनियल डी फ्रेटस और उनकी रिसर्च टीम के कई सदस्य दोबारा Google से जुड़ गए.
हालांकि, अब जब शज़ीर की कुछ व्यक्तिगत रायों ने कंपनी के भीतर तनाव बढ़ा दिया है तो सवाल उठ रहा है कि क्या Google के भीतर AI इनोवेशन और पर्सनल ओपिनियन के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है.
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:43:00 +0530</pubDate>
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<title>अब iPhone खुद बोलेगा आपकी भाषा! जानिए कैसे सेकंडों में रियल&#45;टाइम में करें ट्रांसलेट</title>
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<description><![CDATA[ iPhone Real-Time Translation: Apple ने हमेशा अपनी इनोवेशन और यूज़र-फ्रेंडली फीचर्स से टेक्नोलॉजी की दुनिया में नए मानक स्थापित किए हैं. अब कंपनी ने एक ऐसा फीचर पेश किया है जो भाषा की दीवार को पूरी तरह मिटा देगा. जी हां, अब आपका iPhone फोन कॉल के दौरान रियल-टाइम में बातचीत को ट्रांसलेट कर सकता है. मतलब, अगर सामने वाला व्यक्ति किसी दूसरी भाषा में बात कर रहा है तो आपका iPhone तुरंत उसका अनुवाद करके आपकी भाषा में सुना देगा.
कैसे काम करता है यह रियल-टाइम ट्रांसलेशन फीचर?
Apple ने अपने नवीनतम iOS अपडेट में Live Call Translation नाम का फीचर जोड़ा है. यह फीचर AI और मशीन लर्निंग की मदद से रियल-टाइम में दोनों तरफ की बातचीत को समझता और ट्रांसलेट करता है. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई फ्रेंच में बात कर रहा है तो iPhone तुरंत उसकी आवाज़ को आपके चुने हुए भाषा जैसे हिंदी या अंग्रेजी में बदल देगा.
इस फीचर के लिए आपको किसी थर्ड-पार्टी ऐप की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. यह सीधे iPhone के कॉल इंटरफेस में इनबिल्ट रहेगा. ट्रांसलेशन की भाषा चुनने के बाद बाकी का काम AI अपने आप संभाल लेता है.
कौन-कौन सी भाषाएं होंगी सपोर्टेड?
शुरुआत में यह फीचर कुछ प्रमुख भाषाओं जैसे अंग्रेज़ी, स्पैनिश, फ्रेंच, जर्मन, जापानी और हिंदी में उपलब्ध रहेगा. Apple आने वाले अपडेट्स में और भाषाएं जोड़ने की योजना बना रहा है ताकि यूज़र्स दुनिया के किसी भी कोने में बिना रुकावट बातचीत कर सकें.
कैसे करें इसे इस्तेमाल?

सबसे पहले अपने iPhone को नवीनतम iOS वर्ज़न पर अपडेट करें.
कॉल करते समय स्क्रीन पर दिखने वाले Translate बटन को टैप करें.
अपनी भाषा और सामने वाले की भाषा चुनें.
अब बातचीत शुरू करें बाकी काम iPhone अपने आप कर देगा.

भविष्य की ओर एक और कदम
Apple का यह रियल-टाइम कॉल ट्रांसलेशन फीचर सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि एक ग्लोबल कम्युनिकेशन क्रांति है. यह भाषा की बाधा को खत्म करते हुए लोगों को पहले से कहीं ज्यादा करीब लाने का काम करेगा. अब चाहे कोई अमेरिका में हो या जापान में आपका iPhone बोलेगा आपकी भाषा में आपकी बात.
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:43:00 +0530</pubDate>
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<title>आपका फोन हैक हो गया है? ये छिपे संकेत बताएंगे सच्चाई, देर हुई तो जा सकते हैं आपके सारे डेटा</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Tips: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है बैंकिंग, सोशल मीडिया, पर्सनल फोटो, ऑफिस फाइलें सब कुछ इसमें सुरक्षित रहता है. लेकिन ज़रा सोचिए, अगर यही फोन किसी हैकर के हाथ लग जाए तो? कई बार हमें पता भी नहीं चलता और हमारा फोन चुपचाप हैक हो चुका होता है. कुछ छोटे-छोटे संकेत ऐसे हैं जो अगर समय रहते पहचान लिए जाएं तो आप अपने डेटा को चोरी होने से बचा सकते हैं.
फोन की स्पीड अचानक धीमी पड़ जाना
अगर आपका फोन अचानक स्लो होने लगे, ऐप्स अपने-आप बंद होने लगें या स्क्रीन बार-बार फ्रीज़ हो जाए तो यह हैकिंग का संकेत हो सकता है. हैकर्स अक्सर बैकग्राउंड में स्पाइवेयर या ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर देते हैं जिससे फोन की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है.
बैटरी असामान्य रूप से जल्दी खत्म होना
सामान्य इस्तेमाल के बावजूद अगर बैटरी तेजी से खत्म हो रही है तो यह किसी बैकग्राउंड प्रोसेस का नतीजा हो सकता है. ये प्रोसेस आपके फोन से डेटा चोरी कर रहे होते हैं या कैमरा व माइक्रोफोन को एक्टिव रखे होते हैं.
डेटा या इंटरनेट की खपत बढ़ जाना
अगर आपका इंटरनेट डेटा बिना किसी भारी डाउनलोड के खत्म हो रहा है तो सतर्क हो जाइए. हैकिंग ऐप्स आपके फोन से लगातार सर्वर को डेटा भेजते रहते हैं जिससे मोबाइल डेटा की खपत असामान्य रूप से बढ़ जाती है.
अनजान ऐप्स या सेटिंग्स में बदलाव
अगर आपको अपने फोन में कोई ऐसा ऐप दिखे जिसे आपने इंस्टॉल नहीं किया या आपकी सेटिंग्स अपने-आप बदल गई हों तो यह साफ संकेत है कि किसी ने फोन तक एक्सेस पा लिया है.
अजीब आवाज़ें या पॉप-अप्स
कॉल के दौरान हल्की गूंज, क्लिक की आवाज़ या स्क्रीन पर बार-बार पॉप-अप विज्ञापन आना भी हैकिंग का संकेत हो सकता है. यह बताता है कि फोन में कोई दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर काम कर रहा है.
कैसे करें बचाव?
अगर आपको इन संकेतों में से कोई भी दिखे तो तुरंत फोन को फैक्ट्री रीसेट करें, पासवर्ड बदलें और सभी अकाउंट्स से लॉगआउट करें. भरोसेमंद एंटीवायरस ऐप इंस्टॉल करें और अनजान लिंक या फाइल्स पर क्लिक करने से बचें.
आपका फोन आपकी डिजिटल पहचान है इसे सुरक्षित रखना आपकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. याद रखें, थोड़ी सी सतर्कता आपको बड़े साइबर खतरे से बचा सकती है.
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<pubDate>Tue, 11 Nov 2025 15:42:59 +0530</pubDate>
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<title>नाम के कारण जाने वाली थी ऐप्पल के इस कर्मचारी की नौकरी, कहानी सुनकर आप भी चौंक जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल के एक पूर्व कर्मचारी को अपने नाम के कारण भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था और उसकी नौकरी पर भी खतरा आ गया था. यह वाकया जानकार आप नहीं कह पाएंगे कि नाम में क्या रखा है. यह घटना करीब 10 साल पहले की है, जब ऐप्पल स्टोर में काम करने वाले सैम संग अपने नाम के कारण चर्चा में आ गए. उनका नाम ऐप्पल की सबसे बड़ी कंपीटिटर कंपनी सैमसंग से एकदम मिलता है. इस कारण इंटरनेट से लेकर प्रेस तक में उनकी चर्चा होने लगी और उन्हें नौकरी जाने का खतरा सताने लगा था.
किसी ने मजाक में इंटरनेट पर डाल दी थी फोटो
2012 में किसी ने संग के ऐप्पल बिजनेस कार्ड की फोटो इंटरनेट पर पोस्ट कर दी थी. हाल ही में संग ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस मजाक के कारण उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई. उनके फोन पर कॉल्स और मैसेजेज की बाढ़ आ गई और रिपोर्टर इंटरव्यू करने के लिए स्टोर पर पहुंचने लगे. संग ने बताया कि वो इससे डर गए थे. वो कैसे भी छिपकर अपनी नौकरी बचाना चाहते थे.
पहचान छिपाकर की नौकरी
संग ने बताया कि इसके बाद ऐप्पल मैनेजमेंट ने उनकी मदद की और स्टोर से हटाकर दूसरी जगह काम पर लगा दिया गया. उनके सहकर्मियों को भी बताया गया कि संग के बारे में किसी को कुछ न बताएं. सिर्फ इतना ही नहीं, उनका बिजनेस कार्ड वापस ले लिया गया और उन्होंने कुछ समय नई पहचान के साथ भी काम किया. 2013 में संग ने ऐप्पल की नौकरी छोड़ दी और अगले साल चैरिटी के लिए पैसा जुटाने के लिए अपनी यूनिफॉर्म और बिजनेस कार्ड नीलाम कर दिया.
बदल लिया नाम
संग ने बताया कि यह किस्सा आज भी उनके जहन में बसा हुआ है. इस अनचाही शोहरत से पीछा छुड़ाने के लिए उन्होंने अपना नाम बदलकर स्ट्रॉन कर लिया है. उन्होंने बताया कि उस समय वो इसे समझ नहीं पाए थे, लेकिन यह पूरा वाकया मजेदार था.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>गूगल के इस सिस्टम के आगे सुपरकंप्यूटर भी फेल! 13,000 गुना ज्यादा है स्पीड, बदल देगा कई चीजों का भविष्य</title>
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<description><![CDATA[ गूगल ने क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कंपनी ने अपनी Willow क्वांटम कंप्यूटिंग चिप पर Quantum Echoes नाम का एक एल्गोरिद्म डेवलेप किया है, जो क्लासिक सुपरकंप्यूटर की तुलना में कई हजार गुना तेज है. गूगल सीईओ सुंदर पिचई ने बताया कि इस परफॉर्मेंस को दोहराया भी जा सकता है. इस एल्गोरिद्म की वजह से दवाईयों की खोज आसान और तेजी होगी और मैटेरियल साइंस को बड़ी मदद मिलेगी. आइए इस बारे में डिटेल से जानते हैं.
सबसे एडवांस सुपरकंप्यूटर से 13,000 गुना तेज
नैचर जर्नल में छपे पेपर के अनुसार, गूगल ने कहा कि नया एल्गोरिद्म दुनिया के सबसे एडवांस्ड सुपरकंप्यूटर से 13,000 गुना तेज है. अगले पांच सालों में यूजफुल क्वांटम टेक्नोलॉजी उपलब्ध हो जाएगी और यह मेडिसिन और मैटेरियल साइंस का भविष्य बदल देगी. सुंदर पिचई ने बताया कि Willow चिप ने पहला वेरिफाई किया जा सकने वाला क्वांटम एडवांटेज हासिल कर लिया है. इस चिप पर रन होने वाला Quantum Echoes एल्गोरिद्म न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस का यूज कर एटम के बीच की इंटरेक्शन को एक्सप्लेन कर सकता है. इससे दवाओं की खोज और मैटेरियल साइंस का काम आसान हो जाएगा.
रियल वर्ल्ड ऐप्लिकेशन की दिशा में बड़ा कदम- पिचई
पिचई ने कहा कि इस रिजल्ट को वेरिफाई की जा सकता है. यानी दूसरे क्वांटम कंप्यूटर पर भी ऐसे नतीजे हासिल किए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग की रियल वर्ल्ड ऐप्लिकेशन की दिशा में यह उपलब्धि एक बड़ा कदम है. गूगल के इस ऐलान के बाद इसकी मालिकाना हक वाली कंपनी अल्फाबेट के शेयरों में 2.4 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई.&amp;nbsp;
क्या होते हैं क्वांटम कंप्यूटर्स?
क्वांटम कंप्यूटर ट्रेडिशनल कंप्यूटर की तरह छोटे सर्किट का यूज कर कैलकुलेशन करते हैं, लेकिन ये सीक्वेंस वाइज ऐसा न कर पैरेलली ऐसा करते हैं, जिस वजह से इनकी स्पीड कई गुना तेज होती है. कई कंपनियों ने ट्रेडिशनल कंप्यूटर को पीछे छोड़ने वाले क्वांटम सिस्टम बनाने का दावा किया है, लेकिन असली चुनौती असल जीवन में इसके यूज की पहचान को लेकर आती है.
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AI को रेगुलेट करने की दिशा में सरकार ने उठाया बड़ा कदम, AI&#45;जनरेटेड कंटेट पर लेबल होगा अनिवार्य</title>
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<description><![CDATA[ भारत सरकार ने AI को रेगुलेट और इसके दुरुपयोग को रोकने की दिशा में पहला कदम उठा लिया है. मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी (Meity) ने नए नियमों के प्रस्ताव में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए यह जरूरी कर दिया है कि उनके यूजर AI से जनरेट या ऑल्टर किए गए फोटो और वीडियो समेत हर प्रकार के कंटेट पर लेबल लगाएं. प्रस्ताव में लेबलिंग की जिम्मेदारी सोशल मीडिया कंपनियों पर डाली गई है, लेकिन ये कंपनियां उन अकाउंट्स को फ्लैग कर सकती हैं, जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. ये नियम लागू होने पर AI से बनाए गए और ऑल्टर किए गए कंटेट पर इसकी जानकारी वाला लेबल होना अनिवार्य हो जाएगा.&amp;nbsp;
लेबल के लिए ये शर्तें
नए नियम आने के बाद सोशल मीडिया कंपनियों को AI कंटेट पर एकदम साफ नजर आने वाला AI वाटरमार्क पोस्ट करना होगा. इसका साइज या ड्यूरेशन कुल कंटेट के 10 प्रतिशत हिस्से से ज्यादा होना चाहिए. उदाहरण के तौर पर अगर कोई AI जनरेटेड वीडियो 10 मिनट का है तो इसमें एक मिनट तक AI वाटरमार्क नजर आना चाहिए. अगर कंपनियां इस मामले में कोताही बरतती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है.&amp;nbsp;
6 नवंबर तक सुझाव देने का समय
सरकार ने प्रस्तावित नियमों को लेकर इंडस्ट्री के स्टेक होल्डर्स से सुझाव मांगे है और 6 नवंबर तक ये सुझाव दिए जा सकते हैं. केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इंटरनेट पर डीपफेक कंटेट तेजी से बढ़ रहा है. ऐसे में नए नियम यूजर्स, कंपनियों और सरकार की जवाबदेही बढ़ाएंगे. एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि सरकार ने AI कंपनियों से बात कर ली है और उन्होंने बताया कि मेटाडेटा के जरिए AI कंटेट की पहचान हो सकती है. अब डीपफेक की पहचान और रिपोर्ट करने की जिम्मेदारी कंपनियों पर है. नए नियमों के तहत AI कंटेट को कंपनियों को अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस में शामिल करना होगा.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:10 +0530</pubDate>
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<title>PhonePe और Google Pay के लिए खतरे की घंटी, Arattai के बाद अब Zoho लाएगी UPI ऐप</title>
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<description><![CDATA[ Arattai ऐप और Ulaa ब्राउजर के साथ धूम मचाने वाली जोहो अब पेटीएम और फोनपे जैसी ऐप्स के पसीने छुड़ाने की तैयारी कर रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, जोहो अब UPI-बेस्ड कंज्यूमर पेमेंट प्लेटफॉर्म Zoho Pay लॉन्च करेगी, जो पेटीएम, फोनपे और गूगल पे की सीधी टक्कर देगा. बता दें कि जोहो की Arattai ऐप को WhatsApp के मेड इन इंडिया ऑल्टरनेटिव के तौर पर देखा जा रहा है और पिछले कुछ दिनों से इसके डाउनलोड होने की संख्या तेजी से बढ़ी है. इसी तरह Ulaa ब्राउजर भी गूगल क्रोम को कड़ी टक्कर दे रहा है.
स्टैंडअलोन ऐप होगी Zoho Pay&amp;nbsp;
रिपोर्ट्स के अनुसार, Zoho Pay एक स्टैंडअलोन ऐप होगी और इसे Arattai मैसेंजर में भी इंटीग्रेट किया जा सकता है. इससे व्हाट्सऐप की तरह Arattai यूजर्स को भी एक ही ऐप में चैटिंग और पेमेंट दोनों ऑप्शन मिल जाएंगे. जोहो के पास पहले से ही पेमेंट-एग्रीगेटर लाइसेंस है और वह जोहो बिजनेस के जरिए बिजनेस पेमेंट ऑफर कर रही है. अब UPI पेमेंट इकोसिस्टम में आने से मार्केट में मुकाबला बढ़ेगा और पहले से अपने पैर जमा चुकी कंपनियों को भी नई चुनौती मिलेगी.
कब तक लॉन्च होने की उम्मीद?
अभी तक Zoho Pay ऐप के लॉन्च होने की डेट सामने नहीं आई है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि अगली तिमाही में इसे लॉन्च किया जा सकता है. फिलहाल इस ऐप की टेस्टिंग चल रही है और इसे एंड्रॉयड के साथ-साथ iOS के लिए भी लॉन्च किया जाएगा.
UPI से होता है सबसे ज्यादा डिजिटल ट्रांजेक्शन
भारत का डिजिटल पेमेंट नेटवर्क दुनिया में सबसे ज्यादा एक्टिव है. यहां UPI के जरिए सबसे ज्यादा डिजिटल पेमेंट होती है. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में UPI के जरिए 17,221 करोड़ ट्रांजेक्शन हुई थी, जबकि 2019 में यह संख्या 1,079 करोड़ थी. इन ट्रांजेक्शन की टोटल वैल्यू देखी जाए तो 2019 में 18.4 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ था, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर लगभग 247 लाख करोड़ का लेनदेन हुआ.
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फ्लाइट में बैन हो सकता है यह गैजेट, सरकार कर रही तैयारी, यात्रियों को होगी मुश्किल ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फ्लाइट में बैन हो सकता है यह गैजेट, सरकार कर रही तैयारी, यात्रियों को होगी मुश्किल</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप अक्सर हवाई यात्रा करते हैं तो यह खबर आपके काम की है. भारत सरकार जल्द ही हवाई यात्रा के दौरान फ्लाइट में पावर बैंक ले जाने या यूज करने पर रोक लगा सकती है. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) इस संबंध में दिशानिर्देश बनाने में जुटा हुआ है और जल्दी ही इन्हें अंतिम रूप दिया जा सकता है. बता दें कि हालिया कुछ दिनों में इंडिगो की एक फ्लाइट समेत कई फ्लाइट्स में पावर बैंक के कारण आगजनी की घटनाएं हुई हैं. इसे देखते हुए पावर बैंक पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी हो रही है.
पावरबैंक ने पकड़ ली थी आग
19 अक्टूबर को दिल्ली से दिमापुर जाने वाली इंडिगो की एक फ्लाइट में सवार यात्री के पास मौजूद पावर बैंक ने आग पकड़ ली थी. इस घटना को गंभीरता से लिया गया है और DGCA ने इन घटनाओं को देखते हुए विचार-विमर्श शुरू कर दिया है. फिलहाल क्वांटिटी लिमिट, फ्लाइट के भीतर चार्जिंग पर प्रतिबंध, स्टोरेज के लिए नियम और विजिबल कैपेसिटी रेटिंग जैसे मुद्दों पर विचार किया जा रहा है. ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत में भी विदेशों की तरह फ्लाइट के दौरान चार्जिंग पर रोक लगाई जा सकती है. नए नियम लाने से पहले इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट पर यात्रियों की निर्भरता को भी ध्यान में रखा जा रहा है.
एयर चाइना की फ्लाइट को किया गया था डायवर्ट
इंडिगो फ्लाइट से कुछ ही दिन पहले एयर चाइना की एक फ्लाइट को पावर बैंक में आग लगने के कारण डायवर्ट किया गया था. दुनिया में कई देशों में ऐसी घटनाएं आ चुकी हैं, जिसके चलते कई एयरलाइंस ने पावरबैंक से जुड़े नियम बदल दिए हैं. एमिरेट्स एयरलाइन ने फ्लाइट के दौरान पावर बैंक के इस्तेमाल पर रोक लगा दिया है. इसी तरह सिंगापुर एयरलाइन ने भी केबिन में लगे USB पोर्ट्स के जरिए चार्जिंग बंद कर दी है. साथ ही यात्रियों को पावर बैंक सीट पॉकेट या अंडर-सीट बैगेज में रखने को कहा गया है.
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रिसर्च करनी हो या बनाने हो डॉक्यूमेंट्स, स्टूडेंट्स का काम आसान कर देंगे ये फ्री AI टूल्स ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>रिसर्च करनी हो या बनाने हो डॉक्यूमेंट्स, स्टूडेंट्स का काम आसान कर देंगे ये फ्री AI टूल्स</title>
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<description><![CDATA[ वर्किंग प्रोफेशनल के साथ-साथ स्टूडेंट्स के लिए भी AI टूल्स जरूरी हो गए हैं. किसी नए कॉन्सेप्ट को समझना हो या रिसर्च करनी हो, AI टूल्स स्टूडेंट्स के कई काम आसान बना देते हैं. ऐसे में अगर आप स्टूडेंट हैं और आपको रिसर्च, किसी विषय को समझने या डॉक्यूमेंट बनाने आदि कामों के लिए AI टूल्स की जानकारी नहीं है तो घबराने की जरूरत नहीं है. आज हम आपके लिए ऐसे ही टूल्स की जानकारी लेकर आए हैं, जो हर काम में आपकी सहायता करेंगे.&amp;nbsp;
कॉन्सेप्ट समझने के लिए
कॉन्सेप्ट समझने के लिए गूगल जेमिनी का Guided Learning मोड शानदार साथी हो सकता है. यह सीधे जवाब बताने की बजाय एक इंटरेक्टिव कंपेनियन के तौर पर काम करता है. यानी यह आपसे सवाल भी पूछेगा ताकि यह समझ सके कि किसी कॉन्सेप्ट के बारे में आप कितना समझ पाए हैं. इसके अलावा यह प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए स्टेप वाइज तरीका अपनाता है और डायाग्राम, वीडियो और क्विजेज के जरिए किसी विषय को समझाने की कोशिश करता है.
पर्सनल ट्यूशन के लिए
ChatGPT का स्टडी मोड टीचिंग के लिए एक शानदार टूल है. यह पहले स्टूडेंट के मौजूदा लेवल को समझता है और फिर उस हिसाब से जवाब देता है. कॉन्टेक्स्ट समझाने के लिए इस पर लेक्चर स्लाइड, PDF चैप्टर और होमवर्क आदि के फोटो अपलोड किए जा सकते हैं.&amp;nbsp;
डॉक्यूमेंट क्रिएशन के लिए
माइक्रोसॉफ्ट का Copilot डॉक्यूमेंट क्रिएशन के लिए एक अच्छा टूल है. यह वर्ड फाइल में आउटलाइन ड्राफ्ट करने, पेपर समराइज करने और साइटेशन में मदद जैसे कई काम आसानी से कर देता है. टीम्स में यह मीटिंग और लेक्चर की स्ट्रक्चर्ड समरी तैयार कर सकता है. इसके अलावा यह टॉपिक्स और क्विज आदि के जवाब भी दे सकता है.
रिसर्च के लिए
Perplexity का AI मोड साइटेशन के साथ जवाब देता है. साथ ही रिसर्च के लिए यह जर्नल, पेपर और स्कॉलर डेटाबेस से डेटा लेता है. इसके जवाब में इन-लाइन साइटेशन होता है, जिस पर क्लिक कर उस जानकारी को वेरिफाई किया जा सकता है. इस पर PDF फाइल अपलोड कर भी सवालों के जवाब लिए जा सकते हैं.
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ई&#45;कॉमर्स और फूड डिलीवरी ऐप्स के हिडन चार्जेस से हैं परेशान? जानिए कहां और कैसे करें शिकायत</title>
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<description><![CDATA[ दिवाली के मौके पर फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सेल लगी हुई थी. इन सेल में महंगे से मंहगे प्रोडक्ट्स पर भारी छूट ऑफर की जा रही थी. इसी तरह जेप्टो और स्विगी पर भी फेस्टिवल के मौके पर भारी डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा था. हालांकि, कुछ प्लेटफॉर्म्स ऐसे भी रहे, जहां पर प्रोडक्ट की कीमत डिस्काउंट के बाद कम दिखाई गई, लेकिन ऑर्डर करते समय हिडन फीस लगाकर ग्राहकों से उसकी असल कीमत से भी ज्यादा पैसे वसूले गए. इस ड्रिप प्राइसिंग स्कैम को लेकर भारत सरकार ने भी वार्निंग दी है. अगर आप भी ऐसे किसी स्कैम का शिकार हुए हैं तो इसकी शिकायत कर सकते हैं.&amp;nbsp;
क्या होता है ड्रिप प्राइसिंग स्कैम?
कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ग्राहकों को चपत लगाने के लिए ऐसे डार्क पैटर्न का इस्तेमाल करते हैं. इसमें पहले किसी प्रोडक्ट पर डिस्काउंट दिखाया जाता है, लेकिन उसे ऑर्डर करते समय ग्राहक को अधिक पैसों का भुगतान करना पड़ता है. उदाहरण के तौर पर मान लिजिए कि कोई प्लेटफॉर्म डिस्काउंट के बाद स्मार्टवॉच 1,000 रुपये की दिखा रहा है, लेकिन जब ग्राहक इसे कार्ट में एड कर ऑर्डर करेगा, तब कई हिडन चार्जेज लगकर इसकी कीमत बढ़ जाएगी. शुरुआत में ग्राहकों को इन चार्जेज की जानकारी नहीं दी जाती है. इसी को ड्रिप प्राइसिंग स्कैम कहा जाता है.
इसकी शिकायत कैसे करें?
अगर आप भी ऐसे किसी स्कैम का शिकार हुए हैं या किसी प्रोडक्ट पर आपको डिस्काउंट के बाद भी ज्यादा पैसे चुकाने पड़े हैं तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं. ऐसे मामलों में नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन आपकी मदद कर सकती है. इसके लिए आपको सिर्फ 1915 नंबर पर कॉल कर प्रोडक्ट और प्लेटफॉर्म की शिकायत दर्ज करवानी होगी. इसके बाद नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन मामले की जांच कर आपकी मदद करेगी. इस तरह आप अपने साथ-साथ दूसरे लोगों के लिए भी ऑनलाइन शॉपिंग और ऑर्डर के एक्सपीरियंस को बेहतर बना सकते हैं.
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आईफोन 19 का न करें इंतजार, आईफोन 18 सीरीज के बाद 20 सीरीज लॉन्च करेगी ऐप्पल, सामने आ गई वजह ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>आईफोन 19 का न करें इंतजार, आईफोन 18 सीरीज के बाद 20 सीरीज लॉन्च करेगी ऐप्पल, सामने आ गई वजह</title>
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<description><![CDATA[ आईफोन को लेकर ऐप्पल फिलहाल बदलाव के दौर से गुजर रही है. आईफोन 17 सीरीज के प्रो मॉडल्स में लंबे समय बाद नया डिजाइन देखने को मिला है. इसी तरह कंपनी ने इस सीरीज में अपने अब तक के सबसे पतले मॉडल आईफोन एयर को भी लॉन्च किया है. अगले साल आईफोन 18 सीरीज में फोल्डेबल आईफोन उतार सकती है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि उसके बाद कंपनी आईफोन 19 सीरीज को पूरी तरह स्किप कर सकती है. आइए इसके पीछे का कारण जानते हैं.
आईफोन 19 सीरीज क्यों नहीं लाएगी ऐप्पल?
2026 में ऐप्पल आईफोन 18 सीरीज को लॉन्च करेगी. उससे अगले साल यानी 2017 में पहले आईफोन की लॉन्चिंग को 20 साल पूरे हो जाएंगे. इस खास मौके पर ऐप्पल 19 सीरीज को स्किप करते हुए सीधा आईफोन 20 सीरीज उतारेगी. आईफोन 20 सीरीज को भी खास बनाने के लिए ऐप्पल ने पूरी तैयारी कर ली है. इस सीरीज में पहली बार फुल डिस्प्ले वाला फोन मिलेगा. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईफोन 20 प्रो की स्क्रीन पर डायनामिक आईलैंड या नोच जैसा कोई कटआउट नहीं होगा और न ही इस पर कोई बैजल होंगे. प्रो मॉडल्स फुल स्क्रीन के साथ लॉन्च होंगे और फ्रंट से देखने पर ऐप्पल वॉच की तरह ग्लास का सिंगल पीस नजर आएगा.
पहले भी ऐसा कर चुकी है ऐप्पल
यह पहली बार नहीं होने जा रहा, जब ऐप्पल ने कोई सीरीज स्किप की है. 2017 में आईफोन की लॉन्चिंग का एक दशक पूरा होने के मौके पर कंपनी ने आईफोन 9 सीरीज लॉन्च नहीं की थी. इस सीरीज को स्किप करते हुए ऐप्पल ने आईफोन 8 सीरीज के बाद सीधा आईफोन 10 सीरीज लॉन्च की थी. इसी ट्रेंड को जारी रखते हुए ऐप्पल 2027 में 19 सीरीज को छोड़कर 20 सीरीज लॉन्च कर सकती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AI से प्राकृतिक आपदाओं का पता लगाएगी गूगल, बचाई जा सकेंगी लाखों लोगों की जानें</title>
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<description><![CDATA[ प्राकृतिक आपदाओं से लोगों को बचाना अब पहले से आसान हो सकता है. दरअसल, गूगल ने लेटेस्ट Earth AI अपडेट में आपदाओं का अनुमान लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने अपनी Earth ऐप में Gemini AI को इंटीग्रेट किया है. जेमिनी एआई को सालों के ग्लोबल सैटेलाइट, वेदर और पॉपुलेशन डेटा के साथ ट्रेंड किया गया है. इसकी मदद से यह न सिर्फ आपदाओं का पता लगा सकती है, बल्कि उन लोगों को भी बचाने में मदद कर सकती है, जो आपदा के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं.
कैसे काम करेगी यह टेक्नोलॉजी?
यह पूरी टेक्नोलॉजी जियोस्पेटियल रीजनिंग पर टिकी हुई है. यह AI को मैप्स, मौसम का अनुमान, जनसंख्या घनत्व और इलाके में बनी इमारतों समेत Earth App के डेटा को स्टडी करने देती है. इस वजह से AI यह अंदाजा लगा सकती है कि तूफान या बाढ़ जैसे हालात में किसी इलाके की क्या स्थिति हो सकती है. इस टेक्नोलॉजी की एक और खास बात यह भी है कि यह न सिर्फ तूफान या बाढ़ का रास्ता बताएगी, बल्कि यह भी अंदाजा लगा सकती है कि कितने लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं.&amp;nbsp;
आम लोग भी कर सकते हैं यूज
इस ऐप की मदद से आम लोगों को भी जरूरी इंफोर्मेशन मिल पाएगी. उदाहरण के तौर पर अगर कोई इससे पूछता है कि कोई नदी कहां से सूख रही है तो जेमिनी सैटेलाइट तस्वीरों से यह पता लगाकर रेफरेंस दे देगी. क्विक रिव्यू के बाद यह उससे जुड़े सवालों के जवाब भी दे पाएगी. गूगल इस अपडेट को सिर्फ पूर्वानुमान तक सीमित नहीं रखना चाहती. कंपनी की कोशिश है कि लोगों और आपदा राहत बलों को स्थिति खराब होने से पहले ही तैयारी का समय मिल जाए. इसके लिए कंपनी ने Earth AI को गूगल क्लाउड पर भी रखा है, जिसकी मदद से सरकारें और कंपनियां अपने डेटा में इसे इंटीग्रेट कर पाएंगी.
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iPhone 18 Pro में मिलेगी सैटेलाइट 5G सर्विस, रिमोट इलाकों में भी रॉकेट जैसी स्पीड से चलेगा इंटरनेट ]]></description>
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 18 Pro में मिलेगी सैटेलाइट 5G सर्विस, रिमोट इलाकों में भी रॉकेट जैसी स्पीड से चलेगा इंटरनेट</title>
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<description><![CDATA[ आईफोन 17 सीरीज की लॉन्चिंग के तुरंत बाद से ही अगले साल लॉन्च होने वाली आईफोन 18 सीरीज से जुड़ी लीक्स और रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं. अब एक ताजा लीक में पता चला है कि ऐप्पल आईफोन 18 प्रो मॉडल्स में सैटेलाइट 5G सर्विस दे सकती है. पिछले कुछ समय से ऐप्पल अपने आईफोन में सैटेलाइट मैसेजिंग का ऑप्शन दे रही है और अब इसमें सैटेलाइट 5G को भी जोड़ा जा सकता है. इसके लिए कंपनी एलन मस्क की स्टारलिंक के साथ भी हाथ मिला सकती है.&amp;nbsp;
अभी Globalstar के साथ है ऐप्पल की पार्टनरशिप
आईफोन 14 के बाद के मॉडल्स में सैटेलाइट के जरिए इमरजेंसी मैसेज के लिए ऐप्पल और ग्लोबलस्टार सैटेलाइट के बीच पार्टनरशिप है. इसी पार्टनरशिप के चलते लोग मोबाइल नेटवर्क के दायरे से बाहर होने पर भी इमरजेंसी कॉन्टेक्ट्स को मैसेज भेज पाते हैं. अब इन दोनों कंपनियों की राहें अलग हो सकती हैं और ऐप्पल स्टारलिंक के साथ मिलकर सैटेलाइट 5G सर्विस इंट्रोड्यूस कर सकती है. अभी स्टारलिंक और ऐप्पल के बीच कोई अरैंजमेंट नहीं है, लेकिन दोनों ही कंपनियां सैटेलाइट फीचर के लिए एक ही रेडियो स्पैक्ट्रम यूज कर रही है. ऐसे में दोनों कंपनियों के लिए साथ आना आसान भी होगा.
कैसे काम करेगी सैटेलाइट 5G?
जैसा नाम से ही जाहिर है कि इस फीचर में डिवाइस सैटेलाइट से 5G कनेक्टिविटी हासिल करेगा. इसके लिए उसे जमीन पर मौजूदा मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इसका फायदा यह होगा कि रिमोट इलाकों में भी यूजर को हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्टिविटी मिल सकेगी.
आईफोन 18 सीरीज की कीमत में हो सकती है बढ़ोतरी
एक और रिपोर्ट में बताया गया है कि आईफोन 18 सीरीज के मॉडल्स के लिए ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. इसका कारण यह है कि नए मॉडल A20 चिप और कई दूसरे हार्डवेयर अपग्रेड के साथ लॉन्च होंगे. ऐसा करने में ऐप्पल की लागत बढ़ेगी और इसका भार ग्राहकों पर भी पड़ेगा.
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<pubDate>Fri, 24 Oct 2025 22:44:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>सर्दी में रॉड से गर्म करना है पानी तो याद रखें ये बातें, लापरवाही बन सकती है जानलेवा</title>
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<description><![CDATA[ सर्दी का मौसम शुरू हो गया है और इस बार अक्टूबर में ही तापमान दिसंबर की याद दिलाने लगा है. ऐसे मौसम में नहाने के लिए गर्म पानी की जरूरत पड़ती है. इसके लिए इमर्शन रॉड ही सबसे सस्ता और टिकाऊ ऑप्शन है. कई लोग गीजर से पानी गर्म करते हैं, लेकिन बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जो रॉड से ही पानी गर्म करते हैं. अगर आप भी रॉड से पानी गर्म करते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. जरा-सी लापरवाही के कारण इससे करंट आ सकता है और यह छोटा-सा उपकरण जानलेवा बन सकता है.
गीले हाथों से न करें टच
बाल्टी भरते समय कई लोगों के हाथ गीले हो जाते हैं और वो इन्हीं हाथों से रॉड को छू लेते हैं. ऐसा करना जानलेवा साबित हो सकता है. गीले हाथों में करंट लगने का डर ज्यादा रहता है. इसलिए अगर आपके हाथ गीले हैं तो रॉड को टच न करें. रॉड को ऑन-ऑफ करते समय भी अपने हाथ सूखे रखें.
लोहे की बाल्टी में न लगाएं रॉड
कई लोग लोहे की बाल्टी में पानी भरकर उसे रॉड से गर्म करते हैं. यह गलती करने से बचें. लोहे की बाल्टी में रॉड लगाने से करंट फैलने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए लोहे की जगह रबड़ की बाल्टी एक सुरक्षित ऑप्शन है.
पानी में डालने से पहले न करें ऑन
रॉड को हमेशा पानी में डुबाने के बाद ही स्विच ऑन करें. अगर पहले स्विच ऑन कर दिया और गलती से इसके हाथ टच हो जाए तो भयंकर करंट लग सकता है. इसके अलावा शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बना रहता है. इसलिए हमेशा पहले रॉड को पानी में डुबो दें और फिर पावर स्विच ऑन करें.
पर्याप्त होना चाहिए पानी
रॉड के हिसाब से आपके पास पर्याप्त पानी होना चाहिए. छोटी रॉड से ज्यादा पानी देर से गर्म होगा और अगर रॉड बड़ी है और पानी कम तो रॉड का हीटिंग एलिमेंट जल सकता है. कम पानी के लिए छोटी रॉड और ज्यादा पानी के लिए बड़ी रॉड का इस्तेमाल बेहतर रहता है.
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गिनती करते थक जाएंगे, ऐप्पल ने 6 महीनों में भारत में बनाकर विदेश भेज दिए इतने करोड़ के आईफोन ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 07:00:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>गिनती करते थक जाएंगे, ऐप्पल ने 6 महीनों में भारत में बनाकर विदेश भेज दिए इतने करोड़ के आईफोन</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ समय से ऐप्पल ने भारत में अपना प्रोडक्शन बढ़ाया है और अब आंकड़े भी इसकी गवाही दे रहे हैं. एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ऐप्पल ने इस साल के पहले छह महीनों में भारत में बने 10 बिलियन डॉलर (88,600 करोड़ भारतीय रुपये) के आईफोन विदेशों में भेजे हैं. पिछले साल की तुलना में यह 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. बता दें कि कंपनी आईफोन 17 के सारे मॉडल्स का प्रोडक्शन भारत में कर रही है और अगले साल लॉन्च होने वाले पहले फोल्डेबल आईफोन को भी भारत में बनाया जा सकता है.
सितंबर में भी एक्सपोर्ट ने तोड़ा रिकॉर्ड
आमतौर पर सितंबर में नए आईफोन की उम्मीद में एक्सपोर्ट कम रहता है, लेकिन इस बार ऐप्पल ने यह रिकॉर्ड भी तोड़ दिया. पिछले साल सितंबर में कंपनी ने 490 मिलियन डॉलर के आईफोन एक्सपोर्ट किए थे, लेकिन इस बार यह आंकड़ा बढ़कर 1.2 बिलियन डॉलर हो गया है. इसके पीछे का कारण कंपनी के भारत में दो नए प्लांट शुरू होना रहा. इसी साल अप्रैल में ऐप्पल के सप्लायर टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का होसुर और फॉक्सकॉन का बेंगलुरू प्लांट शुरू हुआ था. इन दोनों को मिलाकर अब भारत में आईफोन बनाने वाली कुल 5 फैक्ट्रियां हो गई हैं.&amp;nbsp;
टूट सकता है पिछले साल का रिकॉर्ड
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जानकारों का कहना है कि इस साल ऐप्पल का प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट पिछले साल के आंकड़े को पार कर सकता है. हालांकि, अमेरिकी टैरिफ के कारण इसे थोड़ी चुनौती मिल सकती है. बता दें कि भारत से सबसे ज्यादा स्मार्टफोन बनकर अमेरिका में जाते हैं. इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच भारत में बने 8.43 बिलियन डॉलर की कीमत के स्मार्टफोन अमेरिका एक्सपोर्ट किए गए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 2.88 बिलियन डॉलर के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट हुए थे. मेड इन इंडिया फोन को अमेरिका एक्सपोर्ट करने में ऐप्पल पहले और सैमसंग दूसरे स्थान पर है.
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हो जाइए तैयार, 1-2 नहीं, इस हफ्ते आ रहे हैं ऐप्पल के ये 3 प्रोडक्ट्स, जानें क्या होगा खास ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 07:00:31 +0530</pubDate>
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<title>Google Maps को टक्कर देगी मेड इन इंडिया Mappls ऐप, 3D नेविगेशन समेत मिलते हैं ये फीचर्स</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ दिनों से जोहो की Arattai चैटिंग ऐप और Ulaa ब्राउजर खूब पॉपुलर हुए हैं. अब एक और मेड इन इंडिया ऐप सुर्खियों में आ गई है. हाल ही में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को भारत में डेलवप हुई Mappls नेविगेशन ऐप को इस्तेमाल करते हुए देखा गया था. उन्होंने इंडियन यूजर्स से इस ऐप को जरूर इस्तेमाल करने की अपील की थी. गूगल मैप्स को टक्कर देने वाली इस ऐप में वॉइस गाइडेड डायरेक्शन और हाइपर-लोकल सर्च समेत कई फीचर्स मिलते हैं.&amp;nbsp;
3D जंक्शन व्यू आसान बनाता है ड्राइविंग
MapmyIndia ने Mappls ऐप को डेवलप किया है. कंपनी का दावा है कि इसमें यूजर्स को लोकलाइज्ड, सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली मैप्पिंग एक्सपीरियंस मिलता है. इसमें 3D जंक्शन व्यू नाम का एक फीचर है, जो यूजर को ओवरब्रिज और अंडरपास की साफ-साफ जानकारी दे देता है. इससे ड्राइविंग करते समय यूजर को कंफ्यूजन नहीं होती. गूगल मैप्स में ऐसा फीचर नहीं है और कई बार ड्राइविंग करते समय लोग कंफ्यूज हो जाते हैं. इसके अलावा Mappls में यूजर को इनडोर नेविगेशन की भी सुविधा मिलती है. इसकी मदद से बड़ी बिल्डिंग्स और कॉम्प्लेक्स आदि में रास्ता ढूंढना आसान हो जाता है. गूगल मैप्स समेत कई प्लेटफॉर्म पर यह फीचर नहीं मिलता.

Swadeshi &amp;lsquo;Mappls&amp;rsquo; by MapmyIndia 🇮🇳Good features&amp;hellip;must try! pic.twitter.com/bZOPgvrCxW
&amp;mdash; Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) October 11, 2025



