<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
     xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
     xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
     xmlns:admin="http://webns.net/mvcb/"
     xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
     xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
     xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/">
<channel>
<title>सच्ची बात सच्चाई के साथ &#45; : आध्यात्मिक</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/rss/category/आध्यात्मिक</link>
<description>सच्ची बात सच्चाई के साथ &#45; : आध्यात्मिक</description>
<dc:language>en</dc:language>
<dc:rights>Copyright © 2024&#45;25 Barwara Patrika , All Rights Reserved</dc:rights>

<item>
<title>Ganga Dussehra 2026: गंगा दशहरा पर राशि के अनुसार दान से मिलेगा 10 गुना फल! इन 10 चीजों को करें शामिल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6255</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6255</guid>
<description><![CDATA[ Ganga Dussehra 2026: हिंदू धर्म में गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी पर्व माना जाता है. मान्यता है कि इसी शुभ दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से धरती पर अवतरित हुई थीं. पंचांग के अनुसार अनुसार इस वर्ष यह पावन पर्व 25 मई 2026 को मनाया जाएगा.
इस 2026 में गंगा दशहरा का त्योहार पुरुषोत्तम मास में होने के कारण इनके फल कई गुना वृद्धि हुई है क्योंकि मलमास यानी पुरुषोत्तम मास में पूजा पाठ तथा दान पुण्य करने का शुभ दिन माना जाता है.

अधिकमास में गंगा दशहरा का महत्व बढ़ा&amp;nbsp;
धार्मिक विश्वासों के अनुसार इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा-पाठ करने से सभी प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है. विशेष रूप से यदि व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार सरल उपाय अपनाए, तो जीवन की बाधाएं कम होती हैं और कष्टों से मुक्ति मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
इस शुभ पर्व पर गंगा माता का ध्यान करते हुए स्नान, दान और पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है. सही विधि और श्रद्धा के साथ किए गए राशि-आधारित उपाय जीवन में नई दिशा और शुभ परिणाम प्रदान कर सकते हैं.
दशमी तिथि कब से कब तक

दशमी तिथि का आरंभ 25 मई 2026 दिन सोमवार 08:07 सुबह से&amp;nbsp;
दशमी तिथि की समाप्ति 26 मई 2026 08:02 सुबह दिन मंगलवार&amp;nbsp;

गंगा दशहरा के दिन पवित्र स्नान, दान और आध्यात्मिक शुद्धि का पर्व माना जाता है. इस दिन राशि अनुसार छोटे-छोटे उपाय करने से जीवन में शांति, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
गंगा दशहरा राशि अनुसार दान










मेष राशि: इस दिन गंगा जल में लाल फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें. हनुमान चालीसा का पाठ करने से आत्मविश्वास बढ़ेगा.
वृषभ राशि: सफेद वस्त्र पहनकर गंगा स्नान करें और चावल व दूध का दान करें. इससे आर्थिक स्थिरता मिलती है.
मिथुन राशि: हरे मूंग और वस्त्र का दान करें. भगवान विष्णु का ध्यान करने से रुके हुए कार्य बनेंगे.
कर्क राशि: गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक करें. दूध और चावल का दान मानसिक शांति देता है.
सिंह राशि: तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करें और गुड़ का दान करें. मान-सम्मान में वृद्धि होगी.
कन्या राशि: हरे फल और हरी सब्जियों का दान करें. गणेश जी की पूजा करने से बाधाएँ दूर होंगी.
तुला राशि: सफेद मिठाई और वस्त्र दान करें. मां गंगा का ध्यान करने से संबंधों में मधुरता आएगी.
वृश्चिक राशि: गंगा स्नान के बाद हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं. शत्रु बाधा से मुक्ति मिलेगी.
धनु राशि: पीले वस्त्र पहनकर केले का दान करें. गुरु पूजा करने से भाग्य मजबूत होगा.
मकर राशि: तिल और काले वस्त्र का दान करें. शिव मंत्रों का जाप लाभकारी रहेगा.
कुंभ राशि: नीले वस्त्र और दान-पुण्य करें. गंगा आरती में शामिल होना शुभ रहेगा.
मीन राशि: पीली दाल और वस्त्र दान करें. भगवान विष्णु की पूजा से मानसिक शांति मिलेगी.

इस प्रकार गंगा दशहरा के दिन राशि अनुसार उपाय करने से जीवन में शुभ फल और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है.
Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी कब ? नोट करें डेट, इस दिन से चातुर्मास शुरू
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;








 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/21/83739eb0cd53b320e6545fe531d2dc861779307334381499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ganga, Dussehra, 2026:, गंगा, दशहरा, पर, राशि, के, अनुसार, दान, से, मिलेगा, गुना, फल, इन, चीजों, को, करें, शामिल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kedarnath Yatra: केदारनाथ में फिर टूटा पहाड़! लैंडस्लाइड के बीच कैसे करें सुरक्षित दर्शन</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6252</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6252</guid>
<description><![CDATA[ Kedarnath Dham: उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश के बीच केदारनाथ यात्रा मार्ग पर एक बार फिर लैंडस्लाइड (Kedarnath Landslide) की घटना सामने आई है. बीते मंगलवार केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भारी बारिश के कारण मुनकटिया क्षेत्र में भूस्खलन हो गया, जिसमें फंसे करीब 10 हजार से अधिक यात्रियों को SDRF की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित निकाला.
पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने के कारण कई जगह रास्ते प्रभावित हुए, जिससे श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ गई है. लेकिन प्रशासन और राहत दल लगातार मार्ग को सुचारु करने में जुटी और यात्रा फिर से बहाल हुई.
केदारनाथ धाम में लगातार भारी बारिश और कमजोर भौगोलिक संरचना के कारण अक्सर लैंडस्लाइड (भूस्खलन) की घटनाएं होती हैं. ऐसे में जो श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन की योजना बना रहे हैं, उनके लिए मौसम, सुरक्षा और यात्रा की तैयारी को लेकर सतर्क रहना बेहद जरूरी होता है.

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सोनप्रयाग&amp;ndash;गौरीकुंड के बीच हुए भूस्खलन के बाद जिला प्रशासन, SDRF, NDRF और पुलिस टीमों ने रातभर रेस्क्यू अभियान चलाकर हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला। पैदल मार्ग बहाल कर राहत कार्य शुरू कर यात्रा मार्ग पुनः सुचारु किया गया।#UttarakhandPolice pic.twitter.com/4n3MacnGkH
&amp;mdash; Uttarakhand Police (@uttarakhandcops) May 20, 2026



केदारनाथ धाम यात्रा का महत्व
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) का श्रद्धालुओं के बीच काफी महत्व है. हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा के लिए आते हैं. चारधाम में केदारनाथ धाम तीसरे स्थान पर आता है.
यह भगवान शिव को समर्पित है. मान्यता है कि, केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (Kedarnath Jyotirlinga) के दर्शन से भक्तों के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है.
धार्मिक व पौराणिक मान्यता के अनुसार, पांडवों ने यहीं भगवान शिव की आराधना कर पापों से मुक्ति पाई थी. समुद्र तल से करीब 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र धाम श्रद्धा, तप और आस्था का केंद्र है.
यही कारण है कि हर साल लाखों भक्त कठिन पहाड़ी रास्तों को पार कर बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बता दें कि, इस साल 2026 में 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोले गए थे, जो अगले 6 महीने तक चलेगी.
लैंडस्लाइड के बीच यात्रा कितनी सुरक्षित?
बारिश के मौसम में केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भूस्खलन, पत्थर गिरना और रास्ते बंद होने जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं. इसलिए यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को प्रशासन की एडवाइजरी का ध्यान रखकर यात्रा करनी चाहिए. कई बार मौसम ज्यादा खराब होने पर यात्रा रोक दी जाती है. इसलिए यात्रा से पहले मौसम और रूट अपडेट जरूर चेक करें.
कैसे पहुंचे केदारनाथ
केदारनाथ पहुंचने के लिए सबसे पहले आपको सड़क मार्ग से सोनप्रयाग पहुंचना होता है. सोनप्रयाग से शटल गाड़ी द्वारा गौरीकुंड जाकर वहां से 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा, खच्चर या पालकी से केदारनाथ धाम पहुंचना होता है. आप फाटा या गुप्तकाशी से हेलीकॉप्टर सेवा भी ले सकते हैं.
ट्रेन यात्रा- अगर आप ट्रेन से केदारनाथ जाना चाहते हैं तो निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश, हरिद्वार और देहरादून हैं. इन स्टेशनों पर पहुंचने के बाद, आप बस या टैक्सी से केदारनाथ के लिए अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं.
हवाई मार्ग- आप&amp;nbsp;हवाई मार्ग से&amp;nbsp;केदारनाथ की योजना बना रहे हैं तो देहरादून स्थित जॉली ग्रांट हवाई अड्डा सबसे निकटतम हवाई अड्डा है. आप हवाई अड्डे से टैक्सी या बस लेकर गौरीकुंड पहुंच सकते हैं.
बस या कार द्वारा&amp;nbsp;- आप यूटीसी पोर्टल का उपयोग करके चार धाम कॉरिडोर के लिए बसों में अपनी सीट बुक करा सकते हैं. हालांकि कई बार बसों का समय और उपलब्धता तारीख व मौसम के अनुसार बदल सकती है, इसलिए टिकट बुक करने से पहले अपनी यात्रा की तारीख और रूट की जानकारी जरूर जांच लें.
केदानथ यात्रा पर के लिए जरूरी सामान

रेनकोट और वाटरप्रूफ जैकेट
गर्म कपड़े और ऊनी टोपी
ट्रैकिंग शूज और अतिरिक्त मोजे
टॉर्च और पावर बैंक
जरूरी दवाइयां और फर्स्ट एड किट
पहचान पत्र और यात्रा रजिस्ट्रेशन कॉपी

ये भी पढ़ें: Kedarnath Temple: ये कैसे संभव है! केदारनाथ के कपाट बंद होने के बाद कैसे जलता है दीपक
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/21/6b7f2672dab3c429c2066d337c9759171779342675508466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kedarnath, Yatra:, केदारनाथ, में, फिर, टूटा, पहाड़, लैंडस्लाइड, के, बीच, कैसे, करें, सुरक्षित, दर्शन</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Adhik Maas 2026: अधिकमास में क्यों किया जाता है 33 मालपुआ का दान, इससे क्या लाभ होता है</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6253</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6253</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/21/a6704d3e4bd243c52a934d3d012d9d4a1779336801807466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Adhik, Maas, 2026:, अधिकमास, में, क्यों, किया, जाता, है, मालपुआ, का, दान, इससे, क्या, लाभ, होता, है</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Guru Gochar 2026: गुरु 2 जून को करेंगे कर्क राशि में एंट्री, इन 4 राशियों को होगा डबल फायदा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6254</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6254</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/21/dd82315617d373a69c09bd99fd3a03e31779337002370499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Guru, Gochar, 2026:, गुरु, जून, को, करेंगे, कर्क, राशि, में, एंट्री, इन, राशियों, को, होगा, डबल, फायदा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Prashant Kishor: राजनीति के &amp;apos;रणनीतिकार&amp;apos; अब आश्रम की शरण में! प्रशांत किशोर की &amp;apos;तपस्या&amp;apos; के पीछे का जानें सच!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6251</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6251</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/21/e0056e7589661a266698c85f0581eec31779346284077466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 21 May 2026 14:31:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Prashant, Kishor:, राजनीति, के, रणनीतिकार, अब, आश्रम, की, शरण, में, प्रशांत, किशोर, की, तपस्या, के, पीछे, का, जानें, सच</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Nautapa 2026: नौतपा 25 मई से 2 जून तक, आग उगलेगी धरती, तापमान बनाएगा नए रिकॉर्ड</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6225</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6225</guid>
<description><![CDATA[ Nautapa 2026: नौतपा तब होता है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है. यह हर साल आता है और इस दौरान 9 दिनों तक सूर्य देव उग्र रूप में रहते हैं. सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है और भीषण गर्मी का सामना करना पड़ता है. इस वर्ष सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 25 मई को 15:37 बजे प्रवेश करेंगे. इसके बाद सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून को 13:33 बजे तक अर्थात 15 दिन रहेंगे.
ऐसे में सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के प्रारंभ के नौ दिन तक नौतपा का प्रभाव रहेगा. 8 जून को ही सूर्य देव मृगशिरा नक्षत्र में प्रवेश कर जायेंगे और 15 जून को मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे. रोहिणी नक्षत्र में सूर्यदेव के प्रवेश से नौतपा भी प्रारंभ हो जाएंगे. नौतपा से आशय सूर्य का नौ दिनों तक अपने सर्वोच्च ताप में होना है यानि इस दौरान गर्मी अपने चरम पर होती है.

क्यों लगता है नौतपा
चंद्र देव रोहिणी नक्षत्र के स्वामी हैं, जो शीतलता का कारक हैं, परंतु इस समय वे सूर्य के प्रभाव में आ जाते हैं. जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 15 दिनों के लिए आता है तो उन पंद्रह दिनों के पहले नौ दिन सर्वाधिक गर्मी वाले होते हैं. इन्हीं शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के नाम से जाना जाता है. ज्येष्ठ मास की ग्रीष्म ऋतु में नौतपा को अधिक गर्मी का संकेत माना जाता है.
नौतपा किस समय लगता है
नौतपा शुक्ल पक्ष में आर्द्रा नक्षत्र से 9 नक्षत्रों तक यानी 9 दिनों तक रहता है. यह आवश्यक नहीं है कि नवतपा में अधिक गर्मी हो. आर्द्रा के 10 नक्षत्रों तक, जो सबसे अधिक गर्मी प्राप्त करता है, बाद में सूर्य उस नक्षत्र में 15 दिनों तक रहता है और अच्छी वर्षा होती है. नौतपा की शुरुआत भी रोहिणी नक्षत्र से होगी. नौतपा में तेज हवा के साथ बवंडर और बारिश की संभावना रहती है. नौतपा समय की ग्रह स्थिति तेज हवा, बवंडर और बारिश का संकेत दे रही है. इस बार 25 मई से नौतपा शुरू होंगे और 3 जून तक रहेंगे.
नौतपा में बारिश हो तो क्या होता है
नौतपा में जितना तापमान चढ़ेगा, आने वाले समय में उतनी ही अच्छी वर्षा होने की भी संभावना बढ़ जाती है. ज्योतिष के अनुसार, यदि नौतपा में बारिश हो जाए तो आने वाले समय में बारिश में कमी रहती है. रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जहां सूर्य व चंद्रमा में मित्रता है. वहीं रोहिणी नक्षत्र वृष राशि में आता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं. शुक्र और सूर्य को एक-दूसरे का शत्रु माना गया है. इसलिए सूर्य इस शत्रु राशि में अपने मित्र के नक्षत्र रोहिणी में अधिक ऊर्जा के साथ प्रवेश कर और अधिक प्रभावी हो जाते हैं. 25 मई से 2 जून तक नौतपा का प्रभाव अपने चरम पर होगा और तेज धूप व गर्मी का सामना करना पड़ेगा.
नौतपा कब होगा शुरू
नौतपा तब होता है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है . यह हर साल आता है और इस दौरान 9 दिनों तक सूर्य देव उग्र रूप में रहते हैं. सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है और भीषण गर्मी का सामना करना पड़ता है.&amp;nbsp; इस बार भी सूर्य 25 मई को 15:37 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा और 8 जून तक यहीं रहेगा.
8 जून के बाद यह मृगशिरा नक्षत्र में चला जाएगा. सूर्य जितने दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में रहता है. पृथ्वी भी उतने ही दिनों तक अत्यधिक गर्मी का अनुभव करती है . ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गर्मी का मौसम 9 दिनों तक रहता है. यानी पृथ्वी पर लोगों को 9 दिनों तक अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ता है .
प्रभाव
नौतपा के कारण संक्रमण में कमी आयेगी. संक्रमण का असर न्यूनतम होगा. लोगों में अनुकूलता और आरोग्यता भी बढ़ेगी. खगोल विज्ञान के अनुसार इस दौरान धरती पर सूर्य की किरणें सीधी लम्बवत पड़ती हैं. जिस कारण तापमान अधिक बढ़ जाता है. यदि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो यह अच्छी बारिश का संकेत होता है.
पौराणिक महत्व
नौतपा का ज्योतिष के साथ-साथ पौराणिक महत्व भी है. ज्योतिष के सूर्य सिद्धांत और श्रीमद् भागवत में नौतपा का वर्णन आता है. कहते हैं जब से ज्योतिष की रचना हुई, तभी से ही नौतपा भी चला आ रहा है. सनातन सस्कृति में सदियों से सूर्य को देवता के रूप में भी पूजा जाता रहा है. नौतपा को लेकर लोक मान्यता है कि नौतपा के सभी दिन पूरे तपें, तो आगे के दिनों में अच्छी बारिश होती है.
ज्योतिषों का कहना है कि चंद्रमा जब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आर्द्रा से स्वाति नक्षत्र तक अपनी स्थितियों में हो और इसके साथ ही अधिक गर्मी पड़े, तो वह नौतपा कहलाता है. वहीं अगर सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होता है तो उस दौरान बारिश हो जाती है तो इसे रोहिणी नक्षत्र का गलना भी कहा जाता है.&amp;nbsp;
मानसून का गर्भकाल
सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण यह मानसून का गर्भ आ जाता है और इसी कारण नौतपा को मानसून का गर्भकाल माना जाता है. ऐसे में जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होता है तो उस समय चंद्रमा नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं.
परंपरा
नौतपा के दौरान महिलाएं हाथ पैरों में मेहंदी लगाती हैं. क्योंकि मेहंदी की तासीर ठंडी होने से तेज गर्मी से राहत मिलती है. इन दिनों में पानी खूब पिया जाता है और जल दान भी किया जाता है ताकि पानी की कमी से लोग बीमार न हो. इस तेज गर्मी से बचने के लिए दही, मक्खन और दूध का उपयोग ज्यादा किया जाता है. इसके साथ ही नारियल पानी और ठंडक देने वाली दूसरी और भी चीजें खाई जाती हैं.
क्या करें और क्या न करें
ग्रहों और नक्षत्रों के प्रभाव में नवत्पा 25 मई से शुरू हो रहा है. नौतपा के दिनों में विवाह जैसी मांगलिक यात्रा में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. ग्रहों की स्थिति को देखते हुए देश के पूर्व, पश्चिम और दक्षिण में प्राकृतिक आपदाएं पैदा हो रही हैं. यह नौतपा 02 जून तक चलेगा.
नौतपा के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहता है. इसके फलस्वरूप सूर्य की सीधी किरणें पृथ्वी पर पड़ती हैं, इस दौरान अत्यधिक भीषण गर्मी देखी जा सकती है. सूर्य की मौजूदा स्थिति अशुभ फल दे सकती है. वृष राशि वालों के लिए वर्तमान समय खराब है.
सूर्य की आराधना
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि रोहिणी नक्षत्र के दौरान सूर्य की आराधना करना विशेष फलदायी होता है. सुबह सूर्योदय के पहले स्नान कर सूर्य को अर्घ दें. जलपात्र में कंकूम डाले और सूर्य को जल चढ़ाए. जल चढ़ाते समय सूर्यदेव का मंत्र ऊं&amp;nbsp; घृणि सूर्याय नमः, या ऊँ सूर्यदेवाय नमः का निरंतर जाप करें.
Weekly Rashifal 17-23 May 2026: इन 6 राशियों का लगेगा जैकपॉट! संवरेगा करियर, मेष-मीन तक साप्ताहिक राशिफल देखें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/18/46243b84bc6444069d50b82d68029c631779110372444499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Nautapa, 2026:, नौतपा, मई, से, जून, तक, आग, उगलेगी, धरती, तापमान, बनाएगा, नए, रिकॉर्ड</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Navgrah Katha 3: नवग्रहों में पढ़ें मंगल देव की कथा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6223</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6223</guid>
<description><![CDATA[ Navgrah Mangal Dev Katha: एक समय स्वर्गलोक के सत्ता सिंहासन पर आसीन इन्द्रदेव ने सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु से अनुरोध किया कि आप लोग क्रमशः अपने मुख से अपना-अपना शुभ, अशुभ, आकृति-प्रकृति, व्यक्तित्व, प्रभाव, शक्ति, पराक्रम और गरिमा का वर्णन करें. तब नव ग्रहों में सबसे सूर्य ने और फिर चंद्रमा ने अपने गुणों का गुणगान किया, जिसकी कथा हमने आपको बताई थी. यहां पढ़ें- Navgrah Katha 2: इंद्रसभा में चंद्रमा ने बताई अपनी महिमा, नवग्रहों में पढ़ें चंद्र देव की दिव्य कथा
मंगल देव की कथा (Mamgal Dev Kahani)
राजन! आपने चंद्रमा की आत्मप्रशंसा तो सुन ली, लेकिन मेरा महत्व भी किसी से कम नहीं है. मेरा नाम ही मंगल है. जिस व्यक्ति पर मैं प्रसन्न होता हूं, उसका जीवन सुख, साहस और मंगलमय बना देता हूं, लेकिन जब मैं क्रोधित होता हूं तो विनाश करने में भी देर नहीं लगाता. मेरी उग्रता और शक्ति से देवता तक भयभीत रहते हैं.
मैं अग्नितत्व से युक्त, सिंदूरी वर्ण वाला पराक्रमी देव हूं. मनुष्यों के भीतर साहस, शक्ति, रक्त और उत्साह का संचार मैं ही करता हूं. मेरे शुभ प्रभाव से व्यक्ति को वीरता, आत्मविश्वास और सफलता मिलती है, लेकिन अशुभ होने पर दुर्घटना, रक्त संबंधी कष्ट, चोट, क्रोध, संघर्ष और अनेक प्रकार की परेशानियां जीवन में बढ़ जाती हैं.
मैं व्यक्ति को स्वस्थ, मजबूत, साहसी और विजेता बनाता हूं. पुलिस, सेना और पराक्रम से जुड़े क्षेत्रों में सफलता दिलाने में मेरा विशेष प्रभाव माना जाता है. भूमि, भवन और संपत्ति का सुख भी मेरी कृपा से प्राप्त होता है, लेकिन जब मैं अशुभ होता हूं तो व्यक्ति घर-भूमि से वंचित होकर दर-दर भटकने लगता है.
मंगलवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति सामान्यतः ऊर्जावान, स्वाभिमानी, वीर और साहसी स्वभाव का होता है. ऐसे लोग खेल, सेना, जासूसी, नेतृत्व और जोखिम वाले कार्यों में आगे रहते हैं. मेरी शुभ स्थिति व्यक्ति को विजय, भूमि लाभ, निर्माण कार्य, राजनीति और साहसिक क्षेत्रों में सफलता देती है, जबकि अशुभ प्रभाव विवाद, ऋण, दुर्घटना, क्रोध और वैवाहिक जीवन में परेशानियां बढ़ा सकता है.
मैं उग्र और प्रभावशाली ग्रह हूं. यदि मेरी स्थिति अनुकूल हो तो व्यक्ति जीवन में ऊंचाइयों को छूता है, लेकिन प्रतिकूल होने पर उसे संघर्ष, रोग, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है. मंगलवार का व्रत, संयम और पूजा-पाठ मेरे अशुभ प्रभावों को शांत करने में सहायक माने गए हैं.
जो व्यक्ति मंगलवार के दिन व्रत रखता है, नमक का त्याग करता है, चने से बने प्रसाद का सेवन करता है और मेरे मंत्रों का जाप करता है, उस पर मेरी विशेष कृपा बनी रहती है. जो भक्त हनुमान जी को बेसन के लड्डू अर्पित कर उन्हें गाय, कुत्ते, बंदरों और जरूरतमंदों में बांटता है, उसके जीवन में सुख और मंगल बढ़ता है. मंगलवार के दिन गुड़ और चने का सेवन भी स्वास्थ्यवर्धक माना गया है.
यदि कोई व्यक्ति मेरे अशुभ प्रभावों से बचना चाहता है, तो उसे मसूर दाल, चना, गुड़ और लाल वस्त्र का दान करना चाहिए तथा श्रद्धा से मेरी उपासना करनी चाहिए. मेष और वृश्चिक राशियों का स्वामी मैं ही हूं. मकर राशि में मैं उच्च का और कर्क राशि में नीच का माना जाता हूं. जन्म कुंडली में शुभ स्थिति में होने पर मैं व्यक्ति को प्रशासन, सेना, नेतृत्व और भूमि संबंधी कार्यों में बड़ी सफलता दिलाता हूं, लेकिन अशुभ स्थिति जीवन में संघर्ष और कष्ट बढ़ा सकती है.
ये भी पढ़ें:Navgrah Katha 1: नवग्रहों में पढ़ें राजा सूर्य देव की दिव्य कथा, मैं सूर्य देव हूं....

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/19/2261dd0ae42b23632537d714a77e14571779158116951466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Navgrah, Katha, नवग्रहों, में, पढ़ें, मंगल, देव, की, कथा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindu Festival 2026: आज बड़ा मंगल, कल मनाई जाएगी वरदा चतुर्थी, जानें दोनों व्रत का शुभ समय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6224</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6224</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/19/2a412321b179fef937178eab0b954fed1779172769605466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindu, Festival, 2026:, आज, बड़ा, मंगल, कल, मनाई, जाएगी, वरदा, चतुर्थी, जानें, दोनों, व्रत, का, शुभ, समय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>MP Bhojshala: भोजशाला में मां वाग्मदेवी की पूजा में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मना महाविजय महोत्सव</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6221</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6221</guid>
<description><![CDATA[ Madhya Pradesh Bhojshala: धार की ऐतिहासिक भोजशाला में मंगलवार का दिन खास रहा. इंदौर हाईकोर्ट के आदेश और एएसआई के नए निर्देशों के बाद मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे. सुबह से पूजा-अर्चना, सरस्वती वंदना, हनुमान चालीसा पाठ और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए.
परिसर के बाहर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला. इंदौर हाईकोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई द्वारा नई व्यवस्था लागू की गई है. इसके तहत भोजशाला &amp;nbsp;अब सूर्योदय से सूर्यास्त तक श्रद्धालुओं के लिए खुली रहेगी.

Dhar Bhojshala pic.twitter.com/GH1ZNwf9zf
&amp;mdash; Jagrati soni (@jasmin_soni) May 19, 2026



मंगलवार होने के कारण सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई. भोज उत्सव समिति द्वारा मंगलवार सत्याग्रह कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें सरस्वती वंदना, हनुमान चालीसा पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रम हुए. बड़ी संख्या में श्रद्धालु इसमें शामिल हुए.
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि वर्ष 2003 के आंदोलन और संघर्ष में योगदान देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई. 2003 के बाद पहली बार बदले नियमों के बीच पूजा हो रही है. यहां सूर्योदय से सूर्यास्त तक विशेष हवन-पूजन होगा. कार्यक्रम के बाद परिसर के बाहर आतिशबाजी और जयकारों के साथ लोगों ने खुशी जाहिर की. श्रद्धालुओं ने इसे लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष और आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण दिन बताया.
&amp;nbsp;पहली बार भोजशाला के आंदोलन में शामिल तीन शहीदों की तस्वीर भी गर्भगृह में रखी गई. हाई कोर्ट ने शनिवार को आदेश देते हुए कहा था कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है. इस आदेश के बाद हिंदुओं को हर मंगलवार की जगह 365 दिन पूजा की अनुमति मिली थी.
Adhik Maas Vrat Tyohar 2026: अधिकमास में आएंगे ये खास व्रत त्योहार, पूजा-पाठ का मिलेगा 10 गुना फल
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/19/6ac2bbe321878b8d4e5308458eb654061779176730122499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Bhojshala:, भोजशाला, में, मां, वाग्मदेवी, की, पूजा, में, उमड़ी, श्रद्धालुओं, की, भीड़, मना, महाविजय, महोत्सव</media:keywords>
</item>

<item>
<title>पंचक्रोशी मार्ग का भीमचंडी मंदिर, जहां मां काली का 10 मुख और शिव पंचमुखी रूप में विराजमान!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6222</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6222</guid>
<description><![CDATA[ रहस्यमयी भीमचंडी मंदिर:&amp;nbsp;वाराणसी की प्रसिद्ध पंचक्रोशी यात्रा के पवित्र मार्ग पर एक ऐसा दुर्लभ और रहस्यमयी मंदिर छिपा है, जिसके अस्तित्व से आज भी अधिकांश लोग अनजान हैं.
​आमतौर पर श्रद्धालु जल्दबाजी में इस अलौकिक स्थान को नजरअंदाज कर देते हैं. यह स्थान है भीमचंडी मंदिर. यहां आपको भव्यता या भारी भीड़ तो नहीं मिलेगी, लेकिन कदम रखते ही एक ऐसी असीम आध्यात्मिक ऊर्जा और शांत शक्ति का अहसास होगा, जिसके लिए आप शायद तैयार नहीं थे.
​10 सिरों वाली मां काली की दुर्लभ प्रतिमा
​इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण मां काली का वह रूप है, जो पूरे विश्व में शायद ही कहीं देखने को मिले. यहाँ देवी काली की दस सिरों वाली प्रतिमा स्थापित है. यह कोई सामान्य मूर्ति नहीं है; इसका हर सिर शक्ति, विनाश और संरक्षण के एक अलग आयाम को दर्शाता है. दस सिरों का अर्थ है सभी दिशाओं से आने वाली नकारात्मकता पर पूर्ण नियंत्रण. माँ का यह रूप जितना शक्तिशाली है, भक्तों के लिए उतना ही सुरक्षात्मक भी है.
​भगवान शिव का पंचमुखी और दशभुजी रूप
​मां काली के साथ ही यहां भगवान शिव का एक अत्यंत दुर्लभ रूप देखने को मिलता है. यहां शिव पांच सिर (पंचमुखी) और दस भुजाओं के साथ प्रकट होते हैं:

​पांच सिर: ब्रह्मांड के पंचतत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतिनिधित्व करते हैं.
​दस भुजाएं: दसों दिशाओं पर उनके पूर्ण नियंत्रण और ब्रह्मांडीय शक्ति को दर्शाती हैं.

​सामान्यतः शांत और ध्यानमग्न दिखने वाले शिव के विपरीत, उनका यह रूप पूर्ण जागरूकता, संतुलन, सृजन और विनाश के सामंजस्य का प्रतीक है.
​भीमचंडी के &#039;कुंवारी देवी&#039; होने का रहस्य
​इस मंदिर की एक और अनोखी विशेषता यह है कि यहाँ माता भीमचंडी की पूजा एक कुंवारी देवी के रूप में की जाती है.

​बिना सिंदूर की पूजा: भगवान शिव से विवाह पूर्व के उनके शुद्ध, स्वतंत्र और शक्तिशाली रूप को दर्शाने के लिए यहाँ देवी को सिंदूर नहीं चढ़ाया जाता, जो कि सनातन परंपरा में बेहद दुर्लभ है.
​मौन शक्ति का प्रतीक: भक्तों का विश्वास है कि देवी इस क्षेत्र की रक्षा करती हैं. उनका यह रूप सिखाता है कि सर्वोच्च शक्ति हमेशा शोर के साथ नहीं, बल्कि पूरी पवित्रता और मौन के साथ विद्यमान रहती है.

​विस्मृत गंधर्वों की मौजूदगी: रक्ताक्ष गंधर्व
​मुख्य देवी-देवताओं के अलावा, इस मंदिर की दीवारों और प्रांगण में प्राचीन गंधर्वों की मूर्तियां भी उकेरी गई हैं, जिन्हें आधुनिक भक्ति में लगभग भुला दिया गया है. इनमें सबसे प्रमुख हैं रक्ताक्ष गंधर्व, जिन्हें उनकी सूर्य जैसी लाल आंखों के लिए जाना जाता है. माना जाता है कि ये दिव्य संगीत और ऊर्जा से ब्रह्मांड को संतुलित रखते हैं. उनकी उपस्थिति इस मंदिर के रहस्य को और गहरा कर देती है.
​भीमचंडी मंदिर केवल पत्थरों और मूर्तियों का ढांचा नहीं है, बल्कि यह छिपे हुए अर्थों, शक्तिशाली प्रतीकों और साक्षात दिव्यता का अनूठा संगम है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/19/1f052a955372f6a50d7da9770e0694c717791670454451413_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 19 May 2026 13:37:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>पंचक्रोशी, मार्ग, का, भीमचंडी, मंदिर, जहां, मां, काली, का, मुख, और, शिव, पंचमुखी, रूप, में, विराजमान</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Budh Uday 2026: बुध का उदय होना इन 3 राशियों की बढ़ाएगा मुसीबतें, हो सकता है पैसों में घाटा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6194</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6194</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/15/a20a0ded076ca5c1bfbd0712b7921e571778825093043499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Budh, Uday, 2026:, बुध, का, उदय, होना, इन, राशियों, की, बढ़ाएगा, मुसीबतें, हो, सकता, है, पैसों, में, घाटा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Varda Chaturthi 2026: अधिकमास की वरदा चतुर्थी कब ? जानें डेट, साल की 12 चतुर्थी करने के समान फलदायी है ये व्रत</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6195</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6195</guid>
<description><![CDATA[ Adhik Maas, Varda Vinayak Chaturthi 2026: मुद्गलपुराण में अधिकमास के शुक्ल चतुर्थी को वरदा चतुर्थी के रूप में जाना जाता है. इस साल अधिकमास 17 मई से शुरू हो रहा है. अधिकमास की वरदा चतुर्थी 20 मई 2026 बुधवार को है.
भविष्यपुराण में उल्लेख है कि अधिकमास में की गयी वरदा विनायक चतुर्थी व्रत की पूजा से सामान्य 12 मासों की चतुर्थी से भी अधिक पुण्य प्राप्त होता है. इस व्रत का श्रद्धापूर्वक पालन करने वाला मनुष्य समस्त विघ्नों से मुक्त होकर धन, सन्तति, यश तथा दीर्घायु को प्राप्त करता है.

अधिकमास वरदा चतुर्थी 2026 मुहूर्त
अधिकमास की वरदा चतुर्थी 19 मई 2026 को दोपहर 2 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 20 मई 2026 को सुबह 11 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी.

चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त - सुबह 10:56 - सुबह 11:06
वर्जित चंद्रदर्शन का समय - सुबह 8.43 - रात 11.08

क्यों सभी महीनों में खास है वरदा विनायक चतुर्थी

इस मास को &quot;अतिशय पुण्यप्रद मास&quot; कहा गया है, इसीलिये इसमें किया गया गणपति व्रत सहस्र गुणा पुण्यदायी होता है.
ये व्रत समस्त प्रकार की समस्याओं से मुक्त कर उन्हें सुख, शान्ति एवं समृद्धि प्रदान करता है.
ग्रंथों के अनुसार मलमास की चतुर्थी व्रत का पालन करने से व्यक्ति के पूर्वजन्म के दोष और वर्तमान जीवन के विघ्न दूर होते हैं.
ये व्रत साधक के लौकिक और पारलौकिक, दोनों तरह के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है. साथ ही इसके प्रताप से पितृगणों एवं देवताओं की तृप्ति भी होती है.

वरदा चतुर्थी पूजा विधि

वरदा चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले वस्त्र पहनें.
इसके बाद पूजा स्थान को शुद्ध करके चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
पूजा के दौरान गणपति बप्पा को सिंदूर का तिलक अर्पित करें, क्योंकि यह उन्हें अत्यंत प्रिय माना जाता है.
गणेश जी की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व बताया गया है. पूजा करते समय &amp;ldquo;ॐ गं गणपतये नमः&amp;rdquo; मंत्र का उच्चारण करते हुए 21 दूर्वा दल अर्पित करें.
इसके बाद भगवान गणेश को मोदक या उनके प्रिय मिठाई का भोग लगाएं. विधि-विधान से विघ्नहर्ता गणेश की आराधना करें और अंत में आरती उतारें.
मान्यता है कि वरदा चतुर्थी का व्रत करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है.
इस दिन गणेश पूजन के बाद ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना और अपनी क्षमता अनुसार दान देना शुभ माना जाता है.
धार्मिक विश्वास के अनुसार &amp;ldquo;ॐ गणेशाय नमः&amp;rdquo; मंत्र का जाप करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और स्वास्थ्य संबंधी कष्टों में भी राहत मिलती है.

गणेश जी को सिंदुर चढ़ाने का मंत्र
सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम् । शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ॥
लाभ - धार्मिक दृष्टि से सिंदूर ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक माना जाता है. गणेश जी को सिंदूर अर्पित करने से मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है.
Shukra Gochar 2026: शुक्र का मिथुन में गोचर, आने वाले 25 दिन मकर समेत 3 राशियों के लिए होंगे कांटों भरे
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/14/a991f4205d5aeb8b34f9d08b2cc1066e1778767145543499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Varda, Chaturthi, 2026:, अधिकमास, की, वरदा, चतुर्थी, कब, जानें, डेट, साल, की, चतुर्थी, करने, के, समान, फलदायी, है, ये, व्रत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Cannes 2026: गीता, तुलसी माला और कृष्ण भक्ति… आरती खेतरपाल के कान्स लुक ने बटोरी सुर्खियां</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6193</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6193</guid>
<description><![CDATA[ Cannes Film Festival 2026: कान्स फिल्म फेस्टिवल दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में से एक है, जिसमें दुनियाभर के कलाकार अपने ग्लैमरस लुक का जलवा दिखाते हैं. इस साल भी कान्स के रेड कार्पेट पर अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय सितारों का लुक चर्चा में रहा. साथ ही कान्स में सनातन धर्म की झलक भी देखने को मिली, जिसकी चर्चा चारों ओर हो रही है.
वृंदावन की आरती खेतरपाल ने सनातन धर्म को किया रिप्रेजेंट
कान्स में कलाकार अपने स्टाइलिश लुक को प्रेजेंट करते हैं. आलिया भट्ट, ऊर्वशी रौतेला, तारा सुतारिया जैसी कई अभिनेत्रियां कान्स में मॉडल, स्टाइलिश और ग्लैमरस लुक में नजर आईं. लेकिन वृंदावन की आरती खेतरपाल कान्स में सिर्फ अपने ग्लैमर और फैशन की वजह से नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने अपना कान्स डेब्लू सनातन धर्म से जुड़े लुक के साथ किया.
रेड कार्पेट पर आरती खेतरपाल की एंट्री होते ही भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की झलक की खूबसूरती देखने को मिली. लहंगे में वृंदावन का नजारा, गले में तुलसी माला, हाथ में श्रीमद्भगवद्गीता लिए आरती ने अपने लुक को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान दी. आरती के हाथ में कस्टम मेड रेड चेंटिंग बैग (गोमुखी) भी दिखा. इस पर हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे लिखा है और बांसुरी बजाते हुए श्रीकृष्ण नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर आरती का कान्स लुक वायरल हो रहा है और लोग भी इसकी काफी तारीफ कर रहे हैं.



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Krishnaarati (@aartikhetarpal_)





आरती खेतपाल ने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों को साझा करते हुए लिखा- कान्स फिल्म फेस्टिवल के इतिहास में पहली बार मुझे रेड कार्पेट पर सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने का सौभाग्य मिला. यह प्रस्तुति वैष्णव परंपरा और भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक श्रद्धा अर्पण है. यह उन सभी लोगों के लिए है जो ईश्वर में विश्वास रखते हैं. उन सभी गुरुजनों और संतों के लिए, जिन्होंने हमें नाम जप और भक्ति का मार्ग सिखाया. वेदव्यास जी के लिए, जिन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता जैसे दिव्य ग्रंथ की रचना की. उन प्रकाशकों के लिए, जो आज भी हमारे वेदों और शास्त्रों को संरक्षित और प्रकाशित कर रहे हैं और उन भारतीय डिजाइनर्स के लिए, जो भारतीय आस्था और संस्कृति को फैशन के माध्यम से दुनिया तक पहुंचा रहे हैं.



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Krishnaarati (@aartikhetarpal_)





आरती ने अपना कान्स लुक परिवार और कृष्ण भक्ति को किया समर्पित
यह मेरी मां के लिए है, जिन्होंने मुझे कृष्ण भक्ति और मंत्र जप का संस्कार दिया.मेरे भाई के लिए, जो हर कदम पर मेरी ताकत बनकर साथ खड़े रहे.मेरी बहन के लिए, जो भारत में पूरी रात जागकर काम संभालती रही.और मेरे पिता के लिए, जिनकी फिल्म इस वर्ष कान्स में प्रदर्शित हो रही है.
हे कृष्ण, आपने मुझे जो भी मंच दिया है, वह मेरे लिए केवल सम्मान नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है.सनातन धर्म का सच्चाई, श्रद्धा और गरिमा के साथ प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी. राधारानी की कृपा से मैं जिस भी रूप में आपकी सेवा कर पाऊं, वही मेरे जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है. प्रभु, मैं अपना सब कुछ आपको समर्पित करती हूं, क्योंकि आप ही मेरे लिए सब कुछ हैं.
ये भी पढ़ें: Prateek Yadav Last Rites: अर्पणा के पिता ने दी प्रतीक को मुखाग्नि, क्या ससुर को है दामाद के अंतिम संस्कार का अधिकारDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/15/de05ac3575fee3e2d52957194f75e8bc1778827045963466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Cannes, 2026:, गीता, तुलसी, माला, और, कृष्ण, भक्ति…, आरती, खेतरपाल, के, कान्स, लुक, ने, बटोरी, सुर्खियां</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vat Savitri Vrat 2026 LIVE: वट सावित्री व्रत 16 या 17 मई कब ? सुहागिनें जान लें पूजा मुहूर्त, सामग्री, विधि</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6192</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6192</guid>
<description><![CDATA[ Vat Savitri Vrat 2026 LIVE:&amp;nbsp;वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को है. वट सावित्री व्रत अर्थात वो दिन जब यमराज को भी एक पत्नी की जिद और उसकी श्रद्ध का आगे झुककर अपना फैसला बदलना पड़ा और देवी सावित्री के पति के प्राण दोबारा लौटाने पड़े.
ग्रंथों के अनुसार इस व्रत को करने से पति की आयु लंबी होती है और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. विवाहित महिलाएं इस दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखकर मां सावित्री और वट वृक्ष की पूजा करती हैं.
वट सावित्री व्रत तिथि और मुहूर्त
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि शुरू होगी 16 मई 2026 को सुबह 5.11 पर और समाप्ति 17 मई 2026 को सुबह 1.30 पर होगी.

पूजा मुहूर्त - सुबह 7.12 - सुबह 8.24

16 या 17 मई को लेकर कंफ्यूजन क्यों है?
हर साल वट सावित्री व्रत की तारीख को लेकर संशय इसलिए होता है क्योंकि अलग-अलग पंचांगों में अमावस्या तिथि के प्रारंभ और समाप्ति समय में अंतर दिखाई देता है. लेकिन उदया तिथि और ज्येष्ठ अमावस्या के आधार पर अधिकांश उत्तर भारतीय पंचांगों के अनुसार वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को ही मान्य रहेगा.
इस दिन किसकी पूजा होती है
वट सावित्री व्रत में मुख्य रूप से देवी सावित्री, सत्यवान और वट वृक्ष की पूजा की जाती है. कई स्थानों पर भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश का भी ध्यान किया जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में त्रिदेव का वास माना गया है.
बरगद का पेड़ यानी वट वृक्ष को अमरत्व और जीवन शक्ति का प्रतीक माना गया है. इ इसकी जड़ें और लंबी आयु स्थिरता, सुरक्षा और अखंड सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं. महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चा सूत बांधती हैं और अपने पति की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं.
क्या है वट सावित्री व्रत की कहानी 
वट सावित्री व्रत का उल्लेख स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में मिलता है. कथा के अनुसार राजकुमारी सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था. विवाह से पहले ही ऋषियों ने बता दिया था कि सत्यवान की आयु बहुत कम हैलेकिन सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पति के प्रति समर्पण से यमराज को भी विवश कर दिया.
जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तब सावित्री ने उनका पीछा किया और अपनी बुद्धिमानी, तप और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न करके अपने पति के प्राण वापस प्राप्त किए. तभी से ये व्रत किया जाने लगा.
कहां मनाते हैं वट सावित्री अमावस्या
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा आदि राज्य में वट सावित्री अमावस्या पर इस व्रत का पालन किया जाता है. वहीं महाराष्ट्र और गुजरात में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा पर मनाया जाता है जो इस साल 29 जून 2026 को है.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/15/367d6ad580cb778fd82ca67f78e239cc1778827538660499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vat, Savitri, Vrat, 2026, LIVE:, वट, सावित्री, व्रत, या, मई, कब, सुहागिनें, जान, लें, पूजा, मुहूर्त, सामग्री, विधि</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Prateek Yadav Snake Tattoo: स्टाइल के पीछे छिपा है अनंत काल का संदेश, जानें क्या कहता है ज्योतिष?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6191</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6191</guid>
<description><![CDATA[ Prateek Yadav Tattoo: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, प्रतीक यादव. राजनैतिक और सामाजिक गलियारों से ताल्लुक रखने वाले प्रतीक यादव अपनी शानदार फिटनेस और लग्जरी लाइफस्टाइल के लिए युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं. लेकिन इस बार उनकी चर्चा किसी जिम वीडियो की वजह से नहीं, बल्कि उनके हाथ पर बने एक रहस्यमयी &#039;स्नेक टैटू&#039; के कारण हो रही है.
कौन हैं प्रतीक यादव और क्यों हो रही है चर्चा?
प्रतीक यादव उत्तर प्रदेश के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं (वे समाजवादी पार्टी के संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे हैं). वे एक सफल बिजनेसमैन और फिटनेस आइकन के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. हाल ही में उनके हाथ पर बने विशाल सांप के टैटू का वीडियो वायरल हुआ, जिसने प्रशंसकों और ज्योतिष प्रेमियों के बीच जिज्ञासा पैदा कर दी है कि आखिर उन्होंने सांप का ही चुनाव क्यों किया?

क्या है &#039;ओरोबोरोस&#039; का रहस्य?ओरोबोरोस एक ऐसा प्राचीन चिन्ह है जिसमें एक सांप को अपनी ही पूंछ खाते हुए दिखाया जाता है. यह कोई साधारण डिजाइन नहीं, बल्कि एक गहरा दार्शनिक संदेश है:

अनंत काल और चक्र (Infinity): यह प्रतीक बताता है कि सृष्टि का न आदि है और न अंत. यह जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र को दर्शाता है.
आत्म-सुधार (Transformation): जिस तरह सांप अपनी पुरानी त्वचा (केंचुल) छोड़कर नया रूप लेता है, वैसे ही यह टैटू निरंतर विकास और खुद को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है.

नॉर्डिक माइथोलॉजी और रक्षक का रूप
प्रतीक यादव का टैटू नॉर्डिक पौराणिक कथाओं के विशाल सर्प &#039;जॉर्मुनगैंडर&#039;&amp;nbsp;से प्रेरित है.

धर्म से जुड़ाव: हिंदू धर्म में जैसे भगवान शिव के गले में वासुकी नाग और भगवान विष्णु के लिए शेषनाग रक्षक और शक्ति के प्रतीक हैं, वैसे ही यह टैटू एक सुरक्षा कवच की तरह है. यह व्यक्ति के भीतर की अदम्य शक्ति और साहस को प्रदर्शित करता है.

स्वप्न शास्त्र: सपने में सांप और इस टैटू का संबंध
अक्सर लोग सपने में सांप देखकर घबरा जाते हैं, लेकिन स्वप्न शास्त्र के अनुसार इसके मायने बेहद खास होते हैं:

शुभ संकेत: यदि आप सपने में सांप को ऊपर की ओर चढ़ते देखते हैं, तो यह जीवन में तरक्की और धन लाभ का संकेत है. प्रतीक का यह टैटू भी उनकी निरंतर सफलता और प्रभाव का प्रतीक माना जा सकता है.
दिशानिर्देश: टैटू में बना &#039;वेगाविजिर&#039; (नॉर्डिक कंपास) और सांप का मेल यह बताता है कि चाहे जीवन का सफर कितना भी कठिन हो, अगर आपका संकल्प मजबूत है, तो आप कभी रास्ता नहीं भटकेंगे.

ज्योतिषीय दृष्टिकोण: राहु-केतु और मानसिक बल
ज्योतिष में सांप को राहु और केतु से जोड़कर देखा जाता है. सांप का प्रतीक धारण करना या उसे सकारात्मक रूप में देखना मानसिक भ्रम को दूर करने और दृढ़ निश्चय के साथ लक्ष्य की ओर बढ़ने का साहस प्रदान करता है.
प्रतीक यादव का यह टैटू हमें सिखाता है कि जीवन में बदलाव ही एकमात्र सत्य है. चाहे वह आपके सपनों में आने वाला सांप हो या शरीर पर उकेरा गया कोई टैटू, ये सभी हमें पुरानी बाधाओं को तोड़कर नई ऊंचाइयों को छूने का संदेश देते हैं.
Kal Ka Rashifal 16 May 2026: धनु राशि वालों को मिलेगी पदोन्नति की खुशखबरी और मकर को प्राप्त होगी पैतृक संपत्ति, जानें शनिवार का भविष्यफल
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/15/1f218767cf5cc74fd2f6ffe1bb472bad17788211023111218_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 15 May 2026 15:09:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Prateek, Yadav, Snake, Tattoo:, स्टाइल, के, पीछे, छिपा, है, अनंत, काल, का, संदेश, जानें, क्या, कहता, है, ज्योतिष</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह में 4 एकादशी का संयोग, जानें अपरा, पद्मिनी, परमा और निर्जला एकादशी व्रत की तिथि</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6164</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6164</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/12/9b349f7dbe52f26df46763bdd78d140e1778605968466466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ekadashi, 2026:, ज्येष्ठ, माह, में, एकादशी, का, संयोग, जानें, अपरा, पद्मिनी, परमा, और, निर्जला, एकादशी, व्रत, की, तिथि</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Spiritual Motivational: क्या बिना राजयोग के नहीं मिलती सफलता? जानिए ज्योतिष में कर्म और किस्मत का असली संबंध</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6165</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6165</guid>
<description><![CDATA[ Spiritual Motivational: ज्योतिष शास्त्र में राजयोग को सफलता, पद, सम्मान और धन से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन एक बड़ा सवाल यह भी है कि अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में राजयोग नहीं हो, तो क्या उसका जीवन साधारण ही रह जाएगा? क्या वह कभी बड़ी सफलता हासिल नहीं कर सकता?
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भी राजयोग को इस तरह पेश किया जाता है, जैसे बिना राजयोग के जीवन में कुछ बड़ा संभव ही नहीं हैं. जबकि ज्योतिष शास्त्र के गहरे अध्ययन और कई विद्वानों की व्याख्याओं में यह बात साफ कही गई है कि सफलता केवल एक योग पर निर्भर नहीं करती हैं.
क्यों कई लोग बिना राजयोग के भी सफल बन जाते हैं?
राजयोग अवसर दे सकता है, लेकिन उस अवसर को पहचानना और उसके लिए मेहनत करना व्यक्ति के हाथ में होता है. कई लोगों की कुंडली में बड़े योग नहीं होते, फिर भी उनमें सीखने की भूख, अनुशासन और लगातार मेहनत करने की आदत उन्हें आगे ले जाती है. जिन लोगों को जीवन में आसानी से सब कुछ नहीं मिलता, वे परिस्थितियों से लड़ना सीख जाते हैं. यह संघर्ष उन्हें मानसिक रूप से अधिक मजबूत बनाता है. कई बार यही लोग आगे चलकर बड़े निर्णय लेने और रिस्क उठाने में दूसरों से आगे निकल जाते हैं.

हर कुंडली का फल समय पर निर्भर करता है?
ज्योतिष में केवल योग नहीं, उसकी दशा और समय भी महत्वपूर्ण माना गया है. इसलिए बिना राजयोग वाला व्यक्ति भी सही समय, सही कर्म और सही दिशा से सफलता पा सकता है. वहीं कई बार मजबूत राजयोग होने के बाद भी व्यक्ति अवसर गंवा देते है. कई प्राचीन ग्रंथों में यह बात कही गई है कि कर्म के बिना कोई योग फल नहीं देता है. अगर व्यक्ति लगातार प्रयास करता रहे, तो सामान्य ग्रह स्थिति भी जीवन में अच्छे परिणाम दे सकती है.&amp;nbsp;
इस सोच का लोगों के जीवन पर क्या असर पड़ता है?
जब किसी व्यक्ति को यह कहा जाता है कि उसकी कुंडली में राजयोग नहीं है, तो वो पहले ही मान लेता हैं कि वो जीवन में कुछ बड़ा नहीं कर पाएंगे. इसका असर उनके आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता पर पड़ता है. और अगर ऐसा व्यक्ति यह मान ले कि उसकी किस्मत में सफलता नहीं लिखी, तो धीरे-धीरे वह प्रयास करना भी कम कर देता है. यह सोच कई बार असली असफलता बन जाती है.कई बार दूसरों की कुंडली या सफलता देखकर लोग खुद को पीछे समझने लगते हैं. इससे ओवरथिंकिंग, चिंता और मानसिक दबाव बढ़ जाता है.
राजयोग का यह मतलब नहीं कि व्यक्ति बिना मेहनत के राजा बन जाएगा. ज्योतिष में यह केवल एक अनुकूल ग्रह स्थिति मानी जाती है, जो सही समय आने पर अवसर दे सकती है. लेकिन अवसर मिलना और उसका लाभ उठाने में बहुत फर्क होता है. कई बार जिन लोगों की कुंडली में शक्तिशाली राजयोग होते हैं, वे भी जीवन में संघर्ष करते दिखाई देते हैं.&amp;nbsp;
वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोग भी मिलते हैं जिनकी कुंडली में कोई बड़ा राजयोग नहीं होता, लेकिन अपनी मेहनत, अनुशासन और निर्णय क्षमता के दम पर वे समाज में ऊंचा स्थान बना लेते हैं.
ये भी पढ़ें: Bakrid 2026 Date: मौलाना ने बताई ईद-उल-अजहा की तारीख, जानें भारत, पाकिस्तान, सउदी में बकरीद कब
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/12/2507a19ae12eefc18e11ce3af23fcd4517785736019521413_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Spiritual, Motivational:, क्या, बिना, राजयोग, के, नहीं, मिलती, सफलता, जानिए, ज्योतिष, में, कर्म, और, किस्मत, का, असली, संबंध</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vrishabh Sankranti 2026: वृषभ संक्रांति पर दुर्लभ संयोग, दुख&#45;दरिद्रता से मुक्ति पाने का मौका, कर लें ये खास काम</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6162</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6162</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/13/80936aa27b2fee9da84bde340341fa6f1778616593724499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vrishabh, Sankranti, 2026:, वृषभ, संक्रांति, पर, दुर्लभ, संयोग, दुख-दरिद्रता, से, मुक्ति, पाने, का, मौका, कर, लें, ये, खास, काम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Apara Ekadashi Vrat Katha: अपरा एकादशी व्रत की संपूर्ण कथा, पूजा में पढ़ें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6163</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6163</guid>
<description><![CDATA[ Apara Ekadashi 2026: आज अपरा एकादशी है. ये व्रत तमाम कष्ट, दुख, दोष को मिटाकर व्यक्ति को परम सुख प्रदान करता है इसका महाम्त्य स्वंय श्रीकृष्ण ने किया है. इस दिन व्रत करने वालोंं को अपरा एकादशी की ये कथा जरुर पढ़ना चाहिए, इससे श्रीहरि बेहद प्रसन्न होते हैं.
अपरा एकादशी की कथा
श्रीकृष्ण ने कहा, &quot;हे अर्जुन! ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम अपरा है, क्योंकि यह अपार धन एवं पुण्यों को प्रदान करने तथा समस्त पापों का नाश करने वाली है. जो मनुष्य इसका व्रत करते हैं, उनकी लोक में प्रसिद्धि होती है.

अपरा एकादशी के व्रत के प्रभाव से ब्रह्महत्या, प्रेतयोनि, दूसरे की निन्दा आदि से उत्पन्न पापों का नाश हो जाता है, इतना ही नहीं, स्त्रीगमन, झूठी गवाही, असत्य भाषण, झूठा वेद पढ़ना, झूठा शास्त्र बनाना, ज्योतिष द्वारा किसी को भरमाना, झूठा वैद्य बनकर लोगों को ठगना आदि भयङ्कर पाप भी अपरा एकादशी के व्रत से नष्ट हो जाते हैं.
युद्धक्षेत्र से भागे हुये क्षत्रिय को नर्क की प्राप्ति होती है, किन्तु अपरा एकादशी का व्रत करने से उसे भी स्वर्ग की प्राप्ति हो जाती है. गुरु से विद्या अर्जित करने के उपरान्त जो शिष्य गुरु की निन्दा करते हैं तो वे अवश्य ही नर्क में जाते हैं. अपरा एकादशी का व्रत करने से इनके लिये स्वर्ग जाना सम्भव हो जाता है.
तीनों पुष्करों में स्नान करने से अथवा कार्तिक माह में स्नान करने से अथवा गङ्गाजी के तट पर पितरों को पिण्डदान करने से जो फल प्राप्त होता है, वही फल अपरा एकादशी का व्रत करने से प्राप्त होता है.
बृहस्पतिवार के दिन गोमती नदी में स्नान करने से, कुम्भ में श्रीकेदारनाथजी के दर्शन करने से तथा बदरिकाश्रम में निवास करने से तथा सूर्य ग्रहण एवं चन्द्र ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में स्नान करने से जो फल सिंह राशि वालों को प्राप्त होता है, वह फल अपरा एकादशी के व्रत के समान है. जो फल हाथी-घोड़े के दान से तथा यज्ञ में स्वर्णदान से प्राप्त होता है, वह फल अपरा एकादशी व्रत के फल के समान है. गौ तथा भूमि या स्वर्ण के दान का फल भी इसके फल के समान होता है.
पापरूपी वृक्षों को काटने के लिये यह व्रत कुल्हाड़ी के समान है तथा पापरूपी अन्धकार के लिये सूर्य के समान है. मनुष्य को इस एकादशी का व्रत अवश्य ही करना चाहिये. यह व्रत सब व्रतों में उत्तम है. अपरा एकादशी के दिन श्रद्धापूर्वक भगवान श्रीविष्णु का पूजन करना चाहिये, जिससे अन्त में विष्णुलोक की प्राप्ति होती है.
प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था. उसका छोटा भाई वज्रध्वज बड़ा ही क्रूर, अधर्मी तथा अन्यायी था. वह अपने बड़े भाई से द्वेष रखता था. उस पापी ने एक दिन रात्रि में अपने बड़े भाई की हत्या करके उसकी देह को एक जंगली पीपल के नीचे गाड़ दिया. इस अकाल मृत्यु से राजा प्रेतात्मा के रूप में उसी पीपल पर रहने लगा और अनेक उत्पात करने लगा.
एक दिन अचानक धौम्य नामक ॠषि उधर से गुजरे. उन्होंने प्रेत को देखा और तपोबल से उसके अतीत को जान लिया. अपने तपोबल से प्रेत उत्पात का कारण समझा. ॠषि ने प्रसन्न होकर उस प्रेत को पीपल के पेड़ से उतारा तथा परलोक विद्या का उपदेश दिया.
दयालु ॠषि ने राजा की प्रेत योनि से मुक्ति के लिए स्वयं ही अपरा (अचला) एकादशी का व्रत किया और उसे अगति से छुड़ाने को उसका पुण्य प्रेत को अर्पित कर दिया. इस पुण्य के प्रभाव से राजा की प्रेत योनि से मुक्ति हो गई. वह ॠषि को धन्यवाद देता हुआ दिव्य देह धारण कर पुष्पक विमान में बैठकर स्वर्ग को चला गया.
हे राजन्! मैंने यह अपरा एकादशी की कथा लोकहित के लिये कही है. इसके पठन एवं श्रवण से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.
Apara Ekadashi 2026: क्या एकादशी व्रत में एलोपैथी दवाईयां खा सकते हैं ?


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/13/a275a7bf9d0b355b9a3341e9c9cf7b2a1778616927121499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Apara, Ekadashi, Vrat, Katha:, अपरा, एकादशी, व्रत, की, संपूर्ण, कथा, पूजा, में, पढ़ें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Apara Ekadashi 2026: अपरा एकादशी व्रत का दिन बनाएं शुभ, शाम होते ही इन जगहों पर जलाएं दीप</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6161</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6161</guid>
<description><![CDATA[ Apara Ekadashi Vrat 2026: अपरा एकादशी हिंदू धर्म की विशेष एकादशी तिथि में एक है, जो ज्येष्ठ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन पड़ती है. अपरा एकादशी को अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि, अपरा एकादशी के व्रत से व्यक्ति को जीवन में अपार सुख-समृद्धि मिलती है.
पंचांग के अनुसार, अपरा एकादशी आज बुधवार 13 मई 2026 को है. एकादशी तिथि की शुरुआत 12 मई दोपहर 2:52 पर हो चुकी थी और 13 मई दोपहर 1 बजकर 29 मिनट पर एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी. उदयातिथि के मुताबिक 13 मई को ही अपरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. वहीं 14 अप्रैल को व्रत का पारण किया जाएगा. पारण के लिए सुबह 5:31 से 8:14 मिनट तक का समय रहेगा.
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक और देश के जाने-माने प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अनीष व्यास के अनुसार, अपरा एकादशी पर स्नान, व्रत, पूजा-पाठ और दान आदि जैसे कार्य पुण्यदायी माने जाते हैं. साथ ही इस एकादशी पर सूर्यास्त के बाद कुछ विशेष स्थानों पर दीप जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है. अपरा एकादशी के अवसर को शुभ बनाने के लिए आज शाम होते ही इन जगहों पर दीपक अवश्य जलाएं. इससे घर-परिवार में शुभता और सकारात्मकता का आगमन होगा.
ये भी पढ़ें: Kamakhya Temple: चुनाव से शपथ तक मां कामाख्या का आशीर्वाद, नेताओं के लिए क्यों खास है यह शक्ति पीठ?
अपरा एकादशी पर सूर्यास्त के बाद जलाएं इन जगहों पर दीपक (Apara Ekadashi 2026 Deepak Upay)

लक्ष्मी नारायण- आज अपरा एकादशी के शाम की पूजा के समय एक घी का दीपक भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के समक्ष जरूर जलाएं और मंगल कामना करें. प्रदोष काल में जलाया गया यह दीप आपके जीवन में सुख-समृद्धि ला सकता है.
मुख्य द्वार- एकादशी के दिन शाम के समय घर के मुख्य द्वार या आंगन में एक दीपक जलाएं. इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर पर शुभता का वास होता है.
तुलसी के पास- एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पास एक दीपक जलाना बहुत शुभ माना जाता है. आप यह उपाय नियमित रूप से भी कर सकते हैं. इससे मां लक्ष्मी का वास घर पर होता है.
नदी सरोवर- एकादशी की शाम किसी पवित्र नदी, सरोवर के पास भी शाम के समय दीपक जलाना चाहिए. यदि पास में नदी-सरोवर ना हो तो आप कुएं के पास या मंदिर के प्रांगण में भी दीपक जला सकते हैं. इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है और मोक्ष प्राप्ति होती है.

दीपक जलाने से क्या होता है?
पूजा-पाठ में दीपक जलाना बहुत शुभ होता है. एकादशी के दिन पूजा में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के सामने यदि दीपक जलाए जाए तो इससे भगवान की कृपा मिलती है. वहीं एकादशी पर यदि अखंड दीप जलाए जाए तो इसे और भी शुभ माना जाता है. अखंड दीप से घर का वातावरण भी सात्विक बना रहता है.
ये भी पढ़ें: Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह में 4 एकादशी का संयोग, जानें अपरा, पद्मिनी, परमा और निर्जला एकादशी व्रत की तिथिDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/13/40593e49c8d5475a779a9bf135fe308f1778647145547466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 13 May 2026 12:14:01 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Apara, Ekadashi, 2026:, अपरा, एकादशी, व्रत, का, दिन, बनाएं, शुभ, शाम, होते, ही, इन, जगहों, पर, जलाएं, दीप</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kamalgatta Mala: कमलगट्टा माला से कैसे आकर्षित होती हैं मां लक्ष्मी? जानिए पूजा के विधि और स्थिर धन प्राप्ति का रहस्य</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6135</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6135</guid>
<description><![CDATA[ Kamalgatta Mala: भारतीय सनातन परंपरा में मां लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी माना गया है. हर व्यक्ति की यह अभिलाषा होती है कि उसके घर में लक्ष्मी का वास स्थायी हो और आर्थिक तंगी कभी बाधा न बने. शास्त्रों और तांत्रिक मान्यताओं में मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के कई मार्ग बताए गए हैं, जिनमें कमलगट्टे की माला का प्रयोग अत्यंत चमत्कारिक और प्रभावशाली माना जाता है.

कमलगट्टा माला का आध्यात्मिक महत्व
कमल का पुष्प देवी लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय आसन और प्रतीक है. कमलगट्टा, दरअसल कमल के फूल के बीज होते हैं. मान्यता है कि इन बीजों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जो वातावरण से नकारात्मकता को दूर कर आर्थिक संपन्नता के द्वार खोलता है. विशेषकर शुक्रवार, दीपावली और पूर्णिमा जैसे शुभ अवसरों पर इसका महत्व और भी बढ़ जाता है.
साधना के अनिवार्य नियम और तैयारी
सफलतापूर्वक मंत्र सिद्धि के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना आवश्यक है:
माला का चयन

शुद्धता: साधना के लिए सदैव &#039;मंत्र सिद्ध&#039; और &#039;प्राण प्रतिष्ठित&#039; कमलगट्टा माला का ही चयन करें.
संख्या: माला में मनकों (दानों) की संख्या 100 से 108 के बीच होनी चाहिए.

शुद्धिकरण और अभिषेक
साधना आरंभ करने से पूर्व माला को जागृत करना आवश्यक है:

दिन: किसी भी बुधवार के दिन यह प्रक्रिया करें.
विधि: माला को पहले शुद्ध जल से, फिर कच्चे दूध से और पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएं.
श्रृंगार: साफ कपड़े से पोंछकर माला पर केसर का तिलक लगाएं और संभव हो तो गुलाब का इत्र अर्पित करें.

स्थापना और संकल्प

मां लक्ष्मी की एक सुंदर प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
उनके समक्ष शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें.
हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए साधना का संकल्प लें.

मंत्र सिद्धि की प्रक्रिया
देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए &#039;स्थिर लक्ष्मी&#039; मंत्र का जाप किया जाता है.
साधना मंत्र:
&quot;ॐ स्वर्णावतिमहाभगवती कामरूपिणि मम कार्य सिद्धि करि करि असीमित द्रव्य स्थिर लक्ष्म्यै नमः&quot;
सिद्धि के नियम:

संख्या: मंत्र को सिद्ध करने के लिए कुल 10,000 (दस हजार) बार जाप करना अनिवार्य है.
यदि आपकी माला 100 दानों की है, तो कुल 100 माला पूर्ण करने पर मंत्र सिद्ध हो जाता है.
अर्पण: जाप पूर्ण होने के पश्चात, उस माला को स्वयं धारण न करें. उसे मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को पहना दें.
विशेष सावधानी: एक बार मां लक्ष्मी को अर्पित करने के बाद उस माला का पुनः जाप के लिए प्रयोग नहीं करना चाहिए. वह माला सदैव मां के गले में ही शोभायमान रहनी चाहिए.

साधना का फल
जब पूर्ण श्रद्धा, एकाग्रता और विश्वास के साथ यह साधना संपन्न की जाती है, तो साधक को &#039;स्थिर लक्ष्मी&#039; का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसका अर्थ यह है कि धन केवल आता ही नहीं, बल्कि घर में ठहरता भी है. आय के नए स्रोत खुलते हैं, कर्ज से मुक्ति मिलती है और परिवार में मानसिक शांति के साथ-साथ भौतिक सुख-सुविधाओं का विस्तार होता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/11/5bdabe8abd96e585384f84988391f3a917784418655101218_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kamalgatta, Mala:, कमलगट्टा, माला, से, कैसे, आकर्षित, होती, हैं, मां, लक्ष्मी, जानिए, पूजा, के, विधि, और, स्थिर, धन, प्राप्ति, का, रहस्य</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Somnath Amrit Mahotsav 2026: सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर शामिल होंगे पीएम मोदी, होगा भव्य कुंभाभिषेक</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6133</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6133</guid>
<description><![CDATA[ Somnath Amrit Mahotsav 2026: भारत के प्राचीन और आस्था के प्रमुख केंद्रों में सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) भी एक है. आज सोमवार, 11 मई को मंदिर अपने आधुनिक पुनर्निर्माण और लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है. गुजरात में आयोजित सोममाथ अमृत महोत्सव की तैयारियां जोरों पर हैं.
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र (PM Narendra Modi) मोदी समेत कई नेता इस भव्य और आध्यात्मिक महोत्सव का हिस्सा बनेंगे. साथ ही पीएम मोदी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और कुंभाभिषेक भी करेंगे. कुंभाभिषेक को हिंदू परंपरा में बहुत ही शुभ और पवित्र अनुष्ठान माना जाता है. मान्यता है कि इससे मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता में वृद्धि होती है.
सोमनाथ मंदिर को हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला ज्योतिर्लिंग है, जो गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र (वेरावल बंदरगाह) के प्रभास पाटन में स्थित है. धार्मिक मान्यता है कि, चंद्रदेव ने राजा दक्ष के श्राप से मुक्ति पाने के लिए यहीं तपस्या की थी और यहीं सबसे पहले शिवजी अग्नि स्तंभ रूप में प्रकट हुए थे. इसलिए सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के अनंत और अविनाशी स्वरूप का प्रतीक है.&amp;nbsp;
सोमनाथ मंदिर सदियों से आस्था, संस्कृति और भारतीय गौरव का प्रतीक रहा है. इतिहास में कई बार विध्वंस और आक्रमण झेलने के बाद भी मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ और आज यह भारतीय सनातन परंपरा की अटूट शक्ति का प्रतीक है.

सोमनाथ अमृत महोत्सव की तैयारी

सोमनाथ मंदिर में अमृत महोत्सव की तैयारियां चल रही है. मंदिर प्रांगण में धार्मिक और सांस्कृति आयोजन आयोजित होंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और कुंभाभिषेक करेंगे. साथ ही वे जनसभा को संबोधित भी करेंगे.
सोमनाथ अमृत महोत्सव के कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम एयर शो करेगी. साथ ही हैलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी.

ये भी पढ़ें: Ganga Dussehra 2026: 25 मई को गंगा दशहरा, नोट करें पवित्र स्नान-दान और पूजा का शुभ मुहूर्त
सोमनाथ मंदिर के विध्वंस से सृजन की गाथा
मोदी ने कहा- जिस तरग सोमनाथ को नष्ट करने के लिए बार-बार षड्यंत्र और प्रयास किए गए, उसी प्रकार से विदेशी आक्रमणकारियों ने सदियों तक भारत को नष्ट करने की कोशिश की. फिर भी न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत.
सोमनाथ मंदिर का इतिहास विनाश और पुनर्निर्माण का एक गौरवशाली प्रतीक है.&amp;nbsp;आजादी के बाद देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया.&amp;nbsp;
फिर 11 मई 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद (Rajendra Prasad) ने मंदिर के पुनः लोकार्पण समारोह में भाग लिया. इसी ऐतिहासिक क्षण की याद में आज 11 मई 2026 को 75वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है.
ये भी पढ़ें: Mangal Aditya Yog 2026: आज बनेगा शक्तिशाली मंगल आदित्य योग, 4 दिनों तक इन राशियों को लाभ के संकेतDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/11/4ca1ffe6f99bcca7ad4bffd1f2e5f6161778472187784466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Somnath, Amrit, Mahotsav, 2026:, सोमनाथ, मंदिर, के, लोकार्पण, की, 75वीं, वर्षगांठ, पर, शामिल, होंगे, पीएम, मोदी, होगा, भव्य, कुंभाभिषेक</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Bakrid 2026 Date: मौलाना ने बताई ईद&#45;उल&#45;अजहा की तारीख, जानें भारत, पाकिस्तान, सउदी में बकरीद कब</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6134</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6134</guid>
<description><![CDATA[ Bakrid 2026 Date: इस्लाम धर्म के कई महत्वपूर्ण त्योहारों में बकरीद भी एक है, जिसे ईद-उल-अजहा के नाम से भी जाना जाता है. बकरीद पर्व पर मुख्य रूप से कुर्बानी का खास महत्व होता है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, बकरीद हर साल जुलहिज्जा (12वां महीना) की 10दसवीं तारीख को मनाई जाती है.
सभी इस्लामिक त्योहारों की तरह बकरीद की तारीख भी हिलाल का चांद नजर आने पर तय होती है. नया चांद नजर आने के बाद जुलहिज्जा की शुरुआत होगी और दसवें दिन बकरीद मनाया जाएगा. इसलिए दुनियाभर के मुसलमानों को जुलहिज्जा के चांद का बेसब्री से इंतजार रहता है.
बकरीद की तारीख को लेकर लगभग दुनियाभर के देशों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. भारत से लेकर पाकिस्तान, ईरान, सऊदी और इंग्लैंड जैसे देशों में बस यही सवाल है कि, बकरीद आखिर कब मनाई जाएगी. इस बीच इस्लामिक विद्वान समीरुद्दी कासमी (Samiruddin Qasmi) ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो जारी कर चांद की स्थिति बताई है. वीडियो में उन्होंने जुलहिज्जा के चांद और बकरीद की संभावित तारीख को लेकर जानकारी दी है.
ये भी पढ़ें: Bakrid 2026 Date: 27 या 28 मई कब होगी बकरीद, ईद-उल-अजहा की तारीख पर मौलाना ने क्या कहा
बता दें कि, समीरुद्दीन कासमी ब्रिटेन में रहने वाले एक भारतीय इस्लामी विद्वान हैं. ये इस्लामी खगोल विज्ञान, हदीस, हनफी न्यायशास्त्र और इस्लामी धर्म-नीतियों में विशेषज्ञता रखते हैं. जुलहिज्जा और ईद-उल-अजहा की तारीख को लेकर समीरुद्दीन कासमी कहते हैं-

चांद की ऊंचाई पर इस्लामिक विद्वान कासमी का आंकलन&amp;nbsp;
17 मई 2026 को भारत में चांद की ऊंचाई 9 डिग्री और उमर 17 घंटे 39 मिनट है. बर्मा में 8 डिग्री, &amp;nbsp;बांग्लादेश में 9 डिग्री, नेपाल में 9 डिग्री. वैसे तो चांद 10 डिग्री में नजर आता है और यहां 9 डिग्री है. 9 डिग्री में चांद देखना मुश्किल है.
वहीं 18 मई 2026 भारत में चांद की ऊंचाई 23 डिग्री और उमर 41 घंटे 40 मिनट है. बर्मा में 22 डिग्री, &amp;nbsp;बांग्लादेश में 23 डिग्री, नेपाल में 23 डिग्री. चांद 10 डिग्री में नजर आता है और 22-23 डिग्री में अच्छी तरह से काफी देर तक हिलाल चांद नजर आएगा. ऐसे में इन देशों में 19 मई को जुलहिज्जा (Dhul Hijjah 1447) की पहली तारीख हो सकती है और इसके ठीक 10 दिन बाद 28 मई को बकरीद मनाई जा सकती है.
17 मई को कराची में चांद 10 डिग्री, पेशावर में 10 डिग्री, ईरान में 10 डिग्री और अफगानिस्तान में 10 डिग्री है. चांद 10 डिग्री में नजर आता है और यहां 10 डिग्री तो है लेकिन चांद की उमर कब है. लेकिन इन जगहों पर 18 मई को जुलहिज्जा की पहली तारीख हो सकती है. ऐसे में पाकिस्तान में 27 मई को बकरीद मनाई जा सकती है.&amp;nbsp;



भारत में बकरीद
28 मई, 2026


पाकिस्तान में बकरीद
27 मई, 2026


इंग्लैंड में बकरीद
&amp;nbsp;27 मई, 2026


सउदी में बकरीद
&amp;nbsp;27 मई, 2026



ये भी पढ़ें: Eid al Adha 2026: मई में इस दिन मनाया जाएगा इस्लाम का बड़ा त्योहार, तैयारियों में जुट जाएं मुसलमान

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/10/93996ebf51e6a5a5df925c9e35c1b6e21778419451908466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Bakrid, 2026, Date:, मौलाना, ने, बताई, ईद-उल-अजहा, की, तारीख, जानें, भारत, पाकिस्तान, सउदी, में, बकरीद, कब</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Somnath Amrit Mahotsav 2026: आज सोमनाथ मंदिर में कुंभाभिषेक, क्या है ये अनुष्ठा, यहां इतिहास में पहली बार होगा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6132</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6132</guid>
<description><![CDATA[ Somnath Amrit Mahotsav 2026 Kumbhabhishek: गुजरात सोमनाथ मंदिर में एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माने जाने वाले इस पवित्र धाम में आज कुंभाभिषेक किया जाएगा. इतिहास में पहली बार सोमनाथ मंदिर के शिखर पर 11 तीर्थों के जल से कुंभाभिषेक होगा, इसमें पीएम मोदी भी शामिल होंगे. क्या है कुंभाभिषेक, कैसे किया जाएगा, इसका महत्व भी जान लें.
क्या है कुंभाभिषेक ?
कुंभाभिषेक = &#039;कुंभ&#039; (कलश) + &#039;अभिषेक&#039; (स्नान) पवित्र कलश जल से मंदिर शिखर का अभिषेक, इसका दूसरा अर्थ है मंदिर को &#039;पुनः जीवित&#039; करना. जब विशेष वैदिक अनुष्ठानों के बाद अभिमंत्रित जल को मंदिर के शिखर, कलश और देव विग्रहों पर चढ़ाया जाता है, तो उसे कुंभाभिषेक कहा जाता है.

पीएम ने सोमनाथ मंदिर में की पूजा

#WATCH | Gir Somnath, Gujarat: Prime Minister Narendra Modi performs rituals as part of the Somnath Amrut Mahotsav at the Somnath Temple, one of the twelve Jyotirlingas. Somnath Amrut Mahotsav marks 75 years since the inauguration of the restored Temple. (Source:&amp;hellip; pic.twitter.com/671p8xud83
&amp;mdash; ANI (@ANI) May 11, 2026




कुंभाभिषेक क्यों किया जाता है
ये कोई सामान्य पूजा नहीं होती, बल्कि कई दिनों तक चलने वाला वैदिक अनुष्ठान होता है. इसमें यज्ञ, हवन, रुद्र पाठ, मंत्रोच्चार और अग्नि अनुष्ठानों के जरिए जल को आध्यात्मिक ऊर्जा से अभिमंत्रित किया जाता है. बाद में उसी जल से मंदिर के शिखर और देव विग्रहों का अभिषेक किया जाता है.&amp;nbsp; सनातन मान्यताओं के अनुसार इससे मंदिर की सकारात्मक ऊर्जा कई गुना बढ़ती है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है.आगम शास्त्रों के अनुसार अधिकांश मंदिरों में हर 12 साल में पुनः कुंभाभिषेक किया जाता है
कैसे होता है कुंभाभिषेक ?

इस दौरान 51 वैदिक ब्राह्मण अति रुद्र पाठ करेंगे, महा रुद्र यज्ञ में लगभग 1.25 लाख आहुतियां दी जाएंगी.
कुंभाभिषेक के लिए सबसे पहले मंदिर परिसर में विशेष यज्ञशाला बनाई जाती है, जहां पूरे अनुष्ठान का वैदिक आयोजन होता है. यही स्थान धार्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है
वेदपाठी ब्राह्मण कई दिनों तक रुद्र पाठ, हवन, अग्नि अनुष्ठान और वैदिक मंत्रोच्चार करते हैं इससे वातावरण को आध्यात्मिक रूप से शुद्ध किया जाता है.
सैकड़ों कलशों में गंगाजल और विभिन्न तीर्थों एवं पवित्र नदियों का जल भरा जाता है. इन कलशों को विशेष मंत्रों से अभिमंत्रित किया जाता है.
वैदिक विधियों के माध्यम से कलशों में भरे जल को आध्यात्मिक ऊर्जा से संपन्न किया जाता है. इसे दिव्य शक्ति का माध्यम माना जाता है.
मंदिर में स्थापित देव प्रतिमाओं और गर्भगृह की विशेष पूजा एवं शुद्धि की जाती है, ताकि सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके.
यदि नई मूर्तियां स्थापित की जाती हैं, तो उनमें &amp;lsquo;प्राण प्रतिष्ठा&amp;rsquo; की जाती है. सनातन परंपरा में इसे देव शक्ति को मूर्ति में स्थापित करने की प्रक्रिया माना जाता है.
मूर्ति निर्माण का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण &amp;lsquo;नेत्र उन्मीलनम्&amp;rsquo; होता है, जिसमें देव प्रतिमा की आंखों को पूर्ण रूप दिया जाता है. मान्यता है कि इसी क्षण से मूर्ति में चेतना जागृत होती है.
अंत में अभिमंत्रित पवित्र जल को मंदिर के शिखर, कलश और देव विग्रहों पर चढ़ाया जाता है. इसी प्रक्रिया को &amp;lsquo;कुंभाभिषेक&amp;rsquo; कहा जाता है.
अनुष्ठान पूर्ण होने के बाद मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं और भक्त पहली बार नवऊर्जित देव विग्रहों के दर्शन करते हैं

कुंभाभिषेक का इतिहास
कुंभाभिषेक की परंपरा दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिरों में विशेष रूप से प्रसिद्ध रही है. तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई बड़े मंदिरों में समय-समय पर यह आयोजन होता है लेकिन सोमनाथ मंदिर के शिखर पर पहली बार इस तरह का कुंभाभिषेक होना ऐतिहासिक पल रहेगा.
धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार मंदिर केवल पत्थरों से बनी संरचना नहीं होते, बल्कि उनमें स्थापित देव विग्रहों और वैदिक मंत्रों के माध्यम से दिव्य ऊर्जा का संचार होता है. कुंभाभिषेक उसी ऊर्जा को पुनः सक्रिय करने की प्रक्रिया मानी जाती है.
सोमनाथ मंदिर में क्यों हो रहा कुंभाभिषेक
मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सोमनाथ अमृत पर्व का भव्य आयोजन किया जा रहा है. इसी के चलते मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर कुंभाभिषेक होगा जिसका साक्षी भारत बनेगा. देशभर से श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल को देखने के लिए सोमनाथ पहुंच रहे हैं.
Weekly Rashifal 10-16 May 2026: इन 7 दिनों में पांच राशियों की पलटेगी किस्मत, मेष-मीन तक साप्ताहिक राशिफल देखें




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/11/926912010610ae1441d0a65316d68f971778475228664499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Somnath, Amrit, Mahotsav, 2026:, आज, सोमनाथ, मंदिर, में, कुंभाभिषेक, क्या, है, ये, अनुष्ठा, यहां, इतिहास, में, पहली, बार, होगा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Shiv Gorakhnath Ashram: शिव गोरखनाथ आश्रम की बढ़ी महिमा, 400 साल पुरानी तपोभूमि पर पहुंचेगे CM योगी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6131</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6131</guid>
<description><![CDATA[ Shiv Gorakhnath Ashram:&amp;nbsp;हिमालय की गोद से निकली गंगा की धारा की तरह शांत और शक्तिशाली, बागपत जनपद का श्री शिव गोरखनाथ आश्रम भक्तों के लिए एक जीवंत तीर्थ बन चुका है. लगभग 400 वर्ष पूर्व यहां बाबा छोटे नाथ और बाबा लिच्छी नाथ ने कठोर तपस्या के बाद समाधि ले ली थी. उनकी तपोस्थली आज लगभग 23 बीघा विशाल भूमि पर बने इस आश्रम में साकार हो रही है, जहां प्राचीन समाधियां और भव्य मंदिर आस्था का अनोखा संगम रचते हैं.
मंदिरों और समाधियों में बसती है आध्यात्मिक ऊर्जा
आश्रम में शिव मंदिर (Shiv Mandir), माता मंदिर, हनुमान मंदिर (Hanuman Mandir), भैरव मंदिर (Bhairav Mandir), शनि देव मंदिर (Shani Mandir), नवनाथ मंदिर और गोरखनाथ मंदिर जैसे अनेक पावन स्थल हैं. बाबा छोटे नाथ और बाबा लिच्छी नाथ की समाधियां यहां की आत्मा हैं, जहां भक्त दर्शन मात्र से मन की शांति पाते हैं. नाथ संप्रदाय की परंपरा को जीवंत रखते हुए यह आश्रम योग, ध्यान और भजन-कीर्तन का केंद्र बना हुआ है. सुबह की आरती से रात की आरती तक, यहाँ की दिव्यता भक्तों को खींच लाती है.
पिछले कुछ वर्षों में आश्रम की मान्यता दिनों दिन बढ़ती जा रही है. दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. आश्रम प्रबंधन द्वारा आयोजित नाथ सिद्ध महोत्सव, रुद्राभिषेक और शनि शांति पूजा जैसे कार्यक्रम भक्तों को आकर्षित करते हैं.

11 मई को आश्रम पहुंचेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
11 मई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) का आश्रम में आगमन निर्धारित है. यह दौरा आश्रम के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है. विकास कार्यों का शिलान्यास और भक्तों को संबोधन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि बागपत को धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनाने में मदद मिलेगी. आश्रम के महंत अर्जुन नाथ का कहना है कि हमारा पूरा ध्यान आश्रम की सुंदरता और भव्यता बनाए रखने पर है. पहले की तरह आरम में चंदन, रुद्राक्ष, कदम के पौधे लगाकर तालाब को पुनर्जीवित करेंगे.
जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री दोपहर 2 बजकर 30 मिनट श्री शिव गोरखनाथ आश्रम पहुंचेंगे, जहां वे खोखरा भगवानपुर नांगल में आयोजित &#039;नव नाथ&#039; प्रतिमा प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होंगे. इसके साथ ही, वे &#039;आठ मान&#039; में आयोजित भंडारे में भी हिस्सा लेंगे. कार्यक्रमों के समापन के बाद, मुख्यमंत्री दोपहर 3:45 बजे गाजियाबाद के लिए प्रस्थान करेंगे.
करोड़ों की लागत से हुआ सौंदर्यीकरण
ऐसे में वह दिन दूर नहीं जब यह तपोस्थली देशभर में पहचानी जाएगी. यह बता दें कि वर्ष 2022 में उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग से 616.89 लाख रुपये की धनराशि से सौंदर्यीकरण कार्य हुआ. साल 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दर्शन के बाद आश्रम की महत्ता राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो गई. अब एक बार फिर आज योगी आदित्यनाथ यहां आकर दर्शन करेंगे.
ये भी पढ़ें: Somnath Amrit Mahotsav 2026: सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ आज, पीएम मोदी करेंगे कुंभाभिषेकDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/05/11/b5de5d97a20abe2555ffb44016e985da1778477149601466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 11 May 2026 12:46:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Shiv, Gorakhnath, Ashram:, शिव, गोरखनाथ, आश्रम, की, बढ़ी, महिमा, 400, साल, पुरानी, तपोभूमि, पर, पहुंचेगे, योगी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kedarnath Yatra 2026: आज से केदारनाथ यात्रा शुरू, श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6104</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6104</guid>
<description><![CDATA[ Kedarnath Yatra 2026: आस्था और श्रद्धा के प्रतीक भगवान श्री केदारनाथ धाम के कपाट कल दिनांक 22 अप्रैल 2026 को प्रातः 08:00 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे. इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ यात्रा 2026 का विधिवत शुभारंभ होगा.
कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी धाम पहुंचेंगे और परंपरानुसार धार्मिक अनुष्ठान एवं पूजा-अर्चना में सम्मिलित होंगे. कपाट खुलने को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है. देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंच रहे हैं और बाबा के दर्शन के लिए उत्सुक हैं.
क्या हैं यात्रा के इंतजाम
श्रद्धालुओं की सुगम, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं. इनमें प्रमुख रूप से सड़कों की मरम्मत एवं सुचारू यातायात व्यवस्था, पैदल मार्ग पर शौचालय, आवास, खान-पान एवं पेयजल की सुविधा, विद्युत एवं सोलर लाइट की समुचित व्यवस्था तथा प्रत्येक दो किलोमीटर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सा सहायता केंद्र (एमआरपी) की स्थापना की गई है.
इसके अतिरिक्त, पैदल मार्ग तथा धाम क्षेत्र में स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते हुए आधुनिक शौचालयों की व्यवस्था एवं गर्म पानी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है. सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस एवं प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हैं. यात्रा मार्ग एवं धाम क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सहज यात्रा का अनुभव मिल सके.
पंचमुखी उत्सव डोली केदारनाथ पहुंची
उल्लेखनीय है कि कपाट खुलने से एक दिन पूर्व आज बाबा केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली धाम पहुंच रही है, जिससे संपूर्ण क्षेत्र में भक्ति एवं आस्था का वातावरण चरम पर है.
Rashifal 22 April 2026: मेष से मीन तक राशिफल, इन 2 राशियों का जल्दबाजी में लिया फैसला पड़ेगा भारी, रहें संभलकर

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/21/eccaa8fb63872a54e8dd2afa1c1300021776783807533499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:18:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kedarnath, Yatra, 2026:, आज, से, केदारनाथ, यात्रा, शुरू, श्रद्धालुओं, में, उत्साह, चरम, पर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Harsha Richhariya Sanyas: मॉडल हर्षा रिछारिया ने लिया संन्यास, जानें कैसे बनते हैं साध्वी ? क्या&#45;क्या त्यागना पड़ता है</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6105</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6105</guid>
<description><![CDATA[ Harsha Richhariya Sanyas: ग्लैमर की दुनिया छोड़ आध्यात्म की राह पकड़ने वाली सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर हर्षा रिछारिया एक बार फिर सुर्खियों में है. महाकुंभ 2025 में वायरल हुईं हर्षा ने संन्यास ले लिया है. अब वह सांसारिक जीवन को छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग पर चलेंगी. साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने उज्जैन में खुद का पिंडदान कर संन्यास की परंपरा का पालन किया इसके बाद उनका नाम भी बदल गया है. आखि
हर्षा रिछारिया से बनीं हर्षानंद गिरी
हर्षा रिछारिया ने अक्षय तृतीया पर उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे मौनी तीर्थ आश्रम में संन्यास दीक्षा ली. पंचायती निरंजनी अखाड़ा के पीठाधीश्वर सुमनानंद गिरि महाराज के नेतृत्व में ये अनुष्ठान हुआ. अब हर्षा रिछारिया स्वामी हर्षानंद गिरि नाम से पहचानी जाएंगी.

( स्वामी हर्षानंद गिरी ) बनी हर्षा रिछारिया। आज गृहस्थ जीवन से संन्यास लेकर उज्जैन में आज अपना तर्पण पिंडदान और श्राद्ध किया। pic.twitter.com/fcm2LAwURw
&amp;mdash; Chaudhary Sanjeev Singh (@Sanjeev33260284) April 19, 2026



खुद का तर्पण, पिंडदान किया
साध्वी हर्षा नंदगिरी ने स्वंय का तर्पण, पिंडदान, शिखा और दंड का त्याग कर संन्यास की दीक्षा ली. सन्यास दीक्षा के दौरान &#039;स्वयं का पिंडदान&#039; एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक अनुष्ठान है, जो सांसारिक जीवन, परिवार और पिछले रिश्तों के पूर्ण त्याग का प्रतीक है. इस प्रक्रिया में, साधक/साधिका अपने पितरों के तर्पण के साथ-साथ स्वयं के नाम का पिंडदान करते हैं, जिसका अर्थ है कि उनका पूर्व जीवन समाप्त हो गया है और वे अब आध्यात्मिक जीवन के लिए पुनर्जन्म ले चुके हैं
कैसे बनते हैं साध्वी ?

साध्वी बनने का मार्ग आसान नहीं होता. यह एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा है, जिसमें महिला को अपने पूरे जीवन को नए सिरे से ढालना पड़ता है. यह सिर्फ बाहरी रूप बदलने का निर्णय नहीं, बल्कि भीतर से पूरी तरह परिवर्तन की प्रक्रिया है.
सबसे पहले, साध्वी बनने की इच्छा रखने वाली महिला को अपने मन में यह दृढ़ निश्चय करना होता है कि वह सांसारिक जीवन, रिश्तों और मोह-माया से पूरी तरह दूर रह सके.
इस निर्णय की गंभीरता को समझने के लिए उसके परिवार, जीवनशैली और यहां तक कि उसकी जन्म कुंडली तक का विश्लेषण किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह इस मार्ग के लिए उपयुक्त है.
साध्वी बनने के लिए एक महिला को अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का त्याग करना पड़ता है, जैसे कि अपने परिवार और दोस्तों से दूर रहना. भौतिक सुखों का त्याग करना पड़ता है, जैसे कि धन, पद, और प्रतिष्ठा.
इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका गुरु की होती है. बिना गुरु के मार्गदर्शन के साध्वी बनने की राह संभव नहीं मानी जाती. जब कोई महिला किसी योग्य गुरु से दीक्षा लेती है, तभी उसके आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत होती है. गुरु उसे मंत्र, ज्ञान और जीवन जीने की नई दिशा प्रदान करते हैं.
दीक्षा के बाद साध्वी को अपने पुराने जीवन से पूरी तरह अलग होना पड़ता है. इसका मतलब है. परिवार, सामाजिक पहचान और व्यक्तिगत इच्छाओं से दूरी बनाना. नियमित दिनचर्या का पालन करना पड़ता है, जिसमें प्रार्थना, ध्यान, और सेवा कार्य शामिल हैं.
इस मार्ग में त्याग का विशेष महत्व होता है. साध्वी को भौतिक सुख-सुविधाओं, आडंबर और तामसिक भोजन&amp;nbsp; का पूरी तरह त्याग करना पड़ता है. जीवन सादा, संयमित और सात्विक बनाना इस साधना का मूल आधार होता है.
बाहरी रूप में भी बदलाव आता है. साध्वी बनने से पहले सिर मुंडवाना एक प्रतीकात्मक प्रक्रिया है, खुद का तर्पण, पिंडदान किया जाता है ताकि सांसारिक जीवन का त्याग किया जा सके.
दीक्षा के बाद साध्वी को भगवा वस्त्र धारण करने होते हैं, गुरु के आदेशों का पालन करना, उनकी सेवा करना और उनके बताए मार्ग पर चलना ही उसका मुख्य कर्तव्य बन जाता है.

कौन हैं हर्षा रिछारिया
हर्षा रिछारिया का जन्म 26 मार्च 1994 को उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के झांसी जिले के मऊरानीपुर में हुआ था. बाद में उनका परिवार मध्य प्रदेश के भोपाल में बस गया. वर्तमान में हर्षा उत्तराखंड में रहती थीं.&amp;nbsp; ल वे नियमित रूप से धर्म और अध्यात्म से जुड़े विषयों पर सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करती रही हैं.
Vat Savitri Vrat 2026 Date: वट सावित्री व्रत 2026 में कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, इसी दिन है शनि जयंती
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/21/99f70658ef119fe57674d070a90f0d121776773825554499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:18:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Harsha, Richhariya, Sanyas:, मॉडल, हर्षा, रिछारिया, ने, लिया, संन्यास, जानें, कैसे, बनते, हैं, साध्वी, क्या-क्या, त्यागना, पड़ता, है</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Panchang 22 April 2026: आज रामानुज जयंती का पूरा पंचांग देखें, शुभ मुहूर्त, योग, राशिफल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6103</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6103</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang, 22 अप्रैल 2026: वैशाख शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और बुधवार है. श्रीरामानुजाचार्य को योग सिद्धियां भी प्राप्त थीं. उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक श्रीभाष्य है. जो पूर्णरूप से ब्रह्मसूत्र पर आधारित है. बुधवार को कम से कम 108 बार &amp;ldquo;ॐ गं गणपतये नमः&amp;rdquo; मंत्र का जाप करें. इससे मन शांत होता है, बुद्धि तेज होती है और काम में सफलता मिलती है.

22 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 22 April 2026)



तिथि

षष्ठी (22 अप्रैल 2026, सुबह 1.19 - 23 अप्रैल 2026, रात 10,49)



वार
बुधवार


नक्षत्र
आर्द्रा


योग
अतिखण्ड


सूर्योदय 
सुबह 6.01


सूर्यास्त
शाम 6.44


चंद्रोदय
सुबह 9.50


चंद्रोस्त
सुबह 12.25, 23 अप्रैल


चंद्र राशि
मिथुन




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 5.49 - सुबह 9.04


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 8.13 - रात 10.47




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 12.20- दोपहर 1.58


यमगण्ड काल
सुबह 7.27 - सुबह 09.04


आडल योग
रात 10.13 - सुबह 5.48, 23 अप्रैल


गुलिक काल
सुबह 10.42 - दोपहर 12.20


विडाल योग
सुबह 5.49 - सुबह 10.13




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 22 April 2026)




सूर्य
मेष


चंद्रमा
मिथुन


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



22 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.
मेष राशि (Aries):आज सकारात्मक अवसर मिलेंगे, दोपहर बाद शुभ समाचार से आत्मविश्वास बढ़ेगा. काम में सफलता मिलेगी, लेकिन विरोधियों से सावधान रहें और जल्दबाजी से बचें.
वृष राशि (Taurus):दिन संतुलित और सुकून भरा रहेगा, परिवार के साथ अच्छा समय बितेगा. आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी और सोच में बदलाव से नए रास्ते मिलेंगे.
मिथुन राशि (Gemini):सामाजिक दायरा बढ़ेगा और लोग आपके काम की सराहना करेंगे. फैसले सोच-समझकर लें, जल्दबाजी आर्थिक नुकसान दे सकती है.
कर्क राशि (Cancer):दिन भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहेगा. दोस्तों और परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा, खर्चों पर नियंत्रण रखें.
सिंह राशि (Leo):नई ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ काम में सफलता मिलेगी. बिजनेस में विस्तार और नए अवसर मिलने के योग हैं.
कन्या राशि (Virgo):धैर्य और समझदारी से काम करने पर अच्छे परिणाम मिलेंगे. करियर में नए अवसर और आर्थिक मजबूती के संकेत हैं.
तुला राशि (Libra):दिन संतुलन और नए अवसर लेकर आएगा, निर्णय सोच-समझकर लें. रिश्तों में संयम रखें और खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है.
वृश्चिक राशि (Scorpio):समझदारी से लिए गए निर्णय आपको लाभ दिलाएंगे. सरकारी कार्यों में सफलता और धन लाभ के योग बन रहे हैं.
धनु राशि (Sagittarius):आज सकारात्मकता और सीखने के अवसर मिलेंगे. प्रोजेक्ट और कॉन्ट्रैक्ट में लाभ के योग बन रहे हैं.
मकर राशि (Capricorn):मेहनत का फल मिलेगा और काम में सफलता हासिल होगी.जीवनसाथी के सहयोग से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.
कुंभ राशि (Aquarius):दिन मिश्रित रहेगा, पुराने लोगों से संपर्क बन सकता है. प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में लाभ और आर्थिक मजबूती रहेगी.
मीन राशि (Pisces):नई खुशखबरी और अवसर मिलने के योग हैं. करियर में सफलता और परिवार के साथ अच्छा समय बीतेगा.
आज का उपाय&amp;nbsp;
गौशाला में गाय को चारा खिलाएं और दान दें
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
हरा रंग सबसे शुभ है.
Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी 22 या 23 अप्रैल कब ? स्नान मुहूर्त, पूजा विधि, आरती, नियम पूरी गाइड देखें



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/21/a4e68786d2dca5b699745c426595ca161776795702789499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:18:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, आज, रामानुज, जयंती, का, पूरा, पंचांग, देखें, शुभ, मुहूर्त, योग, राशिफल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kedarnath Yatra 2026: हर हर महादेव की गूंज के साथ आज खुले केदारनाथ धाम के कपाट, शुरू हुई यात्रा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6102</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6102</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/22/91d8682f0c0b31c2b6e3831fd6bc6cd11776828311068466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:18:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kedarnath, Yatra, 2026:, हर, हर, महादेव, की, गूंज, के, साथ, आज, खुले, केदारनाथ, धाम, के, कपाट, शुरू, हुई, यात्रा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Narasimha Jayanti 2026: नरसिंह जयंती अप्रैल में कब ? जानें तारीख, मुहूर्त, नरसिंह अवतारी की पूजा का महत्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6101</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6101</guid>
<description><![CDATA[ Narasimha Jayanti 2026:&amp;nbsp;वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरसिंह जयंती मनाई जाती है. इस साल नरसिंह जयंती 30 अप्रैल 2026 को है. इस तिथि पर भगवान विष्णु ने अधर्म के अंत और भक्त की रक्षा के लिए आधे मनुष्य और आधे शेर के रूप में अवतार लिया था.
जिसे श्रीहरि का चौथा नरसिंह अवतार कहा जाता है. ये भगवान विष्णु के रौद्र रूप का अवतार है. इनकी आराधना से ज्ञान-शक्ति की प्राप्त होती है. साथ ही शत्रु का भय नहीं रहता. आइए जानते हैं नरसिंह जयंती पर पूजा का मुहूर्त, विधि.
नरसिंह जयंती 2026 मुहूर्त
वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल 2026 को रात 7.51 पर शुरू होगी और अगले दिन 30 अप्रैल 2026 को रात 9.12 पर समाप्त होगी.

नृसिंह जयन्ती सायंकाल पूजा का समय - शाम 04:17 - शाम 06:56
नृसिंह जयन्ती मध्याह्न संकल्प का समय - सुबह 10:59 - दोपहर 01:38

नरसिंह जयंती 2026 व्रत पारण समय
नृसिंह जयन्ती के लिए अगले दिन का पारण समय - 1 मई 2026 को सुबह 05:41 के बाद. नृसिंह जयन्ती पारण के दिन चतुर्दशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी.
नरसिंह जयंती पूजा विधि

व्रत के एक दिन पहले त्रयोदशी तिथि केवल एक समय भोजन करना चाहिए.
व्रत वाले दिन सभी प्रकार के अनाज और धान्य जैसे चावल, गेहूं आदि का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है.
व्रत का पालन एकादशी व्रत की तरह नियमपूर्वक किया जाता है.
नृसिंह जयंती के दिन मध्याह्न काल यानी दोपहर में व्रत का संकल्प लेना शुभ माना जाता है.
सूर्यास्त से पहले संध्या समय में भगवान नृसिंह की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए.
मान्यता है कि भगवान नृसिंह चतुर्दशी तिथि के सूर्यास्त के समय प्रकट हुए थे, इसलिए इसी समय पूजा का विशेष महत्व है.
इस व्रत में रात्रि जागरण, कीर्तन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है.
अगले दिन प्रातःकाल विसर्जन पूजा करना आवश्यक होता है.
पूजा के बाद ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर व्रत को पूर्ण किया जाता है.
अंत में शुभ मुहूर्त में पारण करना चाहिए.

नरसिंह भगवान का मंत्र
&amp;lsquo;नैवेद्यं शर्करां चापि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्. ददामि ते रमाकांत सर्वपापक्षयं कुरु&#039;
नरसिंह भगवान की पूजा के लाभ
भगवान नरसिंह आशा और दृढ़ता के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं, विशेष रूप से उ लोगों के लिए जो उत्पीड़न या विपत्ति का सामना करेत हैं. उनका अवतार इस बात का स्मरण दिलाता है कि सबसे कठिन परिस्थितियों में भी, ईश्वर बुराई की शक्तियों का नाश करने और भक्तों की रक्षा करने के लिए हस्तक्षेप करेंगे.
नरसिंह केवल बाहरी राक्षसों का नाश करने वाले ही नहीं है, बल्कि अहंकार, क्रोध और ज्ञान जैसे आंतरिक राक्षसों के उन्मूलन का भी प्रतिनिधित्व करते हैं, जो आध्यात्मिक प्रगति में बाधा डालते हैं. इस तरह नरसिंह जयंती का उत्सव बुराई की विनाशकाली शक्तियों पर आंतरिक और बाहरी सद्गुणों की विजय पर चिंतन करने का समय है.
Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा कब ? जानें स्नान-दान का मुहूर्त, इस दिन से जुड़ी हैं गौतम बुद्ध की 3 अहम घटनाएं



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/22/f0426ed1ac2516194315cffc92fc42671776829932137499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 22 Apr 2026 11:18:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Narasimha, Jayanti, 2026:, नरसिंह, जयंती, अप्रैल, में, कब, जानें, तारीख, मुहूर्त, नरसिंह, अवतारी, की, पूजा, का, महत्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>महाकाल से जगन्नाथ धाम तक सितारों की लगी लाइन, सेलेब्स में दिखी बढ़ती आध्यात्मिक लहर!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6075</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6075</guid>
<description><![CDATA[ भारत में धर्म के प्रति आस्था केवल एक भावना नहीं, बल्कि जीवनशैली का अहम हिस्सा बन चुका है. यही कारण है कि, आम लोगों से लेकर बड़े सेलिब्रिटीज तक समय-समय पर देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन करते दिख जाते हैं.
इस हफ्ते बी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब फिल्म स्टार, फिटनेस आइकन और ब्यूटी पेजेंट कंटेस्टेंट्स आध्यात्मिक यात्रा करते दिखाई दिए. महाकाल की नगरी उज्जैन से लेकर पुरी तक इनकी मौजूदगी ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि, आस्था की भावना सभी को आपस में जोड़ती है.&amp;nbsp;



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Ankita Konwar (@ankita_earthy)





मिलिंद सोमन पत्नी के साथ पहुंचे महाकाल के दरबार&amp;nbsp;
फिटनेस आइकन मिलिंद सोमन (Milind Soman) अपनी पत्नी Ankita Konwa के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर (Shri Mahakaleshwar Temple) दर्शन के लिए पहुंचे. यहां उन्होंने सुबह के समय होने वाली भस्म आरती में हिस्सा भी लिया.
भस्म आरती भगवान शिव को समर्पित बेहद ही खास और प्राचीन परंपरा है, जिसे ब्रह्म मुहूर्त में किया जाता है. यह आरती जीवन और मृत्यु चक्र का प्रतीक है, जिससे जुड़कर भक्त एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति को प्राप्त करते हैं.&amp;nbsp;
मिलिंद सोमन पहले भी कई बार अपने इंटरव्यू में कह चुके हैं कि, फिटनेस के साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन बेहद जरूरी है. महाकाल मंदिर में उनकी उपस्थिति इस सोच को दर्शाती है.&amp;nbsp;

&#039;धुरंधर&#039; फिल्म की एक्ट्रेस सारा अर्जुन महाकाल की नगरी उज्जैन पहुंची. महाकालेश्वर में उन्होंने भस्म आरती में शामिल होकर आशीर्वाद लिया.इस दौरान उनका भक्तिमय अंदाज़ देखने को मिला.#Mahakal #Ujjain #Mahakaleshwar #SaraArjun #Dhurandhar #HindiNews #ABPNews pic.twitter.com/BbfDTlFLpq
&amp;mdash; ABP News (@ABPNews) April 11, 2026



Gen Z कलाकारों में भी बढ़ रही आध्यात्मिक रुचि
युवा अभिनेत्री सारा अर्जुन (Sara Arjun) &amp;nbsp;भी हाल ही उज्जैन स्थित महाकाल के दर्शन करने पहुंची थीं. उन्होंने भी भस्म आरती में शामिल होकर इस खास अनुभव को अपने करियर का सबसे यादगार पल बताया.
भस्म आरती सुबह करीब 3.30 बजे से 5.30 बजे के बीच होती है, और इसमें शामिल होने हर किसी के लिए आसान नहीं होता है. इसके लिए सबसे पहले रजिस्ट्रेशन और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
सारा अर्जुन का यह फैसला दर्शाता है कि, नई पीढ़ी भी अब केवल ग्लैमर तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों और आध्यात्म से जुड़ने का प्रयास कर रही है.

पुरी जगन्नाथ में भी दिखी अटूट श्रद्धा
वहीं दूसरी ओर बॉलीवुड एक्टर गोविंदा (Govinda) ने भी श्री जगन्नाथ मंदिर (Shri Jagannath Temple) में दर्शन किए. इस दौरान वह पारंपरिक कपड़ों में पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया.
पुरी का जगन्नाथ धाम देश के सबसे पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है. यहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, खासकर रथ यात्रा (Rath Yatra) के दौरान यहां का माहौल और भी भव्य हो जाता है.&amp;nbsp;

मिस इंडिया कंटेस्टेंट्स ने भी लिया आशीर्वाद
इस बीच Femina Miss India 2026 की कुछ प्रतिभागी भी पुरी पहुंचीं. पारंपरिक पाटा साड़ी पहनें इन प्रतिभागियों ने मंदिर में दर्शन किए और अपने फाइनल से पहले आशीर्वाद प्राप्त किया.
उन्होंने कोणार्क के सूर्य मंदिर (Konark Sun Temple)और Chandrabhaga Beach का भी दौरा किया. कंटेस्टेंट्स ने इस अनुभव को बेहद भावुक और यादगार बताया.
पेजेंट का ग्रैंड फिनाले 18 अप्रैल को KIIT में आयोजित किया जाएगा.&amp;nbsp;
इन सभी बातों को ध्यान से देखा जाए तो एक बात साफ है कि, चाहे युवा कलाकार हो या अनुभवी अभिनेता या फिर ग्लैमरस दुनिया से जुड़े लोग सभी अपने जीवन में स्थिरता और शांति की खोज के लिए आध्यात्मिक राह का ही सहारा लेते हैं.&amp;nbsp;
हालांकि इस बात को भी समझने की जरूरत है कि, ये यात्राएं केवल ट्रेंड या शोऑफ का हिस्सा नहीं होना चाहिए. अगर आप केवल फोटो या सोशल मीडिया के लिए मंदिर के दर्शन कर रहे हैं, तो उसका असली अर्थ खत्म हो जाता है.&amp;nbsp;
आस्था को समझने का मतलब अंदर से जुड़ना, अनुशासन के जीवन जीना और मन में लोक भावना बनाए रखना. उज्जैन की भस्म आरती हो या पुरी का जगन्नाथ धाम मंदिर ये जगहें केवल धार्मिक नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मचिंतन का भी केंद्र है. यही कारण है कि, यहां हर उम्र के लोग खिंचे चले आते हैं.&amp;nbsp;
आखिर में इन सेलिब्रिटी विजिट्स से एक संदेश मिलता है कि, सफलता चाहे जितनी भी बड़ी क्यों न हो, सुकून और शांति के लिए इंसान अपनी जड़ों की ओर ही लौटता है.
महाकालेश्वर मंदिर यात्रा: भस्म आरती से लेकर दर्शन तक, उज्जैन में 2-3 दिन में कैसे करें प्लान? ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/16/943cce20c208c8230e42810780e526de17763210795041092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:18:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>महाकाल, से, जगन्नाथ, धाम, तक, सितारों, की, लगी, लाइन, सेलेब्स, में, दिखी, बढ़ती, आध्यात्मिक, लहर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या पर जल से भरा घड़ा दान करने से क्या होता है ?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6074</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6074</guid>
<description><![CDATA[ Vaishakh Amavasya 2026: आज वैशाख अमावस्या शाम 5.22 तक रहेगी. है. ये तिथि स्नान और दान के लिए सबसे अधिक पुण्यदायी मानी जाती है. अमावस्या पर लोग पितरों की ऋर्ण मुक्ति के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं.
स्कंद पुराण के अनुसार इस दिन किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति के पापों का नाश करते हैं साथ ही मृत्यु के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. वैशाख में अक्षय तृतीया के अलावा वैशाख अमावस्या ही वो खास दिन है जब जल से भरा कलश दान करने की परंपरा निभाई जाती है, इसके धार्मिक और ज्योतिष में क्या लाभ मिलते हैं आइए जानते हैं.
वैशाख अमावस्या पर मिट्टी का घड़ा दान का महत्व

एस्ट्रोलॉजर अनीष व्यास के अनुसार वैशाख का महीना भीषण गर्मी का होता है, ऐसे में जल का दान &amp;ldquo;महादान&amp;rdquo; माना गया है. प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य कार्य बताया गया है इसलिए इस दिन जल से भरा मिट्टी का घड़ा दान किया जाता है.
शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया जल दान पितरों को तृप्त करता है. उनकी आत्मा को शांति मिलती है, व्यक्ति पितृ दोष से मुक्ति पाता है.
यह दान व्यक्ति के भीतर सेवा, करुणा और परोपकार की भावना को भी बढ़ाता है. उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव होते हैं. दुर्भाग्य दूर रहता है, सुख समृद्धि का आगमन होता है.

नहीं परेशान करते ये ग्रह

ज्योतिष के अनुसार जल तत्व चंद्रमा और मन से जुड़ा होता है. जल दान करने से चंद्रमा मजबूत होता है और मानसिक शांति मिलती है. जीवन में चल रहा तनाव कम होने लगता है.
जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष, पितृ दोष या शनि से संबंधित समस्याएं होती हैं, उनके लिए यह उपाय विशेष लाभकारी माना जाता है.

कैसे दान करें जल से भरा घड़ा

मिट्टी या तांबे का घड़ा लें और उसमें साफ जल भरें
उसमें थोड़ा सा गुड़ या शक्कर डाल सकते हैं. एक रुपए का सिक्का डाल दें.
इस घड़े को किसी जरूरतमंद, मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर दान करें
दान करते समय मन में पितरों और देवताओं का स्मरण करें.
वैशाख अमावस्या पर सार्वजनिक स्थान पर पियाऊ लगवाना सबसे अधिक पुण्य देता है या फिर अपने घर के बाहर मिट्टी का जल से भरा मटका राहगीरों के लिए रख दें. इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं.

वैशाख अमावस्या उपाय

इस दिन रात में जलाशय में दीपदान करना चाहिए, मान्यता है कि इससे पितरों को सद्गति प्राप्त होती है.
घर में दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं. साथ ही ईशान कोण में घी का दीपक प्रज्वलित करें. मां लक्ष्मी का घर में आगमन होता है.

Aaj Ka Panchang 17 April 2026: वैशाख अमावस्या पर अमृत और सर्वार्थ सिद्धि योग, स्नान-दान मुहूर्त, राशिफल, पूरा पंचांग देखें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/17/8761d62babee9d11d9aecfbfdd27bb7a1776369848055499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:18:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vaishakh, Amavasya, 2026:, वैशाख, अमावस्या, पर, जल, से, भरा, घड़ा, दान, करने, से, क्या, होता, है</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Akshaya Tritiya 2026 Muhurat Live: अक्षय तृतीया 19 या 20 अप्रैल किस दिन, सोना खरीदने का मुहूर्त, पूजा का समय, विधि सब जानें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6072</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6072</guid>
<description><![CDATA[ Akshaya Tritiya 2026 Mahurat Live: अक्षय तृतीया हिंदू धर्म में बेहद ही पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व में से एक है. ऐसा माना जाता है कि, यह दिन कभी न खत्म होने वाली समृद्धि, सौभाग्य और सफलता लेकर आती है.
भारत भर में लोग इस दिन को बेहद श्रद्धा के साथ मनाते हैं और अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करते हैं. अक्षय तृतीया के दिन खरीदी गई किसी भी वस्तु से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, इसीलिए ज्यादातर लोग इस दिन सोना-चांदी खरीदते हैं, ताकि समृद्धि बनी रहे.&amp;nbsp; हिंदू पंचांग (Hindu Panchang) के अनुसार, इस वर्ष अक्षय तृतीया रविवार, 19 अप्रैल 2026 को पड़ रह है.&amp;nbsp;
तृतीया तिथि की शुरुआत- 19 अप्रैल 2026, सुबह 10.49 मिनट पर
तृतीया तिथि समाप्त- 20 अप्रैल 2026 सुबह 7.27 मिनट पर
अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त- 19 अप्रैल 2026 सुबह 10.49 मिनट से लेकर दोपहर 12.20 मिनट तक
अक्षय तृतीया मुख्य रूप से 19 अप्रैल 2026 को ही मनाई जाएगी.&amp;nbsp;
अक्षय तृतीया का महत्व (Akshaya Tritiya 2026 Importance)
अक्षय तृतीया को हिंदू संस्कृति में सबसे खास दिनों में से एक माना जाता है. &quot;अक्षय&quot; शब्द का मतलब है, कभी न घटने वाला, जो अनंत समृद्धि और सफलता का प्रतीक है.&amp;nbsp;
ऐसा भी माना जाता है कि, इस दिन शुरू किया गया कोई भी अच्छा काम हमेशा बढ़ता रहता है और कभी खत्म नहीं होता. लोग इस दिन पूजा-अर्चना करते हैं, सोना खरीदते हैं, नए बिजनेस शुरू करते हैं और यहां तक कि शादी और गृहप्रवेश जैसे जरूरी कार्य भी करते हैं.&amp;nbsp;
इस त्योहार को परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) के रूप में भी मनाया जाता है, जो भगवान विष्णु के छठें अवतार के जन्म का प्रतीक है. हिन्दु .पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग का आरम्भ अक्षय तृतीया के दिन हुआ था. पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया उन बेहद ही दुर्लभ दिनों में शामिल है, जो नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव से मुक्त होता है, जिससे यह दिन अत्यंत पवित्र हो जाता है.
अक्षय तृतीया की पूजा विधि (Akshaya Tritiya 2026 Puja Vidhi)
ज्योतिषाचार्य और धर्म से जुड़े विषयों के जानकार अनीष व्यास के मुताबिक, इस दिन पर लोग कुछ सरल आध्यात्मिक प्रथाओं का पालन करते हैं.

ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठना चाहिए.&amp;nbsp;
घर और पूजा स्थल की सफाई करनी चाहिए.&amp;nbsp;
पूजा से पूर्व पहले स्नान करना चाहिए.&amp;nbsp;
भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की प्रार्थना करने से लाभ मिलता है.&amp;nbsp;
समृद्धि और शांति के लिए मंत्रों का जाप करना चाहिए.&amp;nbsp;
भगवद गीता, रामचरितमानस और विष्णु सहस्त्रनाम जैसे पवित्र ग्रंथों को पढ़ना शुभ माना जाता है.&amp;nbsp;

अक्षय तृतीया दान का महापर्व
इस दिन दान करने से मिलने वाला पुण्य अक्षय (अनंत) माना जाता है. यानी इस दिन किया गया छोटा सा दान भी जीवनभर और अगले जन्मों तक शुभ फल देता है. महाभारत में पांडवों को अक्षय पात्र मिला था, जिससे भोजन कभी खत्म नहीं होता था. इसलिए इस दिन दान और अन्नदान को विशेष महत्व दिया गया.
अक्षय तृतीया पर जल, तिल और अन्न का दान करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. दान का सबसे बड़ा महत्व भावना में है, न कि वस्तु की कीमत में. सच्चे मन, श्रद्धा और बिना अहंकार के किया गया दान ही &amp;ldquo;अक्षय पुण्य&amp;rdquo; देता है. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/17/8e70330384c3ec4cd1998f4635442d4e17763959327131092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:18:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Akshaya, Tritiya, 2026, Muhurat, Live:, अक्षय, तृतीया, या, अप्रैल, किस, दिन, सोना, खरीदने, का, मुहूर्त, पूजा, का, समय, विधि, सब, जानें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>गया का ये मंदिर क्यों है अलग? यहां के हर रिवाज से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6073</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6073</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/17/66273d13c3c9916f62b007a8d08778c517763952418471092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:18:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>गया, का, ये, मंदिर, क्यों, है, अलग, यहां, के, हर, रिवाज, से, कुछ, न, कुछ, सीखने, को, मिलता, है</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या के दिन भूलकर भी न करें ये 7 काम, वरना...</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6071</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6071</guid>
<description><![CDATA[ Vaishakh Amavasya 2026 Rules: 17 अप्रैल 2026 शुक्रवार को वैशाख महीने की अमावस्या तिथि है. इसे सतुवाई अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि खास मायने रखती है, इसलिए अमावस्या के लिए कुछ नियम और परंपरा बनाए गए हैं, जिसका पालन सभी को करना चाहिए.
वैशाख अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करना, पितरों का तर्पण करना, सात्विकता व शुद्धता का पालन करना आदि जैसे कार्य करने चाहिए. इन कार्यों से देवता और पूर्वज दोनों प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं और घर की सुख-समृद्धि बढ़ती है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक और ज्योतिषाचार्य डॉक्टर अनीष व्यास ने बताया कि, अमावस्या के दिन किए गए अच्छे कर्मों का पुण्यफल मिलता है, लेकिन गलतियां हो जाए तो इसका नकारात्मक असर भी जीवन पर पड़ सकता है. इसलिए हर व्यक्ति को यह जरूर जानना चाहिए कि, वैशाख अमावस्या पर आज कौन से काम नहीं करें.
Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या पर बनेंगे कई शुभ योग, पंचक भी हो जाएगा खत्म
वैशाख अमावस्या पर न करें ये 7 गलतियां
स्नान न करना- वैशाख अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान का महत्व होता है. नदी स्नान संभव न हो तो घर पर भी शुद्ध जल से स्नान किया जा सकता है. लेकिन कुछ लोग अमावस्या के दिन स्नान ही नहीं करते. ऐसा करने की गलती न करें, अमावस्या के दिन स्नान करने से ना सिर्फ आपका शरीर शुद्ध होता है, बल्कि इससे जीवन में सकारात्मकता भी आती है.
पितृ तर्पण न करना-&amp;nbsp;अमावस्या को पितरों की तिथि माना जाता है. पितृ इस दिन अपने वंश से तर्पण की आशा रखते हैं. इसलिए अमावस्या पर स्नान के बाद हाथ में कुश और काला तिल लेकर जल से पितरों का तर्पण कर उनका स्मरण करना चाहिए. इससे पितृ प्रसन्न होते है और पितृ दोष भी दूर होता है.
तामसिक भोजन करना- अमावस्या पर मांस-मदिरा का सेवन भी नहीं करना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सात्विक भोजन करें और मन, वचन व कर्म से पवित्रता बनाए रखें.
दान से दूरी- विशेष तिथियों में दान-पुण्य जैसे कार्य जरूर करने चाहिए. वैशाख अमावस्या पर भी अपने सामर्थ्यनुसार दान जरूर दें. इस दिन विशेषरूप से जल से भरा मिट्टी का घड़ा, तिल, छाता, अन्न, फल आदि दान दे सकते हैं.
वाद-विवाद करना- ऐसी मान्यता है कि, अमावस्या पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है. इसलिए घर का वातावरण शांत रखें और स्वयं भी संयमित रहें. घर में कलह-क्लेश, झगड़ा या वाद-विवाद से बचें.
पीपल पूजा न करना- वैशाख अमावस्या पर&amp;nbsp;पीपल वृक्ष की पूजा करना न भूलें. सुबह के समय पेड़ के जल में जल डालें और सूर्यास्त के बाद पीपल वृक्ष के पास सरसों तेल का दीप जलाएं. मान्यता है कि, पीपल में देवताओं और पितरों का वास होता है. इसलिए पीपल वृक्ष की पूजा करने से देवता और पितृ का आशीर्वाद मिलता है.
सेवा भाव करना न भूलें- अमावस्या के दिन सेवा भाव दिखाएं. भूलकर भी बड़ों का अपमान न करें या अपशब्द न कहें. पशु-पक्षुओं के प्रति भी सेवा भाव दिखाते हुए गाय, कुत्ते और पक्षियों के लिए अन्न-जल की व्यवस्था करें.
ये भी पढ़ें: Amavasya Surya Grahan 2026: वैशाख अमावस्या पर क्या आज सूर्य ग्रहण लगा है, जानें सच्चाईDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/17/c56d821d7c27f09e9ecf5de186b807c71776397813185466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 10:18:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vaishakh, Amavasya, 2026:, वैशाख, अमावस्या, के, दिन, भूलकर, भी, न, करें, ये, काम, वरना...</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Shani Dev: नौकरी, पैसा और पारिवारिक समस्या..कहीं शनि आपसे नाराज तो नहीं, न करें ये गलती</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6043</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6043</guid>
<description><![CDATA[ Shani Dev:&amp;nbsp;शनि कर्म प्रधान देवता है. उनका न्याय किसी व्यक्ति के पक्ष या विरोध में नहीं, बल्कि उसके कर्मों के आधार पर होता है. आज के दौर में लोग दूसरों के आगे निकलने की होड़ में कुछ ऐसी छोटी गलतिया कर जात हैं जो उनके तमाम सुखों पर ग्रहण लगा देते हैं.
मेहनत करने के बाद भी पैसा नहीं बचता, आए दिन किसी बीमारी के शिकार रहते हैं, मानसिक तौर पर समस्याएं कम होने का नाम नहीं लेती. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा तब होता है जब शनि आपसे नाराज हों. कौन से ऐसे लोग हैं जिसने शनि नाराज रहते हैं. क्या है शनि को प्रसन्न करने के उपाय जान लें.

&amp;nbsp;
शनि देव किन लोगों से नाराज रहते हैं
अन्याय और धोखा करने वाले लोग
जो लोग दूसरों के साथ छल, कपट या बेईमानी करते हैं, शनि देव उन्हें सबक सिखाते हैं.

क्या सजा देते हैं - धोखा देने पर शनि वित्तीय नुकसान, कानूनी परेशानी या प्रतिष्ठा गिरने के रूप में दंड देता है.

गरीब और कमजोरों को सताने वाले
शनि देव को &amp;ldquo;श्रमिकों और निम्न वर्ग का कारक&amp;rdquo; माना जाता है. जरूरतमंदों, बुजुर्गों, या मजदूर वर्ग का अपमान करने वालों पर शनि की विशेष दृष्टि कठोर मानी जाती है.
क्या सजा देते है - हंसती खेलते जीवन में अचानक कष्ट आना, बीमारी, नौकरी में समस्या या सामाजिक अपमान होना.
अहंकारी और घमंडी व्यक्ति
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो लोग अपनी सफलता पर घमंड करते हैं और दूसरों को नीचा दिखाते हैं, वे शनि के अप्रसन्न होते हैं. अक्सर व्यक्ति पैसे और पद के मद में चूर होकर दूसरों को तन या मन से कष्ट पहुंचाता है.

क्या सजा देते हैं - शनि देव व्यक्ति को विनम्रता सिखाते हैं, इन अप्रिय कार्य करने पर शनि व्यक्ति को अर्श से फर्श पर ले आते हैं. इसलिए कई बार अचानक सफलता के बाद गिरावट भी शनि का ही खेल माना जाता है.

बुजुर्गों और गुरुओं का अनादर
बड़ों, माता-पिता या गुरु का अपमान करना शनि की दृष्टि में गंभीर दोष माना जाता है.

क्या सजा देते हैं - बेरोजार रहना, मानसिक प्रताड़ना, परिवार में क्लेश, तलाक तक की नौबत आ जाती है.

मेहनत से बचने वाले (आलसी लोग)
शनि देव कर्म और परिश्रम के प्रतीक हैं, इसलिए कामचोरी करने वालों को कष्ट झेलना पड़ सकता है. शनि देव बताते हैं बिना मेहनत के स्थायी सफलता नहीं मिलती.

क्या सजा देते हैं - काम में रुकावट, प्रमोशन में देरी, बार-बार असफलता

गलत आदतों और बुरे कर्मों में लिप्त लोग
नशा, गलत संगति, अनैतिक कार्य - ये सब शनि के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाते हैं. आज के दौर में व्यक्ति किसी न किसी तरह के नशे में डूबा है.ज्योतिष में यही उसकी असंतुष्टी और तनाव का कारण माना गया है.

क्या सजा देते हैं - आर्थिक नुकसान, स्वास्थ्य समस्या, मानसिक अशांति

सच्चे न्यायाधीश कहलाए
शनि देव का न्याय डराने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सही दिशा में ले जाने के लिए होता है.शनि देव अमीर-गरीब, बड़ा-छोटा नहीं देखते. हर किसी के साथ समान और निष्पक्ष व्यवहार करते हैं इसलिए इन्हें सच्चा न्यायाधीश कहा जाता है. वे हमें सिखाते हैं कि जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा.
Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या 16 या 17 अप्रैल कब ? स्नान-दान का मुहूर्त, पितृ पूजा किस दिन करें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/14/3a867f531e1a42b91b60cceb4b469a321776156053485499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Shani, Dev:, नौकरी, पैसा, और, पारिवारिक, समस्या..कहीं, शनि, आपसे, नाराज, तो, नहीं, न, करें, ये, गलती</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Akshaya Tritiya 2026: बच्चों के लिए क्या खरीदें ? ये 5 चीजें बनेंगी उनके उज्ज्वल भविष्य का आधार</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6044</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6044</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/15/0bf2385f9feec4adfdbed31690d5fd001776277193144499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Akshaya, Tritiya, 2026:, बच्चों, के, लिए, क्या, खरीदें, ये, चीजें, बनेंगी, उनके, उज्ज्वल, भविष्य, का, आधार</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Panchang 16 April 2026: आज सर्वार्थ सिद्धि योग में चतुर्दशी तिथि, शुभ&#45;अशुभ मुहूर्त, राशिफल, पूरा पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6045</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6045</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang, 16 अप्रैल 2026: आज वैशाख कृृष्ण चतुर्दशी तिथि और गुरुवार है. स्कंद पुराण और विष्णु पुराण में गुरुवार को धर्म, ज्ञान और सद्बुद्धि का दिन बताया गया है. इस दिन व्रत और पूजा करने से गुरु दोष शांत होता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है.&amp;nbsp;

16 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 16 April 2026)



तिथि

चतुर्दशी (15 अप्रैल 2026, रात 10.31 - 16 अप्रैल 2026, रात 8.11)



वार
गुरुवार


नक्षत्र
उत्तर भाद्रपद


योग
इंद्र, सर्वार्थ सिद्धि योग


सूर्योदय 
सुबह 6.01


सूर्यास्त
शाम 6.44


चंद्रोदय
सुबह 5.30, 14 अप्रैल


चंद्रोस्त
शाम 5.39


चंद्र राशि
मीन




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 5.56 - सुबह 7.31


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 6.47 - रात 9.34




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 1.58 - दोपहर 3.34


यमगण्ड काल
सुबह 5.55 - सुबह 7.31


गुलिक काल
सुबह 9.08 - सुबह 10.45


आडल योग
दोपहर 1.59 - सुबह 5.54, 17 अप्रैल


विडाल योग
सुबह 5.55 - दोपहर 1.59


भद्रा काल
सुब 5.55 - सुबह 9.25


पंचक
पूरे दिन




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 16 April 2026)




सूर्य
मेष


चंद्रमा
मीन


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



16 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.
मेष राशि:आज तेजी से फैसले लेने की स्थिति बनेगी, लेकिन थोड़ी उलझन के बाद शाम तक सब ठीक हो जाएगा. आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, सफलता मिलेगी.
वृष राशि:धैर्य और स्थिरता से काम करने पर रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा. परिवार के साथ समय सुखद रहेगा.
मिथुन राशि:दिन व्यस्त रहेगा और मल्टीटास्किंग करनी पड़ सकती है, लेकिन अंत में संतोष मिलेगा. आपकी बातचीत की कला आपको नए अवसर दिलाएगी.
कर्क राशि:भावनाएं मजबूत रहेंगी और आप रिश्तों को लेकर संवेदनशील रहेंगे. धीरे-धीरे काम में स्थिरता आएगी और स्थितियां आपके पक्ष में होंगी.
सिंह राशि:आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता से आप लोगों को प्रभावित करेंगे. काम में सफलता और सम्मान मिलने के योग हैं.
कन्या राशि:योजनाबद्ध तरीके से काम करने से सफलता मिलेगी, लेकिन ज्यादा सोचने से तनाव हो सकता है. धैर्य बनाए रखें.
तुला राशि:दिन संतुलन और जिम्मेदारियों से भरा रहेगा, धीरे-धीरे सफलता मिलेगी. सामाजिक सहयोग आपके काम आएगा.
वृश्चिक राशि:गहरी सोच और मजबूत निर्णय आपको आगे बढ़ाएंगे. भावनाओं को संतुलित रखकर काम करेंगे तो लाभ होगा.
धनु राशि:ऊर्जा और उत्साह से भरा दिन रहेगा, नए अवसर और योजनाएं सामने आएंगी. सामाजिक और पारिवारिक जीवन अच्छा रहेगा.
मकर राशि:मेहनत और धैर्य से काम करने पर धीरे-धीरे प्रगति होगी. जिम्मेदारियों को सही तरीके से निभाने पर लाभ मिलेगा.
कुंभ राशि:नई सोच और क्रिएटिविटी से आप अलग पहचान बना सकते हैं. दोस्तों और संपर्कों से लाभ मिलने के संकेत हैं.
मीन राशि:भावनात्मक और शांत दिन रहेगा, आध्यात्मिकता की ओर झुकाव बढ़ेगा. मानसिक संतुलन बनाए रखना जरूरी है.
आज का उपाय&amp;nbsp;
चने की दाल, हल्दी और पीली वस्तुओं का दान करें. इससे बृहस्पति मजबूत होता है.
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
पीले रंग के वस्त्र पहनें.
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ में 4 नहीं बल्कि 8 बड़े मंगल ? नोट करें तारीख, हनुमान जी की पूजा का खास महत्व



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/16/491300b6451d016747b8793f2c1de3151776282779786499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, आज, सर्वार्थ, सिद्धि, योग, में, चतुर्दशी, तिथि, शुभ-अशुभ, मुहूर्त, राशिफल, पूरा, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Sai Baba Puja: साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन क्यों सबसे शुभ, ऐसे करें पूजा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6042</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6042</guid>
<description><![CDATA[ Shirdi Sai Baba Puja: शिरडी के साईं बाबा सम्मानित आध्यात्मिक गुरुओं में एक हैं, जिन्होंने हमेशा प्रेम, करुणा और एकता का विनम्रतापूर्वक उपदेश दिया. उन्होंने हमेशा सभी धर्मों को एक ही स्रोत बताया. साईं के इन्हीं विचार और भावनाओं के कारण देश-दुनिया में विभिन्न धर्मों के लोग उनके अनुयायी बनें और साईं बाबा के कई मंदिर स्थापित किए गए.
साईं सबके आराध्य हैं. शिरडी साईं बाबा का सबसे प्रसिद्ध कथन &amp;lsquo;सबका मालिक एक&amp;rsquo; सभी धर्मों के बीच एकता, सद्भावना और प्रेम का संदेश देता है. साईं के इस कथन का अर्थ है- ईश्वर एक है चाहे उसे ईश्वर कहो, अल्लाह कहो या भगवान.
साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन क्यों शुभ
वैसे तो आप प्रतिदिन साईं का पूजन कर सकते हैं. लेकिन विशेषकर साईं बाबा की पूजा के लिए गुरुवार का दिन सबसे उत्तम माना जाता है. इसके पीछे धार्मिक मान्यता यह है कि, गुरुवार का संबंध बृहस्पति देव यानी देवताओं के गुरु से है. गुरुवार के दिन को ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है. साईं बाबा को भी आध्यात्मिक गुरु का स्वरूप माना जाता है. क्योंकि उन्होंने लोगों के बीच प्रेम, दया और सेवा भाव का संदेश दिया. इसलिए गुरुवार को उनकी पूजा करना सबसे उत्तम माना जाता है.
गुरुवार को निकलती है साईं बाबा की पालकी
शिरडी में भी हर गुरुवार को साईं बाबा की विशेष पूजा की जाती है और पालकी यात्रा निकाली जाती है, जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं. पालकी यात्रा द्वारकामाई से साईं समाधि मंदिर तक जाती है. इस भव्य शोभायात्रा में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और सभी भजनों के साथ बाबा की मूर्ति को फूलों से सजी पालकी में ले जाते हैं. यह पालकी यात्रा साईं बाबा की भक्ति और उनके प्रति प्रेम का प्रतीक है.
कैसे करें साईं बाबा की पूजा (Sai Baba Puja Vidhi)
गुरुवार के दिन साईं बाबा की पूजा के लिए सुबह स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें. इस दिन पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें. अगर पर घर पर पूजा कर सकते हैं तो साईं बाबा की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं. साईं बाबा को पीले फूल चढ़ाएं. आप श्रद्धापूर्वक बाबा को सात्विक खिचड़ी. हलवा, पूरी, मीठी खीर, बेसन के लड्डू, फल आदि का भोग लगा सकता है. इसके बाद साईं बाबा के मंत्र या &#039;ॐ साईं राम&#039; का जाप करें और साईं चालीसा पढ़ें.
शिरडी वाले साईं बाबा (Shirdi Sai Baba)
महाराष्ट्र के परभणी ज़िले के पाथरी गांव को शिरडी के साईं बाबा का जन्मस्थल बताया जाता है. हालांकि इसका कोई प्रमाण न होने के कारण इस पर हमेशा ही लोगों का मतभेद रहा है. लेकिन यहां स्थानीय लोग मानते हैं कि, साईं का जन्म 1838&amp;nbsp;में इसी स्थान पर हुआ था. साईं बाबा का मूल नाम हरिभाऊ भुसारी था. आज देशभर में साईं बाबा के कई मंदिर है और भक्तों की उनके प्रति गहरी आस्था भी है.
ये भी पढ़ें: Alia Bhatt के स्लीप हैबिट से Sadhguru हुए हैरान! आपको भी जानना चाहिए नींद और आराम का असली सचDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/16/57f8950c78a0b01e666e632543af786f1776309067281466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Sai, Baba, Puja:, साईं, बाबा, की, पूजा, के, लिए, गुरुवार, का, दिन, क्यों, सबसे, शुभ, ऐसे, करें, पूजा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mohini Ekadashi 2026: मोहिनी एकादशी  26 या 27 अप्रैल कब ? सही तारीख और पूजा मुहूर्त नोट करें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6041</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6041</guid>
<description><![CDATA[ Mohini Ekadashi 2026 Date:&amp;nbsp;वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी 27 अप्रैल 2026 को है. मोहिनी एकादशी भगवान विष्णु मोहिनी अवतार को समर्पित है. जब उन्होंने &amp;ldquo;मोहिनी&amp;rdquo; रूप धारण कर देवताओं और असुरों के बीच अमृत का वितरण किया था. मोहिनी एकादशी व्रत सहस्र गौदान के पुण्य के समान है. इसके फल स्वरूप व्यक्ति बुद्धि, विवेक और सही निर्णय से जीवन की बड़ी परेशानियों से मुक्ति पाने में सक्षम बन पाता है.
कहा जाता है कि मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा के साथ-साथ दान करने से जातक को समस्त सांसारिक पापों से छुटकारा मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस दिन व्रत करने से एक हजार यज्ञों का फल मिलता है.
मोहिनी एकादशी 2026 मुहूर्त
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी 26 अप्रैल 2026 को शाम 6.06 पर शुरू होगी और अगले दिन 27 अप्रैल को शाम 6.15 पर समाप्त होगी.