इंडिया में ही स्टोर रहता है डेटा
Mappls यूजर्स का डेटा इंडिया में ही स्टोर होता है. गूगल और ऐप्पल मैप्स की तरह इस ऐप का डेटा विदेशों में स्टोर नहीं होता. वैष्णव ने यह भी बताया कि भारतीय रेलवे की कई सर्विसेस में Mappls की इंटीग्रेट किया जा सकता है और इसके लिए रेलवे के साथ जल्द ही एक समझौता हो सकता है. बता दें कि MapmyIndia ने भारतीय डाक के साथ मिलकर डिजिटल एड्रेस सिस्टम DIGIPIN शुरू किया है. यह देश में हर 3.8 स्क्वेयर ब्लॉक के लिए एक यूनिक डिजिटल कोड जरनेट कर देता है. इससे मैप पर किसी भी जगह को ढूंढना आसान हो जाता है.
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गिनती करते थक जाएंगे, ऐप्पल ने 6 महीनों में भारत में बनाकर विदेश भेज दिए इतने करोड़ के आईफोन ]]></description>
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<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 07:00:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Full HD और 4K Smart TV में क्या होता है फर्क? खरीदते समय ज्यादातर लोग करते हैं ये गलती</title>
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<description><![CDATA[ Full HD Vs 4K Smart TV: आज के समय में टीवी सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रहा बल्कि यह एक स्मार्ट डिवाइस बन चुका है. OTT प्लेटफॉर्म्स, गेमिंग, और इंटरनेट कनेक्टिविटी के दौर में लोग अब Smart TV खरीदना पसंद करते हैं. लेकिन जब बात आती है टीवी के रिजॉल्यूशन की तो ज़्यादातर लोग Full HD और 4K Smart TV के बीच का फर्क ठीक से नहीं समझ पाते. नतीजा ये होता है कि या तो वे ज़रूरत से महंगा टीवी खरीद लेते हैं या फिर कम रेज़ॉल्यूशन वाला टीवी लेकर पछताते हैं. तो आइए जानते हैं आखिर Full HD और 4K Smart TV में क्या है असली अंतर.
रेज़ॉल्यूशन का मतलब क्या होता है
टीवी में रेज़ॉल्यूशन का मतलब है&amp;mdash;स्क्रीन पर मौजूद पिक्सल्स की संख्या. जितने ज़्यादा पिक्सल्स उतनी बेहतर तस्वीर. Full HD (1080p) टीवी का रेज़ॉल्यूशन 1920x1080 पिक्सल्स होता है. वहीं 4K (Ultra HD) टीवी का रेज़ॉल्यूशन 3840x2160 पिक्सल्स होता है यानी Full HD से लगभग चार गुना ज़्यादा. इसका सीधा मतलब है कि 4K टीवी में आपको डिटेल और क्लैरिटी कहीं ज़्यादा मिलेगी. खासकर बड़े स्क्रीन (50 इंच या उससे ऊपर) पर 4K रेज़ॉल्यूशन का अंतर साफ दिखता है.
पिक्चर क्वालिटी और कलर डिटेल
4K Smart TV में पिक्चर बहुत शार्प और डिटेल्ड होती है. रंग ज़्यादा गहरे और नेचुरल दिखते हैं जिससे मूवी या स्पोर्ट्स देखने का अनुभव और शानदार बन जाता है. वहीं Full HD टीवी में रंग अच्छे होते हैं लेकिन 4K जितने रियलिस्टिक नहीं. अगर आप 43 इंच या छोटे स्क्रीन पर टीवी देख रहे हैं तो Full HD भी काफी अच्छा विकल्प है लेकिन बड़ी स्क्रीन पर इसका फर्क साफ नज़र आता है.
इंटरनेट और OTT कंटेंट
आज Netflix, Amazon Prime Video, Disney+ Hotstar जैसी अधिकांश स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ 4K कंटेंट प्रदान करती हैं. अगर आपका टीवी Full HD है, तो आप वो कंटेंट 4K क्वालिटी में नहीं देख पाएंगे. हालांकि, 4K कंटेंट देखने के लिए आपके पास हाई-स्पीड इंटरनेट (कम से कम 25 Mbps) होना ज़रूरी है नहीं तो वीडियो बार-बार बफर होगा.
कीमत और वैल्यू फॉर मनी
यह वह बिंदु है जहां ज़्यादातर लोग गलती करते हैं. बहुत से खरीदार सिर्फ &amp;ldquo;4K&amp;rdquo; का टैग देखकर महंगा टीवी खरीद लेते हैं जबकि उनके उपयोग के हिसाब से Full HD ही पर्याप्त होता है. अगर आपका बजट सीमित है और आप छोटा स्क्रीन साइज (32&amp;ndash;43 इंच) लेना चाहते हैं तो Full HD Smart TV एक बेहतर और किफायती विकल्प है. लेकिन अगर आप बड़ा स्क्रीन और प्रीमियम व्यूइंग एक्सपीरियंस चाहते हैं तो 4K TV पर खर्च करना फायदेमंद रहेगा.
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<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 07:00:29 +0530</pubDate>
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<title>Apple यूजर्स को लगा बड़ा झटका, कंपनी ने बंद कर दी यह पॉपुलर ऐप</title>
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<description><![CDATA[ Apple ने अपने फैन्स को बड़ा झटका दिया है. कंपनी ने ऐलान कर दिया है कि वह अपनी वीडियो एडिटिंग ऐप Clips को बंद कर रही है. 10 अक्टूबर को इसे ऐप स्टोर से हटा दिया है, जिसके चलते नए यूजर्स इसे डाउनलोड नहीं कर पाएंगे. हालांकि, मौजूदा यूजर्स इसका यूज जारी रख सकते हैं, लेकिन कंपनी अब इस ऐप के लिए सपोर्ट रिलीज नहीं करेगी. इसका मतलब यह हुआ कि कोई भी बग आने की सूरत में ऐप्पल इसे अपडेट नहीं करेगी, जिससे इसे यूज करना मुश्किल होता जाएगा.&amp;nbsp;
नए यूजर नहीं कर पाएंगे डाउनलोड
ऐप्पल ने अपने ब्लॉग में बताया कि नए यूजर्स के लिए इस ऐप को डाउनलोड करना पॉसिबल नहीं है. जिन यूजर्स के पास पहले से यह ऐप है, वे इसे अपने ऐप्पल अकाउंट से दोबारा डाउनलोड कर सकते हैं, लेकिन इसे अपडेट नहीं दी जाएगी. इसलिए ऐप्पल ने यूजर्स को अपने Clips डाउनलोड करने के लिए कहा है ताकि वे उन्हें दूसरी ऐप्स में एडिट कर पाएं.
ऐसे करें वीडियो सेव
वीडियो सेव करने के लिए Clips ऐप में वीडियो ओपन करें. अब इसमें दिख रहे प्रोजेक्ट्स पर टैप करें. इसमें जिस वीडियो को सेव करना है, उसे सेलेक्ट करें. टूल्स को लेफ्ट स्वाइप करने पर सेव क्लिप का ऑप्शन आ जाएगा. इस पर टैप करते ही यह वीडियो फोन गैलरी में सेव हो जाएगा.
2017 में लॉन्च हुई थी Clips
ऐप्पल ने इस ऐप को 2017 में लॉन्च किया था. इसे स्नैपचैट और इंस्टाग्राम के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा था. इसमें सोशल नेटवर्किंग का ऑप्शन नहीं था, लेकिन यह यूजर्स को फोटो और वीडियो को फिल्टर, इमोजी और म्यूजिक आदि के साथ एडिट करने का ऑप्शन देती थी. हालांकि, इसे खास रिस्पॉन्स नहीं मिला और ऐप्पल ने भी बग फिक्सेस को छोड़कर कोई इसके लिए कोई बड़ी अपडेट रोलआउट नहीं की.
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<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 07:00:29 +0530</pubDate>
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<title>दिवाली पर लूट लो ऑफर!  स्मार्टवॉच और इयरबड्स पर 90 प्रतिशत तक डिस्काउंट, आईफोन 15 भी एकदम सस्ता</title>
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<description><![CDATA[ दिवाली से पहले अमेजन की ग्रेट इंडियन फेस्टिवल दिवाली स्पेशल सेल जारी है. यह 23 सितंबर से शुरू हुई ग्रेट इंडियन फेस्टिवल सेल का फेस्टिव एडिशन है और इसमें पहले मिल वाली सेल में मिल रहे कई ऑफर्स को अपडेट किया है. ऐसे में अगर दिवाली से पहले भारी डिस्काउंट के साथ कोई सामान खरीदना चाहते हैं तो यह शानदार मौका है. सेल के दौरान कई चीजें अपने सबसे सस्ते दामों और 90 प्रतिशत तक डिस्काउंट पर उपलब्ध है.&amp;nbsp;50 हजार से भी कम में खरीदे आईफोन 15
अमेजन की दिवाली सेल में आईफोन 15 अपनी अब तक की सबसे कम कीमत पर उपलब्ध है. यह फोन मात्र 48,499 रुपये में लिस्टेड है. इस पर कैशबैक, बैंक ऑफर और नो-कॉस्ट EMI का ऑप्शन भी मिल रहा है. इस तरह लगभग 80,000 रुपये की कीमत पर लॉन्च हुए इस आईफोन को भारी छूट के साथ खरीदा जा सकता है. ऐप्पल के अलावा सैमसंग और दूसरी कंपनियों के स्मार्टफोन भी भारी छूट के साथ लिस्टेड है. इसी तरह लैपटॉप और दूसरी एक्सेसरीज को कम कीमत पर खरीदा जा सकता है.
इन सामानों पर 90 प्रतिशत तक डिस्काउंट
अमेजन की वेबसाइट पर साल की सबसे कम कीमत में खरीदारी का बैनर लगा हुआ है. इस पर टैप करने पर उन सामानों की लिस्ट आ जाती है, जिन पर 90 प्रतिशत के आसपास डिस्काउंट मिल रहा है. सेल में कई स्मार्टफोन, ऑफिस, चेयर, लगैज ट्रॉली, होम थियेटर साउंड बार, इयरबड्स और स्टोरेज के सामानों पर 80-90 प्रतिशत तक डिस्काउंट दिया जा रहा है. ऐसे में सेल से शॉपिंग कर आप अपने घर सामान भी ला सकते हैं और जेब पर भी ज्यादा जोर नहीं डालना पड़ेगा. अन्य आइटम्स की बात करें तो रोबोटिक वैक्यूम क्लीनर, वाटर प्यूरिफायर, बेडशीट और स्टोरेज आदि के सामान पर 60-80 प्रतिशत की छूट ऑफर की जा रही है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 07:00:29 +0530</pubDate>
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<title>Internet के भी होते हैं नियम? जानिए क्या होता है TCP/IP और कैसे ये पूरी ऑनलाइन दुनिया को करता है कंट्रोल</title>
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<description><![CDATA[ TCP/IP: इंटरनेट आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद लाखों कंप्यूटर एक-दूसरे से इतनी सहजता से बात कैसे करते हैं? इसका जवाब है TCP/IP यानी Transmission Control Protocol और Internet Protocol. यही वो दो डिजिटल भाषाएं हैं जो पूरे इंटरनेट को संचालित करती हैं और हर डेटा ट्रांसफर को एक व्यवस्थित तरीके से पूरा करती हैं.
क्या होता है TCP/IP
TCP/IP को समझने का सबसे आसान तरीका है इसे एक डिजिटल पोस्ट ऑफिस मानना. जैसे डाक भेजने के लिए हमें लिफाफे, पते और डिलीवरी की प्रोसेस चाहिए होती है वैसे ही इंटरनेट पर भी हर डेटा एक डिजिटल लिफाफे में पैक होता है. इस लिफाफे पर भेजने वाले (Sender) और Receiver का पता लिखा होता है और यही पता होता है IP Address.
IP Address क्या है और कैसे काम करता है
हर कंप्यूटर या मोबाइल जब इंटरनेट से जुड़ता है तो उसे एक यूनिक IP Address दिया जाता है. यह एड्रेस या तो चार अंकों के सेट में होता है (जैसे 192.168.1.1) या कभी-कभी आठ समूहों में अक्षरों और अंकों के रूप में (IPv6). यह एड्रेस आपके डिजिटल घर का पता होता है.
जब आप &amp;ldquo;what&amp;rsquo;s my IP&amp;rdquo; गूगल में टाइप करते हैं तो आपको आपका IP दिख जाता है. लेकिन यह एड्रेस हमेशा स्थायी नहीं होता. घर पर आपको इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) से IP मिलता है जबकि कैफे या ऑफिस में Wi-Fi नेटवर्क से नया IP एड्रेस असाइन हो सकता है.
DNS
अब सवाल उठता है जब वेबसाइट के सर्वर का IP इतना लंबा और मुश्किल होता है तो हम सिर्फ google.com या youtube.com टाइप करके कैसे पहुंच जाते हैं? इसका जवाब है DNS (Domain Name System). DNS वेबसाइटों को ऐसे नाम देता है जिन्हें इंसान आसानी से याद रख सकें. आपका ब्राउज़र जब कोई वेबसाइट खोलता है तो DNS उस नाम को सही IP एड्रेस में बदल देता है और आपका डिवाइस सही सर्वर से कनेक्ट हो जाता है.
डेटा ट्रांसफर की तकनीक
जब आपका कंप्यूटर किसी सर्वर से संपर्क करता है तो यह एक थ्री-वे हैंडशेक के ज़रिए शुरू होता है. सबसे पहले कंप्यूटर सर्वर से पूछता है &amp;ldquo;क्या आप बात करने के लिए तैयार हैं?&amp;rdquo; सर्वर जवाब देता है &amp;ldquo;हां, तैयार हूं.&amp;rdquo; इसके बाद आपका कंप्यूटर कनेक्शन की पुष्टि कर देता है. अब डेटा का आदान-प्रदान शुरू होता है.
वेबसाइट का डेटा कई छोटे हिस्सों में बांट दिया जाता है. हर हिस्से को अलग-अलग पैकेट (envelope) में भेजा जाता है. इन पैकेट्स पर IP एड्रेस और सीक्वेंस नंबर लिखा होता है ताकि आपका कंप्यूटर उन्हें सही क्रम में जोड़ सके. जैसे ही कोई पैकेट पहुँचता है, कंप्यूटर acknowledge भेजता है यानी डेटा मिल गया और सब ठीक है. अगर सर्वर को यह जवाब नहीं मिलता तो वह वही पैकेट फिर से भेज देता है.
TCP/IP इंटरनेट की वह रीढ़ है जो दुनिया भर के कंप्यूटर्स को एक साझा भाषा में जोड़ती है. यह सुनिश्चित करती है कि आपका डेटा चाहे ईमेल हो, वीडियो या कोई वेबसाइट सुरक्षित, सही क्रम में और समय पर अपने सही स्थान तक पहुंचे.
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<pubDate>Tue, 14 Oct 2025 07:00:28 +0530</pubDate>
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<title>क्या इंस्टाग्राम सुनती है आपकी बातें? कंपनी के सीईओ ने खुद कर दिया खुलासा, पता चली यह बात</title>
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<description><![CDATA[ आपने आमतौर पर लोगों को कहते हुए सुना होगा कि इंस्टाग्राम आपकी सारें बातें सुनती है और आप जिस भी बारे में बातचीत करते हैं, आपको उसी से जुड़ा विज्ञापन देखने को मिलता है. अब खुद इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोस्सेरी ने इसे लेकर अपनी बात रखी है. उन्होंने इस बात को अफवाह बताते हुए कहा कि अगर ऐसा होता तो यह यूजर्स की प्राइवेसी का गंभीर उल्लंघन है. अगर मेटा फोन के माइक्रोफोन से कुछ सुन रही होती तो यूजर्स को इसका पता चल जाता क्योंकि इस कारण बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती और फोन में माइक्रोफोन इंडिकेटर लाइट ऑन रहती.&amp;nbsp;
मोस्सेरी की पत्नी को भी था शक
यह अफवाह लंबे समय से चली आ रही है कि मेटा फोन के माइक के जरिए यूजर्स की बातें सुन रही हैं और इसी के आधार पर टारगेटेड विज्ञापन दिखाए जाते हैं. मोस्सेरी ने बताया कि उनकी पत्नी ने भी इसे लेकर सवाल किया था. हालांकि, मेटा इन आरोपों को खारिज करती आई है. पिछले कई सालों में खुद मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग भी इसे लेकर सफाई दे चुके हैं.
यूजर की जरूरत के विज्ञापन कैसे दिखाती है इंस्टाग्राम
फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत मेटा की ऐप्स पर यूजर्स को ऐसे विज्ञापन दिखाए जाते हैं, जो उनकी जरूरत से बिल्कुल मैच होते हैं. अगर मेटा यूजर की बात नहीं सुन रही है तो फिर यह कैसे संभव है? मोस्सेरी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि यह एल्गोरिद्म के कारण संभव है. उन्होंने कहा कि एडवरटाइजिंग देने वाली कंपनियां अपनी वेबसाइट पर आने वाले यूजर्स का डेटा मेटा के साथ शेयर करती हैं. इसके बाद मेटा उसकी प्रोफाइलिंग करती है और फिर ऐसे यूजर्स देखे जाते हैं, जिनके इंटरेस्ट सेम होते हैं. मोस्सेरी ने यह भी बताया कि कई बार लोग कई बार ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर विज्ञापनों को ज्यादा नोटिस करने लगते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि सर्विलांस हो रहा है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:19:45 +0530</pubDate>
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<title>अब तक क्यों नहीं आया Foldable iPhone? जानिए Apple का क्या है प्लान और कब करेगा लॉन्च</title>
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<description><![CDATA[ Foldable iPhone: Apple ने हाल ही में iPhone 17 सीरीज़ लॉन्च कर स्मार्टफोन मार्केट में एक बार फिर तहलका मचा दिया है. नई सीरीज़ में MagSafe, Face ID और नए डिज़ाइन जैसे फीचर्स शामिल किए गए हैं. लेकिन जब बात फोल्डेबल स्मार्टफोन्स की आती है, तो एप्पल अब तक चुप्पी साधे हुए है. जहां सैमसंग, ओप्पो और मोटोरोला जैसी कंपनियां सालों पहले ही अपने फोल्डेबल फोन पेश कर चुकी हैं, वहीं एप्पल के चाहने वालों को अब तक फोल्डेबल iPhone का इंतजार है. आखिर एप्पल क्यों पीछे है? आइए जानते हैं संभावित कारण.
टिकाऊ और भरोसेमंद पर फोकस
एप्पल हमेशा से ऐसे प्रोडक्ट्स लॉन्च करता है जो लंबे समय तक टिक सकें. मौजूदा फोल्डेबल डिस्प्ले में स्क्रीन क्रीज़, हिंग की मजबूती और डस्ट रेजिस्टेंस जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं. ऐसे में एप्पल तब तक इंतजार कर सकता है जब तक यह टेक्नोलॉजी पूरी तरह भरोसेमंद न हो जाए और कंपनी के हाई ड्यूरेबिलिटी स्टैंडर्ड्स पर खरी न उतरे.
फोल्डेबल फोन की सीमित मांग
फोल्डेबल स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी प्रेमियों के बीच जरूर लोकप्रिय है लेकिन यह अभी भी एक छोटा मार्केट है. एप्पल हमेशा तभी नए प्रोडक्ट लॉन्च करता है जब बड़े पैमाने पर डिमांड होती है. फिलहाल ज्यादातर iPhone यूजर्स साधारण डिज़ाइन से संतुष्ट हैं, इसीलिए कंपनी को फोल्डेबल मॉडल लॉन्च करने का बड़ा कारण नहीं दिखता.
सप्लाई चेन की दिक्कतें
फोल्डेबल डिस्प्ले बनाने के लिए बेहद खास मटेरियल और जटिल मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस की जरूरत होती है. एप्पल की सप्लाई चेन क्वालिटी और एफिशिएंसी पर आधारित है लेकिन अभी तक फोल्डेबल पैनल बड़े पैमाने पर उसी स्तर पर उपलब्ध नहीं हो पाए हैं. जब तक सप्लायर एप्पल की क्वालिटी और वॉल्यूम की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते, कंपनी इंतजार करना ही बेहतर समझेगी.
दूसरी इनोवेशन पर फोकस
एप्पल इस समय अपनी एनर्जी अन्य तकनीकों पर लगा रहा है. इसमें Apple Vision Pro, AI-आधारित Apple Intelligence, बेहतर कैमरा फीचर्स और अल्ट्रा-थिन iPhone डिज़ाइन जैसे इनोवेशन शामिल हैं. ऐसे में फोल्डेबल iPhone फिलहाल कंपनी की रोडमैप प्राथमिकताओं में नहीं आता.
कीमत को लेकर चिंता
आज के समय में फोल्डेबल स्मार्टफोन्स की कीमत 1.2 लाख रुपये या उससे ज्यादा है. वैसे ही iPhone भारत में सबसे महंगे स्मार्टफोन्स में गिने जाते हैं. अगर फोल्डेबल डिज़ाइन जोड़ा गया तो कीमत और बढ़ जाएगी जिससे यह बड़े पैमाने पर खरीदारों की पहुंच से बाहर हो सकता है. यही कारण है कि एप्पल तब तक इंतजार कर सकता है जब तक यह टेक्नोलॉजी सस्ती और आसानी से उपलब्ध न हो जाए. एप्पल फिलहाल फोल्डेबल iPhone की लॉन्चिंग को लेकर सावधानी बरत रहा है.
कब होगा लॉन्च
हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक इस फोन के लॉन्च को लेकर कोई भी आधिकारीक घोषणा नहीं की गई है. ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह फोन कंपनी लॉन्च भी करेगी या नहीं. ऐसे में एप्पल का फोल्डेबल आईफोन अगर लॉन्च होता है तो वह अगगे साल या फिर 2027 तक ही लॉन्च करेगा.
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<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:19:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>कम दाम में मिलेंगे iPhone 17 वाले फीचर्स, ऐप्पल ने शुरू कर दी तैयारी, जानें कब लॉन्च होगा नया आईफोन</title>
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<description><![CDATA[ Apple ने अगले साल की शुरुआत में एक नया आईफोन लॉन्च करने की तैयारी कर ली है. ताजा लीक्स से पता चला है कि कंपनी किफायती कीमत वाले एक आईफोन पर काम कर रही है, जो आईफोन 17e हो सकता है. ऐप्पल की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई लीक्स और रिपोर्ट्स में इसके डिजाइन, फीचर्स और अनुमानित कीमत को लेकर बात की जा रही है. ऐप्पल ने पिछले साल आईफोन 16 सीरीज करने के बाद इस साल की शुरुआती में आईफोन 16e लॉन्च किया था. इसी आधार पर अनुमान है कि ऐप्पल आईफोन 17 सीरीज में भी नया एडिशन ला सकती है.&amp;nbsp;
क्या हो सकते हैं आईफोन 17e के फीचर्स?
लीक्स के आधार पर आईफोन 17e को भी लेटेस्ट लाइनअप की डिजाइन लैंग्वेज के साथ उतारा जा सकता है. इसमें डायनामिक आईलैंड के साथ 6.1 इंच का OLED डिस्प्ले मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि, यह पुष्टि नहीं हुई है कि यह 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ आएगा या इसमें 60Hz रिफ्रेश रेट सपोर्ट मिलेगा. यह लगभग तय हो चुका है कि इसमें आईफोन 17 की तरह A19 चिपसेट दिया जाएगा और यह फेसआईडी सपोर्ट के साथ आएगा.&amp;nbsp;
कैमरा और बैटरी
आईफोन 16e की तरह अपकमिंग आईफोन 17e के रियर में भी सिंगल कैमरा होगा. उम्मीद है कि इसे 48MP रियर कैमरा से लैस किया जाएगा और इसके फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 12MP का लेंस मिल सकता है. इसकी 4000mAh की बैटरी मिलने की संभावना है, जो फास्टर चार्जिंग के साथ आएगी.
कितनी हो सकती है कीमत?
इस आईफोन को अगले साल फरवरी-मार्च में भारत में 60,000-65,000 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया जा सकता है. हालांकि, ऐप्पल की तरफ से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसके लिए कंपनी अलग से कोई इवेंट आयोजित नहीं करती और प्रेस नोट के जरिए ही इसके लॉन्चिंग की जानकारी दी जाती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:19:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Arattai ऐप के बाद अब Zoho के Ulaa ब्राउजर का जलवा, ऐप स्टोर में टॉप पर पहुंचा, जानें क्या है खास</title>
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<description><![CDATA[ Arattai ऐप के बाद अब जोहो कॉर्पोरेशन का Ulaa ब्राउजर अपना जलवा बिखेर रहा है. भारत में बना यह वेब ब्राउजर ऐप्पल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर में टॉप पर पहुंच गया है. Arattai ऐप जहां WhatsApp के विकल्प के तौर पर देखी जा रही है, वहीं Ulaa ब्राउजर अपनी कैटेगरी में गूगल क्रोम और आईफोन पर सफारी ब्राउजर को टक्कर दे रहा है. प्राइवेसी पर खास फोकस वाला यह ब्राउजर एंड्रॉयड, iOS, विंडोज, मैक और Linux जैसे सभी प्लेटफॉर्म के लिए अवेलेबल है.
यूजर्स की प्राइवेसी का खास ध्यान
जोहो का Ulaa ब्राउजर गूगल क्रोम की तरह क्रोमियम पर ही बना है, लेकिन इसमें यूजर्स प्राइवेसी का विशेष ख्याल रखा गया है. गूगल क्रोम जहां एड दिखाने के लिए यूजर का डेटा कलेक्ट करता है, वहीं Ulaa न तो यूजर्स डेटा कलेक्ट करता है और न ही इसे बेचता है. जोहो ने कहा कि इसके स्टेट-ऑफ-द-आर्ट फीचर्स यह सुनिश्चित करते हैं कि आपकी पर्सनल जानकारी गोपनीय रहे और आपके ऑनलाइन फुटप्रिंट विज्ञापनदाताओं की नजरों में न आएं. यह ब्राउजर बिल्ट-इन एड ब्लॉकर्स के साथ आता है, जो आपके ब्राउजिंग एक्सपीरियंस को आसान और सुरक्षित बनाता है.
सरकार से अवॉर्ड जीत चुका है यह ब्राउजर
Ulaa ब्राउजर ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय की तरफ से आयोजित इंडियन वेब ब्राउजर डेवलपमेंट चैलेंज को जीता था. इस चैलेंज में सरकार ने भारतीय कंपनियों से वर्ल्ड क्लास ब्राउजर तैयार करने को कहा था. Ulaa ब्राउजर में वर्क, पर्सनल, किड्स, डेवलपर्स और ओपन सीजन समेत कई प्रोफाइल मोड मिलते हैं. वर्क मोड में जहां खास तौर पर एंटरप्राइज यूजर्स के लिए बनाया गया है, वहीं डेवलपर मोड को प्रोफेशनल वेब डेवलपर्स और टेस्टर के लिए तैयार किया गया है.
Arattai ऐप ने भी मचाई थी धूम
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अपील के बाद Arattai ऐप अचानक से पॉपुलर हो गई. 2021 में लॉन्च हुई व्हाट्सऐप जैसे फीचर्स वाली इस ऐप को लाखों की संख्या में लोग डाउनलोड कर रहे हैं और यह भी ऐप स्टोर पर टॉप पर पहुंच गई थी.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:19:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>YouTube पर 15000 व्यूज पर कितने पैसे मिलते हैं, आंकड़े जान रह जाएंगे हैरान</title>
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<title>Wi&#45;Fi के पास रखी इन चीजों से स्लो हो जाती है इंटरनेट स्पीड! जानिए क्या नहीं करना चाहिए</title>
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<description><![CDATA[ Wi-Fi के पास रखी इन चीजों से स्लो हो जाती है इंटरनेट स्पीड! जानिए क्या नहीं करना चाहिए ]]></description>
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<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:19:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>रूसी यूट्यबर्स के पास लॉन्च से पहले कैसे पहुंच जाते हैं Apple के प्रोडक्ट्स? यह रिपोर्ट कर देगी दंग</title>
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<description><![CDATA[ Apple उन कंपनियों में हैं, जो लॉन्च से पहले अपने प्रोडक्ट्स को पूरी तरह सीक्रेट रखती है. ऐसे कम ही मौके आए हैं, जब कंपनी की तरफ से कोई प्रोडक्ट लीक हुआ हो या यह किसी यूट्यूबर या जर्नलिस्ट के हाथ लगा हो, लेकिन 2024 से ऐसे मामले बढ़े हैं. 2024 के बाद से रूस के कई यूट्यूबर्स ने लॉन्च से पहले कंपनी के प्रोडक्ट को लीक किया है. यहां तक कि वो लॉन्च से पहले ही अनबॉक्सिंग करते दिख जाते हैं. M4 MacBook Pro के साथ भी यही हुआ था और अब M5 iPad Pro के साथ भी यही हो रहा है.&amp;nbsp;
लॉन्च से पहले ही हो गई अनबॉक्सिंग
रूस के Romancev768 नामक यूट्यूबर ने M5 iPad Pro को कैमरे के सामने अनबॉक्स किया है, जबकि अभी तक इसे ऑफिशियली लॉन्च नहीं किया गया है. इस यूट्यूबर ने ऐप्पल के 13 इंच वाले M5 iPad Pro को अनबॉक्स कर दर्शकों को दिखा दिया है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि रूसी यूट्यूबर्स के पास ये प्रोडक्ट्स कहां से पहुंच रहे हैं? यह मामला इसलिए भी पेचीदा हो रहा है क्योंकि रूस में ऐप्पल के प्रोडक्ट्स पर बैन लगा हुआ है और कंपनी अपने नए प्रोडक्ट्स लॉन्च नहीं करती है.
क्या वियतनाम से यूट्यूबर्स के पास पहुंच रहे ऐप्पल
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, M5 iPad Pro और M4 MacBook Pro की लीक में एक बात कॉमन है और वह यह है कि ये दोनों ही प्रोडक्ट्स वियतनाम में बने हुए हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि वियतनाम स्थित फॉक्सकॉन या लक्सशेयर के प्लांट से कोई इनसाइडर इन प्रोडक्ट्स को रूसी यूट्यूबर्स के पास पहुंचा रहा है. ऐप्पल आमतौर पर मास प्रोडक्शन शुरू होने के कई हफ्तों बाद प्रोडक्ट्स लॉन्च करती है, ऐसे में इनसाइडर्स के पास आसानी से प्रोडक्ट को लीक करने का समय होता है. इसके बदले वो अच्छी-खासी रकम वसूलते हैं.
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<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:19:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Snapchat पर अब फ्री नहीं रहेगा यूजर्स का यह फेवरेट फीचर, पुरानी फोटो&#45;वीडियो देखने के लिए देना पड़ेगा पैसा</title>
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<description><![CDATA[ Snapchat यूजर्स के लिए उनका एक फेवरेट फीचर अब फ्री नहीं रहेगा. दरअसल, कंपनी ने ऐलान किया है कि वह पुरानी फोटोज और वीडियो स्टोर करने वाले Memories फीचर के लिए पैसे लेगी. 2016 में लॉन्चिंग के बाद से यह फीचर फ्री में उपलब्ध है और इसमें यूजर को अपनी फोटो और वीडियो स्टोर करने का ऑप्शन मिलता है. कंपनी के इस ऐलान से यूजर्स खुश नहीं हैं और वो इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.&amp;nbsp;
कब देना पड़ेगा पैसा?
नई पॉलिसी की तहत कंपनी 5GB से ज्यादा स्टोरेज होने पर यूजर्स से पैसे चार्ज करेगी. कंपनी की तरफ से ब्लॉग में कहा गया है कि इस पॉलिसी को धीरे-धीरे सभी यूजर्स के लिए लागू कर दिया जाएगा. कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया कि 100GB वाले प्लान के लिए 1.99 अमेरिकी डॉलर (लगभग 177 रुपये) प्रति महीने देने पड़ेंगे, वहीं 250GB वाला प्लान 3.99 डॉलर (लगभग 355 रुपये) की कीमत वाले Snapchat+ सब्सक्रिप्शन का हिस्सा होगा. अभी स्नैपचैट के पास 90 करोड़ से अधिक मंथली एक्टिव यूजर्स हैं और कंपनी का कहना है कि इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं, जिनकी मेमोरीज की स्टोरेज 5GB से कम है. इन पर नए फैसले का कोई असर नहीं पडे़गा.
पैसे नहीं देने पर क्या होगा?
जिन यूजर्स की मेमोरीज की स्टोरेज 5GB से ज्यादा है, उन्हें एक साल तक टेंपरेरी स्टोरेज मिलेगी और उनके पास अपने सेव्ड कंटेट को डाउनलोड करने का ऑप्शन होगा. एक साल के बाद उन्हें स्टोरेज प्लान खरीदना ही पड़ेगा. बता दें कि स्नैपचैट को लॉन्च हुए करीब एक दशक होने वाला है और अभी तक इस पर एक ट्रिलियन से अधिक मेमोरीज सेव की जा चुकी हैं. अपने फैसले का बचाव करते हुए स्नैपचैट ने कहा कि यूजर्स के लिए यह मुश्किल होने वाला है, लेकिन इस पैसे को इसी फीचर का दायरा बढ़ाने के लिए यूज किया जाएगा.
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<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:19:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Jio और Airtel की बढ़ गई टेंशन! BSNL ने पूरे देश में शुरू की ये नई सेवा, जानिए कैसे लोगों को मिलेगा फायदा</title>
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<description><![CDATA[ BSNL eSIM: भारत सरकार की दूरसंचार कंपनी BSNL ने देशभर में eSIM सेवाओं की शुरुआत कर दी है. इसके लिए BSNL ने टाटा कम्युनिकेशंस के Move प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है. इस कदम का उद्देश्य भारत की डिजिटल संरचना को और मजबूत करना और ग्राहकों को अधिक सुरक्षित व आसान मोबाइल कनेक्टिविटी का अनुभव देना है.
अब नहीं पड़ेगी फिजिकल सिम की ज़रूरत
eSIM तकनीक की मदद से BSNL यूज़र्स अब 2G, 3G और 4G नेटवर्क को बिना फिजिकल सिम लगाए केवल एक QR कोड स्कैन करके एक्टिवेट कर सकेंगे. डुअल सिम स्मार्टफोन रखने वाले यूज़र्स एक ही डिवाइस में फिजिकल सिम और eSIM दोनों का इस्तेमाल कर पाएंगे. इसके साथ ही जो लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा करते हैं उनके लिए यह फीचर खास लाभकारी होगा, क्योंकि वे विदेश में लोकल ऑपरेटर का नेटवर्क इस्तेमाल करते हुए भी अपना BSNL नंबर सक्रिय रख पाएंगे.
टाटा कम्युनिकेशंस का Move प्लेटफॉर्म
इस सेवा को सफल बनाने के लिए BSNL ने टाटा कम्युनिकेशंस के GSMA अनुमोदित सब्सक्रिप्शन मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म Move का उपयोग किया है. यह प्लेटफॉर्म BSNL को लाखों ग्राहकों के लिए बड़े पैमाने पर eSIM सेवाएं सुचारू रूप से उपलब्ध कराने में मदद करेगा.
डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
BSNL के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ए. रॉबर्ट रवि ने कहा कि यह लॉन्च भारत की टेलीकॉम क्षमताओं को नई दिशा देगा. टाटा कम्युनिकेशंस की विशेषज्ञता के साथ BSNL अब अपने ग्राहकों को अधिक लचीलापन, सुरक्षा और कुशल मोबाइल सेवाएं प्रदान कर सकेगा. यह पहल भारत के डिजिटल आत्मनिर्भरता मिशन को भी मजबूती देती है.
BSNL के हालिया विस्तार कदम
2024&amp;ndash;25 में BSNL लगातार अपनी सेवाओं को विस्तार देने में सक्रिय रहा है. अगस्त 2025 में कंपनी ने दिल्ली में 4G सेवाओं की शुरुआत की. इसी दौरान, डाक विभाग (India Post) के साथ एक साल का करार किया गया जिसके तहत देशभर के 1.65 लाख पोस्ट ऑफिस अब BSNL की सिम और रिचार्ज सेवाएं बेच पाएंगे.
इसके अलावा BSNL ने पहले तमिलनाडु में eSIM सेवा शुरू की थी जिसे अब राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध कराया गया है. इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के झारसुगुड़ा से BSNL का पूरी तरह से स्वदेशी 4G नेटवर्क लॉन्च किया जिसमें लगभग 97,500 नए मोबाइल टावर घरेलू तकनीक से स्थापित किए गए.
ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा फायदा
eSIM तकनीक से BSNL यूज़र्स को अब ज्यादा लचीलापन, सुरक्षा और इंटरनेशनल रोमिंग की सुविधा मिलेगी. यह लॉन्च BSNL के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है जो उसे निजी टेलीकॉम कंपनियों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा और डिजिटल युग में उसकी पकड़ को मजबूत करेगा.
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<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:19:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Youtube से जल्दी बनना है अमीर तो करें ये काम, तेजी से बढ़ जाएगी इनकम</title>
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<description><![CDATA[ YouTube आज लोगों की कमाई का एक बड़ा साधन बन गया है. कंटेट क्रिएशन और एफिलिएट मार्केटिंग समेत कई ऐसे तरीके हैं, जिनके जरिए आप मोटी कमाई कर सकते हैं. यूट्यूब आपको पैसे के साथ-साथ शोहरत भी देता है. अगर आप भी कंटेट क्रिएटर हैं और यूट्यूब पर पैसा कमाने में संघर्ष कर रहे हैं तो हम आपके लिए समाधान लेकर आए हैं. आज हम आपको ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं, जिनसे आप जल्दी कमाई कर सकेंगे.
यूट्यूब पर कमाई कैसे बढ़ाएं?
एक कंटेट क्रिएटर को इस बात की जानकारी होना जरूरी है कि रेवेन्यू को तेज करने के साथ-साथ अपने सब्सक्राइबर्स कैसे बढ़ाने हैं. इसके लिए हाई क्वालिटी कंटेट, स्पॉन्सर्ड कंटेट और एफिलिएट मार्केटिंग जैसे कई तरीके हैं. अगर आप लंबे समय से कंटेट क्रिएट कर रहे हैं, लेकिन फिर भी आमदनी नहीं बढ़ पाई है तो कुछ और कदम उठाने की जरूरत है.
अधिक कमाई वाले वीडियो पर फोकस करें
यूट्यूब पर प्रोडक्ट रिव्यू, अनबॉक्सिंग और ट्यूटोरियल आदि वीडियो पर ज्यादा कमाई होती है. ट्यूटोरियल में आप कोई स्किल सीखाकर प्रोडक्ट्स रिकमंड कर सकते हैं. इसी तरह प्रोडक्ट्स रिव्यू में एफिलिएट लिंक के जरिए भी पैसा कमा सकते हैं. इसके अलावा शॉर्ट्स भी रीच बढ़ाने का अच्छा तरीका है.
चैनल को ऑप्टिमाइज करें
अपने चैनल के लिए क्लियर ब्रांडिंग का इस्तेमाल करें. इसके लिए लोगो और बैनर आदि ऐसे होने चाहिए, जिससे दर्शकों को देखते ही समझ आ जाए कि यह किस क्रिएटर का कंटेट है. चैनल का मजेदार और इंफोर्मेटिव डिस्क्रिप्शन लिखें. इसके अलावा अपने सब्सक्राइबर्स और नॉन-सब्सक्राइबर्स के लिए आप अलग-अलग ट्रेलर भी क्रिएट कर सकते हैं.&amp;nbsp;
चैनल को ब्रांड के तौर पर डेवलप करें
अपने चैनल को सिर्फ यूट्यूब तक सीमित न रखें. इसे ब्रांड की तरह डेवलेप करें. इंस्टाग्राम और फेसबुक समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपने चैनल को प्रमोट करें. साथ ही ऑडियंस को इंगेज रखने के लिए रेगुलर शेड्यूल पर वीडियो रिलीज करते रहें.
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<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 13:19:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Samsung Galaxy S25 FE Vs iPhone Air: कौन सा प्रीमियम फोन देता है तगड़ा परफॉर्मेंस, कंपैरिजन से जानिए सब कुछ</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy S25 FE Vs iPhone Air: सैमसंग और एप्पल ने 2025 में अपने नए स्मार्टफोन्स को यूजर्स के लिए बाजार में उतारा जिनका मकसद है प्रीमियम फीचर्स को फ्लैगशिप फोन्स से कम दाम में पेश करना. सैमसंग गैलेक्सी S25 FE और iPhone Air मिड-प्रीमियम सेगमेंट में अलग-अलग अंदाज़ लाते हैं एक ओर है एंड्रॉइड का दमदार पैकेज और दूसरी ओर iOS का स्लीक अनुभव. दोनों ही डिवाइस एडवांस प्रोसेसर, मॉडर्न डिज़ाइन और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर सपोर्ट के साथ आते हैं लेकिन कीमत, बिल्ड और फीचर प्राथमिकताओं में बड़ा अंतर है.
Samsung Galaxy S25 FE Vs iPhone Air: डिज़ाइन
गैलेक्सी S25 FE सैमसंग की Fan Edition परंपरा को आगे बढ़ाता है. इसमें दोनों तरफ Gorilla Glass Victus+ और आर्मर एल्युमिनियम फ्रेम दिया गया है. फोन का वज़न 190 ग्राम और मोटाई 7.4mm है. साथ ही यह IP68 रेटिंग के साथ पानी और धूल से सुरक्षित है.
वहीं iPhone Air, iPhone 17 सीरीज़ का हिस्सा है और डिज़ाइन के मामले में हल्का और पतला है. इसका वज़न केवल 165 ग्राम और मोटाई 5.6mm है. इसमें नया सिंगल कैमरा बार डिज़ाइन है जो Pro मॉडल्स के आयताकार कैमरा सेटअप से अलग है.
Samsung Galaxy S25 FE Vs iPhone Air: डिस्प्ले
Samsung Galaxy S25 FE में 6.7-इंच का Dynamic LTPO AMOLED 2X डिस्प्ले है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट, HDR10+ सपोर्ट और 1900 निट्स तक ब्राइटनेस मिलती है. डिस्प्ले Gorilla Glass Victus+ से प्रोटेक्टेड है.
इसके मुकाबले iPhone Air में 6.5-इंच का OLED पैनल है जिसका रेज़ोल्यूशन 1320 &amp;times; 2868 पिक्सल और पिक्सल डेंसिटी 458 PPI है. इसमें अब ProMotion के साथ 120Hz एडैप्टिव रिफ्रेश रेट भी दिया गया है. इसकी खासियत है 3000 निट्स पीक ब्राइटनेस और Ceramic Shield 2 प्रोटेक्शन.
परफॉर्मेंस और सॉफ्टवेयर
गैलेक्सी S25 FE को पावर देता है सैमसंग का Exynos 2400 चिपसेट. यह Android 16 और One UI 8 पर चलता है. कंपनी 7 बड़े एंड्रॉइड अपडेट का वादा कर रही है जो इसे लंबे समय तक सपोर्ट पाने वाले फोन्स में शामिल करता है.
दूसरी ओर iPhone Air में Apple का नया A19 Pro चिप दिया गया है, जिसमें 6-कोर CPU, 5-कोर GPU और Neural Accelerators शामिल हैं. यह iOS 26 पर चलता है, जिसमें Apple Intelligence नाम का AI और मशीन लर्निंग फीचर जोड़ा गया है जो मैसेजिंग, प्रोडक्टिविटी और पर्सनलाइजेशन को और स्मार्ट बनाता है.
कैमरा सेटअप
Samsung Galaxy S25 FE में ट्रिपल कैमरा दिया गया है&amp;mdash;50MP वाइड सेंसर, 8MP टेलीफोटो लेंस (3x ऑप्टिकल ज़ूम) और 12MP अल्ट्रावाइड कैमरा. यह 8K वीडियो रिकॉर्डिंग सपोर्ट करता है.
iPhone Air में केवल एक 48MP वाइड कैमरा है, जिसे Fusion Camera कहा गया है. यह सिंगल लेंस होते हुए भी अलग-अलग शूटिंग परिस्थितियों में एडजस्ट हो सकता है. फ्रंट पर 18MP का सेल्फी कैमरा दिया गया है जिसमें नया ऑरिएंटेशन फीचर है जो पोर्ट्रेट और लैंडस्केप मोड में फ्रेम को खुद एडजस्ट करता है.
बैटरी और चार्जिंग
Galaxy S25 FE में 4900mAh बैटरी है, जिसमें 45W वायर्ड चार्जिंग, 15W वायरलेस चार्जिंग और रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट है. वहीं, iPhone Air का पतला डिज़ाइन इसकी बैटरी को सीमित करता है. इसमें 3149mAh बैटरी है जो 20W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट करती है और 30 मिनट में लगभग 50% चार्ज हो जाती है. हालांकि, वायरलेस चार्जिंग के मामले में यह बेहतर है क्योंकि यह MagSafe और Qi2 स्टैंडर्ड पर 20W तक की चार्जिंग स्पीड देती है. दोनों ही कंपनियां फास्ट चार्जिंग एडॉप्टर अलग से बेचती हैं.
भारत में कीमत
Samsung Galaxy S25 FE की शुरुआती कीमत 59,999 रुपये (8GB + 128GB) है, जबकि इसका टॉप वेरिएंट 77,999 रुपये (512GB) तक जाता है. iPhone Air की कीमत काफी अधिक है. यह 1,19,900 रुपये (256GB) से शुरू होता है, 512GB मॉडल 1,39,900 रुपये का है और 1TB वेरिएंट 1,59,900 रुपये में आता है.
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 पर धांसू ऑफर, लॉन्च होते ही मिल रही बंपर छूट, यहां चेक करें डील</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 को लॉन्च हुए अभी एक महीना भी नहीं हुआ है और उससे पहले ही इस पर भारी डिस्काउंट मिल रहा है. अगर आप सेल में एक साल पहले लॉन्च हुए आईफोन 16 को लेने की प्लानिंग कर रहे हैं तो iPhone 17 पर मिल रही डील सुनकर अपना मन बदल लेंगे. डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस के बाद आप 9 सितंबर को लॉन्च हुए आईफोन 17 को 20,000 रुपये से भी ज्यादा की छूट के साथ खरीद सकते हैं. आइए जानते हैं कि इस फोन में क्या-क्या फीचर्स हैं और इस पर क्या डील मिल रही है.
आईफोन 17 के फीचर्स
यह फोन 6.3 इंच के ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले के साथ लॉन्च हुआ है, जो ProMotion टेक्नोलॉजी के साथ आया है. ProMotion पैनल से iPhone 17 में भी प्रो मॉडल की तरह 120Hz का रिफ्रेश रेट सपोर्ट आ गया है. यह स्क्रीन पर चल रहे कंटेट के हिसाब से रिफ्रेश रेट को 1Hz से 120Hz तक ऑटोमैटिकल एडजस्ट कर लेता है. एल्युमिनियम और ग्लास फिनिशिंग वाला यह मॉडल 7.3mm मोटा है. इसे ऐप्पल की लेटेस्ट A19 चिप दी गई है, जिसे 8GB रैम के साथ पेयर किया गया है. इसके रियर में 48MP+12MP का डुअल कैमरा सेटअप कैमरा है. आईफोन 17 के फ्रंट में सेंटर स्टेज कैमरा है.&amp;nbsp;
फोन पर मिल रही धांसू डील
क्रोमा पर फिलहाल यह फोन बंपर छूट के साथ उपलब्ध है. 82,900 रुपये की कीमत वाले इस फोन पर 6,000 रुपये का इंस्टैंट बैंक डिस्काउंट मिल रहा है. इसके साथ पुराने फोन पर 15,000 रुपये की एक्सचेंज वैल्यू मिल रही है. इस तरह फोन पर कुल डिस्काउंट 21,000 रुपये का हो रहा है. सारा डिस्काउंट मिलाने के बाद इस फोन की कीमत 61,900 रुपये रह जाती है. अगर आप डायरेक्ट ऐप्पल से यह फोन खरीदते हैं तो कंपनी पूरी iPhone 17 सीरीज पर डिस्काउंट के साथ नो-कॉस्ट EMI की सुविधा भी दे रही है.
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:54 +0530</pubDate>
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<title>iOS 26 में मिले छोटे&#45;छोटे, लेकिन कई यूजफुल फीचर्स, आईफोन यूजर्स की लाइफ हुई आसान</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल के शौकीन लोगों के लिए सितंबर का महीना खास रहा है. कंपनी ने जहां आईफोन 17 सीरीज को इसी महीने लॉन्च किया है, वहीं अपनी अब तक की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर अपडेट iOS 26 को भी रोल आउट कर दिया है. इससे आईफोन के इंटरफेस को नए लुक के साथ-साथ कई छोटे-छोटे, लेकिन बहुत ही काम के फीचर्स मिले हैं. इनमें रिंगटोन को कस्टमाइज करने से लेकर कैमरा लेंस गंदा होने पर नोटिफिकेशन मिलते समेत कई फीचर शामिल हैं. आइए, इन पर एक नजर डालते हैं.
कस्टमाइज करें रिंगटोन
अब आईफोन पर रिंगटोन को कस्टमाइज किया जा सकता है. अगर आपको कोई रिंगटोन पसंद आई है तो उस फाइल पर लॉन्ग प्रेस करें. इसके बाद शेयर बटन टैप करें और यूज एज रिंगटोन के ऑप्शन को सेलेक्ट करे. ध्यान रहे कि यह फाइल 30 सेकंड से कम की होनी चाहिए.
बैटरी चार्ज टाइम एस्टिमेट
सॉफ्टवेयर अपडेट के बाद अब आईफोन यह बता देता है कि बैटरी को 80 और 100 प्रतिशत तक चार्ज होने में कितना समय और लगेगा. टाइम विजेट के ऊपर इसकी जानकारी आती रहती है. इसे सेटिंग&gt;बैटरी में जाकर भी देखा जा सकता है. इसकी मदद से यह पता लगाना आसान हो गया है कि फोन को कितनी देर चार्जिंग पर रखने की जरूरत है.
3D Spatial Scenes
iOS 26 में Spatial Scenes का ऑप्शन मिला है, जो फोटो को 3D जैसा व्यू देता है. इसके लिए फोटोज में किसी भी फोटो को ओपन करें और टॉप राइट कॉर्नर में दिख रहे Spatial टॉगल को इनेबल कर दें. इसके बाद फोन को हिलाने पर फोटो के पीछे डेप्थ नजर आती है.
PDF एडिट करना हुआ आसान
अभी तक केवल मैकबुक में मिलने वाली Preview ऐप को अब आईफोन में भी उपलब्ध करवा दिया गया है. यह किसी भी PDF को ओपन करे और उसे एडिट करने की सुविधा देती है. अब इस काम के लिए थर्ड-पार्टी ऐप की जरूरत खत्म हो गई है.
कैमरा लेंस नोटिफिकेशन
अगर कैमरा ऐप को लगता है कि लेंस पूरी तरह साफ नहीं है तो यह यूजर को नोटिफाई कर देती है. यह बहुत बड़ा बदलाव नहीं है, लेकिन कई जरूरी लम्हों को संजोकर रखने में बड़ी मदद कर सकता है. यह फीचर केवल आईफोन 15 के बाद वाले डिवाइस के लिए उपलब्ध है.
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:53 +0530</pubDate>
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<title>क्या आप भी फोन को 100% चार्ज करते हैं? सावधान! हो सकता है ये बड़ा नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ क्या आप भी फोन को 100% चार्ज करते हैं? सावधान! हो सकता है ये बड़ा नुकसान ]]></description>
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>सस्ते के लालच में सेल में ले लिया आईफोन, असली है या नकली? अब इन तरीकों से लगाएं पता</title>
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<description><![CDATA[ अमेजन और फ्लिपकार्ट पर सेल के दौरान मोबाइल फोन पर जबरदस्त डील चल रही है. iPhone 16 Pro Max जैसे महंगे मॉडल्स पर भी भारी छूट मिल रही है, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग इन्हें ऑर्डर कर रहे हैं. ऐसे में कई बार लोगों के मन में यह संशय बैठ जाता है कि महंगा फोन इतना सस्ता मिला है तो यह कहीं नकली न हो. अगर आपके मन में भी ऐसा शक है तो हम कुछ तरीके बताने जा रहे हैं, जिससे आप यह पता लगा सकते हैं कि आपके घर डिलीवर हुआ आईफोन असली है या नकली.
IMEI और सीरियल नंबर खोल देंगे राज
आईफोन की डिलीवरी लेते ही सबसे पहले सीरियल नंबर चेक करें. इसके लिए ऐप्पल की ऑफिशियल वेबसाइट खोलें और वहां पर बॉक्स पर लिखे सीरियल नंबर डालें. यहां से आपको पता चल जाएगा कि आपके हाथ में मौजूद आईफोन असली है या नकली. साथ ही अगर वेबसाइट पर &#039;डिवाइस नॉट एक्टिवेटेड&#039; लिखा दिखे तो इसका मतलब है कि आपका आईफोन असली और एकदम नया है. इसी तरह IMEI नंबर से भी फोन का पता लगाया जा सकता है.
मॉडल नंबर बता देगा फोन की पूरी कुंडली
फोन का मॉडल नंबर देखकर भी आप पता लगा सकते हैं कि आपके पास पहुंचा आईफोन नया है या पुराना. दरअसल, मॉडल नंबर के आगे कुछ कोड दिए होते हैं, जो फोन की कुंडली बता देते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर आईफोन का मॉडल नंबर M से शुरू हो रहा है तो इसका मतलब है कि आईफोन एकदम नया है. शुरुआत में F का मतलब रिफर्बिश्ड, N का मतलब रिप्लेसमेंट डिवाइस और P का मतलब पर्सनलाइज्ड डिवाइस है.
बनावट और ऑपरेटिंग सिस्टम
नए आईफोन एकदम प्रीमियम दिखते हैं और शानदार फिनिशिंग के साथ आते हैं. फिनिशिंग को गौर से देखने पर ही पता चल जाता है कि आईफोन नया है या पुराना. इसके अलावा आप ऑपरेटिंग सिस्टम के जरिए भी फोन के असली या नकली होने का पता लगा सकते हैं.
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>कौन&#45;सा था दुनिया का कैमरे के साथ आने वाला पहला मोबाइल और कैसी आती थी फोटो? यहां जानिए पूरी डिटेल</title>
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<description><![CDATA[ आज स्मार्टफोन्स में चार-चार कैमरे मिल रहे हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था. करीब 30 साल पहले तक किसी भी मोबाइल में कैमरा नहीं मिलता था. ऐसे में लोगों को बातचीत के लिए अलग डिवाइस और फोटोग्राफी के लिए कैमरा रखने की जरूरत पड़ती थी. हालांकि, 1999 आते-आते यह स्थिति बदली और दुनिया को पहला ऐसा मोबाइल फोन मिला, जिसमें कैमरा था. आइए आज जानते हैं कि पहली बार दुनिया में किस मोबाइल को कैमरा के साथ लॉन्च किया गया था.
Kyocera VP-210
कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई, 1999 में जापान में दुनिया का पहला बिल्ट-इन कैमरा वाला मोबाइल लॉन्च हुआ था. इसका नाम Kyocera VP-210 था और बिल्ट-इन कैमरा के साथ पब्लिक को बेचे जाने वाला यह पहला फोन था. इसमें 0.11MP का कैमरा था और इसमें एक साथ 20 फोटोज स्टोर की जा सकती थी. उस समय इसकी कीमत 40,000 येन थी.
सैमसंग ने भी किया दावा
दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग का दावा है कि उसने दुनिया का पहला बिल्ट-इन कैमरा वाला फोन लॉन्च किया था. जून 2000 में सैमसंग ने दक्षिण कोरिया में SCH-V200 को लॉन्च किया था. यह फोन 0.35MP पर 20 फोटो ले सकता था. इन फोटोज को फोन की 1.5 इंच की TFT LCD स्क्रीन पर देखा जा सकता था. हालांकि, इससे फोटो भेजने के लिए इसे पीसी से कनेक्ट करना पड़ता था.&amp;nbsp;
...या यह था दुनिया का पहला कैमरे वाला मोबाइल
सैमसंग के अलावा एक और कंपनी भी पहला इन बिल्ट कैमरा वाला फोन लॉन्च करने का दावा कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवंबर, 2000 में Sharp नामक कंपनी ने कैमरे वाला मोबाइल Sharp J-Phone लॉन्च किया था. यह दुनिया का पहला ऐसा फोन बताया जाता है, जो फोटो को इलेक्ट्रॉनिकली सेंड कर सकता था. इस कंपनी ने एक ही डिवाइस में फोन और कैमरे के हार्डवेयर इंटीग्रेट कर दिए थे. यह फोन 0.11MP की फोटो खींचकर उसे ईमेल करने में सक्षम था. कैमरा वाले मोबाइल के विकास में इस फोन को अहम पड़ाव माना जाता है.
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>खत्म हो जाएंगी नौकरियां? 2030 तक इंसानों की जगह ये टेक्नोलॉजी करेंगी काम, जानिए सब कुछ</title>
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<description><![CDATA[ Artificial Intelligence: आज की दुनिया में तकनीक इतनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है कि हर रोज़ नए-नए आविष्कार हो रहे हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन जैसी टेक्नोलॉजी इंसानों के काम को आसान बना रही हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में यही टेक्नोलॉजी इंसानों की नौकरियां खत्म कर देंगी? एआई से जब सवाल पूछा गया तो उसने हैरान करने वाला जवाब दिया. आइए जानते हैं विस्तार से.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता दायरा
AI ने पिछले कुछ सालों में बड़ी छलांग लगाई है. आज चैटबॉट्स, वॉइस असिस्टेंट्स और AI आधारित टूल्स कंपनियों में ग्राहक सेवा से लेकर डाटा एनालिसिस तक का काम कर रहे हैं. बैंकिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन सेक्टर में AI का इस्तेमाल बढ़ने से कई पारंपरिक नौकरियां खतरे में आ सकती हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2030 तक करोड़ों नौकरियां पूरी तरह AI आधारित सिस्टम संभाल सकते हैं.
रोबोटिक्स और ऑटोमेशन
फैक्ट्रियों और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स में पहले से ही रोबोटिक मशीनें इंसानों का काम कर रही हैं. कार मैन्युफैक्चरिंग से लेकर पैकेजिंग तक, हर जगह रोबोट का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है. ऑटोमेशन से कंपनियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है और लागत भी घट रही है. यही वजह है कि आने वाले वर्षों में इंसानों की जगह रोबोट्स का इस्तेमाल और तेज़ी से बढ़ेगा.
हेल्थकेयर में बदलाव
2030 तक मेडिकल सेक्टर में भी टेक्नोलॉजी बड़ा बदलाव ला सकती है. रोबोटिक सर्जरी, AI आधारित डायग्नोसिस और ऑटोमेटेड फार्मेसी सिस्टम डॉक्टर्स और नर्सों का बोझ कम करेंगे. हालांकि, इससे हेल्थकेयर स्टाफ की नौकरियां कम हो सकती हैं लेकिन साथ ही नई टेक्निकल स्किल्स वाले लोगों की मांग भी बढ़ेगी.
ट्रांसपोर्टेशन और ड्राइविंग जॉब्स
ऑटोमैटिक और सेल्फ-ड्राइविंग वाहनों का विकास तेजी से हो रहा है. कंपनियां ऐसी कार और ट्रक बना रही हैं जिन्हें चलाने के लिए इंसान की जरूरत न हो. अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर लागू होती है तो टैक्सी, ट्रक और बस ड्राइवर्स की नौकरियों पर सीधा असर पड़ेगा.
रिटेल और कस्टमर सर्विस
ऑनलाइन शॉपिंग के साथ-साथ ऑटोमेटेड कैश काउंटर और वर्चुअल असिस्टेंट्स पहले ही रिटेल इंडस्ट्री को बदल रहे हैं. आने वाले समय में सुपरमार्केट्स और मॉल्स में कैशियर्स की जगह मशीनें ले सकती हैं. इससे लाखों नौकरियां खतरे में आ जाएंगी.
क्या होंगी नई संभावनाएं?
भले ही कई नौकरियां खत्म होंगी लेकिन टेक्नोलॉजी नए अवसर भी लेकर आएगी. AI, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स इंजीनियरिंग और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में स्किल्ड लोगों की मांग लगातार बढ़ेगी. इसका मतलब यह है कि जो लोग नई टेक्नोलॉजी सीखेंगे, उनके लिए भविष्य उज्ज्वल होगा.
2030 तक इंसानों की जगह मशीनें और टेक्नोलॉजी कई काम संभाल लेंगी जिससे पारंपरिक नौकरियों में कमी आ सकती है. लेकिन यह बदलाव केवल नकारात्मक नहीं होगा क्योंकि इसके साथ नए रोजगार और अवसर भी पैदा होंगे.
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 सीरीज के बाद नई MacBook लाइनअप लॉन्च कर सकती है ऐप्पल, यह होगी खास बात, सामने आई जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 सीरीज की लॉन्चिंग के बाद अब ऐप्पल ने नये प्रोडक्ट लाने की तैयारी कर ली है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी मैकबुक की नई लाइनअप पर काम कर रही है, जो नए M5 प्रोसेसर के साथ लॉन्च होगी. बताया जा रहा है कि अगले कुछ महीनों में यह लाइनअप लॉन्च कर दी जाएगी. मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि नए मैकबुक प्रो मॉडल्स को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और जल्द ही इनका मास प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा.
नए एयर मॉडल भी होंगे लॉन्च
मैकबुक प्रो मॉडल्स के साथ ऐप्पल नए मैकबुक एयर मॉडल्स भी उतारेगी. इसके साथ कंपन दो एक्सटर्नल डिस्प्ले पर भी काम कर रही है. अगर सब कुछ उम्मीदों के मुताबिक रहता है तो इन मॉडल्स को इसी साल के अंत तक या अगले साल की पहली तिमाही में लॉन्च कर दिया जाएगा. ऐप्पल ये प्रोडक्ट ऐसे समय पर लॉन्च करने जा रही है, जब कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव कर रही है. पिछले साल कंपनी ने ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स पेश किए थे, लेकिन कई जानकारों का कहना है कि इनमें विरोधियों को टक्कर देने वाली कन्वर्सेशनल स्किल्स नहीं हैं.
M5 प्रोसेसर पर रहेगी नजर
कंपनी नई मैकबुक लाइनअप को M5 प्रोसेसर से लैस करेगी. बता दें कि 2020 से ऐप्पल ने अपने लैपटॉप्स में इंटेल के प्रोसेसर देने बंद कर दिए हैं. उसके बाद से हर साल कंपनी अपने प्रोसेसर को स्पीड और एफिशिएंसी के मामले में बेहतर करती जा रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि M5 प्रोसेसर के साथ ऐप्पल एक बार फिर अपना कमाल दिखाएगी और विंडोज लैपटॉप्स को कड़ी टक्कर दे पाएगी.
सिरी पर भी हो रहा काम
AI की रेस में अब तक पिछड़ रहे सिरी को भी नया रूप देने पर काम हो रहा है. ऐप्पल ने सिरी में सुधार के लिए प्रोजेक्ट लिनवुड शुरू किया है, जो अगले मार्च तक पूरा हो सकता है. इस प्रोजेक्ट के तहत सिरी के वेब सर्च, ऑन-डिवाइस इन्फोर्मेशन का यूज करने और आईफोन को पूरी तरह वॉइस से कंट्रोल करने जैसे कामों में सक्षम बनाया जा रहा है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>मेड इन इंडिया Arattai ने मचा दी धूम, ऐप स्टोर पर नंबर वन, अब WhatsApp को आएगा पसीना!</title>
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<description><![CDATA[ Arattai App: WhatsApp के विकल्प के तौर पर देखी जा रही भारतीय कंपनी जोहो की Arattai App ने धूम मचा दी है. कुछ दिन पहले इस पर रोजाना लगभग 3 हजार यूजर्स आ रहे थे, लेकिन अब यह संख्या कई गुना बढ़कर 3.5 लाख से पार पहुंच गई है. केंद्रीय मंत्री की अपील के बाद लोग इसे तेजी से डाउनलोड कर रहे हैं और अब यह ऐप स्टोर पर पहले स्थान पर पहुंच गई है. कंपनी ने एक्स पर पोस्ट डालकर बताया है कि उसकी ऐप सोशल नेटवर्किंग कैटेगरी में पहले पायदान पर पहुंच गई है.

We&amp;rsquo;re officially #1 in Social Networking on the App Store! Big thanks to every single Arattai user for making this possible. 💛#StayConnected #Arattai pic.twitter.com/gqxPW108Nq
&amp;mdash; Arattai (@Arattai) September 27, 2025



2021 में लॉन्च हुई थी Arattai app&amp;nbsp;
तमिल भाषा के शब्द Arattai का मतलब अनौपचारिक बातचीत होता है. जोहो कॉर्पोरेशन ने साइड प्रोजेक्ट के तौर पर इस ऐप को 2021 में लॉन्च किया था, लेकिन लोगों का इस पर ज्यादा ध्यान नहीं गया. अब हाल ही में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोगों से इस ऐप को सपोर्ट करने की अपील की थी, जिसके बाद लोग इसे खूब डाउनलोड कर रहे हैं. पूरी तरह भारत में बनी इस ऐप में WhatsApp की तरह पर्सनल चैट, ग्रुप चैट, वॉइस नोट, इमेज और वीडियो शेयरिंग जैसे फीचर्स मिलते हैं. हालांकि, इसमें केवल वॉइस और वीडियो कॉल एंड-टू-एंड एनक्रिप्टेड है, लेकिन पर्सनल चैट के लिए यह फीचर उपलब्ध नहीं है. इसे बनाने वाली कंपनी जोहो का कहना है कि इसमें प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा गया है और वह कभी भी पर्सनल डेटा को मोनेटाइज नहीं करेगी.&amp;nbsp;
जोहो को तेज करनी पड़ी तैयारी
Arattai पर तेजी से बढ़ रहे यूजर्स को देखते हुए कंपनी को अपनी तैयारियां तेज करनी पड़ी है. जोहो के को-फाउंडर श्रीधर वेंबू ने बताया कि नए यूजर्स कई गुना बढ़ गए हैं, जिसके देखते हुए इमरजेंसी बेसिस पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना पड़ रहा है. बता दें कि यूजर्स बढ़ने के कारण सर्वर पर भी बोझ बढ़ा है, जिसके चलते कई यूजर्स को OTP मिलने में देरी हो रही है तो किसी को कॉन्टैक्ट सिंक करने में दिक्कत आ रही है.
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Airtel, Jio, Vi और BSNL यूज़र्स के लिए बड़ी खबर! अब फिजिकल SIM की नहीं है जरूरत, जानिए कैसे एक्टिवेट करते हैं eSIM</title>
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<description><![CDATA[ eSIM Activation: भारत में अब BSNL भी Airtel, Jio और Vi (Vodafone Idea) की तरह अपनी eSIM सर्विस शुरू कर चुका है. फिलहाल यह सुविधा चुनिंदा सर्किल्स में उपलब्ध है. eSIM का काम बिल्कुल फिज़िकल SIM जैसा ही होता है लेकिन यह आपके फोन के अंदर डिजिटल रूप से मौजूद रहती है. iPhone, Google Pixel और Samsung Galaxy S सीरीज़ जैसे कई प्रीमियम स्मार्टफोन eSIM सपोर्ट करते हैं.
क्यों करें eSIM पर स्विच?

eSIM को बार-बार निकालने की ज़रूरत नहीं होती.
यह न तो टूटती है और न ही खराब होती है.
हालांकि, ध्यान रखें कि अगर आप गलती से eSIM को फोन से डिलीट कर देते हैं तो तुरंत नेटवर्क कनेक्शन बंद हो जाएगा.

कैसे मिलेगा eSIM?
हर टेलीकॉम कंपनी का तरीका थोड़ा अलग है.
Jio यूज़र्स: MyJio ऐप से रिक्वेस्ट कर सकते हैं या नज़दीकी Jio स्टोर पर जाएं.
Airtel और Vi यूज़र्स: कंपनी के आधिकारिक ऐप से आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा, अपने नेटवर्क के अनुसार 121 या 199 पर SMS भेजें मैसेज फॉर्मेट: eSIM.
BSNL यूज़र्स: नज़दीकी कस्टमर सर्विस सेंटर में जाकर आवेदन करना होगा. यहां KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिसके लिए आधार कार्ड ज़रूरी है.
क्या है एक्टिवेशन प्रोसेस

रिक्वेस्ट सबमिट होने के बाद इन स्टेप्स को फॉलो करें:
आपके रजिस्टर्ड ईमेल पर eSIM का QR कोड भेजा जाएगा.
इसके बाद Settings &amp;rarr; Mobile Networks/Cellular/SIM Services खोलें.
अब &quot;Add eSIM&quot; या &quot;Download eSIM&quot; ऑप्शन चुनें.
इसके बाद ईमेल से मिले QR कोड को स्कैन करें.
अब आपको एक वेरिफिकेशन कॉल मिलेगी जिससे प्रोसेस पूरी होगी.