पूजा मुहूर्त - सुबह 9.02 - सुबह 10.40

मोहिनी एकादशी 2026 व्रत पारण
28 अप्रैल को सुबह 5.43 से सुबह 8.21 के बीच मोहिनी एकादशी का पारण किया जाएगा. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय शाम 06:51 तक है.
मोहिनी एकादशी पूजा विधि

मोहिनी एकादशी पर व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नान ध्यान करने के बाद एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए.
इसके पश्चात भगवान को स्नान करवाएं और उनको पीले वस्त्र पहनाएं.
इसके बाद चंदन का तिलक लगाकर उनके सामने धूप और दीप प्रज्वलित करें.
एकादशी के व्रत का संकल्प करते हुए तुलसी दल, नारियल, फल और मिठाई अर्पित करें.
पंचामृत चढ़ाएं और भगवान की आरती करें. इसके पश्चात &amp;lsquo;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#039; मंत्र और विष्णु सहस्रनाम का जाप करें.
इसके बाद आप गरीबों को दान करें और भोजन करवाएं. अगले दिन व्रत का पारण करें.

मोहिनी एकादशी देती खास सीख
भगवान विष्णु के हर अवतार का मूल उद्देश्य मानवता का कल्याण, अधर्म का अंत और धर्म की पुनः स्थापना रहा है. मोहिनी अवतार इस बात का प्रतीक है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी सही और न्यायपूर्ण मार्ग चुनना ही सबसे बड़ी जीत होती है.
साथ ही यह अवतार यह भी सिखाता है कि केवल शक्ति ही नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता और समय पर लिया गया निर्णय भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. यदि इंसान समझदारी और सूझबूझ से काम ले, तो वह बड़े से बड़े संकट को अवसर में बदल सकता है.&amp;nbsp;
मोहिनी एकादशी की कथा
पुराणों के अनुसार, एक बार एक राजा था, जिसका पुत्र बहुत ही पापी और गलत रास्ते पर चलने वाला था. उसके कर्मों से परेशान होकर राजा ने उसे राज्य से निकाल दिया. भटकते हुए वह युवक एक ऋषि के आश्रम पहुंचा, जहां उसे मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी गई.
जब उसने श्रद्धा से यह व्रत किया, तो उसके जीवन में परिवर्तन आ गया. उसके पाप नष्ट हो गए और उसे नया जीवन मिला. यह कथा हमें बताती है कि सही समय पर किया गया एक अच्छा कर्म जीवन की दिशा बदल सकता है.
Amarnath yatra 2026: अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से होगी शुरू, रजिस्ट्रेशन कब कर पाएंगे, आया बड़ा अपडेट
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/13/505446bd1191a2cee4ac965ce6e62d8a1776091260575499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 16 Apr 2026 11:13:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mohini, Ekadashi, 2026:, मोहिनी, एकादशी, या, अप्रैल, कब, सही, तारीख, और, पूजा, मुहूर्त, नोट, करें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Budh Pradosh Vrat 2026: बुध प्रदोष व्रत आज, नोट करें प्रदोष काल में पूजा का समय और विधि</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6014</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6014</guid>
<description><![CDATA[ Budh Pradosh Vrat 2026: पंचांग के मुताबिक हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है, जिसे वार के अनुसार अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. आज 15 अप्रैल 2026 को वैशाख कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है. बुधवार का दिन होने से इसे बुध प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है.
शिव कृपा पाने के लिए प्रदोष व्रत को सबसे उत्तम और श्रेष्ठ व्रत माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, बुध प्रदोष व्रत पर किए पूजा-पाठ और व्रत से महादेव सारे कष्ट दूर कर देते हैं. बुध प्रदोष व्रत से शिवजी के साथ ही बुध ग्रह की कृपा भी प्राप्त होती है.
प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 15 अप्रैल पूर्वांह्न 12:12 पर हो चुका है और 15 अप्रैल रात 10:31 पर त्रयोदशी तिथि का समापन हो जाएगा. प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में पूजा करने का महत्व होता है. प्रदोष काल का अर्थ है, सूर्यास्त के ठीक बाद का समय, जो लगभग 1.5 घंटे तक रहता है. आज सूर्यास्त लगभग शाम 06:46 पर होगा.
Akshaya Tritiya 2026 Date: अक्षय तृतीया 2026 में कब है, देखें डेट और सोना-चांदी खरीदने का मुहूर्त
बुध प्रदोष व्रत पूजा विधि (Budh Pradosh Vrat Puja Vidhi Step-by-Step)
बुध प्रदोष व्रत की पूजा विधि बहुत सरल है, लेकिन पूजा पूरे विधि-विधान औऱ नियमपूर्वक करनी चाहिए. सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ हो जाएं और पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प लें. शाम के समय प्रदोष काल में पूजा की तैयारी करें. पूजा स्थान पर भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. आप चाहे तो शिव मंदिर जाकर भी पूजा कर सकते हैं. पूजा में सबसे पहले शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, फूल आदि अर्पित करें. शिव चालीसा, प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और &amp;ldquo;ॐ नमः शिवाय&amp;rdquo; मंत्र का जाप करें. दीपक जलाकर आरती करें.
बुध प्रदोष का महत्व और लाभ
बुधवार का संबंध बुध ग्रह से होता है, जिन्हें ज्योतिष शास्त्र में बुद्धि, संचार और व्यापार का कारक माना जाता है. बुधवार के दिन पड़ने वाले बुध प्रदोष व्रत पर पूजा करने से व्यक्ति की वाणी में मधुरता आती है, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और करियर व व्यापार में सफलता मिलती है. मान्यता है कि, बुध प्रदोष व्रत से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं, बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है, वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और शिव कृपा से सभी संकट दूर होते हैं.
प्रदोष व्रत में रखें ये सावधानियां

व्रत के दिन सात्विक भोजन करें.
किसी से झूठ या कठोर वाणी न बोलें .
नकारात्मक विचारों से दूर रहें.
ब्रह्मचर्य का पालन करें.

ये भी पढ़ें: Happy Poila Baisakh 2026 Wishes: पोईला बैसाख पर दें बंगाली नववर्ष की बधाई, कहें- शुभो नबो बोर्शों

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/15/a6defe207e41bcf993cebd6fc4ea2d441776223114079466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Budh, Pradosh, Vrat, 2026:, बुध, प्रदोष, व्रत, आज, नोट, करें, प्रदोष, काल, में, पूजा, का, समय, और, विधि</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ में 4 नहीं बल्कि 8 बड़े मंगल ? नोट करें तारीख, हनुमान जी की पूजा का खास महत्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6015</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6015</guid>
<description><![CDATA[ Bada Mangal 2026 Date: ज्येष्ठ महीने का हर मंगलवार बड़ा मंगल कहलाता है. इस साल ज्येष्ठ माह में 4 या 5 नहीं बल्कि 8 बड़ा मंगल पर्व मनाए जाएंगे, क्योंकि ज्येष्ठ में अधिकमास भी लग रहे हैं बड़ा मंगल केवल एक व्रत या पर्व नहीं, बल्कि सेवा, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है. इस दिन की गई सच्ची भक्ति और दान जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि का मार्ग खोलती है.
इस बार ज्येष्ठ में 8 बड़ा मंगल
साल 2026 में ज्येष्ठ माह 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक रहेगा, जो इस बार खास इसलिए है क्योंकि 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) भी इसी अवधि में पड़ रहा है. 2 मई से 29 जून के बीच कुल 8 मंगलवार पड़ेंगे,
नोट - शास्त्रीय दृष्टि से &amp;ldquo;निज ज्येष्ठ&amp;rdquo; के मंगलवारों को ही पारंपरिक बड़ा मंगल माना जाता है. पुराणों के अनुसार अधिकमास में कोई संक्रांति नहीं होती इसलिए इसे अस्थायी महीना माना जाता है, ये माह मलिन होता है इस कारण से ज्येष्ठ अधिकमास के मंगलवार को &amp;ldquo;बड़ा मंगल&amp;rdquo; की मुख्य श्रेणी में नहीं रखा जाएगा. हालांकि, मंगलवार होने के कारण हनुमान जी की पूजा कर सकते हैं.
बड़ा मंगल कब-कब है ?



पहला बड़ा मंगल
5 मई 2026


दूसर बड़ा मंगल
12 मई 2026


तीसरा बड़ा मंगल
19 मई 2026


चौथा बड़ा मंगल
26 मई 2026


पांचवां बड़ा मंगल
2 जून 2026


छठा बड़ा मंगल
9 जून 2026


सातवां बड़ा मंगल
16 जून 2026


आठवां बड़ा मंगल
23 जून 2026



बड़ा मंगल कैसे मनाया जाता है

हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाते हैं
बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाते हैं
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं
जरूरतमंदों को भोजन और पानी का वितरण करते हैं

बड़ा मंगल व्रत करने के लाभ
धार्मिक मान्यता यह भी है कि ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में हनुमान जी की पूजा, सेवा और भंडारा करना &amp;ldquo;राम सेवा&amp;rdquo; के समान फल देता है. यही कारण है कि इस दिन जल सेवा, दान और प्रसाद वितरण का विशेष महत्व होता है

संकटों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.
रोग और भय दूर होते हैं.
धन, बल और बुद्धि में वृद्धि होती है.

श्रीराम से हुआ था हनुमान जी का मिलन
रामायण की कथा के अनुसार जब प्रभु श्रीराम माता सीता की तलाश में भटक रहे थे, तो हनुमान जी पहली बार हनुमान जी से मिले थे. हनुमान जी और प्रभु श्रीराम का मिलन पहली बार ज्येष्ठ माह के मंगलवार को हुआ था, इसलिए इस ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बड़ा या बुढ़वा मंगलवार के नाम से जाना गया.
Vastu Tips: आप भी टॉयलेट में ले जाते हैं मोबाइल, कंगाल कर सकता है ये ग्रह
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/15/56feffcfbe1f77f0167b914e9322a50c1776221932901499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Bada, Mangal, 2026:, ज्येष्ठ, में, नहीं, बल्कि, बड़े, मंगल, नोट, करें, तारीख, हनुमान, जी, की, पूजा, का, खास, महत्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>5 मंदिर जिनके बारे में स्थानीय लोगों का मानना है कि वे उनके शहर को बुराई से बचाते हैं!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6011</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6011</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/15/575b211fc85d8fa93066b4b85f06f82517762260632041092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>मंदिर, जिनके, बारे, में, स्थानीय, लोगों, का, मानना, है, कि, वे, उनके, शहर, को, बुराई, से, बचाते, हैं</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vaishno Devi: वैष्णो देवी की महिमा अपार, एक्टर अक्षय कुमार ने सुनाया चमत्कारी अनुभव</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6012</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6012</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/15/80267c88ef3e3d3d267b7ae41b84391f1776228389072466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vaishno, Devi:, वैष्णो, देवी, की, महिमा, अपार, एक्टर, अक्षय, कुमार, ने, सुनाया, चमत्कारी, अनुभव</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Jur Sital 2026: मिथिला का जुड़ शीतल पर्व आज, जानें क्यों सिर पर ठंडा जल डालकर बड़े देते हैं आशीर्वाद</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/6013</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/6013</guid>
<description><![CDATA[ Jur Sital 2026: मिथिला की लोक संस्कृति से कई त्योहार जुड़े हैं, जिससे भावनाए पनपती हैं. कई तीज-त्योहारों में एक बेहद खास पर्व है &amp;lsquo;जुड़ शीतल&amp;rsquo;. यह पर्व वैशाख महीने की शुरुआत में मैथिली नववर्ष के दूसरे दिन मनाया जाता है. जुड़ शीतल पर्व से आस्था, संस्कृति और आशीर्वाद का अनोखा संगम जुड़ा है.
जुड़ शीतल पर्व कब
जुड़ शीतल पर्व बुधवार 15 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है. परंपरा के मुताबिक, जुड़ शीतल सतुआनी या सतुआन पर्व के अगले दिन मनाया जाता है. सतुआन के दिन मैथिली नववर्ष शुरू होता है और अगले दिन जुड़ शीतल पर्व मनाया जाता है. मैथिली कैलेंडर के अनुसार, मंगलवार 14 अप्रैल को मैथिली नववर्ष का पहला दिन था और आज बुधवार 15 अप्रैल को जुड़ शीतल का उत्सव मनाया जा रहा है.
Satuan Sankranti 2026: असकतियन के तीन नहान, खिचड़ी फगुआ आ सतुआन, जानें सतुआन पर्व की परंपरा, महत्व और दान
जुड़ शीतल पर शीतलन अनुष्ठान
जुड़ शीतल पर्व को लोग उत्सव की तरह धूमधाम और पूर्ण आस्था के साथ मनाते हैं. यह पर्व मैथिली समाज की आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है. इस दिन पूजा-पाठ और कई तरह के पारंपरिक अनुष्ठान होते हैं, जिसमें शीतलन अनुष्ठान सबसे महत्वपूर्ण होता है. इसमें परिवार के बड़े सदस्य या बड़े-बुजुर्ग छोटे सदस्यों के सिर पर जल डालते है और &#039;जुड़ैल रह&#039; या &#039;जुड़ायल रहु&#039; कहकर आशीर्वाद देते हैं. शीतलन अनुष्ठान आने वाले वर्ष के लिए आशीर्वाद का प्रतीक होता है.
अन्य अनुष्ठानों में जुड़ शीतल पर्व पर बासी भोजन खाना और मां शीतला की पूजा करना शामिल है. इस दिन लोगे एक-दूसरे को बधाई भी देते हैं. जुड़ शीतल पर्व पर ताजा के बजाय बासी भोजन खाने की परंपरा है, जिसे एक दिन पहले ही पकाकर तैयार किया जाता है. इसमें मुख्य रूप से सत्तू, दही-चूड़ी, कच्चे आम की चटनी, कढ़ी, चावल आदि शामिल होते हैं. &amp;nbsp;
जुड़ शीतल पर्व का महत्व
जुड़ शीतल का अर्थ ठंडक, शीतलता और शांति से जुड़ा है. यह ऐसा दिन होता है, जो जीवन में शीतलता, शांति और ताजगी लेकर आता है. जुड़ शीतल पर्व पर छोटे सदस्यों के सिर पर ठंडा पानी डालकर आशीर्वाद देना गर्मी के मौसम के आगमन और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का भी संदेश देता है. इसलिए जुड़ शीतल का पर्व शरीर, मन और पर्यावरण को ठंडा रखने की परंपरा से जुड़ा होता है.
छोटे सदस्यों के साथ ही लोग जुड़ शीतल के दिन घर-आंगन और पेड़-पौधों पर भी पानी डालते हैं. साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भी पानी की व्यवस्था करते हैं, जिससे कि वातावरण और प्रकृति के हर जीवन में शीतलता बनी रही. इसलिए यह परंपरा इस बात का भी संदेश देती है कि, जुड़ शीतल केवल मनुष्य नहीं बल्कि पूरी सृष्टि का पर्व है.
ये भी पढ़ें: Happy Poila Baisakh 2026 Wishes: पोईला बैसाख पर दें बंगाली नववर्ष की बधाई, कहें- शुभो नबो बोर्शोंDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/15/540b81dd56a0a817ea272a4238f177f41776224690513466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:23:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Jur, Sital, 2026:, मिथिला, का, जुड़, शीतल, पर्व, आज, जानें, क्यों, सिर, पर, ठंडा, जल, डालकर, बड़े, देते, हैं, आशीर्वाद</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Adi Shankaracharya Jayanti 2026: सनातन धर्म के मास्टर माइंड थे आदि शंकराचार्य, जानें 4 दिशाओं में क्यों बनाए चार धाम</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5981</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5981</guid>
<description><![CDATA[ Adi Shankaracharya Jayanti 2026: सनातन धर्म में आदि शंकराचार्य को एक महान दार्शनिक, संत और धर्म सुधारक के रूप में जाना जाता है. शंकराचार्य जयंती 21 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. इस दिन आदि शंकराचार्य की 1238वीं जन्म वर्षगांठ होगी. उन्होंने उस समय हिन्दु संस्कृति को पुनर्जीवित किया, जिस समय हिन्दु संस्कृति अपने पतन की ओर अग्रसर थी. अद्वैत वेदांत का प्रचार-प्रसार किया. आदि शंकराचार्य का इतिहास, उन्होंने भारत में मठों की स्थापना क्यों की आइए जानते हैं.
कौन है आदि शंकराचार्य
आदि शंकराचार्य 8वीं शताब्दी के महान हिंदू दार्शनिक थे, जिनका जन्म केरल के कालड़ी गांव में हुआ था. उनका पूरा नाम शंकर था और उन्हें &amp;ldquo;आदि&amp;rdquo; (प्रथम) शंकराचार्य इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने शंकराचार्य परंपरा की स्थापना की. इनके पिता शिवगुरु और माता आर्याम्बा थीं, आदि शंकराचार्य बचपन से ही असाधारण बुद्धिमत्ता के धनी थे. 8 वर्ष की आयु में ही वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया. कहा जाता है कि उन्होंने बहुत छोटी उम्र में ही संन्यास ले लिया और ज्ञान की खोज में निकल पड़े.
आदि शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में क्यों की मठों की स्थापना
समाज में धार्मिक भ्रम, अलग-अलग मतों के बीच टकराव और वेदों की सही शिक्षा का अभाव के चलते और इन चुनौतियों को दूर करने के लिए मठों की स्थापना आदि शंकराचार्य का एक दूरदर्शी कदम था. आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों दिशाओं में मठ (पीठ) केवल धार्मिक केंद्र बनाने के लिए नहीं, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा, संगठन और ज्ञान के प्रसार के लिए स्थापित किए थे.

श्रृंगेरी मठ (दक्षिण &amp;ndash; कर्नाटक)
द्वारका मठ (पश्चिम &amp;ndash; गुजरात)
पुरी मठ (पूर्व &amp;ndash; ओडिशा)
ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ) (उत्तर &amp;ndash; उत्तराखंड)

आदि शंकराचार्य के विचार
आदि शंकराचार्य के रचित श्लोक आज भी आध्यात्मिक जीवन का मार्ग दिखाते हैं.
ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः॥
अर्थ: - ब्रह्म (ईश्वर) ही सत्य है. यह संसार मिथ्या (अस्थायी) है. जीव (आत्मा) और ब्रह्म अलग नहीं हैं.
भज गोविन्दं भज गोविन्दं गोविन्दं भज मूढ़मते. सम्प्राप्ते सन्निहिते काले न हि न हि रक्षति डुकृञ्करणे॥
अर्थ -&amp;nbsp; हे मनुष्य! भगवान गोविंद (श्रीकृष्ण) का भजन करो. केवल व्याकरण या विद्या (ज्ञान का अहंकार) तुम्हें मृत्यु के समय नहीं बचा सकती. जीवन में केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि भक्ति और ईश्वर से जुड़ाव भी आवश्यक है.
Akshaya Tritiya Muhurat 2026: अक्षय तृतीया पर कर रहे हैं गृह प्रवेश, तो इन 10 बातों का रखें ध्यान, मां लक्ष्मी घर में करेंगी वास


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/11/c04e9e453fec2ff934174d7ee63966b91775893712239499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:22:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Adi, Shankaracharya, Jayanti, 2026:, सनातन, धर्म, के, मास्टर, माइंड, थे, आदि, शंकराचार्य, जानें, दिशाओं, में, क्यों, बनाए, चार, धाम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Panchang 13 April 2026: आज पंचक और वरुथिनी एकादशी का संयोग, पूजा मुहूर्त, राशिफल, और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5982</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5982</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 13 अप्रैल 2026: 13 अप्रैल 2026 को वैशाख की वरुथिनी एकादशी है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति के पिछले जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं. कहा जाता है कि इस दिन किया गया पुण्य 1000 गायों के दान के बराबर फल देता है. इस दिन सोमवार भी है जो शिव साधना के लिए शुभ दिन है.&amp;nbsp;
आज का व्रत
आज वरुथिनी एकादशी व्रत के दिन विष्णु जी की पूजा में पीले फूल, गोपी चंदन का इस्तेमाल करें. सात्विक आहार लें और अगर व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो सोशल मीडिया और तमाम गैजेट्स से दूर बनाकर भी इस व्रत का पालन किया जा सकता है. मंत्रों का जाप करें.

13 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 13 April 2026)



तिथि

एकादशी (13 अप्रैल 2026, सुबह 1.16 - 14 अप्रैल 2026, सुबह 1.08)



वार
सोमवार


नक्षत्र
धनिष्ठा


योग
शुभ


सूर्योदय 
सुबह 6.01


सूर्यास्त
शाम 6.44


चंद्रोदय
सुबह 3.53, 14 अप्रैल


चंद्रोस्त
दोपहर 2.33


चंद्र राशि
कुंभ




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 9.10 - सुबह 10.46


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 6.45 - रात 8.10




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 7.34 - सुबह 9.10


यमगण्ड काल
सुबह&amp;nbsp; 10.46 - दोपहर 12.22&amp;nbsp;


गुलिक काल
दोपहर 1.58 - दोपहर 3.34


पंचक
पूरे दिन




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 13 April 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
कुंभ


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



13 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष (Aries) - आज पुरानी योजनाओं से लाभ होगा और कार्यक्षेत्र में मनचाहा काम मिलेगा. आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी, परिवार का सहयोग और मानसिक प्रसन्नता बनी रहेगी.
वृषभ (Taurus) - स्वास्थ्य और वाहन चलाने में सावधानी रखें, जोखिम भरे कार्यों से बचें. जीवनसाथी से मतभेद हो सकते हैं, निवेश सोच-समझकर करें.
मिथुन (Gemini) - परिवार में खुशी का माहौल रहेगा और करियर में नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी. विदेशी लेनदेन और पुराने निवेश से लाभ मिलने के योग हैं.
कर्क (Cancer) - आर्थिक मामलों में सावधानी रखें और विवादों से दूर रहें. नए संपर्क लाभ देंगे, लेकिन तनाव से सिरदर्द हो सकता है.
सिंह (Leo) - रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आय में वृद्धि के योग हैं. परिवार का सहयोग मिलेगा, लेकिन किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें.
कन्या (Virgo) - संपत्ति या वाहन खरीदने के योग हैं, सुख-सुविधाएं बढ़ेंगी. करियर में प्रगति होगी, लेकिन परिवार की बातें गोपनीय रखें.
तुला (Libra) - साहस से कार्य पूरे होंगे और समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. व्यापार में लाभ और नए आय स्रोत बनने के संकेत हैं.
वृश्चिक (Scorpio) - मिश्रित दिन रहेगा, परिवार में खुशी और थोड़ी चिंता दोनों रहेंगी. आत्मविश्वास बनाए रखें, मानसिक तनाव से बचने की जरूरत है.
धनु (Sagittarius) - करियर में रचनात्मकता दिखाने का मौका मिलेगा और लाभ होगा.परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा, निवेश में सलाह जरूरी है.
मकर (Capricorn) - रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखें. यात्रा के योग हैं, जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें.
कुंभ (Aquarius) - आमदनी के नए स्रोत बनेंगे और पुराने निवेश से फायदा होगा. परिवार और दोस्तों के साथ अच्छा समय बीतेगा.
मीन (Pisces)- बकाया धन वापस मिल सकता है, खर्च और आय में संतुलन रखें. वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा, सकारात्मक सोच से लाभ होगा.

आज का उपाय&amp;nbsp;
&amp;ldquo;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&amp;rdquo; मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें.
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
एकादशी के दिन पीले रंग के वस्त्र पहनना चाहिए.
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर 100 साल बाद &#039;अक्षय योग&#039;, इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/13/a2abb75907c2f0ec8b5345edfe8fae6b1776020847656499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:22:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, आज, पंचक, और, वरुथिनी, एकादशी, का, संयोग, पूजा, मुहूर्त, राशिफल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Varuthini Ekadashi 2026 Paran: वरुथिनी एकादशी व्रत पारण 14 अप्रैल को, देखें पारण की विधि और मुहूर्त</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5980</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5980</guid>
<description><![CDATA[ Varuthini Ekadashi 2026 Paran: एकादशी व्रत को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है. एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है. वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को वरुथिनी एकादशी के नाम से जाता है. मान्यता है कि, इस दिन किए व्रत और पूजा से पाप कर्मों का नाश होता है और सुख-समृद्धि बढ़ती है.
13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi 2026 )
सोमवार 13 अप्रैल 2026 को वरुथिनी एकादशी व्रत रखा जाएगा. पंचांग (Panchang) के अनुसार 13 अप्रैल पूर्वाह्न 01:17 पर एकादशी तिथि शुरू होकर 14 अप्रैल 2026 को पूर्वाह्न 01:09 तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार 13 अप्रैल को ही वरुथिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा और पूजा की जाएगी.
14 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी व्रत पारण (Varuthini Ekadashi 2026 Paran Time)
एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि में करने का विधान है. इसलिए वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण भी मंगलवार, 14 अप्रैल को किया जाएगा. पारण के लिए सुबह 06:54 से 08:31 तक का समय रहेगा. इस बीच आप एकादशी व्रत का पारण कर सकते हैं.
वरुथिनी एकादशी पारण विधि (Varuthini Ekadashi Vrat Paran)
कई लोग विधि-विधान से एकादशी का व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और सभी जरूरी नियमों का पालन भी करते हैं. लेकिन जाने-अनजाने में पारण में हुई छोटी सी भूल के कारण व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता. इसलिए&amp;nbsp;पारण यानी व्रत खोलने का सही समय और विधि जानना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि नियमों के अनुसार किया गया पारण ही एकादशी व्रत का पूर्ण फल देता है.
कैसे करें एकादशी व्रत का पारण (How to break the fast of Ekadashi)

वरुथिनी एकादशी व्रत पारण से पहले स्नान-दान और पूजन का विशेष महत्व होता है. पारण के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की विधिवत पूजा करें. ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने के बाद ही वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण करें.
पारण यानी व्रत खोलने के लिए सबसे पहले अन्न या तामसिक चीजों को मुख में न रखें. सबसे पहले अपने मुख में तुलसी दल रखना चाहिए. लेकिन ध्यान रखें कि,&amp;nbsp;तुलसी को चबाएं नहीं बल्कि निगल जाएं. इसके अलावा पारण करने के लिए आप &amp;nbsp;आंवला या फिर भगवान को भोग लगाया हुआ प्रसाद भी ग्रहण कर सकते हैं.
एकादशी व्रत का पारण हमेशा सूर्योदय के बाद ही करना चाहिए, क्योंकि इससे पहले पारण की कोई विधि और नियम नहीं है. द्वादशी तिथि पर पारण के बाद चावल जरूर खाना चाहिए.
पारण के दिन तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज और मांसाहार से दूर रहना चाहिए. इसके अलावा क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें और दिनभर सकारात्मकता बनाए रखें. व्रत के बाद भी सात्विक जीवनशैली अपनाने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है.

&amp;nbsp;ये भी पढ़ें: Varuthini Ekadashi 2026: व्रत में स्मार्टफोन छोड़ें &#039;स्मार्ट-सोल&#039; बनें, वरुथिनी एकादशी पर अन्न के साथ गैजेट्स का त्याग भी जरूरीDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/12/07fac3d8982481a76160a84932cfd51b1775992943436466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:22:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Varuthini, Ekadashi, 2026, Paran:, वरुथिनी, एकादशी, व्रत, पारण, अप्रैल, को, देखें, पारण, की, विधि, और, मुहूर्त</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Sawan Somwar 2026 Date: सावन में कितने सोमवार आएंगे ? श्रावण कब से कब तक रहेगा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5978</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5978</guid>
<description><![CDATA[ Sawan Somwar 2026 Date List: इस साल सावन 30 जुलाई से शुरू हो रहा है जिसका समापन 28 अगस्त 2026 को होगा. इस बार सावन 28 दिन का ही होगा. पुराणों के अनुसार सावन में शिव जी की साधना पूरे सालभर भोलेनाथ की पूजा करने के समान फल देती है. खासकर सावन सोमवार का विशेष महत्व है. इस साल कितने सावन सोमवार रहेंगे, पहला श्रावण सोमवार किस दिन है, इसका क्या महत्व है.
2026 में कितने सावन सोमवार ?
इस साल सावन में 4 सोमवार आएंगे. वैसे तो सावन का हर दिन बहुत प्रभावशाली माना जाता है लेकिन पुराणों में कहा गया है कि जो सावन सोमवार पर शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत अर्पित करता है उससे दुर्भाग्य कोसों दूर रहता है. जीवन में सुख समृद्धि और किसी भी चीज की कमी नहीं रहती है. जो लोग 16 सोमवार व्रत की शुरुआत करना चाहते हैं उनके लिए सावन का पहला सोमवार बहुत शुभ रहेगा.

शिव पुराण में सावन का महत्व
शिव पुराण के अनुसार श्रावण मासे विशेषेण शिवपूजा फलप्रदा. सर्वपापहरं पुण्यं सर्वकामफलप्रदम्॥ अर्थात सावन मास में की गई शिव पूजा विशेष फल देने वाली होती है, यह सभी पापों का नाश कर इच्छाओं को पूर्ण करती है.&amp;nbsp;
सावन सोमवार व्रत के लाभ

सावन सोमवार का व्रत करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं. दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सामंजस्य बढ़ता है.
शिवजी की पूजा से शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं. परिवार के स्वास्थ्य में सुधार आता है.
शिव भक्ति से आत्मिक जागरूकता बढ़ती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है. व्यक्ति का जीवन संतुलित और सकारात्मक बनता है.

सावन सोमवार व्रत कैसे करें

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें (सफेद या हल्के रंग शुभ माने जाते हैं).
घर के मंदिर में दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें. दिनभर निराहार रहें या फलाहार (फल, दूध, साबूदाना आदि) लें.
संकल्प लेते समय मन में अपनी इच्छा और भगवान शिव का ध्यान करें.
सबसे पहले जल या गंगाजल से अभिषेक करें, फिर दूध, दही, शहद, घी और शक्कर (पंचामृत) चढ़ाएं.
भोग लगाएं और शिव चालीसा का पाठ करें. सावन सोमवार व्रत की कथा पढ़ें.
शाम को फिर से भगवान शिव की पूजा करें
अगले दिन सुबह पूजा के बाद व्रत का पारण करें.

इन बातों का रखें ध्यान

झूठ, क्रोध और नकारात्मक सोच से दूर रहें
किसी का अपमान न करें
ब्रह्मचर्य का पालन करें
बेलपत्र हमेशा साफ और सही दिशा में चढ़ाएं
शिवलिंग पर तुलसी न चढ़ाएं
इसके बाद पुनः जल से स्नान कराएं.
बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन, अक्षत, धूप-दीप अर्पित करें.

Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर 100 साल बाद &#039;अक्षय योग&#039;, इन राशियों पर बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/13/cfbc264728afd92af0dcbe27e10853e61776021769239499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:22:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Sawan, Somwar, 2026, Date:, सावन, में, कितने, सोमवार, आएंगे, श्रावण, कब, से, कब, तक, रहेगा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Varuthini Ekadashi Upay: 7,5 या 3 नहीं, वरुथिनी एकादशी पर कर लीजिए बस ये 1 उपाय, बन जाएगा हर काम!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5979</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5979</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/13/c04903ecaf1d0aa06c4e10a7ab2cad3f1776052020886466_original.avif" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 10:22:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Varuthini, Ekadashi, Upay:, 7, 5, या, नहीं, वरुथिनी, एकादशी, पर, कर, लीजिए, बस, ये, उपाय, बन, जाएगा, हर, काम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vallabhacharya Jayanti 2026: वल्लभाचार्य जयंती क्यों मनाई जाती है, जानें श्रीनाथ जी से क्या है इनका संबंध</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5951</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5951</guid>
<description><![CDATA[ Vallabhacharya Jayanti 2026:&amp;nbsp;श्रीकृष्ण के अनेक भक्तों में से एक है संत शिरोमणि वल्लभाचार्य. हर साल वल्लभाचार्य जयंती 13 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी. इस साल श्री वल्लभाचार्य की 547वीं जन्म वर्षगांठ है. उन्होंने हिंदू धर्म में पुष्टिमार्ग की स्थापना की, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति पर आधारित है. पुष्टि मार्ग को वल्लभ सम्प्रदाय के नाम से भी जाना जाता है. खासतौर पर श्रीनाथ जी की पूजा करने वालों के लिए ये दिन बहुत खास है. &amp;nbsp;
कौन थे वल्लभाचार्य जी
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्री वल्लभाचार्य को श्रीनाथ जी का ही स्वरूप माना जाता है. वल्लभाचार्य का जन्म 1479 ईस्वी में वर्तमान चंपारण (बिहार) में हुआ था. इनके पिता का नाम लक्ष्मण भट्ट और माता का नाम इलम्मा था. बचपन से ही वे अत्यंत प्रतिभाशाली और धार्मिक प्रवृत्ति के थे. उन्होंने कम उम्र में ही वेद, उपनिषद और शास्त्रों का गहरा ज्ञान प्राप्त कर लिया था.

जन्म के समय दिखाई अपनी लीला
श्री वल्लभाचार्य जी का जब जन्म हुआ तब उनमें कोई चेतना नहीं थी. ऐसे में दुखी मन से उनके माता पिता उन्हें मृत समझकर छोड़ दिया था. ऐसे में श्री नाथ जी में श्री वल्लभ आचार्य की माता इल्लामागारू को सपने में दर्शन दिया और कहा कि जिस शिशु को तुम छोड़ आए हो वो जीवित है. तुम्हारे गर्भ से स्वयं श्रीनाथ ने जन्म लिया है. भगवान की अद्भुत वाणी सुनकर जब उनके माता- पिता वहां गए तो देखा कि शिशु के चारों तरह आग की लपटें हैं और वो बीच में बड़ी शांति से अंगूठा चूस रहे थे.
क्यों मनाई जाती है वल्लभाचार्य जयंती
वल्लभाचार्य जी ने &amp;ldquo;सेवा भाव&amp;rdquo; को भक्ति का मुख्य आधार बनाया, जिसमें भगवान को बच्चे की तरह प्रेम और सेवा से पूजा जाता है, जैसे उन्हें भोजन कराना, सजाना और सुलाना. उन्हें पूजने वाले वल्लभाचार्य जी को श्रीनाथ जी का प्रकट स्वरूप मानकर इस दिन को धूमधाम से मनाते हैं.
श्रीनाथजी को मुख्य रूप से भक्ति योग के अनुयायियों और गुजरात और राजस्थान में वैष्णव और भाटिया एवं अन्य लोगों द्वारा पूजा जाता है.
वल्लभाचार्य जयंती पर क्या करते हैं
श्रीकृष्ण के भक्त इस दिन सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण, विशेष रूप से श्रीनाथजी की पूजा करते हैं. मंदिरों में भजन-कीर्तन, आरती और प्रवचन आयोजित किए जाते हैं. भक्तजन दिनभर कान्हा की भक्ति में ली रहते हैं.&amp;nbsp; शास्त्रों का पाठ करते हैं और वल्लभाचार्य जी की शिक्षाओं को सुनते हैं.
वल्लभाचार्य जी के विचार
वल्लभाचार्य अनुसार तीन ही तत्व हैं ब्रह्म, ब्रह्मांड और आत्मा. अर्थात ईश्वर, जगत और जीव. उक्त तीन तत्वों को केंद्र रखकर ही उन्होंने जगत और जीव के प्रकार बताए और इनके परस्पर संबंधों का खुलासा किया.
Varuthini Ekadashi 2026: GEN Z के लिए कैसे फायदेमंद है एकादशी व्रत, बस कर लें ये काम
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/09/2251ac401fe34f57d49f6480b23825e11775721345178499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vallabhacharya, Jayanti, 2026:, वल्लभाचार्य, जयंती, क्यों, मनाई, जाती, है, जानें, श्रीनाथ, जी, से, क्या, है, इनका, संबंध</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Panchang 10 April 2026: आज कालाष्टमी, शत्रु पर जीत पाने इस मुहूर्त में करें काल भैरव की पूजा, राहुकाल, पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5952</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5952</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 10 अप्रैल 2026: 10 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी यानी कालाष्टमी और शुक्रवार है. इस दिन को अत्यंत शक्तिशाली और तांत्रिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. कालाष्टमी पर काल भैरव की पूजा करने से जीवन के अज्ञात भय, दुर्घटनाओं और शत्रु बाधाओं से रक्षा होती है. काल भैरव की पूजा रात्रि काल में शुभ मानी जाती है. इस दौरान भैरवाष्टक का पाठ कर सकते हैं.
10 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 10 April 2026)



तिथि

अष्टमी (9 अप्रैल 2026, रात 9.19 - 10 अप्रैल 2026, रात 11.15)



वार
शुक्रवार


नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा


योग
शिव


सूर्योदय 
सुबह 6.01


सूर्यास्त
शाम 6.44


चंद्रोदय
सुबह 2.10


चंद्रोस्त
सुबह 11.35, 11 अप्रैल


चंद्र राशि
धनु




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.01 - सुबह 10.47


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 9.33 - रात 10.58




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 10.47 - दोपहर 12.23


यमगण्ड काल
दोपहर 3.33 - शाम 5.09


आडल योग
सुबह 6.01 - सुबह 11.28


गुलिक काल
सुबह 7.37 - सुबह 9.12




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 10 April 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
धनु


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



10 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष: भाग्य साथ देगा, निवेश और व्यापार में लाभ के संकेत हैं. दांपत्य जीवन अच्छा रहेगा, लेकिन पेट व श्वसन से जुड़ी समस्या से सावधान रहें.
वृषभ: मेहनत से सफलता मिलेगी और परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा. नौकरी में प्रमोशन/वेतन वृद्धि के योग हैं, स्वास्थ्य सामान्य रहेगा.
मिथुन: व्यापार और निवेश में लाभ होगा, करियर में नई जिम्मेदारी मिल सकती है. वाहन चलाते समय सावधानी रखें, चोट का खतरा है.
कर्क: सोच-समझकर बोलें, वरना नुकसान हो सकता है. निवेश से बचें और रिश्तों में तालमेल बनाए रखें.
सिंह: धैर्य की परीक्षा होगी, लेकिन मेहनत से प्रमोशन के योग हैं. रिश्तों में संयम रखें और जोखिम लेने से बचें.
कन्या: रुके काम पूरे होंगे और संपत्ति मामलों में सफलता मिल सकती है. परिवार में सुख-शांति रहेगी, थोड़ी थकान हो सकती है.
तुला: आत्मविश्वास बढ़ेगा और करियर में नए अवसर मिलेंगे. आर्थिक लाभ के साथ रिश्ते भी मजबूत होंगे.
वृश्चिक: करियर में अच्छी खबर मिल सकती है और प्रेम जीवन सुखद रहेगा. धार्मिक कार्यों से मानसिक शांति मिलेगी.
धनु: सेहत अच्छी रहेगी और सामाजिक सम्मान बढ़ेगा. नए रिश्ते की शुरुआत या धार्मिक यात्रा के योग हैं.
मकर: पैसों के मामले में सावधानी रखें और उधार देने से बचें. परिवार का सहयोग मिलेगा, लेकिन कार्यक्षेत्र में बाधाएं आ सकती हैं.
कुंभ: पुराने संपर्क से फायदा होगा और बिजनेस में बड़ा मौका मिल सकता है. आय के साथ खर्च भी बढ़ेंगे, संतुलन जरूरी है.
मीन: व्यापार और नौकरी में बड़े अवसर मिलेंगे, धन लाभ के संकेत हैं. काम का दबाव बढ़ सकता है, स्वास्थ्य का ध्यान रखें.

आज का उपाय&amp;nbsp;
भैरव बाबा की कृपा से घर और जीवन में मौजूद बुरी शक्तियों का अंत होता है. काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए काले कुत्ते की सेवा करें.
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
शुक्रवार के दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनना चाहिए.&amp;nbsp;
Baglamukhi Jayanti 2026: बगलामुखी जयंती अप्रैल में कब ? शत्रुओं पर जीत दिलाती हैं देवी, जानें इनकी पूजा कैसे करें



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/09/5553f5657197af1f5c85e6683724eb641775757696022499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, आज, कालाष्टमी, शत्रु, पर, जीत, पाने, इस, मुहूर्त, में, करें, काल, भैरव, की, पूजा, राहुकाल, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>मुंबई के मालाबार हिल का वालकेश्वर शिव मंदिर: जानिए रामायण काल से जुड़ी पौराणिक कहानी?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5949</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5949</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/09/b2478157259e9ef93ac4a6b5ff5f1bdf17757322688911092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>मुंबई, के, मालाबार, हिल, का, वालकेश्वर, शिव, मंदिर:, जानिए, रामायण, काल, से, जुड़ी, पौराणिक, कहानी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा कब ? जानें स्नान&#45;दान का मुहूर्त, इस दिन से जुड़ी हैं गौतम बुद्ध की 3 अहम घटनाएं</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5950</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5950</guid>
<description><![CDATA[ Buddha Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. बुद्ध पूर्णिमा 1 मई 2026 को है. दुनिया में बौद्ध को तीसरा सबसे बड़ा धर्म माना जाता है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान-दान, विष्णु जी की पूजा के अलावा बौद्ध धर्म के अनुयायी गौतम बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने का प्रण भी लेते हैं.
बुद्ध पूर्णिमा 2026 मुहूर्त
वैशाख पूर्णिमा 30 अप्रैल 2026 को रात 9 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 1 मई 2026 को रात 10 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगी.

स्नान मुहूर्त - सुबह 4.15 - सुबह 4.58
सुबह 5.41 - सुबह 10.39

बुद्ध पूर्णिमा कैसे मनाते हैं

बौद्ध धर्म के पवित्र ग्रंथों, जैसे &#039;धम्मपद&#039; या त्रिपिटक का पाठ करते हैं.
बोधगया में पीपल के पेड़ (बोधि वृक्ष) की पूजा की जाती है, जो ज्ञान का प्रतीक है.
दीप दान के अलावा घरों को दीपक से सजाते हैं. मंत्र जाप किए जाते हैं.&amp;nbsp; बुद्ध के उपदेशों का स्मरण करते हैं.
हिंदू धर्म वाले इस दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा, मां लक्ष्मी की आराधना और चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं.&amp;nbsp;
व्रत का पालन किया जाता है. जरुरतमंदों को दान देते हैं.&amp;nbsp;

भगवान विष्णु के 9वें अवतार
कुछ धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि गौतम बुद्ध भगवान विष्णु के अवतार थे. ऐसा माना जाता है कि उन्होंने भगवान विष्णु के नौवें अवतार के रूप में पृथ्वी पर जन्म लिया था. वहीं इतिहास के अनुसार 563 ईसा पूर्व गौतम बुद्ध का जन्म कपिलवस्तु की महारानी महामाया देवी और शाक्य गणराज्य के राजा शुद्धोदन के घर में हुआ था, जिन्हें सिद्धार्थ के नाम से जाना जाता है.
वैशाख पूर्णिमा पर हुई महात्मा बुद्ध के जीवन की 3 अहम घटनाएं
बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा) महात्मा बुद्ध के जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं का संगम है, जिसे &quot;त्रिगुण धन्य पर्व&quot; भी कहा जाता है:

जन्म: बुद्ध का जन्म ईसा पूर्व 563 में वैशाख पूर्णिमा के दिन नेपाल के लुंबिनी में हुआ था.
ज्ञान की प्राप्ति (ज्ञानोदय): 35 वर्ष की आयु में, इसी दिन बोधगया में पीपल के पेड़ (बोधि वृक्ष) के नीचे बुद्ध को परम ज्ञान प्राप्त हुआ.
महापरिनिर्वाण (मृत्यु): 80 वर्ष की आयु में, वैशाख पूर्णिमा के ही दिन उन्होंने कुशीनगर में अपना देह त्याग कर महापरिनिर्वाण प्राप्त किया.

कैसे शुरू हुआ बौद्ध धर्म?
बौद्ध धर्म एक प्राचीन भारतीय धर्म है. बताया जाता है कि 2600 वर्ष पहले इसकी स्थापना भगवान बुद्ध ने की थी. यह दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के महत्वपूर्ण धर्मों में से एक है. धर्म लगभग 563 ईसा पूर्व में शुरू हुआ, जो सिद्धार्थ गौतम की शिक्षाओं, जीवन के अनुभवों पर आधारित है.
Akshaya Tritiya Muhurat 2026: अक्षय तृतीया पर कर रहे हैं गृह प्रवेश, तो इन 10 बातों का रखें ध्यान, मां लक्ष्मी घर में करेंगी वास


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/09/20f89a019b8039dd6ef4544f52cdc6591775739042085499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Buddha, Purnima, 2026:, बुद्ध, पूर्णिमा, कब, जानें, स्नान-दान, का, मुहूर्त, इस, दिन, से, जुड़ी, हैं, गौतम, बुद्ध, की, अहम, घटनाएं</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर इन 4 चीजों का दान करना न भूलें, सोना खरीदने जितना मिलेगा पुण्य!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5948</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5948</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/10/17455e24d8bed7f9f6cd51ee44c1c33a1775795209825499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 10:48:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Akshaya, Tritiya, 2026:, अक्षय, तृतीया, पर, इन, चीजों, का, दान, करना, न, भूलें, सोना, खरीदने, जितना, मिलेगा, पुण्य</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Sita Navami 2026 Date: सीता नवमी का दिन बढ़ाता है धन&#45;सौभाग्य, अप्रैल में कब है ये व्रत, नोट करें डेट</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5916</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5916</guid>
<description><![CDATA[ Sita Navami 2026 Date: सीता नवमी 25 अप्रैल 2026 को है. वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाने वाली सीता नवमी को जानकी जयंती भी कहा जाता है, इस दिन सीता माता के प्राकट्य का उत्सव मनाया जाता है. इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को सोलह प्रकार के दान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सीता का जन्म धरती से हुआ था, इसलिए उन्हें &amp;ldquo;भूमि पुत्री&amp;rdquo; कहा जाता है. खास बात यह है कि भगवान श्रीराम और माता सीता का जन्म एक ही नक्षत्र में हुआ माना जाता है, इसलिए राम नवमी के बाद सीता नवमी की पूजा करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है.
सीता नवमी 2026 मुहूर्त
वैशाख शुक्ल नवमी तिथि शुरू - 24 अप्रैल 2026, रात 7.21
वैशाख शुक्ल नवमी तिथि समाप्त - 25 अप्रैल 2026, शाम 6.27

सीता नवमी मध्याह्न मुहूर्त - सुबह 10:58 - दोपहर 01:34

जन्म नहीं सीता जी का प्राक्ट्य हुआ
&amp;ldquo;अयोनिजा जगन्माता भूमेः कन्या यशस्विनी। सीता नाम्ना प्रसिद्धा सा सर्वलोकनमस्कृता॥&amp;rdquo;
अर्थ: सीता माता अयोनिजा (गर्भ से नहीं, बल्कि पृथ्वी से प्रकट) हैं, धर्म ग्रंथों के अनुसार वैशाख शुक्ल नवमी के दिन राजा जनक को खेत जोतते समय पृथ्वी से एक दिव्य कन्या प्राप्त हुई थी, जिन्हें उन्होंने अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया. वही माता सीता थीं. माता सीता को लक्ष्मी जी का स्वरूप माना जाता है.
सीता नवमी क्यों मनाई जाती है
सीता नवमी के दिन देवी जानकी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है. विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है, क्योंकि इससे पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की मजबूती का आशीर्वाद मिलता है.
सीता नवमी की पूजा विधि

इस दिन माता सीता और भगवान राम की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
विशेषकर रामचरितमानस या सुंदरकांड का पाठ करना पुण्यदायी होता है.
सीता माता के भूमि से प्रकट होने के कारण खेत, हल और धरती की पूजा करना शुभ माना जाता है.
अन्न, वस्त्र, फल और जल का दान करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है.
विवाहित महिलाएं सुहाग की वस्तुएं (चूड़ी, सिंदूर आदि) अर्पित कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं.
गरीबों और कन्याओं को भोजन कराएं. इससे विशेष पुण्य और माता सीता का आशीर्वाद मिलता है.

सीता जी की आरती
आरती श्री जनक दुलारी की ,
सीता जी रघुवर प्यारी की ||
आरती श्री जनक दुलारी की ,
सीता जी रघुवर प्यारी की ||
जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी ,
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैय्या भक्तन हितकारी की ||
आरती श्री जनक दुलारी की ,
सीता जी रघुवर प्यारी की ||
श्री शिरोमणि पति हित कारिणी ,
पति सेवा वित्र वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी ,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की
आरती श्री जनक दुलारी की ,
सीता जी रघुवर प्यारी की ||
विमल कीर्ति सब लोकन छाई ,
नाम लेत पवन मति आई ,
सुमिरत काटत कष्ट दुःख दाई ,
शरणागत जन भय हरी की ,
आरती श्री जनक दुलारी की ,
सीता जी रघुवर प्यारी की ||
आरती श्री जनक दुलारी की ,
सीता जी रघुवर प्यारी की ||
April Panchak 2026: 13 अप्रैल से सावधान! वरुथिनी एकादशी पर &#039;राज पंचक&#039; का साया, भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां!

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/07/c1d740786683bf29aaedd7e88dc3994d1775561999361499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Sita, Navami, 2026, Date:, सीता, नवमी, का, दिन, बढ़ाता, है, धन-सौभाग्य, अप्रैल, में, कब, है, ये, व्रत, नोट, करें, डेट</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया पर वाहन खरीदने का शुभ मुहूर्त क्या है ?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5917</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5917</guid>
<description><![CDATA[ Akshaya Tritiya 2026: अगर आप अप्रैल माह में गाड़ी खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो पूरे महीने में अक्षय तृतीया सबसे शुभ दिन है. इस साल अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026 को है. ये दिन हर किसी के जीवन में सौभाग्य और सफलता लाता है.
इस दिन सोना-चांदी विशेष तौर पर खरीदा जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार इस दिन खरीदी गई वस्तु लंबे समय तक समृद्धि प्रदान करती है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है. ऐसे में अक्षय तृतीया पर वाहन खरीदने के लिए कौन-कौन से शुभ मुहूर्त बन रहे हैं यहां जान लें.
अक्षय तृतीया 2026 वाहन खरीदी मुहूर्त

अबूझ मुहूर्त - सुबह 10.49 - सुबह 5.51, 20 अप्रैल
अभिजित मुहूर्त - सुबह 11:55- दोपहर 12:46
त्रिपुष्कर योग - सुबह 07:10 - सुबह 10:49
अमृत - सुबह 05:51 - सुबह 07:28
शुभ - सुबह 09:05 - सुबह 10:43
चर - दोपर 01:58 - दोपहर 03:35
लाभ - दोपहर 03:35&amp;nbsp; - शाम 05:12
अमृत - शाम 05:12 - शाम 06:50
चर - शाम 06:50 - रात 08:12

अक्षय तृतीया पर वाहन खरीदने का महत्व

अक्षय&amp;rdquo; का अर्थ होता है जो कभी खत्म न हो. इस दिन खरीदी गई वस्तु में वृद्धि और स्थायित्व बना रहता है
इस दिन वाहन खरीदने से सुख, समृद्धि और उन्नति बढ़ती है.
मान्यता है कि इस दिन किया गया निवेश लंबे समय तक लाभ देता है.
वाहन को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस दिन खरीदी गई गाड़ी घर में धन-वैभव लाती है.
नई गाड़ी लेने से जीवन में सुविधा और प्रगति के नए रास्ते खुलते हैं.

अक्षय तृतीया पर राशि अनुसार चुनें गाड़ी का रंग

मेष राशि- आपके राशि स्वामी मंगल देव के अनुसार लाल या महरून रंग का वाहन आपके लिए फायदेमंद होगा.
वृषभ राशि- अपनी राशि के स्वामी शुक्रदेव के अनुसार आपके वाहन का रंग सफेद या सिल्वर होना आपके लिए शुभ रहेगा.
मिथुन राशि- हरे, क्रीम, ग्रे रंग की गाड़ी आपकी राशि के लिए अनुकूल रहेगी और लाभ देगी.
कर्क राशि- कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है इसलिए इस राशि वालों के लिए सफेद, सिल्वर या क्रीम रंग का वाहन लाभदायक रहेगा.
सिंह राशि- अपने राशि स्वामी सूर्य के अनुसार सिंह राशि वाले लाल, महरून या चॅाकलेटी, केसरिया रंग का वाहन रखें, फायदा होगा.
कन्या राशि- इस राशि वालों के लिए हरे, सफेद या स्लेटी रंग की गाड़ियां रखनी शुभ होंगी.
तुला राशि- तुला राशि वालों के लिए सफेद, चमकीले या सिल्वर रंग की गाड़ियां लाभदायक होती है.
वृश्चिक राशि- अपनी राशि के अनुसार लाल, महरून या चॅाकलेटी रंग की गाड़ियां वृश्चिक राशि वालों के लिए लकी होती है.
धनु राशि- पीला, क्रीम या सफेद रंग इस राशि वालों के लिए लकी कलर माना गया है इसलिए धनु राशि वाले इस रंग के वाहन खरीदें तो उनको लाभ होगा.
मकर राशि- शनि देव की इस राशि वालों के लिए काले, नीले और भूरे रंग के वाहन भाग्यशाली होते है.
कुंभ राशि - कुंभ राशि वालों को काले, नीले या जामुनी रंग के वाहन रखना लाभ देगा.
मीन राशि- इस राशि वालों के लिए पीला, सफेद, और क्रीम रंग का वाहन रखना भाग्यशाली रहेगा.

Vaishakh Amavasya 2026: वैशाख अमावस्या 16 या 17 अप्रैल कब ? स्नान-दान का मुहूर्त, पितृ पूजा किस दिन करें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/07/51ab26167c3ee95cf1fd7a6095972ee81775572984025499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Akshaya, Tritiya, 2026:, अक्षय, तृतीया, पर, वाहन, खरीदने, का, शुभ, मुहूर्त, क्या, है</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Char Dham Yatra 2026: 19 अप्रैल से शुरू होगी चार धाम यात्रा, बद्रीनाथ&#45;केदारनाथ के कपाट कब खुलेंगे जान लें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5914</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5914</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/07/b1f8b7d2869c2c5fbdfa721107be78231775579549686499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Char, Dham, Yatra, 2026:, अप्रैल, से, शुरू, होगी, चार, धाम, यात्रा, बद्रीनाथ-केदारनाथ, के, कपाट, कब, खुलेंगे, जान, लें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>अयोध्या में बढ़ती गर्मी के बीच रामलला की पूजा&#45;सेवा और दिनचर्या में बड़ा बदलाव! जानिए क्या&#45;क्या बदला?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5915</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5915</guid>
<description><![CDATA[ Ayodhya Ram lalla: अयोध्या में बढ़ती गर्मी का प्रभाव अब राम मंदिर की व्यवस्थाओं पर भी साफ तौर पर नजर आने लगा है. तपते तापमान के बीच रामलला की सेवा-पूजा और दैनिक दिनचर्या में कई खास बदलाव किए गए हैं, ताकि उन्हें किसी भी तरह की असुविधा न हो और पूरी विधि-विधान के साथ उनकी देखभाल भी की जा सके.
मंदिर प्रशासन ने मौसम को ध्यान में रखते हुए हर छोटी-बड़ी व्यवस्था को नए सिरे से ढल दिया है.
बढ़ती गर्मी को देखते हुए रामलला की दिनचर्या में बड़ा बदलाव
भीषण गर्मी के इस दौर में रामनगरी अयोध्या में विराजमान रामलला की दिनचर्या पूरी तरह से मौसम के अनुरूप कर दी गई है. जहां पहले उन्हें गुनगुने पानी से स्नान कराया जाता था, वहीं, अब शीतल जल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उन्हें गर्मी से राहत
मिल सके. इसी तरह भोग व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. अब उन्हें भोग में दही, ताजे मौसमी फल, ठंडा पेय, जूस और लस्सी जैसी चीजें शामिल की जा रही हैं, ताकि भगवान को ठंडक पहुंचाई जा सके.
Maa Mundeshwari Temple: बिहार का रहस्यमय मुंडेश्वरी मंदिर, जहां निभाई जाती है बिना खून बहाए बलि की अनोखी परंपरा!
रामलला की पोशाक में भी परिवर्तन
इसके अलावा रामलला के कपड़ों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है. जहां पहले अपेक्षाकृता भारी वस्त्र पहनाए जाते थे, अब उनकी जगह हल्के और सूती कपड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इससे गर्भगृह के तापमान के अनुसार रामलला को आराम मिल सके.
यह परिवर्तन न केवल परंपरा के अनुरूप है, बल्कि मौसम के प्रभाव को संतुलित करने की भी एक कोशिश है.&amp;nbsp;
पूजा पद्धति भी बढ़ती गर्मी के अनुकूल
पूजा पद्धति में भी बढ़ती गर्मी को देखते हुए परिवर्तन किया गया है. अब दीपों की जगह फूलों से आरती की जा रही है, जिससे अतिरिक्त गर्मी पैदा न हो. मंदिर प्रशासन ने बताया कि, रामलला की सेवा एक पांच वर्ष के बालक की तरह की जाती है, इसलिए हर व्यवस्था में खास सावधानी और संवेदनशीलता बरती जाती है.&amp;nbsp;
इसके साथ ही गर्भगृह में कूलर भी लगाए जा चुके हैं और आने वाले दिन एयर कंडीशनर लगाने की भी तैयारी चल रही है. कुल मिलाकर बढ़ती गर्मी के बीच रामलला की सेवा में किसी भी तरह की कमी न आए, इसके लिए हर संभव कोशिश किया जा रहा है, ताकि तपती अयोध्या में भी उन्हें दिक्कत न आए.&amp;nbsp;
Neem Karoli Baba: 53 साल से सुरक्षित है नीम करोली बाबा का अस्थि कलश, सामने आया आध्यात्मिक रहस्य
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/08/99bf2eb42e02916df7cd8f1a4ad5482f17756156880831092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>अयोध्या, में, बढ़ती, गर्मी, के, बीच, रामलला, की, पूजा-सेवा, और, दिनचर्या, में, बड़ा, बदलाव, जानिए, क्या-क्या, बदला</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Khatu Shayam: खाटूश्याम मंदिर की 13 सीढ़ियों का रहस्य! क्या यहीं से होता है बाबा से सीधा संपर्क?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5913</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5913</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/08/9f8268c93c5625543e36a9897db1531d17756183436981092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 12:59:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Khatu, Shayam:, खाटूश्याम, मंदिर, की, सीढ़ियों, का, रहस्य, क्या, यहीं, से, होता, है, बाबा, से, सीधा, संपर्क</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Panchang 4 April 2026: आज शनि देव की पूजा में सर्वार्थ सिद्धि का दुर्लभ संयोग, जानें आज का शुभ चौघड़िया और राहुकाल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5886</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5886</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 4 अप्रैल 2026: 4 अप्रैल 2026 को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि और शनिवार है. शनिवार के दिन व्रत रखना, काले तिल और सरसों के तेल का दान करना, गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करना, तथा पीपल के वृक्ष की पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. शनि देव की कृपा से जीवन के कष्ट कम होने लगते हैं.&amp;nbsp;
आज का दिन क्यों खास
आज शनिवार शनि देव की पूजा के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बना है. सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए धार्मिक या मांगलिक कार्य सिद्ध होते हैं. इसके साथ शनिवार होने से शनि देव का आशीर्वाद भी साधक को प्राप्त होगा.&amp;nbsp;
4 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 4 April 2026)



तिथि

द्वितीया (3 अप्रैल 2026, सुबह 8.42 - 4 अप्रैल 2026, सुबह 10.08)



वार
शनिवार


नक्षत्र
स्वाती


योग
हर्षण


सूर्योदय 
सुबह 6.10


सूर्यास्त
शाम 6.39


चंद्रोदय
रात 9.01


चंद्रोस्त
सुबह 6.58


चंद्र राशि
तुला




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.09 - सुबह 10.51


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 9.32 - रात 10.58




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुहह 9.16 - सुबह 10.50


यमगण्ड काल
दोपहर 1.58 - दोपहर 3.32


गुलिक काल
सुबह 6.08 - सुबह 7.43


आडल योग
सुबह 6.08 - रात 9.35


विडाल योग
रात 9.35 - सुबह 6.07, 5 अप्रैल


भद्रा काल
रात 11.01 - सुबह 6.07, 5 अप्रैल




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 4 April 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
तुला


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



4 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष: दूसरों की मदद में अपना काम प्रभावित हो सकता है, सतर्क रहें और तनाव से बचें.
वृषभ: सुखद दिन रहेगा, परिवार में खुशी और आर्थिक संतुलन बना रहेगा.
मिथुन: उन्नति के अवसर मिलेंगे, लेकिन काम का दबाव और सावधानी जरूरी है.
कर्क: अचानक धन लाभ और मान-सम्मान बढ़ेगा, सेहत का ध्यान रखें.
सिंह: सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी, लेकिन निवेश में सावधानी रखें.
कन्या: रचनात्मक सफलता मिलेगी, पर रिश्तों में संयम जरूरी है.
तुला: आय के नए स्रोत मिलेंगे और रुके काम पूरे होंगे.
वृश्चिक: आर्थिक लाभ और कर्ज से राहत मिलेगी, रिश्ते मजबूत होंगे.
धनु: कानूनी मामलों में सफलता, लेकिन शत्रुओं और विवाद से सावधान रहें.
मकर: काम में सफलता और शुभ समाचार मिलेगा, खर्चों पर नियंत्रण रखें.
कुंभ: व्यस्तता और पारिवारिक चिंता रहेगी, प्रॉपर्टी में लाभ संभव है.
मीन: व्यापार में सफलता और मानसिक शांति का अनुभव होगा.

आज का उपाय&amp;nbsp;
शनि देव को प्रसन्न करना है तो किसी मजदूर की मदद करें, गरीब की जितनी हो सके सहायता करें. इससे साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
शनिवार का शुभ रंग काला और नीला माना जाता है. शिवलिंग पर शंखपुष्पी के फूल चढ़ाएं. काली चीजों का दान करें.
Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया 19 या 20 अप्रैल किस दिन है, सोना, वाहन, घर खरीदारी का श्रेष्ठ मुहूर्त कब



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/02/e69d73e557014138480036cbe8463ee61775134376925499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 11:52:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, आज, शनि, देव, की, पूजा, में, सर्वार्थ, सिद्धि, का, दुर्लभ, संयोग, जानें, आज, का, शुभ, चौघड़िया, और, राहुकाल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Good Friday 2026: प्रार्थना, जुलूस, श्रद्धांजलि, ईसा मसीह की याद में दुनियाभर में कैसे मनाया जाता है गुड फ्राइडे</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5887</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5887</guid>
<description><![CDATA[ Good Friday 2026: ईसाई धर्म के लिए गुड फ्राइडे का दिन बहुत ही पवित्र और भावनात्मक माना जाता है. इसका कारण यह ह कि इसी दिन यीशु मसीह को सूली (क्रूस) पर चढ़ाया गया था. इसले हर साल इस घटना की याद में गुड फ्राइडे मनाया जाता है.
लेकिन दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में गुड फ्राइडे के दिन को लोग अलग तरीके से मनाते हैं. ईसाई समुदाय के लोग इस विशेष दिन पर प्रार्थना, उपवास और श्रद्धांजलि के साथ मनाते हैं. चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं होती हैं और कई जगहों पर जुलूस भी निकाला जाता है.
गुड फ्राइडे शोक का दिन होता है. इसलिए इस दिन अधिकांश चर्चों में सुबह से ही विशेष प्रार्थना सभाओं की शुरुआत हो जाती हैं. लोग चर्च पहुंचकर यीशु मसीह के बलिदान को याद करते हैं और शांति व मानवता के लिए प्रार्थना करते हैं. कई जगहों पर इस दिन लोग उपवास भी रखते हैं और सादगी के साथ दिन बिताते हैं.
दुनियाभर में कैसे मनाया जाता है गुड फ्राइडे
दुनिया के कई देशों में गुड फ्राइडे पर धार्मिक जुलूस निकालने की परंपरा भी है. जुलूस के माध्यम से ईसा मसीह के बलिदान को याद किया जाता है. इसी तरह का जुलूस इस साल भी स्पेन में निकाला गया, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर छाई हुई है. जुलूस में ईसा मसीह की अंतिम यात्रा और सूली पर चढ़ाए जाने की घटनाओं को प्रतीकात्मक रूप से दिखाया जाता है. श्रद्धालु क्रॉस लेकर सड़कों पर चलते हैं और प्रभु यीशु के त्याग और प्रेम को याद करते हैं.

SPAIN 🇪🇸 Simply incredible scenes tonight as millions attend processions for Holy Thursday This one in Malaga is one of the most STUNNING pic.twitter.com/lG8R7IgzKL
&amp;mdash; Catholic Arena (@CatholicArena) April 2, 2026



यूरोप, अमेरिका, फिलीपींस, स्पेन और इटली जैसे देशों में गुड फ्राइडे के मौके पर विशेष आयोजन होते हैं. स्पेन में पारंपरिक जुलूस और धार्मिक कार्यक्रमों का विशेष महत्व होता है, जबकि फिलीपींस में कई लोग ईसा मसीह के कष्टों को याद करते हुए कठोर तपस्या और प्रार्थना करते हैं.
भारत में भी गुड फ्राइडे के दिन को बड़े श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है. वहीं भारत के गोवा, केरल, मुंबई, दिल्ली और पूर्वोत्तर राज्यों के चर्चों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित होती हैं. यह अवकाश का दिन होता है, जब श्रद्धालु चर्चों में जाकर मोमबत्तियां जलाते हैं और यीशु मसीह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं.
धार्मिक मान्यता के अनुसार गुड फ्राइडे त्याग, प्रेम और मानवता का संदेश देता है. यह दिन लोगों को यह याद दिलाता है कि ईसा मसीह ने मानवता की भलाई के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया था.
ये भी पढ़ें: Good Friday 2026: गुड फ्राइडे पर अपनाएं यीशु के सुविचार और करीबियों को भी भेजेंDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/03/949b9e431f8036676803f143e06b72441775225357749466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 11:52:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Good, Friday, 2026:, प्रार्थना, जुलूस, श्रद्धांजलि, ईसा, मसीह, की, याद, में, दुनियाभर, में, कैसे, मनाया, जाता, है, गुड, फ्राइडे</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Karj Mukti Upay 2026: बार&#45;बार बढ़ रहा है कर्ज? मंगलवार&#45;शनिवार के ये उपाय दे सकते हैं राहत!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5885</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5885</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/04/b692a26f6a32806b08e876dfcc4b169017752753147991092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 11:52:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Karj, Mukti, Upay, 2026:, बार-बार, बढ़, रहा, है, कर्ज, मंगलवार-शनिवार, के, ये, उपाय, दे, सकते, हैं, राहत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>एंटीक्राइस्ट एक इंसान या पूरी सोच? बाइबिल का चौंकाने वाला सच?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5859</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5859</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/03/5b3f9bf95d1a79ee58c487a1db6434c117751928481931092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>एंटीक्राइस्ट, एक, इंसान, या, पूरी, सोच, बाइबिल, का, चौंकाने, वाला, सच</media:keywords>
</item>

<item>
<title>सलमान खान ने भीड़ में खुद को बुरी नजर से बचाने के लिए क्या किया? वायरल वीडियो में दिखा चौंकाने वाला राज!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5857</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5857</guid>
<description><![CDATA[ बॉलीवुड के रोबिन हुड यानी सबके भाईजान सलमान खान आज भी फैंस के दिल में राज करते हैं. उनका फैंडम आज भी उतना ही तगड़ा है, जितना की 90s के दशक में थी.
लेकिन बीते सालों से मिल रही लगातार धमकियों के कारण से सलमान पब्लिकली आने से बचते हैं. अगर आते भी हैं, तो तगड़ी सिक्योरिटी और प्रोटेक्शन के साथ दिखते हैं. भीड़ के बीच सलमान खान बुरी नजर से खुद को बचाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं.&amp;nbsp;
सलमान का वीडियो हुआ वायरल?
सोशल मीडिया पर दंबग खान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इसमें वो खुद को बुरी नजर से बचाते हुए दिख रहे हैं. सलमान ने आखिर ऐसा क्यों किया?
दरअसल 31 मार्च को सलमान एक इवेंट में शामिल हुए थे. प्रेसिडेंट कप 2026 की ग्रेंड ओपनिंग सेरेमनी उन्होंने अटेंड की थी. इवेंट में उनके साथ महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे भी दिखाई दिए थे.
सलमान खान को देखने के लिए वहां दर्शकों की भारी भीड़ पहुंची थी. इस दौरान सलमान खान और एकनाथ शिंदे ने स्पोर्ट्स टूर्नामेंट का आगाज किया साथ ही 1 करोड़ की प्राइज मनी का भी ऐलान किया. सलमान खान को इवेंट में देख फैंस बेकाबू हो गए थे.&amp;nbsp;



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Instant Bollywood (@instantbollywood)





सलमान खान के हाथों में कौन- सी रिंग?
इस इवेंट का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपनी पॉकेट से एक रिंग निकालकर पहनते हैं. सलमान रिंग को पॉकेट से निकालकर चुपके से मिडिल फिंगर में पहन लेते हैं. अब लोगों के बीच इस बात की उत्सुकता बनी हुई है कि, आखिर उन्होंने कौन-सी रिंग अपनी उंगलियों में पहनीं थी.&amp;nbsp;
बता दें कि, इवेंट के दौरान सलमान खान ने अपनी उंगलियों में नीलम (Blue Sapphire) रत्न पहनते हैं, जो सुरक्षा और सफलता से जुड़ी मानी जाती है. इसके अलावा सलमान अपने हाथों में फिरोजा रत्न का ब्रेसलेट भी पहनते हैं, जो उनके पिता सलीम खान ने उन्हें गिफ्ट किया था.&amp;nbsp;
नीलम रत्न किसे पहनना चाहिए?
यह एक बात समझनी सबसे जरूरी है कि, नीलम रत्न हर किसी को नहीं पहनना चाहिए.

जिनकी कुंडली में शनि मजबूत और शुभ स्थिति में हो.
जिनकी राशि मकर (Capricorn) या कुंभ (Aquarius) हो
जो लोग करियर में स्थिरता और तेज ग्रोथ चाहते हैं.&amp;nbsp;

नीलम के फायदे

नीलम पहनने से व्यक्ति को करियर में अचानक ग्रोथ मिल सकती है.
आर्थिक स्थिरता आती है.
नकारात्मक ऊर्जा और दुर्घटना से राहत मिलती है.
मानसिक संतुलन में सुधार देखने को मिलता है.

नीलम के नुकसान (गलत व्यक्ति के लिए)
अब असल बात समझो, बिना कुंडली दिखाए जो लोग नीलम पहनते हैं उन्हें कुछ नुकसान का सामना भी करना पड़ सकता है.

अचानक आर्थिक नुकसान
मानसिक तनाव और बेचैनी
रिश्तों में तनाव
स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं
काम में रुकावट और बदनसीबी
कई मामलों में नीलम पहनते ही 24-28 घंटे में इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है, अच्छा भी और बुरा भी.

पिता सलीम खान ने गिफ्ट किया ब्रेसलेट
सलमान की रिंग पर यूजर्स के अलग-अलग रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं. &amp;nbsp;एक यूजर्स ने कहा कि, सलमान ने नीलम का पत्थर पहना है, जो कि शनि से जुड़ा है. ये करियर में ग्रोथ, वित्तीय स्थिरता के लिए धारण किया जाता है. ये पत्थर नेगेटिव एनर्जी, एक्सीडेंट और घटनाओं से बचाता है. इसके साथ ही इमोशनली आपको स्टेबल रखता है.
हर कोई जानते हैं बीते कई सालों से सलमान के सितारे अच्छे नहीं चल रहे हैं. उन्हें पर्सनली और प्रोफेशनली कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई काफी समय से उन्हें मारने की धमकी दे रहा है. वहीं एक्टर की बैक टू बैक फिल्में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है. बीते दिन उनके पिता सलीम खान की तबीयत भी अचानक बिगड़ गई थीं, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
अक्षय कुमार से हुई महाकाल मंदिर में चूक! नंदी के कान में मनोकामना कहते समय हुई ये गलती!
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/03/a53d9734cd8cc8fc27869073e0b3b1ba17752084741891092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>सलमान, खान, ने, भीड़, में, खुद, को, बुरी, नजर, से, बचाने, के, लिए, क्या, किया, वायरल, वीडियो, में, दिखा, चौंकाने, वाला, राज</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hanuman: हनुमान जन्म का बड़ा रहस्य, कहीं चैत्र तो कहीं कार्तिक, आखिर कौन सी तिथि सही?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5858</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5858</guid>
<description><![CDATA[ Hanuman Janmotsav: रामभक्त भगवान हनुमान का जन्मोत्सव या हनुमान जयंती भारत के सबसे प्रमुख धार्मिक त्योहारों में एक है. इस वर्ष गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को धूमधाम और आस्था के साथ हनुमान जी की जयंती मनाई गई. हनुमान जयंती पर श्रद्धालुओं ने व्रत रखा, पूजा-पाठ किए, हनुमान मंदिरों में पूजा-अर्चना और हनुमान चालीसा का पाठ किया और भक्तों ने संकटमोचन हनुमान से सुख-समृद्धि की कामना की.
आमतौर पर जयंती या जन्मोत्सव जैसे पर्व साल में एक बार होते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि, देश के अलग-अलग हिस्सों में हनुमान जयंती की तिथियां भी अलग-अलग मानी जाती हैं. हनुमान जयंती भी साल मे दो से तीन बार मनाई जाती है. कहीं इसे चैत्र पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है तो कहीं कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर तो कहीं मार्गशीर्ष महीने में. इसलिए लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि, आखिर हनुमान जयंती की सही तिथि कौन-सी है? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है तो ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास आपकी इस कंफ्यूजन को दूर करेंगे.
अलग-अलग तिथियों में क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती
हनुमान जयंती अलग-अलग तिथियों में मनाए जाने का सबसे अहम कारण हनुमान से जुड़ी पौराणिक कथाएं. एक कथा के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जी को दूसरा जीवन मिला था. जब बाल्यावस्था में अत्यंत भूख के कारण सूर्य को फल समझकर निगलने वाले थे, तभी इंद्र ने अपने वज्र से उनपर प्रहार कर दिया था और हनुमान मूर्छित हो गए थे. तब वायुदेव और सभी देवताओं ने हनुमान को दूसरा जीवन प्रदान किया और अपनी शक्तियां भी दीं. इसलिए इस दिन चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती मनाई जाती है.
वहीं कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भी हनुमान जयंती मनाई जाती है. धार्मिक व पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी तिथि पर माता अंजनी के गर्भ से हनुमान जी का जन्म हुआ था. इसलिए इस तिथि को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है. इसके अलावा एक मान्यता यह भी है कि, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर माता सीता और भगवान राम ने हनुमान को चिरंजीवी होने का वरदान दिया था. इसलिए भी कार्तिक में हनुमान जयंती मनाई जाती है.
उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती
उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली में हनुमान जयंती चैत्र पूर्णिमा पर मनाई जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान शिव के अंशावतार और माता अंजनी के पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था. इस दिन मंदिरों में सुंदरकांड का पाठ, हनुमान चालीसा का पाठ और विशेष पूजन किया जाता है. कई जगहों पर भंडारे का आयोजन होता है और शोभायात्राएं भी निकाली जाती हैं.
दक्षिण भारत में अलग-अलग तिथियों पर उत्सव
दक्षिण भारत के कई राज्यों में हनुमान जयंती की तिथि अलग मानी जाती है. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इसे मार्गशीर्ष या पौष मास में मनाने की परंपरा है. तमिलनाडु में हनुमान जन्मोत्सव (हनुमथ जयंती) मार्गशीर्ष अमावस्या के आसपास मनाया जाता है. वहीं कुछ क्षेत्रों में कार्तिक महीने में हनुमान जयंती मनाने की परंपरा है.
ये भी पढ़ें: Hanuman Jayanti Vrat Katha: हनुमान जयंती पर पढ़ें ये पावन कथा, जानें कैसे शिव के अंशावतार में जन्मे बजरंगबलीDisclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/03/a6f5c50947430bb49e057e944cdd015d1775198049724466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hanuman:, हनुमान, जन्म, का, बड़ा, रहस्य, कहीं, चैत्र, तो, कहीं, कार्तिक, आखिर, कौन, सी, तिथि, सही</media:keywords>
</item>

<item>
<title>हनुमान जयंती पर अनोखा भंडार, वानर सेना ने पेट भरकर खाई मिठाईयां, Video Viral</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5856</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5856</guid>
<description><![CDATA[ Viral Video: गुरुवार को देशभर में धूमधाम और श्रद्धापूर्वक हनुमान जयंती मनाई गई. भगवान हनुमान के जन्मोत्सव पर पूजा-व्रत के साथ ही मंदिरों, धार्मिक स्थलों या विशेष स्थानों पर भंडारे का भी आयोजन किया जात है. लेकिन हनुमान जयंती पर भंडारे का एक अनोखा वीडियो सामने आया है, जिसकी जमकर तारीफ हो रही है.
हनुमान जयंती के इस वायरल वीडियो में आस्था और सेवा का एक अनोखा संगम देखा गया. जानकारी के मुताबिक, यह वीडियो महाराष्ट्र के अकोला जिले के बार्शीटाकली तालुका का है. वीडियो के अनुसार हनुमान जयंती पर &amp;lsquo;वानर सेना&amp;rsquo; के लिए विशेष भंडारे का आयोजन किया गया. भंडारे में वानरों को मिठाईयां भी परोई गई, जहां सैकड़ों लंगूरों को अनुशासन के साथ भोजन कराया गया.
हनुमान जयंती पर वानर सेना के लिए भंडारा
दरअसल, महाराष्ट्र के अकोला जिले के बार्शीटाकली तालुका में हनुमान जयंती पर वानर सेना के लिए भंडारा कराने की परंपरा है. यह भंडारा विशेषकर वानर सेना के लिए ही रखा गया. वीडियो में देखा जा सकता है कि, हनुमान जी के भक्त वानर अपने प्रभु के जन्मोत्सव का आनंद ले रहे हैं और मिठाईयां खा सकते हैं.
खास बात यह कि, वानर भी बिना किसी अफरा-तफरी के शांतिपूर्वक भोजन करते दिखाई दे रहे हैं. सभी पंक्ति में बैठकर आराम से थाली में परोसा गया भोजन खाते नजर आ रहे हैं. कई लोगों ने इस पूरे दृश्य को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया. इंटरनेट पर यह वीडियो इस समय काफी चर्चा में है. साथ ही सोशल मीडिया पर इसकी जमकर तारीफ भी हो रही है. कई यूजर्स इसे प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं. तो वहीं कुछ लोगों का कहना है कि हनुमान जयंती जैसे पावन पर्व पर इस तरह का आयोजन समाज में दया, सेवा और सह-अस्तित्व का संदेश देता है.

महाराष्ट्र के अकोला जिले के बार्शीटाकळी तालुका में हनुमान जयंती के अवसर पर &#039;वानर सेना&#039; के लिए रखा गया भंडारा, परोसी गईं मिठाइयां! #HanumanJayanti #MaharashtraNews #ABPNews pic.twitter.com/Hg7t2rgSxh
&amp;mdash; ABP News (@ABPNews) April 2, 2026



धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी का जन्म अंजना माता (जिन्हें एक श्राप के कारण वानर रूप मिला था) और केसरी के घर हुआ, जिन्हें शिवजी का वरदान प्राप्त था. भगवान हनुमान का जन्म शिव के 11वें रुद्रावतार में हुआ. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वानर, नर और वानर के बीच की एक विलक्षण प्रजाति थी जो वन में रहती थी. हनुमान जी को वानरों का राजा और रक्षक माना जाता है. इसलिए हनुमान जी के जन्मोत्सव पर वानरों को भोजन कराना या किसी भी तरह से उनकी सेवा करना बहुत शुभ माना जाता है.
इसी भावना के साथ महाराष्ट्र के अकोला में भी परंपरा को निभाते हए हनुमान जयंती पर वानरों के लिए लंगर का आयोजन किया गया, जिससे हनुमान जी की कृपा बनी रहे और समाज में सेवा व करुणा का संदेश भी पहुंचे. हनुमान जयंती के दिन व्रत, पूजा-पाठ, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ-साथ जरूरतमंदों और जीव-जंतुओं को भोजन कराने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.
ये भी पढ़ें: Hanuman: हनुमान जन्म का बड़ा रहस्य, कहीं चैत्र तो कहीं कार्तिक, आखिर कौन सी तिथि सही?Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/03/00138fd8de911a1828244026e6f5bc331775205881357466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>हनुमान, जयंती, पर, अनोखा, भंडार, वानर, सेना, ने, पेट, भरकर, खाई, मिठाईयां, Video, Viral</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी पर ये 5 गलतियां की तो पूजा हो सकती निष्फल? जानें बचने के उपाय!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5855</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5855</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/03/779c9d40cae4ce2679c05d61bd8eb11b17752074583781092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 15:25:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Sankashti, Chaturthi, 2026:, संकष्टी, चतुर्थी, पर, ये, गलतियां, की, तो, पूजा, हो, सकती, निष्फल, जानें, बचने, के, उपाय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Chaitra Purnima 2026: चैत्र पूर्णिमा स्नान&#45;दान 2 अप्रैल को और व्रत&#45;पूजन आज, जानें चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5828</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5828</guid>
<description><![CDATA[ Chaitra Purnima Moon Time 2026: हिंदू कैलेंडर की पहली पूर्णिमा होने के कारण चैत्र पूर्णिमा का महत्व काफी बढ़ जाता है. इस दिन व्रत, स्नान-दान और चंद्रमा पूजन का विशेष महत्व है. मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ से शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी है. इसका कारण यह है कि पंचांग (Panchang 1 april) में 1 और 2 अप्रैल दोनों दिन पूर्णिमा तिथि मानी जा रही है. चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. लेकिन उदयातिथि के अनुसार, 2 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा का स्नान-दान (Purnima Snan Daan) किया जाएगा. वहीं चंद्रमा पूजन के लिए 1 अप्रैल की तिथि शुभ रहेगी.
&amp;nbsp;आज करें व्रत और चंद्रमा पूजन
पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल 2026 सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू हो चुकी है. इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत-पूजन आज यानी 1 अप्रैल को किए जा रहे हैं. पूर्णिमा तिथि पर चंद्रमा पूजन का विशेष महत्व बताया गया है. पर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करने से चंद्र दोष दूर होता है. चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूर्णिमा व्रत का समापन होता है.
स्नान-दान की पूर्णिमा 2 अप्रैल को
उदयातिथि के आधार पर 2 अप्रैल 2026 को स्नान-दान करना अधिक शुभ माना जा रहा है. क्योंकि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है.&amp;nbsp;स्नान-दान के लिए 2 अप्रैल सुबह 4:38 से सुबह 5:24 तक का समय शुभ रहेगा. इस समय में स्नान न कर पाएं तो सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक जरूर कर लें.
चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय
पंचांग के अनुसार 1 अप्रैल को चंद्रदोय (Moon Rise) का समय शाम 06:06 बजे रहेगा. हालांकि अलग-अलग शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण चंद्रमा के उदय के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है. चंद्रमा के उदित होने पर&amp;nbsp;चांदी के लोटे से चंद्रमा को दूध और जल मिलाकर अर्घ्य दें. साथ ही चंद्रदेव के मंत्रों का जप करें.
चैत्र पूर्णिमा का महत्व

चैत्र पूर्णिमा हिंदू धर्म की पवित्र तिथियों में एक. चैत्र माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को चैती पूनम के नाम से भी जाना जाता है. इस पवित्र दिन पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. भक्त व्रत रखते है और भगवान सत्यनारायण की पूजा की जाती है
मान्यता है कि, पूर्णिमा की रात चंद्रमा की दिव्य किरणें पृथ्वी पर पड़ती है. इसलिए चंद्र देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लोग आज चंद्र देव का पूजन करते हैं और चांदनी में बैठते हैं.
पूर्णिमा तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान, दान, विष्णु मंत्र का जाप, चंद्र देव की पूजा और सत्यनारायण कथा का पाठ करने करना भी शुभ होता है.

ये भी पढ़ें: Chaitra Purnima 2026 Date: हिंदू कैलेंडर की पहली पूर्णिमा पर महाभ्रम! 1 या 2 अप्रैल चैत्र पू्र्णिमा कब

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/01/d847eb3bcaeb28a936e65c563b3a3d811775031834838466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Chaitra, Purnima, 2026:, चैत्र, पूर्णिमा, स्नान-दान, अप्रैल, को, और, व्रत-पूजन, आज, जानें, चंद्रमा, को, अर्घ्य, देने, का, समय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hanuman Jayanti Daan: हनुमान जयंती पर सिंह राशि गुड़ दान करें, जानें राशि अनुसार दान, प्रसन्न होंगे हनुमान!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5829</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5829</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/01/fc5a09961a3f089c7fa157c4ae4041c71775026090587499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hanuman, Jayanti, Daan:, हनुमान, जयंती, पर, सिंह, राशि, गुड़, दान, करें, जानें, राशि, अनुसार, दान, प्रसन्न, होंगे, हनुमान</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया 19 या 20 अप्रैल किस दिन है, सोना, वाहन, घर खरीदारी का श्रेष्ठ मुहूर्त कब</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5826</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5826</guid>
<description><![CDATA[ Akshaya Tritiya 2026:&amp;nbsp;हिंदू कैलेंडर में कुछ तिथियां ऐसी होती है जो समस्त कार्यों के लिए शुभ मानी जाती है, जैसे कि अक्षय तृतीया यानी कि आखा तीज. अक्षय तृतीया के दिन अबूझ मुहूर्त रहता है यानी कि इस दिन बिना मुहूर्त देखे सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नए बिजनेस की शुरुआत, धार्मिक अनुष्ठान,वाहन-सोना या शुभ चीजों की खरीदारी की जा सकती है.
इस साल अक्षय तृतीया 19 या 20 अप्रैल किस दिन है, सोना खरीदने के लिए शुभ मुहूर्त कब बन रहा है पंचांग अनुसार जानें.
अक्षय तृतीया 19 या 20 अप्रैल कब
वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10.29 पर शुरू होगी और अगले दिन 20 अप्रैल 2026 को सुबह 7.27 पर समाप्त होगी.
उदयातिथि के अनुसार अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी. इस दिन सोना खरीदने के लिए लोगों को 19 घंटे का समय मिलेगा.
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का समय - 19 अप्रैल 2026, सुबह 10.49 से 20 अप्रैल 2026, सुबह 5.51 तक
सोना खरीदने के अलावा ये मुहूर्त सभी मांगिलक कार्य, नए व्यापार के आरंभ के लिए भी शुभ है.
अक्षय तृतीया का शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - सुबह 10:49 - दोपहर 12:20
अपराह्न मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 01:58 - दोपहर 03:35
सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - शाम 06:49 - रात 10:57

अक्षय फल देने वाला दिन
अक्षय का शाब्दिक अर्थ होता है, जिसका कभी क्षय न हो अर्थात अनन्त. इस दिन किया हुआ जप, यज्ञ, पितृ-तर्पण, दान-पुण्य एवं वेद-स्वाध्याय, पूजा आदि कर्मों से मिले पुण्य का कभी अंत नहीं होता. यही वजह है कि स्थाई रूप से सुख-समृद्धि और धन पाने के लिए अक्षय तृतीया पर सोना, आभुषण, वाहन, घर, गैजेट्स की खरीदी की जाती है. साथ ही मांगलिक कार्य होते हैं.
अक्षय तृतीया पर कौन से काम करना चाहिए

इस दिन का अधिकाधिक लाभ प्राप्त करने के लिए लोग सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी, सरोवर या धार्मिक स्थल पर स्नान करते हैं.
अक्षय तृतीया के दिन सम्पूर्ण सृष्टि के पालनहार की खास पूजा की जाती है क्योंकि इसी दिन उन्होंने परशुराम अवतार लिया था.
अक्षय तृतीया के शुभः दिवस पर हिन्दु परिवार अपने पूर्वजों की प्रसन्नता के लिए जल और तिल के तर्पण करते हैं.
अक्षय तृतीया के महत्वपूर्ण अवसर पर हवन करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा इस दिन लोग विशेषतः यव (जौ के दाने) एवं अक्षत (बिना टूटे चावल) से हवन करते हैं.
इस दिन खरीदारी, शुभ कार्य की शुरुआत से मां लक्ष्मी अति प्रसन्न होती हैं.

Parshuram Jayanti 2026: परशुराम जंयती कब ? जानें डेट, मुहूर्त, सिर्फ ये 2 लोग ही कर सकते हैं इनकी पूजा

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/01/b5b514b7496e934da3977ccc314a95a81775030861644499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Akshaya, Tritiya, 2026:, अक्षय, तृतीया, या, अप्रैल, किस, दिन, है, सोना, वाहन, घर, खरीदारी, का, श्रेष्ठ, मुहूर्त, कब</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Pink Moon 2026: चैत्र पूर्णिमा पर आसमान में बिखरेगी गुलाबी चांद की छटा ! पिंक मून को देखने की तारीख और समय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5827</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5827</guid>
<description><![CDATA[ Pink Moon 2026 April Chaitra Purnima Full Moon:&amp;nbsp;हर महीने पूर्णिमा तिथि पड़ती है, जिसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है और इसका विशेष महत्व होता है. अप्रैल महीने में पड़ने वाली चैत्र पूर्णिमा (Chaitra Purnima Full Moon) को पिंक मून (Pink Moon) कहा जाता है. इस पूर्णिमा का चांद अधिक चमकदार होता है. लेकिन पिंक मून नाम के पीछे क्या रहस्य है, क्या यह चांद गुलाबी रंग का दिखेगा? आइए जानते हैं पिंक मून का रहस्य और दृश्यता का समय.
1 या 2 अप्रैल कब दिखेगा पिंक मून (Pink Moon 2026)
पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने की पूर्णिमा 1 और 2 अप्रैल दोनों तिथि पर पड़ रही है. चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल सुबह 07:06 से लेकर अगले दिन यानी 2 अप्रैल सुबह 07:41 तक रहने वाली है. ऐसे में दोनों ही दिन पूर्णिमा रहेगी. अगर पिंक मून की बात करें तो, वैसे तो इसे देखने का सबसे अच्छा समय 1 अप्रैल की रात से लेकर 2 अप्रैल की सुबह तक रहेगा. लेकिन आप इसे पूरे हफ्ते देख सकते हैं.
पिंक मून देखने का समय (Pink Moon Time Today)
1 अप्रैल 2026 को पिंक मून का प्रकाश चरम पर होगा. खगोलीय आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल पूर्णिमा का चांद 1 अप्रैल की रात CDT (सेंट्रल डेलाइट टाइम) के अनुसार रात 09:12 से रात 10:12 पर दिखाई देगा. पिंक मून को देखने का सबसे अनुकूल समय सूर्यास्त के बाद का से शुरू होगा. रात के समय आसमान में इसे नंगी आंखों से स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा. इसलिए पूर्ण आकार के चमकीले चांद देखने के लिए अपनी छत या खुली जगह पर जरूर जाएं.
पिंक मून में क्या चांद सच में गुलाबी दिखाई देगा
पिंक मून का चांद आमदिनों की तुलना में अधिक चमकदार या बड़ा प्रतीत हो सकता है, लेकिन यह गुलाबी नहीं दिखता. दरअसल &amp;lsquo;पिंक मून&amp;rsquo; शब्द मूल अमेरी और प्रारंभिक औपनिवेशिक परंपराओं से आया है, जहां पूर्णिमाओं का नाम प्रकृति में होने वाले मौसमी परिवर्तनों के आधार पर रखा जाता था.
अप्रैल के पिंक मून का नाम अमेरिका में पाए जाने वाले एक विशेष जंगली फूल क्रिपिंग फ्लॉक्स (Creeping Phlox) या &#039;मॉस पिंक&#039; के नाम के आधार रखा गया, न कि चंद्रमा के रंग के आधार पर. यह फूल अप्रैल के महीने में खिलता है, इसलिए इस समय दिखने वाली पूर्णिमा के चांद को लोग &#039;पिंक मून&#039; कहने लगे.
पिंक मून का महत्व
अप्रैल की पूर्णिमा में दिखाई देने वाला पिंक मून को जीवन में नई शुरुआत लेकर आता है. पिंक मून विभिन्न संस्कृतियों में पुनर्जन्म और नवीनीकरण के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है, जो वसंत ऋतु के व्यापक विषयों के अनुरूप है. इसलिए यह समय नए लक्ष्य बनाने, नई योजनाएं शुरू करने और कुछ नया करने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है.
बता दें कि, अप्रैल में पिंक मून के बाद मई की पूर्णिमा में फ्लावर मून, जून में स्ट्रॉबेरी मून, जुलाई में बक मून, अगस्त में स्टर्जन मून, सिंतबर में हार्वेस्ट मून, अक्टूबर में हंटर मून, नवंब में बीवर मून और दिसंबर के फुल मून को कोल्ड मून कहा जाता है.
ये भी पढ़ें: Chaitra Purnima 2026 Date: हिंदू कैलेंडर की पहली पूर्णिमा पर महाभ्रम! 1 या 2 अप्रैल चैत्र पू्र्णिमा कब

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/01/54d3390b9a0116f86040f819fb4ae9701775032271203466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Pink, Moon, 2026:, चैत्र, पूर्णिमा, पर, आसमान, में, बिखरेगी, गुलाबी, चांद, की, छटा, पिंक, मून, को, देखने, की, तारीख, और, समय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Panchang 2 April 2026: हनुमान जन्मोत्सव पर ध्रुव योग का अद्भुत संगम, जानें आज का शुभ चौघड़िया और राहुकाल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5825</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5825</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 2 अप्रैल 2026: 2 अप्रैल 2026 को हनुमान जंयती और चैत्र पूर्णिमा दोनों है. आज गुरुवार विष्णु जी का दिन है. सुखी वैवाहिक जीवन, उच्च शिक्षा प्राप्ति और कार्यों में सफलता पाने के लिए गुरुवार को श्रीहरि, राधा-कृष्ण की विशेष पूजा करनी चाहिए.&amp;nbsp;
आज का व्रत
हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा व्रत है. चैत्र पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र जल से स्नान करना चाहिए और विष्णु जी का जल, पंचामृत से अभिषेक करें. हनुमान जन्मोत्सव पर बजरंगबली को चोला चढ़ाएं और घर में सुंदरकांड का पाठ करें. मान्यता है जहां हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ होता है वहां बजरंगबली स्वंय मौजूद रहते हैं भक्तें के कष्ट हर लेते हैं.&amp;nbsp;
2 अप्रैल का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 2 April 2026)



तिथि

पूर्णिमा (1 अप्रैल 2026, सुबह 7.06 - 2 अप्रैल 2026, सुबह 7.41)



वार
गुरुवार


नक्षत्र
हस्त


योग
ध्रुव


सूर्योदय 
सुबह 6.10


सूर्यास्त
शाम 6.39


चंद्रोदय
रात 7.07


चंद्रोस्त
अस्त नहीं


चंद्र राशि
कन्या




चौघड़िया मुहूर्त




सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.10 - सुबह 7.44


लाभ
सुबह 10.51 - दोपहर 1.59


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 5.06 - रात 89.32




राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)




राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 1.59 - दोपहर 3.32


यमगण्ड काल
सुबह 6.10 - सुबह 7.44


गुलिक काल
सुबह 9.18 - सुबह 10.51


विडाल योग
सुबह 6.11 - शाम 4.17


आडल योग
सुबह 6.10 - शाम 5.38




ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 2 April 2026)




सूर्य
मीन


चंद्रमा
कन्या


मंगल
मीन


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
मेष


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



2 अप्रैल 2026 का राशिफल
ये राशिफल पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार है.

मेष: आज धैर्य से काम लें, जल्दबाजी से बचें और पारिवारिक मतभेद बातचीत से सुलझाएं.
वृषभ: भावनाओं पर नियंत्रण रखें और पैसों से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें.
मिथुन: ऊर्जा और आत्मविश्वास के साथ नए अवसरों और संपर्कों का लाभ उठाएं.
कर्क: भावनात्मक संतुलन बनाए रखें, पुराने काम पूरे करने से राहत मिलेगी.
सिंह: आत्मविश्वास से आगे बढ़ें, सफलता और सराहना मिलने के योग हैं.
कन्या: वित्तीय मामलों में सावधानी रखें और काम को समय पर पूरा करें.
तुला: संतुलन और शांति बनाए रखें, बातचीत से समस्याओं का हल मिलेगा.
वृश्चिक: गंभीर सोच के साथ निर्णय लें, पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है.
धनु: उत्साह के साथ नए काम शुरू करें, सफलता के अच्छे संकेत हैं.
मकर: संतुलन बनाकर चलें और पुराने कार्यों को प्राथमिकता दें.
कुंभ: नए विचारों पर काम करें, योजनाएं सफलता की ओर ले जाएंगी.
मीन: नए अवसरों का स्वागत करें, सकारात्मक सोच से दिन बेहतर बनेगा.

आज का उपाय&amp;nbsp;
घर में सत्यनारायण की कथा, शाम को तुलसी के पास घी का दीपक लगाकर श्रीहरि का नाम जपें. मान्यता है इससे मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है. 
आज का लकी कलर&amp;nbsp;
गुरुवार के दिन पीला रंग शुभ माना जाता है. पूजा में विष्णु जी को पीले रंग के फूल अर्पित करें. हनुमान जी को हलवे का भोग लगाएं.&amp;nbsp;
Vikat Sankashti Chaturthi 2026: अप्रैल में विकट संकष्टी चतुर्थी कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, चंद्रोदय समय



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/04/01/bce207ef4aaba2d23d8e8e516d59df6d1775042316211499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 18:05:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Panchang, April, 2026:, हनुमान, जन्मोत्सव, पर, ध्रुव, योग, का, अद्भुत, संगम, जानें, आज, का, शुभ, चौघड़िया, और, राहुकाल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hajj 2026: हज यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू! जानें बुकिंग प्रक्रिया, नियम और ज़रूरी बातें?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5799</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5799</guid>
<description><![CDATA[ Hajj 2026: दुनियाभर के मुसलमानों के लिए मक्का का आध्यात्मिक महत्व काफी ज्यादा है. पैगंबर मुहम्मद की जन्मभूमि और इस्लाम के सबसे महत्वपूर्ण स्थल काबा का स्थान होने की वजह से यह जगह इस्लामी आस्था का केंद्र भी है. हर वर्ष तीर्थयात्री हज और उमराह के लिए यात्रा करते हैं. अब सऊदी अरब में इनके लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं.&amp;nbsp;
हज और उमराह मंत्रालय ने ऐलान की है कि वैध निवास परमिट वाले सऊदी नागरिक और प्रवासी अब तीर्थयात्रा सेवाओं के लिए किंगडम के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल नुसुक प्लेटफॉर्म के जरिए से हज पैकज का चयन और बुकिंग शुरू कर सकते हैं.&amp;nbsp;
नजर लगने से कैसे बचें? इस्लाम में बचाव के आसान तरीके, जानें दुआएं और तारीफ का सही तरीका!
नुसुक प्लेटफॉर्म के जरिए बुकिंग
जिन घरेलू तीर्थयात्रियों ने पहले से अपना विवरण पंजीकृत कराया है, वे अब नुसुक मोबाइल एप्लिकेशन या आधिकारिक बेवसाइट के जरिए उपलब्ध पैकेजों की समीक्षा कर सकते हैं और आसानी से अपनी बुकिंग करा सकते हैं. मंत्रायल के मुताबिक, सभी प्रक्रियाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित की जा रही है.&amp;nbsp;
अब आवेदक बड़ी ही आसानी से अलग-अलग पैकेज के विक्लपों को देख सकते हैं और अपनी पसंदीदा पैकेज को चुन सकते हैं और बुकिंग बिल भी जेनरेट कर सकते हैं.&amp;nbsp;इसके बाद वे सऊदी अरब की SADAD इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली के जरिए से पेमेंट कर सकते हैं.&amp;nbsp;
बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए हज और उमराह मंत्रालय ने भुगतान के सख्त नियमों को लागू किए हैं. तीर्थयात्रियों को बुकिंग इनवॉइस जारी होने के 72 घंटे के अंदर भुगतान करना होगा. यह नियम 14 मई यानी धुल कदा 27 तक लागू रहेंगे.&amp;nbsp;
इस्लाम में हज का महत्व?
इस्लाम धर्म के 5 स्तंभों में से एक हज भी है और इसे सभी सक्षम मुसलमानों के लिए जीवन में एक बार किया जाने वाला जरूरी कर्तव्य बताया गया है. सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में हर साल आयोजित होने वाले हज एक गहन आध्यात्मिक यात्रा है, जिसमें दुनियाभर के लाखों मुसलमान तीर्थयात्री शामिल होते हैं.&amp;nbsp;
इस तीर्थयात्रा में 5 दिनों तक चलने वाले कई पवित्र अनुष्ठान शामिल हैं, जिनमें तवाफ (काबा की परिक्रमा), सई (सफा और मरवा पहाड़ियों के बीच चलना) और अराफात पर्वत पर प्रार्थना करना शामिल हैं.&amp;nbsp;
शारीरिक रूप से तीर्थयात्रा काफी कठिन होती है, जिसमें तीर्थयात्री रोजाना 25 किलोमीटर तक पैदल चलते हैं. इस वजह से 65 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए खास नियम लागू होते हैं. उनके साथ एक स्वस्थ्य साथी होना बेहद जरूरी है, जिसकी उम्र 18 से 60 साल के बीच होनी चाहिए.
झारखंडी बाबा कौन हैं? क्यों हो रहे इतना Viral, ये video देख हंसी भी आएगी और सोच में पड़ जाएंगे
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/03/07/1b8cf93730d7fce04352eca72a79e1d517728705724021092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hajj, 2026:, हज, यात्रा, के, लिए, रजिस्ट्रेशन, शुरू, जानें, बुकिंग, प्रक्रिया, नियम, और, ज़रूरी, बातें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026: प्रेग्नेंट महिलाएं रोजा रखें या नहीं? इस्लाम में क्या है हुक्म</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5796</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5796</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/03/06/45b67b88b9f05f68b1ebd781fad741f91772770848631466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026:, प्रेग्नेंट, महिलाएं, रोजा, रखें, या, नहीं, इस्लाम, में, क्या, है, हुक्म</media:keywords>
</item>

<item>
<title>काशी विश्वनाथ मंदिर में महिला दिवस पर विशेष दर्शन, मिलेगा फ्री प्रवेश!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5797</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5797</guid>
<description><![CDATA[ Kashi Vishwanath temple: 8 मार्च महिला दिवस के मौके पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में महिलाओं को विशेष दर्शन करने का मौका मिलेगा, क्योंकि मंदिर प्रशासन ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर विशेष दर्शन की व्यवस्था की घोषणा की है.
श्री काशी विश्वनाथ विशेष क्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा जारी किए गए ऑफिशियल आदेश में महिला श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के गेट नंबर 4बी से फ्री में एंट्री दी जाएगी.&amp;nbsp;
Women&#039;s Day 2026: हर नारी में बसती हैं ये 3 देवियां, पहचानिए अपना दिव्य रूप
इस व्यवस्था के पीछे का उद्देश्य भगवान विश्वनाथ के पूजनीय मंदिर में दर्शन के लिए आने वाली महिलाओं के लिए सुगम और सुविधाजनक दर्शन सुनिश्चित करना है. इस खास सुविधा के तहत वाराणसी की निवासी हों या देश के अन्य हिस्सों से आने वाली सभी महिलाओं को बिना किसी टिकट या शुल्क मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति होगी.
यह पहल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के खास मौके पर उनका सम्मान करने और दिव्य नारी शक्ति के महत्व को मान्यता प्रदान करने के लिए शुरू की गई है.&amp;nbsp;
बच्चों वाली माताओं को दी जाएगी प्राथमिकता
महिला दिवस के मौके पर उन महिला को दर्शन के लिए प्राथमिकता दी जाएगी, जिनकी गोद में छोटे-से बच्चे हैं. &amp;nbsp;छोटे बच्चे चाहे वो लड़के हों या लड़कियां के साथ आने वाली माताओं को प्राथमिकता के आधार पर एंट्री दी जाएगी.&amp;nbsp;
स्थानीय ट्रेनों का समय फिलहाल वही रहेगा
काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित दर्शन का समय पहले की तरह ही रहने वाला है. सुबह 4 बजे से 5 बजे और शाम 4 बजे से 5 बजे तक का समय केवल स्थानीय लोगों के लिए तय किया गया है. जिसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है.&amp;nbsp;
इन समयों के दौरान स्थानीय लोगों के लिए जो खास दर्शन व्यवस्था पहले से लागू है, वही रहने वाली है.&amp;nbsp;
इंटरनेशनल वुमन डे के मौके पर इन आरक्षित समयों के साथ महिला श्रद्धालुओं के लिए खास व्यवस्था की गई है. महिलाएं गेट नंबर 4-बी से प्रवेश पाकर आसानी से दर्शन कर सकेंगी.
यह आदेश मंदिर प्रशासन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्व भूषण द्वारा 6 मार्च, 2026 को जारी किया गया है.
मंदिर प्रशासन ने दी शुभकामनाएं
काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने घोषणा जारी करने के साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर शुभकामनाएं दीं और प्रार्थना की कि भगवान विश्वनाथ का आशीर्वाद और दिव्य नारी शक्ति की कृपा मानवता पर बनी रहे.&amp;nbsp;
न्यूमरोलॉजी के अनुसार, इन तारीखों में जन्मी महिलाएं शादी के बाद पति के घर लाती हैं धन और तरक्की!
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/03/07/c1bd8acca3cf26e5a18d2ce80406431117728764884001092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>काशी, विश्वनाथ, मंदिर, में, महिला, दिवस, पर, विशेष, दर्शन, मिलेगा, फ्री, प्रवेश</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Masik Shivratri 2026: चैत्र मासिक शिवरात्रि मार्च में कब ? इस दिन पंचक भी, नोट करें डेट, मुहूर्त</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5798</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5798</guid>
<description><![CDATA[ Chaitra Masik Shivratri 2026: महाशिवरात्रि के बाद साल 2026 की पहली चैत्र मासिक शिवरात्रि 17 मार्च 2026 को है. यह नियमित रूप से भगवान शिव की कृपा पाने के लिए किया जाने वाला व्रत है, जो हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आता है. मासिक शिवरात्रि, महाशिवरात्रि से थोड़ी अलग होती है, इसकी पूजा विधि में अंतर है. ऐसे में चैत्र मासिक शिवरात्रि पर कैसे करें व्रत, पूजन और क्या है इसके नियम.
चैत्र मासिक शिवरात्रि 2026 मुहूर्त
चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 17 मार्च 2026 को सुबह 9.23 पर शुरू होगी और अगले दिन 18 मार्च 2026 को सुबह 8.25 पर समाप्त होगी.

पूजा मुहूर्त - देर रात 12.07 - देर रात 12.55, 18 मार्च

मासिक शिवरात्रि व्रत कैसे करें
व्रत का संकल्प - व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें. इसके बाद घर के मंदिर या शिवालय में जाकर पूजा करें. शिवलिंग का अभिषेक करें. महाशिवरात्रि पर पूजा बड़े स्तर पर की जाती है लेकिन मासिक शिवरात्रि पर सामान्य रूप से पूजन कर सकते हैं.
इन चीजों से करें पूजा - जल या गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भांग, सफेद फूल का इस्तेमाल करें. पूजा करते समय &amp;ldquo;ॐ नमः शिवाय&amp;rdquo; मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है.
दिनभर व्रत रखें

निर्जला व्रत (बिना जल के)
फलाहार व्रत
या केवल एक समय भोजन कर सकते हैं.

रात्रि में विशेष पूजा - मान्यता है कि इस दिन रात्रि काल में महादेव शिवलिंग में प्रकट रहते हैं.
अगले दिन व्रत का पारण - अगले दिन सुबह भगवान शिव की पूजा करके व्रत का पारण किया जाता है और जरूरतमंद लोगों को दान दिया जाता है.
मासिक शिवरात्रि व्रत के नियम

व्रत के दिन सात्विक भोजन करें और लहसुन-प्याज से परहेज करें.
मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें.
क्रोध, झूठ और विवाद से दूर रहें.
ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है.
भगवान शिव के मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करें.
संभव हो तो मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक अवश्य करें.

Kharmas 2026: खरमास 15 मार्च से होंगे शुरू, निपटा लें ये 6 काम, 1 महीना शुभ कार्य पर लगेगा ब्रेक




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/08/318b4a9d8baae029e017717744578e071767865865877499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Masik, Shivratri, 2026:, चैत्र, मासिक, शिवरात्रि, मार्च, में, कब, इस, दिन, पंचक, भी, नोट, करें, डेट, मुहूर्त</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026 Sehri Iftar Time: रमजान का 18वां रोजा 8 मार्च को, देखें शहर अनुसार सहरी&#45;इफ्तार का समय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5795</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5795</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan 2026 18th Roza Sehri Iftar Time: रमजान का मुकद्दस महीना अपने दूसरे अशरे यानी मगफिरत के अंतिम पड़ाव पर है. रविवार, 18 मार्च 2026 को भारत में रमजान का 18वां रोजा रखा जाएगा. इस्लाम के अनुसार, अठारहवां रोजा परहेजगारी का काफिका है.
कुरान की सूरह हूद की तेईसवीं आयत में जिक्र मिलता है कि- जो लोग ईमान लाए और नेक अमल किए और अपने परवरदिगार के आगे आजिजी की है यही साहिबे जन्नत है. यह आयत रोजे की अहमियत को बताता है.
रमजान के पाक महीने में संयम, दान और नेकी पर जोर देता है. खासकर इस महीने में रोजा रखना हर मुसलमान पर रोजा फर्ज है. रमजान की शुरुआत से लेकर आखिरी दिन तक रोजेदार नियमित रूप से सहरी और इफ्तार कर रोजा पूरा करते हैं. लेकिन रोजा तभी पूरा होता है जब सही समय पर सहरी और इफ्तार किया जाए. इसलिए रोजेदार जान लें दिल्ली, मुंबई, यूपी, हैदराबाद, कानपुर, चैन्नई समेत अपने शहर के सहरी-इफ्तार का समय (8 March 2026 Sehri-Iftar Timing).&amp;nbsp;



शहर का नाम (City Name)
&amp;nbsp;सेहरी समय (8 March Sehri Timing)
&amp;nbsp;इफ्तार समय (8 March Iftar Timing)






दिल्ली (Delhi)
05:20 AM
06:26 PM


नोएडा (Noida)
05:19 AM
06:26 PM


चेन्नई (Chennai)
05:09 AM
06:20 PM


लखनऊ (Lucknow)
05:06 AM
06:12 PM


पुणे (Pune)
05:35 AM
06:43 PM


मुंबई (Mumbai)
05:39 AM
06:47 PM


कोलकाता (Kolkata)&amp;nbsp;
04:37 AM
05:44 PM


हैदराबाद (Hyderabad)
05:17 AM
06:25 PM


पटना (Patna)
04:51 AM
05:55 PM


भुवनेश्वर (Bhuvneshwar)
04:47 AM
05:55 PM


जयपुर (Jaipur)
05:26 AM
06:33 PM


इंदौर (Indore)
05:27 AM
06:34 PM


बेंगलुरु (bengaluru)
05:20 AM
06:30 PM


अहमदाबाद (Ahmadabad)
05:40 AM
06:47 PM


सूरत (Surat)
05:39 AM
06:46 PM


कानपुर (Kanpur)
05:08 AM
06:15 PM


जम्मू (Jammu)
05:27 AM
06:34 PM


रांची (Ranchi)
04:49 AM
05:56 PM


चंडीगढ़ (Chandigarh)
05:21 AM
06:27 PM



रोजेदार इन बातों का रखें ध्यान

शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए रोजेदार सहरी और इफ्तार के समय खूब पानी पीएं.
इफ्तार में ताजे फल, खजूर और ठंडे शरबत को प्राथमिकता देकर सादगी से रोजा खोलें.
रोजा खोलने के लिए जरूरतमंदों की भी मदद करें. गरीबों और मुसाफिरों को फल-भोजन का दान करें.

ये भी पढ़ें: Ramadan 2026: प्रेग्नेंट महिलाएं रोजा रखें या नहीं? इस्लाम में क्या है हुक्म




Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/03/07/287e886c83a561cbc06299d80a9f32ff1772884145751466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 18:47:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026, Sehri, Iftar, Time:, रमजान, का, 18वां, रोजा, मार्च, को, देखें, शहर, अनुसार, सहरी-इफ्तार, का, समय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holi 2027 Date: होली 2027 में कब ? नोट करें डेट</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5768</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5768</guid>
<description><![CDATA[ Holi 2027 Date:&amp;nbsp;इस साल की होली तो गई लेकिन अब अगले साल 2027 में होली 22 मार्च 2027 को खेली जाएगी. इसके एक दिन पहले होलिका दहन होगा. होली महज रंगों का पर्व नहीं बल्कि आध्यात्मिक रूप से इसका अर्थ है कि सभी भेदभाव मिटाकर प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को बढ़ाना. ब्रज क्षेत्र में श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रंगों की होली खेली थी. इस कारण होली को प्रेम, आनंद और भक्ति का उत्सव भी माना जाता है.
भारत में अलग-अलग तरीके से मनाते हैं होली
ब्रज की होली विश्व प्रसिद्ध है. यहां बरसाना और नंदगांव में लठमार होली खेली जाती है. इस परंपरा में महिलाएं पुरुषों को लाठियों से प्रतीकात्मक रूप से मारती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते है. यह परंपरा भगवान श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ी मानी जाती है.
मथुरा- वृंदावन की फूलों की होली
वृंदावन में रंगों की जगह फूलों से होली खेलने की परंपरा है. मंदिरों में फूलों की वर्षा करके भक्त होली मनाते हैं. विशेष रूप से बांके बिहारी मंदिर में यह उत्सव बहुत प्रसिद्ध है.
काशी में राख और गुलाल की होली
काशी में होली मनाने का तरीका थोड़ा अलग हैं. यहां रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ और माता गौरा का गौना कराया जाता है. इनकी प्रतिमा नगर भ्रमण पर जाती है इस दौरान गुलाल से भक्त शिव-पार्वती संग होली खेलते हैं. वहीं इसके अलगे दिन मणिकर्णिका घाट पर जलती चिता की&amp;nbsp; राख की होली खेली जाती है.
पश्चिम बंगाल की डोल यात्रा
पश्चिम बंगाल में होली को डोल यात्रा या बसंत उत्सव कहा जाता है. इस दिन लोग रंग-गुलाल लगाकर नृत्य और संगीत के साथ उत्सव मनाते हैं. भगवान श्रीकृष्ण और राधा की झांकी निकाली जाती है.
पंजाब का होला मोहल्ला
पंजाब में होली के समय होला मोहल्ला मनाया जाता है.इसमें वीरता के प्रदर्शन, घुड़सवारी और युद्ध कौशल के कार्यक्रम होते हैं. यह परंपरा गुरु गोबिंद सिंह द्वारा शुरू की गई थी.
राजस्थान की शाही होली
राजस्थान में होली शाही अंदाज में मनाई जाती है. उदयपुर और जयपुर में राजघराने की परंपरा के अनुसार शोभायात्रा और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं. पर्यटक भी इस उत्सव में बड़ी संख्या में शामिल होते हैं.
Chaitra Month 2026: हिंदू कैलेंडर का पहला माह चैत्र है बड़ा पुण्यकारी, करें ये 6 काम, बदल सकता है भाग्य!
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/03/06/137808b0008f319ac6f90c12c5e4f8e11772740655426499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:11:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holi, 2027, Date:, होली, 2027, में, कब, नोट, करें, डेट</media:keywords>
</item>

<item>
<title>विजय देवरकोंडा के रिसेप्शन में राम चरण के नंगे पैर और काले कपड़ों ने खींचा ध्यान, जानिए इससे जुड़ा आध्यात्मिक कारण?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5769</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5769</guid>
<description><![CDATA[ अभिनेता विजय देवरकोंडा और उनकी पत्नी रश्मिका मंदाना ने 4 मार्च, 2026 को हैदराबाद में भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया था. जिसमें फिल्म जगत की तमाम हस्तियां शामिल हुईं. लेकिन इस भव्य स्वागत में सारी लाइम लाइट राम चरण ने चुरा ली.
दरअसल उन्हें समारोह स्थल पर नंगे पैर और काले रंग के कपड़ों में देखा गया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. हालांकि इसके पीछे की असल वजह आध्यात्म से जु़ड़ी है.&amp;nbsp;
बड़े भाई से पहले छोटे की शादी क्यों मानी जाती है अशुभ? श्रीराजेंद्र दास महाराज ने बताया धार्मिक रहस्य!
अभिनेता कार्यक्रम में नंगे पैर थे
राम चरण और उनकी पत्नी उपासना कामिनेनी कोनिडेला के साथ रिसेप्शन में शामिल हुए. अभिनेता ने काले रंग का एक शानदार कुर्ता पहना था. उनका स्टाइलिश लुक उनके चाहने वालों को काफी पसंद आया, लेकिन यहां गौर करने वाले बात ये है कि, वे पूरे कार्यक्रम के दौरान नंगे पैर थे.
पहली नजर में उनके प्रशंसकों को लगा कि, यह उनकी नई जीवनशैली हो सकती है, लेकिन असल में यह उनके द्वारा लिए जा रहे धार्मिक व्रत से जुड़ा है.



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Pallav Paliwal (@pallav_paliwal)





नंगे पैर रहने का आध्यात्मिक कारण
दरअसल राम चरण वर्तमान में अय्यप्पा दीक्षा का पालन कर रहे हैं, जो भगवान अय्यप्पा के भक्तों द्वारा प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में जाने से पहले ली जाने वाली एक पवित्र आध्यात्मिक प्रतिज्ञा है. इस आध्यात्मिक प्रतिज्ञा को अनुशासन की अवधि माना जाता है.
भक्तों को कठोर अनुशासन का पालन करना होता है और सादगी भरा जीवन जीना होता है. अय्यप्पा दीक्षा सामान्य 41 से 48 दिनों तक चलती है.
अय्यप्पा दीक्षा के दौरान पालन किए जाने वाले नियम
अय्यप्पा दीक्षा के दौरान भक्त साधारण वस्त्र पहनते हैं, आमतौर पर काले, नीले या केसरिया रंग के कपड़े, कई श्रद्धालु विनम्रता और भक्ति के प्रतीक के रूप में नंगे पैर चलना भी पसंद करते हैं. खाने में शाकाहारी भोजन और शराब व &amp;nbsp;विलासितापूर्ण जीवन शैली से दूर रहना होता है.&amp;nbsp;
अय्यप्पा दीक्षा में दैनिक साधना और ध्यान करना भी जरूरी है. भक्त इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और आमतौर पर बाल-दाढ़ी नहीं कटवाते हैं. इन नियमों का उद्देश्य अनुशासन भरा जीवन जीना है और आध्यात्मिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/03/06/f1393d403f0a2e9f0c4b4ef432e20ae017727754784751092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:11:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>विजय, देवरकोंडा, के, रिसेप्शन, में, राम, चरण, के, नंगे, पैर, और, काले, कपड़ों, ने, खींचा, ध्यान, जानिए, इससे, जुड़ा, आध्यात्मिक, कारण</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026 3rd Jummah: रमजान का तीसरा जुमा आज, नमाजी और रोजेदार नोट करें जुमे की नमाज का समय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5766</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5766</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan 2026 3rd Jummah:&amp;nbsp;19 फरवरी 2026 को शुरू हुआ माह-ए-रमजान का मुबारक और पाक महीना अपने पूरे नूर के साथ जारी है. पहला अशरा गुजराने के बाद रोजेदार मगफिरत (माफी) का दौर इबादत के साथ बिता रहे हैं. रमजान के महीने में देशभर के हर छोटी-बड़ी मस्जिदों में इबादत, दुआ और तिलावत का दौर चल रहा है.
इस बीच आज 6 मार्च को रमजान महीने का तीसरा जुमा (शुक्रवार) भी पड़ा है, जोकि मुसलमानों के लिए खास महत्व रखता है. रमजान महीने का 16वां रोजा रखकर आज मुसलमान मस्जिद में तीसरे जुमे की नमाज अकीदत के साथ अदा करेंगे. इस दौरान मस्जिदों में इमाम और आलिम रमजान की अहमियत, सवाब और दीनी बातों पर भी तकरीर पेश करते हैं.
इस्लाम में जुमे को खास फजीलत वाला दिन माना जाता है. इसलिए हर मुसलमान को जुमे की नमाज जरूर अदा करनी चाहिए. माना जाता है कि इस दिन की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है. खासकर रमजान के महीने में आने वाला जुमे का दिन और भी ज्यादा फजीलत वाला होता है. यही वजह है कि रोजेदार और नमाजी इस दिन विशेष तैयारी के साथ मस्जिदों में पहुंचते हैं. रोजेदार और नमाजी यहां देखें आज कितने बजे अदा की जाएगी जुमे की नमाज.
जुमे की नमाज का समय (Today Jummah Namaz Timing)
रमजानुल मुबारक के तीसरे जुमा की नमाज शहर की छोटी-बड़ी तमाम मस्जिदों में दोपहर 12:30 से 2:30 बजे तक अदा की जाएगी. नमाज में लोग मुल्क में शांति, तरक्की व भाईचारे की दुआ मांगेंगे. &amp;nbsp;जुमे की नमाज़ से पहले इमाम द्वारा खुदबा (उपदेश) दिया जाता है, जिसमें अल्लाह की तारीफ, रसूल पर सलाम और नेक काम करने व गुनाहों से बचने की नसीहत होती है.
&amp;nbsp;बता दें कि, अलग-अलग शहरों के मस्जिदों में जुमे की नमाज के समय में थोड़ा बहुत अंतर होता है. आप जुमे की नमाज की सटीक समय के लिए आप अपने शहर के स्थानीय मस्जिद या फिर इमाम साहब से समय की जानकारी ले सकते हैं.
ये भी पढ़ें: Ramadan 2026: 6 मार्च को रमजान का 16वां रोजा, रोजेदार देखें अपने शहर अनुसार सहरी-इफ्तार का समय

Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/03/06/ce46566b1d23dacee3981164ac6321801772769835946466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:11:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026, 3rd, Jummah:, रमजान, का, तीसरा, जुमा, आज, नमाजी, और, रोजेदार, नोट, करें, जुमे, की, नमाज, का, समय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>इजराइल में लाल बछिया का जन्म, क्या यह दुनिया के अंत का संकेत है! जानिए बाइबल की भविष्यवाणी?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5767</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5767</guid>
<description><![CDATA[ Red Heifer Birth Prediction: इतिहास में दुनिया के खत्म होने के बारे में कई तरह की भविष्यवाणियां की गई हैं, जिनमें से अधिकांश पूरी तरह से बेबुनियाद है. इसका एक उल्लेखनीय उदाहरण साल 2012 में देखने को मिला, जब दावा किया गया था कि, माया के कैलेंडर के मुताबिक दुनिया का अंत होने वाला है, क्योंकि वह कैलेंडर उस तारीख से आगे नहीं बढ़ता था.
हालांकि 2012 के बाद जीवन सामान्य रूप से चलता रहा, जिससे यह भविष्यवाणी पूरी तरह से गलत साबित हुई.&amp;nbsp;
लाल बछिया के जन्म ने इजराइल में बढ़ाई चिंता
सर्वनाश की कोई गुंजाइश न होने के बावजूद इस भविष्यवाणी ने कई लोगों में डर और दहशत पैदा कर दी, जिससे कुछ लोग अंत की तैयारी करने लगे.
कुछ ऐसी ही स्थिति इस समय इजराइल में देखने को मिल रही है, जहां एक रहस्यमय लाल बछिया के जन्म ने दुनिया के अंत के संभावित संकेतों को लेकर बहस छेड़ दी है. कुछ लोग इस घटना को विनाश के संकेत से जोड़ रहे हैं.&amp;nbsp;

On September 4, 2023 The first released an article about The First red heifer in 2000 years which seemingly fulfils Bible prophecy and signals &#039;end of days&#039; being found. The Heifer was born on August 28, 2018 so it&amp;rsquo;s strange that they released that article last month. MSN and&amp;hellip; pic.twitter.com/JkQrlE0vaO
&amp;mdash; Dom Lucre | Breaker of Narratives (@dom_lucre) October 12, 2023



ईसाई और यहूदी दोनों धर्मग्रंथों में लाल बछिया विनाश का संकेत
खबरों की माने तो इजराइल में 2000 सालों में पहली बार किसी लाल बछिया का जन्म हुआ है. यह खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह तैजी से फैल गई है और लोग इसे लेकर डर और संदेह जता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अविश्वास कहकर मानने से इंकार कर रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईसाई और यहूदी दोनों धर्मग्रंथों में लाल बछिया के जन्म को आने वाले विनाश का संकेत माना गया है.&amp;nbsp;
टेंपल इंस्टीट्यूट का बछिया पर गहन अध्ययन
यरूशलेम स्थित टेंपल इंस्टीट्यूट ने बताया कि, वे नवजात बछिया का गहन अध्ययन कर रहे हैं. टेंपल इंस्टीट्यूट ने यूट्यूब पर इसके जन्म के बारे में जानकारी दी है और बताया कि, बछिया का जांच चल रहा है.
इस बीच प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच संभावित संघर्ष को लेकर जनता में चिंताएं बढ़ रही हैं, जिसके बारे में कुछ लोगों का मानना है कि, यह दुनिया के अंत का कारण भी बन सकता है.&amp;nbsp;
लाल बछिया का जन्म यहूदी मसीहा का आगमन- बाइबल
जांच के बाद विशेषज्ञ यह तय करेंगे कि, बछिया पूरी तरह लाल है या नहीं. आम लोगों के बीच एक भविष्यवाणी चर्चा का विषय बन गई है, जिसमें पहली लाल बछिया के जन्म से वैश्विक विनाश की शुरुआत होगी.
ईसाई धर्म और यहूदी धर्म दोनों में ही लाल बछिया का दुनिया के अंत से जुड़ी भविष्यवाणियों का खास महत्व है. बाइबल के मुताबिक, पूरी तरह से लाल बछिया का जन्म यहूदी मसीहा के आगमन का संकेत भी हो सकता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/03/06/e4ba9bab4bacd9631dd78a08512d068617727663623961092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:11:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>इजराइल, में, लाल, बछिया, का, जन्म, क्या, यह, दुनिया, के, अंत, का, संकेत, है, जानिए, बाइबल, की, भविष्यवाणी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Sankashti Chaturthi 2026 Vrat Katha: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी आज, इस कथा के बिना अधूरा है पूजा&#45;व्रत</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5765</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5765</guid>
<description><![CDATA[ Bhalchandra Sankashti Chaturthi 2026 Vrat Katha in Hindi: हिंदू धर्म में हर महीने पड़ने वली चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व होता है. यह भगवान गणेश को समर्पित मासिक व्रत होता है. भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है, जोकि आज शुक्रवार 6 मार्च 2026 को है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से कष्ट, रोग और बाधाओं से मुक्ति मिलती है. भगवान गणेश की पूजा और चंद्रदोय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर आज संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूरा किया जाएगा. लेकिन व्रत कथा का पाठ किए बगैर पूजा अधूरी मानी जाती है. इसलिए आज शाम में पूजा के समय इस कथा का पाठ जरूर करें.
संकष्टी चतुर्थी मुहूर्त (Sankashti Chaturthi 2026 Muhurat)
पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 मार्च शाम 7:53 मिनट से शुरू होगी और 7 मार्च शाम 7:17 मिनट तक रहेगी. संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रमा पूजन का भी महत्व होता है, इसलिए 6 मार्च को ही भालचंद्र संकष्टी मनाई जाएगी. भालचंद्र संकष्टी पर चंद्रोदय का समय रात 9 बजकर 31 मिनट रहेगा.
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (Bhalachandra Sankashti Chaturthi Vrat ki Kahani)
पौराणिक और धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार राक्षसों के अत्याचार से सभी देवता बहुत परेशान हो गए और इसके समाधान के लिए वे भगवान शिव के पास पहुंचे. उस समय पूरा शिव परिवार एक साथ बैठे हुए था. देवताओं की परेशानी सुनकर शिवजी ने अपने दोनों पुत्रों (कार्तिकेय और गणेश) से पूछा कि, देवताओं की इस परेशानी का हल कौन करेगा और कौन उनकी सहायता करेगा. कार्तिकेय और गणेश दोनों भाई देवताओं की सहायता के लिए तैयार हो गए. तब भगवान शिव ने कार्तिकेय और गणेश से एक परीक्षा लेने का निर्णय लिया.
शिवजी बोले कि, जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा वही देवताओं की सहायता करेगा. कार्तिकेय ने तुरंत वाहन मोर पर उठाया और पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए. लेकिन गणेश जी अपने छोटे वाहन मूषक को लेकर परेशान हो गए. वे सोचने लगे कि छोटे से मूषक पर सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा कैसे की जाएगी.
तब गणेश जी ने एक उपाय निकाला. भगवान गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की सात बार परिक्रमा कर अपनी परीक्षा पूरी कर ली, जिसे देख सभी देवतागण भी हैरान रह गए. उधर पृथ्वी की परिक्रमा जब कार्तिकेय वापस आए गए.
भगवान शिव ने गणेश जी से पूछा, बिना कहीं गए उसने अपनी परीक्षा कैसे पूरी की. तब गणेश ने बड़ी ही विनम्रता से कहा कि, माता-पिता ही उनके लिए पूरा संसार हैं, इसलिए उनकी परिक्रमा करना ही पृथ्वी की परिक्रमा के समान है. गणेश का यह उत्तर सुनकर सभी प्रसन्न हुए और उनकी खूब प्रशंसा हुई. इसके बाद भगवान गणेश को देवताओं की सहायता करने की जिम्मेदारी सौंपी गई. &amp;nbsp;इसके साथ ही गणेश को यह आशीर्वाद भी दिया कि, जो भक्त चतुर्थी के दिन उनकी पूजा करेगा और इस कथा का पाठ करेगा, उसका जीवन कष्टों से मुक्त रहेगा.
ये भी पढ़ें:&amp;nbsp;Sankashti Chaturthi 2026: भालचंद्र संकष्टी पर गणपति संग पाएं शिव कृपा, शिवलिंग पर चढ़ाएं ये खास चीजें

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/03/06/7e651fc1df2b06f1374b6021cc3a86451772777401220466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 12:11:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Sankashti, Chaturthi, 2026, Vrat, Katha:, भालचंद्र, संकष्टी, चतुर्थी, आज, इस, कथा, के, बिना, अधूरा, है, पूजा-व्रत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Pradosh Vrat 2026 Date: फाल्गुन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत कब है? तारीख, प्रदोष काल मुहूर्त देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5763</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5763</guid>
<description><![CDATA[ Pradosh Vrat Month Of Falgun 2026: हर महीने का 13वां दिन यानी त्रयोदशी तिथि सनातन धर्म में खास महत्व रखता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर भक्त अपने जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.
इसे प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है और इसे करना धार्मिक रूप से बेहद फलदायी माना जाता है. खासतौर पर फाल्गुन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत भक्तों के लिए और भी ज्यादा खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन कई शुभ योग बनते हैं, जिनमें दुर्लभ शोभन योग भी शामिल है। जानिए फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत कब है?
फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत की तारीख
इस साल फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत रविवार, 1 मार्च 2026 को मनाया जाएगा. त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष की होगी, जो 28 फरवरी शनिवार की शाम 8:43 बजे से शुरू होकर 1 मार्च रविवार की शाम 7:09 बजे तक चलेगी. इस खास दिन भक्त शाम के समय शिवजी और माता पार्वती की पूजा करते हैं, ताकि उनकी कृपा से जीवन में सभी तरह की खुशियाँ और लाभ प्राप्त हो सकें.
प्रदोष व्रत का महत्व और साधना
प्रदोष व्रत में भक्त सुबह से शाम तक कड़ा उपवास रखते हैं. शाम के समय, सूरज ढलने से पहले विशेष पूजा की जाती है. पूजा में दीपक जलाना, फल, फूल, मिठाई और पंचामृत जैसे भोग अर्पित करना शामिल होता है। शिवलिंग पर बिल्व पत्र, दूध, घी, दही, शहद और जल चढ़ाए जाते हैं. इस दिन मंत्रों का उच्चारण करना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है.
प्रदोष व्रत पर किन मंत्रों का जाप करें?

ओम नमः शिवाय
ओम त्र्यम्बकम् यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय अमामृतात्

इन मंत्रों का जप करने से आध्यात्मिक शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि प्राप्त होती है.फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त करने का भी अवसर है. जो भक्त इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखते हैं, उनके जीवन में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि आती है.
Holika Dahan 2026: होली पर भद्रा और ग्रहण का साया, होलिका दहन किस मुहूर्त में करें

Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/26/57937172673572ad2f00dbbffd7790fc1772130488834499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Pradosh, Vrat, 2026, Date:, फाल्गुन, महीने, का, आखिरी, प्रदोष, व्रत, कब, है, तारीख, प्रदोष, काल, मुहूर्त, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026 Jumma: रोजेदार और नमाजी गौर फरमाएं! नोट करें आज रमजान के दूसरे जुमे की नमाज का समय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5764</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5764</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan 2026 Jumma Namaz Time: इस्लाम में पाक महीने रमजान को मुकद्दस का महीना कहा गया है जो इबादत, रहमत, संयम, सब्र और रहमतों का महीना है. रमजान महीने का हर दिन बेहद खास और बरकतों वाला होता है, लेकिन जुमा (शुक्रवार) की अहमियत सबसे अधिक होती है.
20 फरवरी को रमजान का पहला जुमा था और आज 27 फरवरी को रमजान का दूसरा जुमा है. इस्लामिक मान्यता के अनुसार, रमजान महीने में पड़ने वाला मुजा खासतौर पर रोजेदारों के लिए बरकतों और मगफिरत का मौका लेकर आता है. इसलिए रोजेदारों और नमाजियों के लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता कि, आज मस्जिदों में जुमे की नमाज का सही समय क्या रहेगा.
रमजान के दूसरे जुमे की नमाज का समय
जुमे की नमाज आमतौर पर दोपहर के समय में अदा की जाती है. हालांकि अलग-अलग शहरों के मस्जिदों में जुमे की नमाज के समय में थोड़ा बहुत अंतर होता है. ज्यादातर मस्जिदों में जुमे का खुतबा लगभग 12:15 बजे से 12:45 बजे के बीच होता है.&amp;nbsp;
बता दें कि &amp;lsquo;खुदबा&amp;rsquo;, जुमे की नमाज़ से पहले इमाम द्वारा दिया जाने वाला एक अनिवार्य उपदेश है, जिसमें अल्लाह की तारीफ, रसूल पर सलाम और नेक काम करने व गुनाहों से बचने की नसीहत शामिल होती है.&amp;nbsp;वहीं नमाज 12:45 से 1:30 बजे के बीच अदा की जाती है. आप जुमे की नमाज की सटीक समय के लिए अपने शहर के स्थानीय मस्जिद या फिर इमाम साहब से सटीक समय की जानकारी ले सकते हैं.
जुमे की नमाज का महत्व
इस्लाम में जुमे का दिन सबसे अफजल माना जाता है. हजरत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि, जुमे का दिन तमाम दिनों का सरदार है. इसे ईद की तरह की विशेष माना जाता है. वहीं जुमा जब रमजान में पड़े तो उसकी फज़ीलत और अधिक बढ़ जाती है. ऐसा माना जाता है कि, जुमे के दिन की गई दुआएं खास कबूल होती हैं और अल्लाह बंदे के गुनाहों की मगफिरत करते हैं.
ये भी पढ़े: Ramadan 2026 Jumma: रमजान में इस बार 4 या 5 कितने जुमा होंगे, देखें इस्लामिक कैलेंडर की गणना



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/27/92bc3964c2618b1023d84a7258a5e10f1772132535320466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026, Jumma:, रोजेदार, और, नमाजी, गौर, फरमाएं, नोट, करें, आज, रमजान, के, दूसरे, जुमे, की, नमाज, का, समय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holika 2026: भद्रा में होगा होलिका दहन! जानें सही मुहूर्त और वो नियम, जिन्हें भूलना पड़ेगा भारी!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5761</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5761</guid>
<description><![CDATA[ Holika Dahan 2026: हिंदू धर्म में होलिका दहन को सालों से ही बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता रहा है. इस दिन परिवार के सभी सदस्य विधि विधान से होली माता की पूजा करने के साथ रात में होलिका का दहन करते हैं.
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के मुताबिक, होलिका दहन से पहले कुछ जरूरी नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है. ज्ञान की कमी होने की वजह से कई लोग इन नियमों को अनदेखा कर देते हैं, जिससे उन्हें इसका पूरा फायदा नहीं मिलता है.
इसलिए इस खास पर्व को होलिका दहन की सही विधि और जरूरी नियमों को जानने के बाद ही मनाना चाहिए, ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो और जीवन में सुख-समृद्धि आए.&amp;nbsp;
Mahakal Mandir Holika Dahan 2026: महाकाल मंदिर में होलिका दहन कब ? धुलेंडी 3 या 4 मार्च किस दिन
होलिका दहन का आयोजन भद्रा की छाया में?
वैदिक पंचांग के मुताबिक, होलिका दहन 2 मार्च की रात को किया जाएगा. भद्रा काल शाम 5.55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की सुबह 4.28 बजे तक चलेगा.
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, इस दौरान पृथ्वी पर भद्रा का असर रहता है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है. इस दौरान दान करना भी सही है.&amp;nbsp;
इन नियमों का पालन जरूर करें?
होलिका दहन से पहले अपने सिर पर एक पवित्र धागा लपेटें और 5-7 बार परिक्रमा करें. होलिका दहन की अग्नि में जौ या साबुत चावल के दाने को अर्पित करें. फिर नई फसल को अग्नि में भूना जाता है. लोग भुने हुए दानों को घर लेकर जाकर आपस में बांटते हैं.&amp;nbsp;
होलिका दहन के दौरान सफेद, पीला या लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है. इस दिन चमड़े या काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए. इसके अलावा महिलाओं को चमकीले और गहरे रंगों के कपड़े पहनने से बचना चाहिए. यदि आप भी इस समय होलिका गहन करने की योजना बना रहे हैं तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें.&amp;nbsp;
होलिका दहन के फौरन बाद स्थल छोड़ देना सही नहीं है. होलिका दहन के बाद कुछ देर वहीं रुककर अग्नि की परिक्रमा करनी चाहिए. माना जाता है कि, होलिका में अग्नि में एक खास ऊर्जा होती है, जो नकारात्मक शक्तियां को खत्म करती है.
होलिका दहन के बाद अगली सुबह राख को अपने घर लाने के साथ माथ पर लगाए और उसे घर के चारों कोनों में छिड़क दें. ऐसा करना बेहद शुभ माना जाता है. इससे वास्तु दोष की समस्या दूर होती है.&amp;nbsp;
होलिका दहन के दिन होलिका माता की पूजा की जाती है और घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है. इस दिन मांस औऱ शराब का सेवन करना भी वर्जित है, क्योंकि इनसे आर्थिक हानि और रोग की समस्या सता सकती है. इसके अलावा इस दिन तामसिक भोजन भी ग्रहण करने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
होलिका दहन के दिन नकारात्मक ऊर्जाओं से बचने के लिए महिलाओं को अपने बाल खुले नहीं रखने चाहिए. पूजा के दौरान बाल खुले रखने से नकारात्मक ऊर्जाएं जमा हो सकती हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/27/4f1c564f62e4df237baf7b4a358190d517721702073061092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holika, 2026:, भद्रा, में, होगा, होलिका, दहन, जानें, सही, मुहूर्त, और, वो, नियम, जिन्हें, भूलना, पड़ेगा, भारी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Rashmika Vijay Wedding: ग्लैमर के बीच आस्था का रंग! रश्मिका&#45;विजय की शादी में काला टीका क्यों बना चर्चा का विषय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5762</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5762</guid>
<description><![CDATA[ Rashmika Mandanna-Vijay Deverakonda Wedding: नेशनल क्रश कही जाने वाली रश्मिका मंदाना और हैडंसम हंक एक्टर विजय देवरकोंडा 28 फरवरी 2026 को शादी के बंधन में बंध चुके हैं. सोशल मीडिया पर दोनों की तस्वीरे-वीडियो खूब वायरल हो रही है. चारों ओर से न्यूली वेड कपल को बधाईयां और शुभकामनाएं मिल रही हैं.
साउथ बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर कलाकार रश्मिका और विजय देवरकोंडा यानी VIROSH की शादी खूब चर्चा में रही. कपल ने खुद ही सोशल मीडिया पर अपनी शादी की तस्वीरें भी साझा की है. पारंपरिक पोशाक और श्रृंगार में नवविवाहित जोड़ा काफी खूबसूरत लग रहा है, जिससे नजरें हटाना वाकई मुश्किल है.
रश्मिका और विजय की शादी आंध्रा और कोडवा रीति-रिवाजों से संपन्न हुई है. विजय पांपरिक मंडू (mundu angavastram) लुक में दिख रहे हैं. वहीं लाल साड़ी और भरपूर जेवर के साथ रश्मिका मानो साक्षात लक्ष्मीरूपा लग रही हों. हालांकि सोशल मीडिया पर Virosh के शादी का हर लुक चर्चा में है. लेकिन एक चीज है जो काफी चर्चा में है और वह है कपल के गाल पर काला टीका (Kala Tika), जिसे तस्वीर में दोनों के चेहरों पर साफ देखा जा सकता है.



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Vijay Deverakonda (@thedeverakonda)





काला टीका क्यों लगाते हैं
काला टीका या नजर का टीका (Nazar ka Kala Tika) भारतीय संस्कृति में आमतौर पर बुरी नजर बचने का एक प्रचलित और पारंपरिक उपाय माना जाता है. इसे गाल पर या कान के पीछे लगाने का उद्देश्य यह होता है कि, अत्यधिक प्रशंसा, ध्यान या ईर्ष्या जैसी नकारात्मक उर्जा को आकर्षित होने से बचा जाए.
पारंपरिक मान्यतानुसार खुशियों के खास अवसरों पर जैसे शादी, जन्म, सगाई या किसी भी नई शुरुआत में लोग सकारात्मक ऊर्जा और भीड़-धड़ाका के बीच बुरी नजर से बचने के लिए काला टीका लगाते हैं. इसे बुरी नजर से सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखा ता है.
VIROSH का काला टीका क्यों बना चर्चा का विषय
काला टीका लगाना या लगा हुए देखना आमतौर पर साधारण बात है. लेकिन जब ग्लैमरस लुक से सजे धजे सेलिब्रेटी आस्था और परंपराओं का पालन करते हैं तो यह चर्चा का विषय बन जाता है. विजय और रश्मिका ने अपनी शादी में भी अपने लुक से संस्कृति, पंरपरा और आस्था की मिसाल पेश की है. दूल्हा बने विजय देवरकोंडा भी शादी के दिन फिल्मी स्वैग वाले हीरो की तरह नहीं बल्कि पीरियड फिल्म के रॉयल हीरो की तरह लग रहे हैं. कंधे पर लाल अंगवस्त्रम, माथे पर तिलक, हाथों में आलता, गले और हाथ में पारंपरिक जेवर उन्हें सांस्कृतिक और शाही लुक से जोड़ रहा है.
ये भी पढ़ें: Holashtak 2026: क्या होलाष्टक में बाल कटवा सकते हैं या दाढ़ी बनवा सकते हैं?Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/27/e53880212838d0a3a974666af0457d3b1772166205028466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Rashmika, Vijay, Wedding:, ग्लैमर, के, बीच, आस्था, का, रंग, रश्मिका-विजय, की, शादी, में, काला, टीका, क्यों, बना, चर्चा, का, विषय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan Jumma 2026: आज रोजेदार अदा करेंगे करेंगे जुमे की नमाज अदा, मांगेंगे मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5760</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5760</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan Jumma 2026:&amp;nbsp;गुरुवार को खैर व बरकत के साथ रमजान का आठवां रोजा बीत गया. आज 27 फरवरी शुक्रवार को आज माह-ए-रमजान का नौवां रोजा रखा गया है. इस पाक महीने में रोजेदार अल्लाह की रजा में नेक काम कर खूब नेकियां कमा रहे हैं. नेकी कमाने का यह सिलसिला पूरे रमजान तक ऐसे ही चलता रहेगा.
मस्जिद व घरों में जमकर इबादत व कुरआन-ए-पाक की तिलावत हो रही है. दस्तरख्वान पर तमाम तरह की नेमत रोजेदारों को खाने को मिल रही है. सभी के हाथों में तस्बीह व सरों पर सजी टोपियां अच्छी लग रही हैं. महिलाएं इबादत के साथ घर व बाजार की जिम्मेदारियां बाखूबी अंजाम दे रही हैं. तरावीह की नमाज जारी है.
सदका, फित्रा व जकात की रकम लेने के लिए मदरसे वाले घरों पर पहुंचने लगे हैं. इसी सदका, फित्रा व जकात की रकम से मदरसों के साल भर का निजाम चलेगा. मदरसे में पढ़ने वाले गरीब, यतीम छात्रों के रहन-सहन, खान-पान का खर्च निकलेगा. कई मदरसों के शिक्षक तो बड़े शहरों में गये हुए हैं. बाजार गुलजार है. वहीं माह-ए-रमजान में पड़ने वाले दूसरे जुमा के लिए मस्जिदों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. सभी मस्जिदों में जुमा का खुत्बा पढ़ा जाएगा और जुमा की नमाज अदा कर मुल्क में अमन ओ अमान की दुआ मांगी जाएगी. महिलाएं घरों में इबादत कर दुआ मांगेंगीं&amp;nbsp;
माह-ए-रमजान में दुआएं ज्यादा कबूल होती हैं: मुफ्ती मेराज&amp;nbsp;
मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक के इमाम मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि दुआ बंदे की तीन बातों से खाली नहीं होती, पहला उसका गुनाह बख्शा जाता है। दूसरा उसे फायदा हासिल होता है. तीसरा उसके लिए आखिरत में भलाई जमा की जाती है.
माह-ए-रमजान में तो दुआएं ज्यादा कुबूल होती हैं इसलिए माह-ए-रमजान में दुआएं जरूर मांगी जाए. इफ्तार के समय की दुआ खाली नहीं जाती. रोजेदार के लिए तो फरिश्ते व दरिया की मछलियां तक दुआ करती हैं. दुआ मांगने का पहला फायदा यह है कि अल्लाह के हुक्म की पैरवी होती है कि उसका हुक्म है कि मुझसे दुआ मांगा करो. दुआ मांगना सुन्नत भी है.
हकदार मुसलमानों की जकात, सदका, फित्रा से मदद करें: नजीर अहमद&amp;nbsp;
समाजसेवी नजीर अहमद सिद्दीकी ने बताया कि हमें अपनी गलतियों को सुधारने का मौका रमजान के रोजे में मिलता है. गलतियों के लिए तौबा करने एवं अच्छाइयों के बदले बरकत पाने के लिए भी इस महीने की इबादत का महत्व है. माह-ए-रमजान बहुत ही रहमत व बरकत वाला महीना है. हकदार मुसलमानों की जकात, सदका, फित्रा से हरसंभव मदद जरूर कीजिए.
माह-ए-रमजान में ही सदका-ए-फित्र निकाल दें: उलमा किराम&amp;nbsp;
रमज़ान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर गुरुवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा. उलमा किराम ने क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया.
सवाल: सदका-ए-फित्र कब निकालना चाहिए?&amp;nbsp;
जवाब: ईद के दिन सुबह सादिक तुलू होते ही सदका फित्र वाजिब हो जाता है, लेकिन मुमकिन हो तो ईद से कुछ दिन पहले रमजान में ही सदका-ए-फित्र निकाल दें ताकि जरूरतमंद लोग इसका इस्तेमाल कर ईद की खुशियों में हमारे साथ शरीक हो सकें.
सवाल: क्या जिस्म के किसी हिस्से से खून निकलने से रोजा टूट जाता है?&amp;nbsp;
जवाब: नहीं सिर्फ खून निकलने से रोजा नहीं टूटता. हां अगर मुंह से खून निकला और हलक के नीचे उतर गया तो रोजा टूट जाएगा.
ये भी पढ़ें: Ramadan 2026 Jumma: रोजेदार और नमाजी गौर फरमाएं! नोट करें आज रमजान के दूसरे जुमे की नमाज का समय




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/27/1bc5f51a3a0f5e1e3965622a0ba5568c1772170831265466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:21:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, Jumma, 2026:, आज, रोजेदार, अदा, करेंगे, करेंगे, जुमे, की, नमाज, अदा, मांगेंगे, मुल्क, में, अमन, ओ, अमान, की, दुआ</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holi 2026: होली पर महासमंजस खत्म, शास्त्रों की गणना ने बताई रंगवाली होली खेलने की सही तारीख</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5708</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5708</guid>
<description><![CDATA[ Holi 2026: होली के पर्व को लेकर इस वर्ष देशभर में तारीखों का असमंजस बना हुआ था. कहीं 2 तारीख को होलिका दहन की तैयारी हो रही थी तो कहीं 3 तारीख को रंगोत्सव मनाने की चर्चा चल रही थी. आमजन से लेकर मंदिर समितियों तक के बीच यह प्रश्न बना हुआ था कि आखिर शास्त्र सम्मत तिथि कौन सी है.
इस पूरे विवाद और भ्रम के बीच विख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी ने विस्तार से पंचांग की गणना रखते हुए स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने बताया कि केवल कैलेंडर की तारीख देखकर निर्णय लेना उचित नहीं है, बल्कि पूर्णिमा तिथि का आरंभ, उसका समापन, भद्रा काल की स्थिति और शुभ मुहूर्त का सूक्ष्म अध्ययन आवश्यक होता है.
ज्योतिषाचार्य से जानें शास्त्रानुसार होली कब मनाएं

पंडित मनोज त्रिपाठी ने बताया कि होलिका दहन सदैव भद्रा मुख में नहीं किया जाता. भद्रा का त्याग कर, शुभ काल में ही दहन करना शास्त्रों का स्पष्ट निर्देश है.
पूर्णिमा तिथि कब लग रही है और कब समाप्त हो रही है, यह गणितीय और खगोलीय आधार पर तय होता है.
कई बार तिथि दो दिनों में फैल जाती है, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है. ऐसे में हमें शास्त्रों और प्रमाणिक पंचांग का अनुसरण करना चाहिए, न कि केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी का.
उन्होंने आगे कहा कि पर्व का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादाओं का पालन करते हुए सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का आह्वान करना है.

सही तिथि और समय पर होलिका दहन का महत्व
पंडित त्रिपाठी के अनुसार शास्त्र सम्मत समय पर किया गया होलिका दहन परिवार में सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि का संचार करता है, जबकि गलत मुहूर्त में किया गया अनुष्ठान अपेक्षित फल नहीं देता. इस प्रकार उनके विस्तृत स्पष्टीकरण के बाद होली की तिथि को लेकर बना संशय काफी हद तक समाप्त होता नजर आ रहा है.
ग्रहण से बचाएगा शिव मंत्रों का जाप&amp;nbsp;
वहीं श्री महंत रवींद्र पुरी का कहना है कि इस वर्ष चौकी चंद्रमा का ग्रहण है संध्या के समय पर. चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लगता है और सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लगता है तो भारत में जिस समय दृश्य मन होगा अलग-अलग राज्य है अलग-अलग सूर्य उदय का कल और अस्त का कल अलग-अलग है तो उसी के हिसाब से 9 घंटे पहले सूतक की शुरुआत होने पर मंदिरों की पूजा पाठ करके बंद कर दिया जाएगा.

कोई भी ऐसे काम शादी विवाह हवन यज्ञ नहीं होगा.
जो व्रत किए हुए है, बालक हैं, उन्हें थोड़ा आहार लेने की अनुमति रहती है.
इस समय भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए क्योंकि चंद्रमा शक्ति प्रदान करने के लिए ही अनुष्ठान होता है.
सूतक का अर्थ यही होता है जिस ग्रह के ऊपर ग्रहण की छाया है उसके मंत्रों का जाप करना चाहिए, यही वैदिक परंपरा है.

Holika Dahan 2026: होलिका दहन के लिए प्रदोष काल का ये है सबसे शुभ मुहूर्त, भद्रा भी नहीं बनेगी बाधा
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/26/526ca3aa4b22b256cf4b017ebc296bce1772050548305499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holi, 2026:, होली, पर, महासमंजस, खत्म, शास्त्रों, की, गणना, ने, बताई, रंगवाली, होली, खेलने, की, सही, तारीख</media:keywords>
</item>

<item>
<title>इंडोनेशिया से मॉरीशस तक 5 देश जहां हिंदू देवताओं की पूजा अलग तरीके से की जाती है! जानिए खासयित?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5707</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5707</guid>
<description><![CDATA[ &quot;एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति&quot; (ऋग्वेद 1.164.46)
अर्थ- सत्य एक है, बुद्धिमान लोग इसे कई तरीकों से वर्णित करते हैं.&amp;nbsp;
क्या आपने कभी सोचा है कि, आस्था का सीमाओं के पार जानें पर क्या असर पड़ता है? जब लोग प्रवास करते हैं, व्यापार करते हैं, राज्य स्थापित करते हैं या दूरदराज के द्वीपों पर जाकर बसते हैं, तो वे अपने साथ देवताओं को भी ले जाते &amp;nbsp;हैं. लेकिन इस यात्रा में एक अद्भुत बदलाव होता है.
देवता का स्वरूप तो वही रहता है, लेकिन पूजा करने का तरीका बदल जाता है. स्थानीय भाषाएं उनके नामों को आकार देने का काम करती हैं. स्वदेशी मान्यताएं अनुष्ठानों को प्रभावित करती हैं. वास्तुकला मंदिरों को नया रूप देने का काम करती है.&amp;nbsp;
हिंदू धर्म ने, शायद बाकि परंपराओं की तुलना में अपने मूल दर्शन को खोए बिना असाधारण रूप से अनुकूलन करने की क्षमता दिखाई है. दक्षिण पूर्व एशिया से लेकर हिंद महासागर के द्वीपीय देशों तक हिंदू देवी-देवताओं की पूजा बेहद श्रद्धा के साथ की जाती है.&amp;nbsp;
दुनिया के इन 10 देशों में आज भी बसता है हिंदू धर्म, जानें कहां कितनी है आबादी?
इंडोनेशिया (Indonesia)
इंडोनेशिया कई बाहरी लोगों को हैरान में डाल सकता है. यह दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, फिर भी बाली द्वीप पर हिंदू धर्म एक जीवंत परंपरा के रूप में फलता-फूलता है. इंडोनेशिया में हिंदू धर्म का प्रभाव व्यापार और श्रीविजया और मजापाहित जैसे शक्तिशाली राज्यों के जरिए से 7वीं और 14वीं शताब्दी के बीच पहुंचा.
भव्य प्रंबानन मंदिर इस गहरे संबंध की याद का प्रतीक है. नौवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर प्रमुख रूप से भगवान शिव को समर्पित है, साथ ही इसमें विष्णु और ब्रह्मा जी के भी मंदिर हैं.
लेकिन बाली का हिदू धर्म वाराणसी या चेन्नई देखने को मिलने वाले हिंदू धर्म से अलग है. यहां भगवान शिव को स्थानीय पूर्वजों की आत्माओं से गहरा संबंध है. रोजाना कैनंग सारी नामक प्रसाद को तैयार किया जाता है और घरों और मंदिर के बाहर रखा जाता है. फूलों, चावल और अगरबत्ती से भरी ये छोटी टोकरियां भगवान के प्रति कृतज्ञता और संतुलन का प्रतीक है.
यहां रामायण का मंचन खुले आसमान के नीचे बेहद ही नाटकीय नृत्य के रूप में किया जाता है. यहां की धार्मिक परंपराएं स्थानीय ब्रह्मांड विज्ञान से प्रभावित अद्वितीय चक्रों का अनुसरण करती हैं. बाली में हिंदू धर्म मंदिरों की दीवारों तक सीमित न रहकर रोजमर्रा के जीवन में रची-बसी एक जीवंत सांस्कृतिक लय की तरह दिखती है.&amp;nbsp;
नेपाल (Nepal)
नेपाल भारत के साथ खुली सीमा और गहरे आध्यात्मिक संबंध साझा करती हैं, फिर भी इसकी पूजा पद्धतियों से हिमालयी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है. साल 2008 तक नेपाल ऑफिशियल तौर पर एक हिंदू राज्य था.&amp;nbsp;
सबसे अच्छी बात यह है कि, एक कुमारी की पूजा, जो दुर्गा के एक रूप तलेजू देवी का अवतार बनने के लिए चुनी गई एक युवती होती है. वह काठमांडू के एक महल में निवास करती हैं और खास त्योहारों के दौरान प्रकट होती है, जहां हजारों लोग उनका आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं. लोग के बीच एक जीवित देवी की अवधारणा नेपाल की भक्ति और संस्कृति के अनूठे संगम का प्रतीक है.&amp;nbsp;
पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर शिव को समर्पित सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है, जो सभी जीवित प्राणियों के स्वामी पशुपति हैं. यहां के अनुष्ठान हिंदू और बौद्ध धर्म से प्रभावित है, जोद दिखाता है कि नेपाल में ये दोनों ही धर्म कितनी सहजता के साथ फल-फूल रहे हैं.&amp;nbsp;
थाईलैंड (Thailand)
थाईलैंड में मुख्य रूप से बौद्ध धर्म प्रचलित है, फिर भी यहां पर हिंदू देवी-देवताओं का गहरा सम्मान किया जाता है और उनकी व्यापक रूप से पूजा की जाती है. थाईलैंड में हिंदू धर्म का विस्तार आज से नहीं बल्कि सदियों से व्यापार और खमेर साम्राज्य के जरिए पहुंचे थे.&amp;nbsp;
बैंकॉक के बीच में स्थित ब्रह्मा जी को समर्पित प्रसिद्ध एरावन मंदिर, जिसे स्थानीय लोग फ्रा प्रोम के नाम से बुलाते हैं. बिजनेसमैन, छात्र और पर्यटक रोजाना सफलता और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं.
थाईलैंड में गणेश जी कलाकारों और उद्यमियों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. उनकी प्रतिमाएं कॉलेज और रचनात्मक क्षेत्रों में दिखाई देती हैं. विष्णु और शिव को भी शाही समारोहों में सम्मानित किया जाता है, जिनमें प्राचीन ब्राह्माणवादी अनुष्ठान भी शामिल है.&amp;nbsp;
थाईलैंड का राष्ट्रीय महाकाव्य रामाकिएन, रामायण से प्रेरित है. हालांकि इसकी कहानी मूल रामायण से मिलती-जुलती है, लेकिन पात्रों के नाम थाई शैली और सांस्कृति पर आधारित हैं.&amp;nbsp;
थाईलैंड में हिंदू देवताओं को बौद्ध देवताओं से अलग नहीं माना जाता है. उन्हें शक्तिशाली ब्रह्मांडीय प्राणियों के रूप में देखा जाता है, जो भक्तों को सांसारिक और आध्यात्मिक मामलों में समान रूप से मदद करते हैं.&amp;nbsp;
भारत के 6 मंदिर जहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित है! जानें इसके पीछे का रहस्य?
कंबोडिया (Cambodia)
कंबोडिया के प्राचीन खमेर साम्राज्य ने सालों पहले हिंदू धर्म को अपनाया था, जिसे बाद धीरे-धीरे बौद्ध धर्म की ओर रूचि बढ़ी. यहां की स्थापत्य कला आज भी लोगों का मन मोह लेती है.&amp;nbsp;
कंबोडिया का भव्य अंगकोरवाट मंदिर जिसका निर्माण मूल रूप से 12वीं शताब्दी में विष्णु मंदिर के रूप में किया गया था. यहां आज भी दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्मारकों में से एक है. इससे पहले के मंदिर आमतौर पर शिव को समर्पित थे.&amp;nbsp;
खमेर राजाओं ने देवराज की अवधारणा को जीवत रखा, जिसका मतलब है कि, ईश्वर राजा, जहां शास्कों को प्रतीकात्मक रूप से शिव या विष्णु से जोड़ा जाता था. धर्म और शासन आपस में काफी गहराई से जुड़े थे.&amp;nbsp;
मंदिरों की दीवारों पर महाभारत और रामायण से जुड़े दृश्य की नक्काशी देखने को मिलती थी. ये कथाएं केवल धार्मिक ग्रंथ ही नहीं थे, बल्कि राजीतिक और सांस्कृतिक आधार भी थी.&amp;nbsp;
हालांकि आज कंबोडिया में बौद्ध धर्म प्रमुख है, फिर भी हिंदू धर्म प्रतीकवाद इसकी कला, वास्तुकला और राष्ट्रीय पहचान में शामिल है.&amp;nbsp;
मॉरीशस (Mauritius)
मॉरीशस की कहानी थोड़ी अलग है. हिंदू धर्म यहां 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान लाए गए भारतीय अनुबंधित मजदूरों के साथ पहुंचा था. कई प्रवासियों के लिए आस्था एक विदेशी भूमि में अपनी पहचान बनाए रखने का तरीका बन गई.&amp;nbsp;
सबसे पवित्र स्थानों में से एक गंगा तलाओ है, जो एक गड्ढा झील है और मान्यता है कि, इसका गंगा नदी से आध्यात्मिक संबंध है. महाशिवरात्रि के दौरान हजारों भक्त शिव को प्रार्थना अर्पित करने के लिए तीर्थयात्रा करते हैं.&amp;nbsp;
ये रीति-रिवाज उत्तर भारतीय परंपराओं से काफी मिलती जुलती है, लेकिन समय के साथ इनमें क्रेओल संस्कृति और द्वीपीय प्रभाव भी समाहित हो गए हैं. भजन भोजपुरी, हिंदी और स्थानीय भाषाओं में गाए जाते हैं.
दिवाली को नेशनल हॉलिडे के रूप में मनाया जाता है. मॉरीशस में हिंदू देवता निरंतरता, लचीलेपन और सामुदायिक गौरव का प्रतीक हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/26/c26dd0eff00ebb51f71e99f5cb764e8817720725687821092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>इंडोनेशिया, से, मॉरीशस, तक, देश, जहां, हिंदू, देवताओं, की, पूजा, अलग, तरीके, से, की, जाती, है, जानिए, खासयित</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी की संपूर्ण व्रत कथा का करें पाठ, विष्णु जी होंगे प्रसन्न</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5705</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5705</guid>
<description><![CDATA[ Amalaki Ekadashi: प्राचीन समय में वैदिक नाम का एक नगर था. उस नगर में ब्राह्मण, वैश्य, क्षत्रिय, शूद्र, चारों वर्ण के मनुष्य प्रसन्तापूर्वक निवास करते थे. नगर में सदैव वेदध्वनि गूँजा करती थी.उस नगरी में कोई भी पापी, दुराचारी, नास्तिक आदि न था.
उस नगर में चैत्ररथ नामक चन्द्रवंशी राजा राज्य करता था. वह उच्चकोटि का विद्वान तथा धार्मिक प्रवृत्ति का व्यक्ति था, उसके राज्य में कोई भी निर्धन एवं लोभी नहीं था. उस राज्य के सभी लोग भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थ. वहां के छोटे-बड़े सभी निवासी प्रत्येक एकादशी का उपवास करते थे.
एक बार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की आमलकी नामक एकादशी आयी. उस दिन राजा एवं प्रत्येक प्रजाजन, वृद्ध से बालक तक ने आनन्दपूर्वक उस एकादशी को उपवास किया. उस मन्दिर में रात को सभी ने जागरण किया. रात के समय उस स्थान पर एक बहेलिया आया. वह महापापी तथा दुराचारी था.
अपने कुटुम्ब का पालन वह जीव-हिंसा करके करता था. वह भूख-प्यास से अत्यन्त व्याकुल था, कुछ भोजन पाने की इच्छा से वह मन्दिर के एक कोने में बैठ गया. उस स्थान पर बैठकर वह भगवान विष्णु की कथा तथा एकादशी माहात्म्य सुनने लगा. इस प्रकार उस बहेलिये ने सम्पूर्ण रात्रि अन्य लोगों के साथ जागरण कर व्यतीत की.
प्रातःकाल सभी लोग अपने-अपने निवास पर चले गये. इसी प्रकार वह बहेलिया भी अपने घर चला गया और वहाँ जाकर भोजन किया. कुछ समय व्यतीत होने के पश्चात उस बहेलिये की मृत्यु हो गयी. हालांकि, जीव-हिंसा करने के कारण वह घोर नरक का भागी था, परन्तु उस दिन आमलकी एकादशी व्रत तथा जागरण के प्रभाव से उसने राजा विदुरथ के यहाँ जन्म लिया. उसका नाम वसुरथ रखा गया. बड़ा होने पर वह चतुरङ्गिणी सेना सहित तथा धन-धान्य से युक्त होकर दस सहस्र ग्रामों का सञ्चालन करने लगा.
एक समय राजा वसुरथ शिकार खेलने के लिये गया. दैवयोग से वन में वह रास्ता भटक गया और दिशा का ज्ञान न होने के कारण उसी वन में एक वृक्ष के नीचे सो गया. कुछ समय पश्चात पहाड़ी डाकू वहाँ आये और राजा को अकेला देखकर &#039;मारो-मारो&#039; चिल्लाते हुये राजा वसुरथ की ओर दौड़े। वह डाकू कहने लगे कि, &quot;इस दुष्ट राजा ने हमारे माता-पिता, पुत्र-पौत्र आदि समस्त सम्बन्धियों को मारा है तथा देश से निकाल दिया. अब हमें इसे मारकर अपने अपमान का बदला लेना चाहिये.&quot;
इतना कह वे डाकू राजा को मारने लगे और उस पर अस्त्र-शस्त्र का प्रहार करने लगे. डाकुओं के वह अस्त्र-शस्त्र राजा के शरीर से स्पर्श होते ही नष्ट होने लगे तथा राजा को वह शस्त्र पुष्पों के समान प्रतीत होने लगे. कुछ समय पश्चात् प्रभु इच्छा से उन डाकुओं के अस्त्र-शस्त्र उन्हीं पर प्रहार करने लगे, जिससे वे सभी डाकू मूर्च्छित हो गये.
उसी समय राजा के शरीर से एक दिव्य देवी प्रकट हुयी. वह देवी अत्यन्त सुन्दर थी तथा सुन्दर वस्त्रों तथा आभूषणों से अलङ्कृत थी. उसकी भृकुटी टेढ़ी थी. उसके नेत्रों से क्रोध की भीषण लपटें निकल रही थीं. उस समय वे लपटें काल के समान प्रतीत हो रही थीं. उसने देखते-ही-देखते उन सभी डाकुओं का समूल नाश कर दिया.
नींद से उठने पर राजा ने वहां अनेक डाकुओं को मृत पड़ा देखा. वह सोचने लगा किसने इन्हें मारा? इस वन में कौन मेरा हितैषी रहता है? राजा वसुरथ ऐसा विचार कर ही रहा था कि उसी समय आकाशवाणी हुयी - &quot;हे राजन! इस संसार में भगवान विष्णु के अतिरिक्त तेरी रक्षा कौन कर सकता है!&quot;
इस आकाशवाणी को सुनकर राजा ने भगवान विष्णु को स्मरण कर उन्हें प्रणाम किया, तत्पश्चात् अपने नगर को वापस आ गया और सुखपूर्वक राज्य करने लगा.
महर्षि वशिष्ठ ने कहा- &quot;हे राजन! यह सब आमलकी एकादशी के व्रत का प्रभाव था, जो मनुष्य एक भी आमलकी एकादशी का व्रत करता है, वह प्रत्येक कार्य में सफल होता है तथा अन्त में वैकुण्ठ धाम को पाता है. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/25/b33a8004671a5c3b37a308998fd79d361772016773057499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Amalaki, Ekadashi, 2026:, आमलकी, एकादशी, की, संपूर्ण, व्रत, कथा, का, करें, पाठ, विष्णु, जी, होंगे, प्रसन्न</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Rangbhari Ekadashi 2026: रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ को चढ़ेगा गुलाल, होगी रंगोत्सव की शुरुआत</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5706</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5706</guid>
<description><![CDATA[ Rangbhari Ekadashi 2026 in Kashi Vishwanath: सात वार और नौ त्योहारों का शहर काशी विश्व प्रसिद्ध है. यहां स्थिति बाबा विश्वनाथ के मंदिर दर्शन के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु आते हैं. 27 फरवरी 2026 को रंगभरी एकादशी (आमलकी एकादशी) पर काशी में रंगोत्सव की शुरुआत हो जाएगी. परंपरा के अनुसार काशी विश्वनाथ में रंगभरी एकादशी पर अबीर-गुलाल चढ़ाया जाएगा.
बाबा विश्वनाथ को चढ़ेगा गुलाल
होली रंगों का त्योहार है. इसे हिंदू धर्म में सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. बात जब होली उत्सव की आती है तो काशी नगरी की होली और भी खास हो जाती है. क्योंकि यहां रंगोत्सव की शुरुआत रंगभरी एकादशी से ही हो जाती है. काशीवासी रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ को अबीर-गुलाल अर्पित करते हैं और होली खेलने की अनुमति मांगते हैं. रंगभरी एकादशी पर काशी विश्वनाथ को गुलाल अर्पित करने की परंपरा लगभग 360 साल पुरानी मानी जाती है. परंपरा की शुरुआत विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत कुलपति तिवारी के परिवार द्वारा की गई थी.
27 फरवरी 2026 को रंगभरी एकादशी
ज्योतिषार्य और भविष्यवक्ता अनीष व्यास के अनुसार, शुक्रवार 27 फरवरी 2026 को रंगभरी एकादशी रहेगी, जिसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं. फाल्गुन शुक्ल पक्ष इस एकादशी पर हरिश्चंद्र घाट पर मसाने की होली भी खेली जाती है, जिसमें नागा साधु और किन्नर समुदाय शामिल होते हैं. पौराणिक मान्यता है कि, रंगभरी एकादशी पर बाबा विश्वनाथ मां गौरा का गौना कराने के लिए ससुराल आते हैं.
शिव-गौरा के गौना की अनूठी परंपरा
रंगभरी एकादशी पर शिव-गौरा के गौना की परंपरा भी है. मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर विवाह के बाद रंगभरी एकादशी के दिन माता पार्वती का &amp;lsquo;गौना&amp;rsquo; कराने शिव अपने ससुराल जाते हैं. रंगभरी एकादशी पर काशी विश्वनाथ मंदिर समेत तिलभांडेश्वर और गौरी केदारेश्वर मंदिर में शृंगार होता है और पालकी यात्रा निकाली जाती है. इन्हीं कारणों से रंगभरी एकादशी के पर्व को रंगोत्सव, शिव-शक्ति के मिलन और गृहस्थ जीवन की मंगल कामना का प्रतीक माना जाता है.
ये भी पढ़ें: Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी पर करें पीले चंदन, तुलसी और शंख का उपाय, चमकेगा भाग्य


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/26/1c2dd5565476e28e10e32c6d4c1603fa1772073464061466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Rangbhari, Ekadashi, 2026:, रंगभरी, एकादशी, पर, बाबा, विश्वनाथ, को, चढ़ेगा, गुलाल, होगी, रंगोत्सव, की, शुरुआत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Tilak: माथे पर U&#45;आकार का तिलक क्यों लगाया जाता है ? क्या है इसका महत्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5704</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5704</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/26/e4c9f2c9bd5c770ac6dd7542e5df55b71772079259360499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 10:58:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Tilak:, माथे, पर, U-आकार, का, तिलक, क्यों, लगाया, जाता, है, क्या, है, इसका, महत्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Shri Navgrah Pidahar Stotra: होलाष्टक शुरू, करें नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ, उग्र ग्रह होंगे शांत</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5677</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5677</guid>
<description><![CDATA[ Holashtak 2026 Shri Navgrah Pidahar Stotra:&amp;nbsp;फाल्गुन मास में होली से पहले आने वाले 8 दिनों के समय को होलाष्टक कहा जाता है. होलाष्ठ के आठ दिनों की अवधि विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि के लिए शुभ नहीं मानी जाती है. इस साल 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू हो चुका है और 3 मार्च को समाप्त होगा.
ज्योतिष के अनुसार होलाष्टक के समय ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल रहती है. ग्रहों के उग्र होने के कारण मानसिक तनाव, विवाद, आर्थिक रुकावट और स्वास्थ्य संबंधी जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए इस समय नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करना लाभकारी हो सकता है.
नवग्रह पीड़ाहर स्त्रोत महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जो ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति और पीड़ा को दूर करता है. इसमें हर श्लोक के द्वारा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, शुक्र, शनि, राहु जैसे ग्रहों की पीड़ा को कम करने की प्रार्थना की गई है. मान्यता है कि, होलाष्टक के समय ग्रह उग्र होते हैं और नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं. इसलिए होलाष्टक की अवधि में आप भी इसका पाठ कर सकते हैं. &amp;nbsp;
नवग्रह पीड़ाहर स्त्रोत हिंदी अर्थ सहित (Shri Navgrah Pidahar Stotra in Hindi)
ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः। विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे रविः ॥1॥अर्थ-ग्रहों में पहले परिगणित, अदिति पुत्र और विश्व के रक्षक सूर्य विषम स्थानजनित मेरी पीड़ा का हरण करें ।।1।।रोहिणीशः सुधांशुश्च सुधागात्रः सुधाशनः। विषमस्थानसम्भूतं पीड़ां हरतु मे विधुः ॥2॥अर्थ-दक्षकन्या नक्षत्र रूपा देवी रोहिणी के स्वामी, अमृतमय स्वरूप वाले, अमतरूपी शरीर वाले और अमृत का पान कराने वाले चंद्रमा विषम स्थानजनित मेरी पीड़ा का हरण करें ।।2।।भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत्सदा। वृष्टिकृद् वृष्टिहर्ता च पीड़ां हरतु मे कुजः ॥3॥अर्थ-भूमि के पुत्र, महान तेजस्वी, वृष्टि करने वाले तथा वृष्टि का हरण करने वाले मंगल मेरी पीड़ा का हरण करें ।।3।।
उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युतिः। सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीड़ां हरतु मे बुधः ॥4॥अर्थ-महान द्युति से संपन्न, सूर्य के प्रिय, विद्वान और चन्द्रमा पुत्र बुध मेरी पीड़ा का निवारण करें ।।4।।
देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः। अनेकशिष्यसम्पूर्णः पीड़ां हरतु मे गुरुः ॥5॥अर्थ-सर्वदा लोक कल्याण में निरत, देवताओं के मंत्री, विशाल नेत्रों वाले और अनेक शिष्यों से युक्त बृहस्पति मेरी पीड़ा का हरण करें ।।5।।
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामतिः। प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीड़ां हरतु मे भृगुः ॥6॥अर्थ-दैत्यों के मंत्री और गुरुओं जीवन देने वाले, तारा ग्रहों के स्वामी, बुद्धि से संपन्न शुक्र मेरी पीड़ा का हरण करें ।।6।।
सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः। मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु मे शनिः ॥7॥अर्थ-सूर्य पुत्र, दीर्घ देह, विशाल नेत्र, मंद गति की चाल, शिव के शिष्य और प्रसन्नात्मा शनि मेरी पीड़ा का निवारण दूर करें ।।7।।अनेक रूपवर्णैश्च शतशोऽथ सहस्रशः। उत्पातरूपो जगतां पीड़ां हरतु मे तमः ॥8॥अर्थ-विविध रूप और वर्ण वाले, सैकड़ों-हजारों आंखों वाले, जगत के लिए उत्पातस्वरूप, तमोमय राहु मेरी पीड़ा का हरण करें ।।8।।
महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबलः। अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीड़ां हरतु मे शिखी ॥9॥अर्थ-महान शिरा &amp;nbsp;से संपन्न, विशाल मुख और बड़े दांत, बिना शरीर और ऊपर की ओर केश वाले केतु मेरी पीड़ा का हरण करें।।9।।
ये भी पढ़ें: Holashtak 2026: सावधान! आज से होलाष्टक का अशुभ काल शुरू, 8 दिनों तक लॉक हो जाएंगे ये काम





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/24/13b10d7cd396c4756917a068b7b5e5d41771911778017466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:16:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Shri, Navgrah, Pidahar, Stotra:, होलाष्टक, शुरू, करें, नवग्रह, पीड़ाहर, स्तोत्र, का, पाठ, उग्र, ग्रह, होंगे, शांत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को सुबह 6.20 से लगेगा ग्रहण का सूतक, कब बनाए खाना, ज्योतिषाचार्य से जानें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5678</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5678</guid>
<description><![CDATA[ Chandra Grahan 2026: फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा संवत 2082 तदनुसार 3 मार्च 2026 (मंगलवार) को खग्रास चंद्रग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है. पंचांगों के अनुसार ग्रहण का प्रारंभ भारतीय समयानुसार दोपहर 3:19 बजे, मध्य 5:04 बजे और मोक्ष शाम 6:47 बजे होगा, हालांकि भारत में ग्रहण का आरंभ प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देगा, क्योंकि यह चंद्रोदय से पूर्व ही शुरू हो जाएगा. चंद्रोदय के बाद अधिकांश स्थानों पर केवल ग्रहण का मोक्ष ही दिखाई देगा.
भारत में इन 4 जगहों पर साफ दिखेगा ग्रहण
ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि पर होगा. पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड और मणिपुर में ग्रहण का दृश्य प्रभाव अधिक स्पष्ट रहने की संभावना जताई गई है, जबकि अन्य स्थानों पर आंशिक रूप से मोक्ष दिखाई देगा. यह ग्रहण भारत के अलावा यूरोप, एशिया, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के कई हिस्सों में भी देखा जा सकेगा.
सुबह 6.20 से शुरू होगा सूतक
सुबह 6:20 बजे से सूतक आरंभ होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले से प्रभावी हो जाता है. इसी के तहत 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे से सूतक काल प्रारंभ हो जाएगा. सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रखने, भोजन न पकाने और धार्मिक सावधानियां बरतने की परंपरा है.
ऐसे में सूतक शुरू होने से पहले ही खाना बना लें और उसमें तुलसीदल डाल दें. हालांकि बालक, वृद्ध और रोगियों के लिए ग्रहण स्पर्श से 3 घंटे पूर्व यानी दोपहर 12:20 बजे से सूतक मानने की सलाह दी गई है.&amp;nbsp;
2 मार्च को होलिका दहन, 4 मार्च को धुलेंडी मनाई जाएगी
पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को होने के कारण परंपरा अनुसार होलिका दहन किया जाएगा। 4 मार्च 2026 (बुधवार) को धुरेड़ी (धुलेंडी) का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन लोग रंग-गुलाल लगाकर, मिठाइयां बांटकर और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर होली का उत्सव मनाएंगे।
ग्रहण के संयोग के कारण इस बार होली का पर्व धार्मिक दृष्टि से और भी विशेष माना जा रहा है।
राशियों पर ग्रहण का प्रभाव

मेष: चिंता
वृष: व्यथा
मिथुन: लक्ष्मी कृपा
कर्क: क्षति
सिंह: कष्ट/घात
कन्या: हानि
तुला: लाभ
वृश्चिक: सुख
धनु: मानहानि
मकर: मृत्यु तुल्य कष्ट
कुंभ: स्त्री पीड़ा
मीन: सौख्य




नोट - विशेष रूप से पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में जन्मे जातकों और सिंह राशि वालों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. जिन राशियों के लिए ग्रहण अशुभ बताया गया है, उन्हें ग्रहण का दर्शन न करने की सलाह दी गई है



ग्रहण काल में क्या करें, क्या न करें

ग्रहण से पूर्व स्नान करें.
ग्रहण काल में जप, हवन, मानसिक पूजन, श्राद्ध और तर्पण का विशेष महत्व है.
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
ग्रहण काल में भोजन, शयन और मूर्ति स्पर्श वर्जित माना गया है.
ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान-दान कर पूजा करना शुभ बताया गया है. गंगा, यमुना, सरयू या नर्मदा जैसे पवित्र जलाशयों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है. दान में अन्न, वस्त्र, गुड़, तेल, तांबे का पात्र, स्वर्ण-रजत आदि दान करने की परंपरा है.

ज्योतिष से जानें ग्रहण में क्या करें
आचार्य पंडित सोहन शास्त्री (परमहंसी गंगा आश्रम, झोतेश्वर, मध्य प्रदेश) के अनुसार ग्रहण काल में किए गए मंत्र जाप का फल कई गुना बढ़ जाता है. मान्यता है कि ग्रहण काल में जितनी अवधि तक जप किया जाए, उतना ही फल कई गुना होकर प्राप्त होता है.
Holika Dahan 2026: घर खरीदने में आ रही है दिक्कत, तो होलिका दहन पर करें जौ का ये उपाय


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/24/ba106d62b7bb07e307fc8259fe50889e1771946312868499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:16:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Chandra, Grahan, 2026:, मार्च, को, सुबह, 6.20, से, लगेगा, ग्रहण, का, सूतक, कब, बनाए, खाना, ज्योतिषाचार्य, से, जानें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Panchang: आज 25 फरवरी 2026 का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल समय देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5676</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5676</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 25 फरवरी 2026: आज 25 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि और बुधवार है. इस दिन गणपति जी और मां दुर्गा की खास पूजा का विधान है. मान्यता है कि जो नवमी तिथि पर दुर्गा चालीसा पाठ करता है साथ ही कन्याओं को भेंट में कुछ दान देते हैं तो उसके कष्ट माता रानी की कृपा से दूर होते हैं.&amp;nbsp;
25 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 25 February 2026)



तिथि

अष्टमी (24 फरवरी 2026, सुबह 7.01 - 26 फरवरी 2026, सुबह 2.40)



वार
बुधवार


नक्षत्र
रोहिणी


योग
विष्कंभ, सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.00


सूर्यास्त
सुबह 6.10


चंद्रोदय
सुबह 11.52


चंद्रोस्त
सुबह 2.46, 26 फरवरी


चंद्र राशि
वृषभ



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.50 - सुबह 9.42


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 7.52 - देर रात 12.34



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 12.34 - दोपहर 2.00


यमगण्ड काल
सुबह 8.16 - सुबह 9.42


गुलिक काल
सुबह 11.08 - दोपहर 12.34


आडल योग
दोपहर 1.38 - सुबह 6.49, 26 फरवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 25 February 2026)



सूर्य
कुंभ


चंद्रमा
वृषभ


मंगल
कुंभ


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
कुंभ


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



मिथुन राशि
युवाओं को करियर संबंधी कोई शुभ सूचना मिलने की संभावना है.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



वृश्चिक राशि
तनाव का असर पाचन तंत्र पर पड़ सकता है। हेल्दी खानपान लें और तनाव कम करने के लिए योग का सहारा लें



FAQs: 25 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





धार्मिक मान्यता है कि बुधवार के दिन एक मुट्ठी चावल को मंदिर में या किसी जरूरतमंद को दान करने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, रवि और विष्कंभ योग बन रहा है.
Holika Dahan 2026: घर खरीदने में आ रही है दिक्कत, तो होलिका दहन पर करें जौ का ये उपाय




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/25/db6ed52fd80d4facd88b396954cfc5aa1771966027114499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:16:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Panchang:, आज, फरवरी, 2026, का, पंचांग, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, समय, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>काशी में रंगभरी एकादशी की शुरुआत, भगवान विश्वनाथ और माता गौरा का अनोखा रंग उत्सव! देखें फोटो</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5674</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5674</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/25/a52cf486aba609d740e4ede2769deb1f17719977015671092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:16:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>काशी, में, रंगभरी, एकादशी, की, शुरुआत, भगवान, विश्वनाथ, और, माता, गौरा, का, अनोखा, रंग, उत्सव, देखें, फोटो</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holika Dahan 2026 Upay: होलिका दहन की राख है बड़े काम की, इसके 5 उपाय तुरंत दिखाते हैं असर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5675</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5675</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/24/26ed7952616f3c3690242f94356b1f541771954553123499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 11:16:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holika, Dahan, 2026, Upay:, होलिका, दहन, की, राख, है, बड़े, काम, की, इसके, उपाय, तुरंत, दिखाते, हैं, असर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026: 24 फरवरी को रमजान का छठा रोजा, दिल्ली, मुंबई समेत देखें 15 शहरों के सहरी&#45;इफ्तार का समय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5648</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5648</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan 2026 Day 6 Roza Sehri iftar timing: रमजान के मुकद्दस महीने में रोजेदारे पूरी आस्था के साथ रोजा रख रहे हैं और नमाज, कुरान,जकात के जरिए अल्लाह से जुड़ रहे हैं. रमजान में रोजा रखना हर मुसलमान पर फर्ज है. रमजान के 30 दिनों के रोजे के तीन अशरों (रहमत, बरकत और मगफिरत) में बांटा गया है.
रमजान में रोजा रखना संयम, नेकी और आस्था को दर्शाता है और अल्लाह के करीब लाता है. रोजेदार रमजान शुरू होने के बाद नियमित रूप से हर दिन सुबह फज्र की अजान से पहले सहरी करते हैं और शाम में मगरिब की अजान से पहले रोजा खोलते हैं. 19 फरवरी 2026 से शुरू हुआ रमजान का पाक महीना अब छठे रोजे तक पहुंचने वाला है.
छठे रोजा का महत्व
छठा रोजा ईमानदारी और फरमाबर्दारी की सीख देता है. कुरान के 25वें पारे की सूरह शूरा की 43वीं आयात में जिक्र है-&amp;nbsp;&amp;lsquo;व लमन सबरा वगफरा इन्ना ज़ालिका लमिन अज़मिल उमूर&amp;rsquo;.&amp;nbsp;यानी जो सब्र और रहम करने वाला है वह बुलंद मर्तबे और गरिमा वाले हैं. मुकम्मल ईमानदारी और अल्लाह की फरमाबर्दारी के साथ रखा गया रोजा रोजेदारों की पहचान है. रमजान के इस पाक महीने में जो रोजेदार सब्र, संयम, ईमानदारी और दया की कसौटी में खरा उतरता है वह अल्लाह का रहमत पा लेता है.
मंगलवार 24 फरवरी 2026 को 6 रमजान की तारीख रहेगी और इस दिन रोजेदार छठा रोजा रखेंगे. रोजा मुकम्मल होने के लिए सही समय पर सहरी और इफ्तार करना जरूरी है. इसलिए रोजेदार दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कानपुर, चैन्नई समेत अपने शहर के सहरी-इफ्तार का समय यहां देखें (24 February Sehri-Iftar Timing).



शहर का नाम (City Name)
&amp;nbsp;सेहरी समय (24 February Sehri Timing)
&amp;nbsp;इफ्तार समय (24 February Iftar Timing)






दिल्ली (Delhi)
05:32 AM
06:19 PM


नोएडा (Noida)
05:31 AM
06:18 PM


चेन्नई (Chennai)
05:15 AM
06:18 PM


लखनऊ (Lucknow)
05:17 AM
06:05 PM


पुणे (Pune)
05:43 AM
06:40 PM


मुंबई (Mumbai)
05:47 AM
06:43 PM


कोलकाता (Kolkata)
04:46 AM
05:39 PM


हैदराबाद (Hyderabad)
05:24 AM
06:22 PM


पटना (Patna)
04:48 AM
05:48 PM


भुवनेश्वर (Bhuvneshwar)
04:56 AM
05:51 PM


जयपुर (Jaipur)
05:37 AM
06:26 PM


इंदौर (Indore)
05:36 AM
06:29 PM


बेंगलुरु (bengaluru)
05:32 AM
06:19 PM


अहमदाबाद (Ahmadabad)
05:49 AM
06:41 PM


सूरत (Surat)
05:48 AM
06:42 PM


कानपुर (Kanpur)
05:19 AM
06:08 PM


जम्मू (Jammu)
05:41 AM
06:24 PM


रांची (Ranchi)
04:49 AM
05:50 PM


चंडीगढ़ (Chandigarh)
05:34 AM
06:19 PM



ये भी पढ़ें: Ramadan 2026: 23 फरवरी को रमजान का पांचवां रोजा, रोजेदार दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों का देखें सहरी




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/23/f1087d2d93e0b32f5c6b60d72b50a6741771822310885466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026:, फरवरी, को, रमजान, का, छठा, रोजा, दिल्ली, मुंबई, समेत, देखें, शहरों, के, सहरी-इफ्तार, का, समय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holika Dahan 2026: घर खरीदने में आ रही है दिक्कत, तो होलिका दहन पर करें जौ का ये उपाय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5645</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5645</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/23/c4b8912e57c9f923c2022b614465ac8b1771869196630499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holika, Dahan, 2026:, घर, खरीदने, में, आ, रही, है, दिक्कत, तो, होलिका, दहन, पर, करें, जौ, का, ये, उपाय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण में मृत्यु हो जाए तो क्या अंतिम संस्कार कर सकते हैं ? गुरुड़ पुराण में है ये नियम</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5646</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5646</guid>
<description><![CDATA[ Chandra Grahan 2026: इस साल 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण लग रहा है. ग्रहण को अशुभ समय माना जाता है. इस दौरान किसी भी तरह के पूजा-पाठ नहीं किए जातें. ऐसे में&amp;nbsp; ग्रहण वाले दिन यदी किसी की मृत्यु हो जाए तो अंतिम संस्कार कर सकते हैं या नहीं इसको लेकर शास्त्र क्या कहते हैं, क्या है नियम जान लें
हिंदू धर्म में मान्यता है कि मृतक का अंतिम संस्कार शीघ्र करने की प्रथा है, सेहत और आत्मा की आगे की यात्रा के लिए ये बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन कुछ खास मौकों पर जैसे पंचक में अंतिम संस्कार के नियम अलग हो जाते हैं. उसी तरह चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण में अंतिम संस्कार के नियम भिन्न हैं.
ग्रहण के दौरान अंतिम संस्कार करना सही या गलत
चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण की अवधि धार्मिक कार्य के लिए शुभ नहीं मानी जाती है. जब किसी की मृत्यु होती है आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए कुछ प्रारंभिक रस्में निभाई जाती है जैसे -

मृतक के सिरहाने एक तिल के तेल का दीपक जलाना
गंगाजल का छींटा मृतक के शरीर पर छिड़कना.
तुलसी का पत्ता मृतक के मुंह में रखना.
अंतिम संस्कार में अग्नि प्रज्जवलित करना आदि.

ग्रहण के दौरान पूजा की इन सामग्री को स्पर्श करने की मनाही होती है. धार्मिक मान्यता है कि इन रस्मों को किए बिना अंत्येष्टि की जाए तो आत्मा को मोक्ष प्राप्ति में बाधा आ सकती है. ऐसे में मान्यता अनुसार चंद्र ग्रहण या सूर्य ग्रहण के समय किसी का देहांत होता है तो अंतिम संस्कार की प्रक्रिया ग्रहण समाप्ति के बाद ही करना उचित है. पार्थिव शरीर
गरुड़ पुराण में क्या है नियम
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद शव का शीघ्र संस्कार करना चाहिए. आत्मा की गति के लिए दाह-संस्कार में अनावश्यक विलंब उचित नहीं माना गया है. इसलिए केवल ग्रहण होने के कारण अंतिम संस्कार को बहुत देर तक टालना शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता. परिस्थितियों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सकता है.
Chandra Grahan 2026: होली पर आपके शहर में कब और कितनी बजे दिखेगा चंद्र ग्रहण





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/23/9f6b26fb3d3963a27f9186c9dab0432f1771857787937499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Chandra, Grahan, 2026:, चंद्र, ग्रहण, में, मृत्यु, हो, जाए, तो, क्या, अंतिम, संस्कार, कर, सकते, हैं, गुरुड़, पुराण, में, है, ये, नियम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Panchang 24 February 2026: आज फाल्गुन का आखिरी मंगलवार, बजरंगबली की पूजा का मुहूर्त, राहुकाल, पूरा पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5647</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5647</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 24 फरवरी 2026: आज 24 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि और मंगलवार है. ये दिन शक्ति, सुरक्षा की प्राप्ति और संकट से पार पाने के लिए बहुत लाभदायक है. हनुमान जी की पूजा में &#039;ॐ हं हनुमंताय नमः मंत्र का जाप करना चाहिए. इसके प्रभाव से बजरंगबली भक्तों की विनती जल्द स्वीकार करते हैं.&amp;nbsp;
24 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 24 February 2026)



तिथि

सप्तमी (23 फरवरी 2026, सुबह 09.09 - 24 फरवरी 2026, सुबह 7.01)



वार
मंगलवार


नक्षत्र
कृत्तिका


योग
इंद्र, वैधृति, त्रिपुष्कर, सर्वार्थ सिद्धि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.00


सूर्यास्त
सुबह 6.10


चंद्रोदय
सुबह 10.58


चंद्रोस्त
रात 1.40, 25 फरवरी


चंद्र राशि
वृषभ



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 9.43 - दोपहर 2.00


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 7.52 - रात 9.26



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 3.26 - शाम 4.52


यमगण्ड काल
सुबह 9.43 - सुबह 11.09 -दोपहर 12.34


गुलिक काल
दोपहर 12.34 - दोपहर 2.00


आडल योग
सुबह 6.51 - दोपहर 3.07


भद्रा काल
सुबह 7.01 - शाम 5.56



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 24 February 2026)



सूर्य
कुंभ


चंद्रमा
वृषभ


मंगल
मकर


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
कुंभ


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कुंभ राशि
भूमि या भवन खरीदने के योग बन रहे हैं



कौन सी राशियां संभलकर रहें



सिंह राशि
लव लाइफ में आएगी परेशानी, संतान से दूर रहेगी.



FAQs: 24 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





एक तांबे के सिक्के पर लाल या नारंगी सिंदूर से टीका लगाएं और इसे हनुमानजी के मंदिर में जाकर अर्पित कर दें. धन प्राप्ति के लिए ये उपाय कारगर है.





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, त्रिपुष्कर और इंद्र योग बन रहा है.
Chandra Grahan 2026: होली पर आसमान में दिखेगा &#039;बल्ड मून&#039;, देखें दिल्ली-पटना समेत बाकी शहरों में चंद्र ग्रहण का समय




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/24/fa8ea3f78dcbab59d2d57b73a2c1a02f1771877474881499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Panchang, February, 2026:, आज, फाल्गुन, का, आखिरी, मंगलवार, बजरंगबली, की, पूजा, का, मुहूर्त, राहुकाल, पूरा, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Falgun Purnima 2026: 3 मार्च को चंद्र ग्रहण 4 मार्च को होली, फिर कब रखें पूर्णिमा का व्रत</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5644</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5644</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/24/d8786b3a772ef9b1c30901940d58b2b31771905419057466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 24 Feb 2026 11:21:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Falgun, Purnima, 2026:, मार्च, को, चंद्र, ग्रहण, मार्च, को, होली, फिर, कब, रखें, पूर्णिमा, का, व्रत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026: 23 फरवरी को रमजान का पांचवां रोजा, रोजेदार दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों का देखें सहरी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5618</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5618</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan 2026 Day 5 Roza Sehri iftar timing: भारत में इस समय इस्लामी उपवास का महीना यानी माह-ए-रमजान चल रहा है. चारों तरफ रमजान का नूर छाया हुआ है. रोजा रखकर लोग रात में तरावीह की नमाज अदा कर रहे हैं. रमजान इस्लामिक हिजरी कैलेंडर का नौवां सबसे पाक महीना होता है, जिसमें मुसलमान पूरे महीने रोजा रखते हैं. भारत में रमजान की शुरुआत 19 फरवरी 2026 से हो चुकी है.
रविवार 22 फरवरी को रोजेदारों ने चौथा रोजा पूरा कर लिया है. इसके बाद सोमवार, 23 फरवरी 2026 को रमजान का पांचवा रोजा रखा जाएगा. रमजान ऐसा समय होता है, जब मुसलमान एक साथ इस्लाम के तीन फर्ज (नमाज, रोजा और जकात) को पूरा करते हैं. इसलिए यह महीना दुनियाभर के मुसलमानों के लिए खास महत्व रखता है.
पांचवे रोजा का महत्व
इस्लाम के मुताबिक, पांचवां रोजा दुआ का दरख्त यानी पेड़ है, जो अल्लाह की इबादत करने का सलीका सिखाता है. तक्वा और सदाक़त रोजे की पाकीजगी का सलीका है और ऐसे पाकीजा रोजा को रोजेदारों के लिए दुआ का दरख्त माना गया है. 23 फरवरी 2026 को पांचवा रोजा पूरे इमान और नियम के साथ पूरा हो ऐसी दुआ है. लेकिन रोजा मुकम्मल होने के लिए सही समय पर सहरी और इफ्तार करना जरूरी है. इसलिए रोजेदार दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कानपुर, चैन्नई समेत अपने शहर के सहरी-इफ्तार का समय यहां देखें (23 February Sehri-Iftar Timing)



शहर का नाम (City Name)
&amp;nbsp;सेहरी समय (23 February Sehri Timing)
&amp;nbsp;इफ्तार समय (23 February Iftar Timing)






दिल्ली (Delhi)
05:33 AM
06:18 PM


नोएडा (Noida)
05:32 AM
06:17 PM


चेन्नई (Chennai)
05:16 AM
06:18 PM


लखनऊ (Lucknow)
05:18 AM
06:05 PM


पुणे (Pune)
05:44 AM
06:39 PM


मुंबई (Mumbai)
05:48 AM
06:43 PM


कोलकाता (Kolkata)
04:47 AM
05:38 PM


हैदराबाद (Hyderabad)
05:25 AM
06:22 PM


पटना (Patna)
04:49 AM
05:48 PM


भुवनेश्वर (Bhuvneshwar)
04:56 AM
05:50 PM


जयपुर (Jaipur)
05:38 AM
06:25 PM


इंदौर (Indore)
05:37 AM
06:28 PM


बेंगलुरु (bengaluru)
05:27 AM
06:28 PM


अहमदाबाद (Ahmadabad)
05:50 AM
06:41 PM


सूरत (Surat)
05:49 AM
06:41 PM


कानपुर (Kanpur)
05:20 AM
06:07 PM


रांची (Ranchi)
04:59 AM
05:50 PM



ये भी पढ़ें: Ramadan 2026: 22 फरवरी को रमजान का चौथा रोजा, रोजेदार दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों का देखें सहरी-इफ्तार समय



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/22/3d12ea6721b9b3b7f8d58b60de4336c41771759859396466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026:, फरवरी, को, रमजान, का, पांचवां, रोजा, रोजेदार, दिल्ली, मुंबई, और, अन्य, शहरों, का, देखें, सहरी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026: रमजान में हर तरफ इबादत का दौर, रोजेदारों ने चौथा रोजा पूरा कर अल्लाह को किया याद</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5617</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5617</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan 2026: रोजेदार बंदों ने आज 22 फरवरी 2026 को माह-ए-रमजान का चौथा रोजा रखकर अल्लाह के हुक्म को पूरा किया. मस्जिद व घरों में रौनक है. चारों तरफ कुरआन-ए-पाक पढ़ा जा रहा है. पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम व उनकी आल पर दुरूद ओ सलाम का नजराना पेश किया जा रहा है. मस्जिदों में बच्चे, नौजवान व बुजुर्ग नमाज अदा कर रहे हैं. वहीं घरों में महिलाएं इबादत, तिलावत के साथ खुद रोजा रखकर सहरी-इफ्तारी व खाना भी पका रही है और बाजार से खरीदारी भी कर रही है.
दर्जियों की दुकानों पर लोग ईद का कपड़ा सिलवाने पहुंच रहे हैं. बाजार गुलजार होता जा रहा है. सेवई, खजूर, टोपी, इस्लामी किताब, तस्बीह, इत्र की मांग बढ़ गई है. रमजान की सुबह-शाम नूरानी है. इफ्तार के समय का नजारा तो बहुत ही प्यारा है, जब एक दस्तरख्वान पर अमीर-गरीब एक होकर अल्लाह की हम्द बयां कर रोजा खोल रहे हैं. तरावीह की नमाज में भीड़ उमड़ रही है. तरावीह नमाज में कुरआन शरीफ के दस तो कहीं पंद्रह पारे मुकम्मल हो चुके हैं. रहमत के अशरे में चंद दिन गुजर चुके हैं. रहमत के अशरे के बाद मगफिरत का अशरा शुरू होगा. रमजानुल मुबारक का हर पल हर लम्हा कीमती है.
माह-ए-रमजान में नाजिल हुआ कुरआन-ए-पाक : मुफ्ती अख्तर हुसैन&amp;nbsp;
मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने बताया कि रमजान के इस मुकद्दस महीने में कुरआन-ए-पाक नाजिल हुआ. कुरआन-ए-पाक का पढ़ना देखना, छूना, सुनना सब इबादत में शामिल है. कुरआन-ए-पाक पूरी दुनिया के लिए हिदायत है. हमें कुरआन-ए-पाक के मुताबिक बताए उसूलों पर जिंदगी गुजारनी चाहिए. अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर कुरआन-ए-पाक 23 साल में नाजिल हुआ. कुरआन-ए-पाक पर अमल करके ही पूरी दुनिया में अमन ओ शांति कायम की जा सकती है. पूरा कुरआन-ए-पाक एक दफा इकट्ठा नहीं नाजिल हुआ बल्कि जरूरत के मुताबिक 23 वर्षों में थोड़ा-थोड़ा नाजिल हुआ.
कुरआन-ए-पाक के किसी एक हर्फ लफ्ज या नुक्ते को बदलना मुमकिन नहीं. अगली किताबें नबियों को ही जबानी याद होती थी लेकिन कुरआन-ए-पाक का यह मोजजा है कि मुसलमानों का बच्चा-बच्चा उसको याद कर लेता है. माह-ए-रमजान में हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम पर सहीफे 3 तारीख को उतारे गए. हजरत दाऊद अलैहिस्सलाम को जबूर 18 या 21 रमजान को मिली और हजरत मूसा अलैहिस्सलाम को तौरेत 6 रमजान को मिली. हजरत ईसा अलैहिस्सलाम को इंजील 12 रमजान को मिली.
मुसलमान भाईयों की जरूरतों का भी ख्याल रखें : मौलाना फिरोज
मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर के इमाम मौलाना फिरोज निजामी ने कहा कि रमजान का महीना हर साल रहमत, बरकत, और मगफिरत का न मिटने वाला खजाना लेकर हमारे बीच आता है. इस महीने का एक खास मकसद यह है कि हम परहेजगार बन जाएं. इस मुबारक महीने की कुछ ऐसी अहम जिम्मेदारियां हैं जिसे पूरा करना हर खास&amp;zwnj; ओ आम मुसलमान का दीनी फरीजा है.
रोजे की हालत में भूख व प्यास के एहसास के जरिया हमें अपने आस-पास के मुसलमान भाईयों की जरूरतों का भी ख्याल करना चाहिए. रोजा हमें यह तालीम देता है कि हम खुद ही लजीज खानों और शर्बतों से पेट न भरें बल्कि अपने गरीब मुफलिस, भूखे और खाली हाथ मुसलमान भाईयों की जरूरतों का भी ख्याल रखते हुए उनकी हरसंभव मदद करें.
सेहत को नुकसान पहुंचने का खतरा हो तो रोजा छोड़ सकती है गर्भवती महिला : उलमा किराम&amp;nbsp;
रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर रविवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा. उलमा किराम ने कुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया.
1. सवाल: हामिला (गर्भवती) महिला के लिए रोजे का क्या हुक्म है?जवाब: अगर हामिला (गर्भवती) महिला को रोजा रखने की वजह से खुद की या बच्चे की सेहत को नुकसान पहुंचने का खतरा हो तो रोजा छोड़ने की इजाजत है. हां बाद में इनकी कजा करना जरूरी है.
2. सवाल : रोजे की हालत में आंख में दवा डालना कैसा?&amp;nbsp;जवाब : रोजे की हालत में आंख में दवा डालना जायज है, इससे रोजा नहीं टूटेगा, अगरचे उसका जायका हलक में महसूस हो.
3. सवाल : रोजे की हालत में जख्म पर मरहम या दवा लगा सकते हैं?&amp;nbsp;जवाब : हां। लगा सकते हैं.&amp;nbsp;
4. सवाल : इंजेक्शन के ज़रिए खून निकाला तो वुजू टूट जाएगा?&amp;nbsp;जवाब : हां। वुजू टूट जाएगा.
ये भी पढ़ें: Ramadan 2026: रमजान में अल्लाह की रजा में गुजर रहा दिन, जकात और गरीबों की मदद को भी बढ़ रहे रोजेदार के हाथ




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/22/28815ac338e8bac51a9b2108dc85ce521771773932158466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026:, रमजान, में, हर, तरफ, इबादत, का, दौर, रोजेदारों, ने, चौथा, रोजा, पूरा, कर, अल्लाह, को, किया, याद</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Panchang 23 February 2026: फाल्गुन शुक्ल षष्ठी का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5616</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5616</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 23 फरवरी 2026: आज 23 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि और सोमवार है. सोमवार को सफेद कपड़े पहनना ज्योतिष और धार्मिक रूप से बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन चंद्रमा से संबंधित है। सफेद रंग शांति, पवित्रता और मन को स्थिर रखने का प्रतीक है, जो तनाव को दूर करता है
23 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 23 February 2026)



तिथि

षष्ठी (22 फरवरी 2026, सुबह 11.00 - 23 फरवरी 2026, सुबह 09.09)



वार
सोमवार


नक्षत्र
भरणी


योग
ब्रह्म, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.00


सूर्यास्त
सुबह 6.10


चंद्रोदय
सुबह 10.11


चंद्रोस्त
रात 12.30, 24 फरवरी


चंद्र राशि
मेष



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


अमृत
सुबह 6.52 - सुबह 8.18


शुभ
सुबह 9.43 - सुबह 11.09


शाम का चौघड़िया


चर
शाम 6.16 - रात 7.51



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 8.18 - सुबह 9.43


यमगण्ड काल
सुबह 11.09 -दोपहर 12.34


गुलिक काल
दोपहर 2.00 - दोपहर 3.25


आडल योग
शाम 4.43 - सुबह 6.51, 24 फरवरी


विडाल योग
सुबह 6.52 - शाम 4.33



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 23 February 2026)



सूर्य
कुंभ


चंद्रमा
मेष


मंगल
मकर


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
कुंभ


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



मिथुन राशि
&amp;nbsp;यदि आप किसी संपत्ति में निवेश करने की योजना बना रहे हैं,तो भविष्य में वह आपको मन मुताबिक लाभ देने में कामयाब रहेगी.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



धनु राशि
यदि आपके परिवार में किसी वरिष्ठ सदस्य से कोई कलह चल रही है,तो उसे माफी मांग कर सुलझाना होगा.



FAQs: 23 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





सोमवार को दीपक में थोड़े चावल (अक्षत) डालकर जलाने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और मां लक्ष्मी का वास घर में होता है.





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन ब्रह्म और रवि योग बन रहा है.
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में पालकी पर आएंगी मां दुर्गा, हाथी पर करेंगी प्रस्थान, जानें किसका करेंगी कल्याण ?




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/23/d232b99721f7cb9141367661fa05af451771785964759499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Panchang, February, 2026:, फाल्गुन, शुक्ल, षष्ठी, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kartik Swami Murugan Temple: देवभूमि उत्तराखंड का अनोखा मंदिर, जहां अस्थियों की होती है पूजा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5614</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5614</guid>
<description><![CDATA[ Kartik Swami Murugan Temple: उत्तराखंड की पवित्र धरती को देवभूमि कहा जाता है, क्योंकि यहां कई मंदिर हैं. यहां स्थित मंदिर और तीर्थस्थल आस्था का केंद्र है. लेकिन उत्तराखंड में भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय को समर्पित एक ऐसा मंदिर है, जोकि अपनी अनोखी&amp;nbsp; आस्था के लिए प्रसिद्ध है.
कार्तिक स्वामी मंदिर
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के कनकचौरी गांव के निकट कार्तिक स्वामी मंदिर है. पहाड़ की चोटी पर स्थित यह मंदिर अपनी मनमोहक सुंदरता के लिए आकर्षक का केंद्र मानी जाती है. खासकर सावन और शिवरात्रि जैसे अवसरों पर मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान होते हैं. कार्तिक स्वामी मंदिर त्याग, प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है, जहां किसी मूर्ति या प्रतिमा की नहीं अस्थियों की पूजा होती है. जी हां, आपको भले ही सुनकर हैरानी हो रही है, लेकिन यह सत्य है कि, इस मंदिर में कोई मूर्ति स्थापित नहीं है. वहीं मंदिर का इतिहास करीब 200 वर्ष पुराना है.
दुनियाभर में प्रतिमा, शिला, पेड़, पहाड़ या नदी के रूप में पूजा होती है. लेकिन देवभूमि उत्तराखंड के कार्तिक स्वामी मंदिर (मुरुगन मंदिर) अपनी दिव्य आभा, पवित्रता और अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर में प्रतिमा के बजाय प्राकृतिक शिला है, जिसे कार्तिकेय की अस्थियां माना जाता है. स्कंद पुराण में वर्णित क्राउंट पर्वत पर स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर को वह स्थान माना जाता है, जहां भगवान कार्तिकेय ने ध्यान किया था.
कार्तिक स्वामी मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
कथा के अनुसार, एक बार गणेश और कार्तिकेय के बीच प्रतिस्पर्धा (प्रतियोगिता) हुई. भगवान गणेश से प्रतियोगिता में पराजित होने पर कार्तिकेय आहत होकर पहाड़ों पर चले गए और अपने माता-पिता शिव-पार्वती को प्रेम का प्रमाण देते हुए शरीर का त्याग कर दिया. इसलिए इस मंदिर को प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है.
ये भी पढ़ें: Panchgrahi Yog: होलाष्टक से पहले कुंभ राशि में 5 ग्रहों की टोली, पंचग्रही योग से दो राशियों पर मंडराया संकट !

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/23/8e51e645f621948ef659a5d8ecbed8c81771820502398466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kartik, Swami, Murugan, Temple:, देवभूमि, उत्तराखंड, का, अनोखा, मंदिर, जहां, अस्थियों, की, होती, है, पूजा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Laxmi Mandir: MP में मां लक्ष्मी का अनोखा मंदिर! यहां प्रसाद में देते हैं असली सोना&#45;धन</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5615</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5615</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/23/98f674b875bd264c03b1d6e78b880b051771788015045499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 23 Feb 2026 11:25:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Laxmi, Mandir:, में, मां, लक्ष्मी, का, अनोखा, मंदिर, यहां, प्रसाद, में, देते, हैं, असली, सोना-धन</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Panchang 20 February 2026: 20 फरवरी का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5586</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5586</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 20 फरवरी 2026: आज 20 फरवरी 2026 को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और शुक्रवार है. शुक्रवार को लक्ष्मी जी की पूजा के दौरान गुलाब के फूल में कपूर रखकर माता लक्ष्मी को अर्पित करें. इसके साथ ही कपूर डालकर दीपक जलाएं और मां लक्ष्मी की आरती करें. ऐसा करने से धन की देवी प्रसन्न होती हैं.
20 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 20 February 2026)



तिथि

तृतीया (19 फरवरी 2026, दोपहर 3.58 - 20 फरवरी 2026, दोपहर 2.38)



वार
शुक्रवार


नक्षत्र
उत्तर भाद्रपद


योग
साध्य, सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.00


सूर्यास्त
सुबह 6.10


चंद्रोदय
सुबह 8.24


चंद्रोस्त
रात 9.12


चंद्र राशि
मीन



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 6.55 - सुबह 11.10


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 9.25 - रात 11.00



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 11.10 - दोपहर 12.35


यमगण्ड काल
दोपहर 3.25 - शाम 4.50


गुलिक काल
सुबह 8.20 - सुबह 9.45


आडल योग
शाम 6.38 - रात 8.52


पंचक
पूरे दिन


विडाल योग
सुबह 6.55- सुबह 8.07


भद्रा काल
सुबह 1.51 -सुबह 6.54, 21 फरवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 20 February 2026)



सूर्य
कुंभ


चंद्रमा
मीन


मंगल
मकर


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
कुंभ


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



तुला राशि
राजनीति व सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए दिन फेवरेबल रहेगा. महिलाओं के लिए दिन शानदार रहेगा



कौन सी राशियां संभलकर रहें



मीन राशि
मौसम&amp;nbsp;के बदलने से आज बेचैनी थोड़ी बढ़ सकती है. खूब पानी पीए लाभ होगा.



FAQs: 20 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





धार्मिक मान्यता है कि शुक्रवार को कपूर को घी में डुबोकर जलाने से आर्थिक तंगी दूर होती है, जबकि कपूर और लौंग को मिलाकर घर में जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता&amp;nbsp;





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि, रवि योग और साध्य योग बन रहा है.
Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी 27 फरवरी को है, इस दिन आंवले की पूजा करने से क्या होता है जानें




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/20/5f0446977650698e7eeecfb9f16960541771530816149499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Panchang, February, 2026:, फरवरी, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पूरा, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mathura Holi 2026: होली पर मथुरा&#45;वृंदावन जा रहे हैं, तो जानें यहां रंगों की होली 3 या 4 मार्च कब खेली जाएगी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5584</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5584</guid>
<description><![CDATA[ Mathura Holi 2026: ब्रज में रंगोत्सव 24 फरवरी से शुरू होकर 12 मार्च तक चलेगा. ब्रज में होली एक बहुत ही खास और अनोखा त्यौहार है. यहां सिर्फ रंगों से नहीं बल्कि फूलों, लाठी, लड्डुओं से भी होली खेली जाती है. यही वजह है कि हर बार होली पर ब्रज में देश-विदेश से आने वाली की संख्या बढ़ जाती है.
भगवान श्री कृष्ण के समय से चली आ रही होली की तमाम परंपरा को आज भी ब्रज के लोग उसी तरह निभाते हैं. इस साल होलिका दहन और रंगों की होली की डेट को लेकर कंफ्यूजन बना हुआ है. ऐसे में अगर आप भी मथुरा या वृंदावन जाने वाले हैं तो जान लें यहां रंगों की होली कब खेली जाएगी.
मथुरा-वृंदावन में होली 2026 कब
इस साल होली पर चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन और रंगों की होली में एक दिन का गैप आ रहा है. भारत में अन्य जगह पर होलिका दहन 2 मार्च को रात में किया जाएगा लेकिन मथुरा-वृंदावन और समस्त ब्रज क्षेत्र में में होलिका दहन 3 मार्च 2026 को होगा. यहां रंगों की होली यानी धुलंडी 4 मार्च को खेली जाएगी.
रंग, फूल, लड्डू की होली

ब्रज का फाग उत्सव करीब 40 दिन तक चलता है. यहां होली की शुरुआत मथुरा के मुख्य द्वारकाधीश मंदिर में भगवान को गुलाल और टेसू के रंग लगाने के साथ होती है.
इससे पहले बरसाना की महिलाएं राधा रानी का प्रतिनिधित्व करते हुए लट्ठ से पुरुषों को मारती हैं, जबकि पुरुष (हुरियारे) कृष्ण का प्रतिनिधित्व करते हैं और गुलाल से होली खेलते हैं.
वहीं बरसाना में लठमार से पहले लड्डू होली खेली जाती है, जहाँ पुजारी भक्तों पर लड्डू बरसाते हैं.
वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में होली के दिन हवा में गुलाल उड़ता है, भजनों और रसिया गायन के साथ मंदिर का प्रांगण भक्तिमय रंगों में रंग जाता है.

Vivah Muhurat March 2026: मार्च 2026 में विवाह के सिर्फ 8 शुभ मुहूर्त, नोट करें डेट, इस महीने लग रहा है खरमास

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/19/3d0a7245b6c30f3e318a7c80f748d2f61771514356378499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mathura, Holi, 2026:, होली, पर, मथुरा-वृंदावन, जा, रहे, हैं, तो, जानें, यहां, रंगों, की, होली, या, मार्च, कब, खेली, जाएगी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026 First Jumma Wishes: जुम्मे का दिन है और रमजान भी है..ये संदेश भेज कहें जुमा मुबारक</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5585</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5585</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan 2026 First Jumma Wishes: रमजान या रमदान इस्लामिक चंद्र कैलेंडर (हिजरी) का नौवां और सबसे पाक महीना माना जाता है. रमजान दुनियाभर के मुसलमानों के लिए शुद्धि, संयम, अनुशासन और आध्यात्मिक चिंतन का पवित्र समय होता है.
भारत में माह-ए-रमजान की शुरुआत गुरुवार 19 फरवरी 2026 से हो चुकी है. आज 20 फरवरी को रोजेदारों ने दूसरा रोजा रखा गया. खास बात यह है कि, आज दूसरे रोजे पर रमजान का पहला जुमा यानी शुक्रवार भी है. जुमा इस्लाम के खास दिनों में एक है. वहीं रमजान के दौरान पड़ने वाले जुमे का महत्व कई गुणा बढ़ जाता है. इसलिए आज विशेष नमाज अदा करने के लिए साथ ही लोग एक दूसरे को जुमे की मुबारकबाद भी देते हैं.
अगर आप भी अपने रिश्तेदार, परिवार, दोस्त, करीबी या सहकर्मियों को रमजान के पहले जुमे की मुबारकबाद देना चाहते हैं तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं. यहां देखिए जुमा मुबारक से जुड़े संदेश, फोटो, मैसज और बेहतरीन कोट्स-
जुम्मे का दिन है और रमजान भी है,दिल में उम्मीद है, संग ईमान भी है.अब और गुनाह नहीं करूंगा या इलाही,मेरे अंदर छुपा वो इक मुसलमान भी है.रमजान का पहला जुम्मा मुबारक हो

आज है रमजान का पहला जुमारहमतों को सहेज लो, इबादत में सिर झुका लो,अल्लाह से जन्नत मांग लो, क्योंकि फिर दोबार मिलेगा की नहीं मौका.माह-ए-रमजान 2026 की पहली जुमा मुबारक हो

या अल्लाह आज जुमे की नमाज के बाद&amp;nbsp;जितने भी हाथ तेरी बारगाह में दुआ के लिए उठे हैं&amp;nbsp;सबकी दुआ कबूल फरमा.रजमान 2026 जुमा मुबारक

आज फलक से रहमत बरसेगी,आज न कोई बंदा मायूस होगा.रमजान का पहला जुम्मा आया है,आज तो बरकतों का नुजूल होगा.रमजान का पहला जुम्मा मुबारक हो

अल्लाह से दुआ है कि यह पहला जुम्माबरकतों और रहमतों से भरा हो, हर दुआ कुबूल हो,और सभी गुनाह माफ हो जाएं।जुम्मा मुबारक 2026!

ऐ अल्लाह एक मौका हमको भी दे सफ़र-ए-मक्का का,सुना है तेरे घर और जन्नत में कोई फर्क नहीं&amp;hellip;.जुमा मुबारक

ये भी पढ़ें: Ramadan Sehri iftar Timing: जुमे पर रमजान का दूसरा रोजा कल, मुंबई, हैदराबाद समेत देखें अपने शहर के सहरी-इफ्तार का समय

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/19/68d759259f684d95b735476b4d1977941771523943955466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026, First, Jumma, Wishes:, जुम्मे, का, दिन, है, और, रमजान, भी, है..ये, संदेश, भेज, कहें, जुमा, मुबारक</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Braj Holi 2026: ब्रज में होली की धूम, देखें कब और कहां मचेगा रंगों का धमाल!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5582</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5582</guid>
<description><![CDATA[ Braj Holi 2026 Date Update: ब्रज में होली का खुमार छाने लगा है. होली पर ब्रज में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा की चिंता करते हुए शासन-प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट दिख रहा है. जिसको लेकर पुलिस प्रशासन के लोग लगातार समीक्षा बैठक कर रहे हैं.&amp;nbsp;
ब्रज में होली की उमंग के बीच इस बार रंगों के साथ लोक संस्कृति की छटा भी श्रद्धालुओं को देखने को मिलेगी.
बरसाना, नंदगांव, मथुरा, वृंदावन, गोकुल, महावन और बल्देव सहित ब्रज में होली तैयारी शुरू हो चुकी है-
काशी में &#039;मसान की होली&#039; पर फिर विवाद! विद्वानों ने जताई आपत्ति, कहा- इससे समाज में विकृति फैलेगी
इस बार ब्रज में होली के उत्सव निम्न प्रकार रहेंगें-
21 फरवरी - ब्रज के प्रमुख संत गुरुशरणानंद महाराज के रमनरेती स्थित आश्रम में साधू संत और भक्त खेलेंगे होली
24 फरवरी - फाग आमंत्रण नंदगांव
24 फरवरी - लड्डू मार होली बरसाना
25 फरवरी - लट्ठमार होली बरसाना
26 फरवरी - लट्ठमार होली नंदगांव
27 फरवरी - रंगभरनी एकादशी से ही ब्रज में रंगीली होली की शुरुआत होती है और सारे प्रमुख मंदिरों में लगातार होली का रंग गुलाल उड़ना शुरू हो जाता है.
27 फरवरी - श्री कृष्ण जन्मभूमि होली
(इस होली की कवरेज करने के लिए प्रशासन द्वारा कवरेज पास जारी होते है जिसके पास बनवाने के लिए परमिशन लेटर ऑफिस द्वारा जारी होगा )
27 फरवरी - वृंदावन स्थित बिहारी जी मंदिर की होली
1 मार्च - मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर की होली
1 मार्च - गोकुल की छड़ीमार होली
3 मार्च - चतुर्वेदी समाज का डोला निकलेगा
3 मार्च - होलिका दहन
4 मार्च - जलती होली के बीच फालेन गांव में पंडा निकलेगा सुबह 4 बजे
4 मार्च - धुलेंडी होली संपूर्ण ब्रज में खेली जाएगी
5 मार्च - दाऊजी का कपड़े फाड़ हुरंगा
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/20/a553fc848278b25e123360216dd5db2917715634087681092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Braj, Holi, 2026:, ब्रज, में, होली, की, धूम, देखें, कब, और, कहां, मचेगा, रंगों, का, धमाल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में पालकी पर आएंगी मां दुर्गा, हाथी पर करेंगी प्रस्थान, जानें किसका करेंगी कल्याण ?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5583</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5583</guid>
<description><![CDATA[ Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि हिंदू धर्म में आस्था और शक्ति का महान पर्व माना जाता है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की विधिपूर्वक आराधना की जाती है. चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं जो 27 मार्च तक रहेंगे.इस दौरान वसंत ऋतु होने के कारण इसे वासंती नवरात्र भी कहा जाता है.
भक्तगण पूरे नौ दिनों तक उपवास, पूजन और भक्ति में लीन रहकर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे. चैत्र नवरात्रि में माता की सवारी बहुत महत्व रखती है क्योंकि इससे आने समय का शुभ-अशुभ संकेत मिलते हैं.
चैत्र नवरात्रि में पालकी होगी माता की सवारी
देवी पुराण के अनुसार, पालकी (डोली) पर माता का आगमन शुभ नहीं माना जाता है. ये संकेत है कि देश में आर्थिक मंदी आ सकती है. प्रकृति अपने रौद्र रूप में जान-माल का नुकसान कर सकती हैं. माँ दुर्गा का इस तरह आना देश-दुनिया में महामारी के बढ़ने के संकेत भी देता है.
डोली पर माता का आना अशुभ संकेत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ दुर्गा इन नौ दिनों के लिए जब पृथ्वी पर आती हैं, तो एक विशेष वाहन पर सवार होकर आती हैं और एक विशेष वाहन पर सवार होकर ही जाती हैं. वो किस वाहन पर सवार होकर आयेंगी, ये उस दिन के आधार पर तय किया जाता है.
इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 गुरुवार से शुरू हो रही है. पुराणों के अनुसार अगर गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्रि प्रारंभ होने वाली होती है, तो इसका अर्थ है कि मां डोली पर आती हैं, जिसे सामान्यतः अशुभ माना जाता है क्योंकि यह अस्थिरता और चुनौतियों का संकेत है.
मां के प्रस्थान का वाहन शुभ
बुधवार और शुक्रवार के दिन माता हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं, जिसे बेहद शुभ संकेत माना जाता है. इस साल 27 मार्च 2026 शुक्रवार को चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन है, इस दिन माता हाथी पर सवार होकर अपने लोक लौटेंगी.&amp;nbsp; धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हाथी पर विदा होना बेहद शुभ संकेत माना जाता है, जो सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा, कृषि में वृद्धि और समाज में शांति का प्रतीक है.
चैत्र नवरात्रि से शुरू हुई थी सृष्टि
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ था और ब्रह्माजी ने सृष्टि का निर्माण किया था इसलिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष प्रारंभ होता है. इसके अलावा भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम का जन्म भी चैत्र नवरात्रि में ही हुआ था.
Ram Navami 2026: राम नवमी मार्च में कब ? इस साल क्या है खास

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/19/aa7e3b6f873821ce2f9a6eeb23d700d71771524168797499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 10:52:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Chaitra, Navratri, 2026:, चैत्र, नवरात्रि, में, पालकी, पर, आएंगी, मां, दुर्गा, हाथी, पर, करेंगी, प्रस्थान, जानें, किसका, करेंगी, कल्याण</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Surya Grahan 2026 Effects: गर्भवती सूर्य ग्रहण में सिलाई, सब्जी काटने समेत 5 गलती करने की भूल न करें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5529</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5529</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/89f2c03ea68faafdf41cd43e65c8fece1771236202648499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Surya, Grahan, 2026, Effects:, गर्भवती, सूर्य, ग्रहण, में, सिलाई, सब्जी, काटने, समेत, गलती, करने, की, भूल, न, करें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holika Dahan 2026: होलिका दहन में नारियल, सरसों, लौंग डालने से संतान की ये बड़ी 5 समस्याएं होती है दूर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5530</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5530</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/4b7a949288321440288f2726b49cad2d1771223357955499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holika, Dahan, 2026:, होलिका, दहन, में, नारियल, सरसों, लौंग, डालने, से, संतान, की, ये, बड़ी, समस्याएं, होती, है, दूर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Surya Grahan 2026: 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण लग रहा है क्या, क्यों हो रही चर्चा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5526</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5526</guid>
<description><![CDATA[ Surya Grahan 2026: खगोलीय घटना में रुचि रखने वाले ग्रहण को लेकर काफी उत्सुक रहते हैं. वहीं अमावस्या या पूर्णिमा तिथि होने पर धार्मिक भावना वाले लोग भी ग्रहण की जांच करते हैं, क्योंकि ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ जैसे कार्य वर्जित हो जाते हैं. ग्रहण को वैज्ञानिक दृष्टि से केवल खगोलीय घटना माना जाता है. वहीं धर्म और ज्योतिष में ग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है.
क्या 17 फरवरी 2026 को ग्रहण लग रहा है
साल 2026 के पहले ग्रहण को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं. फरवरी महीने में साल 2026 का पहला ग्रहण लगने वाला है. यह वलयाकार सूर्य ग्रहण रहेगा, जोकि फाल्गुन अमावस्या के दिन 17 फरवरी को लग रहा है. सूर्य ग्रहण को लेकर आपके मन में जो भी सवाल या शंकाएं हैं, उन सबका जवाब आपको हम पूरी डिटेल में देंगे.
17 फरवरी को आग के छल्ले जैसा दिखेगा सूरज
वैज्ञानिक जानकारी के अनुसार, 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा, जोकि वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा. इस तरह का ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा सूर्य के बीच आ जाता है, लेकिन पूरा नहीं ढकता, जिससे कि सूर्य के चारों ओर आग के छल्ला जैसा दिखाई देता है, जिसे &amp;lsquo;रिंग ऑफ फायर&amp;rsquo; कहा जाता है.
भारतीय रहें निश्चिंत
ग्रहण को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, साल का पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक भी मान्य रहेगा और ना ही ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा. इसलिए भारतीय निश्चिंत रहें और धार्मिक कार्य बिना किसी झिझक के पूरा करें.
सूर्य ग्रहण का समय (Surya Grahan 2026 Time)

तारीख- मंगलवार 17 फरवरी 2026, फाल्गुन अमावस्या
ग्रहण की शुरुआत- दोपहर 3 बजकर 26 मिनट
ग्रहण का मध्य- शाम 5 बजकर 42 मिनट
ग्रहण की समाप्ति- रात 7 बजकर 57 मिनट

सूर्य ग्रहण में क्या सावधानियां रखें
सूर्य ग्रहण को देखने के लिए इक्लिप्स चश्मे का इस्तेमाल करना चाहिए.
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में सिलई, बुनाई, कटाई जैसे कार्य नहीं करने चाहिए.
बहुत जरूरी न होने पर सूर्य ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं जाना चाहिए.
ये भी पढ़ें: Surya Grahan 2026: 17 फरवरी को शनि की राशि में &amp;lsquo;काला सूरज&amp;rsquo;, ये राशियां होंगी अधिक प्रभावित


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/56cd7d635e57da1f54b7afc8d94f2e6a1771220831068466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Surya, Grahan, 2026:, फरवरी, को, सूर्य, ग्रहण, लग, रहा, है, क्या, क्यों, हो, रही, चर्चा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Panchang 17 February 2026: 17 फरवरी भौमवती अमावस्या, सूर्य ग्रहण और पंचक भी, देखें शुभ मुहूर्त और पूरा पंचांग</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5527</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5527</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 17 फरवरी 2026: आज 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या, सूर्य ग्रहण और अग्नि पंचक भी लग रहे हैं. मंगलवार होने से इस दिन भौमवती अमावस्या होगी. पितरों की पूजा और मांगलिक दोष से मुक्ति पाने के लिए ये दिन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. 
साल का पहला सूर्य ग्रहण इस दिन कुंभ राशि में लग रहा है लेकिन ये भारत में दिखाई नहीं देगा. साथ ही आज से पंचक शुरू हो रहे हैं ऐसे में अगले 5 दिन तक कोई भी मांगलिक कार्य, नई चीजों की खरीदारी, नया काम शुरू न करें.&amp;nbsp;
सूर्य ग्रहण का समय - दोपहर 3.36 से शाम 7.57 तक रहेगा (भारतीय समयानुसार)
कहां दिखेगा सूर्य ग्रहण&amp;nbsp;
अंटार्कटिका महाद्वीप और दक्षिणी महासागर के आसपास के दूरस्थ क्षेत्रों में दिखेगा. वहीं, आंशिक सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका , दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अटलांटिक महासागर, दक्षिणी प्रशांत महासागर तथा अंटार्कटिका के अन्य भागों में दिखेगा.
17 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 17 February 2026)



तिथि

अमावस्या (16 फरवरी 2026, शाम 5.24 - 17 फरवरी 2026, शाम 5.30)



वार
मंगलवार


नक्षत्र
धनिष्ठा


योग
परिघ


सूर्योदय 
सुबह 7.00


सूर्यास्त
सुबह 6.10


चंद्रोदय
नहीं


चंद्रोस्त
शाम 6.10


चंद्र राशि
कुंभ



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 9.47 - दोपहर 2.00


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 7.48 - रात 9.44



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 3.24 - शाम 4.48


यमगण्ड काल
सुबह 9.47 - सुबह 11.11


गुलिक काल
दोपहर 12.35 - दोपहर 2.00


आडल योग
रात 9.16 - सुबह 6.47, 18 फरवरी&amp;nbsp;


भद्रा काल
सुबह 9.05 से शुरू&amp;nbsp;



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 17 February 2026)



सूर्य
कुंभ


चंद्रमा
मकर


मंगल
मकर


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
कुंभ


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



मेष राशि
आपको धनलाभ हो सकता है. आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलेगी.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



मिथुन राशि
जो लोग विदेश से जुड़ा व्यापार करते हैं उन लोगों को नुकसान हो सकता है.



FAQs: 17 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





अमावस्या के दिन अपने घर के मुख्य द्वार पर विशेष रूप से दीया जलाएं और घर के किसी कोने में अंधेरा न छोड़ें. पीपल में जल चढ़ाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें.&amp;nbsp;





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन परिघ योग बन रहा है.
Surya Grahan 2026 Effects: गर्भवती सूर्य ग्रहण में सिलाई, सब्जी काटने समेत 5 गलती करने की भूल न करें




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/fc076da70e456305ceb0f14ba17dd8fe1771243641164499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Panchang, February, 2026:, फरवरी, भौमवती, अमावस्या, सूर्य, ग्रहण, और, पंचक, भी, देखें, शुभ, मुहूर्त, और, पूरा, पंचांग</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan Dates 2026: सऊदी अरब में 17 फरवरी को चांद देखने की अपील, जानें भारत में कब शुरू होगा रमजान</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5528</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5528</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan Dates 2026: माह-ए-रमजान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना है. सऊदी अरब हो पाकिस्तान हो, भारत हो या फिर अन्य मुस्लिम देश नया चांद नजर आने पर ही रमजान की शुरुआत होती है. इसलिए रमजान में रोजा की शुरुआत करने से पहले चांद का सभी को बेसब्री से इंतजार रहता है. चांद दिखने की अगली सुबह से ही रोजा रखने की शुरुआत हो जाती है.
सऊदी अरब का नया चांद क्यों खास
सऊदी अरब में चांद नजर आने के एक दिन बाद भारत में रमजान की शुरुआत होती है. कई बार जब भारत में चांद दिखाई नहीं देता, तो सऊदी अरब के एक दिन बाद से रोजा रखने की शुरुआत हो जाती है. इसलिए हर मुसलमान की नजर सऊदी अरब के चांद की तारीख पर रहती है.
सऊदी में 17 को देखा जाएगा चांद (Ramadan 2026 Moon Sighting In Saudi Arabia)
सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मुसलमानों से 17 फरवरी 2026 की शाम नया चांद देखने की अपील की है. मुसलमान शाम की नमाज के बाद आसमान में नया चांद देखेंगे. यदि इस दिन चांद नजर आ जाता है तो मुसलमान 18 फरवरी को पहला रोजा रखेंगे. वहीं भारत में पहला रोजा 19 फरवरी को रखा जा सकता है.
भारतीय मुसलमान कब देखें नया चांद
भारत में बहुत अधिक संभावना है कि, रहमान महीने का पहला रोजा 19 फरवरी 2026 को रखा जा सकता है और 18 फरवरी को चांद देखा जाएगा. लेकिन 18 फरवरी को चांद नजर नहीं आता तो पहला रोजा भारत में 20 फरवरी को रखा जाएगा. हालांकि अंतिम फैसला स्थानीय चांद दिखने पर ही होता है.
हर साल बदल जाती है रमजान की तारीख
इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है. इसलिए हर साल रमजान की तारीख लगभग 10-11 दिन पहले आ जाती है. इस वर्ष भी रमजान महीने की शुरुआत 10-11 दिन पहले हो रही है. 2025 में रमजान की शुरुआत 1 मार्च से हुई थी.
ये भी पढ़ें: Ramadan 2026: माह-ए-रमजान में चांद रात कब है? 19 या 20 फरवरी किस दिन रखा जाएगा पहला रोजा



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.a


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/e31b50213a9cd3baab9097db37c5b0701771239180767466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, Dates, 2026:, सऊदी, अरब, में, फरवरी, को, चांद, देखने, की, अपील, जानें, भारत, में, कब, शुरू, होगा, रमजान</media:keywords>
</item>

<item>
<title>कौन हैं माही शेखावत, जो बनीं किन्नर अखाड़ा की महामंडलेश्वर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5524</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5524</guid>
<description><![CDATA[ Kinnar Akhada Mahamandaleshwar, Mahi Sekhawat: भोपाल में आयोजित भव्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम में माही शेखावत को किन्नर अखाड़ा भारत वर्ष द्वारा महामंडलेश्वर पद से सम्मानित किया गया. इस ऐतिहासिक अवसर पर देशभर से आए संत-महात्माओं, साधु-संतों, श्रद्धालुओं एवं समाजसेवियों ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं. यह आयोजन धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता एवं आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बना.
माही शेखावत को प्राप्त यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष, साधना और सेवा का परिणाम है, बल्कि पूरे किन्नर समाज के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय भी है।किन्नर अखाड़ा द्वारा महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान किया जाना अत्यंत प्रतिष्ठित एवं गौरवपूर्ण सम्मान माना जाता है.
किसे देते हैं महामंडलेश्वर पद
यह पद केवल उन्हीं व्यक्तित्वों को दिया जाता है, जिन्होंने धर्म, समाज और मानवता की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया हो. माही शेखावत को यह पद मिलना इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अपने जीवन में सत्य, सेवा, समर्पण और संस्कारों को सर्वोपरि रखा है. उन्होंने समाज में व्याप्त भेदभाव, उपेक्षा और असमानता के विरुद्ध निरंतर संघर्ष करते हुए एक सकारात्मक पहचान बनाई है.
कौन है माही शेखावत

माही शेखावत किन्नर समाज की एक प्रतिष्ठित धार्मिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक नेत्री हैं. उनका जीवन संघर्ष, धैर्य और आत्मबल की मिसाल है.
प्रारंभिक जीवन से ही उन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना किया, किंतु कभी भी अपने आत्मविश्वास और आस्था को कमजोर नहीं होने दिया.
उन्होंने सनातन धर्म, मानव सेवा और सामाजिक एकता को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया.
समय के साथ वे धार्मिक आयोजनों, सामाजिक अभियानों और सेवा कार्यों से जुड़ती गईं और समाज में एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में उभरीं.
उनकी सादगी, विनम्रता, सेवा भावना और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें जन-जन के बीच लोकप्रिय बनाया.

Hindi Panchang Today: 17 फरवरी भौमवती अमावस्या, सूर्य ग्रहण और पंचक भी, देखें शुभ मुहूर्त और पूरा पंचांग





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/f375ff091a85cec87ef82a0464df532d1771256495831499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>कौन, हैं, माही, शेखावत, जो, बनीं, किन्नर, अखाड़ा, की, महामंडलेश्वर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Falgun Amavasya 2026: 17 या 18 फरवरी कब है फाल्गुन अमावस्या, क्यों खास है ये</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5525</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5525</guid>
<description><![CDATA[ Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन महीने की अमावस्या तिथि हिंदू धर्म में काफी विशेष महत्व रखती है. धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से इस दिन को महत्वपूर्ण माना जाता है. फाल्गुन अमावस्या पर लोग पवित्र नदी में स्नान, दान और पितरों की आत्मा की शांति के दिन तर्पण आदि जैसे कार्य करते हैं.
फाल्गुन अमावस्या 2026 कब है
साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या की तिथि को लेकर लोगों में थोड़ी भ्रम की स्थिति बनी हुई है. &amp;nbsp;कुछ लोग फाल्गुन अमावस्या की तिथि 17 फरवरी तो कुछ 18 फरवरी मान रहे हैं. लेकिन पंचांग के आधार पर हम अमावस्या की सही तिथि और मुहूर्त के बारे में जान सकते हैं.
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 फरवरी शाम 05:34 से हो चुकी है और 17 फरवरी को शाम 05:31 पर अमावस्या तिथि समाप्त हो जाएगी. ऐसे में 18 फरवरी को अमावस्या नहीं रहेगी. उदयातिथि के मुताबिक 17 फरवरी को ही फाल्गुन अमावस्या रहेगी. मंगलवार का दिन होने से इसे भौमवती अमावस्या कहा जाएगा.
भौमवती अमावस्या पर तर्पण का मुहूर्त
17 फरवरी को भौमवती अमावस्या पर लोग मृत पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान आदि करते हैं. इसके लिए दोपहर 12:37 से 01:23 तक का मुहूर्त रहेगा. इस समय अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जिसमें आप पितरों के निमित्त दान, तर्पण आदि कर सकते हैं.
क्यों खास है फाल्गुन अमावस्या 2026

फाल्गुन अमावस्या पर पितृ तर्पण और श्राद्ध का महत्व है. इस दिन पितरों की शांति के लिए तर्पण, दान और पूजन आदि किए जाते हैं.
अमावस्या तिथि पर धार्मिक स्नान व दान का भी महत्व है. लोग पवित्र नदियों में स्नान कर और जरूरतमंदों को दान करते हैं. मान्यता है कि इससे पुण्य फल मिलता है.
फाल्गुन अमावस्या पर इस साल सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.
अग्नि पंचक की शुरुआत भी फाल्गुन अमावस्या से हो रही है. 17 फरवरी को सुबह 09:05 से पंचक शुरू हो जाएगा और 21 फरवरी को शाम 07:07 पर समाप्त होगा.

ये भी पढ़ें: Surya Grahan 2026: साल के पहले सूर्य ग्रहण से सावधान, बच्चे, बूढ़े, गर्भवती महिलाएं हो जाएं अलर्ट!


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/40e4dd23ecd06609ebfcd0eac26ab6401771248041982466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Falgun, Amavasya, 2026:, या, फरवरी, कब, है, फाल्गुन, अमावस्या, क्यों, खास, है, ये</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vat Savitri Vrat 2026 Date: वट सावित्री व्रत 2026 में कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त, इसी दिन है शनि जयंती</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5523</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5523</guid>
<description><![CDATA[ Vat Savitri Vrat 2026 Date: वट सावित्री व्रत साल में दो बार मनाया जाता है. पहला ज्येष्ठ अमावस्या पर और दूसरा ज्येष्ठ पूर्णिमा पर यानी 15 दिन के अंतराल के बीच अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए महिलाएं ये व्रत करती हैं. ये व्रत पातिव्रत्य, त्याग और निष्ठा का प्रतीक है.
स्त्री की शक्ति और धर्मपालन का आदर्श प्रस्तुत करता है. इस साल वट सावित्री अमावस्या 16 मई 2026 को है. वहीं वट सावित्री पूर्णिमा 29 जून 2026 को है. इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विधान है.
वट सावित्री व्रत 2026 मुहूर्त
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि शुरू होगी 16 मई 2026 को सुबह 5.11 पर और समाप्ति 17 मई 2026 को सुबह 1.30 पर होगी.

पूजा मुहूर्त - सुबह 7.12 - सुबह 8.24

ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि शुरू होगी 29 जून 2026 को सुबह 3.06 पर और समाप्ति 30 जून 2026 को सुबह 5.26 पर होगी.

पूजा मुहूर्त - सुबह 8.55 - सुबह 10.40

क्यों है वट सावित्री व्रत का महत्व
यः स्त्री भक्त्या समायुक्ता वटसावित्रीव्रतं चरेत्।
सर्वपापविनिर्मुक्ता सौभाग्यं लभते ध्रुवम्॥
अर्थ - जो स्त्री श्रद्धा और भक्ति से वट सावित्री व्रत करती है, वह सभी पापों से मुक्त होकर निश्चित रूप से अखंड सौभाग्य प्राप्त करती है. पति की आयु बढ़ती है और दांपत्य जीवन सुखमय होता है. मृत्यु के पश्चात स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है.
कैसे करें वट सावित्री व्रत

प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
वट वृक्ष के नीचे जाकर पूजा सामग्री रखें.
रोली, चावल, पुष्प, धूप, दीप से पूजा करे.
वट वृक्ष की 7 या 108 बार परिक्रमा करें.
कच्चा सूत (मौली) वृक्ष पर लपेटें.
सावित्री-सत्यवान की कथा श्रवण करें.
पति की दीर्घायु की कामना करें.

क्यों होती है वट वृक्ष की पूजा
वट वृक्ष दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक है, इसलिए पति की लंबी आयु के लिए इसकी पूजा की जाती है. इसके हर हिस्से में देवताओं का वास है.

ब्रह्मा का निवास (जड़)
विष्णु का निवास (तना)
शिव का निवास (शाखाएँ

Shani Jayanti 2026: शनि जयंती 2026 में कब ? नोट करें डेट, मुहूर्त


Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/17/c9b4498a2b35cc1890e6a7d9a8550bc31771269073932499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vat, Savitri, Vrat, 2026, Date:, वट, सावित्री, व्रत, 2026, में, कब, नोट, करें, डेट, मुहूर्त, इसी, दिन, है, शनि, जयंती</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Surya Grahan 2026: आज दिखेगा रिंग ऑफ फायर, जानें क्या होता है वलयाकार सूर्य ग्रहण?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5522</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5522</guid>
<description><![CDATA[ Surya Grahan 2026:&amp;nbsp;इस साल का पहला सूर्य ग्रहण मंगलवार 17 फरवरी 2026 को लगा है. भारतीय मानक समयानुसार सूर्य ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होगा और रात 7 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगा. सूर्य ग्रहण को विज्ञान में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है. जब चंद्रमा पृथ्वी के मध्य होता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है.
आज वलयाकार सूर्य ग्रहण लगेगा. लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि, आखिर वलयाकार सूर्य ग्रहण या रिंग ऑफ फायर ग्रहण कैसा होता है. बता दें कि, आज आप आकाश में एक खास खगोलीय घटना देख सकेंगे, जिसे &amp;ldquo;रिंग ऑफ फायर&amp;rdquo; या वलयाकार सूर्य ग्रहण कहा जाता है. इस दौरान सूर्य पूरी तरह ढकता नहीं, बल्कि उसके चारों ओर आग की अंगूठी जैसा चमकता घेरा दिखाई देता है.&amp;nbsp;खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार यह दृश्य बेहद आकर्षक होता है, लेकिन इसे सुरक्षित तरीके से ही देखना चाहिए.
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्रमा दीर्घवत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है, जिससे वह कभी अमावस्या को पृथ्वी और सूर्य के मध्य एक सीध में स्थित होता है. वलयाकार सूर्य ग्रहण की स्थिति तब बनती है, जब चंद्रमा, पृथ्वी से दूर की स्थिति में पृथ्वी और सूर्य के मध्य आता है, जिससे वह सूर्य को पूरी तरह ढंक नहीं पाता. ऐसी स्थिति में सूर्य के चारों ओर एक चमकदार वलय या रिंग बन जाती है. इसलिए इसे वलयाकार या कंकणाकृति ग्रहण कहा जाता है.
सूर्य ग्रहण 2026 तारीख और समय
भारतीय समय (IST) अनुसार, सूर्य ग्रहण मंगलवार, 17 फरवरी को दोपहर 3:26 बजे से रात 7:57 बजे तक रहेगा. ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 31 मिनट होगी. वहीं रिंग ऑफ फायर ग्रहण अपने पीक पर शाम 5:13 बजे से 6:11 बजे के बीच रहेगा.
कैसे देखें रिंग ऑफ फायर
लेकिन अगर आप भारत में हैं तो आज का सूर्य ग्रहण नहीं देख पाएंगे. क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. सूर्य ग्रहण को अर्जेंटीना, चिली, दक्षिण अफ्रीका और अंटार्टिका में सबसे अच्छी स्थिति में देखा जाएगा. हालांकि जिन स्थानों पर ग्रहण नहीं नजर आएगा वे नासा की वेबसाइट पर जाकर भी सूर्य ग्रहण को देख सकते हैं. नासा के यूट्यूब चैनल पर सूर्य ग्रहण की लाइव स्ट्रीमिंग भी की जाती है.
रिंग ऑफ फायर देखने में रखे सावधानी

बिना फिल्टर वाले चश्मे से सूर्य न देखें.
एक्स-रे फिल्म, धूप का चश्मा या पानी में प्रतिबिंब देखना सुरक्षित नहीं
प्रमाणित सोलर फिल्टर या टेलीस्कोप का इस्तेमाल करें

ये भी पढ़ें: Surya Grahan 2026: 17 फरवरी को सूर्य ग्रहण लग रहा है क्या, क्यों हो रही चर्चा


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/17/5dd5bf1a599063a6689cd924b9c48e7b1771299972657466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Feb 2026 10:58:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Surya, Grahan, 2026:, आज, दिखेगा, रिंग, ऑफ, फायर, जानें, क्या, होता, है, वलयाकार, सूर्य, ग्रहण</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026 Parana: महाशिवरात्रि व्रत कब खोला जाएगा, शुभ मुहूर्त, भूल से भी पारण में न करें ये गलती</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5479</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5479</guid>
<description><![CDATA[ Mahashivratri Vrat Parana 2026: महाशिवरात्रि का पूजन अनंत सुख, समृद्धि और शिव कृपा पाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. वैसे तो शिवरात्रि पर आठों प्रहर में शिव साधना का विधान है लेकिन 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पूजा की विशेष पूजा रात्रि के चार प्रहर में की जाएगी. ऐसी मान्यता भी है कि भगवान ने शिवरात्रि के दिन सदाशिव, जो कि निराकार रूप हैं, उससे लिंग स्वरुप लिया था इसलिए भक्त रात भर जागकर भगवान शिव की अराधना करते हैं.
ऐसे में शिवरात्रि का व्रत पारण अगले दिन किया जाता है. महाशिवरात्रि व्रत का पारण 16 फरवरी को किया जाएगा. जान लें महाशिवरात्रि व्रत पारण का समय, विधि और नियम.
महाशिवरात्रि 2026 व्रत पारण का समय
महाशिवरात्रि व्रत का पारण अगले दिन 16 फरवरी 2026 को सुबह 6 बजकर 42 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक किया जाएगा.महाशिवरात्रि व्रत का पारण रात्रि के चारों प्रहर की पूजा समाप्त होने के बाद सूर्योदय में ही करना चाहिए. क्योंकि रात्रि में ही शिव साधना की जाती है.
&amp;nbsp;महाशिवरात्रि व्रत पारण की विधि

महाशिवरात्रि के अगले दिन प्रात: काल स्नान करें महादेव पर बेलपत्र, गंगाजल चढ़ाएं. उन्हें चंदन लगाए, फूलों की माला पहनाएं.
ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें इसके बाद ही व्रत खोलें.
कहते हैं शिवरात्रि का व्रत पूजा में चढ़ाए गए फलों से ही करना चाहिए. पार्थिव शिवलिंग पर चढ़ाया भोग ग्रहण न करें.&amp;nbsp;
व्रत खोलते समय शिव जी पर चढ़ाया बेलपत्र भी भोग के रूप में ग्रहण कर सकते हैं. ये शुभ फल देता है.
शिवरात्रि व्रत पारण में सात्विक भोजन ही करें. व्रत पारण में जो भोजन बनाएं उसमें शुद्ध घी का ही उपयोग करें.

महाशिवरात्रि का दिन क्यों है खास

अनुशासन और ध्यान के माध्यम से आंतरिक जागृति
मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि
अंधकार और अज्ञान पर विजय

Mahashivratri Vrat Katha: महाशिवरात्रि पर जरूर पढ़ें चित्रभानु भील शिकारी की कथा, तभी समझ पाएंगे व्रत का महात्म्य

Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/15/192b537b5c932fc687cbc2b056ffe0e51771164141150499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026, Parana:, महाशिवरात्रि, व्रत, कब, खोला, जाएगा, शुभ, मुहूर्त, भूल, से, भी, पारण, में, न, करें, ये, गलती</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Sadhguru के आश्रम में महाशिवरात्रि कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले की झलक | Isha Foundation</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5480</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5480</guid>
<description><![CDATA[ महाशिवरात्रि के अवसर पर Isha Foundation में भव्य celebration की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, शाम 6:00 बजे से Maha Celebration शुरू होगा, पीछे 112 फीट ऊंची Adiyogi Shiva Statue की प्रतिमा के सामने मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
अलग अलग gates और seating zones बनाए गए हैं, जहां लोग अपनी ticket के अनुसार बैठेंगे। Media area भी निर्धारित है और पूरी coverage live रहेगी Defence Minister Rajnath Singh के आगमन को देखते हुए security arrangements बेहद कड़े हैं, Entry के लिए sticker, pass और band अनिवार्य हैं।
लोग बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं और पूरा माहौल devotion और excitement से भरा हुआ है, देश-विदेश के दर्शक इस कार्यक्रम को live देखेंगे. कुल मिलाकर, यह सिर्फ एक event नहीं बल्कि एक grand spiritual experience है, जिसका इंतजार पूरी दुनिया को रहता है ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/15/74a0a2dc48650cdcf0e770ccfafd399e1771158237514721_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Sadhguru, के, आश्रम, में, महाशिवरात्रि, कार्यक्रम, शुरू, होने, से, ठीक, पहले, की, झलक, Isha, Foundation</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि में चार प्रहर नहीं कर सकते पूजा तो इस समय जरूर करें, शिव हो जाएंगे खुश</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5481</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5481</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/15/656983e66accea6b61314190efbf48931771156167496466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, महाशिवरात्रि, में, चार, प्रहर, नहीं, कर, सकते, पूजा, तो, इस, समय, जरूर, करें, शिव, हो, जाएंगे, खुश</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: क्या आज भी है महाशिवरात्रि, शाम तक रहेगी चतुर्दशी तिथि लोग हो रहे कंफ्यूज</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5476</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5476</guid>
<description><![CDATA[ Mahashivratri 2026:&amp;nbsp;महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया गया. लेकिन पूजा के लिए 16 फरवरी 2026 को सुबह 06 बजकर 59 मिनट तक चार प्रहर का अंतिम मुहूर्त रहेगा. वहीं पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. आज 16 फरवरी को शाम 05 बजकर 13 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी. पंचांग में 16 फरवरी को चतुर्दशी तिथि होने के कारण कई श्रद्धु सोच रहे हैं कि, क्या उदयातिथि के अनुसार आज यानी 16 फरवरी को भी महाशिवरात्रि की पूजा की जा सकती है.
क्यों हो रहा है कन्फ्यूजन
14 फरवरी को शाम 04 बजकर 02 मिनट से त्रयोदशी तिथि शुरू हुई और 15 फरवरी को शाम 05 बजकर 05 मिनट तक त्रियोदशी तिथि थी. 15 फरवरी को शाम 05 बजकर 06 मिनट से चतुर्दशी तिथि शुरू हुई, जिसका समापन 16 फरवरी को शाम 05 बजकर 35 मिनट पर होगा. इस कारण इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी में मनाया गया.
क्या 16 फरवरी को भी है महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2026 Date)
नहीं, आज 16 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि नहीं है. लेकिन आज सुबह 6 बजकर 59 मिनट पर तक आप महाशिवरात्रि की पूजा कर सकते हैं. इसका कारण यह है कि, महाशिवरात्रि की पूजा के लिए चौथे प्रहर का मुहूर्त 16 फरवरी सुबह 03 बजकर 47 मिनट से सुबह 06 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. किसी कारणवश 15 फरवरी को महाशिवरात्रि की पूजा नहीं कर सके तो आप इस समय में भी महाशिवरात्रि की पूजा कर सकते हैं. इसके बाद महाशिवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा.
कितने बजे करें पारण (Mahashivratri 2026 Vrat Paran)
किसी भी व्रत के बाद पारण (व्रत खोलना) की विधि पूजा का अंतिम और महत्वपूर्ण भाग होता है. खासकर महाशिवरात्रि व्रत केवल भूखा रहना मात्र नहीं है, बल्कि यह शिव के एकाकार होने का पर्व है. अंतिम प्रहर की पूजा संपन्न करें, भगवान शिव का अभिषेक करें और फिर विधि-विधान से व्रत खोलें. शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि व्रत का पारण फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के समाप्त होने और सूर्योदय के बाद ही पारण करना श्रेष्ठ होता है. पारण के लिए 16 फरवरी को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से दोपहर 3 बजकर 46 मिनट तक समय रहेगा.
&amp;nbsp;ये भी पढ़ें: Mahashivratri 2026: सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन में महाशिवरात्रि उत्सव शुरू, यहां देखें समय-सारणी
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/cce04d95fa05a131c5962b3f7bec2fad1771183439823466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, क्या, आज, भी, है, महाशिवरात्रि, शाम, तक, रहेगी, चतुर्दशी, तिथि, लोग, हो, रहे, कंफ्यूज</media:keywords>
</item>

<item>
<title>IND vs PAK T20 WC: काल उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का...महाशिवरात्रि पर टीम इंडिया का महाविजय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5477</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5477</guid>
<description><![CDATA[ IND vs PAK T20 WC 2026: आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 (IND vs PAK T20 WC) में भारत ने पाकिस्तान को कराई हार दिलाकर सुपर-8 में जगह बना ली है. महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर पूरा देश जहां एक और शिवमय हो रहा है, वहीं भारतीय क्रिकेट टीम की शानदार जीत से देश में खुशी का माहौल है.
भले ही टीम इंडिया की ओर से मैदान पर ग्यारह खिलाड़ी थे, लेकिन इसके साथ ही करोड़ों भारतीयों की प्रार्थनाएं भी साथ थीं. क्रिकेट प्रेमी महाकाल से टीम इंडिया की जीत की प्रार्थना कर रहे थे और महाकाल ने भी अपने भक्तों को आज निराश नहीं किया.
इसलिए कहा जाता है कि, काल उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का. क्रिकेट हो या जीवन जब तक महादेव का हाथ हमारे ऊपर है, पराजय का कोई अस्तित्व नहीं. क्रिकेट टीम समेत क्रिकेट प्रेमियों को महाशिवरात्रि पर आज महादेव ने जीत का आशीर्वाद दिया है.
कोलंबो में लगी पाकिस्तान की लंका
रविवार 15 फरवरी 2026 को टी20 विश्व कप का मैच इंडिया और पाकिस्तान के बीच कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में खेला गया, जिसमें टॉस जीतकर भी पाकिस्तान के कप्तान ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया और भारत को पहले बल्लेबाजी करने के लिए बुलाया. भारत ने 7 विकेट गंवाकर 175 रन बनाए और जीत के लिए पाकिस्तान को 176 रन का लक्ष्य दिया.
पाकिस्तान की ओर से खेल की शुरुआत ही बेहद खराब थी, जिससे वह बाद में भी उबर नहीं सका. एक के बाद एक 2 ओवर में ही 3 विकेट गिर गए और पाकिस्तान क्रिकेट टीम 18 ओवर में 114 रन पर ढेर हो गई. बता दें कि, टी20 वर्ल्ड कप में भारत की पाकिस्तान पर 9 मैचों में यह 8वीं जीत है.
&amp;lsquo;आखिर बाप तो बाप होता है&amp;rsquo;- धीरेंद्र शास्त्री
भारतीय क्रिकेट टीम की जीत के बाद देशभर में खुशी का माहौल है. चारों ओर से टीम इंडिया को शुभकामनाएं मिल रही हैं. भारत की जीत पर बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर बागेश्वर महाराज धीरेद्र शास्त्री ने कहा कि- जैसे ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने दुश्मनों को जवाब दिया, वैसे ही अब क्रिकेट के मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है. उन्होंने कहा- आखिर बाप तो बाप ही होता है.
महाशिवरात्रि पर महाविजय..- सीएम योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री&amp;nbsp;योगी आदित्यनाथ ने भी एक्स पर पोस्ट कर लिखा-&quot;महाशिवरात्रि पर महाविजय की देश वासियों को हार्दिक बधाई! भारतीय क्रिकेट टीम के सभी सदस्यों का अभिनंदन! जय हिन्द!&quot;

महाशिवरात्रि पर महाविजय की देश वासियों को हार्दिक बधाई!भारतीय क्रिकेट टीम के सभी सदस्यों का अभिनंदन!जय हिन्द!#INDvsPAK#T20WorldCup2026
&amp;mdash; Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 15, 2026



ये भी पढ़ें: Mahashivratri 2026: सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन में महाशिवरात्रि उत्सव शुरू, यहां देखें समय-सारणी


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.a

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/6db8aee71273c50e2ec148e08e2428791771181236928466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>IND, PAK, T20, WC:, काल, उसका, क्या, बिगाड़े, जो, भक्त, हो, महाकाल, का...महाशिवरात्रि, पर, टीम, इंडिया, का, महाविजय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri पर Sadhguru के आश्रम में क्यों मीलों की दूरी तय कर आते हैं लोग?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5478</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5478</guid>
<description><![CDATA[ महाशिवरात्रि के अवसर पर Isha Foundation में भव्य आयोजन शुरूहो रहा है , लगभग 1 लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है, कार्यक्रम Adiyogi Shiva Statue की 112 फीट ऊंची प्रतिमा के सामने आयोजित होगा। अलग-अलग gates और seating blocks बनाए गए हैं, और विशाल LED screens के जरिए दूर बैठे लोग भी कार्यक्रम देखेंगे ,
लोग देश-विदेश से यहां पहुंचे हैं कोई inner peace की तलाश में, कोई spiritual growth के लिए, तो कोई सिर्फ इस divine environment को experience करने के लिए। कई श्रद्धालु पूरी रात जागकर meditation करना चाहते हैं, कुछ volunteers और Sadhana Pada alumni ने बताया कि यहां आने के बाद उनकी life 180&amp;deg; बदल गई और वे अब situations को अधिक ease से handle कर पाते हैं
कई भक्तों का कहना है कि वे मन को मित्र बनाने, freedom और inner happiness पाने की खोज में आए हैं, कुछ लोग इसे &amp;ldquo;Biggest spiritual celebration&amp;rdquo; और &amp;ldquo;Biggest party on the planet&amp;rdquo; भी बताते हैं
कुल मिलाकर, हर व्यक्ति किसी न किसी search के साथ यहां आया है, लेकिन सबसे common तलाश है मन की शांति, शिव भक्ति और आत्मिक आनंद ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/15/7cec7ff0ee32adf7fa79c23ba815ea3f1771169903300721_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:55 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, पर, Sadhguru, के, आश्रम, में, क्यों, मीलों, की, दूरी, तय, कर, आते, हैं, लोग</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahakal Bhasm Aarti: महाकाल की भस्म आरती दोपहर 12 बजे, साल में सिर्फ एक बार आता है यह अद्भुत पल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5473</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5473</guid>
<description><![CDATA[ Mahakal Bhasm Aarti: उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती काफी प्रसिद्ध है. भस्म आरती बाबा महाकाल को जगाने के लिए की जाती है. आमतौर पर भस्म आरती ब्रह्म मुहूर्त तड़के सुबह 4 बजे से 6 बजे के बीच की जाती है. लेकिन विशेष अवसरों खासकर महाशिवरात्रि और शिव नवरात्रि के दौरान इसका समय बदल जाता है.
महाशिवरात्रि के 9 दिन पहले से ही महाकालेश्वर (mahakaleshwar jyotirlinga) में शिव नवरात्रि के आयोजन की शुरुआत हो जाती है और महाशिवरात्रि के अगले दिन इसका समापन होता है. बता दें कि, एकमात्र महाकालेश्वर में ही महाशिवरात्रि से नौ दिन पूर्व शिव नवरात्रि (Shiv Navratri) मनाई जाती है. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में चार प्रहर पूजा-अभिषेक की गई और महाकाल को सेहरा अर्पित किया गया. इस अवसर पर भक्तों के दर्शन के लिए महाकाल के पट भी 44 घंटे नॉनस्टॉप खुले रहें. आज 16 फरवरी को दोपहर 12 बजे भस्म आरती होगी.
दोपहर भस्म आरती का समय (Mahakal Bhasm Aarti Timing)
महाकालेश्वर की भस्म आरती प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में&amp;nbsp; जाती है. लेकिन साल में केवल एक बार ऐसा अद्भत क्षण आता है, जब दोपहर 12 बजे भस्म आरती (Mahakal Noon Bhasm Aarti) संपन्न होती है. साल में एक बार होने वाली महाकाल की दोपहर भस्म आरती में लाखों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं.
आरती से पहले दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और फलों के रस से बाबा महाकाल का स्नान कराया जाता है. इसके बाद विशेष श्रृंगार होता है और पारंपरिक पगड़ी व सेहरा अर्पित किया जाता है. वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दोपहर की भस्म आरती होती है, जो भक्तों को भाव-विभोर कर देता है. दोपहर भस्म आरती के बाद शिव नवरात्रि संपन्न होती है. मंदिर के 11 पुजारी व ब्राह्मण 9 दिनों तक कठोर व्रत रखने के बाद शिव नवरात्रि व्रत का पारण (Vrat Paran) करते हैं.
ये भी पढ़ें: Mahashivratri 2026: क्या आज भी है महाशिवरात्रि, शाम तक रहेगी चतुर्दशी तिथि लोग हो रहे कंफ्यूज




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/276b009a0a98b9456aa6de72466ca0f41771211820637466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahakal, Bhasm, Aarti:, महाकाल, की, भस्म, आरती, दोपहर, बजे, साल, में, सिर्फ, एक, बार, आता, है, यह, अद्भुत, पल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2027 Date: महाशिवरात्रि अगले साल मार्च 2027 में होगी, नोट करें डेट</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5474</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5474</guid>
<description><![CDATA[ Mahashivratri 2027 Date:&amp;nbsp;शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्र कल्याण करने वाली रात्रि, मंगलकारी रात मानी गई है. अगले साल महाशिवरात्रि 6 मार्च 2027 शनिवार को रहेगी. फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि है, यह तपस्या का पर्व है. वैसे कई उपासक हर मास शिवरात्रि मनाते हैं.
पूजा उपासना करते हैं लेकिन बारह मास में एक शिवरात्रि है जिसको महाशिवरात्रि, अहोरात्रि भी कहते हैं। जन्माष्टमी, नरक चतुर्दशी, शिवरात्र, होली, दीपावली नवरात्रि, ये कुछ महारात्रियां हैं. इनमें किया गया जप- तप- ध्यान अनंत गुना पुण्य-फल देता है.
महाशिवरात्रि 2027

तारीख - 6 मार्च 2026
चतुर्दशी तिथि शुरू - 6 मार्च 2027, दोपहर 12.03
चतुर्दशी तिथि समाप्त - 7 मार्च 2027, दोपहर 1.46
निशिता काल पूजा मुहूर्त - देर रात 12.07 - देर रात 12.57

चार प्रहर पूजा मुहूर्त

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - 06:24 पी एम से 09:28 पी एम
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - 09:28 पी एम से 12:32 ए एम, मार्च 07
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 12:32 ए एम से 03:36 ए एम, मार्च 07
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 03:36 ए एम से 06:40 ए एम, मार्च 07

महाशिवरात्रि व्रत का महत्व
न स्नानेन न वस्त्रेण न धूपेन न चार्चया।
तुष्यामि न तथा पुष्पैर्यथा तत्रोपवासतः।।
&amp;lsquo;हे पार्वती ! महाशिवरात्रि के दिन जो उपवास करता है वह निश्चय ही मुझे संतुष्ट करता है। उस दिन उपवास करने पर मैं जैसा प्रसन्न होता हूँ, वैसा स्नान, वस्त्र, धूप और पुष्प अर्पण करने भी नहीं होता.&amp;rsquo;
महाशिवरात्रि में रात्रि पूजन का विधान क्यों
महाशिवरात्रि पूजन रात में इसलिए है क्योंकि एक ऋतु पूरी होती है और दूसरी ऋतु शुरु होती है. जैसे सृष्टिचक्र में सृष्टि की उत्पत्ति के बाद नाश और नाश के बाद उत्पत्ति है, ऐसे ही ऋतुचक्र में भी एक के बाद एक ऋतु आती रहती है.एक ऋतु का जाना और नयी ऋतु&amp;nbsp; आरम्भ होना &amp;ndash; इसके बीच का काल यह मध्य दशा है.
(महाशिवरात्रि शिशिर और वसंत ऋतुओं की मध्य दशा में आती है।) इस मध्य दशा में अगर जाग्रत रह जायें तो उत्पत्ति और प्रलय के अधिष्ठान में बैठने की, उस अधिष्ठान में&amp;nbsp; विश्रांति पाने की, आत्मा में विश्रांति पाने की व्यवस्था अच्छी जमती है इसलिए इस तिथि की रात्र &amp;lsquo;महाशिवरात्र&amp;rsquo; कही गयी है.
पूजा विधि

सूर्योदय से उपवास शुरू करें
अपनी क्षमता के अनुसार हल्का, सात्विक भोजन करें या निर्जला व्रत रखें.
शिव पूजा के लिए बिल्व पत्र, जल, दूध और धूप का प्रयोग करें.
ध्यान या मंत्रोच्चार के लिए रात भर जागते रहें.
अगले दिन सूर्योदय के बाद आदरपूर्वक उपवास तोड़ें.

Festival List 2026: पति की लंबी आयु के लिए होते हैं 5 खास व्रत, 2026 में कब-कब, नोट करें डेट
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/15/3fd06154f26f480a8f738650b6ee53fa1771172922721499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2027, Date:, महाशिवरात्रि, अगले, साल, मार्च, 2027, में, होगी, नोट, करें, डेट</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 16 फरवरी सोमवार का मुहूर्त, राहुकाल और पूरा पंचांग</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5475</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5475</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 16 फरवरी 2026: आज 16 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि और सोमवार है. यह दिन शांत चित्त, संयम और आध्यात्मिक ऊर्जा के विकास के लिए उत्तम होता है. सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.
16 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 16 February 2026)



तिथि

चतुर्दशी (15 फरवरी 2026, शाम 5.04 - 16 फरवरी 2026, शाम 5.24)



वार
सोमवार


नक्षत्र
श्रवण


योग
वरीयान


सूर्योदय 
सुबह 7.00


सूर्यास्त
सुबह 6.10


चंद्रोदय
सुबह 6.50


चंद्रोस्त
शाम 5.09, 16 फरवरी


चंद्र राशि
मकर



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


अमृत
सुबह 6.59 - सुबह 8.23


शुभ
सुबह 9.47 - सुबह 11.11


शाम का चौघड़िया


चर
शाम 6.12 - रात 7.48



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 8.23 - सुबह 9.47


यमगण्ड काल
सुबह 11.11 - दोपहर 12.35


गुलिक काल
दोपहर 1.59 - दोपहर 3.24


आडल योग
सुबह 6.59 - सुबह 8.47



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 16 February 2026)



सूर्य
कुंभ


चंद्रमा
मकर


मंगल
मकर


बुध
कुंभ


गुरु
मिथुन


शुक्र
कुंभ


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कन्या राशि
व्यापार में रुका हुआ कार्य पूर्ण हो सकता है. कोई नया काम आज आप शुरू कर सकते हैं



कौन सी राशियां संभलकर रहें



वृषभ राशि
परिवार में पत्नी से मतभेद हो सकते हैं. भाई और भतीजे से किसी बात को लेकर विवाद बन सकता है.



FAQs: 16 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





शिव मंदिर में बैठकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें. जलाधारी से निकले जल को पूरे घर में छिड़कें. इससे परिवार में क्लेश मिटते हैं.