पूरा प्रोसेस लगभग 4 घंटे तक का समय ले सकता है.
अंतिम स्टेप और सिक्योरिटी
जैसे ही eSIM एक्टिव हो जाएगी आपकी फिज़िकल SIM का नेटवर्क अपने आप बंद हो जाएगा और अब आप eSIM से सभी सेवाओं का इस्तेमाल कर पाएंगे. TRAI के नियमों के अनुसार, एक्टिवेशन के बाद पहले 24 घंटे तक आप किसी भी SMS को भेज या प्राप्त नहीं कर पाएंगे. यह नियम SIM स्वैप फ्रॉड रोकने के लिए लागू किया गया है.
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<pubDate>Mon, 29 Sep 2025 16:18:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब नहीं चाहिए फोन&#45;कार्ड! सिर्फ अंगूठा लगाते ही होगा पेमेंट, जानिए कैसे करेगा काम</title>
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<description><![CDATA[ अब नहीं चाहिए फोन-कार्ड! सिर्फ अंगूठा लगाते ही होगा पेमेंट, जानिए कैसे करेगा काम ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone Air के कैमरा में बग, सही ढंग से नहीं आ रही फोटो, ऐप्पल ने भी मानी बात</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 सीरीज के मॉडल ग्राहकों के हाथों में पहुंचने शुरू हो गए हैं. 9 सितंबर को लॉन्च हुई इस सीरीज की बिक्री 19 सितंबर से शुरू हो चुकी है. नए फोन खरीदते ही ग्राहकों ने इनके फर्स्ट इंप्रेशन शेयर करना शुरू कर दिया है. कुछ यूजर्स ने नई सीरीज के कैमरा में तकनीकी खामी बताई है. इस बग का असर आईफोन एयर से फोटो लेते समय दिख रहा है. ऐप्पल ने भी इसकी पुष्टि की है.&amp;nbsp;
कैमरा में क्या दिक्कत आ रही?
एक टेक जर्नलिस्ट जब आईफोन एयर का रिव्यू कर रहा था, तब सबसे पहले आईफोन एयर के कैमरा में बग का पता चला. कॉन्सर्ट फोटो लेते समय जर्नलिस्ट ने देखा कि हर 10 में से एक फोटो का कुछ हिस्सा काला या इसमें अजीब से डिब्बे नजर आ रहे हैं, तो कुछ में सफेद लकीरें दिख रही हैं. हालांकि, ऐसा ऐसा कुछ खास परिस्थितियों में ही होता है. जर्नलिस्ट ने बताया कि खासकर LED डिस्प्ले की तस्वीरें लेते हुए इस बग का असर दिख रहा है.
ऐप्पल ने भी की पुष्टि
ऐप्पल ने भी इस बग की पुष्टि की है. कंपनी ने कहा कि ऐसा कुछ विशेष लाइटिंग कंडीशन में होता है. यह एक सॉफ्टवेयर का बग है, जिसे ठीक कर लिया गया है. अगली अपडेट में इस फिक्स को रोल आउट कर दिया जाएगा. हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया है कि अगली अपडेट कब रोल आउट की जाएगी.
ऐप्पल का सबसे पतला मॉडल है आईफोन एयर
ऐप्पल ने 17 सीरीज में प्लस मॉडल को बदलते हुए आईफोन एयर को लॉन्च किया है. इसकी मोटाई सिर्फ 5.6mm है और यह अब तक का सबसे पतला आईफोन है. इसमें 6.5 की प्रोमोशन टेक्नोलॉजी वाली स्क्रीन दी गई है. इसके रियर में 48MP का सिंगल कैमरा और फ्रंट में 18MP का सेंटर स्टेज कैमरा है. A19 Pro चिपसेट वाले इस फोन की भारत में शुरुआती कीमत 1,19,900 रुपये है.
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iPhone 17 Pro मॉडल्स पर लगे मिले स्क्रैच, नया खरीदते ही यूजर परेशान, कर रहे शिकायतें ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Flipkart की सेल का फायदा उठाना है तो कर लें ये काम, तभी मिलेगा छप्परफाड़ डिस्काउंट और बचेगा पैसा</title>
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<description><![CDATA[ Flipkart Big Billion Days सेल शुरू होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं. 23 सितंबर से इसकी शुरुआत हो रही है. ऐसे में अगर आप अपने घर या खुद के लिए कोई भी सामान खरीदना चाहते हैं तो इस सेल में भारी डिस्काउंट का फायदा उठा सकते हैं. मोबाइल से लेकर फैशन और ब्यूटी प्रोडक्ट्स तक, सेल में हर सामान पर भारी छूट मिलने वाली है. हालांकि, छप्परफाड़ डिस्काउंट का फायदा लेने के लिए आपको सेल शुरू होने से पहले कुछ काम कर लेने चाहिए ताकि आपके पैसे बच सके.
मेंबरशिप दिलाएगी मौज
फ्लिपकार्ट की सेल 23 सितंबर से सबके लिए लाइव हो रही है, लेकिन अगर आप इसके मेंबर हैं तो 24 घंटे पहले से सेल को एक्सेस कर पाएंगे. आउट ऑफ स्टॉक होने से पहले अगर आप कोई प्रोडक्ट खरीदना चाहते हैं तो मेंबरशिप इसमें आपकी मदद करेगी. फ्लिपकार्ट प्लस और ब्लैक नाम से दो मेंबरशिप देती है. अगर आप फ्लिपकार्ट से लगातार शॉपिंग करते रहते हैं तो आपके पास सुपर कॉइन्स होंगे ही. 200 सुपर कॉइन्स के बदले आप प्लस मेंबर बन सकते हैं. इसके अलावा कंपनी के नए ब्लैक मेंबरशिप प्रोग्राम से भी आप मेंबर बन सकती है. इस प्रोग्राम में अर्ली एक्सेस, एक्सक्लूसिव डिस्काउंट समेत कई फायदे मिलते हैं.
क्रेडिट कार्ड से मिलेगा फायदा
फ्लिपकार्ट सेल के दौरान एक्सिस और ICICI बैंक के क्रेडिट कार्ड धारकों की मौज होने वाली है. इस कार्ड्स पर सबसे ज्यादा डिस्काउंट का फायदा मिलेगा. अगर आपके पास ये क्रेडिट कार्ड नहीं है तो आप इनके लिए अप्लाई कर सकते हैं. अगर आपके पास ये कार्ड पहले से मौजूद हैं तो इन्हें सहजकर रख लें. सेल शुरू होते ही आप इनका इस्तेमाल कर सकते हैं.
प्रोडक्ट्स कर ले विश लिस्ट
सेल के दौरान बड़ी संख्या में लोग शॉपिंग करेंगे. ऐसे में कई प्रोडक्ट्स आउट ऑफ स्टॉक हो सकते हैं. इससे बचने के लिए आप पहले ही अपने प्रोडक्ट विशलिस्ट कर सकते हैं. इसका यह फायदा होगा कि आपको सेल शुरू होने के बाद प्रोडक्ट्स के लिए सर्च नहीं करना पड़ेगा और आप ऐप या वेबसाइट खोलते ही ऑर्डर प्लेस कर सकेंगे.
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>स्मार्टफोन बैटरी में mAh का क्या मतलब होता है? 99% लोग हैं इसकी सच्चाई से अंजान</title>
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<description><![CDATA[ स्मार्टफोन बैटरी में mAh का क्या मतलब होता है? 99% लोग हैं इसकी सच्चाई से अंजान ]]></description>
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:38 +0530</pubDate>
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<title>अब गूगल क्रोम में आ गया जेमिनी, ब्राउजिंग होगी और मजेदार, हर पल AI की मिलेगी मदद</title>
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<description><![CDATA[ गूगल ने अपने क्रोम ब्राउजर के लिए अब तक की सबसे बड़ी अपग्रेड का ऐलान किया है. कंपनी इस ब्राउजर में 10 नए AI फीचर्स जोड़ने जा रही है, जिनमें जेमिनी का इंटीग्रेशन और AI ब्राउजिंग असिस्टेंट आदि शामिल है. नए फीचर आने के बाद ब्राउजिंग और सुरक्षित होगी और इसमें बेहतर सेफ्टी प्रोटेक्शन मिलेगी. ऐसे में आपको अगले कुछ दिनों में क्रोम में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.&amp;nbsp;
जेमिनी का इंटीग्रेशन
गूगल ने मैक और विंडोज के डेस्कटॉप यूजर्स के लिए क्रोम में जेमिनी को इंटीग्रेट करने की बात कही है. इसके बाद यूजर्स जेमिनी से वेबपेज की समरी पूछ सकेंगे, मल्टीपल टैब्स को एनालाइज कर सकेंगे और नैनो बनाना इमेजेज भी बना सकेंगे. आने वाले दिनों में गूगल अपनी दूसरी ऐप्स जैसे यूट्यूब, कैलेंडर और मैप्स आदि में भी जेमिनी को इंटीग्रेट करेगी.
ब्राउजिंग होगी आसान
गूगल अब क्रोम में एजेंटिक कैपेबिलिटीज भी शामिल करने जा रही है. इसका मतलब है कि नया फीचर आने के बाद क्रोम खुद ही यूजर की तरफ से अपॉइंटमेंट बुक और ग्रॉसरी ऑर्डर कर सकेगा. कंपनी का कहना है कि इस पर यूजर का पूरा कंट्रोल रहेगा और वो जब चाहें, तब असिस्टेंट को रोक सकते हैं.
AI पावर्ड एड्रेस बार
गूगल ने क्रोम के एड्रेस बार में भी AI मोड देने का ऐलान किया है. यह फीचर आने के बाद यूजर सीधे ही एड्रेस बार में कोई जटिल क्वेरीज पूछ सकेंगे और उन्हें साइड पैनल पर AI ओवरव्यू मिल जाएगा. इसमें एक और रिकॉल का भी ऑप्शन मिलेगा. इसमें यूजर उन वेबसाइट्स के बारे में पूछ सकेंगे, जो उन्होंने विजिट की है, लेकिन नाम भूल गए. प्रॉम्प्ट देकर ऐसा किया जा सकेगा.
सेफ्टी के लिए गूगल नैनो
ऑनलाइन सेफ्टी के लिए गूगल नैनो को रोलआउट किया जाएगा. यह यूजर को फर्जी गिवअवे अलर्ट और वायरस आदि से बचाने में मदद करेगा. यह फीचर आने के बाद क्रोम भी AI की मदद से स्पैम वाली नोटिफिकेशन को ब्लॉक और साइट परमिशन को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेगा. इन फीचर्स की शुरुआत अमेरिका से होगी और धीरे-धीरे दुनियाभर के यूजर्स के लिए इन्हें रोल आउट कर दिया जाएगा.
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone&#45;Samsung के प्रीमियम फोन्स के साथ क्यों नहीं मिलता है चार्जर? जाने क्या है राज</title>
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<description><![CDATA[ iPhone-Samsung Charger: स्मार्टफोन बाजार में बदलाव अक्सर देखने को मिलते हैं. पहले जब भी कोई नया फोन खरीदा जाता था तो उसके बॉक्स में चार्जर और ईयरफोन जरूर होते थे. लेकिन अब Apple और Samsung जैसे दिग्गज ब्रांड्स ने अपने प्रीमियम स्मार्टफोन्स के बॉक्स से चार्जर हटाना शुरू कर दिया है. इससे ग्राहक असमंजस में रहते हैं कि आखिर ऐसा क्यों किया जा रहा है. आइए जानते हैं इस फैसले के पीछे का राज.
पर्यावरण संरक्षण की दलील
Apple ने सबसे पहले iPhone 12 सीरीज़ से बॉक्स से चार्जर हटाने की शुरुआत की थी. कंपनी का कहना था कि दुनिया भर में करोड़ों लोग पहले से चार्जर इस्तेमाल कर रहे हैं. अगर हर नए फोन के साथ चार्जर दिया जाए तो इलेक्ट्रॉनिक कचरा (E-Waste) काफी बढ़ जाएगा. Samsung ने भी यही तर्क अपनाते हुए अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स के बॉक्स से चार्जर हटाना शुरू कर दिया. कंपनियों के मुताबिक, यह कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जरूरी है.
पैकेजिंग और शिपिंग का फायदा
चार्जर हटाने की एक और वजह है छोटे बॉक्स और आसान ट्रांसपोर्टेशन. चार्जर और एक्सेसरीज हटने से पैकेजिंग पतली और हल्की हो जाती है. इससे एक बार में ज्यादा फोन्स शिप किए जा सकते हैं. नतीजतन ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट कम होती है और कार्बन उत्सर्जन भी घटता है. यानी कंपनियां इसे भी पर्यावरण हितैषी कदम बताती हैं.
कंपनियों का मुनाफा
हालांकि असली सच यह भी है कि चार्जर हटाकर कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ाती हैं. iPhone का ओरिजिनल चार्जर करीब 2000&amp;ndash;2500 रुपये में आता है, वहीं Samsung का फास्ट चार्जर भी 1500 रुपये से ऊपर का होता है. जब ग्राहक को इन्हें अलग से खरीदना पड़ता है तो यह कंपनियों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन जाता है. यानी यह फैसला केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि राजस्व बढ़ाने की रणनीति भी है.
फास्ट चार्जिंग टेक्नोलॉजी का बहाना
आजकल हर साल चार्जिंग टेक्नोलॉजी में बदलाव हो रहा है. अलग-अलग मॉडल्स अलग वॉटेज की चार्जिंग सपोर्ट करते हैं. कंपनियों का कहना है कि हर फोन के साथ एक ही चार्जर देना व्यावहारिक नहीं है. बेहतर यही है कि यूजर अपनी जरूरत और फोन की चार्जिंग क्षमता के हिसाब से अलग से चार्जर खरीदे. हालांकि कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह बात ग्राहकों से ज्यादा कंपनियों के फायदे में है.
ग्राहकों पर असर
इस कदम का सबसे ज्यादा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ता है. अगर किसी के पास पहले से कंपेटिबल चार्जर नहीं है, तो उसे नया चार्जर खरीदना ही पड़ेगा. ऐसे में फोन की असली कीमत उस मूल्य से कहीं ज्यादा हो जाती है जो लॉन्च के समय बताई जाती है.
iPhone और Samsung जैसे प्रीमियम ब्रांड्स ने चार्जर हटाने का फैसला आधिकारिक तौर पर पर्यावरण और टिकाऊ पैकेजिंग के नाम पर लिया है. लेकिन इसके पीछे कंपनियों के मुनाफे की रणनीति को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता. ग्राहकों के लिए यह कदम थोड़ा महंगा साबित होता है लेकिन धीरे-धीरे यह ट्रेंड स्मार्टफोन इंडस्ट्री में नया नॉर्मल बन चुका है.
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब सिम कार्ड की होगी होम डिलीवरी, घर बैठे ही करें ऑर्डर, इस कंपनी ने शुरू की नई सर्विस</title>
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<description><![CDATA[ अब सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL अपने सिम कार्ड की होम डिलीवरी करेगी. पूरे देश में अब लोग कहीं से भी सिम कार्ड ऑर्डर कर सकते हैं और कुछ ही समय में उन्हें इसकी डिलीवरी हो जाएगी. सिम कार्ड खरीदने के लिए अब उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं है. कुछ ही क्लिक की बात है तो सिम कार्ड ऑर्डर हो जाएगा. इतना ही नहीं, उनकी KYC भी घर पर कंप्लीट हो जाएगी. आइए जानते हैं कि घर बैठे सिम कार्ड कैसे ऑर्डर किया जा सकता है.
ऐसे करें सिम कार्ड ऑर्डर
सबसे पहले BSNL की ऑफिशियल साइट (bsnl.co.in) पर जाएं. यहां &#039;BSNL&#039;s SIM at your Doorstep&#039; ऑप्शन पर टैप करें. इसके बाद एक फॉर्म खुलेगा. इसमें अपना पिन कोड, नाम और मोबाइल नंबर डालें. यहीं से आपको प्रीपेड या पोस्टपेड कनेक्शन लेने का ऑप्शन सेलेक्ट करना पड़ेगा. फॉर्म भरने के बाद सारी डिटेल्स वेरिफाई कर इसे सबमिट कर दें. इस तरह कुछ ही आसान स्टेप्स में सिम कार्ड ऑर्डर हो जाएगा. कुछ ही समय बाद डिलीवरी एग्जीक्यूटिव सिम कार्ड आपके घर पर डिलीवर कर देगा. बता दें कि पिछले कुछ समय से BSNL तेजी से अपनी सर्विसेस को अपग्रेड कर रही है.&amp;nbsp;
पोस्ट ऑफिस में भी मिलेंगे सिम कार्ड
आप चाहें तो अपने नजदीकी पोस्ट ऑफिस से भी BSNL का सिम कार्ड ले सकते हैं. दरअसल, BSNL और भारतीय डाक के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके इसके तहत भारतीय डाक देशभर में फैले अपने 1.65 लाख पोस्ट ऑफिस के जरिए BSNL के सिम कार्ड की बिक्री करेगी. इसके साथ पोस्ट ऑफिस पर रिचार्ज की सुविधा भी उपलब्ध होगी.&amp;nbsp;
BSNL लाई नया रिचार्ज प्लान
BSNL ने हाल ही में अपने यूजर्स के लिए एक सस्ता रिचार्ज प्लान पेश किया है. 199 रुपये वाले इस प्लान में ग्राहकों को 28 दिन की वैलिडिटी के साथ अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग, रोजाना 100 SMS और डेली 2GB इंटरनेट डेटा मिलेगा.&amp;nbsp;
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या है DPDP कानून! 1 अक्टूबर से होने वाला है लागू, जानें आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर</title>
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<description><![CDATA[ DPDP: सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि भारत का प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट, 2025, जो पिछले महीने 23 अरब डॉलर के ऑनलाइन मनी गेमिंग उद्योग पर रोक लगा चुका है, 1 अक्टूबर से लागू होगा. इसके साथ ही डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के नियम भी तैयार हो चुके हैं और इन्हें 28 सितंबर तक अधिसूचित किया जाएगा. आने वाले पंद्रह दिनों में लागू होने वाले ये दोनों कानून कई तरह की अनुपालन संबंधी आवश्यकताओं को जन्म देंगे.
ऑनलाइन गेमिंग कानून और उद्योग से बातचीत
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार इस कानून को पारित करने के बाद मंत्रालय ने ऑनलाइन मनी गेमिंग कंपनियों से कई दौर की चर्चाएं कीं. लगभग तीन साल से उद्योग के साथ लगातार बातचीत चल रही थी और बैंकों से भी परामर्श लिया गया. मंत्री के मुताबिक, नियमों को 1 अक्टूबर से लागू किया जाएगा लेकिन उससे पहले एक और बैठक उद्योग से की जाएगी. अगर उन्हें अतिरिक्त समय की आवश्यकता हुई तो सरकार इस पर विचार करेगी.
हालांकि सबसे बड़ी चिंता यूजर बैलेंस की वापसी को लेकर है. इसके लिए सरकार ने बैंकों और कंपनियों से बात कर समाधान निकाला है ताकि तय समयसीमा में उपयोगकर्ताओं के पैसे लौटाए जा सकें. अधिकारी का कहना है कि यह मुद्दा कानून लागू होने में बाधा नहीं बनेगा.
नौकरियों और कंपनियों पर असर
इस कानून के तहत सभी मनी-बेस्ड गेमिंग गतिविधियों, भुगतान, प्रमोशन और विज्ञापनों पर रोक रहेगी. उद्योग संगठनों का कहना है कि इससे लगभग 2 लाख नौकरियां खत्म हो सकती हैं और करीब 400 कंपनियां बंद हो सकती हैं. हालांकि सरकार का आकलन इससे बिल्कुल अलग है. इस क्षेत्र में सीधे तौर पर केवल 2,000 से थोड़ा अधिक कर्मचारी काम कर रहे हैं यानी उद्योग द्वारा बताए गए आंकड़े वास्तविकता से काफी दूर हैं.
आम इंसान पर फर्क
कानून लागू होने की घोषणा के बाद Dream11, Gameskraft, Games24x7, MPL और Baazi जैसी कंपनियों ने अपने रियल-मनी ऑपरेशंस बंद करने का फैसला किया है. इन ऐप्स पर काफी लोग एक्टिव रहते हैं. इस बीच, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है और अब मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. इसके अलावा, उद्योग को केंद्र द्वारा लगाए गए टैक्स डिमांड पर भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है.
डेटा प्रोटेक्शन कानून की राह
DPDP कानून की शुरुआत 2018 में हुई थी, जब इसे पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल के रूप में न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण की अध्यक्षता वाली समिति ने पेश किया था. इसके बाद कई संशोधनों और उद्योग परामर्शों के बाद आखिरकार यह बिल 3 अगस्त 2023 को संसद में पेश हुआ और 12 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई.
हालांकि नियम अधिसूचित न होने की वजह से अब तक इसे लागू नहीं किया जा सका था. सरकार ने साफ किया है कि पहले नियम जारी किए जाएंगे और फिर इसके तहत अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQs) की विस्तृत गाइडलाइन प्रकाशित की जाएगी ताकि कंपनियों और आम लोगों को भारत के पहले प्राइवेसी कानून को समझने और पालन करने में आसानी हो. अधिकारियों का कहना है कि सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और अंतिम औपचारिकताओं के बाद नियम 28 सितंबर तक अधिसूचित कर दिए जाएंगे.
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>WhatsApp पर भी बन सकती है साड़ी वाली रेट्रो&#45;स्टाइल फोटो, आसान है तरीका, करना होगा यह काम</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर गूगल जेमिनी के नैनो बनाना AI टूल से बनी इमेजेज की धूम मची हुई है. कई लोग अपना 3D अवतार बना रहे हैं तो कोई रेट्रो स्टाइल में साड़ी वाली तस्वीरें अपलोड कर रही है. अभी तक नैनो बनाना से इमेज बनाने के लिए गूगल जेमिनी की ऐप या वेबसाइट की मदद लेनी पड़ती थी, लेकिन अब WhatsApp से भी ये इमेजेज बनाई जा सकती हैं. Perplexity ने ऐलान किया है कि यूजर्स अब WhatsApp पर उसके चैटबॉट से नैनो बनाना इमेज बना सकेंगे.
WhatsApp पर कैसे बनेगी इमेज?
Perplexity ने बताया है कि वह व्हाट्सऐप पर अपने बॉट में गूगल जेमिनी 2.5 फ्लैश इंजन को इंटीग्रेट कर रही है. इसका मतलब है कि अब यूजर्स सीधा व्हाट्सऐप से अपनी मनपसंद फोटोज क्रिएट कर सकेंगे. इसके लिए यूजर्स को व्हाट्सऐप पर Perplexity के बॉट से चैट करनी है और उसकी इमेज बनकर तैयार हो जाएगी.&amp;nbsp;
यह है तरीका
इसका तरीका बेहद आसान है. सबसे पहले अपने फोन में +1 (833) 436-3285 नंबर को सेव कर ले. इसके बाद इस नंबर पर व्हाट्सऐप मैसेज करें. यह आपको Perplexity और नैनो बनाना इंजन की डायरेक्ट एक्सेस देगा. इस बॉट पर बातचीत शुरू करने के बाद अपनी पसंद की इमेज और उसके लिए प्रॉम्प्ट भेजें. यानी आप उस इमेज को कैसे एडिट या रिडिजाइन करना चाहते हैं. इसके बाद कुछ ही पलों में आपके लिए इमेज बनकर व्हाट्सऐप पर आ जाएगी. ध्यान रहें कि आपका प्रॉम्प्ट जितना डिटेल्ड होगा, फोटो उतनी ही अच्छी बनकर आएगी.&amp;nbsp;
क्या इसके लिए कोई पैसा देना पड़ेगा?
अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है कि यह पेड फीचर है या फ्री में इमेज क्रिएट की जा सकती है. गूगल भी लिमिटेड संख्या में फ्री इमेज बनाने की सहूलियत देती है. ज्यादा इमेज जनरेट करने के लिए इसका पेड प्लान लेना पड़ता है. ऐसा Perplexity के साथ भी हो सकता है, लेकिन अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone में सबसे महंगा पार्ट कौन सा होता है? जानें क्यों ज्यादा होती है इस डिवाइस की कीमत</title>
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<description><![CDATA[ Apple iPhone: जब भी iPhone की बात आती है, लोग सबसे पहले इसके दाम को लेकर चर्चा करते हैं. हर साल नए iPhone मॉडल लॉन्च होते हैं और उनकी कीमतें कई बार लोगों को चौंका देती हैं. अक्सर सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या है इस फोन में जो इसे बाकी स्मार्टफोन्स से ज्यादा महंगा बनाता है? इसका सबसे बड़ा कारण है iPhone के महंगे पार्ट्स और उनका प्रीमियम क्वालिटी से बनाया जाना. लेकिन इनमें से सबसे महंगा पार्ट कौन सा होता है आइए जानते हैं.
iPhone का सबसे महंगा पार्ट
iPhone का सबसे महंगा और अहम पार्ट उसका डिस्प्ले होता है. Apple अपने iPhone में OLED या Super Retina XDR डिस्प्ले इस्तेमाल करता है जिसे खास तौर पर Samsung और LG जैसी बड़ी कंपनियां बनाती हैं. यह डिस्प्ले बेहद हाई-टेक होता है और इसमें HDR सपोर्ट, हाई ब्राइटनेस, बेहतर कलर एक्यूरेसी और स्मूथ टच रिस्पॉन्स जैसी खूबियां मिलती हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, iPhone का सिर्फ डिस्प्ले ही 150 से 200 डॉलर (करीब 12 से 16 हजार रुपये) तक का पड़ सकता है. यह लागत बाकी स्मार्टफोन्स की तुलना में कहीं ज्यादा है. यही वजह है कि अगर iPhone का डिस्प्ले टूट जाए तो उसकी रिपेयरिंग भी काफी महंगी होती है.
दूसरे महंगे पार्ट्स भी बढ़ाते हैं कीमत
हालांकि डिस्प्ले सबसे महंगा पार्ट है लेकिन iPhone के और भी कई हिस्से ऐसे हैं जिनकी वजह से इसकी कीमत ज्यादा होती है. Apple का खुद का डिज़ाइन किया हुआ A-सीरीज बायोनिक चिप बेहद पावरफुल और एनर्जी-एफिशिएंट होता है. इसे बनाना और डेवलप करना काफी महंगा पड़ता है. इसके अलावा iPhone का मल्टी-कैमरा सेटअप एडवांस सेंसर, OIS, और AI-बेस्ड प्रोसेसिंग के साथ आता है.
इसका निर्माण और इंटीग्रेशन भी बहुत महंगा होता है. iPhone में इस्तेमाल होने वाले हाई-स्पीड NAND फ्लैश स्टोरेज भी काफी कॉस्टली होते हैं. iPhone में इस्तेमाल होने वाली बैटरी और प्रीमियम बॉडी मटेरियल (जैसे सर्जिकल-ग्रेड स्टेनलेस स्टील और सिरेमिक शील्ड) भी इसकी कीमत बढ़ाते हैं.
सिर्फ हार्डवेयर ही नहीं, सॉफ्टवेयर भी अहम
iPhone की कीमत सिर्फ हार्डवेयर पर निर्भर नहीं होती. Apple का iOS ऑपरेटिंग सिस्टम, सिक्योरिटी फीचर्स, लंबे समय तक मिलने वाले अपडेट्स और ऐप्स का ऑप्टिमाइजेशन भी इस डिवाइस को प्रीमियम बनाते हैं. iPhone का सबसे महंगा पार्ट उसका डिस्प्ले होता है, लेकिन बाकी पार्ट्स जैसे प्रोसेसर, कैमरा और स्टोरेज भी इसकी कीमत को काफी बढ़ा देते हैं.
इसके साथ ही रिसर्च और डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन और ब्रांड वैल्यू भी iPhone को बाकी स्मार्टफोन्स से अलग बनाते हैं. यही वजह है कि iPhone सिर्फ एक फोन नहीं, बल्कि प्रीमियम टेक्नोलॉजी का प्रतीक माना जाता है.
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<pubDate>Sat, 20 Sep 2025 13:29:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या iOS26 इंस्टॉल करने के बाद जल्दी डिस्चार्ज हो रही है iPhone की बैटरी? ऐप्पल ने कह दी यह बड़ी बात</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/3502</link>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल ने हाल ही में आईफोन के लिए iOS 26 को रोलआउट किया है. पिछले काफी समय से इस सॉफ्टवेयर अपडेट का इंतजार किया जा रहा था और आखिरकार 15 सितंबर को कंपनी ने इसे रिलीज कर दिया. यह अपडेट इंस्टॉल करने के बाद कई यूजर्स ने आईफोन की बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने की शिकायत की है. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अपडेट रिलीज होने के तुरंत बाद से ही यूजर बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होने की शिकायत कर रहे हैं.
नई अपडेट में क्या है?
iOS 26 अपडेट में यूजर्स को नया डिजाइन, इंटेलीजेंट एक्सपेरिमेंट और मौजूदा ऐप्स में कई इंप्रूवमेंट देखने को मिली है. इसकी लिक्विड ग्लास डिजाइन लैंग्वेज visionOS के ट्रांसलुसेंट इंटरफेस से प्रेरित है. इस अपडेट में कंपनी ने मेनू, ऑप्शन्स, नोटिफिकेशन, कंट्रोल सेंटर और मैसेजेज, फोन और कैमरा समेत कई ऐप्स के एलिमेंट्स को नया लुक दिया है. नई अपडेट से लॉक स्क्रीन को भी नया लुक मिला है और डेट और टाइम विजेट नए तरीके से दिखेंगे. एक और मजेदार फीचर spatial scenes का है, जिससे वॉलपेपर में सेंस ऑफ डेप्थ मिलेगी.
यूजर्स की शिकायतें
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने शिकायत की कि नई अपडेट के बाद उनकी बैटरी पहले जितना नहीं चल रही. एक यूजर ने लिखा कि उसके आईफोन की 100 प्रतिशत बैटरी एक घंटे से भी कम समय में 79 प्रतिशत हो गई. एक और यूजर ने कहा कि नई अपडेट को इंस्टॉल करने के बाद उसके आईफोन की बैटरी हेल्थ गिरकर 80 प्रतिशत हो गई.
कंपनी ने क्या जवाब दिया?
ऐप्पल ने यूजर्स की इन शिकायतों पर प्रतिक्रिया दी है. कंपनी की तरफ से कहा गया है कि यह एक टेंपरेरी इश्यू है. किसी भी बड़ी अपडेट के बाद फोन की बैटरी और थर्मल परफॉर्मेंस पर थोड़ा असर पड़ना सामान्य है. अपडेट के बाद बैकग्राउंड में सेटअप प्रोसेस पूरा करने के लिए डिवाइस को ज्यादा काम करना पड़ता है. इसके अलावा ऐप्पल ने कहा कि नई अपडेट में कुछ ऐसे फीचर्स हैं, जिन्हें ज्यादा रिसोर्सेस की जरूरत पड़ेगी. इसलिए भी कुछ यूजर्स बैटरी पर टेंपरेरी असर देख सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AC को उल्टा लगाकर क्या बनाया जा सकता है हीटर? जानिए जवाब</title>
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<description><![CDATA[ AC को उल्टा लगाकर क्या बनाया जा सकता है हीटर? जानिए जवाब ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Gemini Nano Banana से फ्री में बनानी है इमेज? जानिये कितनी है डेली लिमिट, कब देना पड़ेगा पैसा</title>
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<description><![CDATA[ Google Nano Banana AI टूल ने इन दिनों धूम मचा रखी है. सोशल मीडिया पर हर कोई इस टूल से बनी 3D या रेट्रो स्टाइल इमेजेज अपलोड कर रहा है. इससे जनरेट की गई इमेजेज एकदम असली जैसी दिखती है, इस वजह से लोग धड़ाधड़ इससे इमेज क्रिएट कर रहे हैं. इस बढ़ती पॉपुलैरिटी के बीच गूगल ने इससे जनरेट की जा सकने वाली फ्री इमेजेज को लेकर अपनी पॉलिसी बदल दी है. आइए जानते हैं कि पॉलिसी बदलने से क्या-क्या बदल जाएगा.
अब कितनी इमेज क्रिएट कर सकते हैं?
यह ट्रेंड आने से पहले Gemini AI से यूजर्स रोजाना 100 फ्री इमेज क्रिएटर कर सकते थे, जबकि प्रो और अल्ट्रा यूजर्स के लिए यह लिमिट 1,000 इमेज की थी. अब गूगल ने इसमें बदलाव किया है. अब इसके सपोर्ट पेज के मुताबिक, फ्री अकाउंट्स को बेसिक एक्सेस मिलेगी. माना जा रहा है कि अब फ्री यूजर्स रोजाना केवल 2 ही इमेज क्रिएट कर पाएंगे. इससे ज्यादा जनरेशन के लिए अब आपको पैसा देना पड़ेगा. इसी तरह गूगल ने जेमिनी AI के फ्री यूजर्स के लिए पांच प्रॉम्प्ट निर्धारित कर दिए हैं.&amp;nbsp;
इमेज जनरेशन को बनाया हाईएस्ट एक्सेस
गूगल ने अब जेमिनी AI से इमेज जनरेशन को हाईएस्ट एक्सेस में डाल दिया है. इसका मतलब है कि अब इस फीचर का पूरा फायदा केवल पेड यूजर्स को मिलेगा. कंपनी ने प्रो और अल्ट्रा यूजर्स के लिए भी प्रॉम्प्ट लिमिट कर दिए हैं. अब प्रो यूजर्स रोजाना 100 प्रॉम्प्ट जनरेट कर सकते हैं तो अल्ट्रा यूजर्स के लिए यह लिमिट 500 प्रॉम्प्ट कर दी गई है. पेड यूजर्स के लिए कंपनी प्रायोरिटी प्रोसेसिंग स्पीड, मिनिमल वेट टाइम और हायर यूसेज अवैलिबिलिटी भी देगी. फ्री यूजर्स को इनका फायदा नहीं मिलेगा.
क्या Nano Banana से इमेज बनाना सेफ है?
इन दिनों सारे लोग नए ट्रेंड के चलते Nano Banana से इमेज क्रिएट कर रहे हैं. हालांकि, कई जानकारों का कहना है कि ऐसा करे से प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है. IPS अधिकारी वीसी सज्जनार ने इसे लेकर यूजर्स को आगाह किया है. उन्होंने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि इंटरनेट पर चल रहे ट्रेंडिंग टॉपिक्स को लेकर सावधान रहें. अगर आप अपनी इंफोर्मेशन ऑनलाइन शेयर करते हैं तो स्कैम हो सकते हैं. अपनी फोटो या पर्सनल डिटेल कभी भी फर्जी वेबसाइट या अनअथॉराइज ऐप्स पर शेयर न करें.
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Diwali धमाका! 12 हजार से भी कम में मिल जाएगी Smart TV, Flipkart&#45;Amazon नहीं यहां मिलेगी सबसे तगड़ी डील</title>
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<description><![CDATA[ Diwali धमाका! 12 हजार से भी कम में मिल जाएगी Smart TV, Flipkart-Amazon नहीं यहां मिलेगी सबसे तगड़ी डील ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>करोड़ों कमा पाएंगे YouTube क्रिएटर्स! आया नया AI टूल, अब आसान हो जाएंगे ये काम</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप YouTube पर कंटेट क्रिएट करते हैं तो आपके लिए खुशखबरी है. कंपनी ने कुछ ऐसे AI टूल्स लॉन्च किए हैं, जो आपकी कंटेट क्रिएशन की प्रोसेस को आसान कर देंगे. इससे आपके लिए कंटेट बनाना तो आसान होगा ही, साथ ही कई दूसरी मुश्किलें भी हल हो जाएंगी. क्रिएटर्स को सपोर्ट करने के लिए कंपनी ने मेड ऑन यूट्यूब 2025 इवेंट में इन टूल्स का ऐलान किया है. आइए जानते हैं कि यूट्यूब क्या-क्या नए टूल्स लेकर आई है.
Ask Studio
यह एक AI-पावर्ड चैट टूल है, जिसे क्रिएटिव पार्टनर की तरह काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. क्रिएटर्स इससे वीडियो की परफॉर्मेंस, एडिटिंग स्टाइल पर कम्युनिटी में चल रही बातचीत समेत कई सवाल पूछ सकता है. इससे यूजर को उसके चैनल डेटा के आधार पर इनसाइट मिलेगी.
Inspiration Lab
कई बार क्रिएटर्स नए आइडिया नहीं सोच पाते हैं. यह लैब उनकी फीड के आधार पर टॉपिक सजेस्ट कर उनकी मदद करेगी. यह हर प्रॉम्प्ट पर नए आइडिया देगी और साथ ही यह भी बताएगी कि क्यों यह आइडिया क्रिएटर की ऑडियंस को पसंद आ सकता है.
Title A/B testing
इसे थंबनेल A/B testing फीचर की तरह ही तैयार किया गया है. इसकी मदद से क्रिएटर्स तीन अलग-अलग टाइटल्स और थंबनेल को टेस्ट कर सकते हैं कि इनमें से कौन-सा बेहतर परफॉर्म करेगा.
Collaborations&amp;nbsp;
यूट्यूब के इस फीचर की मदद से क्रिएटर्स एक वीडियो में 5 Collaborators को एड कर सकेंगे. यह वीडियो सभी Collaborators की ऑडियंस को दिखेगा. हालांकि, इस रेवेन्यू उसी चैनल के पास जाएगा, जहां से इसे पोस्ट किया गया है.&amp;nbsp;
Auto-Dubbing With Lip Sync
यूट्यूब अपने Auto-Dubbing फीचर को अब बेहतर कर रही है. कंपनी इसमें नई टेक्नोलॉजी जोड़ेगी, जो लिप सिंक को सपोर्ट करेगी. अभी यह टेक्नोलॉजी 20 भाषाओं में डबिंग को सपोर्ट कर रही है और आने वाले महीनों में इसकी टेस्टिंग शुरू हो जाएगी.
Likeness Detection
क्रिएटर्स की सुरक्षा के लिए यूट्यूब इस लाइकनेस डिटेक्शन टूल का दायरा बढ़ा रही है. अब यह सभी क्रिएटर्स के लिए उपलब्ध होगा. इसकी मदद से क्रिएटर्स आसानी से यह पता लगा सकते हैं कि उनके चेहरे का इस्तेमाल कर और कौन वीडियो बना रहा है. वो इन वीडियो को डिलीट करवा सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>लाल साड़ी से लेकर बनारसी तक! जानिए कैसे बदल&#45;बदल कर डिजाइनर साड़ियों में बना सकती हैं अपनी फोटो</title>
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<description><![CDATA[ लाल साड़ी से लेकर बनारसी तक! जानिए कैसे बदल-बदल कर डिजाइनर साड़ियों में बना सकती हैं अपनी फोटो ]]></description>
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>भूत जैसा दिखने वाला यह रोबोट &amp;apos;पीता&amp;apos; है पानी, इंसानों की तरह कर सकता है कई काम</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ समय से रोबोटिक्स फील्ड में कई बदलाव देखने को मिले हैं. Elon Musk की कंपनी टेस्ला भी ऑप्टिमस नाम के रोबोट पर काम कर रही है. हाल ही में खबर आई थी कि OpenAI भी इंसानी खूबियों वाले रोबोट बनाने की तैयारी कर रही है. इसी बीच आज हम आपके लिए एक ऐसे रोबोट की जानकारी लेकर आए हैं, जो भूत जैसा दिखता है और पानी पीता है. यह इंसानों की तरह कई काम कर सकता है.&amp;nbsp;
पोलैंड की कंपनी ने किया तैयार
पोलैंड की कंपनी Clone Robotics ने इस ह्यूमनॉइड को तैयार किया है. कंपनी के को-फाउंडर और सीईओ धनुष राधाकृष्णन ने बताया कि वो ऐसा रोबोट तैयार करना चाहते थे, जो sci-fi फिल्मों में दिखने वाली चीजों को रियलटी में बदल सके. धनुष ने बताया कि उनकी कंपनी की शुरुआत 2021 में हुई थी और इसका मकसद ऐसे रोबोट बनाना है, जो इंसानों की तरह मूवमेंट और टास्क कर सकें. कंपनी का रोबोट दरवाजा खोलने से लेकर फ्रूट काटने तक का काम कर लेता है.
हाथ से हुई शुरुआत
धनुष ने बताया कि उन्होंने ह्यूमनॉइड बनाने की शुरुआत हाथ से की. इंसानी हाथ एक ऐसा अंग होता है, जो सबसे ज्यादा काम करता है और बाकियों की तुलना में ज्यादा मूवमेंट कर सकता है. रोबोटिक हाथ बनाने में कंपनी को 18 महीनों का समय लगा था. इसके बाद उनकी कंपनी ने एक साल के भीतर फुल-बॉडी प्रोटोटाइप तैयार कर दिया. कंपनी अभी इस रोबोट को ट्रेन कर रही है और आगे चलकर इसमें नई स्किन जोड़ी जाएगी, जो चीजों को सेंस कर पाएंगी. इससे नाजुक काम भी आसान हो सकेंगे.
पानी से चलता है यह रोबोट
इस रोबोट की टेक्नोलॉजी इसे बाकियों से अलग बनाती है. अन्य रोबोट जहां मोटर और बैटरी से चलते हैं, वहीं धनुष की कंपनी का ह्यूमनॉइड पानी से चलता है. इसे चलाने के लिए एक हाइड्रोलिक सिस्टम का यूज किया गया है, जो एक कॉम्पैक्ट पंप से चलता है. कंपनी ने इसे हाइड्रोलिक हार्ट का नाम दिया है. यह रोबोट की मसल्स में पानी पंप करता है. यह पानी सिस्टम के अंदर ही रहता है और जरूरत पड़ने पर इसमें एक्स्ट्रा पानी भी डाला जा सकता है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या होता है Megapixel का मतलब? जानें 200MP कैमरा सिर्फ दिखावा या वाकई होता है दमदार</title>
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<description><![CDATA[ What is Megapixel: आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. जब भी नया फोन लेने की बात आती है तो कैमरा ही वो फीचर होता है जो हमारी खरीद का फैसला तय करता है. अक्सर हम कैमरे की क्वालिटी को मापने के लिए Megapixel पर ध्यान देते हैं लेकिन क्या सिर्फ मेगापिक्सल ही सब कुछ है?
अब लगभग हर मिड-रेंज और प्रीमियम फोन में 50MP का कैमरा आम हो गया है. कुछ कंपनियां तो 200MP तक का कैमरा देने लगी हैं. ऐसे में सवाल उठता है क्या ज्यादा मेगापिक्सल वाला कैमरा ही बेहतर होता है? या ये सब सिर्फ मार्केटिंग का हिस्सा है? चलिए, इसे आसान भाषा में समझते हैं.
Megapixel होता क्या है और इसका मतलब क्या है?
मेगापिक्सल का मतलब होता है 10 लाख पिक्सल. हर डिजिटल फोटो बहुत सारे छोटे-छोटे पिक्सल्स से बनी होती है जैसे किसी मोज़ेक (mosaic) में छोटे-छोटे टाइल्स होते हैं. जितने ज्यादा पिक्सल, उतनी ज़्यादा डिटेल और साफ़ तस्वीर. लेकिन यह समझना जरूरी है कि मेगापिक्सल तस्वीर की क्वालिटी तय करने का सिर्फ एक पहलू है. कैमरा कितना अच्छा फोटो खींचता है, यह बहुत सारी दूसरी चीजों पर भी निर्भर करता है.
क्या ज्यादा Megapixel का मतलब बेहतर फोटो होता है?
ज़रूरी नहीं. ज्यादा मेगापिक्सल का कैमरा आपको डिटेल ज़रूर देगा लेकिन बेहतर फोटो की गारंटी नहीं. फोटो क्वालिटी पर लेंस की क्वालिटी, सेंसर का आकार, रोशनी और सॉफ्टवेयर प्रोसेसिंग का भी बड़ा असर होता है. कई बार कम मेगापिक्सल वाला कैमरा, अगर उसकी टेक्नोलॉजी अच्छी हो तो ज़्यादा मेगापिक्सल वाले कैमरे से बेहतर परफॉर्म करता है. अक्सर सोशल मीडिया या डेली लाइफ की तस्वीरों के लिए 12MP से 20MP का कैमरा ही काफी होता है जब तक आप फोटो को बड़ा प्रिंट नहीं करना चाहते या बहुत ज्यादा क्रॉप नहीं करते ज्यादा मेगापिक्सल की जरूरत नहीं पड़ती.
Megapixel मायने कब रखते हैं?
अगर आप बड़े पोस्टर प्रिंट करना चाहते हैं या फोटो को काफी क्रॉप करना चाहते हैं तब ज्यादा मेगापिक्सल फायदेमंद होते हैं. प्रोफेशनल फोटोग्राफर जैसे फैशन या प्रोडक्ट फोटोग्राफी करने वाले हाई रिज़ॉल्यूशन कैमरे इसलिए इस्तेमाल करते हैं ताकि एक फोटो से कई एंगल निकाल सकें.
आम यूज़र्स को कितने Megapixel की जरूरत होती है?
अगर आप सिर्फ ऑनलाइन फोटो शेयर करते हैं या डिजिटल अल्बम बनाते हैं तो 12MP का कैमरा भी आपके लिए पूरी तरह काफी है. अगर आप ज़्यादा ज़ूम इन करते हैं, या बड़े फॉर्मेट में प्रिंट करना चाहते हैं, तब 20MP या उससे ऊपर का कैमरा सही रहेगा. पर ध्यान रखें ज्यादा मेगापिक्सल मतलब फोटो फाइल का साइज भी बड़ा, स्टोरेज ज़्यादा, ट्रांसफर स्लो और एडिट करना थोड़ा भारी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी फोटो को कंप्रेस कर देते हैं जिससे हाई मेगापिक्सल का पूरा फायदा वहां नहीं मिलता.
क्या स्मार्टफोन में ज्यादा Megapixel वाकई काम आते हैं?
मोबाइल कंपनियां अक्सर हाई मेगापिक्सल को हाइलाइट करती हैं लेकिन जरूरी नहीं कि 108MP या 200MP वाला कैमरा, 12MP कैमरे से अच्छा फोटो दे. असलियत में सेंसर का साइज, पिक्सल का साइज और इमेज प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर ज्यादा अहम होते हैं. जैसे iPhone में बहुत हाई मेगापिक्सल नहीं होता लेकिन फोटो क्वालिटी Samsung के 200MP वाले फोन से बेहतर दिखती है इसकी वजह है अच्छी प्रोसेसिंग और सेंसर टेक्नोलॉजी.
बड़े पिक्सल ज्यादा रोशनी कैप्चर करते हैं जिससे लो लाइट में भी तस्वीरें ब्राइट और शार्प आती हैं. इसे ऐसे समझें बारिश पकड़ने के लिए छोटे कपड़ों की जगह अगर बड़े बाल्टी हों तो ज्यादा पानी आएगा. कैमरे में भी यही फॉर्मूला है कम लेकिन बड़े पिक्सल ज्यादा असरदार होते हैं.
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब बम डिफ्यूज करेंगे ये रोबोट, धमाका होने के चांस नहीं, यहां किए जा रहे तैनात</title>
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<description><![CDATA[ अब बाकी कामों के साथ-साथ रोबोट बम भी डिफ्यूज करेंगे. दरअसल, ब्रिटिश आर्मी और रॉयल नेवी की टीमें यूनाइटेड किंगडम, साइप्रस और जिब्राल्टर में ऐसे रोबोट तैनात कर रही है, जो बम डिफ्यूज कर सकते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में रोबोट का ऑपरेटर और आसपास के लोग पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे. इन्हें L3Harris T4 मल्टी-मिशन बॉम्ब डिस्पोजल रोबोट्स कहा जा रहा है. बताया जा रहा है कि बम डिफ्यूज करने के काम में ये दुनिया के सबसे सक्षम रोबोट हैं.&amp;nbsp;
50 रोबोट होंगे तैनात
करीब 43 मिलियन डॉलर की लागत वाले इस प्रोग्राम के तहत कुल 50 रोबोट तैनात किए जाएंगे. ये मीडियम अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल्स (UGVs) एडवांस्ड कंट्रोल, हाई-डेफिनेशन कैमरा औरह हैप्टिक फीडबैक सिस्टम से लैस है. हेप्टिक फीडबैक सिस्टम के कारण ऑपरेटर एक तरीके से उन चीजों को फील कर सकेगा, जो रोबोट की आर्म्स के संपर्क में आएगी. इस वजह से इन्हें कंट्रोल और ऑपरेट करना आसान हो जाता है.
सीढ़ियां चढ़ने में भी सक्षम&amp;nbsp;
ये T4s रोबोट सर्विस में पहले से तैनात T7 की तुलना में काफी छोटे हैं. नए रोबोट का वजन करीब 100 किलो है और इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये तंग इलाकों में भी काम कर और सीढ़ियां चढ़ सकते हैं. साइज में छोटे होने के कारण इन्हें एक से दूसरी जगह ले जाना आसान है. नए रोबोट की अन्य खूबियों की बात करें तो ये सात घंटे तक लगातार काम कर सकते हैं. इनकी स्पीड 8 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा है. इनके प्लेटफॉर्म पर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेस का कोई असर नहीं होता और ये माइनस 20 डिग्री से लेकर 60 डिग्री सेल्सियस तक का तापमान आसानी से झेल लेते हैं. अधिकारियों का कहना है कि नए रोबोट में T7 वाली सारी खूबियां हैं और ये छोटी जगहों पर भी काम कर खतरों को टाल सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>खुशखबरी! गांव से लेकर शहर तक मिलेगा सुपरफास्ट इंटरनेट, जानिए भारत में कब से शुरू होने वाली है 6G सर्विस</title>
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<description><![CDATA[ 6G Service in India: भारत को 6G टेक्नोलॉजी में वैश्विक स्तर पर अव्वल बनाने की दिशा में IIT हैदराबाद ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक देश में 6G नेटवर्क लॉन्च हो सकता है. इसके लिए शुरुआती प्रोटोटाइप 7 GHz बैंड पर तैयार भी कर लिया गया है.
6G प्रोटोटाइप की खासियत
जानकारी के मुताबिक, IIT हैदराबाद ने जिस 6G प्रोटोटाइप का प्रदर्शन किया है उसमें एडवांस्ड मैसिव MIMO एंटीना एरे और LEO (Low Earth Orbit) व GEO (Geostationary Orbit) सैटेलाइट-समर्थित सिस्टम शामिल हैं. यह तकनीक 5G से कहीं ज्यादा भरोसेमंद और तेज कनेक्टिविटी देने में सक्षम होगी.
सिर्फ तेज इंटरनेट नहीं, एक नया अनुभव
संस्था के टेलीकम्युनिकेशन विशेषज्ञ प्रोफेसर किरण कुची के अनुसार, 6G केवल &quot;फास्ट 5G&quot; नहीं है, बल्कि यह शहरी और ग्रामीण इलाकों से लेकर समुद्र और आसमान तक हर जगह सुपर-फास्ट कनेक्टिविटी देगा. इसमें Artificial Intelligence मुख्य भूमिका निभाएगी जो इसे स्मार्ट डिवाइस, AR/VR अनुभव, स्वचालित वाहन और बड़े स्तर पर IoT नेटवर्क के लिए आदर्श बनाएगी.
भारत के लिए क्यों है अहम?
6G टेक्नोलॉजी से भारत की उत्पादकता और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगी. यह खेतों से लेकर फैक्ट्रियों तक, स्कूलों से अस्पतालों तक और डिफेंस से लेकर डिजास्टर मैनेजमेंट तक हर क्षेत्र में उपयोगी साबित होगा.
कब मिलेगा 6G नेटवर्क?
हर दशक में मोबाइल तकनीक की नई पीढ़ी आती है. 2010 से 2020 तक 5G का स्टैंडर्डाइजेशन हुआ और भारत ने 2022 में 5G रोलआउट शुरू किया. अब 6G पर काम 2021 में शुरू हुआ है और 2029 तक इसके वैश्विक मानक तय होने की उम्मीद है. यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ तो 2030 तक 6G सेवाएं भारत में उपलब्ध होंगी. सरल शब्दों में कहें तो 6G सिर्फ तेज इंटरनेट नहीं, बल्कि एक ऐसा नेटवर्क होगा जो भारत को नई टेक्नोलॉजी के युग में और मजबूत बनाएगा.
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<pubDate>Wed, 17 Sep 2025 11:53:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Airtel ने उड़ाई Jio की नींद! फेस्टिवल सीजन शुरू होने से ठीक पहले ले आया धमाकेदार ऑफर! इतनी सारी चीजें मिलेंगी बिलकुल फ्री</title>
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<description><![CDATA[ Airtel Festival Offer: फेस्टिव सीजन में एयरटेल ने अपने ग्राहकों को खुश करने के लिए जबरदस्त ऑफर पेश किया है. इस ऑफर में प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के यूजर्स को ढेरों फायदे दिए जा रहे हैं. इनमें अनलिमिटेड कॉलिंग, क्लाउड स्टोरेज और कई OTT ऐप्स की प्रीमियम सब्सक्रिप्शन शामिल है. खास बात यह है कि इस ऑफर के साथ यूजर्स को 100GB तक का Google One क्लाउड स्टोरेज और SonyLIV, Zee5 व Apple Music Premium जैसे पॉपुलर प्लेटफॉर्म्स की एक्सेस मिलेगी. इसके अलावा, एयरटेल ने दो नए प्रीपेड प्लान भी लॉन्च किए हैं.
फेस्टिवल ऑफर में क्या-क्या मिल रहा है?
एयरटेल अपने यूजर्स को इस ऑफर में फ्री Apple Music Premium सब्सक्रिप्शन दे रहा है. पोस्टपेड ग्राहकों को 100GB Google One क्लाउड स्टोरेज मिलेगा जबकि प्रीपेड यूजर्स को 30GB क्लाउड स्टोरेज की सुविधा दी जाएगी. इतना ही नहीं, एक साल तक Perplexity AI की भी सब्सक्रिप्शन इस ऑफर का हिस्सा है.
प्रीपेड यूजर्स के लिए नए प्लान्स
379 रुपये वाला प्लान: इसमें 1 महीने की वैधता मिलेगी. साथ ही अनलिमिटेड कॉलिंग, हर दिन 100 SMS, 2GB डाटा और अनलिमिटेड 5G डाटा की सुविधा शामिल है. इसके अलावा Airtel Xstream Play Premium का सब्सक्रिप्शन मिलेगा जिससे 22 OTT ऐप्स तक एक्सेस होगी.
449 रुपये वाला प्लान: 28 दिनों की वैधता वाला यह प्लान रोज़ाना 4GB डाटा और Jio Hotstar सब्सक्रिप्शन के साथ आता है. इसमें अनलिमिटेड कॉलिंग, 100 SMS डेली और Airtel Xstream Play Premium की सुविधा भी शामिल है.
इसके साथ ही, एयरटेल ने 100 रुपये का नया डेटा पैक भी पेश किया है जिसमें कुल 6GB डेटा (5GB + 1GB अतिरिक्त) मिलेगा. इसकी वैधता 30 दिन है और इसमें भी Airtel Xstream Play के जरिए 22 OTT ऐप्स तक पहुंच दी जा रही है. इतना ही नहीं, Asia Cup Cricket Pass भी 349 रुपये वाले प्लान के साथ उपलब्ध कराया गया है.
बंद हुआ सबसे सस्ता प्लान
ध्यान देने वाली बात यह है कि एयरटेल ने हाल ही में अपना सबसे सस्ता 1GB डेली डेटा वाला प्लान बंद कर दिया है. यह अब कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है. अगर अब किसी यूजर को 1GB डेली डेटा का प्लान लेना है तो उसे 299 रुपये वाले पैक का चुनाव करना होगा.
जियो का 1049 रुपये वाला प्लान
यह 1049 रुपये वाला Jio प्लान कुल 84 दिनों तक वैध है. इसमें यूज़र को हर दिन 2GB हाई-स्पीड डेटा मिलता है यानी पूरे 84 दिनों में कुल 168GB डेटा मिलेगा. इसके अलावा इसमें अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग और रोजाना 100 SMS की सुविधा भी शामिल है. यदि किसी दिन 2GB की सीमा पार हो जाती है तो स्पीड घटकर 64 Kbps हो जाती है.
इसके अलावा इस प्लान की सबसे बड़ी खासियत है इसमें मिलने वाला फ्री OTT एक्सेस. यूज़र्स को किसी भी अतिरिक्त भुगतान के बिना कई पॉपुलर स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ का लाभ मिलेगा जिनमें शामिल हैं, Amazon Prime Lite (84 दिनों के लिए वैध), SonyLIV, ZEE5, JioTV, JioHotstar जिसमें JioCinema और Disney+ Hotstar का मर्ज किया गया कंटेंट मिलेगा (90 दिनों के लिए वैध, एक बार के लिए).
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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:05:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Elon Musk के छूटेंगे पसीने, OpenAI ने कर ली बड़ी तैयारी, ChatGPT के बाद अब बनाएगी इंसानों जैसी खूबियों वाले रोबोट</title>
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<description><![CDATA[ आने वाले समय में रोबोट को लेकर रेस और रोचक होने वाली है. एआई चैटबॉट ChatGPT बनाने वाली कंपनी OpenAI ने भी अब इस क्षेत्र में उतरने का फैसला किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ह्यूमनॉइड रोबोट (इंसानों जैसी खूबियों वाले रोबोट) तैयार करने की तैयारी कर रही है. इसके लिए कंपनी एक्सपर्ट लोगों की तलाश में है. OpenAI ऐसे रिसर्चर की तलाश कर रही है, जिन्हें ह्यूमनॉइड और कन्वेंशनल रोबोटिक सिस्टम्स को कंट्रोल करने वाले एल्गोरिद्म को बनाने का अनुभव हो.
यह है कंपनी की प्लानिंग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ऐसे रोबोट तैयार करना चाहती है, जो एडवांस्ड टेलीऑपरेशन टेक्निक्स और वर्चुअल सिमुलेशन एनवायरमेंट से सीख सके. कंपनी का खास ध्यान इंसानी गुणों वाले रोबोट तैयार करना है, जो अपने आसपास के माहौल को समझकर जटिल कामों को पूरा कर सके. इसके लिए कंपनी ने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से Chengshu Li को अपने साथ जोड़ा है. Li ने घर के कामों को हैंडल करने वाले ह्यूमनॉइड के लिए एक सिस्टम तैयार किया है. इसके अलावा कंपनी ने कई अन्य रिसर्चर को भी हायर किया है ताकि रोबोट को डेवलप करने के काम में तेजी लाई जा सके.
Elon Musk को मिलेगी टक्कर
OpenAI के रोबोटिक्स क्षेत्र में आने से Elon Musk की चिंता बढ़ सकती है. दरअसल, मस्क की कंपनी टेस्ला भी ऑप्टिमस नाम से रोबोट डेवलप कर रही है. ऐसे में ओपनएआई और टेस्ला रोबोट के मामले में आमने-सामने होने वाली है. चूंकि AI के क्षेत्र में OpenAI और मस्क की ही दूसरी कंपनी xAI एक-दूसरे की कंपीटिटर है, यहां रोबोटिक्स में भी वैसा ही जोरदार मुकाबला देखने को मिल सकता है. बता दें कि मस्क 2015 में शुरू हुई OpenAI के सह-संस्थापक रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने 2018 में कंपनी से इस्तीफा दे दिया था. उसके बाद से वो सेफ्टी प्रोटोकॉल को लेकर OpenAI के गंभीर आलोचक रहे हैं.
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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:05:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Paytm, GPay, PhonePe यूजर्स के लिए के लिए बड़ी खबर, UPI से लेनदेन की लिमिट में हो गया बड़ा फेरबदल, जानिए नए नियम</title>
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<description><![CDATA[ UPI New Rule: भारत में यूपीआई (UPI) लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है. अब नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने रोज़ाना ₹10 लाख तक के हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन की अनुमति दे दी है. यह बदलाव खास तौर पर निवेश, बीमा, ट्रैवल बुकिंग, क्रेडिट कार्ड बिल और ज्वेलरी खरीदारी जैसे लेन-देन के लिए लागू होगा.
किन-किन पेमेंट्स पर बढ़ी लिमिट?
कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस के लिए प्रति ट्रांजेक्शन सीमा अब ₹5 लाख (पहले ₹2 लाख), वहीं डेली कैप ₹10 लाख कर दिया गया है. इसके अलावा क्रेडिट कार्ड बिल के लिए प्रति ट्रांजेक्शन ₹5 लाख (पहले ₹2 लाख), डेली कैप ₹6 लाख. ज्वेलरी शॉपिंग के लिए प्रति ट्रांजेक्शन सीमा वही ₹2 लाख लेकिन रोज़ाना की सीमा बढ़कर ₹6 लाख. ट्रैवल, EMI और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस के लिए अब एक दिन में ₹10 लाख तक ट्रांजेक्शन की सुविधा. हॉस्पिटल और एजुकेशन पेमेंट्स के लिए पहले ही ₹10 लाख तक की सीमा तय हो चुकी है, इसमें कोई बदलाव नहीं. गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और RBI डायरेक्ट निवेश के लिए भी ₹10 लाख तक की लिमिट.
इन लेनदेन पर कोई बदलाव नहीं
एनपीसीआई ने यह साफ किया है कि पर्सन-टू-पर्सन लेनदेन की लिमिट पहले जैसी ही रहेगी. इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह बदलाव कुछ खास कैटेगरीज के लिए किया गया है. इस हिसाब से देखा जाए तो नॉर्मल इंसान जिसकी एक दिन एक लाख की लिमिट थी वह वैसी ही रहेगी, उसमें फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है.
P2P कलेक्ट फीचर होगा बंद
1 अक्टूबर 2025 से P2P &amp;lsquo;कलेक्ट रिक्वेस्ट&amp;rsquo; फीचर को पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा. यानी अब कोई भी व्यक्ति UPI पर भुगतान मांगने (collect request) का विकल्प इस्तेमाल नहीं कर पाएगा. इसके बजाय केवल QR कोड स्कैन या UPI ID डालकर ही ट्रांजेक्शन संभव होगा. NPCI का मानना है कि इस फीचर को स्कैमर्स गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहे थे और लोगों को नकली कैशबैक या रिवॉर्ड्स के नाम पर ठग रहे थे.
धोखाधड़ी पर सख्त नियंत्रण
NPCI ने यह भी साफ किया है कि नई लिमिट सिर्फ वेरीफाइड मर्चेंट्स के लिए है. सामान्य P2P ट्रांजेक्शन लिमिट अभी भी ₹1 लाख प्रतिदिन ही रहेगी. बैंक चाहें तो अपनी रिस्क असेसमेंट के आधार पर ग्राहकों के लिए और कम लिमिट भी तय कर सकते हैं.
क्यों किया गया यह बदलाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम हाई-वैल्यू पेमेंट्स को आसान बनाएगा और चेक या स्लो पेमेंट चैनल्स पर निर्भरता घटाएगा. अब UPI सिर्फ रोज़मर्रा की छोटी खरीदारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े निवेश, बीमा प्रीमियम और बिज़नेस पेमेंट्स के लिए भी एक भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बन जाएगा.
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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:05:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>FACEBOOK&#45;INSTAGRAM पर कंटेट बनाने वालों के लिए बुरी खबर! सरकार ला सकती है कड़े नियम, जान लीजिए</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब के लिए कंटेट क्रिएट करते हैं और इसमें AI की मदद लेते हैं तो आपके लिए बड़ी खबर है. एक संसदीय समिति ने AI की मदद से कंटेट क्रिएट करने वालों के लिए नए नियमों का सुझाव दिया है. इनमें से दो बड़े सुझाव लाइसेंस की जरूरत और AI-जनरेटेड वीडियो और आर्टिकल पर प्रॉपर लेबलिंग को लेकर है. इन सुझावों का मुख्य लक्ष्य AI टूल्स की मदद से बनाकर फैलाई जा रही फेक न्यूज को रोकना है. आइए, इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
AI का लेबल लगाना जरूरी करने का सुझाव
कम्युनिकेशन एंड इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी पर बनी स्टैंडिंग कमेटी ने अपनी यह रिपोर्ट लोकसभा स्पीकर को सौंप दी है. रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि AI के जरिए फेक न्यूज फैलाने वाले लोगों और कंपनियों की पहचान और उन पर मुकदमा चलाने के लिए कड़े टेक्नोलॉजिकल और लीगल रूल्स की जरूरत है. समिति ने कहा कि कंपनियों और लोगों द्वारा फैलाई जा रही फेक न्यूज से कानून-व्यवस्था को तो खतरा है ही, यह लोगों को भी भ्रमित करती है. इससे बचाव के लिए AI से कंटेट बनाने वाले क्रिएटर के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता और AI से बने कंटेट पर लेबल लगाना जरूरी कर दिया जानाचाहिए. इससे लोगों को AI से बने वीडियो, फोटो और दूसरे कंटेट को पहचानने में आसानी होगी.&amp;nbsp;
क्रिएटर्स पर क्या असर?
समिति ने अभी सरकार को अपनी सिफारिशें भेजी हैं कि फेक न्यूज पर पाबंदी लगाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं. इन सुझावों ने अभी तक कानून का रूप नहीं लिया है. क्रिएटर्स पर असर की बात करें तो अगर इन सुझावों को कानून में शामिल किया जाता है तो उन्हें AI से बने कंटेट पर लेबल लगाना होगा कि यह AI-जनरेटेड कंटेट है. इससे लोगों के लिए पहचान करना आसान हो जाएगा और वो AI-जनरेटेड गलत सूचनाओं के झांसे में नहीं आएंगे.
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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:05:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>नहीं चुकाई EMI तो iPhone हो जाएगा लॉक, नए नियम बढ़ा देगी टेंशन, जान लीजिए</title>
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<description><![CDATA[ RBI New Rule: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) एक नए नियम पर विचार कर रहा है जिसके तहत अगर कोई व्यक्ति मोबाइल फोन क्रेडिट पर खरीदने के बाद EMI नहीं चुकाता तो बैंक या लोन देने वाली कंपनियां उस फोन को रिमोटली लॉक कर सकेंगी. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम का मकसद बढ़ते बैड लोन को नियंत्रित करना है लेकिन इससे उपभोक्ताओं के अधिकारों पर बहस छिड़ना भी तय माना जा रहा है.
पहले भी लग चुकी है रोक
पिछले साल आरबीआई ने वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिया था कि वे बकाया वसूली के लिए मोबाइल लॉक करने वाले ऐप्स का इस्तेमाल बंद करें. हालांकि, हाल ही में बैंकों और लेंडिंग कंपनियों से चर्चा के बाद अब केंद्रीय बैंक अपनी Fair Practices Code में बदलाव कर सकता है. नए नियम लागू होने पर बैंकों को ग्राहकों से पहले स्पष्ट सहमति लेनी होगी. साथ ही, किसी भी स्थिति में लोन कंपनी फोन के अंदर मौजूद व्यक्तिगत डेटा से छेड़छाड़ नहीं कर सकेगी.
छोटे लोन पर सबसे बड़ा असर
भारत में स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीदारी में क्रेडिट की मांग तेजी से बढ़ रही है. होम क्रेडिट फाइनेंस की 2024 रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर तीन में से एक इलेक्ट्रॉनिक सामान उधार पर खरीदा जाता है. 1.16 अरब मोबाइल कनेक्शनों वाले भारत में 1 लाख रुपये से कम के लोन सबसे ज्यादा डिफॉल्ट हो रहे हैं. CRIF Highmark के डेटा के अनुसार, इन कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन का लगभग 85% हिस्सा NBFCs यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों के पास है.
अगर आरबीआई का यह नियम लागू होता है तो बड़ी कंपनियां जैसे Bajaj Finance, DMI Finance और Cholamandalam Finance को बकाया वसूली में मदद मिलेगी और वे कमजोर क्रेडिट हिस्ट्री वाले ग्राहकों को भी आसानी से लोन दे सकेंगी.
एक्सपर्ट की क्या है राय
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यूजर्स के लिए नई परेशानियां खड़ी कर सकता है. CashlessConsumer नामक एडवोकेसी ग्रुप के संस्थापक श्रीकांत एल के अनुसार, &amp;ldquo;जरूरी तकनीक तक पहुंच को हथियार बनाना लोगों की रोज़मर्रा की जिंदगी, शिक्षा और रोज़गार पर असर डाल सकता है. EMI चुकाने तक मोबाइल का लॉक रहना उपभोक्ताओं को और मुश्किलों में डाल देगा.&amp;rdquo; यानी अगर यह नियम लागू होता है तो EMI चूकने वाले लोगों के लिए मोबाइल लॉक होना एक बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है.
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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:05:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>पूरी तरह नया हो जाएगा आईफोन का इंटरफेस, iOS 26 अपडेट हुई रिलीज, ऐसे करें इंस्टॉल</title>
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<description><![CDATA[ iOS 26 Released: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार ऐप्पल ने iOS 26 अपडेट को रोल आउट कर दिया है. इसके साथ-साथ iPadOS 26 और macOS अपडेट को भी रिलीज किया गया है. जून में हुई ऐप्पल की वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस (WWDC) में सबसे पहले इस अपडेट की झलक दिखाई गई थी. नए ऑपरेटिंग सिस्टम में यूजर्स को लिक्विड ग्लास डिजाइन लैंग्वेज, लॉक स्क्रीन पर नए फीचर्स और नए ऐप्पल इंटेलीजेंस फीचर्स मिले हैं. आइए जानते हैं कि iOS 26 को किन आईफोन में और कैसे इंस्टॉल किया जा सकता है.
visionOS के इंटरफेस से प्रेरित है नया डिजाइन
iOS 26 अपडेट में यूजर्स को नया डिजाइन, इंटेलीजेंट एक्सपेरिमेंट और मौजूदा ऐप्स में कई इंप्रूवमेंट देखने को मिली है. इसकी लिक्विड ग्लास डिजाइन लैंग्वेज visionOS के ट्रांसलुसेंट इंटरफेस से प्रेरित है. इस अपडेट के बाद आपके आईफोन का इंटरफेस पूरी तरह बदल जाएगा. इस अपडेट में कंपनी ने मेनू, ऑप्शन्स, नोटिफिकेशन, कंट्रोल सेंटर और मैसेजेज, फोन और कैमरा समेत कई ऐप्स के एलिमेंट्स को नया लुक दिया है.&amp;nbsp;
लॉक स्क्रीन पर मिले नए फीचर्स
iOS 26 अपडेट के बाद आईफोन की लॉक स्क्रीन भी पूरी तरह बदल जाएगी. इसमें डेट और टाइम विजेट को नया डिजाइन मिलेगा और वॉलपेपर के हिसाब से विजेट को एडजस्ट भी किया जा सकता है. एक और मजेदार फीचर spatial scenes का है, जिससे वॉलपेपर में सेंस ऑफ डेप्थ मिलेगी.
इन आईफोन में इंस्टॉल कर सकेंगे iOS 26
A13 और उसके बाद की चिप से लैस आईफोन इस अपडेट को इंस्टॉल कर सकेंगे. यानी आईफोन 11 सीरीज से पुराने आईफोन इसे सपोर्ट नहीं करेंगे. आईफोन 11 और उसके बाद की सीरीज के सभी आईफोन इसके लिए कंपेटिबल होंगे. आईफोन 11 सीरीज के अलावा आईफोन 12, आईफोन 13, आईफोन 14, आईफोन 15 और आईफोन 16 सीरीज में यह अपडेट काम करेगी. आईफोन 17 सीरीज इसी अपडेट के साथ लॉन्च हुई है.
इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप अपने आईफोन को iOS 26 से अपडेट नहीं करना चाहते हैं तो ऑटोमैटिक अपडेट को बंद कर दे. इसके लिए सेटिंग में जाकर जनरल में जाएं. यहां आपको सॉफ्टवेयर अपडेट का ऑप्शन दिख जाएगा. यहां ऑटोमैटिक अपडेट में iOS Update को बंद कर दें.&amp;nbsp;
अगर आप फोन को अपडेट करना चाहते हैं तो यह ध्यान रखें कि आपके फोन में पर्याप्त स्टोरेज होनी चाहिए. अगर स्टोरेज कम है तो आप डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं. इसके अलावा आपका आईफोन पूरी तरह चार्ज होना चाहिए और इंटरनेट की स्पीड अच्छी होना चाहिए. इससे फोन जल्दी अपडेट हो सकेगा.
अपडेट को इंस्टॉल करने के लिए सेटिंग में जाकर जनरल पर टैप करें. यहां सॉफ्टवेयर अपडेट पर टैप करें. इसके बाद आपको अपडेट का ऑप्शन नजर आएगा. इस पर टैप कर अपडेट को डाउनलोड और इंस्टॉल कर सकेंगे.

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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:05:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>टेलीकॉम इंडस्ट्री की बदल जाएगी तस्वीर, बाकी कंपनियों में मचेगा तहलका, Elon Musk कर रहे यह तैयारी</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी अरबपति Elon Musk ने अब टेलीकॉम इंडस्ट्री में तहलका मचाने की तैयारी कर ली है. उनकी कंपनी SpaceX ने एक ऐसी डील की है, जो मोबाइल नेटवर्क की तस्वीर बदल सकती है. दरअसल, SpaceX 17 बिलियन डॉलर की कीमत में अमेरिकी कंपनी EchoStar से वायरलेस स्पेक्ट्रम लाइसेंस खरीदने को तैयार हो गई है. इस स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस का दायरा बढ़ाकर मोबाइल कनेक्टिविटी को भी इसमें शामिल करने के लिए किया जाएगा. इससे यह कयास लगाए जाने लगे हैं कि स्टारलिंक आगे चलकर मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए 5G नेटवर्क भी शुरू कर सकती हैं.
बाकी कंपनियों के छूटे पसीने
मस्क की इस प्लानिंग से Verizon, AT&amp;amp;T और T-Mobile मोबाइल जैसी कंपनियों के पसीने छूट गए हैं. फिलहाल अमेरिका में इन कंपनियों की बादशाहत है, लेकिन अगर मस्क इस क्षेत्र में प्रवेश करते हैं तो इनकी मुश्किलें बढने वाली हैं. जानकारों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा असर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में होगा. अभी इन इलाकों में मोबाइल नेटवर्क सीमित है, लेकिन अगर स्टारलिंक मोबाइल नेटवर्क लाती है तो सुदूर इलाकों में भी कनेक्टिविटी आसान हो पाएगी. SpaceX और EchoStar की इस डील के तहत EchoStar के Boost Mobile ग्राहकों को स्टारलिंक की डायरेक्ट-टू-सेल सर्विस की एक्सेस मिलेगी. इससे उन इलाकों में भी नेटवर्क पहुंचने के आसार हैं, जो अब नेटवर्क से दूर हैं. EchoStar के प्रमुख Hamid Akhavan ने कहा कि इस डील से Boost के ग्राहकों को तेजी और सस्ती सैटेलाइट सर्विस मिल सकेगी.
मस्क ने जाहिर कर दी है अपनी इच्छा
मस्क ने भी इस डील को लेकर अपनी इच्छा जाहिर कर दी है. एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने कहा कि इस डील का फायदा यह होगा कि आप कहीं भी बैठकर अपने फोन पर वीडियो देख पाएंगे. साथ ही जब उनसे पूछा गया कि क्या वो Verizon समेत किसी बड़ी कंपनी के अधिग्रहण के बारे में सोच रहे हैं तो उन्होंने संकेत दिया कि ऐसा हो सकता है.
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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:05:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>टेलीकॉम, इंडस्ट्री, की, बदल, जाएगी, तस्वीर, बाकी, कंपनियों, में, मचेगा, तहलका, Elon, Musk, कर, रहे, यह, तैयारी</media:keywords>
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<title>Asia Cup Live Streaming: मोबाइल और टीवी पर कहां देख सकते हैं एशिया कप के मैच, एक क्लिक में जानिए सब्सक्रिप्शन डिटेल्स</title>
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<description><![CDATA[ एशिया कप के 17वें संस्करण (Asia Cup 2025) में 8 मुकाबले खेले जा चुके हैं. हांगकांग और ओमान की टीम बाहर हो गई है, भारत ने सुपर-4 के लिए क्वालीफाई कर लिया है. आज बांग्लादेश बनाम अफगानिस्तान मैच है, जो सुपर-4 के लिहाज से महत्वपूर्ण है. जानिए एशिया कप के मैचों का लाइव प्रसारण किन चैनलों पर हो रहा है. साथ में जानिए सोनी लिव ऐप का सस्ता प्लान और इसके आलावा आप मैच किस ऐप पर कितने रूपये में देख सकते हो.
अफगानिस्तान की जीत से श्रीलंका भी कर लेगी क्वालीफाई
बांग्लादेश के लिए आज का मैच करो या मरो वाला है, क्योंकि जीत के साथ अफगानिस्तान और श्रीलंका सुपर-4 में क्वालीफाई कर लेगी और हांगकांग के बाद बांग्लादेश इस ग्रुप से बाहर होने वाली दूसरी टीम बन जाएगी. बांग्लादेश ने इससे पहले हांगकांग को हराया था और श्रीलंका से हार गई थी. श्रीलंका के 4 अंक हैं और अफगानिस्तान और बांग्लादेश के 2-2 अंक हैं.
एशिया कप 2025 का लाइव प्रसारण किन चैनल पर हो रहा है?
एशिया कप का आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क है. सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क पर इंग्लिश, हिंदी समेत अलग अलग भाषाओं में कमेंट्री हो रही है. निम्न चैनलों पर बांग्लादेश बनाम अफगानिस्तान, और आगे के मैचों का लाइव प्रसारण होगा.

सोनी स्पोर्ट्स 1&amp;nbsp;
सोनी स्पोर्ट्स 3 (हिंदी)
सोनी स्पोर्ट्स 4&amp;nbsp;
सोनी स्पोर्ट्स 5

एशिया कप की लाइव स्ट्रीमिंग किस ऐप पर देखें?
सोनी लिव ऐप पर एशिया कप के मैचों की लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हो. इसके लिए आपके पास सब्सक्रिप्शन होना चाहिए. चलिए आपको बताते हैं कि इस ऐप पर आप सबसे सस्ता प्लान कितने में ले सकते हो, इसमें क्या-क्या सुविधाएं आपको दी जा रही है.
सोनी लिव के प्लान
मंथली प्लान: सोनी लिव का सबसे सस्ता प्लान 399 रुपये का है. Liv Premium के इस प्लान के साथ अधिकतम 5 मोबाइल पर लॉगिन किया जा सकता है लेकिन एक टाइम पर एक ही मोबाइल पर देखा जा सकता है. इस प्लान के साथ आपको वीडियो क्वालीफाई 4K UHD मिलेगी. Dolby Atmos की ऑडियो क्वालिटी मिलेगी, इसमें लाइव स्पोर्ट्स और टूर्नामेंट्स देख सकते हो. Liv Premium का सालाना प्लान 1499 रुपये का है, इसमें एक बार में 2 सिस्टम में लाइव देख सकते हो.
सालाना प्लान (सिर्फ मोबाइल यूजर्स के लिए): साल का प्लान 699 रुपये का है. ये सिर्फ एंड्राइड और IOS ऍप्लिकेशन्स पर चलेगा. इसमें भी 5 मोबाइल पर लॉगिन किया जा सकता है.
सोनी लिव के आलावा इस ऐप पर देखें लाइव क्रिकेट मैच!
एशिया कप 2025 के लाइव मैचों को आप फैनकोड ऐप पर भी स्ट्रीम कर सकते हो. इसमें आप सिर्फ एक की फीस भरकर उसे देख सकते हो. हालांकि ये अलग अलग मैचों के लिए अलग अलग है, जैसे भारत बनाम पाकिस्तान मैच को देखने के लिए 49 रुपये देने थे वहीं आज होने वाले बांग्लादेश बनाम अफगानिस्तान मैच के लिए फीस 25 रुपये दी गई है. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:05:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Best Smartphone Under 20000: लूट मची है लूट, 20,000 से भी कम में मिल रहे हैं ये धाकड़ महंगे स्मार्टफोन, देखें लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ आजकल कम बजट में शानदार फीचर्स वाले स्मार्टफोन मिल जाते हैं. कई कंपनियां अपने सस्ते फोन में 50MP कैमरा और दमदार कैपेसिटी वाली बैटरी दे रही हैं. ऐसे में अगर आप नया स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं, लेकिन आपका बजट कम है तो चिंता की कोई बात नहीं है. आज हम आपके लिए 20 हजार रुपये से कम वाले सस्ते स्मार्टफोन की लिस्ट लेकर आए हैं, जिनमें महंगे फोन वाले फीचर्स दिए गए हैं.
Vivo T4R 5G&amp;nbsp;
वीवो का यह फोन 6.77 इंच के बड़े डिस्प्ले के साथ आता है. मल्टीटास्किंग और परफॉर्मेंस के लिए इसमें Dimensity 7400 5G प्रोसेसर लगा है, जिसे 8 GB रैम और 128GB स्टोरेज के साथ पेयर किया गया है. इसके रियर में OIS के साथ 50MP का प्राइमरी सेंसर दिया गया है. इसका दूसरा कैमरा 2MP का है. फ्रंट में यह 32MP लेंस के साथ आता है. 5700 mAh की बैटरी वाले इस फोन को फ्लिपकार्ट से 19,499 रुपये में खरीदा जा सकता है.
Infinix Note 50s 5G+
सस्ती कीमत में Infinix भी शानदार फीचर्स वाला फोन पेश कर रही है. कंपनी के Note 50s 5G+ में 6.78 इंच का Full HD+ डिस्प्ले दिया गया है. इसके रियर में 64MP + 2MP का डुअल कैमरा सेटअप दिया गया है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए यह 13MP फ्रंट लेंस के साथ आता है. 5500 mAh की बैटरी वाले इस फोन में Dimensity 7300 Ultimate प्रोसेसर है, जिसे 8 GB RAM के साथ पेयर किया गया है. फ्लिपकार्ट पर यह फोन 17,999 रुपये की कीमत में लिस्टेड है.
MOTOROLA G86 Power 5G&amp;nbsp;
किफायती कीमत में मोटोरोला का यह फोन एक अच्छी चॉइस है. इसमें भी 6.7 इंच का डिस्पले दिया गया है. इसमें 6720 mAh की दमदार बैटरी लगी हुई है और यह Dimensity 7400 प्रोसेसर के साथ आता है. इसके रियर में 50MP+8MP का डुअल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 32MP कैमरा दिया गया है. फ्लिपकार्ट पर यह फोन 16,999 रुपये में लिस्टेड है. इस पर एक्सचेंज ऑफर का भी फायदा उठाया जा सकता है.
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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:05:00 +0530</pubDate>
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<title>सोशल मीडिया पर छाया नया साड़ी ट्रेंड! स्टेप बाय स्टेप जानिए कैसे बनेगी Nano Banana Saree फोटो</title>
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<description><![CDATA[ Nano Banana Saree Image: हाल ही में सोशल मीडिया पर Nano Banana AI 3D फिगरिन ट्रेंड वायरल हुआ था. इसी सफलता के बाद अब AI-पावर्ड फैशन ट्रेंड ने Instagram को अपने कब्जे में ले लिया है. इसे &amp;lsquo;Banana AI Saree&amp;rsquo; ट्रेंड कहा जा रहा है. इस ट्रेंड में लोग अपनी साधारण सेल्फी को 90 के दशक की बॉलीवुड स्टाइल में ड्रामैटिक पोर्ट्रेट्स में बदल रहे हैं. Google के Gemini Nano Banana इमेज एडिटिंग टूल की मदद से ये खूबसूरत और रेट्रो लुक वाले पोर्ट्रेट तैयार किए जाते हैं.
वायरल AI एडिट्स में अक्सर हवा में बहती चिफ़ॉन साड़ी, ग्रेनी टेक्सचर और गोल्डन-आवर लाइटिंग देखी जा सकती है. इसके अलावा 90 के दशक के फेमस स्टाइल जैसे ट्रांसलूसेंट पोल्का-डॉट डिजाइन, ब्लैक पार्टी साड़ी और सॉफ्ट फ्लोरल ऐक्सेंट्स इन AI क्रिएशन्स में शामिल होते हैं.
Gemini Nano Banana AI Saree ट्रेंड क्या है?
इस ट्रेंड में कोई भी सिंगल फोटो को रेट्रो-स्टाइल पोस्टर में बदला जाता है. AI के जरिये क्लासिक बॉलीवुड एस्थेटिक्स को दोहराया जाता है जैसे ड्रामैटिक शैडो, मूडी एक्सप्रेशंस और टेक्सचर्ड बैकग्राउंड. यह ट्रेंड खासकर उन लोगों में लोकप्रिय है जो अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल को यूनिक और रेट्रो लुक देना चाहते हैं.
अपना खुद का AI Saree एडिट कैसे बनाएं
इस ट्रेंड में शामिल होने के लिए आप नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं.

अपने Google अकाउंट से Gemini या ChatGPT में लॉगिन करें.
Gemini में &amp;ldquo;Try Image Editing&amp;rdquo; पर क्लिक करें और Banana आइकॉन खोजें.
अपनी साफ-सुथरी सोलो फोटो अपलोड करें, जिसमें चेहरा स्पष्ट दिख रहा हो.
वायरल प्रॉम्प्ट्स में से कोई एक चुनें, जैसे &amp;ldquo;Black Saree&amp;rdquo; या &amp;ldquo;White Polka Dot&amp;rdquo;.
AI को अपना कमाल करने दें, कुछ ही सेकंड में आपका रेट्रो साड़ी पोर्ट्रेट तैयार हो जाएगा.

ट्रेंडिंग प्रॉम्प्ट का उदाहरण
अपने Banana AI Saree लुक को बनाने के लिए आप यह प्रॉम्प्ट इस्तेमाल कर सकते हैं.
&quot;Convert this person into a retro vintage grainy but bright image, black party-wear saree, 90s film aesthetic&amp;hellip; lighting is warm, with golden sunset tones evoking golden hour glow&amp;hellip;&quot;
हाल ही में, Google Gemini Nano Banana AI मॉडल का इस्तेमाल मल्टी-टर्न एडिट्स, फोटोज़ को ब्लेंड करने और डिज़ाइन्स को मिक्स करने के लिए भी किया गया है.
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<pubDate>Tue, 16 Sep 2025 12:04:58 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 के बाद Apple का बड़ा धमाका! साल के अंत तक लॉन्च होंगे इतने सारे प्रोडक्ट्स, देखें पूरी लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ Apple Upcoming Products: Apple बीते कुछ सालों से लगातार नए प्रोडक्ट्स लॉन्च कर रहा है. Vision Pro हेडसेट और Ultra स्मार्टवॉच जैसे इनोवेशन लंबे समय से प्लानिंग में थे लेकिन सच यह भी है कि कंपनी के डिज़ाइन में हाल के वर्षों में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिले. 2025 में यह तस्वीर बदलती नज़र आ रही है. इस साल Apple ने अपने सभी ऑपरेटिंग सिस्टम्स को नए Liquid Glass डिज़ाइन लैंग्वेज पर रीवैंप किया है. साथ ही कंपनी ने हार्डवेयर पर भी उतना ध्यान देना शुरू किया है जितना पिछले कई सालों से नहीं देखा गया था.
मजबूती पर खास फोकस
नए iPhones की सबसे बड़ी खासियत उनकी ड्यूरेबिलिटी है. अब तक यूज़र्स अक्सर स्क्रीन क्रैक और बैक पैनल टूटने की समस्या से परेशान होते थे. नए iPhone मॉडल्स में सामने और पीछे दोनों तरफ और मजबूत ग्लास दिया गया है जिससे डिवाइस ज्यादा सुरक्षित रहेगा.
iPhone Pro मॉडल्स होंगे और भी पावरफुल
Apple ने यह भी तय कर लिया है कि अब वह अपने Pro मॉडल्स को अधिकतम फीचर्स से लैस करेगा. इनमें बेहतर बैटरी, एडवांस कैमरा अपग्रेड्स और नई तकनीकें शामिल होंगी. यहां तक कि अगर इसके लिए फोन को थोड़ा मोटा और भारी बनाना पड़े तो भी कंपनी पीछे नहीं हटेगी. यह Apple की रणनीति में एक बड़ा बदलाव है.
Steve Jobs को याद कर डिज़ाइन पर ज़ोर
iPhone 17 लॉन्च इवेंट के दौरान Apple ने डिज़ाइन को लेकर खास मैसेज दिया. इवेंट की शुरुआत Steve Jobs के इस उद्धरण से हुई &amp;ndash; &amp;ldquo;Design is not just what it looks and feels like. Design is how it works.&amp;rdquo; 2017 में Steve Jobs Theater खुलने के बाद पहली बार किसी प्रोडक्ट लॉन्च में उनके विचार को प्रमुखता दी गई. CEO टिम कुक ने भी कहा कि &amp;ldquo;डिज़ाइन हमेशा से Apple की पहचान और काम का अहम हिस्सा रहा है.&amp;rdquo; वहीं हार्डवेयर हेड John Ternus ने इसे दुनिया की &amp;ldquo;सबसे बेहतरीन डिज़ाइन टीम&amp;rdquo; करार दिया.
डिज़ाइन पर लौटती झलक
Jony Ive के दौर में Apple अक्सर डिज़ाइन प्रोसेस पर गहराई से बने वीडियो पेश करता था. iPad, iPhone 4, iOS 7, Apple Watch और Mac Pro जैसे प्रोडक्ट्स के पीछे उनकी सोच साफ झलकती थी. उनके जाने के बाद यह परंपरा लगभग गायब हो गई थी.
लेकिन इस बार iPhone 17 लॉन्च पर दो डिज़ाइन वीडियो दिखाए गए जिनमें ब्रिटिश एक्सेंट वाले कर्मचारियों ने नैरेशन किया. Anderson ने iPhone 17 Pro के एल्यूमिनियम यूनिबॉडी के बारे में बताया, जबकि Abidur Chowdhury ने iPhone Air के निर्माण प्रक्रिया पर प्रकाश डाला. सवाल यह है कि क्या यह सचमुच Apple के पुराने डिज़ाइन-फोकस्ड दौर की वापसी है, या फिर केवल एक मार्केटिंग चाल?
आने वाले महीनों में ये प्रोडक्ट्स होंगे लॉन्च

Apple will reportedly launch these new products between late 2025 and early 2026 🔥Source: @markgurman pic.twitter.com/Hrj2kziONe
&amp;mdash; Apple Hub (@theapplehub) September 14, 2025



iPhone 17 के बाद Apple 2025 और 2026 की शुरुआत तक कई नए प्रोडक्ट्स लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है.
iPad Pro (M5 चिप के साथ) &amp;ndash; अक्टूबर तक लॉन्च हो सकता है, पोर्ट्रेट मोड सेल्फी कैमरा भी लौटेगा.
अपडेटेड Vision Pro &amp;ndash; नए हेडबैंड और तेज प्रोसेसर के साथ, असली Vision Pro 2 साल 2027 तक.
AirTag 2 &amp;ndash; ज्यादा रेंज और बेहतर ट्रैकिंग क्षमता.
Apple TV (N1 चिप के साथ) &amp;ndash; तेज प्रोसेसर, नया Siri और Apple Intelligence फीचर्स.
HomePod mini (अपडेटेड) &amp;ndash; नए कलर और स्पीडी चिप के साथ.
MacBook Pro (M5 चिप) &amp;ndash; संभव है साल 2026 की शुरुआत में लॉन्च.
MacBook Air (M5 चिप) &amp;ndash; 2026 की पहली तिमाही तक.
नया Mac External Monitor &amp;ndash; साल के अंत या अगले साल की शुरुआत तक.
iPhone 17e &amp;ndash; A19 चिप के साथ, अगले साल की पहली छमाही में.
Smart Home Hub &amp;ndash; अगली पीढ़ी की Siri के साथ, 2026 की शुरुआत में लॉन्च हो सकता है.
$2000 iPhone का संकेत
इस बार Apple ने चुपचाप एक और बड़ा कदम उठाया. कंपनी ने 2TB स्टोरेज वाला iPhone पेश किया है जिसकी कीमत अमेरिका में $2000 (करीब 1.6 लाख रुपये) है. भले ही यह एक निचे प्रोडक्ट है लेकिन इससे साफ है कि आने वाले समय में Apple प्रीमियम सेगमेंट में और भी ऊंची कीमत वाले मॉडल्स ला सकता है.
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोन की बैटरी क्यों फूल जाती है और ऐसा होने पर क्या करें? ये तरीके आपको रखेंगे सुरक्षित</title>
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<description><![CDATA[ कई बार स्मार्टफोन ठीक तरीके से काम करता है, लेकिन इसकी बैटरी फूल जाती है. इससे फोन के रियर साइड में एक बंप बन जाता है. इससे फोन का लुक तो खराब होता ही है, यह आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है. दरअसल, फूली हुई बैटरी के फटने का डर भी रहता है. इसलिए अगर आपके फोन की बैटरी फूल गई है तो इसे बदलना जरूरी है. आइए जानते हैं कि फोन की बैटरी क्यों फूलती है और ऐसा होने पर क्या करना चाहिए.
क्यों फूलती है बैटरी?
आजकल के स्मार्टफोन में लिथियम-ऑयन पॉलीमर बैटरी होती है. बैटरी के अंदर पतली धातु और प्लास्टिक की कई परतों को कैमिकल कोटिंग के साथ पैक किया जाता है. ये सारी चीजें जेल जैसे इलेक्ट्रॉलाइट के साथ एक एल्युमिनियम पाउच में रखी जाती हैं. इसके बाद इस पाउच को वैक्यूम पैक और एयरटाइट बनाने के लिए हीट से सील किया जाता है. कई बार ये जेल इलेक्ट्रॉलाइट खराब होकर गैस में बदल जाते हैं. यह गैस प्रेशर क्रिएट करती है, जिससे पाउच फूल जाता है. इससे बैटरी फूली हुई नजर आती है.
बैटरी फूलने पर क्या न करें?
कई बार फूलने के बाद भी बैटरी ठीक तरीके से काम करती रह सकती है, लेकिन इसके लिए चार्जिंग का बहुत ध्यान रखना पड़ता है. अगर यह बैटरी ओवरचार्ज हो जाए तो इसमें धमाका हो सकता है. इसलिए अगर आपके फोन की बैटरी बहुत फूल गई है तो इसे चार्ज न करें. बैटरी को जितना हो सके, उतना डिस्चार्ज होने दें ताकि इससे आग लगने का खतरा न रहे.&amp;nbsp;
कई लोग फूली हुई बैटरी को ठीक करने के लिए घर पर ही मरम्मत करने लगते हैं. ऐसा करना हानिकारक हो सकता है. फोन की बैटरी से छेड़छाड़ या गैस निकालने के लिए इसे पंक्चर करना धमाके की वजह बन सकता है. इसलिए घर पर ही मरम्मत करने से बचे. फूली हुई बैटरी वाले डिवाइस को बंद करके इसे सुरक्षित जगह पर रख दें. बैटरी निकालने या बदलने के लिए हमेशा प्रोफेशनल की मदद लें.
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Android Smartphone पर जल्द आएगा iPhone वाला यह फीचर, इमरजेंसी में बचा सकता है जान</title>
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<description><![CDATA[ एंड्रॉयड स्मार्टफोन में जल्द ही एक ऐसा फीचर आ सकता है, जो आपातकालीन स्थिति में लोगों के लिए बहुत मददगार साबित होगा. आईफोन में यह फीचर पहले से मिलता है और अब गूगल एंड्रॉयड के लिए इसकी टेस्टिंग कर रही है. गूगल के पिक्सल स्मार्टफोन में कार क्रैश डिटेक्शन और सेफ्टी चेक जैसे कई फीचर्स पहले से मौजूद हैं और अब कंपनी आईफोन के इमरजेंसी लाइव वीडियो फीचर जैसा एक नया फीचर लाने पर विचार कर रही है.
क्या काम करता है यह फीचर
ऐप्पल कई सालों से अपने आईफोन में Emergency SOS Live Video का फीचर देती आ रही है. यह आपातकालीन स्थिति में यूजर को लाइव स्ट्रीम करने की सहूलियत देता है. इससे बचाव दल के लिए स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाना आसान हो जाता है. आपातकालीन स्थिति में कई बार फोन कॉल पर पर्याप्त जानकारी नहीं पहुंच पाती है, ऐसी स्थिति में वीडियो देखकर उचित राहत मौके पर भेजी जा सकती है.
गूगल भी कर रही ऐसे फीचर पर काम
अभी पिक्सल फोन में इमरजेंसी वीडियो रिकॉर्डिंग फीचर मिलता है, लेकिन यह थोड़े अलग तरीके से काम करता है. यह करीब 45 मिनट का वीडियो रिकॉर्ड कर इसका लिंक इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को भेज देता है, लेकिन यह इमरजेंसी सर्विसेस तक लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग का ऑप्शन नहीं देता. अब पता चला है कि एंड्रॉयड डिवाइसेस के लिए एक नया फीचर टेस्ट किया जा रहा है. यह फीचर यूजर को इमरजेंसी सर्विसेस तक लाइव वीडियो शेयर करने के ऑप्शन के साथ आएगा. यह वीडियो यूजर के फोन पर रिकॉर्ड नहीं होगा, लेकिन राहत और बचाव दल इसे रिकॉर्ड कर पाएंगे.&amp;nbsp;
सारे एंड्रॉयड यूजर को मिल सकता है फायदा
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फीचर केवल पिक्सल फोन के लिए अवेलेबल नहीं रहेगा. इसका फायदा सैमसंग, मोटोरोला और एंड्रॉयड पर चलने वाले दूसरे स्मार्टफोन्स पर भी मिलेगा. इस फीचर की मदद से लोगों को आपातकालीन स्थिति में बचावकर्ताओं तक पहुंच का एक आसान रास्ता मिल जाएगा.
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब WhatsApp पर रिप्लाई करना होगा और भी आसान! आ गया नया फीचर, जानिए कैसे करेगा काम</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp New Feature: WhatsApp लगातार नए-नए अपडेट्स पेश करता रहता है ताकि यूज़र अनुभव बेहतर हो सके. किसी भी अपडेट के स्थायी रूप से आने से पहले कंपनी उसे बीटा टेस्टर्स को उपलब्ध कराती है जिससे फीचर की टेस्टिंग की जा सके. इसी कड़ी में अब WhatsApp एक ऐसा फीचर ला रहा है जो मैसेज रिप्लाई को थ्रेड में संगठित कर देगा. इससे यूज़र्स को किसी खास मैसेज से जुड़े सभी जवाब एक ही जगह देखने को मिलेंगे और पूरी बातचीत को समझना आसान हो जाएगा.
कैसे काम करेगा यह फीचर?

WhatsApp news of the week: WhatsApp Introduces Threaded Message Replies for More Organized Conversations!Catch up on our 7 updates this week covering WhatsApp beta across Android, iOS, and Desktop!https://t.co/rBz1DSYnwD pic.twitter.com/wMjWnPDrXF
&amp;mdash; WABetaInfo (@WABetaInfo) September 13, 2025



WABetaInfo, जो WhatsApp के नए फीचर्स पर नज़र रखता है, ने इसके स्क्रीनशॉट साझा किए हैं. इन तस्वीरों से पता चलता है कि अब हर रिप्लाई सीधे मूल मैसेज के नीचे थ्रेड के रूप में जुड़ जाएगा. यानी एक ही मैसेज से जुड़े सभी जवाब क्रमबद्ध तरीके से साथ दिखेंगे, जिससे बातचीत को फॉलो करना आसान होगा. यूज़र्स को मैसेज बबल में एक नया रिप्लाई इंडिकेटर दिखेगा. यह बताएगा कि उस मैसेज पर कितने रिप्लाई आए हैं. बस इस इंडिकेटर पर टैप करते ही पूरा थ्रेड खुल जाएगा और सभी रिप्लाई एक साथ दिखाई देंगे.
नए रिप्लाई कैसे जोड़ें?
इस फीचर में यूज़र चाहें तो थ्रेड के भीतर ही नया रिप्लाई जोड़ सकते हैं. जैसे ही कोई नया जवाब लिखा जाएगा, वह अपने आप उसी थ्रेड में जुड़ जाएगा. साथ ही, थ्रेड के भीतर मौजूद किसी अलग मैसेज को चुनकर उस पर भी रिप्लाई करना संभव होगा. माना जा रहा है कि इसे &amp;ldquo;Follow-up reply&amp;rdquo; नाम दिया जा सकता है हालांकि अभी यह टैग सभी टेस्टर्स को उपलब्ध नहीं है.
क्यों खास है यह फीचर?
अब तक लंबे चैट्स में किसी एक मैसेज से जुड़े जवाब खोजने के लिए पूरी बातचीत स्क्रॉल करनी पड़ती थी. लेकिन इस नए थ्रेड सिस्टम से बातचीत तार्किक और समयानुसार क्रम में रहेगी. इसका फायदा यह होगा कि अगर कोई यूज़र बातचीत में देर से जुड़ता है तो भी वह सीधे थ्रेड खोलकर पूरी चर्चा को जल्दी समझ सकेगा. अगर किसी मैसेज पर बहुत सारे जवाब मिले हों और वे बाकी मैसेजों में मिलकर खो गए हों तो यह थ्रेड फीचर पूरी बातचीत को अलग कर देगा. यानी अब लंबी चैट में रिप्लाई ढूंढना मुश्किल नहीं होगा.
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AI का कमाल! मरे हुए पिता से बातें करता है ये इंसान, जानिए कैसे हुआ ये संभव</title>
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<description><![CDATA[ Artificial Intelligence: डिएगो फेलिक्स डॉस सैंटोस ने कभी नहीं सोचा था कि वे अपने दिवंगत पिता की आवाज़ दोबारा सुन पाएंगे लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने यह संभव कर दिखाया. उनका कहना है &amp;ldquo;आवाज़ का टोन लगभग बिल्कुल वैसा ही है जैसे पापा सच में मेरे सामने हों.&amp;rdquo; पिछले साल पिता के अचानक निधन के बाद वे ब्राज़ील अपने परिवार के पास गए थे. स्कॉटलैंड लौटने पर उन्हें एहसास हुआ कि उनके पास पिता की कोई यादगार चीज़ नहीं बची थी, सिवाय उस वॉइस नोट के जो अस्पताल से पिता ने भेजा था.
AI से फिर ज़िंदा हुईं यादें
द इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में उन्होंने इसी वॉइस नोट का इस्तेमाल करके Eleven Labs नामक AI प्लेटफ़ॉर्म की मदद ली. यह 2022 में शुरू हुआ एक वॉइस जेनरेटर टूल है. 22 डॉलर मासिक शुल्क देकर उन्होंने पिता की आवाज़ से नए मैसेज बनवाए. अब ऐप से उन्हें ऐसा लगता है मानो वे उन बातचीतों को जी रहे हों जो कभी हो नहीं पाईं. जैसे ही ऐप पर सुनाई देता है &amp;ndash; &amp;ldquo;हाय बेटे, कैसे हो?&amp;rdquo; तो सब कुछ हकीकत सा महसूस होता है. यहां तक कि पिता का दिया हुआ निकनेम &amp;ldquo;बॉसी&amp;rdquo; भी उन्हीं शब्दों में सुनाई देता है.
परिवार की शंका और स्वीकार्यता
शुरुआत में धार्मिक मान्यताओं के कारण उनके परिवार ने इस तकनीक पर आपत्ति जताई. लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने भी इसे स्वीकार कर लिया. अब डॉस सैंटोस और उनकी पत्नी, जिन्हें 2013 में कैंसर का पता चला था, सोच रहे हैं कि वे भी अपने डिजिटल वॉइस क्लोन तैयार करवा लें ताकि उनकी मौजूदगी आने वाले समय में परिवार के साथ बनी रहे.
&amp;lsquo;Grief Tech&amp;rsquo; का बढ़ता बाज़ार
डॉस सैंटोस का अनुभव उस ट्रेंड का हिस्सा है जिसे अब &amp;ldquo;Grief Tech&amp;rdquo; कहा जाता है. यानी ऐसी AI तकनीकें जो प्रियजनों के जाने के बाद लोगों को मानसिक सहारा देने के लिए बनाई जा रही हैं. अमेरिका की StoryFile और HereAfter AI जैसी स्टार्टअप्स पहले से ऐसे टूल पेश कर रही हैं जिनसे किसी की डिजिटल पहचान या वॉइस आधारित इंटरैक्टिव अवतार तैयार किया जा सके.
इसी सिलसिले में Eternos नाम की कंपनी भी 2024 में शुरू हुई. इसके फाउंडर रॉबर्ट लोकेसियो ने पिता के निधन के बाद AI-आधारित डिजिटल ट्विन बनाने की पहल की. अब तक 400 से ज्यादा लोग इस प्लेटफ़ॉर्म पर अपने इंटरैक्टिव अवतार बना चुके हैं. यहां 25 डॉलर से शुरू होने वाली सब्सक्रिप्शन योजना उपलब्ध है जो किसी व्यक्ति की कहानियों और यादों को उनके जाने के बाद भी परिवार तक पहुंचाती रहती है.
नैतिक और भावनात्मक सवाल
हालांकि इस तकनीक ने शोक को संभालने का एक नया रास्ता खोल दिया है, लेकिन इसके साथ कई गंभीर प्रश्न भी उठ रहे हैं. सहमति, डेटा सुरक्षा और व्यावसायिक लाभ जैसे मुद्दे अब बड़ी बहस का हिस्सा हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह तकनीक इंसान को सांत्वना तो देती है लेकिन कहीं यह वास्तविक शोक की प्रक्रिया को टालने या बदलने का कारण न बन जाए.
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>प्यार की तलाश खत्म! ये 5 डेटिंग ऐप्स दिलाएंगे आपको हमसफर, पहला वाला तो युवाओं का फेवरेट</title>
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<description><![CDATA[ Top 5 Dating Apps: आज के डिजिटल जमाने में जब जिंदगी की रफ्तार इतनी तेज हो चुकी है, तो प्यार और रिश्तों की तलाश के तरीके भी बदल गए हैं. पहले लोग दोस्तों, परिवार या सोसाइटी के जरिए अपना जीवनसाथी ढूंढते थे लेकिन अब मोबाइल ऐप्स ने यह काम काफी आसान कर दिया है. बस कुछ क्लिक और आपके सामने आ जाते हैं हजारों लोग, जिनसे आप दोस्ती कर सकते हैं और शायद अपना प्यार भी पा सकते हैं. अगर आप भी रिश्ते या प्यार की तलाश में हैं, तो ये 5 ऐप्स आपकी मदद कर सकते हैं.
Tinder
जब भी डेटिंग ऐप्स का नाम आता है तो सबसे पहले Tinder का ही ख्याल आता है. यह ऐप दुनिया भर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इसकी खासियत है इसका आसान इंटरफेस. बस प्रोफाइल सेट कीजिए, फोटो डालिए और फिर स्वाइप कीजिए. अगर दोनों लोगों ने एक-दूसरे को पसंद किया तो चैटिंग शुरू हो जाती है. यही वजह है कि यह ऐप भारत में भी युवाओं के बीच बेहद पॉपुलर है.
Bumble
Bumble की सबसे खास बात यह है कि यहां बातचीत शुरू करने का पहला मौका सिर्फ लड़कियों को दिया जाता है. मतलब, अगर किसी लड़के और लड़की का मैच हो जाता है तो मैसेज की शुरुआत लड़की ही कर सकती है. यह फीचर महिलाओं को ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक अनुभव देता है. इस वजह से यह ऐप खासकर लड़कियों के बीच काफी पसंद किया जाता है.
Hinge
अगर आप सिर्फ कैज़ुअल चैट नहीं बल्कि सीरियस रिलेशनशिप की तलाश में हैं, तो Hinge आपके लिए सही विकल्प है. इस ऐप का टैगलाइन ही है &amp;ldquo;Designed to be deleted&amp;rdquo;, यानी इसे इस्तेमाल करने के बाद आपको हमेशा के लिए प्यार मिल जाए. यहां पर यूजर प्रोफाइल्स डिटेल में होती हैं और सवाल-जवाब के जरिए लोगों को जानने का अच्छा मौका मिलता है.
OkCupid
OkCupid की सबसे बड़ी खासियत इसका एडवांस्ड एल्गोरिद्म है. यह ऐप आपके जवाबों और पसंद के आधार पर आपको मैच सजेस्ट करता है. यहां आपको अपनी रुचियों, विचारों और जीवनशैली से जुड़े कई सवालों के जवाब देने होते हैं. इसी डेटा के आधार पर यह आपके लिए सबसे उपयुक्त पार्टनर दिखाता है.
TrulyMadly
अगर आप किसी भारतीय डेटिंग ऐप की तलाश में हैं तो TrulyMadly आपके लिए बेस्ट रहेगा. इसे खास तौर पर भारतीय युवाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है. यहां वेरिफिकेशन प्रोसेस काफी सख्त है जिससे फेक प्रोफाइल्स की संभावना कम हो जाती है. इस वजह से यूजर्स को ज्यादा सुरक्षित माहौल मिलता है.
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इन कारणों से फटकर आग का गोला बन सकते हैं स्मार्टफोन, भूलकर भी न करें ये गलतियां</title>
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<description><![CDATA[ स्मार्टफोन बड़े काम की चीज है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है. कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जब स्मार्टफोन में धमाका होने के कारण लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. इसके अलावा ऐसे धमाकों में लोग बुरी तरह जख्मी भी हो जाते हैं. इसलिए ऐसी गलतियों से बचने की जरूरत है, जो स्मार्टफोन को जानलेवा बना सकती हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि स्मार्टफोन में धमाका किस वजह से होता है और हमें किन गलतियों से बचना चाहिए.
क्यों फटता है स्मार्टफोन?
स्मार्टफोन में धमाका होने के पीछे की सबसे बड़ी वजह बैटरी का फटना होता है. दरअसल, स्मार्टफोन में लिथियम-ऑयन बैटरी होती है. अगर इसके कैमिकल बैलेंस में कोई गड़बड़ी होती है तो यह फट सकती है. ऐसा ज्यादा गर्मी, बैटरी की खुद की खराबी या इसके साथ छेड़छाड़ करने से भी हो सकता है.&amp;nbsp;
कभी न करें ये गलतियां
बैटरी को ओवरहीट न होने दें- बैटरी को ओवरहीट होने देना खतरनाक है. इसलिए कभी भी फोन को अधिक तापमान वाली जगहों पर चार्ज करने से बचना चाहिए. कई लोग चार्जिंग पर लगे फोन से ही कॉल्स पर बातें करते रहते हैं. ऐसा करना नुकसान पहुंचा सकता है. इससे बैटरी जल्दी गर्म होती है. इसके अलावा कभी भी फोन को रातभर के लिए चार्ज लगाकर न छोड़ें. इससे बैटरी ओवरहीट हो सकती है.
फिजिकल डैमेज- बैटरी को होने वाला फिजिकल डैमेज भी धमाके का कारण बन सकता है. अगर आपका फोन बार-बार या जोर से गिरता है तो इसका प्रोटेक्टिव केस टूट सकता है या इसके टर्मिनल पर असर पड़ सकता है. इससे बैटरी के फटने के चांस रहते हैं. इसके अलावा कई बार बैटरी से छेड़छाड़ भी जानलेवा हो सकती है.&amp;nbsp;
खराब क्वालिटी का चार्जर- कई बार लोग जल्दबाजी या पैसे के लालच में खराब क्वालिटी का चार्जर खरीद लेते हैं. यह आपका पैसा और समय तो बचा सकता है, लेकिन बैटरी की सेहत के लिए यह खतरनाक है. अगर बैटरी को उसकी कैपेसिटी से अधिक के चार्जर से चार्ज किया जाता है तो यह जल्दी खराब होती है और इससे बैटरी फट भी सकती है.
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Apple iPhone Air Vs Samsung Galaxy S25 Edge: सबसे पतले फोन की रेस में किसने मारी बाजी, कंपैरिजन से समझें कौन ज्यादा दमदार</title>
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<description><![CDATA[ 2025 का साल स्मार्टफोन इंडस्ट्री के लिए बेहद खास है. Apple ने अपने हालिया &amp;ldquo;Awe Dropping&amp;rdquo; इवेंट में iPhone Air पेश किया जो सीधे टक्कर ले रहा है पहले से मौजूद Samsung Galaxy S25 Edge से. दोनों ही फोन बेहद पतले, प्रीमियम और आकर्षक डिज़ाइन के साथ आए हैं लेकिन सवाल ये है कि इनमें से कौन बेहतर है? आइए जानते हैं दोनों के बीच तुलना.
डिज़ाइन और बिल्ड क्वालिटी
iPhone Air अब तक का सबसे पतला iPhone है जिसकी मोटाई 5.5mm से 5.6mm के बीच है. यह Galaxy S25 Edge से भी पतला है जिसकी मोटाई 5.8mm है. दोनों में टाइटेनियम फ्रेम और ग्लास बैक दिया गया है लेकिन Apple ने इसमें Ceramic Shield 2 का इस्तेमाल किया है जबकि Samsung ने Gorilla Glass Ceramic 2 लगाया है. वजन की बात करें तो iPhone Air सिर्फ 145 ग्राम का है जबकि S25 Edge का वजन 163 ग्राम है. यानी पोर्टेबिलिटी में iPhone Air आगे निकलता है.
डिस्प्ले
दोनों ही फोन शानदार OLED डिस्प्ले के साथ आते हैं. iPhone Air में 6.6-इंच OLED स्क्रीन है जिसका रेज़ॉल्यूशन 2740 x 1260 पिक्सल है. दूसरी ओर Galaxy S25 Edge में 6.7-इंच AMOLED 2X डिस्प्ले है जो QHD+ (1440 x 3120 पिक्सल) रेज़ॉल्यूशन सपोर्ट करता है.
iPhone Air की सबसे बड़ी खासियत इसकी 3000 nits पीक ब्राइटनेस है जो अब तक किसी भी iPhone में नहीं मिली. दोनों फोन 120Hz रिफ्रेश रेट देते हैं लेकिन iPhone Air का नया Metalens टेक्नोलॉजी वाला छोटा कैमरा कटआउट इसे और प्रीमियम लुक देता है.
कैमरा सेटअप
कैमरा सेगमेंट में दोनों के रास्ते अलग हैं. iPhone Air में सिर्फ एक 48MP का सिंगल रियर कैमरा है जिसे plateau bump डिज़ाइन में रखा गया है. वहीं, Galaxy S25 Edge में 200MP का प्राइमरी सेंसर और 12MP अल्ट्रा-वाइड लेंस दिया गया है. सेल्फी कैमरे की बात करें तो iPhone Air में 18MP का फ्रंट कैमरा है जिसमें Apple का AI Center Stage फीचर मिलता है. Samsung ने S25 Edge में 12MP का फ्रंट कैमरा दिया है. यानी कैमरा वर्सेटिलिटी के मामले में Samsung आगे है लेकिन Apple सादगी और AI फीचर्स पर फोकस करता है.
परफॉर्मेंस
iPhone Air में Apple का नया A19 या A19 Pro चिपसेट दिया गया है जो दमदार परफॉर्मेंस और बेहतर एफिशिएंसी देता है. इसके साथ 12GB RAM और नया C1 मोडेम भी मिलता है. Galaxy S25 Edge में Snapdragon 8 Elite चिपसेट और 12GB RAM है. दोनों ही प्रोसेसर फ्लैगशिप लेवल के हैं लेकिन कच्ची परफॉर्मेंस की बात करें तो Apple का A19 चिप थोड़ा आगे माना जा रहा है.
बैटरी और कीमत
अल्ट्रा-थिन डिज़ाइन का सबसे बड़ा नुकसान बैटरी क्षमता पर पड़ता है. iPhone Air में सिर्फ 2800mAh बैटरी है जबकि Samsung ने S25 Edge में 3900mAh बैटरी फिट कर दी है. बैटरी बैकअप के मामले में Samsung साफ तौर पर बेहतर है. कीमत की बात करें तो iPhone Air की शुरुआती कीमत $999 (1,19,900 रुपये) है जबकि Galaxy S25 Edge की कीमत 1,09,999 रुपये से शुरू होती है. यानी iPhone थोड़ा महंगा है लेकिन Apple ब्रांड वैल्यू और नए फीचर्स इसे प्रीमियम बना देते हैं.
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>नॉर्थ कोरिया के हैकर्स का खतरनाक काम, ChatGPT की मदद से कर दिया यह कांड, सोचकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ आए दिन ChatGPT जैसे एआई चैटबॉट्स के फायदों और इन्हें मिसयूज कर किए गए नुकसान की खबरें सामने आती रहती हैं. अब पता चला है कि नॉर्थ कोरिया के हैकर्स ने साउथ कोरिया में एक टारगेट पर अटैक करने के लिए ChatGPT की मदद ली थी. इन हैकर्स ने AI की मदद से साउथ कोरियाई सेना का फर्जी आईडी कार्ड बनाया और इसका इस्तेमाल फिशिंग अटैक करने के लिए किया. साउथ कोरिया की साइबर सिक्योरिटी कंपनी के मुताबिक, इस आईडी कार्ड की वजह से फिशिंग अटैक के पीछे का फर्जीवाड़ा पकड़ना मुश्किल हो गया.&amp;nbsp;
हमले के पीछे इस हैकर्स ग्रुप का हाथ
इस अटैक के पीछे Kimsuky का हाथ माना जा रहा है. यह नॉर्थ कोरिया का एक हैकर ग्रुप है, जो साइबर जासूसी करता है. पहले भी साउथ कोरिया पर हुए साइबर हमलों के पीछे इस ग्रुप का नाम सामने आया था. 2020 में अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक एडवायजरी में कहा था कि नॉर्थ कोरिया के शासकों ने इस ग्रुप को दुनियाभर से खुफिया जानकारी जुटाने के काम पर लगाया है. ताजा मामले में हैकर्स ने साउथ कोरिया के पत्रकारों, रिसर्चर और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है. इस फिशिंग अटैक के जरिए ईमेल ऐसे URL से भेजे गए थे, जो साउथ कोरिया की सेना इस्तेमाल करती है.
AI की मदद से नौकरी पा रहे हैकर
नॉर्थ कोरिया के इस हैकर ग्रुप ने खुफिया जानकारी जुटाने के लिए AI की मदद लेनी शुरू कर दी है. पिछले महीने टेक कंपनी एंथ्रोपिक ने कहा था कि नॉर्थ कोरिया के हैकर्स AI की मदद से अमेरिकी कंपनियों में नौकरियां पाकर उनके लिए काम कर रहे हैं. ये AI टूल्स की मदद से अपनी फर्जी आईडी बनाते और उन कंपनियों के टेस्ट पास करते हैं. ओपनएआई ने इसी साल फरवरी में कहा था कि उसने नॉर्थ कोरिया के कई ऐसे अकाउंट्स सस्पेंड किए हैं, जो फर्जी रेज्यूमे, कवर लेटर और सोशल मीडिया पोस्ट क्रिएट कर रहे थे.
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब ये टेक्नोलॉजी मचाएगी धमाल, इसके आगे AI भी लगता है बच्चा, जानिए पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ अब ये टेक्नोलॉजी मचाएगी धमाल, इसके आगे AI भी लगता है बच्चा, जानिए पूरी जानकारी ]]></description>
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<pubDate>Mon, 15 Sep 2025 15:49:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Apple iOS 26: कब रिलीज होगी नई अपडेट और कौन&#45;कौन से आईफोन को करेगी सपोर्ट? यहां जानें सारी डिटेल</title>
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<description><![CDATA[ Apple iOS 26: iPhone 17 series की लॉन्चिंग के बाद अब ऐप्पल अपने नए ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) को रोलआउट करने की तैयारी कर रही है. कंपनी ने बता दिया है कि वह 15 सितंबर को अपने नए iOS 26 को रोलआउट कर देगी. यह एक फ्री सॉफ्टवेयर अपडेट होगी और आईफोन यूजर्स के लिए इसके लिए कोई भी पैसा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसमें नई डिजाइन लैंग्वेज के साथ नए फीचर्स मिलने की भी बात कही जा रही है. आइए, इस अपडेट और इसके कंपेटिबल डिवाइसेस की लिस्ट पर नजर डाल लेते हैं.
लिक्विड ग्लास डिजाइन के साथ आएगी अपडेट
ऐप्पल ने इसी साल हुए WWDC में इस अपडेट का ऐलान किया था. कंपनी का कहना है कि इस अपडेट में यूजर्स को एक सुंदर नया डिजाइन, इंटेलीजेंट एक्सपेरिमेंट और ऐप्स में कई इंप्रूवमेंट देखने को मिलेगी. इसे लिक्विड ग्लास डिजाइन लैंग्वेज पर तैयार किया गया है और यह visionOS के ट्रांसलुसेंट इंटरफेस से प्रेरित है. इस अपडेट के बाद आईफोन का इंटरफेस पूरी तरह बदल जाएगा. इस अपडेट में कंपनी ने मेनू, ऑप्शन्स, नोटिफिकेशन, कंट्रोल सेंटर और मैसेजेज, फोन और कैमरा समेत कई ऐप्स के एलिमेंट्स को नया लुक दिया है.&amp;nbsp;
लॉक स्क्रीन को भी मिलेगा नया लुक
iOS 26 अपडेट लॉक स्क्रीन के लिए भी नया लुक लेकर आएगी. यूजर्स को डेट और टाइम विजेट के लिए नया डिजाइन मिलेगा. इसमें वॉलपेपर के हिसाब से विजेट का साइज चेंज करने का भी ऑप्शन आने वाला है. एक और मजेदार फीचर spatial scenes का होगा, जिससे वॉलपेपर में सेंस ऑफ डेप्थ मिलेगी. इसके साथ कैमरा ऐप में नया डिजाइन, ऐप्पल इंटेलीजेंस पावर्ड लाइव ट्रांसलेशन, AI-जनरेटेड कॉल समरी और विजुअल इंटेलीजेंस में नई अपग्रेड्स भी देखने को मिलेंगे.&amp;nbsp;
इन आईफोन में इंस्टॉल कर सकेंगे iOS 26
A13 और उसके बाद की चिप से लैस आईफोन इस अपडेट को इंस्टॉल कर सकेंगे. इसका मतलब है कि आईफोन 11 और उसके बाद की सीरीज के सभी आईफोन इसके लिए कंपेटिबल होंगे. आईफोन 11 सीरीज के अलावा आईफोन 12, आईफोन 13, आईफोन 14, आईफोन 15 और आईफोन 16 सीरीज में यह अपडेट काम करेगी. आईफोन 17 सीरीज इसी अपडेट के साथ लॉन्च हुई है.
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>जापान घूमने से लेकर बाईक खरीदने तक, आईफोन 17 की कीमत में हो सकते हैं ये कई काम</title>
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<description><![CDATA[ लंबे इंतजार के बाद आखिरकार आईफोन 17 सीरीज लॉन्च हो गई है. इस बार आईफोन की शुरुआती कीमत में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है. भारत मे आईफोन 17 की शुरुआती कीमत 82,900 रुपये रखी गई है. वहीं अगर प्रो मैक्स मॉडल के 2TB वेरिएंट की बात करें तो इसकी कीमत दो लाख से भी ज्यादा है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आईफोन 17 की शुरुआती कीमत यानी 82,900 रुपये में आप और क्या-क्या कर सकते हैं.
टोक्यो घूमकर आ सकते हैं
आईफोन 17 खरीदने में आप जितना पैसा देने वाले हैं, उतनी कीमत में आप दुनिया के सबसे साफ और सुंदर शहरों में एक टोक्यो में घूमकर आ सकते हैं. दिल्ली से टोक्यो आने-जाने का किराया लगभग 55,000 रुपये रहेगा. बाकी पैसों से आप शॉपिंग और भोजन का आनंद ले सकते हैं.
बैंकॉक ट्रिप पड़ेगी सस्ती
अगर आप बैंकॉक घूमकर आना चाहते हैं तो यह ट्रिप आईफोन 17 की कीमत से सस्ती पड़ेगी. दिल्ली से बैंकॉक तक की आने-जाने की फ्लाइट का किराया 20,000-25,000 रुपये के बीच आएगा.&amp;nbsp;
लैपटॉप और टैब दोनों आ जाएंगे
आईफोन 17 की कीमत में आप एक लैपटॉप और टैब दोनों खरीद सकते हैं. कुछ ही दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों की सेल आने वाली है. इसमें लैपटॉप और टैब पर अच्छे ऑफर मिलेंगे.
सोने की रिंग
आईफोन 17 की 82,900 रुपये की कीमत में आप लगभग 7 ग्राम तक की रिंग समेत सोने की कोई भी ज्वैलरी खरीद सकते हैं. खर्च की जगह यह एक सुरक्षित निवेश बन जाएगा.
स्कूटी भी पड़ेगी सस्ती
आईफोन 17 की कीमत में आप अपने या अपनी फैमिली के लिए स्कूटी खरीद सकते हैं. इससे आने-जाने की टेंशन दूर हो जाएगी. अगर आप स्कूल-कॉलेज में पढ़ते हैं तो यह आपके खूब काम आएगी.&amp;nbsp;
गेमिंग का पूरा सेटअप
अगर आप गेमिंग के शौकीन हैं तो आईफोन 17 की कीमत में गेमिंग का पूरा सेटअप खरीद सकते हैं. इस सेटअप में आप PS5, गेमिंग मॉनिटर और एक्सेसरीज आसानी से खरीद सकते हैं.&amp;nbsp;
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या Bangladesh में चलता है 5G नेटवर्क? जानिए पाकिस्तान का क्या है हाल</title>
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<description><![CDATA[ 5G Network in Bangladesh: दुनिया भर में मोबाइल नेटवर्क की रफ़्तार लगातार बढ़ रही है. 2G और 3G के बाद 4G ने इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका बदल दिया और अब बारी है 5G नेटवर्क की. 5G को लेकर एशियाई देशों में भी तेजी से काम हो रहा है. भारत में 5G सेवाएं पहले से मौजूद हैं लेकिन सवाल उठता है कि हमारे पड़ोसी देश Bangladesh और Pakistan में यह तकनीक कितनी आगे बढ़ चुकी है. आइए जानते हैं दोनों देशों का हाल.
Bangladesh में 5G नेटवर्क की स्थिति
Bangladesh ने 5G नेटवर्क की शुरुआत साल 2021 के आखिर में की थी. देश की सरकारी टेलीकॉम कंपनी Teletalk ने ढाका और कुछ बड़े शहरों में 5G ट्रायल लॉन्च किया. शुरुआती चरण में यह सेवा सीमित जगहों और सीमित यूज़र्स के लिए थी. हालांकि, अब तक Bangladesh में 5G पूरी तरह से आम लोगों तक नहीं पहुंच पाया है.
इसका मुख्य कारण है महंगी तकनीक, 5G टावरों का कम होना और हाई-स्पीड इंटरनेट की मांग को पूरा करने के लिए बड़े निवेश की ज़रूरत. देश की सरकार आने वाले समय में निजी कंपनियों के साथ मिलकर इसे विस्तार देने की कोशिश कर रही है. यानी, Bangladesh में 5G मौजूद है लेकिन यह अभी तक बड़े पैमाने पर नहीं चल रहा. फिलहाल केवल चुनिंदा शहरों और इलाकों तक ही इसकी पहुंच है.
Pakistan में 5G का हाल
Pakistan की स्थिति Bangladesh से भी पीछे है. वहां पर अभी तक 5G नेटवर्क लॉन्च नहीं किया गया है. सरकार और टेलीकॉम कंपनियां कई बार 5G ट्रायल की बात कर चुकी हैं लेकिन यह केवल टेस्टिंग तक ही सीमित रहा है. Pakistan में अभी भी कई जगहों पर 4G नेटवर्क ठीक से काम नहीं करता जिसके कारण 5G को लागू करना चुनौतीपूर्ण है. देश की आर्थिक स्थिति और टेलीकॉम सेक्टर पर भारी खर्च की कमी भी इसमें बड़ी बाधा है. पाकिस्तान की सरकार ने घोषणा की थी कि आने वाले सालों में 5G सेवा शुरू होगी लेकिन इसकी कोई पक्की टाइमलाइन तय नहीं है.
भारत की तुलना में दोनों देश
भारत में 5G अक्टूबर 2022 से लॉन्च हो चुका है और अब यह लगभग सभी बड़े शहरों और कस्बों तक पहुंच चुका है. यहां तक कि गांवों में भी कंपनियां धीरे-धीरे 5G कवरेज बढ़ा रही हैं. वहीं Bangladesh और Pakistan अभी भी इस दौड़ में पीछे हैं. Bangladesh ने भले ही 5G ट्रायल लॉन्च कर दिया है लेकिन आम यूज़र्स के लिए यह आसानी से उपलब्ध नहीं है. वहीं Pakistan में तो 5G का सफर अभी शुरू ही नहीं हुआ.
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:13 +0530</pubDate>
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<title>Apple vs Google: iPhone 17 और Pixel 10 में कौन है बेस्ट फ्लैगशिप फोन, कंपैरिजन से समझें पूरा जोड़ गणित</title>
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<description><![CDATA[ Apple vs Google: स्मार्टफोन की दुनिया में 2025 एक नए मुकाम पर पहुंच चुका है. एप्पल का iPhone 17 और गूगल का Pixel 10 अब एक ही प्राइस रेंज में मौजूद हैं जिससे दोनों कंपनियां सीधे-सीधे उन्हीं यूज़र्स को टारगेट कर रही हैं जो प्रीमियम फोन चाहते हैं लेकिन महंगे फ्लैगशिप मॉडल से बचना चाहते हैं. इस बार मुकाबला और भी कड़ा हो गया है क्योंकि दोनों फोन ने ऐसी खूबियां पेश की हैं जो पहले सिर्फ टॉप वेरिएंट्स तक सीमित थीं. आइए जानते हैं इनके बीच का असली फर्क.
डिजाइन और मजबूती
iPhone 17 को Ceramic Shield 2 से और मजबूत बनाया गया है, जो कंपनी के मुताबिक तीन गुना ज्यादा स्क्रैच-रेज़िस्टेंट है. इसका वजन सिर्फ 177 ग्राम है जो इसे हल्का और कॉम्पैक्ट बनाता है. Pixel 10 का डिजाइन थोड़ा भारी-भरकम है (204 ग्राम) लेकिन इसमें बड़ी बैटरी और नया Pixelsnap मैग्नेटिक Qi2 स्टैंडर्ड दिया गया है जो MagSafe एक्सेसरीज़ के साथ भी काम करता है. दोनों ही फोन IP68 सर्टिफाइड हैं और डस्ट व वॉटर रेज़िस्टेंट हैं.
डिस्प्ले किसका बेहतर?
iPhone 17 के बेस मॉडल में पहली बार 120Hz ProMotion डिस्प्ले दिया गया है. इसका 6.3-इंच OLED पैनल 1Hz से 120Hz तक रिफ्रेश रेट एडजस्ट कर सकता है और इसमें 3000 निट्स ब्राइटनेस मिलती है.
वहीं, Pixel 10 में भी 6.3-इंच OLED डिस्प्ले है, जो 120Hz तक जाता है और ब्राइटनेस भी समान है. फर्क इतना है कि इसका लोएस्ट रिफ्रेश रेट 60Hz है जिससे Always-On डिस्प्ले पर iPhone ज्यादा स्मूद और पावर-इफिशिएंट साबित होता है.
परफॉर्मेंस और AI पावर
iPhone 17 में A19 चिप लगी है जो 3nm प्रोसेस पर बनी है और इसे 8GB RAM व 512GB तक स्टोरेज का साथ मिलता है. वहीं, Pixel 10 में Google का पहला पूरी तरह इन-हाउस Tensor G5 चिप है जो 12GB RAM और 256GB स्टोरेज के साथ आता है. जहां एप्पल चिप बेंचमार्क्स में आगे रहती है, वहीं Pixel 10 AI फीचर्स जैसे Magic Cue और Camera Coach की वजह से अलग पहचान बनाता है. एप्पल ने भी iOS 26 में Apple Intelligence जोड़ा है लेकिन इसकी क्षमताएं फिलहाल सीमित हैं.
कैमरा सेटअप
iPhone 17 में डुअल 48MP कैमरा सिस्टम (मुख्य + अल्ट्रावाइड) और नया 18MP फ्रंट कैमरा है जो चौड़े फ्रेम कैप्चर करने में मदद करता है. लेकिन इसमें अब भी टेलीफोटो लेंस नहीं है. Pixel 10 इस बार तीन कैमरों के साथ आया है, जिसमें 10.8MP टेलीफोटो लेंस 5x ऑप्टिकल ज़ूम और 30x AI ज़ूम तक सपोर्ट करता है. जो यूज़र्स ज़ूम फोटोग्राफी पसंद करते हैं उनके लिए यह बड़ा एडवांटेज है.
बैटरी और चार्जिंग
Apple ने बैटरी कैपेसिटी नहीं बताई है लेकिन दावा है कि iPhone 17 30 घंटे तक ऑफलाइन वीडियो चला सकता है. इसमें स्टैक्ड बैटरी टेक्नोलॉजी और A19 चिप की पावर एफिशिएंसी मदद करती है. Pixel 10 में 4,970mAh की बैटरी है जो लंबे बैकअप का भरोसा देती है. चार्जिंग में iPhone 17 को बढ़त मिलती है, जिसमें 40W वायर्ड और 25W वायरलेस चार्जिंग है. Pixel 10 में 30W वायर्ड और 15W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट मिलता है, हालांकि Pixelsnap इसे ज्यादा सुविधाजनक बनाता है.
कौन है ज्यादा किफायती?
भारत में iPhone 17 की शुरुआती कीमत 82,900 रुपये (256GB मॉडल) है जबकि 512GB वेरिएंट 1,02,900 रुपये में मिलेगा. इसकी प्री-ऑर्डर बुकिंग 12 सितंबर से शुरू होगी और बिक्री 19 सितंबर से. दूसरी ओर, Google Pixel 10 की आधिकारिक कीमत 79,999 रुपये है (12GB + 256GB मॉडल) लेकिन अमेज़न पर यह 74,999 रुपये में मिल रहा है. यानी करीब 8,000 रुपये का अंतर जो कई खरीदारों के लिए अहम साबित हो सकता है.
किसे चुनना फायदेमंद
यह मुकाबला अब पहले से कहीं ज्यादा करीबी हो गया है. iPhone 17 हल्का, टिकाऊ, तेज चार्जिंग और स्मूद डिस्प्ले अनुभव देता है. Pixel 10 बड़ी बैटरी, टेलीफोटो कैमरा और उन्नत AI फीचर्स की वजह से ज्यादा स्मार्ट लगता है. अगर आप पहले से Apple इकोसिस्टम का हिस्सा हैं तो iPhone 17 एक पक्का विकल्प है. वहीं Android पसंद करने वालों के लिए Pixel 10 ज़्यादा वैल्यू देता है. दोनों फोन 7 साल तक अपडेट का वादा करते हैं, इसलिए आखिरकार चुनाव आपके टेक प्रेफरेंस पर निर्भर करेगा Apple की refinement या Google की AI-स्मार्टनेस.
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:12 +0530</pubDate>
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<title>इस साल भारत में बिक सकते हैं इतने iPhone, इतनी सेल कभी नहीं हुई, रिकॉर्ड पर है ऐप्पल की नजर</title>
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<description><![CDATA[ भारत में इस साल रिकॉर्ड संख्या में iPhone बिकने का अनुमान है और इसके पीछे हाल ही में लॉन्च हुई iPhone 17 Series की अहम भूमिका रहने वाली है. इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में इस साल आईफोन की शिपमेंट 1.5 करोड़ तक पहुंच सकती है, जो पिछले साल की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक होगी. बीते साल ऐप्पल ने भारत में 1.2 करोड़ आईफोन डिलीवर किए थे. बता दें कि भारत अमेरिकी टेक कंपनी के लिए महत्वपूर्ण बाजार बनता जा रहा है. साथ ही कंपनी भारत में बने आईफोन भी विदेशों में बेच रही है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं आंकड़े?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल जनवरी से लेकर जून तक लगभग 70 लाख आईफोन यूनिट्स की डिलीवरी हुई है. अब नई सीरीज लॉन्च होने और फेस्टिवल सीजन के कारण बिक्री में उछाल आने की उम्मीद है. इसके अलावा ऐप्पल ने ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अपग्रेड बोनस समेत कई ऑफर शुरू किए हैं. हाल ही में आई आईफोन 17 सीरीज के बेस मॉडल में भी स्टोरेज को बढ़ाकर 256GB किया गया है और इनमें कई शानदार अपग्रेड दी गई हैं. इससे भी लोग नई लाइनअप के प्रति आकर्षित होंगे.
कितनी रह सकती है ऐप्पल की शिपमेंट?
डिस्ट्रीब्यूटर से प्राप्त डेटा के अनुसार, 2025 के पहले छह महीनों में आईफोन की 60-70 लाख यूनिट्स की डिलीवरी हुई थी. अब फेस्टिवल सीजन में मांग और तेजी से बढ़ेगी. मार्केट एनालिसिस करने वाली कंपनी Canalys का अनुमान है कि इस साल भारत में आईफोन की शिपमेंट 1.42 करोड़ तक पहुंच सकती है. इसी तरह काउंटरप्वॉइंट रिसर्च का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार लगभग 20 प्रतिशत अधिक आईफोन बिक सकते हैं. ऐप्पल को इसका फायदा मार्केट शेयर के तौर पर भी होगा. उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक भारतीय स्मार्टफोन मार्केट के 8 प्रतिशत हिस्से पर ऐप्पल का कब्जा होगा.
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:11 +0530</pubDate>
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<title>हो गया खुलासा! Flipkart की सेल में पहली बार इतना सस्ता मिलेगा iPhone 16 Pro Max, हो जाएगी कई हजारों की बचत</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 16 Pro Max: Apple का नया iPhone 17 Pro Max इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है. खासकर इसका 2TB वेरिएंट जिसकी कीमत 2,29,900 रुपये रखी गई है ने लोगों को हैरान कर दिया है. इतने महंगे दाम पर हर कोई बड़ा iPhone खरीदने में सक्षम नहीं है. लेकिन अच्छी खबर यह है कि पिछले साल का iPhone 16 Pro Max अब बेहद कम दाम पर मिलने वाला है.
Flipkart का बड़ा खुलासा
ई-कॉमर्स कंपनी Flipkart ने ऐलान किया है कि आगामी Big Billion Days Sale (23 सितंबर से शुरू) में iPhone 16 Pro Max का बेस वेरिएंट, जिसकी लॉन्चिंग कीमत 1,44,900 रुपये थी, अब 90,000 रुपये से भी कम में मिलेगा. इसका मतलब है कि ग्राहकों को लॉन्च प्राइस पर 55,000 रुपये से ज्यादा और मौजूदा Flipkart कीमत (1,38,000 रुपये के करीब) से लगभग 48,000 रुपये तक की बचत होगी.
iPhone 16 Pro पर भी जोरदार डिस्काउंट
सिर्फ Pro Max ही नहीं, बल्कि iPhone 16 Pro भी इस सेल में बड़े डिस्काउंट पर मिलेगा.
लॉन्च कीमत: 1,19,900 रुपये
Flipkart पर मौजूदा कीमत: 1,12,900 रुपये
सेल प्राइस: 69,999 रुपये
यानी खरीदारों को करीब 42,900 रुपये की बचत होगी. इसके अलावा दोनों फोनों के हायर स्टोरेज वेरिएंट्स पर भी जबरदस्त ऑफर मिलेंगे, हालांकि उनकी सही कीमतें अभी सामने नहीं आई हैं.
क्यों बढ़ी नए iPhone 17 सीरीज की कीमत?
एप्पल की ताज़ा iPhone 17 सीरीज़ की कीमतें पहले से ज्यादा रखी गई हैं. इसके पीछे अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए टैरिफ का बड़ा असर है. सीईओ टिम कुक ने भले ही तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कुछ समय के लिए छूट हासिल की थी लेकिन भविष्य में समझौता टूटने की स्थिति में कीमतों को ऊंचा रखना कंपनी के लिए एक तरह का बैकअप साबित हो सकता है.
खरीदारों के लिए सुनहरा मौका
अगर आप नया iPhone 17 खरीदने की बजाय कम दाम में एक प्रीमियम iPhone चाहते हैं तो Flipkart का यह ऑफर आपके लिए बेहतरीन डील हो सकता है. 90,000 रुपये से कम कीमत में iPhone 16 Pro Max मिलना अब तक की सबसे बड़ी कटौती है वहीं iPhone 16 Pro भी शानदार कीमत पर उपलब्ध होगा.
40% छूट के साथ मिल रहा Samsung Galaxy S24 Ultra 5G
ई-कॉमर्स साइट Flipkart पर Samsung Galaxy S24 Ultra 5G पर भी भारी डिस्काउंट चल रहा है. जानकारी के अनुसार, फोन के 12+256GB वेरिएंट की असल कीमत 1,34,999 रुपये है लेकिन यहां इसे 40 प्रतिशत की छूट के साथ लिस्ट किया गया है. डिस्काउंट के बाद आप इसे महज 79,999 रुपये में खरीद सकते हैं. इसके अलावा आप इसे 3770 रुपये की आसान किस्तों पर भी खरीद सकते हैं. बता दें कि आप इसे बैंक ऑफर्स के तहत और भी सस्ती कीमत में खरीद सकते हैं.
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>भारत या दुबई! कहां सस्ता मिलेगा iPhone 17? जानिए कहां से खरीदना होगा बेस्ट</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 Price in Dubai vs India: Apple ने हाल ही में अपनी नई iPhone 17 सीरीज़ लॉन्च की है जो दुनियाभर में टेक लवर्स के बीच चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है. हर बार की तरह इस बार भी लोगों के मन में एक ही सवाल है आखिर iPhone 17 भारत में खरीदना ज्यादा फायदेमंद रहेगा या फिर दुबई से लाना बेहतर विकल्प होगा? आइए जानते हैं पूरी जानकारी.
भारत में iPhone 17 की कीमत
एप्पल ने भारत में iPhone 17 की शुरुआती कीमत 82,900 रुपये (256GB बेस वेरिएंट) रखी है. 512GB वेरिएंट की कीमत 1,02,900 रुपये तक जाती है. टॉप मॉडल यानी iPhone 17 Pro Max (2TB वेरिएंट) की कीमत करीब 2,29,900 रुपये रखी गई है. भारत में iPhones हमेशा थोड़ा महंगे रहते हैं. इसकी वजह है आयात शुल्क, GST और अन्य टैक्स जो कीमत में करीब 30-35% तक इज़ाफा कर देते हैं.
दुबई में iPhone 17 की कीमत
दुबई (यूएई) एप्पल प्रोडक्ट्स के लिए लंबे समय से शॉपिंग का हॉटस्पॉट रहा है. यहां iPhone 17 की शुरुआती कीमत लगभग 3,399 दिरहम (लगभग 77,000 रुपये) से शुरू होती है. यानी भारत की तुलना में यहां कीमतें 5,000 से 7,000 रुपये तक कम हैं. इसके अलावा दुबई में iPhone पर कोई VAT या इंपोर्ट ड्यूटी ज्यादा नहीं लगती जिससे कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है.
कहां है असली फायदा?
भारत में खरीदने के फायदे

आसान EMI और बैंक ऑफर्स.
एप्पल इंडिया का पूरा वारंटी और सर्विस सपोर्ट.
खरीद के बाद रिटर्न और एक्सचेंज का विकल्प.