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन वरीयान और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है.
Festival List 2026: पति की लंबी आयु के लिए होते हैं 5 खास व्रत, 2026 में कब-कब, नोट करें डेट




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/15/c66816b1b3488c87fb1f9257a787dded1771179913035499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, फरवरी, सोमवार, का, मुहूर्त, राहुकाल, और, पूरा, पंचांग</media:keywords>
</item>

<item>
<title>India AI Impact Summit 2026 का श्रीगणेश, पीएम मोदी का मंत्र ‘बहुरत्ना वसुन्धरा’</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5472</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5472</guid>
<description><![CDATA[ India AI Impact Summit 2026: भारत में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की शुरुआत आज 16 फरवरी 2026 से हो रही है, जोकि 20 फरवरी 2026 तक चलेगा. इस महत्वपूर्ण आयोजन में गूगल डीपमाइंड, एंथ्रोपिक, एडोब, सेल्सफोर्स, क्वालकॉम और फेडेक्स के सीईओ सहित वैश्विक राष्ट्राध्यक्ष और प्रौद्योगिकी जगत की दिग्गज हस्तियां एक साथ आएंगी. उम्मीद है कि, इस सशक्त सम्मेलन के परिणामस्वरूप एक ऐतिहासिक सर्वसम्मति की घोषणा हो सकती है.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का &#039;महाकुंभ&#039;
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी &amp;lsquo;इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026&amp;rsquo; का उद्घाटन करेंगे. इसमें 65 देशों की मौजूदी रहेगी और इसके साथ ही दुनियाभर की प्रमुख कंपनियों के सीईओ भी शामिल होंगे. एक्सपों और समिट के दौरान AI से दुनियाभर के हर व्यक्ति को क्या लाभ है, एआई के बदलाव और भविष्य को लेकर भी चर्च होगी. इस आयोजन का मनोरथ ग्लोबल एआई इकोसिस्टम में नए पार्टनरशिप को बढ़ावा देना है.
क्या बोले पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 16 फरवरी 2026 को शाम 5 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन करेंगे. इससे पहले X पर उन्होंने एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि- &quot;यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि India AI Impact Summit के लिए दुनियाभर से लोग भारत आ रहे हैं. इससे हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का भी पता चलता है. यह अवसर इस बात का भी प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक विकास में अहम योगदान दे रहा है. दाने तपसि शौचं च विज्ञानं विनये नये। विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।।&quot;

यह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि India AI Impact Summit के लिए दुनियाभर से लोग भारत आ रहे हैं। इससे हमारे देश के युवाओं के सामर्थ्य का भी पता चलता है। यह अवसर इस बात का भी प्रमाण है कि हमारा देश विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और वैश्विक विकास&amp;hellip; pic.twitter.com/7gxXJEtpOz
&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) February 16, 2026



श्लोक का क्या अर्थ है
दाने तपसि शौचं च विज्ञानं विनये नये। विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा।। का अर्थ है- दान, तप, शौर्य, विज्ञान, विनय और नेतृत्व के संसार में सदैव उत्कृष्ट से उत्कृष्टतर उदाहरण प्राप्त हो जाते हैं. क्योंकि यह पृथ्वी अनेक अनमोल रत्नों से भरी है. अत: विज्ञान व प्रविधि आदि के क्षेत्रों में नित नए आविष्कारों तथा नवाचारों पर किसी को विस्मय नहीं होना चाहिए.
ये भी पढ़ें: Mahakal Bhasm Aarti: महाकाल की भस्म आरती दोपहर 12 बजे, साल में सिर्फ एक बार आता है यह अद्भुत पल




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/16/b66d26cccc9f4d04ae32bb56860d3e961771213494978466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 12:18:53 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>India, Impact, Summit, 2026, का, श्रीगणेश, पीएम, मोदी, का, मंत्र, ‘बहुरत्ना, वसुन्धरा’</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kumbh Sankranti 2026: कुंभ संक्रांति पर ये 5 काम भूलकर भी न करें! जानें अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5416</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5416</guid>
<description><![CDATA[ Kumbh Sankranti 2026: इस साल कुंभ संक्रांति का पर्व 13 फरवरी, 2026 को मनाया जाएगा. इस दिन जब सूर्य मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा. हिंदू धर्म में कुंभ संक्रांति का विशेष महत्व होता है.
इस दिन कुछ खास गतिविधियां अत्यंत शुभ मानी जाती है, वहीं कुछ प्रथाएं धार्मिक नजरिए से नकारात्मक प्रभाव डालती है.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि पर सोमनाथ मंदिर में उमड़ेगी भक्तों की भीड़! दर्शन के लिए प्रशासन की बड़ी तैयारी?
कुंभ राशि पर क्या अशुभ माना जाता है?
तामसिक भोजन को ग्रहण करना- कुंभ संक्रांति के दिन मांस, शराब, प्याज और लहसुन का सेवन करना निषेध माना जाता है. इनका सेवन करने से दिन भर के पुण्य कर्म नष्ट होते हैं.&amp;nbsp;
नया काम या निवेश शुरू करना- संक्रांति का समय बदलाव का वक्त होता है, इस दौरान नया व्यवसाय या कोई बड़ी परियोजना को शुरू करने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
अपशब्दों के इस्तेमाल का प्रयोग- कुंभ संक्रांति के दिन घर में किसी का अपमान या झगड़ा करने से बचना चाहिए.&amp;nbsp;
देर से सोना- कुंभ संक्रांति के दिन देर तक सोना या रात तक जागना शुभ नहीं माना जाता है. ऐसा करने से आपकी कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर होती है.&amp;nbsp;
स्नान से पहले भोजन करना- इस दिन स्नान करने के बाद ही जलपान ग्रहण करना चाहिए. किसी पवित्र नदी में इस दिन नहाने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है.&amp;nbsp;
उपेक्षा करना- इस दिन भिखारियों या जरूरतमंदों को भोजन या सहायता देने से मना करने पर पितृ दोष हो सकता है.&amp;nbsp;
कुंभ संक्रांति के दिन गुड़, तिल, अनाज और कपड़े का दान करना चाहिए. माना जाता है कि, इस दिन दान करने से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है.&amp;nbsp;
सूर्य देव की पूजा करने के लिए तांबे के पात्र में जल अर्पित करते हुए &#039;ओम सूर्याय नमः&#039; मंत्र का जाप करना चाहिए.&amp;nbsp;
गायों को हरा चारा या गुड़ खिलाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है.&amp;nbsp;
खुद को शुद्ध करने के लिए सुबह-सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/11/90182c662219082ec705d0b7aa23665317708031758971092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kumbh, Sankranti, 2026:, कुंभ, संक्रांति, पर, ये, काम, भूलकर, भी, न, करें, जानें, अशुभ, प्रभाव, से, बचने, के, उपाय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Surya Grahan 2026: 17 फरवरी को &amp;apos;आग के छल्ले&amp;apos; जैसा दिखेगा सूरज, भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण ?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5414</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5414</guid>
<description><![CDATA[ Surya Grahan 2026: फाल्गुन अमावस्या पर 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. ये महाशिवरात्रि के ठीक दो दिन बाद लगेगा. ये वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जिसे रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है.
भारतीय समयानुसार ये सूर्य ग्रहण दोपहर 3.26 मिनट पर शुरू होगा, और शाम 7.57 मिनट पर समाप्त होगा हालांकि भारत में ये ग्रहण दिखाई नहीं देगा. रिंग ऑफ फायर दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा. जानें इसे कैसे और लाइव कहां देख सकते हैं.
आकाश में दिखेगा आग का छल्ला
यह वह खास ग्रहण है जहां चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, लेकिन चूंकि चंद्रमा उस समय पृथ्वी से सबसे दूर होता है, इसलिए वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता.फिर सूर्य के चारों ओर एक चमकदार आग के छल्ले जैसा नजारा बनता है. इसे ही रिंक ऑफ फायर कहा जाता है.
कहां-कहां दिखेगा ग्रहण
एनुलर फेज (रिंग ऑफ फायर) सिर्फ अंटार्कटिका में दिखेगा. इसके अलावा आंशिक ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, लेसोथो,चिली, कोमोरोस, इस्वातिनी (स्वाजीलैंड), मेडागास्कर, मलावी, मॉरीशस, मायोटे, मोजाम्बिक, नामीबिया, रियूनियन आईलैंड्स में दिखेगा.
कैसे देखें सूर्य ग्रहण

वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखना बेहद खतरनाक हो सकता है. ऐसा करने से आंखों को नुकसान हो सकता है.
ग्रहण देखने के लिए स्पेशल सोलर फिल्टर ग्लास या प्रोटेक्टिव टूल्स का इस्तेमाल करना जरुरी है. कैमरा, दूरबीन या टेलिस्कोप से देखने के लिए सोलर फिल्टर का प्रयोग करें.
भारत में सूर्य ग्रहण भले ही दिखाई न दें लेकिन आप टेक्नोलॉजी की मदद से लाइव देख सकते हैं. आमतौर पर NASA सूर्य और चंद्र ग्रहण की लाइव स्ट्रीमिंग करता है ऐसे में 17 फरवरी का सूर्य ग्रहण नासा लाइव स्ट्रीम कर सकता है.

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद 5 राजयोग, 4 शुभ मुहूर्त, शिव पूजा का महत्व बढ़ा
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/11/161ed48ad81f78ac87d93a2ed99862521770806986237499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Surya, Grahan, 2026:, फरवरी, को, आग, के, छल्ले, जैसा, दिखेगा, सूरज, भारत, में, दिखेगा, सूर्य, ग्रहण</media:keywords>
</item>

<item>
<title>आमलकी एकादशी 2026: 27 फरवरी को व्रत, आयुष्मान समेत शुभ योग में मिलेगी विष्णु&#45;लक्ष्मी की कृपा?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5415</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5415</guid>
<description><![CDATA[ Amalaki Ekadashi 2026:&amp;nbsp;हिंदू वैदिक पंचांग के मुताबिक, 27 फरवरी 2026, शुक्रवार के दिन आमलकी एकादशी है, यह त्योहार हर साल फाल्गुन माह के शक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है.
इस दिन जग के नाथ भगवान जगदीश और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इसके साथ ही इस दिन वैष्णव समुदाय के अनुयायी और सामान्य भक्त जन एकादशी व्रत का पालन करते हैं.&amp;nbsp;
Kumbh Sankranti 2026: कुंभ संक्रांति पर ये 5 काम भूलकर भी न करें! जानें अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?
धार्मिक मान्यता है कि, आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को पृथ्वी लोक पर स्वर्ग के समान सुखों की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं आमलकी एकादशी की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और योग से जुड़ी जरूरी जानकारी?
आमलकी एकादशी 2026 (Amalaki Ekadashi 2026 Date)
हिंदू वैदिक पंचांग के मुताबिक, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी 2026 शुक्रवार को देर रात 12 बजकर 33 मिनट पर शुरू होगी और 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर एकादशी तिथि के दिन समाप्त होगी. इस तरह 27 फरवरी को आमलकी एकादशी मनाई जाएगी.&amp;nbsp;
आमलकी एकादशी व्रत पारण समय
शुक्रवार 27 फरवरी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा. वहीं शनिवार 28 फरवरी को आमलकी एकादशी का पारण होगा. वही आमलकी एकादशी के पारण का समय 07 बजे से लेकर सुबह 9 बजकर 19 मिनट के मध्य किया जाएगा.&amp;nbsp;
आमलकी एकादशी शुभ योग
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के मौके पर आयुष्मान समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं. इन योगों में भगवान विष्णु की पूजा करने के से मां लक्ष्मी की भी विशेष कृपा प्राप्त होगी. उनकी कृपा से जीवन में व्यापत सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिलने के साथ जीवन में खुशियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
आयुष्मान योग का शुभ संयोग शाम 07 बजकर 44 मिनट तक है. इसके अलावा आमलकी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि और रवि और भद्रावास योग का संयोग बन रहा है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/11/67cc6d750ea5d9a0d574a3eca626282217708062005641092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>आमलकी, एकादशी, 2026:, फरवरी, को, व्रत, आयुष्मान, समेत, शुभ, योग, में, मिलेगी, विष्णु-लक्ष्मी, की, कृपा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 12 घंटे रहेगी भद्रा, किस समय कर पाएंगे शिव पूजा, जानें मुहूर्त</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5411</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5411</guid>
<description><![CDATA[ Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भद्रा का साया मंडरा रहा है. भद्रा को अशुभ माना गया है. भद्रा के दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर 12 घंटे भद्रा रहेगी. ऐसे में शिव पूजन कब करना सही होगा. जलाभिषेक के लिए कौन से मुहूर्त बन रहे हैं.
महाशिवरात्रि पर भद्रा
महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को भद्रा शाम 5 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी, इसका समापन 16 फरवरी को सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर होगा. करीब 12 घंटे तक भद्रा काल रहेगा. हालांकि भद्रा पाताल लोक की है. जब भद्रा पाताल में रहती है तब इसका प्रभाव पृथ्वी पर नहीं पड़ता है. ऐसे में भक्तगण बिना किसी के अवरोध के भगवान शिव की पूजा कर पाएंगे.
महाशिवरात्रि पर पूजा के 6 मुहूर्त
सुबह के मुहूर्त

चर - सुबह 8.24 - सुबह 9.48
लाभ - सुबह 9.48 - सुबह 11.11
अमृत - सुबह 11.11 - दोपहर 12.35

शाम का मुहूर्त

शुभ - शाम 6.11 - रात 7.47
अमृत - शाम 7.47 - रात 9.23
चर - रात 9.23 - रात 10.59

शिव साधना के दिन दुर्लभ संयोग
महाशिवरात्रि इस बार बहुत ही विशेष मानी जा रही है. दरअसल इस दिन शिव योग,आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, साध्य योग, शुक्ल योग, ध्रुव योग, व्यतिपात, शोभन योग और वरियान योग का प्रभाव रहेगा.
शिव पूजा विधि

दिनभर शिव का ध्यान करते हुए मौन रहें. सायंकाल के समय फिर शिव मंदिर में जाकर पूर्व या उत्तर मुखी होकर बैठें और पूजन करें.
शिवलिंग का गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्करसे अभिषेक करें.
भगवान् महाकाल को धतूरे और मदार के फूल, बेलपत्र, चंदन, अक्षत आदि समर्पित करते हुए उनका ध्यान करें और मन ही मन 108 बार &amp;lsquo;ओम् नम: शिवाय&amp;rsquo; का जाप करें.
पूरे दिन निर्जल रहकर व्रत करें तो विशेष पुण्य होता है.

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व
महाशिवरात्रि के चार प्रहर की पूजा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष पुरुषार्थों की सिद्धि होती है. जितनी भी नकारात्मकता या फिर व्याधियां हैं, वे सभी रात्रि के दौरान सक्रिय होती हैं. ये सभी भगवान शिव के वशीभूत रहती हैं, इसलिए उन सभी का नाश करने के लिए विशेष रूप से महाशिवरात्रि पर शिव साधना की जाती है.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार ऐसे करें शिव का अभिषेक, ग्रह दोष होंगे दूर
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/11/f700893049e5cd4df88f6f1e85b2463e1770832558483499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, महाशिवरात्रि, पर, घंटे, रहेगी, भद्रा, किस, समय, कर, पाएंगे, शिव, पूजा, जानें, मुहूर्त</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी कब, नोट करें डेट, संतान को रोगों से बचाने के लिए इस दिन पूजा का महत्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5412</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5412</guid>
<description><![CDATA[ Sheetala Ashtami 2026:&amp;nbsp;चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी को ठंडा खाने की परंपरा है. इन तिथियों को शीतला सप्तमी और शीतला अष्टमी कहा जाता है. इस साल शीतला सप्तमी 10 मार्च और शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 को है. इसे बासोड़ा भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन माता शीतला को ठंडा भोग अर्पित करते हैं. शीतला अष्टमी की पूजा क्यों की जाती है इसका महत्व क्या है, इस दिन कौन सा भोग लगता है सभी बातें जान लें.
क्यों होती है शीतला माता की पूजा
शीतला माता को हिन्दू धर्म में रोग-निवारण की देवी के रूप में पूजा जाता है. वे मुख्य रूप से चेचक (Smallpox), खसरा, बुखार और अन्य संक्रामक बीमारियों से रक्षा करने वाली माता मानी जाती हैं. शीतला माता की पूजा बच्चों को इन गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए और परिवार में स्वास्थ्य, शांति और रोगमुक्ति के लिए की जाती है. संतान की खुशहाली और अनंत सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भी इस दिन व्रत किया जाता है.&amp;nbsp;
शीतला अष्टमी 2026
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 11 मार्च 2026 को सुबह 1.54 पर शुरू होगी और अगले दिन 12 मार्च को सुबह 4.19 पर समाप्त होगी.

पूजा मुहूर्त - सुबह 6.36 - शाम 6.27

शीतला अष्टमी पूजा विधि

शीतला षष्ठी क दिन प्रात: सुबह उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान करें और इसके बाद व्रत का संकल्प लें.
फिर चौकी में सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं और उसमें शीतला माता की प्रतिमा या फिर चित्र स्थापित करें. इसके बाद इस मंत्र &#039;श्रीं शीतलायै नमः, इहागच्छ इह तिष्ठ&#039; को बोलते हुए जल अर्पित करें.
चंदन और अक्षत का तिलक लगाने के साथ फूल और फूल से माला अर्पित करें. इसके बाद शीतला माता को धूप-दीप दिखाएं.
भोग में जो बासी एक दिन पहले रात को बनाया रबड़ी, मीठे चावल, पुए, बिना नमक की पूड़ी,&amp;nbsp; हो उस भोजन का भोग अर्पित करें. इसके बाद शीतला षष्ठी व्रत की कथा सुनें.

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार ऐसे करें शिव का अभिषेक, ग्रह दोष होंगे दूर
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/11/9439021c085360955bd4ea2f5552b63e1770798220160499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Sheetala, Ashtami, 2026:, शीतला, अष्टमी, कब, नोट, करें, डेट, संतान, को, रोगों, से, बचाने, के, लिए, इस, दिन, पूजा, का, महत्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 12 फरवरी का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5413</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5413</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 12 फरवरी 2026: आज 12 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि और गुरुवार है. विष्णु जी की पूजा के लिए ये दिन बहुत शुभ है. इस दिन घर में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए. विष्णु सहस्त्रनाम पूजा कुंडली में सूर्य, बुध और बृहस्पति को मजबूत करने में मदद करती है.&amp;nbsp;
12 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 12 February 2026)



तिथि

दशमी (11 फरवरी 2026, सुबह 9.58 - 12 फरवरी 2026, दोपहर 12.22)



वार
गुरुवार


नक्षत्र
ज्येष्ठा


योग
हर्षण


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 4.04


चंद्रोस्त
दोपहर 1.16, 13 फरवरी


चंद्र राशि
वृश्चिक



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह 7.03 - सुबह 8.26


लाभ
सुबह 8.26 - सुबह 9.49


अमृत
दोपहर 12.35 - दोपहर 1.58


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 7.44 - रात 9.22


अमृत
रात 9.22 - रात 1058



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 1.59 - दोपहर 3.22


यमगण्ड काल
सुबह 7.02 - सुबह 8.25


गुलिक काल
सुबह 9.49 - सुबह 11.12


आडल योग
सुबह 7.02 - दोपहर 1.42


भद्रा काल
सुबह 7.02 - दोपहर 12.22


विडाल योग
दोपहर 1.42 - सुबह 7.01, 13 फरवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 12 February 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
वृश्चिक


मंगल
मकर


बुध
बुध


गुरु
मिथुन


शुक्र
मकर


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



धनु राशि
नौकरी में आपके अधिकारों में वृद्धि होगी. आपका डूबा हुआ धन आपको वापस मिलने की संभावना है.&amp;nbsp;



कौन सी राशियां संभलकर रहें



वृश्चिक राशि
विद्यार्थी यदि पढ़ाई में ढील देंगे, तो उन्हें परीक्षा देने में समस्या आएगी. आपको संतान के करियर को लेकर टेंशन हो सकती है.



FAQs: 12 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





गुरुवार के दिन नियमित रूप से गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करना चाहिए. गीता के इस अध्याय का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता दूर होती है और इसकी जगह सकारात्मकता आने लगती है.





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन हर्षण योग बन रहा है.
Surya Grahan 2026: 17 फरवरी को &#039;आग के छल्ले&#039; जैसा दिखेगा सूरज, भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण ?




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/11/71d0475d7fae21a0f7739569aab6cd411770831872439499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, फरवरी, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े 9 पवित्र स्थल, जानिए जन्म से लेकर वैराग्य तक की यात्रा?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5409</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5409</guid>
<description><![CDATA[ भगवान श्रीकृष्ण को याद करने पर दिमाग में जो सबसे पहले छवि बनती है, वो कुछ इस तरह है कि, सुंदर नयन, नील वर्ण, मधुर मुस्कान, माथे पर सुशोभित मोर पंख, हाथों में बांसुरी और मन मोह लेने वाला निराला रूप जो उन्हें भगवान से ज्यादा सखा बताता है.
महाभारत और पुराणों के मुताबिक, कृष्ण का जीवनकाल 125 वर्ष का था. अपने जीवनकाल के दौरान वे शायद ही कभी एक स्थान पर लंबे समय तक रहे हों. &amp;nbsp;उनका जीवन अलग-अलग चरणों में बीता.&amp;nbsp;
बांके बिहारी और प्रेम मंदिर तो सब जाते हैं, लेकिन ये 5 मंदिर वृंदावन की असली आत्मा हैं!
जहां बचपन में खतरे के माहौल को देखते हुए छिपकर बिताया गया बचपन, प्रेम और विरह से भरा यौवन काल का समय, जिम्मेदारियों से भरा वयस्क जीवन और आखिर में वैराग्य और एकांत वास, हर चरण किसी न किसी स्थान से जुड़ा था, और जब वह चरण समाप्त होता, तो कृष्ण उस स्थान को छोड़ देते. आइए जानते हैं भगवान कृष्ण से जुड़े वो 9 स्थान जहां आज भी कृष्ण की यादें जुड़ी है.&amp;nbsp;
मथुरा जन्म और खतरा
भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा में राजनीतिक आतंक के दौर में हुआ था. कंस के भयावह शासन ने मथुरावासियों के दिल में डर पैदा कर दिया था. जेल में कृ्ष्ण का जन्म कंस के दमन का प्रतीक था. मथुरावासी कृष्ण को बाल रूप में याद करते हैं, जिसने असंभव परिस्थितियों का सामना कर कंस पर विजय प्राप्त की थी.
यद्यपि कृष्ण शिशु अवस्था में और बाद में युवावस्था में थोड़े समय के लिए ही यहां रहे, मथुरा उनके जीवन की शुरुआत और नैतिक नींव का प्रतीक है. इसे उस स्थान के रूप में याद किया जाता है, जहां नियति ने इतिहास में प्रवेश किया.
गोकुल प्रारंभिक जीवन (0-3 वर्ष)
गोकुल में श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के प्रारंभिक वर्ष को व्यतीत किया था. गोकुल उनके लिए पहचान से ज्यादा जीवन रक्षा के लिए महत्व रखता था. कंस से छिपकर श्रीकृष्ण अपने शाही जन्म से अनभिज्ञ होकर बड़े हुए. गोकुलवासी उन्हें समुदाय द्वारा संरक्षित बालक के रूप में याद करते हैं.
इस चरण ने कृष्ण को मानवीय संबंधों से परिचित कराया. गोकुल को कृष्ण के जीवन से जुड़े पालन-पोषण, सुरक्षा और सामूहिक देखभाल के रूप में याद किया जाता है.
वृंदावन बचपन से लेकर युवावस्था (3-11)
वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण के लिए जीवन का सबसे लंबा और भावनात्मक रूप से सबसे यादगार दौर है. यहीं उनका बचपन और युवावस्था का सफर बीता था. धरती, जानवरों और लोगों से उनके गहरे भावनात्मक संबंधों ने प्रेम और विरह के प्रति उनकी समझ को आकार देने का काम किया.
जब कृष्ण ने वृंदावन छोड़ा तो, यह विरह स्थायी हो गया. यही विरह कृष्ण से जुड़ी यादों का केंद्र बन गया. वृंदावन उन्हें वापसी के माध्यम से नहीं, बल्कि उनकी यादों के लिए तड़प के जरिए से याद करता है.&amp;nbsp;
मथुरा वापसी और कंस के अत्याचारों का अंत ( उम्र 11-12)
कृष्ण भगवान जब युवावस्था में आए तो कंस का सामना करने के लिए मथुरा लौटे. मथुरा शहर उन्हें कंस के अत्याचारों के अंत करने वाला मुक्तिदाता के रूप में भी याद करता है.
उनका प्रवास संक्षिप्त था, क्योंकि उनकी भूमिका खास थी. न्याय बहाल होने के बाद वे फिर मथुरा की ओर चले गए. मथुरा भावनात्मक जीवन से राजनीतिक उत्तरदायित्व की ओर संक्रमण का प्रतीक है.&amp;nbsp;

द्वारका राजशाही और शासन (12 से 90 वर्ष)
कृष्ण भगवान का सबसे लंबा निवास स्थान द्वारका था. द्वारका में कृष्ण राजा, रणनीतिकार और रक्षकके रूप में जीवन व्यतीत किया. द्वारका में उनका जीवन विस्तार पर केंद्रित नहीं,बल्कि स्थिरता पर केंद्रित था.
द्वारका में श्रीकृष्ण को ऐसे राजा के रूप में याद किया जाता है, जिसने अपनी प्रजा पर अंहकार रहित शासन किया. जब यादव वंश आंतरिक कलह की वजह से नष्ट हो गया, तभी कृष्ण ने हस्तक्षेप नहीं किया.
कुरुक्षेत्र मार्गदर्शन और दर्शन (करीब 90 ईस्वी)
कुरुक्षेत्र कृष्ण के ज्ञान को दर्शाता है. उन्होंने युद्ध में हिस्सा नहीं लिया फिर भी उनके परामर्श ने युद्ध परिणाम को प्रभावित किया. भगवद् गीता का जन्म इसी पल में हुआ, जो कर्म और वैराग्य को जोड़ती है.
कुरुक्षेत्र कृष्ण के संपूर्ण जीवन को कर्तव्य के दर्शन में समेटता है. कुरुक्षेत्र को उस स्थान के रूप में याद किया जाता है, जहां कृष्ण ने जीवन का सार समझाया था.&amp;nbsp;
हस्तिनापुर कुटनीति और गवाही
हस्तिनापुर कृष्ण की मध्यस्थ भूमिका को दर्शाती है. उन्होंने महाभारत यु्द्ध को रोकने की कोशिश की और विजय से ज्यादा शांति को महत्व दिया. जब युद्ध जरूरी हो गया, तो उन्होंने मानवीय हस्तक्षेप को स्वीकार किया. हस्तिनापुर कृष्ण को शासक के रूप में नहीं, बल्कि एक नैतिक साक्षी के रूप में याद करता है. यह जगह उनकी करुणा को दैवीय हस्तक्षेप की सीमाओं से जोड़ता है.&amp;nbsp;
प्रभास पाटन वापसी और मृत्यु (अंतिम वर्ष)
भगवान कृष्ण का जीवन प्रभास पाटन में सत्ता और जनसमूह से दूर समाप्त हुआ. उनकी मृत्यु शांत, निर्विरोध और एकांत में हुई. यह स्थान कृष्ण को ऐसे व्यक्तित्व के रूप में याद करता है, जिन्होंने मृत्यु को बिना किसी डर के स्वीकार किया. प्रभास पाटन उनकी सांसारिक यात्रा की समाप्ति और वैराग्य के अंतिम चरण का प्रतीक है.&amp;nbsp;
जगन्नाथ पुरी
जगन्नाथ पुरी काल से परे कृष्ण का प्रतिनिधित्व करते हैं. परंपरा के मुताबिक, उनका हृदय विद्यमान रहा और बाद में भगवान जगन्नाथ बन गया. बाकि मंदिरों के विपरीत यहां उनका स्वरूप पूर्णता के बजाय निरंतरता पर बल देता है.
पुरी कृष्ण को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद नहीं करता, जो जीवत रहे या मर गए, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद करता है जो विद्यमान रहे. यह वह स्थान है जहां स्मृति उपस्थिति में बदल जाती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/12/90901f3300c9320b02aadc3ba998a51017708755282021092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>भगवान, श्रीकृष्ण, से, जुड़े, पवित्र, स्थल, जानिए, जन्म, से, लेकर, वैराग्य, तक, की, यात्रा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि क्यों इतनी शक्तिशाली? ज्योतिषाचार्य से जानिए पूजा विधि, शुभ योग और शिव कृपा का पूरा रहस्य?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5410</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5410</guid>
<description><![CDATA[ Maha Shivratri 2026: हजारों सालों से विज्ञान &#039;शिव&#039; के अस्तित्व को समझने का प्रयास कर रहा है. जब भौतिकता का मोह खत्म हो जाए और ऐसी स्थिति आए कि ज्ञानेंद्रियां भी बेकाम हो जाएं, उस स्थिति में शून्य आकार लेता है, और जब शून्य भी अस्तित्वहीन हो जाए तो वहां शिव का प्राकट्य होता है.
शिव यानी शून्य से परे. जब कोई व्यक्ति भौतिक जीवन को त्याग कर सच्चे मन से मनन करे तो शिव की प्राप्ति होती है. उन्हीं एकाकार और अलौकिक शिव के महारूप को उल्लास से मनाने का त्योहार है महाशिवरात्रि.
महाशिवरात्रि पर सोमनाथ मंदिर में उमड़ेगी भक्तों की भीड़! दर्शन के लिए प्रशासन की बड़ी तैयारी?
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानिए महाशिवरात्रि का महत्व
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि महाशिवरात्रि हिंदुओं का एक धार्मिक त्योहार है, जिसे हिंदू धर्म के प्रमुख देवता महादेव अर्थात शिव जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है.
महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. इस दिन शिवभक्त एवं शिव में श्रद्धा रखने वाले लोग व्रत-उपवास रखते हैं और विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करते हैं. महाशिवरात्रि को लेकर भगवान शिव से जुड़ी कुछ मान्यताएं प्रचलित हैं. ऐसा माना जाता है कि इस विशेष दिन ही ब्रम्हा के रूद्र रूप में मध्यरात्रि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था.

महाशिवरात्रि को लेकर कई तरह के मान्यताएं प्रचलित
वहीं यह भी मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने तांडव कर अपना तीसरा नेत्र खोला था और ब्रम्हांड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था. इसके अलावा कई स्थानों पर इस दिन को भगवान शिव के विवाह से भी जोड़ा जाता है और यह माना जाता है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह हुआ था.
वैसे तो प्रत्येक माह में एक शिवरात्रि होती है, परंतु फाल्गुन माह की कृष्ण चतुर्दशी को आने वाली इस शिवरात्रि का अत्यंत महत्व है, इसलिए इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है.
वास्तव में महाशिवरात्रि भगवान भोलेनाथ की आराधना का ही पर्व है, जब धर्मप्रेमी लोग महादेव का विधि-विधान के साथ पूजन अर्चन करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. इस दिन शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है, जो शिव के दर्शन-पूजन कर खुद को सौभाग्यशाली मानती है.
भगवान शिव को भांग बेहद प्रिय
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन शिव जी का विभिन्न पवित्र वस्तुओं से पूजन एवं अभिषेक किया जाता है और बिल्वपत्र, धतूरा, अबीर, गुलाल, बेर, उम्बी आदि अर्पित किया जाता है.
भगवान शिव को भांग बेहद प्रिय है अत: कई लोग उन्हें भांग भी चढ़ाते हैं. दिनभर उपवास रखकर पूजन करने के बाद शाम के समय फलाहार किया जाता है.
शिवरात्रि को भगवान शिव की पूजा करने का सबसे बड़ा दिन माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन भोले को खुश कर लिया तो आपके सारे काम सफल होते हैं और सुख समृद्धि आती है. भोले के भक्त शिवरात्रि के दिन कई तरह से भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं. शिव को खुश करने के लिए शिवालयों में भक्तों का तांता लगा होता है, जो बेल पत्र और जल चढ़ाकर शिव की महिमा गाते हैं.
महाशिवरात्रि 15 फरवरी सर्वार्थ सिद्धि योग में
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि इस बार दो शुभ योगों में 15 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग में त्रियोदशी युक्त चतुर्दशी में मनाई जाएगी.
महाशिवरात्रि के दिन शिवजी के भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते हैं और विधि-विधान से शिव-गौरी की पूजा करते हैं. ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ पृथ्वी पर मौजूद सभी शिवलिंग में विराजमान होते हैं, इसलिए महाशिवरात्रि के दिन की गई शिव की उपासना से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है. &amp;nbsp;
दरअसल महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात का पर्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि की रात आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं.
महाशिवरात्रि पर ज्योतिषाचार्य द्वारा सुझाए गए उपायों से मिलेगा लाभ
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन ज्योतिष उपाय करने से आपकी सभी परेशानियां खत्म हो सकती हैं. महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए तभी इसका फल मिलता है.
इस दिन का प्रत्येक घड़ी-पहर परम शुभ रहता है. कुवांरी कन्याओं को इस दिन व्रत करने से मनोनुकूल पति की प्राप्ति होती है और विवाहित स्त्रियों का वैधव्य दोष भी नष्ट हो जाता है. महाशिवरात्रि में शिवलिंग की पूजा करने से जन्मकुंडली के नवग्रह दोष तो शांत होते हैं, विशेष करके चंद्र्जनित दोष जैसे मानसिक अशान्ति, माँ के सुख और स्वास्थ्य में कमी, मित्रों से संबंध, मकान-वाहन के सुख में विलम्ब, हृदयरोग, नेत्र विकार, चर्म-कुष्ट रोग, नजला-जुकाम, स्वांस रोग, कफ-निमोनिया संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है और समाज में मान प्रतिष्ठा बढती है.
शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से व्यापार में उन्नति और सामाजिक प्रतिष्ठा बढती है. भांग अर्पण से घर की अशांति, प्रेत बाधा तथा चिंता दूर होती है. मंदार पुष्प से नेत्र और ह्रदय विकार दूर रहते हैं. शिवलिंग पर धतूर के पुष्प-फल चढ़ाने से दवाओं के रिएक्शन तथा विषैले जीवों से खतरा समाप्त हो जाता है.
शमीपत्र चढ़ाने से शनि की शाढ़ेसाती, मारकेश तथा अशुभ ग्रह-गोचर से हानि नहीं होती. इसलिए श्रीमहाशिवरात्रि के एक-एक क्षण का सदुपयोग करें और शिवकृपा प्रसाद से त्रिबिध तापों से मुक्ति पायें.
चार प्रहर की पूजा का समय
प्रथम प्रहर पूजा का समय: सायं 06:15 बजे से रात्रि 09:28 बजे तकद्वितीय प्रहर पूजा का समय: रात्रि 09:29 बजे से मध्यरात्रि 12:41 बजे तकतृतीय प्रहर पूजा का समय: मध्यरात्रि 12:42 बजे से 16 फरवरी &amp;nbsp;प्रातः03:54 बजे तकचतुर्थ प्रहर पूजा का समय: 16 फरवरी , प्रातः03:55 बजे से प्रातः 07:07 बजे तक
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अगर किसी को अपना सूर्य मजबूत करना है सरकारी कामों में सफलता प्राप्त करनी है तो तांबे के लोटे मंव जल मिश्रित गुण से शिवलिंग का अभिषेक करें, वैवाहिक जीवन मधुर बनाने के लिए जोड़े से पति पत्नी शिवलिंग का अभिषेक करें.
अगर आपकी कुंडली में मंगल पीड़ित है तो शिवलिंग का अभिषेक हल्दी मिश्रित जल से करें, अगर आपकी कुंडली में बुध की स्थिति खराब है तो शिव पार्वती की पूजा करें पूजन के बाद 7 कन्याओं को भोजन कराएं एवं जल और तुलसी पत्र चढ़ाएं, कुंडली में शुक्र को मजबूत करने के लिए दूध-दही से अभिषेक करें, कुंडली में शनि ग्रह पीड़ित है तो सरसों के तेल से अभिषेक करें, राहु ग्रह को मजबूत करने के लिए जल में 7 दाना जौं मिलाकर अभिषेक करें.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार ऐसे करें शिव का अभिषेक, ग्रह दोष होंगे दूर
केतु को मजबूत करने के लिए जल में शहद मिलाएं
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि केतु ग्रह को मजबूत करने के लिए जल में शहद मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें. कुंडली में चंद्रमा को मजबूत करने के लिए कच्चे दूध से अभिषेक करें.
गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए अपने माथे पर और नाभि पर केसर का तिलक लगाएं. केसर मिश्रित जल चढ़ाएं शिवलिंग में सबसे ज्यादा एनर्जी पाई जाती है. इसके साथ 108 बार ओम नम: शिवाय का जाप करें.
मेष : बेलपत्र अर्पित करें.वृष : दूध मिश्रित जल चढ़ाएं.मिथुन : दही मिश्रित जल चढ़ाएं.कर्क : चंदन का इत्र अर्पित करें.सिंह : घी का दीपक जलाएं.कन्या : काला तिल और जल मिलाकर अभिषेक करें.तुला: जल में सफेद चंदन मिलाएं.वृश्चिक : जल और बेलपत्र चढ़ाए.धनु : अबीर या गुलाल चढ़ाएं.मकर : भांग और धतूरा चढ़ाएं.कुंभ : पुष्प चढ़ाएं.मीन : गन्ने के रस और केसर से अभिषेक करें.

शिव पूजा का महत्व-
भगवान शिव की पूजा करते समय बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति की सभी समस्याएं दूर होकर उसकी इच्छाएं पूरी होती हैं.
शिवरात्रि का पौराणिक महत्व-
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी पावन रात्रि को भगवान शिव ने संरक्षण और विनाश का सृजन किया था. मान्यता यह भी है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का शुभ विवाह संपन्न हुआ था.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि पूजा विधि
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि शिवपुराण के अनुसार व्रती को प्रातः काल उठकर स्नान संध्या कर्म से निवृत्त होने पर मस्तक पर भस्म का तिलक और गले में रुद्राक्षमाला धारण कर शिवालय में जाकर शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन एवं शिव को नमस्कार करना चाहिए. तत्पश्चात उसे श्रद्धापूर्वक व्रत का इस प्रकार संकल्प करना चाहिए.
हल्दी का टीका
शिवरात्री पर भगत मंदिर में हल्दी के जरिए भगवान शिव को टीका लगाते हैं. &amp;nbsp;वैसे भी लगभग हर धार्मिक कार्य में हल्दी का प्रयेाग किया जाता है. &amp;nbsp;लेकिन भगवान शिव को हल्दी अर्पित नहीं की जाती. &amp;nbsp;इसका कारण है कि कि ऐसा हल्दी एक स्त्री सौंदर्य प्रसाधन में प्रयोग की जाते वाली वस्त है और शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है.&amp;nbsp;
लाल रंग के फूल
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि आपने देखा होगा कि शिवरात्रि पर मंदिरों के बाहर खूब फूल बिकते हैं. &amp;nbsp;पर क्या आप ध्यान दिया कि इन फूलों में लाल रंग के फूल नहीं होते. ज्यादातर गेंदा ही नजर आता है. ऐसा इसलिए कि शिवजी को लाल रंग के फूल नहीं चढ़ाते. &amp;nbsp;कहते हैं कि सफेद रंग के फूल चढ़ाने से भगवान शिव को जल्दी प्रसन्न होते हैं.&amp;nbsp;
सिंदूर या कुमकुम
महिलाएं सिंदूर या कुमकुम अपने पति की लंबी उम्र के लिए लगाती हैं. कहते हैं भगवान शिव विध्वंसक के रूप में जाने गए हैं इसलिए शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए. इसकी बजाए आप चंदन का इसतेमाल कर सकते हैं.
तांबे का लोटा
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि शिवजी पर इस बार जब आप जल चढ़ाने जाएं तो केवल तांबे या पीतल के लोटे का ही इस्तेमाल करें, स्टील या लोहे के लोटे का नहीं.&amp;nbsp;
शंख बजाना शुभ
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू धर्म में शंख को बहुत पवित्र माना गया है हर पूजा-पाठ के काम में इसे बजाना और इसके जरिए लोगों को जल देना काफी शुभ माना जाता है. &amp;nbsp;लेकिन कहते हैं कि शिवलिंग पर शंख से जल नहीं चढ़ाना चाहिए. ऐसा करना वर्जित माना गया है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/12/e4c00ef5c44990d083fd75bc7f901ff617708711863361092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Maha, Shivratri, 2026:, महाशिवरात्रि, क्यों, इतनी, शक्तिशाली, ज्योतिषाचार्य, से, जानिए, पूजा, विधि, शुभ, योग, और, शिव, कृपा, का, पूरा, रहस्य</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: रात 12:09 से 1 बजे तक बनेगा दुर्लभ ग्रह योग, पुंडरीक महाराज ने बताया क्यों जागना जरूरी?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5408</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5408</guid>
<description><![CDATA[ Pundrik Maharaj on Mahashivratri:&amp;nbsp;इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026, रविवार के दिन है. आने वाली शिवरात्रि को लेकर साधु-संतों और आध्यात्मिक गुरुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है.
प्रसिद्ध कथावाचक श्री पुंडरीक महाराज ने इस साल की शिवरात्रि को बेहद ही खास बताते हुए कहा कि, इस दिन रात के समय बेहद ही खास ग्रहों का ऐसा संयोग बन रहा है, जो साधना और ऊर्जा जागरण के लिहाज से दुर्लभ माना जा सकता है.&amp;nbsp;
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 1, 2 नहीं 3 ग्रहों की बदलेगी चाल, कई राशियां की किस्मत होगी बुलंद
पुंडरीक महाराज से जानिए ये शिवरात्रि क्यों हैं खास?
पुंडरीक महाराज के मुताबिक, इस बार रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 1 बजे तक एक ऐसा &amp;ldquo;प्लैनेटरी सिस्टम&amp;rdquo; सक्रिय रहेगा, जिसमें ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह सामान्य दिनों की तुलना में काफी अलग रहने वाला है.
उन्होंने बताया कि, आमतौर पर ग्रहों की चाल की वजह से ऊर्जा कभी नीचे की ओर बहती है और कभी ऊपर की ओर, लेकिन इस बार शिवरात्रि की रात यह ऊर्जा उर्ध्वगामी यानी ऊपर की ओर प्रवाहित होने वाली होगी.&amp;nbsp;



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Pundrik Goswami (@sripundrik)





ध्यान और शिव का स्मरण का लाभ
महाराज ने इसे ऊर्जा का शोर कहा है, यानी उस समय वातावरण में काफी ज्यादा सूक्ष्म ऊर्जा सक्रिय रहेगी. उनके मुताबिक, अगर व्यक्ति उस दौरान जागकर मात्र ध्यान करने बैठ जाए या शिव का स्मरण कर ले तो इसका सकारात्मक प्रभाव मन और शरीर पर अच्छा प्रभाव डाल सकता है.
उन्होंने यह भी कहा कि, अगर कोई पूरी रात जाग नहीं सकता, तो कम से कम 45 मिनट का एक मुहूर्त जरूर निकालकर साधना करें.&amp;nbsp;
पुंडरीक महाराज ने इस ग्रह योग की तुलना चुंबकीय प्रभाव से की, जैसे मैग्नेट कभी आकर्षित करता है और कभी किसी चीज को रिपेयर करता है, वैसे ही ग्रहों की स्थिति इंसान के भीतर की ऊर्जा पर प्रभाव डालती है. उनका मानना है कि, इस बार शिवरात्री की रात ब्रह्मांड की ऊर्जा मानो किसी दिव्य लीला के तहत मानव चेतना को ऊपर उठाने के लिए सक्रिय हो रही हैं.&amp;nbsp;
उन्होंने स्पष्ट किया कि, यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि ऊर्जा और प्रकृति के नियमों पर आधारित है. इसलिए एस खास समय में जागना, ध्यान करना या शिव का नाम लेना एक साधारण धार्मिक कार्य नहीं है, बल्कि अपने अंदर की चेतना को सक्रिय करने का मौका हो सकता है. महाशिवरात्रि को हमेशा से ही साधना और आत्मिक जागरण की रात कहा गया है, लेकिन इस साल यह दुर्लभ ग्रह योग इसे ओर भी खास बना रहा है.&amp;nbsp; &amp;nbsp;
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/12/b58c052a5f82badbbdc63a74c059557417708880973881092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, रात, 12:09, से, बजे, तक, बनेगा, दुर्लभ, ग्रह, योग, पुंडरीक, महाराज, ने, बताया, क्यों, जागना, जरूरी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: त्रयोदशी&#45;चतुर्दशी के संयोग में महाशिवरात्रि, देखें पूजा, मुहूर्त, कथा से जुड़ी संपूर्ण जानकारी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5407</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5407</guid>
<description><![CDATA[ Mahashivratri 2026: रविवार, 15 फरवरी को शिव पूजा का महापर्व महाशिवरात्रि है. इस पर्व पर भगवान शिव की पूजा खासतौर पर रात में करने की परंपरा है. महाशिवरात्रि को महारात्रि भी कहा जाता है, क्योंकि इस तिथि पर रात में की जाने वाली पूजा अक्षय पुण्य देने वाली मानी जाती है.
श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि शिवपुराण में लिखा है कि, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे. उस समय ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवाद चल रहा था. दोनों देवताओं खुद को श्रेष्ठ बता रहे थे. इस विवाद को शांत कराने के लिए भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए और इन दोनों देवताओं को अपनी महिमा बताई थी. हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है.
फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि इस बार दो शुभ योगों में 15 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग में त्रियोदशी युक्त चतुर्दशी में मनाई जाएगी. महाशिवरात्रि के दिन शिवजी के भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखते हैं और विधि-विधान से शिव-गौरी की पूजा करते हैं. ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ पृथ्वी पर मौजूद सभी शिवलिंग में विराजमान होते हैं, इसलिए महाशिवरात्रि के दिन की गई शिव की उपासना से कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है.
14 फरवरी को शाम 4.02 बजे त्रयोदशी शुरू होगी और 15 फरवरी को शाम 5.05 बजे तक त्रियोदशी है. 15 फरवरी को शाम 5.06 बजे चतुर्दशी शुरू होगी, जोकि 16 फरवरी को शाम 5.35 बजे तक है. इस कारण इस बार 15 फरवरी को त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन सुबह 7.08 से शाम 7.48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है. इस दिन विधि विधान के साथ शिव लिंग की पूजा करनी चाहिए. शुभ संयोग और शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की आराधना करने से उनके भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होगी.
सर्वार्थ सिद्धि योग ज्योतिष में एक अत्यंत शुभ योग माना जाता है. जिसका अर्थ है सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाला. यह विशेष वार (दिन) और निश्चित नक्षत्रों के संयोग से बनता है, ऐसी मान्यता है कि कार्य (जैसे व्यापार, वाहन खरीदना, खरीदारी) निश्चित रूप से सफल होता है. यह योग बाधाओं को दूर करता है और मनोवांछित फल देता है.
मार्कण्डेय पुराण में शिवरात्रि को महारात्रि कहा गया
मार्कण्डेय पुराण के श्री दुर्गा सप्तशती में तीन प्रकार की दारुण रात्रियों का उल्लेख है. इन तीन रात्रियों को कालरात्रि, महारात्रि और मोहरात्रि कहा गया है. होली का पर्व कालरात्रि के रूप में मनाया जाता है. जबकि दीपावली और शरद पूर्णिमा को मोहरात्रि का पर्व माना गया है. हालांकि कुछ विद्वान दीपावली को कालरात्रि का पर्व भी मानते हैं. शिवरात्रि को विशेष रूप से महारात्रि का कहा गया है, क्योंकि यह रात्रि साधना और भक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. हिंदू धर्म में अधिकतर त्योहार सूर्योदय के बाद मनाने की परंपरा है, लेकिन कुछ पर्व हैं, जिन्हें रात में मनाना चाहिए. इनमें होली, दीपावली, शरद पूर्णिमा, जन्माष्टमी, शिवरात्रि और नवरात्रि प्रमुख हैं. इन पर्वों में रात्रि का महत्व है, क्योंकि यह समय साधना, ध्यान और ईश्वर से जुड़ने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है.
महाशिवरात्रि&amp;nbsp; तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार इस साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि रविवार 15 फरवरी को शाम 05:04 मिनट से शुरू होगी. यह चतुर्दशी तिथि 16 फरवरी को शाम 5:34 मिनट तक रहेगी. ऐसे में महाशिवरात्रि रविवार 15 फरवरी को मनाई जाएगी. महाशिवरात्रि के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है. उत्तराषाढा और श्रवण नक्षत्र का शुभ संयोग बना रहेगा. व्यतीपात योग बनेगा, जो पूरे दिन रहने वाला है. कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र का संयोग चतुर्ग्रही योग का निर्माण करेंगे.
चार प्रहर की पूजा
महाशिवरात्रि के पर्व काल में धर्म शास्त्रीय मान्यता के अनुसार चार प्रहर की साधना का विशेष महत्व है. प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव की उपासना के अलग-अलग प्रकार का वर्णन मिलता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यथा श्रद्धा, यथा प्रहर, यथा स्थिति और यथा उपचार के अनुसार साधना करनी चाहिए. चार प्रहर की साधना से धन, यश, प्रतिष्ठा और समृद्धि प्राप्त होती है. जिनके जीवन में संतान संबंधी बाधा हो रही हो, उन्हें भी यह साधना अवश्य करनी चाहिए.
चार प्रहर की पूजा का समय

प्रथम प्रहर पूजा का समय: सायं 06:15 बजे से रात्रि 09:28 बजे तक
द्वितीय प्रहर पूजा का समय: रात्रि 09:29 बजे से मध्यरात्रि 12:41 बजे तक
तृतीय प्रहर पूजा का समय: मध्यरात्रि 12:42 बजे से 16 फरवरी प्रातः03:54 बजे तक
चतुर्थ प्रहर पूजा का समय: 16 फरवरी, प्रातः03:55 बजे से प्रातः 07:07 बजे तक

पूजा में करें महामृत्युंजय मंत्र का जप
महाशिवरात्रि पर शिव पूजा करते समय में अपनी मनोकामना के अनुसार मंत्र जप करना चाहिए. इस मंत्र के जप से अनजाना भय और चिंता दूर होती है. महामृत्युंजय मंत्र की वजह से शिव जी की विशेष कृपा मिलती है, जिससे जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.
महामृत्युंजय मंत्र- ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंपुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।
इन चीजों से करें भगवान शिव का अभिषेक
महाशिवरात्रि पर्व के दिन भगवान शिव की उपासना के समय शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करना शुभ होता है. ऐसा करने से श्रद्धालु के कार्य जीवन में आ रही सभी समस्याएं दूर हो जाती है और भगवान शिव की कृपा बनी रहती है. शिवरात्रि के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक दही से करने से भी आर्थिक क्षेत्र में आ रही सभी परेशानियां दूर हो जाती है. वहीं गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. भगवान शिव का अभिषेक करते समय 108 बार &#039;ॐ पार्वतीपतये नमः&#039; मंत्र का जाप करना चाहिए. ऐसा करने से जीवन में अकाल संकट नहीं आता है.
महाशिवरात्रि 2026 पूजन विधि
महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को पंचामृत से स्नान करा कराएं. केसर के 8 लोटे जल चढ़ाएं. पूरी रात्रि का दीपक जलाएं. चंदन का तिलक लगाएं. बेलपत्र, भांग, धतूरा, गन्ने का रस, तुलसी, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र व दक्षिणा चढ़ाएं. सबसे बाद में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें.
महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा
शिवपुराण के मुताबिक एक बार ब्रह्मा-विष्णु के बीच विवाद हो गया. झगड़े की वजह ये थी कि दोनों ही देवता खुद को श्रेष्ठ बता रहे थे. जब दोनों देवता दिव्यास्त्रों से युद्ध शुरू करने वाले थे, ठीक उसी समय भगवान शिव लिंग रूप में इनके सामने प्रकट हो गए. शिव जी ने कहा कि आप दोनों में से जो भी इस लिंग का छोर (अंत) खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा. ये बात सुनकर एक छोर की ओर ब्रह्मा जी और दूसरे छोर की ओर विष्णु जी चल दिए. बहुत समय तक ब्रह्मा-विष्णु अपने-अपने छोर की ओर आगे बढ़ते रहे, लेकिन उन्हें लिंग का अंत नहीं मिला. उस समय ब्रह्मा जी खुद को श्रेष्ठ घोषित करने के लिए एक योजना बनाई.
ब्रह्मा ने एक केतकी का पौधा लिया और उससे झूठ बोलने के लिए कहा कि वह शिव-विष्णु के सामने बोले कि ब्रह्मा जी ने लिंग का अंत खोज लिया है. ब्रह्मा केतकी के पौधे को लेकर शिव जी के पास पहुंचे, विष्णु जी भी वहां आ गए और उन्होंने कहा कि मैं इस लिंग का अंत नहीं खोज सका. ब्रह्मा ने कहा कि मैंने इस लिंग का अंत खोज लिया है, ये बात आप केतकी के पौधे से भी पूछ सकते हैं. केतकी ने भी भगवान के सामने झूठ बोल दिया. ब्रह्मा जी का झूठ सुनते ही शिव जी क्रोधित हो गए. उन्होंने कहा कि आपने झूठ कहा है, इसलिए आज से आपकी कहीं भी पूजा नहीं होगी और केतकी ने आपके झूठ में साथ दिया, इसलिए इसके फूल मेरी पूजा में वर्जित रहेंगे। इसके बाद विष्णु जी सर्वश्रेष्ठ घोषित हो गए. ये घटना फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की ही मानी जाती है, इसलिए इस तिथि पर महाशिवरात्रि पर्व मनाने की परंपरा है.
ये भी पढ़ें: Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 1, 2 नहीं 3 ग्रहों की बदलेगी चाल, कई राशियां की किस्मत होगी बुलंद





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.a




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/12/3c7357452d7c2fb31414e20d33e21fc21770892306284466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Feb 2026 16:08:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, त्रयोदशी-चतुर्दशी, के, संयोग, में, महाशिवरात्रि, देखें, पूजा, मुहूर्त, कथा, से, जुड़ी, संपूर्ण, जानकारी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Poila Boishakh 2026: पोइला बोइशाख क्या है ? बंगाली लोग इसी दिन से क्यों मनाते हैं नया साल, जानें डेट और महत्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5356</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5356</guid>
<description><![CDATA[ Poila Boishakh 2026: भारत में नववर्ष के भिन्न होने के कारण सभी धर्म के कैलेंडर भी अलग-अलग होते हैं. बंगाली समुदाय का नववर्ष पोइला बैशाख या पोइला बोइशाख से शुरू होता है. पोइला बंगाली शब्द है जिसका अर्थ है पहला. बैशाख का दिन बंगाली समुदाय के लिए बहुत शुभ है और इसके पहले दिन बंगाली न्यू ईयर की शुरुआत होती है. इस साल पोइला बोइशाख 15 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा.
पोइला बैशाख या बंगला नववर्ष को पश्चिम बंगाल, बंगलादेश, त्रिपुरा और अन्य उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्यों में बंगाली समुदाय द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है. बांग्लादेश में, इसे ढाका, चटगांव और टांगेल जैसे शहरों में एक धर्मनिरपेक्ष त्योहार के रूप में मनाया जाता है.
पोइला बोइशाख महत्व
बंगाली समुदाय के लोग इस दिन शुभो नोबो बोरशो (नया साल मुबारक) के रूप में मनाया जाता है, जिसमें नए कपड़े पहनना, स्वादिष्ट भोजन (जैसे मछली, मिठाइयाँ) और व्यवसायों के लिए &#039;हाल खाता&#039; (नया बही-खाता शुरू करना) की परंपरा शामिल है. नए व्यवसाय शुरू करने और यहां तक ​​कि पुराने कर्ज चुकाने के लिए यह एक शुभ दिन माना जाता है.
क्यों बनाया गया बंगाली कैलेंडर
पोइला बैसाख के इतिहास की बात करें तो जानकारों के अनुसार सातवीं शताब्दी में गौड़ा वंश के राजा शशांक के शासनकाल में इसकी शुरुआत हुई थी, जिन्हें बंगाली पंचांग का निर्माता माना जाता है. कुछ मतों के अनुसार, इस त्योहार की शुरुआत इस्लामी हिजरी पंचांग को सौर कृषि चक्रों के अनुरूप बनाने के लिए हुई थी, जिससे मुगल शासन के दौरान कर संग्रह को सरल बनाने में मदद मिली.
प्रमुख रीति-रिवाज और परंपराएं

इस दिन बंगाली लोग घरों के बाहर चावल के पाउडर के घोल से रंगोली बनाते हैं, ये समृद्धि का प्रतीक है.
इस दिन नई शुरुआत के तौर पर नए कपड़े पहने जाते हैं.
प्रार्थना करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मंदिरों में जाते हैं
कुछ जगह पर धार्मिक जुलूस(परेड) निकाली जाती है. परेड के बाद, पुरुष और महिलाएं विभिन्न प्रकार के लोकप्रिय लोक गीतों को गाते और नृत्य करते हैं.
लोग दिनभर अपने दोस्तों और परिवार वालों से मिलने जाते हैं और एक-दूसरे को बधाई देते हैं और मिठाइयां बांटते हैं.

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 300 साल बाद 5 राजयोग, 4 शुभ मुहूर्त, शिव पूजा का महत्व बढ़ा


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/10/e8fa69c06685cdfe275e63f36eb98cb91770708856849499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Poila, Boishakh, 2026:, पोइला, बोइशाख, क्या, है, बंगाली, लोग, इसी, दिन, से, क्यों, मनाते, हैं, नया, साल, जानें, डेट, और, महत्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 11 फरवरी गणेश जी और दुर्गा जी की पूजा का खास दिन, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5353</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5353</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 11 फरवरी 2026: आज 11 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि और बुधवार है. ये दिन गणेश जी और तिथि माता रानी को समर्पित है. ऐसे में अधूरे कार्य को पूरा करने की मनोकामना से गणपति जी को गुलाब का फूल और माता रानी को गुड़हल का फूल अर्पित करें. कन्या को कुछ अन्न या कपड़े दान करें. मान्यता है इससे संतान सुख, सफलता प्राप्त होती है.
11 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 11 February 2026)



तिथि

नवमी (10 फरवरी 2026, सुबह 7.27 - 11 फरवरी 2026, सुबह 9.58)



वार
बुधवार


नक्षत्र
अनुराधा


योग
व्याघात, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 3.11


चंद्रोस्त
दोपहर 12.27, 12 फरवरी


चंद्र राशि
वृश्चिक



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह 7.03 - सुबह 8.26


लाभ
सुबह 8.26 - सुबह 9.49


अमृत
दोपहर 12.35 - दोपहर 1.58


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 7.44 - रात 9.22


अमृत
रात 9.22 - रात 1058



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 12.26 - दोपहर 1.59


यमगण्ड काल
सुबह 8.26 - सुबह 9.49


गुलिक काल
सुबह 11.12 - दोपहर 12.36


आडल योग
सुबह 10.53 - सुबह 7.02, 12 फरवरी


भद्रा काल
सुबह 11.12 - सुबह 7.02, 12 फरवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 11 February 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
वृश्चिक


मंगल
मकर


बुध
बुध


गुरु
मिथुन


शुक्र
मकर


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



सिंह राशि
घर में खुशखबरी से उत्साह बढ़ेगा. कोई सरकारी मामला चल रहा है तो आज राहत या अनुकूल प्रगति मिल सकती है.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



वृषभ राशि
घर का माहौल अच्छा रहेगा। प्रेम संबंधों में छोटी बातों से तनाव हो सकता है, इसलिए संवाद स्पष्ट रखें



FAQs: 11 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





घर में दुर्गा चालीसा का पाठ करें और किन्नरों को कुछ अन्न, धन या कपड़े भेंट करें.





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, रवि और व्याघात योग बन रहा है.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 15 या 16 फरवरी कब ? जलाभिषेक के लिए कौन सा दिन सही




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/11/4e06d2f12f3e418698d9de224d6208af1770752223629499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, फरवरी, गणेश, जी, और, दुर्गा, जी, की, पूजा, का, खास, दिन, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ekadashi Katha: एकादशी पर चावल वर्जित, लेकिन जगन्नाथ पुरी में लगता है भोग, जानें उल्टी एकादशी का शॉकिंग सच</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5354</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5354</guid>
<description><![CDATA[ Ekadashi Katha: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का काफी महत्व होता है. साथ ही एकादशी व्रत से जुड़े कई नियम भी होते हैं. इन्हीं में एक है एकादशी के दिन चावल न खाना. एकादशी तिथि पर चावल का किसी भी रूप में सेवन नहीं करना चाहिए. जो लोग एकादशी का व्रत नही भी रखते हैं, उन्हें भी इस नियम का पालन करना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि, एकादशी तिथि पर चावल का सेवन करने से अगले जन्म में रेंगने वाले कीड़े के रूप में जन्म होता है. साथ ही एकादशी तिथि पर चावल खाना पाप के समान है.
जगन्नाथ पुरी में भगवान कृष्ण, बलराम और माता सुभद्रा विरामजान हैं. जगन्नाथ पुरी में दिन में चार बार भोग लगाने की परंपरा है. भक्तों को भी दर्शन के बाद महाप्रसाद दिया जाता है. पूरे भारत में ओडिशा के जगन्नाथ पुरी एकमात्र ऐसी जगह है, जहां एकादशी के दिन भगवान को चावल का महाभोग लगाया जाता है और इसे भक्तों के बीच वितरित भी किया जाता है. इसलिए जगन्नाथ पुरी में एकादशी को &amp;lsquo;उल्टी एकादशी&amp;rsquo; कहा जाता है. उल्टी एकादशी का रहस्य और अनोखी कथा जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.
उल्टी एकादशी का रहस्य (Jagannath Puri Ulti Ekadashi Katha in Hindi)
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी भगवान जगन्नाथ का प्रसाद ग्रहण करने के लिए पुरी आए. लेकिन उनके आने से पहले ही प्रसाद खत्म हो चुका था. एक पत्त पर थोड़ा सा प्रसाद बचा था, जिसे एक कुत्ता चाट रहा था. ब्रह्मा जी की भक्ति इतनी सच्ची थी कि वे कुत्ते के साथ बैठकर प्रसाद खाने लगे. तभी वहां देवी एकादशी प्रकट हो गई और ब्रह्मा जी से कहा&amp;ndash; आज एकादशी पर आप चावल कैसे खा सकते हैं?
तब स्वयं भगवान जगन्नाथ प्रकट हुए और कहा- जहां सच्ची भक्ति हो, वहां नियम लागू की बाध्यता नहीं. साथ ही भगवान के कहा कि, मेरे महाप्रसाद पर एकादशी व्रत का कोई बंधन लागू नहीं होता और मेरे भक्त भी इस दिन चावल का महाप्रसाद ग्रहण करेंगे. भगवान ने देवी एकादशी को दंड स्वरूप उल्टा लटका दिया, जिससे कि पुरी में यह नियम भी उल्टा हो जाए. इसलिए आज भी पुरी में एकादशी को उल्टी एकादशी कहा जाता है और भगवान को एकादशी तिथि पर भी चावल के महाप्रसाद का भोग लगाया जाता है.
ये भी पढ़ें: Surya Gochar 2026: वैलेंटाइन डे के पहले सूर्य बदलेंगे चाल, कुंभ राशि में आकर इन राशियों पर बरसाएंगे कृपा





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/10/7836a2d531dacfd3c2ef93191f2baa171770728055703466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ekadashi, Katha:, एकादशी, पर, चावल, वर्जित, लेकिन, जगन्नाथ, पुरी, में, लगता, है, भोग, जानें, उल्टी, एकादशी, का, शॉकिंग, सच</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Chinese New Year 2026: 12 साल बाद लौट रहा फायर हॉर्स, चीनी न्यू ईयर पर ड्रैगन देश के लिए क्या संकेत</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5355</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5355</guid>
<description><![CDATA[ Chinese New Year 2026: नया साल जश्न, खुशी, उत्साह और नई शुरुआत का अवसर होता है. सभी देशों की तरह चीन में भी नया साल बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. ग्रेग्रोरियन कैलेंडर के अनुसार, नए साल की शुरुआत 1 जनवरी से होती है, लेकिन चीनी नववर्ष इससे बहुत अलग होता है. चीनी न्&amp;zwj;यू ईयर को स्&amp;zwj;प्रिंग फेस्&amp;zwj;टिवल के रूप में मनाया जाता है.
17 फरवरी को शुरू होगा चीनी नववर्ष
चीनी नववर्ष की शुरुआत 17 फरवरी 2026 मंगलवार से हो रही है. यहां नए साल को स्प्रिंग फेस्टिवल के रूप में मनाया जाता है, जोकि चीन का महत्वपूर्ण उत्सव है. इसके लिए 15 फरवरी से 23 फरवरी तक छुट्टियां भी रहेंगी. इस वर्ष फायर हार्स यानी अग्नि घोड़े का साल रहेगा, जोकि पूरे 12 वर्ष बाद आ रहा है.
बता दें कि, हर 12 साल में अग्नि घोड़े का साल आता है. फायर हॉर्स है मतलब होता है एनर्जी, तेजी, ऑप्टिमिज्म और नई शुरुआत का प्रतीक. जिस तरह से घोड़ा आजादी पसंद, मेहनती और एडवेंचरस होता है, उसी तरह घोड़े के साल को भी तेज रफ्तार, नया अवसर और जोश से भरा माना जाता है.&amp;nbsp;
चीनी न्यू ईयर स्प्रिंग फेस्टिवल
चीन में चीनी नववर्ष को स्प्रिंग फेस्टिव के रूप में मनाने की परंपरा काफी पुरानी है. इस दौरान लोग अपने घर-परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां मनाते हैं. घर की साफ-सफाई और सजावट कर त्योहार के लिए तैयार किया जाता है. लोग एक दूसरे के साथ दावत करते हैं. बच्चों को गिफ्ट्स दिए जाते हैं. सड़कों पर लाइन डांस और ड्रैगन डांस होते हैं. नकारात्मक ऊर्जा को भगाने के लिए फायरक्रैकर्स जलाए जाते हैं, प्रार्थना के लिए लोग मंदिर जाते हैं और नए साल पर नई शुरुआत की प्रार्थना करते हैं.
फायर हॉर्स का साल 2026, ड्रैगन देश के लिए क्या संदेश

प्रेसिडेंट शी जिनपिंग ने न्यू ईयर एड्रेस में कहा कि, 2025 AI और चिप्स में ब्रेकथ्रू का साल था. अब 2026 में AI में प्रोग्रेस होगा. DeepSeek जैसे मॉडल्स सस्ते, हाई-क्वालिटी और ओपन-सोर्स हैं. Huawei, Alibaba, Baidu नए AI चिप्स और मॉडल्स ला रहे हैं.
चीनी ज्योतिष में घोड़े को आशावाद और नए अवसरों का साल माना जाता है. ऐसे में 2026 का साल यानी फायर हॉर्स वर्ष जनता और निवेशकों के लिए मजबूत आर्थिक विकास का संकेत देता है.
फायर हॉर्स चीनी राशिचक्र की 12 राशियों के चक्र में सातवां जानवर है, जोकि वू नामक पृथ्वी शाखा चिन्ह से जुड़ा है. चीनी ज्योतिष के मुताबिक आशा है कि, घोड़े की रफ्तार से चीन 2026 में आगे बढ़ेगा.

घोड़ा राशि वाले लोग
जिनका जन्म साल 2026 में होगा, चीनी ज्योतिष के अनुसार, उनकी राशि फायर हार्स होगी. इससे पहले 1942, 1954, 1966, 1978, 1990, 2002 और 2014 को जन्मे लोगों की राशि भी चीनी घोड़ा ही है. वहीं जिनका जन्म अब 2038 में होगा, उनकी राशि चीनी घोड़ा होगी. चीनी ज्योतिष के अनुसार घोड़ा, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार होता है, जिन्हें दूसरा द्वारा नियंत्रित रहना पसंद नहीं. माना जाता है कि, घोड़ा राशि वाले लोग बुद्धिमान, मेहनती और शारीरिक व मानसिक रूप से फिट होते हैं. ये निर्णायक तो होते हैं, लेकिन बड़ी ही आसानी से अधीर और प्रभावित भी हो जाते हैं.
ये भी पढ़ें: Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का व्रत हर कोई नहीं रख सकता! जानिए किन लोगों को सावधान रहना चाहिए





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/10/bacd04ee0e7680df6cb31ad82f893b8f1770704945899466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Chinese, New, Year, 2026:, साल, बाद, लौट, रहा, फायर, हॉर्स, चीनी, न्यू, ईयर, पर, ड्रैगन, देश, के, लिए, क्या, संकेत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Masan Holi 2026: काशी में क्यों चिता की राख से खेलते हैं होली, कब है ये पर्व, किसने की इसकी शुरुआत जानें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5351</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5351</guid>
<description><![CDATA[ Masan Holi 2026:&amp;nbsp;होली रंगों का त्योहार है लेकिन काशी में होली चिता की राख से खेली जाती है. इसे मसाने की होली कहते है. इस साल मसाने की होली 28 फरवरी 2026 को है. वाराणसी में रंगभरी एकादशी पर भोलेनाथ और माता पार्वती रंगों से होली खेलते हैं.
वहीं इसके अगले दिन यानी फाल्गुन शुक्ल द्वादशी तिथि पर भगवान महाश्मशानाथ अर्थात भोलेनाथ अपने गणों भूत-प्रेत, पिशाच, यक्ष, गंधर्व, राक्षस आदि के साथ भस्म की होली खेलते हैं. शिवपुराण और दुर्गा सप्तशती में इसका उल्लेख भी मिलता है. क्या है मसान की होली का महत्व जान लें.
राख का त्योहार है मसान की होली
मसान होली वाराणसी (काशी) में मनाई जाने वाली एक अनोखी और आध्यात्मिक होली है. इसे राख का त्योहार भी कहा जाता है. मसान&#039; का अर्थ श्मशान (जहाँ शव दाह होता है) और &#039;मसान होली&#039; का अर्थ श्मशान की होली है, यहां न रंग, न पिचकारी,न गोपी, न ग्वाले चारों ओर भूत-पिशाच की भेष में आए भोलेनाथ के भक्त चिता की भस्म से होली खेलते हैं. ये त्योहार मोह माया के जाल से मुक्त होना दर्शाता है क्योंकि अंत में व्यक्ति को राख ही होना है. यह उत्सव मृत्यु पर विजय और जीवन-मृत्यु के चक्र से परे आत्मा की अमरता का प्रतीक है.
मसान होली कौन खेल सकता है?
मसान होली, भस्म होली और भभूत होली के नाम से इस होली को जाना जाता है. काशी (Varanasi) में मसाने की होली विश्व प्रसिद्ध है जिसे देखने के लिए लोग विदेश से भी आते हैं.
मसान होली साधु-संत, आमलोग और अघोरी खेलते थे, हालांकि महिलाओं का इस होली में आना मना है.
कैसे हुई मसान होली की शुरुआत
पौराणिक कथाओं के मुताबिक मसान की होली की शुरूआत भगवान शिव ने की थी. दरअसल रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ पहली बार माता पार्वती के साथ विवाह के बाद पहली बार काशी आए थे. उस दिन मां का स्वागत गुलाल के रंग से किया था.
शिवजी ने अपने गणों के साथ गुलाल से होली खेली लेकिन भूत-प्रेत, यक्ष, गंधर्व और प्रेत के साथ नहीं खेली इसीलिए रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन मसाने की होली खेली जाती है. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/11/242b1011580dca57a62b6c3a474d04a71770749353925499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Masan, Holi, 2026:, काशी, में, क्यों, चिता, की, राख, से, खेलते, हैं, होली, कब, है, ये, पर्व, किसने, की, इसकी, शुरुआत, जानें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार ऐसे करें शिव का अभिषेक, ग्रह दोष होंगे दूर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5352</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5352</guid>
<description><![CDATA[ Mahashivratri 2026 Jalabhishek: महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी. शिव पूजा में एक लौटा जल ही काफी है, महादेव जल मात्र से प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन महाशिवरात्रि पर राशि अनुसार जलाभिषेक करना बेहद फलदायी होता है, शिवपुराण के अनुसार राशि अनुसार भोलेनाथ का अभिषेक करना दुख, दरिद्रता, क्लेश, दोष से मुक्ति दिलाता है और समस्त मनोकामनाएं जल्द सिद्ध हो जाती है.
महाशिवरात्रि राशि अनुसार जलाभिषेक

मेष राशि - मेष राशि के महाशिवरात्रि पर जल में गुड़ मिलाकर या शहद से भोलेनाथ अभिषेक करें. शिव पंचाक्षर मंत्र नमः शिवाय का लगातार 108 बार जाप करें.
वृषभ राशि - महाशिवरात्रि पर वृषभ वाले गाय के दूध-दही से भगवान शिव का अभिषेक करें. सांब सदाशिव मंत्र का जाप करें.
मिथुन राशि - मिथुन राशि के लोगों को शिवरात्रि पर गन्ने के रस से अभिषेक करना बहुत शुभ रहेगा. इस उपाय से कुंडली में मौजूद ग्रहों से संबंधित दोषों में कमी आती है. जीवन में खुशहाली रहती है.
कर्क राशि - कर्क राशि वालों को महाशिवरात्रि की पूजा में भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए जल में 108 अटूट चावल लेकर ओम नमः शिवाय बोलते हुए शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए.
सिंह राशि - महाशिवरात्रि पर सिंह राशि वाले शिव का शहद से अभिषेक करें और लाल चंदन का तिलक भोलेनाथ को लगाएं. रुद्राष्टक का पाठ करें.
कन्या राशि - कन्या राशि के जातक भांग मिले जल से महादेव का अभिषेक करें. शिव चालीसा का पाठ करें. ये अकाल मृत्यु से रक्षा करता है.
तुला राशि - तुला राशि वाले शिवरात्रि पर घी से महादेव का अभिषेक करें. संतान सुख, धन प्राप्ति और आरोग्य के लिए ये उपाय लाभाकारी है.
वृश्चिक राशि - वृश्चिक राशि के जातकों को महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर गंगाजल में गुलाब जल में मिलाकर अभिषेक करें. वैवाहिक जीवन में सुख शांति स्थापित होती है.
धनु राशि - धनु राशि वाले भोलेनाथ को शिवरात्रि पर जल चढ़ाएं और फिर पीली सरसों अर्पित करें. मान्यता है ये उपाय सौभाग्य लाता है.
मकर राशि- महाशिवरात्रि के मौके पर मकर राशि वालों को बिल्व पत्र चढ़ाकर शिवजी का जल से अभिषेक करना चाहिए. काले तिल जल में डाल लें. शनि की शुभता प्राप्त होती है.
कुंभ राशि - कुंभ राशि वाले सरसों के तेल से या पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करें. शत्रु बाधा, भय और रोगों से मुक्ति के लिए ये उपाय लाभकारी माना गया है.
मीन राशि - भोलेनाथ का अभिषेक घी और गंगाजल से करना चाहिए. साथ ही आपको 108 अक्षत ओम नमः शिवाय बोलते हए शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए. पूजा के समय आपको महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए.

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 15 या 16 फरवरी कब ? जलाभिषेक के लिए कौन सा दिन सही
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/11/25fdb9f5860ce83b0067f68f0250bdd71770752067998499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 11:48:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, महाशिवरात्रि, पर, राशि, अनुसार, ऐसे, करें, शिव, का, अभिषेक, ग्रह, दोष, होंगे, दूर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026: चांद रात कब? 19 या 20 फरवरी माह&#45;ए&#45;रमजान का पहला रोजा किस दिन रखा जाएगा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5296</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5296</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan 2026: मुसलमानों के लिए रमजान कैलेंडर के सभी 12 महीनों में सबसे पाक और मुबारक महीना होता है, जोकि सब्र, रोजा, आत्मचिंतन और उत्सव का समय होता है. रमजान इस्लामिक चंद्र कैलेंडर का नौंवा महीना होता है, जिसमें विशेषरूप से मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं.
रोजा रखना इस्लाम में हर मुसलमान पर फर्ज है. लेकिन रोजा का मतलब केवल भूखा रहना मात्र नहीं है, बल्कि यह नफ्स (इच्छा) पर काबू, बुरी आदतों को छोड़ने, सब्र की परीक्षा और अल्लाह की इबादत का महीना होता है. मुसलमानों को रमजान महीने का बेसब्री से इंतजार रहता है. लेकिन इससे पहले सभी की निगाहें रमजान के चांद पर होती है. इसे चांद रात कहा जाता है. चांद नजर (Ramdan ka Chand) आते ही रमजान महीने की शुरुआत हो जाती है और अगली सुबह से रोजा रखा जाता है. जानिए इस साल कब दिखेगा चांद और किस दिन से रखा जाएगा पहला रोजा.
रमजान 2026 चांद रात कब (Ramadan 2026 Chand Raat)&amp;nbsp;
रमजान का चांद नजर आने के बाद ही रोजा रखने की प्रकिया शुरू होती है. मुस्लिम एड वेबसाइट संस्था के अनुसार, फरवरी 2026 महीने में 19 फरवरी को चांद नजर आने की संभावना है. मक्का या सबंधित देशों के आसपास सबसे पहले चांद देखा जाता है और इसके बाद ही रमजान की तारीख तय होती है. यदि भारत में चांद नहीं दिखाई देता तो मक्का, सऊदी या संबंधित देशों में चांद दिखने के तिथि के अगले दिन भारत में भी रजमान की शुरुआत हो जाती है. चांद नजर आते ही सभी एक दूसरे को चांद रात मुबारक या रमजान मुबारक कहकर बधाई देते हैं. रमजान का महीना 29-30 दिनों तक चलता है और फिर ईद-उल-फितर मनाई जाती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;
कब रखा जाएगा रमजान का पहला रोजा
रमजान का चांद नजर आते ही रोजा रखने का एलान भी हो जाता है. चांद दिखने के अगली सुबह से ही मुसलमान रोजा रखते हैं. संभावना है कि, इस वर्ष रमजान महीने का पहला रोजा 20 फरवरी को रखा जाए. हालांकि यह संभावित तिथि है. चांद दिखाई देने के बाद ही सटीक तिथि की घोषणा की जाएगी.
ये भी पढ़ें: Ramadan Eid 2026 Date: ईद-उल-फितर 2026 में कब मनाई जाएगी और कब से शुरू होगा माह-ए-रमजान


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.a

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/09/52934050040b13917589130cd5b44c4a1770621983532466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026:, चांद, रात, कब, या, फरवरी, माह-ए-रमजान, का, पहला, रोजा, किस, दिन, रखा, जाएगा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 पर महाकाल में 44 घंटे नॉनस्टॉप दर्शन, खुला रहेगा बाबा का दरबार</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5293</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5293</guid>
<description><![CDATA[ Maha Shivratri 2026 Mahakaleshwar: विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) में महाशिवरात्रि का उत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस अवसर पर उज्जैन नगरी भी शिवमय हो जात है. 6 फरवरी से ही महाकालेश्वर में शिव नवरात्रि के साथ महादेव के विवाह का उत्सव शुरू हो चुका है, जोकि 16 फरवरी 2026 तक चलेगा.
शिव नवरात्रि का महत्व&amp;nbsp;
12 ज्योतिर्लिंग में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि से 9 दिन पहले शिव नवरात्रि का उत्सव मनाया जाता है. इसके पीछे मान्यता है कि, जिस तरह देवी शक्ति की उपासना लिए नवरात्रि मनाई जाती है, उसी महाकालेश्वर में शिव नवरात्रि मनाई जाती है. धार्मिक मान्यता है कि, शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने शिव नवरात्रि के दौरान कठिन तप और साधना की थी.
महाशिवरात्रि पर महाकाल का 44 घंटे नॉनस्टॉप दर्शन&amp;nbsp;
रविवार 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. इस मौके पर महाकालेश्वर में भक्तों की भारी भीड़ रहती है. मंदिर प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई है कि, इस बार महाकाल के पट लगातार 44 घंटे दर्शन के लिए खुले रहेंगे. इस दौरान देश-विदेश से आए श्रद्धालु महाकाल के दर्शन कर सकेंगे. महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी सुबह 06 बजकर महाकालेश्वर में दर्शन की शुरुआत होगी, जो 16 फरवरी की सुबह तक जारी रहेगा. इस दौरान बिना किसी ब्रेक के मंदिर नॉनस्टॉप खुला रहेगा.&amp;nbsp;
दोपहर की भस्म आरती
16 फरवरी को दोपहर 12 बजे भस्म आरती होगी और शिव नवरात्रि का समापन हो जाएगा. बता दें कि, महाकालेश्वर में दोपहर की भस्मारती (Noon Bhasma Aarti) वर्ष में केवल एक बार ही होती है. भस्म आरती से पहले महाकाल को फलों, फूलों और सप्तधान्य से बना भव्य सेहरा बांधा जाता है.
महाशिवरात्रि ऐसा पर्व है, जिसमें दिन-रात चारो प्रहर महादेव की पूजा होती है. धार्मिक मान्यतानुसार यह पर्व शिव-पार्वती के विवाह के दिन के रूप में मनाया जाता है. ऐसा माना जाता है कि, इस दिन व्रत, पूजा और शिव नाम का जाप करने से मनोकामनाएं पूरी होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
ये भी पढ़ें: Shiv Navratri 2026: उज्जैन में कब शुरू होगी शिव नवरात्रि, 9 दिनों में कब क्या होगा, देखें पूरा शेड्यूल



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.a


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/09/a93197028b04ecc671633ef4f6eceda01770639671427466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Maha, Shivratri, 2026:, महाशिवरात्रि, 2026, पर, महाकाल, में, घंटे, नॉनस्टॉप, दर्शन, खुला, रहेगा, बाबा, का, दरबार</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 10 फरवरी हनुमान जी की पूजा का मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5294</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5294</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 10 फरवरी 2026: आज 10 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और मंगलवार है. मंगल दोष अधिक क्रोध, अशांति, आर्थिक नुकसान, कानूनी विवाद और कर्ज की समस्या है तो मंगलवार के दिन हनुमान जी को लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें. मंगलवार के दिन विशेष रूप से उनके मंत्र &#039;ॐ अं अंगारकाय नमः&#039; या फिर &#039;ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः&#039; का अधिक से अधिक जप करना चाहिए.&amp;nbsp;
10 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 10 February 2026)



तिथि

अष्टमी (9 फरवरी 2026, सुबह 5.01 - 10 फरवरी 2026, सुबह 7.27)



वार
सोमवार


नक्षत्र
विशाखा


योग
ध्रुव


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 2.16


चंद्रोस्त
सुबह 11.45, 11 फरवरी


चंद्र राशि
वृश्चिक



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह 9.50 - सुबह 11.13


लाभ
सुबह 11.13 - दोपहर 12.35


अमृत
दोपहर 12.35 - दोपहर 1.58


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 7.44 - रात 9.21



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 3.21 - शाम 4.44


यमगण्ड काल
सुबह 9.50 - सुबह 11.13


गुलिक काल
दोपहर 12.35 - दोपहर 1.58


आडल योग
सुबह 7.04 - सुबह 7.55



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 10 February 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
वृश्चिक


मंगल
मकर


बुध
बुध


गुरु
मिथुन


शुक्र
मकर


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



मिथुन राशि
रुकी पेमेंट या उधार दिया पैसा वापस मिलने की संभावना है.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



कर्क राशि
बनते कामों में रुकावट का कारण आपका उतावलापन और गुस्सा बन सकता है. मामा पक्ष से विवाद की आशंका है.



FAQs: 10 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





हनुमान जी को चमेली के फूलों की माला अर्पित करें मान्यता है इससे परिवार की खुशियां लौट आती है.





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन ध्रुव योग बन रहा है.
Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा 2 या 3 मार्च कब ? तारीख और स्नान-दान का मुहूर्त जान लें




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/10/b70689b5f8b244b4b8c955c1869735ba1770662968225499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, फरवरी, हनुमान, जी, की, पूजा, का, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Grahan and Panchak 2026: सूर्य ग्रहण&#45;अग्नि पंचक एकसाथ, कुंभ सहित 3 राशियों पर टूटेगा मुसीबत का पहाड़</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5295</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5295</guid>
<description><![CDATA[ Surya Grahan and Agni Panchak 2026: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 17 फरवरी का दिन बेहद अशुभ माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन से न सिर्फ खतरनाक अग्नि पंचक शुरू हो रहे हैं बल्कि सूर्य ग्रहण भी लग रहा है. खास बात ये है कि फाल्गुन अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण शनि की राशि कुंभ में लग रहा है.
सूर्य और शनि एक दूसरे के शत्रु माने जाते है. पंचक और सूर्य ग्रहण दोनों ही शुभ नहीं माने जाते हैं. ऐसे में कुछ राशियों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलेगा, इन्हें अगले उस दिन बेहद सावधानी बरतनी होगी.
अग्नि पंचक और सूर्य ग्रहण एकसाथ
साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को भारतीय समयानुसार शाम 05 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा. शाम 07 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. हालांकि, ये ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा लेकिन ग्रहण के समय सृष्टि की ऊर्जा में बदलाव आता है इसलिए राशियों पर इसका असर देखने को मिलेगा.
17 फरवरी 2026 को सुबह 09:05 पर अग्नि पंचक शुरू हो रहे हैं और जो 21 फरवरी 2026 को रात 7.07 पर समाप्त होंगे.
इन राशियों पर मंडरा रहा खतरा
सिंह राशि

पंचक और सूर्य ग्रहण का नकारात्मक असर आपको आर्थिक तौर पर परेशान करेगा. सहयोग न होने के कारण बिजनेस में गिरावट आ सकती है.
नए निवेश करने से बचें. जमीन या घर बेचने-खरीदने से पहले दो बार सोचें.
अनावश्यक खर्चे आएंगे. बजट गड़बड़ा सकता है.
गाड़ी सावधानी से चलाएं, दुर्घटना के योग हैं. लंबी दूरी की यात्राएं टालें.

कुंभ राशि

सूर्य ग्रहण कुंभ राशि में ही लग रहा है. ये शनि की राशि है ऐसे में कार्य में लापरवाही आपके लिए घातक साबित हो सकती है.
मन परेशान रहेगा, अपनों के बीच बहस हो सकती है.
&amp;nbsp;कोर्ट-कचहरी के मामलों में फंसने की आशंका है, इसलिए संयम से काम लें.
पुराने रोग दोबारा उभर सकते हैं.
जमा पूंजी का उपयोग सोच-समझकर करें.

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण चुनौतीपूर्ण साबित होगा.पार्टनर के साथ टकराव की स्थिति बनेगी.
शक्की स्वभाव रिश्तों में दूरियां पैदा करेगा. राहु आपको गलत संगत में डाल सकता है इसलिए अपने व्यवहार और वाणी पर काबू रखें.
वहीं आग से जुड़े कार्य भूलकर भी न नकरें. काम का प्रेशर बढ़ेगा लेकिन नौकरी बदलने का जोखिम न लें.

Chandra Grahan 2026: होली पर चंद्र ग्रहण, इन 3 राशियों की बेरंग जिंदगी में आएंगी डबल खुशियां




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/09/066ace2416a342352fed956c3ce58b0b1770658781287499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Grahan, and, Panchak, 2026:, सूर्य, ग्रहण-अग्नि, पंचक, एकसाथ, कुंभ, सहित, राशियों, पर, टूटेगा, मुसीबत, का, पहाड़</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kumbh Sankranti 2026: कुंभ संक्रांति कब ? इन 3 राशियों का आर्थिक अंधेरा छटेगा, होगा धन लाभ</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5291</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5291</guid>
<description><![CDATA[ Kumbh Sankranti 2026: संक्रांति यानी सूर्य के राशि परिवर्तन वाला दिन. सूर्य का गोचर बहुत मायने रखता है क्योंकि इससे सभी 12 राशियों के जीवन में बदलाव आते हैं. मकर संक्रांति के बाद 13 फरवरी 2026 को कुंभ संक्रांति मनाई जाएगी. इस दिन विजया एकादशी का संयोग भी बन रहा है. स्नान-दान के लिए ये महत्वपूर्ण दिन है, इससे रोग, दोष, दरिद्रता से मुक्ति मिलती है. कुंभ संक्रांति पर किस मुहूर्त में करें स्नान, किन राशियों को होगा लाभ.
कुंभ संक्रांति 2026 मुहूर्त
कुम्भ संक्रान्ति पुण्य काल - सुबह 07:01 से दोपहर 12:35
कुम्भ संक्रान्ति महा पुण्य काल - सुबह 07:01 - सुबह 08:53
किन राशियों के लिए कुंभ संक्रांति शुभ
धनु राशि - धनु राशि के लोगों को सूर्य का कुंभ राशि में जाना अधूरे कार्य पूरा करने वाला होगा. करियर में नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे. आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी. पहले किए गए प्रयासों का फल मिलेगा. आपके भौतिक सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी. इसी के चलते मन प्रसन्न रहेगा. व्यापार के क्षेत्र में भी उन्नति के रास्ते मिल सकते है.
मिथुन राशि - मिथुन राशि वालों के लिए कुंभ संक्रांति सौभाग्य लेकर आएगी. मानसिक शांति महसूस करेंगे. पिता और गुरुजन का मार्गदर्शन मिलेगा. नौकरी पाने के अच्छे अवसर मिलेंगे. लव लाइफ मधुर रहेगी और आप पार्टनर के साथ रोमांटिक समय व्यतीत कर सकते हैं. व्यापार में बढ़िया परिणाम मिलेंगे.
मेष राशि - किस्मत का पूरा साथ मिलेगा. आमदनी के नए मौके मिलेंगे. ऑफिस में आपके अधिकारी पूरा सहयोग करेंगे. धन से संबंधित समस्या खत्म होगी. सूर्य की कृपा जीवन में छाया आर्थिक अंधेरा छटेगा. खुशियां दरवाजे पर दस्तक देंगी.&amp;nbsp;
कुंभ संक्रांति का महत्व
मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और स्वास्थ्य लाभ भी मिलता है. कई स्थानों पर कुंभ संक्रांति के अवसर पर स्नान पर्व, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं. पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए संक्रांति का दिन बहुत फलदायी माना गया है.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 19 साल बाद लक्ष्मीनारायण योग, इन 4 राशियों की कंगाली होगी खत्म!



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/09/a6426656cf648dda7bef9d2dc2d90ea61770658569327499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kumbh, Sankranti, 2026:, कुंभ, संक्रांति, कब, इन, राशियों, का, आर्थिक, अंधेरा, छटेगा, होगा, धन, लाभ</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Rangbhari Ekadashi 2026: होली से पहले रंगभरी एकादशी कब, नोट करें डेट, शिव जी से जुड़ा है पर्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5292</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5292</guid>
<description><![CDATA[ Rangbhari Ekadashi 2026: हिंदु धर्म में एकादशी महज एक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और मोक्ष की ओर बढ़ने का मार्ग भी है. एकादशी व्रत विष्णु जी को समर्पित है लेकिन होली से पहले आने वाली एकादशी के दिन खासतौर पर शिव-पार्वती जी की पूजा की जाती है. इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है.
इस साल रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 को है. इसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं. इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करना, उसके नीचे भजन-कीर्तन करना और प्रसाद ग्रहण करना अत्यंत शुभ माना जाता है.
रंगभरी एकादशी 2026 मुहूर्त
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 27 फरवरी को सुबह 12.33 से शुरू होगी और इस दिन रात को 10 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी.

पूजा मुहूर्त - सुबह 6.48 से सुबह 11.08
व्रत पारण समय - सुबह 6.47 - सुबह 09.06 (28 फरवरी 2026)

वायरल वीडियो- काशी में ऐसे मनाते हैं रंगभरी एकादशी



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Aman Gupta | Travel 🗺️ | Bharat 🇮🇳 (@hiii.amann)





क्यों रंगभरी एकादशी पर होती शिव पूजा
फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि वाराणसी के लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव देवी पार्वती के साथ पहली बार वाराणसी में आए थे. रंगभरी एकादशी को लेकर मान्यता है कि इस दिन जो लोग शिवलिंग पर गुलाल, बेलपत्र और जल अर्पित करते हैं वे गरीबी से मुक्ति पाते हैं और सदा के लिए समृद्धि प्राप्त करते हैं.
काशी में खास होती है रंगभरी एकादशी
वाराणसी में रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की प्रतिमाओं को मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी काशी विश्वनाथ मंदिर तक लाया जाता है.&amp;nbsp; यह प्रतीकात्मक यात्रा शिव और पार्वती के अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए शहर में भ्रमण करने का प्रतीक है. ये मूर्तियां गर्भगृह में शिवलिंग के पास स्थापित की जाती हैं, इस शोभायात्रा में पूरा शहर रंगों से सराबोर रहता है.
मां पार्वती की गौना रस्म
रंगभरी एकादशी को बाबा विश्वनाथ और माता गौरा के गौना रस्म के रूप में मनाता है, जहां वाराणसी के प्राचीन गलियों से बाबा विश्वनाथ माता गौरा अपने पूरे परिवार संग पालकी पर सवार होकर गुजरते हैं और इन्हीं गलियों में मौजूद लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य के साथ होली खेलते हैं.&amp;nbsp;
Vijaya Ekadashi 2026: श्रीराम ने क्यों रखा था विजया एकादशी व्रत, फरवरी में ये कब है, कथा, पूजा विधि जानें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/09/94f8067475af980d37646c4400482e041770635176051499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 10 Feb 2026 12:17:02 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Rangbhari, Ekadashi, 2026:, होली, से, पहले, रंगभरी, एकादशी, कब, नोट, करें, डेट, शिव, जी, से, जुड़ा, है, पर्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 8 फरवरी शबरी जयंती की पूजा का मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5230</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5230</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 8 फरवरी 2026: आज 8 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि और शबरी जयंती है. इस दिन शबरी देवी की आराधना करने से श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है. श्रद्धालु इस अवसर पर राम नाम का जप करते हैं और माता शबरी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लेते हैं.
8 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 8 February 2026)



तिथि

सप्तमी (8 फरवरी 2026, सुबह 2.54 - 9 फरवरी 2026, सुबह 5.01)



वार
रविवार


नक्षत्र
स्वाती


योग
गण्ड, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 12.31


चंद्रोस्त
सुबह 11.01


चंद्र राशि
कन्या



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह 8.41 - सुबह 10.05


लाभ
सुबह 10.05 - सुबह 11.30


अमृत
सुबह 11.30 - दोपहर 12.54


शाम का चौघड़िया


शुभ
शाम 6.31 - रात 8.07


अमृत
रात 8.07 - रात 9.43


चर
रात 9.43 - रात 11.18



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
शाम 5.07 - शाम 6.32


यमगण्ड काल
दोपहर 12.54 - दोपहर 2.18


गुलिक काल
दोपहर 3.43 - शाम 5.07


आडल योग
सुबह 5.02 - सुबह 7.16, 8 फरवरी


विडाल योग
सुबह 7.16 - सुबह 5.02, 8 फरवरी


भद्रा काल
सुबह 7.16 - दोपहर 3.54



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 8 February 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
तुला


मंगल
मकर


बुध
बुध


गुरु
मिथुन


शुक्र
मकर


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कुंभ राशि
किसी अच्छे मार्गदर्शक से मुलाकात भी हो सकती ह.ै



कौन सी राशियां संभलकर रहें



मीन राशि
दोपहर बाद कुछ काम रुक सकते हैं, कारण ध्यान भटकना रहेगा.



FAQs: 8 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करें. मान्यता है इससे श्रीराम जल्द प्रसन्न होते हैं.





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन गण्ड और रवि योग बन रहा है.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 19 साल बाद लक्ष्मीनारायण योग, इन 4 राशियों की कंगाली होगी खत्म!




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/08/b8f627e1fd714ca8e7ab01bcf54bccde1770497959050499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, फरवरी, शबरी, जयंती, की, पूजा, का, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vrishchik February Rashifal 2026: वृश्चिक फरवरी राशिफल, जॉब बदलना भारी पड़ सकता है, टेक्नोलॉजी से धन लाभ होगा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5229</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5229</guid>
<description><![CDATA[ बिजनस&amp;nbsp;एंड&amp;nbsp;वेल्थ

03 फरवरीसेचतुर्थ भाव में बुध-राहु का जड़त्व दोष होने से आपकी बिजनस में आंतरिक योजनाओं और बाहरी चुनौतियों में टकराव होगा. कर्मचारियों या सहायकों से समस्या आ सकती है. यहां धैर्य रखें और जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय न लें। प्रतिस्पर्धियों की चाल पर नजर रखें.
04 फरवरीतकशुक्र तृतीय भाव में रहते सप्तम भाव से नवम-पंचम सम्बध रहने से रियल एस्टेट में निवेश के अवसर आ सकते हैं. घर से जुड़े व्यापार में लाभ संभव है। पारिवारिक व्यापार में आपकी भूमिका बढ़ेगी और पुश्तैनी संपत्ति से जुड़े मामले सुलझ सकते हैं.
05 फरवरीसेचतुर्थ भाव में बुध-शुक्र का लक्ष्मीनारायण योग रहने से नए व्यावसायिक साझेदार मिल सकते हैं. अनुबंध और समझौतों में अनुकूल स्थिति बनेगी.
यह दैनिक कार्य और प्रतिस्पर्धा के क्षेत्र में भ्रम का समय है। 4. 8,9,17,18,19,26,27 फरवरी को कर्मचारियों के साथ कम्युनिकेशन गैप बढ़ सकता है. दैनिक व्यावसायिक कार्यों में देरी होगी. प्रतिस्पर्धियों की चाल समझने में भ्रम हो सकता है। इस चरण में नई भर्ती या contracts से बचें। मौजूदा प्रक्रियाओं को सुधारने पर ध्यान दें.
पंचमभाव में विराजित शनि की तीसरी व सातवीं दृष्टि सप्तम भाव व एकादश भाव पर होने से इस समय बड़े संपर्कों से लाभ मिलेगा। नए इनकम सोर्स खुल सकते हैं. मित्रों या परिचितों के माध्यम से व्यावसायिक अवसर आएंगे. विदेशी संपर्कों से भी लाभ की संभावना है.
26 फरवरीबुधचतुर्थ भाव में वक्री होगे जिससे नई तकनीक या अपरंपरागत तरीकों से कमाई होगी. बड़े नेटवर्क और सोशल मीडिया से व्यापार बढ़ेगा. सट्टेबाजी या जोखिम भरे निवेश से दूर रखेगा. अटकलों पर पैसा न लगाएं, ठोस योजना पर चलें.
23 फरवरीसेमंगल चतुर्थ भाव में रहते चौथी दृष्टि सप्तम भाव पर होने से कर्मचारियों के साथ समन्वय बेहतर होगा. प्रतिस्पर्धियों की स्थिति स्पष्ट दिखेगी. जो काम मैथड से करेंगे, वो सफल होंगे. लंबित भुगतान आने लगेंगे और व्यापार में नई गति आएगी.
इससमय काम में रिस्क लेने का मन करेगा. रचनात्मक परियोजनाओं में निवेश फायदेमंद हो सकता है. स्टॉक मार्केट या निवेश में सोच समझकर कदम रखें.

जॉब&amp;nbsp;एंड&amp;nbsp;प्रॉफेशन

महीने की शुरूआत से 12 फरवरी तक षष्ठ भाव के लॉर्ड मंगल तृतीय भाव में दशम भाव के लॉर्ड सूर्य के साथ पराक्रम योग बनाएगे जिससे कार्यस्थल के माहौल पर ध्यान जाएगा। वर्क फ्रॉम होम या flexible working की इच्छा बढ़ेगी. वरिष्ठ अधिकारियों से निजी स्तर पर जुड़ाव बढ़ सकता है.
शनि-केतुका षडाष्टक सम्बध रहने से घर और ऑफिस के बीच संतुलन बनाना कठिन होगा. इस समय शांत रहें और प्राथमिकताएं तय करें.
बॉस या सीनियर्स के साथ टकराव से बचें क्योंकि यह समय डिप्लोमेसी का है विवाद करने का नहीं.
13 फरवरीसेचतुर्थ भाव में सूर्य-राहु का ग्रहण दोष रहने से रोजमर्रा के काम में रुकावटें आएंगी. ईमेल या संदेशों में गलतफहमी हो सकती है. पुरानी फाइलें या प्रोजेक्ट्स वापस आ सकते हैं. तकनीकी समस्याएं परेशान कर सकती हैं.
5,6,7,13,14,20,21 फरवरी को बड़े लक्ष्यों और नेटवर्किंग का है. सीनियर मैनेजमेंट से संपर्क लाभदायक होगा. टीम में आपकी बात सुनी जाएगी. शांत रहकर अपनी रणनीति बनाएं, सही समय पर सामने आएं.
22 फरवरी तक मंगल तृतीय भाव में रहते चौथी व आठवीं दृष्टि षष्ठ भाव व दशम भाव पर होने से बाद काम में गति आएगी.रुके हुए प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ेंगे. सहकर्मियों के साथ समझ बनेगी. अचानक प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है इसलिए क्रिएटिव टास्क को टालें नहीं.
गुरू अष्टम भाव में रहते षष्ठ भाव व दशम भाव से 3-11 का सम्बध रहने से अब आपकी प्रतिभा चमकेगी. प्रस्तुतिकरण में उत्कृष्टता दिखा सकते हैं. नेतृत्व के अवसर मिलेंगे और team lead या project head की भूमिका मिल सकती है.
23 फरवरी से चतुर्थ भाव में मंगल-राहु का ग्रहण दोष रहने से छोटी छोटी बातों पर झुंझलाहट हो सकती है. सहकर्मियों के साथ मतभेद बढ़ सकते हैं। इस समय बड़े बदलाव न करें और नौकरी बदलना इस समय त्यागे मौजूदा काम को व्यवस्थित करने पर ध्यान दें और अधूरे टास्क पूरे करें.
करियर में नई ऊर्जा लाएगा. गहराई से काम करें, सही प्रयास काम नहीं आएंगे.

फैमिली लाइफ, लव लाइफ एंड रिलेशनशिप

04 फरवरी तक शुक्र तृतीय भाव में रहते सप्तम भाव से नवम-पंचम सम्बध रहने से परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा बढ़ेगी. घर का माहौल प्रेम संबंधों को प्रभावित करेगा. साथी को परिवार से मिलवाने का मन हो सकता है. अगर आप सिंगल हैं तो परिवार वाले रिश्ते की बात कर सकते हैं.
05 फरवरी से चतुर्थ भाव में शुक्र-राहु की युति होने से पारिवारिक जिम्मेदारियां और प्रेम जीवन में टकराव होगा। परिवार की अपेक्षाएं और साथी की जरूरतें अलग होंगी। दोनों को संतुलित करना चुनौतीपूर्ण होगा। यहां खुली बातचीत से समाधान निकालें.
7,13,14,20,21,24,25 फरवरी को प्रेम संबंधों में गंभीरता आएगी. विवाह या सगाई की बातचीत हो सकती है. साथी के साथ भविष्य की योजनाएं बनेंगी. अगर रिलेशनशिप में हैं तो नेक्सलेवल पर जाने की बात हो सकती है.
13 फरवरी से सूर्य चतुर्थ भाव में राहु के साथ ग्रहण दोष व शनि से 2-12 का सम्बध रहने से रिश्तों में छोटी समस्याएं ला सकता है. छोटी बातों पर बहस हो सकती है. पुरानी शिकायतें उभर सकती हैं जो आपने सोचा था कि सुलझ गई थीं. इस समय धैर्य रखें और छोटी बातों को बड़ा न बनाएं.
पंचम भाव में विराजित शनि की तीसरी दृष्टि सप्तम भाव पर होने से साथी के साथ क्वलिटी टाइम बिताने के अवसर मिलेंगे. उपहार और सरप्राइज प्लान करें जो मीनिंगफुल हों, एक्सपेंसिव नही.। मित्रों के साथ भी समय बांटना होगा.
23 फरवरी से चतुर्थ भाव में सूर्य, बुध, शुक्र, मंगल, राहु की युति होने से जो बातें अटकी थीं वे स्पष्ट होंगी. गलतफहमियां दूर होंगी और वो बातें जो अजीब लग रही थीं .नए लोगों से मिलने के अवसर लाएगा। सोशल गैदरिंग में कोई खास मिल सकता है.
साथी के साथ मनोरंजक गतिविधियां करेंगे जैसे फिल्म, ट्रिप या कुछ नया सीखना साथ में. रिश्ते में नई ताजगी आएगी और बोरिंग रूटीन से बाहर निकलने का मन करेगा.
परिवार में सामंजस्य बनाए रखें. पारिवारिक जिम्मेदारियों का अहसास होगा. बड़ों की सेवा और सम्मान से घर में शांति रहेगी। भाई बहनों के साथ छोटे मतभेद हो सकते हैं लेकिन इन्हें बढ़ने न दें।

स्टूडेंट्स एंड लर्नर्स

महीने की शुरूआत से 12 फरवरी तक सूर्य तृतीय भाव में रहते शनि से 3-11 का सम्बध रहने से घर पर पढ़ाई का माहौल बनेगा। शांत वातावरण में एकाग्रता बढ़ेगी इसलिए अपने पढ़ाई पर पूरा फोकस करें.
03 फरवरी से चतुर्थ भाव में बुध-राहु का जड़त्व दोष होने से परीक्षा संबंधी भ्रम ला सकता है. सिलेबस या एग्जाम पैटर्न में दुविधा हो सकीत है.&amp;nbsp;
अष्टम भाव में विराजित गुरू का पंचम भाव से 4-10 का सम्बध होने से Competitive exams की तैयारी में धैर्य रखें. रिजल्ट तुरंत नहीं दिखेंगे.
13 फरवरी से सूर्य चतुर्थ भाव में रहते गुरू से नवम-पंचम सम्बध रहने से बड़े लक्ष्यों की स्पष्टता देगा। किस क्षेत्र में आगे बढ़ना है, यह साफ होगा. सीनियर्स से मार्गदर्शन मिलेगा.
22 फरवरी तक मंगल तृतीय भाव में उच्च के होकर विराजित रहने से पर्सनालिटी संवरेगी, एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटी में पार्टिसिपेट करें.

हेल्थ एंड ट्रेवल

03 फरवरी से चतुर्थ भाव में बुध-राहु का जड़त्व दोष व 13 फरवरी से चतुर्थ भाव में सूर्य-राहु का ग्रहण दोष होने से भावनात्मक स्वास्थ्य महत्वपूर्ण होगा. मन की शांति पर ध्यान दें. घर का माहौल स्वास्थ्य को प्रभावित करेगा इसलिए घर को साफ रखें
23 फरवरी से मंगल चतुर्थ भाव में रहते शनि से 2-12 का सम्बध रहने से चिंता और तनाव बढ़ सकता है जिसे नजरअंदाज न करें. नींद में कमी या अनिद्रा हो सकती है, सोने से पहले फोन से दूर रहें. क्योंकि तनाव पाचन क्रिया पर असर डालेगा.
14 फरवरी के बाद आप जो भी ट्रैवल करेंगे वो फेवरेबल और प्रॉफिटेबल हो सकता है.
नर्वस सिस्टम प्रभावित हो सकता है. सिरदर्द या माइग्रेन की संभावना है .गहरी सांस लेने के व्यायाम करें जो कारगर है

उपाय
09 फरवरी सीताअष्टमी पर माता सीता को लाल चंदन और गुड़ का भोग लगाएं व ॐ सीतारामाय नमः मंत्र का जाप करें.
15 फरवरी महाशिवरात्रि पर- शिवलिंग पर जल और लाल चंदन चढ़ाते हुए ॐ त्रर्यम्बकाय नमः मंत्र का जाप करें. किसी साधु या ब्राह्मण को भोजन कराएं.
27 फरवरी आमलकी एकादशी पर श्री विष्णु जी का जल व दुध से अभिषेक करते हुए ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. आपको आंवले का वृक्ष लगाना चाहिए और उसकी देखभाल करनी चाहिए.
Kanya February Rashifal 2026: कन्या फरवरी राशिफल, बाजार में बिजनेस बढ़ाने के मौके मिलेंगे, अनसुलझे मुद्दे चिंता लाएंगे
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/08/33fe752fe94eb38a0785ade4db40b9b51770492996805499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vrishchik, February, Rashifal, 2026:, वृश्चिक, फरवरी, राशिफल, जॉब, बदलना, भारी, पड़, सकता, है, टेक्नोलॉजी, से, धन, लाभ, होगा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का व्रत हर कोई नहीं रख सकता! जानिए किन लोगों को सावधान रहना चाहिए</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5228</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5228</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/08/dd11b3bb8a996c9901231e756375b9f11770531010282466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, महाशिवरात्रि, का, व्रत, हर, कोई, नहीं, रख, सकता, जानिए, किन, लोगों, को, सावधान, रहना, चाहिए</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Shani Dev: काले चने से शनि दोष होगा दूर, जानें ज्योतिष उपाय और सेहत लाभ?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5226</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5226</guid>
<description><![CDATA[ Shani Dev: भारतीय संस्कृति में भोजन मात्र पेट भरने का माध्यम ही नहीं, बल्कि ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करने का एक माध्यम भी है. वैदिक ज्योतिष के मुताबिक, काला चना सीधे तौर पर न्याय के देवता शनिदेव से संबंध है.
मान्यताओं के मुताबिक इसका उचित विधि से इस्तेमाल न केवल सेहत को सुधारता है, बल्कि शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या जैसे महादोषों से छूटकारा भी दिलाता है.&amp;nbsp;
ज्योतिष के जानकार शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या को दूर करने के लिए विशेष सलाह पर बल देते हैं, लेकिन उन सब में काले चने से जुड़ा खास उपाय प्रभावशाली है. शास्त्रों के जानकार बतातें हैं कि, अगर सही तरीके से काले चने का प्रयोग किया जाए तो कुंडली में शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है.&amp;nbsp;
Ashubh Yog: 17 फरवरी का मंगल बन सकता है अमंगल, होंगी ये 5 अशुभ घटनाएं
शनि देव को क्यों प्रिय हैं काले चनें?
स्कंद पुराण में शनिदेव की महिला और उनके प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया गया है. सूर्य देव के पुत्र शनिदेव को काले रंग की चीजें और लोहे जैसी कठोर वस्तुएं पसंद है.
जिस तरह से तंत्र से जुड़े क्रियाओं में काले तिल का महत्व है, उसी तरह से सात्विक पूजा में काले चने को कर्म सुधारक के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसका सेवन और दान करने से शनि की कठोर दृष्टि से शांत होने के साथ व्यक्ति में अनुशासन, सहनशीलता और धैर्य जैसे गुणों का विकास होता है.&amp;nbsp;
सेहत के लिए काला चना क्यों जरूरी?
आयुर्वेद में काले चने को सुपरफूड के रूप में माना जाता है. यह आयरन और प्रोटीन का भंडार भी है. ज्योतिषीय नजरिए से शनि का संबंध शरीर के वात दोष और हड्डियों से होता है. काले चने का सेवन करने से वात संतुलित रहता है, जिससे शनि के दुष्प्रभाव कम होने के साथ जोड़ों के दर्द, अधिक थकान और मानसिक तनाव से राहत मिलती है.&amp;nbsp;
मंगल का कुंभ राशि में गोचर, 23 फरवरी से ये 3 राशियां होंगी मालामाल! कहीं आपकी राशि तो नहीं इसमें
शनि दोष से छुटकारा पाने के सरल उपाय
अगर आप शनि की महादशा, साढ़ेसाती या ढैय्या से गुजर रहे हैं तो काले चने का इस्तेमाल आपके लिए सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है. वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, अगर नियमित रूप से संभव न हो तो, प्रत्येक शनिवार को काले चने का सेवन जरूर करें.
काले चने को नमक वाले पानी के साथ उबालें. इसके बाद इसे शनिदेव को अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. चने का सेवन करते समय ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें. ऐसा करने से शनि-दोष से मुक्ति मिलने के साथ जरूरतमंदों को लाभ मिलता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/08/5a97d8234a3143a49536e849de5ef62e17705448268721092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Shani, Dev:, काले, चने, से, शनि, दोष, होगा, दूर, जानें, ज्योतिष, उपाय, और, सेहत, लाभ</media:keywords>
</item>

<item>
<title>भारत की नागर और द्रविड़ शैली के मंदिर का रहस्य! जानें इनके बीच का अंतर और इतिहास?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5227</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5227</guid>
<description><![CDATA[ Nagara and Dravidian style temples: भारत की आध्यात्मिक आत्मा हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से लेकर तमिलनाडु के तपते मैदानों तक फैले हजारों मंदिरों में वास्तुकला के जरिए प्रकट होती है. हालांकि ये मंदिर अनुष्ठान, भक्ति और आध्यात्मिक सामंजस्य की समान भावना की पूर्ति करते हैं, फिर भी इन्हें दो बेहद अलग-अलग शैलियों के अनुरूप बनाया गया है.
उत्तर भारत की नागर और दक्षिण भारत की द्रविड़ शैली एक-दूसरे के डिजाइन से बेहद अलग है. ये इतिहास, संस्कृति, जलवायु और वैश्विक नजरिए से गहरी विविधता को दर्शाते हैं. आइए जानते हैं कि इन दोनों ही भारतीय मंदिर के वास्तुकला में क्या अंतर है?
भगवान जगन्नाथ स्वामी का मंदिर अन्य विष्णु मंदिर से अलग क्यों हैं? जानिए इसके पीछे का रहस्य?
उत्तर भारत के मंदिर नागर शैली पर आधारित
उत्तर भारत में नागर शैली की उत्पत्ति गुप्त काल (करीब 5वीं शताब्दी ईस्वी) में हुई, जिसे भारतीय कला और साहित्य का गोल्डन युग कहा जाता है. यह शैली विशेष रूप से उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में खूब फली-फूली.
नागर मंदिर की खास बात उनका घुमावदार शिखर है, जो गर्भगृह के ऊपर तीव्र रूप से ऊपर की उठा रहता है. यह ऊर्ध्वाधर, ऊंचे आकार को भक्त की दृष्टि और आत्मा को ऊपर की ओर आकर्षित करने के लिए बनाया गया था, जो सांसारिक मोक्ष का प्रतीक है.&amp;nbsp;
गर्भगृह आमतौर पर अंधेरा और ध्यानमग्न वाला होता है, जो आध्यात्मिक अंतर्मुखता के लिए स्थान प्रदान करता है.
नागर मंदिर आमतौर पर छोटे होते हैं, जिनमें न्यूनतम चारदीवारी और द्वार होते हैं, और भव्यता की तुलना में अधिक ऊर्ध्वाधरता पर अधिक जोर दिया जाता है. कुछ सबसे प्रतिष्ठित नागर मंदिरों में खजुराहों का कंदरिया महादेव मंदिर, कोणार्क सूर्य मंदिर और हिमालय में स्थित केदारनाथ मंदिर शामिल है.&amp;nbsp;
द्रविड़ शैली दक्षिण क्षेत्रों पर आधारित
नागर शैली के विपरीत, द्रविड़ शैली का विकास पल्लव वंश के शासन काल में 6ठीं-7वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास शुरू हुआ, लेकिन चोल, पांड्य और बाद में विजयनगर राजाओं के शासनकाल में यह शैली काफी फली-फूली. ये मंदिर दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में प्रमुख है.
नागर मंदिरों के ऊंचे शिखरों के उलट, द्रविड़ मंदिरों में गर्भगृह के ठीक ऊपर बने पिरामिडानुमा मीनारें होती हैं, जिन्हें विमान कहा जाता है. लेकिन इनसे भी ज्यादा आकर्षण का केंद्र इनके विशाल गोपुरम होते हैं. ये भव्य प्रवेश द्वार मीनारें आमतौर पर गर्भगृह से भी बड़े होते हैं और देवी-देवताओं, राक्षसों, नर्तकियों और जानवारों की मूर्तियों से सजे होते हैं.&amp;nbsp;
द्रवि़ड़ मंदिर एक किले की तरह निर्मित होते हैं, जिनकी ऊंची दीवारें कई संकेंद्रित प्रांगणों को आपस में घेरे रहती हैं, जो परिक्रमा, धार्मिक गतिविधियों और सामुदायिक उत्सवों को प्रोत्साहित करती हैं.
ये मंदिर कठोर ग्रेनाइट से बने होते हैं, जो आर्द्र और मानसूनी जलवायु वाले दक्षिणी क्षेत्र के लिए आदर्श हैं. प्रसिद्ध उदाहरणों में तंजावुर का वृहदीश्वर मंदिर, मदुरै का मीनाक्षी मंदिर, रामेश्वरम मंदिर और हम्पी का विरुपाक्षा मंदिर शामिल हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/08/54b4cf6a34c5a25357cdfb779d66614c17705316898171092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>भारत, की, नागर, और, द्रविड़, शैली, के, मंदिर, का, रहस्य, जानें, इनके, बीच, का, अंतर, और, इतिहास</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा 2 या 3 मार्च कब ? तारीख और स्नान&#45;दान का मुहूर्त जान लें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5223</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5223</guid>
<description><![CDATA[ Falgun Purnima 2026: फाल्गुन पूर्णिमा 3 मार्च 2026 को है. इसे दोल पूर्णिमा और वसंत पूर्णिमा कहा जाता है. इसी दिन होलिका दहन भी किया जाता है. फाल्गुन पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना की जाती है. मान्यता है इससे दुखों का नाश होता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु सहित देवी लक्ष्मी की पूजा करने से धन दौलत और आरोग्य की प्राप्ति होती है.फाल्गुन पूर्णिमा पर स्नान दान का समय जान लें.
फाल्गुन पूर्णिमा 2026 स्नान-दान समय
फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च 2026 को शाम 5.55 से शुरू होगी और अगले दिन 3 मार्च 2026 को शाम 5.07 पर समाप्त होगी.
स्नान-दान मुहूर्त - सुबह 5.05 - सुबह 5.55
चौघड़िया मुहूर्त

चर - सुबह 9.56 से सुबह 11.24
लाभ - सुबह 11.24 से दोपहर 12.52
अमृत - दोपहर 12.52 - दोपहर 2.20

होलिका दहन मुहूर्त
फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन के लिए शाम 6.22 से रात 8.50 तक मुहूर्त है. इस दिन भद्रा पूंछ सुबह 1.25 से सुबह 2.35 तक है और भद्रा मुख सुबह 2.35 से सुबह 4.30 तक है.
फाल्गुन पूर्णिमा पूजा विधि
स्नान और शुद्धता - व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. शारीरिक और मानसिक शुद्धता का विशेष ध्यान रखें.
पूजा और आराधना- व्रत के दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा करें. घर के पूजा स्थल को स्वच्छ कर वहां दीपक जलाएं और भगवान की मूर्ति या तस्वीर के सामने फूल, चावल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें. कथा का पाठ करें.
दान-भजन- दोपहर में सोएं नहीं. भजन या मंत्र जाप करें. गरीबों में दान दें. गौ माता को चारा खिलाएं. अनावश्यक क्रोध, विवाद और नकारात्मक गतिविधियों से दूर रहें.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर अभिषेक के बाद, शिव मंदिर से लें आएं ये चीज, धन की नहीं होगी कमी
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और&amp;nbsp;जानकारियों&amp;nbsp;पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/09/8bdb4fbe4a104645e9862c3cdc0e11f71770614472376499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Falgun, Purnima, 2026:, फाल्गुन, पूर्णिमा, या, मार्च, कब, तारीख, और, स्नान-दान, का, मुहूर्त, जान, लें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kalashtami 2026: कालाष्टमी व्रत आज, जानें बाबा भैरव की पूजा का मुहूर्त, विधि और महत्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5224</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5224</guid>
<description><![CDATA[ Kalashtami 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी व्रत का बहुत महत्व है. पंचांग के अनुसार, मासिक कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. फाल्गुन माह में यह तिथि सोमवार 9 फरवरी 2026 को पड़ रही है. कालाष्टमी का व्रत और पूजन भगवान शिव के उग्र व रौद्र रूप भगवान काल भैरव को समर्पित है. कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा से जीवन की बाधाओं, भय और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं.
कालाष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 8 फरवरी शाम 05:19 से शुरू होगी और 10 फरवरी सुबह 07:15 तक रहेगी. उदयातिथि के अनुसार, 9 फरवरी को कालाष्टमी मनाई जाएगी. काल भैरव की पूजा के लिए 9 फरवरी को कई शुभ मुहूर्त रहेंगे. इस मुहूर्त में आप पूजा, जप, काल भैरव स्तुति आदि कर सकते हैं.
ब्रह्म मुहूर्त में पूजा के लिए सुबह 05:21 से 06:12 तक का समय रहेगा. अभिजीत मुहूर्त में पूजा के लिए दोपहर 12:13 से 12:57 तक का संय रहेगा. दोपहर 02:27 से 03:10 विजय मुहूर्त रहेगा. शाम में गोधूलि मुहूर्त 06:04 से 06:30 तक रहेगा. वहीं रात में पूजा के लिए अमृत काल मुहूर्त 10:04 से 11:52 तक रहेगा. &amp;nbsp;वहीं जो लोग व्रत रखते हैं, वे 10 फरवरी को सुबह 09:16 से दोपहर 12:04 तक पारण कर सकते हैं.
कालाष्टमी पूजा विधि
कालाष्टमी की पूजा आप मंदिर जाकर कर सकते हैं. यदि मंदिर जाना संभव न हो तो घर भी नियमो का पालन करते हुए सात्विक पूजा की जा सकती है. घर पर पूजा करने के लिए काल भैरव की छोटी मूर्ति ही रखकर सरल विधि से पूजा करें. पूजा से पहले स्नान कर स्वच्छ हो जाएं. चौकी में कालभैरव की मूर्ति स्थापित कर सरसों तेल का दीपक जलाएं और विधि पूर्वक पूजा करें. काल भैरव को नींबू, काले तिल और उड़द की दाल जरूर अर्पित करें. काले चने, हलवा, खीर, मालपुए आदि का भोग लगाएं. पूजा के दौरान काल भैरव के मंत्रों का जाप करें.
कालाष्टमी धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी का दिन भगवान भैरव को प्रसन्न करने का विशेष अवसर होता है. इस दिन व्रत और पूजा करने से भय, शत्रु बाधा, मानसिक तनाव, गुप्त शत्रु और नकारात्मकता से राहत मिलती है. भक्त इस दिन मंदिर जाकर काल भैरव की पूजा करते हैं और संकटों से मुक्ति की कामना करता है.
ये भी पढ़ें: Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का व्रत हर कोई नहीं रख सकता! जानिए किन लोगों को सावधान रहना चाहिए



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/08/6ed340dd55af1cf41ac17682cab1d7d71770551569684466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kalashtami, 2026:, कालाष्टमी, व्रत, आज, जानें, बाबा, भैरव, की, पूजा, का, मुहूर्त, विधि, और, महत्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Janaki Jayanti 2026 Upay: जानकी जयंती पर आज करें यह छोटा सा उपाय, धन और वैवाहिक संकट होगी दूर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5225</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5225</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/08/7f0d24f1749e4291b27184673da459551770553322444466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Janaki, Jayanti, 2026, Upay:, जानकी, जयंती, पर, आज, करें, यह, छोटा, सा, उपाय, धन, और, वैवाहिक, संकट, होगी, दूर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mangalwar: मंगलवार की खरीदारी पड़ जाए न भारी! मंगल दोष से बचना है तो शॉपिंग लिस्ट से हटाएं ये चीजें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5221</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5221</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/09/26ba4e86a372fb4ebd597694f34fbb741770626674336466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mangalwar:, मंगलवार, की, खरीदारी, पड़, जाए, न, भारी, मंगल, दोष, से, बचना, है, तो, शॉपिंग, लिस्ट, से, हटाएं, ये, चीजें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026 Samagri: महाशिवरात्रि पर इन 3 चीजों के बिना अधूरी है शिव पूजा, अभी लें आए घर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5222</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5222</guid>
<description><![CDATA[ Mahashivratri 2026 Samagri: महाशिवरात्रि अर्थात भगवान शिव की महान रात. इस दिन रात्रि जागरण कर शिव पूजा का महत्व है. साल में 12 शिवरात्रि होती हैं लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि मनाई जाती है क्योंकि ये शिव जी के वैराग्य को त्यागकर सांसारिक जीवन में प्रवेश करने वाला दिन माना जाता है. इस दिन माता पार्वती ने भोलेनाथ संग विवाह रचाया था. शिव पूजा के लिए जल, बेलपत्र और अक्षत बहुत खास माना जाता है.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि पूजा सामग्री
शिवलिंग, सफेद वस्त्र,&amp;nbsp;
बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते
मदार पुष्प या फूलों की माला
गाय का दूध, दही, शक्कर, फल, मिठाई, घी
कमल और सफेद फूल
गंगाजल, महादेव के वस्त्र
माता पार्वती के श्रृंगार का सामान, वस्त्र
हवन सामग्री
दान की सामान, जैसे वस्त्र, अन्न, गुड़, घी आदि
आरती के लिए दीपक, छोटी इलायची, पान-सुपारी
गाय का घी, कपूर, इत्र, लौंग,&amp;nbsp;
जनेऊ, चंदन, केसर, अक्षत्
मौसमी फल, खस, अभ्रक, कुश का आसन
मौली, रक्षा सूत्र, भस्म,&amp;nbsp;शहद, बेर,&amp;nbsp;
शिव चालीसा और कथा की किताब&amp;nbsp;
भोग के लिए हलवा, ठंडाई, लस्सी
महाशिवरात्रि की रात क्यों करते हैं जागरण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार महाशिवरात्रि की रात को ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि ये मानव शरीर में ऊर्जा को शक्तिशाली ढंग से ऊपर की ओर ले जाती है। इस रात रीढ़ को सीधा रखकर जागृत और सजग रहना हमारी शारीरिक और आध्यात्मिक खुशहाली के लिए बहुत ही लाभदायक है.
महाशिवरात्रि पर रात में शिव साधना न सिर्फ ज्योतिष नजरिए से बल्कि भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए भी महत्वपूर्ण है. महाशिवरात्रि पर की गई महादेव की आराधना सुयोग्य जीवनसाथ और वैवाहिक जीवन में खुशहाली पाने के लिए महत्वपूर्ण है.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर अभिषेक के बाद, शिव मंदिर से लें आएं ये चीज, धन की नहीं होगी कमी

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/09/e2242ada2c91bae6d3a5d311dde624d61770618561872499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 17:06:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026, Samagri:, महाशिवरात्रि, पर, इन, चीजों, के, बिना, अधूरी, है, शिव, पूजा, अभी, लें, आए, घर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holika Dahan 2026: होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय, भद्रा&#45;चंद्र ग्रहण ने बढ़ाई मुश्किल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5168</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5168</guid>
<description><![CDATA[ Holika Dahan 2026 Bhadra and Chandra Grahan: इस वर्ष होली पर्व पर भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसको लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति है. 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा, जबकि अगले दिन 3 मार्च को धुलेंडी के दिन खग्रास चंद्र ग्रहण रहेगा. ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा, जिसमें शुभ कार्य और मंदिर दर्शन वर्जित माने जाते हैं.
होली का त्योहार 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा. पहले दिन यानी सोमवार 2 मार्च को होलिका दहन होगा, जबकि मंगलवार यानी 3 मार्च को धुलंडी पर रंग खेला जाएगा. हालांकि इस बार होलिका दहन का समय 2 मार्च की शाम और अर्द्ध रात्रि में किया जाएगा, जिसमें भी 2 मार्च की शाम को सिर्फ 12 मिनट का ही समय मिलेगा, जबकि अर्द्ध रात्रि में 1 घंटे 10 मिनट का समय होलिका दहन के लिए मिल रहा है. खास बात यह भी है कि इस बार होली के दिन चंद्र ग्रहण भी रहेगा.
होलिका दहन पर भद्रा का समय
2 मार्च को शाम 5:55 बजे भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 4:28 बजे तक रहेगा. वर्ष भद्रा भूलोक में और सिंह राशि में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ रहेगा. भद्रा काल में दान-पुण्य भी किया जा सकता है.
चंद्र ग्रहण के साए में होली

इस बार होली चंद्र ग्रहण के साये में मनाई जाएगी. 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे चंद्र ग्रहण शुरू होगा और शाम 6:48 बजे समाप्त होगा. जयपुर में चंद्र उदय शाम
6:29 बजे और ग्रहण का समापन 6:48 बजे होगा, जिससे ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का रहेगा. ग्रहण का सूतक मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा.
ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में बनेगा और भारत में दिखाई देगा.
चंद्र ग्रहण होने से होलिका दहन 2 मार्च को एक दिन पहले ही करना शुभ रहेगा. इस प्रकार, रंगों का त्योहार 3 मार्च को मनाया जाएगा.

होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त (प्रदोषकाल)
फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित में करना शास्त्रसम्मत बताया गया है. इस वर्ष फाल्गुनशुक्ल चतुर्दशी सोमवार, 02 मार्च 2026 को सायं 05:56 तक है जो कि अगले दिन मंगलवार, 03 मार्च 2026 को सायं 05:07 तक है.
प्रदोषकाल में पूर्णिमा होने से दिनांक 02 मार्च 2026 (सोमवार) को ही होलिका दहन होगा.
इस दिन भद्रा सायं 05:56 से अन्तरात्रि 05:28 तक भूमिलोक (नैऋत्यकोण अशुभ) की रहेगी, जो कि सर्वथा त्याज्य है.
यथा :- भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी (रक्षाबंधन) फाल्गुनी ऐलिकादहन) तथा। श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी ॥ - मुहूर्तचिन्तामणि
होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय

धर्मसिन्धु के प्रमाणानुसार दिनांक 02 मार्च 2026 सोमवार को सायं 06:24 से सायं 06:36 के मध्य प्रदोषकाल में होलिका दहन श्रेष्ठ होगा.
निष्कर्ष :- यदि भद्रा निशीथकाल से आगे तक रहे तो (भद्रा मुख को छोड़कर) होलिका दहन भद्रकाल (भद्रा पुच्छ या प्रदोष) में किया जाना चाहिए.
2 मार्च 2026 को, भद्रा और भद्रा पुच्छ ही निशीथकाल से आगे तक व्याप्त हैं. इसलिए प्रदोष काल ही होलिका दहन हेतु श्रेष्ठ हैं.

February Grahan 2026: फरवरी में 15 दिन में दो ग्रहण, कितना खतरनाक होगा ? क्या है संकेत



Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/06/a1f097106306b4c0ec6cdcc10a973c7a1770375051088499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:46 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holika, Dahan, 2026:, होलिका, दहन, के, लिए, मिलेगा, सिर्फ, मिनट, का, समय, भद्रा-चंद्र, ग्रहण, ने, बढ़ाई, मुश्किल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>भगवान जगन्नाथ स्वामी का मंदिर अन्य विष्णु मंदिर से अलग क्यों हैं? जानिए इसके पीछे का रहस्य?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5167</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5167</guid>
<description><![CDATA[ &amp;ldquo;नहं वसामि वैकुंठे न योगिनां हृदये न च।
मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद॥&amp;rdquo;
इस श्लोक का अर्थ है कि, ईश्वर मात्र वैकुंठ या सिद्ध योगियों के अंदर ही निवास नहीं करते, बल्कि जहां सच्ची भक्ति का पालन किया जाता है, वहां भी निवास करते हैं. जगन्नाथ स्वामी को समर्पित मंदिरों में इस सत्य को गहराई से महसूस किया जा सकता है.&amp;nbsp;
पूर्वी भारत में स्थित भगवान जगन्नाथ स्वामी का मंदिर अन्य विष्णु मंदिरों से बिल्कुल अलग है. यहां अनुष्ठान जीवंत प्रतीत होते हैं, प्रतिमा निर्भीक प्रतीत होती है और श्रद्धालु दूरी बनाकर नहीं खड़े रहते. यहां आस्था व्यवस्था या आश्वासन से नहीं बल्कि श्रद्धा और भरोसे से जुड़ी है.&amp;nbsp;
भक्तों द्वारा आमतौर पर स्मरण किया जाने वाला एक सामान्य अर्पण इस भावना की ओर इशारा करता है कि,&amp;nbsp;
&quot;समर्पयामि सर्वस्वं त्वयि देवं जगन्नाथ।&quot;हे जगन्नाथ मैं आपको सब कुछ अर्पित करता हूं.
उड़ीसा के पुरी में जगन्नाथ स्वामी की पूजा भगवान विष्णु के रूप में की जाती है, फिर भी वे पूर्णता, अनुशासन या निश्चितता की मांग नहीं करते हैं. वे केवल समर्पण और भक्ति भावना की मांग करते हैं. यही वजह है कि, लोग अक्सर यहां अपनी स्पष्ट इच्छाओं के साथ नहीं, बल्कि थके हुए हृदय और अनुत्तरित प्रश्नों के साथ आते हैं.&amp;nbsp;
क्या कृष्ण आज भी वृंदावन में विचरण करते हैं? जानिए इस रहस्यमयी जीवंत नगरी की सच्चाई
जगन्नाथ स्वामी की पूजा लोक के स्वामी के रूप में, न कि व्यवस्था और स्वामी के रूप में
भारत के अधिकांश विष्णु मंदिर ब्रह्मांडीय व्यवस्था पर बल देते हैं. भगवान विष्णु को संरक्षक के रूप में पूजा जाता है, जो नियमों, धर्म और संरचना के माध्यम से संतुलन लाने में मदद करते हैं. वहीं, जगन्नाथ की पूजा जनमानस के स्वामी के रूप में की जाती है. उनके नाम के शाब्दिक अर्थ पर गौर किया जाए तो सृष्टि के स्वामी, लेकिन व्यवहारिक तौर पर इसका अर्थ है वह स्वामी जो सबका है.&amp;nbsp;
जगन्नाथ स्वामी की पूजा में पदक्रम का कोई स्थान नहीं है, उनसे जुड़ी अनेक परंपराओं में पुजारी, राजा, आम लोग और यहां तक कि औपचारिक सामाजिक व्यवस्था से बाहर के लोगों को एक सामान माना जाता है. जगन्नाथ स्वामी तक बौद्धिक धर्मशास्त्र या कठोर अनुष्ठानिक पूर्णता के माध्यम से नहीं पहुंचा जाता है. उनसे उपस्थिति जरिए ही पहुंचा जाता है. जो इस बात की ओर संकेत करता है कि, आस्था को अनुभव किया जाता है, न कि किसी की निगरानी में.
जगन्नाथ स्वामी के शारीरिक स्वरूप का महत्व
अधिकांश विष्णु मंदिर में उनकी मूर्ति को सटीक अनुपात और शास्त्रीय सौंदर्य के साथ तराशा जाता है. जगन्नाथ स्वामी की मूर्ति इसके विपरीत है. उनके स्वरूप की बात की जाए तो अधूरे अंग, गोल आंखें और लकड़ी का शरीर जो सौंदर्य संबंधी अपेक्षाओं के विपरीत हैं. यह इतिहास की आकस्मिक घटना नहीं, बल्कि एक धार्मिक संदेश है.&amp;nbsp;
नागपुर के जंगलों में छुपी 1000 साल पुरानी कर्पूर बावड़ी, जिसका पानी कभी नहीं सूखता!
जगन्नाथ स्वामी की पूजा समर्पण से भरी न कि लेन-देन से
कई लोग सुरक्षा, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए विष्णु मंदिर जाते हैं. जगन्नथ स्वामी के भक्त भी उनकी प्रार्थना करते हैं, लेकिन उनकी प्रार्थना का भाव अलग होता है. यहां मांगने के बजाए स्वयं को भावनात्मक रूप से अर्पत करने पर बल दिया जाता है.&amp;nbsp;
जगन्नाथ स्वामी की भावना सौदेबाजी नहीं है. उनके प्रति आस्था धीरे-धीरे नियंत्रण की बजाए स्वीकृति है. इससे भक्ति कमजोर नहीं, बल्कि गहरी होती है. भक्त आमतौर पर अनुभव करते हैं कि, जगन्नाथ परिणामों का भरोसा नहीं दिलाते, बल्कि अनिश्चितता के समय साथ निभाते हैं. यह भावनात्मक नजरिया प्रार्थना के अनुभव को बदल देती है.&amp;nbsp;
अनुष्ठान गतिशील, लेकिन समय में स्थिरता नहीं
कई विष्णु मंदिर में अनुष्ठान निरंतरता बनाए रखने मके लिए निर्धारित पैटर्न के नियमों का पालन किया जाता है, जबकि जगन्नाथ मंदिर में गति और परिवर्तन से जीवंत हैं. यहां देवता को स्नान कराया जाता है, कपड़े पहनाए जाते हैं, विश्राम कराया जाता है, बाहर ले जाया जाता है और यहां तक कि प्रतीकात्मक रूप से उनका नवीनीकरण भी किया जाता है.&amp;nbsp;
सबसे प्रभावशाली उदाहरण कि, यह विचार कि देवता भौतिक रूप में शाश्वत नहीं हैं. शरीर का प्रतिस्थापना इसलिए नहीं किया जाता क्योंकि वह टूट जाता है, बल्कि इसलिए होता है क्योंकि नवीनीकरण स्वाभाविक है. यह अवधारणा किसी डर के अनित्यता का पाठ सिखाती है. भक्त यह पाठ आत्मसात करते हैं कि, परिवर्तन का मतलब हानि नहीं है, बल्कि रूपांतरण के जरिए से निरंतरता है.&amp;nbsp;
जगन्नाथ तब भी सुलभ हैं जब वे दिखाई न दें
जगन्नाथ स्वामी के भक्तों का कहना है कि, शारीरिक रूप से अप्राप्य होने पर भी निकटता का अनुभव कराते हैं. ऐसे मौके भी होते हैं जब देवता प्रत्यक्ष रूप से विद्यमान नहीं होते हैं और फिर भक्ति कमजोर नहीं पड़ती है. यह इस आम धारणा के उलट है कि आस्था हमेशा दर्शन पर निर्भर करती है.&amp;nbsp;
जगन्नाथ स्वामी की भक्ति भक्तों को निरंतर आश्वसन की जरूरत के बिना भी उनसे जुड़े रहने का कुशल सिखाती है. यह बंधन आंतरिक रूप से विकसित होता है. समय के साथ एक शांत, मान्यताओं पर कम निर्भर और भावनात्मक रूप से परिपक्व ही आस्था का निर्माण करता है.&amp;nbsp;
मंदिर का वातावरण मानवीय न कि परिपूर्ण
जगन्नाथ मंदिर आमतौर पर गहन भीड़भाड़, शोरगुल से भरे और भावनात्मक रूप से आवेशित होते हैं. इनका उद्देश्य मौन या सौंदर्यपूर्ण शांति प्रदान करना नहीं है, बल्कि ये जीवन का ही प्रतिबिंब पेश करते हैं.&amp;nbsp;
यह वातावरण एहसास कराता है कि, मंदिर कोई अलग-थलग पवित्र स्थल नहीं है. यह जीवन का ही एक विस्तृत रूप है. जगन्नाथ धाम में भक्तों पर आध्यात्मिक व्यवहार करने का कोई दबाव नहीं है. उन्हें मानवीय होने की स्वतंत्रता महसूस होती है. संस्थागत धर्म में ऐसी स्वतंत्रता दुर्लभ है और यही वजह है कि, जगन्नाथ मंदिर इतना गहन भावनात्मक प्रभाव छोड़ते हैं.&amp;nbsp;
Shiva Temples: काशी से केदारनाथ तक इन 7 शिव मंदिरों में शिवलिंग को छूना मना है, जानिए क्यों!
समुदाय को प्राथमिकता, व्यक्तिगत गौण
अन्य विष्णु मंदिरों में विष्णु की पूजा में आमतौर पर व्यक्तिगत मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति पर जोर दिया जाता है. वहीं, जगन्नाथ की पूजा में समुदाय को ध्यान में रखा जाता है. साझा भोजन, भ्रमण, अनुष्ठान और भावनाएं इस अनुभव को परिभाषित करती है. देवता के पास अकेले नहीं जाया जाता है. यहां तक कि जब कोई भक्त चुपचाप खड़ा होता है, तब भी एक सामूहिक लय का हिस्सा होता है.&amp;nbsp;
जगन्नाथ जीवन को वास्तविक रूप में स्वीकार करने का प्रतीक
जगन्नाथ मंदिरों के खास होने का शायद सबसे गहरा कारण ये है कि, वे वास्तविकता से संघर्ष नहीं करते. जीवन में दुख, कमी या अनिश्चितता से मना नहीं किया जाता. इसके बजाय ये सब भक्ति में डूबे हुए हैं.&amp;nbsp;
जगन्नाथ जीवन से बचाव को प्राथमिकता नहीं देते, वे जीवन के अंदर मौजूद रहने का प्रतीक है. समय के साथ, भक्त इस सोच को अपना लेते हैं. आस्था समस्याओं से भागने के बारे में नहीं, बल्कि उनके अंदर मजबूती से खड़े रहने के बारे में ज्यादा बताती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/06/9167e37e8695d6d8a38f696b29a2134717703840415541092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:45 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>भगवान, जगन्नाथ, स्वामी, का, मंदिर, अन्य, विष्णु, मंदिर, से, अलग, क्यों, हैं, जानिए, इसके, पीछे, का, रहस्य</media:keywords>
</item>

<item>
<title>बाराबंकी तिलक मामले पर काशी के धर्माचार्य ने कहा&#45; खालिस्तान और हिंदुस्तान में फर्क नहीं !</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5165</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5165</guid>
<description><![CDATA[ Barabanki Tilak Case: बाराबंकी में एक शर्मनाक घटना सामने आई है. कस्वा देव स्थित सूफी संत हाजी वारिस अली शाह के ऐतिहासिक दरगाह के बाहर एक विशेष समुदाय का युवक दूसरे युवक के माथे पर लगे तिलक को पानी से धोता है. यह घटना गुरुवार की बताई जा रही है.
तिलक मिटाने यह घटना शहरभर में फैल गई. आसपास के लोगों ने भी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक हाजी वारिस अली शाह की दरगाह हमेशा अमन, भाईचारा और सौहार्द की पहचान है.
ABP News के संवाददाता निशांत चतुर्वेदी ने इस मामले में काशी के धर्मचार्य के.के. उपाध्याय (वरुणा नदी-आरती आयोजक) से खास बाचतीत की. देखें तिलक मामले और तिलक के महत्व को लेकर काशी के धर्माचार्य ने क्या कहा?