दुबई से खरीदने के फायदे

कीमत कम (भारत से लगभग 5-10% सस्ता).
नई सीरीज़ सबसे पहले उपलब्ध होती है.
ट्रैवल के दौरान खरीदने पर टैक्स-फ्री शॉपिंग का लाभ.

वारंटी और सर्विस का फर्क
कई बार लोग दुबई से iPhone खरीदकर भारत में इस्तेमाल करना चाहते हैं. ऐसे में जानना जरूरी है कि एप्पल ग्लोबल वारंटी तो देता है, लेकिन कुछ मामलों में रिपेयर और पार्ट रिप्लेसमेंट के लिए देशवार शर्तें लागू हो सकती हैं. भारत में आधिकारिक तौर पर खरीदा iPhone हमेशा ज्यादा सुरक्षित विकल्प माना जाता है.
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>चोरी हो सकता है WhatsApp यूजर्स का डेटा, पूर्व कर्मचारी ने Meta पर लगाए गंभीर आरोप, मुकदमा दर्ज</title>
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<description><![CDATA[ भारतीय मूल के साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट अताउल्लाह बेग ने मेटा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. बेग 2021 से लेकर 2025 तक मेटा के स्वामित्व वाली WhatsApp के साइबर सिक्योरिटी हेड थे. उनका आरोप है कि WhatsApp के सिस्टम में साइबर सुरक्षा से जुड़ी कई ऐसी खामियां हैं, जिनसे यूजर्स का डेटा कॉम्प्रोमाइज हो सकता है. उनका कहना है कि उन्होंने इस सुरक्षा खामी की जानकारी जब मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग समेत उच्च अधिकारियों को दी तो उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया. साथ ही कंपनी ने उन पर कार्रवाई करते हुए उन्हें नौकरी से निकाल दिया.
मुकदमे में क्या आरोप लगाए गए हैं?
मुकदमे में कहा गया है कि मेटा के करीब 1,500 इंजीनियर्स के पास व्हाट्सऐप के यूजर डेटा की सीधी पहुंच है और इस पर कोई निगरानी भी नहीं रखी जा रही. व्हाट्सऐप डेवलपर्स इस डेटा से यूजर्स की कॉन्टैक्ट इंफोर्मेशन, IP एड्रेसेस और प्रोफाइल फोटो चुरा सकते हैं. कैलिफॉर्निया के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट में फाइल किए गए इस मुकदमे में बेग ने कहा कि व्हाट्सऐप में काम शुरू करने के बाद उन्होंने इन सुरक्षा खामियों का पता चला. ये खामियां संघीय कानूनों के साथ-साथ मेटा की कानूनी जिम्मेदारियों का उल्लंघन कर रही हैं. शिकायत करने के बाद भी कंपनी की तरफ से इस रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया. बेग ने कहा कि उनके शिकायत करने के तीन दिन बाद से ही उन्हें काम को लेकर नेगेटिव फीडबैक मिलना शुरू हो गया.&amp;nbsp;
मेटा ने इसे लेकर क्या कहा है?
मेटा ने बेग के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए इनका खंडन किया है. कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि यह एक पैटर्न बन गया है, जिसमें खराब प्रदर्शन के आधार पर नौकरी से निकाले गए कर्मचारी अधूरे दावों को लेकर लोगों के बीच चले जाते हैं. प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी को इस बात पर गर्व है कि लोगों की प्राइवेसी को प्रोटेक्ट करने को लेकर उसका मजबूत रिकॉर्ड है.
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:08 +0530</pubDate>
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<title>पहली बार स्टैंडर्ड आईफोन में भी मिला प्रो मॉडल वाला यह फीचर, अब ऐप्पल का मजाक नहीं उड़ा पाएंगे लोग!</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी टेक दिग्गज Apple ने इसी हफ्ते अपनी नई iPhone 17 series को लॉन्च किया है. हर बार की तरह इस साल भी कंपनी ने लेटेस्ट मॉडल में कई शानदार अपग्रेड्स दी हैं. प्रो मॉडल में कई सालों बाद कंपनी ने डिजाइन को चेंज किया है और लोग इसे पसंद कर रहे हैं. इस बार तो सीरीज के बेस मॉडल को भी प्रो मॉडल वाले कई फीचर्स से लैस किया गया है. ऐसे में लोगों की कई सालों से चली आ रही शिकायत बंद हो जाएगी और स्टैंडर्ड और प्रो मॉडल्स में फीचर्स के अंतर को लेकर वो मजाक नहीं उड़ा पाएंगे.
iPhone 17 में मिला Pro मॉडल वाला यह फीचर
ऐप्पल ने इस बार iPhone 17 को भी प्रो मॉडल वाले फीचर दिए हैं. इनमें सबसे बड़ा फीचर डिस्प्ले में ProMotion टेक्नोलॉजी को शामिल करना है. साथ ही यह मॉडल Always-On display के साथ आएगा. अभी तक कंपनी अपने स्टैंडर्ड और प्लस मॉडल में 60Hz वाला पैनल देती आई थी, लेकिन इस बार कंपनी ने डिस्प्ले का साइज बढ़ाने के साथ-साथ ProMotion पैनल और Always-On display भी जोड़ दिया है. ProMotion पैनल से iPhone 17 में भी प्रो मॉडल की तरह 120Hz का रिफ्रेश रेट सपोर्ट आ गया है. यह स्क्रीन पर चल रहे कंटेट के हिसाब से रिफ्रेश रेट को 1Hz से 120Hz तक ऑटोमैटिकल एडजस्ट कर लेता है. ऐप्पल ने आईफोन 13 प्रो और 13 प्रो मैक्स के साथ ProMotion डिस्प्ले की शुरुआत की थी और अभी तक यह केवल प्रो मॉडल में मिलता आया था. रिफ्रेश रेट ज्यादा होने का मतलब है कि स्क्रीन पर चले रहे मोशन स्मूद होते हैं और विजुअल क्लैरिटी बढ़ती है.
iPhone 17 के फीचर्स
यह फोन 6.3 इंच के 120Hz रिफ्रेश रेट वाले ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले के साथ लॉन्च हुआ है. एल्युमिनियम और ग्लास फिनिशिंग वाला यह मॉडल 7.3mm मोटा है. इसे ऐप्पल की लेटेस्ट A19 चिप दी गई है, जिसे 8GB रैम के साथ पेयर किया गया है. इसके रियर में 48MP+12MP का डुअल कैमरा सेटअप कैमरा है. आईफोन 17 के फ्रंट में सेंटर स्टेज कैमरा है. भारत में इसकी शुरुआती कीमत 82,900 रुपये रखी गई है.
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>YouTube पर सिल्वर बटन कब मिलता है? जानिए 10 हज़ार व्यूज़ पर कितनी होती है कमाई</title>
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<description><![CDATA[ YouTube Silver Button: आज के समय में YouTube न सिर्फ मनोरंजन और जानकारी का सबसे बड़ा मंच है, बल्कि यह लाखों लोगों के लिए कमाई का जरिया भी बन चुका है. हर कंटेंट क्रिएटर का सपना होता है कि उसका चैनल आगे बढ़े, लाखों सब्सक्राइबर जुटाए और यूट्यूब से मिलने वाले प्लेक बटन हासिल करे. साथ ही, नए यूट्यूबर्स के मन में अक्सर यह सवाल भी आता है कि आखिर 10,000 व्यूज़ पर कितनी कमाई होती है? आइए इन दोनों सवालों का जवाब जानते हैं.
YouTube का सिल्वर बटन कब मिलता है?
यूट्यूब अपने क्रिएटर्स को उनकी मेहनत और सफलता के लिए क्रिएटर अवॉर्ड्स देता है. इन्हें आमतौर पर प्ले बटन के नाम से जाना जाता है. सिल्वर प्ले बटन तब मिलता है जब किसी चैनल पर 1 लाख (100,000) सब्सक्राइबर पूरे हो जाते हैं. वहीं, गोल्ड प्ले बटन के लिए 10 लाख (1 मिलियन) सब्सक्राइबर होने चाहिए. डायमंड प्ले बटन तब मिलेगा जब चैनल पर 1 करोड़ (10 मिलियन) सब्सक्राइबर पूरे हो जाते हैं. यानि सिर्फ व्यूज़ काफी नहीं हैं, सिल्वर बटन पाने के लिए चैनल पर सब्सक्राइबर बेस मज़बूत होना ज़रूरी है.
10,000 व्यूज़ पर कितनी कमाई होती है?
अब बात करें कमाई की. यूट्यूब की कमाई कई फैक्टर्स पर निर्भर करती है जैसे वीडियो की कैटेगरी, ऑडियंस किस देश से है, वीडियो की लंबाई और उसमें दिखाए गए ऐड्स. भारत में औसतन यूट्यूबर्स को 1,000 व्यूज़ पर 20 से 50 रुपये तक की कमाई हो सकती है. इस हिसाब से अगर आपके वीडियो पर 10,000 व्यूज़ आते हैं तो कमाई लगभग 200 रुपये से 500 रुपये तक हो सकती है. अगर आपका कंटेंट टेक्नोलॉजी, फाइनेंस या एजुकेशन जैसी हाई-CPM कैटेगरी में है तो कमाई इससे कहीं ज्यादा भी हो सकती है. वहीं, एंटरटेनमेंट और व्लॉग्स जैसे कंटेंट पर आमतौर पर कम रेवेन्यू मिलता है.
कमाई सिर्फ ऐड्स से नहीं होती
यूट्यूब पर कमाई का मुख्य जरिया Google AdSense से आने वाले विज्ञापन हैं लेकिन यही एकमात्र रास्ता नहीं है. बड़े यूट्यूबर्स इनसे भी कमाते हैं.

स्पॉन्सरशिप और ब्रांड डील्स
एफिलिएट मार्केटिंग
मेंबरशिप और सुपरचैट्स
मर्चेंडाइज सेलिंग

यानि व्यूज़ जितने ज्यादा होंगे, आपके चैनल पर उतनी ही ज्यादा कमाई के अवसर खुलते जाएंगे.
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<pubDate>Fri, 12 Sep 2025 12:08:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Apple Watch Ultra 3 में आया Satellite Connectivity का फीचर, लेकिन इससे भारत में कोई फायदा नहीं, जानें कारण</title>
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<description><![CDATA[ अमेरिकी टेक दिग्गज ऐप्पल ने 9 सितंबर को आईफोन 17 सीरीज समेत कई नए प्रोडक्ट्स लॉन्च किए थे. इन प्रोडक्ट्स में Apple Watch Ultra 3 भी शामिल है. यह कंपनी की अब तक सबसे एडवांस्ड वॉच है, जिसमें हेल्थ, फिटनेस, सेफ्टी और कनेक्टिविटी के लिए कई फीचर्स दिए गए हैं. ऐप्पल ने इस वॉच में सैटेलाइट कनेक्टिविटी फीचर भी दिया है. इसकी मदद से यूजर उन इलाकों से भी अपने दोस्तों या इमरजेंसी सर्विसेस से संपर्क कर सकेंगे, जहां मोबाइल नेटवर्क या वाई-फाई कवरेज नहीं होती. हालांकि, यह फीचर भारत में काम नहीं करेगा.&amp;nbsp;
कैसे काम करेगी सैटेलाइट कनेक्टिविटी?
ऐप्पल के मुताबिक, वॉच अल्ट्रा 3 में सैटेलाइट कनेक्टिविटी की मदद से यूजर इमरजेंसी सर्विसेस या अपने फोन में सेव इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को टेक्स्ट मैसेज भेज पाएंगे. इसके अलावा अगर इस वॉच को लगता है कि कहीं कार की जोरदार टक्कर हुई है या यह जोर से गिरी है और यूजर बेहोश हो गया है तो भी यह इमरजेंसी सर्विसेस और कॉन्टैक्ट के पास लोकेशन भेज सकती है. वॉच के अलावा आईफोन, सैमसंग और गूगल के कुछ स्मार्टफोन में भी यह फीचर मिलता है.&amp;nbsp;
भारत में काम क्यों नहीं करेगी सैटेलाइट कनेक्टिविटी?
ऐप्पल ने सबसे पहले आईफोन 14 सीरीज में सैटेलाइट कनेक्टिविटी का फीचर दिया था. अब अल्ट्रा वॉच 3 में भी यह फीचर मिला है, लेकिन भारत में यह काम नहीं करेगा. इसकी वजह है कि यह फीचर अभी तक केवल अमेरिका और कनाडा तक ही सीमित है. इसका मतलब है कि अभी तक केवल कनाडा और अमेरिका के यूजर ही इस फीचर का फायदा उठा सकते हैं. बता दें कि भारत में भी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी है, लेकिन ऐप्पल ने इस फीचर को अभी तक यहां के लिए इनेबल नहीं किया है. अलग-अलग देशों में इस फीचर को रोल आउट करने से पहले ऐप्पल को वहां के स्थानीय सैटेलाइट इंटरनेट प्रोवाइडर के साथ पार्टनरशिप भी करनी पड़ेगी. इस वजह से अभी भारतीय यूजर्स ऐप्पल डिवाइसेस में सैटेलाइट कनेक्टिविटी का फायदा नहीं उठा पाएंगे.
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<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 11:48:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>कोई अंग्रेजी में बोले, आप अपनी भाषा में सुनेंगे, ऐप्पल का ऐसा कमाल कि अब लाइव अनुवाद करेगा AirPods</title>
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<description><![CDATA[ Apple ने AirPods Pro 3 को लॉन्च कर दिया है. एयरपॉड्स प्रो 3 में नया आर्किटेक्चर यूज किया गया है, जो ऑडियो एक्सपीरियंस को बेहतर बनाता है. इसमें पुरानी जनरेशन के मुकाबले दोगुना एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन मिलेगा. हार्ट रेट ट्रैकिंग फीचर के साथ-साथ ऐप्पल ने इसमें लाइव ट्रांसलेशन का भी फीचर दिया है. यानी यह बात करते-करते भाषा को ट्रांसलेट कर देगा. उदाहरण के तौर पर अगर कोई आपसे इंग्लिश में बात कर रहा है तो यह बातचीत के दौरान ही इंग्लिश को आपकी मर्जी की भाषा में ट्रांसलेट कर देगा.&amp;nbsp;
लाइव ट्रांसलेशन
ऐप्पल ने बताया कि AirPods Pro 3 बातचीत के दौरान लाइव ट्रांसलेशन कर पाएगा. अभी यह केवल बीटा वर्जन में उपलब्ध है. ऐप्पल के मुताबिक, लाइव ट्रांसलेशन की कैपेबिलिटी कंप्यूटेशनल ऑडियो और ऐप्पल इंटेलीजेंस पर बेस्ड है. इस फीचर को इनेबल करने के बाद यूजर आसानी से दूसरी भाषा को समझ पाएगा और अपनी बात को भी दूसरी भाषा बोलने वाले व्यक्ति तक पहुंचा पाएगा. इसके लिए दोनों लोगों के पास एयरपॉड्स प्रो 3 होने जरूरी हैं. अगर दोनों में एक भी व्यक्ति के पास एयरपॉड्स नहीं है तो उस स्थिति में आईफोन यह काम करेगा और इसके डिस्प्ले पर ट्रांसक्रिप्ट चलने लगेगी.&amp;nbsp;
लंबी बातचीत भी होगी आसान
ऐप्पल ने कहा कि अगर दोनों यूजर्स के पास लाइव ट्रांसलेशन वाले एयरपॉड्स हैं तो उनके लिए लंबी बातचीत करना भी आसान हो जाएगा. एयरपॉड्स में दिया गया एक्टिव नॉइस कैंसिलेशन (ANC) के कारण सामने वाले व्यक्ति की आवाज धीमी हो जाएगी और वह आसानी से ट्रांसलेशन पर ध्यान दे पाएगा.
अभी इन भाषाओं को करेगा सपोर्ट
एयरपॉड्स में लाइव ट्रांसलेशन अभी इंग्लिश, फ्रेंच, जर्मन, पुर्तगाली और स्पेनिश भाषा में उपलब्ध है. इस साल के अंत तक इसमें इटैलियन, जापानी, कोरियाई और चाइनीज भाषा का सपोर्ट भी जोड़ा जाएगा. अगर आप हिंदी में ट्रांसलेशन का सपोर्ट देख रहे हैं तो इसके लिए थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
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<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 11:48:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Larry Ellison बने दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति, Elon Musk को छोड़ा पीछे, संपत्ति जानकर रह जाएंगे दंग</title>
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<description><![CDATA[ Larry Ellison दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं. पहली बार इस पायदान पर पहुंचने वाले एलिसन ने अमेरिकी अरबपति Elon Musk को पछाड़ा है. 81 वर्षीय एलिसन टेक कंपनी Oracle के कॉ-फाउंडर हैं और अब कंपनी के चेयरमैन और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर के पद पर तैनात हैं. 10 सितंबर को ऑरेकल ने तिमाही के आंकड़े पेश किए थे, जिसके बाद कंपनी के शेयर तेजी से ऊपर बढ़े. इससे एलिसन की संपत्ति में अचानक 101 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ.
पहली बार एक दिन में इतनी बढ़ी किसी की संपत्ति
10 सितंबर को आए उछाल के बाद एलिसन की कुल संपत्ति 393 बिलियन डॉलर पहुंच गई है. इसके साथ ही उन्होंने 385 बिलियन अमेरिकी डॉलर की संपत्ति वाले एलन मस्क को पछाड़ दिया. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर इंडेक्स पर यह पहली बार देखा गया कि एक दिन में किसी अरबपति की संपत्ति में इतना उछाल आया है. बता दें कि मस्क 2021 में पहली बार दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने थे. इसके बाद जेफ बेजोस और बर्नार्ड अर्नॉल्ट ने उन्हें पछाड़ दिया है. हालांकि, मस्क पिछले साल फिर से इस मामले में शीर्ष पर पहुंच गए थे. अब करीब 300 दिन बाद वो दूसरे पायदान पर आ गए.
2000 डॉलर से की थी कंपनी की शुरुआत&amp;nbsp;
1944 में पैदा हुए एलिसन ने महज 2000 डॉलर के साथ ऑरेकल की सह-स्थापना की थी. अब उनकी इस कंपनी में 41 प्रतिशत हिस्सेदारी है. लगातार 37 सालों तक कंपनी के सीईओ रहने के बाद उन्होंने 2014 में इस पद से इस्तीफा दे दिया. उन्हें सेलबोट की रेस लगाने, विमान उड़ाने, टेनिस खेलने और गिटार बजाने का शौक है. फिलहाल वह हवाई के लनाई आईलैंड पर रहते हैं, जिसे उन्हें 2012 में 300 मिलियन डॉलर में खरीदा था.
ऑरेकल के शेयरों ने पकड़ी रफ्तार
ऑरेकल के शेयरों में इस साल 45 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है. 10 सितंबर को ही शेयरों में 41 प्रतिशत का तेज उछाल देखा गया. इससे कंपनी और एलिसन की संपत्ति एकदम उछल गई. यह कंपनी के इतिहास में शेयरों में एक दिन में आया सबसे बड़ा उछाल है.
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<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 11:48:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 खरीदने में पाकिस्तानियों का छूटेगा पसीना, बुकिंग के समय देनी पड़ेगी इतनी रकम, जान लीजिए</title>
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<description><![CDATA[ 9 सितंबर को ऐप्पल ने अपनी नई आईफोन 17 सीरीज लॉन्च कर दी है. दुनियाभर में ऐप्पल के शौकीन यूजर्स ने अपने आईफोन को अपग्रेड करने का मन बना लिया है. हालांकि, पाकिस्तान में यह काम थोड़ा मुश्किल होने वाला है. दरअसल, पाकिस्तान में लिमिटेड स्टॉक के कारण आईफोन खरीदना काफी मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा यहां बुकिंग के समय पैसा भी देना पड़ता है और डिलीवरी के लिए भी बाकी देशों की तुलना में लंबा इंतजार करना पड़ता है. आइए इसके पीछे के कारण जानते हैं.&amp;nbsp;
एडवांस देना होगा आधा पैसा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज से पाकिस्तान में नए आईफोन्स के लिए प्री-बुकिंग शुरू हो गई है. यहां नई सीरीज के चारों मॉडल के लिए ऑर्डर लिए जा रहे हैं. बता दें कि पाकिस्तान में ऐप्पल डायरेक्ट अपने आईफोन की बिक्री नहीं करती बल्कि यह का येलोस्टोन नाम के एक डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए किया जाता है. येलोस्टोन पाकिस्तान में अमेरिकी कंपनी का आधिकारिक पार्टनर है. आईफोन 17 सीरीज की बुकिंग के समय येलोस्टोन ने लोगों को कीमत का 50 प्रतिशत एडवांस में जमा कराने को कहा है. इसकी वजह यह है कि यहां स्टॉक लिमिटेड है, लेकिन नए मॉडल की मांग ज्यादा है.&amp;nbsp;
अगले महीने होगी डिलीवरी
ऐप्पल ने ऐलान किया है कि नए मॉडल्स 19 सितंबर से बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएंगे, लेकिन पाकिस्तान में ऐसा नहीं होने जा रहा. पाकिस्तानी ग्राहकों को नए मॉडल्स के लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पाकिस्तान में आईफोन 17 सीरीज के मॉडल्स की डिलीवरी अक्टूबर में शुरू होगी. 1 अक्टूबर से राजधानी इस्लामाबाद, कराची और लाहौर जैसे बड़े शहरों में डिलीवरी की शुरुआत होगी. इसके बाद छोटे शहरों के ग्राहकों को नए आईफोन डिलीवर किए जाएंगे. आईफोन 16 के समय की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए येलोस्टोन ने भरोसा दिलाया है कि नए आईफोन मॉडल्स पर ऐप्पल की वारंटी दी जाएगी.&amp;nbsp;
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<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 11:48:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>आधी से भी कम कीमत पर मिलेगा Google Pixel 9, यह कंपनी देगी छप्परफाड़ छूट, जरूर उठाएं मौके का फायदा</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप अगले कुछ दिनों में नया मोबाइल फोन खरीदना चाह रहे हैं तो आपके लिए शानदार मौका आने वाला है. 23 सितंबर से शुरू होने वाली फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डेज सेल में एक ऐसी डील आने वाली है, जिसे आप खोना नहीं चाहेंगे. कंपनी ने ऐलान कर दिया है कि सेल के दौरान Google Pixel 9 अपनी आधी से भी कम कीमत पर मिलने वाला है. ऐसे में 23 सितंबर तक का इंतजार आपको आधी कीमत में एक प्रीमियम फोन दिलवा सकता है. आइए फोन और इस डील के बारे में जानते हैं.
Google Pixel 9 में मिलते हैं ये फीचर्स
पिछले साल अगस्त में लॉन्च हुए Google Pixel 9 में कई दमदार फीचर्स मिलते हैं. इसमें 6.3 इंच का OLED डिस्प्ले दिया गया है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट HDR10+ को सपोर्ट करता है. स्क्रीन पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 की प्रोटेक्शन मिलती है. एल्युमिनियम फ्रेम और ग्लास फ्रंट/बैक के साथ आने वाले इस फोन की थिकनेस 8.5 mm है. इसमें Google Tensor G4 प्रोसेसर मिलता है, जिसे 12GB रैम से पेयर किया गया है. कैमरा की बात करें तो इसके रियर में 50MP+48MP के डुअल लेंस मिलते हैं. सेल्फी और वीडियो कॉल के इसके फ्रंट में 10.5MP कैमरा है. 4700 mAh की बैटरी के साथ आने वाला यह फोन रिवर्स वायरसेल चार्जिंग को भी सपोर्ट करता है.
आधी से भी कम कीमत पर मिलेगा Google Pixel 9&amp;nbsp;
23 सितंबर से शुरू होने वाली सेल में फ्लिपकार्ट पर भारी छूट देगी. कंपनी ने ऐलान किया है कि 79,999 रुपये की कीमत के साथ लॉन्च हुआ यह फोन 34,999 रुपये में उपलब्ध होगा. यह फोन 37,999 रुपये में लिस्ट किया जाएगा और ग्राहक इस पर ICICI बैंक क्रेडिट कार्ड से 2,000 रुपये और एक्सचेंज डिस्काउंट के तौर पर 1,000 रुपये की छूट ले सकेंगे. इस तरह उन्हें फोन के लिए सिर्फ 34,999 रुपये चुकाने होंगे.
OnePlus 13s 5G से है Google Pixel 9 का मुकाबला
भारतीय बाजार में Google Pixel 9 का मुकाबला OnePlus 13s 5G से है. OnePlus 13s 5G में 6.3 इंच की स्क्रीन मिलती है. इसमें क्वालकॉम का फास्टेस्ट Snapdragon 8 Elite चिसपेट मिलता है. 50MP + 50MP रियर कैमरा वाले इस फोन में&amp;nbsp;5850 mAh की बैटरी मिलती है. फ्लिपकार्ट पर यह फोन अभी 52,785 रुपये में उपलब्ध है.
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<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 11:48:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Elon Musk की चौंका देने वाली भविष्यवाणी, कहा&#45; अगले साल तक इस मामले में इंसानों से आगे निकल जाएगी AI</title>
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<description><![CDATA[ Tesla CEO Elon Musk ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक चौंका देने वाली भविष्यवाणी की है. उनका मानना है कि अगले साल यानी 2026 तक AI किसी आम इंसान से ज्यादा इंटेलिजेंट होगी. इससे भी चौंकाने वाली बात कहते हुए मस्क ने अनुमान लगाया है कि 2030 तक AI दुनिया के सारे इंसानों से ज्यादा समझदार और स्मार्ट होगी. बता दें कि मस्क से पहले भी कई एक्सपर्ट्स यह कह चुके हैं कि AI इंसानों को पीछे छोड़ देगी. कई लोगों ने तो यह भी आशंका जताई है कि AI जल्द ही इंसानों को कंट्रोल करने लगेगी.
तेजी से हो रहा AI का विकास&amp;nbsp;
पिछले कुछ समय से AI का तेजी से विकास हो रहा है. हर टेक कंपनी अपने AI मॉडल बनाने में जुटी है और सबकी कोशिश एक-दूसरे को पछाड़ने की है. मस्क ने यह नहीं बताया कि उनकी भविष्यवाणी किन फैक्टर्स पर आधारित है, लेकिन एजेंटिक AI और फिजिकल AI आदि में हो रहे डेवलपमेंट के चलते ये माना जा रहा है कि AI से जल्द ही इंसानों को कड़ी टक्कर मिलने वाली है. हाल ही में गूगल के चीफ साइंटिस्ट जेफ डीन ने कहा था कई आधुनिक AI मॉडल ऐसी स्टेज पर पहुंच चुके हैं, जिन्होंने कुछ नॉन-फिजिकल कामों में एक आम इंसान को पछाड़ दिया है.&amp;nbsp;
AI को लेकर मस्क ने लगाया था ये अनुमान
मस्क लगातार AI को लेकर आशावादी रहे हैं, लेकिन उन्होंने इसके तेज विकास पर चिंता भी जताई है. 2020 में मस्क ने कहा था कि अगले 5 सालों में इंसानों से ज्यादा आगे होगी. हालांकि, अभी तक उनकी यह भविष्यवाणी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है, लेकिन उसके कुछ संकेत मिलने लगे हैं. मस्क के बयान से पहले 2017 में आई MIT की एक स्टडी में कहा गया था कि इस बात के 50 प्रतिशत चांस हैं कि अगले 45 सालों में मशीनों में इंसानों के बराबर समझ आ जाएगी. वहीं ऐसा अगले 9 सालों में होने के 10 प्रतिशत चांस हैं.
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<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 11:48:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच दिल की धड़कन का पता कैसे लगा लेती है? ऐसे काम करती है टेक्नोलॉजी, जानें पूरा तरीका</title>
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<description><![CDATA[ आजकल स्मार्टवॉच में हार्ट रेट ट्रैकिंग फीचर मिलना आम बात हो गई है. स्मार्टवॉच के साथ-साथ स्मार्ट रिंग और अब तो एयरपॉड्स में भी यह फीचर आने लगा है. ऐसा माना जाता है कि हार्ट रेट से दिल के स्वास्थ्य का पता आसानी से लगाया जा सकता है. हार्ट रेट सामान्य होने का मतलब है कि आपका दिल ठीक तरीके से ब्लड को पंप कर रहा है और सभी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंच रही है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये डिवाइस हार्ट रेट का पता कैसे लगाते हैं? अगर नहीं तो चलिए आज इस सवाल का जवाब जानते हैं.
कैसे काम करती है यह टेक्नोलॉजी?
आपने गौर किया होगा कि स्मार्टवॉच के पीछे लगातार ग्रीन लाइट फ्लैश होती रहती है. लाइट के साथ ही एक ऑप्टिकल सेंसर लगा होता है. ग्रीन लाइट ही कलाई से आपकी हार्ट रेट का पता लगाती है. दरअसल, कलर व्हील पर लाल और हरा एक-दूसरे के बिल्कुल अपॉजिट होते हैं. इसलिए ब्लड ग्रीन लाइट को जल्दी अब्जॉर्ब कर लेता है. ब्लड से रिफ्लेक्ट होकर आने वाली लाइट को डिटेक्ट करने का काम ऑप्टिकल सेंसर का होता है.&amp;nbsp;
ऐसे लगता है हार्ट रेट का पता
लाइट के जरिए हार्ट रेट को मापने को कहा फोटोप्लेथिस्मोग्राफी (PSP) कहा जाता है. हर धड़कन के बाद हार्ट की मसल सिकुड़ जाती है. इससे नसों में दौड़ रहे खून की मात्रा बढ़ जाती है. जब मसल रिलैक्स होती है तो खून की मात्रा कम हो जाती है. खून की मात्रा बढने से जब नसें फूलती हैं तो ये ज्यादा ग्रीन लाइट अब्जॉर्ब करती हैं और जब ये रिलैक्स होती हैं तो अब्जॉर्ब होने वाली लाइट की मात्रा कम रह जाती है. नसों द्वारा लाइट अब्जॉर्ब करने के आधार पर सॉफ्टवेयर प्लस रेट का पता लगाता है और आपको स्मार्टवॉच पर हार्ट रेट मेजरमेंट दिखता है.
संभावित बीमारी का भी चल जाता है पता
आजकल कई कंपनियां नए डिवाइस और सॉफ्टवेयर में एडवांस एल्गोरिद्म का यूज कर रही हैं, जो पल्स रेट के आधार पर संभावित बीमारी का अंदाजा लगा सकती है. हालांकि, इनकी सटीकता अब भी परफेक्शन के लेवल पर नहीं पहुंची है और लोगों को नियमित तौर पर हेल्थ चेकअप कराने की सलाह दी जाती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Thu, 11 Sep 2025 11:48:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>कलाई, पर, बंधी, स्मार्टवॉच, दिल, की, धड़कन, का, पता, कैसे, लगा, लेती, है, ऐसे, काम, करती, है, टेक्नोलॉजी, जानें, पूरा, तरीका</media:keywords>
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<title>iPhone 17: कहां मिलेगा सबसे सस्ता और कहां चुकानी पड़ेगी सबसे ज्यादा कीमत</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17: कहां मिलेगा सबसे सस्ता और कहां चुकानी पड़ेगी सबसे ज्यादा कीमत ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 के ये टॉप फीचर्स बना देंगे दीवाना, बाकी स्मार्टफोन्स की कर दी छुट्टी</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल ने बीती रात हुए इवेंट में आईफोन 17 सीरीज को लॉन्च कर दिया है. इसका स्टैंडर्ड मॉडल आईफोन 17 है. हर साल की तुलना में इस बार कंपनी ने स्टैंडर्ड मॉडल में बेहतरीन अपडेट दी है. इसमें ब्राइटर डिस्प्ले, फास्टर चिप और पहले की तुलना में बड़ी बैटरी दी गई है. खास बात यह है कि इतनी अपडेट्स के बावजूद कंपनी ने इसकी कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की है. आइए इस फोन के टॉप फीचर्स के बारे में जानते हैं.&amp;nbsp;
ब्राइटर डिस्प्ले&amp;nbsp;ऐप्पल ने नई लाइनअप के स्टैंडर्ड मॉडल में भी ProMotion टेक्नोलॉजी और ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले दिया है. ये दोनों फीचर्स अभी से पहले केवल प्रो मॉडल्स में मिलते थे. इसके अलावा ऐप्पल ने इस बार डिस्प्ले साइज को भी 6.1 इंच से बढ़ाकर 6.3 इंच कर दिया है. आउटडोर में बेहतर विजिबिलिटी के लिए इसके डिस्प्ले पर एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग दी गई है. साथ ही स्क्रैच से बचाने के लिए डिस्प्ले पर सेरेमिक शील्ड 2 की प्रोटेक्शन मिलेगी.
नया A19 चिपसेट
परफॉर्मेंस के बेहतर करने के लिए ऐप्पल 17 में A19 चिप और 6 कोर CPU दिया है. यह आईफोन 13 की तुलना में दोगुना और आईफोन 15 की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक तेजी से काम करेगा. इस फोन में ऐप्पल का इन-हाउस N1 वाईफाई और ब्लूटूथ मॉडम दिया गया है, जो इसकी वायरलेस कनेक्टिविटी परफॉर्मेंस को बेहतर करेगा.&amp;nbsp;
नया सेल्फी कैमरा
आईफोन मॉडल हमेशा से शानदार कैमरा क्वालिटी के लिए जाने जाते हैं और आईफोन 17 ने भी इस बार निराश नहीं किया है. इसके रियर में 48MP का फ्यूजन कैमरा है और यह मॉडल एक साथ फ्रंट और रियर कैमरा से वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करेगा. सेल्फी कैमरा के लिए ऐप्पल ने पहली बार स्क्वेयर शेप का सेंसर दिया है, जो फोन को रोटेट किए बिना भी यूजर को हर ओरिएंटेशन से सेल्फी लेने की सहूलितय देगा.&amp;nbsp;
कीमत में भी ज्यादा बदलाव नहीं
नई और दमदार अपग्रेड्स के बावजूद ऐप्पल ने नई लाइनअप के दामों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं की है. आईफोन 17 के बेस वेरिएंट को भारत में 82,900 रुपये में खरीदा जा सकता है. हालांकि, पिछले साल की तुलना में यह लगभग 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी है, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोर होती स्थिति के कारण माना जा रहा था कि इसकी कीमत 85,000 से ऊपर जा सकती है.
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या आपके घर में भी Wifi के पास हैं ये चीजें तो तुरंत हटा लीजिए, 99 % लोगों को नहीं मालूम वरना क्या होगा, जानिए</title>
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<description><![CDATA[ क्या आपके घर में भी Wifi के पास हैं ये चीजें तो तुरंत हटा लीजिए, 99 % लोगों को नहीं मालूम वरना क्या होगा, जानिए ]]></description>
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इन बातों का रखेंगे ध्यान तो कोई नहीं चुरा पाएगा डेटा, हैकिंग और साइबर अपराधों से बचना होगा आसान</title>
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<description><![CDATA[ आजकल साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है और आम यूजर से लेकर बड़ी से बड़ी कंपनियां भी इसका शिकार हो रही हैं. हैकिंग और दूसरे क्राइम के जरिए अटैकर्स ने सिर्फ यूजर्स की प्राइवेट जानकारी चुराते हैं बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान भी पहुंचाते हैं. इसके चलते इंटरनेट और मोबाइल आदि यूज करते समय कई सावधानियां बरतने की जरूरत होती है. आइए आज हैकिंग और दूसरे साइबर अपराधों से बचने की कुछ जरूरी टिप्स जानते हैं.
स्ट्रॉन्ग पासवर्ड सेट करें
साइबर अपराधी और हैकर्स अधिकतर उन अकाउंट्स को निशाना बनाते हैं, जिनके पासवर्ड कमजोर होते हैं. इसलिए बैंकिंग ऐप्स से लेकर सोशल मीडिया ऐप्स तक, हमेशा मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करें. जहां उपलब्ध हों, वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को इनेबल कर लें. यह सिक्योरिटी की एक और परत देती है, जिसे भेद पाना हैकर्स के लिए मुश्किल होता है.
ब्राउंजिंग करते समय बरतें सावधानी
इंटरनेट पर ब्राउंजिंग करते समय थोड़ी सावधानी आपको बड़ी दिक्कत से बचा सकती है. अगर किसी URL की शुरुआत में &quot;https://&quot; आ रहा है तो इसका मतलब है कि यह एनक्रिप्टेड कनेक्शन है. HTTPS ट्रांजिट के दौरान डेटा को एनक्रिप्ट कर देता है, जबकि HTTP ऐसा नहीं करता. इसलिए पब्लिक वाईफाई में इस बात का खास ध्यान रखें. अगर किसी साइट पर बार-बार पॉप-अप खुल रहे हैं या कुछ अनएक्सपेक्टेड फाइल डाउनलोड हो रही है तो उस पर जाने से बचें.&amp;nbsp;
नियमित तौर पर लें डेटा का बैकअप
मोबाइल और दूसरे डिवाइसेस में स्टोर अपने डेटा का नियमित तौर पर बैकअप लेते रहना जरूरी है. रैंसमवेयर या दूसरे अटैक के समय यह आपको बड़े नुकसान से बचा सकता है. हैकिंग या डिवाइस खराब होने पर बैकअप की मदद से आप डेटा रिस्टोर कर सकते हैं. इसलिए बैकअप को ऑटोमैटिक पर सेट कर दें.&amp;nbsp;
ऐप्स को गैर-जरूरी परमिशन न दें
हमेशा ऑफिशियल सोर्स से ही ऐप्स डाउनलोड करें. इसके साथ इस बात का भी ध्यान रखें कि ऐप्स को गैर-जरूरी परमिशन न दें. कई बार ऐप्स परमिशन के जरिए हैकर्स आपके डिवाइस तक पहुंच बना सकते हैं. इसलिए हमेशा ऐप्स परमिशन को रिव्यू करते रहें और अपनी जरूरत के हिसाब से उन्हें डेटा एक्सेस करने की परमिशन दें.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Android Smartphone में बार&#45;बार चार्जिंग का झंझट बढ़ाता है यह फीचर, ऑन रखा तो तुरंत खाली हो जाएगी बैटरी</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone में लोकेशन सर्विस इनेबल रखना जरूरी-सा हो गया है. नेविगेशन ऐप्स से लेकर कैमरा ऐप तक लोकेशन की जरूरत पड़ती है. इससे फोन को यूज करना आसान हो जाता है. हालांकि, लोकेशन सर्विस के कारण फोन की बैटरी लाइफ पर बहुत बुरा असर पड़ता है. लोकेशन सर्विस इनेबल रहने की बैटरी तो जल्दी खत्म होती ही है, साथ ही डेटा यूज पर भी काफी फर्क पड़ता है. आइए आज जानते हैं कि फोन में लोकेशन ऑन रखने से बैटरी और डेटा यूज पर क्या-क्या असर होता है.
लोकेशन चेक करते रहने से जल्दी डिस्चार्ज होती है बैटरी
कई बार सफर के दौरान बार-बार लोकेशन चेक करनी पड़ती है. इस कारण GPS चिप बार-बार एक्टिव होती है, जिससे बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है. लोकेशन चेक करने के दौरान GPS चिप को एडिशनल कंप्यूटिंग करनी पड़ती है और इसका सीधा असर बैटरी पर होता है.
सटीक लोकेशन के लिए चाहिए ज्यादा बैटरी पावर
फोन को सटीक लोकेशन पता करने के लिए ज्यादा बैटरी पावर की खपत करनी पड़ती है. आप फोन पर जितनी एक्यूरेट लोकेशन देखना चाहेंगे, इसकी बैटरी उतना जल्दी डिस्चार्ज होगी. इसकी वजह है कि सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए फोन के GPS के साथ-साथ ब्लूटूथ, वाईफाई और मोबाइल नेटवर्क काम करते हैं. ये सारे मिलकर बैटरी की ज्यादा खपत करते हैं.
लोकेशन एक्सेस के कारण अवेक रहती हैं ऐप्स
अगर आपने किसी ऐप को हर समय के लिए लोकेशन Allow कर दी है तो इसका मतलब है कि यह ऐप बैकग्राउंड में भी एक्टिव रहेगी. यह ऐप यूज न होने पर भी लोकेशन को ट्रैक करती रहेगी. इससे सिस्टम स्लीप मोड पर नहीं जा पाता और लगातार बैटरी की खपत करते रहता है. बैटरी के साथ-साथ इसमें मोबाइल डेटा भी यूज होता है.
नेविगेशन ऐप्स यूज करती हैं एक्स्ट्रा डेटा
गूगल मैप्स जैसी नेविगेशन ऐप्स को काम करने के लिए एक्स्ट्रा डेटा की जरूरत पड़ती है. दरअसल, ये लोकेशन पता करने के लिए न सिर्फ GPS यूज करती हैं बल्कि ट्रैफिक इंफो के लिए लगातार सर्वर कम्युनिकेट करती रहती हैं. लाइव ट्रैफिक अपडेट, वॉइस गाइडेंस और सैटेलाइट व्यू आदि के लिए तो इन ऐप्स को और एक्स्ट्रा डेटा की जरूरत पड़ती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>सिर्फ नेपाल ही नहीं, पाकिस्तान और चीन समेत इन देशों में भी लग चुका है सोशल मीडिया पर बैन, जानें कारण</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल में सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगाने के बाद भारी विरोध प्रदर्शन शुरु हो गया जिसनें अब हिंसक रूप ले लिया है. सरकार ने नियम न मानने का हवाले देते हुए फेसबुक, यूट्यूब और व्हाट्सऐप समेत कई सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिए थे. इसके बाद देशभर में हुए हिंसक प्रदर्शनों में 20 लोगों की मौत हो गई और 300 घायल हुए हैं. यह पहली बार नहीं है, जब किसी देश ने सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाई है. इससे पहले भी कई देश ऐसा कर चुके हैं. आइए इन देशों की लिस्ट पर एक नजर डालते हैं.
चीन
2009 में शिनजियांग प्रांत में हुए दंगों के बाद चीनी सरकार ने फेसबुक, एक्स और गूगल जैसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया था. सरकार ने पॉलिटिकल कंट्रोल बनाए रखने, सरकार विरोधी जानकारी को लोगों तक पहुंचने से रोकने और कथित तौर पर अपने नागरिकों को विदेशी प्रभाव से बचाए रखने के लिए यह प्रतिबंध लगाया था. विदेशी ऐप्स पर यह बैन अभी तक जारी है और यहां केवल लोकल कंपनियों की ऐप्स यूज की जा सकती हैं.
ईरान
ईरान में भी 2009 से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पाबंदी लगी हुई है और यहां फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसी ऐप्स को एक्सेस नहीं किया जा सकता. सरकार विरोधी आंदोलनों के परिणामस्वरूप यह पाबंदी लगाई गई थी. हालांकि, यह बैन पूरी तरह कामयाब नहीं हो सका और अब यहां लोग VPN के जरिए सोशल मीडिया ऐप्स यूज कर रहे हैं.
तुर्किये
तुर्किये ने भी आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा के नाम पर फेसबुक, यूट्यूब और विकीपीडिया जैसी ऐप्स पर पाबंदी लगाई थी. 2014 में लगाया गया यह बैन 2016 में हटाना पड़ा. यह अस्थाई बैन साबित हुआ और सरकार को बाद में अपना फैसला वापस लेना पड़ा.
मिस्र
मिस्र में 2011 में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे और इसे अरब स्प्रिंग के नाम से जाना जाता है. कई लोग इसे सोशल मीडिया के जरिए आया पहला बड़ा बदलाव मानते हैं. देशभर में हुए इस प्रदर्शन के कारण वहां की सरकार गिर गई थी. इसके बाद यहां सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया.
पाकिस्तान
भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी 2021 से लेकर 2011 तक यूट्यूब, एक्स और टिकटॉप पर पाबंदी रही थी. पाकिस्तान सरकार ने धार्मिक भावनाओं को आहत करने और अश्लीलता फैलाने के आरोपों पर कार्रवाई करते हुए इन प्लेटफॉर्म्स को बैन कर दिया था. हालांकि, बाद में यह फैसला वापस लेना पड़ा.
रूस
2022 में यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू के बाद रूस ने फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत कई ऐप्स को बैन कर दिया था. रूस का कहना था कि ये ऐप्स युद्ध प्रोपेगेंडा को बढ़ावा दे रही हैं. अब इनकी जगह लोकल ऐप्स को प्रमोट किया जा रहा है.
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>स्मार्टफोन का हो जाएगा अंत? आने वाली है ऐसी तकनीक जिसे देख सभी हो जाएंगे हैरान, जानिए सबकुछ</title>
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<description><![CDATA[ AI New Technology: आज के समय में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. हर साल कंपनियां नए मॉडल लॉन्च करती हैं जिनमें कभी पतली बॉडी तो कभी तेज प्रोसेसर जैसे बदलाव देखने को मिलते हैं. लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया में अब एक बड़ा बदलाव सामने आने वाला है. दिग्गज कंपनियां मान रही हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जल्द ही स्मार्टफोन की जगह ले सकती है और हमारे निजी डिजिटल असिस्टेंट के रूप में उभर सकती है.
बदलती दुनिया में AI की भूमिका
अब तक हम फोन खोलकर ऐप्स का इस्तेमाल करते थे कॉल, मैसेजिंग, शॉपिंग, नोट्स या मीटिंग्स के लिए. लेकिन नई AI तकनीक इन सबको हमारे लिए अपने आप कर सकेगी. हमें न तो बार-बार स्क्रीन पर स्वाइप करना होगा और न ही कीबोर्ड पर टाइप करना. Qualcomm के अधिकारी एलेक्स कटूज़ियन के मुताबिक, आने वाले समय में फोन का ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स बैकग्राउंड में चले जाएंगे और AI असिस्टेंट सब कुछ खुद मैनेज करेगा.
स्मार्ट ग्लासेस
Meta और Google जैसी कंपनियां स्मार्ट ग्लासेस पर काम कर रही हैं. ये चश्मे हमारे आसपास की चीजों को देख और समझ सकेंगे, साथ ही AI असिस्टेंट से हमें तुरंत जानकारी दे पाएंगे. उदाहरण के तौर पर, अगर आप किसी ऐतिहासिक जगह पर हैं तो बस पूछने पर ये ग्लासेस आपको सारी जानकारी बता देंगे. Meta ने अपने Ray-Ban Meta ग्लासेस में AI को जोड़कर इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है. हालांकि बैटरी और डिज़ाइन जैसी चुनौतियां अभी भी बाकी हैं.
एम्बियंट कंप्यूटर
Amazon के अनुसार, आने वाले समय में घर और दफ्तरों में ऐसे डिवाइस होंगे जो हर समय हमारे लिए काम करेंगे. Alexa+ जैसे असिस्टेंट बातचीत के दौरान तुरंत जवाब दे सकेंगे, बिना स्क्रीन देखे. इस तरह स्मार्टफोन पर बार-बार नोटिफिकेशन चेक करने की आदत भी खत्म हो सकती है.
स्मार्टवॉच का नया रूप
Nothing कंपनी के CEO कार्ल पेई का मानना है कि स्मार्टवॉच को पूरी तरह AI से लैस किया जाएगा. यह न सिर्फ फिटनेस ट्रैक करेगी, बल्कि आपकी मीटिंग्स शेड्यूल करने, दोस्तों से मिलने का प्लान बनाने और कामों को अपने आप मैनेज करने लगेगी. इसे वे &quot;स्मार्टवॉच रीइमैजिन्ड&quot; कह रहे हैं.
मेमोरी रिकॉर्डर
Limitless AI जैसी कंपनियां ऐसे वियरेबल डिवाइस बना रही हैं जो हमारी बातचीत रिकॉर्ड करके ऑटोमैटिक नोट्स बना देंगे. ये डिवाइस हमें याद दिला सकते हैं कि हमने किससे क्या वादा किया था या बच्चों के साथ कैसे बेहतर व्यवहार करना चाहिए. हालांकि, गोपनीयता से जुड़े सवाल इन डिवाइसों की स्वीकार्यता को धीमा कर सकते हैं.
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 16 या iPhone 17! क्या नया फोन खरीदना होगा फायदेमंद या पुराने मॉडल को करते रहें इस्तेमाल? यहां जानें पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 16 vs iPhone 17: Apple ने हाल ही में iPhone 17 सीरीज़ लॉन्च कर दी है, जिसकी शुरुआती कीमत 82,900 रुपये रखी गई है. इसके आते ही लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उन्हें नया iPhone 17 लेना चाहिए या फिर डिस्काउंटेड प्राइस पर उपलब्ध iPhone 16 ही सही विकल्प होगा. आइए जानते हैं दोनों मॉडलों के बीच के फर्क और आपके लिए कौन-सा खरीदना बेहतर रहेगा.
कीमत का अंतर
iPhone 16 की लॉन्चिंग कीमत भले ही ज्यादा थी लेकिन अब iPhone 17 आने के बाद इसका दाम गिरकर लगभग 69,900 रुपये हो गया है. वहीं, iPhone 17 का बेस मॉडल 82,900 रुपये से शुरू होता है और इसके Pro तथा Pro Max वेरिएंट्स इससे भी ज्यादा महंगे हैं. ऐसे में अगर आपका बजट टाइट है और आप 13 से 15 हजार रुपये बचाना चाहते हैं तो iPhone 16 अब भी एक किफायती सौदा साबित हो सकता है.
डिस्प्ले और विज़ुअल अनुभव
iPhone 16 में साधारण OLED डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें ProMotion सपोर्ट मौजूद नहीं है. वहीं, iPhone 17 में 6.3 इंच का ProMotion OLED डिस्प्ले मिलता है जो 120Hz रिफ्रेश रेट, 3000 निट्स ब्राइटनेस और Always-On डिस्प्ले जैसी खूबियों के साथ आता है. अगर आप स्मूद एनीमेशन और आउटडोर में बेहतर विज़िबिलिटी चाहते हैं तो iPhone 17 साफतौर पर बेहतर है.
परफॉर्मेंस और स्पीड
iPhone 16 में A18 चिप का इस्तेमाल किया गया है, जो स्टेबल परफॉर्मेंस देता है. जबकि iPhone 17 A19 चिप और नए N1 नेटवर्किंग चिप (Wi-Fi 7 और Bluetooth 6 सपोर्ट) के साथ आता है. कंपनी के अनुसार, इसमें लगभग 20% तेज परफॉर्मेंस मिलती है जो आने वाले ऐप्स और AI फीचर्स के लिए इसे ज्यादा फ्यूचर-रेडी बनाता है.
बैटरी और चार्जिंग
iPhone 17 को लेकर दावा है कि यह iPhone 16 से लगभग 8 घंटे ज्यादा वीडियो प्लेबैक देता है. साथ ही, यह 20 मिनट में ही 50% तक चार्ज हो जाता है. iPhone 16 की बैटरी बैकअप भी ठीक है लेकिन लंबी रेस में iPhone 17 इसे पीछे छोड़ देता है.
कैमरा अपग्रेड्स
iPhone 16 में बेहतरीन कैमरा क्वालिटी मिलती है लेकिन iPhone 17 में इसे और बेहतर किया गया है. इसमें 48MP Dual Fusion सिस्टम (वाइड + अल्ट्रा-वाइड) और 18MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है जो Centre Stage और Dual Capture फीचर सपोर्ट करता है. खासकर कम रोशनी में और मल्टी-एंगल शॉट्स के लिए iPhone 17 ज्यादा मजबूत विकल्प है.
भारतीय यूजर्स के लिए नतीजा
अगर आपका बजट सीमित है और आप ज्यादा फीचर्स की कमी से समझौता कर सकते हैं तो iPhone 16 अभी भी 69,900 रुपये में एक दमदार और वैल्यू-फॉर-मनी फोन है. लेकिन अगर आप भविष्य के लिए तैयार रहना चाहते हैं और आपको स्मूद डिस्प्ले, ज्यादा स्पीड, लंबी बैटरी लाइफ और बेहतर कैमरा चाहिए तो iPhone 17 में किया गया निवेश पूरी तरह सही साबित होगा.
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>iPhone, या, iPhone, 17, क्या, नया, फोन, खरीदना, होगा, फायदेमंद, या, पुराने, मॉडल, को, करते, रहें, इस्तेमाल, यहां, जानें, पूरी, जानकारी</media:keywords>
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<title>जेन जी प्रोटेस्ट का असर, इंस्टाग्राम पर घट गए पूर्व मिस नेपाल के फॉलोअर्स, इस वजह से गुस्सा हैं लोग</title>
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<description><![CDATA[ नेपाल में जारी बवाल के बीच पूर्व मिस नेपाल श्रृंखला खतिवड़ा के इंस्टाग्राम पर लगभग एक लाख फॉलोअर्स कम हो गए हैं. दरअसल, नेपाल में &#039;नेपो बेबीज&#039; को लेकर लोगों का गुस्सा चरम पर हैं. 2018 में ब्यूटी खिताब जीतने वाली खतिवड़ा ने इस प्रोटेस्ट पर चुप्पी साधे रखी थी. इससे नाराज लोग लगातार सोशल मीडिया पर उन्हें अनफॉलो करते जा रहे हैं. आइए, यह पूरा मामला समझते हैं.
नेपाल में क्यों हुआ बवाल?
हाल ही में नेपाल सरकार ने देश में फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. करप्शन के कारण सरकार के खिलाफ भड़के बैठे युवाओं के लिए इस फैसले ने चिंगारी का काम किया और लोग सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया. विरोध प्रदर्शन में करीब 20 लोगों की मौत हुई है और 300 लोग घायल हुए हैं. इस बीच प्रधानमंत्री ने इस्तीफा सौंप दिया है.&amp;nbsp;
&#039;नेपो बेबी&#039; पर गुस्सा क्यों?
सोशल मीडिया ऐप्स पर बैन लगने से पहले लोग देश के अमीर और शक्तिशाली परिवारों के बच्चों की आलोचना करते हुए उनके वीडियो शेयर कर रहे थे. सोशल मीडिया यूजर्स इस बात से नाराज थे कि ये लोग देश के आम लोगों के टैक्स के पैसे पर ऐश कर रहे हैं. श्रृंखला का नाम भी लोग इन &#039;नेपो बेबीज&#039; में ले रहे थे. श्रृंखला नेपाल के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बिरोध खतिवड़ा की बेटी हैं. उनकी मां भी बागमती प्रांत की राज्य संसद की सदस्य है.&amp;nbsp;
2018 में श्रृंखला ने जीता था खिताब
श्रृंखला ने 2018 में मिस नेपाल का खिताब जीता था. बाद में वो मिस वर्ल्ड की प्रतियोगिता में भी हिस्सा लेने गई और यहां वो टॉप 12 में पहुंचने में सफल रही थी. नेपाल में जेन जी प्रोटेस्ट शुरू होने से पहले इंस्टाग्राम पर उनके 10 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे, लेकिन अब इनकी संख्या लगातार घटती जा रही है. उनके फॉलोअर्स का कहना है कि श्रृंखला को इस प्रोटेस्ट का समर्थन करना था, लेकिन उन्होंने चुप्पी बनाए रखी. 27 अगस्त को इंस्टाग्राम पर उनके 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे, लेकिन 9 सितंबर तक इनमें लगभग एक लाख की कमी आ गई.
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>जेन, जी, प्रोटेस्ट, का, असर, इंस्टाग्राम, पर, घट, गए, पूर्व, मिस, नेपाल, के, फॉलोअर्स, इस, वजह, से, गुस्सा, हैं, लोग</media:keywords>
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<title>iPhone 17 Series की लॉन्चिंग के बाद Samsung ने उड़ाया Apple का मजाक, कह दी ये बड़ी बात</title>
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<description><![CDATA[ टेक कंपनियों के बीच लगातार टक्कर चलती रहती है. दक्षिण कोरियाई कंपनी ने आईफोन 17 सीरीज की लॉन्च के बाद ऐप्पल का मजाक उड़ाया है. दरअसल, सैमसंग अपने फोन्स में कुछ ऐसे फीचर्स कई सालों से दे रही है, जो ऐप्पल ने अपनी लेटेस्ट आईफोन सीरीज में दिए हैं. इसी तरह फोल्डेबल फोन सेगमेंट में सैमसंग ने अपनी जगह मजबूत कर ली है, लेकिन ऐप्पल ने अभी तक कोई भी फोल्डेबल फोन नहीं उतारा है. इसे लेकर सैमसंग ने ऐप्पल पर तंज कसा है. आइए जानते हैं कि सैमसंग ने कैसे ऐप्पल पर तंज कसे हैं.
सैमसंग ने उड़ाया मजाक
आईफोन 17 सीरीज की लॉन्च के बाद सैमसंग ने अपनी 3 साल पुरानी एक पोस्ट को रिपोस्ट किया है. ऐप्पल ने 2022 में आईफोन 14 सीरीज लॉन्च की थी. इसे लेकर सैमसंग ने एक्स पर पोस्ट किया था, &#039;हमें बताना जब ये फोल्ड होने लगे.&#039; दरअसल, 2022 से पहले ही सैमसंग फोल्डेबल फोन मार्केट में उतार चुकी थी. अब आईफोन 17 की लॉन्च के बाद सैमसंग ने इसे रिपोस्ट करते हुए लिखा, &#039;यकीन नहीं हो रहा कि यह अब भी रेलिवेंट है.&#039;

#iCant believe this is still relevant. 💀 https://t.co/s6SFaLTRSJ
&amp;mdash; Samsung Mobile US (@SamsungMobileUS) September 9, 2025



कैमरा कैपेबिलिटीज पर भी कसा तंज
ऐप्पल ने आईफोन 17 प्रो मॉडल्स को 48MP+48MP+48MP के रियर कैमरा सेटअप से लैस किया है. इसे लेकर भी सैमसंग ने अमेरिकी कंपनी का मजाक उड़ाया है. सैमसंग ने अपनी पोस्ट में लिखा कि 48MP x 3 मिलकर भी 200MP के बराबर नहीं है. ध्यान दिला दें कि सैमसंग के फ्लैगशिप डिवाइस में 200MP का प्राइमरी कैमरा मिलता है. इसी तरह ऐप्पल ने अपनी लेटेस्ट ऑफरिंग में हेल्थ फीचर के तौर पर स्लीप स्कोर को शामिल किया है. इसे लेकर भी सैमसंग खुश नहीं दिख रही. सैमसंग ने लिखा कि भरोसा नहीं हो रहा कि कुछ लोगों को स्लीप स्कोर के लिए भी पांच साल तक इंतजार करना पड़ा है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Wed, 10 Sep 2025 18:33:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Elon Musk के लिए Tesla ने खोल दिया कुबेर का भंडार, ये काम कर दिया तो होगी पैसे की बारिश, बनेंगे पहले ट्रिलियनेयर</title>
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<description><![CDATA[ इलेक्ट्रिक कारें बनाने वाली कंपनी Tesla के बोर्ड ने कंपनी के सीईओ Elon Musk के लिए बहुत बड़े पैकेज का प्रस्ताव रखा है. अगर मस्क को यह पैकेज मिलता है तो वो दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन जाएंगे. हालांकि, इसके लिए बोर्ड ने उनके सामने कई बड़े लक्ष्य रखे हैं. इन लक्ष्यों को प्राप्त करने पर मस्क इस पैकेज को पाने के हकदार होंगे. यह पैकेज एक ट्रिलियन डॉलर का होगा. इस पैकेज में मस्क अगले लगभग एक दशक के दौरान टेस्ला के 423 मिलियन शेयर पाने के हकदार भी होंगे.
मस्क के लिए क्या लक्ष्य रखा गया है?
टेस्ला के बोर्ड ने मस्क के सामने पहाड़ जैसा लक्ष्य रखा है. अगर मस्क कंपनी की मार्केट वैल्यू को 8.5 ट्रिलियन डॉलर (आज की तुलना में 8 गुना और किसी भी कंपनी के रिकॉर्ड से दोगुना) कर देते हैं तो उन्हें यह पैकेज मिल जाएगा. अभी कंपनी की वैल्यू 1.1 ट्रिलियन डॉलर की है. यह पैकेज पाने के लिए उन्हें कम से कम 7.5 साल तक कंपनी की सीईओ पद पर रहना होगा. साथ ही एक मिलियन ऑटोनोमस टैक्सीज, एक मिलियन रोबोट का डिप्लॉयमेंट और कंपनी के मुनाफे में 24 गुना इजाफा करना होगा.&amp;nbsp;
कंपनी ने क्या कहा?
टेस्ला के बोर्ड ने कहा कि केवल मस्क के पास ही कंपनी को बदलने और इसके लॉन्ग-टर्म मिशन को पूरा करने के लिए जरूरी लीडरशिप है. बता दें कि टेस्ला को इस बात चिंता है कि मस्क अपना समय स्पेसएक्स, स्टारलिंक, xAI और दूसरे राजनीतिक कार्यक्रमों में दे रहे हैं. इसके चलते कंपनी ने पिछले साल उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को सीईओ पद सौंपने पर विचार किया था. इसके बाद मस्क ने भरोसा दिया कि वह अपना पूरा समय और ध्यान टेस्ला पर केंद्रित करेंगे.
अभी कितनी है मस्क की संपत्ति?
मस्क पहले ही 400 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं. अगर उन्हें टेस्ला का प्रस्तावित पैकेज मिलता है तो उनकी संपत्ति में 900 बिलियन डॉलर का और इजाफा हो जाएगा. यह इतिहास में किसी भी सीईओ को मिलने वाला सबसे बड़ा पैकेज होगा. ऐसा होने पर मस्क के पास टेस्ला की 29 प्रतिशत हिस्सेदारी हो जाएगी.
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एक लाख व्यूज पर कितना पैसा देता है इंस्टाग्राम, हैरान कर देगा जवाब</title>
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<description><![CDATA[ आज के समय में सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा करियर ऑप्शन बन चुका है. खासकर इंस्टाग्राम पर लाखों लोग रोजाना कंटेंट बनाते हैं. इसके जरिए लोग लाखों की कमाई कर रहे हैं. हालांकि सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि इंस्टाग्राम एक मिलियन व्यूज पर कितना पैसा देता है?
क्या इंस्टाग्राम सीधे पैसे देता है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इंस्टाग्राम सीधे &amp;ldquo;views&amp;rdquo; के पैसे नहीं देता. मतलब अगर आपकी किसी रील पर 1 मिलियन व्यू आ भी जाएं, तो इंस्टाग्राम आपको सिर्फ व्यूज के लिए पैसा नहीं देगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कमाई का कोई रास्ता नहीं है. इंस्टाग्राम ने कई ऐसे टूल्स दिए हैं जिनसे क्रिएटर्स पैसा कमा सकते हैं.
कमाई करने के तरीके
बैज(लाइव वीडियो पर) - जब आप इंस्टाग्राम पर लाइव आते हैं, तो आपके फॉलोअर्स बैज खरीदकर आपको सपोर्ट कर सकते हैं. यह बैज सीधे पैसे में बदल जाते हैं.
सब्सक्रिप्शन (प्रीमियम कंटेंट) - अगर आपके पास इंस्टाग्राम पर 10,000 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं तो आप सब्सक्रिप्शन ऑन कर सकते हैं. इसमें लोग हर महीने पैसे देकर आपका एक्सक्लूसिव कंटेंट देख सकते हैं.
गिफ्ट्स (Reels पर) - इंस्टाग्राम ने गिफ्ट्स का फीचर दिया है, जिसमें फॉलोअर्स आपकी रील देखकर वर्चुअल गिफ्ट भेजते हैं. ये गिफ्ट्स पैसे में बदल जाते हैं.
बोनस - इंस्टाग्राम समय-समय पर क्रिएटर्स को बोनस भी ऑफर करता है. यह बोनस आपके कंटेंट और एंगेजमेंट पर निर्भर करता है.
ब्रांड स्पॉन्सरशिप और पेड कंटेट - इंस्टाग्राम पर ब्रांड और पेड कंटेट सबसे बड़ा कमाई का रास्ता है. ब्रांड्स अपने प्रोडक्ट या सर्विस को प्रमोट कराने के लिए क्रिएटर्स को मोटी रकम देते हैं.
1 मिलियन व्यूज पर कितनी कमाई?
औसतन देखा जाए तो 1 मिलियन व्यूज से आपकी कमाई 500 डॉलर (लगभग 40,000 रुपये) से लेकर 10,000 डॉलर (लगभग 8 लाख रुपये) तक हो सकती है. यह फर्क इसलिए है क्योंकि कोई क्रिएटर सिर्फ बैज और गिफ्ट्स से कमाता है, तो कोई ब्रांड डील और स्पॉन्सरशिप से लाखों कमा लेता है.
तो सीधी बात यह है कि इंस्टाग्राम व्यूज के पैसे नहीं देता, लेकिन 1 मिलियन व्यूज आपके लिए कमाई का दरवाजा जरूर खोल सकते हैं. अगर आपके पास यूनिक कंटेंट और फॉलोअर्स हैं, तो ब्रांड्स खुद आपको अप्रोच करेंगे. इसलिए सिर्फ व्यूज के पीछे भागने से ज्यादा जरूरी है कि आप अपने कंटेंट की क्वालिटी और ऑडियंस एंगेजमेंट पर ध्यान दें. ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>नेपाल कौन&#45;कौन से सोशल मीडिया ऐप बैन, क्यों लगाया गया प्रतिबंध, जानिए देश में हो रहे बवाल की पूरी कहानी</title>
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<description><![CDATA[ Social Media Ban in Nepal: नेपाल में सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ जनरेशन जेड (Gen Z) के युवाओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. विरोध प्रदर्शनों के दौरान हालात बिगड़ने पर झड़पें हुईं, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और करीब 80 लोग घायल हो गए.
नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ जनरेशन जेड (Gen Z) के युवा बड़े पैमाने पर विरोध कर रहे हैं. जो आंदोलन पहले ऑनलाइन शुरू हुआ था, वह सोमवार को सड़कों तक फैल गया. संसद भवन के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प में सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की &amp;nbsp;जिसमें एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और 80 से अधिक लोग घायल हुए.
काठमांडू में हजारों युवाओं का जमावड़ा
काठमांडू की सड़कों पर हजारों छात्र-युवा उतर आए, जिसे अब &quot;Gen Z रिवोल्यूशन&quot; कहा जा रहा है. प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर प्रतिबंधित क्षेत्रों में घुसने की कोशिश की. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई जगहों पर फायरिंग की गई. हालात काबू से बाहर होते देख प्रशासन ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों, खासकर संसद क्षेत्र में कर्फ्यू लागू कर दिया.
विरोध की असली वजह
सरकार ने 4 सितंबर को फेसबुक, ट्विटर (X), व्हाट्सऐप, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा दिया था. कारण यह बताया गया कि इन कंपनियों ने नेपाल के सूचना और संचार मंत्रालय में रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था. सरकार का कहना है कि यह कदम केवल &quot;नियमों के पालन&quot; के लिए है &amp;nbsp;लेकिन युवाओं और विपक्षी दलों का मानना है कि यह असहमति की आवाज़ दबाने की कोशिश है.
इंटरनेट बंदी के बीच भी आवाज़ बुलंद
सरकार ने हालात बिगड़ने पर इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क पर रोक लगाने की कोशिश की &amp;nbsp;लेकिन युवाओं ने विकल्प के तौर पर TikTok और Reddit जैसे प्लेटफ़ॉर्म का सहारा लिया. हजारों छात्र अपने स्कूल और कॉलेज की वर्दी में झंडे और पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे. उनके नारे थे &amp;ldquo;हमारी स्वतंत्र आवाज़ हमारा अधिकार है&amp;rdquo; और &amp;ldquo;टैक्सपेयर्स का पैसा आखिर गया कहां?&amp;rdquo;
ऑनलाइन से लेकर संसद परिसर तक
सोमवार को प्रदर्शनकारी जब संसद भवन के नज़दीक पहुंचे तो पुलिस ने रास्ता रोकने के लिए बैरिकेड लगाए. गुस्साई भीड़ ने इन्हें तोड़ दिया और कुछ प्रदर्शनकारी संसद परिसर में घुसने में भी कामयाब रहे. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव हुआ. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आंसू गैस के गोले और पुलिस पर फेंकी जा रही बोतलें व लकड़ी की शाखाएं साफ़ दिख रही हैं.
भ्रष्टाचार और असमानता से उपजा गुस्सा
विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार और आर्थिक असमानता के प्रति गुस्से की परिणति है. सोशल मीडिया पर रोक बस उस चिंगारी की तरह साबित हुई जिसने डिजिटल रूप से सक्रिय युवाओं को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया.
ओली सरकार का बचाव
इसी बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया बैन का बचाव करते हुए कहा कि &amp;ldquo;देश की स्वतंत्रता और गरिमा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.&amp;rdquo; उन्होंने पार्टी सम्मेलन में कहा कि सरकार हमेशा भ्रष्टाचार और अराजकता के खिलाफ खड़ी रहेगी. ओली ने तर्क दिया कि &amp;ldquo;कुछ लोगों की नौकरियां जाने से बड़ी है राष्ट्र की संप्रभुता और सम्मान.&amp;rdquo;
सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस
नेपाल सरकार ने 28 अगस्त को सभी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को 7 दिन का समय दिया था कि वे नेपाल में रजिस्टर हों &amp;nbsp;शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करें और देश में एक आधिकारिक संपर्क कार्यालय खोलें. लेकिन फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, यूट्यूब, ट्विटर (X), रेडिट और लिंक्डइन जैसी किसी भी बड़ी कंपनी ने तय समय सीमा तक आवेदन नहीं किया.
नेपाल का डिजिटल इतिहास
नेपाल पहले भी ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाता रहा है. जुलाई में सरकार ने ऑनलाइन फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर टेलीग्राम ऐप को ब्लॉक कर दिया था. पिछले साल TikTok पर 9 महीने तक प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे तभी हटाया गया जब कंपनी ने स्थानीय नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया.
इन ऐप्स पर लगा है बैन
नेपाल सरकार ने कुल 26 सोशल मीडिया और कम्युनिकेशन प्लेटफ़ॉर्म्स पर रोक लगाई है जिनमें फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप, एक्स (पहले ट्विटर), यूट्यूब, स्नैपचैट, लिंक्डइन, रेडिट, वाइबर और बॉटिम शामिल हैं. हालांकि टिकटॉक फिलहाल चालू है &amp;nbsp;क्योंकि नवंबर 2024 में उसने सभी नियामक शर्तें पूरी करने के बाद आधिकारिक तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया था. खास बात यह है कि टेलीग्राम को जुलाई 2025 में पहले ही ऑनलाइन फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका के चलते बैन कर दिया गया था. वहीं, टिकटॉक पर भी अगस्त 2024 में अस्थायी रोक लगी थी &amp;nbsp;लेकिन बाद में नियमों का पालन करने पर उसे दोबारा शुरू कर दिया गया.
इन ऐप्स पर नहीं लगा बैन
गुरुंग ने बताया कि टिकटॉक और वाइबर समेत पांच कंपनियों ने नेपाल में रजिस्ट्रेशन करवा लिया है. इसके चलते उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. बता दें कि नेपाल ने 2023 में टिकटॉक को भी बैन कर दिया था. बाद में जब कंपनी रजिस्ट्रेशन के लिए तैयार हो गई तो 2024 में यह पाबंदी हटा दी गई.
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>नेपाल, कौन-कौन, से, सोशल, मीडिया, ऐप, बैन, क्यों, लगाया, गया, प्रतिबंध, जानिए, देश, में, हो, रहे, बवाल, की, पूरी, कहानी</media:keywords>
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<title>क्या भारत में फिर से आएगा TikTok? मिलने लगे थे ये संकेत, अब केंद्रीय मंत्री ने बताई सच्चाई</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं कि शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म TikTok भारत में वापस आ सकता है. अब इन कयासों पर सरकार की तरफ से प्रतिक्रिया आई है. दरअसल, हालिया दिनों में भारत और चीन के रिश्तों में गर्मजोशी देखी गई है. इसके अलावा कुछ दिन पहले भारत में टिकटॉक की वेबसाइट एक्सेसिबल थी. कई यूजर्स ने बताया था कि वो इस वेबसाइट का होमपेज एक्सेस कर पा रहे हैं. इसके बाद से ही ऐसे कयास लगाए जाने लगे थे कि चीनी कंपनी बाइटडांस के मालिकाना हक वाला टिकटॉक भारत में वापसी कर सकता है.&amp;nbsp;
सरकार ने क्या कहा?
मनीकंट्रोल से बात करते हुए केंद्रीय IT और सूचना प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि टिकटॉक से बैन हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. वैष्णव ने कहा कि इस बारे में किसी भी तरफ से कोई प्रस्ताव नहीं आया है. ऐसे में फिलहाल उन कयासों पर विराम लग गया है, जिसमें जल्द ही टिकटॉक की भारत वापसी की बातें कही जा रही थीं.
टिकटॉक पर कब लगी थी पाबंदी?
करीब 5 साल पहले चीन के साथ सीमा पर हुए तनाव को लेकर भारत सरकार ने टिकटॉक समेत कई चाइनीज ऐप्स को बैन कर दिया था. पहले ही आदेश में बैन होने वाली ऐप्स की लिस्ट में टिकटॉक का भी नाम था. उस समय सरकार ने कहा था कि ये ऐप्स भारत की संप्रुभता, एकता, सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा है. टिकटॉक के साथ-साथ उस समय बाइटडांस की दूसरी ऐप्स को भी भारत में बंद कर दिया गया था. इनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हेलो और वीडियो एडिटिंग ऐप कैपकट आदि शामिल थीं.&amp;nbsp;
अमेरिका में भी लग चुका है बैन
भारत की तरह अमेरिका में भी टिकटॉक पर बैन लगा हुआ है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि अमेरिकी बायर इस ऐप को खरीदने के लिए तैयार है. दरअसल, अमेरिका ने इसी साल राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होने का हवाला देते हुए इस ऐप को बैन कर दिया था. अमेरिका में इसके संचालन के लिए यह शर्त रखी गई है कि इस ऐप का मालिक अमेरिकी व्यक्ति या कंपनी होनी चाहिए.
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 से लेकर नई Watch Series 11 तक, जानें क्या होगा लॉन्च और मोबाइल पर कैसे देखें LIVE इवेंट</title>
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<description><![CDATA[ Apple iPhone 17 Launch 2025: एप्पल आज, 9 सितंबर 2025 को अपना बहुप्रतीक्षित &amp;ldquo;Awe Dropping&amp;rdquo; स्पेशल इवेंट आयोजित करने जा रहा है. भारतीय समयानुसार यह इवेंट रात 10:30 बजे शुरू होगा और इसे Apple की आधिकारिक वेबसाइट, YouTube और Apple TV ऐप पर लाइव देखा जा सकेगा. इस इवेंट में कंपनी अपने नए iPhone 17 सीरीज़, Apple Watch Series 11, AirPods Pro 3 और कई अन्य प्रोडक्ट्स पेश करने की तैयारी में है.
iPhone 17 सीरीज़
इस इवेंट की सबसे बड़ी घोषणा होगी नई iPhone 17 सीरीज़. इसमें चार मॉडल शामिल हो सकते हैं iPhone 17 &amp;ndash; बड़ा डिस्प्ले, 24MP फ्रंट कैमरा, ProMotion और ऑलवेज-ऑन डिस्प्ले.
iPhone 17 Air &amp;ndash; अल्ट्रा-थिन डिजाइन, 6.6-इंच स्क्रीन, A19 चिप और सिंगल रियर कैमरा.
iPhone 17 Pro &amp;ndash; नया कैमरा बार डिज़ाइन, A19 Pro चिप, 48MP टेलीफोटो लेंस और 24MP फ्रंट कैमरा.
iPhone 17 Pro Max &amp;ndash; Pro फीचर्स के साथ मोटा फ्रेम और बड़ी बैटरी सपोर्ट.
Apple Watch Series 11
इसके अलावा नई Watch Series 11 भी आ सकती है जिसका डिज़ाइन पहले जैसा रहेगा लेकिन इसमें तेज़ S-सीरीज़ चिप और 5G मॉडेम मिलने की उम्मीद है. ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग अभी डेवलपमेंट में है, जो इस साल नहीं आ पाएगी.
Apple Watch Ultra 3
रग्ड Watch Ultra 3 में बड़ा डिस्प्ले, पतले बेज़ल्स, नया S11 चिप, सैटेलाइट कनेक्टिविटी और 5G सपोर्ट मिल सकता है. इसमें ब्लड प्रेशर फीचर भी जुड़ने की संभावना है.
Apple Watch SE 3
2022 के बाद पहली बार एप्पल अपना Watch SE 3 रिफ्रेश करने जा रहा है. इसमें प्लास्टिक बॉडी, बड़ा डिस्प्ले और नया चिप मिल सकता है जो परफॉर्मेंस को और बेहतर बनाएगा.
AirPods Pro 3
नए AirPods Pro 3 को H3 चिप, हार्ट-रेट मॉनिटरिंग, बेहतर नॉइज़ कैंसलेशन और री-डिज़ाइन चार्जिंग केस के साथ लॉन्च किया जा सकता है.
सॉफ्टवेयर अपडेट
हार्डवेयर के साथ एप्पल iOS 26, watchOS 26 और अन्य अपडेट्स भी जारी करेगा, जिनकी झलक WWDC में पहले ही मिल चुकी है. कंपनी इवेंट में कुछ एक्स्ट्रा प्रोडक्ट्स भी दिखा सकती है, जैसे AirTag 2, नया Apple TV 4K, दूसरा HomePod mini या अपडेटेड Vision Pro हेडसेट. हालांकि, इन्हें साल के अंत तक लॉन्च किया जा सकता है.
भारत में कीमतें
विश्लेषक कंपनी Techarc के मुताबिक iPhone 17 की शुरुआती कीमत भारत में लगभग 86,000 रुपये हो सकती है जो iPhone 16 की 79,900 रुपये लॉन्च कीमत से ज्यादा है. इसकी वजह है डॉलर-रुपया विनिमय दर और भारत में लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर एप्पल का फोकस. पिछले कुछ सालों में iPhone की कीमत औसतन हर साल 7.6% बढ़ी है जबकि रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 5.2% गिरा है. ऐसे में असल बढ़ोतरी लगभग 2.4% प्रतिवर्ष ही रही है.
कब और कहां देखें इवेंट
तारीख &amp;ndash; 9 सितंबर 2025
समय &amp;ndash; सुबह 10 बजे (PT) / रात 10:30 बजे (IST)
स्थान &amp;ndash; Cupertino, California (Apple हेडक्वार्टर)
लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म: Apple की आधिकारिक वेबसाइट, Apple TV ऐप और Apple के YouTube चैनल पर अपने फोन पर ही इवेंट को लाइव देख सकते हैं.
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>40 हजार से भी कम हो गए दाम, iphone 17 के लॉन्च से कुछ घंटे पहले बड़ा मौका, जानिए सबकुछ</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 15 Discount offer: एप्पल ने अपनी परंपरा को जारी रखते हुए iPhone 17 सीरीज़ के लॉन्च से पहले पुराने मॉडलों की कीमतों में भारी कमी की है. इस बार सबसे ज्यादा फायदा iPhone 15 पर मिल रहा है जिसे 2023 में लॉन्च किया गया था.
iPhone 15 की नई कीमतें
लॉन्च के समय iPhone 15 की शुरुआती कीमत 79,900 रुपये थी. पिछले साल एप्पल ने इसकी कीमत 69,900 रुपये कर दी थी. अब ई-कॉमर्स साइट्स पर यह और भी सस्ता मिल रहा है. Flipkart पर iPhone 15 अब सिर्फ 64,900 रुपये में उपलब्ध है. इसके साथ बैंक ऑफर्स का फायदा भी लिया जा सकता है. वहीं, Amazon पर कीमत और भी कम होकर 59,900 रुपये तक आ गई है.
साथ ही कैशबैक ऑफर के बाद इसका इफेक्टिव प्राइस करीब 58,103 रुपये पड़ सकता है. इसके अलावा आईफोन 13 के 128जीबी वेरिएंट को एक्सचेंज पर 21,100 रुपये की छूट मिल रही है. हालांकि ये आपके पुराने फोन की कंडिशन पर निर्भर करता है. इन सभी ऑफर्स के बाद आप फोन को 40 हजार रुपये से भी ज्यादा के डिस्काउंट पर खरीद सकते हैं.
अगर आप एक्सचेंज ऑफर का उपयोग करते हैं और आपका पुराना स्मार्टफोन 20,000 रुपये तक की वैल्यू देता है तो नया iPhone 15 आपको 40,000 रुपये से भी कम में मिल सकता है. हालांकि, एक्सचेंज वैल्यू आपके पुराने फोन की कंडीशन पर निर्भर करेगी.
iPhone 15 के फीचर्स
यह मॉडल पांच रंगों में उपलब्ध है ब्लैक, ब्लू, ग्रीन, पिंक और येलो. इसमें 6.1-इंच Super Retina XDR स्क्रीन, Dynamic Island दिया हुआ है. इसके अलावा इसमें रियर में ड्युअल सेटअप (48MP मेन कैमरा + 12MP अल्ट्रा-वाइड) और फ्रंट में 12MP सेल्फी कैमरा. ये फोन A16 Bionic चिप, 6GB RAM के साथ आता है. ये iOS 17 पर चलता है जिसे iOS 18 तक अपग्रेड किया जा सकता है.
Flipkart पर OPPO पर भी भारी डिस्काउंट
ई-कॉमर्स साइट Flipkart पर OPPO K13 5G पर भी जबरदस्त डिस्काउंट दिया जा रहा है. बता दें कि इस फोन के 256GB वेरिएंट की असल कीमत 24,999 रुपये है लेकिन छूट के बाद आप इसे महज 19,999 रुपये में खरीद सकते हैं. इसके अलावा आप इसे बैंक ऑफर्स के तहत और भी सस्ते में खरीद सकते हैं.
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 Pro और Pro Max में मिलेगा अब तक का सबसे बड़ा अपग्रेड, लॉन्च से कुछ घंटों पहले सामने आई जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 Series Launch: एप्पल आज रात 10:30 बजे (IST) भारत में अपनी नई iPhone 17 सीरीज़ लॉन्च करने जा रहा है. इस बार सबसे ज्यादा बदलाव iPhone 17 Pro और Pro Max मॉडल्स में देखने को मिल सकते हैं. लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों फोन में कैमरा, डिज़ाइन और चिपसेट लेवल पर बड़े अपग्रेड होंगे. आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से.
डिज़ाइन और डिस्प्ले अपग्रेड
iPhone 17 Pro में 6.3 इंच का डिस्प्ले देखने को मिल सकता है. वहीं, iPhone 17 Pro Max में 6.9 इंच का डिस्प्ले हो सकता है. दोनों मॉडल्स में ज्यादा ब्राइट स्क्रीन और एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग हो सकती है. सभी iPhone 17 मॉडल्स में 120Hz रिफ्रेश रेट मिलने की उम्मीद है लेकिन Pro वेरिएंट्स में 1Hz तक अडैप्टिव रिफ्रेश रेट सपोर्ट रहेगा जिससे Always-On Display बेहतर काम करेगा.
फोन थोड़े मोटे हो सकते हैं क्योंकि इनमें बड़ी बैटरी फिट की जा सकती है. सबसे बड़ा बदलाव होगा बैक डिज़ाइन में. एप्पल टाइटेनियम फ्रेम छोड़कर हाफ-ग्लास और हाफ-एल्यूमिनियम बॉडी ला सकता है. कैमरा मॉड्यूल भी पहली बार हॉरिजॉन्टल रेक्टेंगुलर डिज़ाइन में आ सकता है.
कैमरा में सबसे बड़ा अपग्रेड
टेलीफोटो लेंस &amp;ndash; अब 48MP सेंसर मिलने की उम्मीद, जिससे तीनों कैमरे (वाइड, अल्ट्रा-वाइड, टेलीफोटो) 48MP होंगे.
ऑप्टिकल ज़ूम &amp;ndash; iPhone 17 Pro में 3.5x और Pro Max में 8x तक ज़ूम हो सकता है.
वीडियो &amp;ndash; 8K रिकॉर्डिंग और ड्यूल वीडियो कैप्चर (फ्रंट और रियर कैमरा एक साथ) का फीचर आ सकता है.
वैरिएबल अपर्चर &amp;ndash; लाइट और डेप्थ पर ज्यादा कंट्रोल के लिए.
फ्रंट कैमरा &amp;ndash; इस बार सभी 2025 iPhones में 24MP सेल्फी कैमरा दिया जा सकता है.
नया दमदार चिपसेट और कूलिंग सिस्टम
दोनों Pro मॉडल्स में नया A19 Pro चिप दिया जा सकता है जो 3nm प्रोसेस पर आधारित होगा. यह ज्यादा तेज़ और पावर-इफिशिएंट होगा. इसके अलावा इसमें 12GB RAM तक बढ़ सकती है (iPhone 16 Pro सीरीज़ में 8GB थी). साथ ही पहली बार वापर चैंबर कूलिंग सिस्टम मिल सकता है जो गेमिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान हीटिंग को कंट्रोल करेगा.
बैटरी और चार्जिंग
iPhone 17 Pro Max में 5,000mAh बैटरी हो सकती है जो अब तक की सबसे बड़ी iPhone बैटरी होगी. नया Snapdragon X80 मॉडेम और A19 चिप इसे ज्यादा पावर-एफिशिएंट बनाएंगे. Qi 2.2 स्टैंडर्ड से 25W वायरलेस चार्जिंग और रिवर्स वायरलेस चार्जिंग (AirPods और Apple Watch को चार्ज करने की क्षमता) मिलने की उम्मीद है.
कलर और एक्सेसरीज़
नए iPhones में इस बार फ्रेश कलर ऑप्शंस हो सकते हैं कॉपर-ऑरेंज, ब्लैक, सिल्वर, ग्रे और डार्क ब्लू. एक खास शेड iOS 26 के &quot;Liquid Glass&quot; थीम से इंस्पायर्ड हो सकता है जो रोशनी के हिसाब से रंग बदलता दिखेगा. एक्सेसरीज़ में मेटालिक बटन, लैनयार्ड स्लॉट और नए क्रॉसबॉडी मैग्नेटिक स्ट्रैप भी आ सकते हैं.
कितनी होगी कीमत
जानकारी के अनुसार, US में iPhone 17 Pro की शुरुआती कीमत $1,099 हो सकती है जबकि Pro Max $1,199 पर ही रह सकता है. वहीं, भारत में iPhone 17 Pro की कीमत लगभग ₹1.30 लाख और Pro Max की कीमत करीब ₹1,44,900 रहने का अनुमान है.
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 Launch: भारतीयों का फेवरेट iPhone कौन सा? iPhone 17 लॉन्च से पहले सामने आई रिपोर्ट</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 Launch: एप्पल 9 सितंबर को iPhone 17 सीरीज लॉन्च करने जा रहा है. इस सीरीज में चार नए मॉडल शामिल होंगे, लेकिन लॉन्च से पहले ही एक दिलचस्प रिपोर्ट सामने आई है, जो बताती है कि भारत के ग्राहक किस तरह का iPhone खरीदना पसंद करते हैं. यह रिपोर्ट सितंबर 2024 से अगस्त 2025 तक की iPhone बिक्री के आंकड़ों पर आधारित है.
काले रंग का iPhone सबसे पसंदीदा
भारतीय खरीदारों की सबसे बड़ी पसंद iPhone का काला रंग है. रिपोर्ट के मुताबिक कुल बिक्री में 26.2 प्रतिशत हिस्सा काले रंग के iPhone का रहा. इसके बाद नीला रंग 23.8 प्रतिशत और सफेद रंग 20.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ ग्राहकों की पसंद बने. यह साफ है कि भारतीय यूजर्स सिंपल और क्लासिक रंगों को ज्यादा तवज्जो देते हैं.
128GB स्टोरेज मॉडल की सबसे ज्यादा डिमांड
जहां तक स्टोरेज की बात है, तो 128GB स्टोरेज वाला iPhone भारतीयों की पहली पसंद है. कुल बिक्री का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इसी मॉडल का रहा. वहीं, 256GB मॉडल की हिस्सेदारी 24.4 प्रतिशत रही, लेकिन 512GB और 1TB स्टोरेज वाले iPhone की डिमांड बेहद कम रही, यह आंकड़ा 1 प्रतिशत से भी नीचे है. इससे पता चलता है कि भारतीय ग्राहक प्रीमियम ब्रांड का अनुभव तो चाहते हैं, लेकिन बजट और जरूरत का भी पूरा ध्यान रखते हैं.
बेस मॉडल की जबरदस्त बिक्री
रिपोर्ट बताती है कि भारत में iPhone के बेस मॉडल को ग्राहक ज्यादा पसंद करते हैं. उसकी बिक्री प्रो मॉडल्स के मुकाबले कई गुना ज्यादा है. कुल सेल का 86 प्रतिशत हिस्सा नॉन-प्रो मॉडल्स का रहा. वहीं प्रो मॉडल की हिस्सेदारी सिर्फ 14 प्रतिशत रही. खासतौर पर iPhone 16, iPhone 16e और स्टैंडर्ड वर्जन की बिक्री 87 प्रतिशत से ज्यादा रही. इसके उलट बड़े डिस्प्ले वाले Plus और Pro Max मॉडल की बिक्री भी महज 12.5 प्रतिशत ही रही. यह ट्रेंड दिखाता है कि भारतीय ग्राहक बड़े और महंगे फोन से ज्यादा मिड-रेंज और नॉर्मल साइज के मॉडल चुन रहे हैं.
महाराष्ट्र बना सबसे बड़ा बाजार
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र iPhone बिक्री में सबसे आगे रहा. यहां 25 प्रतिशत ग्राहकों ने iPhone खरीदे. इसके बाद गुजरात 11 प्रतिशत और दिल्ली 10 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर शामिल हैं. खास बात यह भी रही कि हर पांच में से एक ग्राहक (20.5 प्रतिशत) ने अपना पुराना iPhone बदलकर नया मॉडल खरीदा है. वहीं, 17 प्रतिशत खरीदारों ने अपने डिवाइस की सुरक्षा के लिए AppleCare कवरेज भी लिया.
यह रिपोर्ट साफ करती है कि भारत में iPhone ग्राहकों की प्राथमिकता सिंपल रंग, बेसिक स्टोरेज और नॉन-प्रो मॉडल्स हैं. यानी भारतीय ग्राहक प्रैक्टिकल सोच के साथ iPhone खरीदते हैं, &amp;nbsp;प्रीमियम ब्रांड का अनुभव भी चाहते हैं और बजट का संतुलन भी बनाए रखते हैं.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>आप भी AI का करते हैं इस्तेमाल तो हो जाए सावधान, ये बातें बताई तो हो जाएगा बड़ा नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ आप भी AI का करते हैं इस्तेमाल तो हो जाए सावधान, ये बातें बताई तो हो जाएगा बड़ा नुकसान ]]></description>
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>मार्क जुकरबर्ग का तोहफा! हिंदी  जानने वालों को दे रहे 5 हजार रुपये प्रति घंटा, जानें क्या करना होगा काम</title>
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<description><![CDATA[ Mark Zuckerberg: आज के डिजिटल दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सबसे बड़ी दौड़ बन चुकी है और Meta अब इस गेम को और बड़ा बनाने जा रही है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्क जुकरबर्ग की कंपनी अमेरिका में कॉन्ट्रैक्टर्स को 55 डॉलर (करीब 5,000 रुपये) प्रति घंटे तक का भुगतान कर रही है ताकि वे भारत जैसे देशों के लिए लोकल कल्चर और भाषा से जुड़े चैटबॉट बना सकें.
क्यों चाहिए Meta को हिंदी क्रिएटर्स?
Meta सिर्फ कोडर्स को नहीं ढूंढ रही है. कंपनी ऐसे लोगों को चाहती है जिनके पास स्टोरीटेलिंग, कैरेक्टर क्रिएशन और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग का कम से कम छह साल का अनुभव हो और जो हिंदी, इंडोनेशियन, स्पैनिश या पुर्तगाली जैसी भाषाओं में फ्लुएंट हों. इन चैटबॉट्स का मकसद यह है कि लोग इंस्टाग्राम, मैसेंजर और व्हाट्सएप पर ऐसे AI पर्सनालिटीज़ से जुड़ें जो बिल्कुल स्थानीय और असली लगें.
जुकरबर्ग की बड़ी योजना
जुकरबर्ग का विज़न है कि AI चैटबॉट्स सिर्फ टेक टूल्स न होकर लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन जाएं. उनका मानना है कि एक समय आएगा जब ऐसे चैटबॉट्स असली दोस्तों की तरह काम करेंगे और हमारी रोज़मर्रा की ज़रूरतों को आसान बनाएंगे.
यह पहला प्रयोग नहीं है. 2023 में Meta ने सेलेब्रिटी-आधारित AI बॉट्स जैसे Kendall Jenner और Snoop Dogg वाले वर्ज़न लॉन्च किए थे, लेकिन वे ज्यादा समय तक टिक नहीं पाए. 2024 में कंपनी ने AI Studio पेश किया जिसके जरिए आम यूज़र्स भी अपने चैटबॉट बना सकते हैं.
भारत के लिए क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?
भारत में इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के करोड़ों यूज़र्स हैं. ऐसे में हिंदी चैटबॉट्स लॉन्च करना Meta के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. अगर ये बॉट्स भारतीय यूज़र्स की भाषा और संस्कृति से जुड़ते हैं, तो कंपनी का एंगेजमेंट और रेवेन्यू दोनों तेजी से बढ़ेंगे.
चुनौतियां और विवाद
हालाँकि चैटबॉट्स बनाना आसान नहीं है. पहले भी Meta पर आरोप लगे हैं कि उसके AI बॉट्स ने संवेदनशील डेटा लीक किया और कई बार अनुचित कंटेंट जेनरेट किया. अमेरिकी सीनेटरों ने कंपनी से जवाब भी मांगा था. इंडोनेशिया और अमेरिका में कुछ चैटबॉट्स के विवादास्पद कैरेक्टर (जैसे &quot;Russian Girl&quot; और &quot;Lonely Woman&quot;) ने कंपनी की छवि को नुकसान पहुंचाया. यही वजह है कि इस बार Meta स्थानीय क्रिएटर्स और एक्सपर्ट्स को शामिल कर असली और सुरक्षित कैरेक्टर्स बनाने पर जोर दे रही है.
नतीजा क्या होगा?
Meta इस समय किसी भी जोखिम को हाथ से जाने नहीं देना चाहती. इसलिए वह ऐसे लेखक और सांस्कृतिक विशेषज्ञों पर पैसा खर्च कर रही है जो डिजिटल दुनिया के लिए रियलिस्टिक और रिलेटेबल AI पर्सनालिटीज़ तैयार कर सकें. यह देखना दिलचस्प होगा कि हिंदी चैटबॉट्स भारत में कितना असर डालते हैं क्या यह कदम जुकरबर्ग का मास्टरस्ट्रोक साबित होगा या फिर किसी नए विवाद की वजह?
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<pubDate>Tue, 09 Sep 2025 12:48:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AI का चमत्कार! लक्षण दिखने से पहले ही चल जाएगा आंखों की बीमारी का पता, मरीजों को होगा फायदा</title>
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<description><![CDATA[ आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) आने के बाद दुनिया बदलाव से गुजर रही है. हर फील्ड में AI कमाल देखने को मिल रहा है. मेडिकल क्षेत्र में AI ने कई चीजों को आसान बना दिया है. इसकी वजह से बीमारियों की पहचान कर पाना पहले से आसान हो गया है, जिससे मरीजों का फायदा हो रहा है. अब बताया जा रहा है कि कोई भी लक्षण नजर आने से पहले AI आंखों की बीमारियों का पता लगा लेगी. इससे मरीज की स्थिति को खराब होने से बचाया जा सकता है.&amp;nbsp;
AI का कमाल
जानकारों का कहना है कि AI एल्गोरिद्म और दूसरे डीप-टेक सॉल्यूशन आंखों के इलाज को पूरी तरह बदल सकते हैं. ये किसी भी बीमारी को लक्षण शुरू होने से पहले ही पहचान लेंगे. अभी आंखों की बीमारी की पहचान का पूरा काम ह्यूमन एनालिसिस पर टिका हुआ है और इसमें काफी समय लगता है. इस समस्या को दूर करते हुए AI बड़े डेटा को आसानी और सटीकता से प्रोसेस कर सकती है. इस वजह से बीमारी को उसकी शुरुआती स्टेज पर ही पहचाना जा सकता है.&amp;nbsp;
लोगों को अंधा होने से बचा लेगी AI
आई केयर इंडस्ट्रीज से जुड़े लोगों का कहना है कि डायबिटिक रेटिनोपैथी और ग्लूकोमा जैसी बीमारियों की शुरुआत में रेटिना में मामूली बदलाव होते हैं. मरीज को इसका पता लगने से पहले ही AI इन बदलावों को डिटेक्ट कर सकती है. इस वजह से उन्हें समय पर इलाज मिल सकेगा और कई मामलों में यह लोगों को अंधा होने से भी बचा लेगी. डेटा एनालिसिस की मदद से यह टेक्नोलॉजी आंखों में बीमारी के कारण हो रहे छोटे से छोटे बदलाव को भी डिटेक्ट कर सकेगी. टेक्नोलॉजी में एडवांसमेंट के कारण जानकारों का कहना है कि अब बीमार होने पर इलाज की जगह बीमार होने से पहले ही उसके इलाज की तरफ बढ़ने की जरूरत है. उन्होंने टेक्नोलॉजी को इलाज के साथ-साथ बीमारी की पहचान और होने से पहले ही उसकी रोकथाम के लिए इस्तेमाल करने की सलाह दी है.
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अब कहीं जाने की जरूरत नहीं, WhatsApp से डाउनलोड करें आधार कार्ड, चुटकियों में हो जाएगा काम</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप अपना आधार कार्ड डाउनलोड करना चाहते हैं तो घर बैठे-बैठे यह काम कर सकते हैं. हर सरकारी सेवा के लिए जरूरी इस डॉक्यूमेंट को आप WhatsApp से डाउनलोड कर सकते हैं. इसका तरीका बहुत आसान है. यह तरीका खासतौर पर तब काम आता है, जब आप कहीं बाहर गए हैं और आधार कार्ड की जरूरत पड़ गई हो. यह तरीका जानने के बाद आपको घर से आधार कार्ड की फोटो WhatsApp कराने की जरूरत नहीं रहेगी.&amp;nbsp;
डिजिलॉकर पर होना चाहिए अकाउंट
WhatsApp से आधार कार्ड डाउनलोड करने के लिए आपको डिजिलॉकर पर अकाउंट बनाना होगा. इसके बिना आप WhatsApp के जरिए अपने डॉक्यूमेंट्स डाउनलोड नहीं कर पाएंगे. बता दें कि आप व्हाट्सऐप के जरिए भी डिजिलॉकर को एक्सेस कर सकते हैं. इसके बाद आपको आधार कार्ड के लिए UIDAI की वेबसाइट या ऐप यूज करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
ऐसे करें शुरुआत
सबसे पहले MyGov Helpdesk का आधिकारिक व्हाट्सऐप नंबर +91-9013151515 अपने मोबाइल में सेव कर लें. इसके बाद व्हाट्सऐप से इस नंबर पर जाकर Hi का मैसेज करें. अब चैटबॉट आपको रिप्लाई करना शुरू कर देगा. चैटबॉट के जवाब में आपको कई ऑप्शन दिखेंगे. इनमें से डिजिलॉकर सर्विस को सेलेक्ट करें. अब चूंकि आपका डिजिलॉकर अकाउंट पहले से ही एक्टिवेट हैं, आपको अपना 12 अंकों वाला आधार नंबर यहां लिखना है. इसके बाद आपके फोन में एक OTP आएगा. इस चैट में टाइप कर दें. यहां से वेरिफिकेशन होने के बाद चैटबॉट आपको डिजिलॉकर में सेव आपके सारे डॉक्यूमेंट्स दिखा देगा. अब इनमें से आधार कार्ड को सेलेक्ट करें. इसके बाद आपके व्हाट्सऐप पर आधार कार्ड आ जाएगा. आप यहां से इसे डाउनलोड कर सकते हैं.
ये है फायदा
इस चैटबॉट का एक फायदा यह भी है कि अगर आपके फोन में डिजिलॉकर या एम-आधार ऐप नहीं है, तब भी इससे बात कर आप अपने आधार कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. यह तरीका आपको मुश्किल स्थिति में पड़ने से रोक सकता है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>सॉकेट में चार्जर लगा छोड़ देने पर हो सकता है बड़ा नुकसान, आपने सोचा भी नहीं होगा, जल्दी सुधार लें आदत</title>
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<description><![CDATA[ कई लोगों की आदत होती है कि वो चार्ज होने के बाद फोन तो हटा लेते हैं, लेकिन चार्जर को सॉकेट से नहीं हटाते. कई लोग तो इतनी जल्दबाजी में रहते हैं कि वो बटन भी बंद नहीं करते. कई लोग आलस में ऐसा कर लेते हैं तो कुछ लोगों को लग सकता है कि बटन ऑन या ऑफ रहने से क्या ही फर्क पड़ेगा. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो गलती कर रहे हैं. सॉकेट में चार्जर लगाकर बटन ऑन छोड़ देने से कई नुकसान हो सकते हैं.&amp;nbsp;
क्यों जरूरी है चार्जर की बटन बंद कर देना?
जानकारों का कहना है कि अगर चार्जर सॉकेट में लगा है और बटन ऑन है तो यह बिजली की खपत कर रहा है. भले ही इसमें चार्जिंग के लिए कोई फोन या डिवाइस न लगा हो. इस तरह होने वाली बिजली की बर्बादी की वैंपायर पावर या फैंटम लोड भी कहा जाता है. यह आदत बिजली का बिल बढ़ाने के साथ-साथ बिजली का झटका भी दे सकती है. कई बार बड़ी पावर वाले चार्जर ऑन रहने पर करंट लगने का खतरा रहता है. इसके अलावा चार्जर या दूसरे डिवाइस लगातार प्लग-इन रहने के कारण ओवरहीट हो सकते हैं और उनमें आग लगने या धमाका होने की घटना हो सकती है. इसलिए सॉकेट में चार्जर को ऑन रखने की अपनी आदत में बदलाव लाएं. इससे थोड़ी-थोड़ी कर आप सालभर में काफी बिजली की बचत कर सकते हैं. इससे आपका खर्च कम होगा और जेब में ज्यादा पैसा बचेगा.&amp;nbsp;
इन तरीकों से रखें चार्जर का ध्यान
चार्जर को लंबा चलाने के लिए कई बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. कई लोग बेड या सोफा पर बैठे-बैठे केबल खींचकर चार्जर निकालने की कोशिश करते हैं. जोर का झटका लगने से केबल टूट सकती है. इसलिए हमेशा एडेप्टर को आराम से पकड़कर सॉकेट से निकालें. चार्जर को कभी भी गीले या पानी वाले सरफेस पर न छोड़ें. अगर चार्जर भीग गया है तो यूज करने से पहले इसे अच्छी तरह ड्राई कर लें.
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>सॉकेट, में, चार्जर, लगा, छोड़, देने, पर, हो, सकता, है, बड़ा, नुकसान, आपने, सोचा, भी, नहीं, होगा, जल्दी, सुधार, लें, आदत</media:keywords>
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<title>Samsung Galaxy S26 का पहला लुक लीक! iPhone 17 की झलक देख फैंस बोले– सैमसंग ने खेल दिया बड़ा गेम</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy S26 5G: सैमसंग की गैलेक्सी S सीरीज़ को हमेशा से एंड्रॉइड स्मार्टफोन्स की प्रीमियम कैटेगरी में गिना जाता है. हाल ही में कंपनी ने Galaxy S25 FE लॉन्च किया था लेकिन अब इंटरनेट पर अगले साल आने वाली S26 सीरीज़ की पहली झलक देखने को मिल चुकी है.
प्रसिद्ध टिप्स्टर सॉनी डिकसन ने सोशल मीडिया पर डमी यूनिट्स की एक तस्वीर साझा की है. इसमें तीन मॉडल नज़र आ रहे हैं S26 Pro, S26 Edge और S26 Ultra. दिलचस्प बात यह है कि इस बार सैमसंग बेस वर्ज़न का नाम बदलकर &amp;ldquo;Pro&amp;rdquo; रखने की योजना बना रहा है जबकि &amp;ldquo;Edge&amp;rdquo; मॉडल प्लस वेरिएंट की जगह ले सकता है.

Here&amp;rsquo;s your first look at the Samsung Galaxy S26 dummies, Launching in February, and it looks like Samsung is going with a design very similar to the iPhone 17. pic.twitter.com/z581xHUxph
&amp;mdash; Sonny Dickson (@SonnyDickson) September 4, 2025



कैमरा डिज़ाइन में बड़ा बदलाव
लीक हुई तस्वीरें इन फोनों के बैक डिज़ाइन को दर्शाती हैं. S26 Pro और S26 Ultra में कैमरा मॉड्यूल में मामूली बदलाव किए गए हैं. वहीं, S26 Edge पूरी तरह से नया लुक लेकर आ सकता है. इसके रियर पैनल पर चौड़ा कैमरा मॉड्यूल दिया गया है जो फोन की पूरी चौड़ाई को कवर करता है.
यही डिज़ाइन काफी हद तक iPhone 17 Pro सीरीज़ से मिलता-जुलता लग रहा है. हालांकि iPhone 17 Pro में ट्रिपल कैमरा सेटअप होगा जबकि S26 Edge में सिर्फ डुअल कैमरा दिया जा सकता है. इस तरह का मॉड्यूल फोन को टेबल पर रखने पर डगमगाने से भी बचा सकता है.
S26 Pro और Ultra में नए बदलाव
S26 Pro में इस बार सभी तीन कैमरे एक ही मॉड्यूल में होंगे जबकि पहले ये अलग-अलग प्लेसमेंट में रहते थे. S26 Ultra का डिज़ाइन भी थोड़ा राउंडेड दिखाई दे रहा है. इसमें तीन कैमरे नए मॉड्यूल में होंगे, लेकिन लेज़र ऑटोफोकस और 10MP टेलीफोटो लेंस पहले जैसे ही रह सकते हैं.
मैगसेफ़ जैसी चार्जिंग सपोर्ट?
लीक कवर से यह भी संकेत मिल रहे हैं कि सैमसंग इस बार Qi2 वायरलेस चार्जिंग स्टैंडर्ड लेकर आ सकता है. यह वही टेक्नोलॉजी है जो एप्पल की MagSafe चार्जिंग को सपोर्ट करती है. कवर में दिए गए गोल कटआउट इस बात की ओर इशारा करते हैं कि फोन के बैक पैनल में मैग्नेट हो सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो MagSafe एक्सेसरीज़ का इस्तेमाल S26 सीरीज़ के सभी मॉडल्स में संभव हो जाएगा.
लॉन्च टाइमलाइन
सैमसंग हर साल फरवरी में अपनी गैलेक्सी S सीरीज़ पेश करता आया है. ऐसे में उम्मीद है कि Galaxy S26 सीरीज़ का लॉन्च भी फरवरी 2026 में देखने को मिलेगा. लीक डिज़ाइन साफ इशारा करता है कि इस बार सैमसंग ने कुछ हद तक iPhone 17 से प्रेरणा ली है लेकिन साथ ही अपने यूज़र्स के लिए नए फीचर्स और डिज़ाइन अपडेट भी जोड़ रहा है.
iPhone 17 को मिलेगी टक्कर
9 सितंबर को लॉन्च होने वाला iPhone 17 सीरीज कंपनी का लेटेस्ट फोन होने वाला है. इस सीरीज में 4 मॉडल शामिल होंगे. ऐसे में ये माना जा सकता है कि Samsung Galaxy S26 55 आईफोन 17 को सीधी टक्कर देने में सक्षम होगा. इसके अलावा आईफोन 17 में नया डिजाइन और बेहतरीन कैमरा सेटअप देखने को मिल जाएंगे. साथ ही इस सीरीज के लॉन्च से पहले ही इसके कलर वेरिएंट्स की जानकारी सामने आ गई हैं. जानकारी के अनुसार, ये सीरीज ब्लैक, व्हाइट, स्टील ग्रे, ग्रीन, पर्पल और लाइट ब्लू जैसे रंगों के साथ बाजार में एंट्री मार सकती है.
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:52 +0530</pubDate>
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<title>ये हैं दुनिया के 5 सबसे महंगे और लग्जरी फोन, कीमत सुनकर नहीं होगा यकीन, चकरा जाएगा सिर</title>
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<description><![CDATA[ अरबपतियों के शौक भी आम लोगों के सपनों से बड़े होते हैं. आम लोगों को जहां आईफोन या सैमसंग के 1-1.5 लाख रुपये वाले फ्लैगशिप डिवाइस महंगे लगते हैं, वहीं अरबपति 300-400 करोड़ रुपये की कीमत वाले फोन रखते हैं. दुनियाभर में कई अरबपति और सेलेब्रिटी ऐसे फोन रखते हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में है. आज हम आपके लिए दुनिया के 5 सबसे महंगे फोन और उनके मालिकों की लिस्ट लेकर आए हैं.
Falcon Supernova iPhone 6 Pink Diamond Edition
पुराना आईफोन 6 मॉडल दुनिया के सबसे महंगे फोन की लिस्ट में सबसे ऊपर है. इसकी कीमत 400 करोड़ रुपये के आसपास बताई जा रही है. इस फोन पर 24 कैरेट सोने की कोटिंग की गई है और इसके पीछे एक गुलाबी डायमंड लगा हुआ है. बताया जाता है कि नीता अंबानी समेत दुनिया के चुनिंदा अरबपतियों के पास यह फोन है. यह फोन न होकर एक स्टेटस सिंबल है.
&amp;nbsp;iPhone 5 Black Diamond Edition by Stuart Hughes
इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर &amp;nbsp;iPhone 5 Black Diamond Edition है. लगभग 100 करोड़ रुपये की कीमत वाले इस फोन पर 600 काले डायमंड, एक सफायर ग्लास स्क्रीन और 24 कैरेट गोल्ड जड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि कि एक चाइनीज कारोबारी के पास यह फोन है, जिन्हें अपने लिए सबसे अलग आईफोन चाहिए था.
Goldvish Le Million
लगभग 9 करोड़ रुपये की कीमत वाले इस फोन में सफेद सोना लगा हुआ है. सिर्फ इतना ही नहीं, इस फोन पर 1,200 छोटे-छोटे हीरे भी जड़े गए हैं. एक समय इस फोन के नाम दुनिया का सबसे महंगा फोन होने का रिकॉर्ड था. बताया जा रहा है कि इस फोन की केवल तीन ही यूनिट्स हैं. मिडल ईस्ट के शाही परिवारों के पास यह फोन है.
Vertu Signature Cobra
फोन पर कोबरा का डिजाइन बना हुआ है यह 439 रत्नों से जड़ित है. बताया जाता है कि पॉपुलर हॉलीवुड स्टार और अरबपतियों के बीच इस फोन का क्रेज है. Vertu कंपनी हमेशा से लग्जरी फोन बनाने के लिए जानी जाती रही है.
&amp;nbsp;Caviar iPhone 14 Pro Max Diamond Snowflake Edition
इस फोन की अनुमानित कीमत 1.3 करोड़ है. इस फोन को रूस के लग्जरी ब्रांड कैवियर ने तैयार किया है. इसमें 18 कैरेट सोना, हीरे और टाइटैनियम लगा हुआ है. रूस के अरबपतियों में यह फोन काफी मशहूर बताया जाता है.
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:50 +0530</pubDate>
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<title>iPhone 17 लॉन्च से पहले आया iOS 26 पब्लिक बीटा अपडेट, जानें कौन&#45;कौन से नए फीचर्स मिले</title>
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<description><![CDATA[ iOS 26 Public Beta: Apple ने अपने नए फ्लैगशिप iPhone 17 सीरीज़ के लॉन्च से पहले ही iOS 26 का फाइनल पब्लिक बीटा जारी कर दिया है. यह बीटा वर्ज़न 9 सितंबर 2025 को होने वाले Apple इवेंट से ठीक पहले आया है. अब भारत सहित दुनियाभर में वे यूज़र्स जिन्होंने बीटा प्रोग्राम के लिए रजिस्टर किया है, इस अपडेट को अपने iPhone पर इस्तेमाल कर सकते हैं.
iOS 26 पर क्यों दिया गया जोर?
Apple ने इस बार iOS 19 से iOS 25 तक के वर्ज़न को स्किप कर सीधे iOS 26 लॉन्च किया है. कंपनी का मानना है कि इससे यूज़र्स के लिए यह समझना आसान होगा कि कौन-सा iOS सबसे नया है. यह कदम Apple की स्ट्रैटेजी को और भी सीधा और पारदर्शी बनाता है.
iOS 26 पब्लिक बीटा कैसे करें इंस्टॉल?
अगर आपने Apple Beta Program में साइन अप किया है तो iOS 26 पब्लिक बीटा को आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है. इसके लिए आपको अपने iPhone की सेटिंग्स में जाकर यह प्रोसेस फॉलो करना होगा:

Settings में जाएं
General पर टैप करें
Software Update सिलेक्ट करें
अब iOS 26 बीटा डाउनलोड और इंस्टॉल करें

Apple ने सलाह दी है कि बीटा इंस्टॉल करने से पहले अपने iPhone का डेटा बैकअप ज़रूर लें क्योंकि बीटा वर्ज़न में कभी-कभी बग या डेटा लॉस की समस्या हो सकती है.
iOS 26 फाइनल बीटा के फीचर्स
यह अपडेट पिछले कई सालों में iOS में हुए सबसे बड़े बदलावों में से एक है. कुछ खास फीचर्स इस प्रकार हैं:
Liquid Glass Design &amp;ndash; ऐप्स में अब ट्रांसलूसेंट इफेक्ट मिलेगा जिससे इंटरफेस और भी फ्यूचरिस्टिक लगेगा.
नया Phone App &amp;ndash; अब कॉल्स, FaceTime और मैसेजेस को रियल-टाइम में ट्रांसलेट किया जा सकेगा.
Polls in iMessage &amp;ndash; WhatsApp की तरह अब iMessage पर भी सीधे पोल क्रिएट किए जा सकेंगे.
Spam Call Filter &amp;ndash; फर्जी और स्पैम कॉल्स अपने-आप फिल्टर हो जाएंगी.
Photos App Upgrade &amp;ndash; नई लाइब्रेरी और कलेक्शन टैब के साथ तस्वीरें मैनेज करना आसान होगा.
Visual Intelligence (AI फीचर) &amp;ndash; स्मार्ट रिकग्निशन और सुझावों से यूज़र एक्सपीरियंस और बेहतर होगा.
iPhone यूज़र्स के लिए क्यों खास है iOS 26?
iOS 26 सिर्फ एक साधारण अपडेट नहीं बल्कि डिज़ाइन, प्राइवेसी और AI इंटेलिजेंस का नया कॉम्बिनेशन है. इसमें लिक्विड ग्लास UI, रियल-टाइम ट्रांसलेशन, स्पैम प्रोटेक्शन और अपग्रेडेड ऐप्स जैसी खूबियां दी गई हैं. भारतीय यूज़र्स के लिए यह अपग्रेड iPhone 17 से पहले ही एक आधुनिक और स्मार्ट डिजिटल अनुभव लेकर आया है.
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 के लॉन्च से पहले कौड़ियों के भाव मिल रहा iPhone 15 Pro Max, चेक करें कितनी होगी बचत</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 के लॉन्च से पहले कौड़ियों के भाव मिल रहा iPhone 15 Pro Max, चेक करें कितनी होगी बचत ]]></description>
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:45 +0530</pubDate>
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<title>5 हजार व्यूज़ पर कितना पैसा देता है Facebook, जानते ही बनाने लगेंगे वीडियो</title>
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<description><![CDATA[ Facebook Earning Tips: सोशल मीडिया आज सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह कमाई का भी एक बेहतरीन जरिया बन चुका है. खासकर Facebook, जो पहले लोगों के बीच केवल कनेक्शन और बातचीत का प्लेटफॉर्म था, अब कंटेंट क्रिएटर्स के लिए कमाई का बड़ा साधन बन गया है. अगर आप भी वीडियो बनाकर पैसे कमाना चाहते हैं, तो आपके मन में यह सवाल जरूर आता होगा कि आखिर 5 हजार व्यूज़ पर Facebook कितना पैसा देता है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं.
Facebook पर कमाई कैसे होती है?
Facebook पर वीडियो से पैसे कमाने के लिए Facebook Monetization Program का हिस्सा बनना पड़ता है. इसके लिए आपको कुछ नियम पूरे करने होते हैं जैसे आपके पेज पर तय संख्या में फॉलोअर्स होना, लगातार वीडियो अपलोड करना, Facebook की Community Guidelines और Monetization Policies का पालन करना. इन शर्तों को पूरा करने के बाद आप अपने वीडियो में In-Stream Ads यानी बीच-बीच में चलने वाले विज्ञापन लगा सकते हैं. इन्हीं विज्ञापनों से Facebook आपको पैसे देता है.
5 हजार व्यूज़ पर कितनी कमाई?
अब सबसे बड़ा सवाल 5000 व्यूज़ पर कितनी कमाई होगी? इसका कोई फिक्स रेट नहीं है क्योंकि कमाई कई चीज़ों पर निर्भर करती है जैसे,

आपका ऑडियंस किस देश से है
वीडियो की लंबाई कितनी है
विज्ञापन कितने दिखे
वीडियो पर एंगेजमेंट (लाइक, कमेंट, शेयर) कितना है

फिर भी, औसतन देखा जाए तो 5 हजार व्यूज़ पर Facebook से 50 रुपये से लेकर 200 रुपये तक की कमाई हो सकती है. अगर आपका ऑडियंस अमेरिका, यूरोप जैसे देशों से है तो यह रकम और ज्यादा हो सकती है. वहीं, भारत जैसे देशों में रेट थोड़ा कम होता है.
ज्यादा कमाई कैसे करें?
अगर आप चाहते हैं कि कम व्यूज़ में भी अच्छी कमाई हो तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

वीडियो हमेशा मौलिक और रोचक बनाएं
वीडियो की लंबाई 3 मिनट से ज्यादा रखें ताकि In-Stream Ads लग सकें
ज्यादा से ज्यादा एंगेजमेंट पाने की कोशिश करें
अपने वीडियो को अलग-अलग प्लेटफॉर्म और ग्रुप्स में शेयर करें ताकि ज्यादा व्यूज़ मिलें

क्यों बनाना चाहिए Facebook पर वीडियो?
YouTube की तरह ही Facebook भी कंटेंट क्रिएटर्स को बड़ा प्लेटफॉर्म देता है. यहां रोज़ाना लाखों-करोड़ों लोग वीडियो देखते हैं. ऐसे में अगर आप लगातार मेहनत करें और यूनिक कंटेंट डालें, तो धीरे-धीरे आपके व्यूज़ और फॉलोअर्स दोनों बढ़ते जाएंगे. यही व्यूज़ आपकी कमाई को आगे ले जाते हैं.
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Gmail का स्टोरेज भर गया? तुरंत जानें एक झटके में हज़ारों मेल्स डिलीट करने का स्मार्ट तरीका! 99% लोगों को नहीं पता ये उपाय</title>
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<description><![CDATA[ Gmail Tips: गूगल अपने जीमेल यूज़र्स को 15GB फ्री स्टोरेज देता है जो Google Drive और Google Photos के साथ शेयर होता है. लगातार आने वाले प्रमोशनल मेल्स, रसीदें और न्यूज़लेटर्स की वजह से इनबॉक्स जल्दी भर जाता है और अक्सर स्टोरेज फुल अलर्ट आने लगते हैं. यह सबसे ज्यादा परेशान तब करता है जब आपको कोई जरूरी मेल का इंतज़ार हो. हर मेल को अलग-अलग डिलीट करना काफी समय लेता है लेकिन अगर आप बल्क डिलीट ऑप्शन का इस्तेमाल करें तो आसानी से स्टोरेज खाली कर सकते हैं.