बाराबंकी तिलक मामले पर काशी के धर्माचार्य ने कहा- खालिस्तान और हिंदुस्तान में फर्क नहीं ! #barabanki pic.twitter.com/u0lmYNF1qf
&amp;mdash; Ankur Agnihotri (@Ankuragnihotrii) February 6, 2026



के के उपाध्याय ने दी बाराबंकी की घटना पर प्रतिक्रिया- यह तो बहुत ही शर्मनाक और निंदनीय घटना है. कारण यह है कि सनातन धर्म में तिलक का बहुत बड़ा महत्व है और क्योंकि हम लोग भी काशी में रहते हैं और बचपन से तिलक धारण करते हैं और तिलक जो है हिंदू सनातन के हिसाब से हमारे माथे का ताज है.&amp;nbsp; इसके साथ अगर किसी ने छेड़छाड़ करने का प्रयास किया है तो इसकी हम घोर निंदा करते हैं. ऐसे अराजक तत्व के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. क्योंकि भारत को हिंदुस्तान भी कहा जाता है तो हिंदुस्तान में अगर हिंदू सुरक्षित नहीं रहेगा, अपने माथे पर तिलक नहीं लगा पाएगा, पूजा पाठ नहीं कर पाएगा तो खालिस्तान और हिंदुस्तान में अंतर क्या है, जिन्होंने ऐसा कृत्य किया है उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए यह हमारी मांग है.
ये भी पढ़ें: वृंदावन से उठी शांति की पुकार! प्रेमानंद महाराज और आचार्य लोकेश के बीच मुलाकात में क्या हुआ?



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/06/8969b6fe031e63807af92923abd4c6b81770390082267466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>बाराबंकी, तिलक, मामले, पर, काशी, के, धर्माचार्य, ने, कहा-, खालिस्तान, और, हिंदुस्तान, में, फर्क, नहीं</media:keywords>
</item>

<item>
<title>वृंदावन से उठी शांति की पुकार! प्रेमानंद महाराज और आचार्य लोकेश के बीच मुलाकात में क्या हुआ?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5166</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5166</guid>
<description><![CDATA[ जब दो महान आध्यात्मिक धाराएं एक साथ मिलती हैं तो उसका उद्देश्य केवल जन-कल्याण होता है. हाल ही में धर्मनगरी वृंदावन में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जब अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक जैन आचार्य लोकेश ने प्रख्यात संत पूज्य प्रेमानंद जी महाराज से शिष्टाचार भेंट की. इस मुलाकात के दौरान दोनों संतों के बीच विश्व शांति और युवा पीढ़ी के भविष्य को लेकर गंभीर चर्चा हुई.
चर्चा के दौरान आचार्य लोकेश ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे संघर्ष पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने प्रेमानंद जी से आग्रह किया, &quot;इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए किए जा रहे प्रयास सफल हों, इसके लिए आप प्रार्थना करें.&quot;
इस पर प्रेमानंद जी महाराज ने बहुत ही मार्मिक उत्तर दिया. उन्होंने कहा, &#039;&#039;केवल नीतियों या समझौतों से शांति नहीं आ सकती. वास्तविक शांति तभी संभव है जब मनुष्य का मन शुद्ध हो.&#039;&#039; उन्होंने जोर देकर कहा कि अध्यात्म ही वह मार्ग है जो दुनिया को युद्ध की विभीषिका से बचा सकता है.
युवाओं का आध्यात्मिक विकास
दोनों संतों ने इस बात पर चिंता जताई कि आज की युवा पीढ़ी को सही दिशा की आवश्यकता है. उन्होंने सुझाव दिया...
शांति शिक्षा: स्कूलों और कॉलेजों में &#039;पीस एजुकेशन&#039; को अनिवार्य बनाया जाए.नैतिक मूल्य: युवाओं को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और सेवा का पाठ पढ़ाया जाए.आध्यात्मिक नेतृत्व: नई पीढ़ी के लिए विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम शुरू किए जाएं.
आचार्य लोकेश ने कहा कि अहिंसा केवल एक शब्द नहीं बल्कि जीने का तरीका है. वहीं, प्रेमानंद जी ने स्पष्ट किया कि जब व्यक्ति भीतर से शांत होगा, तभी समाज और विश्व में शांति आएगी. यह भेंट ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक तनाव और ध्रुवीकरण बढ़ रहा है. ऐसे में दोनों संतों का यह संवाद समाज में सद्भाव, करुणा और शांति को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरक पहल माना जा रहा है. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/06/46c7d06bd5717676c25dd2463b78abf31770384748344940_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>वृंदावन, से, उठी, शांति, की, पुकार, प्रेमानंद, महाराज, और, आचार्य, लोकेश, के, बीच, मुलाकात, में, क्या, हुआ</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 7 फरवरी शनि देव की पूजा का मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5163</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5163</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 7 फरवरी 2026: आज 7 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर यशोदा जयंती और शनिवार है. ये दिन शनि देव और माता काली को समर्पित है. माता काली के निमित्त सरसों के तेल का चौमुखी दीपक (आटे का बना) जलाना बेहद फलदायी माना जाता है.&quot;ॐ क्रीं कालिकायै नमः&quot; मंत्र का 108 बार जाप करें, यह नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है और सुख-समृद्धि लाता है.
7 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 7 February 2026)



तिथि

षष्ठी (7 फरवरी 2026, सुबह 1.18 - 8 फरवरी 2026, सुबह 2.54)



वार
शनिवार


नक्षत्र
चित्रा


योग
शूल, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
रात 10.45


चंद्रोस्त
सुबह 9.26


चंद्र राशि
कन्या



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 8.41 - सुबह 10.05


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 6.31 - रात 8.07



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 10.05 - सुबह 11.30


यमगण्ड काल
दोपहर 2.18 - दोपहर 3.42


गुलिक काल
सुबह 7.17 - सुबह 8.41&amp;nbsp;


विडाल योग
सुबह 2.28 - सुबह 7.16, 8 फरवरी


भद्रा काल
सुबह 2.54 - सुबह 7.16, 8 फरवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 7 February 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
कन्या


मंगल
मकर


बुध
बुध


गुरु
मिथुन


शुक्र
मकर


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



सिंह राशि
नौकरी में आपके अधिकार क्षेत्र का विस्तार होगा। आपको कल ससुराल पक्ष से सहयोग मिेलेग.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



वृषभ राशि
कोशिश करें कि किसी भी मामले को लंबित न रखें, वरना भविष्य में समस्या हो सकती है.&amp;nbsp;



FAQs: 7 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?





काली माता के मंदिर में जाकर उन्हें नींबू की माला अर्पित करें. इसके साथ ही मां काली को ताजे फल और सूजी के हलवे का भोग लगाएं. मान्यता है कि इस उपाय को करने से मां काली की कृपा आपके ऊपर बनी रहेगी.





Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन शूल, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग बन रहा है.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर 19 साल बाद लक्ष्मीनारायण योग, इन 4 राशियों की कंगाली होगी खत्म!




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/07/ff8662017cb307d86885b27a65bbe8f51770406326895499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, फरवरी, शनि, देव, की, पूजा, का, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Rose Day 2026: प्रेम, भक्ति और अकीदत से जुड़ा है गुलाब, देवता से लेकर दरगाह तक...</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5164</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5164</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/07/161c18c69df075c9346d00409fe2956c1770403939241466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Rose, Day, 2026:, प्रेम, भक्ति, और, अकीदत, से, जुड़ा, है, गुलाब, देवता, से, लेकर, दरगाह, तक...</media:keywords>
</item>

<item>
<title>विधवा स्त्री को श्रृंगार करना चाहिए या नहीं? जानिए कथावाचक शिवम साधक महाराज के नजरिए से?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5161</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5161</guid>
<description><![CDATA[ भारतीय समाज में विधवा स्त्रियों के लेकर सदियों से एक कठोर और अमानवीय सोच थोपी गई है. कई लोगों मानते हैं कि, विधवा औरत को हमेशा सफेद कपड़े पहनने चाहिए, गहने नहीं पहनने चाहिए, सौंदर्य प्रसाधन (Beauty product) का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, हंसना नहीं चाहिए, मानो पति के निधन के साथ उसका जीवन भी खत्म हो गया हो.
लेकिन सवाल यह है कि, आखिर यह नियम आए कहां से?
कथावाचक शिवम साधक महाराज कहते हैं कि, किसी भी वेद, पुराण या शास्त्र में यह कहीं भी नहीं लिखा है कि, विधवा स्त्री को श्रृंगार नहीं करना चाहिए. तो फिर समाज ने यह क्रूर परंपरा क्यों बनाई?
क्या आप भी पति को &#039;Hubby&#039; बुलाती हैं? कथावाचक शिवम साधक महाराज से जानिए इसके पीछे का तर्क?
श्रृंगार और सुहाग में फर्क समझें
यहां लोग सबसे बड़ी गलती करते हैं कि, श्रृंगार और सुहाग को एक चीज समझ लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है.&amp;nbsp;
सुहाग के चिन्ह जैसे-
मांग में सिंदूरमंगलसूत्रबिछुएचूड़ियां (सुहाग का प्रतीक वाली)
ये विवाह और पति की उपस्थिति का प्रतीक हैं. पति के मरने के बाद ये चिन्ह न पहनना धार्मिक परंपरा का हिस्सा हो सकता है. लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं कि, स्त्री
अच्छे कपड़े पहनना छोड़ देगहने न पहनेखुद को सुंदर न बनाएचप्पल, जूते, साड़ी या सजावटी वस्त्र न पहने
यह सब श्रृंगार का हिस्सा है और पूरी तरह से वैध है.&amp;nbsp;
धर्म ने कभी भी इस बात का समर्थन नहीं किया कि, दुख झेलने का तरीका खुद को कुरूप बनाना है.&amp;nbsp;
किराए का लहंगा पहनने से शादीशुदा जीवन पर पड़ सकता है बुरा असर! जानें कथावाचक की चेतावनी
पुराण क्या कहते हैं?
पुराणों में इस बात का जिक्र देखने को मिलता है कि, स्त्री का अपमान करना, उसे पीड़ा देना, उसका तिरस्कार करना पाप के समान हैं.&amp;nbsp;
सोचिए जब आप किसी विधवा स्त्री से कहते हैं कि वह रंगीन वस्त्र नहीं पहने, गहने न पहने, खुश न रहे तो आप क्या कर रहे हैं?
यह धर्म नहीं, बल्कि क्रूर सामाजिक नियंत्रण है.&amp;nbsp;
विधवा होना अपराध नहीं है. पति का देहांत होना स्त्री का कर्म नहीं होता, तो फिर उसके साथ इस तरह का बर्ताव क्यों किया जाता है?
विधवा स्त्री भी इंसान हैं, भावनाओं से भरी है और जीवन जीने का अधिकार रखती हैं.&amp;nbsp;



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Dr Shivam Sadhak Jii Maharaj (@shivamsadhak_ji)





कथावाचक शिवम साधक महाराज कहते हैं कि, धर्म समर्पण करना सिखाता है, न कि आत्म दमन.
असली सत्य ये है कि, विधवा स्त्री&amp;nbsp;श्रृंगार कर सकती है.&amp;nbsp;अच्छे कपड़े पहन सकती है.सुंदर दिख सकती है. 
आत्मसम्मान के साथ जीवन-यापन कर सकती है. बस सुहाग के प्रतीक नहीं पहनती बस इतना ही, बाकी सब रोकना धर्म का हिस्सा नहीं है, मानसिक हिंसा है. अगर कोई परंपरा स्त्रियों के प्रति भेदभाव की भावना को बढ़ावा देती है, तो वह परंपरा नहीं अत्याचार है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/06/d7ba55db5ea63c94aaae3a91cd6d6dda17703860018091092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>विधवा, स्त्री, को, श्रृंगार, करना, चाहिए, या, नहीं, जानिए, कथावाचक, शिवम, साधक, महाराज, के, नजरिए, से</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vijaya Ekadashi 2026: शत्रु पर जीत दिलाने वाला विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी को, ऐसे प्रसन्न होंगे विष्णु जी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5162</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5162</guid>
<description><![CDATA[ Vijaya Ekadashi 2026: हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और पीली चीजों का दान करना शुभ होता है. इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती हैं.विजया एकादशी का व्रत हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है.
शास्त्रों में एकादशी व्रत को सर्वोत्तम माना गया है क्योंकि, यह इकलौता ऐसा व्रत है जिसका पुण्य आप किसी दूसरे व्यक्ति को भी दान कर सकते हैं. साथ ही इस व्रत को करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को किया जाएगा.
शत्रु पर विजय पाने वाला व्रत
मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने और भगवान के मंत्रों का जप करने से जीवन में आ रही कठिनाइयां दूर होती हैं. साथ ही सफलता का रास्ता आसान हो जाता है.
हिंदू धर्म में भगवान श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी व्रत का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. यह व्रत हर महीने के कृष्णपक्ष और शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है, लेकिन इसका महत्व तब और भी ज्यादा बढ़ जाता है जब यह फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष में पड़ती है और विजया एकादशी कहलताी है.
विजया एकादशी का व्रत करने वालों को शत्रुओं पर सफलता प्राप्त होती है साथ ही तरक्की में आ रही बाधाएं भी दूर होती है.&amp;nbsp;
श्रीराम ने किया था विजया एकादशी
इस व्रत को भगवान श्री राम ने लंका विजय से पहले किया था. मान्यता है कि इस व्रत को करने साधक के जीवन से जुड़े सभी रोग-शोक दूर होते हैं और वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है. विजया एकादशी व्रत के पुण्य प्रभाव से व्यक्ति को कोर्ट-कचहरी के मामले में जीत हासिल होती है.
विजया एकादशी तिथि
विजया एकादशी तिथि का आरंभ 12 फरवरी को दोपहर में 12:33 मिनट पर आरंभ होगी और 13 तारीख को 2:26 मिनट पर समाप्त होगी.
शास्त्रीय विधान के अनुसार, 13 फरवरी को ही विजया एकादशी का व्रत किया जाएगा.
जब भी एकादशी तिथि सूर्योदय के समय लगती है तब विजया एकादशी का व्रत किया जाता है इसलिए विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को ही करना शास्त्र सम्मत है.
विजया एकादशी व्रत का महत्व
मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत भगवान राम ने भी किया थ.जब भगवान राम लंका के रास्ते पर थे उस समय समुद्र के तट पर अपनी सेना के साथ मिलकर भगवान राम ने विजया एकादशी का व्रत किया था। तभी से इस एकादशी का नाम विजया एकादशी पड़ा.
विजया एकादशी पूजा विधि

विजया एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें और की प्रतिमा स्थापित करें.
इसके बाद सबसे पहले भगवान विष्णु को चंदन लगाएं और वस्त्र अर्पित करें.
अब भगवान को पीले रंग की चीजों का भोग लगाएं उन्हें पीली मिठाई और गुड़ चने का भोग लगाए.
इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए उनके मंत्रों का जप करें.
विजया एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और फिर आरती करें. अंत में सभी को प्रसाद दें

भगवान विष्णु के मंत्र
ॐ नमोः नारायणाय॥
ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥
ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुडध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
Holika Dahan 2026: होलिका दहन के लिए मिलेगा सिर्फ 12 मिनट का समय, भद्रा-चंद्र ग्रहण ने बढ़ाई मुश्किल
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/06/74662408c4edabcee95c4cd36f3065ca1770386710372499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vijaya, Ekadashi, 2026:, शत्रु, पर, जीत, दिलाने, वाला, विजया, एकादशी, व्रत, फरवरी, को, ऐसे, प्रसन्न, होंगे, विष्णु, जी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>भानु सप्तमी 2026: सूर्य देव की कृपा पाने का दुर्लभ अवसर! शुभ मुहूर्त, महत्व और अनुष्ठान जानें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5160</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5160</guid>
<description><![CDATA[ Bhanu Saptami 2026: भानु सप्तमी 2026 भगवान सूर्य की पूजा को समर्पित एक खास दिन है. यदि हिंदू पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष का सातवां दिन रविवार के साथ मेल खाता है, तो यह दिन भानु सप्तमी का होता है. अमांत चंद्र पंचांग के मुताबिक, भानु सप्तमी 8 फरवरी 2026, रविवार के दिन पड़ती है. धार्मिक नजरिए से यह बेहद ही खास दिन है क्योंकि रविवार को सूर्य देव की पूजा के लिए उपयुक्त दिन होता है.&amp;nbsp;
इस पवित्र दिन भक्त उपवास रखने के साथ पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और सूर्य देव को विशेष अर्पण करते हैं. माना जाता है कि, इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से न केवल अच्छी सेहत, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि मन शुद्ध होने के साथ आध्यात्मिक आभा में भी निखार आता ह.&amp;nbsp;
Rose Day 2026: प्रेम, भक्ति और अकीदत से जुड़ा है गुलाब, देवता से लेकर दरगाह तक...
भानु सप्तमी 2026 के मौके पर भगवान सूर्य की पूजा करने के लिए तिथि, समय, शुभ मुहूर्त, महत्व और अनुष्ठानों के बारे में जानिए?
भानु सप्तमी 2026 तिथि और समय

भानु सप्तमी 2026 तिथि 8 फरवरी 2026, रविवार
सप्तमी तिथि समाप्त 05.43 अपराह्न, 8 फरवरी 2026
सू्र्यादय सुबह 7.06 बजे, 8 फरवरी 2026
सूर्यास्त शाम 5.55 बजे, 8 फरवरी 2026

भानु सप्तमी 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5.21 बजे से सुबह 6.31 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.13 बजे से 12.57 बजे तक&amp;nbsp;
अमृत काल शाम 07.18 बजे से रात 09.04 बजे तक&amp;nbsp;
रवि योग सुबह 7.05 से 5.02 बजे तक, 9 फरवरी 2026

भानु सप्तमी 2026 महत्व
भानु सप्तमी का दिन सू्र्य देव की पूजा के लिए अत्यंत पवित्र दिन है, जिन्हें जीवन में प्रकाश और चेतना का प्रतीक माना जाता है. इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होने के साथ सफलता के मार्ग खुलते हैं. इसके अलावा इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से पिछले पापों से मु्क्ति मिलने के साथ व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलने में सक्षम होता है.
Valentine Week Rashifal 2026: वैलेंटाइन वीक शुरू, रोज डे से वैलेंटाइन डे तक, जानें कौन सी राशि जीतेगी प्यार की बाजी
भानु सप्तमी 2026 भगवान सूर्य की पूजा के लिए खास अनुष्ठान
भानु सप्तमी के दिन भक्त सूर्योदय से पहले उठकर नहाते हैं. स्नान के पानी में गंगाजल या तिल मिलाना इस दिन धार्मिक नजरिए से शुभ माना जाता है. स्नान के बाद भक्तों को एक तांबे के पात्र में लाल फूलों के साथ चुटकी भर सिंदूर मिले पानी को सूर्य देव को अर्पित करना चाहिए. अर्घ्य अर्पित करते समय गायत्री मंत्र या अन्य सूर्य मंत्रों का जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है.&amp;nbsp;
इस दिन मात्र फल या दूध का सेवन करके उपवास रखना चाहिए. आदित्य हृदयम स्तोत्रम का पाठ करना और सूर्य नमस्कार करना सूर्य देव का आशीर्वाद प्रदान करता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/07/f06ec6a154be9f657c320206784b06e017704385007961092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>भानु, सप्तमी, 2026:, सूर्य, देव, की, कृपा, पाने, का, दुर्लभ, अवसर, शुभ, मुहूर्त, महत्व, और, अनुष्ठान, जानें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>दुनिया का सबसे धार्मिक देश कौन? भारत है टॉप 5 में, पर नंबर 1 पर कौन? देखें लिस्ट</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5159</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5159</guid>
<description><![CDATA[ कोई भी देश कितना धार्मिक हो सकता है? क्या किसी देश की पूरी आबादी धर्म के प्रति दृढ़ता से समर्पित हो सकती है? इस सवाल का जबाव जानने के लिए, एक विश्व स्तर पर सर्वेक्षण किया गया ताकि यह समझा जा सकें कि, लोग धर्म से सबसे ज्यादा जुड़ाव कहां महसूस करते हैं.&amp;nbsp;
बांके बिहारी और प्रेम मंदिर तो सब जाते हैं, लेकिन ये 5 मंदिर वृंदावन की असली आत्मा हैं!
इसके सर्वेक्षण का जो परिणाम सामने आया वो कई लोगों को हैरान कर सकता है. भारत शीर्ष 5 देशों में तो शामिल हैं, लेकिन लिस्ट में पहले स्थान पर नहीं है. इसके बजाए भारत के समीप एक देश विश्व का सबसे धार्मिक देश बनकर उभरा है.&amp;nbsp;
U.S News की सर्वे रिपोर्ट
यूएस न्यूज द्वारा दुनियाभर में करीब 17 हजार लोगों के बीच किए गए एक सर्वेक्षण के मुताबिक, सऊदी अरब सबसे ज्यादा धार्मिक देश के रूप में बनकर &amp;nbsp;उभरा है.
ये नतीजे 2024 के बेस्ट कंट्रीज रैंकिंग से लिए गए हैं, जिसे WWP और यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिवेनिया के व्हार्टन स्कूल के बीच मिलकर की गई एक अध्ययन से इकट्ठा किया गया है.&amp;nbsp;
दुनिया के 10 सबसे धार्मिक देश
सऊदी अरब&amp;nbsp;कुल जनसंख्या 36 मिलियन
इजराइल&amp;nbsp;कुल जनसंख्या 10 मिलियन
ईरान&amp;nbsp;कुल जनसंख्या 92-93 मिलियन
भारतकुल जनसंख्या 1.4 बिलियन
संयुक्त अरब अमीरातकुल जनसंख्या 10.9-11 मिलियन
मिस्त्र&amp;nbsp;कुल जनसंख्या 119 - 120 मिलियन
कतर&amp;nbsp;कुल जनसंख्या 3.15-3.17 मिलियन
जॉर्डन&amp;nbsp;कुल जनसंख्या 11.6 -11.7 मिलियन
तुर्की&amp;nbsp;कुल जनसंख्या 87.8-87.9 मिलियन
ओमान&amp;nbsp;कुल जनसंख्या 5.6 मिलियन
खास बात ये है कि, इस सूची में कोई भी अमेरिका या यूरोपीय देश शामिल नहीं है. भारत और इजराइल के अलावा सर्वश्रेष्ठ 10 में को दूसरा गैर-मुस्लिम बहुमत वाला देश भी नहीं है.&amp;nbsp;
ये नतीजे एख बड़े वैश्विक ट्रेंड को दर्शाते हैं. जबकि 21वीं सदी में कई पश्चिमी समाज खुद को तेडी से सेक्युलर या गैर-धार्मिक के तौर पर पहचान प्राप्त कर रहे हैं, दक्षिण एशिया और मिडिल ईस्ट के देशों में आस्था और धार्मिक पहचान से मजबूत रिश्ते स्पष्ट दिखते हैं.&amp;nbsp;
सर्वे से पता चला कि, इन इलाकों में धर्म रोजमर्रा के जीवन की और कल्चर का अहम हिस्सा बन चुकी है, जो पश्चिमी दुनिया के अधिकतर हिस्सों की तुलना में पब्लिक लाइफ, परंपराओं और निजी विश्वासों से कहीं ज्यादा प्रभावित करता है.&amp;nbsp;
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/07/bda1ba7f90837950c0b8e788bda6a70f17704440167091092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 07 Feb 2026 16:13:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>दुनिया, का, सबसे, धार्मिक, देश, कौन, भारत, है, टॉप, में, पर, नंबर, पर, कौन, देखें, लिस्ट</media:keywords>
</item>

<item>
<title>बजट से पहले राष्ट्रपति का &amp;apos;दही&#45;चीनी&amp;apos; शगुन क्या है इसका रहस्य? जानें आर्थिक भविष्य पर असर!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5105</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5105</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/01/d34b44308bfc34fc8a7b5e138b32a4b817699241813351092_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>बजट, से, पहले, राष्ट्रपति, का, दही-चीनी, शगुन, क्या, है, इसका, रहस्य, जानें, आर्थिक, भविष्य, पर, असर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा, वह तिथि जिस दिन से आरंभ हुआ कलयुग काल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5106</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5106</guid>
<description><![CDATA[ Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म और विशेषकर धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व रखता है. पौराणिक ग्रंथों में माघ पूर्णिमा से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं. साथ ही माघ पूर्णिमा से जुड़ी कई मान्यताएं भी हैं. मान्यता है कि, इस तिथि पर देवतागण भी रूप बदलकर प्रयाग स्नान के लिए आते हैं, कल्पवास का समापन होता है, साधु-संत स्नान आदि करते हैं और श्रद्धालु पूजा-पाठ व व्रत करते हैं.
आज देशभर में माघ पूर्णिमा मनाई जा रही है. श्रद्धालुओं ने स्नान-दान के बाद व्रत का संकल्प लिया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माघ पूर्णिमा के दिन चंद्रमा ता भी अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होते हैं. इस विशेषताओं के साथ ही माघ पूर्णिमा से जुड़ी एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता भी है, जोकि इस तिथि को और खास बनाती है. मान्यता है कि, माघ पूर्णिमा के दिन से ही कलयुग की शुरुआत हुई थी.
माघ पूर्णिमा से कलयुग की शुरुआत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा से कलियुग का आरंभ माना जाता है. इस दिन विधिपूर्वक किया गया स्नान मनुष्य को नर्कगमन से मुक्ति प्रदान करता है. वहीं दान, व्रत और जप के पुण्य फल से साधक भवसागर को पार कर विष्णु धाम को प्राप्त करता है. हालांकि माघ पूर्णिमा को लेकर विभिन्न तरह की मान्यताएं हैं. पुराणों में जैसे विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, कलियुग का आरंभ उस क्षण से माना जाता है, जब भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला समाप्त कर वैकुंठ गमन किया था, जिसे 17 या 18 फरवरी 3102 ईसा पूर्व की माघ पूर्णिमा माना जाता है. इस समय को द्वापर युग का अंत और कलयुग का आरंभ माना जाता है.
कलयुग की कुल अवधि
बता दें कि, कलयुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष मानी गई है, जिसमें वर्ष 2026 तक कलियुग के लगभग 5,127 वर्ष बीत चुके हैं. शास्त्रों में कलयुग अधर्म, अन्याय, पाप और अनैतिकता में वृद्धि की बात कही गई है. साथ ही कलयुग के अंत में भगवान विष्णु के कल्कि अवतार (Kalki Avatar) का भी वर्णन मिलता है, जोकि भगवान का आखिरी अवतार होगा. यह अवतार अन्याय का विनाश और धर्म की स्थापना के लिए होगा.


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/01/9e6498d753f2ddafb9621a6bb550563d1769919903630466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Purnima, 2026:, माघ, पूर्णिमा, वह, तिथि, जिस, दिन, से, आरंभ, हुआ, कलयुग, काल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Budget 2026: लाल ब्रीफकेस से बजट में निकली बौद्ध सर्किट के लिए खास योजना, सरकार का मंदिर&#45;मठों को बचाने पर जोर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5103</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5103</guid>
<description><![CDATA[ Buddha Circuit Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को बजट पेश किया. बजट से कई क्षेत्रों को उम्मीदें रहती हैं. इन्हीं में धार्मिक व सांस्कृतिक क्षेत्र भी एक है. इस साल का बजट 2026 अन्य सेक्टर्स के साथ ही धर्म, आस्था, संस्कृति और धार्मिक पर्यटनों से भी जुड़ा रहा. वित्त मंत्री के लाल ब्रीफकेस से बौद्ध सर्किट के लिए भी बड़ी घोषणा की गई. सरकार ने मंदिर और मठों को बचाने पर खास जोर दिया.
बौद्ध सर्किट कॉरिडोर (Buddhist Circuit Corridoror)
इस साल के बजट में पर्यटन पर सरकार का खास फोकस रहा. संसद में बजट भाषण के दौरान निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने पूर्वोत्तर के पांच राज्यों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कॉरिडोर का ऐलान किया, जिसका नाम बौद्ध सर्किट रखा गया है. ये सभी पूर्वोत्तर के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा मे बनेंगे. इस कॉरिडोर की योजना के तहत मंदिर और मठों के संरक्षण के लिए भी कदम उठाया जाएगा. इस योजना से तीर्थयात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी कार्य किया जाएगा.
बजट 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि-&amp;lsquo;सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र बौद्ध सर्किट के विकास के लिए योजना शुरू करेगी, जिससे कि मंदिर और मठों का संरक्षण किया जा सके. इसके लिए पूर्वोत्तर के इन राज्यों में पर्यटन स्थलों का भी विकास करेगी, जिसके लिए चार हजार ई-बसों की व्यवस्था की जाएगी.&amp;rsquo;
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने कहा कि, जब सरकार धर्म और आस्था का सम्मान करती है और इसके विकास को बढ़ाना देने के लिए हर संभव प्रयास करती है, तो इससे देश में शांति, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. बौद्ध सर्किट का विकास और मंदिर-मठों का संरक्षण भी इसी संतुलन का शुभ संकेत है. पूर्वोत्तर के कई राज्यों में ऐतिहासिक मठ और अन्य बौद्ध स्थल मौजूद हैं.
ये भी पढ़ें: Budget 2026 Stock Market: बजट के बाद धड़ाम से गिरा शेयर बाजार, अचानक उतार-चढ़ाव के लिए कौन से ग्रह जिम्मेदार



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/01/d554b7c01b9a9c6fbcc3ef4c7789992d1769935882226466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Budget, 2026:, लाल, ब्रीफकेस, से, बजट, में, निकली, बौद्ध, सर्किट, के, लिए, खास, योजना, सरकार, का, मंदिर-मठों, को, बचाने, पर, जोर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>February 2026 Tyohar: माघ पूर्णिमा से फरवरी मास शुरू, महाशिवरात्रि, एकादशी, होलाष्टक पड़ेंगे ये खास पर्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5104</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5104</guid>
<description><![CDATA[ February 2026 Vrat Tyohar: फरवरी 2026 के महीने में पड़ने वाले व्रत त्योहार की सूचि तैयार है, जिसे देख आप पूरे महीने का पड़ने वाले व्रत-त्योहार और महत्वपूर्ण तिथियों की प्लानिंग कर सकते हैं. माघ पूर्णिमा के साथ फरवरी महीने की शुरुआत हुई है. इसके साथ ही इस माह महाशिवरात्रि, विजया एकादशी, आमलकी एकादशी आदि से कई पर्व पड़ेंगे होलाष्टक भी फरवरी में ही शुरुआत हो जाएगा. इसलिए यह माह बहुत ही पवित्र है. साथ ही अध्यात्मिक दृष्टी से देखा जाए तो फरवरी का महीना बहुत पुण्यदायी भी रहेगा, क्योंकि दान,पुण्य के लिए उत्तम माना जाएगा. जानें ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्र से फरवरी 2026 में पड़ने वाले प्रमुख व्रत त्योहार की सूची.
माघ पूर्णिमा व्रत (1 फरवरी)
01 फरवरी 2026 दिन रविवार को माघ पूर्णिमा है. माघ पूर्णिमा धार्मिक दृष्टी से अलग महत्व है, स्नान पर्वो का यह अंतिम प्रतीक है. इस दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है. इस तिथि की मुख्यता है इस गंगा स्नान करने से मनुष्य की सभी तरह के बाधा दूर होती है.
फाल्गुन माह कब आरंभ (2 फरवरी)
02 फरवरी 2026 दिन सोमवार को फाल्गुन मास का आरम्भ होगा. यह महीना प्रेम, उत्साह तथा रंगोत्सव का प्रतीक है. इस महीने नकारात्मक शक्ति को समाप्त करने का संदेश देता है.
संकष्टी चतुर्थी (5 फऱवरी 2026)
संकष्टी चतुर्थी, 05 फरवरी 2026 दिन गुरुवार को मनाया जायेगा. भगवान गणेश की पूजन करने का सबसे उत्तम दिन माना जाता है. इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की सभी संशय समाप्त होता है. परिवार में सुख संपति तथा वैभव की प्राप्ति होता है. दिनभर उपवास रहकर चन्द्र दर्शन तथा अर्घ्य दिया जाता है, फिर भगवान गणेश का पूजन करके व्रत तोड़ा जाता है. गणेश का पूजन करने से संतान की प्राप्ति होता है.
भानु सप्तमी और सबरी जयंती (8 फरवरी 2026)
भानु सप्तमी तथा सबरी जयंती यह त्योहार 08 फरवरी 2026 दिन रविवार को मनाया जायेगा. भानु सप्तमी भगवान सूर्यदेव की पूजा तथा उपासना का दिन माना जाता है. भानु सप्तमी को भगवान सूर्य को तांबे के लोटे में जल देने देने से, व्यक्ति निरोग रहता है,साथ ही दीर्घायु होते है,इस दिन भगवान श्री कृष्ण की माता यशोदा की जयंती मनाई जाती है. मातृत्व प्रेम तथा भक्ति एवं शक्ति का विशेष दिन माना जाता है.
जानकी जयंती तथा कालाष्टमी व्रत (9 फरवरी 2026)
09 फरवरी 2026 दिन सोमवार को मासिक कालाष्टमी तथा जानकी जयंती मनाया जाएगा. जानकी और मासिक अष्टमी एक साथ पड़ने के कारण इस व्रत के प्रभाव में वृद्धि होगी. भगवान श्री कृष्ण के साथ मां भगवती का पूजा की जाएगी.
&amp;nbsp;विजय एकादशी (13 फरवरी 2026)
विजय एकादशी 13 फरवरी 2026, दिन शुक्रवार यह व्रत फाल्गुन कृष्ण पक्ष एकादशी को किया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु का पूजन करने से अत्यंत पुण्य का प्राप्ति होता है. विष्णु के पूजन में धुप ,दीप , नैवेद ,नारियल आदि चढ़ाया जाता है. इस व्रत के प्रभाव से कष्ट दूर होता है सभी कार्य में उन्नति होती है व्रत की कथा राम की लंका विजय से जुड़ा है.
कुंभ संक्रांति (13 फरवरी 2026)
13 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार को कुंभ संक्रांति है. इस दिन सूर्य कुम्भ राशि में गोचर करेंगे. संक्रांति का अर्थ होता है सूर्य जब राशि परिवर्तन करे उसे संक्रांति कहा जाता है,कुम्भ राशि शनि की राशि है. शनि की राशि में सूर्य का गोचर करना अनुकूल नहीं माना जाता है. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य शनि के राशि में गोचर करते है अनुकूल नहीं माना जाता है. इस दिन काला तिल, काला उड़द दान करने से शनि के प्रभाव समाप्त करने का उत्तम दिन होता है.
प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष (14 फरवरी)
प्रदोष व्रत 14 फरवरी 2026 दिन शनिवार को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा. भगवान शंकर के सबसे प्रिय व्रत है इस दिन भगवान कैलाश पर संध्या काल में तांडव करते है. पंचांग के अनुसार महीने में दो बार प्रदोष मनाया जाता है एक शुक्ल पक्ष तथा दूसरा कृष्ण पक्ष. प्रदोष व्रत विशेषकर दीर्घायु के लिए किया जाता है. इनके पूजन से भगवान शिव प्रसन्न होकर सभी मनोकामना पूर्ण करते है. शनिवार को प्रदोष पड़ने के कारण व्रत का प्रभाव में वृद्धि होता है.
महाशिवरात्रि (15 फरवरी)
मासिक शिवरात्रि 15 फरवरी 2026 दिन रविवार को यह व्रत मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. इस दिन शिव मंदिर में विशेष तौर पर पूजा पाठ किया जाया है. भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए विधि विधान से पूजा तथा अभिषेक करते है. भगवान शंकर को बेलपत्र तथा जल एवं दूध से पूजन तथा अभिषेक&amp;nbsp;करते है. चंद्रमा से सम्बंधित दोष दूर करने के लिए पूजा पाठ किया जाता है.
फाल्गुन अमावस्या&amp;nbsp;(17 फरवरी)
17 फरवरी 2026 दिन मंगलवार को फाल्गुन अमावस्या का व्रत है. पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष के अमावस्या को फाल्गुन अमावस्या कहा जाता है. पितृ दोष के दूर करने के लिए उत्तम माना जाता है. इस दिन को दर्श अमावस्या के नाम से जाना जाता है,पितृ पूजन तथा तर्पण के लिए उत्तम दिन माना जाता है.
होलाष्टक (24 फरवरी 2026)&amp;nbsp;
24 फरवरी 2026 दिन मंगलवार से होलाष्टक आरम्भ होगा. होलाष्टक में नया कार्य नहीं किया जाता है. विशेषकर विवाह आदि शुभ कार्य नहीं किया जाता है.
आमलकी एकादशी&amp;nbsp;(27 फरवरी)
आमलकी एकादशी का व्रत फाल्गुन शुक्लपक्ष एकादशी को किया जाता है. आंवले के वृक्ष में भगवान का निवास होने के कारण इस दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है इसे&amp;nbsp;रंगभरी एकादशी भी कहते है.


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/01/3078e7ff6eaf1dbd534c29e4cf19844d1769927056284466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>February, 2026, Tyohar:, माघ, पूर्णिमा, से, फरवरी, मास, शुरू, महाशिवरात्रि, एकादशी, होलाष्टक, पड़ेंगे, ये, खास, पर्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा के पुण्यफल का आखिरी मौका न छोड़े, शाम होते ही इन जगहों पर जलाएं दीपक</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5101</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5101</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/01/6117df1b6e86a22b12890db205d44c391769944497209466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Purnima, 2026:, माघ, पूर्णिमा, के, पुण्यफल, का, आखिरी, मौका, न, छोड़े, शाम, होते, ही, इन, जगहों, पर, जलाएं, दीपक</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Snow Moon 2026: माघ पूर्णिमा की रात आसमान में देखें स्नो मून, जानें आज के चांद का रोचक इतिहास</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5102</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5102</guid>
<description><![CDATA[ Snow Moon February 2026: माघ पूर्णिमा या फरवरी महीने की पूर्णिमा स्नान, दान, व्रत, तप और कल्वास की समाप्ति के लिए विशेष महत्व रखती है. लेकिन इसी के साथ यह पूर्णिमा खगोल शास्त्र और चांद-सितारों को देखने में दिलचस्पी रखने वालों के लिए भी खास होती है. आज 1 फरवरी की शाम इन लोगों के बेहद महत्वपूर्ण रहेगी, क्योंकि आज आसमान में दुर्लभ और अधिक चमकीले चांद को देखा जाएगा, जिसे स्नो मून कहा जाता है.
स्नो मून को कब देख सकते हैं (Snow Moon 2026 Timing)
खगोलप्रेमी आकाश में होने वाली हरेक गतिविधि के लिए काफी उत्सुक रहते हैं. स्नो मून के लिए भी इन्हें कुछ ऐसी ही उत्सुकता रहती है. आज का चमकीला सफेद नजर आता है. माघ पूर्णिमा पर यानी 1 फरवरी 2026 को स्नो मून पूर्वी समयानुसार शाम करीब 5 बजकर 9 मिनट पर अपनी अधिकतम चमक पर पहुंचेगा. आप सूर्यास्त होने के बाद पूर्व दिशा की ओर क्षितिज पर उगते हुए इस चंद्रमा को देख सकते हैं. आज का चांद अन्य दिनों की अपेक्षा वास्तिवक आकार में बड़ा और अधिक चमकीला होता है. स्नो मून को आप बिना किसी उपकरण के नंगी आंखों से भी देख सकते हैं, बशर्ते मौसम हो. शहर से दूर और प्रदूषण मुक्त वातावरण स्नो मून और भी अधिक आकर्षक दिखाई देता है.
स्नो मून नाम का रहस्य
फरवरी के चांद को स्नो मून का नाम सदियों पहले दिया गया, जिसका बेहद रोचक इतिहास भी है. हालांकि इसे हंगर मून या स्टॉर्म मून के नाम से भी जाना जाता है. &amp;lsquo;द ओल्ड फार्मर्स अल्मनैक&amp;rsquo; में 1760 के दशक में इसका जिक्र मिलता है. वर्षों पुरानी लोक-परंपराओं के अनुसार, फरवरी में उत्तरी अमेरिका में भारी बर्फबारी होती थी. इसलिए लोगों ने फरवरी के चांद को स्नो मून का नाम दे दिया. प्राचीन समय में लोगों मौसम और प्रकृति से जोड़कर चंद्रमा को नाम देना शुरू किया था, जिसमें फरवरी के चांद को स्नो मून का नाम दिया गया और इसी तरह हर महीने की पूर्णिमा के अलग-अलग नाम रखे गए, जैसे वुल्फ मून, हार्वेस्ट मून, स्ट्रोबेरी मून कोल्ड मून आदि.


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/01/c86e4b34f515763ea5caa4821251df911769939624826466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Snow, Moon, 2026:, माघ, पूर्णिमा, की, रात, आसमान, में, देखें, स्नो, मून, जानें, आज, के, चांद, का, रोचक, इतिहास</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 2 फरवरी से फाल्गुन शुरू, आज का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5099</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5099</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 2 फरवरी 2026: आज 2 फरवरी 2026 से फाल्गुन माह शुरू हो रहा है. ये आनंद और उत्सव का महीना है. इस महीने में श्रीकृष्ण, शिव जी और चंद्र देव की विशेष पूजा करने वालों के तमाम कष्ट दूर होते हैं जिंदगी में खुशियों की बहार आती है. फाल्गुन में ही होली, महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है.&amp;nbsp;
2 फरवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 2 February 2026)



तिथि

प्रतिपदा (2 फरवरी 2026, सुबह 2.38 - 3 फरवरी 2026, सुबह 1.52)



वार
सोमवार&amp;nbsp;


नक्षत्र
अश्लेषा


योग
आयुष्मान, सौभाग्य


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
शाम 6.33


चंद्रोस्त
सुबह 7.27


चंद्र राशि
सिंह



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


अमृत
सुबह 7.09 - सुबह 8.30


शुभ
सुबह 9.52 - सुबह 11.13


शाम का चौघड़िया


चर
शाम 6.00 - रात 7.39



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 8.30 - सुबह 9.52


यमगण्ड काल
सुबह 11.13 - दोपहर 12.35


गुलिक काल
दोपहर 1.56 - दोपहर 3.18


आडल योग
सुबह 10.47 - सुबह 7.08, 3 फरवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 2 February 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
कर्क


मंगल
मकर


बुध
मकर


गुरु
मिथुन


शुक्र
मकर


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



वृश्चिक राशि
घर के रखरखाव और नवीनीकरण के कारण खर्च बढ़ेंगे, लेकिन आय के रास्ते भी खुलेंगे, इसलिए चिंता नहीं रहेगी.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



सिंह राशि
विपरीत परिस्थिति में कुछ नकारात्मक विचार आ सकते हैं, लेकिन आप जल्दी ही संभल जाएंगे। व



FAQs: 2 फरवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




केवड़े के सुगंधित फूल से बना इत्र स्नान के जल में मिलाकर स्नान करें और उसी इत्र को श्रद्धा भाव से भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें. मान्यता है इससे श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और जीवन में लव मैरिज से जुड़ी समस्याएं खत्म होती हैंं.




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन आयुष्मान योग, सौभाग्य योग बन रहे हैं.
Premanand Maharaj: मुझे भूतों का राजा बनना है...प्रेमानंद महाराज से पूछा अजीब सवाल तो मिला ये जवाब




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/02/ebd206b083ca2c54c43eda6effc11c061769972979654499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, फरवरी, से, फाल्गुन, शुरू, आज, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>हर घर में लक्ष्मी जी पधारें... बजट पर पीएम मोदी ने किया हिंदू देवी मां लक्ष्मी का जिक्र</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5100</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5100</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/01/a140965779ee0dda4e8ee557b930e75b1769966346308466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>हर, घर, में, लक्ष्मी, जी, पधारें..., बजट, पर, पीएम, मोदी, ने, किया, हिंदू, देवी, मां, लक्ष्मी, का, जिक्र</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Mela 2026: माघ खत्म लेकिन माघ मेला नहीं, आप भी हैं कंफ्यूज तो जानें अंतिम स्नान की तिथि और समय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5098</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5098</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/01/8068faa82957898702559e673d7210111769951496600466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Mela, 2026:, माघ, खत्म, लेकिन, माघ, मेला, नहीं, आप, भी, हैं, कंफ्यूज, तो, जानें, अंतिम, स्नान, की, तिथि, और, समय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Falgun Maas 2026: फाल्गुन मास आज से शुरू, जानिए हिंदू कैलेंडर के आखिरी महीने का धार्मिक महत्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5097</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5097</guid>
<description><![CDATA[ Falgun Maas 2026: पंचांग के मुताबिक, आज सोमवार 2 फरवरी 2026 से फाल्गुन (फागुन) महीने का आरंभ हो चुका है. फाल्गुन भले ही हिंदू कैलेंडर के मुताबिक वर्ष का आखिरी मास होता है, लेकिन यह महीना जीवन में परिवर्तन, शुद्धि, संयम और नए आरंभ का संकेत देता है. धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी फाल्गुन को बेहद खास माना जाता है.
आनंद और उत्सव का माह फाल्गुन
फाल्गुन महीने में कई महत्वपूर्ण पर्व-त्योहारों की झड़ी लगती है. इसी महीने शिव-पार्वती के दिव्य मिलन का पर्व महाशिवरात्रि मनाई जाती है. रंगोत्सव का पर्व होली भी इसी महीने होती है, साथ ही फाल्गुन महीने में किए व्रत, पूजा, जप, तप आदि का लाभ भी मिलता है. शास्त्रों में फाल्गुन को आनंद और उत्सव का महीना कहा गया है. इसलिए साधकों को इस माह सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए और संयम से रहना चाहिए.
शिव और कृष्ण को समर्पित है फाल्गुन
हिंदू धर्म का प्रत्येक माह किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है. फाल्गुन का महीना विशेषरूप से भगवान शिव और श्रीकृष्ण की पूजा के लिए समर्पित है. इसका कारण यह है कि, फाल्गुन महीने में शिव उपासना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि पड़ती है. साथ ही फाल्गुन श्रीकृष्ण और राधारानी की लीलाओं से जुड़ा मास भी है. वृंदावन से लेकर बरसाना और मथुरा में इसी महीने उत्सव और फाग गीतों की परंपरा है.
फाल्गुन में क्या करें
दान- इस माह गरीबों में अन्न, वस्त्र और रंगों का दान करना चाहिए. फाल्गुन में किए दान से ग्रह दोष दूर होता है और पुण्य प्राप्ति होती है.
सेवा- फाल्गुन माह में सेवा भाव अपनाएं. गरीबों को भोजन कराएं और ब्राह्मण व साधुओं की सेवा करें.
नियमित पूजा- फाल्गुन में नियमित रूप से पूजा-पाठ का संकल्प लें. इस माह शिवलिंग का अभिषेक, महामृत्युजंय जाप और श्रीकृष्ण की पूजा का लाभ मिलता है.
सात्विकता- फाल्गुन में सात्विकता अपनाते हुए मांसाहार से परहेज करें. साथ ही नियमित स्नान, ध्यान, योग और साधना करें. इन कार्यों से आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का विकास होगा.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/02/01/77d87ce9b45e01dc62133f3bd244e2281769952851914466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 02 Feb 2026 14:01:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Falgun, Maas, 2026:, फाल्गुन, मास, आज, से, शुरू, जानिए, हिंदू, कैलेंडर, के, आखिरी, महीने, का, धार्मिक, महत्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Dhanu Weekly Horoscope 2026: फरवरी का यह सप्ताह बदलेगा धनु राशि की तस्वीर, नई नौकरी का बड़ा मौका</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5045</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5045</guid>
<description><![CDATA[ Dhanu Weekly Horoscope 2026 (1 to 7 February): फरवरी 2026 महीने का पहला सप्ताह 1 से 7 फरवरी का समय धनु राशि के करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व प्रेम जीवन और सेहत आदि के लिए यह सप्ताह कैसा रहेगा. धनु राशि वाले ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानें अपना भविष्यफल,&amp;nbsp;यहां पढ़ें अपना पूरा साप्ताहिक राशिफल.
धनु साप्ताहिक राशिफल
करियर-कारोबार
धनु राशि के जातक इस सप्ताह बड़ी सोच के साथ काम करने का प्रयास करेंगे. यदि आप लंबे समय से अपने करियर-कारोबार को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने की सोच रहे थे तो वह इस सप्ताह हो सकता है. नौकरीपेशा लोगों को मनचाहे संस्थान से बड़े पद और कद के साथ बुलावा आ सकता है. अतिरिक्त आय के नये स्रोत बनेंगे. सप्ताह के मध्य में प्रभावी लोगों से मेल-मुलाकात होगी. बेरोजगार लोगों को रोजी-रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे.
आर्थिक राशिफल
भूमि-भवन एवं वाहन का सुख प्राप्त होगा. सप्ताह के मध्य में आप अपनी सुख-सुविधा से जुड़ी चीज पर बड़ी धनराशि खर्च कर सकते हैं. परीक्षा-प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे छात्रों के लिए यह सप्ताह सकारात्मक फल देने वाला साबित होगा. विद्यार्थियों को अध्ययन में सफलता प्राप्त होगी. उच्च शिक्षा के प्रयास सफल होंगे.
व्यापार
सप्ताह के उत्तरार्ध में व्यापार करने वाले लोगों के व्यवसाय में उन्नति और लाभ में वृद्धि होगी. रिश्ते-नाते की दृष्टि से यह सप्ताह आपके लिए सामान्य रहने वाला है. इस सप्ताह किसी प्रिय व्यक्ति के घर में आने से खुशियों का माहौल बना रहेगा.
प्रेम और वैवाहिक जीवन
प्रेम संबंध में परस्पर सहयोग बना रहेगा. प्रेमी के साथ अच्छा समय बिताएंगे और ट्यूनिंग मजबूत होगी. संतान पक्ष की ओर से सुखद समाचार मिलने से खुशियों बढ़ेंगी. वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहेगा.
धनु राशि के लिए उपाय- विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें.
ये भी पढ़ें: Vrishchik Weekly Horoscope 2026: वृश्चिक राशि वालों को मिल सकता है कोई सुखद समाचार, पढ़ें वीकली राशिफल

Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/f885ed068e0668a240ad0afd4afbd1b11769795961504466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Dhanu, Weekly, Horoscope, 2026:, फरवरी, का, यह, सप्ताह, बदलेगा, धनु, राशि, की, तस्वीर, नई, नौकरी, का, बड़ा, मौका</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Vrishchik Weekly Horoscope 2026: वृश्चिक राशि वालों को मिल सकता है कोई सुखद समाचार, पढ़ें वीकली राशिफल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5046</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5046</guid>
<description><![CDATA[ Vrishchik Weekly Horoscope 2026 (1 to 7 February): फरवरी 2026 महीने का पहला सप्ताह 1 से 7 फरवरी का समय वृश्चिक राशि के करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व प्रेम जीवन और सेहत आदि के लिए यह सप्ताह कैसा रहेगा. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से वृश्चिक राशि वाले जानें अपना भविष्यफल, यहां पढ़ें पूरा साप्ताहिक राशिफल.
वृश्चिक साप्ताहिक राशिफल
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह भले ही थोड़ी ज्यादा ही भागदौड़ वाला रहने वाला है, लेकिन अंतत: आपको आपके परिश्रम का पूरा फल प्राप्त होगा. कहने का तात्पर्य यह है कि कुछ बाधाओं और दिक्कतों के बावजूद यह हफ्ता आपके करियर-कारोबार में लाभ एवं उन्नतिकारक रहेगा. सप्ताह की शुरुआत में आपको कारोबार के सिलसिले में लंबी अथवा छोटी दूरी की यात्रा करनी पड़ सकती है.
इस दौरान आपको बाजार में अपने कंपटीटर से कड़ा मुकाबला करना पड़ेगा. हालांकि सप्ताह के मध्य तक चीजें आपके कंट्रोल में होंगी और सप्ताह के अंत तक आप मनचाहा मुनाफा कमाने में कामयाब होंगे. यदि आप लंबे समय से किसी नये प्रोजेक्ट की शुरुआत करने के लिए प्रयासरत थे तो इस सप्ताह के अंत तक आपकी यह इच्छा पूरी हो सकती है. इस सप्ताह आपकी सेहत सामान्य रहेगी.
सप्ताह के उत्तरार्ध में घर में मांगलिक कार्य, उत्सव आदि हो सकते हैं. इस दौरान आपको इष्ट मित्रों से भरपूर सहयोग प्राप्त होने की संभावना है. प्रेम संबंध में अनुकूलता बनी रहेगी. लव पार्टनर की तरफ से कोई सुखद समाचार मिल सकता है. परिजन आपके विवाह के लिए राजी हो सकते हैं. दांपत्य जीवन सुखमय बना रहेगा। पति-पत्नी के बीच अच्छा तालमेल देखने को मिलेगा.
वृश्चिक राशि के लिए उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें.
ये भी पढ़ें: Tula Weekly Horoscope 2026: पार्टनर के साथ तुला राशि की बढ़ेगी ट्यूनिंग, पढ़ें साप्ताहिक राशिफल







Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;






 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/6f6f4b0e9572138350bcc2a85ace47a01769794996090466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Vrishchik, Weekly, Horoscope, 2026:, वृश्चिक, राशि, वालों, को, मिल, सकता, है, कोई, सुखद, समाचार, पढ़ें, वीकली, राशिफल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kumbh Weekly Horoscope 2026: कुंभ राशि वालों को रहना होगा अलर्ट, विरोधी बिगाड़ सकते हैं काम</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5043</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5043</guid>
<description><![CDATA[ Kumbh Weekly Horoscope 2026 (1 to 7 February): फरवरी 2026 महीने का पहला सप्ताह 1 से 7 फरवरी का समय कुंभ राशि के करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व प्रेम जीवन और सेहत आदि के लिए यह सप्ताह कैसा रहेगा. कुंभ राशि वाले ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानें अपना भविष्यफल, यहां पढ़ें पूरा साप्ताहिक राशिफल.
कुंभ साप्ताहिक राशि
कुंभ राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह मिश्रित फलदायी रहने वाला है. सप्ताह की शुरुआत लंबी अथवा छोटी दूरी की यात्रा के साथ होगी. इस दौरान कुंभ राशि के जातकों को अपने समय का सदुपयोग करते कामकाज के प्रति जागरूक रहने की बहुत ज्यादा आवश्यकता रहेगी.
इस दौरान कार्यक्षेत्र में अपने विरोधियों से सतर्क रहें अन्यथा वे आपके बने-बनाए काम को बिगाड़ कर आपकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की साजिश रच सकते हैं. सप्ताह के मध्य का समय व्यवसाय की दृष्टि से शुभता और लाभ लिए रहेगा. इस दौरान आपको कारोबार में मनचाहा लाभ होगा, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा लेकिन सप्ताह के उत्तरार्ध में एक बार फिर कारोबार डगमगा सकता है.
इस दौरान आय के मुकाबले खर्च की अधिकता रहेगी. यदि कोई मामला कोर्ट-कचहरी में चल रहा है तो वह लंबा खिंच सकता है. मनचाहे फैसला के लिए आपको अभी इंतजार करना पड़ेगा. घरेलू महिलाओं की धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ आदि में श्रद्धा बढ़ेगी. नौकरीपेशा लोगों सप्ताह के उत्तरार्ध में अचानक से कार्यभार बढ़ सकता है.
कुंभ राशि के जातकों को इस सप्ताह अपने परिवार के सदस्यों के साथ तालमेल बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए. यदि आप प्रेम संबंध में हैं तो भावना में बहकर कोई भी गलत निर्णय न लें अन्यथा बाद में पछताना पड़ सकता है.
कुंभ राशि के लिए उपाय: बजरंग बाण का पाठ करें.
ये भी पढ़ें: Makar Weekly Horoscope 2026: इस सप्ताह सेहत और संबंध दोनों की परीक्षा, मकर राशि वाले संभलकर चलें

Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/ba5429802f5175f804e151e97c98b6b91769797535728466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kumbh, Weekly, Horoscope, 2026:, कुंभ, राशि, वालों, को, रहना, होगा, अलर्ट, विरोधी, बिगाड़, सकते, हैं, काम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Makar Weekly Horoscope 2026: इस सप्ताह सेहत और संबंध दोनों की परीक्षा, मकर राशि वाले संभलकर चलें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5044</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5044</guid>
<description><![CDATA[ Makar Weekly Horoscope 2026 (1 to 7 February): फरवरी 2026 महीने का पहला सप्ताह 1 से 7 फरवरी का समय मकर राशि के करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व प्रेम जीवन और सेहत आदि के लिए यह सप्ताह कैसा रहेगा. मकर राशि वाले ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानें अपना भविष्यफल, यहां पढ़ें पूरा साप्ताहिक राशिफल.
मकर साप्ताहिक राशिफल
मकर राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह थोड़ा उतार-चढ़ाव लिए रह सकता है. इस सप्ताह आपको बेहद सावधानी के साथ कोई भी कदम आगे बढ़ाने की आवश्यकता रहेगी. इस सप्ताह किसी के बहकावे में आकर पास के फायदे में दूर का नुकसान करने की गलती बिल्कुल न करें.
रिलेशनशिप
सप्ताह की शुरुआत सेहत और संबंध की दृष्टि से थोड़ी प्रतिकूल रह सकती है. इस दौरान लोगों के साथ बात-व्यवहार करते समय विनम्रता से पेश आएं और छोटी-मोटी बातों को तूल न दें.
सेहत
सप्ताह के पूर्वार्ध में सेहत का भी विशेष ख्याल रखना होगा. इस दौरान आपको मौसमी बीमारी हो सकती है. स्वास्थ्य संबंधी छोटी-छोटी समस्याओं को इग्नोर न करें अन्यथा बड़ी परेशानी झेलनी पड़ सकती है.
नौकरीपेशा और शिक्षा
नौकरीपेशा लोगों को सप्ताह के मध्य में छोटे-छोटे कार्यों को पूरा करने में अधिक परिश्रम और प्रयास करना पड़ सकता है. विद्यार्थियों के लिए यह सप्ताह कठिनाइयों से युक्त रहेगा. पढ़ाई में बाधाएं आ सकती हैं. सप्ताह के उत्तरार्ध में आपका मन पढ़ाई से उचट सकता है.
व्यापार
व्यवसाय की दृष्टि से सप्ताह के उत्तरार्ध का समय आपके लिए थोड़ा राहत भरा रह सकता है. हालांकि इस दौरान भी जोखिम भरे निवेश से बचना होगा. प्रेम प्रसंगादि में एक-दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखें.
मकर राशि के लिए उपाय: रुद्राष्टकं का पाठ करें.
ये भी पढ़ें: Dhanu Weekly Horoscope 2026: फरवरी का यह सप्ताह बदलेगा धनु राशि की तस्वीर, नई नौकरी का बड़ा मौका
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/aebe433fb4c332a6bf164d7580df29011769796533351466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:40 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Makar, Weekly, Horoscope, 2026:, इस, सप्ताह, सेहत, और, संबंध, दोनों, की, परीक्षा, मकर, राशि, वाले, संभलकर, चलें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 31 जनवरी माघ शनिवार क्यों है खास, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5041</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5041</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 31 जनवरी 2026: आज 31 जनवरी 2026 को माघ शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि और शनिवार है. शनिवार का व्रत कष्ट और आर्थिक परेशानी से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है. शनि चालीसा का पाठ करें और जरूरतमंदों को दान करें. इसके अलावा इस दिन काले कपड़े, काले तिल और भोजन का दान करने से भी शनि देव प्रसन्न होते हैं. माघ महीना दान के लिए बहुत फलदायी है और खासकर शनिवार के दिन दिया गया दान आर्थिक, शारीरिक और मानसिक सुख देता है.&amp;nbsp;
31 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 31 January 2026)



तिथि

त्रयोदशी (30 जनवरी 2026, सुबह 11.09 - 31 जनवरी 2026, सुबह 8.25)



वार
शनिवार


नक्षत्र
पुनर्वसु


योग
विष्कंभ, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
शाम 4.16


चंद्रोस्त
सुबह 6.45,1 फरवरी


चंद्र राशि
मिथुन



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह 7.10- सुबह 8.31


लाभ
सुबह 8.31- सुबह 9.52


अमृत
सुबह 9.52 -सुबह 11.14


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 9.16 - रात 10.55



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 9.52 - सुबह 11.14


यमगण्ड काल
दोपहर 1.56- दोपहर 3.17


गुलिक काल
सुबह 7.10 - सुबह 8.31


विडाल योग
सुबह 7.10 - सुबह 1.34, 1 फरवरी


आडल योग
सुबह 1.34 - सुबह 7.09, 1 फरवरी


भद्रा काल
सुबह 5.52 - सुबह 7.09, 1 फरवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 31 January 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
मिथुन


मंगल
मकर


बुध
मकर


गुरु
मिथुन


शुक्र
मकर


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



वृश्चिक राशि
मुश्किल स्थिति में भी आप समाधान निकाल लेंगे. सकारात्मक सोच घर और व्यवसाय में संतुलन बनाए रखेगी.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



सिंह राशि
कुछ छोटी परेशानियां बनी रह सकती हैं।. ऑफिस में मुश्किल लक्ष्य मिल सकता है



FAQs: 31 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शनिदेव को नीले अपराजिता के फूल अर्पित करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के कष्टों से राहत मिलती है,




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन रवि और विष्कंभ योग बन रहे हैं.
Budget 2026: ऐतिहासिक होगा 2026 का आम बजट! 1,2,3, नहीं 9 विशेष शुभ योग में आयेगा बजट, क्या है संकेत




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/31/acd0d1febe345b936fff4b63bde39cab1769802079580499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, माघ, शनिवार, क्यों, है, खास, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Meen Weekly Horoscope 2026: मीन राशि सप्ताहिक राशिफल, धन लेन&#45;देन और सेहत में बरतें खास सावधानी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5042</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5042</guid>
<description><![CDATA[ Meen Weekly Horoscope 2026 (1 to 7 February): फरवरी 2026 महीने का पहला सप्ताह 1 से 7 फरवरी का समय मीन राशि के करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व प्रेम जीवन और सेहत आदि के लिए यह सप्ताह कैसा रहेगा. मीन राशि वाले ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास से जानें अपना भविष्यफल, यहां पढ़ें पूरा साप्ताहिक राशिफल.
मीन साप्ताहिक राशिफल
मीन राशि के जातकों को इस सप्ताह आलस्य और अभिमान से बचने की आवश्यकता रहेगी. मीन राशि के जातकों को अपने काम को पूरे मनोयोग से करने पर ही मनचाही सफलता मिलेगी. थोड़ी सी भी लापरवाही आपकी असफलता का कारण बन सकती है. सप्ताह की शुरुआत में इष्टमित्रों से मनचाहा सहयोग न मिल पाने के कारण आपका मन थोड़ा खिन्न रहेगा, लेकिन सप्ताह के मध्य तक चीजों का एक बार फिर से पटरी पर आता हुआ देख मन को संतोष होगा.
सप्ताह के मध्य में धन के लेन-देन में सावधानी बरतें. इस दौरान लंबी दूरी की यात्रा का योग बन सकता है. यात्रा थकान भरी और उम्मीद से कुछ कम फलदायी रह सकती है. इस दौरान आपको अपने कामकाज के साथ सेहत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी. सप्ताह के उत्तरार्ध में आपको शारीरिक एवं मानसिक दोनों थकान महसूस होगी. हालांकि इस कठिन समय में आपका लव अथवा लाइफ पार्टनर आपका संबंल बनेगा.
सप्ताह के उत्तरार्ध में आर्थिक स्थिति में सुधार होगा. यह समय व्यवसाय की दृष्टि से शुभ रहेगा. कारोबार में मनचाहा लाभ होगा. आय के नये स्रोत बनेंगे. परिजनों का विशेष सहयोग प्राप्त होगा. वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के मध्य एक दूसरे के प्रति विश्वास बढ़ेगा. धार्मिक कार्यों में मन कम लगेगा.
मीन राशि के लिए उपाय: प्रतिदिन किचन में बनी पहली रोटी गाय को खिलाएं.
ये भी पढ़ें: Kumbh Weekly Horoscope 2026: कुंभ राशि वालों को रहना होगा अलर्ट, विरोधी बिगाड़ सकते हैं काम


Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/0539d3cc9bba0771906cbd683e7d5db61769797750264466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:39 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Meen, Weekly, Horoscope, 2026:, मीन, राशि, सप्ताहिक, राशिफल, धन, लेन-देन, और, सेहत, में, बरतें, खास, सावधानी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Budget 2026: संसद के बजट सत्र में पहुंचा सोने&#45;चांदी की कीमतों का मुद्दा, शादी&#45;विवाह में क्यों जरूरी है गहने</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5039</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5039</guid>
<description><![CDATA[ Budget 2026: सोने-चांदी की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 13 महीनों में चांदी की कीमत में 306 प्रतिशत और सोने की कीमत में 111 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है. फिलहाल स्थिति कुछ ऐसी है कि, गरीब या मध्यम वर्ग के लिए सोने-चांदी की खरीदारी जेब से बाहर हो गई है.
संसद तक पहुंचा सोने-चांदी का मुद्दा
सोने-चांदी का भारतीय संस्कृति में क्या महत्व है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि, राज्यसभा में बजट सत्र के दौरान सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों का मुद्दा उठाया गया.&amp;nbsp;
कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने कहा कि&amp;nbsp;सोने-चांदी&amp;nbsp;की बेकाबू हो चुकी कीमतों ने ग्रामीण भारत, खासकर महिलाओं और विवाह योग्य परिवारों की कमर तोड़ी दी है. सोना-चांदी नारी की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से जुड़ा है. आज स्थिति ऐसी है , किसान, श्रमिक और मध्यम वर्ग के लोग अपनी बेटियों के विवाह के लिए न्यूनतम आभूषण भी नहीं खरीद पा रहे हैं.
शादी-विवाह में क्यों जरूरी है गहने
सोने या चांदी के आभूषणों को भले ही लग्जरी लाइफस्टाइल या स्टाइल आदि के रूप में देखा जाता हो, लेकिन हिंदू धर्म में सोने-चांदी के आभूषणों का विशेष महत्व होता है. सोने-चांदी जैसे धातु को मां लक्ष्मी और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसलिए सदियों से ही ऐसी परंपरा रही है कि, शादी-विवाह के दौरान बेटी और बहुओं को आशीर्वाद स्वरूप गहने दिए जाते हैं. मंगलसूत्र, नथ, कंगन, पायल, बिछुआ जैसे आभूषणों को परंपरा, समृद्धि, और सौभाग्य के प्रतीक माना जाता है.

भारतीय संस्कृति में शादी-विवाह के मौके पर गहनों की भूमिका बेहद खास होती है.
गहनों को परंपरा और संस्कार के रूप में शुभता, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.
साथ ही गहनों को आर्थिक सुरक्षा, खासतौर पर महिलाओं के लिए गहनों को भविष्य की सुरक्षा के रूप देखा जाता है.
विवाह में गहनों को परिवार की स्थिति और सम्मान से भी जोड़ा जाता है. शादी-विवाह में बेटी-बहू को गहने देना सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है.
सोना-चांदी सदियों से सुरक्षित निवेश का विकल्प रहे हैं. इसलिए कहा जाता है कि, सोना-चांदी कभी मिट्टी नहीं होते, यानी ये कितने भी पुराने क्यों न हो जाएं, इनका मुनाफा हमेशा मिलता है.



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/58f7735d6d3f4743c2c4be98bc85c3e41769777336735466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Budget, 2026:, संसद, के, बजट, सत्र, में, पहुंचा, सोने-चांदी, की, कीमतों, का, मुद्दा, शादी-विवाह, में, क्यों, जरूरी, है, गहने</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal: सुबह 9:52 से 11:13 तक थम जाएगी किस्मत! इन 4 राशियों के लिए शनिवार बना &amp;apos;मुसीबत&amp;apos;, भूलकर भी न करें ये काम</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5040</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5040</guid>
<description><![CDATA[ Aaj Ka Rashifal: शनिवार (31 January 2026) का दिन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि से चतुर्दशी की ओर बढ़ता हुआ आंतरिक परिवर्तन और मानसिक पुनर्संरचना का संकेत देता है. पुनर्वसु नक्षत्र आज उन स्थितियों को दोबारा समझने का अवसर देता है, जिन्हें पहले नजरअंदाज किया गया था. यह दिन टूटे हुए भरोसे, अधूरी योजनाओं और मानसिक बोझ को धीरे-धीरे हल करने की क्षमता रखता है.
दिन के पहले भाग में विश्कुम्भ योग दोपहर 1 बजकर 33 मिनट तक सक्रिय रहेगा, जिससे असमंजस, बेचैनी या निर्णयों में असंतुलन संभव है. इसके बाद स्थितियां स्पष्ट होने लगेंगी.
चंद्रमा दिन के पहले हिस्से में मिथुन राशि में रहकर शाम 8 बजकर 02 मिनट के बाद कर्क राशि में प्रवेश करेगा, जिससे दिन का दूसरा भाग अधिक भावनात्मक, संवेदनशील और आत्मनिरीक्षण से भरा रहेगा.
आज सुबह 9 बजकर 52 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक राहु काल रहेगा, जब जोखिम और जल्दबाज़ी से बचना आवश्यक है. वहीं दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त मानसिक स्पष्टता और संतुलित निर्णयों के लिए अनुकूल रहेगा.इन ग्रहयोगों का गहरा प्रभाव धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि पर दिखाई देगा. जाने आज का राशिफल-
धनु (Sagittarius) राशिफल, 31 January 2026
धनु राशि के लिए आज का दिन विचार और व्यवहार के बीच संतुलन साधने का है. चंद्रमा का प्रभाव दिन के पहले भाग में आपको मानसिक रूप से सक्रिय रखेगा, लेकिन कई दिशाओं में सोच बिखर सकती है. पुनर्वसु नक्षत्र यह संकेत देता है कि आज किसी पुराने विचार, योजना या विश्वास पर पुनर्विचार जरूरी है.
विश्कुम्भ योग के कारण सुबह के समय आप भीतर से असमंजस महसूस कर सकते हैं. कोई ऐसा निर्णय सामने आ सकता है, जिसमें सही और आसान के बीच चुनाव करना पड़े. ऐसे में जल्दबाज़ी नुकसानदेह होगी.
सुबह 9 बजकर 52 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक राहु काल में यात्रा, कानूनी चर्चा या बड़े वादों से दूरी बनाए रखें. इसके विपरीत, दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त मार्गदर्शन लेने, योजना बनाने और स्पष्ट निर्णय के लिए उपयुक्त रहेगा.
करियर में आज सीख और विस्तार के अवसर मिल सकते हैं, लेकिन परिणाम धीरे आएंगे. आर्थिक रूप से खर्च बढ़ सकता है, इसलिए संतुलन जरूरी है. रिश्तों में आज स्पष्ट संवाद से गलतफहमी दूर हो सकती है. स्वास्थ्य की दृष्टि से जांघ, कमर या थकान की समस्या संभव है.
Career. सीख और विस्तार.Finance. खर्च पर नियंत्रण.Love. साफ संवाद जरूरी.Health. थकान या कमर दर्द.Lucky Color. पीलाLucky Number. 3
मकर (Capricorn) राशिफल, 31 January 2026
मकर राशि के लिए आज का दिन जिम्मेदारी, धैर्य और आत्मअनुशासन का है. पुनर्वसु नक्षत्र संकेत देता है कि आज आपको किसी पुराने दायित्व या अधूरे कार्य को दोबारा संभालना पड़ सकता है. चंद्रमा का प्रभाव आपको व्यवहारिक बनाए रखेगा, लेकिन भावनाएं भीतर दब सकती हैं.
विश्कुम्भ योग के कारण सुबह के समय निर्णय लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है. आप यह सोच सकते हैं कि बोझ सिर्फ आपके ही कंधों पर क्यों है. लेकिन यही दिन आपको भीतर से मजबूत भी बनाएगा.
सुबह 9 बजकर 52 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक राहु काल में आर्थिक या प्रशासनिक निर्णय टालना बेहतर रहेगा. वहीं दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त दस्तावेज़, योजना और दीर्घकालीन निर्णयों के लिए अनुकूल है.
करियर में आज जिम्मेदारी बढ़ेगी और आपकी विश्वसनीयता परखा जाएगी. आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी. रिश्तों में भावनाएं व्यक्त करना जरूरी होगा. स्वास्थ्य की दृष्टि से घुटनों या जोड़ों में दर्द संभव है.
Career. जिम्मेदारी बढ़ेगी.Finance. स्थिरता बनी रहेगी.Love. भावनाएं साझा करें.Health. जोड़ों में दर्द.Lucky Color. स्लेटीLucky Number. 10
कुंभ (Aquarius) राशिफल, 31 January 2026
कुंभ राशि के लिए आज का दिन आत्मनिरीक्षण और मानसिक स्पष्टता का है. पुनर्वसु नक्षत्र आपको यह समझने का अवसर देता है कि हर बदलाव का विरोध जरूरी नहीं. चंद्रमा का प्रभाव दिन के पहले भाग में आपको विचारशील बनाए रखेगा, लेकिन भीतर बेचैनी भी रह सकती है.
विश्कुम्भ योग के कारण सुबह के समय गलतफहमी या अफवाह से मन विचलित हो सकता है. इसलिए सुनी-सुनाई बातों पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें.
सुबह 9 बजकर 52 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक राहु काल में कोई भी सार्वजनिक बयान या भावनात्मक निर्णय नुकसानदेह हो सकता है. इसके विपरीत, दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त सीमाएं तय करने और स्पष्ट निर्णय लेने के लिए अनुकूल है.
करियर में आज नए विचारों पर काम होगा, लेकिन धैर्य जरूरी है. आर्थिक रूप से नए रास्ते दिख सकते हैं. रिश्तों में दूरी या भ्रम संभव है, लेकिन संवाद से समाधान निकलेगा. स्वास्थ्य की दृष्टि से नींद की कमी हो सकती है.
Career. नए विचारों पर काम.Finance. नए अवसर.Love. संवाद जरूरी.Health. नींद की कमी.Lucky Color. नीलाLucky Number. 11
मीन (Pisces) राशिफल. 31 January 2026
मीन राशि के लिए आज का दिन भावनात्मक रूप से गहरा और आत्मिक है. चंद्रमा शाम के बाद आपकी ही राशि में प्रवेश करेगा, जिससे संवेदनशीलता बढ़ेगी. पुनर्वसु नक्षत्र संकेत देता है कि आज आपको खुद को समझने और स्वीकारने का अवसर मिलेगा. विश्कुम्भ योग के कारण सुबह के समय भ्रम या असमंजस रह सकता है. लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा, मन शांत होता जाएगा.
सुबह 9 बजकर 52 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक राहु काल में किसी भी भ्रमित निर्णय से बचें. इसके विपरीत, दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त आत्मविश्वास और स्पष्टता देगा.
करियर में रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी. आर्थिक रूप से भावनाओं में बहकर खर्च न करें. रिश्तों में भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा. स्वास्थ्य के लिहाज से जल तत्व से जुड़ी समस्या संभव है.
Career. रचनात्मक सफलता.Finance. भावनात्मक खर्च से बचें.Love. भावनात्मक गहराई.Health. जल तत्व से जुड़ी समस्या.Lucky Color. समुद्री हराLucky Number. 7
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/fedbd0ce928b00b57fa4ac1361d642851769773296797257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:38 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal:, सुबह, 9:52, से, 11:13, तक, थम, जाएगी, किस्मत, इन, राशियों, के, लिए, शनिवार, बना, मुसीबत, भूलकर, भी, न, करें, ये, काम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>कैश क्रैश और मेटल बूम! बाबा वेंगा की भविष्यवाणी ने पहले ही बाजार हिला दिया?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5037</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5037</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/31/7474d6812d70fc981bd2aba62e0406f117698304788701092_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>कैश, क्रैश, और, मेटल, बूम, बाबा, वेंगा, की, भविष्यवाणी, ने, पहले, ही, बाजार, हिला, दिया</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holashtak 2026: होलाष्टक में भूलकर भी नहीं करना चाहिए ये 5 काम, तहस&#45;नहस हो जाता है सुखी संसार!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/5038</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/5038</guid>
<description><![CDATA[ Holashtak 2026:&amp;nbsp;होलिका दहन से आठ दिन पहले होलाष्टक शुरू हो जाते हैं जो 24 फरवरी से 3 मार्च तक चलेंगे। फाल्गुन अष्टमी से होलिका दहन तक आठ दिनों तक होलाष्टक के दौरान इन आठ दिनों में शुभ कार्य नहीं किए जाते लेकिन देवी-देवताओं की आराधना के लिए श्रेष्ठ माने जाते हैं। इन आठ दिनों के मध्य विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, मकान, जमीन, वाहन क्रय और विक्रय आदि निषेध माने गए हैं.
देवी-देवताओं की अराधना के लिए ये दिन बहुत ही श्रेष्ठ माने जाते हैं. इस बार होलिका दहन 2 मार्च 2026 को होगा. वहीं इसके अगले दिन यानी कि 3 मार्च को होली खेली जाएगी.साल की शुरुआत होते ही पहला बड़ा त्योहार होली ही होता है. होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है. होलाष्टक शब्द होली और अष्टक से से मिलकर बना है. इसका अर्थ है होली के आठ दिन.
दान-पुण्य से मिलेगा लाभ
एक तरफ होलाष्टक में 16 संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है, वहीं यह समय भगवान की भक्ति के लिए भी उत्तम माना जाता है. होलाष्टक के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान मनुष्य को अधिक से अधिक भगवत भजन और वैदिक अनुष्ठान करने चाहिए, ताकि समस्त कष्टों से मुक्ति मिल सके. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से हर तरह के रोग से छुटकारा मिलता है और सेहत अ&#039;छी रहती है
क्यों लगते है होलाष्टक
होलाष्टक को लेकर एक कथा प्रचलित है कि राजा हिरण्यकश्यप बेटे प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति से दूर करना चाहते थे. और इसके लिए उन्होंने इन आठ दिन प्रहलाद को कठिन यातनाएं दीं। इसके बाद आठवें दिन बहन होलिका (जिसे आग में न जलने का वरदान था) के गोदी में प्रहलाद को बैठा कर जला दिया. लेकिन फिर भी प्रहलाद बच गए। अतः ऐसे में इन आठ दिनों को अशुभ माना जाता है और कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता.
होलाष्टक के दौरान सोलह संस्कार सहित सभी शुभ कार्यों को रोक दिया जाता है. इन दिनों गृह प्रवेश या किसी अन्य भवन में प्रवेश करने की भी मनाही होती है। इतना ही नहीं, नई शादी हुई लड़कियों को ससुराल की पहली होली देखने की भी मनाही होती है.
होलाष्टक पर न करें ये कार्य

चाहे कोई नया घर खरीदना हो या कोई नया व्यवसाय शुरू करना हो सभी शुभ कार्य रोक दिये जाते हैं.
यदि इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाती है तो उनके अंतिम संस्कार के लिए भी शांति कराई जाती है.
एक मान्यता अनुसार किसी भी नविवाहिता को अपने ससुराल की पहली होली नहीं देखनी चाहिए.

होलाष्टक पर करें आराधना
यह समय भगवान की भक्ति के लिए भी उत्तम माना जाता है. होलाष्टक के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष फल प्राप्त होता है. इस दौरान मनुष्य को अधिक से अधिक भगवत भजन और वैदिक अनुष्ठान करने चाहिए, ताकि समस्त कष्टों से मुक्ति मिल सके. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से हर तरह के रोग से छुटकारा मिलता है और सेहत अच्छी रहती है.
Falgun Month 2026: फाल्गुन में शादी का अबूझ मुहूर्त कब ? विवाह के लिए ये 12 दिन बेहद शुभ





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/31/a9200d92a88accca85f8ff3993beacfb1769801116062499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 10:29:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holashtak, 2026:, होलाष्टक, में, भूलकर, भी, नहीं, करना, चाहिए, ये, काम, तहस-नहस, हो, जाता, है, सुखी, संसार</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Falgun Month 2026: फाल्गुन में शादी का अबूझ मुहूर्त कब ? विवाह के लिए ये 12 दिन बेहद शुभ</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4984</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4984</guid>
<description><![CDATA[ Falgun Motnh 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार हिंदू नववर्ष का आखिरी महीना यानी 12वां माह फाल्गुन मास होता है. फागुन मास 2 फरवरी से आरंभ होकर 3 मार्च तक चलेगा. फाल्गुन माह का प्राकृतिक, वैज्ञानिक और धार्मिक रूप से विशेष महत्व है. इस माह में आने वाले त्योहार होली, महाशिवरात्रि बहुत खास माने गए हैं. फाल्गुन महीने का आरंभ 2 फरवरी से शुरू हो रहा है और 3 मार्च को होली के साथ इसका समापन होगा.
फाल्गुन माह के त्योहार और व्रत सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होते हैं. इस महीने होली का त्योहार मनाया जाता है. सभी इस त्योहार के लिए काफी उत्साहित रहते हैं. इसके साथ ही महाशिवरात्रि भी इस महीने मनाई जाती है. इस खास मौके पर भगवान शिव की पूजा की जाती है.
चंद्र दोष दूर करने वाला महीना
पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है. मान्यता है कि चंद्रमा का जन्म भी इसी माह में हुआ था. फाल्गुन में चंद्र देव की भी विशेष पूजा की जाती है. ऐसा करने से मानसिक तनाव दूर होता है.अगर आपकी कुंडली में चंद्र दोष है, तो इस महीने में चंद्रमा की पूजा करने से यह दूर हो सकता है.
फाल्गुन में शादी का अबूझ मुहूर्त
फाल्गुन लगने के साथ ही शहर में जगह-जगह मंदिरों में भगवान के सामने फागोत्सव खेला जाएगा. इस पूरे माह चंग व ढप के साथ पारंपरिक होली के गीत गाए जाएंगे. वहीं इस माह शादी के लिए 12 सावे हैं, जिनमें से 19 फरवरी फुलेरा दोज का अबूझ सावा भी रहेगा. होली से पहले महाशिवरात्रि पर्व भी मनाया जाएगा. होली के दूसरे दिन से हिंदू नववर्ष चैत्रमास का भी शुभारंभ हो जाएगा. होलिका दहन 2 मार्च को होगा. इससे 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाता है, इस वजह से इस दौरान शुभ मंगल कार्य वर्जित रहेंगे.
फाल्गुन महीने का नाम कैसे पड़ा
फाल्गुन महीना 2 फरवरी से शुरू हो रहा है, जिसका समापन 3 मार्च 2026 को होगा. इस महीने की पूर्णिमा पर चंद्रमा फाल्गुनी नक्षत्र में होते हैं जिस कारण इस महीने का नाम फाल्गुन कहा जाता है. मान्यता है कि इस महीने में दान करने से अक्षय पुण्य फलों की प्राप्ति होती है.
फाल्गुन में 12 सावे&amp;nbsp;
फाल्गुन माह में शादी के लिए 12 सावे हैं।&amp;nbsp; 19 फरवरी को फुलेरा दोज पर अबूझ सावा रहेगा. फुलेरा दोज के दिन सामूहिक विवाह सम्मेलनों की धूम रहेगी.

फरवरी 2026 - 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21, 24, 25 और 26 फरवरी

खरमास और चातुर्मास 2026

14 मार्च 2026 को सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास पुनः प्रारंभ हो जाएगा. खरमास 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा. इस दौरान विवाह नहीं हो सकेंगे. इसके बाद, विवाह का मौसम पुनः शुरू हो जाएगा, जो चातुर्मास के प्रारंभ तक जारी रहेगा.
ज्येष्ठ अधिकमास (17 मई से 15 जून) इस बार ज्येष्ठ का महीना दो बार पड़ रहा है, इसलिए पहले महीने में शादी-ब्याह नहीं हो सकेंगे. चातुर्मास देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है.
देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है और इसके साथ ही शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं.
2026 में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को पड़ेगी इसलिए, 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 के बीच कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे.

होलाष्टक

होलाष्टक का आरंभ 24 फरवरी से हो जाएगा. इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं और न ही कोई नई वस्तमु खरीदी जाती है. होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाते हैं.
होलाष्टक में कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है. होली से 8 दिन पहले फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक लग जाते हैं और इन 8 दिनों के लिए कोई भी शुभ कार्य शादी, विवाह मुंडन आदि पर रोक लग जाती है.
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होली जलाई जाती है और उसके अगले दिन फाल्गुन कृष्ण पक्ष की पहली तिथि को रंगों की होली खेली जाती है. होली इस साल 2 मार्च की रात को जलाई जाएगा और 3&amp;nbsp; मार्च की सुबह रंग खेले जाएंगे.
होलाष्टक को लेकर ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सभी ग्रह उग्र स्वभाव में होते हैं, इसलिए इस वक्त कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए. उसमें बाधा आने की आशंका होती है.

&amp;nbsp;फाल्गुन के व्रत और त्योहार

02 फरवरी - फाल्गुन की शुरुआत
05 फरवरी - द्विजप्रिय संकष्टी
07 फरवरी - यशोदा जयंती
08 फरवरी - भानु सप्तमी, शबरी जयन्ती
09 फरवरी - जानकी जयंती , कालाष्टमी, मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
13 फरवरी - कृष्ण भीष्म द्वादशी, कुम्भ संक्रान्ति, विजया एकादशी
14 फरवरी - शनि त्रयोदशी, शनि प्रदोष व्रत
15 फरवरी - महाशिवरात्रि
17 फरवरी - सूर्य ग्रहण, फाल्गुन अमावस्या
19 फरवरी - फुलेरा दूज
22 फरवरी - स्कन्द षष्ठी
24 फरवरी - होलाष्टक शुरू,मासिक दुर्गाष्टमी
27 फरवरी - आमलकी एकादशी
01 मार्च&amp;nbsp; - रवि प्रदोष व्रत
02 मार्च - होलिका दहन
03 मार्च - होली

Holashtak and Chandra Grahan 2026: होलाष्टक के आखिरी दिन चंद्र ग्रहण, राहु बिगाड़ सकता है बना बनाया खेल, ऐसे बचें




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/29/a800f7ac44013882b613b82c5cd4e0841769675268189499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Falgun, Month, 2026:, फाल्गुन, में, शादी, का, अबूझ, मुहूर्त, कब, विवाह, के, लिए, ये, दिन, बेहद, शुभ</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Sadhavi Prem Baisa: कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा, विवादित वीडियो वायरल होने के बाद सुर्खियों में आईं</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4985</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4985</guid>
<description><![CDATA[ Sadhavi Prem Baisa Death: राजस्थान की कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई है. सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में साध्वी प्रेम बाईसा जाना माना नाम थीं. साध्वी की मृत्यु हुई या उन्होंने सुसाइड किया इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है. आइए जानते हैं कौन थी साध्वी प्रेम बाईसा.



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Sadhvi prem baisa (@sadhvi_prembaisa)





कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा
साध्वी प्रेम बाईसा संत समाज में एक जाना-पहचाना नाम थीं. राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में वह कथा वाचन और भजन गायन के लिए प्रसिद्ध थीं. साध्वी ने अपना पूरा जीवन भक्ति, सेवा और समाज सुधार को समर्पित किया.
साध्वी प्रेम बाईसा का परिवार राजस्थान के बाड़मेर जिले के परेऊ गांव का रहने वाला है. उनके गुरु और कोई नहीं बल्कि स्वंय उनके पिता वीरमनाथ हैं. महंत वीरमनाथ भी धार्मिक जगत में प्रतिष्ठित नाम थे, जो कुटीर आश्रम में रहते थे. एक वीडियो विवाद में फंसने के बाद साध्वी चर्चा में आईं.
वीडियो वायरल होने के बाद मची हलचल
साध्वी प्रेम बाईसा बीते कुछ समय से सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थीं और उनके वीडियो भी काफी वायरल हुए. उनका एक वीडियो काफी चर्चा में रहा. साध्वी के अनुसार इस वीडियो में वह अपने पिता के साथ गले मिल रही थी, उनके मुताबिक इस वीडियो को लोगों ने अश्लील बताकर प्रचारित किया.
इसके बाद उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था. इस संबंध में मामला भी दर्ज हुआ था. साध्वी ने तब सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह खुद को निर्दोष साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा से गुजरने को तैयार है.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि की रात कलावा और हल्दी का छोटा सा उपाय, चट मंगनी-पट होगी शादी




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/29/8cd7b5b351c7ebc820eae8748ec159a21769674774461499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Sadhavi, Prem, Baisa:, कौन, थीं, साध्वी, प्रेम, बाईसा, विवादित, वीडियो, वायरल, होने, के, बाद, सुर्खियों, में, आईं</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत में शिवजी के अलावा उनके 2 गणों की पूजा भी है जरुरी, नहीं तो अधूरा है व्रत</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4982</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4982</guid>
<description><![CDATA[ Shukra Pradosh Vrat 2026: माघ महीने का शुक्र प्रदोष व्रत 30 जनवरी 2026 को है. शिव-पार्वती पूजा का दिन हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है. प्रदोष व्रत हर दोष का शमन करने वाला माना जाता है. इसके प्रभाव से व्यक्ति पाप मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करता है.&amp;nbsp;
इस व्रत में शिव पार्वती जी के अलावा भोलेनाथ के गणों की भी पूजा करनी चाहिए. इनके बिना पूजन अधूरा माना जाता है. प्रदोष व्रत में शिव के कौन से गणों की पूजा करें जान लें.
शुक्र प्रदोष व्रत का पूजा मुहूर्त

माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि शुरू - 30 जनवरी 2026 को सुबह 11.09
माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि समाप्त - 31 जनवरी को सुबह 8.25
पूजा मुहूर्त - शाम 5.59 से रात 8.37 तक

प्रदोष व्रत में शिव के गणों की पूजा
भोलेनाथ के गणों की संख्य अनंत बताई गई है लेकिन उनमें से कुछ खास को महत्व दिया गया है जैसे वीरभद्र, नंदी, भृंगी, मणिभद्र, भैरव (काल और बटुक), चंदिस, श्रृंगी, शैल, गोकर्ण, घंटाकर्ण, जय और विजय हैं.
प्रदोष व्रत के दिन शिव जी के दो प्रमुख गणों की उपासना करनी चाहिए नंदी और नाग देवता.

नंदी को भगवान शिव के सबसे प्रिय गण और वाहन माना जाता है. मान्यता है कि नंदी के कानों में अपनी बात कहने से वह सीधे शिव जी तक पहुँचती है. नंदी जी की पूजा से घर में सुख-शांति आती है. नंदी की पूजा के लिए बैल-गाय को चारा खिलाएं. शिव मंदिर में बैठे नंदी की उपासना करें.
वासुकी नाग शिव के प्रमुख गणों में गिने जाते हैं और हर समय उनके साथ रहते हैं. वासुकी नाग वो हैं जिन्हें शिव जी ने अपने गले में आभूषण के रूप में धारण किया है. इनकी आराधना से संतान सुख, समृद्धि, रक्षा और कालसर्प या नाग दोष से मुक्ति मिलती है. प्रदोष व्रत में शिवलिंग पर लगे नाग देवता की पूजा करें.

कैसे करते हैं प्रदोष व्रत

प्रदोष व्रत को सूर्योदय के साथ ही शुरू कर के सूर्यास्त तक रखते हैं और शाम को भगवान शिव की पूजा के बाद शाम को अपना व्रत खोल लेते हैं, तो वहीं कुछ लोग इस दिन 24 घंटे व्रत को रखते हैं और रात में जागरण करके भगवान शिव की पूजा करते हैं और अगले दिन व्रत खोलते हैं.
शुक्रवार को प्रदोष व्रत रखने से नौकरी और बिजनेस में सफलता मिलती है. साथ ही मां लक्ष्मी व्यक्ति पर मेहरबान रहती हैं. दांपत्य जीवन में भी सुख बढ़ता है.

Falgun Month 2026: फाल्गुन कब से शुरू हो रहा है, इसका महत्व, नियम, व्रत त्योहार सब जानें

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/29/29d72777ec32d82d800dd10e0e992b881769685815491499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Shukra, Pradosh, Vrat, 2026:, शुक्र, प्रदोष, व्रत, में, शिवजी, के, अलावा, उनके, गणों, की, पूजा, भी, है, जरुरी, नहीं, तो, अधूरा, है, व्रत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>महा शिवरात्रि 2026: शिव और पार्वती के दिव्य मिलन का जश्न, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और शक्तिशाली मंत्र!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4983</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4983</guid>
<description><![CDATA[ Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म को मानने वाले लोगों के लिए यह पर्व बेहद खास है. भगवान शिव और देवी पार्वती के पवित्र मिलन का प्रतीक शिवरात्रि भक्तों को शिवशक्ति से जुड़ने का मौका देता है.
माना जाता है कि, इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वैवाहिक जीवन सामंजस्य बना रहता है. शास्त्रों के मुताबिक महाशिवरात्रि शिव से आशीर्वाद प्राप्त करने का एक सुनहेरा मौका प्रदान करती है.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि उत्सव और अनुष्ठान
इस पवित्र मौके पर देशभर के शिव मंदिरों को खास सजावटों से सजाया जाता है. भक्त शिवलिंग अभिषेक के लिए जल, दूध, दही और शहद का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि इस साल कुछ जगहों पर महाशिवरात्रि की तिथि को लेकर कुछ अनिश्चितता बनी हुई है. आइए जानते हैं कि, साल 2026 में यह त्योहार किस दिन मनाया जाएगा.&amp;nbsp;
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ये गलती की तो सालभर रहेगी परेशानी! पूजा से पहले जरूर जान लें नियम?
महाशिवरात्रि 2026 की तिथि
हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5.04 बजे से शुरू होगी.&amp;nbsp; यह तिथि 16 फरवरी को शाम 5.34 मिनट पर समाप्त होगी. इस तिथि के आधार पर महाशिवरात्रि 15 फरवरी, 2026 को मनाई जाएगी.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि पूजा का समय



प्रथम प्रहर पूजा शाम
&amp;nbsp;06.39 बजे से रात 09.45 बजे तक


दूसरे प्रहर की पूजा
&amp;nbsp;रात 09.45 बजे से रात्रि 12.52 बजे तक


तीसरा प्रहर की पूजा
&amp;nbsp;सुबह 12.52 बजे से सुबह 03.59 बजे तक


चौथे प्रहर की पूजा
&amp;nbsp;सुबह 3.59 बजे से सुबह 07.06 बजे तक


निशिता काल पूजा
&amp;nbsp;12.28 बजे से लेकर 01.17 सुबह तक



महाशिवरात्रि पर शुभ योग
इस दिन कई लाभकारी सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं.
उत्तरा आषाढ़ा और श्रवण नक्षत्रों का संयोजन भी बनेगा.&amp;nbsp;
व्यातीपत योग दिन भर प्रभावी
कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र का संयोग चतुर्ग्रही योग बनाएगा. भक्तों को 4 घंटे पूजा के दौरान शिव से जुड़े मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए.&amp;nbsp;

पूजा के लिए प्रथम प्रहर का मंत्र-&#039;ह्रीं ईशानाय नमः&#039;
पूजा के लिए दूसरे प्रहर का मंत्र- &#039;ह्रीं अघोराय नमः&#039;
पूजा के लिए तीसरे प्रहर का मंत्र- &#039;ह्रीं वामदेवाय नमः&#039;
पूजा के लिए चौथे प्रहर का मंत्र- &#039;ह्रीं सद्योजाताय नम:&#039;

भगवान शिव के शक्तिशाली मंत्र
ॐ साधो जातये नमः। ॐ वं देवाय नमः।
ॐ अघोराय नमः। ॐ तत्पुरुषाय नमः।
ॐ ईशानाय नमः. ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/29/4ff8d7c767bb35eaeac4a42fc7ce348917696790986461092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>महा, शिवरात्रि, 2026:, शिव, और, पार्वती, के, दिव्य, मिलन, का, जश्न, जानें, शुभ, मुहूर्त, पूजा, विधि, और, शक्तिशाली, मंत्र</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Jaya Ekadashi Vrat Paran: जया एकादशी व्रत का पारण आज, जानिए विधि और नियम</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4981</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4981</guid>
<description><![CDATA[ Jaya Ekadashi Vrat Paran: माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आज 29 जनवरी 2026 को जया एकादशी का व्रत रखा गया है. यह व्रत सुख-समृद्धि दिलाता है और पाप कर्मों का नाश करता है. भगवान विष्णु की पूजा-पाठ के साथ आज व्रतधारियों ने नियम और विधिपूर्वक जया एकादशी का व्रत रखा है.
लेकिन शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब पारण भी सही तिथि, मुहूर्त और नियमानुसार किया जाएगा. अगर आज आपने भी जया एकादशी का व्रत रखा है तो यह जान लें कि, जया एकादशी व्रत का पारण कब किया जाएगा. साथ ही यह भी जान लें कि, एकादशी व्रत के पारण के क्या नियम हैं. &amp;nbsp;
जया एकादशी का पारण कब?
जया एकादशी व्रत का पारण शुक्रवार 30 जनवरी 2026 को किया जाएगा. शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद करना चाहिए. लेकिन यह भी ध्यान रखें कि, द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई हरि वासर होती है, जिसमें पारण नहीं करना चाहिए.
जया एकादशी पारण मुहूर्त (Jaya Ekadashi Paran Time)
पंचांग के अनुसार, 30 जनवरी को सुबह 07.10 पर सूर्योदय होगा और सुबह 11.09 पर एकादशी तिथि समाप्त हो जाएगी. जया एकादशी व्रत का पारण करने या व्रत खोलने के लिए 30 जनवरी को सुबह 07.10 से 09.20 के बीच का समय सबसे शुभ रहेगा. यदि किसी कारण आप इस समय के भीतर व्रत का पारण नहीं कर पाएं तो मध्यान्हकाल बीत जाने के बाद ही पारण करें.
एकादशी व्रत पारण के नियम

एकादशी व्रत के अगले दिन यानी द्वादशी पर सूर्योदय के बाद ही पारण करना चाहिए.
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले ही करना ठीक रहता है.
किसी कारण तिथियों की घट-बढ़ के कारण द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाए, तो ऐसी स्थिति में भी पारण सूर्योदय के बाद ही करें.
द्वादशी तिथि के भीतर कभी भी पारण नहीं करना चाहिए, इससे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता.

एकादशी व्रत पारण विधि
एकादशी व्रत खोलने से पहले स्नान जरूर करे. स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा करें. साथ ही पूजाघर में दीप जलाकर देवी-देवताओं की भी पूजा करें. एकदाशी व्रत की पूजा में यदि कोई भूलचूक हुई हो तो भगवान से क्षमायाचना करें. इसके बाद ब्राह्मण को दान-दक्षिणा और फिर व्रत खोलें. व्रत खोलने के लिए सबसे पहले पूजा में चढ़ाए गए भोग खा सकते हैं.






Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.





 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/29/81b84f20a7d4083c9ee117929f6f30c51769687562271466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Jaya, Ekadashi, Vrat, Paran:, जया, एकादशी, व्रत, का, पारण, आज, जानिए, विधि, और, नियम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 30 जनवरी शुक्र प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4979</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4979</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 30 जनवरी 2026: आज 30 जनवरी 2026 को माघ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि और शुक्रवार है यानी शुक्र प्रदोष व्रत है. शुक्र प्रदोष व्रत से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, परिवार में खुशियों का संचार होता है. इस व्रत में महिलाओं को सूर्योदय से सूर्यास्त तक अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए.&amp;nbsp;
30 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 30 January 2026)



तिथि

&amp;nbsp;द्वादशी (29 जनवरी 2026, दोपहर 1.55 - 30 जनवरी 2026, सुबह 11.09)



वार
शुक्रवार


नक्षत्र
आर्द्रा


योग
वैधृति, सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
दोपहर 3.06


चंद्रोस्त
सुबह 5.54, 31 जनवरी


चंद्र राशि
मिथुन



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह 7.10- सुबह 8.31


लाभ
सुबह 8.31- सुबह 9.52


अमृत
सुबह 9.52 -सुबह 11.14


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 9.16 - रात 10.55



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 11.14 - दोपहर 12.34


यमगण्ड काल
दोपहर 3.17 - शाम 4.38


गुलिक काल
सुबह 8.31 - सुबह 9.52


विडाल योग
सुबह 3.27 - सुबह 7.10, 31 जनवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 30 January 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
मिथुन


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कर्क राशि
विदेश में रह रहे किसी परिजन की ओर से शुभ समाचार मिलने से मन में सुकून और राहत रहेगी।



कौन सी राशियां संभलकर रहें



धनु राशि
ध्यान रखें कि आपका कोई नजदीकी संबंधी आपके खिलाफ गलतफहमियां उत्पन्न कर सकता है।



FAQs: 30 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




इस दिन मां लक्ष्मी के चरणों में कौड़ियां अर्पित करें.फिर इसे उठाकर लाल रंग के कपड़े में बांध लें. इसे धन रखने की जगह या तिजोरी में रखें. मान्यता है कि इससे धन की स्थिति में सुधार होता है. घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है.




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन रवि, सर्वार्थ सिद्धि योग और वैधृति योग बन रहे हैं.
Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत में शिवजी के अलावा उनके 2 गणों की पूजा भी है जरुरी, नहीं तो अधूरा है व्रत




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/43676acc5171e1edb2f693e5c7753d371769714212238499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, शुक्र, प्रदोष, व्रत, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>February Ekadashi 2026: फरवरी में विजया और आमलकी एकादशी कब&#45;कब, नोट करें डेट, मुहूर्त</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4977</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4977</guid>
<description><![CDATA[ February Ekadashi 2026: फरवरी माह में विजया एकादशी और आमलकी एकादशी व्रत किया जाएगा. ये दोनों ही व्रत अश्वमेध यज्ञ करने के समान पुण्य प्रदान करते हैं. एकादशी व्रत के दिन की गई विष्णु पूजा, दान, हवन कई जन्मों तक शुभ फल देते हैं.
एकादशी व्रत को हरितोष व्रत कहते हैं यानी भगवान की प्रसन्नता के लिए रखा जाने वाला व्रत. भगवान हरि की प्रसन्नता के लिए एकादशी का व्रत किया जाता है. विजया एकादसी और आमलकी एकादशी का व्रत फरवरी में कब है डेट, मुहूर्त सब जान लें.
विजया एकादशी - 13 फरवरी 2026
तिथि - फाल्गुन माह के कृष्ण पत्र की एकादशी 12 फरवरी 2026 को दोपहर 12.22 पर शुरू हो जाएगी और 13 फरवरी 2026 को दोपहर 2.25 पर इसका समापन होगा.
मुहूर्त - चर - सुबह 06:48 - सुबह 08:15

लाभ - सुबह 08:15 - सुबह 09:41
अमृत - सुबह 09:41 - सुबह 11:08

व्रत पारण मय - 14 फरवरी 2026 को सुबह 07:00 से सुबह 09:14 के बीच व्रत का पारण किया जाएगा. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - शाम 04:01 है.
महत्व- इस दिन व्रत रखने और विष्णु जी की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय, कठिन परिस्थितियों से मुक्ति, और सभी पापों का नाश होता है.
आमलकी एकादशी - 27 फरवरी 2026
तिथि - फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी 2026 को सुबह 12.33 पर शुरू होगी और इसी दिन रात को 10.32 मिनट पर इसका समापन होगा.

मुहूर्त - चर - सुबह 7.01 - सुबह 8.25
लाभ - सुबह 8.25 - सुबह 9.48
अमृत - सुबह 9.48 - सुबह 11.12

व्रत पारण समय -&amp;nbsp; 28 फरवरी 2026 को सुबह 06:47 से सुबह 09:06 के बीच पारण किया जाएगा. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय - रात 08:43 है.
महत्व - आमलकी एकादशी का व्रत करने से 100 गायों के दान जितना पुण्य मिलता है, और यह पितृ दोष निवारण के लिए भी शुभ है.&amp;nbsp;
Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत में शिवजी के अलावा उनके 2 गणों की पूजा भी है जरुरी, नहीं तो अधूरा है व्रत


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/ca08ac4efa6aab830719acae5dfaf83a1769711865690499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>February, Ekadashi, 2026:, फरवरी, में, विजया, और, आमलकी, एकादशी, कब-कब, नोट, करें, डेट, मुहूर्त</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal: मकर और कुंभ राशि वालों के लिए आज बन रहा है &amp;apos;राजयोग&amp;apos;? 42 मिनट का वो समय जो बदल सकता है आपकी तकदीर!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4978</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4978</guid>
<description><![CDATA[ Aaj Ka Rashifal: 30 January 2026 को पंचांग के अनुसार शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि दिन को निष्कर्ष, जिम्मेदारी और व्यावहारिक सोच की ओर ले जाती है. आज चंद्रमा मिथुन राशि में स्थित है, जिससे विचारों की गति तेज रहेगी और निर्णय से पहले कई विकल्पों पर विचार करना स्वाभाविक होगा.
आर्द्रा नक्षत्र दिन में मानसिक बेचैनी, सवाल और सच्चाई को सामने लाने की प्रवृत्ति बढ़ाता है, जबकि वैधृति योग जल्दबाज़ी से बचने और सोच-समझकर आगे बढ़ने की चेतावनी देता है.
आज सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक राहु काल रहेगा, जब जोखिम, भ्रम और गलत निर्णय की संभावना अधिक रहती है. वहीं दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त दिन का सबसे संतुलित समय माना जाएगा, जहां बातचीत, योजना और निर्णय अपेक्षाकृत बेहतर परिणाम दे सकते हैं. आज ग्रहों के गोचर का प्रभाव धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि पर विशेष रूप से दिखाई देता है, जानते हैं आज का राशिफल-
धनु (Sagittarius) राशिफल, 30 January 2026
धनु राशि के लिए आज का दिन संबंधों, साझेदारी और दृष्टिकोण से जुड़ा है. द्वादशी तिथि आपको किसी सहयोग, अनुबंध या रिश्ते से जुड़े विषय पर अंतिम स्पष्टता देने की ओर ले जा सकती है. चंद्रमा मिथुन राशि में होने से दूसरों की राय और सुझाव आज आपके निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
आर्द्रा नक्षत्र के कारण बातचीत सीधी और कभी-कभी तीखी हो सकती है. यह जरूरी है कि आप शब्दों का चयन सोच-समझकर करें. सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक राहु काल में किसी भी प्रकार का वादा, कानूनी समझौता या भावनात्मक फैसला टालना बेहतर रहेगा.
इसके विपरीत, दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त साझेदारी से जुड़ी बातचीत, मीटिंग या योजना बनाने के लिए अनुकूल रहेगा.
करियर में सहयोग से काम आगे बढ़ेगा. आर्थिक रूप से खर्च पर नियंत्रण जरूरी है, खासकर दूसरों के लिए किए गए व्यय में. रिश्तों में संवाद से स्थिति सुधर सकती है. स्वास्थ्य के लिहाज से सामान्य दिन है, लेकिन मानसिक थकान महसूस हो सकती है.
Career. साझेदारी और संवाद से लाभ.Finance. खर्च संतुलित रखें.Love. बातचीत से सुधार.Health. मानसिक थकान.Lucky Color. पीलाLucky Number. 3
मकर (Capricorn) राशिफल, 30 January 2026
मकर राशि के लिए आज का दिन जिम्मेदारी, अनुशासन और काम के दबाव से जुड़ा रहेगा. द्वादशी तिथि आपको किसी अधूरे पेशेवर विषय को निष्कर्ष तक पहुंचाने की प्रेरणा देती है. चंद्रमा मिथुन राशि में होने से कार्यस्थल पर संवाद, निर्देश और योजनाओं की संख्या बढ़ेगी.
आर्द्रा नक्षत्र के कारण काम में अचानक बदलाव या नई जानकारी सामने आ सकती है. यह बदलाव आपको असहज कर सकता है, लेकिन यही आगे की दिशा स्पष्ट करेगा.
सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक राहु काल में किसी वरिष्ठ से टकराव, दस्तावेज़ या प्रशासनिक निर्णय से बचना समझदारी होगी. दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त कार्ययोजना, मीटिंग और जिम्मेदार फैसलों के लिए बेहतर समय रहेगा.
करियर में आपकी मेहनत और जिम्मेदारी की पहचान मिलेगी, हालांकि दबाव अधिक रहेगा. आर्थिक रूप से स्थिति सुरक्षित है. रिश्तों में समय की कमी से दूरी महसूस हो सकती है. स्वास्थ्य में पीठ या जोड़ों से जुड़ी समस्या संभव है.
Career. जिम्मेदारी बढ़ेगी, पहचान मिलेगी.Finance. सुरक्षित और स्थिर.Love. समय और संवाद दें.Health. पीठ या जोड़ों में दर्द.Lucky Color. स्लेटीLucky Number. 10
कुंभ (Aquarius) राशिफल, 30 January 2026
कुंभ राशि के लिए आज का दिन रचनात्मकता, विचार और आत्मअभिव्यक्ति से जुड़ा है. द्वादशी तिथि किसी रचनात्मक या व्यक्तिगत परियोजना को अंतिम रूप देने का संकेत देती है. चंद्रमा मिथुन राशि में होने से आज नए विचार, योजनाएं और संवाद तेजी से सामने आएंगे.
आर्द्रा नक्षत्र के कारण मन में बेचैनी और बदलाव की इच्छा रह सकती है. यह जरूरी है कि आप हर नए विचार पर तुरंत अमल न करें. सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक राहु काल में भावनात्मक प्रतिक्रिया, जोखिम या अनिश्चित निर्णय से बचें.
वहीं दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रचनात्मक काम, प्रस्तुति और विचार साझा करने के लिए अनुकूल रहेगा.
करियर में इनोवेशन और नए दृष्टिकोण से लाभ होगा. आर्थिक रूप से दिन सामान्य रहेगा. रिश्तों में मित्रता और संवाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. स्वास्थ्य में मानसिक थकान या नींद की कमी महसूस हो सकती है.
Career. नए विचारों से लाभ.Finance. सामान्य स्थिति.Love. मित्रता और संवाद.Health. मानसिक थकान.Lucky Color. नीलाLucky Number. 11
मीन (Pisces) राशिफल, 30 January 2026
मीन राशि के लिए आज का दिन भावनात्मक, पारिवारिक और आंतरिक संतुलन से जुड़ा है. द्वादशी तिथि आपको किसी घरेलू या व्यक्तिगत विषय पर स्पष्ट निर्णय लेने की ओर प्रेरित कर सकती है. चंद्रमा मिथुन राशि में होने से घर और काम दोनों से जुड़े विचार मन में चलते रहेंगे.
आर्द्रा नक्षत्र के प्रभाव से भावनाएं गहरी हो सकती हैं और पुराने मुद्दे सामने आ सकते हैं. यह समय है कि आप भावनाओं में बहने के बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें.
सुबह 11 बजकर 13 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक राहु काल में पारिवारिक बहस या भावनात्मक निर्णय से बचना उचित होगा. इसके विपरीत, दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त आत्मचिंतन, बातचीत और व्यक्तिगत निर्णय के लिए अनुकूल रहेगा.
करियर में बैक-एंड या रचनात्मक काम बेहतर रहेगा. आर्थिक रूप से खर्च भावनाओं में बहकर न करें. रिश्तों में संवेदनशीलता बढ़ेगी. स्वास्थ्य में थकान या सर्दी-जुकाम संभव है.
Career. शांत और स्थिर प्रगति.Finance. भावनात्मक खर्च से बचें.Love. संवेदनशील जुड़ाव.Health. थकान या सर्दी.Lucky Color. समुद्री हराLucky Number. 7
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/29/35c562db81d5d100ea823d7a6023daa11769694888863257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal:, मकर, और, कुंभ, राशि, वालों, के, लिए, आज, बन, रहा, है, राजयोग, मिनट, का, वो, समय, जो, बदल, सकता, है, आपकी, तकदीर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>कल्याणपुरा कुहाड़ा में भैंरूजी मंदिर का वार्षिकोत्सव, 750 क्विंटल चूरमा प्रसाद, लाखों भक्तों का जमावड़ा!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4976</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4976</guid>
<description><![CDATA[ कल्याणपुरा कुहाड़ा स्थित अरावली की पहाड़ियों में बने श्री छांपाला वाला भैंरूजी मंदिर का 17 वाँ वार्षिकोत्सव समारोह 30 जनवरी शुक्रवार को बड़े ही धुमधाम व हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जायेगा. इस मौके पर विशाल व भव्य मेला, भण्डारा एवं जागरण का आयोजन होगा.
मेले को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. इसको लेकर पिछले एक माह से ग्रामीण जन सहयोग से भंडारे की तैयारियों में जुटे हुये है. भण्डारे में लाखों श्रद्धालू भैंरू बाबा की प्रसादी पायेगें. जिनके लिये 750 क्विंटल चूरमा तैयार किया गया है.
प्रदेश में यह मेला बड़ी मात्रा में चूरमा बनाने के लिए प्रसिद्ध
भैंरूजी का विशाल भण्डारा शुक्रवार 30 जनवरी को है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में चूरमा बनाने के लिये तैयारियां महीने भर पहले से शुरू हो जाती हैं और चूरमा करीब 07 दिन पहले बनना शुरू हो जाता है. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिये जेसीबी, ट्रैक्टर ट्रॉलियों और थ्रेसर काम में लिये जाते हैं. यह मेला अब प्रदेश में इस खास अंदाज में बनाये जाने वाले चूरमे के कारण ही जाना जाता है.
मेले में आसपास के ग्रामीण अपने स्तर पर मैनेजमेंट संभालते हैं. मान्यता है कि यहां भैंरूजी को विशेष प्रसादी में चूरमे का भोग लगाया जाता है. पिछली बार यहां 551 क्विंटल का प्रसाद बनाया गया था और इस बार 750 क्विंटल चूरमे का भोग लगाया जायेगा.
मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं व हजारों वाहनों के लिये ग्रामीण पार्किंग की व्यवस्था तक खुद संभालते हैं. हैलीपेड से लेकर बाबा के दर्शनों के लिये ग्रामीण ही वॉलंटियर्स के रूप में तैनात रहते हैं.

अरावली की पहाड़ियों में बने श्री छांपाला वाला भैंरूजी मंदिर का 17 वाँ वार्षिकोत्सव समारोह 30 जनवरी शुक्रवार को बड़े ही धुमधाम व हर्षोल्लास के साथ आयोजित किया जायेगा. भण्डारे में लाखों श्रद्धालू भैंरू बाबा की प्रसादी पायेगें. जिनके लिये 750 क्विंटल चूरमा तैयार किया गया है. pic.twitter.com/CtA62ObCdC
&amp;mdash; Ankur Agnihotri (@Ankuragnihotrii) January 30, 2026



साल 2010 में प्रथम वार्षिकोत्सव
सर्वप्रथम सन् 2010 में प्रथम वार्षिकोत्सव में 70 किंवटल चूरमे की प्रसादी बनाई थी. उसके बाद हर बार प्रसादी के लिए बनाए गए चूरमे को बढ़ाया गया. महाप्रसादी के लिए दाल बनाने का काम गुरूवार से प्रारंभ हो गया था. मंदिर के वार्षिकोत्सव पर सवाईमाधोपुर, ग्वालियर, झालावाड, कोटा, पीपलखेड़ा, मुरैना व जयपुर सहित दूरदराज से श्रद्धालु आते हैं.
वहीं कोटपूतली विधायक हंसराज पटेल द्वारा निरन्तर व्यवस्थाओं की मॉनीटरिंग की जा रही है. गुरूवार को हजारों महिलाओं द्वारा गाजे-बाजे के साथ विशाल कलश यात्रा निकाली जायेगी. चूरमा तैयार करने में मेला कमेटी से जुड़े ग्रामीण जयराम जेलदार, पुजारी रोहिताश बोफा, कैलाश धाबाई, रामकुंवार, सरपंच विक्रम छावड़ी तथा बबलू गुर्जर जुटे रहे.
इसके अलावा भैंरु बाबा मंदिर पर हैलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की जायेगी. मेले में हैलीकॉप्टर के लिए हेलीपैड भी बना हुआ है. आस्था और विष्वास के इस महाउत्सव की तैयारियों में ग्राम कल्याणपुरा, कूहाड़ा, पदमा की ढ़ाणी, पंवाला राजपूत, हरीपुरा, हीरान की ढ़ाणी, बोपिया, चुरी सहित आसपास के करीब 08 गांवों के लोग पिछले 15 दिनों से तैयारियों में जुटे हुये है.
मैन रोड़ पर बना मंदिर का 05 मंजिला विशाल प्रवेश द्वार भामाशाहों के सहयोग से करीब 96 लाख की लागत से बनाया गया है. इस मौके पर स्थानीय गायक कलाकार ढ़प की ताल पर धमाल गाते हैं. ग्रामीणों की ओर से मेले की तैयारियां जोर शोर से की जा रही है तो वहीं पुलिस प्रशासन भी मेले में उमड़ने वाली भीड़ को लेकर चौकन्ना है.
मेले में प्रत्येक ग्रामीण देता है सेवा
मेले में लाखों श्रद्धालू भैंरू बाबा के दर्शन करने आते है. मेले में श्रद्धालूओं के लिये 651 क्विंटल प्रसादी तैयार की गई है. गांव के प्रत्येक घर से एक व्यक्ति रोजाना अपना समय निकालकर यहां अपनी सेवा दे रहा है. एक समय में यहां कम से कम 100 लोगों की टीम हमेशा रहती है.
चूरमा बनाने में 150 क्विंटल आटा, 100 क्विंटल सूजी, 35 क्विंटल देसी घी, 130 क्विंटल खाण्ड, 10 क्विंटल मावा, 03 क्विंटल बादाम, 03 क्विंटल किशमिश, 03 क्विंटल काजू, 03 क्विंटल खोपरा, 100 क्विंटल दूध आटे में, 80 क्विंटल दूध का दही और 40 क्विंटल दाल का उपयोग किया जायेगा.
वहीं दाल बनाने में 40 क्विंटल दाल, 20 पीपा सरसों तेल, 05 क्विंटल टमाटर, 02 क्विंटल हरी मिर्च, 01 क्विंटल हरा धनिया इस्तेमाल किया जायेगा. वहीं मसालों में 60 किलो लाल मिर्च, 60 किलो हल्दी और 40 किलो जीरा डाला जायेगा. ग्रामीण मेले को इतने व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराते हैं कि पुलिस प्रशासन भी हैरान रहता है.
मेले में आने वाले हजारों वाहनों के लिए ग्रामीण पार्किंग की व्यवस्था तक खुद संभालते हैं. मेले में 21 स्कूलों के करीब 05 हजार विद्यार्थी अपनी सेवाएं देंगे तो वहीं 03 हजार पुरूष व 500 महिलाएं भी वालंटियर्स के रुप में तैनात रहेंगी. प्रसादी वितरित करने के लिए ढ़ाई लाख पत्तल-दोने, चाय कॉफी के लिए 04 लाख कप मंगवा लिए गए हैं. मेले में पेयजल आपूर्ति के लिए 25 टैंकर तैनात रहेंगे. मेले में एम्बुलेस, फायर बिग्रेड आदि संसाधन तैनात रहेंगे.
विशाल कलश यात्रा गुरूवार को
मेले से एक दिन पूर्व 29 जनवरी गुरूवार को प्रातः 09 बजे से चोटिया मोड़ से मंदिर परिसर तक लगभग 03 किलोमीटर की कलश यात्रा निकाली जायेगी. जिसमें हजारों महिलायें सिर पर कलश लेकर चलेगी. जिनके लिये करीब 25 हजार कलश मंगवाये गये है.
विशाल कलश यात्रा का ग्रामीणों द्वारा जगह-जगह स्वागत किया जायेगा. कलश यात्रा में ग्रामीण महिलायें परम्परागत वेशभूषा में गाजे-बाजे के साथ शामिल होंगी.
116 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचते हैं मंदिर
यह मंदिर कोटपूतली-सीकर स्टेट हाईवे पर है. इसके लिए मुख्य सडक़ से 02 किलोमीटर अंदर जाना होता है. इन दो किमी में 03 भव्य दरवाजों से गुजरना पड़ता है. इसके बाद तलहटी से एक पहाड़ पर चढऩा होता है. करीब 116 सीढ़ियां चढ़कर मंदिर परिसर तक पहुंचा जा सकता है.
मंदिर परिसर में प्राचीन भैरव बाबा की मूर्ति स्थापित हैं. इनके साथ ही सवाई भोज, शेड माता व हनुमान जी की मूर्ति स्थापित हैं. वार्षिकोत्सव पर सवाई माधोपुर, ग्वालियर, झालावाड़, कोटा, पीपलखेड़ा, मुरैना, मध्य प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली समेत दूर-दराज से श्रद्धालु भैंरू बाबा के दर्शन करने आते हैं.
ऐसे शुरू हुई महाप्रसादी की परम्परा
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक सोनगिरी पोसवाल नामक व्यक्ति भैंरू जी का भक्त था. जो भैंरू बाबा की मूर्ति को ग्राम कुहाड़ा में स्थापित करवाना चाहता था. भक्त भैंरू बाबा की मूर्ति लाने काशी चला गया. भैंरू बाबा ने सपने में दर्शन देकर सोनगिरी से बड़े बेटे की बलि मांगी, जिस पर वह बेटे की बलि देकर भैंरूजी की मूर्ति लेकर चल देते हैं.
भैंरू बाबा परीक्षा से खुश होकर पुत्र को जीवित कर देते हैं. जिसके बाद भक्त व उसके बेटे ने पंच पीरों के साथ गांव में मूर्ति की स्थापना विधि विधान से जागरण व भण्डारे के साथ की. आज भी प्राचीन पंचदेव खेजड़ी वृक्ष की पूजा होती है. यहां लगने वाले मेले की खास बात है कि यहां खिलौनों की दुकान, चाट पकौड़ी के ठेले व झूले लगाने की अनुमति नहीं दी जाती है.
प्रतिवर्ष होने वाले लक्खी मेले में लाखों की संख्या में भक्त एकत्रित होते हैं. वहीं जनप्रतिनिधि एवं नेतागण भी बाबा के दरबार में धोक लगाते हैं.
खेजड़ी वृक्ष की भी होती है पूजा
सोनगिरा पोषवाल प्रथम के सोनगिरा द्वितीय पैदा हुआ. जिसने अपनी बेटी पदमा पोषवाल की शादी बगड़ावत सवाई भोज के साथ मिति बैशाख सुदी नवमी वार रविवार संवत् 934 में की. जिसमें पंचदेव खेजड़ी वृक्ष का मंडप लगाया गया जो वर्तमान में भी मौजुद है. जिसकी आज भी पुजा होती है.
पदमा पोषवाल ने वरदान दिया कि जिस स्त्री के संतान सुख नहीं है वह मंडप में उपस्थित जड़ के नीचे से निकलने पर उसको संतान सुख प्राप्त होगा. पोषवाल गौत्र पर इसका वरदान लागु नहीं होता है. तभी से आसपास के क्षेत्र में भैरू बाबा व खेजड़ी के वृक्ष की पूजा होने लगी तथा हजारों की संख्या में लोग इसके दर पर आने लगे.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/30/5ae93096e30a4952598ec20b95edd5d217697399361041092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 30 Jan 2026 11:03:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>कल्याणपुरा, कुहाड़ा, में, भैंरूजी, मंदिर, का, वार्षिकोत्सव, 750, क्विंटल, चूरमा, प्रसाद, लाखों, भक्तों, का, जमावड़ा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>अजित पवार किस देवता की करते थे पूजा, जानें इनकी धार्मिक आस्था के बारे में</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4974</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4974</guid>
<description><![CDATA[ अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति का चाणक्य माना जाता था. लेकिन बुधवार 28 जनवरी 2026 की सुबह अजित पवार की मृत्यु की दुखद खबर सामने आई, जिससे पूरे देशभर में शोक की लहर दौड़ गई.
28 जनवरी की सुबह करीब 8.45 पर बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया. इस दर्दनाक हादसे में अजित पवार समेत प्लेन में मौजूद बाकी 5 लोगों की भी मृत्यु हो गई. अजीत पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री थे. महाराष्ट्र की सत्ता में उनका अहम योगदार रहा.
राजनीति के चाणक्य अजीत पवार किस धर्म को माने थे
66 वर्षीय अजित पवार को राजनीति का दिग्गज माना जाता था. उनके धार्मिक आस्था की बात करें तो, अजित पवार अपनी अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि और काम के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे, न कि किसी विशेष देवता की पूजा के लिए. वे मुख्य रूप से महाराष्ट्र की संस्कृति के अनुसार हिंदू देवी-देवताओं में आस्था रखते हैं. पवार परिवार की आस्था महाराष्ट्र के प्रमुख देवताओं, जैसे विट्ठल-रुक्मिणी में रही है, जिसका अजित पवार भी पालन करते थे. इसके साथ ही सभी धर्मों के सम्मानपूर्व व्यवहार का समर्थन करते थे.
पवार परिवार की धार्मिक आस्था और तथ्य

अजित पवार ने पंढरपुर के प्रसिद्ध&amp;nbsp;विट्ठल मंदिर में पूजा पाठ की थी. पवार परिवार भगवान विट्ठल के परम भक्त हैं.
अजित पवार&amp;nbsp; अक्सर पुणे के श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति और मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में भी दर्शन, पूजन और अभिषेक के लिए जाते थे.
अजित पवार प्रभु श्रीराम की भी पूजा करते थे. नासिक के ऐतिहासिक काळाराम मंदिर में उन्होंने भगवान राम की पूजा-अर्चना की थी.







Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.





 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/1405383301c6ac62adf069f4337a0e0e1769585325184466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>अजित, पवार, किस, देवता, की, करते, थे, पूजा, जानें, इनकी, धार्मिक, आस्था, के, बारे, में</media:keywords>
</item>

<item>
<title>VIDEO: प्रेमानंद से मिलकर द ग्रेट खली ने किया ऐसा सवाल, महाराज जी बोले&#45; तुम्हें जेल हो जाएगी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4975</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4975</guid>
<description><![CDATA[ The Great Khali Meet Premanand Maharaj: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज जी से आम लोगों के साथ ही सेलिब्रिटी और जानी-मानी हस्तियां मिलने आते हैं. प्रेमानंद महाराज अपनी प्रेम और भक्ति के संदेश अब देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी करोड़ों भक्तों के प्रेरणास्रोत बन चुके हैं. उनके प्रवचन सुनने बड़े-बड़े सितारे पहुंचते हैं और महाराज जी से आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं, जिसकी फोटो-वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर देखने को मिलती है.
बीते साल WWE के मशहूर रेसलर द ग्रेट खली भी प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए परिवार सहित उनके दरबार पहुंचे. हालांकि इससे पहले भी वे महाराज से मिलने आए थे. लेकिन इस बार वे पूरे परिवार पत्नी और दोनों बच्चों के साथ पहुंचे थे. महाराज से खली ने ऐसा सवाल किया, जिसके जवाब में वे बोले- तुम्हें जेल हो जाएगी. इसका वीडियो पर इनदिनों सोशल मीडिया पर एक बार फिर से चर्चा में है और तेजी से वायरल हो रहा है.
द ग्रेट खली ने महाराज से किया सवाल
द ग्रेट खली ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की और पूछा कि, हमें किसके लिए जीना चाहिए, परिवार के लिए, संसार के लिए या अपने लिए. खली के सवाल का जवाब देते हुए महाराज जी बोले- आफका जीवन किसके लिए है, पहले मुझे इसका जवाब दो. खली वे मुझे नहीं मालूम. महाराज जी ने कहा, आप भगवान के लिए जी रहे हो और आप उन्हीं के अंश हो. खली जिसका नाम है, वह तुम नहीं बल्कि सिर्फ तुम्हारा ढांचा है. जब मां के गर्भ में तुम थे तब तुम्हारा नाम खली नहीं था, जब बाहर आए तब इस ढांचे को खली का नाम दिया गया.

महाराज जी ने उदाहरण देते हुए खली को समझाया कि, तुम्हारा अधिकार इस शरीर को नष्ट करना नहीं है, अभी कानून कार्रवाई में यदि यह साबित हो जाए कि, आप अपने शरीर को नष्ट करना चाहते हो तो तुम्हें जेल हो जाएगी. इसलिए यह जान लो कि आप और हम सभी सिर्फ भगवान के लिए ही जी रहे हैं.






Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.





 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/ac0b17341ad1b6f464dcf8e0e3fbd1561769583267298466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>VIDEO:, प्रेमानंद, से, मिलकर, द, ग्रेट, खली, ने, किया, ऐसा, सवाल, महाराज, जी, बोले-, तुम्हें, जेल, हो, जाएगी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holashtak and Chandra Grahan 2026: होलाष्टक के आखिरी दिन चंद्र ग्रहण, राहु बिगाड़ सकता है बना बनाया खेल, ऐसे बचें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4972</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4972</guid>
<description><![CDATA[ Holashtak and Chandra Grahan 2026: इस साल होलाष्टक का आरंभ 24 फरवरी से होगा, जिसका समापन 3 मार्च 2026 को होगा. पुराणों के अनुसार होलाष्टक को अशुभ अवधि माना जाता है. ये 8 दिन बहुत खतरनाक होते हैं क्योंकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होलाष्टक में सारे ग्रह उग्र हो जाते हैं और व्यक्ति पर इसका&amp;nbsp; विपरीत प्रभाव पड़ता है. यही वजह है कि होलाष्टक में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए.
हालांकि होलाष्टक में ग्रहों की अशुभता से बचने के लिए जप-तप, देवी-देवताओं का पूजन करने की सलाह दी जाती है लेकिन इस बार होलाष्टक के आखिरी दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है, ऐसे में किन बातों का विशेष ध्यान रखें जान लें.
होलाष्टक में चंद्र ग्रहण का साया
इस साल होलाष्टक के आखिरी दिन फाल्गुन पूर्णिमा पर यानी होलिका दहन वाले दिन 3 मार्च 2026 मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरु होगा और शाम को 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. कुल मिलाकर 3 घंटे 27 मिनट तक ये ग्रहण रहेगा. ये भारत में भी दिखेगा. इसका सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाएगा.
होलाष्टक में चंद्र ग्रहण कितना खतरनाक
मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक का संबंध राक्षसी शक्तियों से जुड़ा हुआ है. होलाष्टक के आठ दिनों तक नकारात्मक ऊर्जा बेहद सक्रिय रहती हैं.
वहीं बात करें चंद्र ग्रहण की तो हिंदू धर्म में ग्रहण को अशुभ माना जाता है. चंद्र ग्रहण के दिन राहु का प्रभाव रहता है. इस समय ग्रहण दोष बनता है जो बेवजह के डर और नकारात्मकता के कारण स्वास्थ्य व रिश्तों को प्रभावित करती है. होलाष्टक के 8 दिन अलग-अलग ग्रह उग्र रहते हैं.
राहु से बचकर रहना होगा

होलाष्टक के आखिरी दिन यानी होलिका दहन पर लग रहा चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा. खास बात ये है कि होलाष्टक के आखिरी दिन फाल्गुन पूर्णिमा रहती है. इस दिन राहु उग्र रहता है.
साथ ही चंद्र ग्रहण के दिन भी राहु की नकारात्मकता बढ़ जाती है.चंद्रमा मन का कारक है और राहु भ्रम का. दोनों की युति से मन में बेचैनी, तनाव और भय पैदा होता है.
ऐसे में डिप्रेशन, अनावश्यक डर, निर्णय लेने की क्षमता में कमी, मानसिक तनाव, वैवाहिक जीवन में विवाद आदि की समस्या बढ़ सकती हैं. इनसे बचने के लिए फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन) पर कुछ खास उपाय जरुर करें.

होलाष्टक और चंद्र ग्रहण की अशुभता से कैसे बचें
फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण है, ग्रहण में देवी-देवताओं की पूजा, दान आदि नहीं किए जाते हैं लेकिन राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए इस दिन भगवान विष्णु के मंत्र नमो भगवते वासुदेवाय का जाप और हवन करें. उनकी कृपा से आपका मंगल होगा.

होलाष्टक के दौरान नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्र का पाठ करें.
हनुमान चालीसा या हनुमान बाहुक का पाठ करें.
भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें.

Phulera Dooj 2026: फुलेरा दूज कब, नोट करें डेट, मुहूर्त, मांगलिक कार्य के लिए सबसे खास दिन



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/2677e269a17fdec03a2c54df51d242b11769584541557499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holashtak, and, Chandra, Grahan, 2026:, होलाष्टक, के, आखिरी, दिन, चंद्र, ग्रहण, राहु, बिगाड़, सकता, है, बना, बनाया, खेल, ऐसे, बचें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ajit Pawar Death: अकाल मृत्यु का शिकार हुए अजीत पवार! दुर्घटना से बचाते हैं ज्योतिष के ये चमत्कारी उपाय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4973</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4973</guid>
<description><![CDATA[ Ajit Pawar Death: आज महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की प्लेन क्रैश में मृत्यु हो गई है. पूरे देश के साथ खासकर महाराष्ट्र की राजनीति के लिए ये बहुत दुखद खबर है. पवार ही नहीं इससे पहले भी कई राजनीति के कई धुरंधर जैसे संजय गांधी, माधवराव सिंधिया, वाईएस रेड्डी भी सड़क दुर्घटना या प्लेन क्रैश का शिकार हो चुके हैं.
गरुड़ पुराण के अनुसार सड़क दुर्घटना, प्लेन क्रैश में मृत्यु होना अकाल मृत्यु की श्रेणी में आता है. ज्योतिष में अकाल मृत्यु से बचने के कई उपाय बताए गए हैं. ऐसे में दुर्घटना से बचना है एस्ट्रोलॉजर अनीष व्यास से जानें कौन से उपाय करें.
दुर्घटना से बचने के उपाय
प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार अकाल मृत्यु से बचने के लिए के रोजाना कुछ खास नियमों का पालन जरुर करना चाहिए. उन्होंने एक वीडियो में कहा कि-

अकाल मृत्यु हरणं सर्व व्याधि विनाशनम्।
श्री कृष्ण पादोदकम् पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते ।।
अर्थ - भगवान विष्णु के चरण कमलों का जल (चरणामृत) अकाल मृत्यु को दूर करने वाला और सभी प्रकार की व्याधियों (रोगों) का विनाश करने वाला है. प्रेमानंद महाराज के अनुसार रोजाना बाल गोपाल, शालीग्राम या राधा जी के चरणों का जल रोजाना पीएं. इसे लेते समय ये मंत्र बोलना चाहिए. इसके प्रभाव से व्यक्ति की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है. साथी ये समस्त रोगों से बचाता है.
अकाल मृत्यु से बचाने वाला मंत्र
ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥ - घर से जब बाहर निकलें तब इस मंत्र को रोजाना 11 बार जाप करें. प्रेमानंद महाराज के अनुसार इसके प्रभाव से व्यक्ति दुर्घटना से सुरक्षित रहता है.
भगवान का नाम जप करें
रोजाना अपनी दिनचर्या में से 20 से 30 मिनट ऐसे निकाले की आप अपने भगवान के सामने बैठकर नाम जप कर सको. जो भी नाम आपको प्रिय हो उसका स्मरण करें. ईश्वर व्यक्ति की हर समस्या का समाधान निकालते हैं.
Phulera Dooj 2026: फुलेरा दूज कब, नोट करें डेट, मुहूर्त, मांगलिक कार्य के लिए सबसे खास दिन



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/78fd250af0dc2882dab85f24c618e1511769587567675499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ajit, Pawar, Death:, अकाल, मृत्यु, का, शिकार, हुए, अजीत, पवार, दुर्घटना, से, बचाते, हैं, ज्योतिष, के, ये, चमत्कारी, उपाय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Jaya Ekadashi 2026 Vrat Katha: जया एकादशी की पूजा में जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, पाएं श्रीहरि का आशीर्वाद</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4970</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4970</guid>
<description><![CDATA[ Jaya Ekadashi 2026 Vrat Katha: जया एकादशी का व्रत आज गुरुवार 29 जनवरी 2026 को है. इस व्रत को करने से हर प्रकार का सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है और रुके कार्य बनने लगते हैं. जया एकादशी का व्रथ करने से श्रीहरि की कृपा भी मिलती है, लेकिन व्रत तब तक अधूरा ही माना जाता है, जबकर इससे संबंधित व्रत कथा का पाठ न किया जाएगा. इसलिए आज पूजा में जया एकादशी की कथा जरूर पढ़ें या फिर सुनें.
जया एकादशी की कहानी (Jaya Ekadashi Kahani in Hindi)
जया एकादशी की कथा राजा इंद्र और गंधर्व से जुड़ी है. कथा के अनुसार, एक बार इंद्र की सभा में अप्सराएं नृत्य कर रहीं थी. सभा में गंधर्व पुष्पवंत, उसकी लड़की पुष्पवती और चित्रसेन की स्त्री मालिनी और उसका पुत्र माल्यवान भी मौजूद थे. उस समय पुष्पवती माल्यवान को देख मोहित हो गई और उसके मन में काम भाव जाग उठा. पुष्पावती ने अपने रूप, सौंदर्य, हाव-भाव से माल्यवान को कामासक्त कर दिया. इधर दोनों कामासक्त में लीन हो गए.
तब राजा इंद्र ने उन्हें अलग करने के लिए नृत्य करने का आदेश दिया. दोनों नृत्य करने लगे लेकिन कामातुर होने के कारण वे सही से नृत्य नहीं कर पा रहे थे. इसके बाद देवराज इंद्र गंधर्व माल्यवान और पुष्पवती ने नाराज हो गए. इंद्र ने दोनों को पिशाच बनने का श्राप दिया. श्राप के बाद दोनों मृत्यु लोक पहुंच गए और फिर पिशाच योनि में आकर पृथ्वी पर भटकने लगे. वर्षों भटकने के बाद गंधर्व को एक ऋषि मिले. गंधर्व और पुष्पवती ने उस ऋषि से पिशाच योनि से मुक्ति का उपाय पूछा.
ऋषि ने दोनों को माघ शुक्ल की जया एकादशी करने का उपाय बताया. इसके बाद गंधर्व और पुष्पवती ने विधि-विधान से जया एकादशी का व्रत किया और व्रत के पुण्य फल से उन्हें पिशाच योनि से मुक्ति मिल गई. इसलिए ऐसा माना जाता है कि, जो व्यक्ति विधिपूर्वक इस व्रत को करता है, इस पावन कथा का पाठ करता है और एकादशी व्रत के नियमों का पालन करता है, वह सभी प्रकार के सुखों का भोग कर बैकुंठ लोक में स्थान पाता है.



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/9012a6297dd02c993a559a4979ccbc821769614462331466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Jaya, Ekadashi, 2026, Vrat, Katha:, जया, एकादशी, की, पूजा, में, जरूर, पढ़ें, ये, व्रत, कथा, पाएं, श्रीहरि, का, आशीर्वाद</media:keywords>
</item>

<item>
<title>सन्नाटे में बारामती, शोक में महाराष्ट्र, विमान क्रैश में &amp;apos;दादा&amp;apos; का सफर खत्म, आज एकादशी पर अंतिम संस्कार</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4971</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4971</guid>
<description><![CDATA[ Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु बुधवार सुबह विमान हादसे में हो गई. 28 जनवरी की सुबह करीब 8.45 पर बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन क्रैश हो गया. इस हादसे में अजित पवार सहित प्लेन में मौजूद अन्य 5 लोगों की भी मौत हो गई. इस हादसे के बाद महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में 3 दिन के शोक का ऐलान किया है.
अंतिम संस्कार कब
मीडिया रिपोर्ट्स की जानकारी के मुताबिक, अजित पवार का अंतिम संस्कार कल यानी गुरुवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान में किया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, सुबह 9 बजे अंतिम यात्रा निकलेगी और सुबह 11 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा. 29 जनवरी को एकादशी तिथि रहेगा. ऐसे में धर्म व ज्योतिष को मानने वालों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि, एकादशी तिथि पर अंतिम संस्कार करने का क्या महत्व होता है, क्या शास्त्रों में इसके लिए कोई विशेष मान्यता है?
एकादशी पर नहीं करना चाहिए अंतिम संस्कार!
एकादशी तिथि पर मृत्यु होना शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि, एकादशी तिथि पर मृत्यु हो तो मोक्ष की प्राप्ति होती है. लेकिन अंतिम संस्कार के लिए द्वादशी तिथि तक रुकना चाहिए. वैष्णव परंपरा के अनुसार, एकादशी के दिन अंतिम संस्कार न करने का कारण यह है कि, शवदाह के समय पिंडदान करने के लिए अन्न का प्रयोग होता है, जबकि एकादशी पर अन्न का प्रयोग वर्जित है. इसलिए एकादशी के दिन यदि मृत्यु हो तो द्वादशी के दिन ही अंतिम संस्कार करना चाहिए.
हालांकि शास्त्रों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, जन्म और मृत्यु जैसी घटनाएं प्राकृतिक हैं, इसलिए इनपर तिथि का दोष नहीं लगाया जा सकता. लेकिन विशेष तिथियों में हुए मृत्यु या जन्म के दौरान होने वाले नियमों का पालन जरूर करना चाहिए. जैसे हिंदू धर्म में पंचक में हुई मृत्यु के लिए अंतिम संस्कार की कुछ विशेष विधियां होती हैं.
अंतिम संस्कार का मुख्य उद्देश्य आत्मा की शांति और परिजनों का कर्तव्य&amp;nbsp;
धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि, मृत्यु के बाद शव का अंतिम संस्कार यथाशीघ्र करना चाहिए. केवल सूर्यास्त के बाद अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिए. अंतिम संस्कार के लिए एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या या अन्य कोई भी तिथि अशुभ नहीं होती. परिस्थितियों के अनुसार और विधिपूर्वक अंतिम संस्कार किया जाना ही शास्त्रसम्मत है. अंतिम संस्कार का मुख्य उद्देश्य आत्मा की शांति और परिजनों का कर्तव्य पालन है.






Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.





 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/dcf5bd0fb72c36bb599412d8b9ed290e1769599894086466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>सन्नाटे, में, बारामती, शोक, में, महाराष्ट्र, विमान, क्रैश, में, दादा, का, सफर, खत्म, आज, एकादशी, पर, अंतिम, संस्कार</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal: आज जल्दबाजी की तो पछताएंगे! 29 जनवरी राशिफल, धनु से मीन राशि वालों के लिए सितारों की बड़ी चेतावनी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4968</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4968</guid>
<description><![CDATA[ Aaj Ka Rashifal 29 January 2026: आज का दिन पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की ऊर्जा लेकर आया है, जो संयम, स्पष्ट सोच और आत्मनियंत्रण पर ज़ोर देती है. चंद्रमा का प्रभाव दिन की शुरुआत में व्यवहारिक दृष्टिकोण और स्थिरता को मजबूत करता है, जिससे लोग भावनाओं के बजाय तर्क से निर्णय लेते दिखेंगे.
सुबह नक्षत्र की शांत ऊर्जा मन को संतुलित रखेगी, लेकिन दोपहर के बाद मानसिक सक्रियता और सवाल बढ़ सकते हैं. दिन के मध्य भाग में मिला सीमित शुभ समय बातचीत और योजना के लिए उपयोगी रहेगा, जबकि उत्तरार्ध में जल्दबाज़ी से बचना ही समझदारी होगी. आइए जानते हैं आज का राशिफल.
धनु राशिफल. 29 जनवरी 2026
धनु राशि के लिए आज का दिन अनुशासन, दिनचर्या और आत्मनिरीक्षण से जुड़ा रहेगा. आप स्वभाव से बड़े लक्ष्य देखने वाली राशि हैं, लेकिन आज जीवन आपसे छोटे, व्यावहारिक कदमों पर ध्यान देने को कहेगा. काम करने के तरीके, समय प्रबंधन और स्वास्थ्य से जुड़े विषय आज प्रमुख रहेंगे.
दिन की शुरुआत अपेक्षाकृत स्थिर रहेगी. आप महसूस करेंगे कि कुछ चीजें कंट्रोल में हैं, लेकिन दोपहर के बाद जिम्मेदारियां या मानसिक दबाव बढ़ सकता है. यही वह समय है जब आपको अपने शरीर और मन दोनों की सीमाओं को समझना होगा. अगर आप खुद को थकाते रहेंगे, तो परिणाम आपकी उम्मीदों से कमजोर हो सकते हैं.
कामकाज के क्षेत्र में आज सुधार और पुनर्गठन का दिन है. नई शुरुआत से ज्यादा पुराने सिस्टम को ठीक करने पर ध्यान देना बेहतर रहेगा. आर्थिक रूप से दिन संतुलित है, लेकिन स्वास्थ्य या रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ सकता है.
रिश्तों में आज व्यवहारिक और शांत संवाद अधिक असरदार रहेगा. आज आपको यह समझ आएगा कि हर प्रगति तेज रफ्तार से नहीं होती. कभी-कभी स्थिर रहना भी आगे बढ़ने का हिस्सा होता है.
Career. कार्यप्रणाली सुधारने का दिन.Finance. सामान्य, स्वास्थ्य पर खर्च संभव.Love. शांत और व्यवहारिक संवाद लाभ देगा.Health. थकान, पाचन या दिनचर्या से जुड़ी समस्या.Lucky Color. पीलाLucky Number. 3
मकर राशिफल. 29 जनवरी 2026
मकर राशि के लिए आज का दिन रचनात्मकता और जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने का है. आप आमतौर पर भावनाओं को पीछे रखकर काम करते हैं, लेकिन आज कुछ स्थितियां आपको भीतर से छू सकती हैं. यह कमजोरी नहीं, बल्कि एक जरूरी अनुभव होगा.
दिन की शुरुआत में आत्मविश्वास बना रहेगा. आप अपने काम और फैसलों को लेकर गंभीर रहेंगे. लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेगा, किसी रचनात्मक विचार या भावनात्मक मुद्दे पर आपका ध्यान जा सकता है. यह बदलाव आपको असहज नहीं, बल्कि ज्यादा मानवीय बनाएगा.
करियर में आज जिम्मेदारी बढ़ सकती है. कोई ऐसा काम सामने आ सकता है जिसमें आपको नेतृत्व और संवेदनशीलता दोनों दिखानी होगी. आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम बढ़ाएं, खासकर निवेश या बच्चों से जुड़े खर्च में. रिश्तों में आज भावनात्मक ईमानदारी महत्वपूर्ण रहेगी.
आज का दिन आपको यह सिखाएगा कि केवल मजबूत दिखना ही सफलता नहीं है. कभी-कभी भीतर की सच्चाई को स्वीकार करना भी उतना ही जरूरी होता है.
Career. जिम्मेदारी के साथ रचनात्मकता दिखेगी.Finance. निवेश सोच-समझकर करें.Love. भावनात्मक जुड़ाव गहरा होगा.Health. पीठ या जोड़ों में जकड़न.Lucky Color. स्लेटीLucky Number. 10
कुंभ राशिफल. 29 जनवरी 2026
कुंभ राशि के लिए आज का दिन घर, परिवार और आंतरिक स्थिरता से जुड़ा रहेगा. आप अक्सर भविष्य और बड़े विचारों में रहते हैं, लेकिन आज मन आपको जड़ों की ओर लौटने को कहेगा. यह दिन भावनात्मक सुरक्षा और मानसिक संतुलन तलाशने का है.
दिन के पहले भाग में आप शांत और स्थिर महसूस करेंगे. परिवार या निजी जीवन से जुड़ी कोई बात मन को सुकून दे सकती है. लेकिन दोपहर के बाद सोच में हलचल बढ़ सकती है. पुराने मुद्दे या यादें सामने आ सकती हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा.
कामकाज के क्षेत्र में आज घर से जुड़े काम, रिमोट वर्क या बैक-एंड प्लानिंग बेहतर रहेगी. आर्थिक रूप से घरेलू खर्च या संपत्ति से जुड़े विचार उभर सकते हैं. रिश्तों में आज सुनना बोलने से ज्यादा जरूरी होगा. यह दिन आपको याद दिलाएगा कि भविष्य की तैयारी तभी मजबूत होती है, जब वर्तमान की नींव स्थिर हो.
Career. बैक-एंड काम और योजना में फोकस.Finance. घरेलू खर्च बढ़ सकता है.Love. परिवार और भावनात्मक सुरक्षा अहम.Health. तनाव या छाती से जुड़ी परेशानी.Lucky Color. नीलाLucky Number. 11
मीन राशिफल. 29 जनवरी 2026
मीन राशि के लिए आज का दिन संवाद, स्पष्टता और सोच की दिशा तय करने वाला है. आप भावनात्मक रूप से गहरे होते हैं, लेकिन आज आपकी सोच अपेक्षाकृत व्यवहारिक और सीधी रहेगी. जो बातें लंबे समय से मन में थीं, उन्हें शब्दों में लाने का मौका मिलेगा.
दिन की शुरुआत में मन शांत रहेगा. आप महसूस करेंगे कि कुछ बातें अब स्पष्ट हो रही हैं. दोपहर के बाद बातचीत, संदेश या मुलाकातों की संख्या बढ़ सकती है. हालांकि हर बात तुरंत कह देना जरूरी नहीं होगा. सही शब्द और सही समय आज बहुत मायने रखेंगे.
करियर में लेखन, संवाद, योजना या सलाह से जुड़े कामों में सफलता मिल सकती है. आर्थिक रूप से दिन सामान्य है, लेकिन यात्रा या छोटे खर्च बढ़ सकते हैं. रिश्तों में आज भावनात्मक ईमानदारी और साफ बातचीत रिश्तों को मजबूत करेगी. आज का दिन आपको यह सिखाएगा कि जब मन और शब्द एक दिशा में हों, तो उलझन अपने-आप कम हो जाती है.
Career. संवाद और योजना में सफलता.Finance. सामान्य, छोटे खर्च संभव.Love. भावनात्मक बातचीत से मजबूती.Health. गला, सर्दी या थकान.Lucky Color. समुद्री हराLucky Number. 7
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/ee59ee5a0f7791ae947a657186042c671769603362266257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal:, आज, जल्दबाजी, की, तो, पछताएंगे, जनवरी, राशिफल, धनु, से, मीन, राशि, वालों, के, लिए, सितारों, की, बड़ी, चेतावनी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 29 जनवरी जया एकादशी का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4969</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4969</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 29 जनवरी 2026: आज 29 जनवरी 2026 को माघ शुक्ल पक्ष की जया एकादशी है. ये एकादशी व्यक्ति को जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्रदान करती है साथ ही, आर्थिक समस्याओं से भी मुक्ति मिल सकती है. इस दिन विष्णु जी की पूजा में मंगलं भगवान विष्णु, मंगलं गरुड़ध्वज। मंगलं पुण्डरीकाक्ष, मंगलाय तनो हरि॥ का जाप करें. मान्यता है इससे मंगल कार्य संपन्न होते हैं.
29 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 29 January 2026)



तिथि

&amp;nbsp;एकादशी (28 जनवरी 2026, शाम 4.35 - 29 जनवरी 2026, दोपहर 1.55)



वार
गुरुवार


नक्षत्र
रोहिणी


योग
इंद्र, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
दोपहर 2.02


चंद्रोस्त
सुबह 4.55, 30 जनवरी


चंद्र राशि
वृषभ



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 7.11 - सुबह 8.32


चर
सुबह 11.14 - दोपहर 12.26


शाम का चौघड़िया


अमृत
शाम 5.58 - रात 7.37



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 1.55 - दोपहर 3.16


यमगण्ड काल
सुबह 7.11 - सुबह 8.32


गुलिक काल
सुबह 9.53 - सुबह 11.14


विडाल योग
सुबह 7.11 - सुबह 7.31


भद्रा काल
सुबह 7.11 - दोपहर 1.55



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 29 January 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
वृषभ


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कर्क राशि
किसी विवाह योग्य सदस्य के लिए अच्छा रिश्ता आने से घर में खुशी का माहौल रहेगा.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



मेष राशि
अपने निजी कार्यों के लिए समय न निकाल पाने की वजह से मन में कुछ उदासी की स्थिति रहेगी.



FAQs: 29 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




जया एकादशी व्रत का पुण्यफल पाने के लिए भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की एकसाथ पूजा करते हुए उन्हें पीले चंदन और केसर में गुलाबजल डालकर तिलक अर्पित करें.&amp;nbsp;




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन रवि और इंद्र योग बन रहे हैं.
Holashtak and Chandra Grahan 2026: होलाष्टक के आखिरी दिन चंद्र ग्रहण, राहु बिगाड़ सकता है बना बनाया खेल, ऐसे बचें




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/29/687b2fe952f63ac1c5a3309473318ef41769627816826499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, जया, एकादशी, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mamta Kulkarni: किन्नर अखाड़े से बाहर ममता कुलकर्णी, अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर कही थी ये बात</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4967</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4967</guid>
<description><![CDATA[ Mamta Kulkarni Kinnar Akhada: पूर्व अभिमेत्री और महा-मंडलेश्वर ममता कुलकर्णी को अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है. किन्न अखाड़े में चल रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद के बाद यह फैसला लियागया है. यह फैलला पदाधिकारियों के विचार-विमर्थ के बाद लिया गया है, जिसकी जानकारी डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने वीडियो जारी कर दी.
ममता कुलकर्णी का अब अखाड़े से नहीं कोई नाता
अखाड़े से बाहर होने के बाद अब ममता कुलकर्णी का अखाड़े से आधिकारिक तौर पर कोई नाता नहीं है. वह ना ही पदाधिकारी हैं और ना ही सदस्य. अखाड़े से बाहर होने के बाद ममता कुलकर्णी ने सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम पर लिखा कि-



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by MAHAMANDLESHWAR YAMAIIMAMTA NANDGIRI (@mamtakulkarnimk)





मैं ममता मृदुल कल्याणी बिल्कुल सही मानसिक स्थिति में हूं, मैं 27 जनवरी 2026 तक किन्नर अखाड़ा के महा मंडलेश्वर पद से इस्तीफा दे रही हूं. डॉ. आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के साथ कोई शिकायत नहीं, सम्मान देने के लिए पूरा प्यार. बस बात सिर्फ इतनी है कि मेरा आध्यात्मिक ज्ञान न कृष्ण मूर्ति की तरह बहेगा. सत्य को वस्त्र या प्रतीक की आवश्यकता नहीं होती. मेरे गुरु श्री चेतन्य गगनगिरी नाथ ने कोई भी पद स्वीकार नहीं किया. मैंने 25 साल का आस्तिक जीवन जिया, अंतर्मुखी रहकर अभ्यास जैसे पहले जारी था, अभी करूंगी, जब भी और जब भी जरूरत होगी, किसी भी पार्टी से जुड़ा या किसी विशिष्ट समूह या समान विचारधारा वाले लोगों से जुड़ा हुआ अपना ज्ञान बाटूगीं.
ममता के आखिर क्या कह दिया था
ममता कुलकर्णी ने 25 जनवरी 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की भूमिका और आचरण पर कई सवाल उठाए. साथ ही ममता ने नियुक्ति प्रकिया और पालकी स्नान करने की जरूरत पर भी सवाल उठाया था, जिसके बाद अखाड़े से ममता को बाहर करने का निर्णय लिया गया. उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से प्रश्न किए थे कि, उन्हें शंकराचार्य किसने नियुक्त किया और करोड़ों की भीड़ में पालकी लेकर निकलने की क्या जरूरत थी.
महाकुंभ 2025 में बनी थीं महामंडलेश्वर
बता दें कि ममता कुलकर्णी बीते साल 24 जनवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर बनी थीं. उन्हें नया नाम यामाई ममला नंद गिरी दिया गया था.



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/29/00c91699ded320e7b9cf0883daa572b71769658719656466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 29 Jan 2026 10:23:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mamta, Kulkarni:, किन्नर, अखाड़े, से, बाहर, ममता, कुलकर्णी, अविमुक्तेश्वरानंद, सरस्वती, को, लेकर, कही, थी, ये, बात</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Purnima 2026: माघ पूर्णिमा तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री की पूरी जानकारी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4916</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4916</guid>
<description><![CDATA[ Magh Purnima 2026: माघ माह में आने वाली पवित्र पूर्णिमा जिसे &#039;माघ पूर्णिमा&#039; के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू वैदिक परंपरा के अनुसार, इस साल यह त्योहार 1 फरवरी के दिन मनाया जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, माघ पूर्णिमा के मौके पर देवता स्वर्ग से धरती पर अवतरित होते हैं और पवित्र नदियों के संगम में स्नान करते हैं.
इस वजह से माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व होता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भी विशेष लाभ की प्राप्ति होती है. ऐसे में पूजा करने से पहले पूजा की थाली में कुछ खास वस्तुओं को शामिल करना बेहद जरूरी है, ताकि भक्तों को पूजा का पूर्ण लाभ मिल सकें.&amp;nbsp;
माघ पूर्णिमा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Magh Purnima 2026 Date and shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के मुताबिक माघ पूर्णिमा की तिथि (चंद्र दिवस) 1 फरवरी को सुबह 5.52 मिनट से शुरू होगी और 2 फरवरी को सुबह 3.38 बजे समाप्त होगी. माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी.&amp;nbsp;
माघ पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5.24 मिनट से लेकर सुबह 6.17 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.13 मिनट से लेकर 12.57 मिनट तक&amp;nbsp;
गोधूलि मुहूर्त शाम 5.58 मिनट से लेकर शाम 6.24 बजे तक&amp;nbsp;
विजय मुहूर्त दोपहर 2.23 मिनट से लेकर दोपहर 3.07 मिनट तक&amp;nbsp;

माघ पूर्णिमा पूजा सामग्री की सूची (Magh Purnima 2026 Puja Samagri)
घीपंचामृत&amp;nbsp;रोलीअक्षत (चावल)सिंदूरचिरागचंदन का पेस्टसूती बातीमिठाइयांगंगाजलकमल और पीले रंग के फूलों की मालालाल कपड़ा&amp;nbsp;भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्तियां
माघ पूर्णिमा पर क्या करें?
माघ पूर्णिमा 2026 के मौके पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें.&amp;nbsp;
इसके बाद भगवान सत्यानारायण की कथा पढ़ने के साथ विधिवत रूप से पूजा पाठ करें.&amp;nbsp;
शुद्ध घी का दीपक जलाने के बाद फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और शहद का मिश्रण) और तुलसी के पत्ते भगवान को अर्पित करें.
इसके अतिरिक्त माघ पूर्णिमा के मौके पर तिल, गुड़, वस्त्र और अनाज जैसी वस्तुओं का दान करें. इससे आर्थिक लाभ प्राप्त होने के साथ सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive. com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/c2f1b39152451f4c85c916108ca22b3417695072266391092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Purnima, 2026:, माघ, पूर्णिमा, तिथि, शुभ, मुहूर्त, और, पूजा, सामग्री, की, पूरी, जानकारी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>गंभीर अपराध जिसे अल्लाह भी नहीं करते माफ, मिलता है जहन्नुम, जानें इस्लाम में गुनाए&#45;ए&#45;कबीरा का मतलब?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4915</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4915</guid>
<description><![CDATA[ Gunah-e-kabira in Islam: इस्लाम धर्म के अनुसार, इंसान की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए कुछ हदें तय की गई हैं. इन हदों को तोड़ना इस्लाम धर्म में गुनाह माना जाता है. कुछ गुनाह ऐसे भी होते हैं, जिन्हें कुरान और हदीस में संजीदा (serious) &amp;nbsp;माना गया है, जिन्हें गुनाह-ए-कबीरा के नाम से जाना जाता है.
ये अपराध न केवल इंसान की आखिरत (मृत्यु के बाद के जीवन) को खतरे में डालते हैं, बल्कि समाज में भी दिक्कत पैदा करते हैं.
इस्लाम में गुनाह-ए-कबीरा क्या हैं? इसमें कौन-कौन से नियमों का पालन करना होता है और इस्लाम इन पर क्या सजा तय करता है. मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना इफराहीम हुसैन से इन्हीं चीजों को आसान भाषा में समझने का प्रयास करते हैं.&amp;nbsp;
मौत के बाद क्या?
मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना इफराहीम हुसैन ने कहा कि, मुस्लिम समाज में कुछ ऐसे भी गुनाह बताए गए हैं, जिन्हें इस्लामिक दृष्टिकोण से बेहद गंभीर माना जाता है, इन्हें गुनाह-ए-कबीरा या गुनाह-ए-अजीम कहा जाता है.
इस्लाम के मुताबिक, ये वो गंभीर अपराध होते हैं, जिन पर अल्लाह ताला सख्ती से पेश आते हैं और इंसान बिना तौबा किए दुनिया को अलविदा कह दें तो आखिरत (मृत्यु के बाद के जीवन) में कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है. यहां तक कि उस इंसान को सीधे तौर पर जहन्नुम भेज दिया जाता है.&amp;nbsp;
गुनाह-ए-कबीरा में कौन-कौन सी सजाएं आती हैं?
मौलाना इफराहीम हुसैन ने बताया कि, इस्लाम में बेहद गंभीर अपराध शिर्क है, यानी अल्लाह के समान किसी ओर को ईश्वर मानता है. अल्लाह ही केवल इबादत के काबिल है, उनके सिवा और किसी की भी इबादत करना या उसके समान किसी को समझना गुनाह-ए-कबीरा है.&amp;nbsp;
उन्होंने आगे ये भी बताया कि, इस्लाम में वालिदैन (माता-पिता) का दर्जा काफी महत्वपूर्ण है और उनकी आज्ञा न मानना भी गुनाह-ए-कबीरा में शामिल है. यतीमों (पिताहीन और मिसकीनों (अत्यंत गरीब या जरूरतमंद) लोग का हक मारना भी गुनाह-ए-कबीरा है. इसे इस्लाम में बहुत बड़ा जुर्म माना गया है.&amp;nbsp;
इसी तरह जिना करना (बिना विवाह के अवैध यौन संबंध बनाना), नाहक किसी की हत्या करना या किसी बेगुनाह की जान लेना भी गुनाह-ए-कबीरा में शामिल है. इस्लाम में गुनाहों को दो भागों में बांटा गया है. एक वो गलतियां जो अल्लाह के हकूक (अधिकार समूह) से जुड़े होते हैं.
ऐसे गुनाहों में अगर सच्चे मन के साथ इनसे तौबा करें तो अल्लाह तआला अपने बंदे को माफ कर देते हैं, क्योंकि अल्लाह माफ करने वाले हैं.&amp;nbsp;
दूसरे गुनाह वे होते हैं बंदों के हकूक से जुड़े होते हैं, इसमें किसी का हक मारना, छीना-छपटी करना, किसी असहाय का माल छीनना शामिल हैं. ऐसे गुनाह सिर्फ पश्चाताप करने से माफ नहीं होते हैं, बल्कि जब तक हकदार को उसके हक का वापस नहीं मिल जाता, उसे पूरी तरह माफी नहीं मिलती है.&amp;nbsp;
जितनी बड़ी गलती उतनी बड़ी ही सजा-इस्लाम
मौलाना इफराहीम हुसैन के अनुसार, हर गुनाह की सजा अलग होती है. किसे कितनी सजा मिलेगी, यह आखिरत में अल्लाह ही तय करेंगे. जिसका गुनाह जितना बड़ा होगा उसे उतनी ही बड़ी सजा दी जाएगी.
अगर कोई इंसान बिना तौबा किए इन गुनाहों के साथ दुनिया को अलविदा कह दें, तो उसे आखिरत में सख्त सजा दी जाती है. यहां तक कि उसे जहन्नुम भी भेजा जा सकता है. इसलिए इस्लाम में इंसान को हर समय गुनाहों से बचने की सलाह दी जाती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/7580785813500cfbfd17ff1d06e173b517695123549121092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>गंभीर, अपराध, जिसे, अल्लाह, भी, नहीं, करते, माफ, मिलता, है, जहन्नुम, जानें, इस्लाम, में, गुनाए-ए-कबीरा, का, मतलब</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Horoscope Today: 28 जनवरी को धनु&#45;मीन सहित इन 4 राशियों पर &amp;apos;राहु&amp;apos; की टेढ़ी नज़र, 13:54 तक भूलकर भी न करें ये गलतियां!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4913</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4913</guid>
<description><![CDATA[ Aaj Ka Rashifal: 28 जनवरी 2026 का दिन जीवन में स्थिरता, अनुशासन और व्यवहारिक निर्णयों की परीक्षा लेता है. चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित होने से भावनाओं में गहराई तो रहेगी, लेकिन प्राथमिकता सुरक्षा, संसाधन और ठोस परिणामों पर रहेगी. सुबह कृतिका नक्षत्र 09:28 तक प्रभावी रहेगा, जो पुराने विषयों को निर्णायक रूप से समाप्त करने की प्रवृत्ति देता है. इसके बाद दिन अपेक्षाकृत शांत, लेकिन गंभीर सोच के साथ आगे बढ़ेगा.
आज ब्रह्म योग रात 23:54 तक बना रहेगा, जिससे शाम के समय मानसिक स्पष्टता और संतुलन बढ़ेगा. हालांकि आज अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है, इसलिए किसी भी बड़े निर्णय में जल्दबाज़ी करने से बचना उचित रहेगा. अशुभ समय इस प्रकार रहेगा-

यमघंट. 09:20 से 10:03
गुलिक काल. 11:13 से 12:34
राहु काल. 12:34 से 13:54

इन अवधियों में नई शुरुआत, निवेश, विवाद या भावनात्मक फैसलों से दूरी रखना ही समझदारी होगी. इसी ऊर्जा के आधार पर पेश है राशिफल-
धनु राशिफल. 28 जनवरी 2026
धनु राशि के लिए आज का दिन धैर्य, अनुशासन और आत्ममूल्यांकन का है. चंद्रमा वृषभ राशि में होने से आज आपका ध्यान कार्यप्रणाली, दिनचर्या और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर अधिक रहेगा. आप स्वभाव से बड़े लक्ष्य और दूर की सोच रखने वाले हैं, लेकिन आज परिस्थितियां आपसे छोटे और व्यवहारिक कदमों की मांग करेंगी.
सुबह कृतिका नक्षत्र 09:28 तक सक्रिय रहेगा. यह नक्षत्र आपको किसी पुरानी आदत, काम करने के तरीके या जिम्मेदारी को जड़ से बदलने का संकेत देता है. यदि आप लंबे समय से किसी अव्यवस्था या असंतुलन से जूझ रहे थे, तो आज उसके समाधान की दिशा स्पष्ट होगी.
यमघंट (09:20-10:03) और गुलिक काल (11:13-12:34) के दौरान स्वास्थ्य, नौकरी या दैनिक कार्यों से जुड़ा कोई नया प्रयोग न करें. 12:34 से 13:54 तक राहु काल रहेगा. इस समय जल्दबाज़ी में लिया गया कोई निर्णय थकान या नुकसान का कारण बन सकता है.
आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है, इसलिए निरंतरता और धैर्य ही आपकी सबसे बड़ी शक्ति होगी. ब्रह्म योग के प्रभाव से शाम के समय मानसिक संतुलन लौटेगा और आप अपने काम को व्यवस्थित रूप में देख पाएंगे.
Career. कार्यप्रणाली सुधारने का अवसर, दबाव बढ़ सकता है.Finance. खर्च नियंत्रित, लेकिन स्वास्थ्य पर खर्च संभव.Love. व्यवहारिक संवाद रिश्तों को स्थिर करेगा.Health. थकान, पेट या दिनचर्या से जुड़ी समस्या.Lucky Color. पीलाLucky Number. 3
मकर राशिफल. 28 जनवरी 2026
मकर राशि के लिए आज का दिन रचनात्मकता, जिम्मेदारी और भावनात्मक संतुलन की परीक्षा लेने वाला है. चंद्रमा वृषभ राशि में होने से आज आप अपने काम, उपलब्धियों और पहचान को लेकर गंभीर रहेंगे. आप चाहते हैं कि आपकी मेहनत को सही स्थान मिले, लेकिन इसके लिए आपको धैर्य रखना होगा.
सुबह कृतिका नक्षत्र 09:28 तक प्रभावी रहेगा. यह समय पुराने डर, संकोच या आत्म-संदेह को काटने के लिए अनुकूल है. यदि आप किसी रचनात्मक या नेतृत्व से जुड़े निर्णय को टाल रहे थे, तो आज उसके प्रति दृष्टिकोण बदल सकता है. यमघंट (09:20-10:03) और गुलिक काल (11:13-12:34) के दौरान जोखिम भरे निर्णय या टकराव से बचें. 12:34 से 13:54 तक राहु काल रहेगा.
इस समय प्रतिष्ठा, निवेश या संतान से जुड़े मामलों में सावधानी आवश्यक है. आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है, इसलिए परिणामों की जल्द अपेक्षा न करें. ब्रह्म योग शाम के समय आत्मविश्वास और संतुलन लौटाएगा.
Career. जिम्मेदारी बढ़ेगी, लेकिन पहचान भी मिलेगी.Finance. निवेश सोच-समझकर करें.Love. भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा.Health. पीठ या जोड़ों में दर्द.Lucky Color. स्लेटीLucky Number. 10
कुंभ राशिफल. 28 जनवरी 2026
कुंभ राशि के लिए आज का दिन घरेलू मामलों, मानसिक सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता पर केंद्रित रहेगा. चंद्रमा वृषभ राशि में होने से घर, परिवार और भावनात्मक आधार से जुड़े विषय प्रमुख रहेंगे. आप बाहरी दुनिया से ज़्यादा आज भीतर की स्थिरता खोजेंगे. सुबह कृतिका नक्षत्र 09:28 तक प्रभावी रहेगा.
यह समय पुराने पारिवारिक मतभेद, स्थान परिवर्तन या भावनात्मक बोझ को स्पष्ट करने के लिए अनुकूल है. हालांकि कटु शब्द स्थिति को बिगाड़ सकते हैं. यमघंट (09:20-10:03) और गुलिक काल (11:13-12:34) में घरेलू बहस या बड़े फैसले टालें.
12:34 से 13:54 तक राहु काल रहेगा. इस समय संपत्ति, वाहन या पारिवारिक निवेश से जुड़े निर्णय न लें. आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है, इसलिए भावनात्मक संतुलन बनाए रखना ही सबसे सही मार्ग होगा. ब्रह्म योग शाम को मानसिक शांति देगा.
Career. घर से जुड़े कार्य या रिमोट काम में फोकस.Finance. घरेलू खर्च बढ़ सकता है.Love. परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा.Health. छाती या तनाव से जुड़ी समस्या.Lucky Color. नीलाLucky Number. 11
मीन राशिफल. 28 जनवरी 2026
मीन राशि के लिए आज का दिन संवाद, सोच और मानसिक स्पष्टता का है. चंद्रमा वृषभ राशि में होने से आपकी सोच अधिक व्यवहारिक और ठोस होगी. आप जो महसूस करते हैं, उसे शब्दों में स्पष्ट रूप से व्यक्त करना चाहेंगे.
सुबह कृतिका नक्षत्र 09:28 तक प्रभावी रहेगा. यह समय पुराने भ्रम, गलतफहमियों और अधूरी बातों को स्पष्ट करने के लिए अनुकूल है. हालांकि जल्दबाज़ी में कही गई बात बाद में पछतावे का कारण बन सकती है. यमघंट (09:20-10:03) और गुलिक काल (11:13-12:34) के दौरान महत्वपूर्ण संवाद या दस्तावेज़ से जुड़ा काम न करें.
12:34 से 13:54 तक राहु काल रहेगा. इस समय यात्रा, निवेश या वादे टालना बेहतर रहेगा. आज अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है, इसलिए धैर्य और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ना ही सही रहेगा. ब्रह्म योग के प्रभाव से शाम को मानसिक स्थिरता लौटेगी.
Career. लेखन, संवाद और योजना में सफलता.Finance. खर्च सामान्य, लेकिन जल्दबाज़ी से बचें.Love. भावनात्मक बातचीत से संबंध मजबूत होंगे.Health. गले या सर्दी से जुड़ी परेशानी.Lucky Color. समुद्री हराLucky Number. 7 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/bf7aed19d261564080e9c53623dcb9111769519990302257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, Today:, जनवरी, को, धनु-मीन, सहित, इन, राशियों, पर, राहु, की, टेढ़ी, नज़र, 13:54, तक, भूलकर, भी, न, करें, ये, गलतियां</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 28 जनवरी का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4914</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4914</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 28 जनवरी 2026: आज 28 जनवरी 2026 को माघ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि और बुधवार है.धन का लेन-देन (उधार देना/लेना), काले रंग के कपड़े पहनना, बाल या नाखून काटना, और पश्चिम दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए. इस दिन गणेश विघ्नहर्ता स्तोत्र का पाठ करें.&amp;nbsp;
28 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 28 January 2026)



तिथि

दशमी (27 जनवरी 2026, रात 7.05 - 28 जनवरी 2026, शाम 4.35)



वार
बुधवार


नक्षत्र
कृत्तिका


योग
ब्रह्म, सर्वार्थ सिद्धि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
दोपहर1.02


चंद्रोस्त
सुबह 3.39, 29 जनवरी


चंद्र राशि
मेष



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


लाभ
सुबह 7.11 - सुबह 8.32


अमृत
सुबह 8.32- सुबह 9.53


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 7.36 - रात 9.15


अमृत
रात 9.15 - रात 10.55



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 12.34 - दोपहर 1.55


यमगण्ड काल
सुबह 8.32 - सुबह 9.53


गुलिक काल
सुबह 11.13 - दोपहर 12.34


आडल योग
सुबह 7.11 - सुबह 9.26


विडाल योग
सुबह 9.26 - सुबह 7.11, 29 जनवरी


भद्रा काल
सुबह 3.16 - सुबह 7.11, 29 जनवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 28 January 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
मेष


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कुंभ राशि
संतान के प्रति भी आप अपना दायित्व बखूबी निभाएंगे.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



धनु राशि
अपनी वाणी और गुस्से पर संयम रखने से आप कई मुश्किलों से बच सकते है. बिना मतलब दूसरों की परेशानियों में न उलझें



FAQs: 28 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




&amp;nbsp;नहाने के पानी में इलायची उबालकर डालना, 5 हरी इलायची पर्स में रखना या गणेश जी को अर्पित करना शामिल है. यह उपाय शुक्र और बुध दोनों को मजबूत कर जीवन में सकारात्मकता लाते हैं.&amp;nbsp;




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग और ब्रह्म योग बन रहे हैं.
Mahashivratri 2026 Date: महाशिवरात्रि पर कुंभ सहित 3 राशियों पर बरसेगी शिव कृपा, बढ़ेगा धन, मिलेगी सफलता




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/1f14b7adfbc87ff7b225340ea2721af91769543828529499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>बेटी की शादी में आ रही है रुकावटें होंगी दूर, मिलेगा मनचाहा वर! पति प्राप्ति के लिए चमत्कारी पार्वती स्तोत्र!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4911</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4911</guid>
<description><![CDATA[ Pati prapti parvati stotra: पार्वती स्तोत्र का पाठ अत्यंत लाभकारी और चमत्कारी माना गया है. जिन भी लोगों को पुत्री विवाह में होने वाली देरी या किसी भी तरह की बाधा का सामना करना पड़ता है, उन्हें माता पार्वती का पूजन करने के साथ पति प्राप्ति स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए.&amp;nbsp;
जो भी व्यक्ति पार्वती स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करता है, उसके जीवन में खुशियां बनी रहती है और तो और कुंवारी महिलाओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है. आपको बता दें कि, &amp;nbsp;(Pati Prapti Parvati Stotra) से माता पार्वती प्रसन्न होने के साथ अपने भक्त पर विशेष कृपा होती है.&amp;nbsp;
पति प्राप्ति पार्वती स्तोत्र पाठ के नियम?
अविवाहित महिलाओं को पार्वती स्तोत्र का पाठ करने से पहले स्नान कर साफ वस्त्रों को धारण करना चाहिए.&amp;nbsp;इसके बाद मां पार्वती की मूर्ति या फोटो को स्थापित करें.&amp;nbsp;उनके समक्ष घी का दीपक जलाकर फल-फूल अर्पित करें.&amp;nbsp;पवित्र मन से मां पार्वती का ये स्तोत्र पढ़ें.&amp;nbsp;

&amp;nbsp;जानकीकृतं पार्वतीस्तोत्रम् ॥जानकी उवाच:
शक्तिस्वरूपे सर्वेषां सर्वाधारे गुणाश्रये ।सदा शंकरयुक्ते च पतिं देहि नमोsस्तु ते ॥1॥
सृष्टिस्थित्यन्त रूपेण सृष्टिस्थित्यन्त रूपिणी ।सृष्टिस्थियन्त बीजानां बीजरूपे नमोsस्तु ते ॥2॥
हे गौरि पतिमर्मज्ञे पतिव्रतपरायणे ।पतिव्रते पतिरते पतिं देहि नमोsस्तु ते ॥3॥
सर्वमंगल मंगल्ये सर्वमंगल संयुते ।सर्वमंगल बीजे च नमस्ते सर्वमंगले ॥4॥
सर्वप्रिये सर्वबीजे सर्व अशुभ विनाशिनी ।सर्वेशे सर्वजनके नमस्ते शंकरप्रिये ॥5॥
परमात्मस्वरूपे च नित्यरूपे सनातनि ।साकारे च निराकारे सर्वरूपे नमोsस्तु ते ॥6॥
क्षुत् तृष्णेच्छा दया श्रद्धा निद्रा तन्द्रा स्मृति: क्षमा ।एतास्तव कला: सर्वा: नारायणि नमोsस्तु ते ॥7॥
लज्जा मेधा तुष्टि पुष्टि शान्ति संपत्ति वृद्धय: ।एतास्त्व कला: सर्वा: सर्वरूपे नमोsस्तु ते ॥8॥
दृष्टादृष्ट स्वरूपे च तयोर्बीज फलप्रदे ।सर्वानिर्वचनीये च महामाये नमोsस्तु ते ॥9॥
शिवे शंकर सौभाग्ययुक्ते सौभाग्यदायिनि ।हरिं कान्तं च सौभाग्यं देहि देवी नमोsस्तु ते ॥10॥
स्तोत्रणानेन या: स्तुत्वा समाप्ति दिवसे शिवाम् ।नमन्ति परया भक्त्या ता लभन्ति हरिं पतिम् ॥11॥
इह कान्तसुखं भुक्त्वा पतिं प्राप्य परात्परम् ।दिव्यं स्यन्दनमारुह्य यान्त्यन्ते कृष्णसंनिधिम् ॥12॥श्री ब्रह्मवैवर्त पुराणे जानकीकृतं पार्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/d0e226b74f04db9dc82fa7547d95995e17695158236121092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>बेटी, की, शादी, में, आ, रही, है, रुकावटें, होंगी, दूर, मिलेगा, मनचाहा, वर, पति, प्राप्ति, के, लिए, चमत्कारी, पार्वती, स्तोत्र</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Phulera Dooj 2026: फुलेरा दूज कब, नोट करें डेट, मुहूर्त, मांगलिक कार्य के लिए सबसे खास दिन</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4912</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4912</guid>
<description><![CDATA[ Phulera Dooj 2026: फाल्गुन माह में आने वाला त्योहार फुलेरा दूज बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस साल फुलेरा दूज 19 फरवरी 2026 को है. ये पर्व प्रेम, आनंद और उल्लास का प्रतीक है.&amp;nbsp; ऐसा माना जाता है कि यह दिन विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने और वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने के लिए विशेष तरह से शुभ होता है.
फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि पर मनाया जाने वाला त्योहार फुलेरा दूज ब्रज क्षेत्र में खासकर मथुरा-वृन्दावन में अधिक महत्वपूर्ण पर्व होता है. इस दिन को राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक पर्व माना जाता है. उनकी पूजा होती है और फूलें से विशेष श्रृंगार किया जाता है.
फुलेरा दूज 2026
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 18 फरवरी 2026 को शाम 4.57 पर सुरू होगी और अगले दिन 19 फरवरी 2026 को दोपहर 3.58 पर समाप्त होगी.
फुलेरा दूज 2026 मुहूर्त

शुभ - सुबह 6.56 - सुबह 8.21
चर - सुबह 11.10 - दोपहर 12.35
लाभ - दोपहर 12.35 - दोपहर 2.00

कैसे मनाते हैं फुलेरा दूज

फुलेरा दूज के इस अवसर पर कृष्ण मन्दिरों में विशेष झांकी और दर्शन आयोजित किये जाते हैं, जिसमें भगवान कृष्ण को होली की तैयारी करते हुये दर्शाया जाता है.
फुलेरा दूज के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद राधा-कृष्ण को नए वस्त्र पहनाएं, उन्हें रंग बिरंगे फूलों से सजाएं.
माखन मिश्री का बोग लगाएं. धूप-दीप जलाएं और &#039;ॐ क्लीं कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभय स्वाहा&#039; मंत्र का 108 बार जाप करें. मान्यता है इससे प्रेम विवाह या शीघ्र विवाह के योग बनते हैं.
इसके बाद परिवार और मित्रों के साथ फूलों की होली खेलें, जो प्रेम और आनंद का प्रतीक मानी जाती है.

इस दिन मांगलिक कार्य क्यों करना शुभ
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फुलेरा दूज का दिन समस्त प्रकार के दोषों से मुक्त होता है इसीलिये, सभी प्रकार के मांगलिक के लिए खासकर विवाह, सगाई, रिश्ता पक्का करने के लिए, गृह प्रवेश आदि के लिए&amp;nbsp; फुलेरा दूज के दिन किसी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है.
Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत ? नोट करें डेट, शिव साधना से दूर होगी धन की समस्या


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/a87f7f5e06d84995ab11c73e10694ad91769523204068499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Phulera, Dooj, 2026:, फुलेरा, दूज, कब, नोट, करें, डेट, मुहूर्त, मांगलिक, कार्य, के, लिए, सबसे, खास, दिन</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Shab&#45;E&#45;Barat 2026: शब&#45;ए&#45;बारात 4 फरवरी को! इसे क्यों कहते है माफी की रात</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4909</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4909</guid>
<description><![CDATA[ Shab-E-Barat 2026 Date: शब-ए-बारात मुस्लिम समुदाय के महत्वपूर्ण त्योहारों में एक है, जिसका इस्लाम में काफी महत्व बताया गया है. इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, हर साल शब-ए-बारात शाबान महीने की 14वीं और 15वीं रात के मध्य में मनाई जाती है. लेकिन ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार तिथि बदल जाती है.
शब-ए-बारात 2026 डेट (Shab-E-Barat Kab Hai)
शब-ए-बारात इस साल 2026 में 4 या 5 फरवरी को हो सकती है. हालांकि यह संभावित तिथि है, क्योंकि चांद नजर आने के बाद ही सटीक तिथि की घोषणा की जाती है.
शब-ए-बारात 2026 को क्यों कहते हैं माफी की रात
शब-ए-बारात की रात इस्लाम में काफी अहम मानी जाती है. दुनियाभर के मुसलमान इसे तौबा या फिर माफी (मगफिरत) की रात के रूप में भी मनाते हैं. इस रात विशेष नमाज अदा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि, इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआ कबूल करते हैं और उन्हें माफी देते हैं. इसलिए इस रात मुसलमान दुआ और तिलावत कर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और बुरे कामों को करने से तौबा करते हैं.
पूरी रात इबादत और तिलावत का दौर चलता है. साथ ही शब-ए-बारात की रात लोग अपने उन परिजनों, जो दुनिया से रुखसत हो चुके हैं, उनकी मगफिरत (मोक्ष) के लिए भी दुआएं करते हैं. लोग पूर्वजों के कब्र यानी कब्रिस्तान जाकर फूल चढ़ाते हैं और मोमबत्तियां जलाते हैं. साथ ही शब-ए-बारात पर रोजा भी रखा जाता है, हालांकि यह रोजा फर्ज ना होकर नफिल रोजा होता है.
शब-ए-बारात का महत्व (Shab-E-Barat 2026 date significance)
मुस्लिम धर्म गुरुओं के अनुसार, शब-ए-बारात को इस्लाम की चार मुकद्दस रातों (आशूरा की रात, शब-ए-मेराज, शब-ए-कद्र और शब-ए-बारात) में एक माना जाता है. शब-ए-बारात में शब का अर्थ है रात और बारात का अर्थ है गुनाहों से बरी होने की रात. शब-ए-बारात इस्लाम के आठवें महीने शाबान में मनाई जाती है. इस्लाम में इसे बहुत ही मुबारक महीना माना जाता है. शब-ए-बारात के 15 दिन बाद पवित्र रमजान (Ramadan 2026) की शुरुआत होती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/a49a3991e5bd8eaa99cace762ce7c1451769524278361466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Shab-E-Barat, 2026:, शब-ए-बारात, फरवरी, को, इसे, क्यों, कहते, है, माफी, की, रात</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि की रात कलावा और हल्दी का छोटा सा उपाय, चट मंगनी&#45;पट होगी शादी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4910</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4910</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/a9af1ae53286aa57e8535b663ed423191769526954435499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:17 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, महाशिवरात्रि, की, रात, कलावा, और, हल्दी, का, छोटा, सा, उपाय, चट, मंगनी-पट, होगी, शादी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ramadan 2026: भारत में कब शुरू होगा रमजान का पाक महीना? जानें ईद&#45;उल&#45;फितर की संभावित तारीख</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4908</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4908</guid>
<description><![CDATA[ Ramadan 2026:&amp;nbsp;इस्लामिक कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना रमजान भारत समेत दुनियाभर के मुसलमानों के लिए रोजा (उपवास), प्रार्थना और दान का महीना है. कई लोग पहले से ही इस बात को जानना चाहते हैं कि, आखिर भारत में रमजान कब शुरू होगा और ईद-उल-फितर कब मनाई जाएगी?
भारत में रमजान 2026 की तारीख (Ramadan 2026 Date)
इस्लाम धर्म में रमजान इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है, जो चांद दिखने पर आधारित है. इस वजह से इसकी शुरुआत की तारीख प्रत्येक वर्ष बदलती रहती है और स्थानीय स्तर पर चांद दिखने की स्थिति के आधार पर अलग-अलग देशों में इसके समय में बदलाव देखने को मिलता है.&amp;nbsp;
भारत में रमजान 2026 की शुरुआत इस साल 19 फरवरी 2026 गुरुवार से होनी की उम्मीद है. हालांकि धार्मिक अधिकारियों के द्वारा चांद देखे जाने के बाद ही इसकी सटीक तिथि के बारे में बताया जाएगा. रमजान के दौरान, मुसलमान आमतौर पर उपवास रखते हैं, जिन्हें रोजा कहा जाता है. इस दौरान अल्लाह की प्रार्थना और दान का विशेष महत्व होता है.
रमजान के दौरान मुसलमान पूरे महीने सुबह (सुहूर) से शाम (इफ्तार) तक रोजा रखते हैं और दिन के समय भोजन, पेय और अन्य शारीरिक जरूरतों से बचा जाता है. रमजान के महीने में नमाज पढ़ना, कुरान पढ़ना और जकात व सदका सहित दान-पुण्य भी किया जाता है.&amp;nbsp;
रमजान की अवधि
रमजान का महीना 29 से 30 दिनों का होता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि, अगला चांद कब दिखाई देता है. आखिरी के 10 दिनों में तरावीह और कियाम-उल-लैल नामक विशेष प्रार्थना पर जोर दिया जाता है.&amp;nbsp;
ईद-उल-फितर 2026 संभावित तिथि
ईद-उल-फितर इस्लामी कैलेंडर का महत्वपूर्ण त्योहार है, जो रमजान के खत्म होने का प्रतीक है और आमतौर पर प्रार्थनाओं, दावतों और उपहारों के आदान-प्रदान के साथ मनाया जाएगा.&amp;nbsp;
भारत में ईद-उल-फितर 2026 चंद्रमा दर्शन के आधार पर 20 या 21 मार्च 2026 को पड़ने की उम्मीद है.&amp;nbsp;
इस्लाम में इस त्योहार की शुरुआत में मस्जिदों और खुले मैदानों में आयोजित विशेष ईद की नमाज से होती है, जिसके बाद उत्सव के भोज का आनंद उठाया जाता है, लोग एक दूसरे को गले लगकर शुभकामनाएं देते हैं. बच्चों को ईदी देने के साथ जकात के रूप में जरूरतमंदों को दान किया जाता है, जिसे ईद की नमाज से पहले अदा करना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;

रमजान की शुरुआत- 19 फरवरी, 2026
ईद-उल-फितर की तिथि- 20 या 21 मार्च, 2026 (चांद दिखने पर आधारित

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/bb8a6c14f65b6dadcd95e85eed3c3a4a17695746248841092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:16 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ramadan, 2026:, भारत, में, कब, शुरू, होगा, रमजान, का, पाक, महीना, जानें, ईद-उल-फितर, की, संभावित, तारीख</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर ये गलती की तो सालभर रहेगी परेशानी! पूजा से पहले जरूर जान लें नियम?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4907</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4907</guid>
<description><![CDATA[ MahaShivratri 2026 Puja Niyam: शिवरात्रि के मौके पर भक्तजन शिवजी की पूजा-अर्चना करने के साथ रातभर भजन-कीर्तन करते हैं. मान्यताओं के मुताबिक इस दिन उपवास रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होने के साथ जीवन में सुख और समृद्धि का आगमन होता है. हालांकि शास्त्रों में उपवास के लिए कुछ नियमों को बताया गया है, जिनका पालन करना बेहद जरूरी है.&amp;nbsp;
इस साल महाशिवरात्रि का अत्यंत पवित्र पर्व 15 फरवरी 2026 के दिन मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि के मौके पर निशीथ काल की पूजा का समय 15 फरवरी 2026 की रात को 11.52 मिनट से लेकर 16 फरवरी 2026 पूर्वाह्न 12.42 तक रहेगा.&amp;nbsp;
शिवरात्रि के मौके पर इन नियमों का पालन करें?
शिवजी की पूजा में जल अर्पित करने के कई नियम शामिल हैं, जिनका पालन करना हम सभी के लिए बेहद जरूरी है. यदि इन नियमों को अनदेखा किया जाए तो पूजा का संपूर्ण फल नहीं मिलता है. आइए सबसे पहले जानते हैं शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही नियम क्या है?&amp;nbsp;

शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके खड़ा होना चाहिए.&amp;nbsp;
ऐसा करने से महादेव प्रसन्न होने के साथ आपकी पूजा को स्वीकार करते हैं.
जल अर्पित करते समय इस बात का ध्यान रखें कि, जल उत्तर दिशा से शिवलिंग पर गिरे.&amp;nbsp;
जल अर्पित करने के फौरन बाद परिक्रमा लगाना उचित नहीं माना जाता है.&amp;nbsp;

महाशिवरात्रि के दिन इन नियमों का सख्ती से पालन करें?
महाशिवरात्रि के मौके पर शिवजी की पूजा करने के लिए सही बर्तन का चयन करना बेहद जरूरी है. पूजा में कांसे के बर्तन का इस्तेमाल करना अशुभ होता है. इसलिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के सोना, चांदी या तांबे के बर्तन का प्रयोग करें.
महाशिवरात्रि पर काले रंग के वस्त्रों को धारण करने से बचने चाहिए. ऐसा करने से शिवजी नाराज होते हैं. पूजा के लिए पीले या हल्के रंगों के वस्त्रों को धारण करें. इनमें सफेद, आसमानी, गुलाबी और नारंगी कलर भी शामिल है.&amp;nbsp;
अगर किसी कारण से महाशिवरात्रि के मौके पर व्रत नहीं रख सकते हैं, तो उस दिन भूलकर भी तामसिक भोजन, जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन करने से बचें. ऐसा माना जाता है कि, इससे पूजा का फल कम होता है.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि पर अपने मन को शुद्ध रखें किसी भी तरह का गलत विचार मन में न आने दे.
व्रत के दौरान अनाज की जगह फलों का ही सेवन करें. इस पावन पवित्र मौके पर भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से मन शांत रहता है.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव को तुलसी के पत्ते अर्पित करना वर्जित माना जाता है.
इसके अलावा भगवान शिव को तिल अर्पित करने से भी बचें, क्योंकि तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ है.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि के दौरान भगवान शिव को भूलकर भी टूटे हुए चावल नहीं चढ़ाने चाहिए.&amp;nbsp;
इसके अलावा महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव को नारियल का पानी भी नहीं चढ़ाना चाहिए.&amp;nbsp;
महाशिवरात्रि पर शिवजी को बिल्वपत्र चढ़ाने का विशेष महत्व होता है. ऐसे में बिल्व पत्र के तीनों पत्ते पूरे होने चाहिए, खंडित पत्र कभी भी न अर्पित करें.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/28/a0846b9284faf6f04d7e31202fa190ae17695786670811092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 28 Jan 2026 11:46:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, महाशिवरात्रि, पर, ये, गलती, की, तो, सालभर, रहेगी, परेशानी, पूजा, से, पहले, जरूर, जान, लें, नियम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी 29 जनवरी को, व्रत में इन नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4853</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4853</guid>
<description><![CDATA[ Jaya Ekadashi Niyam: जया एकादशी व्रत का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. इस दिन श्रीहरि विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. जया एकादशी का व्रत रखने वाले जातकों के सारे संताप दूर होते हैं और अनंत सुख मिलता है. लेकिन जाने-अनजाने में इस दिन व्रत के दौरान कुछ कार्य करना न सिर्फ आपको नुकसान पहुंचा सकता है बल्कि इन कार्यों से व्रत का पुण्यफल भी घटना है. इसलिए यह जान लें कि जया एकादशी व्रत में किन नियमों की अनदेखी बिल्कुल भी न करें.
जया एकादशी 29 जनवरी 2026 को (Jaya Ekadashi Date 2026)
जया एकादशी तिथि को लेकर कई लोग दुविधा में हैं, क्योंकि 28 और 29 जनवरी दोनों ही दिन एकादशी तिथि रहने वाली है. लेकिन व्रत 29 जनवरी को रखना ही मान्य होगा. दरअसल पंचांग (Jaya Ekadashi 2026 Panchang) के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 28 जनवरी को शाम 04.35 पर होगा और 29 जनवरी को दोपहर 01.55 पर समाप्त हो जाएगा. उदयातिथि के आधार पर जया एकादशी का व्रत और पूजन गुरुवार 29 जनवरी 2026 को होगा. वहीं जया एकादशी व्रत का पारण 30 जनवरी को सुबह 06.41 से 08.56 पर किया जाएगा.
एकादशी पर किए ये काम पड़ सकते हैं भारी (Jaya Ekadashi Fasting Rules)
चावल का सेवन और दान- एकादशी तिथि पर चावल का सेवन पूरी तरह से वर्जित होता है. वैसे तो यह तिथि दान के लिए अतिशुभ मानी जाती है. लेकिन एकादशी तिथि पर चावल का दान नहीं करना चाहिए. आप अपनी क्षमतानुसार अन्य चीजों का दान कर सकते हैं.
वाणी और क्रोध पर संयम- एकादशी का व्रत रखने वाले जातक लड़ाई-झगड़े से दूर रहे. घर पर बड़े बुजुर्ग या बच्चों पर भी क्रोध न दिखाएं और वाणी पर संयम रखें. गुस्सा करने, चिल्लाने, तेज आवाज में बोलने या झूठ बोलकर व्रत-पूजा करने से इसका पुण्य नहीं मिलता है. इस बात का ध्यान रखें कि, कोई भी व्रत मन, वचन और कर्म से पूरा होता है, न कि केवल भूखा रहने से.
तुलसी तोड़ना- एकादशी तिथि पर भूलकर भी तुलसी को तोड़ने से बचना चाहिए. ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा नहीं मिलती. माना जाता है कि, तुलसी भी एकादशी का व्रत रखती है और इस दिन यदि तुलसी को छूआ जाए या पत्तियां तोड़ी जाए तो इससे उसका व्रत टूट सकता है.
इन नियमों का भी करें पालन- एकादशी पर पूर्ण रूप से सात्विकता का पालन करें. लहसुन-प्याज और मांस-मदिरा से पहरेज करें. इसके साथ ही मसूर की दाल, शहद, बैंगन आदि का सेवन भी न करें. एकादशी व्रथ में ब्रह्मचर्य का भी पालन करना अनिवार्य होता है.



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/26/2419ca56a94e141bacedf835e17234601769422788209466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:15 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Jaya, Ekadashi, 2026:, जया, एकादशी, जनवरी, को, व्रत, में, इन, नियमों, की, अनदेखी, पड़, सकती, है, भारी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>गणतंत्र दिवस 2026 पर केसरिया रंग से सजे बाबा महाकाल और काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग, करें दर्शन</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4852</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4852</guid>
<description><![CDATA[ Jyotirlinga Temple On Republic Day 2026: देशभर में आज 26 जनवरी 2026 को जोश, उत्साह और गर्व के साथ 77वां गणतंत्र दिवस मनाया गया. इस दौरान उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम को भी अद्भुत तरीके से सजाया गया. इन दोनों स्थानों पर महादेव केसरिया, सफेद और हरे रंग में रंगे नजर आएं.
मंदिर से लेकर महादेव का अद्भुत श्रृंगार
गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगे के रंग से ना सिर्फ महादेव का श्रृंगार किया गया, बल्कि मंदिर को केसरिया, सफेद और हरे रंग के लाइट और फूलों से सजाया गया. इस तरह यहां आने वाले भक्त आज महादेव की भक्ति के साथ ही राष्ट्र भक्ति में सराबोर हो रहे हैं. भक्त भारत माता की जय और महाकाल की जय के उद्घोष लगा रहे हैं. महाकाल का यह अनूठा श्रृंगार देख भक्त भी मंत्रमुग्ध हो गए. गणतंत्र दिवस के मौके पर महादेव का श्रृंगार और मंदिर की सजावट राष्ट ध्वज का प्रतीक है.
महादेव के मस्तिक पर सुशोभित हुआ तिरंगा
गणतंत्र दिवस के मौके पर आज बाबा महाकाल का तिलक भी तिरंगे के रंग यानी केसरिया, सफेद और हरे रंग से किया गया. वहीं काशी विश्वनाथ धाम में महादेव को तिरंगे के रंग की माला पहनाई गई. इतना ही नहीं बाबा महाकाल के पुजारी भी आज गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगे के रंग की वेशभूषा में दिखाई दिए.

गणतंत्र दिवस पर तिरंगे के रंगों में सजे महादेव और मंदिर का यह स्वरूप राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अनोखा संगम है. एक ओर देश जहां संविधान और लोकतंत्र का उत्सव मना रहा है, वहीं दूसरी ओर देवालयों का यह दृश्य भी मंत्रमुग्ध करता है. यह अद्भुत दृश्य देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी सशक्त रूप से दर्शाता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/26/0b3bfc32e29a6e385fdaca90df3474721769425941222466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:14 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>गणतंत्र, दिवस, 2026, पर, केसरिया, रंग, से, सजे, बाबा, महाकाल, और, काशी, विश्वनाथ, ज्योतिर्लिंग, करें, दर्शन</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Falgun Month 2026: फाल्गुन कब से शुरू हो रहा है, इसका महत्व, नियम, व्रत त्योहार सब जानें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4850</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4850</guid>
<description><![CDATA[ Falgun Month 2026: हिंदू कैलेंडर का आखिरी महीना फाल्गुन 2 फरवरी 2026 से शुरू हो रहा है, ये 3 मार्च 2026 तक रहेगा. . इस महीने की पूर्णिमा को फाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण इसका नाम फाल्गुन पड़ा है. इसे को आनंद और उल्लास का महीना कहा जाता है. इस महीने से धीरे-धीरे गर्मी की शुरुआत हो जाती है और ठंड कम होने लगती है.
फाल्गुन शिव पार्वती जी की विवाह वर्षगांठ यानी महाशिवरात्रि, राधा-कृष्ण का प्रिय त्योहार होली मनाया जाता है. फाल्गुन माह में क्या करना चाहिए, क्या न करें, इस माह का महत्व, नियम और व्रत-त्योहार जानें.
फाल्गुन माह में किसी पूजा करें

फाल्गुन माह में संतान प्राप्ति के लिए बाल कृष्ण, प्रेम और वैवाहिक जीवन में सुख के लिए युवा कृष्ण और ज्ञान और वैराग्य के लिए गुरु के रूप में श्रीकृष्ण की पूजा करनी चाहिए. इसके अलावा महाशिवरात्रि पर महादेव की आराधना करें.
मान्यता है कि चंद्रमा की उत्पत्ति फाल्गुन मास में हुई थी, इसी कारण मानसिक शांति और मन की स्थिरता के लिए इस माह चंद्रदेव की आराधना की जाती है.

फाल्गुन माह में क्या करें

फाल्गुन माह में मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं, जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नए बिजनेस की शुरुआत हो जाती है.
इस महीने भगवान श्रीकृष्ण और महादेव को गुलाल चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से जीवन खुशहाल होता है.
इस महीने में गाय की सेवा करनी चाहिए. ऐसा करना बहुत पुण्यदायी होता है.
इस माह में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है.
फाल्गुन मास में अन्न, वस्त्र, गुड़, चावल और तिल का दान करने से विशेष लाभ मिलता है.

फाल्गुन में क्या न करें

फाल्गुन महीने में मांस, मदिरा और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई रखें.
इस महीने में किसी के भी प्रति अपने मन में नकारात्मक विचारों को नहीं लाना चाहिए.

फाल्गुन व्रत त्योहार&amp;nbsp;

5 फरवरी -&amp;nbsp; संकष्टी चतुर्थी
13 फरवरी - विजया एकादशी, कुम्भ संक्रांति
14 फरवरी - प्रदोष व्रत (कृष्ण)
15 फरवरी - महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि
17 फरवरी - फाल्गुन अमावस्या
24 फरवरी - होलाष्टक शुरू
27 फरवरी - आमलकी एकादशी
28 फरवरी - प्रदोष व्रत (शुक्ल)

Holashtak 2026: होलाष्टक कब से होंगे शुरू,नोट करें डेट, इन 8 दिनों में बुरी शक्तियां रहती हैं सक्रिय
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/097dd42b18043a0c1081304bd61b9bf81769453603508499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Falgun, Month, 2026:, फाल्गुन, कब, से, शुरू, हो, रहा, है, इसका, महत्व, नियम, व्रत, त्योहार, सब, जानें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 27 जनवरी का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4851</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4851</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 27 जनवरी 2026: आज 27 जनवरी 2026 को माघ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि और मंगलवार है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जो लोग मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। साथ ही सभी कष्टों से मुक्ति भी मिल जाती है. भाग्य का साथ मिलने लगता है. हनुमान जी हर सयम आप पर मेहरबान रहते हैं.
27 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 27 January 2026)



तिथि

नवमी (26 जनवरी 2026, रात 9.17 - 27 जनवरी 2026, रात 7.05)



वार
मंगलवार


नक्षत्र
भरणी


योग
शुक्ल


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 12.12


चंद्रोस्त
सुबह 2.13, 28 जनवरी


चंद्र राशि
मेष



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह&amp;nbsp; 9.53 - सुबह 11.13


लाभ
सुबह 11.13 - दोपहर 12.34


अमृत
दोपहर 12.34 - दोपहर 1.55


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 7.36 - रात 9.15



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 3.15 - शाम 4.36


यमगण्ड काल
सुबह 9.53 - सुबह 11.13


गुलिक काल
दोपहर 12.34 - दोपहर 1.55


आडल योग
सुबह 11.08 - सुबह 7.13, 28 जनवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 27 January 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
मेष


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



मिथुन राशि
अपने कार्यों के प्रति समर्पण भावना आपको नए रास्ता दिखाएगी और फायदा भी होगा.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



मेष राशि
असंतुलित दिनचर्या की वजह से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत हो सकती है। योग और व्यायाम के लिए भी कुछ समय अवश्य निकालें.



FAQs: 27 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




मंदिर में हनुमान जी के सामने बैठकर एक बार सुंदर कांड और सात बार हनुमान चालीसा का पाठ करें. उसके बाद पूजा में कम से कम 7 लड्डू का भोग भी लगाएं. मान्यता है कि इस तरह के उपाय करने से आर्थिक संकट से छुटकारा मिलता है.




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन शुक्ल योग बन रहे हैं.
Magh Mela 2026: माघ मेले में इस दिन होगा अमृत स्नान, पूरे महीने स्नान करने के समान मिलता है पुण्य




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/84262d46540e11271f70e775b7488dd61769455379450499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Jaya Ekadashi 2026: जनवरी 2026 में जया एकादशी और गुरुवार का संयोग, कर लें ये काम</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4847</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4847</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/45034e6eb55e7e1bb9733404a29a93e61769493732945466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Jaya, Ekadashi, 2026:, जनवरी, 2026, में, जया, एकादशी, और, गुरुवार, का, संयोग, कर, लें, ये, काम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026 Date: महाशिवरात्रि पर कुंभ सहित 3 राशियों पर बरसेगी शिव कृपा, बढ़ेगा धन, मिलेगी सफलता</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4848</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4848</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/7dddcc9fdf03ee539211b3fd69fddc4a1769457394838499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026, Date:, महाशिवरात्रि, पर, कुंभ, सहित, राशियों, पर, बरसेगी, शिव, कृपा, बढ़ेगा, धन, मिलेगी, सफलता</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Gupt Navratri 2026: माघ गुप्त नवरात्रि की नवमी पर चुपके से कर लें ये उपाय, रातों रात खत्म होगी परेशानी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4849</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4849</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/6d23fa0c8b83742bbcd76ddb79b067ad1769456909921466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Gupt, Navratri, 2026:, माघ, गुप्त, नवरात्रि, की, नवमी, पर, चुपके, से, कर, लें, ये, उपाय, रातों, रात, खत्म, होगी, परेशानी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>क्या आप भी पति को &amp;apos;Hubby&amp;apos; बुलाती हैं? कथावाचक शिवम साधक महाराज से जानिए इसके पीछे का तर्क?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4846</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4846</guid>
<description><![CDATA[ आज के तेजी से बदलते दौर में सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण कई महिलाएं अपने पति को प्यार से &#039;Hubby&#039; कहकर बुलाती हैं. अधिकतर शादीशुदा महिलाओं को यह एक मॉर्डन, क्यूट और रोमांटिक संबोधन लगता है.
लेकिन ऐसे में सवाल यह है कि, क्या हमें बिना मतलब जानें किसी भी शब्द का इस्तेमाल करना चाहिए? जानिए कथावाचक शिवम साधक महाराज से इसके पीछे का तर्क?
Hubby भारतीय परंपरा का हिस्सा नहीं?&amp;nbsp;
&amp;ldquo;हबी&amp;rdquo; कोई भारतीय परंपरा या हिंदी से निकला शब्द नहीं है. यह मूल रूप से अरबी भाषा का शब्द है, जिसका इस्तेमाल मुस्लिम समाज में होता है और वहां इसका मतलब होता है, &#039;प्रिय&#039; या डार्लिंग, यानी यह शब्द विदेशी है.
यह शब्द भारतीय भाषिक परंपरा का हिस्सा नहीं है. इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन समस्याएं तब शुरू होती हैं, जब लोग इस शब्द का बिना अर्थ, बिना संदर्भ और बिना सांस्कृतिक समझ के अपनाते हैं.&amp;nbsp;



&amp;nbsp;

&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

View this post on Instagram

&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;
&amp;nbsp;



&amp;nbsp;
&amp;nbsp;

A post shared by Dr Shivam Sadhak Jii Maharaj (@shivamsadhak_ji)





कथावाचक शिवम साधक से जानें इसके पीछे का तर्क?&amp;nbsp;
कथावाचक शिवम साधक का कहना है कि, बिना सोचे-समझे विदेश शब्दों को अपनाकर हम धीरे-धीरे अपनी ही भाषिक पहचान को खो रहे हैं. आज हबी हैं, कल कुछ और होगा, और परसों हम खुद भूल जाएंगे कि, हमारी भाषा में क्या शब्द थे.
वैसे भी सनातन परंपरा में पति के लिए सैकड़ों संबोधन पहले से ही मौजूद हैं, जैसे कि- पति, स्वामी, प्राणनाथ, जीवनसाथी, अर्धांग, प्रियतम आदि. ये शब्द केवल रोमांटिक ही नहीं, बल्कि सम्मान, जिम्मेदारी और दायित्व भाव से भी भरे हैं. इसके मुकाबले हबी केवल एक ट्रेंड है, जिसका न कोई भारतीय संदर्भ है और न ही सांस्कृतिक जुड़ाव.
मॉर्डन कल्चर के साथ अपनी सांस्कृति का भी करें सम्मान
आज के समय का कड़वा सच ये भी है कि, लोग मॉर्डन बनने के चक्कर में अक्सर अपनी जड़ों को हीन समझने लगते हैं. उन्हें लगता है कि, अंग्रेजी या विदेश शब्द बोलने से वे अधिक कूल, स्मार्ट और काफी प्रोग्रेसिव भी दिखेंगे. जबकि असल में यह प्रोग्रेस नहीं, बल्कि सांस्कृतिक असुरक्षा की ओर इशारा करता है.
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/6dc669acf927659e8c21cd8108239a1f17694972388431092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>क्या, आप, भी, पति, को, Hubby, बुलाती, हैं, कथावाचक, शिवम, साधक, महाराज, से, जानिए, इसके, पीछे, का, तर्क</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Pradosh Vrat 2026: जनवरी का आखिरी प्रदोष व्रत ? नोट करें डेट, शिव साधना से दूर होगी धन की समस्या</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4845</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4845</guid>
<description><![CDATA[ Shukra Pradosh Vrat 2026:&amp;nbsp;प्रदोष व्रत समस्त पाप मुक्ति, आरोग्य, धन-समृद्धि और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रखा जाता है. शिव जी को प्रसन्न करने के लिए ये व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. 30 जनवरी 2026 को शुक्र प्रदोष व्रत है. ये माघ महीने का दूसरा प्रदोष व्रत होगा.
शुक्र प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 30 जनवरी 2026 को सुबह 11.09 पर माघ शुक्ल त्रयोदशी तिथि शुरू होगी और अगले दिन 31 जनवरी को सुबह 8.25 पर इसका समापन होगा.

पूजा मुहूर्त - शाम 5.59 से रात 8.37 तक

शुक्र प्रदोष व्रत क्यों रखते हैं
शुक्रवार का दिन चूंकि मां लक्ष्मी को समर्पित है ऐसे में शुक्रवार के दिन पड़ने वाली त्रयोदशी तिथि बहुत खास होती है. आर्थिक उन्नति और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुक्र प्रदोष व्रत किया जाता है.
प्रदोष व्रत में शाम को करें पूजा
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है. यह व्रत निर्जल अर्थात् बिना पानी के किया जाता है. प्रदोष व्रत की विशेष पूजा शाम को की जाती है इसलिए शाम को सूर्य अस्त होने से पहले एक बार फिर स्नान करें. साफ़ सफेद रंग के वस्त्र पहन कर पूर्व दिशा में मुंह कर भगवान की पूजा की जाती है.
शुक्र प्रदोष व्रत विधि

इस दिन व्रत रखने वाली उपासक को प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए.
इस दिन उपवास रखा जाता है. कुछ लोग केवल फलाहार करते हैं, जबकि कुछ पूरी तरह से निर्जला व्रत रखते हैं.
संध्या काल में पुनः स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें.
भगवान शिव का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और गंगा जल) से अभिषेक करें. फिर उन्हें बेलपत्र, धतूरा, चंदन, अक्षत, और फूल अर्पित करें.
शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र और &amp;ldquo;ॐ नमः शिवाय&amp;rdquo; मंत्र का जाप करें
पूजा के बाद शिव जी की आरती करें और प्रसाद बांटें.
इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, और धन का दान करना शुभ माना जाता है.

Falgun Month 2026: फाल्गुन कब से शुरू हो रहा है, इसका महत्व, नियम, व्रत त्योहार सब जानें

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/03/672f6feb00622d1cd4f5e5243a5210d61764703689735499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Pradosh, Vrat, 2026:, जनवरी, का, आखिरी, प्रदोष, व्रत, नोट, करें, डेट, शिव, साधना, से, दूर, होगी, धन, की, समस्या</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Purnima 2026: कब है माघ पूर्णिमा? शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, जानें धन&#45;समृद्धि के लिए जरूरी सामग्री!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4844</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4844</guid>
<description><![CDATA[ Magh Purnima 2026: माघ माह में आने वाली पवित्र पूर्णिमा जिसे &#039;माघ पूर्णिमा&#039; के नाम से भी जाना जाता है. हिंदू वैदिक परंपरा के अनुसार, इस साल यह त्योहार 1 फरवरी के दिन मनाया जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, माघ पूर्णिमा के मौके पर देवता स्वर्ग से धरती पर अवतरित होते हैं और पवित्र नदियों के संगम में स्नान करते हैं.
इस वजह से माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व होता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भी विशेष लाभ की प्राप्ति होती है. ऐसे में पूजा करने से पहले पूजा की थाली में कुछ खास वस्तुओं को शामिल करना बेहद जरूरी है, ताकि भक्तों को पूजा का पूर्ण लाभ मिल सकें.&amp;nbsp;
माघ पूर्णिमा 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त (Magh Purnima 2026 Date and shubh Muhurat)
वैदिक पंचांग के मुताबिक माघ पूर्णिमा की तिथि (चंद्र दिवस) 1 फरवरी को सुबह 5.52 मिनट से शुरू होगी और 2 फरवरी को सुबह 3.38 बजे समाप्त होगी. माघ पूर्णिमा 1 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी.&amp;nbsp;
माघ पूर्णिमा 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5.24 मिनट से लेकर सुबह 6.17 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.13 मिनट से लेकर 12.57 मिनट तक&amp;nbsp;
गोधूलि मुहूर्त शाम 5.58 मिनट से लेकर शाम 6.24 बजे तक&amp;nbsp;
विजय मुहूर्त दोपहर 2.23 मिनट से लेकर दोपहर 3.07 मिनट तक&amp;nbsp;

माघ पूर्णिमा पूजा सामग्री की सूची (Magh Purnima 2026 Puja Samagri)
घीपंचामृत&amp;nbsp;रोलीअक्षत (चावल)सिंदूरचिरागचंदन का पेस्टसूती बातीमिठाइयांगंगाजलकमल और पीले रंग के फूलों की मालालाल कपड़ा&amp;nbsp;भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्तियां
माघ पूर्णिमा पर क्या करें?
माघ पूर्णिमा 2026 के मौके पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें.&amp;nbsp;
इसके बाद भगवान सत्यानारायण की कथा पढ़ने के साथ विधिवत रूप से पूजा पाठ करें.&amp;nbsp;
शुद्ध घी का दीपक जलाने के बाद फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर और शहद का मिश्रण) और तुलसी के पत्ते भगवान को अर्पित करें.
इसके अतिरिक्त माघ पूर्णिमा के मौके पर तिल, गुड़, वस्त्र और अनाज जैसी वस्तुओं का दान करें. इससे आर्थिक लाभ प्राप्त होने के साथ सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive. com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/27/c2f1b39152451f4c85c916108ca22b3417695072266391092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 27 Jan 2026 16:28:09 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Purnima, 2026:, कब, है, माघ, पूर्णिमा, शुभ, मुहूर्त, और, पूजा, विधि, जानें, धन-समृद्धि, के, लिए, जरूरी, सामग्री</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Braj Holi 2026: ब्रज में 40 दिनों तक चलेगा रंगों का महासंग्राम, जानें कब और कहां खेली जाएगी होली?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4791</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4791</guid>
<description><![CDATA[ Braj Holi 2026: ब्रज में होली 2026 की शुरुआत बसंत पंचमी के साथ हो चुकी है, जो भगवान कृष्ण की पवित्र भूमि पर मनाए जाने वाले 40 दिवसीय रंगोत्सव का प्रतीक है. वृंदावन, बरसाना, नंदगांव और मथुरा में मनाया जाने वाला यह लंबा होली उत्सव अपनी भक्तिमय रीति-रिवाज, जीवंत परंपराओं और गहरी सांस्कृतियों को जोड़ने के लिए जाना जाता है.
राधा रानी और भगवान कृष्ण की अद्भुत लीलाओं से जुड़ा ब्रज क्षेत्र 40 दिनों तक रंगों और भक्ति में डूबा रहने वाला है. मंदिर के आंगन से लेकर पतली गलियों तक हर कोने में होली की भावना पारंपरिक रूप से देखने को मिलेगी.&amp;nbsp;
ब्रज में होली की तिथि जानें



दिनांक&amp;nbsp;
दिन
घटना 
स्थान


23 जनवरी 2026
शुक्रवार
बसंत पंचमी (होली का जश्न शुरू)
&amp;nbsp; &amp;nbsp;बांके बिहारी जी मंदिर और सभी ब्रज मंदिर


24 फरवरी 2026
मंगलवार
लड्डू मार होली (फाग निमंत्रण)
श्री जी मंदिर, बरसाना


25 फरवरी 2026
बुधवार
लठमार होली
रंगिली गली, बरसाना


26 फरवरी 2026
गुरुवार
लठमार होली
नंद भवन, नंदगाँव


27 फरवरी 2026
शुक्रवार
रंगभरनी एकादशी/फूलों वाली होली
बांकेबिहारी मंदिर, वृन्दावन


1 मार्च 2026
रविवार
छड़िमर होली
गोकुल


2 मार्च 2026
सोमवार
रमन रेती होली / विधवा होली
गोकुल और वृंदावन


3 मार्च 2026
मंगलवार
होलिका दहन
द्वारकाधीश मंदिर, मथुरा और अन्य मंदिर


4 मार्च 2026
बुधवार
Dhulandi
मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, नंदगांव और गोकुल


5 मार्च 2026
गुरुवार
दाऊजी का हुरंगा
मथुरा में दाऊ जी मंदिर



ब्रज में होली और रंगोत्सव का महत्व
40 दिनों तक ब्रज की होली का गहरा आध्यात्मिक महत्व है, जिसकी शुरुआत बसंत पंचमी के दिन से होता है. ब्रज में होली नई शुरुआत, भक्ति और खुशी का प्रतीक माना जाता है. खास रस्मों में से एक है मंदिर के अंदर होली का डंडा लगाना, जो उत्सव के रस्मों की शुरुआत का संकेत है.&amp;nbsp;
रंगोत्सव के दौरान, भक्त राधा रानी और भगवान कृष्ण को ताजे फूल से बने रंग और गुलाल चढ़ाए जाते हैं. ब्रज के मंदिरों में फूलों की होली, लट्ठमार होली और लड्डू मार होली जैसे अनोखे उत्सव का भव्य आयोजन किया जाता है, जो आज से नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा है.&amp;nbsp;
भक्तों के लिए ब्रज में होली खेलना एक आशीर्वाद का प्रतीक है, पूरा इलाका भक्ति गीतों और कीर्तन से गूंज उठता है, जिससे ब्रज होली भारत के सबसे आध्यात्मिक त्योहारों में से एक बन जाती है.&amp;nbsp;
ब्रज होली भक्तों का ध्यान क्यों खींचती हैं?
एक दिन के होली उत्सव के उलट ब्रज होली 40 दिनों तक चलती है, जिसमें आस्था, लोकगीत का मिलाजुला त्योहार होता है. हर रस्में राधा और कृष्ण के बीच दिव्य मिलन को दर्शाती है, जिससे भक्तों को पवित्र परंपराओं में बताई गई होली का अनुभव प्राप्त करने का दुर्लभ मौका मिलता है.&amp;nbsp;
वृंदावन के मंदिरों से लेकर बरसाना की गलियों और नंदगांव के आंगनों तक ब्रज होली 2026 भक्ति, रंग और सांस्कृतिक विरासत की एक बेहतरीन यात्रा का भरोसा दिलाता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/24/2cdd18316cffde761c2e9c2c7564467617692377018371092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:13 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Braj, Holi, 2026:, ब्रज, में, दिनों, तक, चलेगा, रंगों, का, महासंग्राम, जानें, कब, और, कहां, खेली, जाएगी, होली</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Snan 2026: माघ पूर्णिमा से पहले क्या एकादशी पर भी होगा माघ स्नान ?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4789</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4789</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/25/c01b2f0c1dc5a0b53c9104d076d1aa5a1769282256373499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Snan, 2026:, माघ, पूर्णिमा, से, पहले, क्या, एकादशी, पर, भी, होगा, माघ, स्नान</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 25 जनवरी नर्मदा जयंती का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4790</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4790</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 25 जनवरी 2026: आज 25 जनवरी 2026 को नर्मदा जयंती और रथ सप्तमी है. नर्मदा विश्व की एकमात्र ऐसी नदी हैं, जिनकी परिक्रमा का विधान है. कहा जाता है कि जहां गंगा नदी में स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, वहीं मां नर्मदा के दर्शन मात्रा से ही पुण्य फल मिल जाता है.&amp;nbsp;
25 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 25 January 2026)



तिथि

सप्तमी (25 जनवरी 2026, सुबह 12.39- 26 जनवरी 2026, रात 11.10)



वार
रविवार


नक्षत्र
रेवती


योग
सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 10.54


चंद्रोस्त
सुबह 12.23, 26 जनवरी


चंद्र राशि
मीन



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह 8.33 - सुबह 9.53


लाभ
सुबह 9.53 - सुबह 11.13


अमृत
सुबह 11.13 - सुबह 12.34


शाम का चौघड़िया


शुभ
शाम 5.54 - रात 7.34


अमृत
रात 7.34 - रात 9.14


चर
रात 9.14 - 10.54



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
शाम 4.34 - शाम 5.54


यमगण्ड काल
दोपहर 12.34 - दोपहर 1.54


गुलिक काल
दोपहर 3.14 - शाम 4.34


भद्रा काल
रात 11.10 - सुबह 7.12, 26 जनवरी


आडल योग
दोपहर 2.16 - सुबह 7.13, 26 जनवरी


विडाल योग
सुबह 7.13 - सुबह 7.54


पंचक
सुबह 7.13 - दोपहर 1.35



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 25 January 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
मीन


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



मिथुन राशि
अपने कार्यों के प्रति समर्पण भावना आपको नए रास्ता दिखाएगी और फायदा भी होगा.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



मेष राशि
असंतुलित दिनचर्या की वजह से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत हो सकती है। योग और व्यायाम के लिए भी कुछ समय अवश्य निकालें.



FAQs: 25 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




नदी पर स्नान के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर नर्मदा जल से स्नान करें. स्नान के पश्चात आचमन कर पीले वस्त्र धारण करें और सूर्य देव को अर्घ्य दें.




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन रवि, सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है.
Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव 2026 में कब ? नोट करें डेट और पूजा मुहूर्त




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/25/9fc133aca8b5ce568c632b01713f864d1769281054821499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, नर्मदा, जयंती, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Republic Day 2026: भारत माता को समर्पित हैं ये प्रसिद्ध मंदिर, यहां झलकता है राष्ट्रभक्ति का स्वरूप</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4786</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4786</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/25/47e8839c7a007fefdb823c2cae036bd41769342905048466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Republic, Day, 2026:, भारत, माता, को, समर्पित, हैं, ये, प्रसिद्ध, मंदिर, यहां, झलकता, है, राष्ट्रभक्ति, का, स्वरूप</media:keywords>
</item>

<item>
<title>चारधाम यात्रा 2026: पंजीकरण से लेकर यात्रा तक, हर जानकारी! अभी जानें, कहीं चूक न जाएं!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4787</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4787</guid>
<description><![CDATA[ Char Dham Yatra 2026: इस साल चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से होने जा रही है. यह पवित्र तीर्थ यात्रा अक्षय तृतीय के शुभ अवसर के साथ हो रही है. जिन लोगों को नहीं पता है, उन्हें बता दें, कि चारधाम की तीर्थ यात्रा हिंदुओं के लिए काफी महत्व रखती है.
लाखों भक्त हर साल आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के उद्देश्य से यह यात्रा करते हैं. यह यात्रा यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ चार पवित्र तीर्थ स्थलों की यात्रा है.&amp;nbsp;
यात्रा पर जाने से पहले पंजीकरण कराना जरूरी
चारधाम यात्रा पर जाने वाले से पहले पंजीकरण कराना अनिवार्य है. ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, उत्तराखंड सरकार पंजीकृत तीर्थयात्रियों की निगरानी के लिए जीपीएस आधारित प्रणाली का इस्तेमाल करती है. ऐसा यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाता है और प्रत्येक तीर्थस्थल पर आने वाले आंगतुकों की संख्या को नियंत्रित करने में मदद करती है.&amp;nbsp;
इसके अलावा चार धाम पंजीकरण कार्ड सरकार की ओर से दी जाने वाली विशेष सुविधाओं में भोजन और आवास, तक पहुंच प्रदान करता है. &amp;nbsp;मूल रूप से यह पंजीकरण एक यात्रा ई-पास कार्ड के रूप में काम करती है.&amp;nbsp;
चारधाम यात्रा ऑनलाइन पंजीकरण का तरीका

चारधाम यात्रा की ऑफिशियल वेबसाइट registrationandtouristcare.uk.gov.in पर जाएं.&amp;nbsp;
इसके बाद व्यक्तिगत और यात्रा से जुड़ी जानकारी भरें.
वैध पहचान पत्र अपलोड करें.&amp;nbsp;
ओटीपी सत्यापन पूरा करें.&amp;nbsp;
क्यूआर कोड समेत अपना चारधाम यात्रा पंजीकरण पत्र डाउनलोड करें.

Whastsapp से पंजीकरण करने का तरीका
अब आप तीर्थयात्री व्हाट्सएप के माध्यम से भी चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं.&amp;nbsp;
आपको बस यात्रा लिखकर Whastsapp पर 8394833833 पर भेजना है. इसके बाद आपसे कुछ सवालों के जवाब मांगे जाएंगे और ऐप के माध्यम से ही चार धामों के पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया पूर्ण हो जाएगी.&amp;nbsp;
टोल-फ्री नंबर से पंजीकरण करने का तरीका?
आप चारधाम यात्रा पंजीकरण के लिए टोल-फ्री नंबर का प्रयोग कर सकते हैं. इसके लिए आपको टोल-फ्री नंबर 01351364 कॉल करना होगा. एक प्रतिनिधि कॉल के माध्यम से ही यात्रा से जुड़ी मार्गदर्शन करेगा और पंजीकरण पूरा कराने में मदद सहायता करेगा.&amp;nbsp;
काउंटरों और ऑफलाइन पंजीकरण
जो लोग ऑनलाइन या टोल फ्री माध्यम से पंजीकरण नहीं करा सकते, उनके लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, बरकोट, हीना, सोनप्रयाग और पांडुकेश्वर के मार्ग पर ऑफलाइन काउंटर उपलब्ध हैं. नीचें इनसे जुड़ी जानकारी दी गई है.&amp;nbsp;
चारधाम पंजीकरण काउंटर

हरिद्वार में राही होटल में
आईसबीटी में ऋषिकेश&amp;nbsp;
ऋषिकेश में आरटीओ
ऋषिकेश में गुरुद्वारा

अन्य काउंटर

बरकोट (यमुनोत्री)
हीना (गंगोत्री)
सोनप्रयाग (केदारनाथ)
पाडुंकेश्वर (बद्रीनाथ)
गोविंद घाट (हेमकुंट साहिब)

अगर आप ऑफलाइन माध्यम से चारधाम यात्रा का पंजीकरण कराना चाहते हैं तो आपको इन पंजीकरण काउंटर पर जाना है.
चारधाम यात्रा के लिए जरूरी दिशा-निर्देश
निजी या व्यावसायिक वाहनों को उत्तराखंड परिवहन विभाग द्वारा जारी ग्रीन और ट्रिप कार्ड प्राप्त करना जरूरी है. यह कार्ड आपको greencard.uk.gov.in इस वेबसाइट पर मिल जाएगा.&amp;nbsp;
उच्च ऊंचाई वाली जगहों पर चिकित्सा परीक्षण के लिए चारधाम यात्रा में भाग लेने वाले सभी तीर्थयात्रियों के लिए स्वास्थ्य संबंधी सलाह जारी करना जरूरी है.&amp;nbsp;
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/25/ea29587d1824006640c4f2e46956da8517693240857441092_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>चारधाम, यात्रा, 2026:, पंजीकरण, से, लेकर, यात्रा, तक, हर, जानकारी, अभी, जानें, कहीं, चूक, न, जाएं</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ratha Saptami 2026: रथ सप्तमी पर आज कर लें ये उपाय, सूर्य करेंगे भाग्योदय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4788</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4788</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/25/f9e24dbc9199d81c790b001756ec969a1769319392399466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:11 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ratha, Saptami, 2026:, रथ, सप्तमी, पर, आज, कर, लें, ये, उपाय, सूर्य, करेंगे, भाग्योदय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Republic Day 2026: इन ग्रहों से जुड़ा है भारत के तिरंगे का रंग, इसलिए मजबूत है राष्ट्र का आत्मबल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4785</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4785</guid>
<description><![CDATA[ Republic Day 2026:&amp;nbsp;26 जनवरी 2026 को भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा और हर साल की तरह राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा. हर राष्ट्र का अपना विशेष ध्वज होता है. भारत के राष्ट्रीय ध्वज को हम तिरंगा कहते हैं, जो ज्योतिष और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी जीवंत प्रतीक है.
तिरंगे में समाहित है ग्रहों की अद्भुत शक्ति
केसरिया, सफेद, हरा और बीच में नीले रंग का अशोक चक्र ग्रहों की अद्भुत शक्ति में समाहित है, जो राष्ट के आत्मबल, धैर्य और चेतना को सदैव जागृत रखती है. यही कारण है कि आपदा से लेकर युद्ध और संकट की घड़ी में भी भारत का आत्मबल हमेशा मजबूत रहता है. ज्योतिष शास्त्र में तिरंगे के रंगों को ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है, जो सामूहिक चेतना और राष्ट्रीय ऊर्जा का संतुलन बनाए रखते हैं. आइए जानते हैं भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के रंगों में जुड़े ज्योतिषीय और आध्यात्मिक अर्थ को.
केसरिया रंग- तिरंगे के सबसे ऊपर केसरिया रंग त्याग, साहस और तपस्या का प्रतीक है. ज्योतिष में यह रंग सूर्य और मंगल से जुड़ा माना जाता है. सूर्य आत्मा, नेतृत्व, आत्मसम्मान और राष्ट्र की चेतना को दर्शाता है, जबकि मंगल पराक्रम, रक्षा, साहस और वीरता को. साथ ही केसरिया रंग भारत की राजनैतिक, सैन्य और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है.
सफेद रंग- तिरंगे का मध्य में रंग सफेद शांति, सत्य और संतुलन का संकेत देता है. ज्योतिषीय दृष्टि से यह चंद्रमा से जुड़ा है, जोकि मन भावनाएं और संदेवनशीलता का प्रतीक है. सफेद रंग यह दर्शाता है कि भारत केवल शक्ति के साथ ही विवेक के साथ आगे बढ़ने वाला राष्ट्र है.
हरा रंग- तिरंगा झंडे में सबसे नीचे हरा रंग है, जोकि विकास, समृद्धि और जीवन का प्रतीक है, ज्योतिष में बुध को बुद्धि, व्यापार, संवाद और विज्ञान का कारक कहा जाता है. भारत की कृषि, अर्थव्यवस्था, तकनीक और सांस्कृतिक वैभव इसी ऊर्जा से फलता-फूलता है. हरा रंग संकेत देता है कि भारत नवाचार और प्रगति की राह पर निरंतर अग्रसर है.
अशोक चक्र- तिरंगे के मध्य में नीले रंग की 24 तीलियों वाला अशोक चक्र कर्म और धर्म को दर्शाता है. ज्योतिष में इसे शनि ग्रह से जोड़ा जाता है. शनि जोकि न्याय, कर्मफल, अनुशासन और दीर्घकालिक स्थिरता का प्रतीक है. अशोक चक्र यह संदेश देता है कि भारत की शक्ति कर्म, धर्म, नियम और न्याय पर आधारित है.


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/25/bbd91eff1f4285cfdda2bfab7e87f1c91769337817613466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 26 Jan 2026 11:09:10 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Republic, Day, 2026:, इन, ग्रहों, से, जुड़ा, है, भारत, के, तिरंगे, का, रंग, इसलिए, मजबूत, है, राष्ट्र, का, आत्मबल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Dhanu Weekly Horoscope 2026: धनु साप्ताहिक राशिफल, नौकरी का इंतजार होगा खत्म, मिलेंगे अच्छे ऑफर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4731</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4731</guid>
<description><![CDATA[ Mesh Weekly Horoscope 2026 (25 to 31 January): जनवरी 2026 महीने का यह नया सप्ताह 25 से 31 जनवरी का समय धनु राशि के करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व प्रेम जीवन और सेहत आदि के लिए यह सप्ताह कैसा रहेगा. धनु राशि वाले यहां पढ़ें अपना पूरा साप्ताहिक राशिफल.
धनु राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह गुडलक लिए हुए है. इस सप्ताह आपको जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में स्वजनों और शुभचिंतकों का सहयेाग और समर्थन मिलता हुआ नजर आएगा. आपके द्वारा किए गए परिश्रम और प्रयास का पूरा फल मिलेगा. सप्ताह की शुरुआत में आपकी मुलाकात किसी प्रभावी व्यक्ति से होगी, जिसकी मदद से भविष्य में लाभ की योजना से जुड़ने का अवसर प्राप्त होगा.
इस दौरान युवाओं का अधिकांश समय मौज-मस्ती करते हुए बीतेगा. करियर-कारोबार की दृष्टि से यह सप्ताह अत्यं ही शुभ साबित होगा. नौकरीपेशा लोगों पर उनके सीनियर की पूरी कृपा बरसेगी. यदि आप बेरोजगार हैं तो आपको मनचाहे रोजगार की प्राप्ति होगी. यदि आप व्यवसाय से जुड़े हैं तो आपको इस सप्ताह मनचाहा लाभ प्राप्त होगा.
सप्ताह के उत्तरार्ध में कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामले में विजय पा सकते हैं. रिश्ते-नाते की बात करें तो इस सप्ताह आप स्वजनों पर न सिर्फ प्यार लुटाएंगे बल्कि उनसे बदले में खूब प्यार पाएंगे भी. यदि घर के किसी व्यक्ति के साथ कोई गलतफहमी हो गई थी तो इस सप्ताह वह दूर हो जाएगी.
प्रेम संबध को यदि आप विवाद में तब्दील करने के लिए प्रयासरत हैं तो इस सप्ताह आपकी कोशिशें रंग ला सकती हैं. परिजन आपकी शादी के लिए हरी झंडी दिखा सकते हैं. वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहेगा. सप्ताह के उत्तरार्ध में परिवार के संग किसी तीर्थ स्थल की यात्रा का संयोग बन सकता है.
उपाय: विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें.
Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव 2026 में कब ? नोट करें डेट और पूजा मुहूर्त
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/23/3732933544e903e4ef09492af2bd838d1769174711371499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Dhanu, Weekly, Horoscope, 2026:, धनु, साप्ताहिक, राशिफल, नौकरी, का, इंतजार, होगा, खत्म, मिलेंगे, अच्छे, ऑफर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kumbh Weekly Horoscope 2026: कुंभ साप्ताहिक राशिफल, बिजनेस को मिलेगी रफ्तार, होगा तगड़ा मुनाफा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4729</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4729</guid>
<description><![CDATA[ Kumbh Weekly Horoscope 2026 (25 to 31 January): जनवरी 2026 महीने का यह नया सप्ताह 25 से 31 जनवरी का समय कुंभ राशि के करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व प्रेम जीवन और सेहत आदि के लिए यह सप्ताह कैसा रहेगा. कुंभ राशि वाले यहां पढ़ें अपना पूरा साप्ताहिक राशिफल.
करियर और कारोबार के लिए यह सप्ताह आपके लिए पूरी तरह से अनुकूल रहने वाला है. सप्ताह की शुरुआत लंबी अथवा छोटी दूरी की यात्रा से होगी. इस दौरान आपका फोकस अपने अधूरे कार्यों को पूरा करने में रहेगा. यदि आप व्यवसाय से जुड़े हैं तो आपको इस सप्ताह अपने कारोबार में अपेक्षा से अधिक लाभ होता नजर आएगा.
यदि आप लंबे समय से अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए प्रयासरत थे तो इस सप्ताह आपकी ये मनोकामना पूरी होती हुई नजर आएगी. इष्टमित्रों एवं परिजनों की मदद से आप व्यवसाय का विस्तार कर पाएंगे. नौकरीपेशा लोगों के लिए भी यह सप्ताह अनुकूल रहने वाा है. उन पर अधिकारीगण पूरी तरह से मेहरबान रहेंगे. सप्ताह के अंत तक आपकी झोली में कोई महत्वपूर्ण पद या कोई अहम जिम्मेदारी आ सकती है.
रिश्ते-नाते की दृष्टि से यह सप्ताह आपके लिए अत्यंत ही शुभ रहने वाला है. घर के किसी सदस्य का विवाह तय होने से खुशियों का माहौल रहेगा. प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता बनी रहेगी. लव पार्टनर के साथ हंसी-खुशी समय बिताने के अवसर प्राप्त होंगे. माता से कोई विशेष आशीर्वाद या गिफ्ट मिल सकता है. जब कभी आप अपने आपको असमंजस की स्थिति में पाएंगे आपके इष्टमित्र सलाह और मदद देने के लिए तैयार नजर आएंगे. वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहेगा.
उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें.
Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव 2026 में कब ? नोट करें डेट और पूजा मुहूर्त
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/23/cf7e72a4b4c290423b4de528ccc939dc1769176809536499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kumbh, Weekly, Horoscope, 2026:, कुंभ, साप्ताहिक, राशिफल, बिजनेस, को, मिलेगी, रफ्तार, होगा, तगड़ा, मुनाफा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Makar Weekly Horoscope 2026: मकर साप्ताहिक राशिफल, बोली पर कंट्रोल रखें, रिश्ते भी टूट सकते हैं</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4730</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4730</guid>
<description><![CDATA[ Makar Weekly Horoscope 2026 (25 to 31 January): जनवरी 2026 महीने का यह नया सप्ताह 25 से 31 जनवरी का समय मकर राशि के करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व प्रेम जीवन और सेहत आदि के लिए यह सप्ताह कैसा रहेगा. मकर राशि वाले यहां पढ़ें अपना पूरा साप्ताहिक राशिफल.
मकर राशि के जातकों के लिए यह सप्ताह मिलाजुला रहने वाला है. सप्ताह की शुरुआत में कार्यक्षेत्र में माहौल अनुकूल न रहने से आपका मन थोड़ा खिन्न रहेगा. इस दौरान आपको सीनियर और जूनियर का सहयोग और समर्थन अपेक्षाकृत कम ही मिल पाएगा. यदि आपका भूमि-भवन या फिर पैतृक संपत्ति का विवाद चल रहा है तो उसे दूर करने के के लिए आपको कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं.
मकर राशि के जातकों को इस सप्ताह स्पष्टवादिता से बचने की जरूरत रहेगी. भूलकर भी किसी के सामने उस सच्चाई को बयां करने की गलती न करें जिससे दूसरा व्यक्ति आहत हो. इसी प्रकार लोगों के साथ हंसी-मजाक करते समय इस बात का ख्याल रखें कि हास करते-करते किसी का उपहास न हो जाए, अन्यथा वर्षों से चले आ रहे संबंध टूट सकते हैं या फिर उसमें दरार आ सकती है.
व्यवसाय से जुड़े लोगों को कारोबार से जुड़े अहम फैसले जल्दबाजी में लेने से बचना चाहिए. इस सप्ताह आप अपने कागजी काम समय पर निबटा लें अन्यथा आपको आर्थिक एवं मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ सकता है. रिश्ते-नाते की दृष्टि से यह सप्ताह मिश्रित फलदायक रहने वाला है. इस सप्ताह स्वजनों के साथ सावधानी के साथ बात व्यवहार करें अन्यथा लोग आपकी बात का गलत मतलब निकाल सकते हैं. सप्ताह के उत्तरार्ध में अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखें.
उपाय: रुद्राष्टकं का पाठ करें.
Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी 2026 में कब, इस दिन से शुरू होगा 10 दिन का गणेश उत्सव
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/23/f983416df29890053a2db532f52049f91769175362079499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Makar, Weekly, Horoscope, 2026:, मकर, साप्ताहिक, राशिफल, बोली, पर, कंट्रोल, रखें, रिश्ते, भी, टूट, सकते, हैं</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Mela 2026: माघ मेले में इस दिन होगा अमृत स्नान, पूरे महीने स्नान करने के समान मिलता है पुण्य</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4726</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4726</guid>
<description><![CDATA[ Magh Mela 2026 Purnima Snan: प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान अमृत स्नान का विशेष महत्व है, जहां लाखों श्रद्धालु संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करते हैं. माघ मेले का पांचवां स्नान माघ पूर्णिमा पर 1 फरवरी 2026 को किया जाएगा. इस दिन रविदास जयंती भी है,&amp;nbsp;
पूर्णिमा पर माघ स्नान का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि माघ पूर्णिमा पर देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और त्रिवेणी संगम में स्नान व जप-तप करते हैं. माघ पूर्णिमा पर प्रयागराज में पवित्र नदियों का जल अमृत के समान हो जाता है. यही वजह है कि&amp;nbsp; धार्मिक दृष्टिकोण से माघ पूर्णिमा के दिन माघ मेले में इस स्नान का महत्व दोगुना बढ़ जाता है.&amp;nbsp;
विष्णु जी करते हैं जल में निवास
पुराणों के अनुसार, माघी पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं. इसलिए इस पावन दिन गंगाजल का स्पर्श करने से भी स्वर्ग का सुख मिलता है. कहते हैं कि भगवान विष्णु माघ पूर्णिमा के व्रत, उपवास, दान और ध्यान से उतने प्रसन्न नहीं होते, जितना माघ पूर्णिमा के स्नान से प्रसन्न होते है.
माघ पूर्णिमा पर अमृत स्नान मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ पूर्णिमा की शुरुआत 1 फरवरी 2026 को सुबह 5.52 से होगी और इसका समापन 2 फरवरी 2026 को सुबह 3.38 पर होगा. इस दिन अमृत स्नान के लिए सबसे अच्छा ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है. इसके अलावा चौघड़िया मुहूर्त भी देख सकते हैं.

ब्रह्म मुहूर्त &amp;ndash; सुबह 05:54 - सुबह 6.17
अभिजित मुहूर्त &amp;ndash; दोपहर 12:12 - दोपहर 12:57
शुभ मुहूर्त - सुबह 8.31 - दोपहर 12.35

माघ मेला 2026 की आगामी प्रमुख स्नान तिथि
बसंत पंचमी के बाद भी माघ मेले में श्रद्धालुओं के लिए एक आखिरी महत्वपूर्ण स्नान बाकी रहेगा.
महाशिवरात्रि (अंतिम स्नान):&amp;nbsp;15 फरवरी 2026, रविवार
महाशिवरात्रि के दिन अंतिम स्नान के साथ ही माघ मेले का विधिवत समापन होगा. इस दिन भगवान शिव की आराधना और संगम स्नान का विशेष महत्व बताया गया है.
काला जादू और बुरी नजर से बचने का रामबाण उपाय ज्योतिष से जानें




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/23/922106b1ad1bb8db77b5ad973bf6d8a81769182009902499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Mela, 2026:, माघ, मेले, में, इस, दिन, होगा, अमृत, स्नान, पूरे, महीने, स्नान, करने, के, समान, मिलता, है, पुण्य</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 24 जनवरी रथ सप्तमी का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4727</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4727</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 24 जनवरी 2026: आज 24 जनवरी 2026 को स्कंद षष्ठी व्रत और शनिवार है. शनि देव की उपासना के लिए इस दिन सरसों के तेल का दीपक लगाकर शाम को सूर्यास्त के बाद शनि चालीसा का पाठ करें. मान्यता है इससे आर्थिक तरक्की में आ रही परेशानी दूर होती है और उन्नति के रास्ते खुलते हैं.
24 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 24 January 2026)



तिथि

षष्ठी (24 जनवरी 2026, सुबह 1.46 - 25 जनवरी 2026, सुबह 12.39)



वार
शनिवार


नक्षत्र
उत्तर भाद्रपद


योग
शिव, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 10.22


चंद्रोस्त
रात 11.19


चंद्र राशि
मीन



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 8.33 - सुबह 9.53


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 5.54 - रात 7.33



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 9.53 - सुबह 11.13


यमगण्ड काल
दोपहर 1.53 - दोपहर 3.13


गुलिक काल
सुबह 7.13 - सुबह 8.33


पंचक
पूरे दिन


आडल योग
दोपहर 2.16 - सुबह 7.13, 26 जनवरी


विडाल योग
सुबह 7.13 - दोपहर 2.16



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 24 January 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
मीन


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कन्या राशि
पति-पत्नी के बीच सामंजस्यपूर्ण सुखद संबंध रहेंगे तथा घर में भी सकारात्मक वातावरण बना रहेगा



कौन सी राशियां संभलकर रहें



कर्क राशि
प्रॉपर्टी के कार्यों में आज किसी भी प्रकार का निवेश न करें।



FAQs: 24 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?




पति-पत्नी के बीच सामंजस्यपूर्ण सुखद संबंध रहेंगे तथा घर में भी सकारात्मक वातावरण बना रहेगा




Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन रवि और शिव योग बन रहा है.
Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी पर रवि योग, विष्णु जी की कृपा से पूरे होंगे अधूरे काम, कर लें खास उपाय




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/24/7328c20668fbc0bd31f195a2422551211769200705575499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, रथ, सप्तमी, का, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Meen Weekly Horoscope 2026: मीन साप्ताहिक राशिफल, जिम्मेदारी और खर्चे एकसाथ बढ़ेंगे</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4728</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4728</guid>
<description><![CDATA[ Meen Weekly Horoscope 2026 (25 to 31 January): मीन राशि के जातकों को इस सप्ताह पास के फायदे में दूर का नुकसान करने से बचना होगा, अन्यथा उन्हें बाद में पछताना पड़ सकता है. सप्ताह की शुरुआत से ही आपको अपनी सेहत, संबंध और धन का विशेष ख्याल रखना होगा. इस सप्ताह आपके सिर पर अचानक से कुछेक बड़ी जिम्मेदारी के साथ बड़े खर्च सामने आ सकते हैं, जिसे निभाने के लिए आपको न सिर्फ लोगों से सहयोग बल्कि धन भी उधार लेना पड़ सकता है.
सप्ताह की शुरुआत में करियर और कारोबार में कुछ इस कदर व्यस्तता बनी रहेगी कि आप अपने निजी मामलों की ओर चाह कर भी ध्यान नहीं दे पाएंगे. इस दौरान आपको अपने परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है. सप्ताह के मध्य में पिता-पुत्र के बीच अनबन के संकेत मिल रहे हैं.
पैतृक संपत्ति की प्राप्ति को लेकर परिजनों के साथ वाद-विवाद की आशंका है. सप्ताह का उत्तरार्ध पूर्वार्ध के मुकाबले थोड़ा राहत भरा रहने वाला है. इस दौरान परीक्षा-प्रतियोगिता से जुड़े छात्रों को कोई शुभ समाचार मिल सकता है. इस दौरान आपको करियर-कारोबार से जुड़ा कोई बढ़िया आफर मिल सकता है.
प्रेम-प्रसंग में स्थितियां आपके अनुकूल रहेंगी. कठिन समय में आपका लव पार्टनर आपका संबल बनेगा. जब कभी भी आपके कदम लड़खड़ाने लगेंगे तो आपका लव अथवा लाइफ पार्टनर आपकी मदद के लिए आगे आकर थाम लेगा.
उपाय: नारायण कवच का पाठ करें.
Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी 2026 में कब, इस दिन से शुरू होगा 10 दिन का गणेश उत्सव
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/23/d986676456f77ec59c0673ab07ed31ee1769177948909499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Meen, Weekly, Horoscope, 2026:, मीन, साप्ताहिक, राशिफल, जिम्मेदारी, और, खर्चे, एकसाथ, बढ़ेंगे</media:keywords>
</item>

<item>
<title>February Vivah Muhurat 2026: फरवरी में विवाह के सबसे ज्यादा मुहूर्त, इस दिन से बजेंगी शादी की शहनाई</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4724</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4724</guid>
<description><![CDATA[ February Vivah Muhurat 2026: साल 2026 में शुभ विवाह तिथियां 4 फ़रवरी से शुरू होंगी. 2026 का पहला विवाह मुहूर्त 5 फरवरी को रहेगा. साल का आखिरी मुहूर्त 6 दिसंबर को होगा. सालभर में कुल 59 विवाह मुहूर्त रहेंगे. फ़रवरी से मार्च तक विवाह संभव हैं, लेकिन खरमास के कारण 14 मार्च से 13 अप्रैल तक विवाह स्थगित रहेंगे.
फरवरी में 12, मार्च में 8, अप्रैल में 8 और मई में भी 8 शुभ मुहूर्त रहेंगे हालांकि बीच के कुछ महीने ऐसे भी हैं, जिनमें एक भी विवाह के मुहूर्त नहीं हैं. हिंदू धर्म में सभी 16 संस्कारों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक माना जाता है. हर साल 15 जनवरी को धनुर्मास खत्म होते ही शादियों के मुहूर्त शुरू हो जाते हैं. इस बार शुक्र ग्रह अस्त होने के कारण जनवरी में शादी के लिए एक भी मुहूर्त नहीं हैं.
वर्ष 2026 में शुक्र अस्त होने के कारण खरमास समाप्त होने के बाद भी विवाह वर्जित रहेंगे. 9 दिसंबर 2025 को अस्त होने वाला शुक्र 1 फरवरी 2026 तक अस्त रहेगा. इसके बाद 4 फरवरी 2026 से विवाह पुनः प्रारंभ होंगे. इसके बाद फरवरी के अंत से 4 मार्च तक होलाष्टक काल के कारण विवाहों पर फिर से रोक लग जाएगी.
विवाह में गुरु की अहम भूमिका
वैदिक ज्योतिष में गुरु को शुभ फलदायी ग्रह माना गया है. जन्म कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति शुभ होने पर व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता हासिल होती है. गुरु की कमजोर स्थिति से जातक को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. गुरु धनु व मीन राशि के स्वामी ग्रह हैं. यह कर्क राशि में उच्च व शनिदेव की राशि मकर में नीच के माने जाते हैं.

प्रत्येक गुरुवार शिवजी को बेसन के लड्डू चढ़ाने चाहिए। गुरुवार को व्रत करें.
इस दिन पीली वस्तुओं का दान अपने सार्म्थ्यनुसार करें.
गुरुवार के दिन विष्णु भगवान को घी का दीपक लगाएं.

शास्त्रों के मुताबिक विवाह में गुरु ग्रह को उदय होना आवश्यक माना जाता है. हमारे षोडश संस्कारों में विवाह का बहुत महत्त्व है. विवाह का दिन व लग्न निश्चित करते समय वर एवं वधु की जन्म पत्रिका अनुसार सूर्य, चंद्र व गुरु की गोचर स्थिति का ध्यान रखना अति आवश्यक होता है. जिसे त्रिबल शुद्धि कहा जाता है.
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले जाते हैं. वहीं, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर योगनिद्रा से जागृत होते हैं. इस दौरान विवाह समेत सभी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं. वहीं, देवउठनी एकादशी से शुभ कार्य किए जाते हैं. चातुर्मास के दौरान विवाह संबंधित कार्य भी नहीं किए जाते हैं. इसके साथ ही सूर्य देव के धनु और मीन राशि में गोचर के दौरान भी शादी नहीं की जाती है. इस दौरान गुरु का प्रभाव क्षीण हो जाता है.
शुक्र&amp;nbsp; - गुरु ग्रह के अस्त होने पर विवाह नहीं होते
विवाह मुहूर्त की गणना करते समय शुक्र तारा और गुरु तारा पर विचार किया जाता है. बृहस्पति और शुक्र के अस्त होने पर विवाह और अन्य मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते है इसलिए, इस दौरान कोई विवाह समारोह नहीं किया जाना चाहिए.
खरमास और चातुर्मास 2026
14 मार्च 2026 को सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास पुनः प्रारंभ हो जाएगा. खरमास 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा. इस दौरान विवाह नहीं हो सकेंगे. इसके बाद, विवाह का मौसम पुनः शुरू हो जाएगा, जो चातुर्मास के प्रारंभ तक जारी रहेगा. चातुर्मास देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी पर समाप्त होता है.
देवउठनी एकादशी के अगले दिन तुलसी विवाह किया जाता है और इसके साथ ही शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. 2026 में, देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को और देवउठनी एकादशी 20 नवंबर 2026 को पड़ेगी इसलिए, 25 जुलाई से 20 नवंबर 2026 के बीच कोई भी शुभ कार्य नहीं होंगे.
विवाह का धार्मिक महत्व
ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि सनातन धर्म दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक है, जो कई प्रकार की परंपराओं और मान्यताओं से समृद्ध है. इस परंपरा में से एक शुभ विवाह भी है, यह जीवन का सबसे खुशनुमा पल होता है. विवाह कई तरह से किए जाते हैं, प्रत्येक के अपने-अपने रीति-रिवाज और महत्व होते हैं. हिंदू धर्म में यह 16 संस्कारो मे से एक होता है और इसके बगैर कोई भी व्यक्ति ग्रहस्थाश्रम में प्रवेश नहीं कर सकता है. इसलिए हमारे शास्त्रों में विवाह को सबसे महत्वपूर्ण और कल्याणकारी माना जाता है.

फरवरी 2026 - 5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21, 24, 25 और 26 फरवरी
मार्च 2026 -1, 3, 4, 7, 8, 9, 11 और 12 मार्च
अप्रैल 2026 - 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28 और 29 अप्रैल
मई 2026 - 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14 मई
जून 2026 - 21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29 जून
जुलाई 2026 - 1, 6, 7, 11 जुलाई
नवंबर 2026 - 21, 24, 25 और 26 नवंबर
दिसंबर 2026 -2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12 दिसंबर

&amp;nbsp;( कुछ पंचांग में भेद होने के कारण तिथि घट बढ़ सकती है और परिवर्तन हो सकता है। )
Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी 2026 में कब, इस दिन से शुरू होगा 10 दिन का गणेश उत्सव
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/24/726bb0872e986ff9d0368eeac28fece41769202236663499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>February, Vivah, Muhurat, 2026:, फरवरी, में, विवाह, के, सबसे, ज्यादा, मुहूर्त, इस, दिन, से, बजेंगी, शादी, की, शहनाई</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Horoscope 24 January 2026: धनु&#45;मकर&#45;कुंभ राशि वालों की &amp;apos;अग्निपरीक्षा&amp;apos;, आज भावनाओं में बहकर किया ये 1 काम तो भुगतना पड़ेगा अंजाम!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4725</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4725</guid>
<description><![CDATA[ Horoscope Today: 24 जनवरी 2026, शनिवार को चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेगा. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और शिव योग के प्रभाव से दिन भावनात्मक, आत्मविश्लेषण प्रधान और संवेदनशील रहेगा. राहु काल (09:53 AM - 11:13 AM) में महत्वपूर्ण निर्णय टालना उचित होगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त (12:12 PM - 12:54 PM) में लिए गए फैसले स्पष्टता और स्थिरता प्रदान करेंगे. आइए जानते हैं आज का राशिफल-
आज का पंचांग

तिथि: शुक्ल पक्ष षष्ठी
वार: शनिवार
चंद्र राशि: मीन
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद (दोपहर तक)
योग: शिव
राहु काल: 09:53 AM - 11:13 AM
अभिजीत मुहूर्त: 12:12 PM - 12:54 PM

धनु राशिफल - 24 जनवरी 2026
आज का दिन धनु राशि वालों के लिए मानसिक रूप से महत्वपूर्ण है. आप बीते कुछ दिनों से जिन योजनाओं और विचारों पर काम कर रहे थे, आज उन्हें ज़मीन पर उतारने की आवश्यकता है. चंद्रमा मीन राशि में होने के कारण निर्णय भावनात्मक हो सकते हैं, लेकिन यही भावनात्मक जुड़ाव आपको अपने काम से पूरी तरह जोड़ता है.
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र सुबह के समय गहराई और गंभीरता देता है. यह समय पढ़ाई, रिसर्च, करियर प्लानिंग और वरिष्ठों से सलाह लेने के लिए अत्यंत अनुकूल है. हालांकि, राहु काल (09:53-11:13) में किसी भी प्रकार का आर्थिक वादा, साझेदारी या जल्दबाज़ी से लिया गया निर्णय नुकसान दे सकता है.
अभिजीत मुहूर्त (12:12-12:54) में किया गया कार्य आपको दिशा देगा. नौकरी से जुड़ा आवेदन, इंटरव्यू कॉल, मीटिंग या मार्गदर्शन लेना लाभकारी रहेगा.
करियर: सीखने और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे. यदि आप किसी नए कोर्स, स्किल या जिम्मेदारी को लेकर असमंजस में थे, तो आज स्पष्टता मिलेगी.
वित्त: खर्च बढ़ सकता है, विशेषकर घर या परिवार से जुड़े मामलों में. बजट पर नियंत्रण रखें.
लव राशिफल: संवाद में स्पष्टता रखें. अधूरी बात गलतफहमी पैदा कर सकती है.
स्वास्थ्य: कमर दर्द, थकान या नींद की कमी महसूस हो सकती है. आराम ज़रूरी है.
शुभ रंग: पीलाशुभ अंक: 3
मकर राशिफल - 24 जनवरी 2026
मकर राशि वालों के लिए आज का दिन जिम्मेदारी और आत्मसंयम का है. शनिवार होने के कारण शनि का प्रभाव प्रबल रहेगा और चंद्रमा मीन राशि में होने से मन थोड़ा भावुक रह सकता है. लेकिन यही भावुकता आपको दूसरों की स्थिति समझने में मदद करेगी.
सुबह का समय कार्ययोजना और लक्ष्य निर्धारण के लिए उपयुक्त है. आप जिन जिम्मेदारियों से बचना चाहते थे, आज वही आपको भविष्य की ओर ले जाएंगी. राहु काल (09:53-11:13) में किसी भी प्रकार का कानूनी, प्रशासनिक या निवेश संबंधी निर्णय टालना बेहतर रहेगा. अभिजीत मुहूर्त में दस्तावेज़, समझौते और दीर्घकालीन फैसलों पर विचार करना शुभ रहेगा.
करियर: काम का दबाव बढ़ेगा, लेकिन वरिष्ठों की नज़र में आपकी साख मज़बूत होगी.
वित्त: आय स्थिर रहेगी. जोखिम लेने से बचें.
लव राशिफल: भावनाएं भीतर दबाने के बजाय शांत शब्दों में व्यक्त करें.
स्वास्थ्य: घुटनों, जोड़ों या पीठ से जुड़ी समस्या हो सकती है.
शुभ रंग: स्लेटीशुभ अंक: 10
कुंभ राशिफल - 24 जनवरी 2026
कुंभ राशि सामान्यतः तर्क और विचारों से चलती है, लेकिन आज मीन राशि का चंद्रमा आपको भावनात्मक स्तर पर सोचने को मजबूर करेगा. यह दिन भीतर झांकने और अपने वास्तविक भाव समझने का है.
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आपको मौन और गहराई देता है. सुबह के समय अकेले रहकर सोचने से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं. राहु काल (09:53-11:13) में अफवाहों, गलत निष्कर्षों और जल्दबाज़ी से दूरी बनाए रखें. अभिजीत मुहूर्त में स्पष्ट बातचीत, सीमाएं तय करने और भविष्य की दिशा तय करने का सही समय है.
करियर: नए विचार आएंगे, लेकिन उन्हें तुरंत साझा न करें. पहले उन्हें परिपक्व होने दें.
वित्त: आय के नए स्रोत दिख सकते हैं, लेकिन अभी ठोस निर्णय न लें.
प्रेम: दूरी या भ्रम की स्थिति बन सकती है. संवाद ज़रूरी है.
स्वास्थ्य: नींद की कमी और मानसिक थकान.
शुभ रंग: नीलाशुभ अंक: 11
मीन राशिफल - 24 जनवरी 2026
आज चंद्रमा आपकी ही राशि में है, इसलिए मीन राशि वालों के लिए यह दिन भावनात्मक रूप से अत्यंत प्रभावशाली है. छोटी-छोटी बातें भी गहराई से महसूस होंगी, लेकिन यही गहराई आपको सही निर्णय लेने में मदद करेगी.
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र आत्मिक गंभीरता और मौन प्रदान करता है. सुबह का समय ध्यान, प्रार्थना और आत्मविश्लेषण के लिए श्रेष्ठ है. राहु काल (09:53-11:13) में भ्रम या भावनात्मक आवेग में कोई निर्णय न लें. अभिजीत मुहूर्त में खुद से जुड़े फैसले लेना, सीमाएं तय करना और आत्मविश्वास बढ़ाना शुभ रहेगा.
करियर: रचनात्मक, लेखन, कला, मीडिया या आध्यात्मिक कार्यों में सफलता मिलेगी.
वित्त: भावनाओं में बहकर खर्च करने से बचें.
प्रेम: भावनात्मक जुड़ाव गहरा होगा. सच्ची बात दिल तक पहुंचेगी.
स्वास्थ्य: जल तत्व से जुड़ी समस्या - सर्दी, पेट या थकान.
शुभ रंग: समुद्री हराशुभ अंक: 7
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/23/b69762781e9163683e32a245f4f621041769169917149257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, January, 2026:, धनु-मकर-कुंभ, राशि, वालों, की, अग्निपरीक्षा, आज, भावनाओं, में, बहकर, किया, ये, काम, तो, भुगतना, पड़ेगा, अंजाम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>दही&#45;चीनी, काजल, कौआ की बीट… क्या आप भी इन 20 भारतीय अंधविश्वासों को मानते हैं? देखें फोटो</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4722</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4722</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/24/a01484ded51d0f16c007419e65d5b54717692339832541092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>दही-चीनी, काजल, कौआ, की, बीट…, क्या, आप, भी, इन, भारतीय, अंधविश्वासों, को, मानते, हैं, देखें, फोटो</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Holashtak 2026: होलाष्टक कब से होंगे शुरू,नोट करें डेट, इन 8 दिनों में बुरी शक्तियां रहती हैं सक्रिय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4723</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4723</guid>
<description><![CDATA[ Holashtak 2026: फाल्गुन का महीना 2 फरवरी 2026 से शुरू हो जाएगा. फाल्गुन में महाशिवरात्रि और होली त्योहार का लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. होली से पहले के 8 दिन बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं. होल&amp;zwj;िका दहन से ठीक आठ द&amp;zwj;िन पहले होलाष्टक लग जाता है. नकारात्&amp;zwj;मक ऊर्जाओं से भरी हुई इस अवध&amp;zwj;ि में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं. इस दौरान बेहद सावधानी की आवश्यकता रहती है. ऐसे में जान लें 2026 में होलाष्टक कब से शुरू हो रहे हैं, होली किस दिन है.
होलाष्टक 2026 में कब से शुरू
फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होकर फाल्गुन मास की पूर्णिमा&amp;nbsp;तक होलाष्टक लगते हैं. इस साल होलाष्टक 24 फरवरी 2026 से शुरू हो रहे हैं और इसका समापन 3 मार्च 2026 को होलिका दहन पर किया जाएगा.
बसंत पंचमी से होली की शुरुआत हो जाती है. बाबा महाकाल को बसंत पंचमी से होली तक गुलाल अर्पित किया जाता है. इसके अलावा अन्य जगहों पर इस दिन होली का डंडा भी गाड़ा जाता है.
क्या है होलाष्टक
राक्षस राज हिरण्य कश्यप खुद को भगवान समझता था. वह अपने व&amp;zwj;िष्&amp;zwj;णु भक्&amp;zwj;त पुत्र प्रहलाद्ध को घोर यातनाएं देकर डराकर, धमकाकर अपने अधीन करना चाहता था. उसने प्रहलाद को आठ दिन घोर यातनाएं दीं. इसी अवधि को होलाष्टक कहा जाता है.&amp;nbsp;
होलाष्टक में क्या नहीं करें
शास्त्रों में कहा गया है कि इन दिनों में 16 संस्कार जैसे नामकरण संस्कार, जनेऊ संस्कार, गृह प्रवेश, विवाह संस्कार जैसे शुभ कार्य नहीं करने चाहिए. वहीं किसी भी प्रकार का हवन, यज्ञ कर्म भी इन दिनों में नहीं किया जाता है. शास्त्रों में यह भी बताया गया है कि होलाष्टक शुरू होने पर जिन लड़कियों की नई शादी हुई होती है, उन्हें अपने मायके में रहना चाहिए.
होलाष्&amp;zwj;टक के दौरान क&amp;zwj;िसी भी अनजान व्&amp;zwj;यक्&amp;zwj;ति से न तो कोई चीज लें न खाएं. इस अवध&amp;zwj;ि में नकारात्&amp;zwj;मक ऊर्जा काफी ज्&amp;zwj;यादा होती है. ऐसे में क&amp;zwj;िसी की दी हुई चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
होलिका दहन 2026
इस साल होलिका दहन 3 मार्च और रंगों वाली होली 4 मार्च 2026 को है. होलिक दहन का शुभ मुहूर्त शाम 6.22 मिनट से लेकर रात 8.50 मिनट तक रहेगा.
काला जादू और बुरी नजर से बचने का रामबाण उपाय ज्योतिष से जानें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/23/2bf23ea3c144a9cd4e5c7342b039a91e1769183456386499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 24 Jan 2026 12:23:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Holashtak, 2026:, होलाष्टक, कब, से, होंगे, शुरू, नोट, करें, डेट, इन, दिनों, में, बुरी, शक्तियां, रहती, हैं, सक्रिय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 21 जनवरी बुधवार को बने मंगलकारी योग, शुभ मुहूर्त और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4680</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4680</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 21 जनवरी 2026: आज 21 जनवरी 2026 को माघ महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और बुधवार है. मां दुर्गा और गणपति जी की पूजा के लिए ये दिन बेहद शुभ माना जाता है., मान्यता है कि इस दिन संकटों से मुक्ति पाने के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ करना फलदायी होता है. राहु की अशुभता से पार पाने के लिए इस दिन दुर्वा गणेश जी को अर्पित करें और माता जी को लाल चुनरी चढ़ाएं.&amp;nbsp;
21 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 21 January 2026)



तिथि

तृतीया (21 जनवरी 2026, सुबह 2.42 - 22 जनवरी 2026, सुबह 2.47)



वार
बुधवार


नक्षत्र
धनिष्ठा


योग
व्यतीपात, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 8.51


चंद्रोस्त
रात 8.20


चंद्र राशि
कुंभ



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


लाभ
सुबह 7.14 - सुबह 8.34


अमृत
सुबह 8.34 - सुबह 9.53


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 7.31 - रात 9.12


अमृत
रात 9.12 - रात 10.52



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 12.33 - दोपहर 1.52


यमगण्ड काल
सुबह 8.34 - सुबह 9.53


गुलिक काल
सुबह 11.13 - दोपहर 12.33


विडाल योग
सुबह 7.14 - दोपहर 1.58


पंचक
पूरे दिन



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 21 January 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
कुंभ


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



धनु राशि
युवा वर्ग को प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़़ने का मौका मिलेगा, इसलिए लक्ष्य पर केंद्रित रहें.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



सिंह राशि
अनजाने में बड़ों के सम्मान में कमी करना उन्हें आहत कर सकता है, सावधानी रखें.



FAQs: 21 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?



भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए, हरी चीजें (मूंग दाल, घास) दान करनी चाहिए, हरे वस्त्र पहनने चाहिए और &quot;ॐ बुं बुधाय नमः&quot; मंत्र का जाप करना चाहिए.



Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन व्यतीपात और रवि योग बन रहा है.
Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर पीला के अलावा इस रंग का महत्व, मां सरस्वती होती हैं बहुत प्रसन्न




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/20/c09c3c2c70c8559cbb8a0c843ad6d77c1768932390647499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, बुधवार, को, बने, मंगलकारी, योग, शुभ, मुहूर्त, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Horoscope 21 January 2026: आज इन 4 राशियों के लिए &amp;apos;चुप&amp;apos; रहना ही है सबसे बड़ा दांव, नक्षत्रों की चाल बिगाड़ सकती है आपकी बरसों की मेहनत!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4681</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4681</guid>
<description><![CDATA[ 
Rashifal: धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए आज यानी 21 जनवरी 2026 का दिन कैसा रहेगा? क्या धन और सेहत के मामले में हानि होगी या जीवन में कोई शुभ समाचार मिल सकता है, जानते हैं इन चार राशियों का विशेष राशिफल (Horoscope Today).
धनु राशिफल (Sagittarius)
21 जनवरी 2026 का दिन धनु राशि के लिए विचारों से अधिक व्यवहारिक निर्णयों का है. चंद्रमा कुंभ राशि में स्थित है, जिससे आपकी सोच व्यापक और भविष्य उन्मुख रहेगी. शुक्ल तृतीया तिथि यह संकेत देती है कि आज जो योजनाएं बनेंगी, वे आगे चलकर दिशा तय करेंगी, लेकिन जल्द परिणाम की अपेक्षा आपको निराश कर सकती है.
प्रातः और पूर्वाह्न धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव में रहेंगे, जो दिन में 13 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. इस समय सीखने, सलाह लेने और लंबी अवधि की योजना बनाने में लाभ मिलेगा. आप अपने करियर या आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर चर्चा कर सकते हैं. लेकिन पूरे दिन 18 बजकर 58 मिनट तक व्यतीपात योग सक्रिय रहने के कारण किसी भी जानकारी को बिना जांचे स्वीकार करना नुकसानदेह हो सकता है.
दोपहर का समय विशेष सतर्कता मांगता है. 12 बजकर 32 मिनट से 13 बजकर 52 मिनट तक राहु काल और 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक दुष्टमुहूर्त के कारण निवेश, उधार या जल्दबाजी में लिया गया निर्णय टालना ही उचित है. इस समय शांत रहकर केवल निरीक्षण करना बेहतर रहेगा.
शाम के समय शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव बढ़ेगा. इससे आपकी सोच अधिक स्पष्ट और तार्किक होगी. आप यह समझ पाएंगे कि अभी किस दिशा में आगे बढ़ना है और किस बात को कुछ समय के लिए रोकना है.
Career. योजना और ज्ञान से आगे बढ़ेंगे. जल्दबाजी नुकसान देगी.
Finance. सुरक्षा और स्थिरता पर ध्यान दें.
Love. व्यवहारिकता हावी रहेगी.
Health. थकान और ऊर्जा में कमी.
उपाय. दोपहर में कोई आर्थिक निर्णय न लें.
Lucky Color. पीला.
Lucky Number. 3
मकर राशिफल (Capricorn)
मकर राशि के लिए यह दिन जिम्मेदारी और आत्ममंथन का है. चंद्रमा कुंभ राशि में होने से आप अपने काम और जीवन को थोड़ी दूरी से देखेंगे. शुक्ल तृतीया यह बताती है कि आज लिया गया निर्णय दीर्घकालिक प्रभाव डालेगा, इसलिए किसी भी विषय पर जल्द निष्कर्ष न निकालें.
प्रातः और पूर्वाह्न धनिष्ठा नक्षत्र 13 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. यह समय लक्ष्य तय करने, वरिष्ठों से संवाद और योजनाओं को व्यवस्थित करने के लिए अनुकूल है. आप अपने कार्यक्षेत्र में अपनी भूमिका को लेकर अधिक स्पष्ट होंगे. लेकिन 18 बजकर 58 मिनट तक व्यतीपात योग होने के कारण नियमों की अनदेखी या अधूरी जानकारी परेशानी खड़ी कर सकती है.
दोपहर में 12 बजकर 32 मिनट से 13 बजकर 52 मिनट तक राहु काल और 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक दुष्टमुहूर्त रहेगा. इस दौरान टकराव, नौकरी से जुड़े बड़े फैसले या किसी पर दबाव डालने से बचना आवश्यक है. यह समय मौन और धैर्य का है.
शाम को शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव में आप मानसिक रूप से हल्का महसूस करेंगे. आगे की रणनीति तय करने के लिए यह समय उपयुक्त रहेगा.
Career. जिम्मेदारी बढ़ेगी, पर परिणाम स्थायी होंगे.
Finance. आय स्थिर रहेगी. खर्च सोच-समझकर करें.
Love. भावनाएं भीतर दब सकती हैं. संवाद जरूरी है.
Health. जोड़ों और थकान से जुड़ी परेशानी.
उपाय. दोपहर में मौन और शाम को आत्ममंथन करें.
Lucky Color. स्लेटी.
Lucky Number. 8
कुंभ राशिफल (Aquarius)
आज का दिन कुंभ राशि के लिए आत्मचिंतन और भविष्य की तैयारी का है. चंद्रमा आपकी ही राशि में स्थित है, जिससे आप भीतर से अधिक सजग और विचारशील रहेंगे. शुक्ल तृतीया नई शुरुआत का संकेत देती है, लेकिन यह शुरुआत अंदरूनी स्तर पर होगी, बाहरी नहीं.
प्रातः और पूर्वाह्न धनिष्ठा नक्षत्र 13 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. इस समय नेटवर्क, मित्रों और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर सोच बनेगी. लेकिन 18 बजकर 58 मिनट तक व्यतीपात योग के कारण दूसरों की बातों से प्रभावित होकर निर्णय लेना ठीक नहीं रहेगा.
दोपहर में 12 बजकर 32 मिनट से 13 बजकर 52 मिनट तक राहु काल और 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक दुष्टमुहूर्त रहेगा. इस दौरान कोई भी बड़ा कदम, विशेषकर नौकरी, स्थान परिवर्तन या निवेश से जुड़ा, टालना ही सुरक्षित है.
शाम को शतभिषा नक्षत्र का प्रभाव बढ़ेगा. यह समय योजना बनाने, शोध करने और अगले कदम की तैयारी के लिए श्रेष्ठ है.
Career. पर्दे के पीछे की मेहनत भविष्य में फल देगी.
Finance. खर्च नियंत्रण में रखें.
Love. दूरी या मौन महसूस हो सकता है.
Health. अनिद्रा और मानसिक बेचैनी.
उपाय. ध्यान और श्वास अभ्यास करें.
Lucky Color. नीला.
Lucky Number. 4
मीन राशिफल (Pisces)
मीन राशि के लिए आज का दिन भावनात्मक समझ और सीमाएं तय करने का है. चंद्रमा कुंभ राशि में होने से आप अपनी भावनाओं को भीतर ही भीतर परखेंगे. शुक्ल तृतीया यह संकेत देती है कि आज की सोच भविष्य के बदलाव की नींव रखेगी.
प्रातः और पूर्वाह्न धनिष्ठा नक्षत्र 13 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. यह समय मार्गदर्शन लेने, वरिष्ठ या अनुभवी व्यक्ति से बात करने और अपने लक्ष्य स्पष्ट करने के लिए अनुकूल है. लेकिन पूरे दिन 18 बजकर 58 मिनट तक व्यतीपात योग सक्रिय रहने के कारण भावनात्मक भरोसा करने से पहले सतर्कता जरूरी है.
दोपहर में 12 बजकर 32 मिनट से 13 बजकर 52 मिनट तक राहु काल और 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक दुष्टमुहूर्त रहेगा. इस समय किसी भी तरह की आर्थिक या भावनात्मक प्रतिबद्धता टालना बेहतर है.
शाम को शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव में आप भावनात्मक रूप से हल्का और स्पष्ट महसूस करेंगे. यह समय आत्मशांति और दिशा तय करने का है.
Career. सहयोग और मार्गदर्शन से अवसर मिलेंगे.
Finance. आय ठीक रहेगी, खर्च संतुलित रखें.
Love. भरोसे और समझ की जरूरत रहेगी.
Health. थकान और पैरों से जुड़ी समस्या.
उपाय. जल तत्व से जुड़ा दान या ध्यान करें.
Lucky Color. समुद्री हरा.
Lucky Number. 7
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/20/2f365f7e740ce999d149eaac65dcfda51768908245681257_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Horoscope, January, 2026:, आज, इन, राशियों, के, लिए, चुप, रहना, ही, है, सबसे, बड़ा, दांव, नक्षत्रों, की, चाल, बिगाड़, सकती, है, आपकी, बरसों, की, मेहनत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 15 या 16 फरवरी कब ? चारों प्रहर की शिव पूजा का मुहूर्त देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4678</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4678</guid>
<description><![CDATA[ Mahashivratri 2026: देवों के देव महादेव की प्रिय रात्रि महाशिवरात्रि हिंदुओं का एक बड़ा पर्व है. शिवरात्रि हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आती है, और महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को पड़ता है. धार्मिक मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर शिवलिंग रूप में भोलेनाथ प्रकट हुए थे. कहा जाता है कि मन, चित्त, ब्रह्म, माया, जीव, बुद्धि, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी मिलकर शिवलिंग बनाते हैं. यही वजह है कि महाशिवरात्रि पर की गई शिव साधना हर मनोकामना की पूर्ति करती है.
महाशिवरात्रि 15 या 16 फरवरी 2026 कब

चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - फरवरी 15, 2026 को शाम 05:04&amp;nbsp;
चतुर्दशी तिथि समाप्त - फरवरी 16, 2026 को शाम 05:34

हिंदू धर्म में त्योहार उदयातिथि से मान्य होते हैं लेकिन महाशिवरात्रि का पर्व उस दिन मनाया जाता है जब फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि निशिता काल मुहूर्त में विद्यमान हो, ऐसे में महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी.&amp;nbsp;
निशिता काल मुहूर्त - देर रात 12:09 - देर रात&amp;nbsp;01:01
महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर का मुहूर्त

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय &amp;ndash;&amp;nbsp;शाम 06:11&amp;nbsp;&amp;ndash; रात 09:23&amp;nbsp;
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय &amp;ndash;&amp;nbsp;रात 09:23&amp;nbsp;&amp;ndash; 16 फरवरी, सुबह 12:35&amp;nbsp;
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय &amp;ndash;&amp;nbsp;16 फरवरी, सुबह 12:35&amp;nbsp;&amp;ndash; सुबह 03:47&amp;nbsp;
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय &amp;ndash;&amp;nbsp;16 फरवरी सुबह 03:47&amp;nbsp;- सुबह&amp;nbsp;06:59

शिव की उत्पत्ति की कहानी
शिव पुराण की कथा के अनुसार, सृष्टि के बाद भगवान विष्णु और ब्रह्माजी में शक्ति प्रदर्शन को लेकर विवाद हुआ. एक रहस्यमयी चमकीले पत्थर के प्रकट होने पर स्वर्ग से आवाज आई कि जो इसका अंत खोज लेगा वही सर्वशक्तिमान होगा. विष्णु नीचे और ब्रह्मा ऊपर गए, लेकिन किसी को भी पत्थर का अंत नहीं मिला. विष्णु ने हार मान ली, लेकिन ब्रह्मा जी ने दावा किया कि उन्हें पत्थर का अंत मिल गया है.
उसी समय, एक और दिव्य आवाज गूंजी. आकाशवाणी में कहा गया, &quot;मैं शिवलिंग हूँ, और मेरा न कोई अंत है और न ही कोई शुरुआत.&quot; उसी क्षण, भगवान शिव प्रकट हुए. यह घटना ब्रह्मांड में शिव की सर्वोच्च शक्ति का प्रतीक है. यह कथा हमें सच्चाई और ईमानदारी का महत्व भी सिखाती है. ब्रह्मा जी के झूठ बोलने से हमें यह सीख मिलती है कि सत्य की हमेशा जीत होती है.
महाशिवरात्रि पुरुषार्थ पाने का अवसर
महाशिवरात्रि को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की दुष्ट शक्तियों से रक्षा करते हैं तथा काम, क्रोध एवं लोभ जैसी सांसारिक इच्छाओं को नियन्त्रित करने की शक्ति प्रदान करते हैं. महा शिवरात्रि के पर्व को स्त्रियों के लिये विशेष शुभ माना जाता है. विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की सुरक्षा के लिये प्रार्थना करती हैं, जबकि अविवाहित स्त्रियां भगवान शिव के समान आदर्श वर प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करती हैं.
February Vrat Tyohar 2026: महाशिवरात्रि से होलाष्टक तक, फरवरी में मनाए जाएंगे ये व्रत त्योहार

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/21/ceaf47d4be1c7f86179bce5b82dd32121768982902429499_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mahashivratri, 2026:, महाशिवरात्रि, या, फरवरी, कब, चारों, प्रहर, की, शिव, पूजा, का, मुहूर्त, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>February Vrat Tyohar 2026: महाशिवरात्रि से होलाष्टक तक, फरवरी में मनाए जाएंगे ये व्रत त्योहार</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4679</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4679</guid>
<description><![CDATA[ February Vrat Tyohar 2026: जनवरी के अलावा फरवरी का महीना भी व्रत-त्योहार के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. फरवरी में महाशिवरात्रि, माघ पूर्णिमा, आमलकी एकादशी आदि व्रत त्योहार मनाए जाएंगे. फरवरी में ही साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. साथ ही इस महीने में होलाष्टक भी लगेंगे. हालांकि फरवरी माह मांगलिक कार्य के लिए बहुत शुभ माना जा रहा है.
फरवरी व्रत-त्योहार 2026

1 फरवरी 2026- गुरु रविदास जयंती, ललिता जयंती और माघ पूर्णिमा स्नान
2 फरवरी 2026- फाल्गुन माह का आरंभ
5 फरवरी 2026- द्विजप्रिय संकष्टी
7 फरवरी 2026- यशोदा जयंती
8 फरवरी 2026- भानु सप्तमी और शबरी जयंती
9 फरवरी 2026- जानकी जयंती, कालाष्टमी (मासिक) और जन्माष्टमी (मासिक)
13 फरवरी 2026- विजया एकादशी, कुंभ संक्रांति
14 फरवरी 2026- शनि त्रयोदशी, शनि प्रदोष व्रत और वैलेंटाइन डे
15 फरवरी 2026- महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि
17 फरवरी 2026- सूर्य ग्रहण, दर्श अमावस्या, फाल्गुन अमावस्या और द्वापर युग दिवस
18 फरवरी 2026- चंद्र दर्शन और फुलैरा दूज
19 फरवरी 2026- रामकृष्ण जयंती
21 फरवरी 2026- ढुण्ढिराज चतुर्थी
22 फरवरी 2026- संकन्द षष्ठी
23 फरवरी 2026- मासिक कार्तिगाई
24 फरवरी 2026- होलाष्टक शुरू
27 फरवरी 2026- आमलकी एकादशी
28 फरवरी 2026- नृसिंह द्वादशी

माघ का पवित्र स्नान
1 फरवरी को माघ मेले का सबसे खास स्नान किया जाएगा. माघ में देवी-देवता धरती पर आते हैं और पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है, मान्यता है कि जो माघ पूर्णिमा पर गंगा स्नान करता है उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और अमृत की प्राप्ति होती है.
महादेव की प्रिय महाशिवरात्रि
महादेव की प्रिय रात्रि यानी महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन चार प्रहर में पूजा करने वालों पर महादेव की कृपा बरसती है.
महाशिवरात्रि 2026 पूजा शुभ मुहूर्त
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - 06:39 पी एम से 09:45 पी एम
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - 09:45 पी एम से 12:52 ए एम, फरवरी 16
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 12:52 ए एम से 03:59 ए एम, फरवरी 16
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 03:59 ए एम से 07:06 ए एम, फरवरी 16
निशिता काल पूजा समय - 12:28 ए एम&amp;nbsp; से 01:17 ए एम&amp;nbsp; (16 फरवरी
होलाष्टक से बंद होंगे शुभ कार्य
होली से पहले के आठ दिनों (फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक) की अवधि को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है, क्योंकि यह काल भगवान प्रहलाद को दी गई यातनाओं और कामदेव के भस्म होने से जुड़ा है. इस दौरान ग्रहों का स्वभाव उग्र रहता है.
काला जादू और बुरी नजर से बचने का रामबाण उपाय ज्योतिष से जानें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/21/d6ee8d7e47e6305c34f550a18aad27c61768934298773499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>February, Vrat, Tyohar, 2026:, महाशिवरात्रि, से, होलाष्टक, तक, फरवरी, में, मनाए, जाएंगे, ये, व्रत, त्योहार</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 22 जनवरी गणेश जयंती का शुभ मुहूर्त और पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4676</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4676</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 22 जनवरी 2026: आज 22 जनवरी 2026 को माघ महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी विनायक चतुर्थी है. आज गणेश जयंती मनाई जा रही है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था, इसलिए इसे उनके जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है.
22 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 22 January 2026)



तिथि

चतुर्थी (22 जनवरी 2026, सुबह 2.47 - 23 जनवरी 2026, सुबह 2.28)



वार
गुरुवार


नक्षत्र
शतभिषा


योग
वरीयान, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 9.22


चंद्रोस्त
रात 9.19


चंद्र राशि
कुंभ



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 7.14 - सुबह 8.33


चर
सुबह 11.13 - दोपहर 12.23


लाभ
दोपहर 12.23 - दोपहर 1.53


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


शाम का चौघड़िया


अमृत
शाम 5.32 - रात 7.32


चर
रात 7.32 - रात 9.12



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 1.53 - दोपहर 3.12


यमगण्ड काल
सुबह 7.14 - सुबह 8.33


गुलिक काल
सुबह 9.53 - सुबह 11.13


भद्रा काल
दोपहर 2.40 - सुबह 2.28, 23 जनवरी


पंचक
पूरे दिन



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 22 January 2026)



सूर्य
मकर


चंद्रमा
कुंभ


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



वृषभ राशि
बिजनेस के लिए पिता और परिवार के साथ बुजुर्ग के साथ धन मिल सकता है.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



मिथुन राशि
आपको जीवनसाथी की भावनाओं का सम्मान करना होगा, नहीं तो बेवजह के लड़ाई-झगड़े बढ़ेंगे.



FAQs: 22 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?



ऊँ गं गणपतये नम:&amp;nbsp;इस मंत्र का 108 बार जप करने के बाद गणेश जी की कपूर से आरती करें. मान्यता है इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है.



Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन रवि और वरीयान योग बन रहा है.
February Vrat Tyohar 2026: महाशिवरात्रि से होलाष्टक तक, फरवरी में मनाए जाएंगे ये व्रत त्योहार




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/21/6073ed2d26b6b602a0b3598a73dd22301769004237689499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, गणेश, जयंती, का, शुभ, मुहूर्त, और, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Panchak 2026: पंचक 2026 में नए कपड़े खरीदना शुभ या अशुभ? भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना पछताना पड़ सकता है!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4677</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4677</guid>
<description><![CDATA[ Panchak 2026: हिंदू धर्म में हर शुभ काम अच्छा मुहूर्त देखकर किया जाता है. भारतीय ज्योतिष के अनुसार अशुभ समय में किए काम मनचाहा परिणाम नहीं देते. यही कारण है कि पंचक में बहुत से शुभ काम करने की मनाही है. पंचक के दौरान मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नए कार्य की शुरुआत आदि करना शुभ नहीं होता है. ऐसे में पंचक के दौरान क्या नए कपड़े खरीद सकते हैं यहां जानें.
पंचक कब से कब तक

शुरू - 20 जनवरी देर रात 01:35
अंत - 25 जनवरी दोपहर 01:35

पंचक में क्या नए कपड़े खरीद सकते हैं
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचक में नये कपड़े, सामान आदि की खरीददारी करना भी अशुभ माना गया है. कहते हैं जो इस दौरान नए कपड़े खरीदना नकारात्मक ऊर्जा को न्यौता देने के समान है. इससे मां लक्ष्मी नाराज हो सकती है.
पंचक में क्या-क्या कर सकते हैं

पंचक के दौरान कोई व्रत जैसे एकादशी, पूर्णिमा, प्रदोष व्रत, शिवरात्रि आदि पड़ जाए तो इन्हें भी आप कर सकते हैं. इन व्रत में पंचक का अवरोध नहीं आता है.
पंचक के दौरान आप दान-पुण्य कर सकते हैं. पंचक काल में गरीब या जरूरतमंदों में अन्न, फल, वस्त्र या धन आदि का दान देना देवी-देवता को प्रसन्न करता है.
पंचक के दौरान तीर्थ स्थान पर दर्शन कर सकते हैं. पवित्र नदी में स्नान करना या घर पर नियमित स्नान के बाद सूर्य देव को जल से अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है. तुलसी पूजन भी कर सकते हैं.

पंचक में कौन से उपाय फलदायी

पंचक में काले तिल का उपयोग नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सुख-समृद्धि लाता है, तुलसी या पीपल पर चढ़ा सकते हैं.
पंचक में छत डलवाना मना किया जाता है. लेकिन अगर किसी कारण छत डलवाना पड़ जाए या पलंग बनवाने जैसे काम जरूरी हों, तो पहले हवन करें या मजदूरों को मिठाई खिलाएं.

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 15 या 16 फरवरी कब ? चारों प्रहर की शिव पूजा का मुहूर्त देखें


Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/21/f0c08086558a829c57f04f81f63672141768993991151499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Panchak, 2026:, पंचक, 2026, में, नए, कपड़े, खरीदना, शुभ, या, अशुभ, भूलकर, भी, न, करें, ये, काम, वरना, पछताना, पड़, सकता, है</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Rashifal: आज 22 जनवरी को केवल 43 मिनट का है &amp;apos;अभिजीत मुहूर्त&amp;apos;, धनु से मीन राशि वाले इसी समय करें निवेश और करियर की बड़ी बात!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4674</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4674</guid>
<description><![CDATA[ 
Rashifal: धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए आज यानी 22 जनवरी 2026 का दिन कैसा रहेगा? क्या धन और सेहत के मामले में हानि होगी या जीवन में कोई शुभ समाचार मिल सकता है, जानते हैं इन चार राशियों का विशेष राशिफल (Horoscope Today).
धनु राशिफल (Sagittarius)
22 जनवरी का दिन धनु राशि के लिए दिशा और दृष्टिकोण से जुड़ा है. चंद्रमा कुंभ राशि में होने से आपकी सोच व्यापक रहेगी और आप तात्कालिक लाभ से अधिक दीर्घकालिक परिणामों पर ध्यान देंगे. शुक्ल चतुर्थी यह संकेत देती है कि आज जो निर्णय लिए जाएंगे, वे भविष्य में आपके मार्ग को परिभाषित करेंगे.
प्रातः, जब शतभिषा नक्षत्र प्रभावी रहेगा और यह स्थिति 14 बजकर 27 मिनट तक बनी रहेगी, तब सीखने, सलाह लेने और नई जानकारी को आत्मसात करने का समय है. यह अवधि करियर योजना, अध्ययन, लेखन और विचार-विमर्श के लिए अनुकूल है. वरियान योग 17 बजकर 37 मिनट तक सहयोग देता है, जिससे अनुभवी व्यक्ति या वरिष्ठ मार्गदर्शन कर सकते हैं.
दोपहर का समय सावधानी मांगता है. 13 बजकर 52 मिनट से 15 बजकर 12 मिनट तक राहु काल रहेगा. इस दौरान निवेश, यात्रा, कानूनी विषय या जल्दबाजी में कोई वादा करने से बचें. साथ ही 15 बजकर 01 मिनट से 15 बजकर 44 मिनट तक दुष्मुहूर्त होने से दोपहर बाद मानसिक भ्रम बढ़ सकता है.
अभिजीत मुहूर्त, जो 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक है, धनु राशि के लिए दिन का सबसे संतुलित समय है. इस दौरान योजना को अंतिम रूप देना या किसी वरिष्ठ से संवाद लाभकारी रहेगा.
शाम के समय पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव आपकी सोच को अधिक गंभीर बनाएगा. आप समझ पाएंगे कि अब जीवन में सतही फैसलों की जगह ठोस दिशा की आवश्यकता है.
Career. ज्ञान और योजना से आगे बढ़ेंगे.
Finance. जोखिम से बचना बेहतर रहेगा.
Love. व्यवहारिक दृष्टिकोण हावी रहेगा.
Health. थकान और ऊर्जा में कमी.
उपाय. दोपहर में निर्णय टालें.
Lucky Color. पीला.
Lucky Number. 3
मकर राशिफल (Capricorn)
मकर राशि के लिए 22 जनवरी का दिन जिम्मेदारी, अनुशासन और आत्ममंथन से जुड़ा है. चंद्रमा कुंभ राशि में होने से आप अपनी उपलब्धियों और कमियों दोनों को तटस्थ दृष्टि से देख पाएंगे. शुक्ल चतुर्थी यह संकेत देती है कि आज का आत्ममंथन भविष्य की नींव रखेगा.
प्रातः, शतभिषा नक्षत्र 14 बजकर 27 मिनट तक प्रभावी रहेगा. यह समय लक्ष्य तय करने, कार्यक्षेत्र में अपनी भूमिका स्पष्ट करने और वरिष्ठों से संवाद के लिए उपयुक्त है. वरियान योग 17 बजकर 37 मिनट तक स्थिरता और संतुलन देता है.
दोपहर में 13 बजकर 52 मिनट से 15 बजकर 12 मिनट तक राहु काल मकर राशि के लिए विशेष सावधानी का संकेत है. इस दौरान अधिकार, पद या जिम्मेदारी को लेकर टकराव से बचें. 15 बजकर 01 मिनट से 15 बजकर 44 मिनट तक दुष्मुहूर्त भी है, इसलिए दोपहर बाद कोई कठोर निर्णय न लें.
अभिजीत मुहूर्त, जो 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक है, मकर राशि के लिए योजनाओं को व्यवस्थित करने और महत्वपूर्ण बातचीत के लिए श्रेष्ठ है.
शाम के समय पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव आपको मानसिक रूप से परिपक्व बनाएगा. आप समझ पाएंगे कि हर जिम्मेदारी को अकेले उठाना जरूरी नहीं.
Career. जिम्मेदारी बढ़ेगी, पर स्थायित्व भी आएगा.
Finance. आय स्थिर रहेगी, खर्च सोच-समझकर करें.
Love. भावनाएं भीतर दब सकती हैं, संवाद जरूरी है.
Health. जोड़ों और थकान से जुड़ी परेशानी.
उपाय. अनुशासन और धैर्य बनाए रखें.
Lucky Color. स्लेटी.
Lucky Number. 8
कुंभ राशिफल (Aquarius)
कुंभ राशि के लिए 22 जनवरी आत्मचिंतन और आंतरिक तैयारी का दिन है. चंद्रमा आपकी ही राशि में स्थित है, जिससे भावनाएं और विचार दोनों तीव्र रहेंगे. शुक्ल चतुर्थी यह संकेत देती है कि आज भीतर होने वाला परिवर्तन आने वाले समय में बाहरी बदलाव का कारण बनेगा.
प्रातः, शतभिषा नक्षत्र 14 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. यह समय नेटवर्क, मित्रों और दीर्घकालिक लक्ष्यों पर विचार करने के लिए श्रेष्ठ है. वरियान योग 17 बजकर 37 मिनट तक सहयोग देता है, लेकिन आत्मनिर्भरता भी सिखाता है.
दोपहर में 13 बजकर 52 मिनट से 15 बजकर 12 मिनट तक राहु काल और 15 बजकर 01 मिनट से 15 बजकर 44 मिनट तक दुष्मुहूर्त कुंभ राशि के लिए भ्रम और असमंजस ला सकता है. इस समय बड़े निर्णय, स्थान परिवर्तन या नई शुरुआत टालना ही बेहतर रहेगा.
अभिजीत मुहूर्त, जो 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक है, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन देता है. इस दौरान किया गया आत्ममंथन सही दिशा दिखा सकता है.
शाम के समय पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव आपकी सोच को गंभीर और जिम्मेदार बनाएगा. आप समझ पाएंगे कि स्वतंत्रता के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है.
Career. पर्दे के पीछे की मेहनत भविष्य में फल देगी.
Finance. खर्च नियंत्रण में रखें.
Love. दूरी या मौन महसूस हो सकता है.
Health. अनिद्रा और मानसिक बेचैनी.
उपाय. ध्यान और श्वास अभ्यास करें.
Lucky Color. नीला.
Lucky Number. 4
मीन राशिफल (Pisces)
मीन राशि के लिए 22 जनवरी भावनात्मक समझ, सीमाएं तय करने और आत्मसंरक्षण का दिन है. चंद्रमा कुंभ राशि में होने से आप अपनी भावनाओं को भीतर ही भीतर परखेंगे. शुक्ल चतुर्थी यह बताती है कि आज का भावनात्मक निर्णय लंबे समय तक असर डाल सकता है.
प्रातः, शतभिषा नक्षत्र 14 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. यह समय मार्गदर्शन लेने, आत्मचिंतन और रचनात्मक सोच के लिए अनुकूल है. वरियान योग 17 बजकर 37 मिनट तक भावनात्मक संतुलन देता है.
दोपहर में 13 बजकर 52 मिनट से 15 बजकर 12 मिनट तक राहु काल और 15 बजकर 01 मिनट से 15 बजकर 44 मिनट तक दुष्मुहूर्त मीन राशि के लिए भावनात्मक भ्रम का कारण बन सकता है. इस समय किसी भी तरह की आर्थिक या भावनात्मक प्रतिबद्धता से बचें.
अभिजीत मुहूर्त, जो 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 54 मिनट तक है, मीन राशि के लिए आत्मशांति और सही संवाद का समय है. शाम के समय पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव आपको भावनात्मक रूप से परिपक्व बनाएगा. आप समझ पाएंगे कि हर भावना पर प्रतिक्रिया देना आवश्यक नहीं.
Career. सहयोग और मार्गदर्शन से अवसर मिलेंगे.
Finance. आय ठीक रहेगी, खर्च संतुलित रखें.
Love. समझ और धैर्य की जरूरत रहेगी.
Health. थकान और पैरों से जुड़ी समस्या.
उपाय. जल तत्व से जुड़ा दान करें.
Lucky Color. समुद्री हरा.
Lucky Number. 7
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/21/82277fcda48bace3fb2001c17cb0720e1769003896813257_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Rashifal:, आज, जनवरी, को, केवल, मिनट, का, है, अभिजीत, मुहूर्त, धनु, से, मीन, राशि, वाले, इसी, समय, करें, निवेश, और, करियर, की, बड़ी, बात</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Basant Panchami 2026: परीक्षा से हैं परेशान? बसंत पंचमी पर मां सरस्वती पूजा से बढ़ाएं फोकस और सफलता</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4675</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4675</guid>
<description><![CDATA[ Basant Panchami 2026: माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व केवल ऋतुराज बसंत के आगमन का संकेत नहीं देता, बल्कि यह दिन मां सरस्वती, यानी ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत की देवी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है. इस वर्ष 23 जनवरी को बसंत पंचमी मनाई जाएगी. खास बात यह है कि यह पर्व ऐसे समय आता है, जब देशभर में कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे होते हैं.
परीक्षा की तैयारी और बसंत पंचमी
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करने से एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. परीक्षा के दबाव, तनाव और भ्रम की स्थिति में यह दिन छात्रों के लिए मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है. धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी के मुख से मां सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए इसे विद्या आरंभ और लेखन आरंभ के लिए भी श्रेष्ठ माना गया है.
कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र, जिनके सामने करियर से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय होते हैं, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है. नियमित अध्ययन के साथ यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा की जाए, तो मन में स्थिरता आती है और पढ़ाई में मन लगता है.
बसंत पंचमी पूजा विधि
पूजा के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पीले या सफेद रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. घर के किसी साफ स्थान या ईशान कोण में मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और मां को पीले फूल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित करें.
छात्र अपनी पुस्तकें, कॉपियां और कलम पूजा स्थान पर रखें. इससे शिक्षा में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. इसके बाद श्रद्धा भाव से &amp;ldquo;ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः&amp;rdquo; मंत्र का 108 बार जाप करें. यह मंत्र स्मरण शक्ति को मजबूत करने और पढ़ाई में फोकस बढ़ाने में सहायक माना जाता है.
विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी पर विशेष टिप्स

पढ़ाई की नई शुरुआत करें: इस दिन किसी कठिन विषय या चैप्टर की शुरुआत करना शुभ माना जाता है.
स्टडी प्लान बनाएं: बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्र बसंत पंचमी के दिन अपना रिवीजन शेड्यूल तैयार करें.
डिजिटल डिस्ट्रैक्शन से दूरी: पूजा के बाद मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पढ़ाई पर फोकस करें.
लिखकर अभ्यास करें: माँ सरस्वती लेखन और स्मरण शक्ति की देवी हैं, इसलिए उत्तर लिखकर अभ्यास करना लाभकारी रहेगा.
सकारात्मक सोच रखें: परीक्षा को डर नहीं, अवसर मानें.

छात्रों के लिए संदेश पूजा के साथ-साथ नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और आत्मविश्वास भी उतना ही जरूरी है. बसंत पंचमी छात्रों को यह संदेश देती है कि ज्ञान केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि अनुशासन और सकारात्मक सोच से भी प्राप्त होता है. परीक्षा के समय यह पर्व छात्रों को मानसिक मजबूती और नई ऊर्जा देने वाला माना जाता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/21/f839dd3638e0ff748f49adc5acd7182617690138288901218_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Basant, Panchami, 2026:, परीक्षा, से, हैं, परेशान, बसंत, पंचमी, पर, मां, सरस्वती, पूजा, से, बढ़ाएं, फोकस, और, सफलता</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में मां भुवनेश्वरी की पूजा दिलाती है आर्थिक तरक्की, बस कर लें छोटा सा उपाय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4673</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4673</guid>
<description><![CDATA[ Gupt Navratri 2026 Maa Bhuvneshwari: गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्या की पूजा होती है. माघ मास की गुप्त नवरात्रि में चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की पूजा की जाती है, 22 जनवरी को गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन है. शास्त्रों के अनुसार मां भुवनेश्वरी की पूजा ऐश्वर्य, धन प्राप्ति, की प्राप्ति होती है. सनातन परंपरा में भुवनेश्वरी जयंती देवी को राज राजेश्वरी पराम्बा के नाम से भी पूजा जाता है.मां भुवनेश्वरी की साधना समस्त प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु की जाती है. सन्तान, धन, ज्ञान तथा सौभाग्य प्राप्ति के लिए देवी की पूजा की जाती है.
मां भुवनेश्वरी की पूजा विधि
गृहस्थ जीवन वाले माता भुवनेश्वरी को प्रसन्न करने के लिए सामान्य रूप से देवी की पूजा करें. इसके लिए सुबह मूर्ति को एक चौकी पर लाल रंग के आसन पर स्थापित करना चाहिए. इसके बाद माता को गंगाजल से स्नान कराएं और उसके बाद देवी लाल पुष्प, रोली, चंदन, अक्षत और रुद्राक्ष विशेष रूप से अर्पित करें. इसके बाद देवी की कथा कहें और मां भुवनेश्वरी के मंत्र का जाप करें. 10 साल से कम उम्र की कन्या को भोज कराने का बहुत ज्यादा पुण्यफल माना गया है.
मां भुवनेश्वरी का मंत्र
&#039;ह्रीं भुवनेश्वरीयै ह्रीं नमः&#039; मंत्र मां भुवनेश्वरी को समर्पित है. गुप्त नवरात्रि में इसका जाप करने से सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है. सामाजिक पदों पर सफलता मिल सकती है और देवी की कृपा होने से आत्मबल और निर्णय लेने की क्षमता में भी वृद्धि होती है.
धन प्राप्ति के लिए करें ये उपाय
जयति जयति जगदम्बे मातु, भुवनेश्वरी जय जय हे मातु।
सर्व मंगल कारण देवी, सद्गुण सुरसा मातु हे वी।
॥चौपाई॥
जयति जयति जगदम्बे भवानी,
करुणा सिन्धु भक्त सुखदानी।
शरणागत वत्सल भवानी,
सर्वशक्ति प्रदायिनी माँ भवानी।
तुम ही विश्व की हो आधार,
तुमसे ही सबका उद्धार।
शक्ति रूपिणी तुम मातु भवानी,
सभी के जीवन की हो कहानी।
तुम्हारी महिमा अपरम्पार,
तुम्हारे बिना कौन है उपकार।
तुमसे ही सबकी होती रक्षा,
तुम्हीं हो समस्त जगत की रक्षक।
तुम्हारी कृपा से सब सुखी,
तुम्हारी कृपा से सब दुःखी।
तुम्हारे बिना सब असहाय,
तुम्हारे बिना सब निर्बल।
हे माँ तुम्हारी महिमा न्यारी,
तुमसे ही सारी सृष्टि हमारी।
तुम्हारे चरणों में जो भी आए,
सभी को सुख-शांति मिल जाए।
संकट में जो तुम्हें पुकारे,
तुम उसकी सुधि सदा सहारे।
तुम्हारी कृपा से ही हो सबका कल्याण,
तुम्हारे बिना सब बेकार।
तुम ही तो सबकी पालनहार,
तुम्हीं हो सबकी उद्धार।
तुम्हारी शरण में जो भी आए,
उसका जीवन धन्य हो जाए।
जयति जयति माँ भवानी,
तुमसे ही सबकी जुड़ी कहानी।
तुम्हारे बिना सब अधूरा,
तुम्हारे बिना सब सूना।
॥दोहा॥
जयति जयति जगदम्बे मातु, भुवनेश्वरी जय जय हे मातु।
सर्व मंगल कारण देवी, सद्गुण सुरसा मातु हे वी।
Panchak 2026: पंचक 2026 में नए कपड़े खरीदना शुभ या अशुभ? भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना पछताना पड़ सकता है!



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/21/33fd69d23a356b56352a16d1e79d35ae1769008196119499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:19 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Gupt, Navratri, 2026:, गुप्त, नवरात्रि, में, मां, भुवनेश्वरी, की, पूजा, दिलाती, है, आर्थिक, तरक्की, बस, कर, लें, छोटा, सा, उपाय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी पर न करें ये गलतियां, बुद्धि हो जाती है भ्रष्ट !</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4672</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4672</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/22/f9455c777afa57083e68168b20ee0ef21769022880076499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 22 Jan 2026 09:55:18 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Basant, Panchami, 2026:, बसंत, पंचमी, पर, न, करें, ये, गलतियां, बुद्धि, हो, जाती, है, भ्रष्ट</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Makar Sankranti: बाबा रामदेव बोले&#45; मकर संक्रांति जैसे त्योहार भारत की सनातन परंपराओं का दर्पण</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4630</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4630</guid>
<description><![CDATA[ योग गुरु स्वामी रामदेव ने अपने फेसबुक लाइव के माध्यम से देशवासियों को संबोधित करते हुए भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर जोर दिया. उन्होंने मकर संक्रांति, पोंगल और बिहू जैसे त्योहारों को सनातन परंपराओं का आधार बताया. रामदेव ने कहा कि ये उत्सव केवल उत्सव मात्र नहीं हैं, बल्कि ये प्रकृति के प्रति हमारे सम्मान, अनुशासन और जीवन में संतुलन बनाए रखने की सीख देते हैं.
सिंथेटिक उत्पादों से खतरे की चेतावनी
अपने संबोधन के दौरान रामदेव ने आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते रसायनों और कृत्रिम उत्पादों (Synthetic products) के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि रसायनों पर हमारी बढ़ती निर्भरता न केवल मानव स्वास्थ्य को बिगाड़ रही है, बल्कि पर्यावरण के संतुलन को भी तहस-नहस कर रही है. उन्होंने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (Lifestyle disorders) के लिए इन्हीं रसायनों को जिम्मेदार ठहराया और लोगों से जैविक (Organic) और प्राकृतिक उत्पादों को अपनाने का आग्रह किया.
योग, यज्ञ और शिक्षा का महत्व

रामदेव ने &#039;योग&#039; और &#039;यज्ञ&#039; को भारतीय संस्कृति की नींव बताया. उनके अनुसार, ये अभ्यास केवल शारीरिक कसरत या धार्मिक कर्मकांड नहीं हैं, बल्कि मानसिक शांति, सामाजिक सद्भाव और समग्र स्वास्थ्य प्राप्त करने का मार्ग हैं. इसी दिशा में उन्होंने &#039;भारतीय शिक्षा बोर्ड&#039; का उल्लेख करते हुए बताया कि इसे आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कारों के मेल के लिए स्थापित किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें.
स्वदेशी और &#039;मेक इन इंडिया&#039; पर जोर
देश की आर्थिक मजबूती के लिए रामदेव ने &#039;मेक इन इंडिया&#039; का पुरजोर समर्थन किया. उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे विदेशी सामानों के बजाय स्वदेशी उत्पादों का चयन करें. उन्होंने कहा कि जब हम भारत में बनी वस्तुओं का उपयोग करते हैं, तो हम न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि अपने स्वदेशी ज्ञान को भी सम्मान देते हैं.
अंत में उन्होंने पतंजलि के उत्पादों का उदाहरण देते हुए कहा कि प्राकृतिक जीवन शैली अपनाकर ही हम एक स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण जीवन जी सकते हैं. उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि इस बदलते मौसम और त्योहारों के अवसर पर हम अपनी प्राचीन परंपराओं की ओर लौटने का संकल्प लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/07/28/d4373871985d4a60278d0bf422cdb2151753672144134940_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Makar, Sankranti:, बाबा, रामदेव, बोले-, मकर, संक्रांति, जैसे, त्योहार, भारत, की, सनातन, परंपराओं, का, दर्पण</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Shattila Ekadashi Vrat Paran: षटतिला एकादशी व्रत का पारण कितने बजे होगा, जानें मुहूर्त और विधि</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4631</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4631</guid>
<description><![CDATA[ Shattila Ekadashi Vrat Paran Time: माघ महीने के कृष्ण पक्ष की 11वीं तिथि को षटतिला एकादशी का व्रत है. इस वर्ष षटतिला एकादशी बुधवार 14 जनवरी को 2026 को है. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते है. साथ ही षटतिला एकादशी पर तिल के प्रयोग का भी अधिक महत्व होता है.
लेकिन एकादशी व्रत और पूजा का पूर्ण फल तब तक प्राप्त नहीं होता, जब तक विधि-विधान से व्रत का पारण न किया जाएगा. इसलिए यह जान लीजिए कि षटतिला एकादशी व्रत का कारण 15 जनवरी 2026 को किस मुहूर्त और किस विधि से किया जाएगा.&amp;nbsp;
एकादशी तिथि कब तक रहेगी
14 जनवरी 2026 को शाम 05 बजकर 52 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी और इसके बाद द्वादशी तिथि की लग जाएगी. लेकिन फिर भी पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद ही करना उचित रहेगा. इसलिए आप 15 जनवरी को ही षटतिला एकादशी व्रत का पारण करें.
षटतिला एकादशी व्रत पारण टाइम
एकादशी व्रत का पारण हमेशा अगले दिन द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद और पारण काल के भीतर करना चाहिए. इसलिए व्रत पारण में मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें. गुरुवार, 15 जनवरी को षटतिला एकादशी व्रत के पारण के लिए सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 21 मिनट तक का समय रहेगा. आप इस समय के भीतर पारण कर लें.
षटतिला एकादशी पारण विधि
सुबह उठकर सीधे व्रत का पारण नहीं करना चाहिए. सबसे पहले स्नान करें और फिर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर श्रीहरि विष्णु की विधि पूर्वक पूजा-अर्चना करें. इसके बाद ब्राह्मणों को दान दें और फिर अपना व्रत खोलें. एकादशी व्रत के पारण में तामसिक चीजें न खाएं. केवल सात्विक चीजें खाकर ही व्रत खोलें और द्वादशी तिथि पर भी मांसहार भोजन से परहेज करें. पारण वाले दिन चावल जरूर खाएं. इस प्रकार विधि-विधान और सही मुहूर्त पर एकादशी व्रत का पारण करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और व्रती को व्रत का पूर्ण फल भी मिलता है.



Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;


 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/14/055bdada59a06ab639f66a4848cc08941768382726854466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:52 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Shattila, Ekadashi, Vrat, Paran:, षटतिला, एकादशी, व्रत, का, पारण, कितने, बजे, होगा, जानें, मुहूर्त, और, विधि</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Makar Sankranti 2026: 15 जनवरी को मना रहे मकर संक्रांति तो जान लें स्नान&#45;दान का शुभ समय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4628</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4628</guid>
<description><![CDATA[ Makar Sankranti 2026: इस साल 2026 में मकर संक्रांति को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति थी. हालांकि अब भ्रम दूर हो चुका है. 14 जनवरी के साथ ही कई स्थानों पर 15 जनवरी को भी मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है. ऐसे में जो श्रद्धालु 15 जनवरी को मकर संक्रांति मना रहे हैं, उनके लिए स्नान और दान का शुभ समय जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि मकर संक्रांति पर किए स्नान-दान से ही पर्व का पुण्य फल प्राप्त होता है.
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज के अनुसार, 15 जनवरी को मकर संक्रांति पर स्नान-दान के लिए सुबह 4 बजे से दोपहर 3 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा.
स्नान का मुहूर्त (Makar Sankranti Snan-Daan Time)

मकर संक्रांति पर प्रातःकाल पवित्र नदी, सरोवर या घर पर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. वैसे तो पवित्र और विशेष तिथियों में स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे श्रेष्ठ माना जाता है.
15 जनवरी को मकर संक्रांति पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:27 से 06:21 तर है. इस मुहूर्त में आप स्नान कर सकते हैं. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के लिए 54 मिनट का समय रहेगा.
इसके अलावा सुबह 07:15 से 8 बजे तक पुण्यकाल रहेगा. यह समय भी स्नान-दान के लिए उत्तम रहता है.
जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं वे दोपहर में 12:10 से 12:52 के बीच स्नान-दान कर सकते हैं. इस समय अभिजीत मुहूर्त रहेगा.
इसके अलावा दोपहर 2:16 से 2:28 के बीच विजय मुहूर्त रहेगा. इसे भी स्नान दान के लिए शुभ माना जाता है.

मकर संक्रांति पर स्नान के बाद सबसे पहले सूर्य देव को जल अर्पित कर उपासना करें और इसके बाद जरूरतमंदों में तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और खिचड़ी आदि का दान करें. ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, मकर संक्रांति पर्व सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है. यह समय आत्मशुद्धि, संयम और सेवा का संदेश देता है. इसलिए मकर संक्रांति के दिन स्नान-दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/14/adb6dbcd74c642acde6f81054504952d1768413910686466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Makar, Sankranti, 2026:, जनवरी, को, मना, रहे, मकर, संक्रांति, तो, जान, लें, स्नान-दान, का, शुभ, समय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Makar Sankranti 2026: पुलाव या वेज बिरयानी नहीं, मकर संक्रांति पर खिचड़ी ही क्यों, Gen Z वाले जान लें खिचड़ी का किस्सा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4629</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4629</guid>
<description><![CDATA[ Makar Sankranti: सूर्य देवता धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश कर चुके हैं. इसके साथ ही सूर्य उत्तरायण भी हो चुके हैं. सूर्य जिस दिन मकर राशि में गोचर करते हैं, उस दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है. लेकिन इस वर्ष तिथियों का कुछ ऐसा संयोग बना है, जिससे 14 और 15 जनवरी 2026 दोनों ही दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है.
मकर संक्रांति देशभर में अलग-अलग नामों के साथ मनाई जाती है. इसे पोंगल, खिचड़ी, माघी, दही-चूड़ा, शिशुर सेंक्रांत, मकर सकरात, संकरात, पेड्डा पाण्डुगा, मकरविक्लु, उत्तरायण,पौष संक्रांति जैसे कई नामों से जाना जाता है. यह पर्व ऋतु परिवर्तन के साथ ही दान, पुण्य, आस्था, संयम और नव आरंभ का भी प्रतीक है.&amp;nbsp;
किस्सा खिचड़ी का
मकर संक्रांति पर्व के भले ही अनेकों नाम हों लेकिन भावना समान रहती है. खासकर इस दिन खिचड़ी बनाने की परंपरा है.
उत्तर भारत समेत कई राज्यों में मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने, खाने और दान करने की प्राचीन परंपरा है. इस परंपरा के पीछे केवल स्वाद नहीं बल्कि आस्था और भावना भी जुड़ी है.
आज भी कई लोग सोचते हैं कि, स्पेशल दिन पर हम पुलाव, वेज बिरियानी या कोई अन्य डिश नहीं बल्कि खिचड़ी ही क्यों बनाते हैं. खासकर Gen Z यानी हमारी युवा पीढ़ी के मन में यह सवाल जरूर आता है. तो आइए जानते हैं किस्सा खिचड़ी का.
खिचड़ी ही क्यों?
बाबा गोरखनाथ से जुड़ी परंपरा (Khichdi Mythological story)
मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने और खाने की परंपरा का संबंध योगी बाबा गोरखनाथ से जुड़ा हुआ है.
कथाओं में बताया जाता है कि, एक समय असुरक्षित हालात, कठिन जीवन और आक्रमणों के कारण साधु-संत नियमित रूप से अपना भोजन तैयार नहीं कर पाते थे, जिस कारण सभी शारीरिक रूप से कमजोर हो रहे थे.
ऐसे में बाबा गोरखनाथ ने चावल, दाल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाने का उपाय निकाला. यह भोजन जल्दी बन जाता था और लंबे समय तक शरीर को शक्ति व ऊर्जा भी देता था.
समय के साथ यह सरल और पौष्टिक भोजन साधु समाज से आम जनजीवन तक पहुंचा और मकर संक्रांति के पर्व से जुड़ गया. इसके बाद से इसे मकर संक्रांति पर बनाने की परंपरा की शुरुआत हुई.
धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही सूर्य का गोचर मकर राशि में होता है, जोकि सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है. इस दिन किया गया दान विशेष पुण्य प्रदान करता है.
खिचड़ी में शामिल चावल, दाल और घी को सात्विक भोजन माना जाता है, जिसे सूर्य देव को अर्पित करने दान के लिए भी श्रेष्ठ माना जाता है.
मान्यता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करने से नवग्रहों से जुड़ी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में स्थायित्व आता है. इसलिए मकर संक्रांति पर खिचड़ी को प्रसाद के रूप में खाने के साथ ही उसे दान करने की परंपरा भी बनी.
सेहत के लिए भी बेस्ट
मकर संक्रांति का तब आता है, जब ठंड चरम पर होती है. इस मौसम में खिचड़ी का सेवन सेहत के लिए लाभकारी होता है.
खिचड़ी में चावल और दाल का संतुलन शरीर को ऊर्जा देता है, जबकि घी पाचन तंत्र को मजबूत करता है. यह भोजन हल्का और सुपाच्य होने के साथ पोषण से भी भरपूर होता है




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/14/17b6a57f94f393251bcc71c3d3b2d0d91768394196219466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Makar, Sankranti, 2026:, पुलाव, या, वेज, बिरयानी, नहीं, मकर, संक्रांति, पर, खिचड़ी, ही, क्यों, Gen, वाले, जान, लें, खिचड़ी, का, किस्सा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 15 जनवरी आज भी मकर संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त,राहुकाल, दान</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4626</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4626</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 15 जनवरी 2026: आज 15 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति है. आज की सुबह पर सूर्य देव दर्शन देंगे तो वह अपने पुत्र शनिदेव की राशि मकर में होंगे. ऐसे में मकर संक्रांति का महत्व बढ़ जाता है. सूर्य देव की कृपा पाने के लिए उन्हें जल चढ़ाएं, दान करें और गुड़-तिल से बनी चीजों का भोग लगाएं, साथ ही तिल का दान भी करें.&amp;nbsp;
आइए जानते हैं ये दिन किन राशियों के लिए शुभ-अशुभ है, इस दिन का शुभ समय, अशुभ काल, राहुकाल, ग्रह स्थिति और विशेष उपाय भी जानें.
15 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 15 January 2026)



तिथि

द्वादशी (14 जनवरी 2026, शाम 5.52 - 15 जनवरी 2026, रात 8.16)



वार
गुरुवार


नक्षत्र
ज्येष्ठा


योग
वृद्धि


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 5.20, 13 जनवरी


चंद्रोस्त
दोपहर 2.34


चंद्र राशि
वृश्चिक



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह 11.12 - दोपहर 12.31


लाभ
दोपहर 12.31 - दोपहर 1.50


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


शाम का चौघड़िया


शुभ
शाम 4.26 - शाम 5.47


अमृत
शाम 5.47 - रात 7.27



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 1.49 - दोपहर 3.08


यमगण्ड काल
सुबह 7.15 - सुबह 8.34


गुलिक काल
सुबह 9.53 - सुबह 11.12


विडाल योग
सुबह 5.47 - सुबह 7.15, 16 जनवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 15 January 2026)



सूर्य
धनु


चंद्रमा
वृश्चिक


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



मकर राशि
पुराने सोर्स से पैसे आएंगे, यात्रा के योग हैं



कौन सी राशियां संभलकर रहें



कर्क राशि
लव लाइफ में विवाद हो सकता है, भावुकता में कोई निर्णय न लें



FAQs: 15 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?

धर्मशाला बनवाना या दान करना गुरु ग्रह को शांत करता है और जीवन में स्थिरता लाता है.

Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन वृद्धि योग बन रहा है.
Makar Sankranti 2026 Wishes: मकर संक्रांति के नए शुभकामनाएं संदेश, अपनों को भेजें




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/15/fbac98e7bef7764b9ec72844b02902021768444343708499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, आज, भी, मकर, संक्रांति, जानें, शुभ, मुहूर्त, राहुकाल, दान</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Mela 2026: मकर संक्रांति के बाद तीसरा माघ स्नान कब, नोट करें डेट</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4627</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4627</guid>
<description><![CDATA[ Magh Mela 2026 Mauni Amavasya Snan: माघ स्नान न केवल शरीर को शुद्ध करता है, बल्कि मन और आत्मा को भी पवित्र करता है. प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मकर संक्रांति के बाद तीसरा माघ स्नान मौनी अमावस्या पर 18 फरवरी 2026 को किया जाएगा. ये माघ मेले का सबसे पवित्र स्नान माना जाता है. ऐसे में पुण्य प्राप्ति के लिए मौनी अमावस्या को क्या करें जान लें.
मौनी अमावस्या स्नान मुहूर्त - सुबह 5.27 - सुबह 7.15 (सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का महत्व)
मौनी अमावस्या पर माघ स्नान का महत्व
अमावस्या तिथि पर्व मानी गई है, खासकर माघ माह में आने वाली मौनी अमावस्या का दिन जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति पाने का दिन है. इस दिन मौन रहकर स्नान, ध्यान और तप करने की परंपरा है. मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर किया गया संगम स्नान राजसूय यज्ञ के समान फल देता है और समस्त सुख प्रदान करता है.
मौनी अमावस्या पर क्या करें

इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करें.
शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि&amp;nbsp;इस दिन किया गया स्नान और दान मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग की ओर अग्रसर करता है
पूरे दिन मौन व्रत रखने का संकल्प लें. इससे आत्मा की शुद्धि और मानसिक तनाव दूर होता है.
दोपहर में सोएं नहीं, गायत्री मंत्र या अपने ईष्ट देव के मंत्रों का जाप करें.
सुबह पीपल की 108 परिक्रमा करें इससे दरिद्रता मिटती है.
जरुरतमंदों को दान में कंबल, तिल, गुड़, घी, अनाज दें साथ ही सुहागिनों को सुहाग की सामग्री बांटें.

घर में ये उपाय कर पाएं माघ मेले में स्नान का पुण्य

मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में स्नान करने नहीं जा पा रहे हैं तो इस दिन घर में ही नहाने के पानी में तिल और गंगाजल डालें और फिर गंगा जी के मंत्र का जाप करते हुए स्नान करें.
घर पर ही काले तिल और जल से पितरों का तर्पण करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. इसके लिए एक तांबे के पात्र में जल और दूध मिला लें, इसमें काले तिल भी डालें. अब हाथ में तिल मिला जल लेकर अपने पितरों का नाम लेते हुए पात्र में छोड़े. ऐसा तीन बार करें.

कंगाल भी बन जाएगा धनवान, प्रसिद्ध सेलिब्रिटी ज्योतिष ने बताया अचूक उपाय
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/14/5820ceb9165c9f669b0cdfa4337345ea1768383286663499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Mela, 2026:, मकर, संक्रांति, के, बाद, तीसरा, माघ, स्नान, कब, नोट, करें, डेट</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Magh Vinayak Chaturthi 2026: माघ विनायक चतुर्थी कब ? नोट करें डेट, पूजा मुहूर्त, गणेश जयंती का महत्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4625</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4625</guid>
<description><![CDATA[ Vinayak Chaturthi 2026: चतुर्थी तिथि के दिन विधि-विधान के साथ भगवान गणेश का पूजन करना और व्रत रखना बहुत लाभकारी माना जाता है. ये तिथि सुख, सौभाग्य, सफलता और संतान प्राप्ति के लिए बहुत लाभकारी मानी जाती है.
माघ महीने की विनायक चतुर्थी विशेष होती है क्योंकि इस दिन गणेश जयंती मनाई जाती है. माघ शुक्ल गणेश जयन्ती को मुख्यतः महाराष्ट्र व कोंकण के तटीय क्षेत्रों में मनाया जाता है. भारत के अन्य क्षेत्रों में भाद्रपद माह में आने वाली चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. इस बार माघ विनायक चतुर्थी 22 जनवरी 2026 को है.
माघ विनायक चतुर्थी 2026 मुहूर्त
माघ विनायक चतुर्थी 22 जनवरी 2026 को सुबह 2.47 पर शुरू होगी और समाप्ति 23 जनवरी को सुबह 2.28 पर होगी.


मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त - सुबह 11:29 - दोपहर 01:37


वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 09:22 ए एम से 09:19 पी एम


गणेश जयंती का महत्व
शास्त्रों के अनुसार गणेश जयंती वो दिन है जब माता पार्वती के उबटन से गणेश जी प्रकट हुए थे. यह पर्व ज्ञान, बुद्धि और सफलता का प्रतीक है, जिससे जीवन में सकारात्मकता और उन्नति आती है.&amp;nbsp; मान्यता है कि गणेश जयंती के दिन उनकी पूजा करने से सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यह दिन नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी बहुत शुभ माना जाता है.
माघ विनायक चतुर्थी पूजा विधि

प्रातः उठकर स्नानादि करने के पश्चात पूजा स्थान की साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़कें.
अब भगवान गणेश को वस्त्र पहनाएं और मंदिर में दीप प्रज्वलित करें.
सिंदूर से गणेश जी का तिलक करें और पुष्प अर्पित करें.
इसके बाद भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठ अर्पित करें.
गणेश जी को घी के मोतीचूर के लड्डू या मोदक का भोग लगाएं.
पूजा पूर्ण होने के बाद आरती करें और पूजन में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा मांगे.

Magh Mela 2026: मकर संक्रांति के बाद तीसरा माघ स्नान कब, नोट करें डेट

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/15/97672694a9290d58dc847136bb43dbe61768445511844499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Magh, Vinayak, Chaturthi, 2026:, माघ, विनायक, चतुर्थी, कब, नोट, करें, डेट, पूजा, मुहूर्त, गणेश, जयंती, का, महत्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>16 जनवरी को शिव पूजा का अद्भुत संयोग, इन कामों से हर संकट होंगे दूर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4623</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4623</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/15/9f3f26ee78604366d114757b62e362481768449533474499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>जनवरी, को, शिव, पूजा, का, अद्भुत, संयोग, इन, कामों, से, हर, संकट, होंगे, दूर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी व्रत किस दिन, तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण समय देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4624</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4624</guid>
<description><![CDATA[ Jaya Ekadashi 2026: माघ मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, उसका नाम &#039;जया&#039; है. वह सब पापों को हरनेवाली उत्तम तिथि है. पवित्र होने के साथ ही पापों का नाश करनेवाली तथा मनुष्यों को भाग और मोक्ष प्रदान करनेवाली जया एकादशी का जो व्रत करते हैं, वे सहस्र वर्ष तक स्वर्ग में वास करते हैं.
पौराणिक कथा के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से पिशाच योनि जैसे कष्टदायक योनियों से भी छुटकारा मिलता है. इस साल जया एकादशी 29 जनवरी 2026 को है.&amp;nbsp;
जया एकादशी 2026 मुहूर्त
जया एकादशी का व्रत 28 जनवरी 2026 को शाम 4 बजकर 35 मिनट पर शुरू होकर अगले दिन 29 जनवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट तक रहेगी.&amp;nbsp;

विष्णु जी पूजा मुहूर्त - सुबह 7.11 - सुबह 8.32. इसके बाद पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11.14 से लेकर दोपहर 1.55 तक है.
व्रत पारण समय - 30 जनवरी को सुबह 7.10 से सुबह 9.20

जया एकादशी पर विष्णु जी की पूजा
इस दिन विष्णु सहस्रनाम का जाप करें और जरूरतमंदों की मदद करें. 14 मुखी दीपक लगाकर श्रीहरि का ध्यान करें. ये उपाय वैवाहिक जीवन में सुख लाता है. लव मैरिज के रास्ते आसान होते हैं.
जया एकादशी के दिन श्रीहरि को पीपले के पत्ते पर दूध और केसर से बनी मिठाकर रखकर भोग लगाएं. पीपल का पत्ता एक दिन पहले तोड़ लें. मान्यता है इस उपाय से जीवन में कष्ट दूर होते हैं. आर्थिक तंगी नहीं रहती.
जया एकादशी पर क्या न खाएं
जया एकादशी पर खानपान के कुछ नियम बताए गए हैं और जिस घर में जया एकादशी की पूजा हो रही है और व्रत रखा जा रहा है, वहां इन नियमों का पालन करना चाहिए. एकादशी व्रत करने वालों को इस दिन केवल एक समय भोजन करना चाहिए.&amp;nbsp;
इस दिन व्रती को केवल फलाहार करना चाहिए. इस दिन अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन घर में चावल का सेवन भी नहीं करना चाहिए. एकादशी पर बैंगन, मूली, लहसुन, प्याज और मसूर दाल जैसी तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए.
Magh Vinayak Chaturthi 2026: माघ विनायक चतुर्थी कब ? नोट करें डेट, पूजा मुहूर्त, गणेश जयंती का महत्व

Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/15/9b975b2cd3d22d550f38fc44a74968f51768448662333499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:48 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Jaya, Ekadashi, 2026:, जया, एकादशी, व्रत, किस, दिन, तारीख, पूजा, मुहूर्त, और, पारण, समय, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>मकर संक्रांति के मौके पर वैष्णो देवी प्राचीन गुफा मार्ग फिर से खुला! भीड़ नियंत्रण में मिलेगी मदद</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4622</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4622</guid>
<description><![CDATA[ Vaishno Devi Prachin Gufa Marg: मकर संक्रांति के सुअवसर पर वैष्णो देवी मंदिर प्रशासन द्वारा प्राचीन गुफा मार्ग को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए फिर से खोल दिया है. वैष्णो देवी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए त्योहार से पहले एक बड़ी खुशखबरी मिली है.
यह निर्णय कटरा आने वाले भक्तों को ध्यान में रखकर किया गया है, ताकि भीड़ नियंत्रण रहें. यह प्राचीन मार्ग आध्यात्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है और इससे तीर्थयात्रा का अधिक गहरा अनुभव प्राप्त होगा.&amp;nbsp;
श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला प्राचीन गुफा मार्ग
जम्मू के कटरा स्थित मां वैष्णो देवी धाम में प्राचीन मार्ग खुलने से श्रद्धालु एक बार फिर से ऐतिहासिक गुफा मार्ग के जरिए गर्भगृह तक पहुंच सकते हैं और पवित्र पिंडियों के दर्शन भी कर सकते हैं.&amp;nbsp;
बीते दिन 14 जनवरी 2026, मकर संक्रांति के मौके पर मंदिर प्रशासन ने तीर्थयात्रियों के लिए प्राचीन गुफा मार्ग को खोल दिया है. यह रास्ता माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए अध्यात्म के नजरिए से बेहद खास है.&amp;nbsp;
प्राचीन मार्ग फिर से खुलने के साथ तीर्थयात्री प्राचीन गुफा के जरिए पवित्र पिंडियों के दर्शन का लाभ उठा पाएंगे. उम्मीद की जा रही है कि, यह फैसला व्यस्त दिनों में तीर्थयात्रियों की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगा. इसके साथ ही भक्त भी इस पूजनीय पारंपरिक मार्ग का लाभ उठा पाएंगे.&amp;nbsp;

#WATCH | Katra, Jammu and Kashmir: On the occasion of Makar Sankranti, the Shri Mata Vaishno Devi Shrine Board (SMVDSB) reopened the old cave at the Holy Shrine of Shri Mata Vaishno Devi Ji. The reopening was marked by special rituals and prayers, accompanied by Vedic chanting.&amp;hellip; pic.twitter.com/OfPzG8whi6
&amp;mdash; ANI (@ANI) January 14, 2026



साल 2025 में कितने लोगों ने की वैष्णो देवी यात्रा?
बीते साल 2025 में वैष्णो देवी आने वाले भक्तों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बीते वर्ष 70 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने माता वैष्णो रानी के दर्शन किए, जिसमें चैत्र नवरात्रि और नए साल पर काफी भीड़ देखने को मिली.
वही 2026 में नए साल के मौके पर वैष्णो देवी के दर्शन के लिए काफी भीड़ देखने को मिली, जिसमें साल के पहले दिन करीब 40 हजार से अधिक भक्त शामिल थे.&amp;nbsp;
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/15/e2799c95c080df3fa4d249ab3908c61317684572731091092_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 15 Jan 2026 12:36:47 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>मकर, संक्रांति, के, मौके, पर, वैष्णो, देवी, प्राचीन, गुफा, मार्ग, फिर, से, खुला, भीड़, नियंत्रण, में, मिलेगी, मदद</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Kumbh Weekly Horoscope 2026: कुंभ 11&#45;17 जनवरी राशिफल, शारीरिक समस्या की अनदेखी करने से बचें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4581</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4581</guid>
<description><![CDATA[ Kumbh Weekly Horoscope 11 to 17 january 2026: साप्ताहिक राशिफल ग्रह गोचर और नक्षत्रों के आधारित होता है. इसके आधार पर जातक के स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन व प्रेम, धन-धान्य और समृद्धि, परिवार संबंधित जानकारी निकाली जाती है. कहते हैं कुंभ राशि वालों के लिए 11 से 17 जनवरी का राशिफल कैसे रहेगा यहां देखें-
वीक स्टार्टिंग मिलाजुला साबित हो सकता है. आपकी सेहत आपके सोचे हुए को समय पर करने की राह में बाधक बन सकती है. इस दौरान आपको मौसमी या किसी पुरानी बीमारी के उभरने पर शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ सकती है. ऐसे में आपको इस दौरान न सिर्फ अपने खानपान और दिनचर्या का ख्याल रखना चाहिए बल्कि किसी भी शारीरिक समस्या की अनदेखी करने से बचना चाहिए, अन्यथा आपको अस्पताल के चक्कर तक लगाने पड़ सकते हैं.
आपको न सिर्फ सेहत की दृष्टि से बल्कि संबंधों की दृष्टि से थोड़ा प्रतिकूल रह सकता है. ऐसे में आपको स्वजनों के साथ विनम्रता से पेश आते हुए किसी भी समस्या को समझदारी के साथ सुलझाने का प्रयास करना चाहिए. प्रेम संबंध में भी सावधानी के साथ आगे बढ़े और रिश्तों को मजबूती देने के लिए अपने लव पार्टनर की भावनाओं को सम्मान करें.
प्रेम संबंध में किसी भी प्रकार का दिखावा करने से बचें अन्यथा नाहक ही कुछेक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. वाहन सावधानी के साथ चलाना चाहिए अन्यथा चोट लगने की आशंका है. आर्थिक दृष्टि से देखें तो आपको थोड़े उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि यह बिज़नेस का एक पार्ट है और ऐसी स्थिति ज्यादा समय तक नहीं रहेगी. ऑफिस में किसी भी प्रकार की परेशानी से बचने के लिए एम्प्लॉयड पर्सन को सीनियर एंड जूनियर से तालमेल बनाकर चलना उचित रहेगा.
Surya Grahan 2026: साल का पहला सूर्य ग्रहण किन राशियों की किस्मत चमकाएगा, किसकी खुशियों पर लगेगा ग्रहण
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/11/c788899db0dc3ce37e4c08b7fb5d46a61768073536270499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:56 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Kumbh, Weekly, Horoscope, 2026:, कुंभ, 11-17, जनवरी, राशिफल, शारीरिक, समस्या, की, अनदेखी, करने, से, बचें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>धार्मिक ग्रंथों पर पेन से हाईलाइट करना क्यों गलत? कथावाचक शिवम साधक ने समझाया</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4579</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4579</guid>
<description><![CDATA[ Rules for reading religious texts: धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते समय उनके प्रति सम्मान की भावना रखना तमाम धर्मों में अहम माना गया है. ग्रंथ केवल ज्ञान का स्त्रोत ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का भी प्रतीक है.
धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने से हमारी समझ और ध्यान में इजाफा होता है. अक्सर कई लोग धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते समय पेन या हाईलाइट का इस्तेमाल करते हैं, ताकि महत्वपूर्ण अंशों को याद रखा जा सके और भविष्य में आसानी से देख सकें.&amp;nbsp;
यह तरीका आधुनिक पद्धति में सही तो माना जाता है, लेकिन धार्मिक लिहाज से ऐसा करना गलत है. कथावाचक शिवम साधक महाराज के अनुसार धार्मिक ग्रंथों पर पेन या पेंसिल से हाईलाइट करना सही नहीं है. जानिए उन्होंने इस विषय में क्या कहा?

कथावाचक शिवम साधक महाराज ने क्या कहा?
कथावाचक शिवम साधक के अनुसार, &#039;शास्त्रों या श्रीमद् भगवत गीता का अध्ययन करते समय अक्सर अच्छे श्लोकों को हाईलाइट कर देते हैं. लेकिन ग्रंथों पर पेन चलाने चलाने का मतलब है श्री कृष्ण पर पेन चलाना.
अनेक कथाओं में हमें ऐसा मिलता है कि किसी भक्त ने गलती से अगर ग्रंथ पर पेन चलाया तो ठाकुर जी के हृदय पर अथवा मुख पर पेन चल गया. तो कभी भी हमें ग्रंथ पर पेन नहीं चलाना चाहिए.&#039;
उन्होंने आगे कहा कि, &#039;वह ग्रंथ क्या है या श्रीमद भगवत गीता क्या है? श्री कृष्ण ही हैं, क्योंकि कृष्ण के मुखारविंद से प्रत्येक शब्द निकला है तो उस पर अगर कोई लाइन आप खींच रहे हैं तो निश्चित ही श्री कृष्ण के मुखारविंद अथवा हृदय पर आप लाइन खींच रहे हैं. यह बहुत बड़ा दोष आपको लग सकता है.
मन में उतारिए, कोई अच्छी बात लग रही है, जीवन पर उतारिए. भूलने का भय है तो किसी दूसरे कागज पर उतार लीजिए लेकिन ग्रंथ पर कभी भूलकर पेन नहीं चलाइए.&#039;
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/11/06d4b60ef8e771e5550d43e7408cd94717681322030881092_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>धार्मिक, ग्रंथों, पर, पेन, से, हाईलाइट, करना, क्यों, गलत, कथावाचक, शिवम, साधक, ने, समझाया</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Meen Weekly Horoscope 2026: मीन 11&#45;17 जनवरी राशिफल, मल्टीनेशनल कंपनी से मिल सकता है जॉब का ऑफर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4580</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4580</guid>
<description><![CDATA[ Meen Weekly Horoscope 11 to 17 january 2026: साप्ताहिक राशिफल ग्रह गोचर और नक्षत्रों के आधारित होता है. इसके आधार पर जातक के स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन व प्रेम, धन-धान्य और समृद्धि, परिवार संबंधित जानकारी निकाली जाती है. कहते हैं मीन राशि वालों के लिए 11 से 17 जनवरी का राशिफल कैसे रहेगा यहां देखें-
वीक स्टार्टिंग धीमी गति से ही सही लेकिन प्रगति एवं लाभ का कारण बनेगा. फॉरेन में करियर एंड बिज़नेस के लिए प्रयासरत हैं, उनकी राह में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होती हुई नजर आएंगी. किसी मित्र या प्रभावी व्यक्ति की मदद से आप अपने करियर-बिज़नेस को आगे बढ़ाने में कामयाब होंगे. यदि आप जॉब चेंज की सोच रहे थे तो आपको मल्टीनेशनल कंपनी से ऑफर आ सकता है, लेकिन ऐसा कोई भी डिसिशन लेते समय आपको अपने शुभचिंतकों की सलाह अवश्य लेना चाहिए.
मिड वीक सुख-सुविधा से जुड़ी चीज में बड़ी धन राशि खर्च कर सकते हैं. प्रॉपर्टी या व्हीलर परचेस का सपना सच हो सकता है. फैमिली के साथ किसी पर्यटन स्थल पर घूमने-फिरने का प्रोग्राम बन सकता है. यात्रा सुखद एवं मनोरंजक साबित होगी. घर के किसी वरिष्ठ सदस्य की सेहत आपकी चिंता का बड़ा कारण बन सकती है.
इस दौरान किसी घरेलू मसले को लेकर भाई या बहन के साथ मतभेद होने की आशंका है हालांकि घर के किसी वरिष्ठ व्यक्ति की मदद से शीघ्र ही यह दूर हो जाएगा. प्रेम संबंध की दृष्टि से आपके लिए अनुकूल है. लव पार्टनर के साथ सुखद समय बिताने के अवसर प्राप्त होंगे. दांपत्य जीवन सुखमय बना रहेगा। परिवार के साथ हंसी-खुशी समय बिताने के अवसर प्राप्त होंगे.
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर बन रहे कार्य सिद्ध करने वाले योग, सुख-समृद्धि के लिए करें ये काम
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/11/e45369385371d64ad8b94ea409164f3e1768073792996499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:50 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Meen, Weekly, Horoscope, 2026:, मीन, 11-17, जनवरी, राशिफल, मल्टीनेशनल, कंपनी, से, मिल, सकता, है, जॉब, का, ऑफर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 12 जनवरी माघ कृष्ण नवमी तिथि, शुभ मुहूर्त और राहुकाल देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4577</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4577</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 12 जनवरी 2026: आज 12 जनवरी 2026 से माघ महीने के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि और सोमवार है. सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है. इसके साथ ही संतान की कामना भी पूरी होती है. सोम प्रदोष व्रत करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है. कुंडली में मांगलिक दोष है तो भोलेनाथ को दूध अर्पित करें इसमें केसर डालें.
आइए जानते हैं ये दिन किन राशियों के लिए शुभ-अशुभ है, इस दिन का शुभ समय, अशुभ काल, राहुकाल, ग्रह स्थिति और विशेष उपाय भी जानें.
12 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 12 January 2026)



तिथि

नवमी (11 जनवरी 2026, सुबह 10.20 - 12 जनवरी 2026, दोपहर 12.42)



वार
सोमवार


नक्षत्र
स्वाती


योग
धृति


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
सुबह 2.33, 13 जनवरी


चंद्रोस्त
दोपहर 12.45


चंद्र राशि
तुला



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 8.34 - सुबह 9.52


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 5.42 - रात 7.24



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
सुबह 8.34 - सुबह 9.52


यमगण्ड काल
सुबह 11.11 - दोपहर 12.29


आडल योग
सुबह 7.15 - सुबह 09.05


विडाल योग
रात 09.05 - सुबह 7.15, 13 जनवरी


गुलिक काल
दोपहर 1.48 - दोपहर 3.06


भद्रा काल
सुबह 1.59 - सुबह 7.14, 13 जनवरी



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 12 January 2026)



सूर्य
धनु


चंद्रमा
तुला


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कन्या राशि
करियर में मेहनत का असर दिखने लगेगा.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



धनु राशि
खर्च सोच समझकर करें, रिश्तों में खटास आ सकती है.



FAQs: 12 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?

शाम को शिवलिंग के पास घी का दीपक जलाएं, यह बहुत शुभ माना जाता है.&amp;nbsp;

Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन धृति योग बन रहा है.
Magh Mela 2026 Satua Baba: माघ मेले में सतुआ बाबा का लग्जरी अलग अंदाज, देखने वालों की उमड़ी भीड़




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/11/3c325f9584e62373321d89e5479a16091768142237313499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, माघ, कृष्ण, नवमी, तिथि, शुभ, मुहूर्त, और, राहुकाल, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Swami Vivekananda Jayanti 2026: स्वामी विवेकानंद की जयंती पर पढ़ें उनके विचार, गांठ बांध ले ये बातें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4578</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4578</guid>
<description><![CDATA[ Swami&amp;nbsp;Vivekananda Jayanti 2026 Quotes: स्वामी विवेकानंद के विचारों ने खासकर युवाओं और विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और आज भी करते हैं. इसलिए हर साल स्वामी विवेकानंद की जयंती पर 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के रूप में भी बनाया जाता है.
विवेकानंद युवाओं को राष्ट्र की रीढ़ मानते थे. वे कहते थे कि- मेरे देश को ऐसे नौजवान चाहिए जिनकी मांसपेशियां फौलाद की हों और नसों में बिजली दौड़ती हो. उनका सपना भारत को आत्मनिर्भर, शिक्षित और आध्यात्मिक रूप से जागरूक बनाना था.
स्वामी विवेकानंद भले ही अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके प्रेरणादायक विचार विरासत के रूप में आज भी युवाओं को सफल जीवन की बढ़ने, मेहनत करने और लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा देते हैं. स्वामी विवेकानंद की जयंती पर आप उनके उनके विचारों को अपनाने का प्रण लें और अपने लक्ष्य में आने वाली बाधाओं को दूर कर सफलता के शीर्ष पर पहुंचे.
स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक विचार (Swami Vivekananda ke Vichar in Hindi)



&amp;lsquo;जैसा तुम सोचते हो, वैसे ही बन जाओगे. खुद को निर्बल मानोगे तो निर्बल और सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे.&amp;rsquo;


&amp;lsquo;किताबें अनगिनत हैं और समय कम है. ज्ञान का रहस्य यह है कि जो जरूरी है उसे लें. उसे लें और उसके अनुसार जीने की कोशिश करें.&amp;rsquo;


&amp;lsquo;कुछ मत मांगो, बदले में कुछ मत चाहो. जो तुम्हारे पास है वह दे दो, वह तुम्हारे पास वापस आएगा लेकिन अभी उसके बारे में मत सोचो.&amp;rsquo;


&#039;जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते.&amp;rsquo;


उठो! जागो! और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए.&amp;rsquo;


&amp;lsquo;दिन में एक बार खुद से बात करें, नहीं तो आप इस दुनिया में एक बुद्धिमान व्यक्ति से मिलने से चूक सकते हैं.&amp;rsquo;


&amp;lsquo;सच को हजार अलग-अलग तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सच हो सकता है.&amp;rsquo;


&amp;lsquo;दिन में एक बार खुद से बात करो, नहीं तो हो सकता है कि तुम इस दुनिया में किसी बुद्धिमान व्यक्ति से मिलने का मौका गंवा दो.&amp;rsquo;


&amp;lsquo;जब कोई विचार पूरी तरह से मन पर हावी हो जाता है, तो वह एक वास्तविक भौतिक या मानसिक अवस्था में परिवर्तित हो जाता है.&amp;rsquo;


&amp;lsquo;मानव मन की शक्ति की कोई सीमा नहीं है. यह जितना अधिक एकाग्र होता है, उतना ही अधिक बल एक बिंदु पर केंद्रित होता है.&amp;rsquo;





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/11/2d6c886800cdce950889706622345ccf1768115412000466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Swami, Vivekananda, Jayanti, 2026:, स्वामी, विवेकानंद, की, जयंती, पर, पढ़ें, उनके, विचार, गांठ, बांध, ले, ये, बातें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>VIDEO: मकर संक्रांति से पहले पीएम ने जर्मन चांसलर के साथ उड़ाई पतंग, क्या है पतंगबाजी के इतिहास</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4575</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4575</guid>
<description><![CDATA[ Makar Sankranti 2026: तिल गुड़ से बने मिष्ठान, आसमान में उड़ती रंग बिरंगी पतंगे मकर संक्रांति की बानगी देती है. इनके बिना मकर संक्रांति का त्योहार अधूरा माना जाता है. दिल्ली, गुजरात में इसकी रौनक खास रहती है हालांकि भारत के अधिकांश शहरों में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाई जाती है.&amp;nbsp;
मकर संक्रांति से पहले गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फेडरिक मर्ज ने साथ मिलकर पतंग उड़ाई. फेडरिक आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे हैं.

#WATCH | Prime Minister Narendra Modi and German Chancellor Friedrich Merz seen flying a kite depicting Lord Hanuman at the International Kite Festival 2026 at Sabarmati Riverfront. pic.twitter.com/ZjT8FrAP7o
&amp;mdash; ANI (@ANI) January 12, 2026




#WATCH | Ahmedabad, Gujarat: Prime Minister Narendra Modi and German Chancellor Friedrich Merz fly a kite at the International Kite Festival 2026 at Sabarmati Riverfront. (Source: DD News) pic.twitter.com/YF4Va86IXj
&amp;mdash; ANI (@ANI) January 12, 2026



मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा राम काल से निभाई जाती है, मुगलों से भी इसका संबंध रहा है.
मकर संक्रांति पर पतंग और श्रीराम का नाता
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की धार्मिक मान्यताएं हैं. तमिल रामायण के मुताबिक, मकर संक्रांति के दिन सबसे पहली बार पतंग भगवान श्रीराम ने उड़ाई थी. ऐसा कहा जाता है कि उनकी पतंग इतनी ऊंची उड़ रही थी कि वह इंद्रलोक तक पहुंच गई थी. तभी से मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा शुरू हो गई.
रामचरितमानस में बालकांड में उल्लेख
&amp;lsquo;राम इक दिन चंग उड़ाई।इंद्रलोक में पहुँची जाई॥ &amp;nbsp;
&amp;lsquo;रामचरितमानस&amp;rsquo; में तुलसीदास ने ऐसे प्रसंगों का उल्लेख किया है, जब श्रीराम ने अपने भाइयों के साथ पतंग उड़ाई थी. इस संदर्भ में &amp;lsquo;बालकांड&amp;rsquo; में उल्लेख मिलता है-
पतंग उड़ाने का वैज्ञानिक आधार
मकर संक्रांति से ठंड कम होने लगती है. पतंगबाजी के जरिए सर्दी में सूर्य की किरणों का स्वागत करते हुए शारीरिक स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जाता है, क्योंकि धूप से विटामिन डी मिलता है. सर्दियों की सुबह पतंग उड़ाने की शरीर को ऊर्जा मिलती है और त्वचा संबंधी विकार दूर होते हैं
पतंगबाजी का इतिहास
पतंगबाजी का इतिहास करीब 2 हजार साल पुराना है. चीन में इसकी शुरुआत हुई और उस समय पतंग को संदेश भेजने के लिए उपयोग में लाया जाता था. भारत में पतंग चीनी यात्री फाह्यान और ह्वेन त्सांग लेकर आए थे. पहले युद्ध के मैदान में एक-दूसरे को संदेश देने की प्रथा में पतंग का इस्तमाल होता था.दिल्ली में मुगल पतंगबाजी की प्रतियोगिता कराते थे. फिर भारत में धीरे-धीरे नए खेल के रूप में पतंगबाजी लोगों के घरों में पहचान बनाने लग गई.
Shattila Ekadashi 2026: 14 जनवरी को 2 शुभ संयोग में षटतिला एकादशी व्रत, लक्ष्मी जी की बरसेगी कृपा
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/12/70f27e269b69e42ee9ec664f769a710e1768198869543499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>VIDEO:, मकर, संक्रांति, से, पहले, पीएम, ने, जर्मन, चांसलर, के, साथ, उड़ाई, पतंग, क्या, है, पतंगबाजी, के, इतिहास</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Basant Panchami 2026: एग्जाम हैं नजदीक, बसंत पंचमी पर किया ये उपाय दिला सकता है सफलता</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4576</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4576</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/11/e928e233011fb45dc2743aebd6937abf1768127856861499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Basant, Panchami, 2026:, एग्जाम, हैं, नजदीक, बसंत, पंचमी, पर, किया, ये, उपाय, दिला, सकता, है, सफलता</media:keywords>
</item>

<item>
<title>महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि में करेंगे शिवपुराण कथा, इस दिन से होगी शुरू</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4574</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4574</guid>
<description><![CDATA[ Kailashananda Giri: नए वर्ष में बिहार के जमुई के सिमुलतला में नगर वासियों को एक बार फिर देश के श्रेष्ठ संतों में शुमार श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर सह दक्षिण कालीपीठ हरिद्वार के पीठाधीश्वर कैलाशानंद गिरि जी महाराज का दर्शन होगा. इस आयोजन में श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी महाराज शिव पुराण कथा का वाचन करेंगे. कैलाशनंद गिरी दक्षिण कालीपीठ हरिद्वार के पीठाधीश्वर है सिमुलतला से भी संबंध रखते हैं.
कब होगी शिव पुराण
08 मार्च से 17 मार्च तक सिमुलतला में रहेंगे. महाराज सिमुलतला स्थित सेवाधाम में आयोजित श्री श्री 1008 शिवशक्ति महायज्ञ में शिव महापुराण कथा अपने मुखर विंड से शिवभक्ति को सुनाएंगे. इस महायज्ञ और कथा को कैसे सफलता पूर्वक संपन्न हो इस विषय में गहराई से एक बैठक कर मंथन किया गया.&amp;nbsp;इस महायज्ञ में उप मुख्यमंत्री सह भाजपा वरीय नेता सम्राट चौधरी के साथ भारत सरकार एवं बिहार सरकार के कई मंत्री एवं कई राज्यपाल भी आ सकते हैं.
महायज्ञ में अभिनेता सह भाजपा नेता मनोज तिवारी, शिवेश मिश्रा, किशन कुमार, गोलू राजा, स्वाति मिश्रा, निशा उपाध्याय और तृप्ति शाक्या भी शामिल होंगे. इस महायज्ञ में एक शंकराचार्य और बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री भी पहुंचेंगे. इसके अलावा भी देश के कई नामचीन श्रेष्ठ संतों का भी जमावड़ा होगा.
महायज्ञ की कलश शोभा यात्रा 08 मार्च को होगी. कलश यात्रा में 5051 कुंवारी कन्या के साथ माताएं शामिल होगी.
कौन हैं आचार्य कैलाशानंद गिरी महाराज
महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी निरंजनी अखाड़ा का पीठाधीश्वर हैं. 1976 में बिहार के जमुई में स्वामी कैलाशानंद गिरि का जन्म एक. मध्यम परिवार में हुआ. इन्होंने बचपन में ही घर त्यागकर धर्म का रास्ता चुन लिया था.
Swami Kailashanand Giri: भगवान की पूजा के हैं 3 तरीके, स्वामी कैलाशानंद से जानें कौन सा मार्ग है सबसे सरल
Disclaimer : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/12/c5841b2c38753c63fb80a61d98cbeb3a1768190739102499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>महामंडलेश्वर, कैलाशानंद, गिरि, में, करेंगे, शिवपुराण, कथा, इस, दिन, से, होगी, शुरू</media:keywords>
</item>

<item>
<title>ज्योतिष के वो उपाय जो बदल देगा आपकी किस्मत, 24 घंटे में बदल सकते हैं नतीजे</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4573</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4573</guid>
<description><![CDATA[ Money and Destiny Upay: आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में हर कोई चाहता है कि उसकी राह में कोई रुकावट न आए - काम चुटकियों में हो जाए, रिश्ते टूटे नहीं, और नाम-दौलत दोनों साथ आएं. लेकिन क्या सच में राहु-शनि के दोष, मेहनत से जी चुराना या सोशल मीडिया फेम जैसी हर समस्या का हल ज्योतिष के पास होता है?
ज्योतिष कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि प्रकृति के छिपे हुए गणित और रहस्य हैं. इन्हें सही तरह से अपनाया जाए तो जीवन में चमत्कारी बदलाव आते हैं.
सिर्फ 24 घंटे में पूरे होंगे आपके अटके काम
अक्सर लोग सोचते हैं कि ज्योतिषीय उपाय असर दिखाने में वक्त लेते हैं, लेकिन आचार्य जी के अनुसार एक साधारण सा प्रयोग आपकी परेशानी 24 घंटे के भीतर हल कर सकता है.

रात को सोने से पहले अपने तकिए के नीचे पीली सरसों रखें.
फिर आंखें बंद कर, कम से कम 18 सेकंड तक सांस रोककर तीन बार मन में सोचें - &amp;ldquo;मेरा काम हो गया है.&amp;rdquo;
सुबह उठकर यही क्रिया दोहराएं और फिर वह सरसों पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं.

यह छोटा-सा प्रयोग कई बार रुके हुए कामों को अगले ही दिन गति दे देता है.
रुके हुए काम और ग्राहक आकर्षण का ज्योतिषीय विज्ञान-
कई बार व्यापार या करियर अचानक ठहर जाता है - व्यापार में ग्राहक नहीं आते; मेहनत होती है, पर नतीजे नहीं मिलते.

ग्राहक आकर्षण उपाय :

उत्तर दिशा (नॉर्थ) में कभी भी लाल रंग का प्रयोग न करें. इस दिशा में एक स्पॉटलाइट, पानी का छोटा फव्वारा, और एक गोल घड़ी लगाएं. इससे अवसरों की दिशा सक्रिय होती है.

रुके हुए काम के लिए:

शनिवार को सरसों के तेल में अपना चेहरा देखें, फिर नाखूनों पर उस तेल का प्रतिबिंब देखें. इसके बाद काले उड़द और बादाम शनि मंदिर या किसी जरूरतमंद को दान करें. यह प्रयोग शनिदेव की रुकावटें दूर करता है और काम फिर से शुरू होने लगता है.
आलस भगाने का हनुमान मंत्र
आलस की असली वजह मंगल ग्रह का कमजोर होना है.

जब भी आलस महसूस हो, मन ही मन मंत्र जपें - &amp;ldquo;श्री हनु हनुमते नमः.&amp;rdquo;
कुछ ही मिनटों में शरीर में ऊर्जा प्रवाहित होती है और कार्यशक्ति बढ़ती है.

बच्चों की भूख बढ़ाने का आसान मंत्र
आजकल बच्चों का ठीक से खाना न खाना माता-पिता के लिए आम परेशानी है.

भोजन से पहले तीन बार बोलें: हे भगवन् भोग लगाइए, यह अमृत हो जाए, इस अमृत को पान कर मेरा जीवन सफल हो जाए. यह मंत्र भोजन को अमृतमय बना देता है, जिससे बच्चों को खाना स्वादिष्ट लगता है और उनकी भूख स्वाभाविक रूप से बढ़ती है.

रिश्ते टूटने से बचाने का &amp;ldquo;हंस जोड़ा&amp;rdquo; उपाय
हंस वफ़ादारी और स्थिरता का प्रतीक है. चोंच से जुड़े हुए हंसों का जोड़ा खरीदकर घर के दक्षिण-पश्चिम या नॉर्थ-वेस्ट दिशा में रखें.
शुक्रवार या शनिवार को आलू-प्याज़ के परांठे किसी गरीब या ब्राह्मण को खिलाएं. इससे रिश्तों में जमा हुआ तनाव दूर होता है और प्रेम पुनः लौट आता है.
नशे को छुड़ाने का ज्योतिषीय उपाय
नशा हमेशा राहु ग्रह से जुड़ा माना जाता है. आचार्य जी का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति शराब या किसी भी नशे की आदत में फंसा है, तो यह उपाय करें -

नीले कपड़े में राहु यंत्र, जौ, सूखा नारियल और उसके बालों का छोटा गुच्छा बांधकर एक पोटली बना लें.
शनिवार रात 12 बजे वह पोटली सात बार उसके सिर के ऊपर से घुमाकर सुबह सूर्योदय से पहले बहते पानी में बहा दें.
लगातार 11 शनिवार ऐसा करने से नशे की आदत धीरे-धीरे कम होने लगती है.

रात 8 बजे के बाद का &amp;ldquo;शुक्र काल&amp;rdquo;
ज्योतिष के अनुसार, रात 8 बजे के बाद शुक्र काल शुरू होता है. यह समय सौंदर्य, धन और आकर्षण का होता है.

इस दौरान कपूर जलाकर पूरे घर में धुआं करें.
दही से स्नान करें और शुद्ध इत्र लगाएं.

इन उपायों से घर की नकारात्मकता समाप्त होती है और लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है.
कुबेर मंत्र और 33 नंबर का चमत्कार-
धन के देवता कुबेर जी को प्रसन्न करने के लिए आचार्य लवभूषण जी दुर्लभ मंत्र के प्रयोग की सलाह देते हैं - &amp;ldquo;ॐ वं ह्रीं श्रीं रति प्रिय स्वाहा.&amp;rdquo;
किसी भी नए काम, अनुबंध या यात्रा से पहले इस मंत्र का जाप करें. इससे धन और अवसर दोनों की प्राप्ति होती है. 33 नंबर गुरु और शुक्र दोनों की कृपा का प्रतीक है. बाएं हाथ की कलाई पर हरे या गुलाबी पेन से &amp;ldquo;33&amp;rdquo; लिखें. यह नंबर ध्यान, फोकस और आर्थिक समृद्धि बढ़ाता है.
राहु से डरें नहीं, दोस्ती करें
आज के समय में सबसे ज़्यादा धन देने वाला ग्रह राहु है. अगर यह शुभ हो जाए तो शेयर मार्केट, लॉटरी और क्रिप्टो जैसी जगहों से भी लाभ देता है.

राहु को प्रसन्न करने के लिए मछलियों को चावल, मूंग या आटे की गोलियां खिलाएं.
गरीबों, स्वीपर्स या मरीजों को फास्ट फूड और नारियल पानी दें.

ज्योतिष अंधविश्वास नहीं, बल्कि गणित और प्रकृति का अद्भुत विज्ञान है. हर समस्या का समाधान इस प्राचीन विद्या में छिपा है. अगर इन उपायों से ग्रहों को प्रसन्न कर लिया जाए तो भाग्य बदलना मुश्किल नहीं है.
कुंडली बताती है रिश्ते निभेंगे या टूटेंगे, धन आएगा या कर्ज में डूबेंगे! ऐसे पहचानें
नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/12/84248d85d5ca53916cbc85b21e0c07591768195945531499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>ज्योतिष, के, वो, उपाय, जो, बदल, देगा, आपकी, किस्मत, घंटे, में, बदल, सकते, हैं, नतीजे</media:keywords>
</item>

<item>
<title>2026 में दुनिया खत्म? इस साल प्रलय की भविष्यवाणियां क्यों तेजी से वायरल हो रही है?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4572</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4572</guid>
<description><![CDATA[ Doomsday predictions for year 2026: साल 2026 की शुरुआत डरा देने वाली भविष्यवाणियों के साथ शुरू हुई, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मीम्स में लिखा है, &#039;सब खत्म, टाटा, बाय-बाय&#039;, लेकिन इन सबके अलावा बाबा वेंगा समेत दुनियाभर के कई भविष्यवक्ताओं ने साल 2026 को युद्ध और विनाश का साल करार दिया है.
सोशल मीडिया पर कुछ लोग वर्तमान वैश्विक हालात को देखते हुए तीसरे विश्व युद्ध के शुरू होने की भविष्यवाणियां कर रहे हैं. इसमें भीषण प्राकृतिक आपदाओं से लेकर पृथ्वी के वायुमंडल में किसी अंतरिक्ष यान के प्रवेश की चेतावनी दे रहा है.&amp;nbsp;
2026 में दुनिया खत्म होने की बात क्यों हो रही है?
कभी सोचा है कि, आखिर हर कोई साल 2026 में दुनिया खत्म होने की बात क्यों कर रहा है? दरअसल इस वर्ष प्रलय की भविष्यवाणियों में आई तेजी किसी विश्वसनीय स्रोत (reliable source) से नहीं, बल्कि पुरानी भविष्यवाणियों की पिछली बातों, साइंस की गलत व्याख्या (Interpretation) और वर्तमान समय में हमारे आस-पास मंडरा रहे वैश्विक खतरों के प्रति हमारी सामूहिक चिंता के कारण उत्पन्न हो रही है.
इस समय अमेरिकी सरकार का दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ रवैया, रूस-यूक्रेन क्षेत्र, मध्य पूर्व और दक्षिण सागर समेत विश्व के कई देश संवेदनशील क्षेत्र बने हुए हैं.

बाबा वेंगा, एथोस सोलेम और तबाही की घटना
साल 1996 में बाबा वेंगा के निधन के बाद आज भी उनकी प्रलय की भविष्यवाणियां डर को हवा देने का काम करी है. उनकी सबसे अधिक भविष्यवाणियां न्यूयॉर्क पोस्ट, द मिरर और एक्सप्रेस जैसे समाचार पत्रों में व्यापक रूप से प्रकाशित हुई है, जिसको उनके अनुयायी और व्याख्याकार कई नाटकीय घटनाओं को साल 2026 से जोड़कर देखते हैं.&amp;nbsp;
द इकोनॉमिस्ट पत्रिका के &#039;द वर्ल्ड अहेड 2026&#039; के मुख्य पर युद्ध, वैश्विक अशांति और अराजकता से भरे साल का चित्रण किया गया है. विशेषज्ञ की मानें तो 2026 में वित्तीय बाजारों की हालात काफी खराब हो सकती है.&amp;nbsp;

भविष्यवाणियों में प्रलय, प्राकृतिक आपदाएं और एलियन शामिल&amp;nbsp;
इन भविष्यवाणियों में तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत, रूस-अमेरिका, चीन और यूरोप जैसे प्रमुख शक्तियों के बीच वैश्विक संघर्ष के साथ विनाशकारी भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट, तेजी से बदलता मौसम, बाढ़ और तूफान जैसी भीषण आपदाएं शामिल हैं, जो कहीं न कहीं पृथ्वी के 7 से 8 प्रतिशत भाग को प्रभावित कर सकती है.&amp;nbsp;
सबसे हैरान करने वाली भविष्यवाणियों में नवंबर 2026 के मध्य पृथ्वी के वायुमंडल में एक विशाल एलियन जहाज के प्रवेश समेत बाहरी ग्रहों के प्राणियों के साथ मानव सभ्यता का पहला संपर्क भी शामिल है. यह सभी बातें केवल बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों में ही शामिल नहीं है, बल्कि अन्य लोग भी आग में घी डालने वाला काम कर रहा है.
दुनियाभर के तमाम भविष्यवक्ताओं की डराने वाली भविष्यवाणियां
पाकिस्तानी आध्यात्मिक गुरु रियाज अहमद गोहर शाही, जो साल 2003 में रहस्यमय तरीके से गायब हुए थे, उन्होंने साल 2026 में पृथ्वी से एक धूमकेतु के जोरदार टक्कर होने की बात कही थी.
इनमें ब्राजील के जीवत नोस्ट्राडेमस एथोस सेलोम ने भी साल 2024 में चेतावनी दी थी कि, आने वाला समय वैश्विक युद्ध, साइबर संघर्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) का प्रभाव बढ़ेगा.&amp;nbsp;
वहीं दूसरी ओर घाना के एबो नूह जो खुद को पैगंबर बताते हैं, ने बाढ़ की भविष्यवाणियां की थी, लेकिन वो विफल रही. उन्होंने इसके लिए घाना में कई नौकाएं भी बनवाई थीं. यह भविष्यवाणी उनके और उनके लोगों की मुक्ति लेकर नहीं, बल्कि उनकी गिरफ्तारी पर खत्म हुई थी, जब उन्होंने नई मर्सिडीज बेंज कार खरीदी थी.

दुनिया का अंत साल 5079 तक- बाबा वेंगा
बात की जाए बाबा वेंगा की प्रलय की भविष्यवाणियों की तो अभी उसमें समय है, क्योंकि उन्होंने साल 5079 तक की भविष्यवाणी की थी, हालांकि उन्होंने साल 2025 को लेकर कहा था कि, यहां से मानव सभ्यता का पतन होना शुरू हो जाएगा.
उनकी भविष्यवाणियों का कोई आधिकारिक या लिखित रिकॉर्ड नहीं है, क्योंकि वे सभी चेतावनी मौखिक रूप से प्रसारित होती थीं, जो बाद में अन्य लोगों के द्वारा वायरल होते चली गई.
बाबा वेंगा की अधिकतम भविष्यवाणियां सुनी-सुनाई बातें, किताबों और सोशल मीडिया के प्रचार के कारण प्रसिद्ध हुई. उनकी अस्पष्ट भविष्यवाणियों को अक्सर वर्तमान समय की घटनाओं के मुताबिक ढाला जाता है, ठीक उसी तरह जैसे नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों को देखा जाता है.

प्रलय की भविष्यवाणियां क्यों हो रही है वायरल?
प्रलय की भविष्यवाणियां अक्सर सोशल मीडिया पर इसलिए वायरल होती हैं, क्योंकि ये डर और अनिश्चितता की तीव्र भावनाओं को जागृत करती हैं, जिस पर सामान्य सामग्री की तुलना में काफी ज्यादा शेयर, लाइक और कमेंट किया जाता है. तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम सनसनीखेज और प्रलय की भविष्यवाणियों को बढ़ावा देते हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/12/a3aa93528412cebe17097995c3e9344d17681974987541092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Mon, 12 Jan 2026 12:00:41 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>2026, में, दुनिया, खत्म, इस, साल, प्रलय, की, भविष्यवाणियां, क्यों, तेजी, से, वायरल, हो, रही, है</media:keywords>
</item>

<item>
<title>2026 में नई शुरुआत चाहते हैं? जीवन की दिशा बदल सकते हैं भारत के ये 5 शक्तिशाली तीर्थस्थल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4531</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4531</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/07/6e282eca48cc36c026ef54a86dafaf8217677664249741092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:08 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>2026, में, नई, शुरुआत, चाहते, हैं, जीवन, की, दिशा, बदल, सकते, हैं, भारत, के, ये, शक्तिशाली, तीर्थस्थल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>जब शहर की भीड़ में खोई &amp;apos;कुलदेवी&amp;apos; ने दिया जीवन को नया मोड़</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4528</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4528</guid>
<description><![CDATA[ क्या कुलदेवी-देवता को भूलने से जीवन में संकट आते हैं? हां, सनातन धर्म और आध्यात्मिक मनोविज्ञान के अनुसार, कुलदेवी या देवता आपके वंश की ऊर्जा के मूल स्रोत (Root Energy) होते हैं.
जब कोई परिवार अपनी जड़ों से कट जाता है, तो उनका &#039;आध्यात्मिक सुरक्षा कवच&#039; कमजोर हो जाता है, जिससे बिना किसी कारण के स्वास्थ्य, करियर और घरेलू क्लेश जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं. इसका समाधान केवल अपनी कुल परंपराओं को पुनर्जीवित करने और श्रद्धापूर्वक जड़ों की ओर लौटने में है.
आज के आधुनिक दौर में हम महानगरों की ऊंची इमारतों और कॉरपोरेट कल्चर के बीच इतने व्यस्त हो गए हैं कि हम उन शक्तियों को भूल बैठे हैं, जिन्होंने सदियों से हमारे पूर्वजों की रक्षा की.

भारत के &#039;सिलिकॉन वैली&#039; कहे जाने वाले शहर बैंगलुरु में रहने वाले लाखों युवाओं की तरह आदित्य भी अपनी जड़ों से पूरी तरह कट चुके थे. लेकिन जीवन ने उन्हें एक ऐसा सबक सिखाया, जिसने उनकी पूरी सोच बदल दी. यह कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर उस भारतीय की है जो अपनी सांस्कृतिक विरासत को पीछे छोड़ आया है.
बैंगलुरु की चकाचौंध और अचानक शुरू हुआ अंधेरे का दौर
आदित्य (बदला हुआ नाम) बैंगलुरु की एक जानी-मानी आईटी कंपनी में बतौर सॉल्यूशन आर्किटेक्ट कार्यरत थे. महीने का लाखों का पैकेज, सरजापुर रोड पर अपना आलीशान 3BHK फ्लैट और एक खुशहाल परिवार. आदित्य के लिए जीवन एक सीधी लकीर पर चल रहा था. लेकिन 2023 की शुरुआत के साथ ही उनके जीवन में एक ऐसी उथल-पुथल शुरू हुई जिसका कोई तार्किक (Logical) आधार नहीं था.
शुरुआत छोटी-छोटी बातों से हुई. पहले आदित्य की पत्नी की सेहत बिगड़ने लगी, जिसका मेडिकल साइंस के पास कोई ठोस जवाब नहीं था. फिर ऑफिस में बिना वजह विवाद होने लगे. जो काम आदित्य चुटकियों में कर लेते थे, उसमें तकनीकी गलतियां होने लगीं.
आर्थिक तंगी और मानसिक अशांति ने घर में ऐसा डेरा डाला कि आदित्य पूरी तरह टूट गए. उन्होंने वास्तु शास्त्री से लेकर मनोवैज्ञानिकों तक की मदद ली, लेकिन स्थिति और बिगड़ती गई. वह समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर सब कुछ सही होने के बावजूद &#039;सब कुछ गलत&#039; क्यों हो रहा है.
वह एक सवाल जिसने हिलाकर रख दिया
एक शाम, आदित्य की मुलाकात अपने एक पुराने पारिवारिक मित्र से हुई, जो धर्म और अध्यात्म के गहरे जानकार थे. बातों-बातों में जब आदित्य ने अपनी परेशानियां साझा कीं, तो उस मित्र ने एक बहुत ही सरल लेकिन गंभीर सवाल पूछा- &#039;आदित्य, आखिरी बार तुमने अपनी कुलदेवी के मंदिर में कब माथा टेका था? क्या तुम्हें पता भी है कि तुम्हारे कुल की रक्षा करने वाले देवता कौन हैं?&#039;
आदित्य निरुत्तर थे. उन्हें बस इतना याद था कि बचपन में उनके पिता कभी-कभी किसी &#039;माता&#039; का जिक्र करते थे, लेकिन 25 साल पहले पिता के निधन के बाद और पढ़ाई-करियर की भागदौड़ में वह सब कहीं पीछे छूट गया था.
मित्र ने गंभीर स्वर में कहा, &#039;आदित्य, जैसे एक मोबाइल नेटवर्क के बिना काम नहीं करता, वैसे ही एक हिंदू परिवार अपने कुलदेवी-देवता के &#039;सुरक्षा कवच&#039; के बिना सुरक्षित नहीं रहता. जब हम उन्हें भूल जाते हैं, तो हमारे वंश की ऊर्जा क्षीण होने लगती है और नकारात्मक प्रभाव हम पर हावी हो जाते हैं.&#039;
कुलदेवता की खोज: एक चुनौतीपूर्ण लेकिन पवित्र सफर
आदित्य ने अपनी जड़ों को खोजने का संकल्प लिया. लेकिन यह इतना आसान नहीं था. सालों से गांव और रिश्तेदारों से संपर्क टूट चुका था. उन्होंने एक व्यवस्थित तरीके से अपनी खोज शुरू की, जो आज की पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शिका (Guide) बन सकती है:
प्रयास 1: वंशावली का पता लगाना (The Lineage Search)आदित्य सबसे पहले उत्तराखंड के अपने पैतृक गांव पहुंचे. वहां उन्हें पता चला कि उनके परिवार का रिकॉर्ड हरिद्वार के &#039;तीर्थ पुरोहितों&#039; के पास हो सकता है.
प्रयास 2: हरिद्वार के &#039;बही-खाते&#039;हरिद्वार के कुशावर्त घाट पर जब आदित्य ने अपने पूर्वजों के नाम बताए, तो वहां के पुरोहित ने सदियों पुराने बही-खाते (Pothis) खोल दिए. वहां उनके सात पीढ़ियों के नाम दर्ज थे और अंत में सुनहरे अक्षरों में लिखा था, कुलदेवी मां राजराजेश्वरी. आदित्य की आंखों में आंसू थे, उन्हें अपनी पहचान का पहला सूत्र मिल चुका था.
प्रयास 3: पैतृक स्थान का पुनरुद्धारगांव के बुजुर्गों की मदद से आदित्य उस स्थान पर पहुंचे जहां कभी उनकी कुलदेवी का एक छोटा सा मंदिर हुआ करता था. वह स्थान झाड़ियों से ढक चुका था और खंडहर बन गया था. आदित्य को अपनी गलती का एहसास हुआ कि जिस शक्ति ने उनके वंश को फलने-फूलने का वरदान दिया, उसे उन्होंने बिसरा दिया था.
किया विधि-विधान और जीवन में आया चमत्कारआदित्य ने विद्वान ब्राह्मणों की देखरेख में वहां &#039;कुल दोष शांति&#039; की विशेष पूजा करवाई. उन्होंने न केवल मंदिर की सफाई और मरम्मत करवाई, बल्कि वहां नियमित पूजा की व्यवस्था भी की. उन्होंने बैंगलुरु वापस आकर अपने घर के मंदिर में कुलदेवी की तस्वीर स्थापित की और प्रतिदिन उनके नाम का दीपक जलाना शुरू किया.
बदलाव की शुरुआत: आदित्य बताते हैं, &#039;चमत्कार रातों-रात नहीं हुआ, लेकिन जैसे ही मैंने अपनी जड़ों से जुड़ने का संकल्प लिया, मेरे मन की बैचेनी शांत होने लगी. पूजा के एक महीने बाद पत्नी की सेहत में सुधार आया, जो डॉक्टर पिछले एक साल में नहीं कर पाए थे. ऑफिस में जो प्रोजेक्ट मेरे हाथ से निकल गए थे, वे अप्रत्याशित रूप से वापस मिल गए.&#039;
यदि आपको अपने कुलदेवता का पता न हो, तो क्या करें?

पारिवारिक बुजुर्गों से संवाद: अक्सर परिवार की सबसे वृद्ध महिला (दादी, नानी या बुआ) को कुल की रीतियां याद होती हैं. उनसे &#039;अटक&#039; या &#039;गोत्र&#039; के बारे में पूछें.
गोत्र आधारित ऑनलाइन खोज: आज कई ऐसे डिजिटल डेटाबेस मौजूद हैं जहां आप अपने गोत्र (जैसे- कश्यप, भारद्वाज, आदि) के माध्यम से अपने कुलदेवता की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
दहलीज पर दीपक: यदि आपको कुछ भी पता न चले, तो प्रतिदिन शाम को घर की मुख्य दहलीज पर &#039;कुलदेवता&#039; के नाम का एक घी का दीपक जलाना शुरू करें और मन में प्रार्थना करें कि वे आपको मार्ग दिखाएं.
ग्राम देवता की शरण: अपने मूल गांव के &#039;ग्राम देवता&#039; के दर्शन करें. माना जाता है कि ग्राम देवता कुलदेवता तक आपका संदेश पहुँचाने में माध्यम बनते हैं.

आधुनिकता और परंपरा का संतुलन
आदित्य की यह कहानी हमें सिखाती है कि हम चाहे दुनिया के किसी भी कोने में पहुंच जाएं, लेकिन अपनी &#039;आध्यात्मिक जड़ों&#039; से कटे रहकर पूर्ण शांति नहीं पा सकते. कुलदेवी या कुलदेवता केवल धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे हमारे डीएनए (DNA) और हमारे वंश की सूक्ष्म ऊर्जा के संरक्षक हैं. आज के इस भागदौड़ भरे जीवन में, एक बार रुककर सोचिए कहीं आपकी समस्याएं भी तो आपकी जड़ों की पुकार नहीं हैं?
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs): कुलदेवी-देवता और उनके प्रभाव
प्रश्न 1: अगर हमें अपनी कुलदेवी या कुलदेवता का नाम बिल्कुल भी पता न हो, तो क्या करें? 
उत्तर: यदि तमाम कोशिशों के बाद भी नाम ज्ञात न हो, तो शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को अपना कुलदेवता और माता दुर्गा को अपनी कुलदेवी मानकर पूजा शुरू करें. साथ ही, घर में प्रतिदिन एक दीपक जलाकर संकल्प लें, &#039;हे मेरे अज्ञात कुलदेवता, मैं आपको प्रणाम करता हूं, कृपया मुझ पर अपनी कृपा बनाए रखें और दर्शन दें.&#039;
प्रश्न 2: कुलदेवी के नाराज होने के मुख्य लक्षण क्या हैं? 
उत्तर: जब कुल की ऊर्जा असंतुलित होती है, तो इसके कुछ सामान्य संकेत मिलते हैं:-

परिवार में बिना किसी ठोस कारण के लगातार कलह रहना.
वंश वृद्धि में बाधा आना या संतान प्राप्ति में देरी.
विवाह योग्य युवक-युवतियों के विवाह में बार-बार अड़चनें आना.
घर में बरकत की कमी और अचानक बड़े आर्थिक नुकसान होना.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/07/363e2e84de0e821cfa369ba8847d36931767784605351257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>जब, शहर, की, भीड़, में, खोई, कुलदेवी, ने, दिया, जीवन, को, नया, मोड़</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Laxmi Ji: आपकी इन गलत आदतें से नाराज होती है देवी लक्ष्मी, धनवान भी बन जाता है कंगाल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4529</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4529</guid>
<description><![CDATA[ Laxmi ji: आज के समय में हर इंसान मेहनत करता है - कोई 9 से 5 नौकरी करता है, कोई बिज़नेस चलाता है, तो कोई पार्ट-टाइम जॉब से पैसे जोड़ता है. फिर भी यह सवाल हर किसी के मन में आता है - &amp;ldquo;इतनी मेहनत के बावजूद पैसा टिकता क्यों नहीं?&amp;rdquo;
इसका कारण सिर्फ कर्म नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतें और घर की ऊर्जा-असंतुलन भी है. मेहनत ज़रुरी है, लेकिन मेहनत का फल तभी मिलता है जब आपके ग्रह, वास्तु और जीवनशैली एक-दूसरे के अनुकूल हों.
दिशा का खेल : गलत वस्तुएं रोक देती हैं धन का प्रवाह

कई बार इंसान खूब कमाता है, लेकिन उतनी ही तेजी से पैसा खर्च भी हो जाता है. इसका सबसे बड़ा कारण है - घर या ऑफिस में गलत दिशा में रखी वस्तुएं, जो धन प्रवाह को रोक देती हैं.
अगर आपने दीवार घड़ी दक्षिण या पूर्व दिशा में गोल आकार की लगा दी, तो समय आपके खिलाफ हो सकता है. सही दिशा में लगी घड़ी प्रगति का प्रतीक होती है, जबकि गलत दिशा में लगी घड़ी विलंब और हानि लाती है.
घर या ऑफिस में लगे सीसीटीवी कैमरे अगर ईस्ट, साउथ-ईस्ट या वेस्ट-नॉर्थ-वेस्ट में हों, तो यह नकारात्मक ऊर्जा फैलाते हैं. ऐसे घरों में टैक्स, जांच एजेंसियों या कोर्ट केस जैसी परेशानियाँ बढ़ सकती हैं.
घर की सुंदरता बढ़ाने के लिए लोग पौधे लगाते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार साउथ-वेस्ट दिशा में पौधे लगाना दरिद्रता और पारिवारिक कलह को आमंत्रण देता है. यानी अनजाने में आपकी सजावट ही आपकी समृद्धि को रोक सकती है.

आदतें जो बनाती हैं कंगाल-

पैसा सिर्फ मेहनत से नहीं, बल्कि आदतों से भी जुड़ा होता है. आचार्य लव भूषण जी के मुताबिक कलयुग में सबसे अधिक प्रभाव राहु और शनि का है, और इन्हीं से जुड़ी गलत आदतें व्यक्ति के जीवन में लक्ष्मी की कृपा रोक देती हैं.
देर रात तक जागना और सुबह देर से उठना राहु को खराब करता है. नतीजा यह होता है कि सोच नकारात्मक होती जाती है और काम अधूरे रह जाते हैं.
झूठ बोलना और विवाद करना बुध और मंगल को कमजोर करता है. ऐसे लोग प्रमोशन, रिश्ते और बिज़नेस - हर जगह संघर्ष झेलते हैं.
कर्ज लेने या मुफ्त की चीजें लेने की आदत शनि को नाराज़ करती है. भले ही कमाई अच्छी हो, लेकिन धन रुकता नहीं और व्यक्ति हमेशा उधारी में फंसा रहता है. यानी जब तक आदतें नहीं बदलेंगी, मेहनत का फल हाथ में नहीं टिकेगा.

छोटे-छोटे उपाय जो खोलते हैं धन के द्वार-

अमीरी का रास्ता कठिन नहीं, बस सटीक उपाय और सही समय का ज्ञान जरूरी है. महंगे यज्ञ या भारी पूजा के बिना भी छोटे उपाय जीवन में चमत्कार ला सकते हैं. शनिवार को काले कुत्ते को तेल लगी रोटी खिलाएं - शनि प्रसन्न होते हैं और अड़चनें दूर होती हैं.
बुधवार को हरे कपड़े पहनें और गरीब बच्चों को मूंग दान करें - बुध मजबूत होता है और आर्थिक स्थिति स्थिर होती है. अमावस्या की रात सरसों के तेल का दीपक पीपल के नीचे जलाएं. राहु-केतु शांत होते हैं और अचानक धन लाभ के योग बनते हैं.
घर की उत्तर दिशा में एक्वेरियम रखें - ये राहु के प्रभाव को सकारात्मक बनाता है और घर में बरकत लाता है.

भोजन और रंग का रहस्य-

भोजन और रंग हमारी ऊर्जा को सीधे प्रभावित करते हैं - और यही ऊर्जा धन आकर्षण का मूल है. अगर मंगल कमजोर है, तो लाल रंग के कपड़े पहनने से बचें क्योंकि इससे अनावश्यक विवाद और हानि होती है.
अगर राहु का प्रभाव अधिक है और बार-बार कांच या इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं टूटती हैं, तो नीले या भूरे रंग के कपड़े शुभ रहते हैं. शुक्र को मजबूत करने के लिए मीठा भोजन और दूध का सेवन करें &amp;mdash; यह सौंदर्य के साथ आर्थिक स्थिरता भी बढ़ाता है.

लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाले मंत्र और तिलक
धन प्राप्ति के लिए मंत्र और तिलक बेहद प्रभावी साधन हैं.

राहु प्रभावित जातक &amp;ldquo;ॐ रां राहवे नमः&amp;rdquo; का जप करें.
शनि को शांत करने के लिए &amp;ldquo;ॐ शं शनैश्चराय नमः&amp;rdquo; का नियमित जप करें.
तिलक लगाते समय ध्यान रखें कि उसका रंग आपकी जन्मतिथि और ग्रह-दशा के अनुसार हो. जैसे चंदन का तिलक राहु के लिए शुभ है, पर लाल तिलक मंगल-राहु की युति में हानि दे सकता है.

संकेत कि लक्ष्मी नाराज़ हैं

कई बार घर की छोटी घटनाएँ संकेत देती हैं कि लक्ष्मी रूठ चुकी हैं.
घर में बार-बार दूध फटना संकेत है कि आपका शुक्र असंतुलित है.
बार-बार पैसे या पर्स का खो जाना - राहु-केतु की गड़बड़ी को दर्शाता है.
बार-बार बिजली का फ्यूज उड़ना - मंगल और सूर्य के नकारात्मक प्रभाव होता है. इन संकेतों को नजरअंदाज करना मतलब लक्ष्मी को दरवाज़े से लौटाना है.

कर्म और भाग्य का संतुलन : असली कुंजी
सही दिशा, सही आदतें और सही उपाय - यही तीनों मिलकर आपके कर्मों को फलदायी बनाते हैं. गलत दिशा में रखी वस्तुएं, देर रात तक जागना, झूठ बोलना या मुफ्त की वस्तुएं लेना- ये सब लक्ष्मी के प्रवेश को रोकते हैं. वहीं सही दिशा में एक्वेरियम रखना, शुभ रंग पहनना, छोटे दान और सही मंत्र जप - यही स्थायी समृद्धि के द्वार खोलते हैं.
तो अगर आप चाहते हैं कि दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाए और धन का प्रवाह कभी न रुके, तो आज ही अपनी आदतों और दिशाओं की समीक्षा करें, और आचार्य लव भूषण जी के बताए उपायों को अपनाकर अपने जीवन में लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें.
कुंडली बताती है रिश्ते निभेंगे या टूटेंगे, धन आएगा या कर्ज में डूबेंगे! ऐसे पहचानें


नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/07/6741624a781ab80fce4aa6acef060e851767773448971499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Laxmi, Ji:, आपकी, इन, गलत, आदतें, से, नाराज, होती, है, देवी, लक्ष्मी, धनवान, भी, बन, जाता, है, कंगाल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Nostradamus 2026: US का वेनेजुएला पर अटैक, 2026 में युद्ध को लेकर नास्त्रेदमस की डराने वाली भविष्यवाणी वायरल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4530</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4530</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/07/cafb8e97029de17125cedd8eb010f0d21767771844786499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:07 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Nostradamus, 2026:, का, वेनेजुएला, पर, अटैक, 2026, में, युद्ध, को, लेकर, नास्त्रेदमस, की, डराने, वाली, भविष्यवाणी, वायरल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 8 जनवरी का शुभ मुहूर्त, योग, पूरा पंचांग देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4526</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4526</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 8 जनवरी 2026: आज 8 जनवरी 2026 से माघ महीने के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि और गुरुवार है. इस दिन 5 साबुत हल्दी की गांठें एक पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें. इससे धन आगमन के रास्ते खुलते हैं. गुरुवार को लक्ष्मी और विष्णु जी से जुड़ा उपाय करना लाभकारी माना जाता है.
आइए जानते हैं ये दिन किन राशियों के लिए शुभ-अशुभ है, इस दिन का शुभ समय, अशुभ काल, राहुकाल, ग्रह स्थिति और विशेष उपाय भी जानें.
8 जनवरी का पंचांग 2026 (Hindi Panchang 8 January 2026)



तिथि

षष्ठी (8 जनवरी 2026, सुबह 6.33-पूर्ण रात्रि तक)



वार
गुरुवार


नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी


योग
सौभाग्य


सूर्योदय 
सुबह 7.15


सूर्यास्त
सुबह 5.38


चंद्रोदय
रात 10.20


चंद्रोस्त
सुबह 10.05


चंद्र राशि
सिंह



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


लाभ
सुबह 6.37 - सुबह 7.57


अमृत
सुबह 7.57 - सुबह 9.16


&amp;nbsp;
&amp;nbsp;


शाम का चौघड़िया


अमृत
शाम 5.15 - शाम 6.56


चर
शाम 6.55- रात 8.36



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 1.16 - दोपहर 2.36


यमगण्ड काल
सुबह 6.37 - सुबह 7.57


गुलिक काल
सुबह 9.17 - सुबह 10.36


आडल योग
दोपहर 12.24 - सुबह 6.37, 9 जनवरी


विडाल योग
सुबह 6.37 - दोपहर 12.24



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 8 January 2026)



सूर्य
धनु


चंद्रमा
सिंह


मंगल
धनु


बुध
धनु


गुरु
मिथुन


शुक्र
धनु


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कर्क राशि
परिवार के साथ समय बिताना आपको मानसिक शांति देगा. व्यक्तिगत संवाद और निजी गतिविधियों में आपकी रुचि बढ़ेगी.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



मकर राशि
पेशेवरों के लिए समय सामान्य है, इसलिए सोच-विचारकर ही कोई बड़ा निर्णय लें.



FAQs: 8 जनवरी 2026
Q.कौन सा उपाय करें ?
हल्दी मिलाया हुआ जल तुलसी के पौधे में अर्पित करें. इससे धन-संपदा में वृद्धि होती है.
Q.कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?
इस दिन सौभाग्य और रवि योग बन रहा है.
Pradosh Vrat in Januray 2026: जनवरी में दो शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग, नोट करें डेट और मुहूर्त




Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;



 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/08/6cf520d0bfb9e696ce12a1ddb2c0e0dd1767815796248499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, जनवरी, का, शुभ, मुहूर्त, योग, पूरा, पंचांग, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Gen Z लड़कियों को क्यों चाहिए शिव जैसा पार्टनर, जानें ट्रेंड के पीछे छिपी सोच</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4527</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4527</guid>
<description><![CDATA[ Love relationship:&amp;nbsp;Gen Z यानी आज की युवा पीढ़ी. जिनका जन्म 1997 के बाद हुआ है वह पीढ़ी Gen Z कहलाती है. ये पीढ़ी पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ठ, तार्किक, आत्मनिर्भर और भावनात्मक रूप से जागरुक है. जब बात आती है रिश्ते और प्रेम की तो, आज के दौर में इसकी परिभाषा भी तेजी से बदल रही है.
खासकर Gen Z की लड़कियों में इन दिनों एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है. आज की लड़कियां पार्टनर या प्रेमी के रूप में शिव जैसे पति की चाह रखती है. बता दें कि यहां शिव जैसा पार्टनर कहना एक प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति है. Gen Z की लकड़ियां शिव के गुणों की बात करती हैं. Gen Z लड़कियां अब दिखावे या रोमांस से बढ़कर सरल, वास्तविक और जमीन से जुड़ा पार्टनर चाहती हैं.
हालांकि इसे हम नया ट्रेंड तो नहीं कह सकते क्योंकि पौराणिक कथा-कहानियों और पुराणों में ऐसा वर्णन मिलता है कि, पार्वती ने भी शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी. आधुनिक समय में एक बार फिर से लड़कियां अपने प्रेमी या पार्टनर में शिव जैसे गुण चाहती हैं. आइए जानते हैं इस नए जमाने के इस ट्रेंड के पीछे छिपी सोच की भावनात्मक जरूरत क्या है.
Gen Z लकड़ियों की चाह शिव जैसा पार्टनर
सोशल मीडिया से लेकर रिलेशनशिप डिस्कशन तक, लकड़ियां यही कहती हैं कि, उन्हें ऐसा जीवनसाथी चाहिए जिसमें भगवान शिव जैसा गुण हो. यह मामला केवल धार्मिक आस्था से नहीं जुड़ा है बल्कि इसके पीछे गहरी भावनात्मक और सामाजिक सोच भी शामिल है.
Gen Z की लड़कियां भावनात्मक रूप से अधिक जागरूक हैं. वे रिश्तों में स्थिरता, धैर्य और भावनात्मक रूप से संतुलन की चाह रखती हैं. शिव में भी ठीक ऐसा ही गुण है. यही कारण है कि लड़कियां ऐसे पार्टनर की चाह रखती हैं जो गुस्से में भी संयम रखे और पत्नी पर संकट आए तो रौद्र रूप धारण कर ले.
रिश्तों में बांधे नहीं, सशक्त बनाएं
शिव योगी भी हैं और गृहस्थ भी. Gen Z की लड़कियों को शिव का यही गुण आकर्षित करता है. आज की लकड़ियों को ऐसा पार्टनर चाहिए जो उनके सपनों को रोके नहीं, बल्कि समर्थन के साथ नई उड़ान दे. शिव ने पार्वती को हमेशा अपने साथ रखा लेकिन जरूरत पड़ने पर पार्वती को कई शक्तियां दीं और पार्वती ने भी असुरों का संहार किया. इससे यह पता चलता है कि, शिव पार्वती पर विश्वास करते हैं. वे उन्हें बांधते नहीं, बल्कि सशक्त बनाते हैं. आज की लड़कियां भी यही चाहती है कि, उनका पार्टनर&amp;nbsp; उनके करियर को सपोर्ट करे, स्पेस और आजादी दे.
संतुलन और जीवन में समानता
शिव के अर्धनारीश्वर रूप को स्त्री और पुरुष के संतुलन, सृजन और एकता का प्रतीक माना जाता है, जो यह दर्शाता है कि पुरुष और स्त्री एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों के बिना सृष्टि अधूरी है. यह रूप ऊर्जा यानी शक्ति और चेतना यानी शिव के मिलन से ही ब्रह्मांड का निर्माण और निरंतरता संभव होने का संदेश देता है. अर्धनारीश्वर रूप यह दर्शाता है कि पार्टनर को बराबरी का हक और सम्मान मिले.&amp;nbsp; &amp;nbsp;
संवेदनशील और केयरिंग पार्टनर
शिव महाशक्तिशाली हैं और साथ ही करुणामयी भी. Gen Z लड़कियों की नजर में आदर्श पार्टनर वही है जो बाहर से मजबूत हो, लेकिन अंदर से संवेदनशील और केयरिंग भी. साथ ही शिव अहंकार विनाशक भी हैं. लड़कियां अपने पार्नटर में भी यही गुण चाहती हैं, जिसमें पुरुष होने के ईगो के बजाय बराबरी और सम्मान के साथ रिश्ता निभाएं. रिश्ते डोमिनेंस से ज्यादा समझदारी दिखाएं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/07/510634b3512ac1342b3ffe5467115ac71767771419057466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:06 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Gen, लड़कियों, को, क्यों, चाहिए, शिव, जैसा, पार्टनर, जानें, ट्रेंड, के, पीछे, छिपी, सोच</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ravidas Jayanti 2026: रविदास जयंती कब ? कैसे बने शिरोमणि रविदास बने संत</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4524</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4524</guid>
<description><![CDATA[ Guru Ravidas Jayanti 2026: रविदास जयंती 1 फरवरी 2026 को है. गुरु रविदास की इस बार 649वीं जयंती मनाई जाएगी. इन्हें भक्ति आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी. उन्हें गुरु रविदास, रैदास और भगत रविदास जैसे नामों से भी जाना जाता है. अपने जीवन में संत रविदास समानता और मानव अधिकारों की शिक्षा दिया करते थे. &amp;nbsp;संत शिरोमणि रविदास ने अपने उच्च विचारों से पूरी दुनिया को जागरूक किया.
कैसे बने शिरोमणि रविदास संत
इतिहासकारों के अनुसार, एक बार जब संत रविदास को उनके पिता ने घर से निकाल दिया, तो वे एक कुटिया बनाकर रहने लगे और साधु-संतों की सेवा करने लगे. वे जूते-चप्पल बनाने का कार्य करते थे और भक्ति आंदोलन का हिस्सा बन गए. उनके उच्च विचारों से अन्य संत भी प्रभावित हुए, और धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गई. इसके बाद, संत रविदास शिरोमणि के रूप में प्रसिद्ध हो गए.
छुआछूत के खिलाई उठाई आवाज
संत रविदास एक समाज सुधारक भी थे. उन्होंने जातिगत भेदभाव और छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाई, सभी मनुष्यों को समान बताया और प्रेम व भाईचारे का संदेश दिया.
मन चंगा तो कठौती में गंगा
उन्होंने ईश्वर को हर जगह मानते हुए बाहरी आडंबरों और मूर्ति पूजा का विरोध किया और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया, जैसे उनके प्रसिद्ध कथन &quot;मन चंगा तो कठौती में गंगा&quot; में निहित है.
कर्म और सच्ची भक्ति
रविदास जी ने निष्काम कर्म और भक्ति को सबसे महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि ईश्वर भक्ति केवल दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि भक्ति में सच्चाई, प्रेम और सेवा होनी चाहिए, तभी उसका सही फल मिलेगा.
समानता और भाईचारे का संदेश
संत रविदास जी ने हमेशा समाज में समानता और भाईचारे पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि कर्म ही मनुष्य की सच्ची पहचान है, न कि उसकी जाति या जन्म.
Laxmi Ji: आपकी इन गलत आदतें से नाराज होती है देवी लक्ष्मी, धनवान भी बन जाता है कंगाल


Disclaimer : यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/08/0f4b68ae3d42a459d5717e5563c629331767818044846499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ravidas, Jayanti, 2026:, रविदास, जयंती, कब, कैसे, बने, शिरोमणि, रविदास, बने, संत</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal 8 January 2026: इन 4 राशियों के करियर पर मंडरा रहे हैं संकट के बादल, राहु काल में की गई एक गलती पड़ सकती है बहुत भारी!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4525</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4525</guid>
<description><![CDATA[ 
Rashifal: धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए आज यानी 8 जनवरी 2026 का दिन कैसा रहेगा? क्या धन और सेहत के मामले में हानि होगी या जीवन में कोई शुभ समाचार मिल सकता है, जानते हैं इन चार राशियों का विशेष राशिफल (Horoscope Today).
धनु राशिफल (Sagittarius), 8 जनवरी 2026
आज का दिन सोच को बड़ा करने और आगे की दिशा तय करने का है. चंद्रमा सिंह राशि में होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप सीमाओं से बाहर निकलकर कुछ नया सोचने के मूड में रहेंगे. सुबह पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का असर आपको लोगों से जोड़ने, चर्चा करने और अपने विचार साझा करने की ओर ले जाएगा.
 नौकरीपेशा और कॉर्पोरेट कर्मियों के लिए यह दिन भविष्य की भूमिका, प्रमोशन या नई जिम्मेदारी को लेकर सोच पैदा कर सकता है. Gen-Z के लिए यह दिन सीख, एक्सपोजर और नए अनुभवों से जुड़ा रहेगा. शाम को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र आते ही सोच ज्यादा व्यावहारिक और फोकस्ड होगी.
अभिजीत मुहूर्त (12:12 PM - 12:54 PM) में योजना बनाना, किसी कोर्स, ट्रेनिंग या नई जिम्मेदारी पर हां कहना फायदेमंद रहेगा. वहीं राहु काल (01:30 PM - 03:00 PM) में बहस, जल्दबाजी या शेयर बाजार में सुनी सुनाई बातों पर कदम उठाने से बचें, वरना भ्रम और नुकसान दोनों हो सकते हैं.

Career: नई दिशा और सीख के मौके मिल सकते हैं, फोकस जरूरी है.
Finance: पढ़ाई, यात्रा या भविष्य की योजना पर खर्च बढ़ सकता है.
Love: विचारों का मेल जरूरी रहेगा, खुली बातचीत करें.
Health: ऊर्जा बनी रहेगी, लेकिन थकान को नजरअंदाज न करें.
उपाय: गुरु का स्मरण करें और मार्गदर्शन लें.
Lucky Color: पीला
Lucky Number: 3

मकर राशिफल (Capricorn), 8 जनवरी 2026
आज का दिन जिम्मेदारी, पैसे और भविष्य की सुरक्षा पर गहराई से सोचने का है. चंद्रमा सिंह राशि में होकर साझा संसाधन, निवेश और जोखिम से जुड़े मामलों को सक्रिय करता है. सुबह पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के प्रभाव में भावनाएं फैसलों पर असर डाल सकती हैं, खासकर पैसों और रिश्तों से जुड़े मामलों में. 
नौकरीपेशा लोगों को आज गोपनीय काम, रिपोर्ट या सीनियर की अपेक्षाओं का दबाव महसूस हो सकता है. बिजनेस करने वालों के लिए यह दिन लाभ और जोखिम के संतुलन की परीक्षा है. शाम को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र सोच को अनुशासित बनाएगा.
अभिजीत मुहूर्त (12:12 PM - 12:54 PM) में वित्तीय योजना बनाना, लंबी रणनीति तय करना या किसी अनुभवी व्यक्ति से सलाह लेना फायदेमंद रहेगा. राहु काल (01:30 PM - 03:00 PM) में जोखिम भरे निवेश, उधार या जल्दबाजी से बचना बेहद जरूरी है.

Career: रणनीतिक भूमिका मजबूत होगी, जिम्मेदारी बढ़ेगी.
Finance: साझा पैसों और निवेश पर सतर्क रहें.
Love: भावनात्मक गहराई बढ़ेगी, लेकिन संवाद जरूरी है.
Health: थकान और मानसिक दबाव महसूस हो सकता है.
उपाय: शाम को दीपक जलाएं और मन शांत रखें.
Lucky Color: स्लेटी
Lucky Number: 10

कुंभ राशिफल (Aquarius), 8 जनवरी 2026
आज रिश्ते, साझेदारी और सामने वाले की भूमिका सबसे अहम रहेगी. चंद्रमा सिंह राशि में होने से आप दूसरों की प्रतिक्रिया और व्यवहार को गंभीरता से लेंगे. सुबह पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र का असर रिश्तों में अपनापन और आकर्षण बढ़ाएगा, लेकिन भावनात्मक उम्मीदें भी बढ़ सकती हैं. 
नौकरीपेशा और कॉर्पोरेट कर्मियों के लिए क्लाइंट, टीम या HR से जुड़ी बातचीत निर्णायक रह सकती है. Gen-Z के लिए यह दिन कमिटमेंट और रिश्तों की स्पष्टता का है. शाम को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र आते ही सोच ज्यादा संतुलित और व्यावहारिक होगी.
अभिजीत मुहूर्त (12:12 PM - 12:54 PM) में बातचीत सुलझाना, समझौते की शर्तें तय करना या किसी सहयोग को आगे बढ़ाना सही रहेगा. लेकिन राहु काल (01:30 PM - 03:00 PM) में नया वादा, समझौता या भावनात्मक फैसला लेने से बचें, क्योंकि गलतफहमी हो सकती है.

Career: साझेदारी और सहयोग से फायदा मिलेगा.
Finance: खर्च और आय में संतुलन जरूरी है.
Love: साफ और ईमानदार बातचीत जरूरी रहेगी.
Health: सामान्य, लेकिन मानसिक तनाव से बचें.
उपाय: सेवा भाव रखें और धैर्य से काम लें.
Lucky Color: नीला
Lucky Number: 11

मीन राशिफल (Pisces), 8 जनवरी 2026
आज का दिन काम की दिनचर्या, अनुशासन और जिम्मेदारियों पर केंद्रित रहेगा. चंद्रमा सिंह राशि में होने से कार्यक्षेत्र में व्यस्तता बढ़ेगी और आप पर काम का दबाव महसूस होगा. सुबह पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र के कारण भावनाएं काम पर असर डाल सकती हैं, जिससे मन जल्दी विचलित हो सकता है. 
नौकरीपेशा लोगों को आज मल्टी टास्किंग करनी पड़ सकती है. शेयर बाजार में सक्रिय लोगों को भावनाओं के बजाय नियम और रणनीति पर चलना होगा. शाम को उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र आपको ज्यादा व्यवस्थित और केंद्रित बनाएगा.
अभिजीत मुहूर्त (12:12 PM - 12:54 PM) में काम को व्यवस्थित करना, प्राथमिकता तय करना या नई दिनचर्या बनाना फायदेमंद रहेगा. लेकिन राहु काल (01:30 PM - 03:00 PM) में ओवरवर्क, जल्दबाजी या अनावश्यक जिम्मेदारी लेने से बचें, वरना थकान बढ़ सकती है.