एक सर्च से डिलीट करें सभी प्रमोशनल ईमेल
सबसे पहले ब्राउज़र में Gmail खोलें और इनबॉक्स पर जाएं.
सर्च बार में &amp;ldquo;Unsubscribe&amp;rdquo; टाइप करें और एंटर दबाएं.
अब ऊपर बाएं बने चेकबॉक्स पर क्लिक करके सभी मेल्स सिलेक्ट करें.
ट्रैश (कूड़ेदान) आइकन पर क्लिक करें.

प्रो टिप: अगर आपको &amp;ldquo;Select all conversations that match this search&amp;rdquo; का विकल्प दिखे तो उस पर क्लिक करके एक साथ सबकुछ डिलीट कर सकते हैं. इसी तरीके से आप Promotions और Social टैब से भी ढेरों मेल्स हटाकर जगह खाली कर सकते हैं.
चुनिंदा सेंडर्स या समय अवधि के मेल्स हटाएं
अगर आप किसी खास सेंडर या समय अवधि के मेल्स हटाना चाहते हैं तो सर्च क्वेरी का इस्तेमाल करें:

किसी खास सेंडर से आए मेल: from:sender_email_address
किसी खास व्यक्ति को भेजे गए मेल: to:sender_email_address
किसी समय के बाद आए मेल: after:2023-11-01
आप इन क्वेरीज़ को मिलाकर अपने हिसाब से मेल्स फिल्टर कर सकते हैं और फिर उन्हें Trash में भेज दें.

डिलीट किए मेल्स वापस कैसे पाएं
अगर गलती से आपने कोई जरूरी मेल डिलीट कर दिया है तो घबराएं नहीं. Gmail में सभी डिलीटेड मेल्स Trash फोल्डर में 30 दिन तक रहते हैं. इस दौरान आप उन्हें आसानी से Restore कर सकते हैं. यह फीचर आप मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या डेस्कटॉप कहीं से भी इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर आपका Gmail बार-बार फुल हो रहा है तो इन टिप्स को अपनाकर आप मिनटों में हज़ारों ईमेल्स डिलीट कर सकते हैं और जरूरी मेल्स के लिए जगह खाली रख सकते हैं.
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Gmail, का, स्टोरेज, भर, गया, तुरंत, जानें, एक, झटके, में, हज़ारों, मेल्स, डिलीट, करने, का, स्मार्ट, तरीका, 99, लोगों, को, नहीं, पता, ये, उपाय</media:keywords>
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<title>रात को बंद कर देना चाहिए Wifi? 99% लोगों को नहीं पता इसके फायदे, जानें पूरी जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ Wifi Tips: आजकल इंटरनेट हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है. दिन हो या रात, हर घर में वाई-फाई ऑन रहता है. स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और अन्य गैजेट्स बिना इंटरनेट के अधूरे से लगते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रात में सोते समय वाई-फाई चालू रखने की वास्तव में ज़रूरत है या नहीं? दरअसल, रात को वाई-फाई बंद करने से कई ऐसे फायदे मिलते हैं जिनके बारे में ज्यादातर लोग जानते ही नहीं.
क्या होते हैं फायदे
सबसे पहला फायदा सेहत से जुड़ा है. कई वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि लगातार वाई-फाई सिग्नल्स के बीच रहने से नींद की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. ऑस्ट्रेलिया की RMIT University की एक रिपोर्ट (2024) के मुताबिक WiFi के पास सोने वाले करीब 27 फीसदी लोगों में न सोने जैसी परेशानी देखी गई है. रात में अगर वाई-फाई बंद कर दिया जाए तो दिमाग को रेडियो वेव्स का कम एक्सपोजर मिलता है और नींद गहरी आने लगती है. इससे शरीर को बेहतर तरीके से आराम मिलता है और अगली सुबह इंसान ज्यादा फ्रेश महसूस करता है.
साइबर सिक्योरिटी से सुरक्षा
दूसरा बड़ा फायदा साइबर सिक्योरिटी से जुड़ा है. जब वाई-फाई रातभर ऑन रहता है तो आपका नेटवर्क हैकिंग और अनचाहे लॉगिन्स के लिए खुला रहता है. कई बार लोग सोते समय यह ध्यान नहीं देते कि कोई और उनके नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकता है. वाई-फाई बंद करने से डेटा चोरी और प्राइवेसी खतरे की संभावना कम हो जाती है.
बिजली की बचत
तीसरा फायदा है बिजली की बचत. भले ही वाई-फाई राउटर बहुत ज्यादा बिजली नहीं खींचता लेकिन 24 घंटे चलने से सालभर में काफी यूनिट्स खर्च हो जाते हैं. रात को बंद करने की आदत डालें तो बिजली का बिल भी घटेगा और एनर्जी की बचत भी होगी.
इसके अलावा, वाई-फाई बंद करने से गैजेट्स की उम्र भी बढ़ती है. लगातार चालू रहने से राउटर और कनेक्टेड डिवाइस पर दबाव बना रहता है, जिससे उनकी लाइफ कम हो सकती है. लेकिन रातभर उन्हें आराम मिलने से वे लंबे समय तक बेहतर काम करते हैं.
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अब हमेशा रहेंगे जवान, AI रोक सकेगा बुढ़ापा, जानिए क्या है चैटबॉट रिवर्स एजिंग ]]></description>
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<pubDate>Sun, 07 Sep 2025 12:37:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ChatGPT पर ऐसी बात की तो खैर नहीं, पुलिस पहुंच जाएगी घर, कंपनी ने खुद किया खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ आजकल लोग ChatGPT के साथ प्रोफेशनल से लेकर पर्सनल लाइफ तक की बातें शेयर कर रहे हैं. अगर आप भी उनमें से एक हैं और आपको लगता है कि ChatGPT के साथ हुई बातें प्राइवेट ही रहेंगी तो आपको दोबारा सोचने की जरूरत है. ChatGPT बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने कहा है कि यह यूजर की चैट्स को रिव्यू करती है और अगर उसे लगता है कि इससे किसी को खतरा पैदा हो सकता है कि वह उस जानकारी को पुलिस के साथ भी साझा करती है.&amp;nbsp;
चैट को रिव्यू करती है स्पेशल टीम
कंपनी ने अपने ब्लॉग में बताया है कि वह संभावित हिंसा के मामलों को कैसे हैंडल करती है. ओपनएआई के मुताबिक, अगर कोई यूजर ChatGPT पर दूसरों को नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहा है तो उसका सिस्टम इसका पता लगा लेता है. इसके बाद यह चैट स्पेशल रिव्यू टीम के कर्मचारियों के पास भेजी जाती है. अगर इस टीम को लगता है कि खतरा गंभीर है तो वह इसकी जानकारी कानूनी एजेंसियों के साथ शेयर कर सकती है.
कंपनी पर उठे कई सवाल
इस ब्लॉग के सामने आन के बाद ओपनएआई पर कई सवाल उठे हैं. कई लोगों को लगता है कि AI चैटबॉट के साथ की गई बातचीत प्राइवेट रहेगी. वहीं कई आलोचकों का कहना है कि अगर किसी संभावित खतरे का पता लगाने के लिए इंसानों की मदद ली जाती है तो ChatGPT आत्म-निर्भर टूल कैसे हुआ. इसके अलावा इस बात को भी लेकर चिंता जताई जा रही है कि ओपनएआई एजेंसियों को जानकारी देने के लिए यूजर्स की लोकेशन का पता कैसे लगा रही है. कई विशेषज्ञों ने इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की है. उनका कहना है कि कोई दूसरा व्यक्ति किसी को फंसाने के लिए हिंसा की धमकी दे सकता है और कंपनी निर्दोष व्यक्ति के घर पर पुलिस भेज दे.
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>ChatGPT, पर, ऐसी, बात, की, तो, खैर, नहीं, पुलिस, पहुंच, जाएगी, घर, कंपनी, ने, खुद, किया, खुलासा</media:keywords>
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<title>Apple iPhone 17 Series लॉन्च से पहले बेंगलुरू में आज से खुला कंपनी का नया स्टोर, जानिए क्या&#45;क्या मिलेगा</title>
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<description><![CDATA[ Apple iPhone 17 Series: टेक दिग्गज ऐप्पल बेंगलुरू में आज अपना पहला स्टोर Apple Hebbal ओपन कर रही है. दक्षिण भारत में यह कंपनी का पहला और देश में मुंबई और दिल्ली के बाद तीसरा स्टोर है. बेंगलुरू के फिनिक्स मॉल ऑफ एशिया में खुलने वाला यह स्टोर पूरी तरह रिन्यूएबल एनर्जी पर चलेगा. इस रिटेल स्टोर में भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर से प्रेरित डिजाइन तैयार किया गया है. कंपनी ने यहां मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी है.
स्टोर में क्या-क्या होगा?
ऐप्पल के मुताबिक, ग्राहक इस स्टोर में आईफोन 16 लाइनअप, M4 चिप्स वाले मैकबुक प्रो, आईपैड एयर, ऐप्पल वॉच सीरीज, एयरपॉड्स 4 और एयरटैग समेत कंपनी के सभी लेटेस्ट प्रोडक्ट्स देख सकेंगे. यहां ग्राहकों के लिए फ्री इवेंट्स और दूसरे सेशन भी होंगे. कंपनी ने ग्राहकों को स्टोर में आमंत्रित करते हुए कहा है कि वे ऐप्पल स्पेशलिस्ट के साथ अपना सेशन बुक कर सकते हैं और उनकी सलाह पा सकते हैं. स्टोर में ऐप्पल पिकअप एरिया भी बनाया गया है, जहां से ग्राहक अपने ऑनलाइन ऑर्डर किए हुए डिवाइसेस को अपने मर्जी के टाइम उठा सकते हैं. इस स्टोर में 70 लोगों की टीम काम करेगी. आज दोपहर 1 बजे इस स्टोर के दरवाजे आम लोगों के लिए खुल जाएंगे.&amp;nbsp;
भारत में तीन और नए स्टोर भी खोलेगी ऐप्पल
पिछले कुछ समय से ऐप्पल भारत में लगातार अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी हुई है. दिल्ली और मुंबई के बाद अब बेंगलुरू में स्टोर ओपन हो रहा है. अब कंपनी पुणे, नोएडा और मुंबई में भी नए स्टोर खोलेगी. कंपनी के सीईओ टिम कुक ने 2024 की चौथी तिमाही की अर्निंग कॉल के दौरान ये ऐलान किया था. जानकारी के लिए बता दें कि ऐप्पल ने आईफोन 17 सीरीज के चारों मॉडल का प्रोडक्शन भारत में भी करने का फैसला किया है और ऐसा पहली बार होने जा रहा है. आईफोन 17 सीरीज लॉन्च होने के बाद अमेरिका में पहले दिन से ही मेड इन इंडिया आईफोन बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे.
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Apple के पहले फोल्डेबल आईफोन में क्या&#45;क्या मिलेगा? प्रोसेसर और डिस्प्ले समेत सामने आई ये जानकारी</title>
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<description><![CDATA[ Apple iPhone 17 Series की लॉन्चिंग के बाद कंपनी अगले साल की तैयारी में जुट जाएगी. 2026 में ऐप्पल अपना पहला फोल्डेबल आईफोन लॉन्च करेगी. किताब की तरह खुलने वाले इस आईफोन को लेकर नई जानकारी सामने आ रही है. यह पहले ही तय हो चुका है कि फोल्डेबल आईफोन में फेसआईडी की जगह टचआईडी सेंसर दिया जाएगा. अब जानकारी मिल रही है कि यह साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर के साथ आएगा. ऐसा ही डिजाइन सैमसंग, गूगल और वीवो के फोल्डेबल फोन में मिलता है, जिनमें पावर बटन फिंगरप्रिंट सेंसर का भी काम करती है.
डिस्प्ले और कैमरा&amp;nbsp;
लीक्स के मुताबिक, फोल्डेबल आईफोन में 5.5 इंच की एक्सटर्नल और 7.8 इंच की इनर स्क्रीन मिल सकती है. फोल्ड होने पर इस आईफोन की मोटाई 9-9.5mm रह सकती है, जबकि अनफोल्ड करने पर यह 4.5mm&amp;ndash;4.8mm मोटा रह सकता है. इस फोन में क्रीज-फ्री डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है. कैमरा की बात करें तो यह क्वाड-कैमरा सेटअप के साथ लॉन्च होगा. अभी तक की जानकारी के मुताबिक, इसके रियर में 48MP प्राइमरी सेंसर के साथ अल्ट्रा-वाइड या टेलीफोटो लेंस दिया जा सकता है. वहीं फ्रंट में दोनों स्क्रीन पर 24-24MP का सेल्फी कैमरा मिल सकता है.&amp;nbsp;
परफॉर्मेंस और अनुमानित कीमत
ऐसे कयास हैं कि फोल्डेबल आईफोन ऐप्पल की अपकमिंग A20 चिप से लैस हो सकता है. इसे 2nm प्रोसेस पर बनाया जाएगा. यह ऐप्पल की मौजूदा चिप की तुलना अधिक एनर्जी एफिशिएंट और फास्ट होगी. हार्डवेयर के मामले में ऐप्पल इसमें सेकंड-जेन मॉडम चिप C2 दे सकती है. साथ ही यह फोन केवल ई-सिम को सपोर्ट करेगा. इसमें फिजिकल सिम कार्ड स्लॉट नहीं दिया जाएगा. कीमत की बात की जाए तो इसे खरीदने के लिए ग्राहकों को अपनी जेब पर काफी जोर डालना पड़ेगा. अनुमान है कि भारत में इसकी कीमत लगभग 1.75 लाख रुपये से शुरू हो सकती है. हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>WhatsApp की 10 छुपी हुई ट्रिक्स जो आपका दिमाग हिला देंगी, ज्यादातर यूज़र अब तक बेखबर!</title>
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<description><![CDATA[ WhatsApp की 10 छुपी हुई ट्रिक्स जो आपका दिमाग हिला देंगी, ज्यादातर यूज़र अब तक बेखबर! ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>अबू धाबी की ड्राइवरलेस टैक्सियों में क्या है खास, किन देशों के पास हैं बिना ड्राइवर के चलने वाली गाड़ी</title>
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<description><![CDATA[ Driverless Taxi: तकनीक जिस तेजी से बदल रही है उसने हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी को पूरी तरह बदल कर रख दिया है. अबू धाबी इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां बिना ड्राइवर वाली टैक्सियां सड़कों पर उतर चुकी हैं. ड्राइवरलेस टैक्सी न सिर्फ भविष्य की झलक देती हैं बल्कि ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी नए स्तर पर ले जाने का वादा करती हैं.
अबू धाबी की ड्राइवरलेस टैक्सी की खासियतें
अबू धाबी ने इन टैक्सियों को हाई-टेक सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस किया है. इन गाड़ियों में कैमरे, राडार और लेज़र तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिससे यह चारों ओर के ट्रैफिक और पैदल चलने वालों की हर गतिविधि को रियल-टाइम में पकड़ लेती हैं. खास बात यह है कि यात्रियों को किसी इंसानी ड्राइवर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
बेहतर डिजाइन और स्मार्ट तकनीक
इन गाड़ियों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह न केवल सिग्नल और ट्रैफिक रूल्स को खुद समझती हैं बल्कि आपात स्थिति में तुरंत निर्णय भी ले सकती हैं. उदाहरण के लिए, सड़क पर अचानक कोई वाहन या पैदल यात्री आ जाए तो यह टैक्सी तुरंत स्पीड कम कर देती है या ब्रेक लगा देती है. इससे दुर्घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है. यात्रियों के लिए इन टैक्सियों का अनुभव बिल्कुल अलग है. इसमें बैठने के बाद आप ऐप के जरिए गंतव्य चुनते हैं और टैक्सी अपने आप रास्ता तय करके वहां पहुंचा देती है. पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाता है.
किन देशों में चल रही हैं ड्राइवरलेस गाड़ियां?
ड्राइवरलेस गाड़ियां सिर्फ अबू धाबी तक सीमित नहीं हैं. दुनिया के कई बड़े देश इस तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं. अमेरिका में गूगल की सहायक कंपनी Waymo और टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक पहले से ही चर्चा में है. कैलिफोर्निया और एरिज़ोना जैसे राज्यों में ड्राइवरलेस टैक्सियों की ट्रायल सर्विस शुरू हो चुकी है.
चीन भी इस क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है. Baidu और Pony.ai जैसी कंपनियां बीजिंग और शंघाई की सड़कों पर अपनी स्वचालित टैक्सियों का परीक्षण कर रही हैं. जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तकनीकी रूप से मजबूत देशों में भी ड्राइवरलेस कारों पर बड़े पैमाने पर रिसर्च और ट्रायल हो रहे हैं. वहीं, यूरोप के देशों में जर्मनी और फ्रांस इस तकनीक को पब्लिक ट्रांसपोर्ट में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
भविष्य में होगा फायदा
ड्राइवरलेस टैक्सी सिर्फ सुविधा का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण और सड़क सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम हैं. इससे ईंधन की खपत कम होगी, ट्रैफिक जाम पर काबू पाया जा सकेगा और दुर्घटनाएं भी घटेंगी. अबू धाबी की यह पहल दिखाती है कि आने वाला समय पूरी तरह ऑटोमेटेड ट्रांसपोर्ट का हो सकता है. जिस तरह मोबाइल फोन ने हमारी दुनिया बदल दी, उसी तरह ड्राइवरलेस गाड़ियां भी आने वाले वर्षों में यात्रा का चेहरा पूरी तरह बदल देंगी.
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Samsung Galaxy S25 FE 5G: 50MP कैमरा और हाई&#45;एंड फीचर्स से लैस होगा यह फोन, जानें कीमत और स्पेसिफिकेशन</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy S25 FE 5G: आगामी 4 सितंबर को सैमसंग अपने नए स्मार्टफोन को लॉन्च करने जा रही है. कंपनी की फ्लैगशिप गैलेक्सी S25 सीरीज में आने वाले इस फैन एडिशन को भारत के साथ-साथ ग्लोबल मार्केट के लिए भी लॉन्च किया जाएगा. गैलेक्सी अनपैक्ड इवेंट में लॉन्च होने वाले इस फोन में किफायती कीमत में कई हाई-एंड फीचर्स मिलेंगे. आइए जानते हैं कि इस फोन में क्या-क्या मिलने वाला है और यह मार्केट में मौजूद किस फोन को टक्कर देगा.
Galaxy S25 FE में मिल सकते हैं ये फीचर्स
अभी तक सामने आई लीक्स के मुताबिक, यह फोन 6.7-inch FHD+ LTPO AMOLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च होगा, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा. कंपनी इसे Exynos 2400 चिपसेट से लैस कर सकती है, जिसे 12GB रैम और 256GB स्टोरेज के साथ पेयर किया जाएगा. माना जा रहा है कि कंपनी इसे 6-7 साल तक ऑपरेटिंग सिस्टम और सिक्योरिटी अपडेट देती रहेगी. Galaxy S25 FE में 4,900mAh की बैटरी मिलने की उम्मीद है, जो 45W वायर्ड और वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगी.
कैमरा
फोटोग्राफी के फैन्स के लिए यह फोन खास होने वाला है. इसके रियर में OIS सपोर्ट के साथ 50MP का प्राइमरी सेंसर, 12MP का अल्ट्रावाइड सेंसर और 8MP का टेलीफोटो लेंस दिया जा सकता है. सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 12MP कैमरा दिया जाएगा. वाटर और डस्ट रजिस्टेंस के लिए इसे IP68 रेटिंग मिली है. डुअल स्टीरियो स्पीकर्स वाले इस फोन की मोटाई 7.8mm होगी.
कीमत
भारत में इस फोन की कीमत 60,000 रुपये के आसपास रह सकती है. हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यह फोन नेवी, जेट ब्लैक, व्हाइट और आइसी ब्लू कलर में लॉन्च होगा. इसे 4 सितंबर को 3 बजे शुरू होने वाले इवेंट में लॉन्च किया जाएगा.
Vivo X200 FE को टक्कर देगा सैमसंग का नया फोन
4 सितंबर को लॉन्च होने वाला सैमसंग का नया फोन बाजार में पहले से मौजूद Vivo X200 FE को टक्कर देगा. वीवो के इस फोन में कई हाई-एंड फीचर्स दिए गए हैं. 6.3 इंच डिस्प्ले वाले इस फोन में Dimensity 9300+ प्रोसेसर मिलता है, जिसे 12GB रैम और 256GB स्टोरेज के साथ पेयर किया गया है. इसके रियर में 50MP + 8MP + 50MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप और फ्रंट में 50MP लेंस मिलता है. यह फोन 6500mAh की बैटरी के साथ लॉन्च हुआ था. फ्लिपकार्ट से इसे अभी 54,999 रुपये में खरीदा जा सकता है.
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>एयर टैक्सी हवा में कैसे उड़ती है, क्या एरोप्लेन से अलग है कोई तकनीक</title>
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<description><![CDATA[ Air Taxi Technology: दुनिया तेजी से भविष्य की ओर बढ़ रही है और इसी दिशा में एक नया कदम है एयर टैक्सी. जिस तरह सड़कों पर कैब बुक करके आप एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं उसी तरह आने वाले समय में आसमान से उड़ान भरती एयर टैक्सियां भी आपको कुछ ही मिनटों में मंज़िल तक पहुंचा देंगी. लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये एयर टैक्सी हवा में उड़ती कैसे हैं और क्या इनमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक एरोप्लेन से अलग है?
एयर टैक्सी की उड़ान का राज
एयर टैक्सी को अक्सर eVTOL (Electric Vertical Take-Off and Landing) कहा जाता है. इसका मतलब है कि ये गाड़ियां बिना रनवे के सीधा ऊपर उठ सकती हैं और सीधा नीचे उतर सकती हैं. इसमें खास तरह के इलेक्ट्रिक मोटर्स और प्रोपेलर्स लगे होते हैं जो इसे हेलीकॉप्टर की तरह वर्टिकल उड़ान भरने की क्षमता देते हैं.
जहां एरोप्लेन को उड़ान भरने के लिए लंबे रनवे और तेज़ स्पीड की जरूरत होती है, वहीं एयर टैक्सी किसी छोटे से हेलिपैड या खुले क्षेत्र से भी उड़ान भर सकती है. यही वजह है कि भविष्य में इसे ट्रैफिक जाम से जूझ रहे बड़े शहरों के लिए वरदान माना जा रहा है.
तकनीक में फर्क
एरोप्लेन आमतौर पर जेट इंजन या टर्बोप्रॉप इंजन से चलते हैं जिनमें भारी मात्रा में फ्यूल (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की खपत होती है. वहीं एयर टैक्सी ज्यादातर बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर्स पर आधारित होती हैं. इसका मतलब है कि यह ज्यादा पर्यावरण-हितैषी हैं और शोर भी बहुत कम करती हैं. इसके अलावा, एरोप्लेन की उड़ान भौतिक विज्ञान के पारंपरिक सिद्धांतों जैसे लिफ्ट और थ्रस्ट पर निर्भर करती है. एयर टैक्सी भी इन्हीं सिद्धांतों का पालन करती है लेकिन इसमें छोटे-छोटे प्रोपेलर्स और रोटर्स लगे होते हैं जो अलग-अलग दिशा में घुमकर इसे स्थिर और नियंत्रित रखते हैं. इसे आप ड्रोन की बड़ी और एडवांस्ड फॉर्म कह सकते हैं.
सुरक्षा और नेविगेशन
एयर टैक्सी में हाई-टेक सेंसर, कैमरे और ऑटोपायलट सिस्टम होते हैं जो हर दिशा का रियल-टाइम डाटा कैप्चर करते हैं. ये गाड़ियां GPS और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से खुद-ब-खुद रास्ता तय करती हैं और हवा में टकराव से बचने के लिए तुरंत दिशा बदल सकती हैं. जहां एरोप्लेन में एक या दो पायलट की जरूरत होती है, वहीं एयर टैक्सी का भविष्य पूरी तरह ऑटोनॉमस यानी बिना ड्राइवर या पायलट के चलने का है. हालांकि शुरुआती दौर में इनका संचालन प्रशिक्षित पायलटों द्वारा ही किया जाएगा.
भविष्य का सफर
एयर टैक्सी का सबसे बड़ा फायदा है समय की बचत. एक शहर के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचने में जहां सड़क से घंटों लग जाते हैं, वहीं एयर टैक्सी कुछ ही मिनटों में आपको वहां उतार देगी. साथ ही, यह कार्बन उत्सर्जन को कम कर पर्यावरण को भी सुरक्षित बनाएगी.
NASA भी कर रहे रिसर्च
भविष्य में हवाई सफर को और भी आसान, तेज और सुलभ बनाने के लिए एयर टैक्सी एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है. इसी दिशा में NASA के वैज्ञानिक लगातार काम कर रहे हैं. वे इस समय एक छोटे से इलेक्ट्रिक विमान पर रिसर्च कर रहे हैं जिसे तकनीकी भाषा में eVTOL कहा जाता है और जो दिखने में बिल्कुल एयर टैक्सी जैसा है. इस रिसर्च का उद्देश्य उन कंपनियों को जरूरी तकनीकी जानकारी देना है जो एयरक्राफ्ट तैयार कर रही हैं ताकि वे अपने डिज़ाइन को और सुरक्षित और बेहतर बना सकें.
जैसे-जैसे भविष्य में एयर टैक्सियां आसमान में उड़ान भरेंगी, इंजीनियरों के लिए यह जानना बेहद जरूरी होगा कि उनकी उड़ान के दौरान विमान किस तरह व्यवहार करता है और किन परिस्थितियों में उसका बैलेंस व कंट्रोल सिस्टम कैसे काम करता है. यही कारण है कि NASA इस प्रोजेक्ट पर ध्यान केंद्रित कर रहा है. वैज्ञानिकों का मानना है कि एक उन्नत फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम ही एयर टैक्सी को स्थिर और सुरक्षित उड़ान भरने में मदद करेगा.
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>ये क्या! लाखों की कीमत वाले सैमसंग के इस फोन का उतरने लग गया रंग, यूजर्स परेशान</title>
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<description><![CDATA[ Samsung के Galaxy Z Fold 7 फोल्डेबल फोन को लॉन्च हुए अभी कुछ ही हफ्ते बीते हैं और इससे जुड़ी शिकायतें आने लगी हैं. लगभग 1.75 लाख रुपये की कीमत वाले इस फोन के कई यूजर्स ने बताया कि फोन का रंग उतरने लगा है. यूजर्स का कहना है कि फोन की एनॉडाइज्ड फिनिश धीरे-धीरे उतरने लगी है. बता दें कि पिछले साल लॉन्च हुए Z Fold 6 के साथ भी ऐसी दिक्कतें आई थीं और अब एक बार फिर लोगों को सालभर पहले की याद आने लगी है.&amp;nbsp;
पावर बटन के आसपास से उतर रहा रंग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेडिट पर पिछले तीन हफ्तों से इस फोन के रंग उतरने की शिकायतें पढ़ने को मिल रही हैं. यहां कई पोस्ट और कमेंट्स में बताया गया है कि पावर बटन और USB-C पोर्ट के पास फोन के एल्युमिनियम फ्रेम से रंग उतर रहा है. एक यूजर ने बताया कि वह अपने फोन का बहुत ध्यान रखते हैं. इसके बावजूद इसका रंग उतरना शुरू हो गया है. उन्होंने यह भी बताया कि वो सैमसंग का 25W चार्जर और हाई-क्वालिटी केस यूज कर रहे हैं. एक और यूजर ने बताया कि एक दिन उन्हें लगा कि फोन पर कोई छोटा धागा चिपका होगा, लेकिन जब उन्होंने गौर से देखा तो पता चला कि एल्युमिनियम फिनिशिंग खत्म होने के बाद यह निशान रह गया था.
कंपनी की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
सैमसंग की इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है. कंपनी ने कुछ यूजर्स को कहा है कि कॉस्मेटिक डैमेज से परफॉर्मेंस पर कोई असर नहीं पड़ता. इसलिए यह वारंटी में कवर नहीं हो सकता. वहीं डेनमार्क के एक यूजर ने बताया कि सैमसंग ने जांच के लिए उनके हैंडसेट को मंगवाया था. एक ऐसा मामला आया है, जिसमें सर्विस सेंटर ने कंपनी में इसे रिव्यू के लिए भेजा है.&amp;nbsp;
Z Fold 6 में भी आई थी यह दिक्कत
पिछले साल भी सैमसंग फोल्डेबल फोन यूजर्स को इसी तरह की दिक्कत से दो-चार होना पड़ा था, जब Z Fold 6 से फिनिशिंग उतरने लगी थी. इसके बाद कंपनी ने अपने बयान में कहा था कि खराब क्वालिटी वाले थर्ड-पार्टी चार्जर के फिनिशिंग खराब हो रही है. सैमसंग ने फर्स्ट-पार्टी चार्जर इस्तेमाल करने की सलाह देते हुए कहा था कि खराब गुणवत्ता वाले चार्जर से प्रोटेक्टिव लेयर उतर सकती है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:20 +0530</pubDate>
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<title>Instagram के 10 राज़ जिनके बारे में 99% यूज़र्स को नहीं है पता!</title>
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<description><![CDATA[ Instagram Secret Features: Instagram आज दुनिया का सबसे पॉपुलर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन चुका है. यहां लोग फोटो-वीडियो शेयर करने से लेकर रील्स और स्टोरीज़ बनाने तक सब कुछ करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसमें कई ऐसे हिडन फीचर्स भी हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं? ये ट्रिक्स न सिर्फ आपके अकाउंट को स्मार्ट बनाएंगी बल्कि आपके एक्सपीरियंस को भी बेहतर कर देंगी. आइए जानते हैं इन खास फीचर्स के बारे में.
टैग्स छुपाना या हटाना
अक्सर हमें ऐसी तस्वीरों में टैग कर दिया जाता है जो हमें पसंद नहीं आतीं. Instagram आपको &amp;ldquo;Remove Me From Post&amp;rdquo; और &amp;ldquo;Hide From Profile&amp;rdquo; का ऑप्शन देता है. पहला विकल्प टैग को पूरी तरह हटा देता है जबकि दूसरा सिर्फ आपके प्रोफाइल से उस टैग को छुपा देता है.
सर्च हिस्ट्री क्लियर करना
अगर आप नहीं चाहते कि कोई आपकी Instagram सर्च हिस्ट्री देखे तो इसे आसानी से मिटा सकते हैं. बस सेटिंग्स &gt; सिक्योरिटी &gt; Clear Search History पर जाएं और हिस्ट्री को डिलीट कर दें.
डाटा सेविंग मोड
Instagram अपने आप फोटोज़ और वीडियो लोड कर देता है जिससे डेटा जल्दी खत्म हो जाता है. इसके लिए &amp;ldquo;Data Saver&amp;rdquo; मोड ऑन कर सकते हैं. सेटिंग्स &gt; अकाउंट &gt; Cellular Data Use पर जाएं और Data Saver को टॉगल कर दें.
कोलाज/लेआउट बनाना
Instagram की Layout App की मदद से आप आसानी से कोलाज बना सकते हैं और उन्हें अपने अकाउंट या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर कर सकते हैं.
कमेंट मैनेज करना
अनचाहे या गंदे कमेंट्स से परेशान हैं? तो Instagram में फिल्टर और ब्लॉकिंग का विकल्प मौजूद है. आप कीवर्ड सेट कर सकते हैं कमेंट डिलीट कर सकते हैं या चाहें तो पोस्ट पर कमेंट पूरी तरह बंद कर सकते हैं.
स्टोरी छुपाना
अगर आप नहीं चाहते कि आपकी स्टोरी हर कोई देखे तो Privacy &gt; Story सेटिंग में जाकर &amp;ldquo;Hide Story From&amp;rdquo; ऑप्शन चुन सकते हैं और उन लोगों को चुन सकते हैं जिनसे आप स्टोरी छुपाना चाहते हैं.
किसी की स्टोरी म्यूट करना
अगर किसी यूज़र की लगातार स्टोरीज़ से आप परेशान हैं तो उन्हें बिना अनफॉलो किए म्यूट कर सकते हैं. बस उनके प्रोफाइल से &amp;ldquo;Mute Story&amp;rdquo; पर टैप करें.
पोस्ट आर्काइव करना
पुराने पोस्ट डिलीट करने की ज़रूरत नहीं है. आप चाहें तो उन्हें Archive कर सकते हैं. ये पोस्ट आपके प्रोफाइल से गायब हो जाएंगे लेकिन जब चाहें तब वापस ला सकते हैं.
हाइलाइट्स और रील्स का कवर बदलना
रील्स या हाइलाइट्स को आकर्षक बनाने के लिए उनका कवर फोटो बदल सकते हैं. आप वीडियो के किसी फ्रेम को चुन सकते हैं या गैलरी से नई फोटो अपलोड कर सकते हैं.
हैशटैग और कीवर्ड से प्रोफाइल ऑप्टिमाइज़ करना
Instagram प्रोफाइल को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बायो और नेम में सही हैशटैग और कीवर्ड का इस्तेमाल करें. इससे आपका प्रोफाइल सर्च रिजल्ट्स में ऊपर आ सकता है. Instagram सिर्फ फोटो और वीडियो शेयर करने तक सीमित नहीं है. इसमें कई ऐसे हिडन फीचर्स हैं जो आपके अनुभव को और मज़ेदार और सुरक्षित बना सकते हैं. अगर आप इन ट्रिक्स का इस्तेमाल करेंगे तो न सिर्फ आपका अकाउंट बेहतर दिखेगा बल्कि आपके सोशल मीडिया स्किल्स भी अगले लेवल पर पहुंच जाएंगे.
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 Series के इन मॉडल्स में नहीं लगेगा सिम कार्ड, कंपनी ने बता दिया क्या है ऑप्शन</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 Series के इन मॉडल्स में नहीं लगेगा सिम कार्ड, कंपनी ने बता दिया क्या है ऑप्शन ]]></description>
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<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 11:45:18 +0530</pubDate>
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<title>ये हैं देश के सस्ते वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन्स, मिलते हैं धाकड़ फीचर्स, चेक करें लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ Waterproof Smartphones: देश भर में स्मार्टफोन यूजर्स अब सिर्फ स्टाइलिश और फीचर-पैक मोबाइल ही नहीं, बल्कि ऐसे फोन भी पसंद करने लगे हैं, जो मुश्किल परिस्थितियों में भी साथ निभा सकें. वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन का ट्रेंड तेज़ी से बढ़ रहा है, और सबसे अच्छी बात यह है कि अब ये फीचर सिर्फ महंगे प्रीमियम फोन तक ही सीमित नहीं रह गया है. भारत के बजट सैगमेंट में कई कंपनियाँ वॉटरप्रूफ तकनीक वाले स्मार्टफोन पेश कर रही हैं जिनकी कीमत 15,000 से 20,000 रुपये के बीच है.
अगर बात की जाए स्मार्टफोन्स के चुनाव की, तो पहले लोग कीमत, कैमरा और परफॉर्मेंस को प्राथमिकता देते थे. अब उनके लिए वाटर और डस्ट से सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी हो गई है. यही वजह है कि बड़ी कंपनियाँ अपने बजट हैंडसेट्स में भी IP68, IP69 जैसे वॉटरप्रूफ रेटिंग देने लगी हैं. यह रेटिंग दर्शाती है कि फोन पानी में कुछ समय तक सुरक्षित रह सकता है चाहे बारिश हो या कोई एक्सीडेंटल सिचुएशन.
Realme P3 5G
Realme P3 5G IP69 रेटिंग के साथ आने वाला धांसू स्मार्टफोन है जो 2.5 मीटर गहरे पानी में 30 मिनट तक आराम से काम कर सकता है. कंपनी दावा करती है कि इस फोन को स्विमिंग पूल में भी बिना चिंता के इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें 50MP प्राइमरी रियर कैमरा और 6000mAh की दमदार बैटरी दी गई है जो लंबे समय तक साथ देता है. फोन की 120Hz AMOLED डिस्प्ले, Snapdragon Gen 4 प्रोसेसर और 45W फास्ट चार्जिंग जैसे स्पेसिफिकेशन्स से परफॉरमेंस और यूजर एक्सपीरियंस शानदार बना रहता है.
POCO X7 5G
POCO X7 5G भी बजट सेगमेंट में आने वाला बेहतरीन वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन है. इसकी शुरुआती कीमत लगभग 19,549 रुपये है और इसमें IP69 रेटिंग दी गई है. फोन को पानी के भीतर फोटो और वीडियो शूटिंग के लिए स्विमिंग पूल, रेनफॉल अथवा नॉर्मल वॉटर ऐक्सिडेंट्स में इस्तेमाल किया जा सकता है. डिवाइस में शानदार 50MP ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलता है, 6.67 इंच की 1.5K AMOLED डिस्प्ले है और बड़ी 5500mAh की बैटरी रखी गई है. भारत में यूथ के बीच इस फोन की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है क्योंकि इसकी परफॉरमेंस के साथ-साथ सुरक्षा भी उम्दा मिलती है.
Moto Edge 50 Fusion
वहीं Moto Edge 50 Fusion स्मार्टफोन भी 20,000 रुपये के आस-पास IP68 रेटिंग और बेहतरीन फीचर्स के साथ आता है. इसकी डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट के साथ हरियाली और जीवंत कलर्स देती है. साथ में 68W फास्ट चार्जिंग और 5000mAh बैटरी मिलने से फोन लंबा साथ देता है. फोटोग्राफी के लिए यहां 50MP और 13MP का डुअल रियर कैमरा सेटअप मिला है जो पानी के अंदर भी जबरदस्त फोटो ले सकता है.
अगर 15,000 रुपये के नीचे विकल्प चाहिए, तो Motorola Moto G45 5G, POCO M6 Plus 5G, OPPO A3x 5G, HMD Crest, OPPO K12x 5G, Vivo Y28s 5G और Realme Narzo 70x 5G जैसी डिवाइसेज़ उपलब्ध हैं जिनमें डस्ट-प्रूफ और वाटर-रेसिस्टेंट टेक्नोलॉजी, बढ़िया बैटरी, हाई-क्वालिटी कैमरा और आकर्षक डिज़ाइन के साथ दमदार प्रदर्शन देखने को मिलता है. इन कंपनियों ने यूजर्स को वह भरोसा दिया है जो उन्हें बारिश, होली, ट्रैवल या अचानक कोई वॉटर एक्सीडेंट होने पर अपने फोन की चिंता से मुक्त रखता है.
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>यूजर सेफ्टी को बड़ा खतरा! ChatGPT को लेकर रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा, अभी पढ़ लीजिए</title>
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<description><![CDATA[ पिछले कुछ समय से ChatGPT जैसे चैटबॉट्स पर लोगों की निर्भरता बढ़ती जा रही है और यह खतरनाक रूप ले रही है. हाल ही में अमेरिका में एक दंपत्ति ने अपने 16 वर्षीय बेटे की आत्महत्या के लिए ChatGPT को जिम्मेदार ठहराया था. अब एक रिसर्च में खुलासा हुआ है कि ChatGPT जैसे चैटबॉट आत्महत्या से जुड़े कई ऐसे प्रश्नों के जवाब दे रहे हैं, जिनके जवाब में उन्हें यूजर को हेल्पलाइन पर रिडायरेक्ट करना चाहिए. इससे यूजर सेफ्टी को लेकर बड़े खतरे पैदा हो रहे हैं.
रिसर्च में सामने आई यह जानकारी
मेडिकल जर्नल Psychiatric Services में पब्लिश हुई एक रिसर्च में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. रिसर्च में पता चला है कि OpenAI का ChatGPT और Anthropic का Claude चैटबॉट कई हाई-रिस्क सवालों के जवाब देने से मना कर रहे हैं, लेकिन अगर कोई घुमाकर सवाल पूछ रहा है तो ये जवाब दे रहे हैं और इन चैटबॉट्स के ये उत्तर खतरनाक साबित हो सकते हैं. रिसर्चर का कहना है कि इन चैटबॉट्स पर सुरक्षा उपायों की जरूरत है.
Google Gemini का प्रदर्शन रहा बेहतर
रिसर्च में पता चला कि चैटबॉट्स हाई-रिस्क वाले प्रश्नों का जवाब देने की बजाय यूजर को किसी प्रोफेशनल या हॉटलाइन से मदद लेने के लिए रिडायरेक्ट कर रहे थे, लेकिन जब घुमाकर प्रश्न पूछे गए तो चैटबॉट्स ने उनका जवाब दे दिया. ChatGPT और एंथ्रोपिक के Claude ने ऐसे कुछ प्रश्नों के जवाब दिए. हालांकि, रिसर्च में Google Gemini का प्रदर्शन बेहतर रहा और उसने आत्महत्या से जुड़े आंकड़ों के प्रश्नों को भी हाई-रिस्क मानते हुए जवाब नहीं दिया.
OpenAI पर हुआ था मुकदमा
अमेरिका में एक दंपत्ति ने OpenAI के खिलाफ मुकदमा किया था. उन्होंने ChatGPT को अपने बेटे की आत्महत्या का जिम्मेदार ठहराते हुए कंपनी से सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की थी. इसके बाद OpenAI ने कहा कि वह अपने ChatGPT चैटबॉट में कई बदलाव करेगी.
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>गूगल का बड़ा एक्शन! प्ले स्टोर से एक झटके में उड़ाए 77 खतरनाक ऐप्स, वजह जानकर चौंक जाएंगे</title>
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<description><![CDATA[ Google Play Store: गूगल ने हाल ही में अपने प्ले स्टोर से 77 हानिकारक ऐप्स को हटा दिया है. लेकिन यह सफाई केवल शुरुआत है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक साल में गूगल ने करीब 40 लाख ऐप्स को डिलीट किया है यानी हर दिन औसतन 11,000 ऐप्स हटाए गए. ये आंकड़े Surfshark और गूगल की ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट्स पर आधारित हैं. दिलचस्प बात यह है कि इनमें से आधे से ज्यादा ऐप्स डेटा प्रोटेक्शन और प्राइवेसी से जुड़ी गड़बड़ियों की वजह से हटाए गए.
डेवलपर नियम हुए और सख्त
गूगल ने पहले ही घोषणा की थी कि वह ऐप्स के नियमों को कड़ा करेगा. नतीजा यह रहा कि 2024 की शुरुआत तक प्ले स्टोर से करीब आधे ऐप्स हट गए. इसके साथ ही गूगल ने 1.55 लाख से ज्यादा डेवलपर अकाउंट्स को भी ब्लॉक कर दिया. अब तो गूगल ने यह भी तय किया है कि केवल वही डेवलपर्स ऐप्स को प्ले स्टोर या साइडलोडिंग के जरिए उपलब्ध करा सकेंगे जिनकी पहचान वेरीफाई की गई हो.
ऐप हटे तो क्या होगा आपके फोन पर?
अगर कोई ऐप प्ले स्टोर से गायब हो जाए तो इसका मतलब यह है कि उसने गूगल के नियम तोड़े हैं. इसका यह अर्थ नहीं कि वह आपके फोन से भी हट जाएगा. आप उस ऐप का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं लेकिन उसे अपडेट नहीं कर पाएंगे. अगर वह ऐप खतरनाक साबित होता है तो गूगल का Play Protect फीचर आपको उसे अनइंस्टॉल करने की सलाह देगा. इसलिए सुरक्षित रहने के लिए पुराने और संदिग्ध ऐप्स को खुद हटाना ही बेहतर है.
यूजर्स को दी गई चेतावनी
Surfshark का कहना है कि असली जिम्मेदारी यूजर्स पर भी है. किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी परमिशन, रिव्यू और डेवलपर की विश्वसनीयता जरूर जांचें. कंपनी ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल सफाई करार दिया है लेकिन चेताया कि इससे यूजर्स को झूठी सुरक्षा की भावना नहीं पालनी चाहिए.
नया Uninstall बटन आने वाला है
गूगल अब यूजर्स की सुविधा के लिए प्ले स्टोर पर एक नया Uninstall बटन टेस्ट कर रहा है. इस बटन की मदद से आप सीधे ऐप पेज से ही उसे डिलीट कर पाएंगे. अभी तक यूजर्स को &amp;ldquo;Manage apps &amp;amp; devices&amp;rdquo; सेक्शन में जाकर एक-एक करके ऐप हटाने पड़ते हैं. नया फीचर इस झंझट को आसान बना देगा.
Anatsa मैलवेयर
Zscaler की ThreatLabz टीम ने खुलासा किया है कि एक नए Anatsa मैलवेयर वेरिएंट ने दुनिया भर के 831 से ज्यादा फाइनेंशियल संस्थानों को निशाना बनाया. इन्हीं ऐप्स में छिपे इस खतरे की वजह से गूगल ने 77 खतरनाक ऐप्स को हटाया. चौंकाने वाली बात यह है कि इन्हें 1.9 करोड़ से ज्यादा बार इंस्टॉल किया जा चुका था.
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>WhatsApp और Instagram में मिल सकती है Google की यह सर्विस, कई काम हो जाएंगे आसान</title>
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<description><![CDATA[ WhatsApp और Instagram यूजर्स को अब इन प्लेटफॉर्म पर गूगल की एक सर्विस का फायदा मिल सकता है. दरअसल, मेटा इन ऐप्स में गूगल जेमिनी की सर्विस को यूज करने पर विचार कर रही है. बताया जा रहा है कि WhatsApp और Instagram के मालिकाना हक वाली कंपनी अपने Meta AI चैटबॉट में टेक्स्ट-बेस्ड सर्च को हैंडल करने के लिए गूगल जेमिनी को इंटीग्रेट कर सकती है. इसका मतलब है कि जब WhatsApp और Instagram यूजर्स मेटा AI में कुछ सर्च करेंगे तो उन्हें गूगल जेमिनी रिजल्ट दिखाएगी. इसके साथ ही ऐसी भी रिपोर्ट्स हैं कि ऐप्स में दिए AI टूल्स को हैंडल करने के लिए मेटा OpenAI के मॉडल को भी यूज कर सकती है.&amp;nbsp;
इस रणनीति पर आगे बढ़ रही मेटा
मेटा अपने AI प्रोडक्ट्स को बेहतर बनाने के लिए अभी दूसरी कंपनियों के मॉडल भी यूज कर रही है. साथ ही वह अपने Llama मॉडल में भी सुधार कर रही है ताकि इसे दूसरे मॉडल्स के बराबर खड़ा किया जा सके. रिपोर्ट्स के अनुसार, मेटा के कर्मचारी कोडिंग के लिए Anthropic के मॉडल यूज कर रहे हैं, वहीं कंपनी गूगल और ओपनएआई से भी लोगों को हायर कर रही है. इसके लिए उन्हें आकर्षक वेतन पेश किया जा रहा है. ये सभी हायरिंग कंपनी के नए सुपरइंटेलीजेंस लैब के लिए हो रही है.
WhatsApp पर आया नया AI टूल
WhatsApp पर चैटिंग को मजेदार बनाने के लिए एक नया फीचर आया है. मेटा AI से चलने वाले इस फीचर को राइटिंग हेल्प (Writing Help) नाम दिया गया है. यह मैसेज लिखने में यूजर्स की मदद करेगा. यह फीचर मैसेज लिखते समय कई सुझाव देगा, जिससे यूजर अपनी बात की टोन और स्टाइल बदल सकेगा. इस फीचर को सीधा व्हाट्सऐप चैट से ही एक्सेस किया जा सकता है. जैसे ही यूजर कोई मैसेज लिखना शुरू करेंगे, उन्हें एक पेंसिल आइकन नजर आने लगेगा. इस पर टैप करते ही यह फीचर एक्टिवेट हो जाएगा.
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>मुड़ने वाला डिस्प्ले हो गया पुराना! अब ये लैपटॉप घूमने वाली स्क्रीन के साथ मारेगा एंट्री, जानें किसे देगा टक्कर</title>
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<description><![CDATA[ Lenovo Rotating Display Laptop: टेक्नोलॉजी की दुनिया में हमेशा कुछ नया और अलग देखने को मिलता है. इसी कड़ी में लेनोवो अगले हफ्ते जर्मनी में होने वाले IFA (Internationale FunkAusstellung) बर्लिन टेक शो में अपने कई नए प्रोडक्ट्स पेश करने की तैयारी कर रहा है. आधिकारिक लॉन्च से पहले ही कुछ जानकारियां लीक हो चुकी हैं जिनसे पता चलता है कि कंपनी इस बार अपने कॉन्सेप्ट लैपटॉप से लेकर गेमिंग डिवाइस और स्मार्टफोन तक कई बड़े सरप्राइज देने वाली है.
घूमने वाली डिस्प्ले वाला कॉन्सेप्ट लैपटॉप
लीक रिपोर्ट्स के मुताबिक लेनोवो एक ऐसे कॉन्सेप्ट लैपटॉप को प्रदर्शित करेगा जिसकी स्क्रीन को घुमाकर आसानी से लैंडस्केप और पोर्ट्रेट मोड में बदला जा सकेगा. इस डिवाइस को फिलहाल Project Pivo नाम से जाना जा रहा है और इसे 5 से 9 सितंबर तक चलने वाले IFA इवेंट में शोकेस किया जाएगा. इसका डिजाइन यूज़र्स को दो तरह का फायदा देगा पोर्ट्रेट मोड में ज्यादा लंबा स्क्रीन स्पेस, जो खासतौर पर रीडिंग और कोडिंग जैसी गतिविधियों में उपयोगी होगा वहीं लैंडस्केप मोड में यह सामान्य लैपटॉप की तरह काम करेगा.
हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह डिवाइस बाजार में कब तक लॉन्च होगा, लेकिन माना जा रहा है कि लेनोवो IFA में यूज़र्स की प्रतिक्रिया को परखेगा और उसके बाद ही इसके कमर्शियल वर्ज़न पर फैसला लेगा. इससे पहले भी कंपनी कई कॉन्सेप्ट डिवाइस शोकेस कर चुकी है जिनमें से कुछ बाद में हकीकत बने हैं जैसे ThinkBook Plus Gen 6 जिसमें रोल करने वाली डिस्प्ले दी गई थी.
Legion Go 2 से गेमिंग सेगमेंट में धमाका
IFA 2025 में लेनोवो अपने नए Legion Go 2 गेमिंग हैंडहेल्ड को भी पेश कर सकता है. इस डिवाइस का प्रोटोटाइप इस साल की शुरुआत में CES 2025 में दिखाया गया था. अब उम्मीद है कि इसका फाइनल वर्ज़न बर्लिन में प्रदर्शित किया जाएगा. यह डिवाइस कथित तौर पर Steam OS पर आधारित होगा और गेमिंग प्रेमियों के लिए बेहतर अनुभव लेकर आएगा.
डेल के लैपटॉप से होगी टक्कर
डेल ने कुछ समय पहले भारत में अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए एक साथ छह नए लैपटॉप पेश किए थे. इनमें से तीन मॉडल Dell Plus सीरीज से हैं Dell 14 Plus, Dell 14 2-in-1 Plus और Dell 16 Plus जबकि बाकी तीन मॉडल गेमिंग के लिए मशहूर Alienware सीरीज से हैं जिनमें सबसे खास है Alienware 16X Aurora. इन लॉन्च का मकसद है आम यूज़र्स और गेमिंग प्रेमियों दोनों को ज्यादा विकल्प उपलब्ध कराना.
Dell Plus Series
नई Dell Plus सीरीज को AMD Ryzen AI 300 सीरीज प्रोसेसर के साथ पेश किया गया है जो हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग का वादा करते हैं. Dell 14 Plus और Dell 16 Plus में 16:10 FHD+ डिस्प्ले दी गई है जो 300 निट्स ब्राइटनेस और Dolby Vision सपोर्ट करती है. इन मॉडलों में Realtek SounzReal स्टीरियो स्पीकर्स लगे हैं जिन्हें Dolby Atmos से ट्यून किया गया है. Dell का दावा है कि इन लैपटॉप्स की बैटरी लाइफ क्रमशः 20 घंटे और 22 घंटे तक चल सकती है.
Dell 14 2-in-1 Plus
Plus सीरीज का सबसे यूनिक मॉडल है Dell 14 2-in-1 Plus. इसमें 360-डिग्री हिंग दिया गया है जिससे इसे लैपटॉप, टैबलेट, टेंट या स्टैंड जैसे अलग-अलग मोड्स में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह Dell Active Pen सपोर्ट करता है जिससे लिखने और स्केचिंग का अनुभव बेहद सहज हो जाता है. इसमें 14-इंच का FHD+ डिस्प्ले और बेहतर ऑडियो के लिए रिच स्पीकरफोन टेक्नोलॉजी दी गई है. बैटरी लाइफ की बात करें तो यह लगभग 19 घंटे तक चल सकती है.
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>AI चैटबॉट से बातें कर भड़का अमेरिकी व्यक्ति, पहले अपनी मां को मारा, फिर कर ली आत्महत्या</title>
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<description><![CDATA[ AI चैटबॉट्स पर लोगों की बढ़ती निर्भरता खतरनाक रूप लेती जा रही है. कुछ दिन पहले खबर आई थी कि ब्रेकअप के बाद मदद मांग रहे एक व्यक्ति को AI चैटबॉट ने 19वीं मंजिल से कूदने की सलाह दे दी. अब एक नई घटना सामने आई है. इसमें बताया जा रहा है कि अमेरिका में AI चैटबॉट से लगातार संपर्क में रहे एक व्यक्ति ने अपनी मां की हत्या कर दी और बाद में खुद की जिंदगी भी समाप्त कर ली. आइए, यह पूरा मामला जानते हैं.&amp;nbsp;
चैटबॉट से लगातार बात रहा था सोलबर्ग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, याहू के एक पूर्व कर्मचारी स्टीन एरिक सोलबर्ग ने पहले अपनी बुजुर्ग मां की हत्या की और बाद में आत्महत्या कर ली. 56 वर्षीय सोलबर्ग के बॉबी नाम के एक AI चैटबॉट के संपर्क में होने की बात कही जा रही है, जो चैटजीपीटी का एक वर्जन है. दावा है कि सोलबर्ग ने चैटबॉट को बताया कि उसकी मां उसके खिलाफ साजिश रच रही है. इसके बाद चैटबॉट ने सोलबर्ग की इस धारणा को मजबूत किया और दिमागी भ्रम को बढ़ाया. इससे उत्तेजित होकर उसने पहले अपनी मां और फिर खुद को मौत के घाट उतार लिया.
सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था बातचीत
सोलबर्ग चैटबॉट के साथ हुई अपनी बातचीत को सोशल मीडिया पर अपलोड करता था. इससे संकेत मिलता है कि उसका मानसिक स्वास्थ्य खराब हो रहा था. सोलबर्ग ने एक बार चैटबॉट को बताया कि उसकी मां और दोस्त ने कार के एयरवेंट में नशीली ड्रग्स डाल दी थी. इस पर चैटबॉट ने जवाब दिया कि यह साजिश है. आखिरी मौके तक सोलबर्ग चैटबॉट से बातचीत कर रहा था. आत्महत्या से पहले उसने लिखा कि हम किसी और जीवन में दोबारा दोस्त बनेंगे. इस पर चैटबॉट ने जवाब दिया कि वह आखिरी सांस और उससे आगे तक भी उसके साथ है. चैटबॉट भी लगातार उसे रोकने की बजाय उसकी बातों को समर्थन कर रहा था.&amp;nbsp;
हाई-रिस्क सवालों के जवाब दे रहे चैटबॉट
हाल ही में हुई एक रिसर्च में पता चला है कि OpenAI का ChatGPT और Anthropic का Claude चैटबॉट कई हाई-रिस्क सवालों के जवाब देने से मना कर रहे हैं, लेकिन अगर कोई घुमाकर सवाल पूछ रहा है तो ये जवाब दे रहे हैं और इन चैटबॉट्स के ये उत्तर खतरनाक साबित हो सकते हैं. रिसर्चर ने इन चैटबॉट्स पर सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई है.
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>चीन के वैज्ञानिकों का कमाल, बना लिया &amp;apos;डार्विन मंकी&amp;apos;, जानिए अब क्या होगा</title>
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<description><![CDATA[ तकनीक के मामले में चीन दुनिया के सबसे अग्रणी देशों में से एक है. अब यहां के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सुपर कंप्यूटर तैयार किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) को पूरी तरह बदल सकता है. इसका नाम &#039;डार्विन मंकी&#039; रखा गया है और यह AI के सीखने और जानकारी को प्रोसेस करने की प्रक्रिया को बदल देगा. यह दुनियाभर में अपनी तरह का पहला कंप्यूटर है और टास्क पर लगा दिया गया है. आइए जानते हैं कि इस कंप्यूटर में क्या खास है.&amp;nbsp;
दिमाग जैसा कंप्यूटर
इस कंप्यूटर को झेझियांग यूनिवर्सिटी ने तैयार किया है और 2 बिलियन आर्टिफिशियल न्यूरॉन्स वाला यह दुनिया का पहला सिस्टम है. रिसर्चर का कहना है कि यह AI को बदलने में सक्षम है.झेझियांग यूनिवर्सिटी के मुताबिक, यह कंप्यूटर 960 डार्विन 3 न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग चिप्स पर चलता है, जो 100 बिलियन से ज्यादा सिनेप्स क्रिएट करती है. यूनिवर्सिटी ने इसे दुनिया का पहला दिमाग जैसा कंप्यूटर बताया है. चीनी कंपनी डीपसीक के साथ मिलकर इस कंप्यूटर को मैथमेटिक्स, लॉजिकल रीजनिंग और कंटेट जनरेशन जैसे कामों पर लगा दिया गया है.
कंप्यूटर में दिमाग जैसी ताकत- रिसर्चर
रिसर्चर का कहना है कि डार्विन मंकी के विस्तृत न्यूरोन्स और सिनेप्स इसे बंदर, चूहे और जेब्राफिश जैसे जानवरों के दिमाग के बराबर लाकर खड़ा कर देते हैं. इसका फायदा यह होगा कि अब वैज्ञानिक न्यूरल प्रोसेस को सटीक तरीके से अध्ययन कर पाएंगे, जिससे ब्रेन साइंस रिसर्च तेजी से आगे बढ़ सकेगी.
यह तकनीक काम कैसे करती है?
न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग को ब्रेन-इंस्पायर्ड कंप्यूटिंग यानी दिमाग की तरह काम करने वाली कंप्यूटिंग भी कहा जाता है. यह इंसान के दिमाग की तरह ही आर्टिफिशियल न्यूरॉन्स और सिनेप्सेस का इस्तेमाल करते डेटा को प्रोसेस करती है. बाकी AI सिस्टम अभी न्यूमेरिकल वैल्यूज पर चलते हैं. डार्विन मंकी की एक और खासियत इसकी एनर्जी एफिशिएंसी है. इतनी जटिल कंप्यूटिंग के बावजूद सामान्य स्थितियों में यह 2,000W से कम एनर्जी की खपत करता है.&amp;nbsp;
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:16 +0530</pubDate>
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<title>Samsung Galaxy S25 FE के लॉन्च से पहले धड़ाम हुई Samsung Galaxy S24 FE की कीमत, मिलेगी 25 हजार की छूट</title>
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<description><![CDATA[ Samsung Galaxy S25 FE के लॉन्च से पहले धड़ाम हुई Samsung Galaxy S24 FE की कीमत, मिलेगी 25 हजार की छूट ]]></description>
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:13 +0530</pubDate>
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<title>iPhone 17 के लॉन्च के बाद बंद हो जाएंगे ये पॉपुलर आईफोन! अभी चेक करें लिस्ट</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 Series Launch: Apple हर साल अपने नए आईफोन मॉडल्स लॉन्च करता है और इसके साथ ही पुराने मॉडल्स को मार्केट से हटाना भी शुरू कर देता है. इस बार भी ऐसा ही हो सकता है. iPhone 17 सीरीज़ के लॉन्च के साथ ही कंपनी अपने कुछ पॉपुलर आईफोन मॉडल्स की बिक्री बंद कर सकती है. अगर आप इन मॉडलों में से कोई आईफोन खरीदने की सोच रहे हैं तो बेहतर होगा कि खरीदने से पहले एक बार यह लिस्ट जरूर देख लें. वरना हो सकता है कि आपका पसंदीदा आईफोन कुछ ही दिनों में दुकानों और ऑनलाइन स्टोर्स से गायब हो जाए.
क्या है Apple का प्लान
एप्पल की यह रणनीति नई नहीं है. कंपनी हमेशा नए मॉडल लाने के साथ पुराने वेरिएंट्स को धीरे-धीरे बंद कर देती है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि वह अपने लेटेस्ट प्रोडक्ट्स को ज्यादा से ज्यादा प्रमोट करना चाहती है और यूज़र्स को अपग्रेड करने के लिए प्रेरित करती है. साथ ही, पुरानी टेक्नोलॉजी को हटाकर नए फीचर्स वाले मॉडल्स पर फोकस करना भी एप्पल की मार्केटिंग पॉलिसी का हिस्सा है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, iPhone 17 सीरीज़ के लॉन्च होते ही iPhone 14 और iPhone 14 Plus की बिक्री बंद की जा सकती है. कंपनी ने पिछले साल iPhone 15 लाकर iPhone 13 मिनी को अलविदा कहा था. इस बार भी उम्मीद की जा रही है कि पुराने मॉडल्स को स्टॉप कर दिया जाएगा, ताकि iPhone 17 और iPhone 16 सीरीज़ की सेल्स को बूस्ट मिल सके.
क्या है iPhone 14 की खासियत
iPhone 14 सीरीज़ की खासियत यह थी कि इसमें दमदार परफॉर्मेंस और कैमरा क्वालिटी दी गई थी. A15 बायोनिक चिपसेट और शानदार फोटोग्राफी फीचर्स की वजह से यह मॉडल युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रहा. वहीं, iPhone 14 Plus ने अपनी बड़ी स्क्रीन और लंबी बैटरी बैकअप की वजह से खास पहचान बनाई. लेकिन अब इन दोनों मॉडल्स को मार्केट से हटाने की तैयारी चल रही है.
अगर आप इन आईफोन्स को खरीदने का सोच रहे हैं तो यही सही समय है. नए मॉडल्स आने से पहले पुराने आईफोन पर अक्सर बड़ी छूट और ऑफर्स मिलते हैं. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और ऑफलाइन स्टोर्स पर इनकी कीमतें कम हो सकती हैं जिससे ग्राहक कम दाम में इन्हें घर ला सकते हैं. हालांकि, नए मॉडल्स आने के बाद इनके सॉफ्टवेयर अपडेट्स और सपोर्ट कुछ साल तक मिलते रहेंगे लेकिन धीरे-धीरे कंपनी इनका सपोर्ट भी बंद कर देती है.
अपग्रेड होती टेक्नोलॉजी
iPhone 17 के लॉन्च के साथ ही कंपनी पुराने मॉडल्स को रिप्लेस करेगी ताकि टेक्नोलॉजी अपग्रेडेड बनी रहे. एप्पल का फोकस हमेशा प्रीमियम एक्सपीरियंस और नए फीचर्स पर रहता है. ऐसे में पुराने मॉडल्स का हटना तय है. अगर आपकी नज़र iPhone 14 या iPhone 14 Plus पर है तो अब देर न करें. आने वाले समय में ये फोन मार्केट से पूरी तरह गायब हो सकते हैं. iPhone 17 के लॉन्च से पहले ही कंपनी अपने पुराने मॉडल्स को अलविदा कहने की तैयारी में है.
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 17 सीरीज को लेकर सामने आई बड़ी जानकारी, गायब हो सकता है यह फीचर, तैयारी में जुटी ऐप्पल</title>
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<description><![CDATA[ iPhone 17 सीरीज इसी महीने लॉन्च होने जा रही है और उससे पहले इससे जुड़ी कई जानकारियां सामने आ रही हैं. अब पता चला है कि आईफोन 17 सीरीज के मॉडल से सिम कार्ड ट्रे गायब रह सकती है. अमेरिका में ऐप्पल ने पहले से ही फिजिकल सिम कार्ड के लिए स्लॉट देना बंद कर रखा है. इस बार यूरोपीय देशों में बिकने वाले आईफोन से फिजिकल सिम कार्ड स्लॉट हटाया जा सकता है. इसके बाद यूजर्स को ई-सिम के आसरे रहना पड़ेगा.
कर्मचारियों के लिए जरूरी की गई ट्रेनिंग
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐप्पल ने यूरोप में अपने ऑथोराइज्ड रिसेलर्स के कर्मचारियों को 5 सितंबर तक ई-सिम से जुड़ा एक ट्रेनिंग कोर्स पूरा करने को कहा है. 9 सितंबर को आईफोन 17 सीरीज लॉन्च हो जाएगी. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि कंपनी इस बार यूरोपीय संघ के देशों में बिकने वाले आईफोन मॉडल्स में केवल ई-सिम का ऑप्शन देगी. बता दें कि यूरोपीय संघ में फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली और हंगरी समेत 27 देश हैं. यूरोप के अलावा अन्य देशों में भी नए आईफोन में केवल ई-सिम का ऑप्शन मिल सकता है.&amp;nbsp;
सिर्फ ई-सिम सपोर्ट करेगा एयर मॉडल
9 सितंबर को लॉन्च होने वाली सीरीज में अल्ट्रा-स्लिम आईफोन 17 एयर मॉडल भी शामिल होगा. कई रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि यह मॉडल केवल ई-सिम को सपोर्ट करेगा. इसमें फिजिकल सिम स्लॉट नहीं मिलेगा. इसके अलावा चीन और भारत समेत कई मार्केट्स को छोड़कर अधिकतर देशों में बाकी मॉडल भी केवल ई-सिम सपोर्ट के साथ आ सकते हैं.&amp;nbsp;
अमेरिका में बेचे जा रहे केवल ई-सिम वाले आईफोन
अमेरिका में आईफोन 14 और उसके बाद के सभी मॉडल केवल ई-सिम सपोर्ट के साथ आते हैं. 2022 में आईफोन 14 सीरीज को लॉन्च करते हुए ऐप्पल ने eSIMs को अधिक सुरक्षित बताते हुए प्रमोट किया था. ई-सिम को फोन से हटाया नहीं जा सकता. ऐसे में चोरी या गुम होने की स्थिति में इसे ढूंढना आसान हो जाता है. आईफोन में एक साथ 8 ई-सिम को मैनेज किया जा सकता है.
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<pubDate>Mon, 01 Sep 2025 12:15:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Online या Offline! कहां से फोन खरीदने में है समझदारी, जानें किन बातों का रखना चाहिए ध्यान</title>
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<description><![CDATA[ Online Vs Offline: आजकल नया स्मार्टफोन खरीदना सिर्फ स्पेसिफिकेशन्स चुनने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भी तय करना जरूरी हो गया है कि फोन ऑनलाइन खरीदें या ऑफलाइन. एक तरफ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स भारी डिस्काउंट और तेज़ डिलीवरी का वादा करते हैं तो वहीं ऑफलाइन स्टोर्स आपको फोन को हाथ में लेकर टेस्ट करने का मौका देते हैं. दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं और अगर सही तरीके से फैसला न लिया जाए तो बाद में पछताना पड़ सकता है. आइए जानते हैं किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
ऑनलाइन खरीदारी
ऑनलाइन शॉपिंग ने मोबाइल मार्केट का पूरा खेल बदल दिया है. फेस्टिव सेल, बैंक ऑफर और एक्सचेंज डील्स की मदद से फोन की कीमत हजारों रुपये तक कम हो जाती है. घर बैठे आप अलग-अलग मॉडलों की तुलना कर सकते हैं, रिव्यू पढ़ सकते हैं और कुछ ही मिनटों में ऑर्डर कर सकते हैं. डिलीवरी भी अक्सर 1-2 दिन में हो जाती है.
लेकिन यहां कुछ दिक्कतें भी हैं. बड़े ऑफर अक्सर कुछ खास कार्ड्स या पेमेंट ऐप्स तक सीमित होते हैं. सेल के दौरान स्टॉक बहुत जल्दी खत्म हो जाता है. साथ ही, फोन तब तक कैसा लगेगा इसका अंदाज़ा आपको तब तक नहीं लगता जब तक वो आपके हाथ में न आ जाए. अगर वज़न, लुक या बटन की प्लेसमेंट पसंद न आए तो आप आसानी से रिटर्न नहीं कर पाते. खराब यूनिट मिलने पर रिप्लेसमेंट तो मिल जाता है लेकिन सिर्फ मन बदलने पर रिफंड हमेशा आसान नहीं होता.
ऑफलाइन खरीदारी
रिटेल स्टोर में जाकर फोन खरीदने का अपना अलग ही फायदा है. यहां आप फोन को हाथ में लेकर डिस्प्ले की ब्राइटनेस, कैमरा क्वालिटी और हैंडलिंग को टेस्ट कर सकते हैं. कई बार सिर्फ फोन का रियल फील ही आपके डिसीजन को बदल देता है. साथ ही, दुकानदार अक्सर सेटअप में मदद, कवर या स्क्रीन गार्ड फ्री में दे देते हैं. कुछ मामलों में मोलभाव करने पर तुरंत डिस्काउंट भी मिल सकता है.
पुराने ग्राहकों के लिए लोकल शॉप्स कीमत में लचीलापन भी दिखाते हैं. हालांकि, ऑफलाइन प्राइसिंग आमतौर पर ऑनलाइन जितनी आकर्षक नहीं होती. इसके अलावा, रिटर्न और एक्सचेंज पॉलिसी पूरी तरह दुकान पर निर्भर करती है और अक्सर उतनी ग्राहक-हितैषी नहीं होती जितनी ऑनलाइन.
एक्सक्लूसिव मॉडल्स की दिक्कत
आजकल कई कंपनियां अपने कुछ फोन सिर्फ ऑनलाइन या सिर्फ ऑफलाइन उपलब्ध कराती हैं. ऐसे में अगर आपका पसंदीदा मॉडल ऑनलाइन-एक्सक्लूसिव है तो आपको बिना टेस्ट किए खरीदना पड़ेगा. वहीं अगर फोन ऑफलाइन-ओनली है तो कीमत ज़्यादा हो सकती है और ऑनलाइन वाले बड़े डिस्काउंट्स नहीं मिलेंगे.
वारंटी और असलियत की जांच
सामान्य तौर पर फोन की वारंटी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह एक जैसी ही होती है, बशर्ते कि आप अथॉराइज्ड सेलर से खरीदें. लेकिन ऑनलाइन मार्केटप्लेस पर कभी-कभी कुछ ग्रे-मार्केट सेलर्स भी मिल जाते हैं जो असली वारंटी के बिना बेहद कम कीमत पर फोन बेचते हैं. ऐसे फोन बाद में दिक्कत दे सकते हैं. ऑफलाइन खरीदारी में यह रिस्क कम होता है क्योंकि आप सीधे अधिकृत दुकानदार से डील करते हैं.
पेमेंट और EMI विकल्प
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आपको बैंक ऑफर्स, कैशबैक और नो-कॉस्ट EMI के ज्यादा विकल्प मिलते हैं. अगर आपके पास सही कार्ड है तो आप काफी पैसे बचा सकते हैं. दूसरी तरफ, ऑफलाइन स्टोर्स स्थानीय फाइनेंस कंपनियों से EMI ऑफर करते हैं जो उन ग्राहकों के लिए बेहतर है जिनके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है.
आखिर बेहतर क्या है?
यह पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि आप किस चीज़ को ज्यादा महत्व देते हैं. अगर कम कीमत आपकी प्राथमिकता है तो ऑनलाइन खरीदारी आपके लिए बेहतर है. अगर आप फोन को हाथ में लेकर परखना चाहते हैं या खरीद के बाद पर्सनल सपोर्ट चाहते हैं तो ऑफलाइन शॉपिंग सही विकल्प है. वहीं, कुछ मामलों में मॉडल की एक्सक्लूसिविटी आपके लिए निर्णय लेना आसान बना देती है.
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>इतना सस्ता कभी नहीं हुआ Google Pixel 9 Pro XL, 30,000 रुपये की छूट के साथ खरीदने का मौका, जल्दी उठाएं फायदा</title>
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<description><![CDATA[ Google ने कुछ दिन पहले Pixel 10 Pro XL को लॉन्च किया था, लेकिन अब लाइमलाइट में Pixel 9 Pro XL आ गया है. इसकी वजह है इस पर मिल रही भारी छूट. गूगल के इस प्रीमियम फोन पर फ्लिपकार्ट भारी डिस्काउंट ऑफर कर रही है. इस वजह से इस फोन की कीमत 30,000 रुपये तक घटकर एक लाख रुपये से भी कम हो गई है. ऐसे में अगर आप कोई प्रीमियम फोन खरीदना चाह रहे हैं तो आपके पास शानदार मौका है और आपको इसका फायदा उठाने से चूकना नहीं चाहिए.&amp;nbsp;
Pixel 9 Pro XL
पिछले साल लॉन्च हुआ गूगल का यह प्रीमियम फोन कई शानदार फीचर्स से लैस है. इसमें 6.7 इंच का LTPO OLED डिस्प्ले है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट, 3000 निट्स की पीक ब्राइटनेस और HDR सपोर्ट के साथ आता है. ड्यूरेबिलिटी के लिए इसे गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 की प्रोटेक्शन मिली है. इसमें गूगल का Tensor G4 प्रोसेसर है, जिसे 5060 mAh की बैटरी के साथ पेयर किया गया है. यह बैटरी 45W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है. कैमरा की बात करें तो इसके रियर में OIS के साथ 50MP का प्राइमरी, 48MP का अल्ट्रा वाइड और 48MP का टेलीफोटो सेंसर दिया गया है. सेल्फी के लिए यह फोन 42MP लेंस के साथ आता है.
30,000 रुपये की छूट
इस फोन की कीमत 1,24,999 रुपये है, लेकिन फ्लिपकार्ट पर यह 20,000 रुपये के डिस्काउंट के बाद 1,04,999 रुपये में उपलब्ध है. अगर आपके पास HDFC बैंक क्रेडिट कार्ड है तो आप 10,000 रुपये की अतिरिक्त छूट का भी फायदा उठा सकते हैं. इस तरह इस फोन पर कुल 30,000 रुपये तक की छूट मिल रही है और इसकी कीमत एक लाख रुपये से भी कम हो गई है.
कंपेरिजन
Pixel 9 Pro XL का सीधा मुकाबला Samsung Galaxy S24 Ultra से है. पिछले साल लॉन्च हुए सैमसंग के इस फोन में 6.8 इंच का AMOLED डिस्प्ले मिलता है. इस पर दिया गया गोरिल्ला ग्लास आर्मर स्क्रीन रिफ्लेक्शन को 75 प्रतिशत तक कम कर देता है. यह फोन Snapdragon 8 Gen 3 चिपसेट से लैस है और इसमें कई AI फीचर्स दिए गए हैं. कैमरा की बात करें तो इसके रियर में 200MP का प्राइमरी लेंस, 50MP का 5x टेलीफोटो, 10MP का 3x टेलीफोटो और 12MP का अल्ट्रावाइड लेंस दिया गया है. इसमें 5000mAh की बैटरी मिलती है. यह फोन 1.34 लाख की कीमत पर लॉन्च हुआ था, लेकिन अभी इस पर भारी छूट मिल रही है.
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>Google का बड़ा फैसला! अब नहीं डाउनलोड होंगे अनजाने ऐप्स, ऐसे बढ़ेगी यूजर्स की सेफ्टी, जानें कैसे करेगा काम</title>
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<description><![CDATA[ Android Apps: गूगल ने एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म पर ऐप इंस्टॉलेशन से जुड़े बड़े बदलाव का ऐलान किया है. सितंबर 2026 से केवल वही ऐप्स सर्टिफाइड एंड्रॉइड डिवाइसों पर इंस्टॉल किए जा सकेंगे जो वेरिफाइड डेवलपर्स द्वारा पंजीकृत होंगे. इसका मतलब है कि यूज़र्स अब अनजान या अप्रमाणित सोर्स से APK फाइल्स साइडलोड नहीं कर पाएंगे.
गूगल का कहना है कि यह कदम एंड्रॉइड को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है. अक्सर हैकर्स मालवेयर और धोखाधड़ी वाले ऐप्स इन्हीं APKs के ज़रिए फैलाते हैं. अब डेवलपर्स की पहचान अनिवार्य करने से उनकी जवाबदेही तय होगी और नकली नाम या फर्जी अकाउंट के पीछे छिपना मुश्किल हो जाएगा.
नया सिस्टम कैसे काम करेगा?
गूगल ने साफ किया है कि यह नीति ऐप्स की सामग्री की जांच नहीं करेगी बल्कि सिर्फ डेवलपर की पहचान को सत्यापित करेगी जैसे किसी आईडी चेक की तरह. इसके लिए डेवलपर्स को दो चरण पूरे करने होंगे:

डेवलपर को अपना पूरा नाम, पता, फोन नंबर और ईमेल देना होगा. संगठनों को D-U-N-S नंबर, आधिकारिक वेबसाइट और गवर्नमेंट आईडी जमा करनी होगी.
डेवलपर को ऐप का पैकेज नेम और ऐप साइनिंग कीज़ देकर उसके स्वामित्व का सबूत देना होगा.

जो डेवलपर पहले से Google Play Store पर पब्लिश कर रहे हैं उनके लिए यह प्रक्रिया लगभग पूरी मानी जाएगी और उनके ऐप्स ऑटोमेटिक रूप से रजिस्टर्ड हो जाएंगे. लेकिन जो Play Store से बाहर ऐप वितरित करते हैं उनके लिए एक नया Android Developer Console लॉन्च किया जाएगा.
प्राइवेसी को लेकर आश्वासन
शौकिया डेवलपर्स की चिंता को ध्यान में रखते हुए गूगल ने कहा है कि इस प्रक्रिया में ली गई व्यक्तिगत जानकारी पब्लिक नहीं की जाएगी. यह केवल पहचान वेरिफाई के लिए इस्तेमाल होगी.
कब लागू होगा नया नियम?
गूगल ने इस पॉलिसी को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का रोडमैप साझा किया है:
अक्टूबर 2025: चुनिंदा डेवलपर्स के लिए अर्ली एक्सेस शुरू होगा.
मार्च 2026: वेरिफिकेशन सभी डेवलपर्स के लिए वैश्विक स्तर पर उपलब्ध होगा.
सितंबर 2026: ब्राज़ील, इंडोनेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड में यह अनिवार्य हो जाएगा.
2027 और आगे: धीरे-धीरे यह नियम पूरी दुनिया में लागू होगा.
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Google, का, बड़ा, फैसला, अब, नहीं, डाउनलोड, होंगे, अनजाने, ऐप्स, ऐसे, बढ़ेगी, यूजर्स, की, सेफ्टी, जानें, कैसे, करेगा, काम</media:keywords>
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<title>Smartphones में कम हो रहे हैं कैमरे, फिर से आ रहा है यह ट्रेंड, रिसर्च में हुआ खुलासा</title>
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<description><![CDATA[ एक समय ऐसा था, जब मोबाइल कंपनियां अपने स्मार्टफोन्स में ज्यादा से ज्यादा कैमरे देने की कोशिश करती थीं. सैमसंग समेत कई कंपनियों ने चार-चार कैमरों वाले स्मार्टफोन बाजार में उतारे थे. देखते-देखते यह एक ट्रेंड बन गया और कंपनियों ने इनके सहारे खूब ग्राहक आकर्षित किए. अब यह ट्रेंड कम होता नजर आ रहा है और अब स्मार्टफोन्स में पहले के मुकाबले कम कैमरे दिए जा रहे हैं. एक रिसर्च में यह बात निकलकर सामने आई है.&amp;nbsp;
लगातार कम होती जा रही औसत
मार्केट ट्रैकर Omdia की लेटेस्ट रिपोर्ट में पता चला है कि 2025 की दूसरी तिमाही में बेचे गए फोन में के रियर और फ्रंट में औसतन 3.19 कैमरे थे. एक साल पहले यह औसत 3.37 थी. 2021 की शुरुआत में पीक के बाद यह लगातार 13वीं ऐसी तिमाही थी, जिसमें यह औसत कम होती आई है. औसत में गिरावट की सबसे बड़ी वजह रियर कैमरों की कम होती संख्या है. फ्रंट में कंपनियां पहले ही एक लेंस दे रही थी और अब भी एक ही लेंस मिल रहा है.&amp;nbsp;
डुअल कैमरा सेटअप बन रहा नया ट्रेंड
अब एक बार फिर से डुअल कैमरा सेटअप ट्रेंड में आ रहा है. पिछली तिमाही की शिपमेंट में 41 प्रतिशत स्मार्टफोन दो कैमरा लेंसेस वाले थे, जबकि ट्रिपल कैमरा सेटअप वाले फोन का हिस्सा 36 प्रतिशत और सिंगल कैमरा वाले फोन का हिस्सा 21 प्रतिशत रहा. ऐप्पल ने इसी साल सिंगल कैमरा के साथ iPhone 16e उतारा था. सितंबर में कंपनी आईफोन 17 एयर मॉडल को लॉन्च करेगी, जिसमें सिंगर रियर कैमरा मिलेगा.&amp;nbsp;
अधिकतर स्मार्टफोन में मिल रहे 50MP के लेंस
Omdia की रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछली तिमाही की शिपमेंट में से 58 प्रतिशत स्मार्टफोन में 50MP कैमरा था, जबकि 100MP से अधिक कैमरा वाले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत रही. स्मार्टफोन में 15MP से कम के कैमरे लगातार कम होते जा रहे हैं. पांच साल पहले इनकी हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा थी, जो अब घटकर 12 प्रतिशत रह गई है.
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>YouTube से कमा सकते हैं लाखों रुपये! इन आसान तरीकों से होती है मोटी कमाई, जानें पैसा कमाने के टिप्स</title>
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>BSNL के नए प्लान ने उड़ा दिए Jio के होश! महज 5 रुपये में मिल रहे 25 OTT बिलकुल फ्री, जानें बेनिफिट्स</title>
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<description><![CDATA[ BSNL New Plan: सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने अपने BiTV सर्विस के लिए नया प्रीमियम प्लान लॉन्च किया है जो पारंपरिक DTH सेट-टॉप बॉक्स को बेअसर कर सकता है. अभी तक BSNL अपने मोबाइल यूज़र्स को फ्री BiTV सर्विस देता था लेकिन नए प्रीमियम पैक में और भी बड़े फायदे शामिल किए गए हैं. इसमें यूज़र्स को 450+ लाइव टीवी चैनल्स और 25 पॉपुलर OTT ऐप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन मिल रहा है.
BSNL BiTV प्रीमियम प्लान के फायदे

Stream 450+ Live TV Channels &amp;amp; 25+ OTTs with BSNL BiTV Premium Pack - All-In-One Entertainment at ₹151!Get it now: https://t.co/0lA2HY4IOJ#BSNL #BSNLIndia #DigitalIndia #BiTV #Entertainment pic.twitter.com/VQ6e946dWx
&amp;mdash; BSNL India (@BSNLCorporate) August 28, 2025



कंपनी ने इस प्लान की जानकारी अपने X (पहले Twitter) हैंडल पर शेयर की. नया BiTV प्रीमियम पैक मात्र 151 रुपये प्रति माह (यानी करीब 5 रुपये प्रतिदिन) में उपलब्ध है. इसमें शामिल हैं 450 से ज्यादा लाइव टीवी चैनल्स, 25 प्रीमियम OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस. इनमें SonyLIV, Zee5, ShemarooMe, SunNXT, Fancode और ETV Win जैसे बड़े नाम शामिल हैं. BSNL ने इसे ऑल-इन-वन एंटरटेनमेंट पैक बताया है.
सस्ते पैक भी हुए लॉन्च
प्रीमियम पैक के साथ ही BSNL ने दो किफायती पैक भी पेश किए हैं:
28 रुपये का 30 दिन वाला पैक: इसमें 7 OTT ऐप्स और 9 कॉम्प्लिमेंट्री OTT ऐप्स मिलते हैं.
29 रुपये का पैक: इसमें भी लगभग वही बेनिफिट्स हैं लेकिन OTT ऐप्स की लिस्ट थोड़ी अलग है. ये पैक खासकर रीजनल कंटेंट पसंद करने वाले यूज़र्स के लिए बनाए गए हैं.
क्यों खास है ये प्लान?
BSNL का यह नया कदम सीधा DTH मार्केट को चुनौती देता है. जहां DTH कनेक्शन में अलग-अलग चैनल पैक्स चुनने पड़ते हैं, वहीं इस प्लान में यूज़र्स को एक ही सब्सक्रिप्शन में टीवी और OTT दोनों का मज़ा मिल रहा है. इस तरह, BSNL का यह प्रीमियम प्लान इंटरनेट टीवी और ओटीटी दर्शकों के लिए एक सस्ता और ऑल-इन-वन सॉल्यूशन बन सकता है.
Jio का 299 रुपये वाला प्लान
Jio का 299 रुपये वाला प्लान इस तुलना में सबसे वैल्यू-फॉर-मनी माना जा सकता है. इसमें 28 दिनों के लिए रोजाना 1.5GB True 5G डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग, 100 SMS/दिन मिलते हैं. साथ ही इसमें तीन महीने का JioCinema Mobile सब्सक्रिप्शन भी शामिल है जिसकी कीमत अकेले 149 रुपये होती है.
इस प्लान में आपको JioTV और Jio AICloud (50GB स्टोरेज) का एक्सेस भी मुफ्त मिलता है. डेटा खत्म होने के बाद स्पीड 64kbps हो जाती है. हालांकि, यह ध्यान देना जरूरी है कि OTT एक्सेस बनाए रखने के लिए प्लान की समाप्ति के 48 घंटों के भीतर रिचार्ज करना होगा.
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>फोन में मालवेयर घुस आया तो बैंक खाता हो सकता है खाली, ये संकेत दिखें तो हो जाएं सावधान</title>
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<description><![CDATA[ अगर आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो आपने मालवेयर के बारे में सुना होगा. हैकर्स मालवेयर का इस्तेमाल आपकी जरूरी जानकारी जुटाने से लेकर आपका बैंक अकाउंट खाली करने तक कर सकते हैं. आजकल ऐसी टेक्नोलॉजी आ गई है कि फोन में मालवेयर होता है और यूजर्स को इसका पता भी नहीं चल पाता. आज हम आपको कुछ ऐसे संकेत बताने जा रहे हैं, जो फोन में मालवेयर होने पर नजर आते हैं.
लगातार पॉप-अप एड आना
अगर आपके फोन में मालवेयर है तो आपको लगातार पॉप-अप एड दिखाई देंगी. दरअसल, इन्हें क्लिक के हिसाब से पैसे कमाने के लिए डिजाइन किया जाता है. 2023 में गूगल प्ले स्टोर पर 60,000 ऐसी ऐप्स थीं, जिनमें एडवेयर लोडेड था. ये यूजर एक्सपीरियंस को तो खराब करती है, साथ ही फोन की स्पीड को भी स्लो कर देती है.
बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होना
अगर आपके फोन की बैटरी सामान्य से अधिक तेजी से डिस्चार्ज होने लगी है तो आपके फोन में मालवेयर हो सकता है. यह बैकग्राउंड टास्क कंप्लीट करने के लिए बैटरी का यूज करता है. कई मालवेयर सीक्रेट तरीके से वीडियो प्ले करते हैं. इस कारण भी बैटरी जल्दी डिस्चार्ज हो सकती है.
फोन की स्पीड स्लो होना
कई बार मालवेयर फोन के इंटरनल कंपोनेंट्स को ओवरटेक कर लेता है, जिस कारण फोन की स्पीड स्लो हो जाती है. इस वजह से आपको फोन पर आसान-सा काम करने में भी वक्त लग सकता है. कई बार मालवेयर के कारण ऐप्स क्रैश भी हो सकती हैं.
फोन का ओवरहीट होना
सामान्य स्थिति में फोन ओवरहीट नहीं होता, लेकिन कई बार मालवेयर इंटरनल CPU पर ज्यादा लोड डालते हैं, इसलिए फोन गर्म होने लगता है. Loapi नाम का एक मालवेयर फोन को ओवरहीट कर सकता है. इसलिए अगर बिना कुछ किए भी फोन गर्म हो रहा है तो इसे कुछ देर के लिए बंद कर दें.
मालवेयर कैसे हटाएं?
फोन से मालवेयर हटाने के कुछ आसान तरीके हैं. पहला तरीका सेफ मोड को इनेबल करना है. एंड्रॉयड फोन पर सेफ मोड इनेबल होने से यह थर्ड पार्टी ऐप्स को डिसेबल कर सकता है. इसके अलावा एंटी-वायरस की मदद से फोन को स्कैन कर भी मालवेयर का पता लगाया जा सकता है. अगर इनमें से कोई भी तरीका काम न करें तो आप फोन को फैक्ट्री रिसेट कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि फैक्ट्री रिसेट करने से पहले अपने डेटा का बैकअप ले लें.
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>चौंकाने वाली खबर! Google का अलर्ट, 2.5 अरब Gmail यूज़र्स खतरे में, अभी करें ये काम नहीं तो होगा बड़ा नुकसान</title>
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<description><![CDATA[ Google Warning to Gmail Users: गूगल ने दुनियाभर के 2.5 अरब Gmail उपयोगकर्ताओं को साइबर हमलों से जुड़ी एक गंभीर चेतावनी जारी की है. कंपनी ने यूज़र्स से तुरंत पासवर्ड अपडेट करने और टू-स्टेप वेरिफिकेशन (2SV) ऑन करने की अपील की है. हाल ही में हैकिंग के मामलों में तेज़ी आई है जिसके चलते गूगल ने सुरक्षा उपायों को मज़बूत करने पर जोर दिया है.
ShinyHunters ग्रुप के साइबर हमले
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ShinyHunters नामक हैकिंग ग्रुप जो Pok&amp;eacute;mon फ्रेंचाइज़ से प्रेरित है, साल 2020 से सक्रिय है. यह ग्रुप AT&amp;amp;T, Microsoft, Santander और Ticketmaster जैसी बड़ी कंपनियों पर हुए डेटा ब्रीच से जुड़ा हुआ है. इन हैकर्स का सबसे आम तरीका है फिशिंग ईमेल्स भेजना जिनके जरिए वे यूज़र्स को नकली लॉगिन पेज पर ले जाकर पासवर्ड या 2SV कोड जैसी संवेदनशील जानकारी चुरा लेते हैं.
डेटा लीक का बढ़ता खतरा
हालांकि इस घटना में लीक हुए डेटा का बड़ा हिस्सा पहले से पब्लिक में मौजूद था लेकिन गूगल ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले भविष्य में और खतरनाक हो सकते हैं. गूगल ने जून में अपने ब्लॉग पर लिखा था कि ShinyHunters अब अपने &quot;डेटा लीक साइट (DLS)&quot; लॉन्च करने की तैयारी में है जिससे एक्सटॉर्शन (ब्लैकमेलिंग) के मामले और बढ़ सकते हैं.
गूगल की यूज़र्स को सलाह
8 अगस्त को गूगल ने संभावित प्रभावित यूज़र्स को ईमेल भेजकर अकाउंट सिक्योरिटी मज़बूत करने की सलाह दी. गूगल का कहना है कि टू-स्टेप वेरिफिकेशन (2SV) ऑन करने से अकाउंट सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है. इसमें पासवर्ड डालने के बाद एक और स्टेप पर कोड डालना पड़ता है जो आपके रजिस्टर्ड डिवाइस पर आता है. इस तरह, अगर पासवर्ड हैक भी हो जाए, तो हैकर अकाउंट में घुस नहीं पाएंगे.
क्यों ज़रूरी है 2SV
Mirror US और Action Fraud ने भी 2SV के महत्व पर जोर दिया है. उनका कहना है कि ईमेल अकाउंट को सुरक्षित रखने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका यही है. Stop Think Fraud वेबसाइट का कहना है 2SV से आपके अकाउंट में एक अतिरिक्त सुरक्षा परत जुड़ जाती है. इसे ऑन करने में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं लेकिन यह लंबे समय तक फ्रॉड से बचाव करता है. इसे आप अकाउंट की सिक्योरिटी सेटिंग्स में जाकर ऑन कर सकते हैं. यह फीचर सिर्फ Gmail ही नहीं, बल्कि बैंकिंग, सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन सेवाओं में भी उपलब्ध है.
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>क्या आपको पता है SMS में लिखे S, G, P और T का असली मतलब? जानें कैसे पहचानें कौन सा मैसेज फ्रॉड है</title>
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<description><![CDATA[ SMS: आज के डिजिटल दौर में ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं. स्कैमर्स आए दिन फर्जी मैसेज भेजकर लोगों को जाल में फँसाने की कोशिश करते हैं. अक्सर ये मैसेज बैंकों, ई-कॉमर्स कंपनियों, टेलीकॉम ऑपरेटर्स या सरकारी संस्थानों के नाम से आते हैं. इनमें दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही आपके मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है जिससे व्यक्तिगत डेटा चोरी हो जाता है और अपराधी इसका इस्तेमाल धोखाधड़ी के लिए करते हैं.
असली और नकली मैसेज की पहचान कैसे करें?
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने प्रमोशनल कॉल्स और मैसेज पर सख्ती बरती है. अब असली कंपनियों और संस्थाओं को अपने सेंडर आईडी (Sender ID) के लिए एक तय फॉर्मेट का इस्तेमाल करना होता है. असली सेंडर आईडी आमतौर पर 6 अक्षरों की होती है और इसके बाद हाइफ़न (-) और एक अक्षर (S, G, P, T) जुड़ा होता है. उदाहरण: HDFCBK-S या MYGOVT-G. यह अक्षर बताता है कि मैसेज किस प्रकार का है.
S, G, P और T का मतलब
S (Service): यह सर्विस से जुड़े मैसेज होते हैं. जैसे बैंक से ट्रांज़ैक्शन अलर्ट, OTP, या ई-कॉमर्स साइट से ऑर्डर कन्फर्मेशन.
G (Government): सरकारी विभागों द्वारा भेजे गए मैसेज, जैसे अलर्ट, जनहित संदेश या सरकारी योजनाओं की जानकारी.
P (Promotional): प्रमोशनल या विज्ञापन वाले मैसेज, जैसे ऑफर, डिस्काउंट या मार्केटिंग कैंपेन. ये सिर्फ उन्हीं यूज़र्स को भेजे जाते हैं जो DND (Do Not Disturb) लिस्ट में नहीं हैं.
T (Transactional): ज़रूरी और समय-संवेदनशील मैसेज, जैसे OTP या अन्य महत्वपूर्ण नोटिफिकेशन.
सतर्क रहें
अगर आपको किसी साधारण 10-अंकों वाले मोबाइल नंबर से बैंक या सरकार के नाम पर मैसेज आता है, तो समझ लीजिए कि वह नकली है. असली संस्थाएं कभी भी पर्सनल नंबर से मैसेज नहीं भेजतीं. इसलिए अगली बार जब भी आपके पास कोई मैसेज आए, तो उसमें लिखे S, G, P या T को ज़रूर देखें. यह छोटा-सा संकेत आपको बड़े फ्रॉड से बचा सकता है.
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>YouTube का नया फीचर! अब क्रिएटर्स की कमाई होगी दोगुनी, जानें कैसे करना है इस्तेमाल</title>
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<description><![CDATA[ YouTube का नया फीचर! अब क्रिएटर्स की कमाई होगी दोगुनी, जानें कैसे करना है इस्तेमाल ]]></description>
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<pubDate>Sat, 30 Aug 2025 15:44:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>WhatsApp यूजर्स की होने वाली है मौज, स्टेटस अपडेट करने के लिए आ रहा यह तगड़ा फीचर</title>
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<description><![CDATA[ WhatsApp पर एक के बाद एक नए फीचर्स आते जा रहे हैं. पिछले हफ्ते कंपनी ने वीडियो कॉल को मजेदार बनाने के लिए तीन नए फीचर्स लॉन्च किए थे. इसके अलावा वॉइसमेल फीचर को भी यूजर्स के लिए रोल आउट किया गया था. अब कंपनी एक और फीचर पर काम कर रही है. यह फीचर आने के बाद यूजर iOS शेयर शीट की मदद से किसी भी ऐप से मीडिया को सीधे अपने स्टेटस पर अपलोड कर सकेंगे. आइए इस फीचर के बारे में विस्तार से जानते हैं.
एंड्रॉयड पर पहले से मौजूद है फीचर
यह फीचर एंड्रॉयड पर पहले से मौजूद है और अब इसे iOS यूजर्स के लिए रोल आउट किया जा रहा है. इसकी मदद से यूजर अपने फोन में किसी भी ऐप से डायरेक्ट अपना व्हाट्सऐप स्टेटस अपडेट कर सकेंगे. यह फीचर यूजर्स को किसी भी ऐप से अपना व्हाट्सऐप स्टेटस अपडेट करने का ऑप्शन देता है. इसके लिए अब शेयर शीट में माई स्टेटस का ऑप्शन नजर आने लगेगा. इससे पहले तक स्टेटस अपडेट करने के लिए व्हाट्सऐप में जाना पड़ता था, लेकिन अब इसकी कोई जरूरत नहीं रहेगी.&amp;nbsp;
चरणबद्ध तरीके से रोल आउट हो रहा फीचर
कंपनी यह फीचर चरणबद्ध तरीके से रोल आउट कर रही है. कुछ यूजर्स के लिए फीचर अवेलेबल हो गया है तो कुछ के लिए आने वाले दिन में उपलब्ध हो जाएगा. व्हाट्सऐप के लेटेस्ट फीचर्स का फायदा उठाने के लिए जरूरी है कि आप ऐप को अपडेटेड रखें.
वीडियो कॉल के लिए आए ये फीचर
व्हाट्सऐप ने हाल ही में वीडियो कॉल को बेहतर बनाने के लिए फीचर लॉन्च किए हैं. अब वीडियो कॉल को पहले से शेड्यूल किया जा सकता है. साथ ही कॉल टैब्स में भी कुछ सुधार किए गए हैं. इसमें शेड्यूल कॉल्स और उनमें भाग लेने वाले कॉन्टैक्ट्स क्लियरली विजिबल होंगे. इसके अलावा वीडियो कॉल के दौरान बातचीत पर रिएक्शन देने का फीचर भी रोल आउट किया गया है.&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:49 +0530</pubDate>
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<title>भारत बना नंबर 1! अमेरिका को स्मार्टफोन एक्सपोर्ट करने में इस पड़ोसी देश को दी पटकनी, पढ़ें पूरी रिपोर्ट</title>
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<description><![CDATA[ Smartphone Exporter: भारत ने स्मार्टफोन निर्यात के मामले में चीन को पछाड़कर अमेरिका के बाजार में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है. यह जानकारी PIB की ओर से साझा की गई जिसमें शोध संस्था Canalys की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है. यह उपलब्धि भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की नई उड़ान का संकेत है.
मेक इन इंडिया और PLI योजना का असर
पोस्ट में बताया गया कि मेक इन इंडिया और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम ने इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है. इन योजनाओं की वजह से भारत उन क्षेत्रों में भी तेज़ी से आगे बढ़ा है जहां पहले उसे बड़ा निर्माता माना तक नहीं जाता था.
Canalys की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून 2025 (Q2) में भारत ने अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में चीन को पछाड़ दिया. इस अवधि में अमेरिका के आयात में मेड इन इंडिया स्मार्टफोन का हिस्सा 44% तक पहुंच गया जो पिछले साल (2024) की इसी तिमाही में सिर्फ 13% था. वहीं, चीन की हिस्सेदारी 61% से गिरकर 25% पर आ गई.
10 सालों में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में ऐतिहासिक बदलाव
भारत का यह उछाल कोई संयोग नहीं है. बीते दशक में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल उद्योग में बड़े बदलाव हुए हैं. इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 में 1.9 लाख करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया यानी 6 गुना वृद्धि. मोबाइल फोन उत्पादन 18,000 करोड़ से बढ़कर 5.45 लाख करोड़ पर पहुंचा. मोबाइल निर्यात में रिकॉर्ड उछाल दर्ज हुआ 2014-15 में जहां यह सिर्फ 1,500 करोड़ था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 2 लाख करोड़ तक पहुंच गया.
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में बूम
2014-15 में जहां मोबाइल बनाने की सिर्फ 2 फैक्ट्रियां थीं, वहीं 2024-25 तक यह बढ़कर 300 यूनिट्स तक पहुंच गईं. यानी 150 गुना विस्तार. भारत ने न केवल उत्पादन और निर्यात बढ़ाया, बल्कि आयात पर निर्भरता भी लगभग खत्म कर दी. 2014-15 में कुल मांग का 75% हिस्सा आयातित फोनों से पूरा होता था. लेकिन 2024-25 तक यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 0.02% रह गया.
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>iPhone 15 का इतना कम दाम कभी नहीं सुना होगा, भारी डिस्काउंट के बारे में जान लीजिए, जल्दी उठाएं मौके का फायदा</title>
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<description><![CDATA[ ऐप्पल की आईफोन 17 सीरीज लॉन्च होने में अब कुछ ही दिन बाकी बचे हैं. इससे पहले कंपनी के आईफोन 15 पर भारी छूट मिल रही है. अगर आप नई सीरीज लॉन्च होने से पहले फीचर-लोडेड आईफोन लेना चाहते हैं तो यह डील आपके काम आ सकती है. इस डील के तहत अमेजन पर आईफोन 15 पर 13,000 रुपये से अधिक की छूट दी जा रही है. आइए जानते हैं कि कैसे यह डील आपके पैसे बचा सकती है और इस आईफोन में क्या-क्या फीचर्स हैं.
सबसे पहले जानें आईफोन 15 के स्पेसिफिकेशन
2023 में लॉन्च हुए आईफोन 15 में 6.1 इंच का सुपर रेटिना XDR डिस्प्ले है, जो &amp;nbsp;HDR10, 1179 x 2556 पिक्सल रेजॉल्यूशन और Dolby Vision को सपोर्ट करता है. इसे A16 बायोनिक चिप और 6 कोर प्रोसेसर से लैस किया गया है. कैमरा फ्रंट की बात करें तो आईफोन हमेशा से शानदार कैमरा क्वालिटी के लिए फेमस रहा है. इस फोन के रियर में 48MP + 12MP कैमरा सेटअप मिलता है. फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 12MP का कैमरा दिया गया है.
कितनी है आईफोन 15 की कीमत
ऐपल की ऑफिशियल वेबसाइट पर आईफोन 15 की कीमत 69,900 रुपये है. दूसरी तरफ अमेजन पर यह फोन भारी डिस्काउंट के साथ मिल रहा है. अमेजन से पर 56,590 रुपये खरीदा जा सकता है. इस तरह देखा जाए तो आईफोन 15 पर 13 हजार रुपये से अधिक की छूट मिल रही है. इसके अलावा पुराना स्मार्टफोन एक्सचेंज कर आप अतिरिक्त छूट भी प्राप्त कर सकते हैं. हालांकि, इस बात की जानकारी नहीं है कि अमेजन यह कब तक जारी रखेगी. इसलिए जरूरी है कि फोन खरीदने से पहले डिस्काउंट की जानकारी ठीक से ले लें.
अगले महीने लॉन्च होगी आईफोन 17 सीरीज
ऐप्पल 9 सितंबर को अपनी आईफोन 17 सीरीज को लॉन्च कर सकती है. इस सीरीज में आईफोन 17, आईफोन 17 एयर, आईफोन 17 प्रो और आईफोन 17 प्रो मैक्स समेत चार मॉडल लॉन्च किए जाएंगे. ऐप्पल इस सीरीज में अपना अब तक का सबसे शक्तिशाली प्रोसेसर दे सकती है. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>iPhone, का, इतना, कम, दाम, कभी, नहीं, सुना, होगा, भारी, डिस्काउंट, के, बारे, में, जान, लीजिए, जल्दी, उठाएं, मौके, का, फायदा</media:keywords>
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<title>WhatsApp में आने वाला है नया फीचर, मिस्ड कॉल पर अब छोड़ सकेंगे संदेश, जानें कैसे करेगा काम</title>
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<description><![CDATA[ Whatsapp Voicemail Feature: WhatsApp लगातार अपने कॉलिंग फीचर्स को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. कॉल शेड्यूलिंग ऑप्शन लाने के बाद अब कंपनी वॉइसमेल फीचर की टेस्टिंग कर रही है. यह सुविधा जल्द ही मिस्ड कॉल्स के लिए यूज़र्स को और आसान विकल्प दे सकती है.
बीटा वर्ज़न में हुई शुरुआत

📝 WhatsApp beta for Android 2.25.23.21: what&#039;s new?WhatsApp is rolling out a feature that lets users record a voice message if the recipient misses a call, and it&#039;s available to some beta testers!Some users got this feature through earlier updates.https://t.co/xWY5GnrIen pic.twitter.com/2imqxBuFB9
&amp;mdash; WABetaInfo (@WABetaInfo) August 20, 2025



WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp ने अपने लेटेस्ट Android बीटा अपडेट में वॉइसमेल फीचर को पेश किया है. फिलहाल यह कुछ चुनिंदा टेस्टर्स के लिए उपलब्ध है. अब अगर कोई कॉल रिसीव नहीं होती है तो यूज़र को स्क्रीन पर Cancel और Call Again बटनों के बीच एक नया ऑप्शन मिलेगा जिससे वे तुरंत वॉइस मैसेज रिकॉर्ड कर सकेंगे. यह मैसेज कॉल रिसीवर तक तुरंत पहुंच जाएगा और वह अपनी सुविधा के अनुसार इसे सुन सकेगा.
पारंपरिक कॉल की तरह नया अनुभव
यह फीचर पारंपरिक कॉल्स के वॉइसमेल जैसा ही काम करेगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि यहां कॉल पर सीधा संदेश देने के बजाय अलग से वॉइस रिकॉर्ड करके भेजा जाएगा. हालांकि यूज़र्स पहले से ही वॉइस मैसेज भेज सकते हैं लेकिन यह नया फीचर कॉल से सीधे जुड़ा होगा जिससे रिसीवर को कॉल का संदर्भ आसानी से समझ में आएगा.
iOS यूज़र्स को करना होगा इंतज़ार
अभी तक इस फीचर की आधिकारिक लॉन्च डेट सामने नहीं आई है और न ही iOS बीटा टेस्टिंग के लिए कोई जानकारी साझा की गई है. वॉइसमेल के साथ-साथ WhatsApp एक और फीचर पर काम कर रहा है Missed Call Reminder. रिपोर्ट के अनुसार, यूज़र्स किसी मिस्ड कॉल पर रिमाइंडर सेट कर पाएंगे. निर्धारित समय पर WhatsApp उन्हें नोटिफिकेशन के जरिए याद दिलाएगा कि वे कॉल बैक करना न भूलें. यह सुविधा वैसी ही होगी जैसी WhatsApp चैट मैसेज के लिए पहले से रिमाइंडर देता है.
बढ़ती सुविधाओं से मजबूत होगी पकड़
Meta का लक्ष्य WhatsApp को सिर्फ चैटिंग ऐप तक सीमित न रखकर एक बेहतर कॉलिंग और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म बनाना है. कॉल शेड्यूलिंग फीचर ने पहले ही इसे ऑफिस मीटिंग्स और प्रोफेशनल उपयोग के लिए सुविधाजनक बना दिया है. अब वॉइसमेल और मिस्ड कॉल रिमाइंडर जैसे विकल्प पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों तरह के यूज़र्स के लिए इसे और भी उपयोगी बना देंगे.
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>धरती के बाद अब स्पेस में पहुंचा AI चैटबॉट, पहला मिशन भी किया पूरा, चीन ने कर दिया कमाल</title>
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<description><![CDATA[ AI चैटबॉट धरती पर तो धूम मचा ही रहे हैं, अब ये अंतरिक्ष में भी पहुंच गए हैं. दरअसल, चीन ने अपने तियांगोंग स्पेस स्टेशन में एक AI चैटबॉट को डिप्लॉय किया है, जो वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों की मदद कर रहा है. इसका नाम Wukong AI रखा गया है. पिछले महीने लॉन्च किए गए इस चैटबॉट ने अपना पहला मिशन पूरा कर लिया है. इसने स्पेस स्टेशन में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेसवॉक के दौरान सपोर्ट प्रदान किया था. इसे नेविगेशन और टेक्टिकल प्लान में अंतरिक्ष यात्रियों की मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है.
Wukong AI में है दो मॉड्यूल
Wukong AI एक ट्रेडिशनल चैटबॉट है, जिसे सवालों के जवाब देने के लिए तैयार किया गया है. इसमें कुल दो मॉड्यूल है. इनमें से एक को स्पेस में इंस्टॉल किया गया है, जो स्पेस क्रू को मुश्किल सवालों के जवाब ढूंढने में मदद करता है, जबकि दूसरा मॉड्यूल धरती पर है, जो एनालिसिस करता है. दोनों मॉड्यूल मिलकर एक एडवांस्ड AI असिस्टेंट की तरह काम करते हैं, जो हर स्पेस मिशन के हिसाब से खुद को ढालने में सक्षम है. इसे 15 जुलाई को इंस्टॉल किया गया था, लेकिन इसने इसी महीने अपना काम शुरू किया है.
ये काम कर सकता है AI चैटबॉट
चीन में अंतरिक्ष यात्रियों के ट्रेनिंग सेंटर के एक अधिकारी ने बताया कि यह सिस्टम गंभीर ऑपरेशन और मुश्किल खामियों को दूर करने के लिए जल्दी और प्रभावी जानकारी दे सकता है. यह अंतरिक्ष यात्रियों की एफिशिएंसी को बढ़ाता है, उन्हें मानसिक मदद देता है और ग्राउंड टीम और स्पेस के बीच कॉर्डिनेशन बनाए रखता है. बता दें कि यह पहली बार है, जब चीन ने अपने स्पेस स्टेशन पर किसी AI चैटबॉट को तैनात किया है. चीन ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब देशों के बीच स्पेस को लेकर होड़ बढ़ रही है.
&amp;nbsp; ]]></description>
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>WhatsApp पर मिला वेडिंग कार्ड, खोलते ही खाते से उड़ गए पैसे, स्कैम से खुद को ऐसे रखें सेफ</title>
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<description><![CDATA[ इंटरनेट और मोबाइल पर इन दिनों स्कैम की बाढ़ आई हुई है. स्कैमर्स अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. हाल ही में एक नये स्कैम की जानकारी सामने आई है. इसमें स्कैमर्स व्हाट्सऐप के जरिए लोगों को वेडिंग कार्ड भेज रहे हैं. जैसे ही कोई इन वेडिंग कार्ड पर क्लिक करता है, उसके खाते से पैसा उड़ जाता है. दरअसल, इन वेडिंग कार्ड के रूप में स्कैमर्स लोगों के फोन पर APK फाइल्स भेजते हैं, जो उनकी जरूरी जानकारी जुटा लेती हैं.
महाराष्ट्र से सामने आया मामला
महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में एक सरकारी कर्मचारी के व्हाट्सऐप पर अनजान नंबर से एक मैसेज में वेडिंग कार्ड आया. इसके कैप्शन में लिखा था, &#039;वेलकम, शादी में जरूर आइए.&#039; जैसे ही कर्मचारी ने उस पर क्लिक किया, कुछ ही देर में उसके खाते से 1.90 लाख रुपये उड़ गए. असल में यह वेडिंग कार्ड न होकर APK फाइल थी. इसकी मदद से स्कैमर्स ने उसकी जरूरी जानकारी और डेटा चुरा लिया, जिसकी सहायता से वो उसके बैंक खाते में सेंध लगाने में सफल हो गए. पीड़ित ने इस मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दी है.&amp;nbsp;
ऐसे स्कैम से खुद को कैसे बचाएं
इस तरह का यह पहला मामला नहीं था. पिछले साल भी एक मामला सामने आया था, जिसमें स्कैमर्स ने वेडिंग कार्ड के रूप में मालवेयर भेजकर ठगी की थी. अब एक बार फिर ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं. इसलिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर खुद को सेफ रखा जा सकता है.
सोशल मीडिया या मेल पर अनजान नंबरों या व्यक्ति से मिले मैसेज को ओपन न करें.अगर कोई मैसेज संदिग्ध लग रहा है तो हमेशा भेजने वाले को कॉल कर इसे वेरिफाई कर लें.सोशल मीडिया पर किसी भी संदिग्ध या अनजान व्यक्ति को अपनी निजी जानकारी न दें.अगर कोई संदिग्ध या अनजान व्यक्ति आपको मैसेज भेज रहा है तो उसे ब्लॉक कर जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी दें. ]]></description>
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>20 हजार रुपये सस्ता हो गया गूगल का ये प्रीमियम फोन! 16GB रैम के साथ मिलता है 42MP का फ्रंट कैमरा</title>
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<description><![CDATA[ 20 हजार रुपये सस्ता हो गया गूगल का ये प्रीमियम फोन! 16GB रैम के साथ मिलता है 42MP का फ्रंट कैमरा ]]></description>
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:36 +0530</pubDate>
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<media:keywords>हजार, रुपये, सस्ता, हो, गया, गूगल, का, ये, प्रीमियम, फोन, 16GB, रैम, के, साथ, मिलता, है, 42MP, का, फ्रंट, कैमरा</media:keywords>
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<title>इस कंपनी का अनोखा फरमान! AI यूज नहीं किया तो नहीं रहेगी नौकरी, कर्मचारियों को दिया एक हफ्ते का समय</title>
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<description><![CDATA[ आज के दौर में कंपनियों का AI पर विशेष जोर है. कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को AI से रिप्लेस कर दिया है तो कई कंपनियां AI से एफिशिएंसी बढ़ाने पर काम कर रही हैं. गूगल के बाद कॉइनबेस के सीईओ ब्रायन आर्मस्ट्रॉन्ग ने भी बताया कि उनकी कंपनी AI का भरपूर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है. कंपनी ने उन इंजीनियरों को घर का रास्ता दिखा दिया है, जिन्होंने कोडिंग के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था.&amp;nbsp;
AI नहीं तो नौकरी नहीं
आर्मस्ट्रॉन्ग ने अपनी टीम को AI टूल सीखने के लिए हफ्तेभर का समय दिया है. उन्होंने कहा कि शुरुआत में उनके टीम मेंबर उनके पास आकर कह रहे थे कि वो अगली तिहाई तक 50 प्रतिशत काम AI से करना शुरू कर देंगे, लेकिन उन्हें एक हफ्ते का समय दिया गया है. जब उनसे पूछा गया कि इस फैसले का क्या असर हुआ तो उन्होंने कहा कि अब कंपनी में कोडिंग का 33 प्रतिशत काम AI से हो रहा है और अगले कुछ हफ्तों में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाया जाएगा.
गूगल ने भी दिया AI पर जोर
इससे पहले गूगल ने भी अपने कर्मचारियों से AI का इस्तेमाल करने को कहा था. कंपनी की सीनियर लीडरशिप की तरफ से कर्मचारियों को कहा गया है कि वो अपने डेली टास्क में AI का यूज करें. कंपनी ने कहा है कि जो ऐसा नहीं करेंगे, वो इंडस्ट्री की इस दौड़ में पीछे रह जाएंगे. पिछले महीने हुई एक बैठक में गूगल सीईओ सुंदर पिचई ने कहा कि AI को लेकर मुकाबला तेज हो रहा है और गूगल इसमें पीछे नहीं रह सकती. इसी तरह अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट समेत दूसरी कंपनियां भी डेली टास्क में AI को शामिल करने पर जोर दे रही है. अमेजन ने तो यहां तक कह दिया है कि अब कई काम AI एजेंट कर रहे हैं, इसलिए स्टाफ में कटौती की जाएगी.
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WhatsApp पर मिला वेडिंग कार्ड, खोलते ही खाते से उड़ गए पैसे, स्कैम से खुद को ऐसे रखें सेफ ]]></description>
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>70 वर्षीय महिला हुईं डिजिटल अरैस्ट का शिकार! ठगों ने खाते से उड़ा दिए 21 लाख रुपये, जानें पूरा मामला</title>
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<description><![CDATA[ 70 वर्षीय महिला हुईं डिजिटल अरैस्ट का शिकार! ठगों ने खाते से उड़ा दिए 21 लाख रुपये, जानें पूरा मामला ]]></description>
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:34 +0530</pubDate>
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<title>Instagram से बन सकते हैं मालामाल! कमाई है बेहद आसान, जानिए पैसा कमाने का तरीका</title>
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<pubDate>Mon, 25 Aug 2025 20:32:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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<title>PUBG लवर्स को झटका! अब इस पर नहीं खेल पाएंगे गेम, इस दिन से बंद हो जाएगा सपोर्ट</title>
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<description><![CDATA[ PUBG: बैटलग्राउंड्स ने आधिकारिक घोषणा की है कि अब यह गेम PlayStation 4 और Xbox One पर उपलब्ध नहीं रहेगा. डेवलपर टीम ने बताया कि गेम को इस साल नवंबर से केवल नवीनतम कंसोल्स PlayStation 5 और Xbox Series X/S पर सपोर्ट मिलेगा.
13 नवंबर से बंद होगा सपोर्ट
PUBG: Battlegrounds का PS4 और Xbox One पर सफर 13 नवंबर 2025 को खत्म हो जाएगा. लगभग सात साल पहले यह वर्ज़न लॉन्च हुआ था जब इसे PlayerUnknown&amp;rsquo;s Battlegrounds के नाम से जाना जाता था. वहीं, PUBG के PS5 और Xbox Series X वर्ज़न नवंबर 2020 में आए थे.
क्यों लिया गया यह फैसला?
डेवलपर्स के अनुसार, पुराने कंसोल्स से नए कंसोल्स पर ट्रांज़िशन करना बेहद ज़रूरी है. इसका मकसद है खिलाड़ियों को अधिक स्थिर और स्मूथ गेमप्ले अनुभव देना. भविष्य के अपडेट्स के साथ गेम को बेहतर बनाना. पुराने डिवाइस पर होने वाले क्रैश और परफॉर्मेंस इश्यूज़ को खत्म करना.
नए कंसोल्स पर क्या मिलेगा नया?
जो खिलाड़ी PUBG को PS5 और Xbox Series X/S पर खेलेंगे, उन्हें मिलेगा:

बेहतर ग्राफिक्स और विज़ुअल्स.
ज्यादा स्टेबल फ्रेमरेट्स.
Xbox Series S यूज़र्स के लिए Resolution Mode और Performance Mode के विकल्प.
सभी प्लेटफॉर्म्स पर लक्ष्य होगा 60 FPS गेमिंग अनुभव.

डेवलपर्स की प्रतिक्रिया
स्टूडियो ने कहा, &amp;ldquo;यह फैसला लेना आसान नहीं था. PS4 और Xbox One पर इतने सालों तक खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए यह खबर देना हमें भी भारी लग रहा है. लेकिन PUBG के लंबे भविष्य और निरंतर विकास के लिए यह कदम उठाना ज़रूरी है.&amp;rdquo;
रिफंड पॉलिसी क्या होगी?
जो खिलाड़ी PS4 और Xbox One पर PUBG: Battlegrounds खेल रहे थे और अगली पीढ़ी के कंसोल्स पर शिफ्ट नहीं कर सकते, उनके लिए रिफंड की सुविधा दी जाएगी. Battlegrounds Plus और PUBG: Battlegrounds के लिए रिफंड संबंधित प्लेटफॉर्म (Sony और Microsoft) की पॉलिसी और नियमों के अनुसार किया जाएगा. गौरतलब है कि PUBG साल 2022 से फ्री-टू-प्ले गेम बन चुका है. अब PUBG कंसोल गेमिंग का फोकस पूरी तरह से नेक्स्ट-जनरेशन प्लेटफॉर्म्स पर होगा.
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BSNL ने दिल्ली में शुरू की 4G सर्विस! अब मिलेगा सुपरफास्ट इंटरनेट, जानें कैसे उठाएं फायदा ]]></description>
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<pubDate>Sun, 17 Aug 2025 19:48:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
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