Career: काम ज्यादा रहेगा, लेकिन संभल जाएगा.
Finance: खर्च सीमित रखें और बचत पर ध्यान दें.
Love: समय की कमी से दूरी महसूस हो सकती है, संवाद जरूरी है.
Health: थकान या पेट से जुड़ी परेशानी हो सकती है.
उपाय: विष्णु मंत्र का जप करें और नियमितता रखें.
Lucky Color: हल्का पीला
Lucky Number: 12

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/07/5d9d39fdbc21afb375e14be03892ee451767780104199257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:05 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal, January, 2026:, इन, राशियों, के, करियर, पर, मंडरा, रहे, हैं, संकट, के, बादल, राहु, काल, में, की, गई, एक, गलती, पड़, सकती, है, बहुत, भारी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पर ये गलती कर ली तो सूर्य नाराज हो सकते हैं</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4523</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4523</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/07/3aab9e1c22b9b4e5ecd8312753ed13261767802232619466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:04 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Makar, Sankranti, 2026:, मकर, संक्रांति, पर, ये, गलती, कर, ली, तो, सूर्य, नाराज, हो, सकते, हैं</media:keywords>
</item>

<item>
<title>2026 में 13 महीनों का हिंदू नव वर्ष! ज्येष्ठ मास में होगा बड़ा बदलाव, जानें अधिकमास का रहस्य और महत्व</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4522</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4522</guid>
<description><![CDATA[ Vikram samvat 2083: अंग्रेजी कैलेंडर में नया साल जनवरी से शुरू होता है, लेकिन हिंदू परंपरा में समय की गणना विक्रम संवत के अनुसार की जाती है. हर साल की शुरुआत चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से होती है. आने वाला विक्रम संवत 2083 कई मायनों में बेहद खास होने वाला है. अधिक मास जुड़ने की वजह से ज्येष्ठ माह लगभग 58&amp;ndash;59 दिनों तक चलेगा.
यही कारण है कि इस वर्ष पंचांग में 13 महीने होंगे, जो एक दुर्लभ खगोलीय और पंचांगीय घटना है. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि साल 2026 में हिंदू कैलेंडर का नया साल नवसंवत्सर 2083 इस बार 13 महीनों का होगा. कारण कि इस नवसंवत में अधिकमास ( मलमास) आएगा. इस कारण एक महीना बढ़ जाएगा.
ज्येष्ठ माह अधिकमास होगा. यह ज्येष्ठ अधिकमास 17 मई से 15 जून तक रहेगा. इससे आगे के महीनों के व्रत त्योहार 15 से 20 दिन देरी से आएंगे. 19 मार्च से विक्रम संवत लगेगा, इसी दिन से गुड़ी पड़वा, वासंती नवरात्र की शुरुआत होती है.
हिंदू नया वर्ष 12 नहीं बल्कि पूरे 13 महीनों का- ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि भगवान विष्णु ने इस अधिक महीने को अपना नाम देकर इसकी महिमा सभी महीनों से ज्यादा कर की है. जब चांद-सूरज की चाल अपनी लय बदलती है और पंचांग अचानक एक अतिरिक्त महीना जोड़ देता है, तब साल सिर्फ आगे नहीं बढ़ता तो इसके मायने भी बदल जाते हैं.
हिंदू नया वर्ष 12 नहीं बल्कि पूरे 13 महीनों का होगा. यह अतिरिक्त महीना ही मलमास कहा जाता है. जिसे लोग अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं. लोक मान्यता है कि यह महीना भगवान विष्णु की खास कृपा बरसाने वाला समय होता है और इसी कारण इसे आध्यात्मिक रूप से सबसे पावन काल माना जाता है.
अधिकमास से जुड़ी पौराणिक कथाएं
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि कथाओं में वर्णन मिलता है कि जब एक अतिरिक्त महीना उत्पन्न हुआ तो कोई भी देवता उसे अपनाने को तैयार नहीं था. तब भगवान विष्णु ने उसे अपने संरक्षण में लिया और उसे &amp;lsquo;पुरुषोत्तम मास&amp;rsquo; के रूप में प्रतिष्ठित किया. यही कारण है कि यह समय देवों में भी सर्वोच्च माना जाता है. मान्यता है कि इस अवधि में की गई साधना जीवन में सौभाग्य, शांति और आध्यात्मिक उत्थान लेकर आती है.
पंचांग के अनुसार अधिकमास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 को समाप्त होगा. इस पूरे महीने को वरदान माना जाता है. यह तप, जप, ध्यान, भक्ति और दान का महापवित्र समय होगा. मान्यता है कि अधिक मास के पहले दिन व्रत रखने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है.
पंचांग में एक ऐसा समय माना जाता है जब सांसारिक और मांगलिक कार्यों को विराम देकर आध्यात्मिक साधना को प्राथमिकता दी जाती है. यह महीना हर तीन साल में एक बार आता है और इसका उद्देश्य पंचांग की गणितीय समायोजन को संतुलित करना होता है, पर धार्मिक रूप से इसे अत्यंत पवित्र माना गया है.
इस साल घटेगा अनोखा घटनाक्रम 2 ज्येष्ठ महीने!
विक्रम संवत 2083 में अधिक मास पड़ रहा है और वह भी ज्येष्ठ (जेठ) माह में. इसका सीधा अर्थ है:एक नहीं, बल्कि दो-दो ज्येष्ठ महीने रहेंगेएक सामान्य ज्येष्ठ मास
दूसरा अधिक ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम मास)अधिक मास जुड़ने की वजह से ज्येष्ठ माह लगभग 58&amp;ndash;59 दिनों तक चलेगा. यही कारण है कि इस वर्ष पंचांग में 13 महीने होंगे- जो एक दुर्लभ खगोलीय और पंचांगीय घटना है.अधिक ज्येष्ठ मासआरंभ: 17 मई 2026समाप्ति: 15 जून 2026सामान्य ज्येष्ठ मासआरंभ: 22 मई 2026समाप्ति: 29 जून 2026यानी इस अवधि में दोनों महीने एक-दूसरे के साथ ओवरलैप भी करेंगे.
13वां महीना होगा अधिक मास
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि विक्रम संवत 2083 में ज्येष्ठ का अधिक मास होने से ये साल 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का रहेगा. अधिक मास यानी इस साल ज्येष्ठ का महीना 30 नहीं बल्कि 60 दिनों का होगा. ज्येष्ठ का अधिक मास 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा.
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं. धर्म ग्रंथों में इसका विशेष महत्व बताया गया है. इस महीने में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि पर रोक रहती है.
क्यों लगता है मलमास
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि सूर्य और चंद्र कैलेंडर के बीच का फर्क ही इस अद्भुत महीने को जन्म देता है. सौर वर्ष 365 दिन का होता है और चंद्र वर्ष 354 दिन.
यह अंतर हर 32 महीने और 16 दिनों में इतना बढ़ जाता है कि पंचांग को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ना पड़ता है. इसी अतिरिक्त महीने को अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है.
मांगलिक कार्यों से परहेज
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि परंपराओं में कहा गया है कि मलमास के दौरान विवाह जैसे शुभ संस्कार, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, भूमि पूजन या किसी नए व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिए.
ऐसा माना जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्य अपेक्षित फल नहीं देते और ग्रह-नक्षत्र भी मांगलिक कर्मों के अनुकूल नहीं माने जाते. इसी कारण इस पूरे अवधि में बड़े संस्कारों को स्थगित करने की सलाह दी जाती है.
क्यों जरूरी है अधिक मास
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू धर्म में लगभग सभी व्रत त्योहार चंद्रमा की तिथियों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं. चंद्रमा लगभग 29 दिनों में पृथ्वी का एक चक्कर लगाता है, जिसे एक चंद्र मास कहते हैं. जब चंद्रमा पृथ्वी के 12 चक्कर लगा लेता है तो इसे एक चंद्र वर्ष कहते हैं जो लगभग 355 दिन का होता है.
वहीं सौर वर्ष 365 का होता है. अगर अधिक मास की व्यवस्था न हो तो हिंदू व्रत-त्योहार हर साल 10 दिन पीछे खिसकते चले जाएंगे, जिससे दिवाली बारिश में और होली शीत ऋतु में मनाई जाने लगेगी. ऐसी स्थिति से बचने के लिए ही हमारे विद्वानों में अधिक मास की व्यवस्था की है.





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp;




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/01/08/f0e33b90fe4d6494655cad1ba6dff33617678484347941092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 08 Jan 2026 11:54:03 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>2026, में, महीनों, का, हिंदू, नव, वर्ष, ज्येष्ठ, मास, में, होगा, बड़ा, बदलाव, जानें, अधिकमास, का, रहस्य, और, महत्व</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 16 दिसंबर से खरमास शुरू, आज धनु संक्रांति का पंचांग, योग, मुहूर्त देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4479</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4479</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 16 दिसंबर 2025: आज 15 दिसंबर को पौष माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि, मंगलवार है. आज से खरमास शुरू हो रहे हैं क्योंकि सूर्य धनु राशि में प्रवेश करेंगे. खरमास में मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं हालंकि तप, जप और तीर्थ दर्शन के लिए ये महीना बहुत शुभ माना जाता है. इसके पुण्य सालों तक मिलते हैं.&amp;nbsp;
आइए जानते हैं ये दिन किन राशियों के लिए शुभ-अशुभ है, इस दिन का शुभ समय, अशुभ काल, राहुकाल, ग्रह स्थिति और विशेष उपाय भी जानें.
16 दिसंबर का पंचांग 2025 (Hindi Panchang 16 December 2025)



तिथि

द्वादशी (14 दिसंबर 2025, रात 9.19 - 15 दिसंबर 2025)



वार
मंगलवार


नक्षत्र
स्वाती


योग
अतिखण्ड, त्रिपुष्कर


सूर्योदय 
सुबह 7.02


सूर्यास्त
सुबह 5.24


चंद्रोदय
सुबह 4.41, 15 दिसंबर


चंद्रोस्त
दोपहर 2.36


चंद्र राशि
तुला



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


शुभ
सुबह 8.23 - सुबह 9.40


शाम का चौघड़िया


लाभ
शाम 5.26 - रात 7.09



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 2.52 - शाम 4.09


यमगण्ड काल
सुबह 9.42 - सुबह 10.59


गुलिक काल
दोपहर 12.17 - दोपहर 1.34



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 16 December 2025)



सूर्य
धनु


चंद्रमा
तुला


मंगल
वृश्चिक


बुध
तुला


गुरु
मिथुन


शुक्र
वृश्चिक


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कन्या राशि
प्रियजनों का सहयोग सही समय पर मिल सकता है, जिससे आपके पर्सनल व प्रफेशनल लाइफ में अटके हुए सभी कार्य पूरे होंगे.&amp;nbsp;



कौन सी राशियां संभलकर रहें



धनु राशि
धनु राशि के जातकों को आज के दिन व्यवसाय में थोड़ा उतार-चढ़ाव देखना पड़ सकता है. लेकिन आप अपने चतुराई और अपने धैर्य के साथ इसे बाहर निकाल पाएंगे.



FAQs: 16 दिसंबर 2025

Q.कौन सा उपाय करें ?
एक लाल कपड़ा लें और फिर उसमें कपूर की एक छोटी सी डली लेकर बांध लें और पूर्व दिशा की तरफ रख दें या बांध दें. ऐसा करने से आपके घर में सुख-समृद्धि तो आएगी ही साथ ही सूर्य देव की कृपा भी बरसेगी.
Q. कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?इस दिन त्रिपुष्कर और अतिखण्ड योग बन रहा है.

Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव 2026 में कब ? नोट करें डेट और पूजा मुहूर्त
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/16/f099b7f0f4f21612640fe0b1d5a2f0e41765827210947499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:49 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, दिसंबर, से, खरमास, शुरू, आज, धनु, संक्रांति, का, पंचांग, योग, मुहूर्त, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mangalwar Vrat: संतान सुख के लिए मंगलवार व्रत कैसे करें? जानें पूजा विधि और नियम</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4478</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4478</guid>
<description><![CDATA[ Santaan Sukh Upay: मंगलवार का व्रत भगवान राम के परम भक्त भगवान हनुमान को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी संकटमोचन हैं और भक्तों की हर पीड़ा दूर करते हैं. विशेष रूप से निःसंतान दंपत्तियों के लिए मंगलवार का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है.
जो दंपत्ति लंबे समय से संतान सुख की कामना कर रहे हैं, यदि वे श्रद्धा और नियम के साथ मंगलवार का व्रत करते हैं तो उन्हें हनुमान जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से है, जो संतान, रक्त और ऊर्जा का कारक माना जाता है. मंगल ग्रह की शुभ स्थिति संतान सुख में सहायक होती है. मंगलवार का व्रत करने से मंगल दोष शांत होता है और संतान प्राप्ति के योग बनते हैं.
साहस और शक्ति भी देता है मंगलवार का व्रत
मान्यता है कि मंगलवार का व्रत करने से व्यक्ति को भगवान हनुमान की कृपा के साथ-साथ साहस, शक्ति और आत्मबल प्राप्त होता है. यही गुण दंपत्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत करने से शारीरिक और मानसिक बाधाएं दूर होती हैं.
इसके साथ ही मंगलवार का व्रत नकारात्मक शक्तियों, नजर दोष और तांत्रिक प्रभाव को भी दूर करता है. कई बार इन्हीं कारणों से संतान संबंधी परेशानियां बनी रहती हैं. हनुमान जी की उपासना से ऐसे सभी अशुभ प्रभाव समाप्त होते हैं और दंपत्ति को संतान सुख प्राप्त होता है.
संतान सुख के लिए मंगलवार व्रत का नियम
संतान प्राप्ति की कामना से मंगलवार का व्रत लगातार 21 मंगलवार तक करना चाहिए. व्रत की शुरुआत संकल्प लेकर करें. व्रत वाले दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें. घर की उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान हनुमान की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
हनुमान जी के सामने देसी घी का दीपक जलाएं और उन्हें सिंदूर, फूलों की माला, रोली और फल अर्पित करें. चोला चढ़ाना और चमेली के तेल में भिगोई रुई अर्पित करना विशेष शुभ माना गया है. इसके बाद हनुमान चालीसा और मंगल व्रत कथा का पाठ करें.
संभव हो तो सुंदरकांड का पाठ भी करें. व्रत के दिन एक समय भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. माना जाता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया मंगलवार का व्रत हनुमान जी की कृपा से संतान सुख प्रदान करता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://www.barwarapatrika.com/uploads/images/202512/image_870x580_69410b8bac412.jpg" length="77334" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:44 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mangalwar, Vrat:, संतान, सुख, के, लिए, मंगलवार, व्रत, कैसे, करें, जानें, पूजा, विधि और नियम</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal: 16 दिसंबर का राशिफल&#45; धनु, मकर, कुंभ, मीन राशि के लिए आज एक फैसला लाइफ बदल सकता है!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4477</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4477</guid>
<description><![CDATA[ Rashifal: धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि के लिए आज यानी 16 दिसंबर 2025 का दिन कैसा रहेगा? क्या धन और सेहत के मामले में हानि होगी या जीवन में कोई शुभ समाचार मिल सकता है, जानते हैं इन चार राशियों का विशेष राशिफल (Horoscope Today).
धनु राशिफल (Sagittarius), 16 दिसंबर 2025
आज चंद्रमा तुला राशि में होकर आपके ग्यारहवें भाव को सक्रिय कर रहा है. इसलिए दिन का फोकस लक्ष्य, नेटवर्क, लाभ और सामाजिक संपर्कों पर रहेगा. सुबह स्वाति नक्षत्र और अतिगण्ड योग के कारण किसी मित्र या सहयोगी से अपेक्षा टूट सकती है या लाभ में देरी हो सकती है. इस समय बहुत ऊंची उम्मीद रखना निराशा दे सकता है.
दोपहर 02:09 बजे के बाद चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करता है और सुकर्मा योग बनता है. इससे अटके फायदे मिलने लगेंगे और आपकी बात सही लोगों तक पहुंचेगी. शाम के बाद किए गए प्रयास भविष्य में स्थायी लाभ देंगे.
Career: टीमवर्क से फायदा होगा. दोपहर बाद नेटवर्किंग काम आएगी.Love: मित्रता से जुड़ा रिश्ता भावनात्मक रूप ले सकता है.Education: प्रतियोगी छात्रों के लिए समय अनुकूल है.Health: थकान रहेगी लेकिन स्थिति गंभीर नहीं होगी.Finance: आय के नए स्रोत पर बातचीत संभव है.
उपाय: विष्णु जी का स्मरण करें.Lucky Color: पीलाLucky Number: 3
मकर राशिफल (Capricorn), 16 दिसंबर 2025
आज चंद्रमा तुला राशि में होकर आपके दसवें भाव को सक्रिय कर रहा है. यह दिन करियर, प्रतिष्ठा और जिम्मेदारी से जुड़ा रहेगा. सुबह स्वाति नक्षत्र और अतिगण्ड योग के कारण वरिष्ठों से तालमेल में कमी आ सकती है या काम का दबाव अचानक बढ़ सकता है. जल्द प्रतिक्रिया देने से छवि प्रभावित हो सकती है.
दोपहर 02:09 बजे के बाद चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करता है. इससे स्थिति संभलेगी और आपकी मेहनत का मूल्यांकन सही ढंग से होगा. सुकर्मा योग के कारण शाम को लिया गया निर्णय लंबे समय तक असर डालेगा.
Career: जिम्मेदारी बढ़ेगी. दोपहर बाद स्थिति मजबूत होगी.Love: काम के कारण दूरी महसूस हो सकती है.Education: लक्ष्य स्पष्ट रहेगा, मेहनत रंग लाएगी.Health: घुटनों या कमर में थकान संभव है.Finance: आय स्थिर रहेगी. खर्च सोच-समझकर करें.
उपाय: शनि मंत्र का जप करें.Lucky Color: नीलाLucky Number: 8
कुंभ राशिफल (Aquarius), 16 दिसंबर 2025
आज चंद्रमा तुला राशि में होकर आपके नवें भाव को सक्रिय कर रहा है. इसलिए दिन का संबंध विचार, विश्वास, मार्गदर्शन और भविष्य की दिशा से रहेगा. सुबह स्वाति नक्षत्र और अतिगण्ड योग के कारण मन असमंजस में रह सकता है. कोई निर्णय लेने से पहले बार-बार सोचेंगे.
दोपहर 02:09 बजे के बाद चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में जाएगा और सुकर्मा योग बनेगा. इससे सोच में स्पष्टता आएगी और सही मार्ग दिखेगा. शाम के बाद गुरु, वरिष्ठ या पिता से जुड़ी सलाह लाभ दे सकती है.
Career: नई दिशा पर विचार होगा. दोपहर बाद निर्णय लें.Love: वैचारिक दूरी संभव है, संवाद जरूरी है.Education: उच्च शिक्षा से जुड़े छात्रों को लाभ होगा.Health: मानसिक तनाव धीरे-धीरे कम होगा.Finance: लंबी अवधि की योजना बन सकती है.
उपाय: पीपल के वृक्ष को जल दें.Lucky Color: आसमानीLucky Number: 4
मीन राशिफल (Pisces), 16 दिसंबर 2025
आज चंद्रमा तुला राशि में होकर आपके आठवें भाव को सक्रिय कर रहा है. यह दिन मानसिक परिवर्तन, अचानक घटनाओं और गहरी सोच से जुड़ा रहेगा. सुबह स्वाति नक्षत्र और अतिगण्ड योग के कारण मन बेचैन रह सकता है या किसी बात को लेकर भय बन सकता है. अनावश्यक शंकाओं से बचना जरूरी है.
दोपहर 02:09 बजे के बाद चंद्रमा विशाखा नक्षत्र में प्रवेश करता है. इससे मानसिक स्थिति स्थिर होगी और सुकर्मा योग के कारण पुराने मुद्दों का समाधान निकलेगा. शाम के बाद शोध, गहराई वाले काम या आत्ममंथन लाभ देगा.
Career: पर्दे के पीछे का काम सफल रहेगा.Love: भावनाएं गहरी होंगी, लेकिन अभिव्यक्ति संयम से करें.Education: रिसर्च और अध्ययन में लाभ मिलेगा.Health: तनाव या हार्मोन से जुड़ी परेशानी संभव है.Finance: अचानक खर्च हो सकता है, सावधानी रखें.
उपाय: शिव जी का ध्यान करें.Lucky Color: बैंगनीLucky Number: 7
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/15/e7b9ab1171a3c518bb01a5139bc0defb1765805767971257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal:, दिसंबर, का, राशिफल-, धनु, मकर, कुंभ, मीन, राशि, के, लिए, आज, एक, फैसला, लाइफ, बदल, सकता, है</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Last Amavasya 2025: 19 दिसंबर को है साल की आखिरी अमावस्या, बन रहे ये शुभ योग</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4475</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4475</guid>
<description><![CDATA[ Last Amavasya 2025: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को बहुत पवित्र तिथि माना जाता है. पंचांग (Panchang) के अनुसार पूरे वर्ष में कुल 12 अमावस्या तिथि पड़ती है और सभी का विशेष महत्व होता है. यह दिन विशेषकर स्नान-दान, व्रत, पूजा और पितृ तर्पण के लिए बहुत शुभ मानी जाती है.
साल 2025 की आखिरी अमावस्या भी महत्वपूर्ण रहने वाली है, जोकि पौष अमावस्या होगी. यह अमावस्या धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास हो रही है, क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं. साथ ही साल 2025 की अंतिम अमावस्या होने के कारण इसका प्रभाव आने वाले नए साल 2026 पर भी पड़ेगा.
पौष अमावस्या 2025 तिथि (Paush Amavasya 2025 Date)
पौष अमावस्या इस साल शुक्रवार 19 दिसंबर 2025 को पड़ रही है. पंचांग के मुताबिक 19 दिसंबर को सुबह 4 बजकर 59 मिनट पर अमावस्या तिथि की शुरुआत हो जाएगी और 20 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर समाप्त हो जाएगा. उदयातिथि के मुताबिक 19 दिसंबर को ही साल की आखिरी अमावस्या यानी पौष अमावस्या होगी.
पौष अमावस्या पर बन रहे ये खास योग
पंचांग के मुताबिक पौष अमावस्या पर सुबह से लेकर रात तक कई शुभ योग का निर्माण हो रहा है. इस दिन सुबह 03:47 तक शूल योग रहेगा फिर गण्ड योग का निर्माण हो जाएगा. सुबह से लेकर रात तक ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा. आध्यात्मिक कार्य, पूजा-पाठ और तर्पण आदि के लिए इन योग-नक्षत्रों को शुभ माना जाता है.
पौष अमावस्या को क्या करें
अमावस्या तिथि विशेषकर पितरों के तर्पण और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए शुभ मानी जाती है. साथ ही इस तिथि पर दान का महत्व भी बढ़ जाता है. पौष अमावस्या साल 2025 की अंतिम अमावस्या भी होगी. इस दिन आप पवित्र नदी में स्नान कर, पितरों के निमित्त तर्पण, दान और दीपदान आदि से पुण्यफल प्राप्त कर सकते हैं. &amp;nbsp;
पौष अमावस्या पर न करें ये काम
अमावस्या के दिन वाद-विवाद और नकारात्मक सोच से बचना चाहिए. इस दिन तामसिक भोजन और झल-कपट जैसी चीजों से दूर रहें. इन कार्यों से देवता और पितृ नाराज होते हैं.
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/15/3d8e099d59c4a2d2826ebb322d4ecd3b1765770778876466_original.jpeg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Last, Amavasya, 2025:, दिसंबर, को, है, साल, की, आखिरी, अमावस्या, बन, रहे, ये, शुभ, योग</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Morning Dreams: सुबह के सपने में ये 5 चीजें दिख जाए तो समझ लें लॉटरी लगने वाली है</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4476</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4476</guid>
<description><![CDATA[ Dream Interpretation: नींद में देखे गए सपने व्यक्ति की महज कल्पना नहीं बल्कि उसके भविष्य का संकेत देते हैं. कहते हैं ना कि सुबह-सुबह देखा गया सपना सच होता है, मान्यता है कि इस समय देखे गए सपने अकसर शुभ फल देने वाले होते हैं और आने वाले समय में धन लाभ और तरक्की का इशारा करते है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में सपने में कुछ खास चीजों का दिखना सौभाग्य, खुशियां आने का संकेत देता है.
सुबह के सपने में 5 चीजें दिखना शुभ
सोना-चांदी &amp;ndash; ब्रह्म मुहूर्त मतलब सुबह 3.30 से 5.30 के बीच का समय. इस समय सपने में सोना-चांदी और धन से भरी तिजोरी देखना धन लाभ का संकेत देता है.स्वप्न शास्त्र के अनुसार ऐसा सपना आपके करियर में प्रमोशन मिलने, व्यापार में ग्रोथ होने की ओर इशारा करता है. किस्मत 360 डिग्री पलट सकती है.
अनाज का ढेर - स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में अनाज का ढेर देखने का मतलब है मां लक्ष्मी की आप पर कृपा होने वाली है.ये जीवन में समृद्धि, धन लाभ, मेहनत का फल, और अचानक आर्थिक तरक्की का प्रतीक है. धन-अन्न के भंडार भरे रहने का आशीर्वाद मिल सकता है.
पानी का घड़ा - सपने में पानी से भरा घड़ा या उसके पास खड़े रहने का सपना देखना बताता है कि जीवन की परेशानियां खत्म होंगी और मान-सम्मान बढ़ेगा. ये स्थिरता का प्रतीक है. ऐसा सपना इशारा करता है कि जिंदगी में चल रही उतार-चढ़ाव का दौर खत्म होगा, शांति स्थापित होगी.
कमल का फूल - स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि आपको सपने में कमल का फूल दिखाई देता है तो यह इस बात का संकेत है कि आपके जीवन में मां लक्ष्मी का आगमन होने जा रहा है. मां लक्ष्मी की कृपा से आपकी आर्थिक स्थिति में भी काफी वृद्धि देखने को मिलेगी.
इंटरव्यू देना - स्वप्न शास्त्र के अनुसार सुबह के सपने में नौकरी के खुद को इंटरव्यू देते हुए देखना सफलता का संकेत माना जाता है. आय में बढ़ोत्तरी की ओर इशारा करता है.
हनुमान जी को खुश करने के लिए कौन से तेल का दीपक लगाना चाहिए








Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.







 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/16/e6aa56c2b343ecc5da0137ed658356e31765829416056499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Morning, Dreams:, सुबह, के, सपने, में, ये, चीजें, दिख, जाए, तो, समझ, लें, लॉटरी, लगने, वाली, है</media:keywords>
</item>

<item>
<title>हनुमान जी की कृपा पाने का चमत्कारी उपाय: किस तेल का दीया दूर करता है संकट और खोलता है भाग्य के द्वार! जाने</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4474</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4474</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/15/0622dbaba97f5d8a10ee1ba4fe9d361a17658113700731301_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:37 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>हनुमान, जी, की, कृपा, पाने, का, चमत्कारी, उपाय:, किस, तेल, का, दीया, दूर, करता, है, संकट, और, खोलता, है, भाग्य, के, द्वार, जाने</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Numerology Horoscope 2026: मूलांक 1&#45;9 तक जानिए आपके लिए 2026 में क्या है खास</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4473</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4473</guid>
<description><![CDATA[ Numerology Yearly Horoscope 2026: अंक ज्योतिष के अनुसार साल 2026 () मूलांक 1 का होगा. अंक तालिका में नंबर 1 नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, ज्योतिषियों के अनुसार इस बार नए साल में जो नया कार्य करने का विचार कर रहे हैं वह सफलता की सीढ़ी चढ़ सकते हैं. न्यूमोरोलॉजी से जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के जातकों के लिए नया साल खुशियों के कौन से अवसर ला रहा है या फिर उन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा.
अंक ज्योतिष राशिफल 2026
मूलांक 1 - मूलांक 01 वालों के लिए साल 2026 नौकरी में नए अवसर जरुर लाएगा, नई शुरुआत करने के लिए आप प्रेरित होंगे लेकिन कदम-कदम पर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा. किसी भी तरह के शॉर्टकट से बचें नहीं तो बड़ी हानि हो सकती है. अप्रैल के बाद करियर-कारोबार में लाभ मिल सकता है. कमाई में स्थिरता आएगी. इस साल आपको महत्वाकांक्षा को बुद्धिमानी और विनम्रता से संतुलित करना होगा.
मूलांक 2 &amp;ndash; साल 2026 मूलांक 2 वालों के लिए नई ऊर्जा, कामयाबी के शिखर पर जाने के लिए नए मौके लेकर आ रहा है. नए लोगों से पहचान बढ़ेगी जो आपके बिजनेस के लिए लाभदायक हो सकती है. प्रॉपर्टी का काम तेजी से आगे बढ़ेगा. अहंकार और लालच के कारण रिश्तों में टकराव हो सकते है जो शुरुआत के कुछ महीने में आपको इमोशनल स्ट्रेस होगा. अनियमित दिनचर्या के कारण स्वास्थ बिगड़ सकता है.
मूलांक 3 &amp;ndash; नया साल आपकी लव लाइफ पर खास असर डालेगा. पार्टनर के साथ गलतफहमियां बढ़ सकती है, कोई अपना ही आपको धोखा दे सकता है. इस साल शादी का निर्णय सोच समझकर लें. सेल्स, मार्केटिंग, आईटी, सोशल मीडिया के कार्य से जुड़े लोगों के लिए ये साल अच्छा रहेगा,
मूलांक 4 &amp;ndash; साल 2026 आपके लिए आसान नहीं रहेगा, लेकिन जो भी उपलब्धि मिलेगी, वह लंबे समय तक टिकेगी. आपका धैर्य, अनुशासन और स्ट्रक्चर आपके सबसे बड़े हथियार साबित होंगे. स्टार्टअप या नया बिजनेस शुरू करने पर विचार सकते हैं.
मूलांक 5 &amp;ndash; नए साल में ट्रांसफर के योग हैं. खर्चों पर कंट्रोल रखें नहीं तो कर्जा लेना पड़ सकता है. लव मैरिज के लिए बात बन सकती है. दुर्घटना की संभावना है, गाड़ी सावधानी से चलाएं. साल के दूसरे भाग में अच्छा मुनाफा होगा.&amp;nbsp;
मूलांक 6 &amp;ndash; साल 2026 में आपका विदेश जाने का सपना पूरा हो सकता है. शादी के लिए अच्छा जीवनसाथी मिलने के योग हैं. जोखिश भरे निवेश से बचें, कानूनी मामलों में आपको सफलता मिल सकती है. सांस्कृतिक या सामाजिक कार्यों में भाग लेने से मन की शांति मिलेगी.
मूलांक 7 &amp;ndash; इस साल उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा. जो लोग नए साल में कोई नया काम या बिजनेस शुरु करना चाहते हैं, वे लोग उसके प्रति समर्पित होकर काम करेंगे, तो सफलता मिलेगी. नौकरीपेशा वालों पर भी यही नियम लागू होगा. पार्टनर के साथ वाद विवाद की स्थिति से बचें, नहीं तो प्रेम संबंधों पर खतरा मंडरा सकता है. आपका ब्रेकअप हो सकता है.
मूलांक 8 &amp;ndash; ये साल आपके लिए चुनौतियां लेकर आएगा लेकिन मेहनत का फल धीरे-धीरे मिलेगा. पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ेंगी. जितना आप अनुशासन में होंगे उतनी ही सफलता आपको प्राप्त हो सकती है.
मूलांक 9 &amp;ndash; नववर्ष आपके लिए लकी साबित होगा. जो लोग नए साल में कुछ अपना काम या बिजनेस शुरु करना चाहते हैं, उनके लिए भी नया साल बहुत लकी साबित होगा. आपको सकारात्मक फल देखने को मिलेंगे.&amp;nbsp;बैंक बैलेंस बढ़ेगा.&amp;nbsp;शादी पक्की हो सकती है. प्रतियोगी परीक्षा में उत्तीर्ण हो सकते हैं.
Hanuman Janmotsav 2026: हनुमान जन्मोत्सव 2026 में कब ? नोट करें डेट और पूजा मुहूर्त
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/15/5f015b898547c87d91257b99478360821765792436486499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Numerology, Horoscope, 2026:, मूलांक, 1-9, तक, जानिए, आपके, लिए, 2026, में, क्या, है, खास</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Ram Navami 2026: राम नवमी 2026 में दो दिन मनाई जाएगी, जानें डेट, पूजा मुहूर्त</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4472</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4472</guid>
<description><![CDATA[ Ram Navami 2026: मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था. इस दिन राम नवमी मनाई जाती है. ये चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन होता है. आमतौर पर पंचांग भेद के कारण जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाती है लेकिन साल 2026 में सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है कि राम नवमी भी दो दिन मनाई जाएगी.
राम नवमी 2026 डेट
चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की 26 मार्च 2026 को सुबह 11.38 से शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10.06 मिनट तक रहेगी.

26 मार्च 2026 &amp;ndash; इस दिन नवमी तिथि सुबह 11.38 से शुरू होकर पूरे दिन रहेगी. श्रीराम की पूजा का मुहूर्त सुबह 11.13 से दोपहर 1.41 तक है.

राम नवमी पूजा अनुष्ठान आदि करने के लिए मध्याह्न का समय सर्वाधिक शुभ होता है. ग्रंथों के अनुसार मध्याह्न के मध्य का समय श्री राम जी के जन्म के क्षण को दर्शाता है तथा मन्दिरों में इस क्षण को भगवान श्री राम के जन्म काल के रूप में मनाया जाता हैं. श्रीराम का जन्म दोपहर 12 हुआ था इसलिए इस दिन पूजा करना श्रेष्ठ होगा. राम नवमी मध्याह्न का क्षण -&amp;nbsp; दोपहर 12:27

27 मार्च 2026 &amp;ndash; वहीं उदयातिथि के अनुसार वैष्णव संप्रदाय के लोग राम नवमी इस दिन मनाएंगे. इस दिन राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त सुबह 11:13 से दोपहर 01:41 तक है.

कैसे करें राम नवमी व्रत
राम नवमी के समय आठ प्रहर उपवास करने का सुझाव दिया जाता है. जिसका अर्थ है कि, भक्तों को सूर्योदय से सूर्योदय तक व्रत पालन करना चाहिएं. राम नवमी का व्रत तीन अलग अलग प्रकार से किया जाता है

नैमित्तिक - जिसे बिना किसी कारण के किया जाता है.
नित्य - जिसे जीवन पर्यन्त बिना किसी कामना एवं इच्छा के किया जाता है.
काम्य - जिसे किसी विशेष मनोरथ की पूर्ती हेतु किया जाता है.

Rahu Gochar 2026: साल 2026 में राहु का डबल गेम, मिथुन समेत 3 राशियों की नैया होगी पार, तो 2 राशियों पर गिरेगी गाज
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/15/2ec3347f71005435b48ecb426c6b1c461765743045032499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Ram, Navami, 2026:, राम, नवमी, 2026, में, दो, दिन, मनाई, जाएगी, जानें, डेट, पूजा, मुहूर्त</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Pradosh Vrat December 2025: बुध प्रदोष व्रत पर जरूर करें ये 3 काम, प्रसन्न होंगे शिव</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4471</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4471</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/16/d9c9953d79dac0543d641871eaeb63f41765860869947466_original.avif" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Pradosh, Vrat, December, 2025:, बुध, प्रदोष, व्रत, पर, जरूर, करें, ये, काम, प्रसन्न, होंगे, शिव</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Jayfal Upay: रुक गई है कमाई, धन प्राप्ति के लिए आजमाएं जायफल के ये उपाय</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4470</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4470</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/15/656a841e175f4d7135fef88006012b5a1765820641322499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 16 Dec 2025 12:53:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Jayfal, Upay:, रुक, गई, है, कमाई, धन, प्राप्ति, के, लिए, आजमाएं, जायफल, के, ये, उपाय</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Putin Religion: धर्मनिरपेक्ष देश रूस के राष्ट्रपति पुतिन किस धर्म को मानते हैं? क्या रखते हैं भगवान में श्रद्धा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4428</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4428</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/04/3d893ce1dd2d48a83f4608a2e7f46c641764838029599466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:36 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Putin, Religion:, धर्मनिरपेक्ष, देश, रूस, के, राष्ट्रपति, पुतिन, किस, धर्म, को, मानते, हैं, क्या, रखते, हैं, भगवान, में, श्रद्धा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति के दिन ही भीष्म पितामह ने क्यों चुना देहत्याग? पढ़ें पौराणिक कथा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4427</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4427</guid>
<description><![CDATA[ Makar Sankranti 2026: नया साल 2026 बस कुछ ही दिनों में आने वाला है. जिसमें कई पर्व आएंगे जिनको हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. जिसमें से एक पर्व मकर संक्रांति भी है. हिंदू धर्म में यह त्योहार बहुत ही महत्वपूर्ण है. जब भी भगवान सूर्य अपनी राशि छोड़कर अपने पुत्र शनि देव की राशि में प्रवेश करते हैं, जो की मकर है, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है.
हर साल जिस तिथि पर भगवान सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, उसी दिन मकर संक्रांति का पर्व भी मनाया जाता है. मगर आपको पता है इस पर्व का संबंध महाभारत काल से भी जोड़ा है. महाभारत के अनुसार भीष्म पितामह 58 दिनों तक बाणों की शैय्या पर लेटे हुए थे.
जिसके बाद उन्होंने अपने प्राण त्याग ने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार किया था. इससे जुड़ी एक पौराणिक कथा भी है, आइए जानते हैं.&amp;nbsp;
नए साल 2026 में कब है मकर संक्रांति?
वैदिक पंचांग के मुताबिक, भगवान सूर्य 14 जनवरी को दोपहर के समय 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. जिस वजह से मकर संक्रांति का पर्व दोपहर से शुरू होगा. ऐसे में नए साल 2026 में 14 जनवरी, बुधवार के दिन ही यह पर्व मनाया जाएगा. मकर संक्रांति का स्नान-दान भी इसी दिन किया जाएगा.&amp;nbsp;
क्या है पौराणिक कथा?
महाभारत का महान युद्ध कुल 18 दिनों तक चला था, जिसमें पांडवों की जीत हुई थी . शुरुआत के दस दिनों तक भीष्म पितामह कौरवों के प्रधान सेनापति रहे. उनके अद्भुत युद्ध कौशल और अपराजेय रणनीति ने पांडवों को गहरी चिंता में डाल दिया था. कोई भी योद्धा पितामह के सामने &amp;nbsp;टीक नहीं पा रहा था.
आखिरकार, पांडवों ने शिखंडी की सहायता लेने का निर्णय किया, क्योंकि भीष्म ने प्रतिज्ञा की थी कि वे शिखंडी पर शस्त्र नहीं उठाएंगे. शिखंडी को सामने रखकर अर्जुन ने बाणों की ऐसी वर्षा की कि भीष्म पितामह बाणों की शैया पर आ गिरे.
फिर भी, उनकी मृत्यु तुरंत नहीं हुई, क्योंकि उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. वे जानबूझकर मृत्यु का समय टालते रहे और सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करते रहे. मान्यता है कि उत्तरायण में देह त्यागने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं, और इसी पवित्र समय की प्रतीक्षा में पितामह 58 दिनों तक बाणों की शैय्या पर जीवित रहे. उनका उद्देश्य था कि वे हस्तिनापुर को सुरक्षित और स्थिर देखकर ही जीवन यात्रा का पूर्ण विराम करें.&amp;nbsp;

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/04/12e3e2b243bf1ed99a300feb21f6b95617648448716941301_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:35 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Makar, Sankranti, 2026:, मकर, संक्रांति, के, दिन, ही, भीष्म, पितामह, ने, क्यों, चुना, देहत्याग, पढ़ें, पौराणिक कथा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>वृंदावन के कथावाचक Indresh Upadhyay की शादी: जानें कौन हैं उनकी दुल्हन और कैसे शुरू हुआ अध्यात्म का सफर!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4424</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4424</guid>
<description><![CDATA[ Indersh Upadhyay Marriage: वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय 5 दिसंबर को अभिजीत मुहूर्त की शुभ बेला में शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं. उनकी शादी राजस्थान के जयपुर के आमेर स्थित कुंदन वन विवाह स्थल में परांपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न होगी.
शुक्रवार 5 दिसंबर की सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर के 1 बजे के बीच चलने वाले इस भव्य शादी समारोह में संत समुदाय से लेकर रामानुज परंपरा से जुड़े महंत, और प्रसिद्ध कथावाचक जैसी धार्मिक जगत की तमाम हस्तियां उपस्थित रहेंगी. शादी से जुड़ी पारिवारिक रस्में वृंदावन स्थित रमण-रेती आश्रम में पहले ही संपन्न की जा चुकी है.&amp;nbsp;
राजस्थान के आमेर में हो रही है शादी
आज आमेर में भात-मायरा की रस्म निभाई गई, जिसमें दोनों ही परिवार के सदस्यों ने पारंपरिक परिधान और रीति रिवाजों का पालन किया.कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय की पत्नी का नाम शिप्रा है, जो हरियाणा के यमुनानगर में रहती हैं. उनके पिता पुलिस विभाग में DCP के पद पर रह चुके हैं.&amp;nbsp;
उनका परिवार वर्तमान में अमृतसर में निवास करता है. कल सुबह विवाह के मंडप मं स्वस्ति-वाचन के साथ वैदिक मंत्रोच्चार सहित समारोह संपन्न होगा. उनकी शादी समारोह से जुड़ी फोटो और वीडियो इंटरनेट पर काफी वायरल हो रही है.
बचपन से ही आध्यात्मिकता की ओर आकर्षित
इंद्रेश उपाध्याय बचपन से ही भक्ति, शास्त्रों और कथा की ओर आकर्षित हो गए. उन्होंने मात्र 13 साल की उम्र से ही श्रीमद्भागवत कथा, गीता और अन्य धार्मिक ग्रथों का अध्ययन करना शुरू कर दिया. वृंदावन के कान्हा माखन पब्लिक स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की है.&amp;nbsp;
इंद्रेश उपाध्याय के पिताजी खुद एक प्रसिद्ध कथावाचक हैं, जिनका नाम कृष्णचंद्र शास्त्री ठाकुर हैं. उनकी माता का नाम नरवादा शर्मा और तीन बहनों के इकलौते भाई हैं. उनके द्वारा गए हुए भजन सोशल मीडिया पर काफी वायरल होते हैं.&amp;nbsp;
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/04/ef5678c5926cad390932bf9b6beb58e417648540689601092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>वृंदावन, के, कथावाचक, Indresh, Upadhyay, की, शादी:, जानें, कौन, हैं, उनकी, दुल्हन, और, कैसे, शुरू, हुआ, अध्यात्म, का, सफर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>December Supermoon 2025: आज आसमान में ही बनाए रखें नजर, दिखेगा साल 2025 का आखिरी अद्भुत सुपरमून</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4425</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4425</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/04/e690f834ae4eb12ac2845c3400edec131764845667317466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>December, Supermoon, 2025:, आज, आसमान, में, ही, बनाए, रखें, नजर, दिखेगा, साल, 2025, का, आखिरी, अद्भुत, सुपरमून</media:keywords>
</item>

<item>
<title>शनि देव क्यों हुए लंगड़े? जानिए पौराणिक कथा और पीपल पूजा का रहस्य!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4426</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4426</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/04/ae390c552b0760c732bf4608e06f5ce617648484968061092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>शनि, देव, क्यों, हुए, लंगड़े, जानिए, पौराणिक, कथा, और, पीपल, पूजा, का, रहस्य</media:keywords>
</item>

<item>
<title>जीवन में कामयाबी हासिल करना चाहते हैं? तो पढ़ें विकास दिव्यकीर्ति सर के मोटिवेशनल कोट्स</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4422</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4422</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/04/65044d2e5bf34be726b773c528d6be241764832900192986_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>जीवन, में, कामयाबी, हासिल, करना, चाहते, हैं, तो, पढ़ें, विकास, दिव्यकीर्ति, सर, के, मोटिवेशनल, कोट्स</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal: तुला वृश्चिक धनु पर वृषभ राशि के चंद्रमा का प्रभाव, भूलकर भी न करें ये काम जानें 5 दिसंबर 2025 राशिफल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4423</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4423</guid>
<description><![CDATA[ Horoscope Today: आज वृषभ चंद्रमा तुला, वृश्चिक और धनु की ऊर्जा को अलग-अलग दिशा में मोड़ देगा. कहीं संतुलन बनेगा तो कहीं संबंध और दिनचर्या की परीक्षा. करियर, प्रेम, स्वास्थ्य और वित्त में आज तीनों राशियों के लिए निर्णायक बदलाव के संकेत हैं.
तुला (Libra) राशिफल, 5 दिसंबर 2025
वृषभ चंद्रमा आज भावनाओं को गंभीर करेगा. किसी करीबी व्यक्ति से मन की बात खुलकर करने का अवसर मिलेगा. काम में संतुलन बनाने की आपकी क्षमता किसी अहम स्थिति को संभाल लेगी. छात्रों में रचनात्मकता बढ़ेगी. सेहत में कमर खिंच सकती है.
Career: बातचीत और संतुलन से निर्णय आपके पक्ष में रहेंगे.Love: मन की बात कहने से संबंध मजबूत होंगे.Education: रचनात्मक विषयों में प्रगति.Health: कमर में हल्का तनाव.Finance: सोच-समझकर खर्च करें.उपाय: हल्की सुगंध वाली धूप अर्पित करें.Lucky Color: Sky Blue . Lucky Number: 7
वृश्चिक (Scorpio) राशिफल, 5 दिसंबर 2025
वृषभ चंद्रमा आज साझेदारी और संबंधों की परीक्षा लेगा. किसी पुराने मुद्दे पर चर्चा फिर खिल सकती है&amp;mdash;धैर्य से हल निकालें. काम में आपकी गहरी समझ सबका ध्यान खींचेगी, पर टकराव से दूर रहें. छात्रों के लिए गहन अध्ययन का दिन. सेहत में जलन या अम्लता.
Career: प्रभाव मजबूत रहेगा, पर शांत रहना आवश्यक.Love: पुरानी बातों से तनाव बढ़ सकता है.Education: गहराई से पढ़ाई लाभ देगी.Health: अम्लता बढ़ सकती है.Finance: भुगतान या कर्ज संबंधी बात आगे बढ़ेगी.उपाय: चंदन का तिलक लगाएँ.Lucky Color: Maroon . Lucky Number: 8
धनु (Sagittarius) राशिफल, 5 दिसंबर 2025
वृषभ चंद्रमा आज दिनचर्या में सुधार लाने का संकेत दे रहा है. छोटे कदम भी बड़े परिणाम दे सकते हैं. काम में नियमितता आपके पक्ष में माहौल बनाएगी. किसी वरिष्ठ की सलाह नया दृष्टिकोण देगी. छात्रों के लिए पुनरावृत्ति अनिवार्य. सेहत में थकावट रहेगी.
Career: अनुशासन से सफलता सुनिश्चित.Love: स्थिरता संबंध को मजबूत करेगी.Education: पुनरावृत्ति से लाभ.Health: थकान महसूस होगी.Finance: बचत की शुरुआत शुभ.उपाय: पीली दाल का दान करें.Lucky Color: Yellow . Lucky Number: 3
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/04/3285ddd63a2c69b4e828ab3f69e3718b1764849117762257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal:, तुला, वृश्चिक, धनु, पर, वृषभ, राशि, के, चंद्रमा, का, प्रभाव, भूलकर, भी, न, करें, ये, काम, जानें, दिसंबर, 2025, राशिफल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Friday puja: शुक्रवार को करें ये खास उपाय, लक्ष्मी कृपा से कभी नहीं होगी धन की कमी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4420</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4420</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/04/71021677fd779dea53ef8d5a35ecf00f1764850735388986_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Friday, puja:, शुक्रवार, को, करें, ये, खास, उपाय, लक्ष्मी, कृपा, से, कभी, नहीं, होगी, धन, की, कमी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal: मकर, कुंभ, मीन राशि के लिए करियर में बाधा का संकेत, जानें 5 दिसंबर 2025 राशिफल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4421</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4421</guid>
<description><![CDATA[ Rashifal: आज वृषभ चंद्रमा का प्रभाव मकर, कुंभ और मीन राशि पर अलग असर डालेगा. मकर को कार्यस्थिरता, कुंभ को भावनात्मक संयम और मीन को रिश्तों व लाभ के अवसर मिल सकते हैं. करियर, प्रेम, शिक्षा, सेहत, पैसा और उपाय, सब कुछ यहां पढ़ें- आज का राशिफल.
मकर (Capricorn) राशिफल, 5 दिसंबर 2025
वृषभ चंद्रमा आज आपको काम पर पूरा ध्यान लगाने की शक्ति देगा. किसी महत्वपूर्ण योजना का आरंभ हो सकता है. परिवार में किसी बड़े व्यक्ति की सलाह आपके लिए निर्णायक साबित होगी. छात्रों के लिए व्यवस्था और अनुशासन आवश्यक. सेहत में घुटनों या पैरों में हल्का तनाव.
Career: योजनाओं को ठोस दिशा मिलेगी.Love: शांत व्यवहार संबंध मजबूत करेगा.Education: अनुशासन पढ़ाई में गति लाएगा.Health: पैरों में थकान.Finance: बचत सुरक्षित रहेगी.उपाय: काली उड़द दान करें.Lucky Color: Black . Lucky Number: 8
कुंभ (Aquarius) राशिफल, 5 दिसंबर 2025
वृषभ चंद्रमा आज मन को थोड़ा भारी कर सकता है, पर निर्णय बहुत स्पष्ट होंगे. काम में किसी ज़िम्मेदारी को आप अकेले ही संभाल लेंगे. घर&amp;ndash;परिवार में किसी बात को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया आ सकती है, धैर्य रखें. छात्रों के लिए ध्यान और एकांत पढ़ाई उपयोगी. सेहत सामान्य पर नींद कम हो सकती है.
Career: अकेले काम बेहतर परिणाम देगा.Love: संवेदनशील बातों में संयम रखें.Education: एकांत में पढ़ाई लाभ देगी.Health: नींद कम हो सकती है.Finance: खर्च नियंत्रित रहेगा.उपाय: जल में सफेद पुष्प बहाएं.Lucky Color: Blue . Lucky Number: 4
मीन (Pisces) राशिफल, 5 दिसंबर 2025
वृषभ चंद्रमा आज विचारों को स्थिर करेगा और आपको महत्वपूर्ण संबंधों की ओर ध्यान दिलाएगा. काम में आपकी कल्पनाशीलता एक व्यावहारिक रूप लेगी. मित्र या सहकर्मी से महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी. छात्रों के लिए स्मरण शक्ति तेज़. सेहत में आंखों में हल्की थकान.
Career: नए विचार व्यावहारिक रूप ले सकते हैं.Love: भावनात्मक समीपता बढ़ेगी.Education: स्मरण शक्ति मजबूत.Health: आंखों में थकावट.Finance: लाभ के अवसर खुलेंगे.उपाय: मीठा जल पीपल की जड़ में अर्पित करें.Lucky Color: Purple . Lucky Number: 5
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/04/df754149c0b6ded79c35a9146d42dddb1764852787960257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal:, मकर, कुंभ, मीन, राशि, के, लिए, करियर, में, बाधा, का, संकेत, जानें, दिसंबर, 2025, राशिफल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>2026 में 24 एकादशी तिथियां, जानें क्यों एकादशी व्रत यज्ञ से भी ज्यादा फलदायी माना गया?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4419</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4419</guid>
<description><![CDATA[ Ekadashi tithi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना जाता है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है जो व्यक्ति इस व्रत को सच्चे मन से करता है उसे उसके सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। एकादशी व्रत करने वाला व्यक्ति इस लोक में समस्त सुख भोगकर मृत्य के बाद स्वर्ग में स्थान पाता है।
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि, ग्यारहवीं तिथि को एकादशी कहते हैं। ये महीने में दो बार आती है। एक शुक्ल पक्ष के बाद और दूसरी कृष्ण पक्ष के बाद।
एक साल में 24 एकादशी तिथियां
पूर्णिमा के बाद आने वाली एकादशी को कृष्ण पक्ष की एकादशी और अमावस्या के बाद आने वाली को शुक्ल पक्ष की एकादशी कहते हैं। इस तरह साल 24 एकादशी तिथियों को अलग-अलग नाम दिए गए हैं। हर एकादशी का अपना अलग महत्व है।
हिंदू धर्म व्रतों और त्योहारों का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत का भी सभी व्रत में विशेष महत्व है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। हिन्दू पंचांग के अनुसार एकादशी व्रत हर माह में 2 बार पड़ता है एक कृष्ण पक्ष में और एक शुक्ल पक्ष में। इस तरह से साल में 24 एकदशी पड़ती हैं।&amp;nbsp;
एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बेहद प्रिय
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी तिथि भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस व्रत की महिमा स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताई थी। एकादशी व्रत के प्रभाव से जातक को मोक्ष मिलता है और सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं, दरिद्रता दूर होती है। &amp;nbsp;
अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता, शत्रुओं का नाश होता है, धन, ऐश्वर्य, कीर्ति, पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता रहता है। एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सर्वोच्च माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति सच्ची श्राद्धा और भक्ति से इस व्रत को करते हैं उसकी सभी परेशानियों से उसे छुटकारा मिलता है। साल भर में आने वाली सभी एकादशियों का फल अलग-अलग मिलता है।
यज्ञ से भी ज्यादा फल देता है एकादशी व्रत
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि पुराणों के मुताबिक, एकादशी को हरी वासर यानी भगवान विष्णु का दिन कहा जाता है। विद्वानों का कहना है कि एकादशी व्रत यज्ञ और वैदिक कर्म-कांड से भी ज्यादा फल देता है।
पुराणों में कहा गया है कि इस व्रत को करने से मिलने वाले पुण्य से पितरों को संतुष्टि मिलती है। स्कंद पुराण में भी एकादशी व्रत का महत्व बताया गया है। इसको करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं।
पुराणों और स्मृति ग्रंथ में एकादशी व्रत
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि स्कन्द पुराण में कहा गया है कि हरिवासर यानी एकादशी और द्वादशी व्रत के बिना तपस्या, तीर्थ स्थान या किसी तरह के पुण्याचरण द्वारा मुक्ति नहीं होती। पदम पुराण का कहना है कि जो व्यक्ति इच्छा या न चाहते हुए भी एकादशी उपवास करता है, वो सभी पापों से मुक्त होकर परम धाम वैकुंठ धाम प्राप्त करता है।
कात्यायन स्मृति में जिक्र किया गया है कि आठ साल की उम्र से अस्सी साल तक के सभी स्त्री-पुरुषों के लिए बिना किसी भेद के एकादशी में उपवास करना कर्त्तव्य है। महाभारत में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सभी पापों ओर दोषों से बचने के लिए 24 एकादशियों के नाम और उनका महत्व बताया है।
एकादशी व्रत का महत्व
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक संस्कृति में प्राचीन काल से ही योगी और ऋषि इन्द्रिय क्रियाओं को भौतिकवाद से देवत्व की ओर मोड़ने को महत्व देते आ रहे हैं। एकादशी का व्रत उसी साधना में से एक है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार एकादशी में दो शब्द होते हैं एक (1) और दशा (10)।
दस इंद्रियों और मन की क्रियाओं को सांसारिक वस्तुओं से ईश्वर में बदलना ही सच्ची एकादशी है। एकादशी का अर्थ है कि हमें अपनी 10 इंद्रियों और 1 मन को नियंत्रित करना चाहिए। मन में काम, क्रोध, लोभ आदि के कुविचार नहीं आने देने चाहिए। एकादशी एक तपस्या है जो केवल भगवान को महसूस करने और प्रसन्न करने के लिए की जानी चाहिए।
एकादशी व्रत 2026

षटतिला एकादशी- 14 जनवरी 2026
जया एकादशी - 29 जनवरी 2026
विजया एकादशी - 13 फरवरी 2026
आमलकी एकादशी - 27 फरवरी 2026
पापमोचिनी एकादशी - 15 मार्च 2026
कामदा एकादशी - 29 मार्च 2026
वरुथिनी एकादशी - 13 अप्रैल 2026
मोहिनी एकादशी - 27 अप्रैल 2026
अपरा एकादशी - 13 मई 2026
पद्मिनी एकादशी - 27 मई 2026
परम एकादशी - 11 जून 2026
निर्जला एकादशी - 25 जून 2026
योगिनी एकादशी - 10 जुलाई 2026
देवशयनी एकादशी - 25 जुलाई 2026
कामिका एकादशी - 9 अगस्त 2026
श्रावण पुत्रदा एकादशी - 23 अगस्त 2026
अजा एकादशी - 7 सितंबर 2026
परिवर्तिनी एकादशी - 22 सितंबर 2026
इन्दिरा एकादशी - 6 अक्टूबर 2026
पापांकुशा एकादशी - 22 अक्टूबर 2026
रमा एकादशी - 5 नवंबर 2026
देवुत्थान एकादशी - 20 नवंबर 2026
उत्पन्ना एकादशी - 4 दिसंबर 2026
मोक्षदा एकादशी - 20 दिसंबर 2026

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/05/30fd035da856a467332db07daae35bb317649134210901092_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 05 Dec 2025 13:21:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>2026, में, एकादशी, तिथियां, जानें, क्यों, एकादशी, व्रत, यज्ञ, से, भी, ज्यादा, फलदायी, माना, गया</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 3 दिसंबर पंचांग, बुधवार को कौन सा काम करें, क्या है मुहूर्त, योग, राहुकाल, जानें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4374</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4374</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 3 दिसंबर 2025: आज 3 दिसंबर को मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है, इस दिन कर्नाटक में हनुमान जयंती मनाई जा रही है. आज बुधवार भी है ऐसे में परिवार में सुख-शांति के लिए गणेश स्त्रोत का पाठ करें. , साथ ही मंदिर में हरी चीजों का दान दें. इस उपाय को करने से व्यक्ति के पापों का शमन होता है और घर में आर्थिक मजबूती आती है.
आइए जानते हैं ये दिन किन राशियों के लिए शुभ-अशुभ है, इस दिन का शुभ समय, अशुभ काल, राहुकाल, ग्रह स्थिति और विशेष उपाय भी जानें.
3 दिसंबर का पंचांग 2025 (Hindi Panchang 3 December 2025)



तिथि

त्रयोदशी (2 दिसंबर 2025, दोपहर 3.57 - 3 दिसंबर 2025, दोपहर 12.25)



वार
बुधवार


नक्षत्र
भरणी


योग
परिघ, सर्वार्थ सिद्धि, रवि योग


सूर्योदय 
सुबह 6.57


सूर्यास्त
सुबह 5.24


चंद्रोदय
दोपहर 3.43


चंद्रोस्त
सुबह 6.50, 4 दिसंबर


चंद्र राशि
मेष



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


लाभ
सुबह 6.58 - सुबह 8.16


अमृत
सुबह 8.16 - सुबह 9.34


शाम का चौघड़िया


शुभ
रात 7.06 - रात 8.48


अमृत
रात 8.48 - रात 10.29



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 12.11 - दोपहर 1.29


यमगण्ड काल
सुबह 8.16 - सुबह 9.34


आडल योग
शाम 5.59 - शाम 6.59


विडाल योग
सुबह 6.58 - शाम 5.59


गुलिक काल
सुबह 10.53 - दोपहर 12.11



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 3 December 2025)



सूर्य
वृश्चिक


चंद्रमा
मेष


मंगल
वृश्चिक


बुध
तुला


गुरु
मिथुन


शुक्र
वृश्चिक


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



तुला राशि
आपको कुछ नए अनुबंधों से लाभ मिलेगा और आप लोगों का दिल जीतने में भी कामयाब रहेंगे.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



वृषभ राशि
निवेश करने से पहले सौ बार सोचें, अनावश्यक लग्जरी पर खर्च न करें. काम पर ध्यान रखें.



FAQs: 3 दिसंबर 2025

Q.कौन सा उपाय करें ?अगर बुधवार को यात्रा पर जा रहे हैं तो पहले एक नींबू साथ रखें और वापस आकर उसे बहते पानी में प्रवाहित कर दें. मान्यता है कि इससे यात्रा सफल होती है.
Q. कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?इस दिन रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है.

 Amavasya 2026 Dates: नए साल की पहली अमावस्या कब ? 2026 में अमावस्या की पूरी लिस्ट देखें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/03/a1ed30618ca4a316e42e039f9bd52cdf1764700777429499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, दिसंबर, पंचांग, बुधवार, को, कौन, सा, काम, करें, क्या, है, मुहूर्त, योग, राहुकाल, जानें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>प्राचीन भारत में सास के 6 प्रकार! कहीं आपकी सास भी तो नहीं हैं इनमें से एक? जानें रिश्तों का सच</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4375</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4375</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/02/cbf03268e52e9c96bec3d025d7d5258217646777104861092_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>प्राचीन, भारत, में, सास, के, प्रकार, कहीं, आपकी, सास, भी, तो, नहीं, हैं, इनमें, से, एक, जानें, रिश्तों, का, सच</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Motivational Quotes: मन को अपने वश में कैसे रखें? जानें सद्गुरु का जीवन बदलने वाला संदेश</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4373</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4373</guid>
<description><![CDATA[ Sadhguru: सद्गुरु बताते हैं कि मन एक अद्भुत शक्ति है. यही मन आनंद भी देता है और यही मन दुख, क्रोध, ईर्ष्या और बेचैनी भी पैदा कर सकता है. समस्या यह नहीं कि मन नकारात्मक भाव क्यों पैदा कर रहा है, समस्या यह है कि हम अपने ही मन को संभाल नहीं पाते हैं.
वे कहते हैं कि दिन भर में जो डर, गुस्सा या जलन हम महसूस करते हैं, वे हमारे बाहर से नहीं आते, बल्कि हमारे भीतर ही पैदा होते हैं. सद्गुरु के अनुसार आपको इन भावों से भागने की आवश्यकता नहीं है.
इन्हें मिटाने की भी जरूरत नहीं है. बस यह समझना होगा कि मन आपके वश में है कि नहीं है. जब व्यक्ति अपने ही मन के बटन गलत दबाता रहता है, तो जीवन एक उथल-पुथल बन जाता है. इसलिए जीवन को जानने का पहला कदम अपने मन की प्रकृति को समझना और उसे दिशा देना है.
मन को बदलना नहीं, उसे समझें
सद्गुरु बताते हैं कि जैसे एक कंप्यूटर में सही बटन दबाने पर सही परिणाम आता है. उसी प्रकार मन भी सही दिशा में चले तो आनंद, शांति, ऊर्जा और सकारात्मकता पैदा कर सकता है.
पर हम मन को ही नहीं समझते और लगातार गलत बटन दबाते रहते हैं. गुस्सा, भय, तनाव ये सब मन की प्रक्रिया का हिस्सा हैं. इन्हें हटाने की कोशिश करने के बजाय हमें सीखना होगा कि कैसे इन्हें मन के अंदर पैदा ही नहीं होन दिया जाए.
सद्गुरु कहते हैं कि आपको अपने भीतर यह क्षमता जगानी होगी कि कब किस भाव को जन्म देता है. यदि आप चाहें, तो यही मन परमानंद पैदा कर सकता है. यदि आप चाहें, तो यही मन शांति का स्रोत बन सकता है. इसके लिए साधना, ध्यान और अपने भीतर जागरूकता की आवश्यकता है.
खुद पर नियंत्रण ही आनंद और सद्गुणों का मार्ग
सद्गुरु समझाते हैं कि जीवन में सही अनुभव उसी समय आते हैं, जब हम अपने शरीर, मन और ऊर्जा की कमान स्वयं संभाल लेते हैं. &amp;nbsp;यदि हम मन को अज्ञानता में छोड़ दें, तो वह पीड़ा बढ़ाता जाएगा लेकिन यदि हम समझें कि कौन-सा बटन कब दबाना है, तो वही मन आनंद और शांति का महासागर बन सकता है.
सद्गुरु कहते हैं कि जब तक आप भीतर सही कदम नहीं उठाते, जीवन में सही परिणाम नहीं आएँगे. आपके भीतर ही सब कुछ है बस उसे जानने और नियंत्रित करने की आवश्यकता है.
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/02/6b5094d7ebe515c7e10eead6ca99a71417646878143631241_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:23 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Motivational, Quotes:, मन, को, अपने, वश, में, कैसे, रखें, जानें, सद्गुरु, का, जीवन, बदलने वाला संदेश</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal: धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए आज कुछ खास है? जानें 3 दिसंबर 2025 का राशिफल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4372</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4372</guid>
<description><![CDATA[ Rashifal: धनु, मकर, कुंभ और मीन राशि राशि के लिए आज यानी 3 दिसंबर 2025 का दिन कैसा रहेगा? क्या धन और सेहत के मामले में हानि होगी या जीवन में कोई शुभ समाचार मिल सकता है, जानते हैं इन चार राशियों का विशेष राशिफल (Horoscope Today).
धनु (Sagittarius) राशिफल, 3 दिसंबर 2025
मेष चंद्रमा आज आपकी ऊर्जा, कल्पना और उत्साह को बढ़ाएगा. किसी पुराने विचार को दोबारा शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी. काम में गति बनी रहेगी और आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा. रिश्तों में प्रेम और अपनापन महसूस होगा, लेकिन हल्की चिड़चिड़ाहट भी हो सकती है. छात्रों के लिए कला, संगीत और रचनात्मक विषयों में गहराई आएगी. सेहत में शरीर गर्म रह सकता है या थकान महसूस हो सकती है.
Career: रचनात्मक काम सफल.Love: प्रेम बढ़ेगा.Education: कला&amp;ndash;विषय अच्छे.Health: थकान&amp;ndash;गरमाहट.Finance: शौक पर खर्च.उपाय: गाय को गुड़ दें.Lucky Color: Purple . Lucky Number: 3
मकर (Capricorn) राशिफल, 3 दिसंबर 2025
मेष चंद्रमा आज आपकी घरेलू ज़िम्मेदारियां बढ़ाएगा. किसी पारिवारिक विषय पर मन अशांत रह सकता है. काम में ध्यान कम लगेगा लेकिन आपका अनुभव आपको गलत दिशा में नहीं जाने देगा. रिश्तों में दूरी या कम संवाद से भारीपन महसूस होगा. छात्रों के लिए पढ़ाई धीमी चलेगी पर पुराने अध्याय दोहराने का समय अच्छा है. स्वास्थ्य में सिर भारी या नींद कम हो सकती है.
Career: ध्यान कमजोर.Love: दूरी बनी रहेगी.Education: पुनरावृत्ति ठीक.Health: थकान&amp;ndash;नींद कम.Finance: घरेलू खर्च.उपाय: काला कपड़ा दान करें.Lucky Color: Brown . Lucky Number: 8
कुंभ (Aquarius) राशिफल, 3 दिसंबर 2025
मेष चंद्रमा आपकी वाणी और विचारों को तेज़ करेगा. आप आज बातों में बहुत स्पष्ट रहेंगे, जिससे लोग प्रभावित भी होंगे और कुछ असहज भी. काम में आपके सुझाव महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. रिश्तों में साफ़-सुथरी बातचीत गलतफ़हमी मिटाएगी. छात्रों के लिए तर्क, गणित, विश्लेषण और विज्ञान वाले विषय बहुत अच्छे. स्वास्थ्य में गर्दन&amp;ndash;कंधे में हल्का खिंचाव.
Career: बातचीत प्रभावशाली.Love: साफ़ बात.Education: तर्क&amp;ndash;ज्ञान मजबूत.Health: गर्दन&amp;ndash;कंधा तनाव.Finance: यात्रा खर्च.उपाय: तुलसी को जल दें.Lucky Color: Blue . Lucky Number: 4
मीन (Pisces) राशिफल, 3 दिसंबर 2025
मेष चंद्रमा आज आपकी कमाई, खर्च और आत्मसम्मान पर असर डालेगा. किसी छोटी खरीदारी या अचानक खर्च की स्थिति बनेगी. काम में व्यावहारिक होकर निर्णय लेना लाभ देगा. रिश्तों में आपकी नरमी और मधुरता लोगों को आपकी ओर खींचेगी. छात्रों के लिए सामान्य दिन&amp;mdash;व्यावहारिक विषयों में समझ बढ़ेगी. स्वास्थ्य में गला सूखना या हल्की कमजोरी.
Career: व्यावहारिक निर्णय.Love: नरमी लाभ देगी.Education: सामान्य, स्थिर.Health: गला सूखेगा.Finance: अचानक खर्च.उपाय: चावल दान करें.Lucky Color: White . Lucky Number: 2
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/02/565e93040bdca5d0dd827f0b96b227b11764658662265257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:22 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal:, धनु, मकर, कुंभ, और, मीन, राशि, वालों, के, लिए, आज, कुछ, खास, है, जानें, दिसंबर, 2025, का, राशिफल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Pradosh Vrat 2026 Dates: साल 2026 के प्रदोष व्रत कब&#45;कब ?</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4369</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4369</guid>
<description><![CDATA[ Pradosh Vrat 2026 Dates: शिव पुराण के अनुसार शिव जी को सबसे प्रिय है त्रयोदशी तिथि, क्योंकि इस दिन प्रदोष काल में महादेव प्रसन्न होकर कैलाश पर नृत्य करते हैं. इस दिन लोग महादेव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत रखते हैं. कहते हैं जो प्रदोष व्रत करता है उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. विवाह और वैवाहिक जीवन की परेशानी से मुक्ति मिलती है.
साल 2026 की शुरुआत प्रदोष व्रत से ही हो रही है, ये बेहद शुभ संयोग माना जा रहा है. हर प्रदोष व्रत का अपना महत्व है लेकिन जब सोमवार को प्रदोष व्रत होता है तो इसका महत्व दोगुना हो जाता है. इस साल
प्रदोष व्रत 2026
01 जनवरी 2026 - गुरु प्रदोष व्रत (शुक्ल)
16 जनवरी 2026 - शुक्र प्रदोष व्रत (कृष्ण)
30 जनवरी 2026 - प्रदोष व्रत (शुक्ल)
14 फरवरी 2026 - शनि प्रदोष व्रत (कृष्ण)
28 फरवरी 2026 - शनि प्रदोष व्रत (शुक्ल)
16 मार्च 2026 - सोम प्रदोष व्रत (कृष्ण)
30 मार्च 2026 - सोम प्रदोष व्रत (शुक्ल)
15 अप्रैल 2026 - बुध प्रदोष व्रत (कृष्ण)
28 अप्रैल 2026 - भौम प्रदोष व्रत (शुक्ल)
14 मई 2026 - गुरु प्रदोष व्रत (कृष्ण)
28 मई 2026 - गुरु प्रदोष व्रत (शुक्ल)
12 जून 2026 - शुक्र प्रदोष व्रत (कृष्ण)
12 जुलाई 2026 - रवि प्रदोष व्रत (कृष्ण)
26 जुलाई 2026 - रवि प्रदोष व्रत (शुक्ल)
10 अगस्त 2026 - सोम प्रदोष व्रत (कृष्ण)
25 अगस्त 2026 - भौम प्रदोष व्रत (शुक्ल)
8 सितंबर 2026 - भौम प्रदोष व्रत (कृष्ण)
24 सितंबर 2026 - गुरु प्रदोष व्रत (शुक्ल)
8 अक्टूबर 2026 - गुरु प्रदोष व्रत (कृष्ण)
23 अक्टूबर 2026 - शुक्र प्रदोष व्रत (शुक्ल)
6 नवंबर 2026 - शुक्र प्रदोष व्रत (कृष्ण)
22 नवंबर 2026 - गुरु प्रदोष व्रत (शुक्ल)
6 दिसंबर 2026 - रवि प्रदोष व्रत (कृष्ण)
21 दिसंबर 2026 - सोम प्रदोष व्रत (शुक्ल)
 Amavasya 2026 Dates: नए साल की पहली अमावस्या कब ? 2026 में अमावस्या की पूरी लिस्ट देखें





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/03/672f6feb00622d1cd4f5e5243a5210d61764703689735499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Pradosh, Vrat, 2026, Dates:, साल, 2026, के, प्रदोष, व्रत, कब-कब</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Surya Mangal Yuti 2025: दिसंबर में बनेगा आदित्य मंगल योग, सूर्य&#45;मंगल की युति बढ़ाएगी इन राशियों का तेज</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4370</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4370</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/02/513420e140a0337ae7a002d9eb9f8f8b1764675851953466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Surya, Mangal, Yuti, 2025:, दिसंबर, में, बनेगा, आदित्य, मंगल, योग, सूर्य-मंगल, की, युति, बढ़ाएगी, इन, राशियों, का, तेज</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Wednesday Puja: गणेश जी की कृपा पाने के लिए बुधवार को करें ये उपाय! करियर और नौकरी में मिलेगी तरक्की</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4371</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4371</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/02/23a22728a0c400d2d91947958cd8d28f17646915666001241_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:21 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Wednesday, Puja:, गणेश, जी, की, कृपा, पाने, के, लिए, बुधवार, को, करें, ये, उपाय, करियर, और, नौकरी, में मिलेगी तरक्की</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Margashirsha Purnima 2025 Upay: मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर करें ये उपाय, नहीं रहेगी धन&#45;धान्य की कमी</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4366</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4366</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/03/0ec4910bc81a6b19023ef6b0c016d2231764735671925466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Margashirsha, Purnima, 2025, Upay:, मार्गशीर्ष, पूर्णिमा, पर, करें, ये, उपाय, नहीं, रहेगी, धन-धान्य, की, कमी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>बालों के दान से लेकर दही चावल के प्रसाद तक, तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़े 6 रोचक तथ्य!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4367</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4367</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/03/8aa0b34b4101749678d7d1b2bc0e7a4417647431587231092_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>बालों, के, दान, से, लेकर, दही, चावल, के, प्रसाद, तक, तिरुपति, बालाजी, मंदिर, से, जुड़े, रोचक, तथ्य</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Christmas 2025: इन 5 देशों में क्रिसमस मनाने की अजब&#45;गजब परंपरा, नहीं जानते होंगे आप</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4368</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4368</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/02/f870e05f28dfdf4e753eb23b926f43711764696768239499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 03 Dec 2025 12:14:20 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Christmas, 2025:, इन, देशों, में, क्रिसमस, मनाने, की, अजब-गजब, परंपरा, नहीं, जानते, होंगे, आप</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hindi Panchang Today: 2 दिसंबर भौम प्रदोष व्रत का मुहूर्त, योग, राहुकाल, जानें पंचांग</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4325</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4325</guid>
<description><![CDATA[ Hindi Panchang 2 दिसंबर 2025: 2 दिसंबर को मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष का भौम प्रदोष व्रत है.मान्यता है कि यह व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को रोगों से मुक्ति मिलती है साथ ही मंगल देवता के आशीर्वाद से मांगलिक दोष दूर होता है, विवाह की अड़चने खत्म होती है.&amp;nbsp;
आइए जानते हैं ये दिन किन राशियों के लिए शुभ-अशुभ है, इस दिन का शुभ समय, अशुभ काल, राहुकाल, ग्रह स्थिति और विशेष उपाय भी जानें.
2 दिसंबर का पंचांग 2025 (Hindi Panchang 2 December 2025)



तिथि

द्वादशी (1 दिसंबर 2025, रात 7,01- 2 दिसंबर 2025, दोपहर 3.57)



वार
मंगलवार


नक्षत्र
अश्विनी


योग
वरीयान, रवि, सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि योग


सूर्योदय 
सुबह 6.57


सूर्यास्त
सुबह 5.24


चंद्रोदय
दोपहर 2.59


चंद्रोस्त
सुबह 4.53, 3 दिसंबर


चंद्र राशि
मेष



चौघड़िया मुहूर्त



सुबह का चौघड़िया


चर
सुबह 9.34 - सुबह 10.52


लाभ
सुबह 10.52 - दोपहर 12.11


अमृत
दोपहर 12.11 - दोपहर 1.29


शाम का चौघड़िया


लाभ
रात 7.06 - रात 8.57



राहुकाल और अशुभ समय (Aaj Ka Rahu kaal)



राहुकाल (इसमें शुभ कार्य न करें)
दोपहर 2.47 - शाम 4.06


यमगण्ड काल
सुबह 9.34 - सुबह 10.52


आडल योग
रात 8.57 - सुबह 1.22, 3 दिसंबर


विडाल योग
सुबह 6.57 - रात 8.51


गुलिक काल
दोपहर 12.11 - दोपहर 1.29



ग्रहों की स्थिति (Grah Gochar 2 December 2025)



सूर्य
वृश्चिक


चंद्रमा
मेष


मंगल
वृश्चिक


बुध
तुला


गुरु
मिथुन


शुक्र
वृश्चिक


शनि
मीन


राहु
कुंभ


केतु
सिंह



किन राशियों को लाभ



कर्क राशि
निवेश के लिहाज से दिन अच्छा रहेगा. लाभ के योग हैं.



कौन सी राशियां संभलकर रहें



मीन राशि
ऑफिस में काम का प्रेशर आपको परेशान कर सकता है, तैयार रहें.



FAQs: 2 दिसंबर 2025

Q.कौन सा उपाय करें ?भौम प्रदोष व्रत के दिन जरुरतमंदों को चावल, मसूर दाल, तांबा,धन, कंबल, का दान करना चाहिए, इससे मंगल देवता प्रसन्न होते हैं.
Q. कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं ?इस दिन अमृत सिद्धि, रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है.

 Saphala Ekadashi 2025: मोक्षदा के बाद सफला एकादशी कब ? नोट करें डेेट, मुहूर्त
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.&amp;nbsp; ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/02/494a7e89c8d6cd861f9768abc438d7bb1764619657677499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:33 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hindi, Panchang, Today:, दिसंबर, भौम, प्रदोष, व्रत, का, मुहूर्त, योग, राहुकाल, जानें, पंचांग</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal: 2 दिसंबर 2025 राशिफल सिंह, कन्या, तुला और वृश्चिक राशि के फैसलों और भावनाओं में बड़ा बदलाव</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4324</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4324</guid>
<description><![CDATA[ Rashifal: सिंह, कन्या, तुला और वृश्चिक राशि&amp;nbsp;के लिए आज यानी 2 दिसंबर 2025 का दिन कैसा रहेगा? क्या धन और सेहत के मामले में हानि होगी या जीवन में कोई शुभ समाचार मिल सकता है, जानते हैं इन चार राशियों का विशेष राशिफल (Horoscope Today).
सिंह (Leo) राशिफल, 2 दिसंबर 2025
मीन चंद्रमा आज आपके अंदर गहरे भाव और छुपी हुई चिंताओं को सतह पर ला सकता है. किसी पुराने भावनात्मक अनुभव की याद अचानक आ सकती है. कार्यक्षेत्र में आपको रणनीति (Strategy) और शांत स्वभाव दिखाना होगा, तभी स्थितियां आपके पक्ष में मुड़ेंगी. रिश्तों में आप ज्यादा गंभीर और चिंतनशील रहेंगे, जिससे साथी आपको कम बोलते हुए नोट करेगा. छात्रों के लिए ध्यान, शोध, मनोविज्ञान और कठिन विषय आसान लगेंगे. सेहत में हार्मोनल असंतुलन या पानी की कमी.
Career (कैरियर): रणनीति की ज़रूरत.Love (प्रेम): भावनात्मक गहराई.Education (शिक्षा): शोध में लाभ.Health (सेहत): हार्मोन/थकान.Finance (धन): संयुक्त खर्च बढ़े.उपाय: काले तिल बहते जल में.Lucky Color (भाग्यशाली रंग): Orange (नारंगी) । Lucky Number (भाग्यांक): 9
कन्या (Virgo) राशिफल, 2 दिसंबर 2025
मीन चंद्रमा आज आपके रिश्तों और साझेदारी पर सीधा असर डालेगा. किसी करीबी का व्यवहार बदला हुआ लग सकता है, जिससे हल्की दूरी बन सकती है. कार्यक्षेत्र में धैर्य की परीक्षा होगी और किसी की देरी से आपका काम अटक सकता है. रिश्तों में स्पष्ट बातचीत ही राहत देगी. छात्रों के लिए जोड़ी में पढ़ाई या साझे प्रोजेक्ट अच्छे. सेहत में पेट और पीठ का तनाव.
Career (कैरियर): टीम सपोर्ट कम.Love (प्रेम): स्पष्ट बातचीत ज़रूरी.Education (शिक्षा): जोड़ी अध्ययन शुभ.Health (सेहत): पेट&amp;ndash;पीठ तनाव.Finance (धन): साझेदारी खर्च.उपाय: घी का दीपक जलाएं.Lucky Color (भाग्यशाली रंग): Light Green (हल्का हरा) । Lucky Number (भाग्यांक): 7
तुला (Libra) राशिफल, 2 दिसंबर 2025
मीन चंद्रमा आज आपके दैनिक जीवन और काम की गति में उतार-चढ़ाव ला सकता है. अचानक कोई काम बढ़ सकता है जिससे दिन थोड़ा अव्यवस्थित दिखेगा. कार्यस्थल पर आपको सूक्ष्म ध्यान (Fine Attention) रखना होगा, वरना गलती हो सकती है. रिश्तों में आपकी चुप्पी साथी को परेशान कर सकती है, आज थोड़ा स्नेह दिखाएं. छात्रों के लिए अनुशासन वाले विषय अच्छे. सेहत में थकान, पेट में गैस या चक्कर.
Career (कैरियर): काम अचानक बढ़ेगा.Love (प्रेम): चुप्पी तनाव बढ़ाएगी.Education (शिक्षा): अनुशासन ज़रूरी.Health (सेहत): थकान&amp;ndash;गैस.Finance (धन): छोटे खर्च.उपाय: गौ माता को हरी घास.Lucky Color (भाग्यशाली रंग): Pink (गुलाबी) । Lucky Number (भाग्यांक): 6
वृश्चिक (Scorpio) राशिफल, 2 दिसंबर 2025
मीन चंद्रमा आज आपके अंदर रचनात्मकता और भावुकता दोनों बढ़ाएगा. कोई पुरानी चिंता आज हल्की हो सकती है या किसी प्रियजन से बात राहत देगी. कार्यक्षेत्र में आपका रचनात्मक दृष्टिकोण (Creative Approach) प्रभाव छोड़ेगा. रिश्तों में रोमांस और गहराई, लेकिन हल्की जलन भी संभव. छात्रों के लिए कला, संगीत, लेखन और नाटक शुभ. सेहत में पानी की कमी, सिर भारी या कमजोरी.
Career (कैरियर): रचनात्मक काम सफल.Love (प्रेम): गहरा रोमांस.Education (शिक्षा): कला विषय अच्छे.Health (सेहत): सिर, थकान.Finance (धन): मनोरंजन खर्च.उपाय: भगवान विष्णु को पीली पुष्प अर्पित करें.Lucky Color (भाग्यशाली रंग): Maroon (गहरा लाल) । Lucky Number (भाग्यांक): 8
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/01/b687f72746d4118b81a9d34d5fc054261764587491595257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:32 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal:, दिसंबर, 2025, राशिफल, सिंह, कन्या, तुला, और, वृश्चिक, राशि, के, फैसलों, और, भावनाओं, में, बड़ा, बदलाव</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Motivational Quotes: जब धर्म और राष्ट्र खतरे में हो तो विरोध ही सच्ची भक्ति है, जानें प्रेमानंद महाराज का संदेश</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4322</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4322</guid>
<description><![CDATA[ Motivational Quotes: प्रेमानंद महाराज &amp;nbsp;अपने उपदेशों में बार-बार यही बात करते हैं कि जीवन का सर्वोच्च धर्म वही है, जिसमें धर्म, राष्ट्र, संस्कृति और इष्ट की गरिमा सुरक्षित रहे. यदि इन मूल स्तंभों पर आंच आती है, तो मौन रहना अधर्म है और विरोध करना ही हर व्यक्ति का कर्तव्य है.&amp;nbsp;
क्या कहते हैं प्रेमानंद महाराज
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि धर्म का वास्तविक अर्थ किसी संप्रदाय या कर्मकांड तक सीमित नहीं है. धर्म वह है जो मनुष्य को मनुष्य बनाए रखे. जब समाज में असत्य, अधर्म या अन्याय बढ़ता है, तो केवल उपदेश देना पर्याप्त नहीं होता है. उस समय विरोध ही धर्म का प्रतीक बन जाता है.
यही कारण है कि गीता में भी श्रीकृष्ण अर्जुन को युद्धभूमि में खड़ा होने का आदेश देते हैं क्योंकि धर्म की रक्षा के लिए सक्रिय होना आवश्यक है. वे कहते हैं कि राष्ट्र केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, परंपरा, भाषा, इतिहास और संघर्षों का समन्वित स्वरूप है.
महाराज कहते हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व केवल सेनाओं का नहीं, बल्कि हर नागरिक का है. यदि राष्ट्र की अस्मिता पर चोट पहुंचती है तो विरोध करना आवश्यक हो जाता है. ऐसा विरोध समाज को जागरूक भी करता है और राष्ट्र को सुदृढ़ भी करता है.&amp;nbsp;
चरित्रहीनता राष्ट्र के लिए दुर्बलता
प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि चरित्र वह तत्व है जो व्यक्ति को प्रतिष्ठा देता है और समाज को स्थिरता प्रदान करता है. चरित्रहीनता राष्ट्र की सबसे बड़ी दुर्बलता है. चरित्रहीनता आग है जिनसे राष्ट्र भीतर ही भीतर जलता है. ऐसे समय में विरोध केवल नारा नहीं, बल्कि समाज को जागृत करने का दायित्व है. चरित्र की रक्षा ही राष्ट्र के भविष्य की रक्षा है.&amp;nbsp;
आस्था पर चोट करना सभ्यता के लिए संकट
प्रेमानंद महाराज के अनुसार मनुष्य अपने इष्ट से शक्ति, धैर्य और विवेक प्राप्त करता है. जब इष्ट, धर्म या देवी-देवताओं का अपमान होता है, तो आस्था कमजोर पड़ती है. महाराज कहते हैं कि आस्था पर चोट लगना किसी भी सभ्यता के लिए गंभीर संकट होता है. इसलिए यदि कोई शक्ति समाज को उसकी जड़ों से काटने का प्रयास करे, तो प्रतिकार करना ही उपासना बन जाता है.
वे समझाते हैं कि विरोध का अर्थ हिंसा नहीं बल्कि विरोध का अर्थ है- सत्य के पक्ष में खड़ा होना है. गलत को गलत कहना और संस्कृति की रक्षा करना ही धर्म है. प्रेमानंद महाराज के अनुसार, जब चारों मूलाधार धर्म, राष्ट्र, चरित्र और इष्ट सुरक्षित हों, तभी समाज समृद्ध होता है.
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/01/875b6ccfba91d75fba9522e09c3664be17645891935291241_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Motivational, Quotes:, जब, धर्म, और, राष्ट्र, खतरे, में, हो, तो, विरोध, ही, सच्ची, भक्ति, है, जानें, प्रेमानंद, महाराज, का, संदेश</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Hanuman worship: मंगल दोष और हनुमान जी की कृपा पाने के लिए करें मंगलवार का पूजा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4323</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4323</guid>
<description><![CDATA[ Hanuman worship: धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगलवार का व्रत रखने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कुंडली में बने मंगल दोष का प्रभाव भी कम हो जाता है. हनुमान जी को संकटमोचन कहा गया है. इसलिए मंगलवार के दिन उनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है.
 जन्म कुंडली में मंगल दोष
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में बारह भाव होते हैं. प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में मंगल का स्थित होना आमतौर पर मंगल दोष बनाता है. कई बार यह दोष स्वतः समाप्त भी हो जाता है, लेकिन कई जातकों को इसके दुष्परिणाम झेलने पड़ सकते हैं.
विवाह में विलंब, दांपत्य तनाव, क्रोध, दुर्घटना का भय या आर्थिक संघर्ष इन सबके पीछे अक्सर मंगल दोष को कारण माना जाता है. इसलिए ज्योतिष में इसके उपाय और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. हनुमान जी की भक्ति को मंगल दोष शांत करने का सबसे सरल उपाय माना जाता है.
कैसे करें व्रत
मंगलवार का व्रत बहुत सीधा और प्रभावी माना जाता है. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग के वस्त्र धारण करें. मन में मंगल दोष दूर करने का संकल्प लें. पूजा स्थान को साफ करें और हनुमान जी तथा मंगल देव की तस्वीर स्थापित करें. लाल फूल, सिंदूर, चने और गुड़ का भोग अर्पित करें.
&amp;ldquo;ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः&amp;rdquo; और &amp;ldquo;ॐ हनुमते नमः&amp;rdquo; मंत्रों का 108 बार जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है. हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ अवश्य करें. दिनभर फलाहार रखें और नमक का सेवन न करें. सूर्यास्त के बाद व्रत का पारण करें.
इन उपायों से दूर होगा दूष:
मंगलवार के दिन दान करना शुभ माना गया है. लाल मसूर की दाल, गुड़, तांबा या लाल रंग की वस्तुओं का दान मंगल दोष को शांत करने में सहायक होता है. यह भी माना जाता है कि जो व्यक्ति मंगलवार को संयम, सेवा और विनम्रता के साथ हनुमान जी की भक्ति करता है, उसके जीवन से बाधाएँ धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं.
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/01/421e7a5b3807d2f2da827613cf96902517645737812121241_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:31 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Hanuman, worship:, मंगल, दोष, और, हनुमान, जी, की, कृपा, पाने, के, लिए, करें, मंगलवार, का, पूजा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>अगहन मास में जीरा क्यों नहीं खाना चाहिए? जानें धार्मिक और आयुर्वेदिक कारण</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4320</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4320</guid>
<description><![CDATA[ Aghan Mahina: हिंदू धर्म में अगहन महीने को सबसे श्रेष्ठ माह कहा गया है, क्योंकि भगवान कृष्ण को सभी महीनों में से यह माह सबसे ज्यादा प्रिय है. मान्यता के अनुसार मार्गशीर्ष माह में पूजा-पाठ और जाप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है.
मगर यह धार्मिक दृष्टि के साथ-साथ स्वास्थ्य के नज़रिये से भी बहुत जरूरी है. क्योंकि अगहन महीने में तामसिक भोजन नहीं किया जाता, जिसमें लहसुन, प्याज, जीरा, मसूर सहित अन्य चीजों को आयुर्वेद और धर्म के दोनों में ही वर्जित माना गया है.
जीरा की जगह करें इस मसाले का इस्तेमाल&amp;nbsp;
वहीं बात करें जीरे की तो, यह एक ऐसा मसाला है, जिसे हर भारतीय के घर में इस्तेमाल किया जाता है. सनातन धर्म में भी जो लोग लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करते, उनके यहां भी साल भर जीरा का तड़का लगता है. मगर अगहन मास में जीरा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इसकी जगह हींग या काली मिर्च का उपयोग कर सकते हैं.&amp;nbsp;
इस महीने में खानपान का विशेष महत्व
अगहन महीने में पूजा-पाठ, व्रत और सात्विक भोजन का खास महत्व है. इस महीने में खानपान पर ध्यान रखने से भी हमारा स्वास्थ्य सही रहता है.
बुंदेलखंड की एक कहावत के अनुसार, क्वांर करेला, कार्तिक दई, अगहन आंवला, पूष में मई. यह ठंड के महीने होते हैं, जिनमें इन चीजों को खाने से स्वास्थ्य को नुकसान होता है.
वैसे ही आयुर्वेद और पुराणों में भी अगहन माह में जीरा खाना वर्जित किया गया है.&amp;nbsp;
जाने धार्मिक और आयुर्वेदिक कारण&amp;nbsp;
अगहन का महीना शीत ऋतु का होता है और &amp;nbsp;धर्म ग्रंथों और पुराणों के अनुसार इस महीने में जीरा खाने से व्यक्ति के शरीर की पाचन शक्ति अधिक सक्रिय हो जाती है. जिस वजह से गर्म तासीर वाली चीजें हमारे शरीर के संतुलन को बिगाड़ सकती है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अगहन मास में जीरा का सेवन करने से मां लक्ष्मी के आशीर्वाद में रुकावटें आती हैं. वहीं भगवान विष्णु को सात्विक भोजन ही प्रिय है और जीरा को तामसिक गुणों वाला पदार्थ माना जाता है.
आयुर्वेद की माने तो जीरा का सेवन करने से व्यक्ति को सिरदर्द, स्किन के जुड़े रोग या पाचन जैसी दिक्कतें आ सकती हैं. जीरा पित्त दोष को भी बढ़ाता है. इससे शारीरिक के साथ-साथ मानसिक परेशानियां भी होती है, जो नींद को प्रभावित कर सकती हैं.&amp;nbsp;
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/01/01aac8be48df1565966d891dba1b97a817646069040501218_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>अगहन, मास, में, जीरा, क्यों, नहीं, खाना, चाहिए, जानें, धार्मिक, और, आयुर्वेदिक, कारण</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Tulsi: तुलसी पत्ते को चबाने से क्यों रोकते हैं धर्म और विज्ञान, वजह जान चौंक जाएंगे</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4321</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4321</guid>
<description><![CDATA[ Tulsi: हिंदू धर्म में तुलसी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है. तुलसी का पौधा सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता बल्कि इसे सकारात्मक ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक भी माना जाता है. आयुर्वेद में तो तुलसी को गुणकारी माना गया है और इसके सेवन के कई लाभ भी बताए गए हैं.
तुलसी को गुणकारी मानकर कई लोग इसके पत्ते को चबा-चबाकर भी खाते हैं. अगर आप भी उन लोगों में एक हैं जो यह सोचते हैं कि तुलसी की पत्तियों को चबाकर खाना वाकई आपके लिए लाभकारी है तो आपको यह खबर जरूर पढ़नी चाहिए.
वास्तव में आप ऐसा करके ना सिर्फ धार्मिक नियमों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि कहीं न कहीं अपनी सेहत के साथ ही खिलवाड़ कर रहे हैं. धर्म और विज्ञान की दृष्टि से भी ऐसा करना सही नहीं माना जाता है. आइए धर्म और विज्ञान दोनों पक्षों से समझते हैं कि आखिर क्यों तुलसी की पत्तियों को नहीं चबाना चाहिए.
क्यों नहीं चबानी चाहिए तुलसी की पत्तियां (Why Not Chew Tulsi Leaves)
धार्मिक कारण- पुराणों में तुलसी को देवी और माता का दर्जा प्राप्त है. इसलिए यह पौधा पवित्र और पूजनीय माना गया है. तुलसी की पत्तियों को दांतों से चबाना इसका अपमान करने जैसा होता है. क्योंकि ऐसी मान्यता तुलसी की प्रत्येक पत्तियों में देवी लक्ष्मी का वास होता है. यही वजह है कि, पूजा-पाठ में तुलसी की पत्तियों को कभी तोड़कर (खंडित) नहीं चढ़ाया जाता है.
वैज्ञानिक कारण-&amp;nbsp;वैज्ञानिक नजरिए से भी तुलसी की पत्तियों को चबाने से बचने की सलाह दी जाती है. इसका कारण यह है कि तुलसी की पत्तियों में &amp;lsquo;Mercury&amp;rsquo; (पारद) या मर्क्यूरिक एसिड (Mercuric Acid) जैसा तत्व पाया जाता है, जो दांतों के इनेमल (enamel) के लिए नुकसानदायक होता है. तुलसी को चबाने से ये तत्व दांतों के संपर्क में आते हैं और दांतों की ऊपरी परत धीरे-धीरे घिसने लगती है.
साथ ही इसकी पत्तियों को तुलसी के पत्तों की तासीर गरम और हल्की एसिडिक होती है. इसे अगर बार-बार चबाया जाए, तो यह मुंह और पेट में एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है. तुलसी की पत्तियों में बहुत कम मात्रा में आर्सेनिक (Arsenic) नामक तत्व भी होता है. लेकिन अगर इसे ज्यादा मात्रा में चबाया जाए, तो यह शरीर में धीरे-धीरे टॉक्सिन को जमा कर सकता है (Side effects of chewing Tulsi).
फिर कैसे करें तुलसी का सेवन
आयुर्वेद और विज्ञान के अनुसार तुलसी औषधीय पौधा है, जिसमें कई प्रकार के एंटी-बैक्टीरियल और एंटी वायरल गुण मौजूद हैं. इसलिए आयुर्वेद में इसके सेवन की सलाह दी जाती है. खासकर खांसी-कफ आदि के लिए तो यह रामबाण माना जाता है. लेकिन मर्क्यूरिक एसिड होने की वजह से विशेषज्ञ तुलसी की पत्तियों को चबाने के बजाय निगलने की सलाह देते हैं.
आयुर्वेद के मुताबिक, तुलसी को चबाने के बजाय आप इसकी पूरी पत्तियों को पानी के साथ निगल सकते हैं. इसके अलावा चाय, काढ़ा या गुनगुने पानी में डालकर भी इसका सेवन कर सकते हैं. तुलसी के पत्तों को शहद और अदरक के रस के साथ मिलाकर लेने से रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/01/52c83aac90bf0a2830fed97a43c4bdc81764597133317466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:30 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Tulsi:, तुलसी, पत्ते, को, चबाने, से, क्यों, रोकते, हैं, धर्म, और, विज्ञान, वजह, जान, चौंक, जाएंगे</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Annapurna Jayanti 2025: अन्नपूर्णा जयंती पर जौ, राई, गेहूं समेत इन चीजों का करें दान, कुंडली में मजबूत होंगे ग्रह</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4317</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4317</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/01/efc7a26279aba038338b9d7b4d6b68c51764608777825466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Annapurna, Jayanti, 2025:, अन्नपूर्णा, जयंती, पर, जौ, राई, गेहूं, समेत, इन, चीजों, का, करें, दान, कुंडली, में, मजबूत, होंगे, ग्रह</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Bhaum Pradosh Vrat 2025: भौम प्रदोष व्रत कथा और पूजा विधि, जानें महत्व और लाभ</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4318</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4318</guid>
<description><![CDATA[ Bhaum Pradosh Vrat 2025: 2 दिसंबर 2025 को मार्गशीर्ष माह का भौम प्रदोष व्रत किया जाएगा. ये शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत होगा, इसका महत्व दोगुना बताया जा रहा है क्योंकि मंगलवार के दिन जब त्रयोदशी पड़ती है तो शिव संग हनुमान जी का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
भौम प्रदोष व्रत मांगलिक दोष से मुक्ति के लिए बहुत कारगर माना गया है. इस दिन शिव जी की उपासना प्रदोष काल में करें और कथा का पाठ जरुर करें. मान्यता है कलियुग में एक मात्र प्रदोष व्रत करने वालों के सारे दोष दूर हो जाते हैं. जानें भौम प्रदोष व्रत की कथा और पूजा विधि.
भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि

इस दिन शाम को सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें, बिल्वपत्र, अक्षत, चंदन, पुष्प और धूप-दीप से भगवान शिव की पूजा करें. साथ ही माता पार्वती की भी आराधना करें.
&amp;nbsp;महामृत्युंजय मंत्र का 11 या 108 बार जाप भी कर सकते हैं. या शिव चालीसा या रुद्राष्टक पाठ करें.
मसूर की दाल, गुड़, तांबा, लाल वस्त्र आदि का दान करना पुण्यदायी होता है.
&amp;nbsp;इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ, लाल वस्त्र पहनना और सिंदूर अर्पण करने से मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं, ऐसी मान्यता है.

भौम प्रदोष व्रत कथा
सूतजी बोले- मंगलवार का दिन व्याधियों का नाशक है. इस दिन त्रयोदशी&amp;nbsp; व्रत में एक समय व्रती को गेहूं और गुड़ का भोजन करना चाहिए. इस व्रत के करने से मनुष्य सभी पापों व रोगों से मुक्त हो जाता है इसमें किसी प्रकार का संशय नहीं है. एक नगर में एक बुढ़िया रहती थी, जिसके मंगलिया नाम का एक पुत्र था.
वृद्धा&amp;nbsp; प्रत्येक मंगलवार को व्रत रखती थी, इस दिन न तो घर लीपती थी और न ही मिट्टी खोदती थी. एक दिन मंगल देवता ने वृद्धा की परीक्षा लेने का विचार किया. साधु का वेष धरकर हनुमान जी वृद्धा की चौखट पर जाकर बोले कि &#039;है कोई है जो मेरी इच्छा पूरी करे, बुढ़़िया ये सुनकर बाहर आई और बोली क्या आज्ञा है महाराज.
मैं बहुत भूखा हूं भोजन करूंगा, तू थोड़ी सी जमीन लीप दे&#039; वृद्धा बड़ी दुविधा में पड़ गई। अंत में हाथ जोड़कर प्रार्थना की- हे महाराज! लीपने और मिट्टी खोदने के अतिरिक्त जो काम आप कहें वह मैं करने को तैयार हूं.
साधु ने फिर कहा- अपने बेटे को औंधा मुंह लिटाओ में उसकी पीठ पर भोजन पकाऊंगा. बुढ़िया ने मंगल देवता का स्मरण करते हुए लड़के को औंधा लिटा दिया और उसकी पीठ पर अंगीठी रख दी. साधु ने जब भोजन बना लिया तब बुढ़िया से कहा कि वह मंगलिया को पुकारे ताकि वह भी आकर भोग लगा ले. वृद्धा के आंख में आंसू थे, उसने कहा अब कहां से बुलाउं उसे, आपने उसकी पीठ पर भोजन तो पका लिया.
साधु के बार बार कहने पर बुढ़िया ने मांगलिया को पुकारा. थोड़ी देर बाद हंसता हुआ मांगलिया घर में दौड़ा आया. मंगलिया को जीता जागता देखकर वृद्धा हैरान रह गई. इसके बाद साधु महाराज ने उसे अपने असली रूप में दर्शन दिए. मंगल देव ने कहा कि उसका व्रत सफल हुआ.
 Purnima 2026 Date: पूर्णिमा 2026 की पूरी लिस्ट यहां देखें, कब-कब है व्रत
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/08/19/ce3255ed05f9de29f1b61f52ab720f1e1755581614491466_original.avif" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Bhaum, Pradosh, Vrat, 2025:, भौम, प्रदोष, व्रत, कथा, और, पूजा, विधि, जानें, महत्व, और, लाभ</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Sakat Chauth 2026 Date: सकट चौथ 2026 में कब ? साल की बड़ी चतुर्थी क्यों है सबसे खास जानें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4319</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4319</guid>
<description><![CDATA[ Sakat Chauth 2026:&amp;nbsp;सकट चौथ यानी संकट को हरने वाली चतुर्थी. साल में 4 बड़ी चतुर्थी होती है जिसमें से सकट चौथ भी एक है. अगले साल में सकट चौथ 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी. ये दिन भगवान गणेश और संकटा माता को समर्पित है. सुख, सौभाग्य, संतान और सफलता की कामना के लिए सकट चौथ व्रत किया जाता है. इसे तिलकुटा चौथ, वक्रतुंडी चतुर्थी भी कहते हैं.
महाराष्ट्र आदि के क्षेत्रों में गणेश भक्त सकट चौथ का पर्व लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाते है. इस दिन भक्तगण संकटों से मुक्ति प्राप्त करने हेतु एक दिवसीय उपवास करते हैं जिसका पारण चन्द्र दर्शन के उपरान्त किया जाता है.
2026 सकट चौथ का पूजा मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी सकट चौथ की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को सुबह 8.01 पर होगी और समापन 7 जनवरी को सुबह 6.52 पर होगा.
सकट चौथ की पूजा के लिए रात 7.21 मिनट से रात 9.03 तक शुभ मुहूर्त है. इस व्रत में तिल का विशेष प्रयोग किया जाता है, इसके बिना सकट चौथ की पूजा अधूरी मानी जाती है.
सकट चौथ के दिन चंद्रोदय समय
सकट चौथ सूर्योदय से शुरू होकर चंद्रोदय तक रहता है. इस दिन चंद्रमा की विशेष पूजा की जाती है. इस बार सकट चौथ का चांद 6 जनवरी को रात 8.54 मिनट पर उदय होगा.
तिलकुटा चतुर्थी में तिल का महत्व
सकट चौथ यानी तिलकुट चतुर्थी को लेकर मान्यता है कि इस दिन तिल से बनी चीजों का भोग लगाने पर गणेश जी बेहद प्रसन्न होते हैं और उनका सेवन करने से व्यक्ति रोगों से मुक्ति पाता है. तिल चौथ पर तिल-गुड़ के लड्डू बनाएं, भगवान को भोग लगाएं। इस चतुर्थी पर तिल का दान भी करना चाहिए.
पूजा विधि

तिल चतुर्थी पर सुबह सूर्योदय से पहले उठना चाहिए. स्नान के बाद निर्जल या निराहार व्रत का संकल्प लें.
शुभ मुहूर्त में जल, दूध, दही, घी, मिश्री, शहद से बना पंचामृत से गणपति की पूजा करें.
चंदन, अक्षत, फूल, दूर्वा, बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल और अन्य सामग्रियां अर्पित करें.
&amp;nbsp;तिल-गुड़ के लड्डू, मिठाई का भोग लगाएं. कथा का पाठ करें.
शाम को चंद्र उदय के समय चंद्र को अर्घ्य दें, पूजा में ऊँ सों सोमाय नम: मंत्र का जप करें. फिर व्रत का पारण करें.

 Ekadashi 2026 Date: 2026 में एकादशी कब-कब है ? पूरी लिस्ट नोट करें
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/12/01/5070c5812ace787432da962c27ac9ee71764588401923499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:29 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Sakat, Chauth, 2026, Date:, सकट, चौथ, 2026, में, कब, साल, की, बड़ी, चतुर्थी, क्यों, है, सबसे, खास, जानें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Amavasya 2026 Dates: नए साल की पहली अमावस्या कब ? 2026 में अमावस्या की पूरी लिस्ट देखें</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4316</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4316</guid>
<description><![CDATA[ Amavasya 2026 Dates full list: हिंदू माह के कृष्ण पक्ष का आखिरी दिन अमावस्या कहलाता है. 2026 में जनवरी से दिसंबर तक की अमावस्या की तारीख इस आर्टिकल में हम बता रहे हैं. शास्त्रों में अमावस्या को बहुत महत्वपूर्ण दिन माना गया है. इस दिन किया गया दान, स्नान, तप, जप देवी-देवताओं के अलावा पितरों को भी प्रससन्न करता है.धार्मिक अनुष्ठान, जैसे कालसर्प दोष निवारण की पूजा, भी अमावस्या के दिन की जाती है.
अमावस्या जब सोमवार या शनिवार को हो तो इसका महत्व दोगुना हो जाता है. ये दिन जरुरतमंदों की मदद, पशु-पक्षियों की सेवा और पूजन के लिए खास होता है. इससे न सिर्फ पितृ दोष दूर होता है बल्कि सुहागिन को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है.
2026 की अमावस्या तिथि

माघ अमावस्या (मौनी अमावस्या) - 18 जनवरी 2026
फाल्गुन अमावस्या - 17 फरवरी 2026
चैत्र अमावस्या - 19 मार्च 2026
वैशाख अमावस्या - 17 अप्रैल 2026
ज्येष्ठ अमावस्या - 16 मई 2026
ज्येष्ठ अमावस्या (अधिक) - 15 जून 2026
आषाढ़ अमावस्या - 14 जुलाई 2026
श्रावण अमावस्या - 12 अगस्त 2026
भाद्रपद अमावस्या - 17 सितंबर 2026
अश्विन अमावस्या (सर्व पितृ अमावस्या) - 10 अक्टूबर 2026
कार्तिक अमावस्या (दीपावली) - 9 नवंबर 2026
मार्गशीर्ष अमावस्या - 8 दिसंबर 2026

अमावस्या पर क्यों करते हैं गंगा स्नान
पुराणों में ऐसा कहा गया है कि इस दिन अपने पूर्वजों को याद कर पूजा करने और गरीबों को दान देने से मनुष्य के पापों का नाश होता है. वहीं अमावस्या पर किया गया गंगा स्नान अमृत स्नान के बराबर माना जाता है. खासकर प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक की पवित्र नदियों में स्नान करने वालों को इसका शुभ फल मिलता है.
दरअसल जब समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को लेकर देवता-असुरों में छीना झपटी हो रही थी तब कुछ अमृत की बूंदें इन 4 जगहों पर गिरी थी. इसलिए इन जगहों पर बहने वाली नदियों का जल अमृत गिरने से पवित्र हो गया. यही कारण है कि त्योहारों, पूर्णिमा और अमावस्या जैसी तिथियों पर गंगा स्नान किया जाता है.
 Ekadashi 2026 Date: 2026 में एकादशी कब-कब है ? पूरी लिस्ट नोट करें





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/28/e451bfddda832127e1c1b03d85763aa61764332245888499_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:44:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Amavasya, 2026, Dates:, नए, साल, की, पहली, अमावस्या, कब, 2026, में, अमावस्या, की, पूरी, लिस्ट, देखें</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Gita Jayanti 2025: गीता जयंती 1 दिसंबर को, जानें पूजा विधि और सरल मंत्र</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4315</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4315</guid>
<description><![CDATA[ Gita Jayanti 2025: गीता जयंती का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता था. हर साल गीता जयंती का पर्व मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी मोक्षदा एकादशी पर मनाई जाती है. यह वही शुभ तिथि है जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य ज्ञान दिया था.
धार्मिक मान्यतानुसार जिस तिथि पर श्रीकृष्ण ने अपने मुख से गीता का ज्ञान दिया था, वह मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि थी. इसलिए हर साल इस तिथि को गीता जयंती के रूप में मनाने की परंपरा है. साथ ही गीता हिंदू धर्म के विभिन्न ग्रंथों में ऐसा एकमात्र ग्रंथ भी है, जिसकी जयंती मनाई जाती है. आइए जानते हैं गीता जयंती की तिथि, पूजा विधि और मंत्र के बारे में.
गीता जयंती 2025 तिथि और मुहूर्त (Gita Jayanti 2025 Date and Muhurat)
गीता जयंती का पर्व सोमवार 1 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी. एकादशी तिथि की शुरुआत 30 नवंबर को रात 09:30 से हो रही है और 1 दिसंबर को शाम 07:02 पर समाप्त होगी. उदयातिथि के मुताबिक यह पर्व 1 दिसंबर को मनाना मान्य होगा. गीता जयंती के दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने का विधान है.
गीता जयंती पूजा विधि (Gita Jayanti 2025 Puja Vidhi)
गीता जयंती की पूजा बहुत ही सरल मानी जाती है. आप घर पर आसानी है इस दिन पूजा कर सकते हैं. पूजा के लिए सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें और साफ वस्त्र धारण करें. भगवान कृष्ण की प्रतिमा या फोटो स्थापित कर गंगाजल छिड़कें.
इसके बाद प्रतिमा के सामने घी का दीपक लाएं. भगवान का तिलक करें, फूल चढ़ाएं, भोग, तुलसी दल, मिष्ठान, नैवेद्य आदि अर्पित करें. श्रीकृष्ण की फोटो के पास ही श्रीमद्भगवद्गीता की पुस्तक भी किसी साउ वस्त्र पर रखें और श्रद्धा व सम्मानपूर्वक पूजा.
यदि आप संपूर्ण गीता नहीं पढ़ सकते तो विशेषकर अध्याय 12 (भक्ति योग) या अध्याय 15 जरूर पढ़ें. फिर श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करें और पूजा के आखिर में भगवान कृष्ण की आरती करें.
इन मंत्रों का करें जाप
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नम:
ॐ श्रीकृष्णाय नमः
ॐ देविकानन्दनाय विधमहे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात:क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नमः&#039;।






Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.





 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/27/02113bd63a6fd23eb6fd2788b0f0b1501764260920198466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:28 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Gita, Jayanti, 2025:, गीता, जयंती, दिसंबर, को, जानें, पूजा, विधि, और, सरल, मंत्र</media:keywords>
</item>

<item>
<title>फल&#45;फूल नहीं, बल्कि इस मंदिर में मां काली को लगता है मोमोज, नूडल्स और फ्राइड राइस का भोग</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4312</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4312</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/28/0b6d2ac27b8a2b4fe11a39d8bce7fed817643213330101092_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>फल-फूल, नहीं, बल्कि, इस, मंदिर, में, मां, काली, को, लगता, है, मोमोज, नूडल्स, और, फ्राइड, राइस, का, भोग</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Mokshada Ekadashi 2025: 1 दिसंबर को बन रहा है शुभ संयोग! जानें महत्व, पूजा विधि और लाभ</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4313</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4313</guid>
<description><![CDATA[ गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर को मनाई जाएगी, अगहन (मार्गशीर्ष) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि इस वर्ष 30 नवंबर को रात 9:29 बजे से प्रारंभ होकर 1 दिसंबर को शाम 7:01 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि की परंपरा के अनुसार गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी का पावन पर्व 1 दिसंबर को ही मनाया जाएगा. यह जानकारी श्री लक्ष्मीनारायण एस्ट्रो सॉल्यूशन, अजमेर की निदेशिका ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने दी.
मोक्षदा एकादशी का महत्व: ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा के अनुसार मोक्षदा एकादशी सभी एकादशियों में अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है. इसे विष्णुप्रिया एकादशी भी कहा गया है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है. जिन पितरों को अभी तक मुक्ति नहीं मिली, उनका तर्पण इस दिन करने से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है.
गीता जयंती का धार्मिक महत्व: नीतिका शर्मा ने बताया कि द्वापर युग में अगहन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध के दौरान अर्जुन को श्रीमद्भागवत गीता का उपदेश दिया था. इसी कारण इस तिथि को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है. गीता दुनिया का एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जिसकी जयंती मनाई जाती है.साल में सामान्यतः 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन जिस वर्ष अधिकमास आता है, उस वर्ष इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है. इस वर्ष भी सावन मास में अधिकमास होने के कारण 26 एकादशियां रही हैं.
मोक्षदा एकादशी की तिथि
अगहन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 30 नवंबर को रात 9:29 बजे शुरू होकर 1 दिसंबर को शाम 7:01 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि होने के कारण यह पर्व 1 दिसंबर को मनाया जाएगा.
गीताजी की पूजा विधि:
नीतिका शर्मा ने बताया कि गीता जयंती के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें.

पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें.
चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा और श्रीमद्भागवत गीता स्थापित करें.
भगवान को जल, अक्षत, पीले पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें.
श्रीमद्भागवत गीता का पाठ अवश्य करें.

गीतादान का विशेष महत्व
श्रीमद्भागवत गीता में ही बताया गया है कि इस परमज्ञान को दूसरों तक पहुंचाना चाहिए. ग्रंथों में ग्रंथदान को महादान कहा गया है. गीता का दान करने से अनेक पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है.
गीता उपदेश का ऐतिहासिक संदर्भ
महाभारत युद्ध प्रारंभ होने से पहले मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. इसी कारण गीता में &amp;ldquo;श्रीभगवान उवाच&amp;rdquo; लिखा है, न कि &amp;ldquo;श्रीकृष्ण उवाच&amp;rdquo;. यह गीता की दिव्यता और सार्वभौमिकता को दर्शाता है.
गीता का आध्यात्मिक महत्व
नीतिका शर्मा ने बताया कि गीता में वेद, उपनिषद और पुराणों का सार है. इसमें कर्म, ज्ञान और भक्ति मार्ग की विस्तृत व्याख्या है. गीता के 18 अध्याय जीवन के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और मनुष्य की शंकाओं का समाधान करते हैं.
गीता से जीवन-शिक्षा
ग&amp;zwnj;ीता हमें कर्म करते रहने का संदेश देती है. कर्म न करना भी एक कर्म माना जाता है, जिसका फल अवश्य मिलता है. इसलिए जीवन में निष्क्रियता नहीं, बल्कि सतत कर्म आवश्यक है.
मोक्षदा एकादशी की विशेष मान्यताएंछ

व्रत करने से मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है.
पितरों का उद्धार होता है.
पापों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
संतान, धन और विवाह संबंधी इच्छाएँ पूरी होती हैं.
गौसेवा, गीता दान और दान-पुण्य श्रेष्ठ माना जाता है.
मान्यता है कि इस व्रत से बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है.

1 दिसंबर को पड़ने वाली गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी भक्तों के लिए अत्यंत शुभ संयोग माना जा रहा है. व्रत, पूजा और गीता पाठ से विशेष पुण्य और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/28/ed0285a1bbef3ca14c04b13b20052c1f17643161994101218_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Mokshada, Ekadashi, 2025:, दिसंबर, को, बन, रहा, है, शुभ, संयोग, जानें, महत्व, पूजा, विधि, और, लाभ</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Imran Khan: इस्लाम में इद्दत क्या है, जिसका पालन न करने पर इमरान खान और बुशरा बीबी को हुई थी सजा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4314</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4314</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/26/88d8c54447634f71ad69a0414368d20c1764158991324466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:27 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Imran, Khan:, इस्लाम, में, इद्दत, क्या, है, जिसका, पालन, न, करने, पर, इमरान, खान, और, बुशरा, बीबी, को, हुई, थी, सजा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Neem Karoli Baba: कैंची धाम में मनोज बाजपेयी ने महसूस किया अद्भुत अनुभव, नीम करोली बाबा के चमत्कार से हुए हैरान!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4309</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4309</guid>
<description><![CDATA[ Neem Karoli Baba: उत्तराखंड के कुमाऊ हिल्स में स्थित कैंची धाम एक फेमस जगह है. जहां नीम करोली बाबा को हनुमान जी महराज के अवतार के रूप में माना जाता था. बाबा के इस आश्रम में स्टीव जॉब्स, मार्क जुगरबर्ग, जुलिया रॉबर्ट, विराट कोहली और अनुष्का शर्मा जैसी शख्सियत आ चुके हैं.
जिस वजह से इसे किस्मत बदलने वाला धान भी माना जाता है. वहीं कुछ समय पहले यहां बॉलीवुड स्टार मनोज बाजपेयी भी दर्शन करने पहुंचे थे. वह किसी फिल्म के प्रोजेक्ट के लिए उत्तराखंड गए थे, मगर वे सेट पर जाने की जगह, पहले कैंची धाम गए.
यहां जाने से पहले वे अपने करियर के उस पड़ाव पर थे, जहां वे इस फिल्म एंटस्ट्री को छोड़ने जा रहे थे. मगर धाम पर जाने के बाद उनका जीवन पूरा बदल गया.&amp;nbsp;
मनोज बाजपेयी को मुझे कैंची धाम में मिला अपना जवाब&amp;nbsp;
मनोज बाजपेयी ने एक इंटरव्यू में बताया कि वे एक मुश्किल दौर से गुजर रहे थे, जहां उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था. उन्होंने आगे कहा की &#039;मुझे यहां तक लगने लगा था की अब वो वक्त आ चुका हैं, जहां मुझे यह प्रोफेशन छोड़ना होगा&#039;.
जुगनुमा फिल्म के पहले मैने एक साल तक कोई काम नहीं किया था और ना मुझे कोई काम दे रहा था. मगर जब मैं इसका जवाब ढूंढ रहा था, तब जुगनुमा फिल्म के डायरेक्टर राम रेड्डी ने मुझे एक शूटिंग लोकेशन पर साथ चलने को कहा, मगर यहां जाने से पहले हम नैनीताल स्थित नीम करोली बाबा के कैंची धाम गए.
जिसके बाद एक घंटा चढ़ाई करने के बाद हम दोनों गुफा तक पहुंचे और ध्यान किया. ध्यान के बाद हमें ऐसा महसूस हुआ की कुछ जादू सा हुआ है और हमें हमारा जवाब मिल चुका है. नीचे उतरते वक्त राम और मैंने एक दूसरे को देखा और बोला की हमें फिल्म मिल गई है.&amp;nbsp;

बाबा खुद बुलाते हैं धाम
कहते हैं कि कैंची धाम वही व्यक्ति पहुंच पाता है जिसे बाबा खुद बुलावा देते हैं. कई लोग बिना किसी &amp;nbsp;योजना के अचानक यहां पहुंच जाते हैं, जबकि कुछ लोग पूरा प्लान के बाद भी नहीं पहुंच पाते. भक्तों का विश्वास है कि हर व्यक्ति के लिए एक सही समय होता है और जब वह समय आता है, तो बाबा खुद उनको बुलाते हैं.
श्रद्धालु तो यह भी मानते हैं कि बाबा आज भी इस धाम में मौजूद हैं और सच्चे मन से प्रार्थना करने पर वे हमारे सभी सवालों का उत्तर भी दे देते हैं.
बाबा की अद्भुत सिद्धियां
नीम करोली बाबा हनुमान जी के परम भक्त थे. उन्होंने देशभर में बजरंगबली के 108 मंदिर बनवाए और वर्षों की कठोर साधना से कई सिद्धियां भी प्राप्त कीं. कई भक्तों ने उन्हें एक ही समय पर दो अलग-अलग स्थानों पर देखने का अनुभव भी साझा किया है.
बाबा हमेशा लोगों को हनुमान चालीसा का पाठ और श्रीराम नाम का जप करने को कहा करते थे. उनका मानना था कि नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान सकता है और धीरे-धीरे परमात्मा के मार्ग पर भी आगे बढ़ सकता है.





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/28/420749164944e40ceb5ab8661349320517643354624981301_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Neem, Karoli, Baba:, कैंची, धाम, में, मनोज, बाजपेयी, ने, महसूस, किया, अद्भुत, अनुभव, नीम, करोली, बाबा, के, चमत्कार, से, हुए, हैरान</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Lord Ram Statue: गोवा या अयोध्या, कहां है भगवान श्रीराम की सबसे ऊंची प्रतिमा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4310</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4310</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/28/61dce6b92890568388ac98e92852218e1764330606380466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Lord, Ram, Statue:, गोवा, या, अयोध्या, कहां, है, भगवान, श्रीराम, की, सबसे, ऊंची, प्रतिमा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>उडुपी के श्रीकृष्ण मठ पहुंचे PM Modi, 1 लाख लोगों के साथ किया गीता पाठ</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4311</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4311</guid>
<description><![CDATA[ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शुक्रवार 29 नवंबर 2025 को अपने एकदिवसीय दौरे पर कर्नाटक पहुंचे हैं. यहां उडुपी में जगद्गुरु श्री श्री सुगुनेंद्र तीर्थ स्वामीजी (Jagadguru Sri Sri Sugunendra Theertha Swamiji) ने विश्व गीता पर्याय लक्ष्य कंठ गीता परायण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन किया.
उडुपी दौरे में पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उडुपी जनसंघ और भाजपा के सुशासन मॉडल की कर्मभूमि रही है. इसके साथ ही पीएम ने 25 नवंबर को अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में धर्म ध्वजा की स्थापना की चर्चा की.

#WATCH | Udupi, Karnataka | &quot;... असमाकं नरेन्द्र मोदी महोदयः भारतः भाग्य विधता...,&quot; says Jagadguru Sri Sri Sugunendra Theertha Swamiji, as he addresses in Sanskrit.Source: DD pic.twitter.com/pFRJ0axfUZ
&amp;mdash; ANI (@ANI) November 28, 2025



&amp;nbsp;
सुर्वण तीर्थ मंडप का उद्घाटन
पीएम मोदी ने यहां श्रीकृष्ण मठ (Shri Krishna Mantha) के गर्भगृह में बने सुवर्ण तीर्थ मंडप का उद्घाटन किया और कनकवा किंडी के लिए कनक कवच (सोने का आवरण) समर्पित किया. बता दें कि उडुपी में श्रीकृष्ण मठ की स्थापना लगभग 800 वर्ष पहले द्वैत वेदांत दर्शन के संस्थापक श्री माधवाचार्य ने की थी.
पीएम ने 1 लाख लोगों के साथ किया गीता पाठ
पीएम मोदी ने कहा कि, आज इस अवसर पर जब 1 लाख लोगों ने एक साथ गीता के श्लोक पढ़े तो पूरे विश्व के लोगों ने भारत के सहस्त्र वर्षों की दिव्यता का साक्षात दर्शन भी किया है. &amp;nbsp;

Addressing the Laksha Kantha Gita Parayana programme at Sri Krishna Matha in Udupi. Deeply honoured for the opportunity to be in the presence of the revered sages.https://t.co/4E53zyQF7B
&amp;mdash; Narendra Modi (@narendramodi) November 28, 2025



हरि गुन गाहा, गावत नर पावहिं भव थाहा
पीएम ने कहा, रामचरित मानस में लिखा है- कलियुग केवल हरि गुन गाहा, गावत नर पावहिं भव थाहा। अर्थात कलियुग में केवल भगवद् नाम और लीला का कीर्तन ही परम साधन है।&amp;nbsp;उसके गायन कीर्तन से भवसागर से मुक्ति हो जाती है। हमारे समाज में मंत्रों का और गीता के श्लोकों का पाठ तो शताब्दियों से हो रहा है, पर जब 1 लाख कंठ, एक स्वर में इन श्लोकों का ऐसा उच्चारण करते हैं, जब इतने सारे लोग गीता जैसे पुण्य ग्रन्थ का पाठ करते हैं, जब ऐसे दैवीय शब्द एक स्थान पर एक साथ गूंजते हैं, तो एक ऐसी ऊर्जा निकलती है, जो हमारे मन को, हमारे मष्तिष्क को एक नया स्पंदन और नई शक्ति देती है





Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.




 ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/28/cda3c5ecec6277102d96aa6147043e3a1764323606697466_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:26 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>उडुपी, के, श्रीकृष्ण, मठ, पहुंचे, Modi, लाख, लोगों, के, साथ, किया, गीता, पाठ</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Motivational Quotes: खुशी बाहर नहीं आपके भीतर है, जानें सद्गुरु का जीवन बदलने वाला संदेश</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4307</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4307</guid>
<description><![CDATA[ &amp;nbsp;Sadhguru Wisdom: सद्गुरु कहते हैं कि दुनिया में कुछ भी बाहर नहीं है सब कुछ आपके अंदर ही है. पीड़ा और सुख, खुशी और गम सब आपके भीतर छीपा हुआ है. दुनिया में जो कुछ भी होता है, वह भले बाहरी हो, लेकिन उसका अनुभव भीतर से ही उत्पन्न होता है.
जब इंसान कहता है कि मैं दुखी हूं, तो वह दरअसल अपनी ही मानसिक प्रक्रिया से दुखी रहता है. हमारे विचार और भावनाएं ही हमारे सुख-दुख के कारण हैं.
समझना होगा न्यूरोलॉजिकल सिस्टम
सद्गुरु कहते हैं कि आप कैसे सोचते और महसूस करते हैं, यह आपके हाथ में होना चाहिए. अगर आपके भीतर जो कुछ हो रहा है वह आपकी मर्जी से नहीं हो रहा, तो इसका मतलब है कि आपने जीवन की प्रकृति को अब तक नहीं समझा.
वे समझाते हैं कि इंसान को प्रकृति ने सबसे विकसित न्यूरोलॉजिकल सिस्टम दिया है. हमने उसका यूज़र्स मैनुअल नहीं पढ़ा. नतीजा यह है कि वही बुद्धि जो हमें ऊँचाई तक ले जा सकती थी, अब हमारे खिलाफ काम कर रही है.
जीवन दुखी नहीं, इसे समझना जरूरी
वे कहते हैं कि दुनिया में कोई और प्राणी अपने जीवन को लेकर इतना संघर्ष नहीं करता जितना इंसान करता है. मनुष्य की बुद्धि अनियंत्रित है. अगर आपकी बुद्धि आपके खिलाफ काम करने लगे, तो कोई ताकत आपको नहीं बचा सकती.
सद्गुरु के अनुसार जीवन दुख नहीं है. यह एक अद्भुत प्रक्रिया है. अगर आप इसकी सवारी करते हैं तो यह सुंदर है, अगर आप इसके नीचे कुचलते हैं तो यह भयानक है.
वे कहते हैं कि इनर इंजीनियरिंग का अर्थ है अपने भीतर के यंत्र को समझना, उसे संतुलित और सामंजस्यपूर्ण बनाना है. दुनिया को हमने मकान, सड़कें, तकनीक बनाई है. लेकिन अपने भीतर की मशीन को संभालना नहीं सीखा. इसलिए बाहरी सुविधाएं बढ़ीं, पर व्यक्ति का जीवन सुखमय नहीं हुआ.
दुख का कारण बाहर नहीं है, भीतर ही है
सद्गुरु कहते हैं कि आप चाहे अमीर हों या गरीब, शिक्षित हों या अनपढ़, शादीशुदा हों या अकेले हैं लोग हर अवस्था में दुखी हैं. इसका कारण बाहर नहीं, भीतर ही है. यह आज के समय में समझना जरूरी है. अगर आपके भीतर का संसार आपकी मर्जी से चलता, तो आप दुखी नहीं रहता लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आपको आनंद को समझना होगा.
Disclaimer:&amp;nbsp;यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि&amp;nbsp;ABPLive.com&amp;nbsp;किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/26/6723f52f10aea09875fec37fd89d641a17641360615901241_original.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Motivational, Quotes:, खुशी, बाहर, नहीं, आपके, भीतर, है, जानें, सद्गुरु, का, जीवन, बदलने वाला संदेश</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Aaj Ka Rashifal: 29 नवंबर को सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक की किस्मत अचानक पलटेगी! जानें किसे बड़ा नुकसान, किसे गुप्त फायदा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4308</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4308</guid>
<description><![CDATA[ Rashifal: सिंह, कन्या, तुला और वृश्चिक&amp;nbsp;राशि के लिए आज यानी 29 नवंबर 2025 का दिन कैसा रहेगा? क्या धन और सेहत के मामले में हानि होगी या जीवन में कोई शुभ समाचार मिल सकता है, जानते हैं इन चार राशियों का विशेष राशिफल (Horoscope Today).
सिंह (Leo) राशिफल, 29 नवंबर 2025
कुंभ चंद्रमा आज आपकी दिनचर्या और कार्यस्थल में हलचल बढ़ा सकता है. आप एक साथ कई काम पकड़ना चाहेंगे, पर ध्यान बार-बार भटक सकता है. ऑफिस में किसी सहकर्मी की गलती या अचानक बदलाव आपका मूड बदल सकता है. रिश्तों में आपकी चुप्पी Partner को अनकंफर्टेबल कर सकती है. छात्रों के लिए रिवीजन और Practical Study अच्छा रहेगा. सेहत में सिरदर्द, पाचन थकान और हल्का चिड़चिड़ापन.
Career: अचानक बदलाव के संकेत.Love: चुप्पी तनाव बढ़ाएगी.Education: रिवीजन अच्छा चलेगा.Health: सिरदर्द&amp;ndash;थकान.Finance: छोटे खर्च बढ़ेंगे.उपाय: गुड़ का दान करें.Lucky Color: Gold । Lucky Number: 1
कन्या (Virgo) राशिफल, 29 नवंबर 2025
कुंभ चंद्रमा आज आपकी Creativity और Work-Style दोनों को बदल सकता है. किसी नए टास्क या Responsibility का मौका मिल सकता है. रिश्तों में आपकी चुप्पी Partner को गलत संदेश दे सकती है, अपनी बात धीमी आवाज़ में भी स्पष्ट कहें. छात्रों के लिए कला, लेखन, design और Conceptual subjects बहुत अच्छे रहेंगे. सेहत में आंखों पर दबाव, गर्दन-कंधे में stiffness.
Career: नई जिम्मेदारी मिल सकती है.Love: आपकी चुप्पी से confusion.Education: Creative Subjects बेहतरीन.Health: आंख&amp;ndash;कंधे खिंचाव.Finance: अनियोजित खर्च.उपाय: तुलसी पत्र विष्णु को अर्पित करें.Lucky Color: Light Green । Lucky Number: 7
तुला (Libra) राशिफल, 29 नवंबर 2025
कुंभ चंद्रमा आपके निजी जीवन, परिवार और Mood पर असर डालेगा. आज आप Practical दिखेंगे लेकिन भीतर हल्की भावनात्मक बेचैनी बनी रहेगी. ऑफिस में आपका Balance बनाए रखना सभी को अच्छा लगेगा, पर मन घर की किसी बात में उलझा रह सकता है. रिश्तों में आपकी Care Partner को Comfort देगी. छात्रों के लिए Home Study और revision productive रहेगा. सेहत में पाचन, नींद और हाइड्रेशन पर ध्यान.
Career: steady work, mood थोड़ा उतार-चढ़ाव.Love: Care से रिश्ते मजबूत.Education: Home Study अच्छा.Health: पाचन&amp;ndash;नींद प्रभावित.Finance: घरेलू खर्च बढ़ेगा.उपाय: मिश्री दान करें.Lucky Color: Pink । Lucky Number: 6
वृश्चिक (Scorpio) राशिफल, 29 नवंबर 2025
कुंभ चंद्रमा आज आपकी बातचीत, Responses और Mindset में तेज़ उतार-चढ़ाव ला सकता है. ऑफिस में किसी Senior की एक बात आपका पूरा दिन बदल सकती है, सकारात्मक या चैलेंज दोनों तरह. रिश्तों में Sensitivity बढ़ेगी, आप थोड़ा ज़्यादा भावुक हो सकते हैं. छात्रों के लिए Writing, Communication और Analytical Thinking मजबूत रहेगी. सेहत में गला, BP और भावनात्मक थकान.
Career: एक बातचीत दिशा बदल सकती है.Love: भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा.Education: Writing strong.Health: गला&amp;ndash;BP&amp;ndash;थकान.Finance: छोटे gains.उपाय: काले उड़द शनिवार को दान करें.Lucky Color: Maroon । Lucky Number: 9
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/28/911928b180efee0db2ec0a41113ab9401764324167344257_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Aaj, Rashifal:, नवंबर, को, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, की, किस्मत, अचानक, पलटेगी, जानें, किसे, बड़ा, नुकसान, किसे, गुप्त, फायदा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Chanakya Niti: इन 5 गुणों वाली महिलाएं बनती हैं घर की लक्ष्मी!</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/4306</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/4306</guid>
<description><![CDATA[  ]]></description>
<enclosure url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2025/11/29/81dfdfd9ee9d4068c6c7f7854c9684fc1764395115034986_original.png" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Sat, 29 Nov 2025 12:53:24 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Chanakya, Niti:, इन, गुणों, वाली, महिलाएं, बनती, हैं, घर, की, लक्ष्मी</media:keywords>
</item>

<item>
<title>बागेश्वर धाम में फिर हादसा: धर्मशाला की दीवार ढही, एक श्रद्धालु की मौत, 11 घायल</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/1636</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/1636</guid>
<description><![CDATA[ बागेश्वर धाम में फिर हादसा: धर्मशाला की दीवार ढही, एक श्रद्धालु की मौत, 11 घायल ]]></description>
<enclosure url="https://www.barwarapatrika.com/uploads/images/202507/image_870x580_686cbe1a72b79.jpg" length="60579" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 12:14:34 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>बागेश्वर धाम में फिर हादसा: धर्मशाला की दीवार ढही, एक श्रद्धालु की मौत, 11 घायल</media:keywords>
</item>

<item>
<title>श्री सालासर बालाजी की आरती</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/1359</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/1359</guid>
<description><![CDATA[ श्री सालासर बालाजी की आरती ]]></description>
<enclosure url="https://www.barwarapatrika.com/uploads/images/202506/image_870x580_685d3f74ba369.jpg" length="119179" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 26 Jun 2025 18:10:57 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>श्री सालासर बालाजी की आरती</media:keywords>
</item>

<item>
<title>लेके चलूँ नीम करोली || Kanhiya Mittal || Neem Karoli Baba Bhajan || Neeb Karori || कैंची धाम मंदिर</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/1215</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/1215</guid>
<description><![CDATA[ लेके चलूँ नीम करोली || Kanhiya Mittal || Neem Karoli Baba Bhajan || Neeb Karori || कैंची धाम मंदिर ]]></description>
<enclosure url="https://img.youtube.com/vi/WiHwCDfLkAE/maxresdefault.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 20 Jun 2025 17:50:25 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>लेके चलूँ नीम करोली || Kanhiya Mittal || Neem Karoli Baba Bhajan || Neeb Karori || कैंची धाम मंदिर</media:keywords>
</item>

<item>
<title>श्री हनुमान चालीसा 🌺🙏| Shree Hanuman Chalisa Original Video |🙏🌺| GULSHAN KUMAR | HARIHARAN |Full HD</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/1214</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/1214</guid>
<description><![CDATA[ श्री हनुमान चालीसा 🌺🙏| Shree Hanuman Chalisa Original Video |🙏🌺| GULSHAN KUMAR | HARIHARAN |Full HD ]]></description>
<enclosure url="https://www.barwarapatrika.com/uploads/images/202506/image_870x580_6855515cc04f9.jpg" length="138627" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Fri, 20 Jun 2025 17:47:51 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>श्री हनुमान चालीसा 🌺🙏| Shree Hanuman Chalisa Original Video |🙏🌺| GULSHAN KUMAR | HARIHARAN |Full HD</media:keywords>
</item>

<item>
<title>Meri Gadi Mera Bangla Sab Tero Sanvariya Seth Mera Toh Kuch Bih Nahi | गोकुल शर्मा नया सांवरीया भजन</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/1069</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/1069</guid>
<description><![CDATA[ Meri Gadi Mera Bangla Sab Tero Sanvariya Seth Mera Toh Kuch Bih Nahi | गोकुल शर्मा नया सांवरीया भजन ]]></description>
<enclosure url="https://img.youtube.com/vi/1D-dkFZToTY/maxresdefault.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 20:03:42 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>Meri Gadi Mera Bangla Sab Tero Sanvariya Seth Mera Toh Kuch Bih Nahi | गोकुल शर्मा नया सांवरीया भजन</media:keywords>
</item>

<item>
<title>तीन बाण के धारी॥छोटू सिंह रावणा||New bhajan॥Khatu Shyam|| Teen ban ke dhari ||Chotu Singh</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/1068</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/1068</guid>
<description><![CDATA[ तीन बाण के धारी॥छोटू सिंह रावणा||New bhajan॥Khatu Shyam|| Teen ban ke dhari ||Chotu Singh ]]></description>
<enclosure url="https://img.youtube.com/vi/olu0ayE7-h8/maxresdefault.jpg" length="49398" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Tue, 17 Jun 2025 19:59:54 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>तीन बाण के धारी॥छोटू सिंह रावणा||New bhajan॥Khatu Shyam|| Teen ban ke dhari ||Chotu Singh</media:keywords>
</item>

<item>
<title>श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/1015</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/1015</guid>
<description><![CDATA[ श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा ]]></description>
<enclosure url="https://www.barwarapatrika.com/uploads/images/202506/image_870x580_684a6bd95efe7.jpg" length="90482" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Thu, 12 Jun 2025 11:21:00 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>श्री मुनिसुव्रतनाथ चालीसा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>श्री शनि चालीसा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/965</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/965</guid>
<description><![CDATA[ श्री शनि चालीसा ]]></description>
<enclosure url="https://www.barwarapatrika.com/uploads/images/202506/image_870x580_684975e747395.jpg" length="92680" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 11 Jun 2025 17:56:43 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>श्री शनि चालीसा</media:keywords>
</item>

<item>
<title>हनुमान चालीसा</title>
<link>https://www.barwarapatrika.com/964</link>
<guid>https://www.barwarapatrika.com/964</guid>
<description><![CDATA[ हनुमान चालीसा ]]></description>
<enclosure url="https://www.barwarapatrika.com/uploads/images/202506/image_870x580_684970ac29b02.jpg" length="62769" type="image/jpeg"/>
<pubDate>Wed, 11 Jun 2025 17:42:12 +0530</pubDate>
<dc:creator>Barwara Patrika</dc:creator>
<media:keywords>हनुमान चालीसा</media:keywords>
</item>

</channel>
</rss>